Atharva Veda
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 12/13 · श्लोक 132.1–139.5

पूर्ण अध्याय पाठ79 श्लोक

अध्याय 20

श्लोक 132.1

खिलानि ।आदला॑बुक॒मेक॑कम्

khilāni | ādalābukamekakam

हिन्दी अर्थ

हम सब का पिताहै, रक्षक है । इसलिये रक्षक होने के कारण वहु हमारे रजस् तमस् को पीस डलेगा, ताकि - दुःखों से हमारी रक्षा हो सके । भरौर . मन्व ८७२ मेँ कुमारी का यह् भ्रभिप्राय है कि परमेदवर मातृरूप है । माता करुणामयी होती है, भरतः करुणामयी जगन्माता निज स्वाभाविकं करुणा प्रकट नहीं होनि देते । ते =भरनृते ८७३.. निगद्य कको दौ -निरायच्छमि मध्यमे । नतर कुमारि तत् तथा यथौ कुमारि मन्य॑से ॥६॥ (निरायच्छसि ) नियमन करना मानती है,- (कुमारि) है कुमारी ! (वै)

English

Whenever any good man’s son becometh bold and spirited, Then hath the wise Gandharva said this pleasant upward-point- ing word.

अध्याय 20

श्लोक 132.2

अला॑बुकं॒ निखा॑तकम्

alābukaṃ nikhātakam

हिन्दी अर्थ

मन्व मे कुमारी के दस विचार काभी निराकरणं कियागया है। समग्र सुक्त का भ्रमिप्राय यह है कि राजस ओौर तामस भावनाभ्रों कै निराकरण ददवरभ्रणिधान भ्रादि मुख्य साधन है । इनके परचात् ही उपासक ईदवरीय पाका पात्रं बनता है। भरतः रजसू-तमस् के परामवके लियेये दोनों ह--हदय । पुरुष की लोमवाली छांती के भीतर उस् का हदय होता है । इस हृदयरूपी हद के किनारे र्थात् छाती पर लोमरूपौ घास उगा रहता है । हृदय के मीतर “रक्त” मानो हृद काजल” है । मथवंवेद (१०।२।१ १) मेँ रक्त को “भाषः कहा है, भौर हृदय को “सिन्धु” 1 . . (भरालाक्) है कुटिल चालवालो ! (इह) इस पृथिवी मे (एत्थ ) मामो, जन्म लो। चाहे ( प्रार् ) पृथिवी के पूवंमाग में भराभो, चाहे

English

Kings’ fight, That was a guard for every man: for he is formed to stay disease.

अध्याय 20

श्लोक 132.3

क॒र्क॒रि॒को निखा॑तकः

karkariko nikhātakaḥ

हिन्दी अर्थ

माग में भारो; तुम भ्रपनी कुचालों को हटाने के लिये, ( उद् भरमत्संथ ) . तर्जेना किया करो, डंट-ढपट दिया करो 1 ्रभिम्राय यह है कि मनुष्य के चाल-चलनं पर पृथिवी के प्रदेशा मँ होते है । उन कुचल की निवृत्ति के लिये प्रत्येक को यतवान् होना चाहिय, भौर मनों भ प्रवल विरोधी-मावनार्भं को जागरित करना चाहिए ।

English

Easily conquering Maghavan, thou, Hero, bentest Raji down, Rentest asunder Rauhina, calvest in pieces Vritra’s head. Thou who didst separate the clouds and penetrate the water- floods,

अध्याय 20

श्लोक 132.4

तद्वात॒ उन्म॑थायति॒

tadvāta unmathāyati

हिन्दी अर्थ

६।४५।१ ) विद्ठेषतया विचार-योग्य है । यथा--“परोपेहि मनस्पाप किमशस्तानि शंससि । परेहि न त्वा कामये" । भर्थात् है मानसिक-पाप१ तर परं हट जा, तू क्यो भरभदस्त-विवार्यो की प्रशंसाः करता है1 परेहट जा, , तेरी कामना यै नहीं करंतां- इत्यादि 1. भ्ररालाक् =भरराल = ०५५1१०५, उदक्, भधराक् ) चाहे पृथिवी के पुर्वं आदि किसी भी प्रदेश मे, किसीभी समाग मे गायो, सरवर ( वत्साः ) कच्चे ( पुरषन्तः भ्रासते ) पुरुषं होकर , बच्चे उतमन्न होते है, इन पौर कमं का सम्बन्व किसी विशेष भुभागं क

English

To thee, great slayer of the foe, be glory, Indra, yea, to thee! They said to Auchchaihsravasa running as side-horse of the

अध्याय 20

श्लोक 132.5

कुला॑यं कृणवा॒दिति॑

kulāyaṃ kṛṇavāditi

हिन्दी अर्थ

८७९. इत्य ्रागपारुदगघराग्--्थारीपाको 1 सीते ॥६॥ (स्थालीपाकः) स्थालीपाक (विलीयते). अच्छी प्रकार पकाया.जाता है । . : स्थालीपाकः--च्ाने.के लिये थाली मे रखा पका. भोजन । तरैदिकः

English

Bays, Safely to victory, O Steed, bear Indra with the beauteous wreath. They yoke the white mares, on the Bay’s right harness Auchchai- hsravasa.

अध्याय 20

श्लोक 132.6

उ॒ग्रं व॑नि॒षदा॑ततम्

ugraṃ vaniṣadātatam

हिन्दी अर्थ

होना परत्यावदयके है । . यज्ञकर्म के लिये भी स्थालीपाकः पकाया; जाता है 1 -इस.से मन्त्र मे यज्ञकमो के करने का भी विधानं किया है । “विलीयते".का पिभा)०१9, .19।79 ०५५७ (जापटे) 1 अर्थात् गृहस्थ . को चाहिए किं दः" . आयु के नियत काल में स्थालीपाक भ्रादि क्रियाम का परित्याग कर, वनस्थ या संन्यास धारण कर, कन्दमूल फलो परं जीवन-निर्वाहि करे । .

English

He joyeth as he carrieth Indra the foremost of the Gods. 34. One of them is Hariknikā. Hariknikā, what seekest thou?

अध्याय 20

श्लोक 132.7

न व॑निष॒दना॑ततम्

na vaniṣadanātatam

हिन्दी अर्थ

उदक्, भरषराक्ो जाह एथिवी के प्रवं भादि किसी. मी. भूभाग भ जन्म लो । (सः) .वहे स्थालीपाक (वे) भिषग् से (पु). बहुंमातरा म सर्वत्र (लीयते) शरकाया जाता है स्थानीपाक, देखो मन्व ८७९।. . . , ऋ ५ न समाधि मेँ योगनिद्रा में "शयन" करना ( श्राः भारम्मसेही लाहणि = ला (भरादान, भप्त करना) +हणि हन् = हिसा, त्याग),

English

The excellent, the golden son: where now hast thou aban- doned him? 78. There where around those distant trees, three Sisus that are standing there, 910. Three adders, breathing angrily, are blowing loud the threatening horn.

अध्याय 20

श्लोक 132.8

क ए॑षां॒ कर्क॑री लिखत्

ka eṣāṃ karkarī likhat

हिन्दी अर्थ

से दी वेदो भ तेरे लिये यह मागं निदिष्ट है, अर्थात् गृहस्थकालः भे तथ भगृहस्य काल में तेरे लिये योग का विधान है । यथा-“पत्युरनुब्रता भूत्वा पद द्वारा पत्नी के लिये मोक्ष का विधान किया है ८८२. इत्य भागपागुदं गषरांग्--अदिली पुष्िकीयते । ६।। (आक्, भपाक्, उदक्, अषराक्) चाहे पृथिवी के धुवं .आदि किसी.भूमाग

English

Hither hath come a stallion: he is known by droppings on his way, 1314. As by their dung the course of kine. What wouldst thou in the home of men?

अध्याय 20

श्लोक 132.9

क ए॑षां दु॒न्दुभिं॑ हनत्

ka eṣāṃ dundubhiṃ hanat

हिन्दी अर्थ

दुन्दुभिमाइननाभ्यां जरितरोऽथांमो देव॥१॥ (मुग्.इति) जो भोगी है, वह (प्रभिगतः) भोगो की. भोर जाता है; .. (शल् इति). भोगो से जो भपना संवरण कर लेता है, भरपने प्रापको बचा लेता है वह (भ्रपक्रान्तः) भोगों से पीछे हंट जाता है. भोगों का परित्यागं

English

Barley and ripened rice I seek. On rice and barley hast thou fed, 1718. As the big serpent feeds on sheep. Cow’s hoof and horse’s tail hast thou, 1920. Winged with a falcon’s pinion is that harmless swelling of thy tongue.

अध्याय 20

श्लोक 132.10

यदी॒यं ह॑न॒त्कथं॑ हनत्

yadīyaṃ hanatkathaṃ hanat

हिन्दी अर्थ

. निचय से ( तत् ) वह तेरा कथन या मानना (न तथा ) तथ्य नहीं है, (यथा) जसे कि (कुमारि) है कुमारी ! (मन्यसे) तू मानती है । ॥ कणेकौ = किरणौ (कृ विक्षेपे), किरति विदिपतीति कर्णः (उणादि कोष ३। १०.) । मध्यमे जीवन का मध्यम मागं है-“त्यागपूर्वंक भोग" । ३४२ .. भ्रयववेद-माष्य. ( कुन्ताप-सूक्त) .का० २०। सू° १३३

English

The most unprofitable churl, the wealthy men who brings no. gift, These, verily, as we have heard, are cast away by all the wise.

अध्याय 20

श्लोक 132.11

दे॒वी ह॑न॒त्कुह॑नत्

devī hanatkuhanat

हिन्दी अर्थ

कवत्य-आप्ति । मध्यममागे.के लिये देखो-( योग १।३ ३.) । मध्यमे न व कूभारि तत् वथा यथां कुमारि मन्य॑से ॥४॥ न हे-कुमारी ! ( उत्तानायै ) पीठ पर केटी हई, ( शयानायै ) था नद्रावस्थाके रूप मे, (वा तिष्ठन्ती)या बंटी हई या खेड़ी हुई तु (भवगूहसि) चित्तवृत्तियों का निरोष करती है । (कुमारि ) है कुमारी (वं) निदचय से (तत्) तेरा वह कथने या मानना (न तथा ) तथ्य नहीं है, (यथा) जसे कि तू (कुमारि) है कुमारी ! (मन्यसे) मानती ह ।

English

But they who have adored the Gods, and they who have best- owed their gifts, Those liberal lords are filled with wealth like Sūrya risen up to heaven.

अध्याय 20

श्लोक 132.12

पर्या॑गारं॒ पुनः॑पुनः

paryāgāraṃ punaḥpunaḥ

हिन्दी अर्थ

योगश मँ चित्त की स्थिरता के सिये कई माग दरचाए है । उन तथा “यथाभिमतध्यान” को भी साघन माना है (योग १।३९) । कुमारी स्थिरता के लियेये साषन उपकारी तो हो सकते है, परन्तु राजसिक तथा नामिक वृत्तयो का पूणं निरोध तो .विना ध्यान भौर वैराग्य के

English

With unanointed eyes and limbs, wearing no gem or ring of gold. No priest, no Brāhman’s son is he: these things are ordered in the rules. With well-anointed limbs and eyes, wearing fair gem and golden, ring,

अध्याय 20

श्लोक 132.13

त्रीण्यु॒ष्ट्रस्य॒ नामा॑नि

trīṇyuṣṭrasya nāmāni

हिन्दी अर्थ

क “ध्यान की स्थिति सम्भव ह । इसलिये कुमारी का कथन टीक ८७१, श्टस्णायां इरिणकायां श्वाय गूदपि । नव कमारि तद् तथा यथां इमारि मन्य॑से ॥५॥ सुमारभावो को हौ ( भरवगहसि ) छिपाए रखती है । ( कुमारि ) कुमारी । (वै) निश्वेय से (तत्) वह तेरा कथन या मानना ( न तथा ) ७: (यथा) नैसेकितू ( कुमारि.) है कुमारी ! -मत्यसेः)

English

Good priest is he, the Brāhman’s son; these things are ordered in the rules. Pools with no place for drinking, and the wealthy man who. giveth naught,

अध्याय 20

श्लोक 132.14

हि॒र॒ण्य इत्येके॑ अब्रवीत्

hiraṇya ityeke abravīt

हिन्दी अर्थ

काञ २०। सू° १३३ अथवरत्रेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३४३. कुमारी पुनः परमेइवरोय-मातृशक्ति को युक्तिरूप मेँ उपस्थित केरती है । वह स्याल् करती है कि सांसारिक मातृशक्ति्मे, है परमेदवरीय मातृशक्ति तु ने सुकूमार-भावनाभ्रों का प्रदान किया है; जिनके ढारा उन

English

The pretty girl you may not touch, these things are ordered in: the rules. Pools with good drinking places, and the wealthy man who freely gives, The pretty girl who may be touched, these things are ordered in the rules.

अध्याय 20

श्लोक 132.15

द्वौ वा॑ ये शिशवः

dvau vā ye śiśavaḥ

हिन्दी अर्थ

का दयाद्र -हदय बच्चों के कष्ट-निवारण मे सदा तत्पर रहता है । है परमे- सवर ! श्राप मी जगन्माता ह, तब भ्रापका भी तो हृदय भरपनी सन्तानो के इलक्णिकां = अनुकम्पायां “कः”, ( अष्टा° ५।३।७६ ) । भनुकम्पा दवारा मातृ-दाक्ति की भ्रतिसुकृमारताकाद्योतनकियादहै। नवै मारि तत् तथा यथां कुमारि मन्यसे ॥६॥ इव) सुकुमारता जसौ भावना ( भ्रव भ्रंशत् ) परमेश्वर ने डाल रखी है । (कुमारिः है कूमारी ! (वं) निरचय से (तत्) -वह तेरा कथन (न तथा) तथ्य नहीं है, (यथा ) जैसे किं ( कुमारि) है कुमारी! (मन्यसे) तू

English

The favourite wife neglected, and the man who safely shuns the fight, A sluggish horse whom none may guide, these things are order- ed in the rules.

अध्याय 20

श्लोक 132.16

नील॑शिखण्ड॒वाह॑नः

nīlaśikhaṇḍavāhanaḥ

हिन्दी अर्थ

इव = मन्त्र मेँ उपमा दी गई है। माता कीं सुक्मार-मावना को उपमान मानकर, पिता की सुकूमार-मावना की उपमेय मानकर यहु दर्शाया दहै कि पिता कौं सुकूमार-मावना, म.ताकी सुकूमार-मावना की गया है । पिता की सुकुमार-मावना नियन्त्रण से मिशित-होती है, परन्तु माता की सुकुमार-भावना दया स्नेह भ्रौर त्याग से भिभधित रहती है । कुमारी का विचार है क्रि परमेदवर की "मातृशक्ति की सुकुमार-भावना की १. वेद मेँ परमेश्वर का-माता भौर पिता इनः दोर्नो रूप भ वर्णन हरा है ।

English

The favourite wife most dearly loved, the man who safely goes to war, The fleet steed who obeys the rein, these things are ordered in the rules. When, Indra, thou, as no man could, didst plunge into the Ten

अध्याय 20

श्लोक 133.1

खिलानि ।वित॑तौ किरणौ॒ द्वौ तावा॑ पिनष्टि॒ पूरु॑षः ।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

khilāni | vitatau kiraṇau dvau tāvā pinaṣṭi pūruṣaḥ | na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

कृर देता है; (फल् इति) भरौर जो जीवन के फल को प्राप्त करना बाहवा का० २०। सु° १३५ भथववेवेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) . . ३४७ (जरतः) है वेदो का स्तवन करनेवाले ! (दंव) देवाधिदेव परमेश्वर ! पटने के दण्डो दवारा हम पीटते है, भौर (गोयामः= भरा उथामः) प्रजां कां चत्थान करते हैँ । १ भ नि

English

Who carried off these stores of milk? Who took the dark cow’s milk away? 3, Who took away the white cow’s milk t Who took the black cow’s milk away?

अध्याय 20

श्लोक 133.2

मा॒तुष्टे कि॑रणौ॒ द्वौ निवृ॑त्तः॒ पुरु॑षानृते ।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

mātuṣṭe kiraṇau dvau nivṛttaḥ puruṣānṛte | na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

भरव॑रण डाल लेना, ताकि वे मोगीं के धिकार न बनसरके। यह भरावरणं भराग्यन्तरभ्रावरणदहै, जो करि मन पर डाला जाता है, यमःनियम, तप, स्वाध्याय भादि का भ्रावरण । ® हे .देवाधिदेव ! (मंन ५५३) ओप (उत्तमम् जनिम् ) उत्तमं निहित करते है, जसे कि (रजनि = रजन्याम् ) रारि के समय (कीदंबिले)

English

Question this man, Where do I ask? Where, whom that knoweth do I ask? 7, Not to the belly comes the grain. The patient ones are angry now. 9, Undecked with gems, and decked with gems: deity rivalling the Sun.

अध्याय 20

श्लोक 133.3

निगृ॑ह्य॒ कर्ण॑कौ॒ द्वौ निरा॑यच्छसि॒ मध्य॑मे ।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

nigṛhya karṇakau dvau nirāyacchasi madhyame | na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

खजजाने के पेट मे ग्रन्थेः ) धन की धेली को ( धानम् ) निधिरूपमे बहो म्र चित्तो ®ो एेसीं सुल मता के साथ निहित कर तेते है, जेसे.किं चलने के. लिये व्यक्ति.(.प्ावम् ) अपने पैर को ( उपानहि ) जूती मे. भासानी से ८८५. अलाूनि पुषात॑कान्यचत्यपठाष् ।: = - . ... (जलानि) जैसे तुम्बे नदी से पार करते है, वैसे है परमेषवर ! .

English

Dapple, Harinikā, and Bay ran forward to the liberal gifts. 13, When the horn’s blast hath sounded forth let not our friend discover thee.

अध्याय 20

श्लोक 133.4

उ॒त्ता॒नायै॒ शया॒नायै॒ तिष्ठ॑न्ती॒ वाव॑ गूहसि ।न वै॑ कमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

uttānāyai śayānāyai tiṣṭhantī vāva gūhasi | na vai kamāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

भ्रोपं मवसागडसे पार.कररते है.। ( प्रष्रातकरानि ) जसे. वायु वर्षा-जल- विन्दु दवारो पृथिवी. को सींचती है, बरसे भाष, भरानम्दरस की. बर मर ह -सींच रहे ह ।. ( भश्कृत्थ पलाशम् ) कालरूपी . भवः पर. पररमेदबरं डे भथववेद-माष्य (कुन्ताप-सुक्त) का० २० ।.सु० १३५ ( पिपीलिकावटक्वसः) वह॒ चीटियोँ के बिर्लो मेँ भी प्राणवायु पहुंबाता है ।

English

Hither to the cow’s son they come. Libation hath rejoiced the God. 311 17, Then cried they. Here he is, and, Here; again the cry was,

अध्याय 20

श्लोक 133.5

श्लक्ष्णा॑यां॒ श्लक्ष्णि॑कायां॒ श्लक्ष्ण॑मे॒वाव॒ गूहसि ।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

ślakṣṇāyāṃ ślakṣṇikāyāṃ ślakṣṇamevāva gūhasi | na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

वहं जङ् ह, मूल कारण है । (जरितः) है वेदों का स्तवन करनेवाले ! (हैव). अलाद्रनिं (द ०- मन्त. ०५५; ८५६) पृषातकानि पृषत न्त्पुषु सेचने=जलविन्दु, तथा “पुष्यो मरतोम्ः' ( निव० १११५ ) । दकः = भवत्य भर्व (काल्), यथा--“कालो सह्यो भवति" (भधवं ° १९।६३१

English

Here is he. 19, Then not defective be our steeds! A splinter so diminutive!

अध्याय 20

श्लोक 133.6

अव॑श्लक्ष्ण॒मिव॑ भ्रंशद॒न्तर्लोममति॑ ह्र॒दे।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

avaślakṣṇamiva bhraṃśadantarlomamati hrade| na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

१) +-स्थ । पलाशम् =पल1-भर् ( भोजने ).1. इसीलिये परमेरवर को यौ=-इन्धिया भूमि भादि (उणादि कोषः २।६४) । ¦ ८८दे. वीमे देवा अंकस॒ताध्वयो धिर प्रचर । ससत्यंमिद् गवामस्यिं प्रसुदासिं ॥४।

English

Varuna with the Vasus goes: the Wind-God hath a hundred reins. 5, A hundred golden steeds hath he, a hundred chariots wrought of gold. 7, A hundred bits of golden bronze, a hundred golden necklaces.

अध्याय 20

श्लोक 134.1

खिलानि ।इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धरा॒ग् – अरा॑ला॒गुद॑भर्त्सथ

khilāni | ihettha prāgapāgudagadharāg – arālāgudabhartsatha

हिन्दी अर्थ

(इमे) ये (देवाः) सूयं चन्दर पुथिवी रादि दिव्य लोक-लोकान्तर, विशिष्ट क्रीडा लीलाकररहेरै। सुदं क्रीडायाम् । . ८८७. पत्नी यरइपते पत्नी यक््यमाणा अरितिरोऽथाम हैव । हेता विभ्टीमेन जरित्रोऽथामो हैव ॥५॥ , (जरितः ) है वेदों का स्तवन करनेवाले !, ( हैव ) है देवाधिदेव विवराहे-खंस्कार द्वारा सत्कृत हो रही होती है, ( भ्रा उषामः ) तव हमारा कां० २० ु° १३५ : भरथवेवेद-माष्य ( कुन्ताप-सूक्त) ३४६

English

Lover of Kusa grass, Unploughed! Fat is not reckoned in the hoof. 11, The ladle doth not hold apart the entrails and the clotted blood.

अध्याय 20

श्लोक 134.2

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – व॒त्साः पुरु॑षन्त आसते

ihettha prāgapāgudagadharāg – vatsāḥ puruṣanta āsate

हिन्दी अर्थ

( देव ) है देवाधिदेव्र परमेश्वर !. जब कि ( होता ) विवोह-संस्कारमें पत्नी को स्वीकार कर लेता है, तंमी ( भ्रोथामः = भ्रा उथामः हमारा. . उत्थान होता है, हमारी समून्नति होती है, ।

English

This O Mandūrikā, is mine. Thy trees are standing in a clum , The plain domestic sacrifice, the sacrifice with burning dung. 17, Asvattha, Dhava, Khadira, leaf taken from the Aratu.

अध्याय 20

श्लोक 134.3

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – स्थाली॑पाको॒ वि ली॑यते

ihettha prāgapāgudagadharāg – sthālīpāko vi līyate

हिन्दी अर्थ

संयोगे (अष्टा ०.४।१।१३३)। होता =हु.दाने, भराहुतियां देनेवाला । विष्टी- करनेवाली होगी । पति के. साथ मिलकर विवाह-संस्कार में यज्ञ क्रेशौ निषचंय से ( ताम् ) उस दक्षिणा को (जरितः) है वेदोपदेष्टा परमेष्वेर / प्रशिक्षणं भौर दिष्य के संरक्षणकेरूपमे। -

English

The man pervaded thoroughly lies on the ground as he were slain. 21, The biestings only have they milked: one-and-a half of the wild ass,

अध्याय 20

श्लोक 134.4

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – स वै॑ पृ॒थु ली॑यते

ihettha prāgapāgudagadharāg – sa vai pṛthu līyate

हिन्दी अर्थ

( जरितः.) है वेदोषदेष्ठा परमेद्वर ! जसे ( नः.) हिम् िष्यो की. है, बे (जरितः) है वेदोपदेष्टाः! ( ह उ ) -निरुबय से मः ताम् ) हम नहीं हो सकते, वैसे. ही (यज्ञानेतरसम्) उपासना भ्रादि यन्नो के विना (न. पुरोयवासः) हम् अध्यात्ममागं भे भागे नहीं बढ़ सक्रते ।

English

And two hides of an elephant. 1, Then too the single bottle-gourd, the bottle-gourd dug from the earth, 3, The lute dug up from out the ground: this the wind stirs and agitates.

अध्याय 20

श्लोक 134.5

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – आष्टे॑ लाहणि॒ लीशा॑थी

ihettha prāgapāgudagadharāg – āṣṭe lāhaṇi līśāthī

हिन्दी अर्थ

३५० भयरववेद-माष्य ( कन्ताप-सुक्त) का० २० । चु° १३५ (उत) तथा (षवेतः) शुभ करमोवाला ओर शुभ्र सात्विक वृत्तिर्योवाला करता है, (उत उ) गौर (पद्याभिः) पदयमयी-ऋचामो दवारा, उनके श्रवण- मनन द्वारा (यविष्ठः) योगमागे मे अति वेग प्राप्त कर लेता है । ( उतं ) भौर (भाष) शीघ्र. (ईम् मानम्) योगी होने के इस मान को, सत्कार कौ (वसवः) भ्रौर वसु ब्रह्मचारी भी (ते) है योगिन् ! तेरी ( इदं राघः ) इस योग-सम्पत्ति कां (भनु) अनुकरण करने लगते है । (भङ्किरः) है प्राणायामा-

English

Let him prepare a nest, they say: he shall obtain it strong and stretched. 7, He shall not gain it unspread out. Who among these will touch the lute?

अध्याय 20

श्लोक 134.6

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – अक्ष्लि॑ली॒ पुच्छिली॑यते

ihettha prāgapāgudagadharāg – akṣlilī pucchilīyate

हिन्दी अर्थ

(विसु) विभूतियों से सम्पन्न है, (प्रमु) तथा प्रमुता देनेवाली है । (दं राधः) यहः योग-सम्पत्ति जहत् ) वृदधिकारक भोर ५६१ महाविस्तारी है । ८९९. देवा ददतां तद् बं अस्तु सुचैतनग् 1: , ष्मा अस्तु दिवेदिवे प्येवं शमायत ॥१०॥

English

Who among these will beat the drum? How, if he beat it, will he beat? 11, Where beating will the Goddess beat again again about the house? 13, Three are the names the camel bears, Golden is one of them, he said.

अध्याय 20

श्लोक 135.1

खिलानि ।भुगि॑त्य॒भिग॑तः॒ शलि॑त्य॒पक्रा॑न्तः॒ फलि॑त्य॒भिष्ठि॑तः ।दु॒न्दुभि॑माहनना॒भ्यां जरितरोथा॑मो दै॒व

khilāni | bhugityabhigataḥ śalityapakrāntaḥ phalityabhiṣṭhitaḥ | dundubhimāhananābhyāṃ jaritarothāmo daiva

हिन्दी अर्थ

(वः) नहं योगमागं भँ (सुचेतनम्) सुचेत करनेवाला (रसु ) हो । बह सहित कायं नदीं होते, भरात् दिनौ के. कारोः के.होतेः शान-सम्यन्धी कायं होते है। काऽ २०1 सू० १३५ भथवेवेद-माष्य ( कुन्ताप-सृक्त) ३५१ करते रहो । आसुरम् =असु = (प्राण); भ्रसु = (ज्ञा; निध° ३।९) । क न

English

Glory and power, these are two. He with black tufts of hair shall strike. The Enigmatical Verses

अध्याय 20

श्लोक 135.2

को॒श॒बिले॑ रजनि॒ ग्रन्थे॑र्धा॒नमु॒पानहि॑ पा॒दम्।उत्त॑मां॒ जनि॑मां ज॒न्यानुत्त॑मां जनी॒न्वर्त्म॑न्यात्

kośabile rajani grantherdhānamupānahi pādam| uttamāṃ janimāṃ janyānuttamāṃ janīnvartmanyāt

हिन्दी अर्थ

सांसारिक खान-पान की (प्रह) ही (गा प्रशंसति) पूणंतया प्रशंसा करता, भौर (अनिराम्) सांसारिक खान-पान से विपरीतं भराध्यात्मिक-ततत्वो का , (भरप सेषति) निराकरण करता रहता है । (निघ०.२।७) ; इदा उदक (उणादि कोष व वा कोष २।२९)। भन्न, ंल, मच प्रादि सारि) ॥ । ब ज (यत् ) जो कोई ( हृषु ) नाट नौर ( स्यूलम् ) मोटा दष, ( ४ ) पापकर्मसे विमुख ( भ्स्याः ) इस ए अ ।

English

Here east and west and north and south adheres when touched. That water-drop. Here east and west and north and south in iron mayst thou not be caught. The cup.

अध्याय 20

श्लोक 135.3

अला॑बूनि पृ॒षात॑का॒न्यश्व॑त्थ॒पला॑शम्।पिपी॑लिका॒वट॒श्वसो॑ वि॒द्युत्स्वाप॑र्णश॒फो गोश॒फो जरित॒रोऽथामो॑ दै॒व

alābūni pṛṣātakānyaśvatthapalāśam| pipīlikāvaṭaśvaso vidyutsvāparṇaśapho gośapho jaritaro'thāmo daiva

हिन्दी अर्थ

५ उपातसत् विना करने को उदयत होता है, तो यह शरकेला ही क्या. ‰ से (एजतः) कांप जाते है, ( इव ) जैसे कि ( गोशफं ) गौ के खुर जितने गढ़ भे-पङ़ जल मै (शकुनौ ) दो मछलियां कांपतीं भोर तद़फती रहती है । भहभेद्याः- पापकर्म से जो अपने भाप को छिन्-भिन्नं हई मानती. काऽ ए ॥ सुर १३६ अथर्वैवेद-माष्य (कुन्ताप-सुक्त) ३५३.

English

Here east and west and north and south fain would it clasp what would not clasp. Emmet hole.

अध्याय 20

श्लोक 135.4

वीमे दे॒वा अ॑क्रंस॒ताध्व॒र्यो क्षि॒प्रं प्र॒चर॑ ।सु॒स॒त्यमिद्गवा॑म॒स्यसि॑ प्रखु॒दसि॑

vīme devā akraṃsatādhvaryo kṣipraṃ pracara | susatyamidgavāmasyasi prakhudasi

हिन्दी अर्थ

(उपावधीत्) लगमगं हनन कर देती है, तब ( अस्याः ) इस कमारी केवे अनः मनुष्याः (निघ० २।३)। . ८९८. -यदरिङा स्वण्पि्धा ककैनधकेव् प्ते । . बासंन्तिकामैव तेजने यन्त्य॒बाताय बित्य॑ति ॥६॥

English

Verses called Frustration, Abuse, the Gods’ Offering, and Dazzling Power 312 Bang! here he is. A dog,

अध्याय 20

श्लोक 135.5

प॒त्नी यदृ॑श्यते प॒त्नी यक्ष्य॑माणा जरित॒रोऽथामो॑ दै॒व।हो॒ता वि॑ष्टीमे॒न ज॑रित॒रोऽथामो॑ दै॒व

patnī yadṛśyate patnī yakṣyamāṇā jaritaro'thāmo daiva| hotā viṣṭīmena jaritaro'thāmo daiva

हिन्दी अर्थ

भ्रायुवाली हो,-( ककंन्धूका == ककंन्धूकानि. ) वह. पके.मीठे बेरो के सदृश मधुर स्वभाववाली होती हई भी,--बलात्कार की चेष्टा होने पर ( भरव उस समय, (वासन्तिकम्) वसन्तकाल के (तेजनम् इव ) तेज सथं के सदृश तेज धारण कंरलेती है। गौर तब बलात्कारी पर्ष (अवाताय यन्ति) निष्प्राण हो जाने.की भोर पग बढ़ा रहेहोतेर्है। कक न्धूक--यदरीफल ( उणादि कोष १।९३ . वैदिक यन्तालंय, भ्रवाताय =भ्रथवा राजनियमानुसार वे वायुरहितं कारागार मे जते ह । ८९९. यदू देवासो रुकामगुं प्रविष्टीमिनमाबिषु;ः ।

English

Swish! it is gone. Falling of leaves. Crunch! it is trodden on. A cow’s hoof.

अध्याय 20

श्लोक 135.6

आदि॑त्या ह जरितरङ्गि॑रोभ्यो॒ दक्षि॑णाम॒नय॑न्।तां ह॑ जरितः॒ प्रत्या॑यं॒स्तामु ह॑ जरितः॒ प्रत्या॑यन्

ādityā ha jaritaraṅgirobhyo dakṣiṇāmanayan| tāṃ ha jaritaḥ pratyāyaṃstāmu ha jaritaḥ pratyāyan

हिन्दी अर्थ

३४ भववेद-मषय (कताप-ूकत) का० २०। दू १३६ करते है, तब (नारी) विवाहिता स्त्री ( सकला ) कूलवाली हो गई है . एसा (देदिर्यते) निदिष्ट कर दिया जाता है" यह रेसी सच्चाई है (यथा)

English

These Gods have gone astray. Do thou, Adhvaryu, quickly do thy work. There is good resting for the cows. Take thy delight. O singer, the Ādityas brought rich guerdon to the Angirases.

अध्याय 20

श्लोक 135.7

तां ह॑ जरितर्नः॒ प्रत्य॑गृभ्णं॒स्तामु ह॑ जरितर्नः॒ प्रत्य॑गृभ्णः ।अहा॑नेतरसं न॒ वि चे॒तना॑नि य॒ज्ञानेत॑रसं न॒ पुरो॒गवा॑मः

tāṃ ha jaritarnaḥ pratyagṛbhṇaṃstāmu ha jaritarnaḥ pratyagṛbhṇaḥ | ahānetarasaṃ na vi cetanāni yajñānetarasaṃ na purogavāmaḥ

हिन्दी अर्थ

छर्वितकाननां स्व॑चमदीकं सक्तु पदयम ।।५॥ म सन्दीप्त रहती है, गौर ( मा) मुक पति कै प्रति, ( उ निद्चय से भरस्थान मे, जहां कि. उसे नहीं जाना चाहिए. वहां, चली जाती है । वह भौर अपनी शक्तियों को खाती रहती है, कमजोर करती जाती है,(भ्रचाकम्)

English

Singer, they went not near to it. Singer, they did not take the gift. Singer, they went not near to that; but, singer, they accepted this:

अध्याय 20

श्लोक 135.8

उ॒त श्वेत॒ आशु॑पत्वा उ॒तो पद्या॑भि॒र्यवि॑ष्ठः ।उ॒तेमाशु॒ मानं॑ पिपर्ति

uta śveta āśupatvā uto padyābhiryaviṣṭhaḥ | utemāśu mānaṃ piparti

हिन्दी अर्थ

हठो मे लगी रहती है, चिपकी रहती है । ९०६१. महानग्नयुहललमतिकरामंनतयनवीत् । (महानग्नी ) महा-भपटिता महामूर्खा सत्री, (उलूखलम् ) ऊव के

English

That days may not be indistinct, nor sacrifices leaderless. And quickly Both he fly away, the White Horse swiftest on his feet, And swiftly fills his measure up.

अध्याय 20

श्लोक 135.9

आदि॑त्या रु॒द्रा वस॑व॒स्त्वेनु॑ त इ॒दं राधः॒ प्रति॑ गृभ्णीह्यङ्गिरः ।इ॒दं राधो॑ वि॒भु प्रभु॑ इ॒दं राधो॑ बृ॒हत्पृथु॑

ādityā rudrā vasavastvenu ta idaṃ rādhaḥ prati gṛbhṇīhyaṅgiraḥ | idaṃ rādho vibhu prabhu idaṃ rādho bṛhatpṛthu

हिन्दी अर्थ

हे लकड़ी के बने ऊखल. ! (यथा) -जैसे (तव) तेरी, (निरघ्नन्ति) मुसली द्वारा निरन्तर पिटाई करते ह, (तथव इति) वैसी ही पिटाई मुफपरमभी का० २०। सू १३६ श्रथवंवेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३५५ . : महानग्नी ) महा-भपठिता स्त्री ( उपब्रूते ) .उखल के समीप जाकर कहती है कि है ऊखल !. ( अथापि ) बार-बार पीटा जाकर तू बने ऊखल ! (यथेव) जेसी ही (ते) तेरो ( पिषप्पति ) गति हो रही दहै, (तथव इति) वैसी ही गतिमेरी भी होती जांःरहीहै।

English

Ādityas, Rudras, Vasus, all pay worship unto thee. Accept this liberal gift, O Angiras, This bounty excellent and rich, this ample bounty spreading far.

अध्याय 20

श्लोक 135.10

देवा॑ दद॒त्वासु॑रं॒ तद्वो॑ अस्तु॒ सुचे॑तनम्।युष्मां॑ अस्तु॒ दिवे॑दिवे प्र॒त्येव॑ गृभायत्

devā dadatvāsuraṃ tadvo astu sucetanam| yuṣmāṃ astu divedive pratyeva gṛbhāyat

हिन्दी अर्थ

बिप॑य सुवते वैसुबतिं दुरभवसे बंद ॥११।॥ , अवंराविदया के गुरुभ्रों से, (दामंरिणा) सुखदायी मागं द्वारा हमे . (हव्यम्) पहले श्रवण-भनभ से रहित था, परन्तु जो भरव ( विप्राय ) मेधावी बनकर ( स्तुवते ) भर्पेकी स्मुतियां करने लगा है, उसके लिये भी ( वसुवनिम्

English

Two rays of light are lengthened out, and the man gently touches them with the two beatings on the drum. Maiden, it truly is not so as thou, O maiden, fanciest.

अध्याय 20

श्लोक 135.11

त्वमि॑न्द्र श॒र्मरि॑णा ह॒व्यं पारा॑वतेभ्यः ।विप्रा॑य स्तुव॒ते व॑सु॒वनिं॑ दुरश्रव॒से व॑ह

tvamindra śarmariṇā havyaṃ pārāvatebhyaḥ | viprāya stuvate vasuvaniṃ duraśravase vaha

हिन्दी अर्थ

शमंरिणा =र्मरिणा+-भ्रा +-वह । श्मरिणा से “भरा” का छेद होकर “वह्” के साथ भ्रन्वित होता है । हए, (वञ्चते) भौर सव॑ विचरते हृए यायावर, (अस्मै) इस. धन्यासी .के भ्रारष्य चावल, (च) भौर (पक्वं षीलु) पके पीलु फलं, भौर (वाः) जल . (बः) बहत माता मँ (कृणोः) कर दिया है ।. -

English

Two are thy mother’s rays of light: the skin is guarded from the man. The Ajijnasenya Verses

अध्याय 20

श्लोक 135.12

त्वमि॑न्द्र क॒पोता॑य च्छिन्नप॒क्षाय॒ वञ्च॑ते ।श्यामा॑कं प॒क्वं पीलु॑ च॒ वार॑स्मा॒ अकृ॑णोर्ब॒हुः

tvamindra kapotāya cchinnapakṣāya vañcate | śyāmākaṃ pakvaṃ pīlu ca vārasmā akṛṇorbahuḥ

हिन्दी अर्थ

“भवसागर सेः पारः करनेवाले" ““परवतेम्यः"" भवत सदु कूप सदृक्ष गम्भीर गर ३१२ .. ,. भरयववेद-माष्य (कुन्ताप-सूकत) का० २० सू १३६ „. , जसे बैतसीवृत्ति भरौर वकवृत्ति भादि वृत्तियां है, वसे ही कोतवृत्त

English

Here are we sitting east and west and north and south, with waters. Bottle-gourd vessels. Here east and west and north and south sit the calves sprinkling Curds and oil.

अध्याय 20

श्लोक 135.13

अ॒रं॒ग॒रो वा॑वदीति त्रे॒धा ब॒द्धो व॑र॒त्रया॑ ।इरा॑मह॒ प्रशं॑स॒त्यनि॑रा॒मप॑ सेधति

araṃgaro vāvadīti tredhā baddho varatrayā | irāmaha praśaṃsatyanirāmapa sedhati

हिन्दी अर्थ

भी है, जिस का भाश्नय संन्यासियां को लेना चाहिए । वतमान समय मेँ “कपोतः शान्तिसुचक माना जाता है । ष + करामह पर्चसत्यनिरामप॑ं सेधति ॥१३॥ परन्तु संसारी मनुष्य, (भरगरः) जो कि सांसारिक-भोगों „ के विषों दुःखो मे या स्थूल सूक्ष्मं भौर कारण शरीरो मे (वदः ) .बन्धा हुमा है, वहू (वावदीति) सांसारिक-मोगों की ही बार-बार चर्चा करता है, तथा (इराम्)

English

Here east and west and north and south the offering of rice clings on. The leaf of the Asvattha tree.

अध्याय 20

श्लोक 136.1

खिलानि ।यद॑स्या अंहु॒भेद्याः॑ कृ॒धु स्थू॒लमु॒पात॑सत्।मु॒ष्काविद॑स्या एज॒तो गो॑श॒फे श॑कु॒लावि॑व

khilāni | yadasyā aṃhubhedyāḥ kṛdhu sthūlamupātasat| muṣkāvidasyā ejato gośaphe śakulāviva

हिन्दी अर्थ

जाकर. कहती है कि है ऊखल । ,-(-यथा ) जसे ( वयः ) पणं भ्रायु को जला दिया जाता है, - वैस ही (अथ पि) बार-बार कूटा-पीटा जाकरतू व्यक्ति का स्वर्गेवास हो गया है।

English

The Gods shall give the precious boon: let it be pleasant to your hearts. Let it be with you every day: accept our offerings in return. Vouchsafe us shelter, Indra, thou to be invoked from far away.

अध्याय 20

श्लोक 136.2

यदा॑ स्थू॒लेन॒ पस॑साणौ मु॒ष्का उपा॑वधीत्।विष्व॑ञ्चा व॒स्या वर्ध॑तः॒ सिक॑तास्वेव॒ गर्द॑भौ

yadā sthūlena pasasāṇau muṣkā upāvadhīt| viṣvañcā vasyā vardhataḥ sikatāsveva gardabhau

हिन्दी अर्थ

पति भी पत्नी का उद्धार उसके कष्टों में अवदय किया करे । श्र .कायुकीस्ती केदुगुणो का वर्णेन भा है। शुदम् =भागु+द १ शिरिम्बिटिः; २ बधः; ३ वामदेवः;.४-६ ययातिः; ७-११ तिरश्च

English

permolit). Arnica eum alloquitur: Tum etiam tu defecisti. Ut tua. Arbor! (verbera) Pinsunt, sic etiam nunc (me permole).

अध्याय 20

श्लोक 136.3

यदल्पि॑का॒स्वऽल्पिका॒ कर्क॑धू॒केव॒षद्य॑ते ।वास॑न्ति॒कमि॑व॒ तेज॑नं॒ यन्त्य॒वाता॑य॒ वित्प॑ति

yadalpikāsva'lpikā karkadhūkevaṣadyate | vāsantikamiva tejanaṃ yantyavātāya vitpati

हिन्दी अर्थ

देवाः; ३ दधिक्राः; ४-६ पवमानः सोमः; ७-१४ इनदरः तथा पवमानः सोमः 1 ९१९. यद्ध पराचीरजगन्तनोरो मण्डूरषाणिकीः । - (मण्डूरधाणिकीः) खनिज-लोहे की निधियां अर्थात् खाने, (यत् इ जोकि ˆ व ) पृथिवी की छाती मे, (प्राचीः ) । पूवं ध ह, भौर वे (स्वे) सव शत्रु (बुद्बुदयाशवः) पानी कै बुलबुलों के सदृश शीघ्र

English

Arnica eum alloquitur: Tum etiam tu defceisti. Ut silvae ignis. inflammatur, sic ardent mea membra.

अध्याय 20

श्लोक 136.4

यद्दे॒वासो॑ ललामगुं॒ प्रवि॑ष्टी॒मिन॑माविषुः ।स॒कु॒ला दे॑दिश्यते॒ नारी॑ स॒त्यस्या॑क्षि॒भुवो॑ यथा

yaddevāso lalāmaguṃ praviṣṭīminamāviṣuḥ | sakulā dediśyate nārī satyasyākṣibhuvo yathā

हिन्दी अर्थ

गृहस्थ कै-कणष्टों को दर करताः है । (महतः) गृहस्थ मे बड़ेकोही.( साधु) सूयं उदित होता रहता है । उत्तरायणे भौर दक्षिणायन तक फली भू-पेदी मे खनिज-लोहे की खाने प्रायः होती ह यह अभिप्राय यहां -प्रतीत. होता है । उरी = उरस् = उरांस; भर्थात् खनिज-लोहे की खाने न तो बहुत गहरी होती है श्रौरन पृथिवी के बाहरी स्तरे, भ्रपितु पृथिवीकी छातीरमे होती है । बुद्बुदयाद्वः बुद्बुद +-या-+ बाचु । . (कपृन्नरः) सुखो की पूत्ति करनेवाले है राष्टूनेताभो ! ( कपुथम् ).

English

Arnica eum alloquitur: Fauste infixus est penis; arboris fructu celeriter fruamur. Arnica cum fuste gallum circumcurrit. Nos nescimus quae bestia pudendum muliebre in capite gerat.

अध्याय 20

श्लोक 136.5

म॒हा॒न॒ग्न्यतृप्नद्वि॒ मोक्र॑द॒दस्था॑नासरन्।शक्ति॑का॒नना स्व॑च॒मश॑कं सक्तु॒ पद्य॑म

mahānagnyatṛpnadvi mokradadasthānāsaran| śaktikānanā svacamaśakaṃ saktu padyama

हिन्दी अर्थ

ऊ चे सिंहासन पर बिठाश्रो, (चोदयंत) भौर उसे राष्टर-रक्षा के लिये प्रेरित करो 1 (वाजसातये) राष्ट्रिय बल की प्राप्तिं के लिये ( खुदत ) खानों को उन्नति में कोई बाधा उपस्थित हो जाय, तब ( इह ) इस निमित्त (सोभ- रथं कोई निदिचत नहीं, प्रकरणानुसार भ्रथं “खोदना” प्रतीत्न होता है

English

Arnica post currentem amatorem currit: Has ejus boves custodi tu. Me futue: coctam oryzam ede.

अध्याय 20

श्लोक 136.6

म॒हा॒न॒ग्न्युलूखलमति॒क्राम॑न्त्यब्रवीत्।यथा॒ तव॑ वनस्पते॒ निर॑घ्नन्ति॒ तथै॑वति

mahānagnyulūkhalamatikrāmantyabravīt| yathā tava vanaspate niraghnanti tathaivati

हिन्दी अर्थ

को (जिष्णोः) जीत्तकर स्वाधिकार में करनेवाले, ( वाजिनः ) बलक्षाली भाषण तथा प्रियभाषण की रिक्षा देकर (नः) हमारे ( मुखा ) मुखो को , (खरम) सुरभित भर्थात् सुवासित (करत्). करे, भरौर (नः) हमारी(भायू षि) -भआयुग्रों करो (प्र तारिषत्) बढाए । तदथं परमेदवर की भक्तिपूंक उपासना करनी चाहिए, ताकि - भानुष-

English

Fortunatus, Arnica, te opprimit. Bona est magni viri fututio, Macrum pinguis. femina obtineat. Futue me, etc. Sine digito mulcta vacca vanankaram producit, Magna et bona est Aegle Marmelos. Futue

अध्याय 20

श्लोक 136.7

म॒हा॒न॒ग्न्युप॑ ब्रूते भ्र॒ष्टोथाप्य॑भूभुवः ।यथै॒व ते॑ वनस्पते॒ पिप्प॑ति॒ तथै॑वति

mahānagnyupa brūte bhraṣṭothāpyabhūbhuvaḥ | yathaiva te vanaspate pippati tathaivati

हिन्दी अर्थ

९१६. शन्दुरिनदरांय पवत॒ इतिं देवासो अनुबन् । मानो हैनिकं गतियां कर रहा. है, (इति) यह तथ्य, (देवासः) दिव्य व्यक्ति काऽ २०। सू १३७ अथवेवेद-माष्य ३६१ म्राध्यात्मिक-विभूति्यो का (पतिः) पति है" ओर ( दिवेदिवे ) दिन-प्रति-

English

me, etc. Infelix, Amice, te opprimit. Bona est magni viri fututio. Flava puollula, opere suo perfecto,

अध्याय 20

श्लोक 136.8

म॒हा॒न॒ग्न्युप॑ ब्रूते भ्र॒ष्टोथाप्य॑भूभुवः ।यथा॑ वयो॒ विदाह्य॑ स्व॒र्गे न॒मवद॑ह्यते

mahānagnyupa brūte bhraṣṭothāpyabhūbhuvaḥ | yathā vayo vidāhya svarge namavadahyate

हिन्दी अर्थ

(कृष्णः) काला तमोगुण, (दरभिः सहल : ) हेजारों काले कर्मो के हई, दूध को स्वानुरूप कर देती है । तब ( धमन्तम् ) भपने काले कर्मौँ के साथ साप-सदृश फूकारते हए (तम्) उस काले तमोगुण को, ( इन्द्रः ) हिस चित्तवुत्ति्यो को, (भप भ्रवत्त) दुर कर देता है ।

English

procurrit. Magna certe et bona est Aegle Marmelos. Bona est magna

अध्याय 20

श्लोक 136.9

म॒हा॒न॒ग्न्युप॑ ब्रूते स्वसा॒वेशि॑तं॒ पसः॑ ।इ॒त्थं फल॑स्य॒ वृक्ष॑स्य॒ शूर्पे॑ शूर्पं॒ भजे॑महि

mahānagnyupa brūte svasāveśitaṃ pasaḥ | itthaṃ phalasya vṛkṣasya śūrpe śūrpaṃ bhajemahi

हिन्दी अर्थ

८०४) 1 स्नेहितीः न्=स्मेहति वधकर्मा (निष० २।१९) । . , ३६२ „ भथवंवेद-भाष्य - का० २० । सु० १३७ वतमान काले तमोगुण को, (अपदयम्) जै परमेदवर ने देख लिया है, जो हों गया है । (वृषणः)हे भक्तिरस की वर्षा करनेवाले शक्तिशाली उपासको!

English

Ficus Glomerata. Magnus vir ubique opprimit. Bona est magni viri fututio. Quem macrum factum puella flava pinguisque capiat sicut pollicem ex olei cado fossorem

अध्याय 20

श्लोक 136.10

म॒हा॒न॒ग्नी कृ॑कवाकं॒ शम्य॑या॒ परि॑ धावति ।अ॒यं न वि॒द्म यो॑ मृ॒गः शी॒र्ष्णा ह॑रति॒ धाणि॑काम्

mahānagnī kṛkavākaṃ śamyayā pari dhāvati | ayaṃ na vidma yo mṛgaḥ śīrṣṇā harati dhāṇikām

हिन्दी अर्थ

(महानग्नी) महा-अपरठिता पत्नी (उषत्रूते) पति.को कहती है किः (मसौ) वह् है पति.! तूने गृह्णजीवन मे ( पसः ) कलह द्वारा विनाशं (सु गये ( फलस्य ) फलखूप में प्राप्त अनाज को, ( यूपं ) छाज मे रखकर, भ्मपना हिस्सा ब्रां लेते है। । अयन निग्न यों मृग. शीर्णा हरति षाणिकाम् ॥१०॥

English

Bring treasure hither to reward the far-famed bard who praises thee. Thou, Indra, to the trembling dove whose pinions had been rent and torn.

अध्याय 20

श्लोक 136.11

म॒हा॒न॒ग्नी म॑हान॒ग्नं धाव॑न्त॒मनु॑ धावति ।इ॒मास्तद॑स्य॒ गा र॑क्ष॒ यभ॒ माम॑द्ध्यौद॒नम्

mahānagnī mahānagnaṃ dhāvantamanu dhāvati | imāstadasya gā rakṣa yabha māmaddhyaudanam

हिन्दी अर्थ

६ भवववेद-माष्य (कुन्तापःपुक्त) का० २० ।सू० १३६ वाले पति की भ्रोर, (शम्यया) उसे शान्तं करनेवाली लाठी लेकर, (परि (इमाः गाः) इन + ८ १ (तद्) सो भस्य ) इस क गृहस्यधमं का ती + शाव । म न पालन कर, भौर खुशी से (भोदनम्) भात (भ्रा पिय ९०७. सुदेवस्त्ा मदान्राषत +

English

Gayest ripe grain and Pilu fruit, gavest him water when athirst. The ready praiser loudly speaks though fastened triply with a strap. Yea, he commends the freshening draught, deprecates languor of disease.

अध्याय 20

श्लोक 136.12

सुदे॑वस्त्वा म॒हान॑ग्नी॒र्बबा॑धते मह॒तः सा॑धु खो॒दन॑म्।कु॒सं पीव॒रो न॑वत्

sudevastvā mahānagnīrbabādhate mahataḥ sādhu khodanam| kusaṃ pīvaro navat

हिन्दी अर्थ

पति कहता कि हेपली ! ( सुदेवः ) . ४ सुदेवः ) शरेष्ठ परमेश्वर-देव कठोर कमं से रोक सकता है। ( महतः मै जो क बड़ा हृ उस की (साघु खोदनम्). काफी पिसाई हुई है,- दस प्रकार कहता प्रशंसा करने लग 4 भति, कुम् ) बड़बमकु पत्नी की ( नवत् ).

English

Erotica Si quis in hujus tenui rima praeditae feminae augustias fascinum intromittit, vaccae

अध्याय 20

श्लोक 136.13

व॒शा द॒ग्धामि॑माङ्गु॒रिं प्रसृ॑जतो॒ग्रतं॑ परे ।म॒हान्वै भ॒द्रो यभ॒ माम॑द्ध्यौद॒नम्

vaśā dagdhāmimāṅguriṃ prasṛjatogrataṃ pare | mahānvai bhadro yabha māmaddhyaudanam

हिन्दी अर्थ

, कार कान १०। दुर १३१ मन दमानक ,------- ०। सू १३६ भथर्ववेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) , निदचय से, (भद्रः) भद्र व्यवहारोवाला ' होना. चाहिए इस पत्नी को, (प्र सृजत) तुम घरवाले छोड़ दो, इमेतंगन करो । (वला)

English

ungularum et Sakula. rum pisci- um more pudenda ejus agitantur. Quum magno pene parvula ejus pudenda vir percutit, huc et illuc ilia increscunt veluti duo asini in solo arenoso.

अध्याय 20

श्लोक 136.14

विदे॑वस्त्वा म॒हान॑ग्नी॒र्विबा॑धते मह॑तः सा॑धु खो॒दन॑म्।कु॒मा॒री॒का पि॑ङ्गलि॒का कार्द॒ भस्मा॑ कु॒ धाव॑ति

videvastvā mahānagnīrvibādhate mahataḥ sādhu khodanam| kumārīkā piṅgalikā kārda bhasmā ku dhāvati

हिन्दी अर्थ

यह तो सदा तुम्हारे वर मेँ है । क्योंकि ( महान् ) धरम बडेको, (व) हिये । पत्नी शुच हौकर कहने लगती है कि है पति! (मां यभोमेरे स तको (भ्रा भद्ध) प्रसन्नतापूवक भनौर मु द्वारा (भ्रोदनम्) पकाए गए मा कुमारिका पिज्ञलिका काद मस्म कु घाति .॥1१४॥

English

Quum parvum, admodum parvum, Ziziphi Jujubae quasi granum in eam incidit, ventris ejus partes interiores, velut verno tempore arundo, extentae videntur.

अध्याय 20

श्लोक 136.15

म॒हान्वै भ॒द्रो बि॒ल्वो म॒हान्भ॑द्र उदु॒म्बरः॑ ।म॒हां अ॑भि॒क्त बा॑धते मह॒तः सा॑धु खो॒दन॑म्

mahānvai bhadro bilvo mahānbhadra udumbaraḥ | mahāṃ abhikta bādhate mahataḥ sādhu khodanam

हिन्दी अर्थ

पत्नियों को, ( महतः साघु खोदनम् ) चर कर बड़ कीकटोरवाणी द्वार पिसाई से (विदेवः) कोई विशेषं देव ही ( वि बाघते ). हटायेगा । देख, (कुमारिका) कुत्सित कामवासनावाली, भ्रौर इसलिये ( पिङ्गलिका ) सवृश्च (क धावति) धरा-शायी हो जाती है, भ्रथवा उस की कुत्सित-गति पि.के प्रति न्य लोग . (परे, ६०८) कहते ह कि (महान्). गृहस्थ- , जीवन में जो बहा होता है, वह (वै) निश्चय से, ( बिल्वः) बिल्व के संदा (भद्रः) कल्याणकारी भौर सुखदाय होता है, (महान् ) गृहस्य मबड़ाहीं - (उदुम्बरः) गूलर के सदृश (भद्रः) कल्याणकारी भौर सुखदायी होता द 1

English

Si Dii mentulae intumescenti faverunt, cum femoribus suis se: ostentat femina tanquam vero testi. Magnopere delectata est arnica: ut equns solutus adveniens vocem edidit: Vaginam juvenis!

अध्याय 20

श्लोक 136.16

यः कु॑मा॒री पि॑ङ्गलि॒का वस॑न्तं पीव॒री ल॑भेत्।तैल॑कुण्ड॒मिमा॑ङ्गु॒ष्ठं रोद॑न्तं शुद॒मुद्ध॑रेत्

yaḥ kumārī piṅgalikā vasantaṃ pīvarī labhet| tailakuṇḍamimāṅguṣṭhaṃ rodantaṃ śudamuddharet

हिन्दी अर्थ

भच्छे प्रकार से (खोदनम्) कमाई आदि कामों मे पिसना होता है । - ९११. यः इमारी पिङ्गलिका वसन्तं पीवरी लंमेत् । . , (पिङ्गलिका) पीली णड़ी हृईः (पोवरी) मोटी (कुमारी) कुमारी, पत्नी भवश्य करे । (यः) इसी प्रकार जो प्रति;- पील। पड़ी, मोरी, नारी,

English

pene percute: medium. femur paratum est. Arnica, pilam superans, dixit: Ut tua, Arbor, ! (verbera) pinsunt, sic etiam nunc (hic me

अध्याय 20

श्लोक 137.1

यद्ध॒ प्राची॒रज॑ग॒न्तोरो॑ मण्डूरधाणिकीः ।ह॒ता इन्द्र॑स्य॒ शत्र॑वः॒ सर्वे॑ बुद्बु॒दया॑शवः

yaddha prācīrajagantoro maṇḍūradhāṇikīḥ | hatā indrasya śatravaḥ sarve budbudayāśavaḥ

हिन्दी अर्थ

(वः इष्यामि) यै परमेश्वर तुम्हें चाहता हूं, कि तुम (भ्राजौ ) इस देवासुर- चित्त का वर्णन योग-माष्य मेँ नदी रूप में भी हृ है । यथा- “चित्तनदी नामं उभयतो वाहिनी । बहति कल्याणाय वहति पापाय चः

English

ilium extrahat. A composite hymn in praise of Indra When, foul with secret spot and stain, ye hastened onward to the breast.

अध्याय 20

श्लोक 137.2

कपृ॑न्नरः कपृ॒थमुद्द॑धातन चो॒दय॑त खु॒दत॒ वाज॑सातये ।नि॒ष्टि॒ग्र्यः पु॒त्रमा च्या॑वयो॒तय॒ इन्द्रं॑ स॒बाध॑ इ॒ह सोम॑पीतये

kapṛnnaraḥ kapṛthamuddadhātana codayata khudata vājasātaye | niṣṭigryaḥ putramā cyāvayotaya indraṃ sabādha iha somapītaye

हिन्दी अर्थ

-का वहन कर रहा है । (ऋष्वः) वह् महान् है, ( भरस्तृतः) अविनाशी है । (यः इन्द्रः) जो परमेवर (्रोजसा) निज ओज कै कारण (महान्) (स्तोमैः) स्तुतिगानों द्वारा (वावुषे) उपासकं की वृद्धि वी

English

Indra with might longed for it as it panted: the hero-hearted laid aside his weapons. I saw the drop in the far distance moving, on the slope bank of Ansumati’s river,

अध्याय 20

श्लोक 137.3

द॒धि॒क्राव्णो॑ अकारिषं जि॒ष्णोरश्व॑स्य वा॒जिनः॑ ।सु॒र॒भि नो॒ मुखा॑ कर॒त्प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत्

dadhikrāvṇo akāriṣaṃ jiṣṇoraśvasya vājinaḥ | surabhi no mukhā karatpra ṇa āyūṃṣi tāriṣat

हिन्दी अर्थ

(बह्नयः) उपासना-यज्ञ कीं बुरा का वहन करनेवाे उपासक-नेत, ( यद् ) नब ( पिप्रतः ) जीवनपालकं भौर ज्रीवनो को पू्णं बननिवाले, का० २० 1 सू० १३६९ अथववेद -भाष्य ३६५ भरन्त) भ्रपने जीवनीं मे प्रकरषंरूप मे वहन करने लगते है, तब ( विप्राः वे मेधावी उपासक, (सत्यस्य ) सत्य-नियमों के भी ( वाहसा ) वाहक हो जाते है । भ्रभिप्राय यह किं जिनके जीवनो मै परमेदवर मार्गदशंकहो. जाता है, उन के जीवन सत्यमय हो जाते हैँ । पिप्रतः = प पालनपूरणयोः। साधक परभेदवर को, (यत्) जब (स्तोमः) स्तुतिगानों दवारा, (अक्रत) अपना बना लेते ह,.तब वे ( ब्रवत) कहते ह कि ( भ्रायुधम् ) कामादि-शतरुभरों के विना के लिये अन्य उपाय (जामि) व्यथं है । न

English

Like a black cloud that sank into the water. Heroes. I send you forth. Go, fight in battle. And then the drop in Ansumati’s bosom, splendid with light, assumed its proper body;

अध्याय 20

श्लोक 137.4

सु॒तासो॒ मधु॑मत्तमाः॒ सोमा॒ इन्द्रा॑य म॒न्दिनः॑ ।प॒वित्र॑वन्तो अक्षरन्दे॒वान्ग॑च्छ॑न्तु वो॒ मदाः॑

sutāso madhumattamāḥ somā indrāya mandinaḥ | pavitravanto akṣarandevāngacchantu vo madāḥ

हिन्दी अर्थ

१-५ क्षशकर्णंः । िवनौ । १, ४ बहती; २,३ गायत्री; ४ ककुप् । ९९९. आ नूनमंशचिना युवं व॒त्सस्य॑ गन्तम्से । (अदिवना) है नगराधिपति ! तथा है सेनाधिपति ! ( युवम् ) व्यवस्था करो, जो गृह. कि ( पृथु ) बड़े-बड़े हों, तथा (अवृकम्) जिन प्र

English

And Indra with Brihaspati to aid him, conquered the godless tribes that came against him. Then, at thy birth, thou wast the foeman, Indra, of those the seven who ne’er had met a rival. The hidden pair, the heaven and earth, thou foundest, and to the mighty worlds thou gavest

अध्याय 20

श्लोक 137.5

इन्दु॒रिन्द्रा॑य पवत॒ इति॑ दे॒वासो॑ अब्रुवन्।वा॒चस्पति॑र्मखस्यते॒ विश्व॒स्येशा॑न॒ ओज॑सा

indurindrāya pavata iti devāso abruvan| vācaspatirmakhasyate viśvasyeśāna ojasā

हिन्दी अर्थ

शतु है, उन्हे (युयुतम्) र्ट से पृथक् कर दयाकरो । १. घनौ के सम्बन्ध मे देलो-दिम्यणी, मन्त ९१८ । . ३६६ भरथवेवेद-माष्य का० २०1 सु १३६ ( भ्रषिविना ) है अदिवयो ! ( ये विप्रासः ) जो मेधावी मन्त्रीगण,

English

pleasure. So, Thunder-armed! thou with thy bolt of thunder didst boldly smite that power which none

अध्याय 20

श्लोक 137.6

स॒हस्र॑धारः पवते समु॒द्रो वा॑चमीङ्ख॒यः ।सोमः॒ पती॑ रयी॒णां सखेन्द्र॑स्य दि॒वेदि॑वे

sahasradhāraḥ pavate samudro vācamīṅkhayaḥ | somaḥ patī rayīṇāṃ sakhendrasya divedive

हिन्दी अर्थ

इन मेधावियों दवारा शासित प्रजाजन को. ( बोधतम् ) श्रवगत करा दिया करो । विप्राः=मेधाविनेः ( निघ० ३।१५ ) । कण्वः--मेधावौ ( निघ् ३।१५) । काण्व ==मेधावियो द्वारा शासित प्रजाजन । (अद्वरिना) है भ्रदिवयो (वाम्) आप दोनों का ( भ्रयं चमं: ) यह

English

might equal; With weapons broughtest low the might of Sushna, and, Indra, foundest by thy strength the cattle.

अध्याय 20

श्लोक 137.7

अव॑ द्र॒प्सो अं॑शु॒मती॑मतिष्ठदिया॒नः कृ॒ष्णो द॒शभिः॑ स॒हस्रैः॑ ।आव॒त्तमिन्द्रः॒ शच्या॒ धम॑न्त॒मप॒स्नेहि॑तीर्नृ॒मणा॑ अधत्त

ava drapso aṃśumatīmatiṣṭhadiyānaḥ kṛṣṇo daśabhiḥ sahasraiḥ | āvattamindraḥ śacyā dhamantamapasnehitīrnṛmaṇā adhatta

हिन्दी अर्थ

राष्टर-यज्ञ, (स्तोमेन) सदुपदेदामृत दवारा ( परि षिच्यते ) मेधावियों से सींचा जाता है । ( वाजिनीवसू) है भर्नोवाली तथा बल देनेवाली पुथिवीरूपी दुर्भक्ष-रोग को निवृत्त करते हैँ । भरथर्वेवेद-भाष्य ३ ६७ (पुरुदंससा भरदिवना) है नानाविध कर्मोवाले अदिवयो ! (यद्). जो कृतियां वनस्पतौ ) . वनस्पतियों के उगाने तथा -उनसे फल भ्रादि के

English

We make this Indra very strong to strike the mighty Vritra dead: A vigorous Hero shall he be.

अध्याय 20

श्लोक 137.8

द्र॒प्सम॑पश्यं॒ विषु॑णे॒ चर॑न्तमुपह्व॒रे न॒द्यो अंशु॒मत्याः॑ ।नभो॒ न कृ॒ष्णम॑वतस्थि॒वांस॒मिष्या॑मि वो वृषणो॒ युध्य॑ता॒जौ

drapsamapaśyaṃ viṣuṇe carantamupahvare nadyo aṃśumatyāḥ | nabho na kṛṣṇamavatasthivāṃsamiṣyāmi vo vṛṣaṇo yudhyatājau

हिन्दी अर्थ

९३४. यन्नासत्या भुरण्यथो यदवा देव भिषज्यथः । ( नासत्या) असत्य व्यवहारो से रहित है भरदिवयो ! ८ यद् ) यतः (यद् वा ) तथा ( देव=देवा-देवौ ) श्राप दोनों देव, राष्ट के अज्ञान;

English

Indra was made for giving, set, most mighty, o’er the joyous draught, Bright, meet for Soma, famed in song. By song, as ‘twere, the powerful bolt which none may parry was prepared:

अध्याय 20

श्लोक 137.9

अध॑ द्र॒प्सो अं॑शु॒मत्या॑ उ॒पस्थेऽधा॑रयत्त॒न्वं॑ तित्विषा॒णः ।विशो॒ अदे॑वीर॒भ्या॒३चर॑न्ती॒र्बृह॒स्पति॑ना यु॒जे॑न्द्रः॑ ससाहे

adha drapso aṃśumatyā upasthe'dhārayattanvaṃ titviṣāṇaḥ | viśo adevīrabhyā3carantīrbṛhaspatinā yujendraḥ sasāhe

हिन्दी अर्थ

दुभिक्ष, अनावृष्टि आदि रोगों की - ( भिषज्यथः: चिकित्सा समय-समय न विन्धते) ठीक-टीक नहीं जान सकता, उनकां मूल्याङ्कन ठीक-टीक नहीं भव्ररय (गच्छथः) राप दोनों जाते रहै । ९३९५.. आं ननंमभिनोक्रौषि स्तोभ चिकेत वाम्या ।

English

Lofty, invincible he grew. In praise of Indra

अध्याय 20

श्लोक 137.10

त्वं ह॒ त्यत्स॒प्तभ्यो॒ जाय॑मानोऽश॒त्रुभ्यो॑ अभवः॒ शत्रु॑रिन्द्र ।गू॒ल्हे द्यावा॑पृथि॒वी अन्व॑विन्दो विभु॒मद्भ्यो॒ भुव॑नेभ्यो॒ रणं॑ धाः

tvaṃ ha tyatsaptabhyo jāyamāno'śatrubhyo abhavaḥ śatrurindra | gūlhe dyāvāpṛthivī anvavindo vibhumadbhyo bhuvanebhyo raṇaṃ dhāḥ

हिन्दी अर्थ

(अध) तंदनन्तर (दरप्सः) खट्टी दधि के समान कृष्ण-तमोगुण (रंशु- . के प्रधिपति उपासक के सहयोग से, (अमभ्याचरन्तीः) भभिचार-क्रिया करने- बाजी (भ्रदेवीः) भ्रदिव्य मावनाभभ का (ससाहे) पराभव कर देता है, जो अदिव्य भावनाए" कि (विदः) ष्ण-तमोगुण.की प्रजाए" है ।

English

All Indra’s enemies were slain and passed away like froth and foam. Indra is he, O men, who gives us happiness: sport, urge the giver of delight to win the spoil.

अध्याय 20

श्लोक 137.11

त्वं ह॒ त्यद॑प्रतिमा॒नमोजो॒ वज्रे॑ण वज्रिन्धृषि॒तो ज॑घन्थ ।त्वं शुष्ण॒स्यावा॑तिरो॒ वध॑त्रै॒स्त्वं गा इ॑न्द्र॒ शच्येद॑विन्दः

tvaṃ ha tyadapratimānamojo vajreṇa vajrindhṛṣito jaghantha | tvaṃ śuṣṇasyāvātiro vadhatraistvaṃ gā indra śacyedavindaḥ

हिन्दी अर्थ

दानैः-शनं बढता जाता है, भौर भदिग्य चित्तवुत्तियों को जन्म देता रहता जाता है, तब परमेश्वर मनुष्य की सहायता करता है । बहस्पतिः = बृहती विनादंक (अ्रमवः) हो जाते है। भ्रापने ( गर्हे ) प्रकृति की गोद मे छिपे

English

Bring quickly down, O priests, hither to give us aid, to drink the Soma, Indra son of Nishtigri. So have I glorified with praise strong Dadhikrāvan, conquering steed. Sweet may he make our mouths; may he prolong the days we have to live.

अध्याय 20

श्लोक 137.12

तमिन्द्रं॑ वाजयामसि म॒हे वृ॒त्राय॒ हन्त॑वे ।स वृषा॑ वृष॒भो भु॑वत्

tamindraṃ vājayāmasi mahe vṛtrāya hantave | sa vṛṣā vṛṣabho bhuvat

हिन्दी अर्थ

रमणीयता (धाः) भ्रापने स्थापित कीहै। (धुषितः) पराभव करनेवाले पने (वच्ण) भरपने भ्रोजरूपी वज्र द्वारा (जघन्थ) कृष्ण तमोगुण का हनन कर दिया है । (त्वम् ) आपने (वघतरैः) देनेवाले कष्ण तमोगुणं कै सामथ्यं को (अवातिरः) विनष्ट कट द्विया है

English

The Somas very rich in sweets, for which the sieve is destined, flow, Effused, the source of Indra’s joy. May your strong juices reach the Gods.

अध्याय 20

श्लोक 137.13

इन्द्रः॒ स दाम॑ने कृ॒त ओजि॑ष्ठः॒ स मदे॑ हि॒तः ।द्यु॒म्नी श्लो॒की स सो॒म्यः

indraḥ sa dāmane kṛta ojiṣṭhaḥ sa made hitaḥ | dyumnī ślokī sa somyaḥ

हिन्दी अर्थ

(गाः) स्तुति-वाणियों को (अविन्दः) प्राप्त किया है।. । हुमा है । वीजयति --अचंतिकर्मा ( निव° ३।१४) । महावृत्र भवि, भरस्मिता, रागद्वेष, काम मोह प्रादि . ३६४ भरथवेवेद-भाष्य - काऽ २० । सू०. १३४ : (सः) वहु (इन्द्रः) . परमेदवर, हमने मानो (दामने) उपासना ओर

English

Indu flows on for Indra’s sake—thus have the deities declared. The Lord of Speech exerts himself, ruler of all, because of might. Inciter of the voice of song, with thousand streams the ocean flows,

अध्याय 20

श्लोक 137.14

गि॒रा वज्रो॒ न संभृ॑तः॒ सब॑लो॒ अन॑पच्युतः ।व॒व॒क्ष ऋ॒ष्वो अस्तृ॑तः

girā vajro na saṃbhṛtaḥ sabalo anapacyutaḥ | vavakṣa ṛṣvo astṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

(सः) वह परमेदवर ( मदे ). भरानन्द तथा परसत्नता के प्रदान र ( हितः हमारा हित करता है । ( सः ) वह परमेश्वर ( चुम्नी ) सम्पत्-शाली है, (वच्वः न) वहं परमेश्वर व्र के सदृरा दुष्कभियों का विनाशक है । लिया जाता है । (सबलः) वह बलवान् है.(भनपच्युतः) भ्रौर किसी भी शक्ति दारा न्याय-पक्ष से च्यत नहीं किया जा सकता । (ववक्ष ) वह संसार-मार

English

Even Soma, Lord of Opulence, the friend of Indra, day by day. The black drop sank in Ansumati’s bosom, advancing with ten thousand round about it.

अध्याय 20

श्लोक 138.1

म॒हाँ इन्द्रो॒ य ओज॑सा प॒र्जन्यो॑ वृष्टि॒माँ इ॑व ।स्तोमै॑र्व॒त्सस्य॑ वावृधे

mahā~ indro ya ojasā parjanyo vṛṣṭimā~ iva | stomairvatsasya vāvṛdhe

हिन्दी अर्थ

, , (ऋषिः) ऋषिकोटि का राष्ट्रपति, (वामया) निजं सुन्दर पत्नी के नानाविध कायो को, ( नूनम् ) -निदचंयपूर्वक, .( आ विकेत ) पूर्णरूपेण टीक-ठीक जानता है; तथा ( भ्रथवंणि ) उपद्रवो भ्रौर विप्लवो से रहित ३६८. मथववंतेद-माष्य का २० । सू० १४०

English

Indra, great in his power and might and, like Parjanya, rich in rain, Is magnified by Vatsa’s lauds, When the priests, strengthening the Son of holy Law, present their gifts,

अध्याय 20

श्लोक 138.2

प्र॒जामृ॒तस्य॒ पिप्र॑तः॒ प्र यद्भर॑न्त॒ वह्न॑यः ।विप्रा॑ ऋ॒तस्य॒ वाह॑सा

prajāmṛtasya piprataḥ pra yadbharanta vahnayaḥ | viprā ṛtasya vāhasā

हिन्दी अर्थ

सेनापति का वणन हृभ्राहै, भ्रौर “ऋषि पद द्वारा राष्टरपति का।. स्तोमम्--उणादिकोष में इस का अथं “संघात” भी दिया गया है । मन्त मुखिया । उस परमेरवर ने तेरा भ्राह्लवान किया है अपनी गदृदी पर, वहतू , (अशिवना) ह भ्रर्वियो ! तुम दोनों (रषुवतंनिम्) सुगमता से चलाये

English

Singers with Order’s hymn of praise. Since Kanvas with their lauds have made Indra complete the sacrifice,

अध्याय 20

श्लोक 138.3

कण्वाः॒ इन्द्रं॒ यदक्र॑त॒ स्तोमै॑र्य॒ज्ञस्य॒ साध॑नम्।जा॒मि ब्रु॑वत॒ आयु॑धम्

kaṇvāḥ indraṃ yadakrata stomairyajñasya sādhanam| jāmi bruvata āyudham

हिन्दी अर्थ

बेठो, भौर इसे चलाओ । (मम) मुक राष्टूपति के(हमे) ये (स्तोमाः) तुम्हारे कतंग्यों के स्तवन अर्थात् कथन परामश, (नमः न) मेध के जलों के सदुश, (चुच्यवीरत) शान्ति देते हुए, तथा उपकारी होते हए (वाम्) तुम्हारे लिये ९३७. यवु ब नासत्योक्थैर। चुच्युवीमहिं । . यदु वा वाणीभिरथिनेवेत् काण्वस्य बोधतम् ॥४॥ . वैदिक सूक्तो दवारा (वाम्) तुम दोनों को, हम सबने मिलकर ( प्रा चुच्यु- बीमहि ) तुम्हारे कर्तव्यो का निदेश किया है, या मेव के सदृश तुम दोनों

English

Words are their own appropriate arms. 314 A hymn to the Asvins

अध्याय 20

श्लोक 139.1

आ नू॒नम॑श्विना यु॒वं व॒त्सस्य॑ गन्त॒मव॑से ।प्रास्मै॑ यच्छतमवृ॒कं पृ॒थु च्छ॒र्दिर्यु॑यु॒तं या अरा॑तयः

ā nūnamaśvinā yuvaṃ vatsasya gantamavase | prāsmai yacchatamavṛkaṃ pṛthu cchardiryuyutaṃ yā arātayaḥ

हिन्दी अर्थ

भरदिवयो ! हमने (वाणीभिः) निजवाणियो द्वारा तुमे तुम्हारे करव्यो का का० २० प° १४० अथर्ववेद-माष्य ३६९ दवारा ्रासित प्रजावगं को (बोघतम्) तुम दोनों जता दिया करो । , (भष्िना)हे भषवियो! (वाम्) तुम दोनों के लिये(कक्षीवान्“ऋषिः')

English

To help and favour Vatsa now, O Asvins, come ye hitherward. Bestow on him a dwelling spacious and secure, and keep malig- nites afar.

अध्याय 20

श्लोक 139.2

यद॒न्तरि॑क्षे॒ यद्दि॒वि यत्पञ्च॒ मानु॑षाँ॒ अनु॑ ।नृ॒म्णं तद्ध॑त्तमश्विना

yadantarikṣe yaddivi yatpañca mānuṣā~ anu | nṛmṇaṃ taddhattamaśvinā

हिन्दी अर्थ

जो-जो कुछ ( जुहाव राष्टू-यज्ञ में भपनी-भपनी आहृतियां दी है; तथा वाम् ) तुम दोनों के लिये, ( दीघंतमाः “ऋषिः” ) दीर्घतमा ऋषि ने ( जुहाव ) राष्टू-यज्ञ मेँ भरनी ( यद् ) जो भाहृतियां दी दहै, ्रौर (स्वे सादने) बैठने के भरपने-भरपने मन्त्रालय मे, (पृथी, वैन्यः) . पृथी-ऋषि भ्रौर किय। है, (चेतयेथाम्) उस सब को तुम भपने चित्तो में धारण करो । ऋषि-कोटि.क होने चाहिए । भौर ऋषियों द्वारा दिये गये परामशे, राष्ट

English

All manliness that is in heaven, with the Five Tribes, or in mid- air, Bestow, ye Asvins, upon us. Remember Kārnva first of all among the singers,, Asvins, who

अध्याय 20

श्लोक 139.3

ये वां॒ दंसां॑स्यश्विना॒ विप्रा॑सः परिमामृ॒शुः ।ए॒वेत्का॒ण्वस्य॑ बोधतम्

ye vāṃ daṃsāṃsyaśvinā viprāsaḥ parimāmṛśuḥ | evetkāṇvasya bodhatam

हिन्दी अर्थ

भावना द्वारा होना चाहिए, भ्राथिक लाभ तंथा पदाधिकार कीं लालसा से नहीं होना. चाहिए । मन्त मँ कक्षीवान् भादि सभी ऋषिनार्मो कै साथ भज्रूषि"” पद का अन्वय समना चाहिए । इसी प्रकार “स्वे सादने का को जानकर, तदनुसार उपायों का भवलम्बन. करनेवाला मन्त्री (तमाः = अन्य भन्तरी ऋषि-कोटि के होने चाहिए । २७० मथरववेद-भाष्य - का० २०। सु° १४१

English

Have thought upon your wondrous deeds. Asvins, for you with song of praise this hot oblation is effused,

अध्याय 20

श्लोक 139.4

अ॒यं वां॑ घ॒र्मो अ॑श्विना॒ स्तोमे॑न॒ परि॑ षिच्यते ।अ॒यं सोमो॒ मधु॑मान्वाजिनीवसू॒ येन॑ वृ॒त्रं चिके॑तथः

ayaṃ vāṃ gharmo aśvinā stomena pari ṣicyate | ayaṃ somo madhumānvājinīvasū yena vṛtraṃ ciketathaḥ

हिन्दी अर्थ

बतिस्तोकाय तन॑याय यातम् ॥१॥ वि (-छ्दिष्पा)हे हमारे गृहो की रक्षा करनेवाले, (उत) तथा (नः) हमारी हरीरों की रक्षा करनेवाले . (भतम्) होभो । भापं (तोकाय) हमारे पत्रो .व्यवहार भौरं रोजी भादि के साधन है, (यातम्) इसलिये भ्राप प्रजाजनों मे भाया-जायो कीजिये 1 - तम् == भवतम् । वतिः साषनदरष्यम् (उणादि कोष .४।१४२)

English

This your sweet Soma juice, ye Lords of wealth and spoil, through which ye think upon the foe. Whatever ye have done in floods, in the tree, Wonder-workers, and in growing plants,

अध्याय 20

श्लोक 139.5

यद॒प्सु यद्वन॒स्पतौ॒ यदोष॑धीषु पुरुदंससा कृ॒तम्।तेन॑ माविष्टमश्विना

yadapsu yadvanaspatau yadoṣadhīṣu purudaṃsasā kṛtam| tena māviṣṭamaśvinā

हिन्दी अर्थ

पतियो (भष्विना) दे दोनों भदिवयो ! नागरिक प्रजा तथा सेना के भधि- बैठकर (याथः) भ्रनाजनों के निरीक्षण के लिये जाते हो, (थद् वा) श्रथवा . वायुना) वायुयानों के भध्यक्ष के साथ (समोकसा समोकसौ ) अन्तरिक्षः कोटि के विद्रानों, तथां (ऋमुभिः) राष्ट्र के कारीगसों के साथ (सजोषसा)

English

Therewith, O Asvins, succour me. Continuation of the preceding hymn to the Asvins

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।