Atharva Veda
8
अध्याय 8 / 20

Kanda 8

काण्ड 8

292 श्लोकभाग 5/6 · श्लोक 9.1–9.26

पूर्ण अध्याय पाठ26 श्लोक

अध्याय 8

श्लोक 9.1

विराट्।१-२६ अथर्वा।कश्यपः, सर्वे ऋषयः, छन्दांसी च, विराट्।त्रिष्टुप्, २ पङ्क्तिः, ३ आस्तारपङ्क्तिः, ४-५, २३, २५-२६ अनुष्टुप्, ८, ११-१२, २२ जगती, ९ भुरिक्, १४ चतुष्पदातिजगती।कुत॒स्तौ जा॒तौ क॑त॒मः सो अर्धः॒ कस्मा॑ल्लो॒कात् क॑त॒मस्याः॑ पृथि॒व्याः ।व॒त्सौ वि॒राजः॑ सलि॒लादुदै॑तां॒ तौ त्वा॑ पृछामि कत॒रेण॑ दु॒ग्धा

virāṭ| 1-26 atharvā| kaśyapaḥ, sarve ṛṣayaḥ, chandāṃsī ca, virāṭ| triṣṭup, 2 paṅktiḥ, 3 āstārapaṅktiḥ, 4-5, 23, 25-26 anuṣṭup, 8, 11-12, 22 jagatī, 9 bhurik, 14 catuṣpadātijagatī| kutastau jātau katamaḥ so ardhaḥ kasmāllokāt katamasyāḥ pṛthivyāḥ | vatsau virājaḥ salilādudaitāṃ tau tvā pṛchāmi katareṇa dugdhā

हिन्दी अर्थ

ओर शिशिर को एक मानकर । मन्त्र (१७) मे ६ ऋतुरएं अभिप्रत ह, हेमन्त है । सातवीं ऋतु "त्रयोदश मस" रूपहै, इसे मलमासमभौ क्तेर्हु। यया ३।८) । इस त्रयोदश मास को श्रधिकमास भी कहते ह । इसकी व्याख्याके कररहे रह, “परिभरतमायन्'" ये सव्रहैँ ७ गृध्राः। आदित्य की सप्तरर्मियों को द्विविध मानाहै।

English

for goats and sheep, 132

अध्याय 8

श्लोक 9.2

यो अक्र॑न्दयत् सलि॒लं म॑हि॒त्वा योनिं॑ कृ॒त्वा त्रि॒भुजं॒ शया॑नः ।व॒त्सः का॑म॒दुघो॑ वि॒राजः॒ स गुहा॑ चक्रे त॒न्वःऽ परा॒चैः

yo akrandayat salilaṃ mahitvā yoniṃ kṛtvā tribhujaṃ śayānaḥ | vatsaḥ kāmadugho virājaḥ sa guhā cakre tanvaḥ' parācaiḥ

हिन्दी अर्थ

(कः, नु) कौन है निस्वयसे (गौः) सौ, (कः) कौन है (एकः) एक (ऋषिः) ऋषि (किम्, उ क्या है निश्चय से (धाम) धाम, (काः) (एकवत्) एकवत्, (एकर्तुः) एक है ऋतु, (सः) वहु छतु (नु) निश्चय से (कतमः) ऋतुभों मे कौनसी है । ॑ एको गोरे एकऋषिरेकं धा्मैकेधाज्चिषंः । (एकः) एक (गौः) गौ है, (एकः) एक है (एक ऋषिः) एक ऋषि है (एकधा) एक ही प्रकार की (आशिषः) म्राशीर्वादोक्तियां हैँ । (पुथि-

English

Dasyus a hundred, thousand, myriad, hundred millions. This world so mighty was the net of Sakra, of the Mighty One: With this, the net of Indra, I envelop all those men with gloom.

अध्याय 8

श्लोक 9.3

यानि॒ त्रीणि॑ बृ॒हन्ति॑ येषां॑ चतु॒र्थं वि॑यु॒नक्ति॒ वाच॑म्।ब्र॒ह्मैन॑द् विद्या॒त् तप॑सा विप॒श्चिद् यस्मि॒न्नेकं॑ यु॒ज्यते॒ यस्मि॒न्नेक॑म्

yāni trīṇi bṛhanti yeṣāṃ caturthaṃ viyunakti vācam| brahmainad vidyāt tapasā vipaścid yasminnekaṃ yujyate yasminnekam

हिन्दी अर्थ

समपित किया है । मन्त्र के उत्तरार्धं मं सात पशुओं का वणेन हुआ है । कां वहन करते हुँ अतः पशु है। ६५ रलयोरभेदः, उलयोरभेदः । पदम् -=एकांश । तय्यार क्रिया पुरोडाश, आः.मा पुष्टे च पोषे चरत्रि देवानां सुमतौ स्पाम । ॥ि

English

The Gharma hath been warmed with fire: this Homa slays a thousand men. Let Bhava, Prisnibāhu, and Sarva destroy that armament. Their portion be the fire of Death, hunger, exhaustion, slaughter, fear.

अध्याय 8

श्लोक 9.4

बृ॒ह॒तः परि॒ सामा॑नि ष॒ष्ठात् पञ्चाधि॒ निर्मि॑ता ।बृ॒हद् बृ॑ह॒त्या निर्मि॑तं॒ कुतोऽधि॑ बृह॒ती मि॒ता

bṛhataḥ pari sāmāni ṣaṣṭhāt pañcādhi nirmitā | bṛhad bṛhatyā nirmitaṃ kuto'dhi bṛhatī mitā

हिन्दी अर्थ

३२० अथर्वेवेद-भाष्य का० ३ सू० १० तथा (पोषे च) पुत्रादि के परिपोषणमें (आ “स्थापय ) स्थापितं कर, (देवानाम्) दिव्य गुणो वाले सज्जनो की ( सुमतौ) सुमति मे (स्याम) हम ह, हम रहँ । (दवं) है यज्ञिय होम की कड्छी (पूर्णा) घृत आदिसे तदनन्तर (सुपूर्णा) यज्ञिय फल से पूणं हुई त् (आपत) हमारी ओर ओआ। रहता है जो कि अमावास्या के दिन पूर्णं होता है । इस दिन की रात्री को “रात्रि कहा है । यज्ञ का फल है पुष्टि, ष् मौर ऊजं । आयमगन्त्संवत्सरः पतिरेकाष्टके तव ।

English

With your entangling snares and nets, Sarva and Indra! slay that host.

अध्याय 8

श्लोक 9.5

बृ॒ह॒ती परि॑ मात्रा॑या मा॒तुर्मात्राधि॒ निर्मि॑ता ।मा॒या ह॑ जज्ञे मा॒याया॑ मा॒याया॒ मातली॒ परि॑

bṛhatī pari mātrāyā māturmātrādhi nirmitā | māyā ha jajñe māyāyā māyāyā mātalī pari

हिन्दी अर्थ

पततिः) तेरा पति (ग्रा गन्) भाया है। (सा) वहतु संवत्सर पतिके प्रभूत धघन-सम्पत् की अभिलाषा प्रकट कीहै। (ऋतून् आदि) ऋतुओं श्रादि को लक्षय करके (यजे) ओ यन्न करता के लिये (यजे) यज्ञ करता हूं ।

English

Fly, conquered, in alarm, ye foes, run driven by the spell away! Let not one man escape of those when routed by Brihaspati. Down fall their weapons on the ground: no strength be theirs to point a shaft:

अध्याय 8

श्लोक 9.6

वै॒श्वा॒न॒रस्य॑ प्रति॒मोपरि॒ द्यौर्याव॒द् रोद॑सी विबबा॒धे अ॒ग्निः ।ततः॑ ष॒ष्ठादामुतो॑ यन्ति॒ स्तोमा॒ उदि॒तो य॑न्त्य॒भि ष॒ष्ठमह्नः॑

vaiśvānarasya pratimopari dyauryāvad rodasī vibabādhe agniḥ | tataḥ ṣaṣṭhādāmuto yanti stomā udito yantyabhi ṣaṣṭhamahnaḥ

हिन्दी अर्थ

का० ३। सू० १० एकाष्टका-परिशिष्ट ३२९ परस्येक व्यित संकल्प करता है कि वह ऋतु आदि की शुद्धि ओर त्याग, तथा शिल्पकर्मो द्वारा वायु आदि में मल बढ़ता रहता है । अतः उन मे हुञा है । तभी हैनिक अशुद्धि रौर अस्वच्छता का निराकरण सम्भव है! ऋतुपतीन् = ऋतुर्न के पति है, प्रत्येक ऋतुकाल के नियामक सूयं

English

Then in their dreadful terror let their arrows wound their vital parts. Let Heaven and Earth roar out in wrath against them, and Air with all the Deities in concert,

अध्याय 8

श्लोक 9.7

षट् त्वा॑ पृछाम॒ ऋष॑यः कश्यपे॒मे त्वं हि यु॒क्तं यु॑यु॒क्षे योग्यं॑ च ।वि॒राज॑माहु॒र्ब्रह्म॑णः पि॒तरं॒ तां नो॒ वि धे॑हि यति॒धा सखि॑भ्यः

ṣaṭ tvā pṛchāma ṛṣayaḥ kaśyapeme tvaṃ hi yuktaṃ yuyukṣe yogyaṃ ca | virājamāhurbrahmaṇaḥ pitaraṃ tāṃ no vi dhehi yatidhā sakhibhyaḥ

हिन्दी अर्थ

आदि, या कतुओं के समूहरूप उत्तरायण तथा दक्षिणायन के काल । हायन = ““्वन्द्रो माता” (निरुक्त ११।१।६) , के “मा” का समास “सह के साथ हुमा है । इस प्रकार “समाः चानद्र-वषं । “सहस्य सः (अष्टा° ६१३। ७८) द्वारा सह को “स” भदेश हृुप्रा है । संवत्सरः सौरवषं । (यजे) मै यज्ञ करता हूं, (समे) समृद्धि के लिये । तथा (धात्रे) जगत् के घारक-पोषक (विधात्रे) विधाता भौर (भूतस्य) भरूत-मौतिक जगत् के (पतये) पति कौ प्रस्नता के लिये ्मयज्ञ करता हं । भादिके विकृतहो जाने प्रर रोगश्रादिकासंचार हौ जाताहै। यज्ञमें

English

Let them not find a surety or a refuge, but torn away go down to Death together. The mules of the Gods’ car are heaven’s four quarters; their hooves are sacred cakes, the air its body.

अध्याय 8

श्लोक 9.8

यां प्रच्यु॑ता॒मनु॑ य॒ज्ञाः प्र॒च्यव॑न्त उप॒तिष्ठ॑न्त उप॒तिष्ठ॑मानाम्।यस्या॑ व्र॒ते प्र॑स॒वे य॒क्षमेज॑ति॒ सा वि॒राडृषयः पर॒मे व्योऽमन्

yāṃ pracyutāmanu yajñāḥ pracyavanta upatiṣṭhanta upatiṣṭhamānām| yasyā vrate prasave yakṣamejati sā virāḍṛṣayaḥ parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

हकिः चतुधिव होनी चहिये । यथा प्रथम सुगन्धित, द्वितीय पृष्टिकारक, तृतीय मिष्ट, चतुर्थं रोगनाशक (संस्कारवि ध, ऋषि दयानन्द) । इनमे इडया जुह्वतो वयं देवान् प्रृतवता यजे। (घृतवता) घृतवाले (इडया) अर द्वारा (देवान् ) अग्नि वायु भ्रादि धरो को प्राप्त कर, (गोमतः) गौओं वाले (वयम् ) हम (भलुभ्यतः) लोभ- मोह से रहित हए (संविशेम) मिल कर गृहो मे प्वेण करे । ब्रथवा लोभ. मोह से रहित गृहों में प्रवेश करे । कथन हआ है । गृहस्थ-धर्मं पालते हए भी जीवन मे लोभ-मोह न होना ,

English

Its sides are Heaven and Earth, its reins the Seasons, Voice is its hood, its grooms are sky’s mid-regions.

अध्याय 8

श्लोक 9.9

अ॒प्रा॒णैति॑ प्रा॒णेन॑ प्राण॒तीनां॑ वि॒राट् स्व॒राज॑म॒भ्येऽति प॒श्चात्।विश्वं॑ मृ॒शन्ती॑म॒भिरू॑पां वि॒राजं॒ पश्य॑न्ति॒ त्वे न त्वे प॑श्यन्त्येनाम्

aprāṇaiti prāṇena prāṇatīnāṃ virāṭ svarājamabhye'ti paścāt| viśvaṃ mṛśantīmabhirūpāṃ virājaṃ paśyanti tve na tve paśyantyenām

हिन्दी अर्थ

चाहिए । केवल कतव्य समभ कर : गृहस्थ कृत्य करने चाहिए । पुष्टिके लिये गृहस्थ को गोसंग्रह भी करना चाहिए ताकि गोघृत द्वारा यज्ञ मी करिये जा सके ओर पारिवारिक पालन-पोषणभी हो सके , (तपसा) ताप से ( तप्यमाना) तप्त होती हुई ( एकाष्टका) मुख्य

English

Year is the car, Full Year the seat for driving, Virāj the pole, the chariot’s front is Agni, Indra the warrior, and the Moon the driver. Hence conquer, conquer, Hail! be thou the victor! Let these be conquerors and those be

अध्याय 8

श्लोक 9.10

को वि॒राजो॑ मिथुन॒त्वं प्र वे॑द॒ क ऋ॒तून् क उ॒ कल्प॑मस्याः ।क्रमा॒न् को अ॑स्याः कति॒धा विदु॑ग्धा॒न् को अ॑स्या॒ धाम॑ कति॒धा व्युऽष्टीः

ko virājo mithunatvaṃ pra veda ka ṛtūn ka u kalpamasyāḥ | kramān ko asyāḥ katidhā vidugdhān ko asyā dhāma katidhā vyu'ṣṭīḥ

हिन्दी अर्थ

पय दर्णाकर कारणभाव ग्रौर क्यभाव सूचित कर ओर दोनों मे अभेद" मान हारा कथित किया है, भ्रौर सप्त छन्दांसि का पृथक् कथन नहीं किया । इस अघि) पूषे-पूवे के छन्द मे (आगतानि) श्रपित होतेह, आध्रित होते है प्रक्रार (ग्रापितानि) अपित होतेह, ्राित होते ह ।

English

So many Plants, brought hitherward, give shelter and defence to thee! Hitherward unto thee I bring the Plants that cure all maladies, All Plants wherein physicians have discovered health-bestowing power.

अध्याय 8

श्लोक 9.11

इ॒यमे॒व सा या प्र॑थ॒मा व्यौच्छ॑दा॒स्वित॑रासु चरति॒ प्रवि॑ष्टा ।म॒हान्तो॑ अस्यां महि॒मानो॑ अ॒न्तर्वधूर्जि॑गाय नव॒गज्जनि॑त्री

iyameva sā yā prathamā vyaucchadāsvitarāsu carati praviṣṭā | mahānto asyāṃ mahimāno antarvadhūrjigāya navagajjanitrī

हिन्दी अर्थ

„ यजु १७२३ेमें नाना स्तोमो का कथन हृश्रा है।॥ यथा" चरिवत होता है, दोहराना होता है । कहा भी है “विः प्रयमामन्वाह चिरुत्तमाम्'' समन्वय, अपने-प्रपने ढंग से होते है। घटक मन्त्रो" को जानाजा सकताहै। २. तथा जिसे स्तोमो के स्वरूप ज्ञात हैँ वह सुगमतासे जान सकताहैकि

English

Let Plants with flower and Plants with bud, the fruitful and the fruitless, all, Like children of one mother, yield their stores for this man’s perfeet health.

अध्याय 8

श्लोक 9.12

छन्दः॑पक्षे उ॒षसा॒ पेपि॑शाने समा॒नं योनि॒मनु॒ सं च॑रेमे ।सूर्य॑पत्नी॒ सं च॑रतः प्रजान॒ती के॑तु॒मती॑ अ॒जरे॒ भूरि॑रेतसा

chandaḥpakṣe uṣasā pepiśāne samānaṃ yonimanu saṃ careme | sūryapatnī saṃ carataḥ prajānatī ketumatī ajare bhūriretasā

हिन्दी अर्थ

स्तोम के मौलिक मन्त्र जान लिये जाते ह का०८॥ सुऽ € भ्रथवंवेद-मष्य ३११ (हव्यम्) हवि को (एति) प्राप्त होती है । अदितिः प्रकृति, जो कभी क्षीण नहीं होती म्र +-दीडः क्षये । इस के आए्पूत्र पैदा हए । यथा--

English

From the Five-arrowed, from the Ten-arrowed have I delivered thee, Freed thee from Yama’s fetter and from all offence against the Gods,

अध्याय 8

श्लोक 9.13

ऋ॒तस्य॒ पन्था॒मनु॑ ति॒स्र आगु॒स्त्रयो॑ घ॒र्मा अनु॑ रेत॒ आगुः॑ ।प्र॒जामेका॒ जिन्व॒त्यूर्ज॒मेका॑ रा॒ष्ट्रमेका॑ रक्षति देवयू॒नाम्

ṛtasya panthāmanu tisra āgustrayo gharmā anu reta āguḥ | prajāmekā jinvatyūrjamekā rāṣṭramekā rakṣati devayūnām

हिन्दी अर्थ

अदितिकेशरीरसे जो आठ पुत्र पैदा हए थे, उनमेसे ७ पूत्रो द्वारा के सात पुत्र है, सात प्रहु-बुध, शुक, पृथिवी, मंगल, गुरु बृहस्पति , शनं- श्वर । ये सातो या पुथिवी का उपग्रहचांदतो रात्रि कालमें चुलोकमें समय-समय पर यह् दष्टिगोचर होते रहते है, यह हँ अदिति का७ पूत्रो सहित काल में दृष्टिगोचर नहीं होता, यह् है उसका परे फेंकना (१०।७२।८) । तथा पूवं युग मे अदिति ७ पुत्रो समेत हुई, जौर प्रजा की उत्पत्ति तथा मी पैदा किया । बुष आदि ७ पत्र यद्यपि मातेण्डगेही पैदा हुए है, परन्तु रात्रिकाल में सात की दुष्टिगोचरता ओर दष्टिगोचरन होने वाले सूरय के दस भेद को दशनि के लिये इन मे परस्पर पाथक्य दर्शायाहै (१०।७२।९) 1

English

Imprecations directed against a hostile army Indra the Shaker shake them up, brave, hero, fortdemolisher,

अध्याय 8

श्लोक 9.14

अ॒ग्नीषोमा॑वदधु॒र्या तु॒रीयासी॑द् य॒ज्ञस्य॑ प॒क्षावृष॑यः क॒ल्पय॑न्तः ।गा॒य॒त्रीं त्रि॒ष्टुभं॒ जग॑तीमनु॒ष्टुभं॑ बृहद॒र्कीं यज॑मानाय॒ स्वऽरा॒भर॑न्तीम्

agnīṣomāvadadhuryā turīyāsīd yajñasya pakṣāvṛṣayaḥ kalpayantaḥ | gāyatrīṃ triṣṭubhaṃ jagatīmanuṣṭubhaṃ bṛhadarkīṃ yajamānāya sva'rābharantīm

हिन्दी अर्थ

८ ऋत्विक् हँ जो कि सौरमण्डलरूपी यज्ञ को रचा रहे है । २१२ श्रथवेवेद-भाष्य का० ८ । सू € अष्टयोनिः =भाठ को पद करने वाली योनि से सम्बद्ध अदिति । यह “एकाष्टका-रा्नी'' हो, जिसमेंफि हव्य प्रदान किया जाता है, हव्य

English

That into thousand fragments we may strike the armies of our foes! Let Pūtirajju with her breath corrupt and putrefy that host, And terror smite our foemen’s heart when fire and smoke are seen afar.

अध्याय 8

श्लोक 9.15

पञ्च॒ व्युऽष्टी॒रनु॒ पञ्च॒ दोहा॒ गां पञ्च॑नाम्नीमृ॒तवोऽनु॒ पञ्च॑ ।पञ्च॒ दिशः॑ पञ्चद॒शेन॑ क्लृ॒प्तस्ता एक॑मूर्ध्नीर॒भि लो॒कमेक॑म्

pañca vyu'ṣṭīranu pañca dohā gāṃ pañcanāmnīmṛtavo'nu pañca | pañca diśaḥ pañcadaśena klṛptastā ekamūrdhnīrabhi lokamekam

हिन्दी अर्थ

कथन नहीं हुआ । “भूतस्य पत्ये यजे" (, १०) मे भूतपति के लिये, तथा देवों के लिये (११) यज्ञ का विधान हुंभा है। सूक्त ६।२१ मेँ देव्याः पद होता ह । ग्रदिति परमेदवर की जागारूप से प्रघर्जिनी है, अतः परमेश्वरा- पित हवि, अधाङ्किनी रूपमे अदितिको भी प्राप्त समी जा सक्ती है। जन्मा) सब को जन्म देने वाला या मुे-गीर-तुम्हं समानरूपं में जन्म रूपो म धियमान प्रकृति (श्रदिति) भी सुखी रहती है । श्रम्यथा नानाविव बीमा- मे सखा, निज सखा को, दुःख नहीं देता । ्रात्माग्नों के संग वाली श्रदिति माता तभी

English

Asvattha, rend those men; do thou devour them quickly, Khadira!

अध्याय 8

श्लोक 9.16

षड् जा॒ता भू॒ता प्र॑थम॒जर्तस्य॑ षडु॒ सामा॑नि षड॒हं व॑हन्ति ।ष॒ड्यो॒गं सीर॒मनु॒ साम॑साम॒ षडा॑हु॒र्द्यावा॑पृथि॒वीः षडु॒र्वीः

ṣaḍ jātā bhūtā prathamajartasya ṣaḍu sāmāni ṣaḍahaṃ vahanti | ṣaḍyogaṃ sīramanu sāmasāma ṣaḍāhurdyāvāpṛthivīḥ ṣaḍurvīḥ

हिन्दी अर्थ

करते है । स्थान-स्थान मेँ वैदिक वणेन श्रति रहुस्मयी भाषा तथा कवितां पाये जति है । मन्त्र (२२) में भी कवितामपी तथा रहस्यमयी भाषाटहै। ( शिवः) कल्याण करने वाला है, (सः) वहु (वः) तुम्हारी (सर्वाः) सब मनुष्यो के प्रति कथन करती हुई कहती है । अदितिः न देवभात।” प्रकृति है मदिति । वह॒ सबकी माताहै, तथा पिताभीहै। मता म्मौर

English

Like reeds let them be broken through, down-smitten by a lifted rush. Let Parushāhva make them reeds, and let the bulrush strike them down: Bound in a mighty net let them break quickly like an arrow’s shaft.

अध्याय 8

श्लोक 9.17

षडा॑हुः शी॒तान् षडु॑ मा॒स उ॒ष्णानृ॒तुं नो॑ ब्रूत यत॒मोऽति॑रिक्तः ।स॒प्त सु॑प॒र्णाः क॒वयो॒ नि षे॑दुः स॒प्त च्छन्दां॒स्यनु॑ स॒प्त दी॒क्षाः

ṣaḍāhuḥ śītān ṣaḍu māsa uṣṇānṛtuṃ no brūta yatamo'tiriktaḥ | sapta suparṇāḥ kavayo ni ṣeduḥ sapta cchandāṃsyanu sapta dīkṣāḥ

हिन्दी अर्थ

भाषा में भ्रदिति कहती है किहे मनुष्यों! तुम्हारा ओर अपना निःश्रयस चाहती हुई मँ इस जगद्रप मेँ आई हूं । शरीरो के होते ही योगसाधनाओं केरूपमें परिणत नदहोतो निःश्रेयस को प्राप्ति नहीं हो सकती जिस-जिस भी पाक्षिक-निःश्रेयस है। इस लिये प्रदिति मनुष्यों के साथ सखिभावमें सुखी है । “शेवम् सुखनाम” (निघं० ३।६) । “शरीरो तथा जगत् के रूप मे" तथा साम्यावस्था से विषमावस्थाकेरूप सब कृतियों तथा चेष्टाओं को तथा (२) तुम सब प्रजाभों को जानता

English

Air was the net; the poles thereof were the great quarters of the sky: Sakra therewith enveloped and cast on the ground the Dasyus’ host.

अध्याय 8

श्लोक 9.18

स॒प्त होमाः॑ स॒मिधो॑ ह स॒प्त मधू॑नि स॒प्तर्तवो॑ ह स॒प्त।स॒प्ताज्या॑नि॒ परि॑ भू॒तमा॑य॒न् ताः स॑प्तगृ॒ध्रा इति॑ शुश्रुमा व॒यम्

sapta homāḥ samidho ha sapta madhūni saptartavo ha sapta| saptājyāni pari bhūtamāyan tāḥ saptagṛdhrā iti śuśrumā vayam

हिन्दी अर्थ

भप मनुष्या नोषधीस्ता उ पञ्चायु सेचिरे ॥२३॥ ओषधियों को (पञ्च) पाच (श्रनु) ऋतुप्रों के भ्रनुसार (सेचिरे) सींचते है । २३)- मन्त्र १५ से २२ तक के विषयों का उपसंहार अथ ति संग्रहस्प ह ज्ञान नहीं होता जोन तो ऋषि है, बौर न तपस्वी । तो भी परलोक भ्रीर अवरलोक सम्बन्धी पराविद्या भौर अपरा विद्या के जानने वालों मे, जिसे

English

Verily mighty is the net of mighty Sakra rich in wealth: Therewith press all the foemen down so that not one of them escape! Great is thy net, brave Indra, thine the mighty match for a thousand, Lord of Hundred

अध्याय 8

श्लोक 9.19

स॒प्त च्छन्दां॑सि चतुरुत्त॒राण्य॒न्यो अ॒न्यस्मि॒न्नध्यार्पि॑तानि ।क॒थं स्तोमाः॒ प्रति॑ तिष्ठन्ति॒ तेषु॒ तानि॒ स्तोमे॑षु॒ क॒थमार्पि॑तानि

sapta cchandāṃsi caturuttarāṇyanyo anyasminnadhyārpitāni | kathaṃ stomāḥ prati tiṣṭhanti teṣu tāni stomeṣu kathamārpitāni

हिन्दी अर्थ

होतः है" । निरुक्त में “तपः” का अभिप्राय शारीरिक .““तपः'” नहीं, अपितु सम्यक् जाना जा सकता है । 4. केवलीनदरौय दुदुहे हि गृष्टिवंशं पीयूष भ्रयमं दुहाना । (केवली) सेवनीया (गृष्टिः) गौ (वशम्) कान्तिमय (पीगूषम् ) पेय का०८। सूरश अथवेवेद-माष्य ३१५ (हि) ही (दुदृहे) दोही जाती है । (अथ) तदनन्तर (देवान्, मनुष्यान्, करना चाहिए । केवली = केवृ सेवने (भ्वादिः) वशम् = वश कान्तौ (अदारिः) तथा र ते कृण्वन्ति कीकटेषु गावः'' (ऋ०.३।५३।१४) की भावना मन्त्र (२४) में प्रतीत होती है । गृष्टिः = ०प0छ 0०५ (्राप्टे) । कोयुगोःक पएंकष्टषिः किमु धाम् का ्ारिषः।

English

Powers! Holding them, with his host, therewith hath Indra slaughtered

अध्याय 8

श्लोक 9.20

क॒थं गा॑य॒त्री त्रि॒वृतं॒ व्याऽप क॒थं त्रि॒ष्टुप् प॑ञ्चद॒शेन॑ कल्पते ।त्र॒य॒स्त्रिं॒शेन॒ जग॑ती क॒थम॑नु॒ष्टुप् क॒थमे॑कविं॒शः

kathaṃ gāyatrī trivṛtaṃ vyā'pa kathaṃ triṣṭup pañcadaśena kalpate | trayastriṃśena jagatī kathamanuṣṭup kathamekaviṃśaḥ

हिन्दी अर्थ

एक ही ऋतु है, (न अति रिच्यते) उस से बढ़कर भौर कों नहीं । साथ “गृष्टि” कोभी तप्त करती दहै, व्ह है पुथिवी। (गौः पृयिवीनाम' अभिप्राय यह् किगौ के कान्तिमय, पेषदुगधामृत पर, प्रथम दका २३१६ जयर्ववेद-माष्य का०८।सूु०९ (निघं० १।१) । पुथिवी से गृष्टि भी पैदा होती, श्रौर पाथिव घासं आदि

English

Great weakness and misfortune, pain which words can never charm away, Languor, fatigue, bewilderment, with these I compass all the foes.

अध्याय 8

श्लोक 9.21

अ॒ष्ट जा॒ता भू॒ता प्र॑थम॒जर्तस्या॒ष्टेन्द्र॒र्त्विजो॒ दैव्या॒ ये।अ॒ष्टयो॑नि॒रदि॑तिर॒ष्टपु॑त्राष्ट॒मीं रात्रि॑म॒भि ह॒व्यमे॑ति

aṣṭa jātā bhūtā prathamajartasyāṣṭendrartvijo daivyā ye| aṣṭayoniraditiraṣṭaputrāṣṭamīṃ rātrimabhi havyameti

हिन्दी अर्थ

धत द्वारा देवयज्ञ होता, परमेश्वर के प्रति आहृतियां दी जातीं; ओर है । अतः वास्तविक गौ है पृथिवी । तथा एक ही ऋषि है परमेश्वर । ऋषि पारदृश्वा है । अतः वह् ही एक ऋषि है, मुख्य ऋषि है । परमेश्वर ही सब के लिये एक धामरूप है, एकाश्रयरूप है । वह् ही सब धामो मेधामरहै, सब तेजस्वियों मे तेजोरूप है । वेदों द्वारा दिये उस के आशीर्वाद सव के आशीवदिों में मेदभाव नहीं । उसने आशीर्वादरूप मे दी कल्याणी वेदवाक्'

English

I give those foemen up to Death: bound in the bonds of Death are they. I bind and carry them away to meet Death’s wicked messengers. Bear them away, Death’s messengers! envoys of Yama! bind them fast.

अध्याय 8

श्लोक 9.22

इ॒त्थं श्रेयो॒ मन्य॑माने॒दमाग॑मं यु॒ष्माकं॑ स॒ख्ये अ॒हम॑स्मि॒ शेवा॑ ।स॒मा॒नज॑न्मा॒ क्रतु॑रस्ति वः शि॒वः स वः॒ सर्वाः॒ सं च॑रति प्रजा॒नन्

itthaṃ śreyo manyamānedamāgamaṃ yuṣmākaṃ sakhye ahamasmi śevā | samānajanmā kraturasti vaḥ śivaḥ sa vaḥ sarvāḥ saṃ carati prajānan

हिन्दी अर्थ

वह् एक ही वतंमान है ) “एकः वतते” इति एकवृत् । ऋतुओं मे ऋतु भी एक है, वह् है वसन्त-ऋतु । यथा “ऋतूनां कुसुमा- करः" (गीता १०।३५) कुसुमाकरः = कुयुमों अर्थात् पूलों को खान । वसन्त से बढ़ कर कोई ऋतु नहीं । एकतुं : = एकः मृख्यः ऋतुः । २. “स एष एकवत्, एक एव” (श्रव ० १३।४।१२) । तथा “व एतं हैव- मेकवृतं वेद (श्रथवं° १३।४।२ (१५) । (सा) वह (प्रथमा) पहिली उषा (ह व्युवास) चमकी, (सा) वह (यमे) नियन्ता-परमेश्वर के नियमन मे (घेनुः) दुगधदात्नी गौ के सदृश फलदात्री (अभवत्) हुई । (सा) वह् उषा (पयस्वती) दुगवाली गौ

English

More than a thousand be their slain: the club of Bhava pierce them through! Forth go the Sādhyas in their might bearing one netpole raised aloft.

अध्याय 8

श्लोक 9.23

अ॒ष्टेन्द्र॑स्य॒ षड् य॒मस्य॒ ऋषी॑णां स॒प्त स॑प्त॒धा।अ॒पो म॑नु॒ष्या॒३नोष॑धी॒स्ताँ उ॒ पञ्चानु॑ सेचिरे

aṣṭendrasya ṣaḍ yamasya ṛṣīṇāṃ sapta saptadhā| apo manuṣyā3noṣadhīstā~ u pañcānu secire

हिन्दी अर्थ

(दुहाम्) अभिमत फल का दोहन करे । दुहाम् = दुग्धाम् । प्रलयकाल म तम ही तम था । सजेनकालमें जो पहली उषा चमकी उसे फलदात्री होने के कारण धेनु तथा पयस्वती कहा है । यां देवाः प्रतिनन्दन्ति राति घेतुमुपायतीम् । (याम् रातिम्) जिस रात्रि को (उपायतीम्) समीप आती हुई देख सृष्टि के उत्पन्न हो जाने पर संवत्सर अदि कालविभाग होता है,

English

One pole the Rudras carry, one the Vasus, and the Ādityas one. The Visve Devas from above shall come depressing it with might, And in the midst the Angirases, slaying the mighty host, shall go.

अध्याय 8

श्लोक 9.24

केव॒लीन्द्रा॑य दुदु॒हे हि गृ॒ष्टिर्वशं पी॒यूषं॑ प्रथ॒मं दुहा॑ना ।अथा॑तर्पयच्च॒तुर॑श्चतु॒र्धा दे॒वान् म॑नु॒ष्याँ॒३ असु॑रानु॒त ऋषी॑न्

kevalīndrāya duduhe hi gṛṣṭirvaśaṃ pīyūṣaṃ prathamaṃ duhānā | athātarpayaccaturaścaturdhā devān manuṣyā~3 asurānuta ṛṣīn

हिन्दी अर्थ

३१८ अथर्वंवेद-माष्य का०३। सू० १० संवत्सर की निमर्तरीरूप मे (उपास्महे) हम सेवित करते है, (सा) वहतु प्राथमिक उषा में (महान्तः महिमानः) अप्ररिमित महिमां हँ, यह् (नव- गत्) नये-नये रूप को ्राप्त होने वालो उषा (वधु) वधूवत्' (जनित्री) जो कि नये-नये दिन को पैदा करती हुई (जिगाय) वजयिनी हुई है । नव- एकाष्टके सुप्रजसः सुवीरा वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥५॥ (वानस्पत्याः) वनस्पति के काष्ठ से निमित ऊखल मुसलं आदि ने, व।ली (हविः) हवि को (कृष्वन्तः). तय्यार करते हृए । (एकाष्टके) हे

English

Trees of the forest, trees that bear flower and fruit, and herbs and plants, Quadruped, biped send I forth that they may strike this army dead,

अध्याय 8

श्लोक 9.25

को नु गौः क ए॑कऋ॒षिः किमु॒ धाम॒ का आ॒शिषः॑ ।य॒क्षं पृ॑थि॒व्यामे॑क॒वृदे॑क॒र्तुः क॑त॒मो नु सः

ko nu gauḥ ka ekaṛṣiḥ kimu dhāma kā āśiṣaḥ | yakṣaṃ pṛthivyāmekavṛdekartuḥ katamo nu saḥ

हिन्दी अर्थ

उखल-मुसल द्वारा घान से तण्डल तय्यार किये जाते हैँ । तदनन्तर दुषद्-उपल द्वारा तण्डुलो की पीठी तथ्यार कर, पुरोडाश पका कर, हविः निष्पन्न होती है, ओौर संवत्सर कौ पूवंभाविनी भष्टमी मे इस पुरोडाश १. वधु जसे विवाहानन्तर नरन पति के घर जा कर, प्रर जननी बन कर संमान को प्राप्त नटीं होती । † क हविः की श्राहृतियां दी जाती ह । उत्तम-सन्तान पदा करने, तथा धमेकाये म सुवीर रहने, तथा विक्रमी बनने का संकल्प कर, . धनोपाजेन में प्रवृत्त

English

Gandharvas, and Apsarases, Gods, Serpents, Fathers, Holy Men, Seen and unseen, I send them forth that they may strike this army dead.

अध्याय 8

श्लोक 9.26

एको॒ गौरेक॑ एकऋ॒षिरेकं॒ धामै॑क॒धाशिषः॑ ।य॒क्षं पृ॑थि॒व्यामे॑क॒वृदे॑क॒र्तुर्नाति॑ रिच्यते

eko gaureka ekaṛṣirekaṃ dhāmaikadhāśiṣaḥ | yakṣaṃ pṛthivyāmekavṛdekarturnāti ricyate

हिन्दी अर्थ

होना चाहिए । सुप्रजसः सु+-प्रजा+असिच् (अष्टा° ५।४।१२२ ) । (पदम्) इस एकांश को - (घृतवत्) जो कि घत वाला, तथा (सरीसृपम्) जिस से घृत सर्पण कर रहा है, टपक रहा है -एेसे प्रन्न को, तथा (हव्या) को निरूपित करने वाले या नानारूपों वाले (ग्राम्याः)ग्राम के, या समूह्रूप उन सातो की (रन्तिः) रति (मयि) मूभमें (अस्तु).हो।

English

Here spread are snares of Death wherefrom thou, once within them, ne’er art freed: Full many a thousand of the host yonder this horn shall smite and slay.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।