Atharva Veda
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 4/13 · श्लोक 37.1–52.3

पूर्ण अध्याय पाठ86 श्लोक

अध्याय 20

श्लोक 37.1

यस्ति॒ग्मशृ॑ङ्गो वृष॒भो न भी॒मः एकः॑ कृ॒ष्टीश्च्य॒वय॑ति॒ प्र विश्वाः॑ ।यः शश्व॑तो॒ अदा॑शुषो॒ गय॑स्य प्रय॒न्तासि॒ सुष्वि॑तराय॒ वेदः॑

yastigmaśṛṅgo vṛṣabho na bhīmaḥ ekaḥ kṛṣṭīścyavayati pra viśvāḥ | yaḥ śaśvato adāśuṣo gayasya prayantāsi suṣvitarāya vedaḥ

हिन्दी अर्थ

, (यस्मात् ऋते ) जिसकी सहायता क विता (जनासः) लोग (विजयन्ते न) विरोधी शक्तियों पर विजय नहीं पाते. (युध्यमानाः). ओर यढ करते हए (वसे) रकथं (यम्) जिसको (हवन्ते) पुकारते ह, (थः) तथं परथ्ववेद-माष्य . का० २०।सू० ३४ (यः) जो (शर्वा) भ्रपने न्यायायुघ द्वारा, (शदवतः) चादवत काल

English

distress. His yellow-coloured jaws, like ladles, move apart, what time,. for strength, he makes the

अध्याय 20

श्लोक 37.2

त्वं ह॒ त्यदि॑न्द्र॒ कुत्स॑मावः॒ शुश्रू॑षमाणस्त॒न्वा सम॒र्ये।दासं॒ यच्छुष्णं कुय॑वं॒ न्यऽस्मा॒ अर॑न्धय आर्जुने॒याय॒ शिक्ष॑न्

tvaṃ ha tyadindra kutsamāvaḥ śuśrūṣamāṇastanvā samarye| dāsaṃ yacchuṣṇaṃ kuyavaṃ nya'smā arandhaya ārjuneyāya śikṣan

हिन्दी अर्थ

प्राजनो ! ( सः इन्द्रः ) वह परमेक्वर है ॥ . - पर्व॑तो की धायियों मे जमे हिमपर्व॑तों (61801615) का वर्णेन हुआ है । ्रतिरीतं के कारण पर्वंत-घाटि्यो में बहती नदी जब्र हिममय हो जाती है, तो उसे हिमपर्वत (७।०५।९।) कहते हँ । यह ॒हिमपवंत जलमय होते हैं । मानो इन्होने इन - पवतो मे भ्रपना निवासगृह बना लिया है । क्योंकि ये - वषँ तक इन चाटियों मे लेटे पड़ रहते है । लगभग ४० “ररद्-ऋतुओं कां० २० सू० ३४ भरथवंवेद-माष्य चर

English

like a horse for food. Then the great wish hath seized upon him mightily, and the beloved One hath gained high

अध्याय 20

श्लोक 37.3

त्वं धृ॑ष्णो धृष॒ता वी॒तह॑व्यं॒ प्रावो॒ विश्वा॑भिरू॒तिभिः॑ सु॒दास॑म्।प्र पौरु॑कुत्सिं त्र॒सद॑स्युमावः॒ क्षेत्र॑साता वृत्र॒हत्ये॑षु पू॒रुम्

tvaṃ dhṛṣṇo dhṛṣatā vītahavyaṃ prāvo viśvābhirūtibhiḥ sudāsam| pra paurukutsiṃ trasadasyumāvaḥ kṣetrasātā vṛtrahatyeṣu pūrum

हिन्दी अर्थ

उपासको को, (वहं जनम् ) तथा अन्य बहुत जनों को,.शम्बर ने (आमूत्) जल को रोके रखने के कारण मुचति कर रखा था, उस (शम्बरम्) हिम- पर्वत को (यः) जिसने (कसीभिः) जल को निष्कासित करनेवाली, (अचारुकास्ना)- तथा अचर अर्थात् अचल, स्थिररूप में पड़नेवाली सौर-रदिमियो द्वारा (पर्यतरत्) काट दिया । ओर परिणाम मै (सुतस्य ) शम्बर से प्रकट हए जल को (भपिवत्) पिलाया, (जनासः) है प्रजाजनो की किरणें स्थिररूप- मे पड़ती है, तब शम्बर का जल पिघल कर बह निकलता है, रौर पर्वंतवासी जलपान करते हैँ । कास्ना कास्

English

power of life. Thou, comprehending with thy might the earth and heaven, acceptest the dear hymn for ever

अध्याय 20

श्लोक 37.4

त्वं नृभि॑र्नृमणो दे॒ववी॑तौ॒ भूरी॑णि वृ॒त्रा ह॑र्यश्व हंसि ।त्वं नि दस्युं॒ चुमु॑रिं धुनिं॒ चास्वा॑पयो द॒भीत॑ये सु॒हन्तु॑

tvaṃ nṛbhirnṛmaṇo devavītau bhūrīṇi vṛtrā haryaśva haṃsi | tvaṃ ni dasyuṃ cumuriṃ dhuniṃ cāsvāpayo dabhītaye suhantu

हिन्दी अर्थ

है । यथा- मन्त्र २०८ का अभिप्रायः-- . जिसने, चान्तिव्रत को वरण कयि हए, पर्वन मे अभ्यास के लिये भौर जिसने, भ्रोजप्रकट करते हुए, जड काट देनेवाले, चित्त मेँ सोए पड़,

English

new and new. O Asura, disclose thou and make visible the Cow’s beloved home to the bright golden Sun.

अध्याय 20

श्लोक 37.5

तव॑ च्यौ॒त्नानि॑ वज्रहस्त॒ तानि॒ नव॒ यत् पुरो॑ नव॒तिं च॑ स॒द्यः ।नि॒वेश॑ने शतत॒मावि॑वेषी॒रहं॑ च वृ॒त्रं नमु॑चिमु॒ताह॑न्

tava cyautnāni vajrahasta tāni nava yat puro navatiṃ ca sadyaḥ | niveśane śatatamāviveṣīrahaṃ ca vṛtraṃ namucimutāhan

हिन्दी अर्थ

(अहिम्) पाप-सांप का हनन कर दियां, वह परमेदवर है । करना) । पवंतेषु = उपह्वरे गिरीणां संगमे च नवीना, धिया विध्रो भरजा- यत यञ्चु०. २६।१५) । इस प्रकार पर्व॑तो मेँ भरभ्यास करने का विधान है । ..

English

O Indra, let the eager wishes of the folk bring thee the golden- jawed, delightful, on thy car. That, pleased with sacrifice wherein ten fingers toil, thou mayest at the feast drink of our

अध्याय 20

श्लोक 37.6

सना॒ ता त॑ इन्द्र॒ भोज॑नानि रा॒तह॑व्याय दा॒शुषे॑ सु॒दासे॑ ।वृष्णे॑ ते॒ हरी॒ वृष॑णा युनज्मि॒ व्यन्तु॒ ब्रह्मा॑णि पुरुशाक॒ वाज॑म्

sanā tā ta indra bhojanāni rātahavyāya dāśuṣe sudāse | vṛṣṇe te harī vṛṣaṇā yunajmi vyantu brahmāṇi puruśāka vājam

हिन्दी अर्थ

चत्वारिवयां शरदि =ज्राह्यण का उपनयन रावे वषंकीश्रायुमे होना चाहिए । एसा भ्रादवलायन गृहासुों भें लिखा है । यथा अष्टमे ब्राहमण- . पापों को विक्ीणं करता रहता है, इसलिये इस कालको दरत् कहा है । दानुमू = दाप् लवणे । पाप जीवन की जड़ काट कर उसे सुखा देता है,

English

offered mead. Juices aforetime, Lord of Bays, thou drankest, and thine, and only thine, is this libation.

अध्याय 20

श्लोक 37.7

मा ते॑ अ॒स्यां स॑हसाव॒न् परि॑ष्टाव॒घाय॑ भूम हरिवः परा॒दौ।त्राय॑स्व नोऽवृ॒केभि॒र्वरू॑थै॒स्तव॑ प्रि॒यासः॑ सू॒रिषु॑ स्याम

mā te asyāṃ sahasāvan pariṣṭāvaghāya bhūma harivaḥ parādau| trāyasva no'vṛkebhirvarūthaistava priyāsaḥ sūriṣu syāma

हिन्दी अर्थ

८६ . भअथवेवेद-माष्य का० २० । मु० ३४ इसलिये वह दानु है । शयामम् =संस्काररूप मे सोए पाप-संस्कारों के हनन करने को सूचित किया है । न जिसने शासन करनेवाले, तथा गुर के भररुचिकर-मौखिक- सदुपदेशो

English

Gladden thee, Indra, with the mead-rich Soma: pour it down ever, Mighty One, within thee. Drink of the juice which men have washed in waters and fill the- full, O Lord of tawny

अध्याय 20

श्लोक 37.8

प्रि॒यास॒ इत् ते॑ मघवन्न॒भिष्टौ॒ नरो॑ मदेम शर॒णे सखा॑यः ।नि तु॒र्वशं॒ नि याद्वं॑ शिशीह्यतिथि॒ग्वाय॒ शंस्यं॑ करि॒ष्यन्

priyāsa it te maghavannabhiṣṭau naro madema śaraṇe sakhāyaḥ | ni turvaśaṃ ni yādvaṃ śiśīhyatithigvāya śaṃsyaṃ kariṣyan

हिन्दी अर्थ

रस पिला दिया, तथा जिस पर्व॑त म अभ्यास करते हुए नाना उपासक-जनों को उसने समाधिनिद्रां मे मूषित सा कर दिया,वह परमेश्वर है । भचारुकास्ना--अचारक + भ्रास्ना = (मुखेन) । कसीभिः== कस् (यः) जो (सप्तरदिमः) सात रदिमर्योवाले सूर्यं का स्वामी, (ुषभः)

English

horses. O Indra, hearer of the laud, with Soma which stones have mix- ed for thee enhance thy

अध्याय 20

श्लोक 37.9

स॒द्यश्चि॒न्नु ते॑ मघवन्न॒भिष्टौ॒ नरः॑ शंसन्त्युक्थ॒शास॑ उ॒क्था।ये ते॒ हवे॑भि॒र्वि प॒णींरदा॑शन्न॒स्मान् वृ॑णीष्व॒ युज्या॑य॒ तस्मै॑

sadyaścinnu te maghavannabhiṣṭau naraḥ śaṃsantyukthaśāsa ukthā| ye te havebhirvi paṇīṃradāśannasmān vṛṇīṣva yujyāya tasmai

हिन्दी अर्थ

सिन्धून्) सात प्रकार की नदियों को, (सतवे) प्रवाहित होने लियः. (भरवासृजत्) नीचे की भोर प्रकट करता है; भ्रौर (यः) जिस (वज्रबाहुः) करत हए (रौहिणम्) मेष को (अस्फुरत्) कम्पा कृर भूमि पर फक दिया,-- (जनासः) है प्रजाजनोः ! (सः इन्द्रः) वह.परमेदवर है ।

English

rapture. To make thee start, a strong true draught I offer to thee the

अध्याय 20

श्लोक 37.10

ए॒ते स्तोमा॑ न॒रां नृ॑तम॒ तुभ्य॑मस्म॒द्र्यऽञ्चो॒ दद॑तो म॒घानि॑ ।तेषा॑मिन्द्र वृत्र॒हत्ये॑ शि॒वो भूः॒ सखा॑ च॒ शूरो॑ऽवि॒ता च॑ नृ॒णाम्

ete stomā narāṃ nṛtama tubhyamasmadrya'ñco dadato maghāni | teṣāmindra vṛtrahatye śivo bhūḥ sakhā ca śūro'vitā ca nṛṇām

हिन्दी अर्थ

से (महि एनः -दधानान्) महापापधारी (अमन्यमानान्) भमननशील नास्तिको का (जघान) हनन करता रहा है, (यः) जो (शर्धते) बला- नहीं करता, . (यः) जो (दस्योः) उपक्षयकारी का (हन्ता). हनन करता है,-- (जनासः) है प्रजाजनो ! (सः इन्द्रः) वह परमेश्वर है ।

English

yellow-tinted stir, When. while the bowl stands there, he grooms his tawny steeds, when he hath drunk strong

अध्याय 20

श्लोक 37.11

नू इ॑न्द्र शूर॒ स्तव॑मान ऊ॒ती ब्रह्म॑जूतस्त॒न्वा वावृधस्व ।उप॑ नो॒ वाजा॑न् मिमी॒ह्युप॒ स्ती॑न् यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः

nū indra śūra stavamāna ūtī brahmajūtastanvā vāvṛdhasva | upa no vājān mimīhyupa stīn yūyaṃ pāta svastibhiḥ sadā naḥ

हिन्दी अर्थ

जलमय हिमपवंतं को, (चत्वारिदयाम्) चालीसवीं (शरदि) -शरद् ऋतु तथा (यः) जो (ओजायमानम्) उमड़े हुए, (दानुम्) जल देने की प्रवृत्ति- नहीं करता, उस (अहिम्) मेष का (जघान) हनन करता है (जनासः) है '

English

drink, the sweet juice that he: loves. Yea, to the dear one’s seat in homes of heaven and earth the- bay steeds’ Lord hath whinnied

अध्याय 20

श्लोक 38.1

आ या॑हि सुषु॒मा हि त॒ इन्द्र॒ सोमं॒ पिबा॑ इ॒मम्।एदं ब॒र्हिः स॑दो॒ मम॑

ā yāhi suṣumā hi ta indra somaṃ pibā imam| edaṃ barhiḥ sado mama

हिन्दी अर्थ

तथा “पञ्चबुद्धधादि'" कहा है ( श्वेता० उप० भ. १, खं. ५ ) 1 स्तवे = सात्विक जीवनम बहने के लिये । रौदिणम्=लालवर्णवाला रजोगुण । जो रजोगुण को योगी के मस्तिष्करूपी दूलोक मे चढने नहीं देता, भ्रपितु उसे निचले जीवन तकं सीमित रखतां है, वह परमे्वर है । शोषकबल से ( पवंताः चित् ) पव॑त भी ( भयन्ते ) भयभीत रहते है, (यः) जो कि (सोमपाः ) चन्द्रमा की भी रक्षा करता है । (निचितः) . जीवन मेँ नियमतः चिनी गर्ई यह परमेदवराग्नि (वचजबाहुः) मानो वज्न- धारी होकर ( वजखहस्तः ) वचर द्वारा पाप-पुञ्ज का हनन करता है, उसे

English

Bull, O thou whom bay steeds carry. Here take delight, O Indra, in our voices while thou art hymned with power and all our spirit.

अध्याय 20

श्लोक 38.2

आ त्वा॑ ब्रह्म॒युजा॒ हरी॒ वह॑तामिन्द्र के॒शिना॑ ।उप॒ ब्रह्मा॑णि नः शृणु

ā tvā brahmayujā harī vahatāmindra keśinā | upa brahmāṇi naḥ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

है । हस्तः हन्तेः प्रादुहनने ( नि० १।३।७ ) । निचितः--नि +-चितः, नाना रक्षा-साघनों दवारा (यः) जो रक्षा करता है, . (यस्य) जिसका) जिसकी है, -- (जनासः) है प्रजाजनो ! (सः इन्द्रः) वह परमेश्वर है ।

English

O mighty Indra, through thine aid, thy prowess, obtaining life, zealous, and skilled in worship.

अध्याय 20

श्लोक 38.3

ब्र॒ह्माण॑स्त्वा व॒यं यु॒जा सो॑म॒पामि॑न्द्र सो॒मिनः॑ ।सु॒ताव॑न्तो हवामहे

brahmāṇastvā vayaṃ yujā somapāmindra sominaḥ | sutāvanto havāmahe

हिन्दी अर्थ

(पित्रोः) माता-पिता की (उपस्थे) गोद में खेलनेवाला (जातः ) जिसके गुणों करा कथन करता है, जो (परस्य ) अपने से भिन्न किसी भ्न्य को (भुवः) पृथिवी का (जनितुः) जनयिता (न वेद) नहीं जानता, (यः) हमे ( वेद ) जानता पहुचानता है, जो ( देवानाम् ) सूयं चन्द्र॒ आदि सब

English

Men in the house who share the sacred banquet stand singing praise that brings them store of children.

अध्याय 20

श्लोक 38.4

इन्द्र॒मिद् गा॒थिनो॑ बृ॒हदिन्द्र॑म॒र्केभि॑र॒र्किणः॑ ।इन्द्रं॒ वाणी॑रनूषत

indramid gāthino bṛhadindramarkebhirarkiṇaḥ | indraṃ vāṇīranūṣata

हिन्दी अर्थ

दिव्य पदाथा के ( व्रता ) कमं भौर गतिविधियों को ( वेद ) जानता है- (जनासः) है प्रजाजनो ! (सः इन्द्रः) वहु परमेश्वर है । २१४. यः सोमकामो हयैः सृरियैसमाद् रेजन्ते धव॑नानि विश्वा । 1. . भ्रथववेद-माष्य,. का० २०. सू०३१५

English

He who just born, chief God of lofty spirit, by power and might became the God’s protector, Before whose breath, through greatness of his valour, the two worlds trembled, He, O men, is

अध्याय 20

श्लोक 38.5

इन्द्र॒ इद्धर्योः॒ सचा॒ संमि॑श्ल॒ आ व॑चो॒युजा॑ ।इन्द्रो॑ व॒ज्री हि॑र॒ण्ययः॑

indra iddharyoḥ sacā saṃmiśla ā vacoyujā | indro vajrī hiraṇyayaḥ

हिन्दी अर्थ

( यः) जो ( सोमकामः) सक्तिरस कौ . कामना करता, या सौम्य- ग्रावों का स्वामी, तथा ( सूरिः ) सर्वपरेरक है, (विद्वा भुवनानि ) सब भूवन (यस्मात् ) जिस से ( रेजन्ते ) भयभीत होकर काम्पते है, (यः) बरसनेवाले मेष का (जघान) हनन क्रिया है, (यः) जो (एकवीरः) एक- मात्र वीर है, ( जनासः ) है प्रजाजनो ! (सः इन्द्रः ) वहु परमेदवर है ।

English

Indra. He who fixed fast and firm the earth that staggered, and set at rest the agitated mountains,

अध्याय 20

श्लोक 38.6

इन्द्रो॑ दी॒र्घाय॒ चक्ष॑स॒ आ सूर्यं॑ रोहयद् दि॒वि।वि गोभि॒रद्रि॑मैरयत्

indro dīrghāya cakṣasa ā sūryaṃ rohayad divi| vi gobhiradrimairayat

हिन्दी अर्थ

२१५. यः सुन्वते पथते दुध आ चिद् बाज दहैषि स किलासि स॒त्यः । कर रहा है उसके लिये, (पचते) जो भक्तिरस को परिपक्व कर रहा है उस के लिये, ( दृधे ) जो भपने ब्रतौ में दुर्धर है उस के लिये, (वाजम्) बल भौर शक्ति (आ. दर्द॑षि) भादर पूर्वक देते है, (सः) वे श्राप (किल)

English

Who measured out air’s wider middle region and gave the heaven support, He, O men, is Indra.

अध्याय 20

श्लोक 39.1

इन्द्रं॑ वो वि॒श्वत॒स्परि॒ हवा॑महे॒ जने॑भ्यः ।अ॒स्माक॑मस्तु॒ केव॑लः

indraṃ vo viśvataspari havāmahe janebhyaḥ | asmākamastu kevalaḥ

हिन्दी अर्थ

श्रौर (सुवीरासः) घमंका्यँ मे सुचीर बनकर (विदथम्) आपके ज्ञान का ( आ वदेम ) सवत्र प्रचार करते रहँ । विच्वह = विष्व + हाड ( गतौ, ९२१६. अस्मा दु प्र तवसे तुराय प्रयो न इमि सतोमं माहिनाय । (तवसे) वृद्धिकारकं, (तुराय ) शीघ्र फलदायकः, (माहिनायं ) महा- -

English

Who slew the Dragon, freed the Seven Rivers, and draye the kine forth from the cave of Vala, Begat the fire between both stones, the spoiler in warrior’s battle, He, O men, is Indra.

अध्याय 20

श्लोक 39.2

व्य॑१न्तरि॑क्षमतिर॒न्मदे॒ सोम॑स्य रोच॒ना।इन्द्रो॒ यदभि॑नद् व॒लम्

vya1ntarikṣamatiranmade somasya rocanā| indro yadabhinad valam

हिन्दी अर्थ

महिम (भस्म ) इस परमेर्वर के लिये (इत्) टी, (उ ) भवय, ग (स्तो- मम्) सामगान ( प्र हमि) भेंट करता हुं । (न) जसे कि भरग्निहोत्रमे, मै इसी परमेश्वर के लिये (प्रयः) सामग्री भादि अन्न भेट करता हूं । (ऋची- का० २० । सु° ३५ म्रथवंवेद-माष्य । ८ वाले ( इन्द्राय ) परमेदवर के लिये, ( राततमा ) यथाथंज्ञान-परदायक

English

By whom this universe was made to tremble, who chased away the humbled brood of demon, Who, like a gambler gathering his winnings, seized the foe’s riches, He, O men, is Indra.

अध्याय 20

श्लोक 39.3

उद् गा आ॑ज॒दङ्गि॑रोभ्य आ॒विष्कृ॒ण्वन् गुहा॑ स॒तीः ।अ॒र्वाञ्चं॑ नुनुदे व॒लम्

ud gā ājadaṅgirobhya āviṣkṛṇvan guhā satīḥ | arvāñcaṃ nunude valam

हिन्दी अर्थ

गानों की (भरामि) मेंट लाता हं, (हृदा) हादिक-मावनाभों के साथ, (मनसा) मानसिक विचारो के-साथ,. तथा (मनीषा ) मानसिक इच्छाभ्भों के साथ । लिये, है उपासको ! तुम (धियः) भरपने कमो भौर बुदधियो को (मजंयन्त) माजन द्वारा बुद्ध करो ।. प्रयंसि प्रयांसि । १ (भरामि) भेट करता हूं । मुखोच्चारण द्वारा स्तुति करने से श्रोतांओं

English

Of whom, the terrible, they ask, Where is He? or verily they say of him, He is not. He wastes the foeman’s wealth like stakes of gamblers. Have faith in him for He, O men, is

अध्याय 20

श्लोक 39.4

इन्द्रे॑ण रोच॒ना दि॒वो दृ॒ल्हानि॑ दृंहि॒तानि॑ च ।स्थि॒राणि॒ न प॑रा॒णुदे॑

indreṇa rocanā divo dṛlhāni dṛṃhitāni ca | sthirāṇi na parāṇude

हिन्दी अर्थ

प्रकार से प्रेरित करता हूं, (इव तष्टा ) जसे कि कारीगर (रथंन) मानो रथ को प्रेरित होने योग्य कर देता है ( तत् + सिनाय ) रथसम्बःधी स्वामी के लियि। ( गिर्वाहसे ) स्तुततिवाणियों को स्वीकार करनेवाले ,. (मेधिराय) मेधावी (इन्द्राय) परभेदवर के लिये (गिरः च) मँ सभी स्तुतियां प्रेरित करता हूं । विशवमिन्वम् = विव + मिवि (सेचने) । तत्-+ सिनाय

English

279 Indra.

अध्याय 20

श्लोक 39.5

अ॒पामू॒र्मिर्मद॑न्निव॒ स्तोम॑ इन्द्राजिरायते ।वि ते॒ मदा॑ अराजिषुः

apāmūrmirmadanniva stoma indrājirāyate | vi te madā arājiṣuḥ

हिन्दी अर्थ

क्रीर-धूरियो की परम्परा को विदीणं करनेवाले परमेदवर की (वन्द्यं) वन्दना कर सकं । उसका भरभिवादन भौर स्तवन कर सक् । (अरम इत् उ) दस ही परमेदवर की माज्ञा कै.. पालन के लिये ताकि जल को रोकनेवाले मेष के साथ युद्ध किया.जा सके । (ईशानः चित्) शासन करनेवाला चेतन परमेदवर (येन तुजता) जिस हिल वदुतवच्

English

Stirrer to action of the poor and lowly, of priest, of suppliant who sings his praises Who, fair-faced, favours him who presseth Soma with stones adjusted, He, O men, is Indra.

अध्याय 20

श्लोक 40.1

इन्द्रे॑ण॒ सं हि दृक्ष॑से संजग्मा॒नो अबि॑भ्युषा।म॒न्दू स॑मा॒नव॑र्चसा

indreṇa saṃ hi dṛkṣase saṃjagmāno abibhyuṣā| mandū samānavarcasā

हिन्दी अर्थ

का० २० । सु० ३५ भथववेद-भाष्य ९९ हिसित करता है, उस वच को (विदत्) प्राप्त करके परमेश्वर (कियेधाः) कितने ही प्राणिर्यो का घारण-पोषण करता है ।

English

He under whose supreme control are horses, all chariots, and the hamlets, and the cattle: He who begat the Sun, begat the Morning, leader of waters.

अध्याय 20

श्लोक 40.2

अ॒न॒व॒द्यैर॒भिद्यु॑भिर्म॒खः सह॑स्वदर्चति ।ग॒णैरिन्द्र॑स्य॒ काम्यैः॑

anavadyairabhidyubhirmakhaḥ sahasvadarcati | gaṇairindrasya kāmyaiḥ

हिन्दी अर्थ

ष १ १।१२) ¬+ तमप् । स्वयम् = स्वः (आकारा ; उपतापि कियाहै,जोपेय कि (चारु) रचिकर (अन्ना) भाष्यात्मिक अन्न है। मेरे हृदय को बींध कर, (तिरः) उसमे तिरोहित भर्थात् छिपे (पचतम्)

English

He, O men, is Indra. To whom both armies cry in close encounter, foe against foe, the stronger and the weaker;

अध्याय 20

श्लोक 40.3

आदह॑ स्व॒धामनु॒ पुन॑र्गर्भ॒त्वमे॑रि॒रे।दधा॑ना॒ नाम॑ य॒ज्ञिय॑म्

ādaha svadhāmanu punargarbhatvamerire| dadhānā nāma yajñiyam

हिन्दी अर्थ

५।१ ४) । मुषायत् == मालिक के पता विना भालिकं के मालको हर परमेहवर, विना पता दिये, उपासक के भक्तिरस का पाने करता रहता है. इसलिये परमेदवर कै इस पान को चोरी कहा है । चार्बन्ना-= चारूणि २९३. अस्मा इदु भ्रा देवल रिन््रयाकेम॑हिदत्यं उुः ।

English

Whom two invoke upon one chariot mounted, each for himself, He, O ye men, is Indra.

अध्याय 20

श्लोक 41.1

इन्द्रो॑ दधी॒चो अ॒स्थभि॑र्वृ॒त्राण्यप्र॑तिष्कुतः ।ज॒घान॑ नव॒तीर्नव॑

indro dadhīco asthabhirvṛtrāṇyapratiṣkutaḥ | jaghāna navatīrnava

हिन्दी अर्थ

(अदिहत्ये) कामादि सापो के हननाथं, (भस्मे इत् उ चित्) इस ही परमेदवर के लिये (भकम् उवुः) भर्च॑नाश्भो का पट बुनती रही हँ । (जश्न) भरण-पोषण करनेवाले, (उर्वी). विस्तृत (द्यावापृथिवी) अलोक श्रौर भूलोक, है परमेदवर ! भरस्य ते) इस भ्रापकी (महिमानम्) महिमा का (परि न स्तः) मुकाबिला नहीं कर पाते । (ग्नाः = वाक् (निच १।११) ।

English

He, without whom men conquer not in battle, whom, warring, they invoke for help and succour;

अध्याय 20

श्लोक 41.2

इ॒च्छनश्व॑स्य॒ यच्छिरः॒ पर्वते॒ष्वप॑श्रितम्।तद् वि॑दच्छर्य॒णाव॑ति

icchanaśvasya yacchiraḥ parvateṣvapaśritam| tad vidaccharyaṇāvati

हिन्दी अर्थ

(दिवस्पृथिव्याः) द्युलोक गौर पृथिवीलोक से, तथा (परि अन्तरि- . महिमा (प्ररिरिचे) पूर्णतया रेचित हो रही है, प्रवाहित हो रही है। , विद्व में उद्यमवाला, (स्वरिः) आसुरी मावों कां उपतापक या उनका

English

He, all this universe’s type and image, who shakes what never shook, He, men, is Indra. He who hath smitten, ere they know their danger, with his hurl- ed weapon many grievous

अध्याय 20

श्लोक 41.3

अत्राह॒ गोर॑मन्वत॒ नाम॒ त्वष्टु॑रपी॒च्यम्।इ॒त्था च॒न्द्रम॑सो गृ॒हे

atrāha goramanvata nāma tvaṣṭurapīcyam| itthā candramaso gṛhe

हिन्दी अर्थ

(इन्द्रः) परमेदवर, (रणाय) भरांसुरी-भावों के साथ युद्ध करनेके लिये या उपासक कीं प्रसन्नता के लिये, (दमे) उपासक के हदय-गृहं मेँ (आ तथा श्रीःपंर सातवलेकर भध से प्रकादित भथवंवेद संहितां मे पाठ. को न छाप कर इनके स्थान में विद्युद्ध सार्थक पाठ ही छापने चाहिए ।

English

sinners: Who pardons not his boldness who provokes him, who slays the

अध्याय 20

श्लोक 42.1

वाच॑म॒ष्टाप॑दीम॒हं नव॑स्रक्तिमृत॒स्पृश॑म्।इन्द्रा॒त् परि॑ त॒न्वं ममे

vācamaṣṭāpadīmahaṃ navasraktimṛtaspṛśam| indrāt pari tanvaṃ mame

हिन्दी अर्थ

पाप-वुत्र की जड़ (विवृदचद् ) काट देतां है । तच जीवात्मा (ब्राणाः) राग- दष भ्रादि से भवंत (भ्रवनीः) पृथिवीस्थ प्रजाजनों को राग-दरःष.भादि से (अमुञ्चत्) मुक्त कर देता है, (न) जैसे कि (त्राणाः) मेष से भावृत का०२०।सु०३५ भ्रय्ववेद-भाष्य ९३ (सिन्धवः) समुद्र (रन्त) रमणीय बने हूुये.है, (यद्) जब कि परमेदवर

English

Dasyu, He, O men, is Indra. He who discovered in the fortieth autumn Sambara dwelling in the midst of mountains:

अध्याय 20

श्लोक 42.2

अनु॑ त्वा॒ रोद॑सी उ॒भे क्रक्ष॑माणमकृपेताम्।इन्द्र॒ यद् द॑स्यु॒हाभ॑वः

anu tvā rodasī ubhe krakṣamāṇamakṛpetām| indra yad dasyuhābhavaḥ

हिन्दी अर्थ

ने (व्र ण) वं्युत वज दवाय इन्दं (परि) पृथिवी के चारों भ्रोर (सीम्) सरवंत्र (अयच्छत्) प्रदान किया, या नियत कर दिया। परमेइवर ने (ईशानकृत्) शासको की सुष्टि भीं की हुई है । परमेदवर (दाशुषे) भ्रात्म- (तुर्वणिः) चोघ्र राक्ति प्रदान करनेवाला परमेषवर (गाधं कः) अपना (भर्णासि) जलो को (दष्यन्) चाहता हृभा राजा, पृथिवी पर

English

Who slew the Dragon putting forth his vigour, the demon lying there, He, men, is Indra. Who drank the juice poured at the seas of Order, subduing

अध्याय 20

श्लोक 42.3

उ॒त्तिष्ठ॒न्नोज॑सा स॒ह पी॒त्वी शिप्रे॑ अवेपयः ।सोम॑मिन्द्र च॒मू सु॒तम्

uttiṣṭhannojasā saha pītvī śipre avepayaḥ | somamindra camū sutam

हिन्दी अर्थ

(भरपाम्) जलो के (विचरघ्यै) विचरे के लिये, (-तिरदचा) तिरे (रदा) -शस्त्रो द्वारा (न) जसे (गोः) पृथिवीके (पवं) भङ्खोंको काटताहै भौर पृथिवीतलं पर नहरों यानदी केरूप मेंजल बहादेताहै, वसेह (तूतुजानः) बल का संग्रह करता - हा, ओौर (कियेधाः) कितनोकाही धारण-पोषण करता हृभा, (ईशानः) इन्द्रियों भरौर मन का अधीदवर बनकर तु, (वृत्राय) . पाप-वृत्र के हनन के लिये (वचम्) असङ्गरूपी

English

Sambara by superior prowess, Who hoarded food within the mountain’s hollow wherein he grew in strength, He, men, is

अध्याय 20

श्लोक 43.1

भि॒न्धि विश्वा॒ अप॒ द्विषः॒ परि॒ बाधो॑ ज॒ही मृधः॑ ।वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र

bhindhi viśvā apa dviṣaḥ pari bādho jahī mṛdhaḥ | vasu spārhaṃ tadā bhara

हिन्दी अर्थ

“तुतुजानः भ्रौर किमधाः” का. अन्वय. राजा के साथ भी होता गोः यहां गोपु का वणन नही, क्योंकि गौ के गङ्ख काकाटना जल के लिये कहा है । गोपु कृ अङ्गो को काटने से जल की प्राप्ति नहीं हो सकती । जसे राजाःमगीरथ ने पवंतों.को काट कर पृथिवी. तल परगङ्खाको बहाया था, वसा ही वर्णन मन्र मंदहै) भगीरथ केकारणगक्खाकानाम हे परमेदवर ! (नव्यः) भाप दी स्तुति के योग्यहै। भाप,

English

Indra. Who, with seven guiding reins, the Bull, the mighty, set the

अध्याय 20

श्लोक 43.2

यद् वी॒लावि॑न्द्र॒ यत् स्थि॒रे यत् पर्शा॑ने॒ परा॑भृतम्।वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र

yad vīlāvindra yat sthire yat parśāne parābhṛtam| vasu spārhaṃ tadā bhara

हिन्दी अर्थ

यमाणः) -श्रासुरी प्रवृत्तियों का विनाश चाहता हृश्रा, तंदथं (आयुधानि ) तदुपयोगी भायुों को (दइष्णानः) चाहता हमा, (युषे) देवासुर-संग्राम मर (शत्रून्) भरासुरी शाचरश्ों का (निरिणाति) वव करता है 4 ऋषायमाणः (शरस्य इत् उ) इस ही (जनुषः) जन्मदाता परमेश्वर के (मिया) भयं से (गिरयः) पव॑त (दल्हयाः) धपने-भपने स्थानों में दृढ़ खडे है, (च) देता हरा परमेश्वर, (नोधाः) उपासक की स्तुत्तियां धारण करके, वेनस्य) कामनावाले उपासंक को; (वीर्याय) वीरता के लिये,(सद्यः) दीघ (भोणिम्)

English

Seven Rivers free to flow at pleasure; Who, thunder-armed, rent Rauhina in pieces when scaling heaven, He, O ye men, is Indra.

अध्याय 20

श्लोक 43.3

यस्य॑ ते वि॒श्वमा॑नुषो॒ भूरे॑र्द॒त्तस्य॒ वेद॑ति ।वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र

yasya te viśvamānuṣo bhūrerdattasya vedati | vasu spārhaṃ tadā bhara

हिन्दी अर्थ

रक्षा-साघन (उप उ भुवत्) उपस्थित कर देता है । दल्हाः= दृढाः । जो- शुवानः गुड् अव्यक्ते शाब्दे । उपासक को परमेरवर, उसकं मन में भरणा देता है, जिसके लिये व्यक्तवाणी की भरावर्यकता नहीं होती । ओणिम् = भव् रक्षणे, अथवा श्नोणु = भ्रपनयने ; बाघाभों को हटाने कं संघन । २६०. असां शु त्यदलुं दाय्येषामेको यद् वव्ने भूरेसै्चानः ।

English

Heaven, even, and the earth bow down before him, before his very breath the mountains tremble.

अध्याय 20

श्लोक 44.1

प्र स॒म्राजं॑ चर्षणी॒नामिन्द्रं॑ स्तोता॒ नव्यं॑ गी॒र्भिः ।नरं॑ नृ॒षाहं॒ मंहि॑ष्ठम्

pra samrājaṃ carṣaṇīnāmindraṃ stotā navyaṃ gīrbhiḥ | naraṃ nṛṣāhaṃ maṃhiṣṭham

हिन्दी अर्थ

कि (एकः) एक ही. है, वह, (एषाम्) इन उपासक मे से (भस्मे. इत् उ) का० २० । सू० ३६ अथवैवेद-माष्य । ६५ दान करता है, (यद् ) जिस की कि उपासक (वव्ने) याचना करता है।

English

Known as the Soma-drinker, armed with thunder, the wielder of the bolt, He, men, is Indra. Who aids with favour him who pours the Soma, and him who brews it, sacrificer, singer;

अध्याय 20

श्लोक 44.2

यस्मि॑न्नु॒क्थानि॒ रण्य॑न्ति॒ विश्वा॑नि च श्रव॒स्य ।अ॒पामवो॒ न स॑मु॒द्रे

yasminnukthāni raṇyanti viśvāni ca śravasya | apāmavo na samudre

हिन्दी अर्थ

वव्ने वनु याचने । श्रव किरणें । संस्छतसाहित्य मेँ सूयं को स्तोता लोग, (एवा) .इस प्रकार, (हारियोजना हारियोजनानि) विषय- विहारी-इन्दरियों को अपके साथ योगयुक्त -करनेवाली, ( सुवृक्ति है । (एषु) इन उपासको में भ्राप (विर्वपेशसम्) विद्व का निरूपण करने-

English

Whose strength our prayer and offered Soma heighten, and this our gift, He, O ye men, is Indra.

अध्याय 20

श्लोक 44.3

तं सु॑ष्टु॒त्या वि॑वासे ज्येष्ठ॒राजं॒ भरे॑ कृ॒त्नुम्।म॒हो वा॒जिनं॑ स॒निभ्यः॑

taṃ suṣṭutyā vivāse jyeṣṭharājaṃ bhare kṛtnum| maho vājinaṃ sanibhyaḥ

हिन्दी अर्थ

वालीं (धियम्) यथार्थ बुद्धि का (चाः) भाधान करते है, भौर (धियावसुः) प्रत्यय है, जो कि संज्ञावाची शब्दो मे, नहीं हो सकता । इसलिये "गोतम" , . (यः) जो .(एक इत्) एकं ही, (चषणीनाम्) मनुष्यों दवारा (हव्यः)

English

Born, manifested in his Parents’ bosom, He knoweth as a son the Highest Father. He who with vigorous energy assisted the companies of Gods,

अध्याय 20

श्लोक 45.1

अ॒यमु॑ ते॒ सम॑तसि क॒पोत॑ इव गर्भ॒धिम्।वच॒स्तच्चि॑न्न ओहसे

ayamu te samatasi kapota iva garbhadhim| vacastaccinna ohase

हिन्दी अर्थ

हये हैवह् (पत्यते) सकल एेश्वयों का पति है । (पवंतेष्ठाम्)अपने त्रत मे पवंत के सदृशा सुद उपासकौ मेः स्थिति पाये हए, (अद्रोघवाचम्) जिसकी वेदवाणी किसी के साथ द्रोह करना नहीं सिखाती, ही परमेदरवर को, (नः) हमारे (पूवं पितरः) पुवं पितर, . (नवग्वाः) तथा नवीन-स्तोता, गौर (सप्त विप्रासः) . सात छन्दोमयी वेद-वाणियों

English

He, men, is Indra Lord of Bay steeds, who loves the flowing Soma, He before whom all living creatures

अध्याय 20

श्लोक 45.2

स्तो॒त्रं रा॑धानां पते॒ गिर्वा॑हो वीर॒ यस्य॑ ते ।विभू॑तिरस्तु सू॒नृता॑

stotraṃ rādhānāṃ pate girvāho vīra yasya te | vibhūtirastu sūnṛtā

हिन्दी अर्थ

“सप्त' -ईरवर के साथ सदा सम्बद्ध “सपति समवेतीति' (उणा०कोष १। (तम्) उस (इन्द्रम्) परमेदवर से (ईमहे) हमं याचनाएं करते ह परमेरवर कीः है, जो परमेकवर किं ( पुरुवीरस्य ) बहूतों को वीर बनाता, .घमंवीरं दानवीर भ्रादि बनाता, (नृवतः) जौँ

English

tremble. He who smote Sambara and slaughtered Sushna, He the Sole

अध्याय 20

श्लोक 45.3

ऊ॒र्ध्वस्ति॑ष्ठा न ऊ॒तये॒ऽस्मिन् वाजे॑ शतक्रतो ।सम॒न्येषु॑ ब्रवावहै

ūrdhvastiṣṭhā na ūtaye'smin vāje śatakrato | samanyeṣu bravāvahai

हिन्दी अर्थ

किं नर नारियों का स्वामी, तथा (पुरुक्षोः) सभी भन्नो का भननपति है । का० २०। सु० ३६ - भय्वेवेद-माष्य ९७ परमेदवर के भक्त ! ( मादयध्यं ) भरपनी तृप्ति के लिये (तम् ) उस पर- मेदवर का तु (भराभर) भाश्रयले।

English

Hero, He, O men, is Indra. Thou verily art true strong God who sendest wealth to the man who brews and pours

अध्याय 20

श्लोक 46.1

प्र॒णे॒तारं॒ वस्यो॒ अच्छा॒ कर्ता॑रं॒ ज्योतिः॑ स॒मत्सु॑ ।सा॒स॒ह्वांसं यु॒धामित्रा॑न्

praṇetāraṃ vasyo acchā kartāraṃ jyotiḥ samatsu | sāsahvāṃsaṃ yudhāmitrān

हिन्दी अर्थ

(इन्द्रः) है परमेश्वर ! (ते) भाप के (जरितारः ) स्तोता (यदि) होते रहे है" .(तत्) तो उस सुख के सम्बन्ध मेँ (नः) हरमे भी (विवोचः) विष्ेषरूप मेँ कथन कीजिये । (दुध्र) है दुर्धर! , ( चिदः)हे दीन-दयालो।! , ( पुश्टूत) है बहतो द्वारा पकारे गये !, (पुरूवसो ) है महाधनी ! ( असु- रघ्नः) आपि भ्रासुर-परवृत्तियों का हनन करने वाले है; किये किं ( कःते मागः ) कौनसा धन आपका मागदहै?, ( कि वयः ) भौर भ्मापकाःश्नन्न (वेपी ) उदात्तादि स्वरों की दुष्ट से सुरीले वेपनोंवाली, ( वक्वरी ) जौर यथाथंज्ञान का कथनं करनेवाली ( यस्य गीः ) जिसकी वेदवाणी,

English

libation. So may we evermore, thy friends, O Indra, address the synod with brave sons about us.

अध्याय 20

श्लोक 46.2

स नः॒ पप्रिः॑ पारयाति स्व॒स्ति ना॒वा पु॑रुहू॒तः ।इन्द्रो॒ विश्वा॒ अति॒ द्विषः॑

sa naḥ papriḥ pārayāti svasti nāvā puruhūtaḥ | indro viśvā ati dviṣaḥ

हिन्दी अर्थ

९८ भरथवेवेद-माष्य का० २०। सू० ३६ किसी मवलम्ब के महाका मे नियत गतियां कर रहे है, भौर स्थान ष्ट नहीं होते ॥.इसका कारण यह् है कि ये सब परमेदवर की मजबूत पकड़ में इस इस प्रकार के प्रदन वेदों मे करई स्थानों मे. किये गये है । गातुम् = गायति सः गातुः ( उणा० कोष १।७३ ), वैदिकयन्त्रालय, भ्रजमेर । नक्षते गति-

English

To him, to him swift, strong, and high-exalted, I bring my song of praise as dainty viands; My thought to him resistless, meet for praises, prayers offered most devotedly to Indra.

अध्याय 20

श्लोक 46.3

स त्वं न॑ इन्द्र॒ वाजे॑भिर्दश॒स्या च॑ गातु॒या च॑ ।अच्छा॑ च नः सु॒म्नं ने॑षि

sa tvaṃ na indra vājebhirdaśasyā ca gātuyā ca | acchā ca naḥ sumnaṃ neṣi

हिन्दी अर्थ

(मनोजुवा ) मनुं मेँ प्रेरणाएं देनेवाली ( भ्रया मायया ) इस प्रज्ञा- हये, तथा (पवंतेन ) पर्वत के सदुश सुदुढ ( स्वतवः ) निज बल से सम्पन्लं आप ने (धृषता ) भरषने पराभवकारी पराक्रम द्वारा, अच्युता ) न च्युत

English

To him I offer praise as choice refreshment, bring forth my song, with seemly laud besiege him.

अध्याय 20

श्लोक 47.1

तमिन्द्रं॑ वाजयामसि म॒हे वृ॒त्राय॒ हन्त॑वे ।स वृषा॑ वृष॒भो भु॑वत्

tamindraṃ vājayāmasi mahe vṛtrāya hantave | sa vṛṣā vṛṣabho bhuvat

हिन्दी अर्थ

कर दिया है, भौर विरुजः) उन को मग्न कर दिया ह महा हे नवीन उपासको ! (वः) तुम्हारे ज्ञान के लिये हम गुरुजन, (पंल- विभरूतिर्यो के वर्णन. से विभ्रुषित करते हँ । ( सः ) वह ( भरनिमानः) माप-

English

For Indra, Lord of olden time, the singers shall deck their hymns with heart and mind and spirit.

अध्याय 20

श्लोक 47.2

इन्द्रः॒ स दाम॑ने कृ॒त ओजि॑ष्ठः॒ स मदे॑ हि॒तः ।द्यु॒म्नी श्लो॒की स सो॒म्यः

indraḥ sa dāmane kṛta ojiṣṭhaḥ sa made hitaḥ | dyumnī ślokī sa somyaḥ

हिन्दी अर्थ

छोडकर आत्म समपण की . आहुतियां करनेवाले की (प्रावः) रक्षाकी है रौर (सुदासम्) उत्तम दानी की रक्षा (विक्वाभिः ऊतिभिः) सब . सुदासम् = मु दा दाने । -पुषकुत्सः =नाना पायो भी जड काटने ४द. सं नूभिंमैमणो देववीतौ पूरींणि वृत्रा ईय इंपि ।

English

battle. Through his own strength with bolt of thunder Indra smote piece-meal Vritra, drier up of

अध्याय 20

श्लोक 47.3

गि॒रा वज्रो॒ न संभृ॑तः॒ सब॑लो॒ अन॑पच्युतः ।व॒व॒क्ष ऋ॒ष्वो अस्तृ॑तः

girā vajro na saṃbhṛtaḥ sabalo anapacyutaḥ | vavakṣa ṛṣvo astṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

वर्णन किया है । एसी स्वप्नावस्था किं जिससे तमोगुण भौर रजोगुणे पुनः का० २०।सु०३७ भथवेवेद-माष्य १० जागरित न हो सके । इस स्वप्नावस्था का. वणन योगदशंन मे भी हुमा

English

With lordly might favouring him who worshipped, he made a ford, victorious, for Turviti. Vast, with thine ample power, with eager movement against this

अध्याय 20

श्लोक 47.4

इन्द्र॒मिद् गा॒थिनो॑ बृ॒हदिन्द्र॑म॒र्केभि॑र॒र्किणः॑ ।इन्द्रं॒ वाणी॑रनूषत

indramid gāthino bṛhadindramarkebhirarkiṇaḥ | indraṃ vāṇīranūṣata

हिन्दी अर्थ

द० २।४) । इसमे रागदेष भादि. वृत्तियो के प्रसुप्त हो जाने की. अवस्था का वर्णन हा है । इन वृत्तिर्यों की जागरित अवस्थाको “उदार आपने, (नवतिम्) घमंकर्म से इन्कार करनेवाली (तानि) उन (नव पुरः) का (भ्रहन् ) हनन कर दिया है, भौर फलतः (निवेशने ) मेरे शरीर-गृहं मे, शारीरिक कोर मे, भ्रापने (शततमा) सेकड़ों सत्कमं (भ्राविवेषीः) प्रविष्ट कर दियेरहै। - नवतिम्-=न + वत् 1 नव पुरः € कोषे । प्रायः ५ कोर्शोका

English

Vritra cast thy bolt of thunder. Rend thou his joints, as of an ox dissevered, with bolt oblique that floods of rain may follow.

अध्याय 20

श्लोक 47.5

इन्द्र॒ इद्धर्योः॒ सचा॒ संमि॑श्ल॒ आ व॑चो॒युजा॑ ।इन्द्रो॑ व॒ज्री हि॑र॒ण्ययः॑

indra iddharyoḥ sacā saṃmiśla ā vacoyujā | indro vajrī hiraṇyayaḥ

हिन्दी अर्थ

कोरा, रौर विज्ञानमयकोद । अवान्तरभेद से इन कोर को-€ भी कहा है । यथाः-“तस्येमे नव कोष्ठा विष्टम्भा नवधा हिताः” (अथव ० १३।४। . . (१)।१० ) । ये £ कोश रहै, (१) स्थूल्रीर ; (२) स्थूलदारीर को (न्दर). है परमेश्वर † (रातंहव्याय) जिसने अपने सवसव को हव्य-

English

Sing with new lauds his exploits wrought aforetime, the deeds of him, yea, him who moveth swiftly,

अध्याय 20

श्लोक 47.6

इन्द्रो॑ दी॒र्घाय॒ चक्ष॑स॒ आ सूर्यं॑ रोहयद् दि॒वि।वि गोभि॒रद्रि॑मैरयत्

indro dīrghāya cakṣasa ā sūryaṃ rohayad divi| vi gobhiradrimairayat

हिन्दी अर्थ

रूप में आपके प्रति समर्पित कर दिया है, जो (दाशुषे) सदादानी, ओर (सुदासे) सात्त्विकदानी है, उसके लिये,--(ते) श्राप के - (ता भोजनानि) वे योग्य पदाथं (सना) सदा उपस्थित रहते हैँ । है परमेश्वर ! यै उपासक योगविधि द्वारा भापके साथ युक्त करता हूं । . (पुरुशाक) - है महाशक्त्यो

English

When, hurling forth his weapons in the battle, he with impetuous wrath lays low the foemen. When he, yea, he is born the firm-set mountains and the whole heaven and earth tremble in

अध्याय 20

श्लोक 47.7

आ या॑हि सुषु॒मा हि त॒ इन्द्र॒ सोमं॒ पिबा॑ इ॒मम्।एदं ब॒र्हिः स॑दो॒ मम॑

ā yāhi suṣumā hi ta indra somaṃ pibā imam| edaṃ barhiḥ sado mama

हिन्दी अर्थ

१०४ थवेवेद-माष्य का०२०। सु० ३७ हो जांय । परमेदवर के नाम पर जो भ्रपना सवंस्व समर्पण कर देता है, रायस नोऽव्केभिवैरंयतवं प्रियासः सूरिषु स्याम .॥७॥ (सहसावन्) है पापों का पराभव करनेवाले ! (हरिवः) हे

English

terror. May Nodhas ever lauding the protection of this dear Friend win straightway strength heroic.

अध्याय 20

श्लोक 47.8

आ त्वा॑ ब्रह्म॒युजा॑ हरी॒ वह॑तामिन्द्र के॒शिना॑ ।उप॒ ब्रह्मा॑णि नः शृणु

ā tvā brahmayujā harī vahatāmindra keśinā | upa brahmāṇi naḥ śṛṇu

हिन्दी अर्थ

(परिष्टौ) परिस्तुति मे, (भ्रवाय) पापो के वह में (मा भरम) नदीं हम होने पाते । (मा परादं) कृपया हमें पापरूपी शत्रुओं के वशीभूत न होने दीजिये, या इस सम्बन्ध मेँ भाप हमारा परित्याग न कीजिये; भ्रपितु.

English

Now unto him of these things hath been given what he, who rules alone o’er much, electeth. Indra helped Etasa, the Soma presser, contending in the chariot- race with Sūrya.

अध्याय 20

श्लोक 47.9

ब्र॒ह्माण॑स्त्वा व॒यं यु॒जा सो॑म॒पामि॑न्द्र सो॒मिनः॑ ।सु॒ताव॑न्तो हवामहे

brahmāṇastvā vayaṃ yujā somapāmindra sominaḥ | sutāvanto havāmahe

हिन्दी अर्थ

(श्रवृकेमिः) हिसा से बचानेवाली (वस्यः) निज कवचो द्वारा (नः) हमारा ०9 11011 (जापटे), अर्थात् कवच, जो कि शरीर का आवरण करती है । वरूथ को वेद मे वमं मी का है । यथाः--“्रजापतेराक्तो ब्रह्मणा रक्षा करते ह . भवृकेभिः ; परादं = वृक आदाने (भ्वादि), वृक, आदान

English

Thus to thee, Indra, yoker of bay coursers, the Gotamas have brought their prayers and praises.

अध्याय 20

श्लोक 47.10

यु॒ञ्जन्ति॑ ब्र॒ध्नम॑रु॒षं चर॑न्तं॒ परि॑ त॒स्थुषः॑ ।रोच॑न्ते रोच॒ना दि॒वि

yuñjanti bradhnamaruṣaṃ carantaṃ pari tasthuṣaḥ | rocante rocanā divi

हिन्दी अर्थ

का० २० । सु० ३६ भ्रथवेवेद-माष्य । ६९ हे परमेश्वर आप, ( द्रुह्वणे ) पापों के साथ द्रोह करनेवाले, उन के हनन की अभिलाषा करनेवाले ( जनाय ) मनुष्य के लिये (पाथिवानि . लिये, (क्षाम् ) पुथिवी को ( भ्रपः च ) भौर जलो को ( शोचय ) सुखा

English

To him then with my lips my song of praises, excellent, winning heavenly light, I offer, 280

अध्याय 20

श्लोक 47.11

यु॒ञ्जन्त्य॑स्य॒ काम्या॒ हरी॒ विप॑क्षसा॒ रथे॑ ।शोणा॑ धृ॒ष्णू नृ॒वाह॑सा

yuñjantyasya kāmyā harī vipakṣasā rathe | śoṇā dhṛṣṇū nṛvāhasā

हिन्दी अर्थ

चिष्व बज़ं दधिण इन्द्र हते विश्वा अजयं दयसे. वि मायाः ।।९॥ हस्ते) पने दाहिने हाथ मेँ वज्र धारण करता है । (भजु) है जजर भ्रमर विनाशिन् ! भाप (विद्वाः) सब प्रकार के (मायाः) छलकपटरूपी क्सो का (वि. दयथे ) विनां करते है, भरथवा सब प्रजञागो के दाता है । मायाः--छलटपट, तथा प्रज्ञा (निघ० ३१९) 1 दयसे हिसा तथा यया दासान्यायौंणि वत्रा कर बजिन्तमुतुका नाहषाणि ॥१०॥

English

To magnify with hymns of invocation and eulogies the Lord, most bounteous Giver. Even for him I frame a laud—so fashions the wright a chariot for the man who needs it

अध्याय 20

श्लोक 47.12

के॒तुं कृ॒ण्वन्न॑के॒तवे॒ पेशो॑ मर्या अपे॒शसे॑ ।समु॒षद्भि॑रजायथाः

ketuṃ kṛṇvannaketave peśo maryā apeśase | samuṣadbhirajāyathāḥ

हिन्दी अर्थ

१०० , . .' भथरवेवेद-माष्य का०२०। सु° ३७ तथा महाकल्याण मागं प्राप्त करादये जिससे कामादि के साथ पुनः संग्राम पराप्त कराइये, (यया) जिस द्वारा कि (दासानि) उपक्षयकारी तथा . (वृत्रा) उन्नति. को रोकनेवाले (नाहुषाणि ) मनुष्यो को मी, भ्राप

English

Songs for wise Indra hymned with invocation, a song composed with care and all-impelling. So with my tongue I deck, to please that Indra, my hymn as’t- were a horse, through love of

अध्याय 20

श्लोक 47.13

उदु॒ त्यं जा॒तवे॑दसं दे॒वं व॑हन्ति के॒तवः॑ ।दृ॒शे विश्वा॑य॒ सूर्य॑म्

udu tyaṃ jātavedasaṃ devaṃ vahanti ketavaḥ | dṛśe viśvāya sūryam

हिन्दी अर्थ

उनकी सन्तानो को भी भ्राप शरेष्ठ भ्रां बना देते हँ । - मनुष्यनाम (निच० २।३) ।आयेः = ईरवरपुत्रः (निद० ६।५।२६) । तुक् = . न या अदेषो बते न देव आभिर्याहि तूय॒मा मंहूयद्रिर् ॥११॥

English

glory, To reverence the Hero, bounteous Giver, famed far and wide, destroyer of the castles.

अध्याय 20

श्लोक 47.14

अप॒ त्ये ता॒यवो॑ यथा॒ नक्ष॑त्रा यन्त्य॒क्तुभिः॑ ।सूरा॑य वि॒श्वच॑क्षसे

apa tye tāyavo yathā nakṣatrā yantyaktubhiḥ | sūrāya viśvacakṣase

हिन्दी अर्थ

(पुरत) है बहतो के द्वाराः पुकारे गए † (वेध) है पापों की वेधने श्राप, (विदववाराभिः) सब पापों का निव्रारण करनेवाली (नियुद्धिः) शक्त्यो को (न अदेवः) न कोई शरदेव, (न देवः) भौर न कोर्ई देव (वरते) .

English

Even for him hath Tvashtar forged the thunder, most deftly wrought, celestial, for the battle. Wherewith he reached the vital parts of Vritra, striking—the vast, the mighty—with the

अध्याय 20

श्लोक 47.15

अदृ॑श्रन्नस्य के॒तवो॒ वि र॒श्मयो॒ जनां॒ अनु॑ ।भ्राज॑न्तो अ॒ग्नयो॑ यथा

adṛśrannasya ketavo vi raśmayo janāṃ anu | bhrājanto agnayo yathā

हिन्दी अर्थ

, निवारण कर सकता है, (भ्रासिः) इन शक्तियों समेत माप (तूयम्) शीघ् का० २०। सु० ३७. रथवेवेद-माष्य ,. १०१ तीक्षण किररणोवाने भौर वर्षा करणे सूयं के सदृ (यः) जो भाप (भीमः) ¦

English

striker, As soon as, at libations of his mother, great Vishnu had drunk up the draught, he plundered.

अध्याय 20

श्लोक 47.16

त॒रणि॑र्वि॒श्वद॑र्शतो ज्योति॒ष्कृद॑सि सूर्य ।विश्व॒मा भा॑सि रोचन

taraṇirviśvadarśato jyotiṣkṛdasi sūrya | viśvamā bhāsi rocana

हिन्दी अर्थ

भयप्रद है, वे भाप .(एकः) भकेले ही (विवा ) सब (कृष्टीः) प्रजाजनों को (प्रच्यावयसि) विचलित कर देते हँ । (यः). जो -भ्राप (चरवतः) नियन्ता है, वे भ्राप (वेदः) दानी के घन को (सुष्वितराय) इतरो के के भ्रति देदेतेरहै,प्रेरितकरदेते्है। - कृष्टीः मनुष्यनाम (निध० २।३)! मयस्य धननाम ( निष

English

The dainty cates, the cooked mess; but One stronger transfixed the wild boar, shooting through the mountain.

अध्याय 20

श्लोक 47.17

प्र॒त्यङ् दे॒वानां॒ विशः॑ प्र॒त्यङ्ङुदे॑षि॒ मानु॑षीः ।प्र॒त्यङ् विश्वं॒ स्वर्दृ॒शे

pratyaṅ devānāṃ viśaḥ pratyaṅṅudeṣi mānuṣīḥ | pratyaṅ viśvaṃ svardṛśe

हिन्दी अर्थ

२।१०) । वेदः धननाम (निष०.२।१०) । सुष्वितराय =सु + षणु (दाने) जब-आप, कहीं मी रहते उपासक की प्राथेना को (शुश्रूषमाणः) सुन लेते सदुश भ्रपनें पापों की जड़ काटनेवाले उपासक की (समर्ये ) उसके देवासुर-

English

To him, to Indra when he slew the Dragon, the Dames too, Consorts of the Gods, wove praises.

अध्याय 20

श्लोक 47.18

येना॑ पावक॒ चक्ष॑सा भुर॒ण्यन्तं॒ जनां॒ अनु॑ ।त्वं व॑रुण॒ पश्य॑सि

yenā pāvaka cakṣasā bhuraṇyantaṃ janāṃ anu | tvaṃ varuṇa paśyasi

हिन्दी अर्थ

उपासक के लिये (शिक्षन) सत् शिक्षा देते हुये, भापने (दासम् ) उपासक राजस कमं कां (अरन्धयः) विनाश कर दिया है, (यत्) जसे कि मेघीय- (शुष्णम्) उसे सुखा देनेवाले तथा (दासम्) उसका क्षय कर देनेवाले मेष का (अरन्वयः) हसन करती हं । 1

English

The mighty heaven and earth hath he encompassed: thy great- ness heaven and earth, combined, exceed not.

अध्याय 20

श्लोक 47.19

वि द्यामे॑षि॒ रज॑स्पृ॒थ्वह॒र्मिमा॑नो अ॒क्तुभिः॑ ।पश्यं॒ जन्मा॑नि सूर्य

vi dyāmeṣi rajaspṛthvaharmimāno aktubhiḥ | paśyaṃ janmāni sūrya

हिन्दी अर्थ

अनु न शुक्ल (निर २।६।२१) ; तथा लुभ् (सत्यमारग,चऋचु- र पोच्कत्वि तसरदसयुमाबुः सेतर॑घाता इत्ते पुरुम् ॥३॥ १०२ . . भयवंवेद-माष्य - का० २०। सु० ३७ १ (धृष्णो) पापो का धर्षण करनेवाले है परमेदवर ¡ (त्वम्) आपने

English

Yea, of a truth, his magnitude surpasseth the magnitude of earth, mid-air and heaven. Indra whom all men praise, the Sovran Ruler, waxed in his home loud-voiced and strong for

अध्याय 20

श्लोक 47.20

स॒प्त त्वा॑ ह॒रितो॒ रथे॒ वह॑न्ति देव सूर्य ।शो॒चिष्के॑शं विचक्ष॒णम्

sapta tvā harito rathe vahanti deva sūrya | śociṣkeśaṃ vicakṣaṇam

हिन्दी अर्थ

उपासक नेता दवारा देववीतौ). श्राप देव कं प्रति आत्मसमर्पण कर हनन कर देते है, (नृमणः) क्योंकि उपासक-नेताभों के प्रति भरापका मन, के कारणों को (नि भस्वापयः) नित्या सुला दिया है।

English

waters. He let the floods go free, like cows imprisoned, for glory, with a heart inclined to bounty.

अध्याय 20

श्लोक 47.21

अयु॑क्त स॒प्त शु॒न्ध्युवः॒ सूरो॒ रथ॑स्य न॒प्त्यः ।ताभि॑र्याति॒ स्वयु॑क्तिभिः

ayukta sapta śundhyuvaḥ sūro rathasya naptyaḥ | tābhiryāti svayuktibhiḥ

हिन्दी अर्थ

, (श्दभीति'- पद द्वारा उपासक के “सात्त्विकमाव को सुचित किवा है । वह् सत्याचारी है इसलिये दम्म भावनां से रहित है । चुमुरि का भ्रं होता है “हिरन" 1 यह स्वभावतः डरयोक होताः है । .डंरपोकपन तमोगुण का परिणाम है। इसलिये चुमुरि पद द्वारा “तमोगुण” को का भभव, चञ्चलता । इस द्वारा “रजोगुण” को सूचित किया है। “अस्वापयः” पद् . ढारा तमोगुण ब्रौर रजोगुण को नितरां सुला देने का ,

English

Through his resplendent power still stood the rivers when with his bolt on every side he stayed them.

अध्याय 20

श्लोक 48.1

अ॒भि त्वा॒ वर्च॑सा गिरः॒ सिञ्च॑न्ती॒राच॑र॒ण्युवः॑ ।अ॒भि व॒त्सं न धे॒नवः॑

abhi tvā varcasā giraḥ siñcantīrācaraṇyuvaḥ | abhi vatsaṃ na dhenavaḥ

हिन्दी अर्थ

दात्र हमारा आदान न करे- हम उनके वश में न होने पाएं । इस प्रकार “वृक भ्रौर परादे"५। इन दोनों शरदो में “भ्राद्रान" भरं समान है । (मघवन्) है घनयते ! (ति) भापके (इत्) ही (प्रियासः) प्यारे उपासकं नर-नारियां, (सखायः) परस्पर सखा बनकर, . (शरणे ) भाषकी

English

Bestow upon them thought, decked with all beauty. May he, enriched with prayer, come soon and early.

अध्याय 20

श्लोक 48.2

ता अ॑र्षन्ति शु॒भ्रियः॒ पृञ्च॑न्ती॒र्वर्च॑सा प्रि॒यः ।जा॒तं जा॒त्रीर्यथा॑ हृ॒दा

tā arṣanti śubhriyaḥ pṛñcantīrvarcasā priyaḥ | jātaṃ jātrīryathā hṛdā

हिन्दी अर्थ

का०.२० । सू० ३७ अथववेद-भाष्य .. १०५ .. . सदगुरु की चरण मे जानेवाले उपासक की . (शंस्यम्) कीति को (करिष्यन्) (मघवन्). है धनपते.! . सांसारिक ओौर भ्राध्यात्मिक धन के

English

Our ancient sires, Navagvas, sages seven, while urging him to show his might, extolled him, Dweller on heights, swift smiting down opponents, guileless in word, and in his thoughts

अध्याय 20

श्लोक 48.3

वज्रा॑पव॒साध्यः॑ की॒र्तिर्म्रि॒यमा॑ण॒माव॑हन्।मह्य॒मायु॑र्घृ॒तं पयः॑

vajrāpavasādhyaḥ kīrtirmriyamāṇamāvahan|mahyamāyurghṛtaṃ payaḥ

हिन्दी अर्थ

गायन करने लगते हँ । (येते) जो आप के हम उपासक, (हवेभिः) आह्वान- कम निम्नलिखित है ।. यथा-“तदपरयत्, तदभवत्, तदासीत्" (यजु०. दशन मेँ तद्रप हो जातां है, तल्लीन हो जाता है, तदनन्तर उसमे चिरस्थित हयो जाता है । रासीत् सम्भवतः भ्रासीत (भ्रासू उपवेशने) । यह चिर- -स्थितिही सागुज्य-मृक्ति है ।

English

most mighty. We seek that Indra to obtain his riches that yield much food, and men, and store of heroes.

अध्याय 20

श्लोक 48.4

आयं गौः पृश्नि॑रक्रमी॒दस॑दन्मा॒तरं॑ पु॒रः ।पि॒तरं॑ च प्र॒यन्त्स्वः

āyaṃ gauḥ pṛśnirakramīdasadanmātaraṃ puraḥ | pitaraṃ ca prayantsvaḥ

हिन्दी अर्थ

१०६ भथवेवेद-माष्य का० २०. सु०.३८ सामगान, हमे (मघानि) आध्यात्मिक ददव्यं (ददतः) प्रदान करते है। हनन-काये भे आप (शिवः) उनके लिये कल्याणकारी (भ्रुः) हृजिये । (च) पौर (रः) राप पराक्रमकारी, (नृणाम्). उपासक नेताभों के, (सखा

English

O Lord of Bay Steeds, bring to make us joyful, celestial wealth abundant, undecaying. Declare to us—if at thy hand aforetime the earlier singers have obtained good fortune

अध्याय 20

श्लोक 48.5

अ॒न्तश्च॑रति रोच॒ना अ॒स्य प्रा॒णाद॑पान॒तः ।व्य॑ख्यन्महि॒षः स्वः

antaścarati rocanā asya prāṇādapānataḥ | vyakhyanmahiṣaḥ svaḥ

हिन्दी अर्थ

हमे अवश्य बद़ादये 1 तथा (उपस्तीन्) आपके आश्रये रहनेवाले (नः) हम उपासको को ( वाजान्) बल ओौर शक्तियां (उप मिमीहि) प्रदान कीजिये । तथा है उपासक .नेताभ्रो ! (मन्व १०) (युयम्) भ्राप सब, (सदा पात) सदा रक्षा करते रहिये । (इन्द्र) है परमेदवर ! -(आ याहि ) आद्ये, दर्शन दीजियेः। (हि) तिर्वय से (ते) . भ्रापके लिये . (सोमम्) भक्तिरस का सुषुम) 4 हमने निष्पादन किया हुभ्रा है। (इमम्) इस भक्तिरस को (पिब)

English

What is thy share and portion, strong Subduer, Asura-slayer, rich, invoked of many?

अध्याय 20

श्लोक 48.6

त्रिं॒शद् धामा॒ वि रा॑जति॒ वाक् प॑त॒ङ्गो अ॑शिश्रियत्।प्रति॒ वस्तो॒रह॒र्द्युभिः॑

triṃśad dhāmā vi rājati vāk pataṅgo aśiśriyat| prati vastorahardyubhiḥ

हिन्दी अर्थ

कीजिये, ओर (मम) मेरे (ददं बहिः) इस हृदयाखन पर (भरासदः) भा का० २० ॥ सु० ३८ अथववैवेद-भाष्यः „ १५५. आ त्वा जहमपूजा इरी वहतामिन्द्र केशिन ।

English

He who for car-borne, thunder-wielding Indra, hath a hymn, craving deeply-piercing, fluent, Who sends a song effectual, firmly-grasping, and strength- bestowing, he comes near the

अध्याय 20

श्लोक 49.1

यच्छ॒क्रा वाच॒मारु॑हन्न॒न्तरि॑क्षं सिषासथः ।सं दे॒वा अ॑मद॒न् वृषा॑

yacchakrā vācamāruhannantarikṣaṃ siṣāsathaḥ | saṃ devā amadan vṛṣā

हिन्दी अर्थ

वाले, (केशिनं) गौर भ्रापके स्वरूप पर प्रकाश डालनेवाले, (हरी) मनो- हारी ऋक् की स्तुतियां, तथा सामवेद के सामगान, (त्वा) भरापको (श्चा वहताम्) हमे प्राप्त केरा दं । है परमेक्वर ! - तब आप (नः) हमारी मे साक्षात् उपस्थित होकर, (शुणु) सुनिये । . इन्द्र) है परमेषवर ! (सोमिनः) भक्तिरसवाले, (सुतावन्तः)

English

mighty. Strong of thyself! thou with this art hast shattered with thought- swift Parvata, him who

अध्याय 20

श्लोक 49.2

श॒क्रो वाच॒मधृ॑ष्टा॒योरु॑वाचो॒ अधृ॑ष्णुहि ।मं॑हिष्ठ॒ आ म॑द॒र्दिवि॑

śakro vācamadhṛṣṭāyoruvāco adhṛṣṇuhi | maṃhiṣṭha ā madardivi

हिन्दी अर्थ

(हवामहे) पुकारदहेहै। - २५७. हनद्रमिर गाथिनो बृहदिनरमकेभिरकिणं; । (गाधिनः) सामगान करनेवाले सामगानो दवारा, (भ्रकरिणः) ऋग्वेदी भ्रनूषत) महास्तवन करते है, ओर (वाणीः) यजुरवंद भौर अथर्ववेद की

English

waxed against thee; And, Mightiest! rager! boldly rent in pieces things that were firmly fixed and never shaken..

अध्याय 20

श्लोक 49.3

श॒क्रो वाच॒मधृ॑ष्णुहि॒ धाम॑धर्म॒न् विरा॑जति ।विम॑दन् ब॒र्हिरा॒सर॑न्

śakro vācamadhṛṣṇuhi dhāmadharman virājati | vimadan barhirāsaran

हिन्दी अर्थ

समवाय सम्बन्ध से मिधित हुभा हभ है, . चू कि (वचोयुजा) . ऋक् भौर सामःका जोडा परमेदवर का ही प्रवचन. करता है । (इन्द्रः) परमेश्वर बाला है, या सब करा.हित करनेवाला तथा रमणीयरूपवाला है । - समवाये । मानो ऋग्वेद की स्तुतियों भौर सामवेद के सामगानौं के साथ परमे- दवर का समवाय सम्बन्ध है । द्रसके द्वारा यह सूचित किया है कि “उपासना मे चाहे किसी भी वेदिक दंवतनाम द्वारा स्तुति या सामगान किया जाये,वह् स्तुति भ्रौर सामगान परमेदवर के सम्बन्धे ही समनी चाहिए.। जसे कि भथवंवेद मे का है कि-““यस्तं न वेद किमुचा करिष्यति"(६।१०।१०)

English

Him will we fit for you with new devotion, the strongest, Ancient One, in ancient manner.

अध्याय 20

श्लोक 49.4

तं वो॑ द॒स्ममृ॑ती॒षहं॒ वसो॑र्मन्दा॒नमन्ध॑सः ।अ॒भि व॒त्सं न स्वस॑रेषु धे॒नव॒ इन्द्रं॑ गी॒र्भिर्न॑वामहे

taṃ vo dasmamṛtīṣahaṃ vasormandānamandhasaḥ | abhi vatsaṃ na svasareṣu dhenava indraṃ gīrbhirnavāmahe

हिन्दी अर्थ

भर्थात् “ऋचां के साध . उसका कोई मतलब नहीं, जो किं चाभ्रो के - वर्ण॑नों मे परमेदवर को भ्रोत-प्रोत हमा नहीं जानता” । इसलिये उपासना , मे ऋक्-साम को परमेरवर का प्रवचनकर्ता कहा है । साम भौर ऋचा . कां हनन कर देता है, इस प्रकार उसक लिये ( ओर प्रौभाविकता गान पर निभ॑र है) इसी लिये. परमेदवर के प्रवक्ता

English

So way that Indra, boundless, faithful leader, conduct us o’er all places hard to traverse. Thou for the people who oppress hast kindled the earthly firma- ment and that of heaven.

अध्याय 20

श्लोक 49.5

द्यु॒क्षं सु॒दानुं॒ तवि॑षीभि॒रावृ॑तं गि॒रिं न पु॑रु॒भोज॑सम्।क्षु॒मन्तं॒ वाजं॑ श॒तिनं॑ सह॒स्रिणं॑ म॒क्षू गोम॑न्तमीमहे

dyukṣaṃ sudānuṃ taviṣībhirāvṛtaṃ giriṃ na purubhojasam| kṣumantaṃ vājaṃ śatinaṃ sahasriṇaṃ makṣū gomantamīmahe

हिन्दी अर्थ

इस दुष्ट से “वचोयुजा का भरं होगा, । कि ये दोनो “वचन” भर्थात् कं (सचा) साथ, (इन्द्रः) परमेदवर (भा संभिरलः) म्रिधित हौ जाता है । संमिदलः == जंसे पानी मे नमक डाला जाय तो नमक पानी

English

With heat, O Bull, on every side consume them heat earth and flood for him who hates devotion:

अध्याय 20

श्लोक 49.6

तत् त्वा॑ यामि सु॒वीर्यं॒ तद् ब्रह्म॑ पू॒र्वचि॑त्तये ।येना॒ यति॑भ्यो॒ भृग॑वे॒ धने॑ हि॒ते येन॒ प्रस्क॑ण्व॒मावि॑थ

tat tvā yāmi suvīryaṃ tad brahma pūrvacittaye | yenā yatibhyo bhṛgave dhane hite yena praskaṇvamāvitha

हिन्दी अर्थ

संमिधित होकर पानी को नमकीन बना देता है, इसी प्रकारं जब.परमेदवर परमेदवरीय-सत्ता का भान होने लगता है । यह परमेश्वर का इन्द्रियो के २५९. इन्द्र दीर्घाय चसे आ बूर रोहयद् दिवि ।

English

Of all the heavenly folk, of earthly creatures, thou art the King, O God of splendid aspect.

अध्याय 20

श्लोक 49.7

येना॑ समु॒द्रमसृ॑जो म॒हीर॒पस्तदि॑न्द्र॒ वृष्णि॑ ते॒ शवः॑ ।स॒द्यः सो अ॑स्य महि॒मा न सं॒नशे॒ यं क्षो॒णीर॑नुचक्र॒दे

yenā samudramasṛjo mahīrapastadindra vṛṣṇi te śavaḥ | sadyaḥ so asya mahimā na saṃnaśe yaṃ kṣoṇīranucakrade

हिन्दी अर्थ

(इन्द्रः) परमेदवर ने (दीर्घाय) दूर-दूर तकं (चक्षते) देखने के कियादहै, रौर (गोभिः) सूयं की किरणों द्वारा (अद्रिम्) मेचको (वि -एेरयत्) विविध स्थानों में प्रेरित किया है।

English

In thy right hand, O Indra, grasp the thunder: Eternal! thou destroyest all enchantments. Give us confirmed prosperity, O Indra, vast and exhaustless for the foes’ subduing.

अध्याय 20

श्लोक 50.1

कन्नव्यो॑ अत॒सीनां॑ तु॒रो गृ॑णीत॒ मर्त्यः॑ ।न॒ही न्व॑स्य महि॒मान॑मिन्द्रि॒यं स्वर्गृ॒णन्त॑ आन॒शुः

kannavyo atasīnāṃ turo gṛṇīta martyaḥ | nahī nvasya mahimānamindriyaṃ svargṛṇanta ānaśuḥ

हिन्दी अर्थ

के ऊपर सहस्रारचक्र है । सहसरा रचक्र को सहस्रदल कमल भी कहते हैँ । इस केमल की सहस्र पंखडियां ह । ये. नाना रगोवाले प्रका से प्रकारितदहै। श्रदविम- द्रिका भ्रथंहै, मेष । जैसे मेधसे वर्षा होती दहै, वसे रखता है । वही तरल “द्रव” सुषुम्णा-नाल मे चूता रहता है । तथा वही

English

Strengthen therewith the Arya’s hate and Dāsa’s; and let the arms of Nahushas be mighty. Come with thy teams which bring all blessings, hither, disposer, much-invoked, exceeding

अध्याय 20

श्लोक 50.2

कदु॑ स्तु॒वन्त॑ ऋतयन्त दे॒वत॒ ऋषिः॒ को विप्र॑ ओहते ।क॒दा हवं॑ मघवन्निन्द्र सुन्व॒तः कदु॑ स्तुव॒त आ ग॑मः

kadu stuvanta ṛtayanta devata ṛṣiḥ ko vipra ohate | kadā havaṃ maghavannindra sunvataḥ kadu stuvata ā gamaḥ

हिन्दी अर्थ

११० अथर्ववेद-माष्य कौ० २० । सु० ३९ “कपाल महाघिद्र'” से भी चता रहता है । इसे मेघवर्षा कहते हैँ । नीरोगा- है, परन्तु इसमे यत्किचित् चरपड्ाहट भी होती है । योगी लोग . इसका पान करते हैँ । इसे भमृत-तथा भ्रमर वारुणी भी कहते हैँ । (देखो-“पात-

English

holy! Come to me swiftly with these teams of coursers, these which no fiend, no God may stay or

अध्याय 20

श्लोक 51.1

अ॒भि प्र वः॑ सु॒राध॑स॒मिन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे।यो ज॑रि॒तृभ्यो॑ म॒घवा॑ पुरू॒वसुः॑ स॒हस्रे॑णेव॒ शिक्ष॑ति

abhi pra vaḥ surādhasamindramarca yathā vide| yo jaritṛbhyo maghavā purūvasuḥ sahasreṇeva śikṣati

हिन्दी अर्थ

( वः जनेभ्यः) तुम सबः ज्नोः के सुखः के लिये, हम उपासक विदेषरूप मं फलाया है, भौर द्युलोक मे . (रोचना ) चमकते सूये,. नक्षत्र, तांरागणो को फलाया है, तथा. (सोमस्य सदे) भक्तिरसः से प्रसन्न होकर

English

hinder. O Bold One, thou with all thine aids hast boldly helped Sudās whose offerings were accepted,

अध्याय 20

श्लोक 51.2

श॒तानी॑केव॒ प्र जि॑गाति धृष्णु॒या हन्ति॑ वृ॒त्राणि॑ दा॒शुषे॑ ।गि॒रेरि॑व॒ प्र रसा॑ अस्य पिन्विरे॒ दत्रा॑णि पुरु॒भोज॑सः

śatānīkeva pra jigāti dhṛṣṇuyā hanti vṛtrāṇi dāśuṣe | gireriva pra rasā asya pinvire datrāṇi purubhojasaḥ

हिन्दी अर्थ

ने किया है । रोचना रोचनानि 1 (अर्खिरोभ्यः) प्राणायामाभ्यासियों के. लिये. परमेदवर ने (गाः) हृदयं की गुफा में छिपी ज्ञान की किरणों को (भाविष्कृण्वन्) परमेदवर ने

English

Pūru in winning land and slaying foemen, and Trasadasyu son of Purukutsa. At the Gods’ banquet, Hero-souled! with heroes, Lord of Bay

अध्याय 20

श्लोक 51.3

प्र सु श्रु॒तं सु॒राध॑स॒मर्चा॑ श॒क्रम॒भिष्ट॑ये ।यः सु॑न्व॒ते स्तु॑व॒ते काम्यं॒ वसु॑ स॒हस्रे॑णेव॒ मंह॑ते

pra su śrutaṃ surādhasamarcā śakramabhiṣṭaye | yaḥ sunvate stuvate kāmyaṃ vasu sahasreṇeva maṃhate

हिन्दी अर्थ

भ्रौर तमस् को, मानो (अर्वाजवं नुनुदे ) उसने नीचे पटक दिया है क्षीण हो जाता है । “ततः क्षीयते प्रकाशावरणभ्" (योगदशंन २।५२) हई (दृल्हानि रोचना) दृढ़ दीप्तिर्यो को . (दृ हितानि) गौर सुदंढ़ कर दिया है, (न पराणुदे) भ्रव ये दीप्तियां हटाई नहीं जा सकतीं 1

English

Steeds, thou slewest many Vritras. Thou sentest in swift death to sleep the Dasyu, both Chumuri and Dhuni, for Dabhiti,

अध्याय 20

श्लोक 51.4

श॒तानी॑का हे॒तयो॑ अस्य दु॒ष्टरा॒ इन्द्र॑स्य स॒मिषो॑ म॒हीः ।गि॒रिर्न भु॒ज्मा म॒घव॑त्सु पिन्वते॒ यदीं॑ सु॒ता अम॑न्दिषुः

śatānīkā hetayo asya duṣṭarā indrasya samiṣo mahīḥ | girirna bhujmā maghavatsu pinvate yadīṃ sutā amandiṣuḥ

हिन्दी अर्थ

इइं (भ्रजिरायते ) नदी के सदुश प्रवाहित हो रही है, भौर (मदाः ते) मु उपासक मे मंस्ती देनेवाले आपके ्रानन्दरस (वि) विशषेषरूप मे (अररा- जिषुः) मु उपासक पर राज्य कर रहे है ।

English

These were thy mighty powers that, Thunder-wielder! then swiftly crushedst nine-and ninety castles.

अध्याय 20

श्लोक 52.1

व॒यं घ॑ त्वा सु॒ताव॑न्त॒ आपो॒ न वृ॒क्तब॑र्हिषः ।प॒वित्र॑स्य प्र॒स्रव॑णेषु वृत्रह॒न् परि॑ स्तो॒तार॑ आसते

vayaṃ gha tvā sutāvanta āpo na vṛktabarhiṣaḥ | pavitrasya prasravaṇeṣu vṛtrahan pari stotāra āsate

हिन्दी अर्थ

२६९५. शनद्रेण स हि इशषसे संजग्मानो अबिभ्युषा । हे उपासक !, (अबिभ्युषा) स्वयं निभंय तथा भय से रहित करने- दृक्षसे तत्सदृश सा दिखाई दे रहा है । (मन्दु). : तुमः. दोनों संतृप्त हो

English

Thou capturedst the hundredth in thine onslaught; thou slewest Namuchi, thou slewest Vritra.

अध्याय 20

श्लोक 52.2

स्वर॑न्ति त्वा सु॒ते नरो॒ वसो॑ निरे॒क उ॒क्थिनः॑ ।क॒दा सु॒तं तृ॑षा॒ण ओक॒ आ ग॑म॒ इन्द्र॑ स्व॒ब्दीव॒ वंस॑गः

svaranti tvā sute naro vaso nireka ukthinaḥ | kadā sutaṃ tṛṣāṇa oka ā gama indra svabdīva vaṃsagaḥ

हिन्दी अर्थ

करता हमरा, (अचंति) परमेरवर की भ्रचंना करता है । उपासनायज्ञ शौघ्र फलदायक हो जाते है 1 कं (नाम) नाम का (दधानाः). जप करने लगते हं ।

English

Old are the blessings, Indra, which thou gavest Sudās the wor- shipperwho brought oblations. For thee, the strong I yoke thy strong bay horses: let them, approach our prayers and wealth,

अध्याय 20

श्लोक 52.3

कण्वे॑भिर्धृष्ण॒वा धृ॒षद् वाजं॑ दर्षि सह॒स्रिण॑म्।पि॒शङ्ग॑रूपं मघवन् विचर्षणे म॒क्षू गोम॑न्तमीमहे

kaṇvebhirdhṛṣṇavā dhṛṣad vājaṃ darṣi sahasriṇam| piśaṅgarūpaṃ maghavan vicarṣaṇe makṣū gomantamīmahe

हिन्दी अर्थ

स्रधा इसलिये कहते हं किं यह भन्न, प्राकृतिक अन्न के सदृश न होकर का० २०। सू° ४१ अथर्ववेद-माष्य १.१३ नास्तिकता ) 1-वतीः, परमेश्वर को न माननेवाले । नव=९ ( नौ),

English

Most Mighty! Give us not up, Lord of Bay Horses, victor, in this our time of- trouble, to the wicked.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।