प्रश्नोपनिषद्

Praśna 6श्लोक 3/838%

Prashna Upanishad 6.3

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

स ईक्षाञ्चक्रे ।कस्मिन्नहमुत्क्रान्त उत्क्रान्तो भविष्यामि कस्मिन्वा प्रतिष्ठिते प्रतिष्ठास्यामीति

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

उस पुरुष ने विचार किया — "जिसके निकलने पर मैं निकलूँगा, और जिसके ठहरने पर मैं ठहरूँगा — वह कौन है?"

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

He (the Puruṣa) reflected: "By whose departing shall I depart? By whose abiding shall I abide?"

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

सृष्टि के आरम्भ में उस परम पुरुष का गहन आत्म-विमर्श और संकल्प: 'स ईक्षाञ्चक्रे। कस्मिन्नहमुत्क्रान्त उत्क्रान्तो भविष्यामि कस्मिन् वा प्रतिष्ठिते प्रतिष्ठास्यामीति'। उस परम पुरुष ने 'ईक्षा' (सचेत विचार, संकल्प, अवलोकन) की: 'मेरे शरीर से किसके निकलने पर मैं निकला हुआ माना जाऊँगा, और किसके स्थित रहने पर मैं प्रतिष्ठित रहूँगा?' यह वही प्रश्न है जो द्वितीय प्रश्न में इंद्रियों और प्राण के बीच उठा था। परम पुरुष ने देखा कि वह केंद्रीय तत्व केवल और केवल 'प्राण' ही हो सकता है, जिसके रहने पर सारा अस्तित्व रहता है और जिसके जाने पर सब कुछ बिखर जाता है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
किसी भी कार्य, व्यवसाय या सृजन को आरम्भ करने से पहले बिना सोचे-समझे कूद पड़ना मूर्खता है। यह मंत्र हमें 'ईक्षा' — कार्य आरम्भ करने से पूर्व शांत, समग्र और दूरदर्शी विचार करने — का पाठ पढ़ाता है। सृष्टि रचने से पहले परमात्मा ने भी विचार किया कि इस व्यवस्था का केंद्रीय आधार क्या होगा। अपने जीवन में किसी भी बड़े निर्णय या प्रोजेक्ट को आरम्भ करने से पहले रुकें और विचार करें: 'इस कार्य की मुख्य जीवन-रेखा (प्राण) क्या है? इसके रहने से क्या रहेगा और इसके जाने से क्या बिखर जाएगा?'
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **निर्णय से पूर्व शांत ईक्षा (Practicing Deliberate Reflection Before Action)**: किसी भी महत्वपूर्ण कदम को उठाने से पहले हड़बड़ी न करें; शांत बैठकर उसके मूल आधार, प्रभाव और दूरगामी परिणामों पर विचार करें। - **मुख्य जीवन-रेखा की पहचान (Identifying the Core Life-Line)**: अपने किसी भी प्रोजेक्ट या संबंध में यह पहचानें कि वह कौन सा केंद्रीय मूल्य (विश्वास, निष्ठा, गुणवत्ता) है जिसके टूटने पर सब कुछ टूट जाएगा, और उस आधार की रक्षा करें। - **सचेत संकल्प की शक्ति (Harnessing Conscious Intention)**: अपने दैनिक कार्यों को केवल आदत के वशीभूत होकर न करें; प्रत्येक कार्य के पीछे एक स्पष्ट, सचेत और कल्याणकारी संकल्प (ईक्षा) जोड़ें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या आप अपने जीवन के बड़े निर्णय केवल आवेगी भावनाओं और जल्दबाजी में ले रहे हैं, या आपके प्रत्येक कार्य के पीछे परमात्मा की तरह एक शांत, दूरदर्शी और सचेत विचार (ईक्षा) होता है?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

कॉस्मिक इन्टेंशनालिटी, प्रथम सिद्धांत और जटिलता का उद्भव (Cosmic Intentionality, First Principles & Emergence): आधुनिक ब्रह्माण्डिकी में 'एंथ्रोपिक सिद्धांत' (Anthropic Principle) और जटिल प्रणालियों का उद्भव यह दर्शाता है कि सृष्टि कोई अंधी दुर्घटना नहीं है; उसके मूल में एक अत्यंत सूक्ष्म, अंतर्निहित व्यवस्था और नियमबद्धता (Fine-Tuning) कार्य कर रही है। चेतना जब स्वयं को अभिव्यक्त करना चाहती है, तो वह सबसे पहले एक गतिशील ऊर्जा-वाहक (प्राण) का निर्माण करती है। उपनिषद् का 'स ईक्षाञ्चक्रे' (उसने विचार किया) ब्रह्माण्डीय संकल्प और प्रथम सिद्धांतों का दार्शनिक आधार है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
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Translation
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Last updated
2026-10-24
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श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

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Prashna Upanishad 6.3Current VerseBhagavadBhagavad Gita Bh…BhagavadBhagavad Gita Bh…
🟣Cross-Scriptural Linkपार-ग्रंथ सम्बन्ध (गीता ↔ उपनिषद् ↔ रामायण)

Bhagavad Gita 7.5

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम्

Translation / Meaning (भावार्थ)

There is a lower nature (apara prakriti) and a higher nature (para prakriti). The lower consists of the elements and the mind; the higher is the soul that sustains the universe.

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आगे क्या · What next