Atharva Veda
6
अध्याय 6 / 20

Kanda 6

काण्ड 6

453 श्लोकभाग 8/8 · श्लोक 142.1–142.3

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 6

श्लोक 142.1

अन्नसमृद्धिः।१-३ विश्वामित्रः।वायुः।अनुष्टुप्।उच्छ्र॑यस्व ब॒हुर्भ॑व॒ स्वेन॒ मह॑सा यव ।मृ॒णी॒हि विश्वा॒ पात्रा॑णि॒ मा त्वा॑ दि॒व्याशनि॑र्वधीत्

annasamṛddhiḥ| 1-3 viśvāmitraḥ| vāyuḥ| anuṣṭup| ucchrayasva bahurbhava svena mahasā yava | mṛṇīhi viśvā pātrāṇi mā tvā divyāśanirvadhīt

हिन्दी अर्थ

हन महानु मावों फा हम कृतक्ञतापू्वेक धन्यवाद करते ह ओरभ्राशा करते ह कि वेदभक्त आयेजन इस महक्त्वपूणं कायं को पूर्णं॑करने में हरे यथोचित सहयोग प्रदान करेगे । हस भाग पर केवल कागज ओर छपाई पर ही १२ सहल रपरया व्वय पुस्तक लागत १८ रुपये पडती है । रभो काण्ड ५-४ छप रहे ह गौर ३-२-१३ काण्ड छापने है) प्रथम

English

A blessing on cattle Spring high, O Barley, and become much through thine own magnificence: p. a269 Burst all the vessels; let the bolt from heaven forbear to strike thee down.

अध्याय 6

श्लोक 142.2

आ॒शृ॒ण्वन्तं॒ यवं॑ दे॒वं यत्र॑ त्वाच्छा॒वदा॑मसि ।तदुच्छ्र॑यस्व॒ द्यौरि॑व समु॒द्र इ॑वै॒ध्यक्षि॑तः

āśṛṇvantaṃ yavaṃ devaṃ yatra tvācchāvadāmasi | taducchrayasva dyauriva samudra ivaidhyakṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

स्मून ४० सहस्र रुपया व्यय होगा, जो हमारे लिये एक बडी समस्या है । करने में मुक्तहस्त होकर सहायता करं प्रदान कियाहै। हमारी परमपिता परमेद्वरसे यही प्राथनादहै कि प्रम , अ्रन्थकत्ताका संलिप्त परिचेय एक हैष्ड' कौ मानोपाधि से विभूषित ह) सन् १९१९ के दीक्षारत समारोह

English

As we invite and call to thee, Barley, a God who heareth us, Raise thyself up like heaven on high and be exhaustless as the sea.

अध्याय 6

श्लोक 142.3

अक्षि॑तास्त उप॒सदोऽक्षि॑ताः सन्तु रा॒शयः॑ ।पृ॒णन्तो॒ अक्षि॑ताः सन्त्व॒त्तारः॑ स॒न्त्वक्षि॑ताः

akṣitāsta upasado'kṣitāḥ santu rāśayaḥ | pṛṇanto akṣitāḥ santvattāraḥ santvakṣitāḥ

हिन्दी अर्थ

दष भोर रसायन शास्म (केमिस्टी) मे, तथा स्वयोग में प्रथम , १ भापको ४ सुवणेपदक श्रौर १ र॑जतपदकप्राप्त हुए । आप । ॥ ॥॥॥॥ की विप्रवविद्यालयमे समय-समय पर माप रसायन, ॥॥॥॥ न घास्य पढ़ते र मौर सन् १६४२ माच मे वहां , अयवेवेद-भाष्य काण्ड २८; १८-१६; १४-१५-१६-१७; ११.१२-१३; ६-१०; ७-८; छः खण्ड । सात्तवां खण्ड काण्ड ६ । १२. ऋग्देदाधिभष्यमूमिका सरल अध्ययन

English

Exhaustless let thine out-turns be, exhaustless be thy gathered heaps, Exhaustless be thy givers, and exhaustless those who eat of thee. 101

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।