Atharva Veda
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 3/13 · श्लोक 28.1–36.11

पूर्ण अध्याय पाठ70 श्लोक

अध्याय 20

श्लोक 28.1

व्य॑१न्तरि॑क्षमतिर॒न्मदे॒ सोम॑स्य रोच॒ना।इन्द्रो॒ यदभि॑नद् व॒लम्

vya1ntarikṣamatiranmade somasya rocanā| indro yadabhinad valam

हिन्दी अर्थ

श्मोकेये ) भरपने हृदय-गृह में (सोमं) मक्तिरसं को (चोदामि) प्रेरितं करता हं, (पीतये) ताकि भ्राप इते स्वीकार करे । ( हृदि ) मेरे हृदय में स्थित - (एषः) यह भक्तिरस (ते). भापके - लिये ( रारन्तु ) प्रस्नतादायक हो । . (इन्द्र). है परमेदवर ! ( कुशिकासः ) भक्ति भौर योग के विषयों

English

The Son of Truth, Lord of the brave. Hither his bay steeds have been sent, red steeds are on the sacred grass.

अध्याय 20

श्लोक 28.2

उद् गा आ॑ज॒दङ्गि॑रोभ्य आ॒विष्कृ॒ण्वन् गुहा॑ स॒तीः ।अ॒र्वाञ्चं॑ नुनुदे व॒लम्

ud gā ājadaṅgirobhya āviṣkṛṇvan guhā satīḥ | arvāñcaṃ nunude valam

हिन्दी अर्थ

राप पुराण पुरुष का (हवामहे) आह्वान करते है । ६२ भरयवंवेद-भाष्य . काऽ २० । सु०.२५ रक्षा पाता है." (तम् इत् ) -उसे ही भप (भवीयसा) प्रभूत (वसुना ) वेदिक

English

Where we in concert sing our songs. For Indra, Thunder-armed, the kine have yielded mingled milk and meath,

अध्याय 20

श्लोक 28.3

इन्द्रे॑ण रोच॒ना दि॒वो दृ॒ल्हानि॑ दृंहि॒तानि॑ च ।स्थि॒राणि॒ न प॑रा॒णुदे॑

indreṇa rocanā divo dṛlhāni dṛṃhitāni ca | sthirāṇi na parāṇude

हिन्दी अर्थ

जसे कि (अभितः) समुद्र के.चारों ओर बहनेवाली (. विचेतसः ) अचेतन (आपः) नदियां (सिन्वुम्) समुद्र को जलो से पालित तथा पूरित करती ह 1. (ऋ० १।१६४।२) पर निरुक्तकार कहते हँ किं - 'एकोऽदवो बहति सप्त- अरिप्रता (==पाप-शुन्यता) की भ्रावश्यकता, होती है । यथा "यदेषां शेषठं यदरिप्रमासीत्प्रेणा तदेषां निहितं गुहाविः (ऋ० १०।७१।१)। इसी प्रकार वैदिकं ज्ञानरस का स्थिर रूप से प्रानं करते रहना, तथा वेदं का सतत स्वा- घ्यायये भी कारण ह वेदो के रहस्याथोँ कै ज्ञान मे (ऋ° १०।७१।५; ६)। . गोषु गौः वाक् (वेदवाणी, निष० १।११)।

English

What time he found them in the vault. Invoked to drink the Soma juice come with thy bay steeds,

अध्याय 20

श्लोक 28.4

अ॒पामू॒र्मिर्मद॑न्निव॒ स्तोम॑ इन्द्राजिरायते ।वि ते॒ मदा॑ अराजिषुः

apāmūrmirmadanniva stoma indrājirāyate | vi te madā arājiṣuḥ

हिन्दी अर्थ

(जापः न) जलो के-सदृश विषयुद्ध प्रौरःपवित्र. करनेवाली (देवीः) स्पष्टतया देखते है 1. ( यथा ). जैसे कि सवंसाधारण जन ( विततं रजः ) का०.२० सुऽ २५ भ्रथववेद-भाष्य ६३

English

Thunder-armed! Come, Indra, hitherward, to me.

अध्याय 20

श्लोक 29.1

त्वं हि स्तो॑म॒वर्ध॑न॒ इन्द्रास्यु॑क्थ॒वर्ध॑नः ।स्तो॒तॄ॒णामु॒त भ॑द्र॒कृत्

tvaṃ hi stomavardhana indrāsyukthavardhanaḥ | stotṝṇāmuta bhadrakṛt

हिन्दी अर्थ

भगे-भ्रागे बदुने के उपायो द्वारा (देवासः) योगाचायं देव रणयन्त) योगमागं (जोषयन्ते) भरौर उसकी मार्ग-प्रदर्शंन इरा सेवा करते ह । (इव) जसे कि .. (बराः) नव-विवाहित पुरुष नव-विवाहित श्रपनी पलनियो के साथ प्रणय. (या मिथुना ) जो - पति-पत्नी ( यतस्.चा ) यज्ञिय-लूच् पकड़ कर भर हुतियों हारा (सपयंतः) परमेदवरं की परिचर्या. करते है, (दयोः षधि)

English

Our priest is seated true to time; the grass is regularly strewn; The pressing-stones were set at morn.

अध्याय 20

श्लोक 29.2

इन्द्र॒मित् के॒शिना॒ हरी॑ सोम॒पेया॑य वक्षतः ।उप॑ य॒ज्ञं सु॒राध॑सम्

indramit keśinā harī somapeyāya vakṣataḥ | upa yajñaṃ surādhasam

हिन्दी अर्थ

हारा भापकी स्तुतियां करने लग जाते हैँ । है परमेदवर !. ( ते आपके क्षीण होता जाता ह 1. भौर जो ते) भापके दर्शाए (ब्रते) व्रतो मे (शक्तिः) शक्ति .्राप्त होती है ।. वि सुच् = यज्ञ का चमचा, जिस के दारां भ्रग्नि मेँ घुताहृति दी जाती

English

These prayers, O thou who bearest prayer, are offered. Seat thee on the grass. Hero, enjoy the offered cake.

अध्याय 20

श्लोक 29.3

अ॒पां फेने॑न॒ नमु॑चेः॒ शिर॑ इ॒न्द्रोद॑वर्तयः ।विश्वा॒ यदज॑य॒ स्पृधः॑

apāṃ phenena namuceḥ śira indrodavartayaḥ | viśvā yadajaya spṛdhaḥ

हिन्दी अर्थ

६४ भरथववेद-माष्य . का० २० सु० २५ (त° उप० ३।१०।६), - परमेदवर कहता है कि “म भरन्त हु, भ्रौर मे भन्नाद प्रथमं वयः=-भरंथवा वे सर्वेश्वष्ठ जीवन को धारण करते हैँ ।

English

O Vritra-slayer, be thou pleased with these libations, with these hymns, Song-loving Indra, with our lauds.

अध्याय 20

श्लोक 29.4

मा॒याभि॑रु॒त्सिसृ॑प्सत॒ इन्द्र॒ द्यामा॒रुरु॑क्षतः ।अव॒ दस्यूं॑रधूनुथाः

māyābhirutsisṛpsata indra dyāmārurukṣataḥ | ava dasyūṃradhūnuthāḥ

हिन्दी अर्थ

१५८. युहैरथर्वा प्रथमः पथस्तते ततः रया तुषा वेन आज॑नि। आ गा आजदुशना काव्यः सचा यमखं जातमसते यजामहे ॥ ५॥ बर्णाश्चमि्यों के जीवन-मागोँ का ( तंते ) विस्तारसे वर्णेन किया । भौर एतद्थं (उशना). प्रजा के सुख भ्रौर कल्याण की कामनावाले परमेहवर ने (सचा) एक साथ (गाः) वेदवाणि्यो को ( रा ) पू्ण॑र्प से ( भाजत् ) (अमृतम्) भरमृतस्वरूप का (यजामहे ) हम यजन करते है, उस स्वरूप के साथ हम प्रपना.संग करते है ।

English

Our hymns caress the Lord of Strength, vast, drinker of the Soma’s juice,

अध्याय 20

श्लोक 29.5

अ॒सु॒न्वामि॑न्द्र सं॒सदं॒ विषू॑चीं॒ व्यनाशयः ।सो॒म॒पा उत्त॑रो॒ भव॑न्

asunvāmindra saṃsadaṃ viṣūcīṃ vyanāśayaḥ | somapā uttaro bhavan

हिन्दी अर्थ

ह । (ब्रतपाः) भग्नं वायु सूयं तथा ग्रह भादि अपने-अपने नियत कर्मो मेः सदा स्थित रहते है, भरतः ये व्रतपति है, व्रतपा है । उदनाः वष्टि कामयते का०२०। सू० २६ भथववंवेद-भाष्य ६५ (दिवि) चुलोक मे (भरकः) सूयं, जिस परमेदवर की श्लोकम्) कीत्ति

English

Indra, as mother-cows their calf. Delight thee with the juice we pour for thine own great munificence:

अध्याय 20

श्लोक 30.1

प्र ते॑ म॒हे वि॒दथे॑ शंसिषं॒ हरी॒ प्र ते॑ वन्वे व॒नुषो॑ हर्य॒तं मद॑म्।घृ॒तं न यो हरि॑भि॒श्चारु॒ सेच॑त॒ आ त्वा॑ विशन्तु॒ हरि॑वर्पसं॒ गिरः॑

pra te mahe vidathe śaṃsiṣaṃ harī pra te vanve vanuṣo haryataṃ madam| ghṛtaṃ na yo haribhiścāru secata ā tvā viśantu harivarpasaṃ giraḥ

हिन्दी अर्थ

स्तुत्ियां करता, रौर (वंदत्ति) मानो परमेरवर के साथ संवाद करने लगता भरन्नो में (अमि रण्यति) भ्रभिरमण करने लगता है। (निर०.६।१।६) । कारः स्तोता (निघ० ३।१६) । पित्वेषु पितु = न्न्

English

Yield not thy singer to reproach. We, Indra, dearly loving thee, bearing oblation, sing thee hymns:

अध्याय 20

श्लोक 30.2

हरिं॒ हि योनि॑म॒भि ये स॒मस्व॑रन् हि॒न्वन्तो॒ हरी॑ दि॒व्यं यथा॒ सदः॑ ।आ यं पृ॒णन्ति॒ हरि॑भि॒र्न धे॒नव॒ इन्द्रा॑य शू॒षं हरि॑वन्तमर्चत

hariṃ hi yonimabhi ye samasvaran hinvanto harī divyaṃ yathā sadaḥ | ā yaṃ pṛṇanti haribhirna dhenava indrāya śūṣaṃ harivantamarcata

हिन्दी अर्थ

दवर ! (घेनाभिः) भानन्दरसरूपी दुग्ध पिलानेवाली वेदवाणियों द्वारा (दह) इस जीवन मे (मादयस्व) मुभे तृप्त कर दीजिये । मै उपासक तथा (राच्या) वाणी द्वारा (गृणानः) भाप की स्तुतियां कर रहा हं । उग्रां पीतिम् --5॥०00 ५९ तीव्रसंवेगी भक्तिरस का पान ।

English

Thou, Vasu, nearly lovest us. O thou to whom thy Bays are dear, loose not thy horses far from us:

अध्याय 20

श्लोक 30.3

सो अ॑स्य॒ वज्रो॒ हरि॑तो॒ य आ॑य॒सो हरि॒र्निका॑मो॒ हरि॒रा गभ॑स्त्योः ।द्यु॒म्नी सु॑शि॒प्रो हरि॑मन्युसायक॒ इन्द्रे॒ नि रू॒पा हरि॑ता मिमिक्षिरे

so asya vajro harito ya āyaso harirnikāmo harirā gabhastyoḥ | dyumnī suśipro harimanyusāyaka indre ni rūpā haritā mimikṣire

हिन्दी अर्थ

६६ शरयवेवेद-माष्य का० २०। सू० २६ (सखायः) है योगाभ्यास के साथियो ¡ (ऊतये) आत्मरक्षां (योगे- बाले (इन्द्रम्) परभेदवर का (हवामहे) हम आह्वान करते । .

English

Here glad thee, Indra, Lord Divine. May long-maned courses, dropping oil, bring thee on swift car hitherward.

अध्याय 20

श्लोक 30.4

दि॒वि न के॒तुरधि॑ धायि हर्य॒तो वि॒व्यच॒द् वज्रो॒ हरि॑तो॒ न रंह्या॑ ।तु॒ददहिं हरि॑शिप्रो॒ य आ॑य॒सः स॒हस्र॑शोका अभवद्धरिंभ॒रः

divi na keturadhi dhāyi haryato vivyacad vajro harito na raṃhyā | tudadahiṃ hariśipro ya āyasaḥ sahasraśokā abhavaddhariṃbharaḥ

हिन्दी अर्थ

(यदि श्ववत्) यदि परमेदवर हमारी भ्राथनाभ को स्वीकार कर लेता है, तो वहं (घ) निश्चय से (सहस्िणीभिः ऊतिभिः) हजारों प्रकार के रक्षा-साघनों के साथ, तथा (वाजेभिः) हजारों प्रकार केः बलों समेत के नेता परभेख्वर को (प्रत्नस्य) पुराकाल से माने हुए (ओकसः) (हुवे) तेरी सहायता के लिये बुलाता हूं । (यम्) जिस परमेदवर का कि (ते पिता). तेरे पिता मैने (पूवम्) पहले भरपने जीवन में (हुवे). आह्वान क्र लिया है, प्रत्यक्ष कर लिया है ।

English

Indra, to seat thee on the grass. Come to the juice that we have pressed, to Soma, Indra! blent with milk:

अध्याय 20

श्लोक 30.5

त्वंत्व॑महर्यथा॒ उप॑स्तुतः॒ पूर्वे॑भिरिन्द्र हरिकेश॒ यज्व॑भिः ।त्वं ह॑र्यसि॒ तव॒ विश्व॑मु॒क्थ्य॑१मसा॑मि॒ राधो॑ हरिजात हर्य॒तम्

tvaṃtvamaharyathā upastutaḥ pūrvebhirindra harikeśa yajvabhiḥ | tvaṃ haryasi tava viśvamukthya1masāmi rādho harijāta haryatam

हिन्दी अर्थ

मागं पर भरूढ् हुभरां है, तेरी सफलता.के लिये वँ परमेश्वर की सहायता की प्राना करता हूं । निल्वय जान किं तुभे परमेश्वर की सहायता मिलेगी-। क्योंकि मैने भरपने जीवन में इसका. अनुभव कर लिया है खूपचद़ा देता है । वेक्षः रूपम् (निष ० . ३।७)।

English

Come, favouring us, thy bay-drawn car! Come, Indra, to this gladdening drink, placed on the grass, pressed out with stones:

अध्याय 20

श्लोक 31.1

ता व॒ज्रिणं॑ म॒न्दिनं॒ स्तोम्यं॒ मद॒ इन्द्रं॒ रथे॑ वहतो हर्य॒ता हरी॑ ।पु॒रूण्य॑स्मै॒ सव॑नानि॒ हर्य॑त॒ इन्द्रा॑य॒ सोमा॒ हर॑यो दधन्विरे

tā vajriṇaṃ mandinaṃ stomyaṃ mada indraṃ rathe vahato haryatā harī | purūṇyasmai savanāni haryata indrāya somā harayo dadhanvire

हिन्दी अर्थ

का०२०॥ सु° २७ अथरवैवेद-भाष्य ६५ . है । इसी परमेदवर के प्रकाश से (दिवि). द्युलोक मे (रोचना) चमकते नदहव्-तारागण (रोचन्ते). च्रमक रहे है । तथा इसी परमेश्वर की रचिकर

English

Wilt thou not drink thy fill thereof? To Indra have my songs of praise gone forth, thus rapidly sent hence,

अध्याय 20

श्लोक 31.2

अरं कामा॑य॒ हर॑यो दधन्विरे स्थि॒राय॑ हिन्व॒न् हर॑यो॒ हरी॑ तु॒रा।अर्व॑द्भि॒र्यो हरि॑भि॒र्जोष॒मीय॑ते॒ सो अ॑स्य॒ कामं॒ हरि॑वन्तमानशे

araṃ kāmāya harayo dadhanvire sthirāya hinvan harayo harī turā| arvadbhiryo haribhirjoṣamīyate so asya kāmaṃ harivantamānaśe

हिन्दी अर्थ

१६९. युञन्त्यस्य काम्या इरी विधसा रथै । . (काम्या =काम्यौ योग-सांघना के लिये चाही गई, (हरी) चित्त को विषयों से हर लेनेवाली, (विपक्षसा) सुषुम्णा-नाड़ौ क अलग-अलग दो पावो मे लगी हृद, (शोणा) भरे भ्रौर पीले से रगो वाली, (धृष्णू)

English

To turn him to the Soma-draught. Hither with songs of praise we call Indra to drink the Soma. juice:

अध्याय 20

श्लोक 31.3

हरि॑श्मशारु॒र्हरि॑केश आय॒सस्तु॑र॒स्पेये॒ यो ह॑रि॒पा अव॑र्धत ।अर्व॑द्भि॒र्यो हरि॑भिर्वा॒जिनी॑वसु॒रति॒ विश्वा॑ दुरि॒ता पारि॑ष॒द्धरी॑

hariśmaśārurharikeśa āyasasturaspeye yo haripā avardhata | arvadbhiryo haribhirvājinīvasurati viśvā duritā pāriṣaddharī

हिन्दी अर्थ

मजब्ूत,. (नृवाहसा) योगिजनों को उनके . उदेश्य तक. पूहुंवानेवाली इडा भ्रौर पिङ्गला नाडयो को भस्य ) इस परमेदवर के (रथे) रमणीय १६६. केतं ुग्बंकेतेे पेश मयां असं । समुषद्भिरजायथाः ॥६॥ (इन्र) है परमेदवर ! (यथा) जैसे (त्वम् ) भाप (एक इत ) भकेले ही (वस्वः) वैदिक ज्ञान-सम्पत्ति कै (ईशीय) भधीदवर है, वसे.

English

Will he not come to us by lauds? Indra, these Somas are expressed, Take them within thy belly,

अध्याय 20

श्लोक 31.4

स्रुवे॑व॒ यस्य॒ हरि॑णी विपे॒ततुः॒ शिप्रे॒ वाजा॑य॒ हरि॑णी॒ दवि॑ध्वतः ।प्र यत् कृ॒ते च॑म॒से मर्मृ॑ज॒द्धरी॑ पी॒त्वा मद॑स्य हर्य॒तस्यान्ध॑सः

sruveva yasya hariṇī vipetatuḥ śipre vājāya hariṇī davidhvataḥ | pra yat kṛte camase marmṛjaddharī pītvā madasya haryatasyāndhasaḥ

हिन्दी अर्थ

६८ भ्रथर्वेवेद-भाष्य का० २० । सु° २७ ग्रभीदवर बन जाऊं, तो (मे) मेरा (स्तोता) शिष्य (गोषखा) वेदव्राणी ज्ञाता हो जाता । उपासक परमेदवर से शिकायत करता है किर्गीभ्रापका स्तोता हृं, परन्तु भ्राप" की कृषा भ्रभी तक नहीं हुई कि मँ मी. वेदवाणी ररहस्या्थो को जान पाता । १६८. धिक्षैयमस्मे दित्सेयं शचीपते मनीषिणं ।

English

Lord Of Hundred Powers, thou Prince of wealth. We know thee winner of the spoil and resolute in battles, Sage!

अध्याय 20

श्लोक 31.5

उ॒त स्म॒ सद्म॑ हर्य॒तस्य॑ प॒स्त्यो॒३रत्यो॒ न वाजं॒ हरि॑वां अचिक्रदत्।म॒ही चि॒द्धि धि॒षणाह॑र्य॒दोज॑सा बृ॒हद् वयो॑ दधिषे हर्य॒तश्चि॒दा

uta sma sadma haryatasya pastyo3ratyo na vājaṃ harivāṃ acikradat| mahī ciddhi dhiṣaṇāharyadojasā bṛhad vayo dadhiṣe haryataścidā

हिन्दी अर्थ

(शचीपते) है प्रज्ञा भरौर वेदवाणियों के पति ! (यद्) जो (्रहम्) मै (गोपतिः) वदवाणियोँ का आौर समग्र पुथिवी का पति (स्याम्) पाथिव-सम्पत्तियो का दान भी करू । उपासक वेदज्ञान भौर पाथिव सम्पत्ति, इन दोनों का पति होना चाहता है । इसीलिये उसे “मन्त २ के अनुसार वेदवाणी कै

English

Therefore thy blessing we implore. Borne hither by thy stallions, drink, Indra, this juice which we have pressed,

अध्याय 20

श्लोक 32.1

आ रोद॑सी॒ हर्य॑माणो महि॒त्वा नव्यं॑नव्यं हर्यसि॒ मन्म॒ नु प्रि॒यम्।प्र प॒स्त्यमसुर हर्य॒तं गोरा॒विष्कृ॑धि॒ हर॑ये॒ सूर्या॑य

ā rodasī haryamāṇo mahitvā navyaṃnavyaṃ haryasi manma nu priyam| pra pastyamasura haryataṃ gorāviṣkṛdhi haraye sūryāya

हिन्दी अर्थ

गर्धा रखता है, भौर वैदिक रहस्यार्थोँ की भी । इसलिये वह . भ्रसफल है । मो वाक् वेदवाणी (निघ० १।११) ; तथा पृथिवी (निष० १।१)१. (सूनृता) प्रिय तथां सत्यरूपा (षेनुः) वेदवाणी (सुन्वते) भक्तिरसवाले भ्रौर अरव का ज्ञान (दुहे) प्रदान करती है। ।

English

Mingled with barley and with milk. Indra, for thee in thine own place I urge the Soma for thy draught:

अध्याय 20

श्लोक 32.2

आ त्वा॑ ह॒र्यन्तं॑ प्र॒युजो॒ जना॑नां॒ रथे॑ वहन्तु॒ हरि॑शिप्रमिन्द्र ।पिबा॒ यथा॒ प्रति॑भृतस्य॒ मध्वो॒ हर्य॑न् य॒ज्ञं स॑ध॒मादे॒ दशो॑णिम्

ā tvā haryantaṃ prayujo janānāṃ rathe vahantu hariśipramindra | pibā yathā pratibhṛtasya madhvo haryan yajñaṃ sadhamāde daśoṇim

हिन्दी अर्थ

किरणः, वच , चन्द्रमा, भूमिः, वाणी जलं बा(उणा० कोष २।६७) वं दिक पुस्तकालय, भरजमेर । अरव = इन्द्रियां, मन, सूयं, बहि, भ्रषव, पशु, वीयं भ्रादि । वेदवाणी इन सब विष्यो का ज्ञान प्रदान करतीदहै।+ १७०. नते वर्ताि राध॑स इन्दं देवो न मत्यः । 1क० २० । सु०.२८ ग्थवंवेद-मोष्य । । ६९.

English

Deep in thy heart let it remain. We call on thee, the Ancient One, Indra, to drink the Soma juice,

अध्याय 20

श्लोक 32.3

अपाः॒ पूर्वे॑षां हरिवः सु॒ताना॒मथो॑ इ॒दं सव॑नं॒ केव॑लं ते ।म॒म॒द्धि सोमं॒ मधु॑मन्तमिन्द्र स॒त्रा वृ॑षं ज॒ठर॒ आ वृ॑षस्व

apāḥ pūrveṣāṃ harivaḥ sutānāmatho idaṃ savanaṃ kevalaṃ te | mamaddhi somaṃ madhumantamindra satrā vṛṣaṃ jaṭhara ā vṛṣasva

हिन्दी अर्थ

जो धन (दित्ससि). देना चाहते ह, उस (ते). भाप के (राधसः) धन मेँ (वर्ता) खकावट डालनेवाला (न देवः स्ति) न कोरर देव है, भ्रौर (न मत्यः) न कोई मनुष्य । वर्ता = निवारणकर््ता.। (भ्रोपशम्) सौरमण्डले के शिरोभूषणरूप सूयं को (दिवि) द्युलोक (चक्राणः ) भरकट करते हए प रमेदवंर ने (यद्, जो (भ्रमिम्) भूमि को

English

We Kusikas who seek thine aid. Indra, the mortal man well guarded by thine aid goes foremost in the wealth of horses and of

अध्याय 20

श्लोक 33.1

अ॒प्सु धू॒तस्य॑ हरिवः॒ पिबे॒ह नृभिः॑ सु॒तस्य॑ ज॒ठरं॑ पृणस्व ।मि॒मि॒क्षुर्यमद्र॑य इन्द्र॒ तुभ्यं॒ तेभि॑र्वर्धस्व॒ मद॑मुक्थवाहः

apsu dhūtasya harivaḥ pibeha nṛbhiḥ sutasya jaṭharaṃ pṛṇasva | mimikṣuryamadraya indra tubhyaṃ tebhirvardhasva madamukthavāhaḥ

हिन्दी अर्थ

, (न्द्र) है प रमेदवर ! (वावृधानस्य) संसार की वुद्धि करते हृए, तथां (विद्वा धनानि) संसारके सभी प्रकार के धनों पर (जिग्युषः) विजय पाए हृए (ते) भापके (वयम्) हेम उपासक, भ्राप से ( ऊतिम्) सुरक्षा का (भ्रावृणीमहे) वर मागतेर्है। . । विशेषरूपे फलाया है । भौर (रोचना) -चुलोक के चमकते सूरयं-नक्षत्र- तारागणं को विविधरूप में फलाया है । तथा (सोमस्य मदे) भक्तिरस

English

kine. With amplest wealth thou fillest him, as round about the waters clearly seen afar fill Sindhu

अध्याय 20

श्लोक 33.2

प्रोग्रां पी॒तिं वृष्ण॑ इयर्मि स॒त्यां प्र॒यै सु॒तस्य॑ हर्यश्व॒ तुभ्य॑म्।इन्द्र॒ धेना॑भिरि॒ह मा॑दयस्व धी॒भिर्विश्वा॑भिः॒ शच्या॑ गृणा॒नः

progrāṃ pītiṃ vṛṣṇa iyarmi satyāṃ prayai sutasya haryaśva tubhyam| indra dhenābhiriha mādayasva dhībhirviśvābhiḥ śacyā gṛṇānaḥ

हिन्दी अर्थ

७० . , ' भ्रथर्वंवेद-माष्य का० २० सू०.२८ अङ्किरोभ्यः) प्राणायाम के भभ्यासियों के लिये प रमेदवर ने (गाः) हदय की गुफा में छिपी हई ज्ञान की किरणों को (भराविष्छृण्वन्) प रभेदवर ने भ्राविष्कृत कर दिया है, प्रकट कर दिया है । भौर ज्ञान-किरणो पर पड़

English

full. The heavenly waters come not nigh the priestly bowl: they but look down and see how far

अध्याय 20

श्लोक 33.3

ऊ॒ती श॑चीव॒स्तव॑ वी॒र्येण॒ वयो॒ दधा॑ना उ॒शिज॑ ऋत॒ज्ञाः ।प्र॒जाव॑दिन्द्र॒ मनु॑षो दुरो॒णे त॒स्थुर्गृ॒णन्तः॑ सध॒माद्या॑सः

ūtī śacīvastava vīryeṇa vayo dadhānā uśija ṛtajñāḥ | prajāvadindra manuṣo duroṇe tasthurgṛṇantaḥ sadhamādyāsaḥ

हिन्दी अर्थ

मानो (भर्वाव्चं नुनुदे) नीचे पटक दिया है । भर्जिरसः=प्राणादि- (सोयण)। प्राणायाम के परिपक्क हौ जाने पर चित्त पर पड़ा भावरण क्षीण हो जाता है । य॒थाः- “ततः क्षीयते प्रकाशावरणम् (योग०.२।५२)। हृईः (न रोचना) दृढ़ दीप्तियों को (दृ"हितानि) ओर सुदृढ कर दिया हैः. (स्थिराणि) इन्हं स्थिर कर दिया है ! (न पराणुदे) गब थे दीप्तियां हटाई नहीं जा सकतीं । ६ १

English

mid-air is spread: The Deities conduct the pious man to them: like suitors they delight in him who loveth

अध्याय 20

श्लोक 34.1

यो जा॒त ए॒व प्र॑थ॒मो मन॑स्वान् दे॒वो दे॒वान् क्रतु॑ना प॒र्यभू॑षत्।यस्य॒ शुष्मा॒द् रोद॑सी॒ अभ्य॑सेतां नृ॒म्णस्य॑ म॒ह्ना स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yo jāta eva prathamo manasvān devo devān kratunā paryabhūṣat| yasya śuṣmād rodasī abhyasetāṃ nṛmṇasya mahnā sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

को परमेद॑वंरने हटा दिया है, भ्रौर सात्विक प्रकाशो को स्थिर कर. दिया है । योगिराज श्री जगन्नाथ पथिक “सन्ध्यायोग" में लिखते ह कि “नक्षत्रों से भरे गगन के समान भासनेवाला “सहल्लार-चक्र” है पृ १६७ । मन्त्र -करा आधिहैविक अर्थं निम्नलिखित हैः - परमेकवर ने

English

prayer. 276

अध्याय 20

श्लोक 34.2

यः पृ॑थि॒वीं व्यथ॑माना॒मदृं॑ह॒द् यः पर्व॑ता॒न् प्रकु॑पिताँ॒ अर॑म्णात्।यो अ॒न्तरि॑क्षं विम॒मे वरी॑यो॒ यो द्यामस्त॑भ्ना॒त् स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yaḥ pṛthivīṃ vyathamānāmadṛṃhad yaḥ parvatān prakupitā~ aramṇāt| yo antarikṣaṃ vimame varīyo yo dyāmastabhnāt sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

करते हुए (ये) जो उपासक, (हरिम्) चित्तहारी ५ नभः है। मौर ८ (यम्) जिसे किं उपासक (हरिभिः) ऋग्वेदीय स्तुतियों तथा स द्वारा (भरा पृणन्ति) तृप्त करते है, (न) जैसे कि (षेनवः) ० ५ १०५. हरे एसे ए ) परमेश्वर के लिये है १८४. सो ख बज इरितो य आयसो हरिर्निकामो हरिरा गमसतयोः ।

English

Here take delight. O Indra, in our voices while thou art hymned with power and all our spirit. In every need, in every fray we call, as friends, to succour us

अध्याय 20

श्लोक 34.3

यो ह॒त्वा हि॒मरि॑णात् स॒प्त सिन्धू॒न् यो गा उ॒दाज॑दप॒धा व॒लस्य॑ ।यो अश्म॑नोर॒न्तर॒ग्निं ज॒जान॑ सं॒वृक् स॒मत्सु॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yo hatvā himariṇāt sapta sindhūn yo gā udājadapadhā valasya | yo aśmanorantaragniṃ jajāna saṃvṛk samatsu sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

(सः) वह॒ परमेश्वर (भस्य) इस उपासक का मानो (वचः) (यः) जो कि (हरितः) उपासक के कामादि ५ क) ा - (आयसः) लोहसमान सुदुढ़ है । (हरिः पापहारी परमेष्वर उपासक की (निकामः) कामना का भ्रन्तिम ध्येय है। (हरिः) पापहारी परमेदवर. ही उपासंक के (गभस्त्योः) हाथ भादि कर्मेन्दरियों का विषय होतां है ¡ तब

English

Indra the mightiest of all. If he will hear us let him come with succour of a thousand kinds,

अध्याय 20

श्लोक 34.4

येने॒मा विश्वा॒ च्यव॑ना कृ॒तानि॒ यो दासं वर्ण॒मध॑रं॒ गुहाकः॑ ।श्व॒घ्नीव॒ यो जि॑गी॒वां ल॒क्षमाद॑द॒र्यः पु॒ष्टानि॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yenemā viśvā cyavanā kṛtāni yo dāsaṃ varṇamadharaṃ guhākaḥ | śvaghnīva yo jigīvāṃ lakṣamādadaryaḥ puṣṭāni sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

ओौ र (हरिमन्युसायकः) पापहारी परभेदवर के 9 ४ गा का विनाश कर देता है ।. (दनद्र) परमेर्वर म (हरिता. ङपा) सब मनोः कम ्रय्वेद-माप्य - का० २०।ब्० ३१ १८५. दिवि न केतुरधि षायि हयतो विष्यचए् वजो हरितो. न रघा । - तुददहिं हरिशिप्रो य आंयसः सहलंछोका अभवदरिंभरः ॥४॥

English

And all that strengthens, to our call. I call him, mighty to resist, the Hero of our ancient home,

अध्याय 20

श्लोक 34.5

यं स्मा॑ पृ॒च्छन्ति॒ कुह॒ सेति॒ घो॒रमु॒तेमा॑हु॒र्नैषो अ॒स्तीत्ये॑नम्।सो अ॒र्यः पु॒ष्टीर्विज॑ इ॒वा मि॑नाति॒ श्रद॑स्मै धत्त॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yaṃ smā pṛcchanti kuha seti ghoramutemāhurnaiṣo astītyenam| so aryaḥ puṣṭīrvija ivā mināti śradasmai dhatta sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

(दिवि) द्ूलोक में (न) जसे (केतुः) ज्ञान का हेतु सूयं (भधिधायि) सौर-लोक के अ्रधिष्ठातुरूप मे स्थापित है, वैसे (दिवि) मस्तिष्कं (केतुः) मँ स्थित है । (हरितः) हरण करनेवाले (वचरः) विद्युद्-व (न) के सदुश,

English

Thee whom my sire invoked of old. They who stand round him as he moves harness the bright, the ruddy steed:

अध्याय 20

श्लोक 34.6

यो र॒ध्रस्य॑ चोदि॒ता यः कृ॒शस्य॒ यो ब्र॒ह्मणो॒ नाध॑मानस्य की॒रेः ।यु॒क्तग्रा॑व्णो॒ योऽवि॒ता सु॑शि॒प्रः सु॒तसो॑मस्य॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yo radhrasya coditā yaḥ kṛśasya yo brahmaṇo nādhamānasya kīreḥ | yuktagrāvṇo yo'vitā suśipraḥ sutasomasya sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

प्रहार करता है। परमेद्वर का (यः) जो (आयसः) लोहसमन सुदृढ (वजः) न्याय-वच्न है, जो कि (हरिरिपरः) पापहारी स्वरूपवाला है, वह, (अहिम्) उपासक के सांप की तरह ॒विषेले-पापों को (तुदत्) व्यथित कर देता है । तब उपासक, जो कि (हरिमरः) 'परमेदवर को भक्तिरसो की जाता है । सहस्रशोकाः-- सहस्र +-ओकस् (गृह, भश्रय)।

English

The lights are shining in the sky. On both sides of the car they yoke the two bay coursers dear to him,

अध्याय 20

श्लोक 34.7

यस्याश्वा॑सः प्र॒दिशि॒ यस्य॒ गावो॒ यस्य॒ ग्रामा॒ यस्य॒ विश्वे॒ रथा॑सः ।यः सूर्यं॒ य उ॒षसं॑ ज॒जान॒ यो अ॒पां ने॒ता स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yasyāśvāsaḥ pradiśi yasya gāvo yasya grāmā yasya viśve rathāsaḥ | yaḥ sūryaṃ ya uṣasaṃ jajāna yo apāṃ netā sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

(हरि) है ममोहारी या पापहारी प्रकाशवाले परमेद्वरः ! (त्वम्) यज्ञो के यजमान द्वाया (अरहयंथाः) चाहे गये ह श्रौर (उपस्तुतः) उपा- सना-विधि से स्तुतियां पातेः रहे है । (त्वम्) भप (हय॑सि) उपासको को

English

Bold, tawny, bearers of the thief. Thou, making light where no light was, and form, O Men! where form was not,

अध्याय 20

श्लोक 34.8

यं क्रन्द॑सी संय॒ती वि॒ह्वये॑ते॒ परेऽव॑रे उ॒भया॑ अ॒मित्राः॑ ।स॒मा॒नं चि॒द् रथ॑मातस्थि॒वांसा॒ नाना॑ हवेते॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yaṃ krandasī saṃyatī vihvayete pare'vare ubhayā amitrāḥ | samānaṃ cid rathamātasthivāṃsā nānā havete sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

चाहते है । (तव) ापंका (विदवम् ) संसार (उवथ्यम् ) प्रांसनीय है । (हरिजात) ऋक् की स्तुंतियो तथा साम के गानों द्वारा प्रकट हए का० २०। सू० ३१ मथवंवेद-माष्य . . ७५ मनोहारी ऋग्वेदीय-स्तुतियां तथा सामगान, (विणम्) पापों के मे (वहत) वहन करते है । है उपासको ! (भस्म) इस परमेदवर के लिये, (पुरूणि) भक्तिरस से पूरित (सवनानि) सक्ति-यज्ञो को (हर्यत)

English

Wast born together with the Dawns. I should be fain, O Lord of Might, to strengthen and enrich the sage,

अध्याय 20

श्लोक 34.9

यस्मा॒न्न ऋ॒ते वि॒जय॑न्ते॒ जना॑सो॒ यं युध्य॑माना॒ अव॑से॒ हव॑न्ते ।यो विश्व॑स्य प्रति॒मानं॑ ब॒भूव॒ यो अ॑च्युत॒च्युत् स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yasmānna ṛte vijayante janāso yaṃ yudhyamānā avase havante | yo viśvasya pratimānaṃ babhūva yo acyutacyut sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

स्वाभिमुख करनेवाले (सोमाः) भक्तिरस (दधन्विरे) प्रवाहित.होः रहे है । रथे परमेदवर, उपासक के शरीर-रथ का स्वामी बनकर, उपासक को प्रेरणाएं देने लगता है । दधन्विरे = धवि गतौ । अवेशिमरयो इरिंभिजोषमीयते सो अस्य॒ काम इरिवन्तमानरे ॥२॥

English

Were I the lord of herds of kine, To worshippers who press the juice thy goodness, Indra, is a cow.

अध्याय 20

श्लोक 34.10

यः शश्व॑तो॒ मह्येनो॒ दधा॑ना॒नम॑न्यमानां॒छर्वा॑ ज॒घान॑ ।यः शर्ध॑ते॒ नानु॒ददा॑ति शृ॒ध्यां यो दस्यो॑र्ह॒न्ता स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yaḥ śaśvato mahyeno dadhānānamanyamānāṃcharvā jaghāna | yaḥ śardhate nānudadāti śṛdhyāṃ yo dasyorhantā sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

द्युलोक के चमकते हृए नक्ष = तारां को,जो कि दुढुङूपमेंस्थित रहै, उन खूब दृढ कर दिया है । वे द्युलोक मे स्थिर है, गौर अपनी-भरपनी सपिकष 1 स्थिति से विच्युत नहीं होते” । .. .

English

Praiseworthy blessing hast thou laid upon the pair who with uplifted ladle serve thee, man and wife.

अध्याय 20

श्लोक 34.11

यः शम्ब॑रं॒ पर्व॑तेषु क्षि॒यन्तं॑ चत्वारिं॒श्यां श॒रद्य॒न्ववि॑न्दत्।ओ॒जा॒यमा॑नं॒ यो अहिं॑ ज॒घान॒ दानुं॒ शया॑नं॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yaḥ śambaraṃ parvateṣu kṣiyantaṃ catvāriṃśyāṃ śaradyanvavindat| ojāyamānaṃ yo ahiṃ jaghāna dānuṃ śayānaṃ sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

(अपाम्) जलो की ९५ ) 1 भ्य के (इव ष ५५. कीःतंरङ्गं, (इन्द्र) है पर ¦! (मदन्) म भती इ (सनत क प्रवाह के. सदृश भवाहि हो रही है । भौर (मदाः ते) मुक उपासको में मस्ती देनेवाले आप के भ्रानन्दरस (वि) विकषेषरूप भे (भराजिषुः). मुक उपासक पर राज्य कर रहे है । उपासको दारा की गई स्तुतियों भँ उत्तरोत्तर वृद्धि . करते (भसि) है ।

English

Unchecked he dwells and prospers in thy law: thy power brings blessing to the sacrificer pouring gifts.

अध्याय 20

श्लोक 34.12

यः शम्ब॑रं प॒र्यत॑र॒त् कसी॑भि॒र्योऽचा॑रुका॒स्नापि॑बत् सु॒तस्य॑ ।अ॒न्तर्गि॒रौ यज॑मानं ब॒हुं जनं॒ यस्मि॒न्नामू॑र्छ॒त् स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yaḥ śambaraṃ paryatarat kasībhiryo'cārukāsnāpibat sutasya | antargirau yajamānaṃ bahuṃ janaṃ yasminnāmūrchat sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

१७८. इन्द्रमित केशिना इरीं सोमपेयाय बक्षतः । , उष॑ यहं सुरा॑सम् ॥६॥ ह (केशिना ज्ञान ओर भक्ति का प्रकार देनेवाले (हरीः) चित्तहारी भे (उप वक्षतः) प्रकट कर देते है । ५ (इन्दर) है परमेदवर ! शरीर मेँ रहनेवाले (श्रषाम्) रसरक्तरूपी

English

First the Angirases won themselves vital power, whose fires were kindled through good deeds and sacrifice.

अध्याय 20

श्लोक 34.13

यः स॒प्तर॑श्मिर्वृष॒भस्तुवि॑ष्मान॒वासृ॑ज॒त् सर्त॑वे स॒प्त सिन्धू॑न्।यो रौ॑हि॒णमस्फु॑र॒द् वज्र॑बाहु॒र्द्यामा॒रोह॑न्तं॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yaḥ saptaraśmirvṛṣabhastuviṣmānavāsṛjat sartave sapta sindhūn| yo rauhiṇamasphurad vajrabāhurdyāmārohantaṃ sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

न दछूटनेवाले पाप-वृच्र के. (शिरः) सिर को (उदवत॑यः) काट दिया है। दुबु तियो पर (भजयः) आप ने हमे विजय दिलाई है। अभिप्राय यह है कि ऊर्ध्वरेता उपासक स्पर्धा रादि दुवृ तियं पर जब. विजय पा लेता है, ७२ भरथर्ववेद-माष्य काऽ २०। सुऽ ३०

English

The men together found the Pani’s hoarded wealth, the cattle, and the wealth in horses and in kine,

अध्याय 20

श्लोक 34.14

द्यावा॑ चिदस्मै पृथि॒वी न॑मेते॒ शुष्मा॑च्चिदस्य॒ पर्व॑ता भयन्ते ।यः सो॑म॒पा नि॑चि॒तो वज्र॑बाहु॒र्यो वज्र॑हस्तः॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

dyāvā cidasmai pṛthivī namete śuṣmāccidasya parvatā bhayante | yaḥ somapā nicito vajrabāhuryo vajrahastaḥ sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

परमेदवर की कृपा का आह्वान भरावदयक है। - सहारे (उत् सिसृप्सतः) सुषुम्गानाडी के ऊपर की गोर सपण करनेवाले, शनैः शनैः उ्वंगति करनेवाले, भौर (द्याम्) शिरस्यथ सहलार-चक्र की (भरवधूनुथाः) पृथक् कर दिया है । मा्या=-भज्ञा ( निव० ३।६) । ;

English

Atharvan first by sacrifices laid the path; then, guardian of the Law, sprang up the loving Sun.

अध्याय 20

श्लोक 34.15

यः सु॒न्वन्त॒मव॑ति॒ यः पच॑न्तं॒ यः शंस॑न्तं॒ यः श॑शमा॒नमू॒ती।यस्य॒ ब्रह्म॒ वर्ध॑नं॒ यस्य॒ सोमो॒ यस्ये॒दं राधः॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yaḥ sunvantamavati yaḥ pacantaṃ yaḥ śaṃsantaṃ yaḥ śaśamānamūtī| yasya brahma vardhanaṃ yasya somo yasyedaṃ rādhaḥ sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) है परमेदवर ! (विषूचीम्) विधूचिका-रोग-के सदृ विना करनेवाली, (असुन्वाम्) भक्तिरस से रहित, (संसदम्) अपितु सांसारिक-भोगों मेँ ही स्थित हई नास्तिकता-वृत्ति को (व्यनाशयः) भराषने.

English

Usanā Kāvya drove the kine hither with him: let us with offer- ings honour Yama’s deathless birth.

अध्याय 20

श्लोक 34.16

जा॒तो व्यख्यत् पि॒त्रोरु॒पस्थे॒ भुवो॒ न वे॑द जनि॒तुः पर॑स्य ।स्त॒वि॒ष्यमा॑णो॒ नो यो अ॒स्मद् व्र॒ता दे॒वानां॒ स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

jāto vyakhyat pitrorupasthe bhuvo na veda janituḥ parasya | staviṣyamāṇo no yo asmad vratā devānāṃ sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

विनष्ट कर दिया है । (सोमपाः) भाप हमारे भक्तिरसं का पान कीजिये । ओौर (उत्तरः भवन् ) भौर उत्कृष्ट तैरानेवाली नौका बन कर हमे मव- सागर से तैराद्ये । तरः == तरस् ¶०81, 19" (्रापटे)।

English

When sacred grass is trimmed to aid the auspicious work, or the hymn makes its voice of praise sound to the sky,

अध्याय 20

श्लोक 34.17

यः सोम॑कामो॒ हर्य॑श्वः सू॒रिर्यस्मा॒द् रेज॑न्ते॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।यो ज॒घान॒ शम्ब॑रं॒ यश्च॒ शुष्णं॒ य ए॑कवी॒रः स ज॑नास॒ इन्द्रः॑

yaḥ somakāmo haryaśvaḥ sūriryasmād rejante bhuvanāni viśvā | yo jaghāna śambaraṃ yaśca śuṣṇaṃ ya ekavīraḥ sa janāsa indraḥ

हिन्दी अर्थ

ते नयो इरिभिषाड सेच॑त॒ आ त॑ मभ्न्ु देहं गिरः॥१ -उषासक (ते हरी) भ्राप के दिये पापहारी ऋगवेद भौर सामवेद की . (भवन्वे) मै मक्तिपूवंक याचना करता रहता हं । ५१८ (यः). जो भ्रपं = (हरिभिः) पापहारी ऋग्वेदीय स्तुतियों तथा सामवेद के के

English

Where the stone rings as ‘twere a singer skilled in laud,—Indra in truth delights when these come near to him.

अध्याय 20

श्लोक 34.18

यः सु॑न्व॒ते पच॑ते दु॒ध्र आ चि॒द् वाजं॒ दर्द॑र्षि॒ स किला॑सि स॒त्यः ।व॒यं त॑ इन्द्र वि॒श्वह॑ प्रि॒यासः॑ सु॒वीरा॑सो वि॒दथ॒मा व॑देम

yaḥ sunvate pacate dudhra ā cid vājaṃ dardarṣi sa kilāsi satyaḥ | vayaṃ ta indra viśvaha priyāsaḥ suvīrāso vidathamā vadema

हिन्दी अर्थ

का०.२० । सू० ३० मथववेद-माष्य ७३ कारण, हम उपासकों पर (वृतं न) धृत के सदृश पुष्टिदायक (चार) भ्रौर रचिकर आनन्दरस (सेचते) . सचते रहते है । उस (त्वा) राप

English

To make thee start, a strong true draught I offer to thee the Bull, O thou whom bay steeds carry.

अध्याय 20

श्लोक 35.1

अ॒स्मा इदु॒ प्र त॒वसे॑ तु॒राय॒ प्रयो॒ न ह॑र्मि॒ स्तोमं॒ माहि॑नाय ।ऋची॑षमा॒याध्रि॑गव॒ ओह॒मिन्द्रा॑य॒ ब्रह्मा॑णि रा॒तत॑मा

asmā idu pra tavase turāya prayo na harmi stomaṃ māhināya | ṛcīṣamāyādhrigava ohamindrāya brahmāṇi rātatamā

हिन्दी अर्थ

(हरयः) परमेश्वर को स्वाभिमुख करनेवाले भक्तिरस, जब परमे- पर्याप्त हो जाते हँ । (हरयः) जब ये भक्तिरस वास्तव मेः परमेदवर को निज प्रेरणा इारा भ्रेरित करने लगतादहै । (यः) जो परं

English

Yielding in plenty kine and steeds. None is there, Indra, God or man, to hinder thy munificence,

अध्याय 20

श्लोक 35.2

अ॒स्मा इदु॒ प्रय॑ इव॒ प्र यं॑सि॒ भरा॑म्याङ्गू॒षं बाधे॑ सुवृ॒क्ति।इन्द्रा॑य हृ॒दा मन॑सा मनी॒षा प्र॒त्नाय॒ पत्ये॒ धियो॑ मर्जयन्त

asmā idu praya iva pra yaṃsi bharāmyāṅgūṣaṃ bādhe suvṛkti| indrāya hṛdā manasā manīṣā pratnāya patye dhiyo marjayanta

हिन्दी अर्थ

१९४. . अपाः पूषा हरिवः सुतानामथो इदं सव॑नं केषं ते । - काल से उपासको के (सुतानाम्). भक्तिरसो का (अपाः) पान किया है। (अथो) भ्र (इदम्) यह (सवनम्) हमारा भक्तिरस भमी (केवलं ते) ..

English

Soma juice, The Bountiful to our sacrifice.

अध्याय 20

श्लोक 35.3

अ॒स्मा इदु॒ त्यमु॑प॒मं स्व॒र्षां भरा॑म्याङ्गू॒षमा॒स्येऽन ।मंहि॑ष्ठ॒मच्छो॑क्तिभिर्मती॒नां सु॑वृ॒क्तिभिः॑ सू॒रिं वा॑वृ॒धध्यै॑

asmā idu tyamupamaṃ svarṣāṃ bharāmyāṅgūṣamāsye'na | maṃhiṣṭhamacchoktibhirmatīnāṃ suvṛktibhiḥ sūriṃ vāvṛdhadhyai

हिन्दी अर्थ

(हरिवः). है इन्दरिया्वोँ के, या ऋक्-साम की स्तुतयो के उपासक-नेताभ्रो दवारा . (सुतस्य) निष्पादित भक्तिरस का, (इह) हस . अन्तरिक्ष को. से पूरित कर दीजिये । (भ्रदरयः) पर्व॑तो के सदृश

English

With waters’ foam thou torest off, Indra, the head of Namuchi, Subduing all contending hosts.

अध्याय 20

श्लोक 35.4

अ॒स्मा इदु॒ स्तोमं॒ सं हि॑नोमि॒ रथं॒ न तष्टे॑व॒ तत्सि॑नाय ।गिर॑श्च॒ गिर्वा॑हसे सुवृ॒क्तीन्द्रा॑य विश्वमि॒न्वं मेधि॑राय

asmā idu stomaṃ saṃ hinomi rathaṃ na taṣṭeva tatsināya | giraśca girvāhase suvṛktīndrāya viśvaminvaṃ medhirāya

हिन्दी अर्थ

मक्तिरसो को -स्वीकांर करके आप (उक्यवाहः) स्तुतिं के वाहक परमेश्वरं को उवर है, जठर है । भिमिकुः-- मिह सेने ? । हे परमेदवर ! (नाभिः) भ्रानन्दरसरूपी दुग्ध. पिलानेवालीः वेदवाणियों दारा (इह) इस जीवन मे (मादयस्व) मुभ तृप्त कर. .दीजिये। र्म

English

The Dasyus, when they fain would climb by magic arts and mount to heaven, Thou, Indra, castest down to earth.

अध्याय 20

श्लोक 35.5

अ॒स्मा इदु॒ सप्ति॑मिव श्रव॒स्येन्द्रा॑या॒र्कं जु॒ह्वा॒३सम॑ञ्जे ।वी॒रं दा॒नौक॑सं व॒न्दध्यै॑ पु॒रां गू॒र्तश्र॑वसं द॒र्माण॑म्

asmā idu saptimiva śravasyendrāyārkaṃ juhvā3samañje | vīraṃ dānaukasaṃ vandadhyai purāṃ gūrtaśravasaṃ darmāṇam

हिन्दी अर्थ

दारा, तंथा (हच्या) वाणी द्वारा (गृणानः) भ्राप कीस्तुतियां कर रहा वाले, (ऋतज्ञाः) यथाथेवेत्ता (मनुषः) मननशील उपासक (तव) भ्रापके दीर्घायु धारण केरते हए; (सघमाद्यासः) तथा उपासना यज्ञो मे मिल

English

As Soma-drinker conquering all, thou scatteredst to every side Their band who poured no gifts to thee.

अध्याय 20

श्लोक 35.6

अ॒स्मा इदु॒ त्वष्टा॑ तक्ष॒द् वज्रं॒ स्वप॑स्तमं स्व॒र्यं॑१ रणा॑य ।वृ॒त्रस्य॑ चिद् वि॒दद् येन॒ मर्म॑ तु॒जन्नीशा॑नस्तुज॒ता कि॑ये॒धाः

asmā idu tvaṣṭā takṣad vajraṃ svapastamaṃ svaryaṃ1 raṇāya | vṛtrasya cid vidad yena marma tujannīśānastujatā kiyedhāḥ

हिन्दी अर्थ

(गृणन्तः) भापके स्तुतिगान करते है । (यः) जो पंरमेदवर (प्रथमः) भनादि - तथा सरव॑प्रथम शक्ति है (मनस्वान्) -मनस्वी है, (देवः) वह परमेर्वर देव (जात एव) उपासक ८9 भथववेद-माष्य का० २०। सुण ३४

English

In the great synod will I laud thy two bay steeds: I prize the sweet strong drink of thee the Warrior-God,

अध्याय 20

श्लोक 35.7

अ॒स्येदु॑ मा॒तुः सव॑नेषु स॒द्यो म॒हः पि॒तुं प॑पि॒वां चार्वन्ना॑ ।मु॒षा॒यद् विष्णुः॑ पच॒तं सही॑या॒न् विध्य॑द् वरा॒हं ति॒रो अद्रि॒मस्ता॑

asyedu mātuḥ savaneṣu sadyo mahaḥ pituṃ papivāṃ cārvannā | muṣāyad viṣṇuḥ pacataṃ sahīyān vidhyad varāhaṃ tiro adrimastā

हिन्दी अर्थ

भयभीत हृए-हुए अपने-अपने कर्तव्यो मे स्थित है, (जनासः) है सज्जनो ! (यः) जिसने (व्यथमानाम्). व्यथित हुई (पृथिवीम्) पृथिवीको पृथिवी सूयं से विभक्त हई है । विभाग-काल में पृथिवीठेसी ही .

English

His who pours lovely oil as’twere with yellow drops. Let my songs enter thee whose form hath golden tints.

अध्याय 20

श्लोक 35.8

अ॒स्मा इदु॒ ग्नाश्चि॑द् दे॒वप॑त्नी॒रिन्द्रा॑या॒र्कम॑हि॒हत्य॑ ऊवुः ।परि॒ द्यावा॑पृथि॒वी ज॑भ्र उ॒र्वी नास्य॒ ते म॑हि॒मानं॒ परि॑ ष्टः

asmā idu gnāścid devapatnīrindrāyārkamahihatya ūvuḥ | pari dyāvāpṛthivī jabhra urvī nāsya te mahimānaṃ pari ṣṭaḥ

हिन्दी अर्थ

दधकती-गेस रूप थी,जेसा कि सूर्यं था, भौर भरव भी है । रानः-शनैः पृथिवी तो-पृथिवीः तंल की सी या. पिधले घी-की-सी कुछ चनावस्था भँ आई । इसी प्रकार शनेः शनैः अधिकाधिक धनावस्थां मे से.गुजरती हई वतमानं दर्चाया है । ““व्यथ' का. भथं होता है “संचलनावस्था"” । जबकि -पृथिवी

English

Ye who—in concert sing unto the gold-hued place, like bay steeds driving onward to the heavenly seat,

अध्याय 20

श्लोक 35.9

अ॒स्ये दे॒व प्र रि॑रिचे महि॒त्वं दि॒वस्पृ॑थि॒व्याः पर्य॒न्तरि॑क्षात्।स्व॒रालिन्द्रो॒ दम॒ आ वि॒श्वगू॑र्तः स्व॒रिरम॑त्रो ववक्षे॒ रणा॑य

asye deva pra ririce mahitvaṃ divaspṛthivyāḥ paryantarikṣāt| svarālindro dama ā viśvagūrtaḥ svariramatro vavakṣe raṇāya

हिन्दी अर्थ

कै घटकं अवयव परस्पर एक-दूसरे के -साथ सुदृढ रूप मे बद्ध नहींथे। . जेसेकि समूद्रीय.जल के घटकं शवंयवर परस्पर एक दूसरे के साथ सुदृढ मे कहा है-“येन छ्ौर्ग्रा पुथिवी ' च बुदा” (यजु० ३२।६) । जब पुथिवी तरलोवस्था मे.था तंलावस्थामें थी, तज पथिवी- पर पाथिव-तरङ्ख ऊंची-ऊंची उठती रथी, जसे कि जलीय-घमुद्र मे तरङ्ख' उठती रहती है । ये पाथिव-तरङ्ग पवतो के रूप में उटृती रहीं, भौर ये तर क्गमय-पर्वत पृथिवी के तरल द्रव मेँ तंरते हए अपना-भपना स्थान बदलते रहते थे 1 शनैः-शनं

English

For Indra laud ye strength allied with tawny steeds, laud him whom cows content as’twere with yellow drops.

अध्याय 20

श्लोक 35.10

अ॒स्येदे॒व शव॑सा शु॒षन्तं॒ वि वृ॑श्च॒द् वज्रे॑ण वृ॒त्रमिन्द्रः॑ ।गा न व्रा॒णा अ॒वनी॑रमुञ्चद॒भि श्रवो॑ दा॒वने॒ सचे॑ताः

asyedeva śavasā śuṣantaṃ vi vṛścad vajreṇa vṛtramindraḥ | gā na vrāṇā avanīramuñcadabhi śravo dāvane sacetāḥ

हिन्दी अर्थ

साथ (जोषम् ईयते) प्रेम करने लगता है, (सः) वह परमे्वर ( भरस्य ) इस उपासक की (हरिवन्तं कामम्) परमेदवरप्राप्ति की कामना को (भ्रान्ते) भ्राप्त करा देता है, पुणं कर देता ह । १८९. इरिषमचार्खरिकेश आयसस्तुरस्पेये योह॑रिपा अवर्धत । जिस ॒परमेदवर का. (भायसः) लोहसमान सुद्ढ् न्याय-वसख, (हरिदमशारः) हरेभरे भर्थात् युवा शरीरो का भी. विनाच.करता,

English

The wealth which, lauded, thou wilt give. The sacrifice made Indra strong when he unrolled the earth and made

अध्याय 20

श्लोक 35.11

अ॒स्येदु॑ त्वे॒षसा॑ रन्त॒ सिन्ध॑वः॒ परि॒ यद् वज्रे॑ण सी॒मय॑च्छत्।ई॒शा॒न॒कृद् दा॒शुषे॑ दश॒स्यन् तु॒र्वीत॑ये गा॒धं तु॒र्वणिः॑ कः

asyedu tveṣasā ranta sindhavaḥ pari yad vajreṇa sīmayacchat| īśānakṛd dāśuṣe daśasyan turvītaye gādhaṃ turvaṇiḥ kaḥ

हिन्दी अर्थ

तथा (यः) जो न्याय-बच (हरिपाः) इन्दरियांष्वों का रक्षक होकर (पेये) ७६ परथरववेद-माष्य . काऽ २० सू० ३१. (भवं द्धिः) इन्दरियाद्वो के कारण उपासको के लिये "( वाजिनीवसुः)

English

Himself a diaden in heaven. Thine aid we claim, O Indra, thine who after thou hast waxen great.

अध्याय 20

श्लोक 35.12

अ॒स्मा इदु॒ प्र भ॑रा॒ तूतु॑जानो वृ॒त्राय॒ वज्र॒मीशा॑नः किये॒धाः ।गोर्न पर्व॒ वि र॑दा तिर॒श्चेष्य॒न्नर्णां॑स्य॒पां च॒रध्यै॑

asmā idu pra bharā tūtujāno vṛtrāya vajramīśānaḥ kiyedhāḥ | gorna parva vi radā tiraśceṣyannarṇāṃsyapāṃ caradhyai

हिन्दी अर्थ

दुरितों से (अरति प।रिषत्) पार कर देता हँ । हरि+दम (= शरीर) + शारः (शृणाति) । हरिकेशः न्=हरि +कः (केशाः == रदमयः)। = प यतक चमसे मेजर पीवा मदस्य ह॑तं॒न्ध॑स।(४॥ . (इव) जसे (हरिणी) मनोहारी (खवा =ल्वौ). दो ल्व घृताहृति के लिथे (वि पेततुः) भरलग-मलग परन्तु एक साथ यज्ञान्न की

English

Hast won all treasures for thine own. Showing the hidden he draye forth the cows for the Angirases,

अध्याय 20

श्लोक 35.13

अ॒स्येदु॒ प्र ब्रू॑हि पू॒र्व्याणि॑ तु॒रस्य॒ कर्मा॑णि॒ नव्य॑ उ॒क्थैः ।यु॒धे यदि॑ष्णा॒न आयु॑धान्यृघा॒यमा॑णो निरि॒णाति॒ शत्रू॑न्

asyedu pra brūhi pūrvyāṇi turasya karmāṇi navya ukthaiḥ | yudhe yadiṣṇāna āyudhānyṛghāyamāṇo niriṇāti śatrūn

हिन्दी अर्थ

देनेवाले (यस्य) जिस उपासक के. (हरिणी) मनोहारी (दिप्रे) दो हनु हृर् (विपेततुः) भरलग-मलग परन्तु एकसाथ वृत्त होते ह! भौर (यत्ते). जिस उपासक के लिये (चमसे). उसकं हृदय-चमस मेँ स्थित (मदस्य) रूपी भवो को (प्र ममु जत्) खूब माज देता है, स्वच्छ कर देता द-

English

And Vala he cast headlong down. By Indra were the luminous realms of heaven established and secured.

अध्याय 20

श्लोक 35.14

अ॒स्येदु॑ भि॒या गि॒रय॑श्च दृ॒ल्हा द्यावा॑ च॒ भूमा॑ ज॒नुष॑स्तुजेते ।उपो॑ वे॒नस्य॒ जोगु॑वान ओ॒णिं स॒द्यो भु॑वद् वी॒र्याय नो॒धाः

asyedu bhiyā girayaśca dṛlhā dyāvā ca bhūmā januṣastujete | upo venasya joguvāna oṇiṃ sadyo bhuvad vīryāya nodhāḥ

हिन्दी अर्थ

(उत) तच (पस्त्यः) गृहवासी (न) जसे. (सद्म) भपने निवास- . गृह कीं (अचिक्रदत्) बार-बार प्रशंसा करता है, वैसे (हरिवान्) हरि का परमेदवर की (वाजम्) शक्तियों का. (अचिक्रदत्) बार-बार कथन करता है । तब (धिषणा) उपासक की वाणी (भोजसा) . भओजस्विती होकर (शः) दिन प्रतिदिन । मही चित् हि) पूजनीया होती ज्ञाती है । (यद्) जबकि है उपासक ! तुः (हयंतः) काम्ब-परमेदवरः के. (बृहद् वयः). महान् भ्रानन्दरसरूपी अन्न को (दधिषे) अपने मे धारण कर लेता है । हर्यतः का० २० । सु० ३२. . भ्रथर्वेवेद-माष्य ७७

English

Firm and immovable in their place. Indra, thy laud moves quickly like a joyous wave of water-floods.

अध्याय 20

श्लोक 35.15

अ॒स्मा इदु॒ त्यदनु॑ दाय्येषा॒मेको॒ यद् वव्ने भूरे॒रीशा॑नः ।प्रैत॑शं॒ सूर्ये॑ पस्पृधा॒नं सौव॑श्व्ये॒ सुष्वि॑माव॒दिन्द्रः॑

asmā idu tyadanu dāyyeṣāmeko yad vavne bhūrerīśānaḥ | praitaśaṃ sūrye paspṛdhānaṃ sauvaśvye suṣvimāvadindraḥ

हिन्दी अर्थ

हे परभेदवर ! श्राप (रोदसी) चुलोक गौर भूलोक को ( महित्वा) प्रङृष्टरूप में आविष्कृत कीजिये । । किया है । इसलिये कवि लोग इस कान्ति से मोहित होकर नित्य नर्ई-नर्द (५५ व करते रहते हैँ । मन्मभिः मननीयैः स्तोत्रैः . (निंसं°

English

Bright shine the drops that gladden thee. I. For thou, O Indra, art the God whom hymns and praises magnify:

अध्याय 20

श्लोक 35.16

ए॒वा ते॑ हारियोजना सुवृ॒क्तीन्द्र॒ ब्रह्मा॑णि॒ गोत॑मासो अक्रन्।ऐषु॑ वि॒श्वपे॑शसं॒ धियं॑ धाः प्रा॒तर्म॒क्षू धि॒याव॑सु॒र्जगम्यात्

evā te hāriyojanā suvṛktīndra brahmāṇi gotamāso akran| aiṣu viśvapeśasaṃ dhiyaṃ dhāḥ prātarmakṣū dhiyāvasurjagamyāt

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) है परमेदवर ! (जनानाम्) उपासकजरनों के (परयुज ज्योतिवाले (त्वा) भ्रापको,. (रथे) उपासकजनों के शरीर-रथों म (भा वहन्तु). उनके स्वांमीरूप मेँ आवाहन करे, प्रार्थनाएं करे .-किं भ्रापही हमारे शरीर-रथों के प्रेरकं हों ।. है परमेदवर ! (दशोणिम्) कीजिये । भंमिप्राय यह है कि भाप. मधुर भक्तिरस के ग्रहेण दारा

English

Thou blessest those who worship thee. Bay horses with their long manes bring Indra to drink the

अध्याय 20

श्लोक 36.1

य एक॒ इद्धव्य॑श्चर्षणी॒नामिन्द्रं॒ तं गी॒र्भिर॒भ्यर्च आ॒भिः ।यः पत्य॑ते वृष॒भो वृष्ण्या॑वान्त्स॒त्यः सत्वा॑ पुरुमा॒यः सह॑स्वान्

ya eka iddhavyaścarṣaṇīnāmindraṃ taṃ gīrbhirabhyarca ābhiḥ | yaḥ patyate vṛṣabho vṛṣṇyāvāntsatyaḥ satvā purumāyaḥ sahasvān

हिन्दी अर्थ

का० २०1 सू०-३४ .. अथर्ववेद-माष्य ८१ तर ङ्ग॑मय पवत भी ठण्ड हौकर घनीभूत होते गए । इस घनीभूत अवस्था मे मी इन पर्वतो से ज्वालाएं उऽ्ती थी, जसे कि उत्रालामुखी पर्वतो में “रम्” घातु का अथं “क्रीडा”. भीं है, जिसके द्वारा पाथिव तरङ्खोवाले

English

His is that thunderbolt, of iron, golden-hued, gold-coloured, very dear, and yellow in his arms;

अध्याय 20

श्लोक 36.2

तमु॑ नः॒ पूर्वे॑ पि॒तरो॒ नव॑ग्वाः स॒प्त विप्रा॑सो अ॒भि वा॒जय॑न्तः ।न॒क्ष॒द्दा॒भं ततु॑रिं पर्वते॒ष्ठामद्रो॑घवाचं म॒तिभिः॒ शवि॑ष्ठम्

tamu naḥ pūrve pitaro navagvāḥ sapta viprāso abhi vājayantaḥ | nakṣaddābhaṃ taturiṃ parvateṣṭhāmadroghavācaṃ matibhiḥ śaviṣṭham

हिन्दी अर्थ

ऋण विद्यतो से समाविष्ट दो प्रकार के मेव जब भ्रापसमें मिलते.है, तब (यैन) जिसने (इमा) . इन (विवा) सब (मृवना) भुवनो को ( वना) गतिमान् तथा विनाशी (कृतानि) किया हैः (यः) जिसने पर् प्रथवंवेद-माष्य . का० २० सूु० २४

English

tawny-hued. Thou, thou, when praised by men who sacrificed of old, hadst pleasure in their lauds, O Indra

अध्याय 20

श्लोक 36.3

तमी॑महे॒ इन्द्र॑मस्य रा॒यः पु॑रु॒वीर॑स्य नृ॒वतः॑ पुरु॒क्षोः ।यो अस्कृ॑धोयुर॒जरः॒ स्वऽर्वा॒न् तमा भ॑र हरिवो माद॒यध्यै॑

tamīmahe indramasya rāyaḥ puruvīrasya nṛvataḥ purukṣoḥ | yo askṛdhoyurajaraḥ sva'rvān tamā bhara harivo mādayadhyai

हिन्दी अर्थ

न बरसनेवाले मेष को (भरम्) नीचे की भोर बरस।कर (गुह अकः) पर (जिगीवान्) विजय पाई है । (भयः) भौर जो स्वामी (पुष्टानि) धन से परिपुष्ट व्यक्तियों को भी ( भरादत् ) पने मे लीन कर लेता है, उनका सहार कर देता है,-(जनासः) है सज्जनो ! (सः) वहु (इन्द्रः) परमेदवर ९०९. यं स्मौ पृच्छन्ति इ सेति बोरमृतमाहूनषो अलतीलनय् । .

English

golden-haired. All that befits thy song of praise thou welcomest, the perfect: pleasant gift, O golden-hued

अध्याय 20

श्लोक 36.4

तन्नो॒ वि वो॑चो॒ यदि॑ ते पु॒रा चि॑ज्जरि॒तार॑ आन॒शुः सु॒म्नमि॑न्द्र ।कस्ते॑ भा॒गः किं वयो॑ दुध्र खिद्वः पुरु॑हूत पुरूवसोऽसुर॒घ्नः

tanno vi voco yadi te purā cijjaritāra ānaśuḥ sumnamindra | kaste bhāgaḥ kiṃ vayo dudhra khidvaḥ puruhūta purūvaso'suraghnaḥ

हिन्दी अर्थ

है (स. इति) वह परमेदवर ? (उत) भ्रौर कई (ईम्) इसे (घोरम् भ्राहुः) घोर कहते है, हत्यारा तथा भयानक कृते है, भौर करई (एनम्) इसे .. (आहुः). कहते ह कि (एषः) यह ( न भ्रस्ति इति) हही नहीं; (यः

English

from birth. These two dear Bays bring hither Indra on his car, thunder- armed, joyous, meet for laud, to

अध्याय 20

श्लोक 36.5

तं पृ॒च्छन्ती॒ वज्र॑हस्तं रथे॒ष्ठामिन्द्रं॒ वेपी॒ वक्व॑री॒ यस्य॒ नू गीः ।तु॒वि॒ग्रा॒भं तु॑विकू॒र्मिं र॑भो॒दां गा॒तुमि॑षे॒ नक्ष॑ते॒ तुम्र॒मच्छ॑

taṃ pṛcchantī vajrahastaṃ ratheṣṭhāmindraṃ vepī vakvarī yasya nū gīḥ | tuvigrābhaṃ tuvikūrmiṃ rabhodāṃ gātumiṣe nakṣate tumramaccha

हिन्दी अर्थ

भी .(विंज इव) उद्वेगी विजयी राजा के समान (आरा मिनाति) विनष्ट कर. देता है (जनासः) है प्रजाजनो !. (सः इन्द्रः) वह् परभेदवर है। .. घोरम् = हन्तेर् घुर च (उणा० कोष - ५।६४)।

English

drink his fill. Many libations flow for him who loveth them: to Indra have: the gold-hued Soma juices run.

अध्याय 20

श्लोक 36.6

अ॒या ह॒ त्यं मा॒यया॑ वावृधा॒नं म॑नो॒जुवा॑ स्वतवः॒ पर्व॑तेन ।अच्यु॑ता चिद् वीलि॒ता स्वो॑जो रु॒जो वि दृ॒ह्ला धृ॑ष॒ता वि॑रप्शिन्

ayā ha tyaṃ māyayā vāvṛdhānaṃ manojuvā svatavaḥ parvatena | acyutā cid vīlitā svojo rujo vi dṛhlā dhṛṣatā virapśin

हिन्दी अर्थ

को प्रेरणाएं देता, (यः) जो (नाधमानस्य) याचना करनेवाले, (कीरेः ) करता है, (जनासः) है भ्रजाजनो ! (सः इन्द्रः) वह परमेश्वर है । . रभ्रस्य = रध्यतिः वशगमने (निर०..६।६।३२) । कीरिः स्तोता का०.२०। सुर ३४ भथववेद-भाष्य । ८३

English

The gold-hued drops have flowed to gratify his wish: the yellow. drops have urged the swift Bays to the Strong.

अध्याय 20

श्लोक 36.7

तं वो॑ धि॒या नव्य॑स्या॒ शवि॑ष्ठं प्र॒त्नं प्र॑त्न॒वत् प॑रितंस॒यध्यै॑ ।स नो॑ वक्षदनिमा॒नः सु॒वह्मेन्द्रो॒ विश्वा॒न्यति॑ दु॒र्गहा॑णि

taṃ vo dhiyā navyasyā śaviṣṭhaṃ pratnaṃ pratnavat paritaṃsayadhyai | sa no vakṣadanimānaḥ suvahmendro viśvānyati durgahāṇi

हिन्दी अर्थ

, (यस्य) जिसके . (दिशि) निदंश में (अरवासः) अरव, तथा मे (ग्रामाः) संनिक समूह, तथा (यस्य ) जिसके निदं में (विश्वे रथासः) सब' रथारोही विद्यमान रहते है, (यः) जिसने . (सूर्यम्) सूयं को (यः) श्रौर जिसने (उषसम्) उषां को (जजान) पदाः कियादहैः (यः) जो

English

He who speeds on with bay steeds even as he lists hath satisfied his longing for the golden 278

अध्याय 20

श्लोक 36.8

आ जना॑य॒ द्रुह्व॑णे॒ पार्थि॑वानि दि॒व्यानि॑ दीपयो॒ऽन्तरि॑क्षा ।तपा॑ वृषन् वि॒श्वतः॑ शो॒चिषा॒ तान् ब्र॑ह्म॒द्विषे॑ शोचय॒ क्षाम॒पश्च॑

ā janāya druhvaṇe pārthivāni divyāni dīpayo'ntarikṣā | tapā vṛṣan viśvataḥ śociṣā tān brahmadviṣe śocaya kṣāmapaśca

हिन्दी अर्थ

(अपाम्) मेधो , नदियों तथा समुद्र आदि जलो का ( नेता) मांदक है, (जनासः) है सज्जनो (सः इन्द्रः) वह परमेश्वर है । २०५. यः करन्दसी संयती वियते प ऽब॑र उभया अमित्रा; । , (करन्दसी) जिनमें भक्रन्दन हो रहा है, एेसेः द्युलोक भरौर भूलोक

English

drops. At the swift draught the Soma-drinker waxed in might, the iron.

अध्याय 20

श्लोक 36.9

भुवो॒ जन॑स्य दि॒व्यस्य॒ राजा॒ पार्थि॑वस्य॒ जग॑तस्त्वेषसंदृक्।धि॒ष्व वज्रं॒ दक्षि॑ण इन्द्र॒ हस्ते॒ विश्वा॑ अजुर्य दयसे॒ वि मा॒याः

bhuvo janasya divyasya rājā pārthivasya jagatastveṣasaṃdṛk| dhiṣva vajraṃ dakṣiṇa indra haste viśvā ajurya dayase vi māyāḥ

हिन्दी अर्थ

माह्वान करते है, तथा (परेऽवरे) दुर के भ्रौर समीपं के (अमित्राः) अमित्र राष्ट (उभया) ये. दोनों सुहायता के लिये जिसका प्राह्वान करते : . है, (समानं चिद्) एक जैसे (रथम्) रथो भै (आआतस्थिवांसा) स्थित हृए यीद्धा (नाना) नानाल्पों मे जिसका. (हवेते). भ्राह्वान करते है २०६. यान्न ऋते विजयन्ते जनासो य॑ युध्यमाना अव॑से हन्ते ।

English

One with yellow beard and golden hair, He, Lord of tawny coursers. Lord of fleet-foot mares, will bear his bay steeds safely over all

अध्याय 20

श्लोक 36.10

आ सं॒यत॑मिन्द्र णः स्व॒स्तिं श॑त्रु॒तूर्या॑य बृह॒तीममृ॑ध्राम्।यया॒ दासा॒न्यार्या॑णि वृ॒त्रा करो॑ वज्रिन्त्सु॒तुका॒ नाहु॑षाणि

ā saṃyatamindra ṇaḥ svastiṃ śatrutūryāya bṛhatīmamṛdhrām| yayā dāsānyāryāṇi vṛtrā karo vajrintsutukā nāhuṣāṇi

हिन्दी अर्थ

पुथिवीः के स्तर पर, अपने स्थान वदलते . रहते थे । यह् ही उनकी क्रीडा (गाः) जलं को (उदाजत्) ऊपर अन्तरिक्ष से नीचे भूमि की गौर फका है, (यः) जिसने (अदमनोः) फले हुए दो मेघो के (अन्तः) बीच (भ्ग्निम् ) वैद्युताम्नि को (जजान) पेदा करिया है, तथा जो (समत्सु) देवासुर-

English

Bright with strong teeth, destroying with its tawny rage. In Indra are set fast all forms of golden hue.

अध्याय 20

श्लोक 36.11

स नो॑ नि॒युद्भिः॑ पुरुहूत वेधो वि॒श्ववा॑राभि॒रा ग॑हि प्रयज्यो ।न या अदे॑वो॒ वर॑ते॒ न दे॒व आभि॑र्याहि॒ तूय॒मा म॑द्र्य॒द्रिक्

sa no niyudbhiḥ puruhūta vedho viśvavārābhirā gahi prayajyo | na yā adevo varate na deva ābhiryāhi tūyamā madryadrik

हिन्दी अर्थ

सज्जनो ! (सः) वह (ददरः) परमेदवर है । गाः जल (उणा० कोष २।६७), वे दिक पुस्तकालय, अजमेर । अहमा= , मेध (निघ ० १।१०) “अ्रदरमनोः” में द्विवचन है । भ्रन्तरिक्षमें धन ओर

English

As if a lovely ray were laid upon the sky, the golden thunder- bolt spread out as in a race. That iron bolt with yellow jaw smote Ahi down. A thousand flames had he who bore the

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।