ईशावास्योपनिषद्

Isha Upanishadश्लोक 16/1889%

Isha Upanishad 1.16

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

पूषन्नेकर्षे यम सूर्य प्राजापत्य व्यूह रश्मीन् समूह तेजः ।यत्ते रूपं कल्याणतमं तत्ते पश्यामि योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

हे पूषन, एकर्षि, यम, सूर्य, प्रजापति-पुत्र — अपनी किरणों को समेट लो, अपना तेज इकट्ठा कर लो। तुम्हारा जो सर्व-कल्याण-कारी रूप है, उसे मैं देखता हूँ। वह पुरुष जो वहाँ है — वह मैं हूँ।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

O Pūṣan, solitary seer, Yama, Sūrya, son of Prajāpati — draw aside thy rays, gather thy splendour. Thy most blessed form I behold: that Person yonder — I am He.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

महावाक्य 'सोऽहमस्मि' — "मैं वही हूँ।" पाँच नामों से सूर्य (पूषन) को सम्बोधित करते हुए — जो विभिन्न ब्रह्माण्डीय कार्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं — द्रष्टा सूर्य से उसकी चकाचौंध भरी किरणें समेटने की प्रार्थना करता है ताकि उसका सच्चा रूप दिख सके — और उस रूप को अपनी आत्मा के रूप में पहचानता है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
आधुनिक सूचना युग में मनुष्य का ध्यान हजारों दिशाओं में बिखर चुका है। नोटिफिकेशन, ईमेल, सोशल मीडिया फीड और दिन भर की अंतहीन उत्तेजनाओं ने हमारे दिमाग की ऊर्जा को पूरी तरह छिन्न-भिन्न कर दिया है। इसके साथ ही, विशाल संस्थाओं और कॉरपोरेट तंत्र के सामने सामान्य व्यक्ति स्वयं को अत्यंत तुच्छ, शक्तिहीन और महत्वहीन महसूस करता है। मनुष्य यह भूल चुका है कि उसके भीतर भी ब्रह्मांड की वही परम सृजनात्मक ऊर्जा सोई हुई है। ईशावास्य उपनिषद् यहाँ आत्मा के सर्वोच्च साक्षात्कार का महामंत्र उद्घाटित करता है: "पूषन्नेकर्षे यम सूर्य प्राजापत्य व्यूह रश्मीन् समूह तेजः। यत्ते रूपं कल्याणतमं तत्ते पश्यामि योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि॥" (हे पोषक, हे एकाकी पथिक, हे यम, हे सूर्य, हे प्रजापति के पुत्र! अपनी इन चकाचौंध करने वाली किरणों को समेट लीजिए, अपने तेज को केंद्रित कीजिए। आपका जो परम कल्याणकारी रूप है, मैं उसका दर्शन कर रहा हूँ; और वह जो परम पुरुष वहाँ है, वह 'मैं' ही हूँ: सोऽहमस्मि!)। यह मन्त्र उद्घोष करता है कि जब आप अपनी बिखरी हुई ऊर्जा को समेटते हैं, तो आप पाते हैं कि ब्रह्मांड की जो सर्वोच्च चेतना तारों और सूर्य को चला रही है, वही चेतना आपकी अपनी अंतरात्मा है!
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **सोऽहम् — अपनी परम गरिमा की पहचान (Awakening to 'So-ham')**: जब भी हीनता, कमजोरी या आत्म-संदेह मन पर हावी हो, गहरी श्वास के साथ 'सोऽहम्' (वही परम तत्त्व मैं हूँ) का स्मरण करें; अपनी असीम सामर्थ्य को पहचानें। - **बिखरी हुई ऊर्जा का समेटना (Gathering Scattered Energy)**: दिन भर विभिन्न दिशाओं में बिखरी हुई मानसिक वृत्तियों और चिंताओं को समेटकर अपने आंतरिक केंद्र में एकाग्र करने का अभ्यास करें। - **कल्याणकारी दृष्टि का विकास (Focusing on the Auspicious)**: दुनिया के शोर-शराबे और विकृतियों से ऊपर उठकर जीवन के उस परम कल्याणकारी और सुंदर रूप पर ध्यान केंद्रित करें जो हर परिस्थिति के मूल में स्थित है।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या आप स्वयं को परिस्थितियों के आगे एक लाचार और दीन-हीन व्यक्ति मानते हैं, अथवा आप 'सोऽहमस्मि' (वह परम पुरुष मैं हूँ) की उस असीम ब्रह्मांडीय गरिमा का अनुभव करते हैं?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

सूर्य वस्तुतः पृथ्वी पर लगभग समस्त ऊर्जा और जीवन का स्रोत है — ब्रह्माण्डीय स्रोत के लिए उपयुक्त प्रतीक। आधुनिक खगोलभौतिकी (Astrophysics): तुम्हारे शरीर का हीलियम से भारी हर परमाणु किसी तारकीय भट्टी में बना था। तुम वस्तुतः सूर्य-पदार्थ से बने हो। 'सोऽहमस्मि' एक रासायनिक तथ्य भी है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Kanva Recension, Shukla Yajurveda Samhita Ch. 40. Göttingen Register of Electronic Texts in Indian Languages (GRETIL)
Translation
Gita Press Gorakhpur & Swami Nikhilananda
Last updated
2026-10-23
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Madhyandina recension transposes mantras 5 and 6 and alters initial phrasing in mantra 16.

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श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

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🟣Cross-Scriptural Linkपार-ग्रंथ सम्बन्ध (गीता ↔ उपनिषद् ↔ रामायण)

Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

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आगे क्या · What next