श्वेताश्वतरोपनिषद्

Adhyāya 6श्लोक 7/2330%

Shvetashvatara Upanishad 6.7

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

तमीश्वराणां परमं महेश्वरं तं देवतानां परमं च दैवतम् ।पतिं पतीनां परमं परस्ताद्- विदाम देवं भुवनेशमीड्यम्

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

उस महेश्वर को जानें — जो सभी ईश्वरों में परम है, सभी देवताओं में सर्वोच्च है, सभी पतियों का पति है, और जिसके परे कुछ नहीं — जो विश्व का स्वामी और स्तुत्य देव है।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

Let us know that Supreme God — Maheshvara, the greatest among rulers, the highest deity among gods, the Lord of lords, beyond whom there is nothing — the one worthy of praise who rules the worlds.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

यह मन्त्र ब्रह्माण्डीय पदानुक्रम के सर्वोच्च शिखर को उद्घाटित करता है। इस जगत में अनेक प्रकार के नियंत्रक, नियामक और शक्तियाँ (ईश्वर और देवता) कार्य कर रही हैं, किन्तु उन सब के मूल में एक ही 'परम महेश्वर' है — जो सभी ईश्वरों का परम ईश्वर है, सभी देवताओं का परम देवता है, और सभी स्वामियों का सर्वोच्च स्वामी है। उसके परे कोई अन्य सत्ता नहीं है। वह सम्पूर्ण विश्व का अद्वितीय अधिपति और वन्दनीय सत्ता है। यह द्वैतवादी बहुदेववाद से ऊपर उठकर एक सर्वातिशायी अद्वैत ब्रह्माण्डीय चेतना का साक्षात्कार कराता है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
आज की कॉर्पोरेट और सामाजिक व्यवस्था में मनुष्य निरंतर सत्ता-संरचनाओं (power hierarchies), सत्ताधारियों के दबाव और सामाजिक पदानुक्रमों के भय में जीता है। कार्यस्थलों पर बॉस का भय, व्यवस्थाओं में अधिकारियों की तानाशाही, वित्तीय बाजारों की अनिश्चितता और राजनीतिक ताकतों के सामने सामान्य व्यक्ति स्वयं को अत्यंत असहाय, लाचार और पराधीन महसूस करता है। इस भय के कारण लोग अपने नैतिक मूल्यों, अंतरात्मा की आवाज और सत्य के साथ आए दिन समझौते करते रहते हैं, जिससे उनका आत्म-सम्मान भीतर से बिखर जाता है। श्वेताश्वतर उपनिषद् यहाँ मानव चेतना को सर्वोच्च संप्रभुता (supreme sovereignty) और निर्भयता प्रदान करता है। उपनिषद् कहता है — "तमीश्वराणां परमं महेश्वरं तं देवतानां परमं च दैवतम्" (हम उस परम सत्ता को जानें, जो सभी शासकों का परम शासक है, सभी शक्तियों की मूल शक्ति है, और संपूर्ण ब्रह्मांड का एकमात्र स्वतंत्र अधिपति है)। संसार के सभी पद, डिग्रियाँ, राजनीतिक प्रभुत्व और संस्थागत अधिकार सीमित, सापेक्ष और नश्वर हैं। जो व्यक्ति उस सर्वोच्च परम सत्ता के साथ अपनी आंतरिक डोर जोड़ लेता है, वह संसार की किसी भी क्षणभंगुर ताकत या पदधारी के आगे भयभीत होकर नहीं झुकता।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **आंतरिक संप्रभुता और अभय (Inner Sovereignty)**: किसी भी सांसारिक पद, धनवान व्यक्ति या बॉस के सामने अपने आत्म-सम्मान और नैतिक रीढ़ को मत तोड़िए। यह स्मरण रखिए कि हर मानवीय सत्ता सीमित है, और आपका वास्तविक स्वामी केवल ब्रह्मांड का वह परम सत्य है। - **नैतिक अडिगता (Uncompromising Integrity)**: जब भी कार्यस्थल या समाज में अनैतिक समझौता करने का भारी दबाव आए, तो याद कीजिए कि आपकी अंतिम जवाबदेही किसी क्षुद्र व्यवस्था के प्रति नहीं, अपितु उस सर्वोच्च धर्म और सत्य के प्रति है। - **परम शरणागति में विश्राम (Surrender of Anxiety)**: दिन भर की मेहनत के बाद भविष्य की चिंताओं और परिणामों के बोझ को उस परम महेश्वर को सौंप दीजिए। जब संपूर्ण ब्रह्मांड को चलाने वाला वह एक है, तो वह आपके जीवन का भी रक्षक है।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या आप सांसारिक पदों, अधिकारियों और परिस्थितियों के काल्पनिक भय के आगे अपनी अंतरात्मा और आत्म-सम्मान को गिरवी रख रहे हैं, अथवा आपकी निष्ठा उस सर्वोच्च परम महेश्वर के साथ जुड़ी है?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

जटिल प्रणालियों का पदानुक्रम (Hierarchy in Complex Adaptive Systems) और एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत (Unified Field Theory): भौतिक ब्रह्मांड में ऊर्जा और सूचना के अनेक स्तर हैं — क्वार्क, परमाणु, अणु, कोशिकाएँ, जीव, ग्रह और आकाशगंगाएँ। प्रत्येक स्तर पर एक स्थानीय नियामक व्यवस्था (Local Governing Principles) कार्य करती है, किन्तु सम्पूर्ण कॉसमॉस अंततः कुछ सार्वभौमिक मूलभूत नियमों (Fundamental Symmetries and Laws of Physics) द्वारा संचालित होता है। उपनिषद् का 'ईश्वराणां परमं महेश्वरम्' इसी परम वैश्विक नियमबद्धता और उस एकीकृत चेतना-क्षेत्र की ओर संकेत करता है जो प्रकृति के सभी स्थानीय बलों (विद्युत-चुंबकीय, गुरुत्वाकर्षण, परमाणु बल) का साझा स्रोत है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Edition (Book Code 0073). Gita Press Gorakhpur (Official Publication)
Translation
Gita Press Editorial Board (Hindi)
Last updated
2026-10-23
Licence note (as recorded)
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पाठ-भेद · Variant readings
Collated with Dashopanishad Anandashram Series.

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श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

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🟣Cross-Scriptural Linkपार-ग्रंथ सम्बन्ध (गीता ↔ उपनिषद् ↔ रामायण)

Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

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आगे क्या · What next