Atharva Veda
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 8/13 · श्लोक 92.1–95.4

पूर्ण अध्याय पाठ65 श्लोक

अध्याय 20

श्लोक 92.1

अ॒भि प्र गोप॑तिं गि॒रेन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे।सू॒तुं स॒त्यस्य॒ सत्प॑तिम्

abhi pra gopatiṃ girendramarca yathā vide| sūtuṃ satyasya satpatim

हिन्दी अर्थ

(वस्वः) सम्पत् का (भक्षीमहि) हम मोग कर रहे ह। (बृहस्पते) है महती-वेदवाणी के पति आप, (च) भ्रौर ( इनदरः ) नः पात). सदाः हमारी रक्षा करते रहो । बृहस्पतिः = बृहती वाक् तस्याः पतिः। कीरि स्तोता निघ०

English

Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine, In thousands, O most wealthy One.

अध्याय 20

श्लोक 92.2

आ ह॑रयः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ ।यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे

ā harayaḥ sasṛjrire'ruṣīradhi barhiṣi | yatrābhi saṃnavāmahe

हिन्दी अर्थ

५५०. सां जनां मममुत्येयिनद्र संतस्थाना वि हवन्ते समीके । संस्थाभरों के रूपमे खड् हो जतेरहै, ओर दन ( समीके) वागृ-युद्धोमे सहायतथं (त्वाम्) भ्रपको (वि) विशेषरूप में, हथन्ते) सहायतां पुकारते समपंणरूपौ हविवाला होता है । (शूरः) भाप शुर (श्रसुन्वता ) भक्तिरस

English

autumnal forts, brakest them down with conquering might. Thou hast chastised. O Indra, Lord of strength, the man who worships not,

अध्याय 20

श्लोक 92.3

इन्द्रा॑य॒ गाव॑ आ॒शिरं॑ दुदु॒ह्रे व॒ज्रिणे॒ मधु॑ ।यत् सी॑मुपह्व॒रे वि॒दत्

indrāya gāva āśiraṃ duduhre vajriṇe madhu | yat sīmupahvare vidat

हिन्दी अर्थ

दूर रहता हुआ मी (दात्रुः) कामादि, (अस्य) इस परमेदवर की उपस्थिति मँ (जयताम्) भयभीतः-रहता है, (स्म) एसे परमेदवर कै प्रति (जन्या ) दे देनी चाहिए । शिश्राय श्रा पाके;- कामम् = मोक्ष-कामना । (ुष्डूत) बहतो द्वारा या बहुत नामो दवारा पुकारे ग॑एहे परमेववर! आपका (यः) जो ( श्वः ) शान्त कर देनेवाला ( प ) उग्र बल है, स्तोता के लिये (धियम्) ठेसी बुद्धि (कृधि) प्रदान कीजिये जो किं (वाज-

English

One stream after another have they gained from thee, eager for glory have they gained. As sits the young bird on the tree rejoicing, ye, swift pair, have been roused by clear

अध्याय 20

श्लोक 92.4

उद् यद् ब्र॒ध्नस्य॑ वि॒ष्टपं॑ गृ॒हमिन्द्र॑श्च॒ गन्व॑हि ।मध्वः॑ पी॒त्वा स॑चेवहि॒ त्रिः स॒प्त सख्युः॑ प॒दे

ud yad bradhnasya viṣṭapaṃ gṛhamindraśca ganvahi | madhvaḥ pītvā sacevahi triḥ sapta sakhyuḥ pade

हिन्दी अर्थ

परमेदेवर, उपासकं पर, (अह) निर्य से, (दामानम्) कमो की रस्सी के . (प्रहाम्). दुःख-प्रहाण करनेवाले परमेदवर पर ( जयति ) विजय पा लेता -फदे को. (म) -नहीं ( नियंसत् ) जकड़ता, अपि तु ( सुन्वते ) मक्तिरष क ॥

English

laudation, Whose Hoter-priest through many days is Indra, earth’s guardian, friend of men, the best of

अध्याय 20

श्लोक 92.5

अर्च॑त॒ प्रार्च॑त॒ प्रिय॑मेधासो॒ अर्च॑त ।अर्च॑न्तु पुत्र॒का उ॒त पुरं॒ न धृ॒ष्ण्वऽर्चत

arcata prārcata priyamedhāso arcata | arcantu putrakā uta puraṃ na dhṛṣṇva'rcata

हिन्दी अर्थ

का०.२० । सू० ८६ अथवंवेद-भाष्य । २१ ९ ५५५. उन प्रहामतिदीवा जयि कृतमिव न्नी वि चिमोति काले। - योदेतकामो न धरम रुणद्धि समित् तं रायः सुजि सधा ।॥९॥ (उत) तथा (भ्रतिदीवा) शरत्यधिकःस्तुतियां करनेवाला उपासक, यथोचित समय मे, (कृतम्) नए कमे-क्ेत्र को (वि चिनोति) निर्वय करके चुन लेता है,्रौर (जयति) उस पर विजय पा लेता है (देवकामः) परमे्वंर- देव की कामनावाला (यः) जो मनुष्य (घनम्) धन को ( रुणद्धि न ) रोके

English

heroes. May we, when this Dawn and the next dance hither, be thy best servants, most heroic Hero!

अध्याय 20

श्लोक 92.6

अव॑ स्वराति॒ गर्ग॑रो गो॒धा परि॑ सनिष्वणत्।पिङ्गा॒ परि॑ चनिष्कद॒दिन्द्रा॑य॒ ब्रह्मोद्य॑तम्

ava svarāti gargaro godhā pari saniṣvaṇat| piṅgā pari caniṣkadadindrāya brahmodyatam

हिन्दी अर्थ

नहीं रखता, उस क। संग्रह नहीं करता रहता, ।108/0119 नहीं करतां रहता, (तम् इत्) उस के साथ ही, परमेदबर ( स्वधाभिः ) निज धारक- शति + दिष् ( स्तुतौ ) + कनिन् ( उणा० कोष १।१५६ ) । (“कृतमिव (गोभिः) वेदवाणियों छी नौका द्वारा (विवे) हम सब (दुरेवाम्) .

English

Let the victorious car with triple splendour bring hitherward the hundred chiefs with Kutsa. What was the gladdening draught that pleased thee, Indra?

अध्याय 20

श्लोक 92.7

आ यत् पत॑न्त्ये॒न्यः सु॒दुघा॒ अन॑पस्फुरः ।अ॒प॒स्फुरं॑ गृभायत॒ सोम॒मिन्द्रा॑य॒ पात॑वे

ā yat patantyenyaḥ sudughā anapasphuraḥ | apasphuraṃ gṛbhāyata somamindrāya pātave

हिन्दी अर्थ

गए परमेदवर ! ( वयम् ) हम ( अरिष्टासः ) रोगादि से रहित होकर, २२०. भ्रथववेद-भाष्य . का०२०। सू० ६० “वयं राजसु" का प्राधिभौतिक श्रभिप्राय यह् है कि राजालोग योग निज भोगों मेँ करते है, तो प्रजा को चाहिए कि (वृजनीभिः) सेनाग्रं मेँ

English

Speed to our doors, our songs, for thou art mighty.

अध्याय 20

श्लोक 92.8

अपा॒दिन्द्रो॒ अपा॑द॒ग्निर्विश्वे॑ दे॒वा अ॑मत्सत ।वरु॑ण॒ इदि॒ह क्ष॑य॒त् तमापो॑ अ॒भ्यऽनूषत व॒त्सं सं॒शिश्व॑रीरिव

apādindro apādagnirviśve devā amatsata | varuṇa idiha kṣayat tamāpo abhya'nūṣata vatsaṃ saṃśiśvarīriva

हिन्दी अर्थ

. विप्लव तथा विद्रोह जागरित कर, उन धनों पर विजय पाकर, उन काः: उपयोग प्रजा की भलाई के निमित्त करर । वैदिक समाजवाद का यह् एक चाहनेवाला कामादि हमारी हत्या न करे । बृहस्पति-इन्द्र (सखा) सखा बन ˆ कर, (सखिभ्यः) सखिरूप हम उपासको के लिये, (वरिवः) सांसारिक घन

English

Why comest thou to me, what gift attracts thee? Fain would I bring thee food most meet to offer.

अध्याय 20

श्लोक 92.9

सु॒दे॒वो अ॑सि वरुण॒ यस्य॑ ते स॒प्त सिन्ध॑वः ।अ॒नु॒क्षर॑न्ति का॒कुदं॑ सू॒र्यं सुषि॒रामि॑व

sudevo asi varuṇa yasya te sapta sindhavaḥ | anukṣaranti kākudaṃ sūryaṃ suṣirāmiva

हिन्दी अर्थ

“कृणौतु"" मे .एकवच्न है, अतः बृहस्पति श्रौर इनदर, एक ही कर्ता है, दो नहीं ॥ ये दो पद परभेदवर केदो गणो केप्रेद्शंकरै' सत्) भरौर भतप्त सूर्यादिलोको मे स्थित है, वह ( नः पिता ) हमारा पिता,. (प्रथमजाः) प्रथम भ्रकट होकर, ( रोद्तौ ) सिर से लेकर पैरों तक.को -का० २०। सू० €० श्रथवेवेद-माष्य २२१ ५५९. जनाय चिव् य दव॑त उ. लोकं बहुस्पीपदेबहतौ चकारं ।

English

Indra, what fame hath one like thee mid heroes? With what plan wilt thou act? Why hast thou sought us?

अध्याय 20

श्लोक 92.10

यो व्यतीं॒रफा॑णय॒त् सुयु॑क्तां॒ उप॑ दा॒शुषे॑ ।त॒क्वो ने॒ता तदिद् वपु॑रुप॒मा यो अमु॑च्यत

yo vyatīṃraphāṇayat suyuktāṃ upa dāśuṣe | takvo netā tadid vapurupamā yo amucyata

हिन्दी अर्थ

का० २० ।सु० ८ अथववंवेद-म।ष्य । २१३ के पति ने, (सहसा) निज स्वाभाविक बल के कारण, ( रवेण ) केवलमात्र विशेष सुदुढ़ कर दिया है, ( प्रतनासः ) भ्रनादिकांल के ( ऋषयः विप्राः )

English

Lull thou asleep, to wake no more, the pair who on each other look: Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine,

अध्याय 20

श्लोक 92.11

अतीदु॑ श॒क्र ओ॑हत॒ इन्द्रो॒ विश्वा॒ अति॒ द्विषः॑ ।भि॒नत् क॒नीन॑ ओद॒नं प॒च्यमा॑नं प॒रो गि॒रा

atīdu śakra ohata indro viśvā ati dviṣaḥ | bhinat kanīna odanaṃ pacyamānaṃ paro girā

हिन्दी अर्थ

उस परमेश्वर का (दीध्यानाः) सतत ध्यान करते हुए, ( पुरः ) सदा उसे. म्रपने समक्ष (दधिरे) रखते है । त । ( बृहस्पते ) है महाब्रह्माण्ड के पति ! (नः ) हममेसे(भे)जो (धृनेतयः) कामादि को कम्पने में नेतृरूप उपासक,--( सुप्रकेतम् ) सुविज्ञ. उपासको के, (भ्रस्य ) भौर इस मु उपासक के ( योनिम् ) शरीर-गृहों की योनि = गृह (निध० ३।४); अर्थात् जौ मातृयोनि से पदा होते है,

English

In thousands, O most wealthy One. Hero, let hostile spirits sleep, and every gentler Genius wake:

अध्याय 20

श्लोक 92.12

अ॒र्भ॒को न कु॑मार॒कोऽधि॑ तिष्ठ॒न्नवं॒ रथ॑म्।स प॑क्षन्महि॒षं मृ॒गं पि॒त्रे मा॒त्रे वि॑भु॒क्रतु॑म्

arbhako na kumārako'dhi tiṣṭhannavaṃ ratham| sa pakṣanmahiṣaṃ mṛgaṃ pitre mātre vibhukratum

हिन्दी अर्थ

मथवा “तिः” कर्तरि, निपातनात्) । ग - ५४६. बुदस्पते या प॑रमा परावदत आ तं शतस्पृशो निकेदुः। आपकी (यापरमा) जो परम-विभूति है, (भरतः). इस विभति से यत्-

English

Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine, In thousands, O most wealthy One.

अध्याय 20

श्लोक 92.13

आ तू सु॑शिप्र दंपते॒ रथं॑ तिष्ठा हिर॒ण्यय॑म्।अध॑ द्यु॒क्षं स॑चेवहि स॒हस्र॑पादमरु॒षं स्व॑स्ति॒गाम॑ने॒हस॑म्

ā tū suśipra daṃpate rathaṃ tiṣṭhā hiraṇyayam| adha dyukṣaṃ sacevahi sahasrapādamaruṣaṃ svastigāmanehasam

हिन्दी अर्थ

( शद्वदुगधाः तथा मेष से प्रज्नवित जल कं सदृश पवित्र ये उपासक,-- (खाताः) समाधि में मानो गडसेगएर्है, निखातहोगएहैँ। ये उपासक (शचोतन्ति) प्रवाहित कर रहे है । द . 4 सदृश तमोजन्य राग-द षं भ्रादि को भस्मीभ्रूत कर देता है । महो ज्योतिषः-- “विशोका वा ज्योतिष्मती" (योग० १।३६) के ..

English

Destroy this ass, O Indra, who in tones discordant brays to thee: Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine,

अध्याय 20

श्लोक 92.14

तं घे॑मि॒त्था न॑म॒स्विन॒ उप॑ स्व॒राज॑मासते ।अर्थं॑ चिदस्य॒ सुधि॑तं॒ यदेत॑व आव॒र्तय॑न्ति दा॒वने॑

taṃ ghemitthā namasvina upa svarājamāsate | arthaṃ cidasya sudhitaṃ yadetava āvartayanti dāvane

हिन्दी अर्थ

प्रादि रूप. की -भ्राकृतिवाला भान होता है” । इसे ही ““महाज्योतिवाला ५४५. घ सुष्टुभा स शरक्वता गणेनं चलं करोज फलिग रतरेण कार २०1 सु० ८९ भ्रथवंवेद-माष्य =. २१५

English

In thousands, O most wealthy One. Far distant on the forest fall the tempest in a circling course;

अध्याय 20

श्लोक 92.15

अनु॑ प्र॒त्नस्यौक॑सः प्रि॒यमे॑धास एषाम्।पूर्वा॒मनु॒ प्रय॑तिं वृ॒क्तब॑र्हिषो हि॒तप्र॑यस आशत

anu pratnasyaukasaḥ priyamedhāsa eṣām| pūrvāmanu prayatiṃ vṛktabarhiṣo hitaprayasa āśata

हिन्दी अर्थ

-( कनिक्रदत् , योगमागं की भ्रगली-भरगली भूमिका््रोकी भोरयोमीका रर्मियों को (उदाजत्) उदित करता रहा है । विम = कान्तिकंर्मा (निघः २।६) । व् = 10 51115 (जापटे)। ५४६. एवा पित्रे विश्वदाय शे यहैवियेग नम॑सा हविर्भिः ।

English

Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine, In thousands, O most wealthy One.

अध्याय 20

श्लोक 92.16

यो राजा॑ चर्षणी॒नां याता॒ रथे॑भि॒रध्रि॑गुः ।विश्वा॑सां तरु॒ता पृत॑नानां॒ ज्येष्ठो॒ यो वृ॑त्र॒हा गृ॒णे

yo rājā carṣaṇīnāṃ yātā rathebhiradhriguḥ | viśvāsāṃ tarutā pṛtanānāṃ jyeṣṭho yo vṛtrahā gṛṇe

हिन्दी अर्थ

(पित्रे) हम सब के पिता, (विदवदेवाय ) विव के देवता, (वृष्णे) हम निज सेवाएः स॒मपित करते हँ । ( बृहस्पते ) है महाब्रह्याण्डपति । ठीक विधि से, ( स्तोमम्) सामगानों का मानो (प्रभर) प्रहार किया कर ।

English

Slay each reviler and destroy him who in secret injures us: Do thou, O Indra, give us thope of beauteous horses and of kine,

अध्याय 20

श्लोक 92.17

इन्द्रं॒ तं शु॑म्भ पुरुहन्म॒न्नव॑से॒ यस्य॑ द्वि॒ता वि॑ध॒र्तरि॑ ।हस्ता॑य॒ वज्रः॒ प्रति॑ धायि दर्श॒तो म॒हो दि॒वे न सूर्यः॑

indraṃ taṃ śumbha puruhanmannavase yasya dvitā vidhartari | hastāya vajraḥ prati dhāyi darśato maho dive na sūryaḥ

हिन्दी अर्थ

२१६. ; थवंवेद-माष्य का० २०। सु० ८९. वाजम्) देवासुर-संग्राम पर (तरत) विजय पारो । है (जरितः) स्तुति भं (- ) सोम्य उपासक ( मर्यः ) भ्रपने चित्त का मरधीइवर उपासक ! ( गाम् ) वेदवाणो से ( दोहेन ) दहे ज्ञान द्वारा तु ( ॥ ) अपने साथी उपासक को (उप शिक्ष ) उपासना की शिक्षा दिया शोषय) मनी परार सदा जागरूक रखा कर । (न ) जंसे (वसुना पूणम्)

English

In thousands, O most wealthy One. Couples desirous of thine aid are storming thee, pouring their presents forth to win a stall of

अध्याय 20

श्लोक 92.18

नकि॒ष्टं कर्म॑णा नश॒द् यश्च॒कार॑ स॒दावृ॑धम्।इन्द्रं॒ न य॒ज्ञैर्वि॒श्वगू॑र्त॒मृभ्व॑स॒मधृ॑ष्टं धृ॒ष्ण्वोऽजसम्

nakiṣṭaṃ karmaṇā naśad yaścakāra sadāvṛdham| indraṃ na yajñairviśvagūrtamṛbhvasamadhṛṣṭaṃ dhṛṣṇvo'jasam

हिन्दी अर्थ

व मेश्वरर् को मघदेयभ्य ) लिया जाताहै, वक्षे ( शूरम् ) दानशूर परमत क, ( मघदेय, ए के देने के लिये, ( भ्रा च्यावय ). ब्रपनी भ्रोर पुणतया न. , श्राप (भोजम्) भोज है, सब कं प्रतिपालक है,-(त्वा) "ठ सम्बन्धं मे यह (किम्) क्यो (राहुः) लोग कहते ? (मा).

English

king pouring gifts, Indra, seeking thee. When two men seeking spoil or heaven thou bringest face to face in war,

अध्याय 20

श्लोक 92.19

अषा॑ल्हमु॒ग्रं पृत॑नासु सास॒हिं यस्मि॑न् म॒हीरु॑रु॒ज्रयः॑ ।सं धे॒नवो॒ जाय॑माने अनोनवु॒र्द्यावः॒ क्षामो॑ अनोनवुः

aṣālhamugraṃ pṛtanāsu sāsahiṃ yasmin mahīrurujrayaḥ | saṃ dhenavo jāyamāne anonavurdyāvaḥ kṣāmo anonavuḥ

हिन्दी अर्थ

४८० कृपा कीजिये कि (मम). मेरी ( घीः ) बुद्धि (गप्नस्वती) (नः) हम (आ मर) प्राप्त कराये । - . (विप्रा है मेधावी उपासको ! (वाचा) वेदवाणी द्वारा भोक्त विधि द्वारा ॥ का० २० सु० ८8 श्रथवंवेद-माष्य - २१७

English

Thou showest, Indra, then the bolt, thy constant friend, the bull that ever waits on thee. This thine heroic power full well the people knew, wherewith thou brakest down, Indra,

अध्याय 20

श्लोक 92.20

यद् द्याव॑ इन्द्र ते श॒तं श॒तं भूमी॑रु॒त स्युः ।न त्वा॑ वज्रिन्त्स॒हस्रं॒ सूर्या॒ अनु॒ न जा॒तम॑ष्ट॒ रोद॑सी

yad dyāva indra te śataṃ śataṃ bhūmīruta syuḥ | na tvā vajrintsahasraṃ sūryā anu na jātamaṣṭa rodasī

हिन्दी अर्थ

विहीन के साथ (संख्यम्) मंत्री (न वष्टि) नहीं चाहते । ममसत्यम् = संप्राम (निष २।१७) । समीके ग्राम (२।१७) (भ्रा सुनोति) पू्णंतया समपित कर देता है, (तस्म ) उस उपासक के लिये, -जीवन मे व्याप्त (शात्रून्) कामादि शतरभों को, -( सुतुकान ) ओर उन से. (वृत्रम्) उस वृत्रवगृं का (हन्ति) हनन कर देता है ।

English

And made thine own this great earth and these water-floods, with joyous heart these water floods. And they have bruited far this hero might, when thou, O Strong

अध्याय 20

श्लोक 92.21

आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न् विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा ।अ॒स्मां अ॑व मघव॒न् गोम॑ति व्र॒जे वज्रिं॑ चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑

ā paprātha mahinā vṛṣṇyā vṛṣan viśvā śaviṣṭha śavasā | asmāṃ ava maghavan gomati vraje vajriṃ citrābhirūtibhiḥ

हिन्दी अर्थ

५५१, यान्मिन् वं. दं चिम छसुमिन्रे यः शिभयं मघवा काममस्मे । २११८. मथवंवेद-माष्य -का० २० सूर ८९ (शंखम्) प्रशंसित-स्तुतियां ( दधिम ) धारण करते है, भेट करते ह; रौर.

English

One, in thy joy helpest thy suppliants who sought to win thee for their Friend. Their battle-cry thou madest sound victorious in the shocks of war.

अध्याय 20

श्लोक 93.1

उत् त्वा॑ मन्दन्तु॒ स्तोमाः॑ कृणु॒ष्व राधो॑ अद्रिवः ।अव॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ जहि

ut tvā mandantu stomāḥ kṛṇuṣva rādho adrivaḥ | ava brahmadviṣo jahi

हिन्दी अर्थ

( देवहूतौ ) बृहस्पति-३ेव का जब भ्राह्न किया जाता है, तब ( यंः उपासक-जन के लिये, (उ ) निश्चय से ( लोकम् ). भालोक या प्ज्ञालोक को (वि ददंरीति। विदी्णं कर देता है, उन्हं मोक्ष दिना देतां है

English

Speed happily those, as Sūrya ends his journey, who meet his wish as bridegrooms meet their spouses;

अध्याय 20

श्लोक 93.1-2

अ॒भि प्र गोप॑तिं गि॒रेन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे।सू॒तुं स॒त्यस्य॒ सत्प॑तिम्

abhi pra gopatiṃ girendramarca yathā vide| sūtuṃ satyasya satpatim

हिन्दी अर्थ

५६०. "बृहस्पतिः सम॑जयद् वचन म॒हो व्र॒जान् गोम॑तो देव एषः । प्राणों तथा (स्वः) सुखो का (सिषासन्) महादान करता हभ, ( भरकः) .निज गोः=इन्वियां (उणा० कोष २।६७), वैदिक यन्तालय, -अजमेर । ( महः २२२ म्मथववेद-माध्य का०.२० । सु०९१

English

Speed happily those, as Sūrya ends his journey, who meet his wish as bridegrooms meet their spouses;

अध्याय 20

श्लोक 93.2

प॒दा प॒णींर॑रा॒धसो॒ नि बा॑धस्व म॒हां अ॑सि ।न॒हि त्वा॒ कश्च॒न प्रति॑

padā paṇīṃrarādhaso ni bādhasva mahāṃ asi | nahi tvā kaścana prati

हिन्दी अर्थ

(ते) उन उपासक-सखाभो ने ( गाः वेदवाणियो को प्राप्त करने की ( इषणयन्त) इच्छा की, भौर ( सत्येन मनसा ) सच्चे मनसे की गई (घीभिः) ध्यानविधिरयो दारा उन्होने ( गोपतिम् ) वेदवाणियो के पति से वाणियों के पति ने, ( स्वयुग्भिः ) अपने मँ योगयुक्त, तथा ( अवद्यपेभिः ) सूयं रदिमियो के . सदृश ज्ञानप्रकाशवाली वेदवाणियों को (मिथः) एक साथ,

English

heaven. E’en beyond this his majesty extendeth who hath exceeded all the worlds in greatness,

अध्याय 20

श्लोक 93.2-2

आ ह॑रयः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ ।यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे

ā harayaḥ sasṛjrire'ruṣīradhi barhiṣi | yatrābhi saṃnavāmahe

हिन्दी अर्थ

भ्रभिप्रायः योगोपयोगी कर्मो से ह. । हए हम उपासक-सखा, (शूरसातौ). शूर बने-कामादि के विना के निमित्त धारण करते हुए, ( भसा ) भषने मौखिक उपदेशो द्वारा; ( वृषणम् ) का० २५ । सु० ९१. भ्रथवेवेव-माष्य

English

heaven. E’en beyond this his majesty extendeth who hath exceeded all the worlds in greatness,

अध्याय 20

श्लोक 93.3

त्वमी॑शिषे सु॒ताना॒मिन्द्र॒ त्वमसु॑तानाम्।त्वं राजा॒ जना॑नाम्

tvamīśiṣe sutānāmindra tvamasutānām| tvaṃ rājā janānām

हिन्दी अर्थ

दोनो सुनोः। सुनने का व्यवहार चेतनो मँ ही सम्मव हैःमचेतनों मे नहीं । (इन्द्रः) परमेदवर ने ( मह्ला ) निज-महिमा मे, सूयं के तापद्वारा मे पदा हृए (भिम्) भन्तरिक्षगामी मेष का ( अहन् ) हनन किया, तथा

English

thee. Hymned by Angirases, bursting the cowstalls, thou foundest ample strength for us as leader.

अध्याय 20

श्लोक 93.3-2

इन्द्रा॑य॒ गाव॑ आ॒शिरं॑ दुदु॒ह्रे व॒ज्रिणे॒ मधु॑ ।यत् सी॑मुपह्व॒रे वि॒दत्

indrāya gāva āśiraṃ duduhre vajriṇe madhu | yat sīmupahvare vidat

हिन्दी अर्थ

दसं प्रकार (देवैः) दिव्यराक्तियों हारा ( द्यावापृथिवी ) चुलोक भौर पृथिवी- . लोक (नः) हमारी (भावतम्) पूरी रक्षा करतेदहै। कप० २० । सुऽ ९२ स, अथर्ववेद-भाष्यः । २२६ हे उपासक । तू ( यथाविदे ) परमेरवर के यथाथ स्वरूप के जानने के लिये, (गिरा) वै दिक-स्तुतिवाणियों यरा, (गोपतिम्) संसारके स्वामी या

English

thee. Hymned by Angirases, bursting the cowstalls, thou foundest ample strength for us as leader.

अध्याय 20

श्लोक 93.4

ई॒ङ्खय॑न्तीरप॒स्युव॒ इन्द्रं॑ जा॒तमुपा॑सते ।भे॒जा॒नासः॑ सु॒वीर्य॑म्

īṅkhayantīrapasyuva indraṃ jātamupāsate | bhejānāsaḥ suvīryam

हिन्दी अर्थ

(श्रि बर्हिषि) हमारे हदयाकाशो मे,--(यत्र) जिन हृदयाकाशों । मे ( अभि) परमेश्वर को साक्षात् करके ( सं नवामहे ) हम इकटूठे मिलकर सम्यक्-स्तुतियां करते है, उन हृदयाकासों में ( भरुषीः ) प्रकाशमयी तथा व ॥ 4: व ( आ ससूच्िरे ) पुणंल्प में प्रकट लिये, हमारे (मषु) मघुर तथा ( आशिरम् ) परिपक्व भक्तिरसो को (दुदुहे)

English

He, excellent, withholdeth not his gift of power and wealth in kine, When he hath listened to our songs.

अध्याय 20

श्लोक 93.4-2

उद् यद् ब्र॒ध्नस्य॑ वि॒ष्टपं॑ गृ॒हमिन्द्र॑श्च॒ गन्व॑हि ।मध्वः॑ पी॒त्वा स॑चेवहि॒ त्रिः स॒प्त सख्युः॑ प॒दे

ud yad bradhnasya viṣṭapaṃ gṛhamindraśca ganvahi | madhvaḥ pītvā sacevahi triḥ sapta sakhyuḥ pade

हिन्दी अर्थ

मर्व; पीत्वा सचेवहि त्रिः सुप्त सरूपः पदे ॥४॥ गन्वहि ) इकटूठे हो जाते है, तब ( मध्वः पीत्वा ) परमेश्वर मेरे मधुर. भक्तिरस को, ओौर नै उपासक परमेषवर के भानन्दरस को पीकर एक-दूसरे के संगी साथी हो जतिहै। शरीरके ५ पद, ५ तन्मात्रो के सूक्ष्मरीरके ५ पद,

English

He, excellent, withholdeth not his gift of power and wealth in kine, When he hath listened to our songs.

अध्याय 20

श्लोक 93.5

त्वमि॑न्द्र॒ बला॒दधि॒ सह॑सो जा॒त ओज॑सः ।त्वं वृ॑ष॒न् वृषेद॑सि

tvamindra balādadhi sahaso jāta ojasaḥ | tvaṃ vṛṣan vṛṣedasi

हिन्दी अर्थ

। सनयं ५ पद, ५ ज्ञानेन्द्रियो के ५.पद । २ १ वां पद न॑ व । म श्रन्तःकरण मे लीन हो जाता है, तब इस २१बें स्थानम, पद भ, - परमेष्वर भ्रौर उपासक मे सखिभाव स्थापित हो जाता है । ह वंच तन्मात्रा - शीत, उष्ण, सुख, दुःख की भनुभुतियां ५ का

English

To which the Dasyu-slayer goes. Bring us, O Indra, name and fame, enriching, mightiest, excellent,

अध्याय 20

श्लोक 93.5-2

अर्च॑त॒ प्रार्च॑त॒ प्रिय॑मेधासो॒ अर्च॑त ।अर्च॑न्तु पुत्र॒का उ॒त पुरं॒ न धृ॒ष्ण्वऽर्चत

arcata prārcata priyamedhāso arcata | arcantu putrakā uta puraṃ na dhṛṣṇva'rcata

हिन्दी अर्थ

खवा” ( गीता २।१४ ) 1 थिमोसोफिरूट जिसे 51181 ००५४ कहते है, बह यह पञ्चतन्मात्रिंक शरीर ही है। अथैन्तु प्रका उत पुरं नं ध्व वेत ॥५॥ (प्रियमेषासः) है उपासना-यज्ञ के प्याो ( भवंत ) परमेक्वर कीं पर्चना किया करो, (रावत) प्रकृष्ट विधि से ओर प्रभूतः भरचना । द ल बार-बार भ्रचना किया करो । (- उत ) भौर ( पृत्रकाः )

English

To which the Dasyu-slayer goes. Bring us, O Indra, name and fame, enriching, mightiest, excellent,

अध्याय 20

श्लोक 93.6

त्वमि॑न्द्रासि वृत्र॒हा व्य॑१न्तरि॑क्षमतिरः ।उद् द्याम॑स्तभ्ना॒ ओज॑सा

tvamindrāsi vṛtrahā vya1ntarikṣamatiraḥ | ud dyāmastabhnā ojasā

हिन्दी अर्थ

छोटे पुत्र तथा छोटी पुत्रियां .भी (अर्चन्तु) अच॑ना किया करे । (न) जैसे (पुरम्) तुम भने देह की भरचना करते हो, वैसे (धृष्णु) ाप-बक क क्री (अचत) श्रना किया करो । 1 1 न

English

We call on thee, O King, mighty among the Gods, ruler of men, to succour us, All that is weak in us, excellent God, make firm: make our foes easy to subdue.

अध्याय 20

श्लोक 93.6-2

अव॑ स्वराति॒ गर्ग॑रो गो॒धा परि॑ सनिष्वणत्।पिङ्गा॒ परि॑ चनिष्कद॒दिन्द्रा॑य॒ ब्रह्मोद्य॑तम्

ava svarāti gargaro godhā pari saniṣvaṇat| piṅgā pari caniṣkadadindrāya brahmodyatam

हिन्दी अर्थ

की देखमाल मे, तथा पालन-पोषण मे लगे रहते है, इसी लगन से परमेदवर की. भर्चना म भी लगना ची । मेषः=-यज्ञः (निधं ३।१७) धु. . (ग्रः) श्भत स्तुतियां . करनेवाला उपासक, जब ( अवस्वराति आमे स्वर भें स्वरपू्वेक स्तुतियां करता है, तब, गोषा - उपासको का

English

We call on thee, O King, mighty among the Gods, ruler of men, to succour us, All that is weak in us, excellent God, make firm: make our foes easy to subdue.

अध्याय 20

श्लोक 93.7

त्वमि॑न्द्र स॒जोष॑सम॒र्कं बि॑भर्षि बा॒ह्वोः ।वज्रं॒ शिशा॑न॒ ओज॑सा

tvamindra sajoṣasamarkaṃ bibharṣi bāhvoḥ | vajraṃ śiśāna ojasā

हिन्दी अर्थ

का० २०। सु० ९२ भ्रथवेवेद-माष्य २३१ गरः = गृशब्दे, यड लुक्; गृणाति भचंतिकर्मा (निघ० ३1 १४) । अपटे ने १०५५500५, ४७०५४९0 ; तथा 58101 दिये है ।. लालिमा न्निय शरुरे या केसरी रंग के कपड् धारण करनेवाली प्रचांरिका-

English

Thou, Hero, hast performed thy hero needs with might, yea, all+ with strength, O Strongest One.

अध्याय 20

श्लोक 93.7-2

आ यत् पत॑न्त्ये॒न्यः सु॒दुघा॒ अन॑पस्फुरः ।अ॒प॒स्फुरं॑ गृभायत॒ सोम॒मिन्द्रा॑य॒ पात॑वे

ā yat patantyenyaḥ sudughā anapasphuraḥ | apasphuraṃ gṛbhāyata somamindrāya pātave

हिन्दी अर्थ

बढ़ापे में ज्ञानोपवेद करने का भ्रधिकार वेद ने दिया है । यथा-“भ्रय जीधिः - विदथमावदाति"( भ्रथवं ० १४।१।२१ )» अर्थात् है विवाहित पत्नी ! बढी होकर तु ज्ञानोपदेश किथा कर; जीषिः-जीर्णा। मुनियो के सम्बन्ध में ऋग्वेद मे कहा है कि--““मुनयो वातरशनाः “पिशङ्खा"" वसते मला" मर्थं 06०५5॥1-0०५00 किय है । सम्भवतः, मुनि-स्तियों भौर मुनि-ृरषों के लिये पिशङ्गं वस्व धारण करने का उपदेदा वेदव्रिहित हो । उपरि- एक स्थान मेँ टिकी हुई होकर, (सुदाः) ये सुगमता से दुही जने योग्य होती है, इसी प्रकारः है उपासको ! तुम (इन्द्राय पातवे) परमेदवर के पान -. २ ३२ क । भयवंवेद-माष्य का० २० ।सु० ६२

English

Thou, Hero, hast performed thy hero needs with might, yea, all+ with strength, O Strongest One.

अध्याय 20

श्लोक 93.8

त्वमि॑न्द्राभि॒भूर॑सि॒ विश्वा॑ जा॒तान्योज॑सा ।स विश्वा॒ भुव॒ आभ॑वः

tvamindrābhibhūrasi viśvā jātānyojasā | sa viśvā bhuva ābhavaḥ

हिन्दी अर्थ

कर ्रनेवाली कहां है,परन्तु ये नानावर्णोवाली गौएु तब सुगमता से दुही जा सकती है, जब दोहते समय ये एक स्थान मं टिकी रह 1 इसी प्रकार भक्तिरस को परमेश्वर स्वीकार नहीं करता 1 - एन्यः ५७1698186 वण इदिह धयत् तमाय अम्पनुषत वत्से. य॑शरिश्वरीरिव ॥८॥

English

I should support the singer, God who scatterest wealth! and! not abandon him to woe. Each day would I enrich the man who sang my praise, in what- soever place he were.

अध्याय 20

श्लोक 93.8-2

अपा॒दिन्द्रो॒ अपा॑द॒ग्निर्विश्वे॑ दे॒वा अ॑मत्सत ।वरु॑ण॒ इदि॒ह क्ष॑य॒त् तमापो॑ अ॒भ्यऽनूषत व॒त्सं सं॒शिश्व॑रीरिव

apādindro apādagnirviśve devā amatsata | varuṇa idiha kṣayat tamāpo abhya'nūṣata vatsaṃ saṃśiśvarīriva

हिन्दी अर्थ

, (अपात्) स्थिर तथा. निद्वल भक्तिरस का पान कर लेता है, तबं ( विवे) लगते है, (इव) जैसे ( संशि्वरीः ) भिल कर शिचु कौ वृद्धि करनेवाली ५८१. सुदेवो असि बरुण॒ यस्य॑ ते सप्त सिन्धवः । अनुक्षरन्ति काङ्ं॒सूम्यंषिराभिव ॥९॥। (वरुण) है उपासकः का वरण करनेवाले, या उपासक द्वारा वरणं किये जानेवाने परमेदवर ! श्राप (सुदेवः भसि) सर्वोत्तम देव है, (यस्य तै

English

I should support the singer, God who scatterest wealth! and! not abandon him to woe. Each day would I enrich the man who sang my praise, in what- soever place he were.

अध्याय 20

श्लोक 93.9

सु॒दे॒वो अ॑सि वरुण॒ यस्य॑ ते स॒प्त सिन्ध॑वः ।अ॒नु॒क्षर॑न्ति का॒कुदं॑ सू॒र्यं सुषि॒रामि॑व

sudevo asi varuṇa yasya te sapta sindhavaḥ | anukṣaranti kākudaṃ sūryaṃ suṣirāmiva

हिन्दी अर्थ

का० २०।सू० ९२ अथवंवेद-भ।ष्य २३३ (सिन्धवः) मानो स्यन्दन करती पासकों क 1 , हुई (काकुदम्) उ के तालुश्रों को

English

No kinship is there better, Maghavan, than thine: a father even) is no more. O Indra marvellously bright, come, these libations long for thee,

अध्याय 20

श्लोक 93.10

यो व्यतीं॒रफा॑णय॒त् सुयु॑क्तां॒ उप॑ दा॒शुषे॑ ।त॒क्वो ने॒ता तदिद् वपु॑रुप॒मा यो अमु॑च्यत

yo vyatīṃraphāṇayat suyuktāṃ upa dāśuṣe | takvo netā tadid vapurupamā yo amucyata

हिन्दी अर्थ

वेदवाणी को, (नः पिता) हम सब के पिता परमेदवर ने, ( भरविन्दत् ) हमे द्विया है (विदवजन्यः) विदवजन हितकारी परमेश्वर ने (अयास्यः) विना तुरीयम् यजुर्वेद के -पुरुषसुक्त मेँ परमेदवर-पुरुष का वर्णेन ..

English

Men who support, O Indra strong by nature, with food the many songs that tell thy praises. Thine are two measures, Indra, wide, well-meted, heaven for thy majesty, earth for thy

अध्याय 20

श्लोक 93.11

अतीदु॑ श॒क्र ओ॑हत॒ इन्द्रो॒ विश्वा॒ अति॒ द्विषः॑ ।भि॒नत् क॒नीन॑ ओद॒नं प॒च्यमा॑नं प॒रो गि॒रा

atīdu śakra ohata indro viśvā ati dviṣaḥ | bhinat kanīna odanaṃ pacyamānaṃ paro girā

हिन्दी अर्थ

त्रिपादंखूप मे परमेदवर जगत् से उध्वं है, रौर इस का एकं पाद ही पुनः- है, तुर्य तुरीय । अयास्यः --परमेरवर से चारों वेद प्रकट हुए । इनक : प्रकारान में परमेदवेर को कोई प्रयास नहीं करना पडता, जसे कि र्वास- स्वभावतः विना प्रयास. केहो रही है, जागते सोते यह क्रिया विना परिश्रम ओौर प्रयत्न केहोरहीदहै। इसी प्रकार चारों वेद परमेदवर के

English

wisdom. Here for thy choice are Somas mixed with butter: may the sweet meath be pleasant for thy

अध्याय 20

श्लोक 93.12

अ॒र्भ॒को न कु॑मार॒कोऽधि॑ तिष्ठ॒न्नवं॒ रथ॑म्।स प॑क्षन्महि॒षं मृ॒गं पि॒त्रे मा॒त्रे वि॑भु॒क्रतु॑म्

arbhako na kumārako'dhi tiṣṭhannavaṃ ratham| sa pakṣanmahiṣaṃ mṛgaṃ pitre mātre vibhukratum

हिन्दी अर्थ

पति ने,-(वावदद्िः) कलरव करते हुए (हंसैः) नीर-क्षीर विवेकी हंसो के सदृ वतमान विवेकी-परमहंस (सखिभिः)ऋषि-सखाश्रो द्वारा, (वावदद्धिः) .(उत च) भ्रौर तदनन्तर इन ऋषि-सखाभों द्वारा वेदवाणियों का ( उद् को वेदवाणियों का मौखिक उपदेश कराया । 8 ५ . इस विषय का प्रसङ्खं भरथवंवेद मे अन्यत्र भी हमरा है । यथा--

English

drinking. They have poured out a bowl to him, to Indra, full of sweet juice, for faithful is his bounty.

अध्याय 20

श्लोक 93.13

आ तू सु॑शिप्र दंपते॒ रथं॑ तिष्ठा हिर॒ण्यय॑म्।अध॑ द्यु॒क्षं स॑चेवहि स॒हस्र॑पादमरु॒षं स्व॑स्ति॒गाम॑ने॒हस॑म्

ā tū suśipra daṃpate rathaṃ tiṣṭhā hiraṇyayam| adha dyukṣaṃ sacevahi sahasrapādamaruṣaṃ svastigāmanehasam

हिन्दी अर्थ

कां उपदेश दिया (भथ ° १०।७।१४) । २२४ भथर्वेवैव-भाष्य का०.२० । सुऽ ९१ -के चतुथंपादसे “वि” भरौर “भा का श्नन्वय होता है । पद्यरचना भ्रौर म्बित है, “चऋच्यधिरूढं साम गीयते" । तथा "चऋकसामाभ्याम्”'. इस वंदिक

English

O’er earth’s expanse hath he grown great by wisdom, the friend of man, and by heroic exploits.

अध्याय 20

श्लोक 93.14

तं घे॑मि॒त्था न॑म॒स्विन॒ उप॑ स्व॒राज॑मासते ।अर्थं॑ चिदस्य॒ सुधि॑तं॒ यदेत॑व आव॒र्तय॑न्ति दा॒वने॑

taṃ ghemitthā namasvina upa svarājamāsate | arthaṃ cidasya sudhitaṃ yadetava āvartayanti dāvane

हिन्दी अर्थ

हारा गद्यरंचना का नि्वंश किया है । तथा इन्हीं तीन रचनाभ्नो को मन्त के चतुर्थपाद में “तिस्लः” पद द्वारा निदिष्ट किया है । ५६८. वि मिया पूरं ज्ययेमपांचीं निसप्रीणि साकरुदषेरङृम्तत् । साथ, ( त्रीणि ) तीन रचनाओं को,. ( उदषेः ) निज ज्ञान-सागरसे (निः . ..

English

Indra hath conquered in his wars the mighty: men strive in multitudes to win his friendship. Ascend thy chariot as it were in battle, which thou shalt drive to us with gracious favour,

अध्याय 20

श्लोक 93.15

अनु॑ प्र॒त्नस्यौक॑सः प्रि॒यमे॑धास एषाम्।पूर्वा॒मनु॒ प्रय॑तिं वृ॒क्तब॑र्हिषो हि॒तप्र॑यस आशत

anu pratnasyaukasaḥ priyamedhāsa eṣām| pūrvāmanu prayatiṃ vṛktabarhiṣo hitaprayasa āśata

हिन्दी अर्थ

गर्जती हुई जल प्राप्त करातीहै। है । जपाचीम् = इस पद द्वारा प्रलयावस्था को सूचित किया है । भपाची, णं ४5०९, फननत्की०6 (भ्रापटे) । उदधेः = जेमे समुद्रं से, सूयंताप का २०।घु० ९१ अथववेद-माष्य २२५

English

For him have we pressed juice exceeding potent: here, praised with song, let him effect his visit.

अध्याय 20

श्लोक 93.16

यो राजा॑ चर्षणी॒नां याता॒ रथे॑भि॒रध्रि॑गुः ।विश्वा॑सां तरु॒ता पृत॑नानां॒ ज्येष्ठो॒ यो वृ॑त्र॒हा गृ॒णे

yo rājā carṣaṇīnāṃ yātā rathebhiradhriguḥ | viśvāsāṃ tarutā pṛtanānāṃ jyeṣṭho yo vṛtrahā gṛṇe

हिन्दी अर्थ

. द्वारा, भापहूप मेँ जल काट कर भ्रलग कर दिग्रा जाता है" वसे बुहस्पति के ज्ञानोदधि से तीन रचनाए' मानो कट कर उस से पृथक् हुई" । सृष्टिक्रमं ५६६. द्रौ वलं र्ितारं॑दुषांनां ऋरणेव वि चकर्ता खण ।

English

Unyoke, as at thy journey’s end, O Hero, to gladden thee to-day at this libation. Like Usanā, the priest a laud shall utter, a hymn to thee, the

अध्याय 20

श्लोक 93.17

इन्द्रं॒ तं शु॑म्भ पुरुहन्म॒न्नव॑से॒ यस्य॑ द्वि॒ता वि॑ध॒र्तरि॑ ।हस्ता॑य॒ वज्रः॒ प्रति॑ धायि दर्श॒तो म॒हो दि॒वे न सूर्यः॑

indraṃ taṃ śumbha puruhanmannavase yasya dvitā vidhartari | hastāya vajraḥ prati dhāyi darśato maho dive na sūryaḥ

हिन्दी अर्थ

भ्राकाद को घेरे हुए, (रक्षितारम्) भौर भपने जल की अपने मं रक्षा करते (विच॑कतं ) काट गिराया, (इव) जसे कोई (करेण) हाथ द्वारा किसी वृक्ष रादि को काटं गिराता है। तथा (स्वेदाञ्जिभिः) जल के अद्धि -कणोढारा चाहते हए परमेदवर ने, (पणिम्) - व्यवहार के साधनभूत मेव को (अ्ररोद- व्यवहारे । गाः गौः (जलम्), उणादि कोष २।६७; वैदिक यन्त्रालय,

English

Lord Divine, who markest. When the Bull quaffing praises our libation, as a sage paying holy rites in secret,

अध्याय 20

श्लोक 93.18

नकि॒ष्टं कर्म॑णा नश॒द् यश्च॒कार॑ स॒दावृ॑धम्।इन्द्रं॒ न य॒ज्ञैर्वि॒श्वगू॑र्त॒मृभ्व॑स॒मधृ॑ष्टं धृ॒ष्ण्वोऽजसम्

nakiṣṭaṃ karmaṇā naśad yaścakāra sadāvṛdham| indraṃ na yajñairviśvagūrtamṛbhvasamadhṛṣṭaṃ dhṛṣṇvo'jasam

हिन्दी अर्थ

५६७. ख € सत्येभिः सखिभिः पुवक्गिगोषांयसं वि धनसैरदर्दः । जद॑णस्पतिषमिवेरदेस्वेदेभिदरविणे व्यानट् ॥७।। ( धनसैः ) भाध्यात्मिक-धनों के प्रदाता, ( वृषभिः ) उपदेशामृतव्षी, २२६ भरथवेवेद-भाष्य का०२० 1 सु० ९१

English

Seven singers here from heaven hath he begotten, who e’en by day have wrought their works while singing.

अध्याय 20

श्लोक 93.19

अषा॑ल्हमु॒ग्रं पृत॑नासु सास॒हिं यस्मि॑न् म॒हीरु॑रु॒ज्रयः॑ ।सं धे॒नवो॒ जाय॑माने अनोनवु॒र्द्यावः॒ क्षामो॑ अनोनवुः

aṣālhamugraṃ pṛtanāsu sāsahiṃ yasmin mahīrurujrayaḥ | saṃ dhenavo jāyamāne anonavurdyāvaḥ kṣāmo anonavuḥ

हिन्दी अर्थ

या ब्रह्याण्डपति ने, ( गोधायसम् ) पुथिवीवासियों के घारण-पोषण करने- वाले वैदिक-रहस्यो को ( चि अवदः ) -विशेषरूप मे खोल दिया, भौर सखिभिः- सखा का भथ है “समान ख्यातिवाले, समान ध्मवाले । ज्ञीय-कमों की दृत्टि से, परमेदवंर के लिये समानधर्मा हो जाते रहै, तब परमेश्वर उन्हँ सखारूप जानता है । घनसैः-= घन +षणु दनि । वराहैः श्रेष्ठाहारवद्धिः । अथवा “वराहैः वृषभिः मेघो के समान, विना भेदभाव के सर्वत्र उपदेशामृतों की वर्षा करनेवाले । घमं = यज्ञ (निव० ३।१७)। . ५६८. ते सत्येन मनसु गोप॑तिं गा इयानास इषणयन्त धीभिः ।

English

When heaven’s fair light by hymns was made apparent. (they made great splendour shine at break of morning),

अध्याय 20

श्लोक 93.20

यद् द्याव॑ इन्द्र ते श॒तं श॒तं भूमी॑रु॒त स्युः ।न त्वा॑ वज्रिन्त्स॒हस्रं॒ सूर्या॒ अनु॒ न जा॒तम॑ष्ट॒ रोद॑सी

yad dyāva indra te śataṃ śataṃ bhūmīruta syuḥ | na tvā vajrintsahasraṃ sūryā anu na jātamaṣṭa rodasī

हिन्दी अर्थ

गुदा के समीप मूलाधार चक्रहोतादहै, उसके ऊपर की ओर उत्तरोत्तर ५७१. सत्यामाशिषं ृथुता बयोषै करं चिद्धथक्थ सेभिरेयैः । हे उपासको ! - तुम ( वयोधै; ) वयोवृद्ध-उपासकीं द्वारा प्रदर्शित

English

Sakra who knoweth well all human actions hath with his eager friends let loose the waters. They with their songs cleft e’en the mountain open, and willingly disclosed the stall of cattle.

अध्याय 20

श्लोक 93.21

आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न् विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा ।अ॒स्मां अ॑व मघव॒न् गोम॑ति व्र॒जे वज्रिं॑ चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑

ā paprātha mahinā vṛṣṇyā vṛṣan viśvā śaviṣṭha śavasā | asmāṃ ava maghavan gomati vraje vajriṃ citrābhirūtibhiḥ

हिन्दी अर्थ

कथन को. ध्यानपुरवंक सुनो । । „ + रोदसी का भथ है-चुलोक भ्रौर भूलोक । वेदो मे पुरुष को धौ; तथा स्त्री को पृथिवी कहा गया है । यथा- “द्यौरहं पुथिवी त्वं, ताविह सं भवाव, प्रजामा जनयावहै" (प्रथवें ० १४।२।७१) मन्त्र मे कहा है कि तुम ..

English

He smote away the flood’s obstructer Vritra: Earth conscious lent her aid to speed thy thunder.

अध्याय 20

श्लोक 94.1

आ या॒त्विन्द्रः॒ स्वप॑ति॒र्मदा॑य॒ यो धर्म॑णा तूतुजा॒नस्तुवि॑ष्मान्।प्र॒त्व॒क्षा॒णो अति॒ विश्वा॒ सहां॑स्यपा॒रेण॑ मह॒ता वृष्ण्ये॑न

ā yātvindraḥ svapatirmadāya yo dharmaṇā tūtujānastuviṣmān| pratvakṣāṇo ati viśvā sahāṃsyapāreṇa mahatā vṛṣṇyena

हिन्दी अर्थ

चली भूमि की भ्रोर निरन्तर प्रवाहित होती रंहती ह ॥ नषि त् नीतः (निरु० ५।४।२७) । काकुदम् = जिह्वा कोकुवा, साऽस्मिन् धीयते (निर० ५।४।२७ ) सुषिरा दो पव॑त के. बीच की संड्ड 1 ।1०॥०५५, ०७५४५ (प्रापे) । , तको नेता तदिद् वपुरुपमा यो अर्धुच्यत॥१०॥

English

Thus by fine fingers purified. Urged by the holy singer, sped by song, come, Indra, to the prayers.

अध्याय 20

श्लोक 94.2

सु॒ष्ठामा॒ रथः॑ सु॒यमा॒ हरी॑ ते मि॒म्यक्ष॒ वज्रो॑ नृप॑ते॒ गभ॑स्तौ ।शीभं॑ राजन् सु॒पथा या॑ह्य॒र्वाङ् वर्धा॑म ते प॒पुषो॒ वृष्ण्या॑नि

suṣṭhāmā rathaḥ suyamā harī te mimyakṣa vajro nṛpate gabhastau | śībhaṃ rājan supathā yāhyarvāṅ vardhāma te papuṣo vṛṣṇyāni

हिन्दी अर्थ

“न्नोदन” पद क्म॑मोग के लिये लाक्षणिक है । कमो का भी परिपाक होता है । कनीनः कनि ( कान्ति ) + इनः. ( स्वामी ) = कान्ति का स्वामी = भ्रतिकान्तिमान् । - 4 ५८४. अर्भको न डमारकोऽविं पिष्टक रथ॑म् । ,. करता है, जन्म लेता है, वह बड़ा होकर यदि (कुमारकः न) कुत्सित काम- बृत्तिरयोवाले युवा के सदृदा हो जाता है, तो ( सः ) वह.( महिषं मृगम् ) भसे तथा मृग ध्रादि पचु्ओं को ( पित्र मात्रे ) पिता भ्रौर मातारूपमें जीवात्मा मानुष शरीर धारण करके भी, यदि युवा होकर, कामादि-

English

Even him, eternal, like a bull who rushes down, men’s con- queror, bounteous like a cow; Him who is cause of both, of enmity and peace, to both sides most munificent.

अध्याय 20

श्लोक 94.3

एन्द्र॒वाहो॑ नृ॒पतिं॒ वज्र॑बाहुमु॒ग्रमु॒ग्रास॑स्तवि॒षास॑ एनम्।प्रत्व॑क्षसं वृष॒भं स॒त्यशु॑ष्म॒मेम॑स्म॒त्रा स॑ध॒मादो॑ वहन्तु

endravāho nṛpatiṃ vajrabāhumugramugrāsastaviṣāsa enam| pratvakṣasaṃ vṛṣabhaṃ satyaśuṣmamemasmatrā sadhamādo vahantu

हिन्दी अर्थ

वासनारओों से वासित हो जाता है, तो. उते फिर पाशविक शरीरो मँ जाकर विविध प्रकारके पादाविक कमो कै भोग मोगने पडते है । अध॑ दक्षं सचेवहि सह॑पादमसुवं स्व॑ततिगाम॑नेहसंम् ॥१६॥ परमेरवर का (सचेवहि) संग किया करेगे ।

English

Although these men in sundry ways invoke thee to obtain thine aid. Be this our prayer, addressed, O Indra, unto thee, thine exalta- tion every day.

अध्याय 20

श्लोक 94.4

ए॒वा पतिं॑ द्रोण॒साचं॒ सचे॑तसमू॒र्ज स्क॒म्भं ध॒रुण॒ आ वृ॑षायसे ।ओजः॑ कृष्व॒ सं गृ॑भाय॒ त्वे अप्यसो॒ यथा॑ केनि॒पाना॑मि॒नो वृ॒धे

evā patiṃ droṇasācaṃ sacetasamūrja skambhaṃ dharuṇa ā vṛṣāyase | ojaḥ kṛṣva saṃ gṛbhāya tve apyaso yathā kenipānāmino vṛdhe

हिन्दी अर्थ

धुक्षम् = दयूलोक की विभरतियों भौर धुलोक के असंख्येय तारागणं की दुष्टि से उन के नियामकरूप मेँ, परमेश्वर को “चुलोकवासी कहा है । कहा है । परोंका कम है एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाना । इस द्वारा परमेश्वर को सर्वंगतरूप मँ वणित किया है । तथा पैरों का काम “प्रतिष्ठा,

English

Those skilled in song, O Maghavan, among these men o’ercome with might the foeman’s 296

अध्याय 20

श्लोक 94.5

गम॑न्न॒स्मे वसू॒न्या हि शंसि॑षं स्वा॒शिषं॒ भर॒मा या॑हि सो॒मिनः॑ ।त्वमी॑शिषे॒ सास्मिन्ना स॑त्सि ब॒र्हिष्य॑नाधृ॒ष्या तव॒ पात्रा॑णि॒ धर्म॑णा

gamannasme vasūnyā hi śaṃsiṣaṃ svāśiṣaṃ bharamā yāhi sominaḥ | tvamīśiṣe sāsminnā satsi barhiṣyanādhṛṣyā tava pātrāṇi dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

मे ककम के . दुष्परिणाम का वर्णन है, श्रौर मन्व (५८५) मे सुकमो का (इत्था) यह सत्य है किं उपासक (नमस्विनः) नमस्कार करते हए धन को (एते) प्राप्त करके, वे उपासक, (दावने) दान के निमित्त उस धन सम्पत्तियो का दान, ये दो उपाय हैँ परमेश्वर के समीप भ्रासीन होने के 4 इत्या सत्यम् (चिव० ३।१०) । ।

English

songs, Come hither, bring us strength in many a varied form most near that it may succour us.

अध्याय 20

श्लोक 94.6

पृथ॒क् प्राय॑न् प्रथ॒मा दे॒वहू॑त॒योऽकृ॑ण्वत श्रव॒स्याऽनि दु॒ष्टरा॑ ।न ये शे॒कुर्य॒ज्ञियां॒ नाव॑मा॒रुह॑मी॒र्मैव ते न्य॑विशन्त॒ केप॑यः

pṛthak prāyan prathamā devahūtayo'kṛṇvata śravasyā'ni duṣṭarā | na ye śekuryajñiyāṃ nāvamāruhamīrmaiva te nyaviśanta kepayaḥ

हिन्दी अर्थ

(एषाम्) इन उपासर्को मँ से जो उपासक (्रियमेधासः) उपासना- ् . (यः) जो परमेदवर (चषंणीनाम्) सब मनुष्यों का (राजा) राजा है, जो ( रथेभिः ) हमारे शरीर-रथों ढारा, तथा गतिशील भ्रौर रमणीय जिस की गतिविधि को कोई रोक नदीं सकता । ( यः ) जो ( विश्वासा पृतनानाम् )- सब विरोधी शक्तियो को .( तरुता ) पराजित किया हमा,

English

Those who are yoked by prayer with prayer I harness, the two. fleet friendly Bays who joy together.

अध्याय 20

श्लोक 94.7

ए॒वैवापा॒गप॑रे सन्तु दू॒ढ्योऽश्वा॒ येषां॑ दु॒र्युज॑ आयुयु॒ज्रे।इ॒त्था ये प्रागुप॑रे॒ सन्ति॑ दा॒वने॑ पु॒रूणि॒ यत्र॑ व॒युना॑नि॒ भोज॑ना

evaivāpāgapare santu dūḍhyo'śvā yeṣāṃ duryuja āyuyujre| itthā ye prāgupare santi dāvane purūṇi yatra vayunāni bhojanā

हिन्दी अर्थ

है, (गुणे) उसके मँ स्तुतिगान गाता हूं । ४ - इस्ता॑य षल्नः परति धायि दशतो महो दिते न ध्यै! ॥१७। , (पुर्हन्मत्) है पापों का भ्रति हनन करनेवाले उपासक ! (अवसे ) स्तुतियोँ प्रौर कीतैनों द्वारा शोभा बढ़ाया कर, ( यस्य ) जिसकंकि (विधतंरि ) विक्ेष-धा रण-सामथ्यं पर (द्विता) दो प्रकार के- चयुलोक तथा तथा भूलोक, इहलोक तथा परलोक स्थित है; तथा जिस परभेदवर ने (हस्ताय) पापियों भौर पापों के हनन कं लिये, ( दशतः) दरंनीय (वचनः) ज्ञानरूपी वच ( प्रतिधायि ) धारण किया हृभ्रा है, (न ) जैसे. कि उसने

English

Mounting thy firm and easy car, O Indra, wise and all-knowing come thou to the Soma. No wild bull knows his drinking-place like Indra who ever seeks him who hath pressed the

अध्याय 20

श्लोक 94.8

गि॒रींरज्रा॒न् रेज॑मानां अधारय॒द् द्यौः क्र॑न्दद॒न्तरि॑क्षाणि कोपयत्।स॒मी॒ची॒ने धि॒षणे॒ वि ष्क॑भायति॒ वृष्णः॑ पी॒त्वा मद॑ उ॒क्थानि॑ शंसति

girīṃrajrān rejamānāṃ adhārayad dyauḥ krandadantarikṣāṇi kopayat| samīcīne dhiṣaṇe vi ṣkabhāyati vṛṣṇaḥ pītvā mada ukthāni śaṃsati

हिन्दी अर्थ

( दिवे ) अका के लिये भर्थात् अन्धकार के हनन के लिये ( महः सूर्यः ) प्रकाशमय महा सूयं घारण किया हमा है ।. ५९०. नकिष्टे कमणा नश् यश्वकारं सदादषम् ।

English

Soma. Thou dost desire to drink, each day that passes, the pleasant food which thou hast had

अध्याय 20

श्लोक 94.9

इ॒मं बि॑भर्मि॒ सुकृ॑तं ते अङ्कु॒शं येना॑रु॒जासि॑ मघवं छफा॒रुजः॑ ।अ॒स्मिन्त्सु ते॒ सव॑ने अस्त्वो॒क्त्यं सु॒त इ॒ष्टौ म॑घवन् बो॒ध्याभ॑गः

imaṃ bibharmi sukṛtaṃ te aṅkuśaṃ yenārujāsi maghavaṃ chaphārujaḥ | asmintsu te savane astvoktyaṃ suta iṣṭau maghavan bodhyābhagaḥ

हिन्दी अर्थ

(कर्मणा) किसी भी कर्म द्वारा (नकिः) कोई भी नहीं . (तम्) उस परमेदवर की सदहिमा को ( नशत् ) प्राप्त कर सकता, (यः) जो परमेद्वर कि (सद।वृधम् ) से की सदा वृद्धि (चकार) करता हौ । ( विहवगूर्तम् ) यज्ञ-यागादि द्वारा, (नकिः नशत्) कोई नहीं पहुंच सकता 1. . ( यस्मिन् ) जिस परमेदवर के ( जायमाने ) प्रकट होते हृए+-

English

aforetime. O Indra, gratified in heart and spirit, drink eagerly the Soma set before thee.

अध्याय 20

श्लोक 94.10

गोभि॑ष्टरे॒माम॑तिं दु॒रेवां॒ यवे॑न॒ क्षुधं॑ पुरुहूत॒ विश्वा॑म्।व॒यं राज॑भिः प्रथ॒मा धना॑न्य॒स्माके॑न वृ॒जने॑ना जयेम

gobhiṣṭaremāmatiṃ durevāṃ yavena kṣudhaṃ puruhūta viśvām| vayaṃ rājabhiḥ prathamā dhanānyasmākena vṛjanenā jayema

हिन्दी अर्थ

उपासको को ( भ्रफाणयत् ) योगमागं में गधी निवा, ५ ( (षान ) सुगमता से योगयुक्त किरा, तथा ( उपयुक्तान् ) योगमा के समरपंक के लिये, (नेता) मागं प्रददोन करता है, वह ( उपमा ) उपमारूपं है, (यः) जो कि उपासक के ( तत् इत् ) उसी वत्तं

English

Of the libation-pouring priest. Approach, O Indra, hasting thee, Lord of Bay Horses, to the prayers:

अध्याय 20

श्लोक 94.11

बृह॒स्पति॑र्नः॒ परि॑ पातु प॒श्चादु॒तोत्त॑रस्मा॒दध॑रादघा॒योः ।इन्द्रः॑ पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नः॒ सखा॒ सखि॑भ्यो॒ वरि॑वः कृणोतु

bṛhaspatirnaḥ pari pātu paścādutottarasmādadharādaghāyoḥ | indraḥ purastāduta madhyato naḥ sakhā sakhibhyo varivaḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

(अमुच्यत) डा देता, ्रौर उसे मुक्त ५ देता ह। 1 विहीन 1 = चित्त की तं से 8 भरफाणयत् फणति गतिकर्मा ( निघ० २।१४ ) । तक्व = तक् द्विषः) सब प्रकार की दवेष-मावनाभो से ( अति प्तिकानत ८ । (" ग (उ) ५५ = का (भ्रति भोहते) बि तो । ) उसे बर छा देता ह । (कनीनः) कान्तिमान् ( परः ) परब्रह् (गिरा) वेदवाणियों के कथनानुसार, ( पच्यमानम् ०५४५ व रहे कर्म- मोगों को (भिनत्) छिन्न-भिन्न करदेताहै। । न ऋ कनीनः == कन् वीप्तिकान्तिगतिषु । भोदनम् = जैसे “भात का

English

Take pleasure in the juice we pour. Praise only mighty Indra when the juice is shed, and say your lauds repeatedly:

अध्याय 20

श्लोक 95.1

त्रिक॑द्रुकेषु महि॒षो यवा॑शिरं तुवि॒शुष्म॑स्तृ॒पत् सोम॑मपिब॒द् विष्णु॑ना सु॒तं यथाव॑शत्।स ईं॑ ममाद॒ महि॒ कर्म॒ कर्त॑वे म॒हामु॒रुं सैनं॑ सश्चद् दे॒वो दे॒वं स॒त्यमिन्द्रं॑ स॒त्य इन्दुः॑

trikadrukeṣu mahiṣo yavāśiraṃ tuviśuṣmastṛpat somamapibad viṣṇunā sutaṃ yathāvaśat| sa īṃ mamāda mahi karma kartave mahāmuruṃ sainaṃ saścad devo devaṃ satyamindraṃ satya induḥ

हिन्दी अर्थ

कामादि के.नाना वर्गों के उपस्थित हो जाने पर भी ( सासहिम् ) उनका लोकलोकान्तर मिलकर कर रहे है, (चेनवः) वेदवाणियां भी उसी परमेश्वर महापरिमाणी. (क्षामः) -पृथिवी भी उसी की स्तुत्तियां कर रहे है ।

English

Thou, newly-born, for strength didst drink the Soma; thy mother told thee of thy future greatness.

अध्याय 20

श्लोक 95.2

प्रो ष्व॑स्मै पुरोर॒थमिन्द्रा॑य शू॒षम॑र्चत ।अ॒भीके॑ चिदु लोक॒कृत् सं॒गे स॒मत्सु॑ वृत्र॒हास्माकं॑ बोधि चोदि॒ता नभ॑न्तामन्य॒केषां॑ ज्या॒का अधि॒ धन्व॑सु

pro ṣvasmai purorathamindrāya śūṣamarcata | abhīke cidu lokakṛt saṃge samatsu vṛtrahāsmākaṃ bodhi coditā nabhantāmanyakeṣāṃ jyākā adhi dhanvasu

हिन्दी अर्थ

(भरद्रिवः) है भविदीणं शक्ति्योवाले परमेश्वर ! (स्तोमाः) हमारे सम्बन्धी विरोधी जावनाभ्रो का (भव जहि) हनन कीजिये । है परमेद्वर ! ( राधसः) भ्रांराधना-विहीन (पणीन्) हमारी व्याव- हारिक-भावनाओों को (षदा) मानो पैर की ठोकर हारा भ्राप (नि बाधस्व) (स्वा) भ्राप का (अतिन) प्रतिरोध नदीं करं सकती ।

English

O Indra, thou hast filled mid-air’s wide region, and given the Gods by battle room and freedom.

अध्याय 20

श्लोक 95.3

त्वं सिन्धूं॒रवा॑सृजोऽध॒राचो॒ अह॒न्नहि॑म्।अ॒श॒त्रुरि॑न्द्र जज्ञिषे॒ विश्वं॑ पुष्यसि॒ वार्यं॒ तं त्वा॒ परि॑ ष्वजामहे॒ नभ॑न्तामन्य॒केषां॑ ज्या॒का अधि॒ धन्व॑सु

tvaṃ sindhūṃravāsṛjo'dharāco ahannahim| aśatrurindra jajñiṣe viśvaṃ puṣyasi vāryaṃ taṃ tvā pari ṣvajāmahe nabhantāmanyakeṣāṃ jyākā adhi dhanvasu

हिन्दी अर्थ

के (ईरिषे) अधीरवर है, (त्वम्) भ्राप ( भसुतानाम् ) न पदां कं ४ का २०. सू० ९३ अथवेवेद-माष्य . २३९ ( सहसः ) मानसिक साहस, तथा ( भोजसः ) भआ्राध्यात्मिक कोमल

English

When thou hast urged the arrogant to combat, proud in their strength of arm, we will subdue them.

अध्याय 20

श्लोक 95.4

वि षु विश्वा॒ अरा॑तयो॒ऽर्यो न॑शन्त नो॒ धियः॑ ।अस्ता॑सि॒ शत्र॑वे व॒धं यो न॑ इन्द्र॒ जिघां॑सति॒ या ते॑ रा॒तिर्द॒दिर्वसु॒ नभ॑न्तामन्य॒केषां॑ ज्या॒का अधि॒ धन्व॑सु

vi ṣu viśvā arātayo'ryo naśanta no dhiyaḥ | astāsi śatrave vadhaṃ yo na indra jighāṃsati yā te rātirdadirvasu nabhantāmanyakeṣāṃ jyākā adhi dhanvasu

हिन्दी अर्थ

(इन्र) है परमेश्वर ! आप ( वृत्रहा भसि ) पापों का हनन कर (भरकंम्) सूयं को विना बाहू के ही ( बिभर्षि ) धारण कर रहे ह, भौर समान सूयं को (शिशानः) ताप से तीखा कर रहै है । ६०१. स्वमिनद्राभिमूरंसि मिष्वा जातान्योजसा 1

English

Or, Indra, when thou fightest girt by heroes, we in the glorious fray with thee will conquer. I will declare the earliest deeds of Indra, and recent acts which

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।