Atharva Veda
8
अध्याय 8 / 20

Kanda 8

काण्ड 8

292 श्लोकभाग 4/6 · श्लोक 7.1–8.24

पूर्ण अध्याय पाठ52 श्लोक

अध्याय 8

श्लोक 7.1

ओषधयः।१-२८ अथर्वा।भैषज्यं, आयुष्यं, ओषधयः।अनुष्टुप्, २ उपरिष्टाद् भुरिग्बृहती, ३ पुरउष्णिक्, ४ पञ्चपदा परानुष्टुबतिजगती, ५-६, १०, २५ पथ्यापङ्क्तिः ( ६ विराड् गर्भा भुरिक्) ९ द्विपदार्ची भुरिगनुष्टुप्, १२ पञ्चपदा विराडतिशक्वरी, १४ उपरिष्टान्निचृद् बृहती, २६ निचृत्, २८ भुरिक्।या ब॒भ्रवो॒ याश्च॑ शु॒क्रा रोहि॑णीरु॒त पृश्न॑यः ।असि॑क्नीः कृ॒ष्णा ओष॑धीः॒ सर्वा॑ अ॒च्छाव॑दामसि

oṣadhayaḥ| 1-28 atharvā| bhaiṣajyaṃ, āyuṣyaṃ, oṣadhayaḥ| anuṣṭup, 2 upariṣṭād bhurigbṛhatī, 3 purauṣṇik, 4 pañcapadā parānuṣṭubatijagatī, 5-6, 10, 25 pathyāpaṅktiḥ ( 6 virāḍ garbhā bhurik) 9 dvipadārcī bhuriganuṣṭup, 12 pañcapadā virāḍatiśakvarī, 14 upariṣṭānnicṛd bṛhatī, 26 nicṛt, 28 bhurik| yā babhravo yāśca śukrā rohiṇīruta pṛśnayaḥ | asiknīḥ kṛṣṇā oṣadhīḥ sarvā acchāvadāmasi

हिन्दी अर्थ

(१०) लोकलोकान्तर धासी देव तथा मनुभ्य भादि (२१) । (११) देवरथ, उस के भवयव (२२ ॥॥। (१२) संवत्सररथ, उस के भवयव (२९) । यथा हनाम सेनां अमित्राणां सहस्रशः ॥१॥ (मन्थिता) मथन करने वाला, (शक्रः) शव्तिशाली (पुरंदरः) पुरो तथा

English

For his long life, to last a hundred autumns, that to full age his days may be extended. Lord of the clan who brings, us bliss, fiend-slayer, queller of the foe,

अध्याय 8

श्लोक 7.2

त्राय॑न्तामि॒मं पुरु॑षं॒ यक्ष्मा॑द् दे॒वेषि॑ता॒दधि॑ ।यासां॒ द्यौष्पि॒ता पृ॑थि॒वी मा॒ता स॑मु॒द्रो मूलं॑ वी॒रुधां॑ ब॒भूव॑

trāyantāmimaṃ puruṣaṃ yakṣmād deveṣitādadhi | yāsāṃ dyauṣpitā pṛthivī mātā samudro mūlaṃ vīrudhāṃ babhūva

हिन्दी अर्थ

कर सकते ओर न बुजुगं ही । बहुरूपियो को प्रौर गायक-गायिकाभओं को १. गान्धवंवेद सामवेद का उपवेद है, जिसमे गायन विद्य' का वर्णन है २. एसे भ्रन्य बहुरूपिए जो करि गुप्तरूप से सप॑कृत्य कर सके । सवेथा निराकरण के लिये उग्रप्रयोग वेदानुमोदित है । मवश्च पृरिनबाहुश्च श्वं सेनाममूं तम् ॥१७॥

English

Karumas, These with thine odour, O thou Plant, drive far away to every side. Kukundhas and Kukūrabhas who dress themselves in hides and skins,

अध्याय 8

श्लोक 7.3

आपो॒ अग्रं दि॒व्या ओष॑धयः ।तास्ते॒ यक्ष्म॑मेन॒स्य॑१मङ्गा॑दङ्गादनीनशन्

āpo agraṃ divyā oṣadhayaḥ | tāste yakṣmamenasya1maṅgādaṅgādanīnaśan

हिन्दी अर्थ

लोहित ररिमयो हारा “अवतनोमि” इन दो रदिमयों के प्रयोग द्वारा शत्ुपक् को मूलसा देना होता है, तब ब्रपने घनुषों कौ डोरियां ढीली कर देनौ होती ह, क्योंकि शतु रहे ही नहीं । नील भौर लोहित लाल रशिया, रश्म- ॥18 ( १५।११६-८) । “स्वाहा” का वेदानुमत निवेचन = सु+अ।+-हा (त्यागे) काण्ड ८ अनुवाक ४ सूक्त ८ समाप्त । ॥ परमेष्वर की उपासना (६) र ॥ (६) कश्यप-परमेश्वर क ६ =) (श जिज्ञासा (४) । दक्षन कद करते है, कई नहीं (६) ।

English

The yellow Plant with mighty bow shall pierce him even to the heart. Those who kill infants unawares, and near the new-made mothers lie, Let Pinga chase the amorous Gandharvas as wind chases cloud.

अध्याय 8

श्लोक 7.4

प्र॒स्तृ॒ण॒ती स्त॒म्बिनी॒रेक॑शुङ्गाः प्रतन्व॒तीरोष॑धी॒रा व॑दामि ।अं॒शु॒मतीः॑ का॒ण्डिनी॒र्या विशा॑खा॒ ह्वया॑मि ते वी॒रुधो॑ वैश्वदे॒वीरु॒ग्राः पु॑रुष॒जीव॑नीः

prastṛṇatī stambinīrekaśuṅgāḥ pratanvatīroṣadhīrā vadāmi | aṃśumatīḥ kāṇḍinīryā viśākhā hvayāmi te vīrudho vaiśvadevīrugrāḥ puruṣajīvanīḥ

हिन्दी अर्थ

(६०) उषाग्मो मे पारमेए्वरी-माता चमकती है, (११) । 1 (११) प्रतिदिन कौ दो उषाणएं प्रातः कालीन तथा सायंकालीन (१२) ॥ (१२) तीन शक्तियों ओर तीन घर्मो के काय (१३) । (१३) यज्ञरूपी पुरुष के स्वरूप के ४ घटक (१४ ) 1 (१६) सप्तगृघ्राः के स्वरूप (१ ८) । (१७) छन्दां ओर स्तोमो का वणन (१६, २०) । (१६) गोदुग्ष के अधिकारी (२४) । (२०) एकं है गौ, एक है ऋषि, एक है यक्ष, एकं है ऋतु (२६) । । २६० श्रथवेवेद-भाष्य का०८।सू० ६ का० ८ । सु० भथरववेद-भाष्य २६१ के सम्बन्ध में पृछठाहै कि वह किस पृथिवी सेपेदा हु । पृथिवी त्रिविधा । ऋक र, जलभाग, स्थलभाग ओर पवंतभाग । इस दृष्टि से कहा है करि "चन्द्रमा" ऊ

English

Let it maintain the genial seed: let the laid embryo rest secure. Let both strong Healers, to be worn within the girdle, guard the babe.

अध्याय 8

श्लोक 7.5

यद् वः॒ सहः॑ सहमाना वी॒र्यं॑१यच्च॑ वो॒ बल॑म्।तेने॒मम॒स्माद् यक्ष्मा॒त् पुरु॑षं मुञ्चतौषधी॒रथो॑ कृणोमि भेष॒जम्

yad vaḥ sahaḥ sahamānā vīryaṃ1yacca vo balam| tenemamasmād yakṣmāt puruṣaṃ muñcatauṣadhīratho kṛṇomi bheṣajam

हिन्दी अर्थ

वत्सो विराजं: सछिलादुहैतां तो त्व पृच्छामि कतरेण दुग्धा ॥१॥ लोकात्) किस लोक से, तथा (कतमस्याः° पृथिव्याः) किस पृथिवी से। कि (कतरेण) दोमेसेकिसने (दुग्धा) विराट् दोही थी। उपादान कारण का । सूयं ओर चन्द्रमा प्रकृति रूपी उपादान कारणसे उत्पच्च हृए । “कतमः” प्रकृति का पूवे-दिशा' का भाग था, जोकि अधः"

English

From the Kimīdin, for thy lord and children, Pinga shield thee well, From Sāyaka, and Nagnaka, Tangalva, and Pavīnasa. From the five-footed, fingerless, from the four-eyed, the double- faced,

अध्याय 8

श्लोक 7.6

जी॒व॒लां न॑घारि॒षां जी॑व॒न्तीमोष॑धीम॒हम्।अ॒रु॒न्ध॒तीमु॒न्नय॑न्तीं पु॒ष्पां मधु॑मतीमि॒ह हु॑वे॒ऽस्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

jīvalāṃ naghāriṣāṃ jīvantīmoṣadhīmaham| arundhatīmunnayantīṃ puṣpāṃ madhumatīmiha huve'smā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

हए । इस दिशा को पूवं श्रं" कहा है, अथवं० (४।२।६) । प्रकृति के मोर घुमते है, २९५४०1८ कर रहे है (कुतः) किंस उपादान कारणसे (तौ) वेदो (जातौ) पदा हुए, ह, अतः पृथिवी से पैदा हुभा कहा है, जसे कि प्रह, सूर्य की परिक्रमा करते रौर सूर्यं से पैदा हए हैँ । सम्भवतः जहां समूद्रजल है उस स्थल से चनमा पेदा हृगरा हो । सूं ओर चन्द्रमा “विराट् नाम॒ वाली प्रकृति से पदा हुए ये, इस लिये इन्हे “विराजः वत्सौ" कहा है ये दोनो 'सलिलात्” “सति उदित हुए ये । तथा परमेश्वर मौर जीव इन दो मंसे “कतरेण! अर्थात्

English

From the Close-creeper, from the Worm, from the Quick-roller guard her well. Those who eat flesh uncooked, and those who eat the bleeding flesh of men,

अध्याय 8

श्लोक 7.7

इ॒हा य॑न्तु॒ प्रचे॑तसो मे॒दिनी॒र्वच॑सो॒ मम॑ ।यथे॒मं पा॒रया॑मसि॒ पुरु॑षं दुरि॒तादधि॑

ihā yantu pracetaso medinīrvacaso mama | yathemaṃ pārayāmasi puruṣaṃ duritādadhi

हिन्दी अर्थ

हुए । जीवात्मा इस दोहन में निमित्त कारण थे, भोगापवगेदृष्टि से । (योनिम्) घर को (त्रिभुजम्) तीन भृजागों वाला (कृत्वा) कर के (शयानः) उस में शयन करते हए (यः) जिस ने (महित्वा) निज महिमा किया, गर्जना युक्त क्रिया, ग्रौर जौ (कामदः विराजः) कामना का (वत्सः) वत्सरूप है, या उसमे बसा हूर है (सः) उस परमेष्वरने (गुहा)

English

Feeders on babes unborn, long-haired, far from this place we banish these. Shy slinkers from the Sun, as slinks a woman from her husband’s sire, Deep down into the heart of these let Baja and let Pinga pierce.

अध्याय 8

श्लोक 7.8

अ॒ग्नेर्घा॒सो अ॒पां गर्भो॒ या रोह॑न्ति॒ पुन॑र्णवाः ।ध्रु॒वाः स॒हस्र॑नाम्नीर्भेष॒जीः स॒न्त्वाभृ॑ताः

agnerghāso apāṃ garbho yā rohanti punarṇavāḥ | dhruvāḥ sahasranāmnīrbheṣajīḥ santvābhṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

लोक-लोकान्तरों को (चक्रे) उत्पन्न किया है। लावा ही हिमालय के उत्त्थानरूपमं प्रकट हुभ्राहौ। योनिः गृहनाम (निषं० ३)४ ) । त्रिमुजयोनिः = प्रकृति, बद्धजीव, कर रहार, ओर शयन करता हृता इनमे व्यवस्था कर रहा है । गौ से दूष भिलता है उसके वत्स के कारण । संसाररूपी विराट् से सुखसम्पत्तिरूपी दुग्ध मिलता है परभेश्वररूपी वत्स के कारण । प्रकृति सेजबर संसार पदा (वियुनक्ति) तीन वाणियों के साथ विक्चेषतया नियुक्त करता हैः सम्ब करता है, (एनत्) इस चौथे वाक्यरूप वाणी को (विपश्चित्) मेघावी

English

Pinga, preserve the babe at birth, make not the boy a female child. Let not Egg-eaters mar the germs: drive the Kimidins far away.

अध्याय 8

श्लोक 7.9

अ॒वको॑ल्बा उ॒दका॑त्मान॒ ओष॑धयः ।व्यृऽषन्तु दुरि॒तं ती॑क्ष्णशृ॒ङ्ग्यः

avakolbā udakātmāna oṣadhayaḥ | vyṛ'ṣantu duritaṃ tīkṣṇaśṛṅgyaḥ

हिन्दी अर्थ

बरहा सम्बद्ध है । दो बार कथन वृढतासूवक है।। बार कथन दुद़तासूचक है । २. “ग्रीणि बृहन्ति” दारा क्, यजुः साम को सूचित कियादहै। ये तीन मिल कर “श्रयवंवेद" से बड़ं हँ । भ्रथवेवेद के मन्त्र लगभग ६००० (६ हजार ) 1 शेष तीनों के लगभग १४००० मन्त्र ह 1 तथा सर्वंसाघारण के जीवनं के लिये ज्ञान, कमं प्रत्येक मनुष्य भ्रधिकारी नहीं। ३. भरथवेवेद को “वाचम्” कहा है । स कथन से शेष तीन वेद भी “वाक् ' रूप सूचित होते है। “वाक्” “संहिता” रूप दोती है, पदरूप नहीं । इस से सूचित । किया है करि परमेदवर से प्राप्त वेद “संहिता रूप मेये। इनका घटन पदोँद्ारा

English

Sterility, and infants’ death, and weeping that announceth woe, Dear! lay them on the fiend as thou wouldst pluck a garland from a tree. A charm to restore a sick man to health

अध्याय 8

श्लोक 7.10

उ॒न्मु॒ञ्चन्ती॑र्विवरु॒णा उ॒ग्रा या वि॑ष॒दूष॑णीः ।अथो॑ बलास॒नाश॑नीः कृत्या॒दूष॑णीश्च॒ यास्ता इ॒हा य॒न्त्वोष॑धीः

unmuñcantīrvivaruṇā ugrā yā viṣadūṣaṇīḥ | atho balāsanāśanīḥ kṛtyādūṣaṇīśca yāstā ihā yantvoṣadhīḥ

हिन्दी अर्थ

(उपध्मानी) जलती हुई तथा शब्द करती हुई (वुतिरज्जुः) दुगंन्षित शतु (हृत्सु) हृदयो मेँ (भयम्, भ्रादधताम्) भय धारण करे सेनाध्यक्ष ¦ (अमून्) उन शतु सेनिकों को (निः शृणीहि) निःशेषतया कुचल डाल, (खदिर) हैखा जाने वाले ! सेनाध्यक्ष (अमून्) उन्हे (ग्रजिरम्) शीघ्रतासे (खाद) खाजा। (ताजद््भेगः इव) टूटने वाले के6८। सूु० ८ भथववेद-माष्य २७७ भंग के सदश (भज्यन्ताम्) वे भग्न हो जांय (वधकः) वध करने वाला त्याग कर देने वाले अर्थात् मङगुर। क १.४. परुषानमून् धरूषाहः कणोत हन्त्वेनान् वधको वभः ।

English

May he, the conqueror, ne’er subdued, may Indra bind the Charm on thee, Bull, Soma-drinker, he who gives us peace.

अध्याय 8

श्लोक 7.11

अ॒प॒क्री॒ताः सही॑यसीर्वी॒रुधो॒ या अ॒भिष्टु॑ताः ।त्राय॑न्ताम॒स्मिन् ग्रामे॒ गामश्वं॒ पुरु॑षं प॒शुम्

apakrītāḥ sahīyasīrvīrudho yā abhiṣṭutāḥ | trāyantāmasmin grāme gāmaśvaṃ puruṣaṃ paśum

हिन्दी अर्थ

कठोर शब्दों मे , सश्राट् (कृणोतु) प्राहुत करे, (वधकः) वव करते अन्तरि जारमासीज्जालदुण्डा दिको महीः । तेनांभिधाय दम्यंनां शक्रः सेनापर्पावपत् ॥५॥ (महीः दिशः) महती दिशो के सदृश महान् (जालदण्डाः) जाल. के दण्डे, ये । (तेन) उस जाल द्वारा (अभिधाय) बाध कर, (शक्रः) शव्ितिशाली अवपत्) पृथक् कर छिक्न-भिघ्र कर दिया । . ५

English

May he protect thee round about, by night and day on every, side. A charm to exercise evil spirits who beset women

अध्याय 8

श्लोक 7.12

मधु॑मन्मू॑लं म॑धुमद॑ग्रमासाम्म॑धुमन्म॑ध्यं वीरु॑धां बभूव ।मधु॑मत् प॒र्णं मधु॑म॒त् पुष्प॑मासां॒ मधोः॒ संभक्ता अ॒मृत॑स्य भ॒क्षो घृ॒तमन्नं॑ दुह्रतां॒ गोपु॑रोगवम्

madhumanmūlaṃ madhumadagramāsāmmadhumanmadhyaṃ vīrudhāṃ babhūva | madhumat parṇaṃ madhumat puṣpamāsāṃ madhoḥ saṃbhaktā amṛtasya bhakṣo ghṛtamannaṃ duhratāṃ gopurogavam

हिन्दी अर्थ

यह अन्तरिक्ष में होने वाला युद्धं है । वतमान में ब॑हुचचित "ऽथा फ ' है, जिस का कि निर्देश मन्त्र में हुआ है । इससे भी बड़ा युद्ध “लोक-लोकः- यदधो मे नरसंहारी आयुधो का प्रयोग॒वदिक नहीं, जसे कि मन्तो की लिये कहा है किं यहीं विमानो द्वारा लडने वले शतरुसेनिकों को, सम्राट् चन) कोई भी (न मुच्यातै) न मुक्त हो सके, चछूट सके । उन्जू=

English

Let neither fiend of evil name, Alinsa, Vatsapa, desire Thy pair of husband-wooers which thy mother cleansed when, thou wast born. Palala, Anupalala, Sarku, Koka, Malimlucha, Palijaka Vavri- vāsas and Asresha, Rikshagriva

अध्याय 8

श्लोक 7.13

याव॑तीः किय॑तीश्चे॒माः पृ॑थि॒व्यामध्योष॑धीः ।ता मा॑ सहस्रप॒र्ण्योऽ मृ॒त्योर्मु॑ञ्च॒न्त्वंह॑सः

yāvatīḥ kiyatīścemāḥ pṛthivyāmadhyoṣadhīḥ | tā mā sahasraparṇyo' mṛtyormuñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

२७८ श्रथवेवेद-भाष्य का०ष८ । सू० जाल (वृहत्) बड़ा है । (तेन) उस जाल द्वारा (शक्रः) शक्तिशाली सेना- ॥ (सहम्) हजार, (अयुतम्) १० हजार (न्यवदम्) तथा लाखों संनिकों को, (सेनया) सेना द्वारा (जघान) मार दिया । अयं छोको जाकंपासीच्छक्रस्यं महतो महान् । १. जिसे साग्राज्य फे राजा, सामन्त तथा प्रजाएं मेदि देते है ।

English

and Pramilin. Approach not, come not hitherward: creep not thou in-between her thighs.

अध्याय 8

श्लोक 7.14

वैया॑घ्रो म॒णिर्वी॒रुधां॒ त्राय॑मानोऽभिशस्ति॒पाः ।अमी॑वाः॒ सर्वा॒ रक्षां॒स्यप॑ ह॒न्त्वधि॑ दू॒रम॒स्मत्

vaiyāghro maṇirvīrudhāṃ trāyamāno'bhiśastipāḥ | amīvāḥ sarvā rakṣāṃsyapa hantvadhi dūramasmat

हिन्दी अर्थ

हरा है । तामसास्तर का वर्णेन यथा, (अथवे० ३।२।५,६) । यथा के प्रयोग का विधान किया है, जिस से तमस् के आवरण से आवृत होकर शत्रुसेनिक कमं से रहित हो जाय, भौर परस्पर एक-दूसरे को पहचान न हो जाना, (च) ओौर (भनपवाचना) जिसका किं भ्रपाकरण कहा नहींजा उन सब शत्रुओं को (अभिदधामि) भ बाधिता हूं, जकड़ देता हूं । श्रवसाद- निराशा, निरुत्साहं । अनपवाचना -= मन् + भप (अपाकरण)

English

I set, to guard her, Baja, that which chases him of evil name. Durnāmā and Sunāmā both are eager to converse with her. We drive away Arāyas: let Sunāmā seek the women-folk,

अध्याय 8

श्लोक 7.15

सिं॒हस्ये॑व स्त॒नथोः॒ सं वि॑जन्ते॒ऽग्नेरि॑व विजन्त॒ आभृ॑ताभ्यः ।गवां॒ यक्ष्मः॒ पुरु॑षाणां वी॒रुद्भि॒रति॑नुत्तो ना॒व्याऽएतु स्रो॒त्याः

siṃhasyeva stanathoḥ saṃ vijante'gneriva vijanta ābhṛtābhyaḥ | gavāṃ yakṣmaḥ puruṣāṇāṃ vīrudbhiratinutto nāvyā'etu srotyāḥ

हिन्दी अर्थ

मृत्यु के (ये) जो (अघलाः) हत्यारे (दूताः) दूत ह (तेभ्यः) उन के प्रति (मृत्युदूताः) है मृत्यु के दरूतो ! (अमून्) उन शतृप्रो को (नयत) ले जाओ, (यमदूताः) है यम के दूतो ! (अपोम्भत) इन कौ सम्प्णं शक्तियों तियो द्वारा प्रजा का पालन करने वाला नागरिक अध्यक्ष, तथा “शवं है मारने वाला, ओौर यम है नियन्ता। यथा “सएव. मृत्युः सोऽमृतम्” उठा कर (ओजसा) गोज के साथ (यन्तु) चले, (रद्राः) खर (एकम्) एक को, (वसवः) वसु (एकम्) एक को उठा कर भ्रौज के साथ चलं

English

The black and hairy Asura, and Stambaja and Tundika, Arāyas from this girl we drive, from bosom, waist, and parts below.

अध्याय 8

श्लोक 7.16

मु॒मु॒चा॒ना ओष॑धयो॒ऽग्नेर्वै॑श्वान॒रादधि॑ ।भूमिं॑ संतन्व॒तीरि॑त॒ यासां॒ राजा॒ वन॒स्पतिः॑

mumucānā oṣadhayo'gnervaiśvānarādadhi | bhūmiṃ saṃtanvatīrita yāsāṃ rājā vanaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

शक्तियां । इन शक्तियों को भवलम्ब देने वाले हँ सध्य, खर, वसु मौर आदित्य । ये मनुष्य है । साध्याः है महात्मगण (यजु° ३१।९ ), यथा महात्माश्रों मौर पठितो के सहयोग से उत्साहित हो कर प्रजावगे भी युद निमित्त भपने-भ्राप को न्यौछावर कर देता है । शत्रुओं को, ऊपर की ओर से (उन्जन्तः ) ऋजु करते हुए, (जोजसा) भोज से (यन्तु) गति करे । गौर (्रङ्किरसः) भ्रङ्गारों के सदृश ूलसाने वाने महती सेना को (घ्नन्तः) मारते हए (यन्तु) गति करं ।

English

Sniffer, and Feeler, him who eats raw flesh, and him who licks his lips, Arāyas with the tails of dogs, the yellow Baja hath destroyed. Whoever, in thy brother’s shape or father’s comes to thee in sleep,

अध्याय 8

श्लोक 7.17

या रोह॑न्त्याङ्गिर॒सीः पर्व॑तेषु स॒मेषु॑ च ।ता नः॒ पय॑स्वतीः शि॒वा ओष॑धीः सन्तु॒ शं हृ॒दे

yā rohantyāṅgirasīḥ parvateṣu sameṣu ca | tā naḥ payasvatīḥ śivā oṣadhīḥ santu śaṃ hṛde

हिन्दी अर्थ

शत्रुसेना, जब अन्तक में स्थित हुई, निज सेना पर प्रहार करती हो, तो उस सेना से भौर ऊपर जा कर, निज सैनिक, उन की प्रहरण शवित को ऋजु करदे, ठीली करदे, ताकि उन की प्रहरण-शविति कम हो जाय । ओर यदि शतरसेना पृथिवीस्थ हुई प्रहार करती हो तो भङ्खारो के सदृश विश्वे देवाः =- विष्वे (सब) +देवाः (विजिगीषवः) “दिव् कीडा- दविपास्चतुष्वादिष्णामि यथा सेनाममूं हन॑न् ॥१४॥ (उत) ठथा (वीरुधः) लताओं को, (द्विपात्, चतुष्पाद्) तथा दो-पायों , म्रोर चौपायोंको (इष्णामि) मै बार-बार भेजता हु (यथा) ताक्रिवे (अमूम्, सेनाम्) उस सेना का (हनन्) हनन करे ।

English

Let Baja rout and chase them like eunuchs with woman’s head- dress on. Whoever steals to thee asleep or thinks to harm thee when awake,—

अध्याय 8

श्लोक 7.18

याश्चा॒हं वेद॑ वी॒रुधो॒ याश्च॒ पश्या॑मि॒ चक्षु॑षा ।अज्ञा॑ता जानी॒मश्च॒ या यासु॑ वि॒द्म च॒ संभृ॑तम्

yāścāhaṃ veda vīrudho yāśca paśyāmi cakṣuṣā | ajñātā jānīmaśca yā yāsu vidma ca saṃbhṛtam

हिन्दी अर्थ

समय-समय पर भजते रहना चाहिए ताक्रि वन्दीकृत सेनिकों मे इनके ४ अमुष्यां हन्त॒ सेनाया हदं करटं सहस्रशः ॥१६॥ (इमे) ये (मृत्युपाशाः) मृत्यु के फन्दे (उप्ताः) बीजरूप में बोएरहै, भभिप्राय यह है कि युद्ध मे पकड़ गये सैनिकों को, वृक्षौ के फलो, र

English

These hath it banished, as the Sun travelling round drives shade away. Whoever causeth her to lose her child or bear untimely fruit,— Destroy him, O thou Plant, destroy the slippery fiend who lusts for her.

अध्याय 8

श्लोक 7.19

सर्वाः॑ सम॒ग्रा ओष॑धी॒र्बोध॑न्तु॒ वच॑सो॒ मम॑ ।यथे॒मं पा॒रया॑मसि॒ पुरु॑षं दुरि॒तादधि॑

sarvāḥ samagrā oṣadhīrbodhantu vacaso mama | yathemaṃ pārayāmasi puruṣaṃ duritādadhi

हिन्दी अर्थ

ओर लताएं तो पूवेतः स्थित है, भओषधियों तथा मांसभक्षियों को बार-बार उदेश्य है हनन", अतः हननोपायों का मवलम्बन कहा है । ृष्टानदृष्टानिष्णामि यथा सेनाममूं हनन् ॥१५॥ बार-बार भेजता हु, (यथा) ताकि वे (अमू सेनाम्) उन बन्दीकृत सैनिकों को (हनन्) मार डाले । गायको श्रौर गायिकाओं का प्रेषण सैनिकों के मनो विनोद के लिये है।

English

Those who at evening, with the bray of asses, dance around the house, Kukshilas, and Kusfilas, and Kakubhas, Srimas,

अध्याय 8

श्लोक 7.20

अ॒श्व॒त्थो द॒र्भो वी॒रुधां॒ सोमो॒ राजा॒मृतं॑ ह॒विः ।व्री॒हिर्यव॑श्च भेष॒जौ दि॒वस्पु॒त्रावम॑र्त्यौ

aśvattho darbho vīrudhāṃ somo rājāmṛtaṃ haviḥ | vrīhiryavaśca bheṣajau divasputrāvamartyau

हिन्दी अर्थ

(सहसखरहः) हजारों शत्रुसेनिकों का हनन करने वाली है । (शर्वं) है शवे ! (अमूम् सेनाम्) उस शत्रु सेना को (हतम्) मारो। “मं” का अभिप्राय है “घमेदुघा" नामिका गौ से दुहा दूध । मन्तरमें सनिकाहूति । शंवं है सेनाधिपति, भव है नागरिक अध्प्रक्ष, इसे पुर्निबाहू कहा है । पृश्नि है नाना वणँ से रञ्जित पृथिवी । पृथिवी के रक्षाथं, बाहुश्रों वाला “भव” है । पृिनिबाहु मे मध्यपदलोपी समास है । पृश्निः दो जालो द्वारा।येदो्है (१) समिद्धः घर्मः, ओर (२) हौमः(मन्तर १७) ।

English

Who dance about like eunuchs, who raise a wild clamour in the wood, all these we banish far 130

अध्याय 8

श्लोक 7.21

उज्जि॑हीध्वे स्त॒नय॑त्यभि॒क्रन्द॑त्योषधीः ।य॒दा वः॑ पृश्निमातरः प॒र्जन्यो॒ रेत॒साव॑ति

ujjihīdhve stanayatyabhikrandatyoṣadhīḥ | yadā vaḥ pṛśnimātaraḥ parjanyo retasāvati

हिन्दी अर्थ

वेद की विधि द्वाय (पराजिताः) पराजित , हुए तुम (रसत) त्रास प्र्थात् दन में से (कश्चन) कोई भी (मा मोचि) मृत्युसेन टे । साम्राज्य की समग्र सेना का पति । सोमः सेनानायक । मरुतः मारने में ये (इषुम्, प्रतिघाम्) शरसंघान (मा एकन्) न॒ कर सकं । (अथ) ध (बहु विभ्यताम् ) बहुत भयभीत हए (एषाम्) इन के (ममंणि) ममेस्थल मे (इषवः) हमारे इषु वाण (घ्नन्तु) प्रहार करं ।

English

away. All those who cannot bear the Sun who warms us yonder from the sky, Arāyas with the smell of goats, malodorous, with bloody mouths, the Makakas we drive afar.

अध्याय 8

श्लोक 7.22

तस्या॒मृत॑स्ये॒मं बलं॒ पुरु॑षं पाययामसि ।अथो॑ कृणोमि भेष॒जं यथा स॑च्छ॒तहा॑यनः

tasyāmṛtasyemaṃ balaṃ puruṣaṃ pāyayāmasi | atho kṛṇomi bheṣajaṃ yathā sacchatahāyanaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रतिधाम् इषुम् इषु का धनुष् पर चढाना । सं कोक्चतामेनान् चावापृथिवी समन्तरिक्षं सह हैवतांमिः। (चावापृथिवी) चुलोक श्रौर प्ृथिवीलोक (सम्) मिलकर (एनान्) प्राणियों तथा मनुष्यों मरौर मुक्तात्माभं देवताओं का भी निवास है।ये सब परस्पर मिलकर सांसारिक घटनाओं से प्रभावित होते रहते है । श्रतः इन द्वारा कोसना कोई अस्वामाविक बात नहीं । समग्र संसार एक “ये सब भूगोल, लोक ओौर इनमे मनुष्यादि प्रजा भी रहती है । जेसे दयलोक ओर पृथिवी लोक के निवासियो द्वारा कोसना उपपन्न हो सकता है ।

English

All those who on their shoulders bear a head of monstrous magnitude, Who pierce the women’s loins with pain,—those demons, Indra drive away!

अध्याय 8

श्लोक 7.23

व॒रा॒हो वे॑द वी॒रुधं॑ नकु॒लो वे॑द भेष॒जीम्।स॒र्पा ग॑न्ध॒र्वा या वि॒दुस्ता अ॒स्मा अव॑से हुवे

varāho veda vīrudhaṃ nakulo veda bheṣajīm| sarpā gandharvā yā vidustā asmā avase huve

हिन्दी अर्थ

(चतघखः दिशः) चार दिशां हँ (भश्वतयंः) चार खच्चरियां (देव+ रथस्य) परमेश्वर देव के रथ की, (पुरोडाशाः ) पुरोडाश हैँ (शफाः) खुर, यलोक ओर पृथिवीलोक है (पक्षसी) रथ के दो पक्ष, पाश्वं, (ऋतवः) जगत् में रथ का, तथा जगत् के घटकों मेँ रथ ऊ घटकों का आरोप

English

Those, bearing horns upon their hands, who first of all approach the brides; Standing in ovens, laughing loud, those who in bushes flash forth light, all these we banish hence away.

अध्याय 8

श्लोक 7.24

याः सु॑प॒र्णा आ॑ङ्गिर॒सीर्दि॒व्या या र॒घतो॑ वि॒दुः ।वयां॑सि हं॒सा या वि॒दुर्याश्च॒ सर्वे॑ पत॒त्रिणः॑ ।मृ॒गा या वि॒दुरोष॑धी॒स्ता अ॒स्मा अव॑से हुवे

yāḥ suparṇā āṅgirasīrdivyā yā raghato viduḥ | vayāṃsi haṃsā yā viduryāśca sarve patatriṇaḥ | mṛgā yā viduroṣadhīstā asmā avase huve

हिन्दी अर्थ

आरोप द्वारा दर्शाया है कि जगत् गतिमान् है, तथा इसमे देव।धिदेव पर- मेश्वर रममाण हुआ स्थित है । इसलिये जगत् को “देवरथ” कहा है। पुरोडाण यज्ञिय हँ जो कि गोल होते है, अतः इन्दं भश्वतरियों के शफाः रचना करता तथ। संचालन करता है । जंमे पारमेश्वरी वेदव।कं जगत की रक्षिका है, वैसे रथ के पहियों पर चढ़ा लोहचक्र पहियों की रक्षा करता है । पुरोडाशाः शफाः अन्तदेशाः-=क्िकराः (मृत्य) द्यावापृथिवी =पक्षसी(रथ के दो पाश्वं) के लोह चक्र)

English

Those who have retroverted toes, and heels and faces in the front, Khalajas, Sakadhūmajas, Urundas, all the Matmatas, impotent

अध्याय 8

श्लोक 7.25

याव॑तीना॒मोष॑धीनां॒ गा॑वः प्रा॒श्नन्त्य॒घ्न्या याव॑तीनामजा॒वयः॑ ।ताव॑ती॒स्तुभ्य॒मोष॑धीः॒ शर्म॑ यच्छ॒न्त्वाभृ॑ताः

yāvatīnāmoṣadhīnāṃ gāvaḥ prāśnantyaghnyā yāvatīnāmajāvayaḥ | tāvatīstubhyamoṣadhīḥ śarma yacchantvābhṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

(संवत्सरो रथः) संवत्सर है रथ, (परिवत्सरो रथोपस्थ: परिवत रथ में बैठने का स्थान, (विराट् ईषा) विराट् हैरथ का र जो व (४०1६९) के साथ लगा रहता है, (अ्रग्निः रथमुखमू्) अग्नि है रथ का मुख (चन्द्रमाः) चन्धमा है (सारथिः) सारथि । + संवत्सरः वष, पृथिवी का एक भ्रमण, सूर्यं की परिक्रमा के रूप मे । संवत्सर का वणेन यथा-- “एक चक्रवाला रथ" है सूर्यमण्डल, इस रथ मेँ ७ रर्मियां जुती हुई है,

English

Kumbhamushkas, these, Drive thou, O Brāhmanaspati, far from this girl with vigilance. Sightless and with distorted eyes, impotent. woman less be they.

अध्याय 8

श्लोक 7.26

याव॑तीषु मनु॒ष्याऽ भेष॒जं भि॒षजो॑ वि॒दुः ।ताव॑तीर्वि॒श्वभे॑षजी॒रा भ॑रामि॒ त्वाम॒भि

yāvatīṣu manuṣyā' bheṣajaṃ bhiṣajo viduḥ | tāvatīrviśvabheṣajīrā bharāmi tvāmabhi

हिन्दी अर्थ

ओौर हेमन्त । यह संवत्सर चक्र जीणं नहीं होता ओौर न इसके. चलने वाला भुवन ्रधिष्ठित है" (निरुक्त ४।४।२७) । रप्मियां ऽल्7णा॥ में दिखाई देती है, यथा, २८५ (लाल) 0121186 14120 (नील के पौधे से निकाले रंग जेसा) ऽ1०€। (बगनी रंगवाली) । संवत्सरः न्=पुथिवी की एक बार सूयं की परिक्रमा का काल । परिवत्सरः

English

O Healing Plant, cast each away who, not her husband, would approach this woman wedded to her lord.

अध्याय 8

श्लोक 7.27

पुष्प॑वतीः प्र॒सूम॑तीः फ॒लिनी॑रफ॒ला उ॒त।सं॒मा॒तर॑ इव दुह्राम॒स्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

puṣpavatīḥ prasūmatīḥ phalinīraphalā uta| saṃmātara iva duhrāmasmā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

१. रथ स्वय निमित नहीं होता । इस की सत्ता, दस के निर्माति को सुचित करती है । संवत्सर कोरथ कहु कर सके निर्माता परमेदवर सूचित किया है। अ अथववेद-माष्य का० त । सुनः (६), ऋग्वेदादि वेदों (७), अश्वो, गौओं, अजावयः (८ ): का क्रमशः ; रथ का मूख है । अर्थात् इस रथ के अग्रभागमें जुतौ हई प्रतीत होती है

English

The Bristly-haired, the Maniac-haired, the Biter, and the Groper-fiend, The Creeper-near, the Copper-hued, the Snouty, and the Saluda,

अध्याय 8

श्लोक 7.28

उत् त्वा॑हार्षं॒ पञ्च॑शला॒दथो॒ दश॑शलादु॒त।अथो॑ य॒मस्य॒ पड्वी॑शा॒द् विश्व॑स्माद् देवकिल्बि॒षात्

ut tvāhārṣaṃ pañcaśalādatho daśaśalāduta| atho yamasya paḍvīśād viśvasmād devakilbiṣāt

हिन्दी अर्थ

लगती है । इसलिए ग्रग्नि संवत्सर-रथ के मुख मे जुती हुई है--यद कथनं स्थिति परस्पर विरुद्ध दिशाभों मे होती है । सूयं पूवं मे उदित होता ओौर , पूणं चन्द्रमा उसका सारथि रथ के दक्षिण में स्थित होगा ही । (इतः) इधर से (जय) त्रु जीत (इतः) इधर से (विजय) विजय को कीडोरियां ढीली करदेताहूं।॥ ॥

English

With foot and heel kick over, as a hasty cow her milking-pan. If one should touch thy coming babe or kill thine infant newly born,

अध्याय 8

श्लोक 8.1

शत्रुपराजयः।भृग्वङ्गिराः।इन्द्रः, वनस्पतिः, परसेनाहननं च।अनुष्टुप्, २, ८-१०, २३ उपरिष्टाद्बृहती, ३ विराड् बृहती, ४ बृहती पुरस्तात्प्रस्तारपङ्क्तिः, ६ आस्तारपङ्क्तिः, ७ विपरीतपादलक्ष्मा चतुष्पदातिजगती, ११ पथ्याबृहती, १२ भुरिक्, १९ पुरस्ताद्विराड् बृहती, २० पुरस्तान्निचृद्बृहती, २१ त्रिष्टुप्, २२ चतुष्पदा शक्वरी, २४ त्र्यवसाना त्रिष्टुबुष्णिग्गर्भा पराशक्वरी पञ्चपदा जगती।इन्द्रो॑ मन्थतु॒ मन्थि॑ता श॒क्रः शूरः॑ पुरंद॒रः ।यथा॒ हना॑म॒ सेना॑ अ॒मित्रा॑णां सहस्र॒शः

śatruparājayaḥ| bhṛgvaṅgirāḥ| indraḥ, vanaspatiḥ, parasenāhananaṃ ca| anuṣṭup, 2, 8-10, 23 upariṣṭādbṛhatī, 3 virāḍ bṛhatī, 4 bṛhatī purastātprastārapaṅktiḥ, 6 āstārapaṅktiḥ, 7 viparītapādalakṣmā catuṣpadātijagatī, 11 pathyābṛhatī, 12 bhurik, 19 purastādvirāḍ bṛhatī, 20 purastānnicṛdbṛhatī, 21 triṣṭup, 22 catuṣpadā śakvarī, 24 tryavasānā triṣṭubuṣṇiggarbhā parāśakvarī pañcapadā jagatī| indro manthatu manthitā śakraḥ śūraḥ puraṃdaraḥ | yathā hanāma senā amitrāṇāṃ sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

के स्थान में “चत्वारि पठित है । चतुथे का हुआ है । मन्त्रे वेदौ को “वाक् कटा हः परतः परमेदवर वाक्यरूप सें, वाणीरूप म, वेद प्रकट ईए पदखूप मे नदीं -यह भावना वस्तुतः ठीक है । अथववेद के वर्णन अतिगूढ श्रौर गहन रह। 1 र वहतः परि सामानि षष्ठात् पञ्चाधि निषिता ।

English

The tawny-coloured, and the pale, the variegated and the red, The dusky-tinted, and the black,—all Plants we summon hither- ward.

अध्याय 8

श्लोक 8.2

पू॒ति॒रज्जुरु॑प॒ध्मानी॒ पूतिं॒ सेनां॑ कृणोत्व॒मूम्।धू॒मम॒ग्निं प॑रा॒दृश्या॒मित्रा॑ हृ॒त्स्वा द॑धतां भ॒यम्

pūtirajjurupadhmānī pūtiṃ senāṃ kṛṇotvamūm| dhūmamagniṃ parādṛśyāmitrā hṛtsvā dadhatāṃ bhayam

हिन्दी अर्थ

संचरेते) संचार करती हैँ । (सूयेपत्नी) ये दोनों सूयं की पलिर्या, (प्रजा- नती) निजमागं को जानती हुई, (ॐतमती ) मानो कण्डा ली हु, (अजरे) चलोक मे उड़ने वाली पक्षीरूप दो उषाः प्रातःकालीन ,उषा तथा सायं उषाएं । उषा-काल ध्यान का काल है 1 इन कालों मे परमेश्वर का ध्यान मानो दो पंख है पक्षीके दोही पंख होते ह । उपासना के मन्त्र नहीं कहे,

English

Let purchased Plants of mightier power, Plants that are praised for excellence. Here in this village safely keep cattle and horses, man and beast. Sweet is their root, sweet are these Plants’ top branches, sweet also is their intermediate

अध्याय 8

श्लोक 8.3

अ॒मून॑श्वत्थ॒ निः शृ॑णीहि॒ खादा॒मून् ख॑दिराजि॒रम्।ता॒जद्भङ्ग॑ इव भजन्तां॒ हन्त्वे॑नान् वध॑को व॒धैः

amūnaśvattha niḥ śṛṇīhi khādāmūn khadirājiram| tājadbhaṅga iva bhajantāṃ hantvenān vadhako vadhaiḥ

हिन्दी अर्थ

ऋतुप्रो की प्रत्येक ऋतु मे, पृथिवीके प्रदेशों मे उषाओं की चमकोंमेभी पंचविध भेद हो जाता है। तथा ऋतुभेद के कारण पृथिवी मे पञ्चविध दोह ्र्थात् उत्पत्तियां भी होती रहती हैँ । इन पांच दिशाओं. कौ रूपी मूर्घा से पाच दिशाएं निकल कर “एकलोक”' पृथिवी मे व्याप्त हो रही है 1 मन्त्र मे सब वणेन कवितामेंहै। इसलिये वेद को कान्य कहते) यथा "देवस्य पश्य काव्यम्” (अथवं० १०।८।३२; €।१५।९) । तथा पर- मेश्वर को कवि कहा है ) यथा “केविमेनीषी परिभरः स्वयम्भूः” (यजु°

English

These Plants of the Angirases which grow on mountains and on plains. The Plants I know myself, the plants that with mine eye I look upon, Plants yet unknown, and those we know, wherein we find that power is stored,

अध्याय 8

श्लोक 8.4

प॒रु॒षान॒मून् प॑रुषा॒ह्वः कृ॑णोतु॒ हन्त्वे॑ना॒न् वध॑को व॒धैः ।क्षि॒प्रं श॒र इ॑व भजन्तां बृहज्जा॒लेन॒ संदि॑ताः

paruṣānamūn paruṣāhvaḥ kṛṇotu hantvenān vadhako vadhaiḥ | kṣipraṃ śara iva bhajantāṃ bṛhajjālena saṃditāḥ

हिन्दी अर्थ

४०।८) 1 वेदों मे कल्पनाएं केवल कल्पनाएं ही नहीं अपितु इन कल्पनाभों मे यथार्थता अनुस्यूत रहती है । नि पड जाता भूता परथम॒जतेस्थ॒ समानि षडहं व॑हन्ति करते हैँ । (षड्योगम्) ६ बैल के योगवाले हल द्वारा कयि (सीरम्) कृषिकमं के (अनु) अनुरूप (सामसाम) प्रत्येक योग के साथ एक-एक साम होता है । (षट्) ६ (यावापृथिवी) द्यौ ओर पृथिवी है (ग्राहः) एषा कहते ह ओर (षट् उर्वीः) ६ विस्तृत दिशाएं है । (ग्रथवें० १५।४३,५,८,११) इन ६ सामों के अतिरिक्त श्यैत ओर नौधस सामों काभी वणेन प्रथवेवेद में हुम है ।

English

Let all the congregated Plants attend and mark mine utterance, That we may rescue this man here and save him from severe distress.

अध्याय 8

श्लोक 8.5

अ॒न्तरि॑क्षं॒ जाल॑मासीज्जालद॒ण्डा दिशो॑ म॒हीः ।तेना॑भि॒धाय॒ दस्यू॑नां श॒क्रः सेना॒मपा॑वपत्

antarikṣaṃ jālamāsījjāladaṇḍā diśo mahīḥ | tenābhidhāya dasyūnāṃ śakraḥ senāmapāvapat

हिन्दी अर्थ

“सीरम्” सीर का श्रथं है हल, जिस द्वारा चेत जोता जाता है। हल के साथ ६ बेलों को जोतना हास्यास्पदहै। गीता के ्रनुस।र (१३।१-२) येही ६ बेल रह, जोकि बुद्धिरूपी हल के आगे जुते हए ँ। इस आध्यात्मिक कृषिकमं कौ सफलता के लिये जीवन में भक्ति भरे ६ सामगान भी होने चाहिए, ्रजञानेन्ियों श्रौर मन कौ शुद्धि के लिये । इन ६ री शुद्धि हो जाने - १ पदपाठ मे, जाता। भूता। प्रथमजा--देे पाठर, जोक्रि नपुसकलिङ्खौी प्रतीत होते ह । ्रतः भूता = भूतानि । जाता जातानि । प्रथमजा = प्रथम जात्तानि । की स्थिति भी वेदानुमत है (यजु° ३१।१६) ।

English

Asvattha, Darbha, King of Plants, is Soma, deathless sacrifice Barley and Rice are healing balms, the sons of Heaven who never die. Lift yourselves up, ye Healing Plants, loud is the thunder’s crash and roar.

अध्याय 8

श्लोक 8.6

बृ॒हद्धि जालं॑ बृह॒तः श॒क्रस्य॑ वा॒जिनी॑वतः ।तेन॒ शत्रू॑न॒भि सर्वा॒न् न्युऽब्ज॒ यथा॒ न मुच्या॑तै कत॒मश्च॒नैषा॑म्

bṛhaddhi jālaṃ bṛhataḥ śakrasya vājinīvataḥ | tena śatrūnabhi sarvān nyu'bja yathā na mucyātai katamaścanaiṣām

हिन्दी अर्थ

पृथिवी भी त्रिविधा है, समुद्र, समतल, तथा पवेत । अथवा पृथिवी का उपर का पाथिव स्तर इस के नीचे जलीय स्तर, जिस कौ सूचन। कृपजलों सूचना ज्वालामुखी पवतो तथा गमेचश्मो द्वारा मिलती है । इस प्रकार दौः ओर पृथिवी मिलकर षट् है। नाकः स्थान विशेष अतीत होते है जोकि चौके श्रद्धरूप हैं स्वः--सुख को, भ्रौर नाकः सब दु-लों से रहित मोक्ष को“ सूचित करते है ६ उष्ण मास है--यह् (कवयः) मेधावी लोग (आहुः) कहते हँ, (यतमः) जो (अतिरिक्तः) इन से अतिरिक्त (ऋतुम्) ऋतु है उसे (नः ब्रूत) हमं

English

When with full flow Parjanya, ye Children of Prisni! blesseth; you. We give the essence of that stream of nectar of this man to drink:

अध्याय 8

श्लोक 8.7

बृ॒हत् ते॒ जालं॑ बृह॒त इ॑न्द्र शूर सहस्रा॒र्घस्य॑ श॒तवी॑र्यस्य ।तेन॑ श॒तं स॒हस्र॑म॒युतं॒ न्यऽर्बुदं ज॒घान॑ श॒क्रो दस्यू॑नामभि॒धाय॒ सेन॑या

bṛhat te jālaṃ bṛhata indra śūra sahasrārghasya śatavīryasya | tena śataṃ sahasramayutaṃ nya'rbudaṃ jaghāna śakro dasyūnāmabhidhāya senayā

हिन्दी अर्थ

स।र (सप्त दीक्षाः) ७ दीक्षां है। “कवयः"" के दो अभिगप्रायर्है, (१) “कविः मेधाविनाम" (निघं० ३।१५) ; (२) “कवते गतिकर्मा” (निषं० २।१४) । सुपर्णाः = सुपतना पक्षी कहा है । ये रषमियां मानो दूरस्थ, आदित्य से, शीघ्र उड़कर, पृथिवी पर श्रा पटहूंचती हैँ । ये सातर्हैँ। इन सातोँका मिश्रणहै भादित्यकी

English

So I prepare a remedy that he may live a hundred years. Well doth the wild boar know a Plant, the mungoose knows the Healing Herb.

अध्याय 8

श्लोक 8.8

अ॒यं लो॒को जाल॑मासीच्छ॒क्रस्य॑ मह॒तो म॒हान्।तेना॒हमि॑न्द्रजा॒लेना॒मूंस्तम॑सा॒भि द॑धामि॒ सर्वा॑न्

ayaṃ loko jālamāsīcchakrasya mahato mahān| tenāhamindrajālenāmūṃstamasābhi dadhāmi sarvān

हिन्दी अर्थ

णीत-उष्ण-१२ मासो से अतिरिक्त यदि कोईऋतुदहैतो उसे को, क्योंकि १२ मासही ६ ऋतुं मे विभक्त हँ । उत्तर के अभाव में मन्त्र (१८) मे स्वयं कह दिया कि “ऋतवो ह सप्त” कि निश्चय से ऋतुएं 3 ह । (होमाः सप्त) होम ७ है, (ह्) निश्चय से (समिधः सप्त) समिधाए ७ है, (मधूनि सप्त) मधु ७ है, (ह्) निश्चय से (ऋतवः सप्त) ऋतुएं ७ है । यह् (वयम्) हम ने (शुश्रुम) सूना है। मनुष्यों द्वारा इन ७ सप्तकं की अभिकक्षा होती है, अभिलाषा होतीहै

English

I call, to aid this man, the Plants which Serpents and Gandhar- vas know. Plants of Angirases which hawks, celestial Plants which eagles. know;

अध्याय 8

श्लोक 8.9

से॒दिरु॒ग्रा व्यृऽद्धि॒रार्ति॑श्चानपवाच॒ना।श्रम॑स्त॒न्द्रीश्च॒ मोह॑श्च॒ तैर॒मून॒भि द॑धामि॒ सर्वा॑न्

sedirugrā vyṛ'ddhirārtiścānapavācanā| śramastandrīśca mohaśca tairamūnabhi dadhāmi sarvān

हिन्दी अर्थ

ही प्राप्त होती है । इस लिये कष्ठमयी समिधाग्रों को भी समिधा कहते हैँ । रूपी समिधाश्रोंके लिये भी होता दहै) भथवा “त्रिःसप्त समिधः कृताः." (यजु० ३१।१५) में कथित २१ समिधाओंमेंसे किन्हीं ७ समिधाभोंका “यो वे कशायाः सप्तमधूनि वेद मघुमान् भवति । इस मन्त्र मे सप्तमधूनि का वणेन हुआ है ।

English

Plants known to swans and lesser fowl, Plants known to all the birds that fly. Plants that are known to sylvan beasts,—I call them all to aid this man. The multitude of herbs whereon the Cows whom none may slaughter feed, all that are food

अध्याय 8

श्लोक 8.10

मृ॒त्यवे॒ऽमून् प्र य॑च्छामि मृत्युपा॒शैर॒मी सि॒ताः ।मृ॒त्योर्ये अ॑घ॒ला दू॒तास्तेभ्य॑ एना॒न् प्रति॑ नयामि ब॒द्ध्वा

mṛtyave'mūn pra yacchāmi mṛtyupāśairamī sitāḥ | mṛtyorye aghalā dūtāstebhya enān prati nayāmi baddhvā

हिन्दी अर्थ

(बृहतः, षष्ठात्" परि अधि) ५ बृहत् पादीं सहित छठे बृहत् पाद से अर्थात् ६ बृहत् पादो से (पञ्च सामानि) ५ साम सामगान 1( निमिता = से (निमितम्) निर्मित होता है । (बृहती) बृहती छन्द (कुतः) किससे (सिता) निमित होता है ?। ह सम्भवतः ५ बृहत्-पादो द्वारा ४ सामगान निर्मित होते हा, ओर ६ बृहत् पादो दवाय भवां बड़ा सामगान निमित होता ही, दूसलिये षष्ठात् का पथकं व्णंन हृभा हो । बृहत् पाद् बृहती छन्द दारा निमित होता है बृहती वेदः” 1 एक ही छन्दोमयी रचना को विविध नाना स्वरो मेगायाजा सकता है । साम है स्वर । दस लिये सामवेद के मन्त्रोको हजार सामो बाह हनार वतो भं गाप ना चन क न हजार स्वरो में गाएजा तकने का निर्देश हा है । छान्दोग्य उप

English

This man let them deliver from Consumption which the Gods have sent. The father of these Herbs was Heaven, their mother Earth, the Sea their root.

अध्याय 8

श्लोक 8.11

नय॑ता॒मून् मृ॑त्युदूता॒ यम॑दूता॒ अपो॑म्भत ।प॒रः॒स॒ह॒स्रा ह॑न्यन्तां तृ॒णेढ्वे॑नान् म॒त्यं भ॒वस्य॑

nayatāmūn mṛtyudūtā yamadūtā apombhata | paraḥsahasrā hanyantāṃ tṛṇeḍhvenān matyaṃ bhavasya

हिन्दी अर्थ

या कण्डिका ४) । अथर्ववेद मेँ सामों के नाम प्रतिपादित है यथा, (बृहती) वृहती छन्द॒ (मात्रायाः परि) मावा से; (मात्रा) गौर मात्रा (मातुः श्रधि) निज परिमाण से (निर्मिता) निर्मित हुई है! (माया) बृहती छन्द मात्रामों को मापसंख्यासे भी निमित होता है--यह मन्त दारा कहते हैँ । मात्रा का निर्माण भी निज परिमाण द्वारा निश्चित होता है। का निर्माण करने वाली “मातली प्रकट होती है । मातली=मा

English

The Waters are the best, and heavenly Plants. From every limb of thine have they removed Consumption caused by sin.

अध्याय 8

श्लोक 8.12

सा॒ध्या एकं॑ जालद॒ण्डमु॒द्यत्य॑ य॒न्त्योज॑सा ।रु॒द्रा एकं॒ वस॑व॒ एक॑मादि॒त्यैरेक॒ उद्य॑तः

sādhyā ekaṃ jāladaṇḍamudyatya yantyojasā | rudrā ekaṃ vasava ekamādityaireka udyataḥ

हिन्दी अर्थ

है उसके विघटनमें बाधक हो रहौ है। (ततः) उस (मुतः) दुरस्थ का०ष८। सूु० ध्रथवंवेद-भाष्य २६५ रूप मे चमक रही है । यौः यद्यपि वैश्वानर श्नग्निसे चमकती है" तो भी ओर तारे, न वियुते चमकतीं ; अग्नि पार्थिव अग्नि का तो कहना ही क्था, अपितु उस परमेश्वरके चमकते हीये सब चमक रहे है । उसको चमक द्वारा ही यहु सब कुछ चमक रहा है। परमेश्वर कौ यह दिव्य

English

I speak to Healing Herbs spreading, and bushy, to creepers, and to those whose sheath is single, I call for thee the fibrous and the reed-like, and branching.

अध्याय 8

श्लोक 8.13

विश्वे॑ दे॒वाः उ॒परि॑ष्टादु॒ब्जन्तो॑ य॒न्त्वोज॑सा ।मध्ये॑न॒ घ्नन्तो॑ यन्तु॒ सेना॒मङ्गि॑रसो म॒हीम्

viśve devāḥ upariṣṭādubjanto yantvojasā | madhyena ghnanto yantu senāmaṅgiraso mahīm

हिन्दी अर्थ

होता है। परमेश्वरीय कामन से जगत् जब पदा होतार, तो जगत् की ज्योति भी परमेश्वरीय कामना सेही प्रकट होती है। अतः परमेश्वर ज्योतिमय है, यह् समा जा सकता है । इस लिये परमेश्वर को “आदित्य- व्णेम्"' भी कहा है (यजु ° ३१।१८) । दिन है 1 तथा प्रलयकाल मे सत्यलोकरूपी ब्रह्म मे वापिस चले जाते ट । --पर्यक) है सवंद्रष्टः ॥ (दमे षट् ऋषयः) ये ६ ऋ जते सृष्टिरथ को (युयुकषे) जोता है, (च) ओौरतू ही ( योग्यम्) जुतनं हणः) ब्रह्म का (पितरं) पिता हैः = क र (1 सखियों के लिये (यतिघा जितने कि हम हैवि) ˆ

English

Plants, dear to the Visve Devas, powerful, giving life to men.

अध्याय 8

श्लोक 8.14

वन॒स्पती॑न् वानस्प॒त्यानोष॑धीरु॒त वी॒रुधः॑ ।द्वि॒पाच्चतु॑ष्पादिष्णामि॒ यथा॒ सेना॑म॒मूं हन॑न्

vanaspatīn vānaspatyānoṣadhīruta vīrudhaḥ | dvipāccatuṣpādiṣṇāmi yathā senāmamūṃ hanan

हिन्दी अर्थ

तिमोँ द्वारा विराट् से उत्पन्न । ४ । य . विराट को ब्रहम का पिता कहाद। सलः, ज्ञात होता है, अत सुपर्णा सयुजा सखाया ) । सखा होने के करण ६ ऋषि परमेश्वर से । ॥ व ज्ञान सम्बन्धी अभिलाषा वालेहो जाते है, रौर सवं अ सप्ति" कहा भी हि। यथा “सप्त ऋषयः प्रति प्माकाश मे व्याप्त है। । ९, + ¢ ४

English

The conquering strength, the power and might which ye, victo- rious Plants, possess, Therewith deliver this man here from this Consumption, O ye Plants: so I prepare the remedy.

अध्याय 8

श्लोक 8.15

ग॒न्ध॒र्वा॒प्स॒रसः॑ स॒र्पान् दे॒वान् पु॑ण्यज॒नान् पितॄ॒न्।दृ॒ष्टान॒दृष्टा॑निष्णामि॒ यथा॒ सेना॑म॒मूं हन॑न्

gandharvāpsarasaḥ sarpān devān puṇyajanān pitṝn| dṛṣṭānadṛṣṭāniṣṇāmi yathā senāmamūṃ hanan

हिन्दी अर्थ

काल मे जब परमेश्वर सृष्टि मे उपस्थित हो जाता है तब यज्ञकमें भी का प्रलय करना भौर प॑दाकरना परमेश्वर काव्रतदहै, इसी कौ प्रेरणासे परमेदवर की उपस्थिति श्रावश्यक है । वारे ॥ स देखते है, (त्वे) कई (न) नहीं (एनाम्) इसे (पश्यन्ति) का नहीं। यह् रूपवती है दहस केरूप को योगी तो देखते है, श्रयोगी नहीं देखते । प्राणेन = हेतौ तृतीया (अष्टा० २।३।२३) । विराज् = राजु

English

The living Plant that giveth life, that driveth malady away, Arundhatr, the rescuer, strengthening, rich a sweets I call, to free this man from scath and

अध्याय 8

श्लोक 8.16

इ॒म उ॒प्ता मृ॑त्युपा॒शा याना॒क्रम्य॒ न मु॒च्यसे॑ ।अ॒मुष्या॑ हन्तु॒ सेना॑या इ॒दं कूटं॑ सहस्र॒शः

ima uptā mṛtyupāśā yānākramya na mucyase | amuṣyā hantu senāyā idaṃ kūṭaṃ sahasraśaḥ

हिन्दी अर्थ

, (कः) कौन (विराजः) सुष्टि मे विशेषतया प्रदीप्त हुई प्रकृति के है, (कः) कौन (ऋतून्) ऋतुधरमोँ के कालों को, (क उ) मौर कोन इस प्रकृति के (क्रमान्) क्रमों को, तेथा (कतिधा) कितनी वार यह (विदु- को, तथा (कतिधा ) कितने प्रकार या कितनी (व्युष्टीः) यह् विविध उषा मे चमकी - इन सब को सम्पक् रूप मे जानता है ।

English

harm. Hitherward let the sapient come, the friendly sharers o f my speech. That we may give this man relief and raise him from his evil plight.

अध्याय 8

श्लोक 8.17

घ॒र्मः समि॑द्धो अ॒ग्निना॒यं होमः॑ सहस्र॒हः ।भ॒वश्च॒ पृश्नि॑बाहुश्च॒ शर्व॒ सेना॑म॒मूं ह॑तम्

gharmaḥ samiddho agnināyaṃ homaḥ sahasrahaḥ | bhavaśca pṛśnibāhuśca śarva senāmamūṃ hatam

हिन्दी अर्थ

परमेवर है उस का पति । परमेश्वर की कामना किरम सष्टिको रच् यह् है रेतस् वीयं जिस का किं आधान वह प्रकृति के गभं मे करताहै, गौर सृष्टि पैदा होती है । यथा “कामस्तदग्रे समवतंताधि मनसो रेतः प्रथमं ऋतुधमं है जिनके होते स्त्री गभधारण करती है। कल्पम् = जितने काल तक सृष्टि बनी रहती है उतना काल, जिसे कि ब्राह्मदिन कहते है जोकि १००० यर्गोकाकालहोताहै। माकाश, आकाश से वायु, वायु से षग्नि, अग्नि से भपः, आपः से पृथिवी पृथिवी से भोषधियां, ओषधियों से अन्न, अश्न से रेतस्, रेतस् से पुरुष” (तै० कतिघा = सृष्टि कितनी हई है,-इसे भी कौन जानता है ।

English

Germ of the Waters, Agni’s food, Plants ever growing fresh and new, Sure, healing, bearing thousand names, let them be all collected here.

अध्याय 8

श्लोक 8.18

मृ॒त्योराष॒मा प॑द्यन्तां॒ क्षुधं॑ से॒दिं व॒धं भ॒यम्।इन्द्र॑श्चाक्षुजा॒लाभ्यां॒ शर्व॒ सेना॑म॒मूं ह॑तम्

mṛtyorāṣamā padyantāṃ kṣudhaṃ sediṃ vadhaṃ bhayam| indraścākṣujālābhyāṃ śarva senāmamūṃ hatam

हिन्दी अर्थ

विदुगघान् के दो अथं द, (१) दुग से विशिष्ट होना, इसके द्वारा सृष्टिकी होता है । (२) दूसरा अथं है “दुग्धरदित' होना, यह् अवस्था प्रलयकाल धाम = घाम फे अर्थं हैँ नाम, स्थान, जन्म ओर तेज । यतः यह् उषा- कालों मे चमकी है, इसलिये धाम का अथे तेज कियादहै। उषाश्रों द्वाराभी सृष्टिकालों को सूचित करिया है । सुक्त मे विविध पहैलियों का कथन हुमा है जिनके सुलभाने मे मतभेद सम्भव है । (हयम्) यह परमेश्वर-माता (एव) ही (सा या) वह है जोकि (प्रथमा)

English

Let Plants whose soul is water, girt with Avakās, piercing with their sharp horns expel the malady. Strong, antidotes of poison, those releasers, free from Varuna,

अध्याय 8

श्लोक 8.19

परा॑जिताः॒ प्र त्र॑सतामित्रा नु॒त्ता धा॑वत॒ ब्रह्म॑णा ।बृह॒स्पति॑प्रनुत्तानां॒ मामीषां॑ मोचि कश्चन

parājitāḥ pra trasatāmitrā nuttā dhāvata brahmaṇā | bṛhaspatipranuttānāṃ māmīṣāṃ moci kaścana

हिन्दी अर्थ

ह (जिगाय) इस ने सब पर विजय पाई हुई है, जैसे कि (नवगत् जनित्री ) २३०० श्रथवेवेद-भाष्य कीा० ८1 सुर € वध् पतिगृह मे जा कर यदि सन्तानोत्यादन करती है तो वहं पतिगृह की वंशवृद्धि कर पतिगृह मे मान पाती है, यह् पतिगृह पर विजय पाना है। बन्ध्यावधू पतिगृह मे मान नहीं पाती । सूर्येपरनी सं च॑रतः प्रजानती केंतुमतीं अजरे भूरिरेतसा ॥१२॥

English

And those that drive away Catarrh, and those that frustrate magic arts, let all those Plants come hitherward.

अध्याय 8

श्लोक 8.20

अव॑ पद्यन्तामेषा॒मायु॑धानि॒ मा श॑कन् प्रति॒धामिषु॑म्।अथै॑षां ब॒हु बिभ्य॑ता॒मिष॑वः घ्नन्तु॒ मर्म॑णि

ava padyantāmeṣāmāyudhāni mā śakan pratidhāmiṣum| athaiṣāṃ bahu bibhyatāmiṣavaḥ ghnantu marmaṇi

हिन्दी अर्थ

अधिकःरी सभी मनुष्य नहीं होते । समीप बैठनेमेवेही सशक्त हो सकते ह जो क्रि निज चित्तवृत्तियों का निरोध कर सकते हँ । सवं साधारण इसमें निःणक्तं होते हैँ । अतः वे केवलः स्तुति ओर प्राथंना ही कर.सक्ते है समान यानि है चुलोक । इसी मे दोनों उषाएं विचरती हँ । "योनिः गृह नाम'' (निधं ६।४) । दोनों उषाणएं स्यं की पली ह 1 सूयक माशे-भागे का० ८ । सू० € प्रथवेवेद-भाष्य १५१ चलती है श्नौर सायंकाल की उष।एं अर्थात् लालिमाणए सूं के अस्त होने के समनन्तर यलोक में कुछ काल तक चमकती है । इन का केतु अर्धात् मण्डा सूयं ही प्रतीत होता है।ये भ्रजरा है। इन पर बृढ़ापा नहीं आता, ये सदा शक्तिमती होती दँ । जब से सृष्टिरचना हुई ॥ है तवसे चमकती रहगीं । अतः ये प्रजरा है । अनुसार (तिः) तीन शक्तियां (मा अगुः) भाई .हुद है, (वयः ) तीन को (जिन्वति) प्रीणित करती है, (एका) दूसरी एक (ऊर्जम्) बल ओर प्राण के दाता भन्न कोप्रीणितकरती है, (एका) तीसरी एक (देवमूनमम्)

English

portion; Sweet is their foliage, and sweet their blossom, combined with sweetness is their taste of

अध्याय 8

श्लोक 8.21

सं क्रो॑शतामेना॒न् द्यावा॑पृथि॒वी सम॒न्तरि॑क्षं स॒ह दे॒वता॑भिः ।मा ज्ञा॒तारं॒ मा प्र॑ति॒ष्ठां वि॑दन्त मि॒थो वि॑घ्ना॒ना उप॑ यन्तु मृ॒त्युम्

saṃ krośatāmenān dyāvāpṛthivī samantarikṣaṃ saha devatābhiḥ | mā jñātāraṃ mā pratiṣṭhāṃ vidanta mitho vighnānā upa yantu mṛtyum

हिन्दी अर्थ

राष्ट की (रक्षति) रक्नाकरती है। र जब समग्र संसार परमेश्वर के दर्शाए मागे पर चलता है, भौर मनुष्य तप्तं करती है, इतना उत्पादन कर . देती है कि कोई प्राणी अन्नाभावका अनुभव नहीं करता “ऊक् ˆ अघ्ननाम"' (निषं० २।७) । तथा वर्षा, पृथिवी; ३०२ अथर्ववेद-भाष्य का०प८्। सु°्श

English

Amrit: food, fatness let them yield, with kine preceding. These Plants that grow upon the earth, whate’er their number and their size, Let these with all their thousand leaves free me from Death and misery.

अध्याय 8

श्लोक 8.22

दिश॒श्चत॑स्रोऽश्वत॒र्यो देवर॒थस्य॑ पुरो॒डाशाः॑ श॒फा अन्तरि॑क्षमु॒द्धिः ।द्यावा॑पृथि॒वी पक्ष॑सी ऋ॒तवो॒ऽभीश॑वोऽन्तर्दे॒शाः किं॑क॒रा वाक् परि॑रथ्यम्

diśaścatasro'śvataryo devarathasya puroḍāśāḥ śaphā antarikṣamuddhiḥ | dyāvāpṛthivī pakṣasī ṛtavo'bhīśavo'ntardeśāḥ kiṃkarā vāk parirathyam

हिन्दी अर्थ

कापाक करने लगती है, किसौ के घर की पाथिव प्रम्नि अन्नाभाव के हए (ऋषयः) ऋषियों ने (भ्रग्नीषोमौ) मनिनि मौर सोम की (म्रदधः) (आसीत्) थी उस की भी परिपुष्ट की । तथा (यजमानाय स्वः अम- बरहदकी = परमेश्वर की स्तुति करने वाली महती ऋक् । रूप मे कल्पित किया है । जैसे अस्मदादि पुरुषों के शरीर दो पाव वाले

English

May the Plants’ Tiger-amulet, protective, guardian from the curse, Beat off the brood of demons, drive all maladies afar from us.

अध्याय 8

श्लोक 8.23

सं॒व॒त्स॒रो रथः॑ परिवत्स॒रो र॑थोप॒स्थो वि॒राडी॒षाग्नी र॑थमु॒खम्।इन्द्रः॑ सव्य॒ष्ठाश्च॒न्द्रमाः॒ सार॑थिः

saṃvatsaro rathaḥ parivatsaro rathopastho virāḍīṣāgnī rathamukham| indraḥ savyaṣṭhāścandramāḥ sārathiḥ

हिन्दी अर्थ

श्रौर सोमादि हव्यपदाथं । इन दो पाण्वोँक मेल से यज्ञपुरुष बनता है। तथा जैसे हमारे शरीरो की आत्माएं हँ, जीवात्माएं, वैसे यज्ञपुरुष कौ होता है (१) अग्नि; (२) सोमादि हव्यपदारथे; (३) यज्ञ मेँ पूजनीया वयुष्टियो के (अनु) अनुसार (पञ्चदोहाः) पञ्चविध दोह ह, पृथिवी में उत्त्तियां ई, ओर पञ्चविध नमनों के अनुसार (पञ्च ऋतवः) पांच ऋतुं है । (पञ्च दिशः) पांच दिशाएं (पञ्चदशेन) १५ कलाओं अभि) एक पुथिवीलोक की भोर है फली हृरद ।

English

Before the gathered Plants they fly and scatter, as though a lion’s roar or fire dismayed them. Expelled by Plants, let men’s and kine’s Consumption pass from us to the navigable rivers. Emancipated from the sway of Agni, of Vaisvānara, go, covering the earth, ye Plants whose

अध्याय 8

श्लोक 8.24

इ॒तो ज॑ये॒तो वि ज॑य॒ सं ज॑य॒ जय॒ स्वाहा॑ ।इ॒मे ज॑यन्तु॒ परा॒मी ज॑यन्तां॒ स्वाहै॒भ्यो दु॒राहा॒मीभ्यः॑ ।नी॒ल॒लो॒हि॒तेना॒मून॒भ्यव॑तनोमि

ito jayeto vi jaya saṃ jaya jaya svāhā | ime jayantu parāmī jayantāṃ svāhaibhyo durāhāmībhyaḥ | nīlalohitenāmūnabhyavatanomi

हिन्दी अर्थ

गक्ष पर ६६१ अंश का कोण बनाती हुई सूयं की परिक्रमा, घडी कौ सूर्यो कके उतल्टे क्रम में अर्थात् दाएं से बाद गोर करती है । ६दका कोण पृथिवी का एक “नमन” है । इस “नमन” के साथ पृथिवी के भिन्न-मिन्न भागोके २०४ अथवेवेद-भाष्य का० ८ । सूर ६ “नमन'' अर्थात् भकाव भी, भिन्न-भिन्न कालो मे, सूये के संमृख होते रहते है । इन द्विकिध नमनो के कारण ऋतुओं का निर्माण होता है। वेदानुसार शिशिर ऋतुग्रों मे सर्दी लगभग एक समान होने के कारण इनका पार- स्परिक भेद अनुभूत नहीं होता, अतः इन दः ऋतुओओं को एक ऋतु मानकर द्वारा दिशाओं कौ संख्या भी पांच कही है, पुवं, पटिचिम, उत्तर, दक्षिणं पूवं मे होता है) इस प्रकार चन्द्रमाभी दिशओंका ज्ञापकहै। दिनिमें

English

ruler is Vanaspati. May these be pleasant to our heart, auspicious, rich in store of milk,

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।