Atharva Veda
8
अध्याय 8 / 20

Kanda 8

काण्ड 8

292 श्लोकभाग 6/6 · श्लोक 10.1–10.16

पूर्ण अध्याय पाठ66 श्लोक

अध्याय 8

श्लोक 10.1

विराट्।१-१३ अथर्वाचार्यः।विराट्।(षट्-पर्यायाः)।१-१३, १ त्रिपदार्ची पङ्क्तिः, २-७ याजुषी जगती, ३, ९ साम्न्यनुष्टुप्, ५ आर्च्यनुष्टुप्, ७, १३ विराड् गायत्री, ११ साम्ननी बृहती।वि॒राड् वा इ॒दमग्र॑ आसी॒त् तस्या॑ जा॒तायाः॒ सर्व॑मबिभेदि॒यमे॒वेदं भ॑वि॒ष्यतीति॑

virāṭ| 1-13 atharvācāryaḥ| virāṭ| (ṣaṭ-paryāyāḥ)| 1-13, 1 tripadārcī paṅktiḥ, 2-7 yājuṣī jagatī, 3, 9 sāmnyanuṣṭup, 5 ārcyanuṣṭup, 7, 13 virāḍ gāyatrī, 11 sāmnanī bṛhatī| virāḍ vā idamagra āsīt tasyā jātāyāḥ sarvamabibhediyamevedaṃ bhaviṣyatīti

हिन्दी अर्थ

(जजान) पैदा किया । (तेन) उस इन्द्र द्रारा (देवाः) संसार कौ दिव्य- का (न्ता) हनन करने वाला (ग्रभवत्) ह! । फात्गुन-मास वसन्त काल है । यथा “फाल्गुनः = एय18 58९4807 (वसन्त का०३॥ सु° १० एकाष्टक।-परिशिष्ट ३२३ से उत्तर कौ ओर आता है, ओर इस का ताप बढ़ने लगता है । एकाष्टका की अष्टमी भी वासन्तिक कालके सूरयके तपद्वारा तप्त होने लगती रूपी शतुओं का विशेषतया पराभव करने लगतो है! ये शेत्य-अन्धकार आदि दस्यु ह, उपक्षयकारी हैँ । शची = कर्मनाम (निषं० २।१) । शची दहै,

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय 8

श्लोक 10.1-2

(७) (2) १-१०) १ त्रिपदा साम्नी अनुष्टुप्, २ उष्णिग्गर्भा चतुष्पदोपरिष्टाद्विराड्बृहती, ३ एकपदा याजुषी गायत्री, ४ एकपदा साम्नी पङ्क्तिः ५ विराड् गायत्री, ६ आर्च्यनुष्टुप्, ७ साम्नी पङ्क्तिः, ८ आसुरी गायत्री, ९ साम्नी अनुष्टुप्, १० साम्नी बृहती।सोद॑क्राम॒त् सान्तरि॑क्षे चतु॒र्धा विक्रा॑न्तातिष्ठत्

(7) (2) 1-10) 1 tripadā sāmnī anuṣṭup, 2 uṣṇiggarbhā catuṣpadopariṣṭādvirāḍbṛhatī, 3 ekapadā yājuṣī gāyatrī, 4 ekapadā sāmnī paṅktiḥ 5 virāḍ gāyatrī, 6 ārcyanuṣṭup, 7 sāmnī paṅktiḥ, 8 āsurī gāyatrī, 9 sāmnī anuṣṭup, 10 sāmnī bṛhatī| sodakrāmat sāntarikṣe caturdhā vikrāntātiṣṭhat

हिन्दी अर्थ

विस्तार; (२) रथन्तर स्तन पृथिवी से बोषधियां; (३) वामदेव्य काल में पूनः प्ररोहित हो जाते हँ! प्राकृतिक-घटना के इस दृश्य से शिक्षा का०८। सू० १० प्रथर्ववेद-भाष्य ३२५ (१) असुरराज्य । असुर ह परकृत्ति के उपासक । प्राह्वादि विरोचन है (२) पितरराज्य । पितर दँ सभा भौर समिति के सदस्य । यम राजा

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय 8

श्लोक 10.1-3

(१७) (3) (१-८) १ चतुष्दा विराडनुष्टुप्, २ आर्ची त्रिष्टुप्, ३,५,७ चतुष्पदा प्राजापत्या पङ्क्तिः, ४,६,८ आर्ची बृहती।सोद॑क्राम॒त् सा वन॒स्पती॒नाग॑च्छत् तां वन॒स्पत॑योऽघ्नत॒ सा सं॑वत्स॒रे सम॑भवत्

(17) (3) (1-8) 1 catuṣdā virāḍanuṣṭup, 2 ārcī triṣṭup, 3,5,7 catuṣpadā prājāpatyā paṅktiḥ, 4,6,8 ārcī bṛhatī| sodakrāmat sā vanaspatīnāgacchat tāṃ vanaspatayo'ghnata sā saṃvatsare samabhavat

हिन्दी अर्थ

का साधन 1 यावत धृतराष्ट है विराट्-गौ का दोहनकर्ता उस ने विषरूपी विष के प्रयोक्ता को प्रतीकाररूपमे मार डालना चाहिए, इसमें मनुष्यहत्या न समनी चाहिए । अपितु यह् समभना चाहिए कि इस के हनन द्वारा अन्यों को विषप्रयोग से मैने बचा दिया का० ८ । सु° १० अयवेवेद-भाष्य ३२७ विराद् वा इदभग्रं आसीत् तस्यां जातायाः सवैमविभेदियमेवेदं भीत हो गया, श्रौर कहने लगा कि (इयम्) यह राज्य वरिहीन अवस्था (एव) ही (इदम्) इस रूप में (भविष्यति, इति) भविष्य मे हौगी, रहेगी ।

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय 8

श्लोक 10.1-4

(२१) (4-5) (१-१६, १-१६) २२-२३, २६,२९(प्र०) चतुष्पदा साम्नी जगती, २२-२४, २८-२९(द्वि०) साम्नी बृहती, २२,२६ (तृ०) साम्नी उष्णिक्, २२-२३,२६,२९ (च०) आर्च्यनुष्टुप्, २३ (तृ०) आर्ची गायत्री, २४-२५, २८ (प्र०) चतुष्पदा उष्णिक्, २४ (तृ०) प्राजापत्यानुष्टुप्, २४-२५, २७ आर्ची त्रिष्टुप्, २५-२६ (द्वि०) साम्नी उष्णिक्, २५, २७-२८ (तृ०) विराड् गायत्री २७ (प्र०)चतुष्पदा प्राजापत्या जगती, २७ (द्वि०) साम्नी बृहती त्रिष्टुप्, २८ (च०) त्रिपदा ब्राह्मी भुरिग्गायत्री, २९ (तृ०) साम्नी अनुष्टुप्।सोद॑क्राम॒त् सासु॑रा॒नाग॑च्छ॒त् तामसु॑रा॒ उपा॑ह्वयन्त॒ माय॒ एहीति॑

(21) (4-5) (1-16, 1-16) 22-23, 26,29(pra0) catuṣpadā sāmnī jagatī, 22-24, 28-29(dvi0) sāmnī bṛhatī, 22,26 (tṛ0) sāmnī uṣṇik, 22-23,26,29 (ca0) ārcyanuṣṭup, 23 (tṛ0) ārcī gāyatrī, 24-25, 28 (pra0) catuṣpadā uṣṇik, 24 (tṛ0) prājāpatyānuṣṭup, 24-25, 27 ārcī triṣṭup, 25-26 (dvi0) sāmnī uṣṇik, 25, 27-28 (tṛ0) virāḍ gāyatrī 27 (pra0)catuṣpadā prājāpatyā jagatī, 27 (dvi0) sāmnī bṛhatī triṣṭup, 28 (ca0) tripadā brāhmī bhuriggāyatrī, 29 (tṛ0) sāmnī anuṣṭup| sodakrāmat sāsurānāgacchat tāmasurā upāhvayanta māya ehīti

हिन्दी अर्थ

मानुष-सृष्टि से पुव केवल ईश्वरीय व्यवस्था थी, उस समय मानुषी- सृष्टि अभी पेदा ही नहीं हुई थी, अतः मनुष्यकृत भय भी उस समय न था । यह् एक विचाररूप है कि श्रारम्भ में सामाजिक तथा राजनंतिक' अवस्था सामाजिक श्रौर राजनेतिक व्यवस्था का विकास हुआ होगा। यहतो होना; (३) पति सम्बन्धी पत्नी का होना । इस दवारा यह सूचित हूंभा है

English

Calf of Virāj, giving each wish fulfilment, made bodies for him- self far off, in secret. Which are the three, the mighty three, whereof the fourth divides the voice, This may the Brāhman know by prayer and fervour, whereto belongs the one, whereto the

अध्याय 8

श्लोक 10.1-5

(२५) (5) सोद॑क्राम॒त् सा दे॒वानाग॑च्छ॒त् तां दे॒वा उपा॑ह्वय॒न्तोर्ज॒ एहीति॑

(25) (5) sodakrāmat sā devānāgacchat tāṃ devā upāhvayantorja ehīti

हिन्दी अर्थ

(यः) जो व्यविति (एवम्) इस प्रकार (वेद) जानता है वह (गृह मेधी) गृह-यज्ञ का करने वाला भौर (गृहपतिः) गृह का षति ( भवति) मनुष्यसमाज की दुरवस्था को जान कर जिस जानी ने इस दुरवस्था को हटाना चाहा, उसने पहिले स्वयं गृहमेध किया, गृहयज्ञ का संगम किया, गृहरचना की, भौर गृहपति बना, उसने पति-पलनीभाव् को भी व्यवस्थित सोदक्रामत् साईवनीये न्यऽकरामत् ॥८॥ सीमित थी उस ने ्रन्यों का आह्वान किया, आसपास रहने वालों को बुलाया, गौर उन्दँ मी गाहपत्य-न्यवस्था के लाभ समभाए ओर आहवनीय व्यवस्था की चर्चा की ।

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय 8

श्लोक 10.1-6

।तद् वि॒षं स॒र्पा उप॑ जीवन्त्युपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥१६ (२९) (6) (-१-४) १ द्विपदा विराड् गायत्री, २ द्विपदा साम्नी त्रिष्टुप्, ३ द्विपदा प्राजापत्यानुष्टुप्, ४ द्विपदार्च्युष्णिक्।तद् यस्मा॑ ए॒वं वि॒दुषे॒ऽलाबु॑नाभिषि॒ञ्चेत् प्र॒त्याह॑न्यात्

| tad viṣaṃ sarpā upa jīvantyupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda ||16 (29) (6) (-1-4) 1 dvipadā virāḍ gāyatrī, 2 dvipadā sāmnī triṣṭup, 3 dvipadā prājāpatyānuṣṭup, 4 dvipadārcyuṣṇik| tad yasmā evaṃ viduṣe'lābunābhiṣiñcet pratyāhanyāt

हिन्दी अर्थ

जीवनों वाले हो गये हु । यह आहवनीय “्रामसंस्था'” का पूवंूप है । जो कि समय पाकर एक संगठ्ति “्रामसमा” बन जाती है, भौर इसका प्यश्च ये” (अथवं ° ३।५।७) । इस “ग्रामसभा'' के नियमों तथा आ्रज्ञानों को उद्घोषित करने के लिये एक कममंचारी रख लिया जाता है, जिसे कि “श्रापघोषी'' कहा है (अथवं ° ५।२०।६) । यतो दक्षिणीयो वासंतेयो मवति य पं वेद् ॥७।॥ को (वेद) जानता है वहु (यज्ञतः) इस संस्थारूपी-यज्ञ मे जाने योग्यहो जाता है, भ्रौर (वासतेयः) वसती का शुभकारी (भवति) होता है ।

English

They call Virāj the Father of Devotion: tell her to us thy friends in all her figures. She whom, advancing, sacrifices follow, and when she takes her station stand beside her, By whose control and hest the spirit moveth, she is Virāj, in highest heaven, O Rishis.

अध्याय 8

श्लोक 10.2

सोद॑क्राम॒त् सा गार्ह॑पत्ये॒ न्यऽक्रामत्

sodakrāmat sā gārhapatye nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

चमकते-दमकते कपड़ पहनने वाल। भौर इस प्रकार विविध-रुचियों वाला प्रतिनिधि का है । इसे मन्त्र मे ेन्दियिक-सुख का पूवर कहा है! असुरो पालक है “भ्रयः” अर्थात् लोहा । लोहा तमोगुण है, प्रकृति का तामसिक- के दोहने के लिये “विरोचन को वत्स कलह है। वत्स के विनागौ दुही नहीं जा सकती । इसी प्रकार विरोचन स्वभाव वाले नेता के विना श्रासुरी- सम्पत्ति, विराट् गौसे दोहीनहींजासकती। ! ॥ ३४२ भ्रथववेवेद-माष्य का०८ 1 सू० १०

English

The Spirit dwelling on the earth is single: the Single Season never is transcended. A glorification of the mystical abstraction Virāj Viraj at first was This. At birth all feared her; the thought, She will become this All, struck

अध्याय 8

श्लोक 10.2-2

(८) तां दे॑वमनु॒ष्याऽ अब्रुवन्नि॒यमे॒व तद् वे॑द॒ यदु॒भय॑ उप॒जीवे॑मे॒मामुप॑ ह्वयामहा॒ इति॑

(8) tāṃ devamanuṣyā' abruvanniyameva tad veda yadubhaya upajīvememāmupa hvayāmahā iti

हिन्दी अर्थ

के पुत्र ने (अधोक्) दुहा, (ताम्) उस से (मायाम् एव ) मायाकोही विरोचन को दों सिसे बाला कहा है, वह एक सिरसे तो सोचता है, ओर दूसरे सिर से वाणी बोलता है, अर्थात् मन मेँ कु भौर वाणी मेक । है, ऋतुओ के सदृश परसिवितनभील है, अस्थिरमति है । उसने विराद्-गौ से (वेद) जानता है, वह् मी (उपजीवनीयः) अन्यो के लिये जीवन का जश्रय (भवति) हो जाता है, ्नन्यो को जीवन प्रदान करतादहै। मन्त्र यमं “परसुर-राज्य” का वणन हुभ्रा है)

English

Jagatī fashioned on the three-and-thirty? How is Anushtup formed? how Ekavinsa? Eight Elements sprang up, first born of Order: the Priests divine are eight in number, Indra! Eight are the wombs of Aditi, eight her children; for the eighth night is the libation destined.

अध्याय 8

श्लोक 10.2-3

।तस्मा॒द् वन॒स्पती॑नां संवत्स॒रे वृ॒क्णमपि॑ रोहति वृ॒श्चते॒ऽस्याप्रि॑यो॒ भ्रातृ॑व्यो॒ य ए॒वं वेद॑

| tasmād vanaspatīnāṃ saṃvatsare vṛkṇamapi rohati vṛścate'syāpriyo bhrātṛvyo ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

पितरः है समा श्रौर समिति के सदस्य । सभा है लोकसभा, श्रौर समिति है राजसभा (अथवं ० ८।१०।८-११ ) । समा मौर समिति के संयुक्त अधिवेशन मे स्थित सभ्यो ब्रौर सामित्यों को “पितरः कहा है । यथा-- का० ८ सूु० १० श्रयर्षवेद-भाष्य ३४२ नियमन करने वाला (राजा) राजा, (रजतपात्रम्) रक्षक ओर पालकं रजत पितरों अर्थात् सभासदों भौर समिति क सदस्यों को विराट्-गौ के धारण-पोषण करने की शक्ति, स्वतन्त्रता, अपराधीनता

English

So planning bliss for you have I come hither to win your friendship: kind am I, and gracious. Born from one source, propitious is your wisdom: knowing full well to all of you it cometh.

अध्याय 8

श्लोक 10.2-4

।तस्या॑ वि॒रोच॑नः॒ प्राह्रा॑दिर्व॒त्स आसी॑दयस्पा॒त्रं पात्र॑म्

| tasyā virocanaḥ prāhrādirvatsa āsīdayaspātraṃ pātram

हिन्दी अर्थ

सैन्य विभाग है “मरने भौर मारने के लिये' । अतः यह समग्र विभाग मृत्यु का पूर है, भौर सेनापति भी । अतः सेनापति को मार्त॑व्य कहा है । परन्तु श्ञासन तथा राज्यरक्षा नहीं हौ सकती । (पितरः) सभा-समिति के सदस्य (जीवन्ति) जीवित होतेहै, वह् भी म् जीवनीयः) अन्यो के जीवित रहने का आश्रय ( भवति) हो जाता है (यः) श्रौर जलवाली ! (एहि) आ (इति) इस प्रकार -

English

To Indra eight, to Yama six, seven to the Rishis, seven to each: The number five accompanies waters and men and healing herbs. The Heifer, all his own, poured forth for Indra control and milk at her first time of milking;

अध्याय 8

श्लोक 10.2-5

।तस्या॒ इन्द्रो॑ व॒त्स आसी॑च्चम॒सः पात्र॑म्

| tasyā indro vatsa āsīccamasaḥ pātram

हिन्दी अर्थ

पालन का साघन थी । पात्रम् =पा+तेड. (पालने) । परन्तु विशेषाभिभाय से “ननु” को विरस्वान् भात् चव का एन कहा € । गनौर जल का मिलना सूर्याधित है । दसी के श्राश्रयसेषेती फततीहै। खेतीके फलने पर किसानवर्भं से निराशा का प्रन्धकार दुर होता है । का० ८. सू० १० अथवेवेद-माष्य २४५ यह् “मनु” है जनपद निवासी किसान-वगं (मन्त्र ११,१२) । इस वगं ने “वत्स'" बनकर विराट्-गौ का दोहन किया । दोहन का फल हुआ “करृषि ओर

English

And he then satisfied the four divisions, the Gods and men and Asuras and Rishis.

अध्याय 8

श्लोक 10.2-6

।न च॑ प्रत्याह॒न्यान्मन॑सा त्वा प्र॒त्याह॒न्मीति॑ प्र॒त्याह॑न्यात्

| na ca pratyāhanyānmanasā tvā pratyāhanmīti pratyāhanyāt

हिन्दी अर्थ

कृषि-सस्य, पृथिवी से ही प्राप्त होतेह, जो कि.किसान-वशभे कौ रक्षा ्रौर (ताम्) उस विराट्-गौ को (पृथी) कृषिविस्तार करने वाले, (वैन्यः) छर षि-मेधावी कृषकों कौ वंशपरम्परा में उत्पन्न किसन ने (अधोक्) दोहा, पृथो' = जसे पृथिवी विस्तृत है उसी प्रकार कृषिकमं का विस्तार करने वाला कृषिकमं में प्रस्यात कृषक । वैन्यः = वेनः मेधाविनाम (निघं० ३।१५) । वैन्यः = मेधावी कृषकवंण मे उत्पन्न, जिस को वंशपरम्परामें कृषिकमं रहा है, वह् कृषि का विशेषज्ञ सम्भावित है । वैन्यः =वेनृ गति- हो जाता है भौर (उपजीवनीयः) ग्रौरों के जीवनो का आश्रय (भवति) हो जाता ह (यः) जो कि (एवम्) इस प्रकार के तथ्य को (वेद) जानता है ।

English

Who is the Cow? Who is the Single Rishi? What is the law, what are the benedictions? What on the earth is the one only Spirit? Which of the number is the Single Season? One is the Cow, one is the Single Spirit, one is the law, single are benedictions.

अध्याय 8

श्लोक 10.3

गृ॒ह॒मे॒धी गृ॒हप॑तिर्भवति॒ य ए॒वं वेद॑

gṛhamedhī gṛhapatirbhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

२।१०) +-किः । शासन की दृष्टिसे राष्टरकेदो विभाग, नागरिक ओर शासन सभा-समिति का शासन ग्रामवासियों कौ रजत आदि की आव- २४६ अथर्ववेद-भाष्य का० ८।सूु० १० श्यकता को पूरित करता तथा उन की स्वावस्था को सुरक्षित करता द, नगरवासियों की कृषि ओर सस्य की आवश्यकता को पूरित करता है । इस प्रकार राष्टकेये दो विभाग एक दूसरे के पूरक होकर एक राष्टरूप है । इसे “पितर-मनुष्य राज्य'' कह सकते हँ । हे ब्रह्मवाली ! (एहि) तू आ (इति) इस प्रकार ।

English

She mounted up, she entered Consultation. Whoso knows this is fit to be consulted, and to his consultation come the people. She mounted up, and, into four divided, she took her station in the air’s mid-region.

अध्याय 8

श्लोक 10.3-2

(९) तामुपा॑ह्वयन्त

(9) tāmupāhvayanta

हिन्दी अर्थ

द्धि । मनुष्य के निःश्रेयस के लिये ये सात “ऋषिकोटि” के होने चाहियं । इस भावना को अभिव्यक्त करने के लिये इन सातको ऋषि कहाहै। मे समता कही है । इसलिये आधिभौतिक शासन मे भी सात ऋषियों द्वारा की सात रदिमयां ह (निरुक्त १२।४।३७) ।

English

Viraj at first was This. At birth all feared her; the thought, She will become this All, struck terror. She rose, the Gārhapatya fire she entered. He who knows this becomes lord of a household,

अध्याय 8

श्लोक 10.3-3

(१८) सोद॑क्राम॒त् सा पि॒तॄनाग॑च्छ॒त् तां पि॒तरो॑ऽघ्नत॒ सा मा॒सि सम॑भवत्

(18) sodakrāmat sā pitṝnāgacchat tāṃ pitaro'ghnata sā māsi samabhavat

हिन्दी अर्थ

दस का स्पष्टीकरण हृभ्रा है । २. मनुनेभीसात या भ्राठ सचिवों का कथन क्रिया । यथा “सचिवान् सप्त का० ८1 स्० १५ भशथवेवेद-भाष्य ३४७ यद्यपि वैदिक साहित्यानुसार राजा क्षत्रिय होना चाहिए । परनपु प्रजा के शासन में उसे सौम्य स्वभाववाला होकर, शासक होन चाहिए, शासन, वैदिकमन्त्प्रतिपादित विधि द्वारा होना चाहिए ( देखो यजु° (वृहस्पतिः) बृहती वेदवाणी के पति ने (अषोक्) दोहा (ताम्) उस विराट्

English

performer of domestic sacri- fices. She mounted up, the Eastward fire she entered. He who knows this becomes the Gods’

अध्याय 8

श्लोक 10.3-4

।तां द्विमू॑र्धा॒र्त्व्योऽधो॒क् तां मा॒यामे॒वाधो॑क्

| tāṃ dvimūrdhārtvyo'dhok tāṃ māyāmevādhok

हिन्दी अर्थ

ऋषयः) सात ऋषि (जीवन्ति) जीवित रहते है, (यः) जो (एवम्) इस मौर (उपजीवनीयः) अन्यो के जीवन का प्राश्चय (भवति) हो जातादहै। जीवन में ढालने का निर्देश मन्त्र द्वारा हा है। २४८ अथर्ववेद-भाष्य का० ८।सु० १०

English

beloved, and to his call they come when she invokes them. She mounted up, the Southward fire she entered. He who knows this becomes a fit performer of sacrifice, meet for honour, shelter-giver.

अध्याय 8

श्लोक 10.3-5

।तां दे॒वः स॑वि॒ताधो॒क् तामू॒र्जामे॒वाधो॑क्

| tāṃ devaḥ savitādhok tāmūrjāmevādhok

हिन्दी अर्थ

शन््रादिदेवताकराज्य (भ्राधिदविका्थं ) (सा) वहू विराट् (उदकामत्) उत्कान्त हई, ऊपर की गोर गतिवाली इन (चमसः) भौर मेष था (पात्रम् ) रक्षा ओौर पालन का साधनं । को उत्पत्ति का कारण है, अतः “चमस है । यह “चमस” है पात्र अर्थति रक्ना भौर पालन का साधने, पा (रक्षणे) + तड पालने । चमस चमु तां देवः संविताषोक् तामूनमिवा्धोक् ॥३॥

English

She mounted up, she entered the Assembly. He who knows this becomes polite and courtly, and people come as guests to his assembly.

अध्याय 8

श्लोक 10.3-6

।यत् प्र॑त्या॒हन्ति॑ वि॒षमे॒व तत् प्र॒त्याह॑न्ति

| yat pratyāhanti viṣameva tat pratyāhanti

हिन्दी अर्थ

र (ताम्) उस विराट््-गौ को (देवः) दु तिसम्पनन (सविता ) सयं ने कहा है । बछ्ड के विना गौ द्ध नहीं देती रौर दोहने वाला ग्वाला है निर्माण होता है, श्रौर मेधीय- विदुत् फ ताडन द्वारा मेष से जल बरसता है, का० ८ । सू० १० भ्रथवेवेद-भाष्य १४९ तामूं देवा उप॑ जीवन्तयुपजीवनीयो मवति य एवं वेदं ॥४॥

English

She mounted up, she passed within the meeting. He who knows this becomes fit for the meeting, and to his hall of meeting come the people. She mounted up, she entered Consultation. Whoso knows this is fit to be consulted, and to his

अध्याय 8

श्लोक 10.4

।सोद॑क्राम॒त् साह॑व॒नीये॒ न्यऽक्रामत्

| sodakrāmat sāhavanīye nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

जीवित होति ह (यः) जो (एषम्) हस प्रकार इस तथ्य को (वेद) जानता है वह भी (उपजीवनीयः) आचरितो के जीवनों का साधक (भवति) हो देवाः = प्राकृतिके देव । उप = उपाश्रित्य । प्राकृतिक देव वायु, परज्ञान के लिये देखो (यजु० १४५२० । ति ॥ वेश्यप्रकृतिक राज्य (भ्राधिभौतिका्थ) उस को (देवाः) व्यापारी-वेश्यो ने (उप अह्वयन्त) अपने समीप बुलाया कि (उजं) है बल ओौरप्राण देने वाले अन्नरूपिणी । (एहि) प्रा; (इत्ति)

English

She rose, she came unto the tress: they killed her. A year went by and she again existed. Hence in a year the wounds of trees heal over. He who knows this sees his loathed rival wounded.

अध्याय 8

श्लोक 10.4-2

(१०) ऊर्ज॒ एहि॒ स्वध॒ एहि॒ सूनृ॑त॒ एहीरा॑व॒त्येहीति॑

(10) ūrja ehi svadha ehi sūnṛta ehīrāvatyehīti

हिन्दी अर्थ

देवाः = दिवु क्रीडा विजिगीषाव्यवहार “““ (दिवादिः) । मन्त्र मे (तस्याः) उस विराटृरूपी गौ का (वत्सः) बडा (्रासीत्) था दारा विराट् का आह्वान करिया है। तथा “इन्द्रमह वणिजं चोदयामि” (श्रथवं० ३।१५।१) मे इन्द्र को वणिक् कहा भी है ।. “चमसः मेषनाम”

English

Of her the Gods and men said, This she knoweth. That we may both have life let us invoke her. Thus did they cry to her:

अध्याय 8

श्लोक 10.4-3

।तस्मा॑त् पि॒तृभ्यो॑ मा॒स्युप॑मास्यं ददति॒ प्र पि॑तृ॒याणं॒ पन्थां॑ जानाति॒ य ए॒वं वेद॑

| tasmāt pitṛbhyo māsyupamāsyaṃ dadati pra pitṛyāṇaṃ panthāṃ jānāti ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

श्मयर्वयेद-भाष्य का० ८ । सू० १० सहाथक है, अतः उसे “चमस कटा है । इस प्रकार “मेघः' रक्षा पालन का साघन है । पात्रम् =पा (रक्षणे) + तम् (वड. पालने) 1 । तां देवः स॑धिताऽधोक तामू्ामवाधोक् ॥२॥ (ताम्) उस विराटृरूपी गौ को, (सविता) प्रेरक (देवः) तथा व्यवहार कोही (अधोक्) दोहा । तामृजें देवा उप॑ जीवन्त्युपजीव नीयों मवति य एवं वेदं ॥४॥ (जीवन्ति) जीवित होते रहै, (यः ) जो ( एवम्) इस प्रकार दस तथ्य को (वेद) जानता है, वह् (उपजीवनीयः) भ्रन्यों के जीवनो का आश्रय(मवति)

English

Come, Strength! come, Food! come, Charmer! come, Free- giver! Her calf, her well-beloved calf, was Indra: Gāyatri was her rope, the cloud her udder.

अध्याय 8

श्लोक 10.4-4

।तां मा॒यामसु॑रा॒ उप॑ जीवन्त्युपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| tāṃ māyāmasurā upa jīvantyupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

समीप बुलाया कि (पुण्यगन्धे) है पवित्रगन्धवालो ! (एहि) तू आ “आपः द्वारा मेष" का वर्णेन हा है 1 तथा यजुवद से जिन मन्त्रो के द्योतन प्रं भमिगप्रत है 1 तथा युस्थानवासी भी । का०८।सूु० १० जथवेवेद-माष्य ३५१

English

Two teats she had, Rathantara and Brihat, two, Yajnāyajniya and Vāmadevya. With the Rathantara the Gods milked from her the Plants, and all the wide expanse with Brihat.

अध्याय 8

श्लोक 10.4-5

।तामू॒र्जां दे॒वा उप॑ जीवन्त्युपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| tāmūrjāṃ devā upa jīvantyupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

सहायक हैँ । इस भावना को ६-ठ मन्त्रो में दर्शाया है । यथः-- रमणीय गति करने वाला मेघ (तस्याः) उस विराट-गौ करा (वत्सः) बडा चित्ररथः = मेघ । वर्षाऋतु में मेघ नानाकृतियो में दृष्टिगोचर होता, गतियो मे अन्तरिक्ष मे विचरता है । रथः ““रहतेगैतकमेणः'' (निरुक्त ओौर चमकता हुभा अन्तरिक्ष कं पक्षों मे गति करता है । रथः “रमम।णो-

English

They drew the Waters forth with Vāmadevya, with Yajnayaj- niya they milked out worship. For him who knoweth this, Rathantara poureth out Plants, and Brihat yieldeth wide

अध्याय 8

श्लोक 10.4-6

वि॒षमे॒वास्याप्रि॑यं॒ भ्रातृ॑व्यमनु॒विषि॑च्यते॒ य ए॒वं वेद॑

viṣamevāsyāpriyaṃ bhrātṛvyamanuviṣicyate ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

ओर रश्मियों को विशेषरूप से क।रण कहा है । दोहन करता है, जिस से वर्षा होती, श्रौर ““ुष्करपणं"” आदि पेदा होते हैँ । पणं का अभिप्राय है पुष्कर की पंखुडियां । एकवचन जात्येकवचन है । इ दारा पृष्करों का विकसितरूप दर्शाया है। ये विकसित-पुष्कर भ्रमरो, मधुकरो के पात्र है, रक्षक-ओौर-पालक हँ । इन के साथ सूयेकाभी वणेन २५२ प्रथवंवेद-भाष्य का० ठ । सु० ११ हुआ है, सूयं के होते ही पुष्कर विकसित होते ह, ग्रौर सूर्यास्त पर मंकुलित

English

expansion. Waters from Vāmdevya come, from Yajnāyajniya sacrifice. She rose, she came unto the tress: they killed her. A year went by and she again existed.

अध्याय 8

श्लोक 10.5

।यन्त्य॑स्य दे॒वा दे॒वहू॑तिं प्रि॒यो दे॒वानां॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| yantyasya devā devahūtiṃ priyo devānāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

(वसुरुचिः) वसुओं के उत्पादन में रुचिवाले मेष ने, (अधोक्) दोहा (ताम्) अचेतन है, उसमे “रुचि"" सम्भव नहीं क्योंकि रुचि चतन काधमदहै।तोभो कं विसम्प्रदायानुसार अचेतन मे भी चेतनधर्मों काञआरोपहुभा करता है। (उपजीवनीयः) अर्यो के लिये जीवन का आश्रय (भवति) हो जाता, (यः) जो कि (एवम्) इस प्रकार (वेद) इस तथ्य को जानत है । बुलाया किं (पुम्यगन्धे) है पुण्यकमोँ की गन्ध वाली (एदि) आ; (इति) का० ८। सुऽ १० अथवेषेद-माष्यः १५३

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय 8

श्लोक 10.5-2

(११) तस्या॒ इन्द्रो॑ व॒त्स आसी॑द् गाय॒त्र्यऽभि॒धान्य॒भ्रमूधः॑

(11) tasyā indro vatsa āsīd gāyatrya'bhidhānyabhramūdhaḥ

हिन्दी अर्थ

१।३) । परति त सा्ुद्रिक जलो मे तथा भ्रन्तरिक्ष मे सरण करनी वाली (तेत्तिरीय आरण्यक १०।६) । इस भावना को सूचित करने के लिये मन्व मधुकर मंङरातेः है, पुष्कर की सुगन्ध से आकृष्ट होकर । दारा सुसज्जित रथों वाला सेन्यवगे । (पुष्करपणम्) विकसित पंसुदधियों वाला कमल था (पत्रम्) रक्षा भौर पालन का साधन।

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय 8

श्लोक 10.5-3

(१९) सोद॑क्राम॒त् सा दे॒वानाग॑च्छ॒त् तां दे॒वा अ॑घ्नत॒ सार्ध॑मा॒से सम॑भवत्

(19) sodakrāmat sā devānāgacchat tāṃ devā aghnata sārdhamāse samabhavat

हिन्दी अर्थ

भौर पालन पाम् का साधन था विकसित कमल । अभिप्राय यह कि ३५४ प्रयवंवेदे-माष्य का०८। सू० १० चाहने. वाला; यह् प्राकृतिक विभ्ूतियो को निज रक्षक तथा पालक समता वसुरुचिः वसुभं के उपाजन मे रुचिवाला वैश्यवर्णं । यह् भी उस को (इतरजना) इतरजनों ने (उप) अपने समीप (म्रह्वयन्त) बुलाया कि (तिरोधे) है अन्तर्घानरूपिणी ! धा कुटिलता का धारण-पोषण करने वाली ! (एहि) भ, (एति) इस प्रकार ।

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय 8

श्लोक 10.5-4

(२२) सोद॑क्राम॒त् सा पि॒तॄ॒नाग॑च्छत् तां पि॒तर॒ उपा॑ह्वयन्त॒ स्वध॒ एहीति॑

(22) sodakrāmat sā pitṝnāgacchat tāṃ pitara upāhvayanta svadha ehīti

हिन्दी अर्थ

का० ८। शुम १० प्रथर्ववेद-भाष्य ३५५ भधिमौतिकं वणेन हृभा है । इतरजन उन से भिन्न प्रकारके है जेसी तिरोधे ! = इतश्जनो की विराट्-व्यवस्था “तिरोघा' रूप है । "तिरोधा! ही किये जाते हँ (मन्त्र (१२), तथा तिरोधा काथं यह् भीहैकि

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय 8

श्लोक 10.5-5

(२६) सोद॑क्राम॒त् सा ग॑न्धर्वाप्स॒रस॒ आग॑च्छत् तां ग॑न्धर्वाप्स॒रस॒ उपा॑ह्वयन्त॒ पुण्य॑गन्ध॒ एहीति॑

(26) sodakrāmat sā gandharvāpsarasa āgacchat tāṃ gandharvāpsarasa upāhvayanta puṇyagandha ehīti

हिन्दी अर्थ

जिसे कि “इतरजन"” अपनाते हैँ । तिरः (कुटिलता, टेढापन +-धा (घारण- का राजा । (आमपात्रम्) तथा उन कौ अपरिपक्वनीति के रक्षा-पालन के साधन थे (पात्रम्) उनके रक्षक-पालक 1 कुबेरः कुवि (आच्छादने) +र तां रजतनांमिः कावेरकोऽधोक् तां तिरोधायेवार्धोक् ।११॥ (ताम्) उस इतरजनव्यवस्थारूपी विराट्-गौ को, (रजतनाभिः) ओर कुत्सित वीरता वाले कुबेर ने (अधोक् ) दोहा (ताम्) उस विराट् से

English

Come, O Māyā, come thou hither. Her dear calf was Virochana Prāhrādi: her milking vessel was a. pan of iron.

अध्याय 8

श्लोक 10.6

सोद॑क्राम॒त् सा द॑क्षिणा॒ग्नौ न्यऽक्रामत्

sodakrāmat sā dakṣiṇāgnau nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

१. ““कावेरकः” ९2, तथा एए? पाण्डुलिपियों के भाठ । कावेरकः, यथा ““कापुरषः' । तथा “रज्तनाभिः"' दवारा यह सूचित कियाद करि नाभिनाल द्वारा कृत्सितवीर या कावीरः यथा कापुरुष । रजतन्मर्ि-- माता से जन्मलाभ करतेहीजो प्रभूत रजत आदि का स्वामी बन गयाःहै वहः। “इतरजन राज्य में कूबर था बखडा, भौर रजतनाभिः कूत्सितवीर था दोग्धा ( ईसे कुत्सितवीर दस लिये कलहा है किं इसकी वीरत;, तिरोधानः को तथा कुटिल कर्मोको दही दोहृरूप में प्राप्त करतीहै। , जीवनीयो मवति य एवं वेदं ।॥१२॥ पः पापकमों को. छिषाने रूप.में (उप) श्राश्रय मान कर (इतरजनाः) इतर- जन (जीवन्ति) जीवित रहते है, (य । जो (एवम्) इस प्रकारके तथ्य को (वेद) जानन्ञा है वहु (सवं पाप्मानम्) सब. पापों को (तिरोधत्ते) छिपाता रहता है, भ्रौर अभ्य पापियों के लिये ' (उपजीवनीयः) जीवनो का आश्रय (भवति) हो जाता है।

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय 8

श्लोक 10.6-2

(१२) बृ॒हच्च॑ रथन्त॒रं च॒ द्वौ स्तना॒वास्तां॑ यज्ञाय॒ज्ञियं॑ च वामदे॒व्यं च॒ द्वौ

(12) bṛhacca rathantaraṃ ca dvau stanāvāstāṃ yajñāyajñiyaṃ ca vāmadevyaṃ ca dvau

हिन्दी अर्थ

पास (अह्वयन्त) बुलाया किं (विषवति) है विषवाली ! (एहि) आ (इति) (कि. सपे सदश पर-छिद्रो मेःपरवेश कर उनकी हत्या के लिये, विष प्रयोग का०.८। सुर १० अथयर्ववेदभाष्प ३१७ एसे सापो के सहारे सप॑प्रकृतिक लोग जीवनचर्या करते हँ" एसे सपं ही उन के जीवनों के रक्षक ओौर पालकं होते हैँ । जलवाले, तथा (धृतरष्ट्रः). सांपप्रकृतिकों के राष्ट कोः धारण करने वाले

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय 8

श्लोक 10.6-3

।तस्मा॑द् दे॒वेभ्यो॑ऽर्धमा॒से वष॑ट्कुर्वन्ति॒ प्र दे॑व॒यानं॒ पन्थां॑ जानाति॒ य ए॒वं वेद॑

| tasmād devebhyo'rdhamāse vaṣaṭkurvanti pra devayānaṃ panthāṃ jānāti ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

उसने दोह्।, दोहरूप में प्राप्त किया । नागपुर, नागालेण्ड पदों मे “नाग” पद का. भथंहै, नाग जाति के मनुष्य को (वेद) जानता है, वहु (उषजीवनीयः) अन्यो के अर्थात अन्य विष प्रयोक्तागों के जीवनों.का भ्राश्रय (भवति). हो जाता है। ३४८ परथवगेद-भाष्य काऽ .ठ८ सू०.१९

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय 8

श्लोक 10.6-4

।तस्या॑ य॒मो राजा॑ व॒त्स आसी॑द् रजतपा॒त्रं पात्र॑म्

| tasyā yamo rājā vatsa āsīd rajatapātraṃ pātram

हिन्दी अर्थ

भ्रतिफलसरूप मे (आहन्मि) मै मार डालता हू, (इति) इपर प्रकार संकल्प कर के (प्रति) प्रतिफलरूप मे (आहन्यात्) मार डाले । ही.दाले, ताकि वह् निरभेय होकर म्रन्यों पर मी विषप्रयोग न करतः रहै । ३. मनु के श्नुसार ““शरद'' अर्थात् विषदाता भ्रातताय है भौर नुने कहा है छि “प्नाततायिनमावन्त हुन्धादेवाविचारयन्” । का०८। सू० १० अथर्ववेद-माष्य ३५६९ के विषप्रयोक्ता को, -यहु सम कर उसे मार इसे। उसे मारने ते समभना चाहिए किं विष को सदा के लिये मार दिया । जब विषप्रयोक्षता न रहा तो विष मौर विषकाप्रयोगभोन रहा। .

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय 8

श्लोक 10.6-5

।तस्या॑श्चि॒त्रर॑थः सौर्यवर्च॒सो व॒त्स आसी॑त् पुष्करप॒र्णं पात्र॑म्

| tasyāścitrarathaḥ sauryavarcaso vatsa āsīt puṣkaraparṇaṃ pātram

हिन्दी अर्थ

विपमेषास्याभियं भरात॑व्यमनुविषिष्यते य एवं वेद् ॥; रा (यः) जो (एवम्) इस प्रकार इस तथ्य को (वेद ) जामता है (अस्य हं ९ हए भी सपत्न को (एव) ही (विषम्) विष (विषिच्यतै) विशेषतया एवं वेद = मन्त्र (३) मे कथित समाधान कोजो जान त्रो उसे भी विषदेने मे शद्धुत नहीं होता, जोकरिदहैतो न

English

These men depend for life on corn and tillage. He who knows this becomes a meet supporter, successful in the culture of his_ corn-land. She rose, she came unto the Seven Rishis. They called her,.

अध्याय 8

श्लोक 10.7

।य॒ज्ञर्तो॑ दक्षि॒णीयो॒ वास॑तयो भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| yajñarto dakṣiṇīyo vāsatayo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

समाप्त केर देने बाले विषैले जल द्वारा । । । प्रकाशित वा प्रसारित प्रामाणिक परन्य भ्रति भाग सहस्राधिक टिप्पणियां, १०-११ प्रकारः ५ शव ४. तैत्तिरीय संहिता-पवपाठः-- ५० वषं से दुलंम ग्रन्थ का पु (+ क --श्री पं० विद्वनाथ जी वेदोपाघ्याय कृत ।,६-१०

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय 8

श्लोक 10.7-2

(१३) ओष॑धीरे॒व र॑थन्त॒रेण॑ दे॒वा अ॑दुह्र॒न् व्यचो॑ बृह॒ता

(13) oṣadhīreva rathantareṇa devā aduhran vyaco bṛhatā

हिन्दी अर्थ

6 काष्ड क । बीसवां काण्ड २५-००। काण्ड ७-८ छप रहा है । एवं न रिप्फणियो से युक्त । साधारण जिल्दं ३०-००, पूरे कषड ह. -परििष्ट --मूमिका पर किए गये भ्राक्षेपो ७. ॥ग्वेदादिभाष्यभूमिका ह के ग्रन्थकार द्वारा दिये उत्तर । ध मू वारिधि । सर्वाधिक शुद्ध सस्करण । वा ध

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय 8

श्लोक 10.7-3

(२०) सोद॑क्राम॒त् सा म॑नु॒ष्या॒३नाग॑च्छ॒त् तां म॑नु॒ष्याऽ अघ्नत॒ सा स॒द्यः सम॑भवत्

(20) sodakrāmat sā manuṣyā3nāgacchat tāṃ manuṣyā' aghnata sā sadyaḥ samabhavat

हिन्दी अर्थ

सिरमिय संस्कृत टीका सहित । टीका का पूरा पाठ प्रथम वार छापा ६ नि विजयपाल जी विद्यावारिधि । उत्तम संस्करण ३५-००; साधारण २५-०० प्रकाश साहित्यदर्पण श्रादि के समान १४. वेदसं्ञा-मीमांसा- युधिष्ठिर मीमांसक २-०० १५. वेविक-छन्दोमीमांसा -यु० मी०। नया संस्करण २५-०० १६. वदिक-स्वर-मीमांसा -यु० मी० । नया संस्करण ३०-०० १८. वेर्वो का महत्व तथा उनके प्रचार के उपायः; वेदाथ को विविष

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय 8

श्लोक 10.7-4

।तामन्त॑को मार्त्य॒वोऽधो॒क् तां स्व॒धामे॒वाधो॑क्

| tāmantako mārtyavo'dhok tāṃ svadhāmevādhok

हिन्दी अर्थ

२१. निरुक्तकार भ्रौर षेद में हतिहास- + „+ २-५० शरो प° धमेदेव जी निरुक्ताचायं । मूल्य २-५० कन्यतीथं लिखित वेदविषयक चतुदश-मुवन, वसिष्ठ-नन्विनी, वैदिक जो वेदोपाध्याय । बहधिया जिल्द २५-००, साधारण २०-००।

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय 8

श्लोक 10.7-5

।तां वसु॑रुचिः सौर्यवर्च॒सोऽधो॒क् तां पुण्य॑मे॒व ग॒न्धम॑धोक्

| tāṃ vasuruciḥ sauryavarcaso'dhok tāṃ puṇyameva gandhamadhok

हिन्दी अर्थ

२९. वेविक-पीयूष-धारा--लेखक-- श्री देवेन््कुमार जी कपुर । चुने गीतों से युक्त । उत्तम जित्द १५-००; साधारण १०-००। ३१. उरज्योति -डा० वासुदेवशरण भ्रग्रवाल लिखित वेदविषयकं ३२. वेदो कौ प्रामाणिकता--डा० श्रीनिवास शास्त्री । १-५० फमेकाण्ठ-विषयक्र अ्रन्थ ३४. बौधायन-घौत-सूत्रम्-- ( दशंपणमास प्रकरण ) - भवस्वामी तथा

English

He who knows this becomes a meet supporter. She rose approached the Apsarases and Gandharvas. They called her, Come to us, O

अध्याय 8

श्लोक 10.8

सोद॑क्राम॒त् सा स॒भायां॒ न्यऽक्रामत्

sodakrāmat sā sabhāyāṃ nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

सायणकरृत भाष्य सहित (संस्कृत) । ४५-०० ३५. बौधायन-भौत-घुत्रम् (आधान-प्रकरण )- सुबोधिनी वृत्ति सहित । २६. दक्षपू्णमास-पद्धति पं भीमसेन कत्, भाषां सहित । २५-०० हमने इसे प्रथम बार छापा है । । २५-०० सं्लोधित संस्कारःविधिका म्राघार् बना। २०-००

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय 8

श्लोक 10.8-2

(१४) अ॒पो वा॑मदे॒व्येन॑ य॒ज्ञं य॑ज्ञाय॒ज्ञिये॑न

(14) apo vāmadevyena yajñaṃ yajñāyajñiyena

हिन्दी अर्थ

सोमयाग, चातुर्मास्य ग्रौर वाजपेय आदि यागो का वणन है। (दोनों भाग बरृह॒द् हवन के मन्त्रौ सहित । मूल्य १-०० एेतिह्य दिया गया है (संस्कृत) सम्पादक - डा ° विजयपाल विद्यावारिषि ५८. धातुपाठ -धात्वादिसूचौ सहित, शुद्ध संस्करण । ३-५० ५९. क्षीरतरङ्किणी--क्षी रस्वामीकृत । पाणिनीय धातुपाठ की सबसे ६०. धातुप्रदौप-मेत्रेयरक्षित . विरचित पाणिनीय धातुपाठ को

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय 8

श्लोक 10.8-3

।तस्मा॑न्मनु॒ष्ये॒ऽभ्य उभय॒द्युरुप॑ हर॒न्त्युपा॑स्य गृ॒हे ह॑रन्ति॒ य ए॒वं वेद॑

| tasmānmanuṣye'bhya ubhayadyurupa harantyupāsya gṛhe haranti ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

कागज श्रौर छपाई सुन्दर, सजिल्द २५-००। ६५. उभाविकोष-- ० द० स° कृत व्याख्या तथा प० य° मी० कृत ६६. वेवम् पुरुषकारवातिकोपेतम्-लीलाशुकमुनि कृत । १२-०० ६७. लिट् भ्रौर लुङ लकार की रूप-बोधक सरलविषि-- ४५-००

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय 8

श्लोक 10.8-4

।तां स्व॒धां पि॒तर॒ उप॑ जीवन्त्युपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| tāṃ svadhāṃ pitara upa jīvantyupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

७१. शाब्बरूपावलौ-- विना रटे शब्दरूपो का ज्ञान कराने वाली ३-५० ७२. संस्कृत-धातुकोक्ष- पाणिनीय धातु्रों का हिन्दी में भ्रथं निदेश । छपाई, उत्तम कागज, बदिया जिल्द सहित । मूल्य ५०-०० विषय परिपणे महत्त्वपूणे भूमिका छपी है । मूल्य ५०-०० प्रतिपादन करने वाला दानिक ग्रन्य 1 मूल्य ४०-०० अग्रजी व्याख्या सहित । मूल्य ईशो० २-००; केनो० २-००; कठो० ४-००

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय 8

श्लोक 10.8-5

।तं पुण्यं॑ ग॒न्धं ग॑न्धर्वाप्स॒रस॒ उप॑ जीवन्ति॒ पुण्य॑गन्धिरुपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| taṃ puṇyaṃ gandhaṃ gandharvāpsarasa upa jīvanti puṇyagandhirupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

9. मानवता कौ श्रोर--श्री शान्तिस्वरूप कपुर के विविध विचारो- तजक सरल भाषा मे लिखे गये लेखो का संग्रह । ५-०० सहिते । सुन्दर काण्ड २०-०० युद्धकाण्ड १२-०० स्वती । विस्तृत विषय-सूची तथा शलोक-पची सहित । उत्तम कागज, सून्दर ६०. विदुर-नोति -पं° युधिष्ठिर मीमांसक करत प्रतिपद पदाथं भौर

English

and makes all evil disappear and vanish. She mounted up, she came unto the Serpents. The Serpents called her, Venomous! come hither.

अध्याय 8

श्लोक 10.9

।यन्त्य॑स्य स॒भां सभ्यो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| yantyasya sabhāṃ sabhyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

नया परिष्कृत परिवधित संस्करण । तीनो भागों का मूल्य १२५-०० ९३. ऋषि दयानन्द के पत्र भ्रौर विज्ञापन-इस बार इसमे ऋषि दयानन्द के अनेक नये उपलब्ध प श्रौर विज्ञापन संगृहीत किय गये हु। शस बार यह संग्रह चार भागो मे छपा है प्रथम दो भागोंमें ऋ° द के पत्र बौर विज्ञापन भादि संगृहीत है । तीसरे मौर चौथे भाग मे विविध ६४. विरजानन्द प्रकाड--लेखक-पं° -पीमसेन शास्त्री एम ए०) नया परिवर्धित ओौर शुद्ध संस्करण। मूल्य ४.०० द्विष्टे के सहित । मूल्य ४०-५० १०५. भागवत-खण्डनम्-ऋ० द० की प्रथमङ़ृति । श्रनुवादक

English

The poison that it drives away, that poison verily repels. The man who hath this knowledge pours its venom on his hated foe. 137

अध्याय 8

श्लोक 10.9-2

(१५) ओष॑धीरे॒वास्मै॑ रथन्त॒रं दु॑हे॒ व्यचो॑ बृ॒हत्

(15) oṣadhīrevāsmai rathantaraṃ duhe vyaco bṛhat

हिन्दी अर्थ

१०६. ऋषि दयानन्द के दास्तां नोर प्रवचन इसमे पौराणिक विद्वानों तथा ईसाई मुसलमानों के साथ हए ऋ° द° के शास्त्राथे तथा पूना संग्रह है । उत्तम कागज, कपड़े को जिल्द । मूल्य ३५-०० १०६. ऋषि दयानन्द सरस्वती के ग्रन्थों का इतिहास लेखक-- युधिष्ठिर मीमांसक । नया परिशोधित परिवर्धित संस्करण । ४०-०० ११०. व्यवहारभानु - ऋषि दयानन्द कृत । +

English

The poison that it drives away, that poison verily repels. The man who hath this knowledge pours its venom on his hated foe. 137

अध्याय 8

श्लोक 10.9-3

(२३) सोद॑क्राम॒त् सा म॑नु॒ष्या॒३नाग॑च्छ॒त् तां म॑नु॒ष्या॒३ उपा॑ह्वय॒न्तेरा॑व॒त्येहीति॑

(23) sodakrāmat sā manuṣyā3nāgacchat tāṃ manuṣyā3 upāhvayanterāvatyehīti

हिन्दी अर्थ

खण्डन श्री पं० महाराणी शंकर । अपने विषय की सुन्दर सामयिक पुस्तक । हः ), ॐ „ (अक्षेपों के उत्तरं सहित) मूल्य ८-०० वेद में इतिहास है वा नहीं' विषय पर लाहौर में सन् १६३३ मे म० हंस राज जी के सभापतित्वमे हुआथा1 । छ्मप्राप्य ३६ वषो से विना नागा नियत समय प्रकाशित होने वाली वेदादि पूणं विषय पर एक बृहद् षिशेषांक दिया जाता है । वार्षिके चन्दा १५-०० रपये म।तर । विदेशों के लिये ४०-०० रुपया वार्षिक ।

English

The poison that it drives away, that poison verily repels. The man who hath this knowledge pours its venom on his hated foe. 137

अध्याय 8

श्लोक 10.9-4

(२७) सोद॑क्राम॒त् सेत॑रज॒नानाग॑च्छत् तामि॑तरज॒ना उपा॑ह्वयन्त॒ तिरो॑ध॒ एहीति॑

(27) sodakrāmat setarajanānāgacchat tāmitarajanā upāhvayanta tirodha ehīti

हिन्दी अर्थ

बहालगटू, जिका सोनीपत (हरयाणा) १३१०२१ पद पर नियुक्त तथा सन् १९४२ मे वहाँ से सेवामुक्त हुए। अनुसन्धान - सन् १९२३-२४ मे परोपकारिणी सभा अजमेर मे। सन् १९५६-५७ आर्य सार्वदेशिक वाटिका में साथ ही ' वैदिक अनुसन्धान ' त्रैमासिक पत्रिका का सम्पादन भी। अन्य लेखन- ९. सामवेद का आध्यात्मिक भाष्य। रहन के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदक प्राप्त हुआ।

English

The poison that it drives away, that poison verily repels. The man who hath this knowledge pours its venom on his hated foe. 137

अध्याय 8

श्लोक 10.10

सोदक्राम॒त् सा समि॑तौ॒ न्यऽक्रामत्

sodakrāmat sā samitau nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

कामानस्माकं पूरय परति ग्रृह्वाहि नौ हविः ॥१३॥ हे एकाष्टके ! तु (प्रजापतेः) प्रजाओं के पति परमेश्वर की (दुहिता असि) श्रौर (नः) हमारी (हविः) हवि को (प्रति गृह्णाहि) स्वीकारकर। हँ नवीन वषं ४ वषं भर होनी वाली मानुषी कामनाएं । वे अव्याहतरूप में पूरी होती रहँ इस निमित्त, हविर्यज्ञ करते रहने का निर्देश हृभा है ताकरि वायु भादि की शुद्धि ग्रौर सम्पुष्टि होती रहे ।

English

We, Kagyapa! six present Rishis, ask thee—for thou hast prov- ed things tried and meet for trial

अध्याय 8

श्लोक 10.10-2

(१६) अ॒पो वा॑मदे॒व्यं य॒ज्ञं य॑ज्ञाय॒ज्ञियं॒ य ए॒वं वेद॑

(16) apo vāmadevyaṃ yajñaṃ yajñāyajñiyaṃ ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

३२६ श्रथववेद-भाष्य कान सू० १० गन्धरवाप्सिरसराज्य गन्धवं हैँ गौः पृथिवी के धारकं राजा लोग, जिन्हे कि ""पाधिवाः" कहते है, रौर अप्सरसः हँ जल तथा अन्तरिक्ष कौ (३) इतरजनराज्य । इतरजन है ( आधिभौतिकाथं) गन्धर्वा्सराजं त सिन्त प्रकार के छलौ-कपटी लोग । विराट्-गौ है तिरोधा । वश्रवण ताण का साधन । रजतनाभि कविरक है विराट्-गौ का दोहन-कर्ता । दोहा-दूध है तिरोधा, छ्लकपट, पापों को छिपाना ।

English

We, Kagyapa! six present Rishis, ask thee—for thou hast prov- ed things tried and meet for trial

अध्याय 8

श्लोक 10.10-3

।तस्या॒ मनु॑र्वैवस्व॒तो व॒त्स आसी॑त् पृथि॒वी पात्र॑म्

| tasyā manurvaivasvato vatsa āsīt pṛthivī pātram

हिन्दी अर्थ

थी,.गृह् नहीं तो उस का अधिपतिभमीन था,भ्रौर न पति-पत्नी भावक ३२८ प्रथ्वेवेद-भाष्य का०८॥। सू १० पद भूतकाल केह, रतः तदनुसार अथं दर्शाए है, वस्तुतः, अभिप्राय सावतिक होते है । छन्दसि लुड. लड लिटः (भ्रष्टा ° ३।४।६ ) । गृहमेधी गृहपंतिभवति य एवं वेदं ॥२॥

English

We, Kagyapa! six present Rishis, ask thee—for thou hast prov- ed things tried and meet for trial

अध्याय 8

श्लोक 10.10-4

।तस्याः॒ कुबे॑रो वैश्रव॒णो व॒त्स आसी॑दामपा॒त्रं पात्र॑म्

| tasyāḥ kubero vaiśravaṇo vatsa āsīdāmapātraṃ pātram

हिन्दी अर्थ

उन देवों का (प्रियः) प्यारा (भवति) हो जाता है (यः) जो (एवम्) इस प्रकार की श्राहवनीय व्यवस्था को (वेद) जानता है। एकत्रित कर, निज पारस्परिक जीवनों को सुखी बनाने के लिये, आहवनीय का०८। सु० १० अथववैद-माधष्य २२६ बन जाता है, श्रीर वे आहूत देव इसे भ्राहवनीय व्यवस्था का मुखिया चुन लेते है, यह् भावना मन्त्र मे निहित दहै! यह भावना अगले मन्वोंदयारा जीवन फो अपनाया भौर जाङ्खलिक जीवन को त्याग कर पति-पली

English

We, Kagyapa! six present Rishis, ask thee—for thou hast prov- ed things tried and meet for trial

अध्याय 8

श्लोक 10.11

।यन्त्य॑स्य॒ समि॑तिं सामि॒त्यो भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

| yantyasya samitiṃ sāmityo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

देवकोटि के रमणी ही होते तथा इनमें परस्पर सगम होता है, समभ्र जिला के निवासियों के हितकर कार्योके लिये । आगामी मन्त्रों मे उक्त तीन संस्थायो का वणेन हरा है । सोदक्राम॒त् सा सभायां न्यकरामत् ॥८॥ (यः) जो (एवम्) एस प्रकार (वेद) सभा-संस्था के महत्व को जानता सभासद् होकर सभा का सभापति हो जाता है। (दुहितरौ) तुम दोनों सभा, समिति दुहिता के सदृश कामनाओंका दोहन करने वाली हो, (संविदाने) तुम दोनों सम्यक् ज्ञानी हो, परस्पर ेकमत्य होकर कामनाओं का दोहन करो । (येन) तुममेंसे जिस किसीके साय (संगच्छ) मेँ सभा-समिति का पति संगकरू । (सः) वह् (मा) मुभे (उपशिक्षात्) मेरे समीप प्राकर परामशं प्रदान करे। । ( पितरः) हे

English

Who knows her steps, how oft, how far extended, who knows her home and number of her dawnings?

अध्याय 8

श्लोक 10.11-2

।तां पृथी॑ वै॒न्योऽधो॒क् तां कृ॒षिं च॑ स॒स्यं चा॑धोक्

| tāṃ pṛthī vainyo'dhok tāṃ kṛṣiṃ ca sasyaṃ cādhok

हिन्दी अर्थ

समिति का वर्णन मन्त्र (१०; ११) में होगा । यह समिति राजसमा है । “सभ्य सभां मे पाहि ये च सभ्याः सभासदः'” (अथवं० १६।५५।५), प्रजापति राजा कहता है कि “है सभ्य 1 अर्थात् सभापति ! तथाह सभा मे उपस्थित सभासदों ! तुम मिलकर मेरी समाकौ रक्षा करो । यह् सभा- पति समभा का संचालक है, जो कि प्रजापति द्वारा नियत क्रिया जाता है । संगतेषु = समा ओर समिति के संधुक्त श्रपिवेशनों को “संगत'' कहा है । सोदकरामत् सा सातो स्य क्रामत् ॥१०॥ को (वेद) जानता है वह (सामित्यः) समिति का समितिपति (भवति) हो जाता है, (अस्य) मौर इस की (समितिरौ समितिमे (यन्ति) राजा

English

Who knows her steps, how oft, how far extended, who knows her home and number of her dawnings?

अध्याय 8

श्लोक 10.11-3

।तां र॑ज॒तना॑भिः काबेर॒कोऽधो॒क् तां ति॑रो॒धामे॒वाधो॑क्

| tāṃ rajatanābhiḥ kāberako'dhok tāṃ tirodhāmevādhok

हिन्दी अर्थ

समिति है राजसभा, राजाभों की समा । यथा “यत्रौषधीः समग्मत १२।८०), अर्थात् जिस में ओषधियों का संगम होता है, जेसे कि राजाथों रोगोत्पादक क्रिमिरूपराक्षसों का हनन करता है, ओर अमौवाग्रों का विनाश करता है । अमीवा अम रोगे (चुरादिः) । इस प्रकार यजुवद मे भिषक् के लक्षण में, समिति में राजाओं का संगम दशया दहै । समिति में रष्टरों के राजा एकत्रित होते ह! यह् है "राजसभा" वेदानुसार राष्ट के राजा वंशानुगत नहीं ह अपितु प्रादेशिक प्रजाभं दारा चुने" गए होतेहँ। (अथवं० ६।८७।१; ४।८।४) । यजुर्वेद के “युद्धमिति” अथं प्रायः किया जाता है । यहं ठीक नहीं प्रतीत होता ।

English

Who knows her steps, how oft, how far extended, who knows her home and number of her dawnings?

अध्याय 8

श्लोक 10.12

सोद॑क्राम॒त सामन्त्र॑णे॒ न्यऽक्रामत्

sodakrāmata sāmantraṇe nya'krāmat

हिन्दी अर्थ

जघ राजसमिति का निर्माण हो जाता है, तब राष्टू-समा प्रौर राज-समिति मिल कर “सम्राट्” का चनाव करती है । इसलिये कहा है “ये राजानो राजकृतः" करते हं, “राजानं कुवेन्तीति राजकृतः” 1 (मन्व १) का अंश भी सम्भावित विद्यमान रहता है ।

English

dwelling. Sūrya’s two wives, unwasting, most prolific, knowing their way, move, rich in light, together. The three have passed along the path of Order—three warm libations have regarded offspring

अध्याय 8

श्लोक 10.12-2

।ते कृ॒षिं च॑ स॒स्यं च॑ मनु॒ष्या॒३उप॑ जीवन्ति कृ॒ष्टरा॑धिरुपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| te kṛṣiṃ ca sasyaṃ ca manuṣyā3upa jīvanti kṛṣṭarādhirupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

कहलाता है । सम्राट् संगत हुए राजाश्रों की संस्था। यजुवेदमें कहा कि का० ८ सु० १० श्रथवेवेद-भाष्य ३३३ तां देवमनुष्था अघ्रुवन्नियमेव तद् वेद यदुभयं उपजीेमेमामुपं के आश्रय पर (उभये) हम दोनों देव, मनुष्य (उप जीवेम) जीवित हो सकते हँ । अतः (इमाम्) इसे (उप) समीप (ह्वयामहे) हम बृलाते है । देवाः विद्वांसो वै देवाः । मनुष्य! = मननशील सवंसाधारण मनुष्य । विध प्रजां का पत्ति । “वरुणदच राजा” में राजा कौ वर्ण कहा है, यतः राजा

English

dwelling. Sūrya’s two wives, unwasting, most prolific, knowing their way, move, rich in light, together. The three have passed along the path of Order—three warm libations have regarded offspring

अध्याय 8

श्लोक 10.12-3

तां ति॑रो॒धामि॑तरज॒ना उप॑ जीवन्ति॒ ति॒रो ध॑त्ते॒ सर्वं॑ पा॒प्मान॑मुपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

tāṃ tirodhāmitarajanā upa jīvanti tiro dhatte sarvaṃ pāpmānamupajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

३३४ भ्रथववेद-माष्य का० ८ सु० १० हे स्वधारण-पोषण की शक्ति देने वाली विराट् (एहि) तु भ्रा, (सूनृते) हे देवों ओर मनुष्यों ने श्रनुभव किया कि हम दोनों के जीवन इसी विराट् पर भाश्ित रह, अतः इस का उन दोनों ने स्वागत करते हुए कहा (मन्व ४) कि सब को प्रात होता है। इरावती = इरा श्रन्ननाम (निघं० २।७) ; इरा जल-

English

dwelling. Sūrya’s two wives, unwasting, most prolific, knowing their way, move, rich in light, together. The three have passed along the path of Order—three warm libations have regarded offspring

अध्याय 8

श्लोक 10.13

।(६) यन्त्य॑स्या॒मन्त्र॑णमामन्त्र॒णीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

|(6) yantyasyāmantraṇamāmantraṇīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

द्वारा बान्धकर दोहा जाता है, ताकि वहु इधरुूउधर विचलित नहो सके । गौ, विना वत्स के दूध नहीं देती । विराट् गौ का वत्स है विद्यत । “यो गायव्याः अधिपति्बेभूव (अथवं० ४।३५।६) । वह् परमेश्वर अभि का० ८ । सू० १० मथववंवेद-माष्य ३३५ गौ के चार स्तन होते है। बृहत् श्रादि चारको विराटू-गौ के चार ओषधीरेव रंथन्तरेणं देवा अंदृहन् व्यचो बहुता ॥७॥

English

The five sky-regions made fifteen in number, one head have these to one sole world directed. Six Elements arose, first-born of Order: the six-day time is carried by six Sāmans.

अध्याय 8

श्लोक 10.13-2

(२४) सोद॑क्राम॒त् सा स॑प्तऋ॒षीनाग॑च्छ॒त् तां स॑प्तऋ॒षय॒ उपा॑ह्वयन्त॒ ब्रह्म॑ण्व॒त्येहीति॑

(24) sodakrāmat sā saptaṛṣīnāgacchat tāṃ saptaṛṣaya upāhvayanta brahmaṇvatyehīti

हिन्दी अर्थ

(देवाः) देवों ने (रथंतरेण) रथंतर द्वारा (श्रोषधीः एव) ओषधियों अपो वामदेव्येन यन्न॒ यन्ञायश्ियैन ॥८॥ चार स्तनो से हुआ कहा है 1 सम्भवतः एक-एक स्तन से एक-एक ओषधि आदि का दोहन । ये चार फल हँ “विराट् रूपी गौ" से प्राप्त । रथंतर है पृथिवी, जिसमें रथों द्वारा मगेरूपी समुद्र तेरा जाता है।

English

The five sky-regions made fifteen in number, one head have these to one sole world directed. Six Elements arose, first-born of Order: the six-day time is carried by six Sāmans.

अध्याय 8

श्लोक 10.13-3

(२८) सोद॑क्राम॒त् सा स॒र्पानाग॑च्छ॒त् तां स॒र्पा उपा॑ह्वयन्त॒ विष॑व॒त्येहीति॑

(28) sodakrāmat sā sarpānāgacchat tāṃ sarpā upāhvayanta viṣavatyehīti

हिन्दी अर्थ

३३६ श्रथववेद-भाष्य का०८। सू० १० जीवन साधन, विराट्-गौ के दुग्धरूप हु । ओषधीरेवास्मै रथंतरं है भ्यचों बृहत् ॥९॥ अपो वामदेव्ये य॒त यज्ञायज्ञियं य एवं वेदं ॥१०॥ (अस्मे) इसके लिये (रथंतरम्) रथंतर स्तन पृथिवी (ओषधीः एव) भरोषधियों का ही (दुहे) दोहन करती है (बृहत्) बृहत् स्तन (व्यचः') स्तन (अपः) जल का दोहन करता है, (यज्ञायज्ञियं) ओर यज्ञायसिय स्तन (यज्ञम) यज्ञका दोहन करता है, (यः) जो कि (एवम्) इस प्रकार श्रोषधि आदि का जीवन के साधन वेद) जानता है।

English

The five sky-regions made fifteen in number, one head have these to one sole world directed. Six Elements arose, first-born of Order: the six-day time is carried by six Sāmans.

अध्याय 8

श्लोक 10.14

।तस्याः॒ सोमो॒ राजा॑ व॒त्स आसी॒च्छन्दः॒ पात्र॑म्

| tasyāḥ somo rājā vatsa āsīcchandaḥ pātram

हिन्दी अर्थ

गौ के1 ओौर ग्रोषधि भादि चार दुग्धरूपर्ह, विराटरूपीगौके। जो का० = सु० १० प्रथर्ववेद-भाष्य २३७ वृष्चतेस्यामिंषो भाव्यो य णवं वेद् ॥२॥ परोहित हौ जाता है । (यः) जो (एवम्) इस तथ्य को (वेद) जानता हे

English

redundant? Seven sages, eagles, have sat down together: seven metres match the seven Consecrations.

अध्याय 8

श्लोक 10.14-2

।तस्या॑स्तक्ष॒को वै॑शले॒यो व॒त्स आसी॑दलाबुपा॒त्रं पात्र॑म्

| tasyāstakṣako vaiśaleyo vatsa āsīdalābupātraṃ pātram

हिन्दी अर्थ

तियो के कटे अंश भी प्ररोहितहोजतेहैँ तौ वह भी निज मनोभावनाभं के कटु अंशो मे सुधार करता है, ओर उसके मन का मालिन्य अर्थात् पाप भी कट जाता है । “धातृव्य”” पद मनोगत “पाप” को सूचित करता है । णेति तुपचारात्” (भटोजदीक्षित कोमुदी, अष्टा० ४।१।१४५)। भभिप्राय जीवन को समूक्नत करता रहता है । यथपि दो मासो की एक ऋतु होती है । तो भी ऋतु केदोमासोग्में से प्रत्येक मास में विराट् प्रकट होती है। (मास्यम्) मासमे देय हविः (उप ददति) उपहाररूप मे देते है, वह् (पितुयाणम् पन्थाम्) पितृयाणः नामक मागे को ( प्रजानाति) जानता है (यः) जो (एवम्) इस प्रकार ऋतुप्रों के स्वरूप को (वेद) जानता है । सोदंकामत् सा देवानाग॑च्छत् तां देवा अघ्नत साधेभासे

English

redundant? Seven sages, eagles, have sat down together: seven metres match the seven Consecrations.

अध्याय 8

श्लोक 10.15

।तां बृह॒स्पति॑राङ्गिर॒सोऽधो॒क् तां ब्रह्म॑ च॒ तप॑श्चाधोक्

| tāṃ bṛhaspatirāṅgiraso'dhok tāṃ brahma ca tapaścādhok

हिन्दी अर्थ

२. बैदिक साहित्य मे प्रत्येक मास कोभी छतु कहा है 1 यथा ““मधुरच माघव- प्रतः दो मास को सुचित करते । दसी प्रकार देखो (यजु° १४।१६; १४। २७) । फा०८। सूु० १० प्रथववेद-माष्य ३३६ (अधंमासे) श्रधंमास मे (सम्, अभवत्) प्रकट हुई !

English

Vultures. Seven metres, by four syllables increasing, each of the seven founded upon another

अध्याय 8

श्लोक 10.15-2

तां धृ॒तरा॑ष्ट्र ऐराव॒तोऽधो॒क् तां वि॒षमे॒वाधो॑क्

tāṃ dhṛtarāṣṭra airāvato'dhok tāṃ viṣamevādhok

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमा देवता...” (यजु० १४।२० । अतः चन्द्रमा कौ कलाएं भी, (तस्मात्) इसलिये (देवेभ्यः) देवों के प्रति (अधंमासे) अघेमास में (देवयानं पन्थाम्) “देवयान” नामक मागं को (प्रजानःति) जानता है (यः) जो कि (एवम्) इस प्रकार के तत्त्व को (वेद) जानता है । दिन (उप हरन्ति) उपहाररूप में अन्न लाते है, (भस्य) इसके (गृहे) घर मे (उप हरन्ति) उपहाररूप मे भन्न लाते रहै (यः) जो (एवम्) स प्रकार (वेद) जानता है । के. लिये दिन मे एकं बार भोजन करने का निर्दश हृञा है । एकवार प्रति- दन भोजन करने पर सुपच होकर अगले दिन भूख चमक उटती है, तब पूनः भोजन करने पर कोष्ठबद्धता आदि की शिकायत नहीं रहती, शरीर

English

Vultures. Seven metres, by four syllables increasing, each of the seven founded upon another

अध्याय 8

श्लोक 10.16

।तद् ब्रह्म॑ च॒ तप॑श्च सप्तऋ॒षय॒ उप॑ जीवन्ति ब्रह्मवर्च॒स्युऽपजीव॒नीयो॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑

| tad brahma ca tapaśca saptaṛṣaya upa jīvanti brahmavarcasyu'pajīvanīyo bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

मे “अहरहः” पाठ है, जिस का अथं है दिन-प्रतिदिन । मन्त्र ४ श्रौर में मास भौर भ्रधेमासमें हविः देने का विधन, ओौर मन्त्र में प्रतिदिन एक वार मनुष्य को भोजनाहुति देने का संकेत हआ है । “उभयद्युः” का श्रभिप्राय है दो लगातार दिन । अर्धात् एक दिन भोजन लेकर उसके अगले दिन भी भोजन लेना चाहिए, बीच के व्यवधान न हैना चाहिए, अन्यथा निर्बलता असरों ने (उपाह्वयन्त) श्रपनै समीप बुलाया कि (माये) है माया ! (एहि) आ, (इति) इस प्रकार । का० ८ । सू० १० अथवेवेद-माष्य ३४१ असुर है प्राण" के ओौर धनः के अनुयायी, जो कि निज प्राणों के पोषण ओर धनाजेन को जीवन का ध्येय समभते हँ । उन्होने विराट् को श्रपने पास बुलाया, प्रौर वह् मायारूप मे उनके पास ्राई। भाया है प्रकृति को “असुराः'” कहा है, ये प्राकृतिक उन्नति को निज ध्येय जानते हँ । आसुरः

English

How are the hymns of praise on these supported, and how are these imposed upon the praise songs? How hath the Gāyatri filled out three triads? On the fifteen how is the Trishtup moulded, Jagatī fashioned on the three-and-thirty? How is Anushtup formed? how Ekavinsa?

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।