वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्तिदंष्ट्राकरालानि भयानकानि।केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषुसंदृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः
vaktrāṇi te tvaramāṇā viśanti daṁṣṭrā-karālāni bhayānakāni kecid vilagnā daśanāntareṣu sandṛśyante cūrṇitair uttamāṅgaiḥ
mouths
Your
fearful
entering
teeth
terrible
very fearful
some of them
being attacked
between the teeth
being seen
smashed
by the head
अर्थMeaning
(श्लोक 26–27) हमारे मुख्य योद्धाओंके सहित भीष्म, द्रोण और वह कर्ण भी आपमें प्रविष्ट हो रहे हैं। राजाओंके समुदायोंके सहित धृतराष्ट्रके वे ही सब-के-सब पुत्र आपके विकराल दाढ़ोंके कारण भयंकर मुखोंमें बड़ी तेजीसे प्रविष्ट हो रहे हैं। उनमेंसे कईएक तो चूर्ण हुए सिरोंसहित आपके दाँतोंके बीचमें फँसे हुए दीख रहे हैं।
अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।
Hasten to enter Your fearful mouths with terrible fangs, crushing some of those caught between the teeth to powder.
Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.
व्याख्याVyakhya
पिछले श्लोक का दृश्य यहाँ अपनी पूर्ण भयावहता में प्रकट होता है। 'वक्त्राणि ते त्वरमाणा विशन्ति', वे बड़ी शीघ्रता से आपके मुखों में प्रवेश कर रहे हैं, 'दंष्ट्राकरालानि भयानकानि', जो विकराल दाढ़ों के कारण भयानक हैं; 'केचिद्विलग्ना दशनान्तरेषु', उनमें से कुछ दाँतों के बीच फँसे हुए, 'संदृश्यन्ते चूर्णितैरुत्तमाङ्गैः', चूर्ण हुए सिरों के साथ दिखाई दे रहे हैं। यह गीता के सबसे भयावह दृश्यों में से एक है, और इसे पढ़ते हुए हृदय काँप उठता है। जिन महान योद्धाओं को अर्जुन ने जीवन भर आदर से देखा था, वे उसकी आँखों के सामने काल के मुख में जा रहे हैं। 'त्वरमाणाः', शीघ्रता से, यह शब्द सबसे विचलित करनेवाला है: वे रुक नहीं रहे, विरोध नहीं कर रहे, मानो कोई अदृश्य शक्ति उन्हें खींच रही हो। यह दृश्य इसलिए दिखाया गया है ताकि अर्जुन, और हम, एक कठोर सत्य को देख सकें: मृत्यु अटल है। जो जन्मा है, वह जाएगा। अर्जुन सोच रहा था कि यदि वह युद्ध न करे, तो वे बच जाएँगे। पर यह दृश्य दिखाता है कि उनका अन्त पहले से निश्चित है। यह भय दिखाने के लिए नहीं, मोह तोड़ने के लिए है। यह श्लोक किसी को भयभीत करने के लिए नहीं, जागृत करने के लिए है। जीवन क्षणभंगुर है, यह जानकर जो समय मिला है, उसे व्यर्थ के विवादों, अहंकार और मोह में मत गँवाइए। जो कुछ सार्थक है, उसे आज ही कीजिए।
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- Sanskrit edition
- Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080). Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
- Translation
- Jayadayal Goyandka (Hindi), Swami Gambhirananda & Swami Sivananda (English)
- Source
- github.com/gita/gita
- Last updated
- 2026-10-24
- Licence note (as recorded)
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- पाठ-भेद · Variant readings
- Variant readings collated from Anandashram (Pune) and Bhandarkar Oriental Research Institute (BORI) critically edited texts.
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