अध्याय 6
श्लोक 82.1
जायाकामना।१-३ भगः।इन्द्रः।अनुष्टुप्।आ॒गच्छ॑त॒ आग॑तस्य॒ नाम॑ गृह्णाम्याय॒तः ।इन्द्र॑स्य वृत्र॒घ्नो व॑न्वे वास॒वस्य॑ श॒तक्र॑तोः
jāyākāmanā| 1-3 bhagaḥ| indraḥ| anuṣṭup| āgacchata āgatasya nāma gṛhṇāmyāyataḥ | indrasya vṛtraghno vanve vāsavasya śatakratoḥ
हिन्दी अर्थ
"राज्यकर' का प्रबन्ध करता है। तथा राष्ट का सेनानायक (यजु° १७। का० ६ ?अनु० । सु° ८८ अथवेवेद-भाष्य १५५ (घ्र.वा) घ्व है (यौः) चूलोक, (घरवा) घ्रूब है (पुथिवो) पृथिवो गतिमान् है। (घूवाषः) धक रहै (दमे पवंताः) ये पवेत, ( घ्व) घ्व द (अयय्) यह् (विशाम् राजा) प्रजाओंका राजा। धरुवं ते राजा वरुणौ धवं देवो बृहस्पर्तिः
English
Let Varana the heavenly tree here present keep disease away. The Gods have driven off Decline that entered and possessed this man.