कठोपनिषद्

Vallī 6श्लोक 5/1828%

Katha Upanishad 6.5

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

यथाऽऽदर्शे तथाऽऽत्मनि यथा स्वप्ने तथा पितृलोके ।यथाप्सु परीव ददृशे तथा गन्धर्वलोके छायातपयोरिव ब्रह्मलोके

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

जैसे दर्पण में, वैसे आत्मा में; जैसे स्वप्न में, वैसे पितृ-लोक में; जैसे जल में प्रतिबिम्ब, वैसे गन्धर्व-लोक में; जैसे छाया और प्रकाश, वैसे ब्रह्म-लोक में।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

As in a mirror, so in the Self; as in dream, so in the world of the ancestors; as if reflected in water, so in the world of the gandharvas; as light and shadow, so in the world of Brahman.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

आत्म-दर्शन के विभिन्न धरातल: जैसे दर्पण में रूप अत्यंत स्पष्ट दिखाई देता है, वैसे ही अपनी निर्मल बुद्धि में आत्मा का साक्षात् दर्शन होता है; जैसे स्वप्न में अस्पष्ट दिखता है, वैसे पितृलोक में; जैसे जल में परछाईं हिलती हुई दिखती है, वैसे गंधर्वलोक में; और जैसे धूप और छाया का स्पष्ट भेद होता है, वैसा ब्रह्मलोक में आत्म-दर्शन होता है!

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यमराज आत्म-दर्शन की स्पष्टता के स्तरों का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हैं: 'यथाऽऽदर्शे तथाऽऽत्मनि यथा स्वप्ने तथा पितृलोके। यथाऽप्सु परीव ददृशे तथा गन्धर्वलोके छायातपयोरिव ब्रह्मलोके॥' — आत्मा को कहाँ और कितना स्पष्ट देखा जा सकता है? अपनी ही शुद्ध और एकाग्र बुद्धि (आत्मनि) में वह वैसे ही शत-प्रतिशत स्पष्ट दिखता है जैसे किसी स्वच्छ दर्पण में अपना मुख! पितृलोक में वह स्वप्न की भाँति धुंधला दिखता है; गंधर्वलोक में वह पानी में कांपती परछाईं जैसा दिखता है; और ब्रह्मलोक में वह धूप और छांव की भाँति अत्यंत स्पष्ट दिखता है। किन्तु ब्रह्मलोक जाना अत्यंत दुर्लभ है, इसलिए अपने ही अंतःकरण के दर्पण को साफ करके यहीं आत्म-दर्शन कर लेना सर्वश्रेष्ठ और सबसे सुलभ मार्ग है! हम प्रायः सोचते हैं कि किसी अन्य लोक, स्वर्ग या भविष्य में हमें मुक्ति मिलेगी। उपनिषद् कहता है कि कहीं और भटकने की आवश्यकता नहीं है; तुम्हारा अपना अंतःकरण ही वह 'दर्पण' है जहाँ साक्षात् परमात्मा स्पष्ट दिखाई दे सकता है। आवश्यकता केवल एक बात की है — दर्पण पर जमी हुई वासनाओं, क्रोध, लोभ और चिंताओं की धूल को पोंछ दिया जाए। जब मन रूपी दर्पण शांत और निर्मल होता है, तो परमात्मा को देखने के लिए किसी अन्य लोक में जाने की आवश्यकता नहीं होती; वह यहीं और इसी क्षण प्रत्यक्ष हो जाता है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **मन के दर्पण की सफाई**: प्रतिदिन आत्म-निरीक्षण और ध्यान के द्वारा अपने चित्त पर जमी राग-द्वेष की धूल को साफ करें। - **वर्तमान जीवन में पूर्णता**: किसी काल्पनिक स्वर्ग या भविष्य के भरोसे न बैठें; इसी जीवन में अपने अंतःकरण को आत्म-दर्शन का केंद्र बनाएं। - **स्पष्टता का अभ्यास**: अपने विचारों और भावनाओं के प्रति अत्यंत स्पष्ट और पारदर्शी बनें; धुंधलेपन और संशय को स्वाध्याय से दूर करें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं अपनी आत्मा को खोजने के लिए बाहर के तीर्थों या भविष्य के लोकों की कल्पना कर रहा हूँ, अथवा मैं अपने ही अंतःकरण के दर्पण को साफ करने में जुटा हूँ?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

चित्त की स्वच्छता और प्रतिबिंब का सिद्धांत: दर्पण (मन) जितना शुद्ध और स्थिर होगा, चेतना का प्रतिबिंब उतना ही यथार्थ और स्पष्ट होगा; बाह्य लोकों की अपेक्षा अपनी ही अंतरात्मा में आत्म-दर्शन सबसे सुलभ है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

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श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

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🟣Cross-Scriptural Linkपार-ग्रंथ सम्बन्ध (गीता ↔ उपनिषद् ↔ रामायण)

Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

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आगे क्या · What next