श्रीमद्भगवद्गीता

Arjuna Visada Yogaश्लोक 22/4747%

Bhagavad Gita 1.22

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्।कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

(श्लोक 21–22) अर्जुन बोले - हे अच्युत! दोनों सेनाओं के मध्य में मेरे रथ को आप तब तक खड़ा कीजिये, जब तक मैं युद्धक्षेत्र में खड़े हुए इन युद्ध की इच्छावालों को देख न लूँ कि इस युद्धरूप उद्योग में मुझे किन-किनके साथ युद्ध करना योग्य है।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

So that I may have a good look at those who are standing, eager to fight, and know with whom I must fight in this enterprise of war.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्याAI-drafted · editor-approved

अर्जुन की प्रार्थना यहाँ पूरी होती है, और वह बताता है कि वह रथ को बीच में क्यों ले जाना चाहता है। 'यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्', जब तक मैं युद्ध की इच्छा से खड़े इन लोगों को देख न लूँ, 'कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे', कि इस युद्ध में मुझे किन-किन के साथ लड़ना है। 'निरीक्षे', ध्यान से देखूँ, यह शब्द अर्जुन के मन की अवस्था को प्रकट करता है। वह केवल एक दृष्टि नहीं डालना चाहता; वह हर चेहरे को ध्यान से देखना चाहता है। एक योद्धा के रूप में यह स्वाभाविक है: वह जानना चाहता है कि उसके सामने कौन-कौन है, किसकी कितनी शक्ति है। पर यहीं एक गहरी विडम्बना छिपी है। अर्जुन यह सब एक योद्धा की भाँति, रणनीति के लिए देखना चाहता है। पर जब वह देखेगा, तो उसे योद्धा नहीं, अपने पितामह, अपने गुरु, अपने भाई, अपने मित्र दिखाई देंगे। जो दृष्टि उसने युद्ध के लिए डाली थी, वही उसके हृदय को करुणा से भर देगी। कभी-कभी हम किसी परिस्थिति को एक भूमिका से देखने जाते हैं, और वह हमें एक सर्वथा भिन्न सत्य दिखा देती है। 'योद्धुकामान्', युद्ध की इच्छा रखनेवाले, अर्जुन इन्हें अभी केवल योद्धा मान रहा है, पर कुछ ही क्षणों में ये उसके लिए 'स्वजन' बन जाएँगे। यह श्लोक आपको सिखाता है कि किसी को देखने से पहले अपनी दृष्टि को तैयार कीजिए। जब आप ध्यान से देखते हैं, तो शत्रु में भी मनुष्य दिखने लगता है।

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

Content status

  • Original text
  • Translation · from the source archive
  • Commentary · AI-drafted · editor-approved

No independent human review is recorded for this verse yet. How this site is made.

Sanskrit edition
Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080). Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
Translation
Jayadayal Goyandka (Hindi), Swami Gambhirananda & Swami Sivananda (English)
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Community dataset — verify license terms at source repo before redistribution.
पाठ-भेद · Variant readings
Variant readings collated from Anandashram (Pune) and Bhandarkar Oriental Research Institute (BORI) critically edited texts.

Found a mistake?

आगे क्या · What next