श्रीमद्भगवद्गीता

Sankhya Yogaश्लोक 40/7256%

Bhagavad Gita 2.40

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

मनुष्यलोकमें इस समबुद्धिरूप धर्मके आरम्भका नाश नहीं होता, इसके अनुष्ठानका उलटा फल भी नहीं होता और इसका थोड़ासा भी अनुष्ठान (जन्म-मरणरूप) महान् भयसे रक्षा कर लेता है।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

Here, there is no loss of effort, nor any accrual of evil. Even a little of this Dharma (called Karma Yoga) protects one from the great fear.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्याAI-drafted · editor-approved

कर्मयोग का पहला परिचय भगवान एक अद्भुत आश्वासन से देते हैं, जो हर साधक के हृदय से असफलता का भय उठा लेता है। 'नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति', इस मार्ग में आरम्भ किए गए प्रयत्न का कभी नाश नहीं होता; 'प्रत्यवायो न विद्यते', और इसका कोई उलटा फल भी नहीं होता। साधारण कर्मों में थोड़ी सी भूल से सब बिगड़ सकता है, पर इस मार्ग पर उठाया गया हर कदम सुरक्षित है। और फिर वह वचन, जो अनगिनत थके हुए साधकों का सहारा बना है: 'स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्', इस धर्म का थोड़ा सा भी पालन महान भय से रक्षा करता है। 'स्वल्प', बहुत थोड़ा। भगवान पूर्णता की माँग नहीं करते; वे कहते हैं कि एक छोटा सा प्रयत्न भी व्यर्थ नहीं जाता। इस श्लोक में कितनी करुणा है! हममें से बहुत से लोग आध्यात्मिक मार्ग पर इसलिए नहीं चलते कि लगता है हम पूर्ण साधना नहीं कर पाएँगे, या बीच में छूट जाएगा। यह श्लोक कहता है: आरम्भ कीजिए, चाहे छोटा हो। एक दिन का निष्काम कर्म, एक क्षण की समता, एक बार का सच्चा स्मरण, इनमें से कुछ भी खोता नहीं। वह आपके भीतर एक बीज की तरह बना रहता है, और कभी न कभी अंकुरित होता है।

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080). Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
Translation
Jayadayal Goyandka (Hindi), Swami Gambhirananda & Swami Sivananda (English)
Last updated
2026-10-23
Licence note (as recorded)
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पाठ-भेद · Variant readings
Variant readings collated from Anandashram (Pune) and Bhandarkar Oriental Research Institute (BORI) critically edited texts.

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