कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम्।रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम्
karmaṇaḥ sukṛitasyāhuḥ sāttvikaṁ nirmalaṁ phalam rajasas tu phalaṁ duḥkham ajñānaṁ tamasaḥ phalam
of action
pure
is said
mode of goodness
pure
result
mode of passion
indeed
result
pain
ignorance
mode of ignorance
result
अर्थMeaning
(विवेकी पुरुषोंने) शुभ-कर्मका तो सात्त्विक निर्मल फल कहा है, राजस कर्मका फल दुःख कहा है और तामस कर्मका फल अज्ञान (मूढ़ता) कहा है।
अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।
It is said that the fruit of a good deed is pure and of the nature of Sattva; the fruit of Rajas is pain; and the fruit of Tamas is ignorance.
Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.
व्याख्याVyakhya
अब भगवान तीनों गुणों से होनेवाले कर्मों के फल बताते हैं, और यह एक सरल पर गहरा सत्य है। 'कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम्', शुभ कर्म का फल सात्त्विक और निर्मल कहा गया है, 'रजसस्तु फलं दुःखम्', राजस कर्म का फल दुःख है, 'अज्ञानं तमसः फलम्', और तामस कर्म का फल अज्ञान है। इस श्लोक में तीन बीज और तीन फल हैं, और उनका सम्बन्ध प्रकृति के नियम की भाँति अटल है। सात्त्विक कर्म, जो निःस्वार्थ भाव से, शान्ति से, विवेक से किया जाए, उसका फल 'निर्मल' है: वह मन को और स्वच्छ करता है, और शान्ति देता है। पर राजस कर्म का फल 'दुःख' है, और यह चौंकाने वाली बात है। राजस कर्म तो अधिकतर सुख के लिए ही किया जाता है: अधिक धन, अधिक प्रतिष्ठा, अधिक भोग। फिर उसका फल दुःख क्यों? क्योंकि राजस कर्म तृष्णा से उत्पन्न होता है, और तृष्णा कभी शान्त नहीं होती। जो पाया, वह कम लगता है; जो नहीं पाया, उसकी पीड़ा रहती है; और जो पाया, उसके खोने का भय। जैसे कोई खारा जल पीकर प्यास बुझाने का प्रयत्न करे। और तामस कर्म का फल 'अज्ञान' है: जड़ता और असावधानी से किया गया कर्म मन को और भी अन्धकार में धकेल देता है। यह श्लोक आपको अपने कर्मों की परख का एक साधन देता है। किसी कर्म के बाद देखिए: क्या उसने आपको अधिक शान्त किया, अधिक अशान्त, या अधिक भ्रमित? यही उसके गुण का प्रमाण है।
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- Sanskrit edition
- Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080). Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
- Translation
- Jayadayal Goyandka (Hindi), Swami Gambhirananda & Swami Sivananda (English)
- Source
- github.com/gita/gita
- Last updated
- 2026-10-24
- Licence note (as recorded)
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- पाठ-भेद · Variant readings
- Variant readings collated from Anandashram (Pune) and Bhandarkar Oriental Research Institute (BORI) critically edited texts.
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