कठोपनिषद्

Vallī 1श्लोक 25/2986%

Katha Upanishad 1.25

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

ये ये कामा दुर्लभा मर्त्यलोके सर्वान् कामांश्छन्दतः प्रार्थयस्व ।इमा रामाः सरथाः सतूर्या न हीदृशा लम्भनीया मनुष्यैः ।आभिर्मत्प्रत्ताभिः परिचारयस्व नचिकेतो मरणं माऽनुप्राक्षीः

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

"मर्त्यलोक में जो भी कामनाएँ दुर्लभ हैं — सब अपनी इच्छा से माँग। ये अप्सराएँ, रथों और संगीत के साथ — मनुष्य ऐसी नहीं पा सकते। ये मेरी दी हुई हैं — इनसे सेवा करा। परन्तु, नचिकेता, मृत्यु के विषय में मत पूछ।"

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

'Whatever desires are hard to attain in the mortal world — ask all of them at will. These beauties with chariots and music — humans cannot obtain such. Be served by them, my gift. But, Naciketas, do not ask about death.'

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

यम का अंतिम प्रलोभन: मर्त्यलोक में जो भी कामनाएं अत्यंत दुर्लभ हैं — वे सब मांग लो। ये दिव्य अप्सराएं, रथ, वाद्य यंत्र जो मनुष्यों को अप्राप्य हैं — इन्हें लेकर विलास करो, किन्तु मृत्यु का रहस्य मत पूछो!

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यमराज अपने तरकश का अंतिम और सबसे अचूक बाण चलाते हैं — वे अलौकिक सौन्दर्य, संगीत और कामुक विलासिता का प्रलोभन देते हैं: "मर्त्यलोक में जो भी भोग अत्यंत दुर्लभ हैं, वे सब अपनी इच्छानुसार मांग लो। ये दिव्य अप्सराएँ, अपने दिव्य रथों और वाद्यों के साथ, जो साधारण मनुष्यों को कभी प्राप्त नहीं हो सकतीं — इन्हें ले जाओ, इनसे अपनी सेवा कराओ और आनंद लो! परन्तु हे नचिकेता, मृत्यु के बाद क्या होता है — यह प्रश्न मत पूछो!" यह इन्द्रिय-सुख (sensory gratification) का वह शिखर है जहाँ बड़े-बड़े तपस्वी और मनीषी भी फिसल जाते हैं। समकालीन समाज में डिजिटल मीडिया, ग्लैमर, पोर्नोग्राफी और मनोरंजन उद्योग इसी संवेदी आनंद के दोहन पर टिके हैं। ये मनुष्य की चेतना को इस प्रकार सम्मोहित (hypnotize) कर देते हैं कि वह जीवन के परम लक्ष्य, आत्म-सम्मान और मृत्यु के यथार्थ को पूर्णतः भूल जाता है। यमराज का यह अंतिम प्रलोभन नचिकेता के लिए 'अग्नि-परीक्षा' थी — क्या उसका वैराग्य केवल एक बौद्धिक ढोंग था या वह वास्तव में इन्द्रियों की दासता से मुक्त हो चुका था?
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **संवेदी सम्मोहन से बचाव (Digital & Sensory Fasting)**: ग्लैमर, कामुक आकर्षणों और अंतहीन मनोरंजन के सम्मोहन को पहचानें; नियमित रूप से स्क्रीन और इन्द्रिय-उत्तेजनाओं से उपवास करें। - **अल्पकालिक विलास बनाम शाश्वत सत्य**: जब भी कोई आकर्षक विलासिता आपको अपने उच्चतर मूल्यों या साधना से भटकाने का प्रयास करे, तो नचिकेता की अडिगता का स्मरण करें। - **चित्त की स्वतंत्रता**: सौन्दर्य और संगीत का आदर करें किन्तु उनके दास न बनें; अपनी चेतना की स्वायत्तता को किसी भी इन्द्रिय-सुख के लिए गिरवी न रखें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं इन्द्रियों के क्षणिक आकर्षणों और विलासिता के सम्मुख आसानी से झुक जाता हूँ, अथवा मेरे भीतर सत्य की खोज के लिए इन प्रलोभनों को ठुकराने का अदम्य साहस है?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

संवेदी आनंद का चरमोत्कर्ष: कामुकता, संगीत, सौन्दर्य और विलासिता मनुष्य के न्यूरो-केमिकल रिवार्ड सिस्टम को पूर्णतः सम्मोहित करने की क्षमता रखते हैं।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

Content status

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  • Translation · from the source archive

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Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

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