Atharva Veda
6
अध्याय 6 / 20

Kanda 6

काण्ड 6

453 श्लोकभाग 4/8 · श्लोक 61.1–81.3

पूर्ण अध्याय पाठ65 श्लोक

अध्याय 6

श्लोक 61.1

विश्वस्रष्टा।१-३ अथर्वा।रुद्रः।१ त्रिष्टुप्, २-३ भुरिक्।मह्य॒मापो॒ मधु॑म॒देर॑यन्तां॒ मह्यं॒ सूरो॑ अभर॒ज्ज्योति॑षे॒ कम्।मह्यं॑ दे॒वा उ॒त विश्वे॑ तपो॒जा मह्यं॑ दे॒वः स॑वि॒ता व्यचो॑ धात्

viśvasraṣṭā| 1-3 atharvā| rudraḥ| 1 triṣṭup, 2-3 bhurik| mahyamāpo madhumaderayantāṃ mahyaṃ sūro abharajjyotiṣe kam| mahyaṃ devā uta viśve tapojā mahyaṃ devaḥ savitā vyaco dhāt

हिन्दी अर्थ

देवा मागं यथा पूव सं जानाना उपाधते ॥१॥ मन (सं जानताम्) एक विध सकल्पो वाले हों । (यथा) जंसे (पूवं) विद्या से सम्पूणं (देवाः) विद्वान् (सं जानानाः) एक मत हो कर (भागम्) भज- नीय परमेएवर का (उपासते) उपासना करते्ह वेसेतुम भी किया (समितिः) राजसभा (समानो) एक हो, (व्रतम्) ब्रत (समानम्) एकरूप (जुहोमि) मे यन्न करता हुं, माहुति्यांः देता हू, (समानम) तुम्हारा एक- विध (चेतः) चिन्तनदहो (अभि सं विशध्वम्) एक चित्त दौ कर तुम राजसभा मे प्रवेश किया करो। १. पथवा मन्त्रः वेदिक विचार, वेदानुकूल विचार ।

English

The angry spirit hath relaxed: loose are the arms that act with mind. Do thou, destroyer, overcome and drive these foemen’s might away, and then bring opulence to us.

अध्याय 6

श्लोक 61.2

अ॒हं वि॑वेच पृथि॒वीमु॒त द्याम॒हमृ॒तूंर॑जनयं स॒प्त सा॒कम्।अ॒हं स॒त्यमनृ॑तं॒ यद् वदा॑म्य॒हं दैवीं॒ परि॒ वाचं॒ विश॑श्च

ahaṃ viveca pṛthivīmuta dyāmahamṛtūṃrajanayaṃ sapta sākam| ahaṃ satyamanṛtaṃ yad vadāmyahaṃ daivīṃ pari vācaṃ viśaśca

हिन्दी अर्थ

३. राजसमा मे प्रवेश फर, कार्यारम्म करने से पूवं, समान हवि दारा यज्ञ ११६ करणवेवेद-भाष्य कां० ६॥ गनु° ७। सु° ६५. एकरूप हो । हादिक भावनाएं एकरूप हों । (वः) तुम्हारा (मनः) मनन (समानम्) एकरूप (अस्तु) हा, (यथा) जिस प्र॑कार से कि (वः) (मनोयुजा = मनोयुजौ) विचयेषी मनो द्वारा प्रगृक्त हुए (वाहु) दोनों बाहु (अव) नीचे हो जांय। (पराशरः “पर” अर्थात् शत्रुओं का “आ” पूर्णरूप

English

The shaft for handless fiends which, Gods! ye cast against the handless ones,

अध्याय 6

श्लोक 61.3

अ॒हं ज॑जान पृथि॒वीमु॒त द्याम॒हमृ॒तूंर॑जनयं स॒प्त सिन्धू॑न्।अ॒हं स॒त्वमनृ॑तं॒ यद् वदा॑मि यो अ॑ग्नीषो॒मावजु॑षे॒ सखा॑या

ahaṃ jajāna pṛthivīmuta dyāmahamṛtūṃrajanayaṃ sapta sindhūn| ahaṃ satvamanṛtaṃ yad vadāmi yo agnīṣomāvajuṣe sakhāyā

हिन्दी अर्थ

(अदय) हिसित भर, (अधा अथा) तत्पश्चात् (रयिम्) उनके धन॑ को (नः) हमे (आ कृधि) प्राप्त करा । कां० ६.1 अनु° ७ । 'सू° ६६ अथववेद-भाष्यः ११७ प्रयोग पुमः भ क. सरके, परन्तु उनके जीवनो का अपहरण मँ नहीं करता । मन्व (१) मे भी बाहुं का कथन हुमा है, वहां केवल श््रुओं को नीचा कर उन के बाहुभों को निकम्मे कर देने का मभिप्रायहै,, उन्हे काटने का किया । हविषा द्वारा “सैनिक हविः” प्रतीत होते है, “अहम्” द्वारा सेना का मुख्याधिकारी है, जिे बाहु-छेदनरूपी दण्ड प्रदान करभे का अधिकार

English

With this, in shape of sacrifice, I rend the arms of enemies. Indra made first for Asuras the shaft designed for handless foes: Victorious shall my heroes be with Indra as their constant friend.

अध्याय 6

श्लोक 62.1

पावमानम्।१-३ अथर्वा।रुद्रः, वैश्वानरः, वातः, द्यावापृथिवि।त्रिष्टुप्।वै॒श्वा॒न॒रो र॒श्मिभि॑र्नः पुनातु॒ वातः॑ प्रा॒णेने॑षि॒रो नभो॑भिः ।द्यावा॑पृथि॒वी पय॑सा॒ पय॑स्वती ऋ॒ताव॑री य॒ज्ञिये॑ न पुनीताम्

pāvamānam| 1-3 atharvā| rudraḥ, vaiśvānaraḥ, vātaḥ, dyāvāpṛthivi| triṣṭup| vaiśvānaro raśmibhirnaḥ punātu vātaḥ prāṇeneṣiro nabhobhiḥ | dyāvāpṛthivī payasā payasvatī ṛtāvarī yajñiye na punītām

हिन्दी अर्थ

। " हस्वकार पथमं तेईस्तमघुरेभ्यः । पौषकों के लिये (नैहस्तम्) निहत््येपन का (चकार) दण्ड दिया । (मेदिना) सहायता द्वारा (मम) मुज्ञ सेनाधिपति के (सत्वानः) . शक्तिशाली सेनिक -=जो केवल जीवन का उेश्य भाणपोषण मात्र मानते है. अतः देवविरोधी हवि द्वारा (८: पं सेनाधिपति, (वृश्चामि) काटता हूं । (देवाः = दिवु

English

A charm for the destruction and plunder of enemies Handless be every foeman who assaileth, they who with missiles come to fight against us!

अध्याय 6

श्लोक 62.2

वै॒श्वा॒न॒रीं सू॒नृता॒मा र॑भध्वं॒ यस्या॒ आशा॑स्त॒न्वोऽवी॒तपृ॑ष्ठाः ।तया॑ गृ॒णन्तः॑ सध॒मादे॑षु व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒नाम्

vaiśvānarīṃ sūnṛtāmā rabhadhvaṃ yasyā āśāstanvo'vītapṛṣṭhāḥ | tayā gṛṇantaḥ sadhamādeṣu vayaṃ syāma patayo rayīnām

हिन्दी अर्थ

रहित कर दि, “-च्रओं के लिये, देवाः) है हमारे विजिगीषु सेनार्धिका- शतुओं के ˆ गहजं को, (अनेन) इस (हविषा) यृद्ध-यज्ञ साघक सम॑पयेनदर महता वधेन दरात्वषामघहारो विविधः ॥१॥ । अरि वजय प्राप्त कर शत्रुओं को.एक वार जर हथि- अस्तु) निहत्था हो जाय, हेधिहारो से रहित हो जाय, (ये) जौ शतु कि रियो ! तुम ¦ नम्) निर्या करने वाले (यम्) जिस (शरम्) हसक आयुध के साय श्ट (समपेय) सम्बद्ध कर, (एषाम्) इन शतुजो मे ( अघं-

English

Dash them together with great slaughter, Indra! and let their robber chief run pierced with arrows. Ye who run hither bending bows, brandishing swords and cast- ing darts.

अध्याय 6

श्लोक 62.3

वै॒श्वा॒न॒रीं वर्च॑स॒ आ र॑भध्वं शु॒द्धा भव॑न्तः॒ शुच॑यः पाव॒काः ।इ॒हेड॑या सध॒मादं॒ मद॑न्तो॒ ज्योक् प॑श्येम॒ सूर्य॑मु॒च्चर॑न्तम्

vaiśvānarīṃ varcasa ā rabhadhvaṃ śuddhā bhavantaḥ śucayaḥ pāvakāḥ | iheḍayā sadhamādaṃ madanto jyok paśyema sūryamuccarantam

हिन्दी अर्थ

ओर इस बाहुं को मै काटदेताहू, ताकिवे हथि रोका ११८ अथववेवेद-भाष्य का० ६ । भनु° ७। पू ६७ अघहारःन्पापी, जो कि सेनानायकं है । द्रातु=द्रा कत्सायां गवौ (तन्वानाः) धनुषो को ताने हुए, (आयच्छन्तः) धनुषो पर वाण चदा कर उन्हे खे चते हृए, (च) ओर (अस्यन्तः) वाणो को हेम पर फकते हुए (ये) जो तुम (शत्रवः) हि शत्रु ! (धावथ) फिस्भी भय के कारण से रहित कर दिये गए हो; (इन्द्रः) हमारा सच्राट् (अद) आजं (वः तुम्हारी (पराशरीत्) पराङ्मुख हओं की हिसा करे । परा, अशरीत्;

English

Handless be ye, O enemies! Let Indra mangle you to-day. Handless be these our enemies! We enervate their languid limbs.

अध्याय 6

श्लोक 63.1

वर्चोबलप्राप्तिः।१-४ द्रुणः।१ निर्ऋतिः, २ यमः, ३ मृत्युः, ४ अग्नि।१-3 जगती, २ अतिजगतीगर्भा, ४ अनुष्टुप्।यत् ते॑ दे॒वी निरृ॑तिराब॒बन्ध॒ दाम॑ ग्री॒वास्व॑विमो॒क्यं यत्।तत् ते वि ष्या॒म्यायु॑षे॒ वर्च॑से॒ बला॑यादोम॒दमन्न॑मद्धि॒ प्रसू॑तः

varcobalaprāptiḥ| 1-4 druṇaḥ| 1 nirṛtiḥ, 2 yamaḥ, 3 mṛtyuḥ, 4 agni| 1-3 jagatī, 2 atijagatīgarbhā, 4 anuṣṭup| yat te devī nirṛtirābabandha dāma grīvāsvavimokyaṃ yat| tat te vi ṣyāmyāyuṣe varcase balāyādomadamannamaddhi prasūtaḥ

हिन्दी अर्थ

अथँषामिन्दर वेदांसि श्तश्षो वि भ॑जामहै ॥३॥ हे सञ्राट् ! (एषाम्) इन के (शतशःवेदां घि) संकडों प्रकारके धनो को हषक्षये (भ्वादिः) । वेदः)धननाम निघं° २।१०) (इन्रः) सम्राट (च) ओौर (पूषा) पोषणाधिकारी (सर्वतः) सबं भय कां०,६ । अनु० ७। सू०६७ अथववेद-भाष्य

English

So let us part among ourselves, in hundreds, Indra! all their wealth. A charm for the destruction and plunder of enemies Indra and Pūshan have gone forth along the ways on every side.

अध्याय 6

श्लोक 63.2

नमो॑ऽस्तु ते निरृते तिग्मतेजोऽय॒स्मया॒न् वि चृ॑ता बन्धपा॒शान्।य॒मो मह्यं॒ पुन॒रित् त्वां द॑दाति॒ तस्मै॑ य॒माय॒ नमो॑ अस्तु मृ॒त्यवे॑

namo'stu te nirṛte tigmatejo'yasmayān vi cṛtā bandhapāśān| yamo mahyaṃ punarit tvāṃ dadāti tasmai yamāya namo astu mṛtyave

हिन्दी अर्थ

बाकि शतरगों की (अमूः) वे (सेनाः) सेनाए, (अदय) आज या अब सब मागो का निरीक्षण स्वयं करं या करवाए फि शत्रु सेनाएं किस-किस मागे से आक्मण कर सकती है, मौर किस-किस मागं सेः अपनी सेना को बायुध मौर खाद्य सामग्री पहुंचा जा सकती है । हस का निरीक्षण कर, यथोचित प्रबन्ध करें, ताकि शतु सेनाओं का सब प्रयत्न विफल हौ जाय । (भमिधाः) है तमो ! (मूढाः चरत) तुम जयके उपायकेज्ञानसे रहित हुए विचरो, (इव) जसे (अशीर्षाणः) सिरकटे (अहयः) साप दध र्-उघर समुढुकते रहते ह । (अग्निमूढानाम्) हमारे अग्रणी की को मारदेनेको आज्ञादे। शेष सेनिक मारने न चाहिए । अथवा (अजिनम्) चमो को (एषु) इनं निज संनिकोंने (शा नद्य) बान्ध

English

To-day those hosts of enemies must flee bewildered far away. Ye foes, come hitherward dismayed like serpents when their heads are gone.

अध्याय 6

श्लोक 63.3

अ॒य॒स्मये॑ द्रुप॒दे बे॑धिषे इ॒हाभिहि॑तो मृ॒त्युभि॒र्ये स॒हस्र॑म्।य॒मेन॒ त्वं पि॒तृभिः॑ संविदा॒न उ॑त्त॒मं नाक॒मधि॑ रोहये॒मम्

ayasmaye drupade bedhiṣe ihābhihito mṛtyubhirye sahasram| yamena tvaṃ pitṛbhiḥ saṃvidāna uttamaṃ nākamadhi rohayemam

हिन्दी अर्थ

(अभयम् कृधि) मौर हमे भय रदित कर । (अमित्रः) शतु (पराङ्) २. पदपाठ मेँ “भियं कृधि” पाठ है । अर्थात् शत्रु कै लिये मयैदा कर।वे यह् भान कर भयमीत हो कि यै हरिण कोर गदूमृत शषच्छ्यां है जो कि युद्ध कर रही ये हमारा साक्ष कर देगी । अतः वे गुद स्थल से भाग ओय । कां० ६। अनु० ७ । सु ६८ अथवंवेद-भाष्य १२१ म २ कि उदकं को उष्ण करके लाता है 1 अन्तरिक्ष कों वापं उदक को उष्ण १२० अथवेवेद-माष्य॒का० ६। गनु० ७। सू° दन

English

Let Indra slay each bravest one of you whom Agni hath con- fused. Gird thou a bullock’s hide on these, make those as timid as the deer. Let the foe flee away, and let his kine come hither-ward to us.

अध्याय 6

श्लोक 63.4

संस॒मिद् यु॑वसे वृष॒न्नग्ने॒ विश्वा॑न्य॒र्यृ आ।इ॒डस्प॒दे समि॑ध्यसे॒ स नो॒ वसू॒न्या भ॑र

saṃsamid yuvase vṛṣannagne viśvānyaryṛ ā| iḍaspade samidhyase sa no vasūnyā bhara

हिन्दी अर्थ

मादित्य, श्र मौर वसु भो ४८, ३६ ओर २४ वर्षो के स्नातक है, जोकि बरह्मचयश्िम मे गुरेरूप हैँ । चिकषैत्सतु भ्रनाप॑तिदीर्थायुखाय चक्ष॑से ॥२॥ रूपा, आचाययेपत्नी (एमष्शरु) मोछठो का (वपतु) छदन करे, आपः उन्दन्तु) परस्पर सहयोग से मुण्डन करो । ब्रह्मचारो के उपनयन कमे में इस सूक्त का विनियोग हमा है (कौशिक सूत्र ५५।१-३) । उपनयन का अथं है “समीप लाना” । आचाय अशरीरो देवता विशेष नहीं । (अथवं० ८।२।१७) मे सायणाचाये ने कहा ।

English

A charm to accompany the shaving of the beard Savitar hath come hither with the razor: come thou, O Vāyu, with the heated water.

अध्याय 6

श्लोक 64.1

सांमनस्यम्।१-३ अथर्वा।सांमनस्यम्, १ विश्वे देवाः।अनुष्टुप्, (२ त्रिष्टुप्)।सं जा॑नीध्वं॒ सं पृ॑च्यध्वं॒ सं वो॒ मनां॑सि जानताम्।दे॒वा भा॒गं यथा॒ पूर्वे॑ संजाना॒ना उ॒पास॑ते

sāṃmanasyam| 1-3 atharvā| sāṃmanasyam, 1 viśve devāḥ| anuṣṭup, (2 triṣṭup)| saṃ jānīdhvaṃ saṃ pṛcyadhvaṃ saṃ vo manāṃsi jānatām| devā bhāgaṃ yathā pūrve saṃjānānā upāsate

हिन्दी अर्थ

जोकिकेण छेदन को जानता है,-(वरुणस्थ) वरण-कर्ता आचार्यं के है कि "हे देव सवितः, संस्कारकपुरुष, स्वं “वप्ता” केशानां छेता “नापितः” मे सायणाचायं॒ने “सविता” को “पुरुष” तथा “नापित” कहा है । होता है जो कि क्षुरेण" उस्तरे के साथ ¦ “भा अगन्” भाया है । १२२ मथवेवेद-भाष्य का० ६। अनु०७। सू० ६ ..

English

One-minded let Ādityas, Rudras, Vasus moisten the hair: shave ye who know King Soma. Let Aditi shave the beard, and let the Waters bathe it with their strength: p. a232 Prajāpati restore his health for sight and days of lengthened life!

अध्याय 6

श्लोक 64.2

स॒मा॒नो मन्त्रः॒ समि॑तिः समा॒नी स॑मा॒नं व्र॒तं स॒ह चि॒त्तमे॑षाम्।स॒मा॒नेन॑ वो ह॒विषा॑ जुहोमि समा॒नं चेतो॑ अभि॒संवि॑शध्वम्

samāno mantraḥ samitiḥ samānī samānaṃ vrataṃ saha cittameṣām| samānena vo haviṣā juhomi samānaṃ ceto abhisaṃviśadhvam

हिन्दी अर्थ

वपत) इस केशछछठेदन को केरो ताकि विद्याकी समाप्ति के अनन्तर सुरायां सिच्यमानायां कोले मधु तन्मयि ॥१॥ (गोषु) गौभों मे (यत्) जो (यशः) यश है; (सिच्यमानायाम्) सीचे जाने वाले (सुरायाम्) शुद्ध जल में, (कीलाले') अन्न में (मधु) जो मिठास दहै (तत्) वह् सब (मयि) मूक्ञमेहो। पवत मे यश है दुता । भरगराटो अर्थात् अरों षाले घराटोंमे यश है अन्न को पोसना; यहां केवल पीसना भथ अभिप्रेत है, कुकर्मो तथा व्यसनो को प१।स डालना । “मरो वाले राट” ह “पनचक्कियां” जो कि पानीके वेग द्वारा चलतीदहैँ। हिरण्यमें यश दहे हूदयरमणीयता, सबके हृदयो को रमणीय होना । गौओंमे यश द निज दुग्ध द्वारा पालन-पोषण, कृषि कममे सीचा गना, मीठा उदक मीठे अखका उत्पादनं करेतादहै,

English

The razor used by Savitar, for shaving, who knoweth Varuna and royal Soma, Even with this shave ye this man, O Brāhman. Let him be rich in horses, kine, and children.

अध्याय 6

श्लोक 64.3

स॒मा॒नी व॒ आकू॑तिः समा॒ना हृद॑यानि वः ।स॒मा॒नम॑स्तु वो॒ मनो॒ यथा॑ वः॒ सुस॒हास॑ति

samānī va ākūtiḥ samānā hṛdayāni vaḥ | samānamastu vo mano yathā vaḥ susahāsati

हिन्दी अर्थ

खारा-उदक कृषि कमं मे न सींचना चाहिय । भारतीय दशन शास्त्रों के अनुसार शुद्ध जलकागृणहै माधुयं । कीलाल दहै अघ्न (निघं० २।७) प्रकरणानुसार मधुर अस्र, न कि खटा कसला मन्न) सायणाचायं ने “भरगराटेषु” के निम्नलिखित अथं किये हँ “रथचक्रा- , का० ६। अनु ७। सु° ६९ अथर्ववेद-भाष्य १२२ वयवाः कोलका. अराः । तान् गिरति आत्मना संश्नेषयतीति अरगरो (मा) मक्षे (सारघेण) सरघा अर्थात् मधुमक्खी के ( मधुना) मधु सदश (जनान् अनु) सब जनों के प्रति, अनुकूललूप, (भगेस्वतीम्) माधय के

English

A priest’s prayer for power and glory Mine be the glory in the hill, in vales, in cattle, and in gold, Mine be the sweetness that is found in nectar and in flowing wine!

अध्याय 6

श्लोक 65.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अथर्वा।(चन्द्रमाः) इन्द्रः, पराशरः।अनुष्टुप्, १ पथ्यापङ्क्तिः।अव॑ म॒न्युरवाय॒ताव॑ बा॒हू म॑नो॒युजा॑ ।परा॑शर॒ त्वं तेषां॒ परा॑ञ्चं॒ शुष्म॑मर्द॒याधा॑ नो र॒यिमा कृधि

śatrunāśanam| 1-3 atharvā|(candramāḥ) indraḥ, parāśaraḥ| anuṣṭup, 1 pathyāpaṅktiḥ| ava manyuravāyatāva bāhū manoyujā | parāśara tvaṃ teṣāṃ parāñcaṃ śuṣmamardayādhā no rayimā kṛdhi

हिन्दी अर्थ

(भयो) तथा (यशः)कीति को, (अथो) तथा (यज्ञस्य) यज्ञ का (यत्) जो (पयः) सारभूत फल है ५( तत् ) उप को प्रजापतिः ) प्रजाभों का स्वामी परमेश्वर (मयि) मृक्षमे (दहतु) सुदुढ़ खूप में स्थापित करे, (दिवि) द्युलोक में (इव) . .जसे (याम्) द्यौ को उसने स्थापित किया हृभा है, सुदृढ शूप में । १२४ सथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० ७। सू० ७० (१-३) । काड्धायनः । अघ्न्या अगतौ । (यथा) जिस प्रकार मांसाहारी को (मांसम्) मांस, (यथा) जसे सुरापायी को (सुरा) सुरा, (यथा )जेसे कितव को (अधिदेवने) यूतकमं म (अक्षाः) पासे प्रिय होते है, (यथा) जंसे (वृषण्यतः पुसः) कामाभिलाषी है (एवा) इसी प्रकार (अघ्न्ये) है अह्ननीये गौ (ते मनः) तेरा मन

English

With your delicious honey balm me, Asvins, Lords of splendid light! That clear and resonant may be the voice I utter to mankind.

अध्याय 6

श्लोक 65.2

निर्ह॑स्तेभ्यो नैर्ह॒स्तं यं दे॑वाः॒ शरु॒मस्य॑थ ।वृ॒श्चामि॒ शत्रू॑णां बा॒हून॒नेन॑ ह॒विषा॒हम्

nirhastebhyo nairhastaṃ yaṃ devāḥ śarumasyatha | vṛścāmi śatrūṇāṃ bāhūnanena haviṣāham

हिन्दी अर्थ

तथा पदनाम (निषं० ५।४) । पदनाम का मर्भिप्रायहै “योगिकनाम” । कर सकती । गौ का निज जात वत्स के साथ स्वाभाविक प्रम होतादहीहै, है । यथा “अन्यौ अन्यमभिजातमिवाण्न्या” (अथवं० ३।३०।१) 1 भतः गौ मौर गृहिणी दोनों ही सन्तानोत्पादन करतीं तथा सन्तानों को निज दुग्ध पालन-पोषण मे तेरा विशेष ध्यान होना चाहिए । “मातृमान् पुरुषो वेद" '

English

In me be strength, in me be fame, in me the power of sacrifice: Prajāpati establish this in me as firm as light in heaven! A benediction on cow and calf

अध्याय 6

श्लोक 65.3

इन्द्र॑श्चकार प्रथ॒मं नै॑र्ह॒स्तमसु॑रेभ्यः ।जय॑न्तु सत्वा॑नो॒ मम॑ स्थि॒रेणेन्द्रे॑ण मे॒दिना॑

indraścakāra prathamaṃ nairhastamasurebhyaḥ | jayantu satvāno mama sthireṇendreṇa medinā

हिन्दी अर्थ

चा रों दृष्टान्त यद्यपि हीनोपमाखूप है, परुनतु ्रमासक्ति के दणनि मे उप- का० ६। अनु० ७। सू० ७० भथववेद-भाष्य १२५ (यथा) जसे (हस्ती) हाथी (हस्तिन्याः) हिनो के (पदेन) पग के अनुकल (पदम्) निज पद को प्रेमवश हुजा ( उदयुजे) उद्-यक्त करता टे, चलते समय उठाता है, (यथा) जेसे (वृषण्यतः) कामाभिलाषी (पुसः) “त” का लोप तथा छान्दस विकरण का लुक् (सायण) । (यथा) जसे (प्रधिः) रथचक्र की नेमि, (यथा) जेसे (उपधिः) शैमि से सम्बद्ध रथचक्र का चेरा, वलय, जिसके साथ “अरे” लगे रहते है;

English

As wine associates with flesh, as dice attend the gaming-board, As an enamoured man’s desire is firmly set upon a dame,

अध्याय 6

श्लोक 66.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अथर्वा।इन्द्रः।अनुष्टुप्, १ त्रिष्टुप्।निर्ह॑स्तः शत्रु॑रभि॒दास॑न्नस्तु॒ ये सेना॑भि॒र्युध॑मा॒यन्त्य॒स्मान्।सम॑र्पयेन्द्र मह॒ता व॒धेन॒ द्रात्वे॑षामघहा॒रो विवि॑द्धः

śatrunāśanam| 1-3 atharvā| indraḥ| anuṣṭup, 1 triṣṭup| nirhastaḥ śatrurabhidāsannastu ye senābhiryudhamāyantyasmān| samarpayendra mahatā vadhena drātveṣāmaghahāro vividdhaḥ

हिन्दी अर्थ

१२६ अथवेवेद-भाष्य का० ६ । अनु० ७। सू° ७१ गौ, बकरी, भेड (यद् एव) जो ही (किच) कुच्छ (अहम्) भेन (प्रति जग्रह) दानरूप मे ग्रहण क्रिया है, (तत्) उस सब को (होता) दाता द्वारा उत्तम विधि पूवक दिथा हुमा (कृणोतु) करे । नामक परमेश्वरसे प्रार्थना करता क्रि आगे से सदा सुहत होने वाला की भी अभिलाषा सूचित कौ है, ताकि व्यक्ति विवेकपूर्वेक अन्न

English

So let thy heart and soul, O Cow, be firmly set upou thy calf. As the male elephant pursues with eager step his female’s track, As an enamoured man’s desire is firmly set upon a dame,

अध्याय 6

श्लोक 66.2

आ॒त॒न्वा॒ना आ॒यच्छ॒न्तोऽस्य॑न्तो॒ ये च॒ धाव॑थ ।निर्ह॑स्ताः शत्रवः स्थ॒नेन्द्रो॑ वोऽद्य परा॑शरीत्

ātanvānā āyacchanto'syanto ye ca dhāvatha | nirhastāḥ śatravaḥ sthanendro vo'dya parāśarīt

हिन्दी अर्थ

एक गोल फलक नम्य होता है, जिस कैसा अरोका एकं किनारा सम्बद्ध रहता है, ओर दूसरा किनारा पिये कौ प्रधि अर्थात् परिधिके साथ लगा रहता है । मौर गोलाकार परिधि प्रधि मी गोलाकार में कुकौ हुई ऽउपधियों अर्थात् पुदिव्यो, अवयवो के जोह द्वारा बनी होकर इन पुद्ठ्यों उपधियों के साथ कां० ६ । अनु ७। सू० ७१ अथववेद-भाष्य १२७ खा सके, ओौर विवेकपूवंक प्रतिग्रह कर सके । मनुनेतो कहाहै कि यन्मां हुतमहूंतमाजगामं दन्तं पितृभिरलुंमतं मनुष्यः । मनः) मेरा मन (इव) मानो (उद् रारजोति) उद्धषित हृभाहै, या राग उत्तम यज्ञशेषरूप (कृणोतु) करे ।

English

So let thy heart and soul, O Cow, be firmly set upon the calf.

अध्याय 6

श्लोक 66.3

निर्ह॑स्ताः सन्तु॒ शत्र॒वोऽङ्गै॑षां म्लापयामसि ।अथै॑षामिन्द्र॒ वेदां॑सि शत॒शो वि भ॑जामहै

nirhastāḥ santu śatravo'ṅgaiṣāṃ mlāpayāmasi | athaiṣāmindra vedāṃsi śataśo vi bhajāmahai

हिन्दी अर्थ

बन्न तो हुतरूप है । उसके ग्रहण करने से मन उदीप्त होता है, उद्धषित होता है उद् राजु दीप्तौ, भौर यज्ञ किये विना, परन्तुफिरभी सवं साधारण मनुष्यों दवारा अनुज्ञात अन्न, जोकि सेवन करने वाले को ससारिकयाधनकेराग से रञ्जितकर देताहै। इन दोनों प्रकारके १ अथववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ७। समूु० ७२ छन 1 बतु ७.। पुर ७९ अयुननेवन्ाश्य १८२९ यह् मनुष्य का स्वभाव है कि वह् अनुचित काम करके भी उस कफे † ओौर वह् अनुचित कर्मो के करने से उपरत हो जाता. है ।

English

Close as the felly and the spoke, fixt as the wheel-rim on the nave, As an enamoured man’s desire is firmly set upon a dame, So let thy heart and soul, O Cow, be firmly set upon thy calf.

अध्याय 6

श्लोक 67.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अथर्वा।इन्द्रः।अनुष्टुप्।परि॒ व॑र्त्मा॑नि स॒र्वत॒ इन्द्रः॑ पू॒षा च॑ सस्रतुः ।मुह्य॑न्त्व॒द्यामूः सेना॑ अ॒मित्रा॑णां परस्त॒राम्

śatrunāśanam| 1-3 atharvā| indraḥ| anuṣṭup| pari vartmāni sarvata indraḥ pūṣā ca sasratuḥ | muhyantvadyāmūḥ senā amitrāṇāṃ parastarām

हिन्दी अर्थ

हारा, (असितः) बन्धन रहित अर्थात् सीमा रहित भाकाश (प्रथयते) प्रथित होता है, विस्तृत हीता है, ओर (वशान् अनु) कामनानुसार (वपुषि). नानाविध शरीरो का (कृण्वन्) वहं परमेष्वर पदा करता है (एवा) दसी प्रकार (सदसा) षाह द्वारा (ते) है राजन् ! तेरा (शेप राञ्य,, (अयम् अकरः) जो कि इस सूरय को तरह ज्ञानप्रकाश से प्रकाशित हुमा है वायुविकार द्वारा पेटस्थूलहो जातादहै, फुल जाता है । परस्वतः=पुवे- काल फे चक्रवर्ती" राजा का । “पारस्वतम्'पंछान्दस पाठ है, ओर लौकिक संस्कृत पाठ है "पाराव- 1 पद प्रतोत होता है, जो कि “पारावतम्” सम्भव है । पारावतं ्है।इनः मे जितने-जितने तारा हवे उस-उस के गङ्ख है, गवयव

English

A priest’s benediction after meat What food I eat of varied form and nature, food whether gold, or horse, sheep, goat, or

अध्याय 6

श्लोक 67.2

मू॒ढा अ॒मित्रा॑श्चरताशी॒र्षाण॑ इ॒वाहयः॑ ।तेषां॑ वो अ॒ग्निमू॑ढाना॒मिन्द्रो॑ हन्तु॒ वरं॑वरम्

mūḍhā amitrāścaratāśīrṣāṇa ivāhayaḥ | teṣāṃ vo agnimūḍhānāmindro hantu varaṃvaram

हिन्दी अर्थ

इच्छा कामना । शपः =पसः = राष्ट्रम् ह) राट् (भथर्व० २।४१) कहा है । अर्थात् पृथिवीके सब जनों का एक राजा, 4 मथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु०° ७। सु०७२ ( है । प्रत्येक “पारावत” आदि जितनी डिगयियों अंशो मे फला हुमा है, विस्तृत हभ है, उतने विस्तार वाला उस-उस का मानो राष्ट है, राड

English

bullock, Whatever gift I have received, may Agni the Hotar make it sacrifice well-offered. Whatever, sacrificed or not, hath reached me, bestowed by men and sanctioned by the

अध्याय 6

श्लोक 67.3

ऐषु॑ नह्य॒ वृषा॒जिनं॑ हरि॒णस्या॒ भियं॑ कृधि ।परा॑ङ॒मित्र॒ एष॑त्व॒र्वाची॒ गौरुपे॑षतु

aiṣu nahya vṛṣājinaṃ hariṇasyā bhiyaṃ kṛdhi | parāṅamitra eṣatvarvācī gaurupeṣatu

हिन्दी अर्थ

सदृश विस्तृत हो र वतमान द्युलोक के चित्र अभिप्रेत वेदिक-चि्षो फे अनवाक = सवेथा अनुरूप नहीं ह । चित्रो कौ व्याख्या परिशिष्ट मं देखिए । नि ॐ (इह) यहां (आयातु) आए (वर्णः) वरुण राजा, (सोमः) सेना- यहां (आ यातु) आए, (वसुभिः) वघुमों श््रौ, आदित्यो के साथ । ७।४।२४) । वसुभिः पद, षां ओर आदित्यो का उपलक्षक है । ये है लगाया गया है, मौर अधिकारियों तथा विद्वानों को तदथं आमन्त्रित

English

Fathers, Whereby my heart seems to leap up, may Agni the Hotar make that sacrifice well-offered.

अध्याय 6

श्लोक 68.1

वपनम्।१-३ अथर्वा।१ सविता, आदित्याः, रुद्राः, वसवः, २ अदितिः, आपः, प्रजापतिः, ३ सविता, सोमः, वरुणः।१ पुरोविराडतिशाक्वरगर्भा चतुष्पदा जगती, २ अनुष्टुप्, ३ अतिजगतीगर्भा त्रिष्टुप्।आयम॑गन्त्सवि॒ता क्षु॒रेणो॒ष्णेन॑ वाय उद॒केनेहि॑ ।आ॒दि॒त्या रु॒द्रा वस॑व उन्दन्तु॒ सचे॑तसः॒ सोम॑स्य॒ राज्ञो॑ वपत॒ प्रचे॑तसः

vapanam| 1-3 atharvā| 1 savitā, ādityāḥ, rudrāḥ, vasavaḥ, 2 aditiḥ, āpaḥ, prajāpatiḥ, 3 savitā, somaḥ, varuṇaḥ| 1 purovirāḍatiśākvaragarbhā catuṣpadā jagatī, 2 anuṣṭup, 3 atijagatīgarbhā triṣṭup| āyamagantsavitā kṣureṇoṣṇena vāya udakenehi | ādityā rudrā vasava undantu sacetasaḥ somasya rājño vapata pracetasaḥ

हिन्दी अर्थ

विदानो फी, देखो (छान्दोग्य उप० ६।१६); जसे कि बी ०.ए, एम०ए०, खाक्टर । ० ६ । अनु० ८ । सु ७४ अथववेद-भाष्य १३२ भयवंवेद-भाष्य का०६। अनु ८। सू० ७४ तान्त्सीवयामि हविषां घृतेन मयि सजाता रमां जी न पर्षा अ ¢ करं ब्रह्मणश्तिङार श

English

What food I eat unjustly, Gods! or, doubtful between bestow- ing and refusing, swallow, Through greatness of Vaisvānara the mighty may that same food be sweet to me and blessed! A charm to restore or increase virile power

अध्याय 6

श्लोक 68.2

अदि॑तिः॒ श्मश्रु॑ वप॒त्वाप॑ उन्दन्तु॒ वर्च॑सा ।चिकि॑त्सतु प्र॒जाप॑तिर्दीर्घायु॒त्वाय॒ चक्ष॑से

aditiḥ śmaśru vapatvāpa undantu varcasā | cikitsatu prajāpatirdīrghāyutvāya cakṣase

हिन्दी अर्थ

शरीरो, मनो, तथा ब्रतों भौर क्मोकीदृष्टिसे तुम आपसमें मिले लगे दरवार मे एकच्रित हए अधिकारियों ओौर शिक्षकों पौ भाषण है । शुष्मम् बलनाम (निषं० २।९) । वास्तोष्पतिरतुं बो जोहवीतु मयि सजाता रमातिवों अस्त ।३। सनं वो मनसोऽयो ०१ दः । (वः) तुम्हारे (मनसः) मनो का (संज्ञपनम्) सांमनस्य हो, (अयो)

English

Sicut anguis niger ad voluntatem se extendit, Asurarum arte magica formas novas efficiens, sic fascinum tuum, partem cum parte, conjunctum, hic hymnus efficiat.

अध्याय 6

श्लोक 68.3

येनाव॑पत् सवि॒ता क्षु॒रेण॒ सोम॑स्य॒ राज्ञो॒ वरु॑णस्य वि॒द्वान्।तेन॑ ब्रह्माणो वपते॒दम॒स्य गोमा॒नश्व॑वान॒यम॑स्तु प्र॒जावा॑न्

yenāvapat savitā kṣureṇa somasya rājño varuṇasya vidvān| tena brahmāṇo vapatedamasya gomānaśvavānayamastu prajāvān

हिन्दी अर्थ

हे मभ्यागतरो ! (इह एव) यहां ही मेरे बातिच्य भे (स्त) होभो पथा (हृदः) हृदयो का (संज्ञपनम्) सांमनस्य हो । (अथो ) तथा (भगस्य) रोध (कृणोतु) करे । (वास्तोष्पतिः ) राजकीय गृहोंका स्वामो (अनु) निरन्तर (वः) वहारा (जोहवीतु)बार-बार आह्वान करता रहै (सजाताः) रहा, (मा गपयात) हम से जुदा न होभो । (पूषा) अक्नादि द्वारा पोषक

English

Velut penis (tayadarus quem ventus permagnum fecit, quantus. est onagri penis, tantus penis tuus increscat. Quantum estonagri membrum masculinum, elephanti, asinique, quantum est fortis equi,

अध्याय 6

श्लोक 69.1

वर्चःप्राप्तिः।१-३ अथर्वा।बृहस्पतिः, अश्विनौ।अनुष्टुप्।गि॒राव॑र॒गरा॑टेषु॒ हिर॑ण्ये॒ गोषु॒ यद् यशः॑ ।सुरा॑यां सि॒च्यमा॑नायां की॒लाले॒ मधु॒ तन्मयि॑

varcaḥprāptiḥ| 1-3 atharvā| bṛhaspatiḥ, aśvinau| anuṣṭup| girāvaragarāṭeṣu hiraṇye goṣu yad yaśaḥ | surāyāṃ sicyamānāyāṃ kīlāle madhu tanmayi

हिन्दी अर्थ

मनो का साम्मनस्य है एकविचार, हूदयों का साम्मनस्य है एकसवृश भसु कोटि के विद्भानों के साथ (संबभूवुः) सांमनस्यमे होते है, (उग्राः) उर ¦ (अहणीयमानाः) धिना लज्जा ओौर संकफोषं के (संबमूवः) सांमनस्य मे पोषकसामग्री दवारा तुम्हारो इतनी सेवा करे कि वापिस जानेका तुम्हारा होते है, (एवा) इसी प्रकार (त्रिणामन्) तीन लोकों को अपने प्रति.

English

tantus penis tuus increscat. A King’s charm to conciliate his discontented kinsmen

अध्याय 6

श्लोक 69.2

अश्वि॑ना सार॒घेण॑ मा॒ मधु॑नाङ्क्तं शुभस्पती ।यथा॒ भर्ग॑स्वतीं॒ वाच॑मा॒वदा॑नि॒ जनाँ॑ अनु॑

aśvinā sāragheṇa mā madhunāṅktaṃ śubhaspatī | yathā bhargasvatīṃ vācamāvadāni janā~ anu

हिन्दी अर्थ

नमानेवाने,लुकाने बाले, उन्हँ पराजित करनेवाले है परमेश्वर ! (बहूणीय- मानः) विना संकोच क्रियेत (इमान्) हन (जनान्) प्रजाजनों को (सं- मनसः) परस्पर सांमनस्थ वाले, तथा निज के साथ मिले मनोवाले (दह्) , है तब भी गुरुकलो म परस्पर सांमनस्य में रहते, प्रेमपूर्वक रहते । उग्र सेनाध्यक्ष ओर सेनाधिपति तथा सेनिक एक-संनिक स्यान मे भो पर- ,, उपासक मे भो परस्पर अनुरागयुक्त हौना चाहिए ।

English

Let Varuna come hither, Soma, Agni, Brihaspati come hither with the Vasus! Unanimous, ye kinsmen, come united, come to the glory of this mighty guardian. The inclination which your hearts have harboured, the purpose which hath occupied your

अध्याय 6

श्लोक 69.3

मयि॒ वर्चो॒ अथो॒ यशोऽथो॑ य॒ज्ञस्य॒ यत् पयः॑ ।तन्मयि॑ प्र॒जाप॑तिर्दि॒वि द्यामि॑व दृंहतु

mayi varco atho yaśo'tho yajñasya yat payaḥ | tanmayi prajāpatirdivi dyāmiva dṛṃhatu

हिन्दी अर्थ

वरुण-राष्टृपति निकाल देना हुं, (यः) जो (सपत्नः) शत्रु फि (पृत- नितरां बाधा डालने वालो (हविषा) नुद्धयज्ञ में हविरूप सेना दर रा(एनम्) ¦ इस सपत्न को (पराशरीत्) हिसा करे । ॑ ॑ क० ६ । मनु० ८। सू० ७६ अथववेद-भाष्य (वृव्रहा) आवरण अर्थात् घेरा डालने वाले शतुदल का ट्नन करने

English

spirits, This I annul with sacrifice and butter. In me be your sweet resting-place, O kinsmen.

अध्याय 6

श्लोक 70.1

अघ्न्याः।१-३ काङ्कायनः।अघ्न्याः।जगती।यथा॑ मां॒सं॑ यथा॒ सुरा॒ यथा॒क्षा अ॑धि॒देव॑ने ।यथा॑ पुं॒सो वृ॑षण्य॒त स्त्रि॒यां नि॑ह॒न्यते॒ मनः॑ ।ए॒वा ते॑ अघ्न्ये॒ मनोऽधि॑ व॒त्से नि ह॑न्यताम्

aghnyāḥ| 1-3 kāṅkāyanaḥ| aghnyāḥ| jagatī| yathā māṃsaṃ yathā surā yathākṣā adhidevane | yathā puṃso vṛṣaṇyata striyāṃ nihanyate manaḥ | evā te aghnye mano'dhi vatse ni hanyatām

हिन्दी अर्थ

वर्षो से भौ (पुनः) धिर लोट करं (न आयति) न जाये । अभिप्राय यह् किं इन्द्र उसे मार डाले, जहा से लौटकर आना नहं होता । मन्त्र में "तम्" द्वारा शतर-राजा का निदेश हुमा है । परावतः दर शसु (परावतः) दूरवर्ती (तिस्रः) तीन भूमिं को (अति एतु ) अति- कर जाए । (तिस्रः रोचनाः) तीन प्रदीप्त लोकों का ( अति एतु) अत- क्रमण कर जाय, (यतः) जहां से (न पुनः भायति) न फिर आए, न लौट

English

Stand even here; forsake me not. Before us may Pūshan make your path unfit to travel. Vāstoshpati incessantly recall you! In me be your sweet resting- place, O kinsmen! A King’s charm to secure the fidelity of his people

अध्याय 6

श्लोक 70.2

यथा॑ ह॒स्ती ह॑स्ति॒न्याः प॒देन॑ प॒दमु॑द्यु॒जे।यथा॑ पुं॒सो वृ॑षण्य॒त स्त्रि॒यां नि॑ह॒न्यते॒ मनः॑ ।ए॒वा ते॑ अघ्न्ये॒ मनोऽधि॑ व॒त्से नि ह॑न्यताम्

yathā hastī hastinyāḥ padena padamudyuje| yathā puṃso vṛṣaṇyata striyāṃ nihanyate manaḥ | evā te aghnye mano'dhi vatse ni hanyatām

हिन्दी अर्थ

दूरवर्ती" तीन भूमियां है बुध, वृहस्पति, शनैश्चर । पञ्चजन हँ शार वणो के जन ओर एक निषादरूपी, दस प्रकार पांच प्रकार के मनुष्य । शत जब मर कर पथिदी से दूर चला गया तो उसका सम्पकं पृथिवीवासी य एनं परिषीदंन्ति समादधति चक्षसे । १. भौर समीप की तीन भूमियां है, पृथिवीजो कि हमारे अत्यन्त समीप दहै, १२९ अथववेद-भाष्य कार ६। अनु० ८ । सुर ७ ओर बैठते है, ओर (चक्षसे) अग्विके दशन के लिये (समादधति)

English

Close gathered be your bodies: be your minds and vows in. unison! Here present Brāhmanaspati and Bhaga have assembled you.

अध्याय 6

श्लोक 70.3

यथा॑ प्र॒धिर्यथो॑प॒धिर्यथा॒ नभ्यं॑ प्र॒धावधि॑ ।यथा॑ पुं॒सो वृ॑षण्य॒त स्त्रि॒यां नि॑ह॒न्यते॒ मनः॑ ।ए॒वा ते॑ अघ्न्ये॒ मनोऽधि॑ व॒त्से नि ह॑न्यताम्

yathā pradhiryathopadhiryathā nabhyaṃ pradhāvadhi | yathā puṃso vṛṣaṇyata striyāṃ nihanyate manaḥ | evā te aghnye mano'dhi vatse ni hanyatām

हिन्दी अर्थ

अधि) क्षत्रिय के हृदय से (उदेतु) उद्गत हो, उ । । । होती है उसके दशन के लिये क्षत्रिय के चारों ओर बैठे संनिकों के उत्साहु- से उठती है मौर प्रजाजन इस अग्नि का दर्णन ध्यानपू्वक करते है । अग्नि के (पदम्) पैरको, चरण को (आयुषे) निज, प्रजाजन ओर राष्ट

English

Let there be union of your minds, let there be union of your hearts: All that is troubled in your lot with this I mend and harmonize. As, free from jealousy, the strong Ādityas have been the Vasus’ and the Rudras’ fellows.

अध्याय 6

श्लोक 71.1

अन्नम्।१-३ ब्रह्मा।अग्निः, ३ वैश्वानरः, देवाः।जगती, ३ त्रिष्टुप्।यदन्न॒मद्मि॑ बहु॒धा विरू॑पं॒ हिर॑ण्य॒मश्व॑मु॒त गाम॒जामवि॑म्।यदे॒व किं च॑ प्रतिज॒ग्रहाह॑म॒ग्निष्टद्धोता॒ सुहु॑तं कृनोतु

annam| 1-3 brahmā| agniḥ, 3 vaiśvānaraḥ, devāḥ| jagatī, 3 triṣṭup| yadannamadmi bahudhā virūpaṃ hiraṇyamaśvamuta gāmajāmavim| yadeva kiṃ ca pratijagrahāhamagniṣṭaddhotā suhutaṃ kṛnotu

हिन्दी अर्थ

के जीवन के लिये, (अहम्) मँ (आरभे भालमे) पक्ता हू, छता ह । वद्धा सत्यनाम (निषं० ३।१०) । अद्धातयः मेधाबिनाम (निषं ३। १५) । भग्नि जब सन्दीप्त होती है तो उस से घुयां उठता है, इसी प्रकार क्षात्राग्नि के मुख से धुञं उठता ह । सम्भवतः यह मूख “फेन हो । यो अंस्य समिधे वेद पतरियेण समाहिताम् । ॥॥1 प्रजाजन (अभिहार) कुटिल अर्थात् छल-कपट की नौति मे ( पदम्) षैर को (न निदधाति) नहीं रखता, पदन्यास नहीं करता, ओर न (मृत्यवे) मृत्यु के लिये पदन्यास वरता है । का०६। अनु० ८ । सु० ७७ अथववेद-भाष्य १३७

English

So free from jealousy, Lord of Three Titles! cause thou these people here to be one-minded. A charm to effect the removal of an enemy

अध्याय 6

श्लोक 71.2

यन्मा॑ हु॒तमहु॑तमाज॒गाम॑ द॒त्तं पि॒तृभि॒रनु॑मतं मनु॒ष्यैः ।यस्मा॑न्मे॒ मन॒ उदि॑व॒ रार॑जीत्य॒ग्निष्टद्धोता॒ सुहु॑तं कृणोतु

yanmā hutamahutamājagāma dattaṃ pitṛbhiranumataṃ manuṣyaiḥ | yasmānme mana udiva rārajītyagniṣṭaddhotā suhutaṃ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

अर्भिह्वारे = अभि +ह, कौटिल्ये (्वादिः) । कुटिल है छल-कषपट से नुमोदित छल-कपट रहित युद्ध को भपनाताहै। क्षत्रिय की समिधाहै हत कर देता है, परन्तु छलकपट का आश्रय नहीं लेता । को (न ध्नन्ति) नहीं मार पाते, (न) ओर न (सक्नान्) घेरा डाले बेठे शत्रुओं को वह् (मवगच्छति) अगत हो करतादहै, इन्दं कुछ जानताहो

English

Forth from his dwelling drive that man, the foeman who assaileth us: Through the Expellent sacrifice hath Indra rent and mangled him. Indra, Foe-Slayer, drive him forth into the distance most remote,

अध्याय 6

श्लोक 71.3

यदन्न॒मद्म्यनृ॑तेन देवा दा॒स्यन्नदा॑स्यन्नु॒त सं॑गृ॒णामि॑ ।वै॒श्वा॒न॒रस्य॑ मह॒तो म॑हि॒म्ना शि॒वं मह्यं॒ मधु॑मद॒स्त्वन्न॑म्

yadannamadmyanṛtena devā dāsyannadāsyannuta saṃgṛṇāmi | vaiśvānarasya mahato mahimnā śivaṃ mahyaṃ madhumadastvannam

हिन्दी अर्थ

ग्रहण करता है, नाम जपता है, इसे प्राप्तव्य देव जानकर इस को उपासना १. वथा अण्व; =मादित्यः । यथा “एको मश्वौ बहति सप्तनामा” (-ऋ० १। १६४।२) । “एकोऽश्यो बहति सप्तनामादित्यः'” (निरुक्त ४।४।२७) । रखा है। ये सब चलायमान ह- यह् दशनि के लिये मन्म विश्वको. (यः) जो (गोपाः) पृथिवी भौर वेदवाक् का रक्षकं परमेश्वर (परा-

English

Whence never more shall be return in all the years that are to come.

अध्याय 6

श्लोक 72.1

वाजीकरणम्।१-३ अथर्वाङ्गिराः।शेपोऽर्कः।१ जगती, २ अनुष्टुप्, ३ भुरिक्।यथा॑सि॒तः प्र॒थय॑ते॒ वशाँ॒ अनु॒ वपूं॑षि कृ॒ण्वन्नसु॑रस्य मा॒यया॑ ।ए॒वा ते॒ शेपः॒ सह॑सा॒यम॒र्कोऽङ्गे॒नाङ्गं॒ संस॑मकं कृणोतु

vājīkaraṇam| 1-3 atharvāṅgirāḥ| śepo'rkaḥ| 1 jagatī, 2 anuṣṭup, 3 bhurik| yathāsitaḥ prathayate vaśā~ anu vapūṃṣi kṛṇvannasurasya māyayā | evā te śepaḥ sahasāyamarko'ṅgenāṅgaṃ saṃsamakaṃ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

(तम्) उस परमेश्वर का (अपि) भी (हवे) मँ स्तुति-परार्थना में बलवान जाषवेदो निन्॑तय शृतं तं सन्त्वाटत॑ः । १. जगत् = गच्छतीति, गम् घातोः जगादेशः तथा (उणा० २।८५) । २. द्र के मागं =धुलोक सम्बन्धी । नीचे के मागे = बम्बर के मोर मूलोक अयवेवेद-भाष्य कां ६॥ भनु० ८। सु०७७

English

To the three distances, beyond mankind’s Five Races, let him go, Beyond the three skies let him go, whence he shall never come- again In all the years that are to be, long as the Sun is in the heaven.

अध्याय 6

श्लोक 72.2

यथा॒ पस॑स्तायाद॒रं वाते॑न स्थूल॒भं कृ॒तम्।याव॒त् पर॑स्वतः॒ पस॒स्ताव॒त् ते वर्धतां॒ पसः॑

yathā pasastāyādaraṃ vātena sthūlabhaṃ kṛtam| yāvat parasvataḥ pasastāvat te vardhatāṃ pasaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० ६। अनु० ८। सु° ७८ अथववेद-भाष्य १२३६ हमारे राग-देष आदि की निवृत्ति कर, ताकि (शतम्) ' सौ (ते आवृतः) माता-पिता ने प्राप्त कराया है (ताम्) उसे (रसेन) दुग्ध, दधि, घृत तथा उस मे आहुतिषू्प में आहूत करना घाष्ठिये । भौर एक बार प्रभूत अन्न न खाकर बार-बार ्टसका सेवन करना चाद्ये । एसे सेवकं को 'मात्मयाजीः कहते ह । पत्नौ ने सन्तानोत्पादन करना है, अतः उस का पोषण रसदाश पौष्टिक भोयो वारा करते रहूना पति का कर्तेम्य है। अभिवधताम् न रय्या सहसरवर्यसेमो स्तामनुंपक्षितोः ॥२॥

English

A benediction on a new-born Kshatriya child Those who are sitting round this babe prepare him to be looked upon.

अध्याय 6

श्लोक 72.3

या॒व॒द॒ङ्गीनं॒ पार॑स्वतं॒ हास्ति॑नं॒ गार्द॑भं च॒ यत्।याव॒दश्वस्य वा॒जिन॒स्ताव॑त् ते वर्धतां॒ पसः॑

yāvadaṅgīnaṃ pārasvataṃ hāstinaṃ gārdabhaṃ ca yat| yāvadaśvasya vājinastāvat te vardhatāṃ pasaḥ

हिन्दी अर्थ

१, ये दोनों पदं “बहूत्व'" के सूष्रक है । २. ये वोर्नो रसे अश्वादि का सेवन करे कि गृहस्य धमे का पालन करते हुए भीन का तेज बहुता रहे । १४० जयवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० ८। सु० ७९ आयुए तुम्हारी कीं मूतकाल में, वह् (वाम्) पुम दोर्मोकी (अयुः) वतमान भयु को (दीघम् कृणोतु) दीघं करे ।

English

Let Agni thoroughly inflamed with all his tongues rise from his- heart. For length of life I use the name of Agni the Consuming God, Whose smoke the sage who knows the truth beholds proceeding. from his mouth.

अध्याय 6

श्लोक 73.1

सांमनस्यम्।१-३ अथर्वा।सांमनस्यम्, वरुणसोमाग्निबृहस्पतिवसवः, ३ वास्तोष्पतिः, १,३ भुरिक्, २ त्रिष्टुप्।एह या॑तु॒ वरु॑णः॒ सोमो॑ अ॒ग्निर्बृह॒स्पति॒र्वसु॑भि॒रेह या॑तु ।अ॒स्य श्रिय॑मुप॒संया॑त॒ सर्व॑ उ॒ग्रस्य॑ चे॒त्तुः संम॑नसः सजाताः

sāṃmanasyam| 1-3 atharvā| sāṃmanasyam, varuṇasomāgnibṛhaspativasavaḥ, 3 vāstoṣpatiḥ, 1,3 bhurik, 2 triṣṭup| eha yātu varuṇaḥ somo agnirbṛhaspatirvasubhireha yātu | asya śriyamupasaṃyāta sarva ugrasya cettuḥ saṃmanasaḥ sajātāḥ

हिन्दी अर्थ

अथवा हजार वर्षो को दीषं आयु तुम्हारी करे । भयु; जीवनकाल । करनेवाला परमेश्वर (नः) हमारी (अभिरक्षतु) पुणंतया रक्षा करे बौर (नः) हमारे (गृहेषु) घरो मे (असमातिम्) मापरहितत धान्य की रक्षा करे । मेघ के वर्णन से तदुत्पादिव धान्य की असमाति अभिग्रेत है। जसमा- (नभसस्पते) है मेष के पति ! (त्वम) तू (नः गृहेषु), हमारे घरोर्मे (ऊजेम.) बलदायक भौर प्राणप्रद अन्न (धारय) स्थापित कर, जिससे कां० ६। अनु० ८ । प्ु० ८० अथर्ववेद-भाष्य १४१

English

The man who knows his fuel laid in order by the Kshatriya Sets not his foot upon the steep declivity that leads to Death.

अध्याय 6

श्लोक 73.2

यो वः॒ शुष्मो॒ हृद॑येष्व॒न्तराकू॑ति॒र्या वो॒ मन॑सि॒ प्रवि॑ष्टा ।तान्त्सी॑वयामि ह॒विषा॑ घृ॒तेन॒ मयि॑ सजाता र॒मति॑र्वो अस्तु

yo vaḥ śuṣmo hṛdayeṣvantarākūtiryā vo manasi praviṣṭā | tāntsīvayāmi haviṣā ghṛtena mayi sajātā ramatirvo astu

हिन्दी अर्थ

देव संस्फान सहसनापो षस्येकिषे । खरापोषस्य) हजार प्रकार के पोषक धन का(ईषिषे)तू अधीश्वर है, (तस्य) उस का भाग (नः) हमें (रास्व) दे, (तस्य) उसका भाग (नः) हमारे किये (हि) धारित या पोषित कर निर्धारित कर (ते) तेरे (तस्य) उस अघ्न के (भक्तिवांसः) भागवाले (स्याम) हम हो । अथवा उस तुक्च कौ भक्तिवाले, भजन करने वाले हम हो, तेरे दिये अक्के सेवनद्वारा भूता = विश्वानि मतानि) सव भूत-भौतिक तत्त्वो का (अव) जो कि नीचे (यत्) जो (महः) तेज है (तेन हविषा) उस हविः हारा (ते) तेरी (विधेम) परिचर्यां हम करते द ।

English

Those who encompass slay him not: he goes not near his lurk— ing foes The Kshatriya who, knowing well, takes Agni’s name for length of life. A charm to bring the cattle home

अध्याय 6

श्लोक 73.3

इ॒हैव स्त॒ माप॑ या॒ताध्य॒स्मत् पू॒षा प॒रस्ता॒दप॑थं वः कृणोतु ।वास्तो॒ष्पति॒रनु॑ वो जोहवीतु॒ मयि॑ सजाता र॒मति॑र्वो अस्तु

ihaiva sta māpa yātādhyasmat pūṣā parastādapathaṃ vaḥ kṛṇotu | vāstoṣpatiranu vo johavītu mayi sajātā ramatirvo astu

हिन्दी अर्थ

(निषं० २।५) । द्युलोकस्थ शवा है 91775, जिसे 12085197 भी कते है तया 0व776प2 भी । द्युलोक मे सर्वाधिक चमकीला यह ताराहैजोकि ८0775 00807 मै स्थित है । यह् जब सूये के साथ उदित ओर मस्त होता है उन दिनों को 1202028 कहते हँ । यह् सर्वाधिक चमकीला दहै इसलिये परमेश्वर की चमक को श्वा की चमक फे सदु कहा । चमक के की स्तुति करना परमेश्वर की परिचर्या है । ये अय॑ः कालकाश्जा दिवि देवा ईव भिताः । (ये) जो (त्रयः) तीन (कालकाञ्जाः) काल को अभिव्यक्त करनेवसे (अह्व ) म माहवान करता हूं (ऊतये) रक्षा के लिये मौर (अस्म मरिष्ट- ¦

English

Firm stands the heaven, firm stands the earth, firm stands this universal world, Firm stand the rooted mountains. I have put the horses in the stall.

अध्याय 6

श्लोक 74.1

सांमनस्यम्।१-३ अथर्वा।सांमनस्यम्, नाना देवताः, त्रिणामा।अनुष्टुप्, ३ त्रिषटुप्।सं वः॑ पृच्यन्तां त॒न्वः॑१ सं मनां॑सि॒ समु॑ व्र॒ता।सं वोऽयं ब्रह्म॑ण॒स्पति॒र्भगः॑ सं वो॑ अजीगमत्

sāṃmanasyam| 1-3 atharvā| sāṃmanasyam, nānā devatāḥ, triṇāmā| anuṣṭup, 3 triṣaṭup| saṃ vaḥ pṛcyantāṃ tanvaḥ1 saṃ manāṃsi samu vratā| saṃ vo'yaṃ brahmaṇaspatirbhagaḥ saṃ vo ajīgamat

हिन्दी अर्थ

तातये) इस अविनाशके करनेके लिये या विस्तार के लिये । अथववेद-भाष्यं का० ६। अनु० द। सू० ८० (रधादिः) । ये तीन रहै सूय, चन्द्रमा तथा सप्तपिमण्डल । तीनों दारा कां० ६ । अनु० ८। सू० ८१ अथववेद-भाष्य १४३

English

I call the Herdsman, him who knows the way to drive the cattle forth, Who knows the way to drive them home, to drive them back and drive them in. O Jātavedas turn them back: a hundred homeward ways be thine!

अध्याय 6

श्लोक 74.2

सं॒ज्ञप॑नं वो॒ मन॒सोऽथो॑ सं॒ज्ञप॑नं हृ॒दः ।अथो॒ भग॑स्य॒ यच्छ्रा॒न्तं तेन॒ संज्ञ॑पयामि वः

saṃjñapanaṃ vo manaso'tho saṃjñapanaṃ hṛdaḥ | atho bhagasya yacchrāntaṃ tena saṃjñapayāmi vaḥ

हिन्दी अर्थ

यन्ताऽक्षि यच्छ॑से हस्तावेप॒ रासि सेधसि । के लियेतु अपने दोनों हाथों का सहारा (यच्छसे) देता है, (रक्नासि) राक्षसी प्रवृत्तियों को तु (अप सेधसि) गृहस्थ जीवन से अपगत करता है, करनेवाला, पाणिग्रहण करनेवाला (धभूत्) हुमा है कालगणना के लिये इन तनो! कालों का आह्वान करना चाद्ये, इस से पाणि का ग्रहण किया है, पाणिग्रहण की विधि के अनुसार ।

English

Thou hast a thousand avenues: by these restore our kine to us A nuptial benediction

अध्याय 6

श्लोक 74.3

यथा॑दि॒त्या वसु॑भिः संबभू॒वुर्म॒रुद्भि॑रु॒ग्रा अहृ॑णीयमानाः ।एवा त्रि॑णाम॒न्नहृ॑णीयमान इ॒मान् जना॒न्त्संम॑नसस्कृधी॒ह

yathādityā vasubhiḥ saṃbabhūvurmarudbhirugrā ahṛṇīyamānāḥ | evā triṇāmannahṛṇīyamāna imān janāntsaṃmanasaskṛdhīha

हिन्दी अर्थ

धातवे) गभधिान कफे लिये (योनिम् विधारय) योनि का विशेषरूपं तू धारण-पोषण कर । (मयदि) गौर है मयदि! (पुत्रमाषेहि) तु पृत्रका आधान कर, (तम्) उस पत्र को (त्वम्) तु (गमे) भागमनकालमे, प्रसवकाल मेँ (आगमय) हमे प्राप्तं करा। गर्भाधान से पूवं पत्नी की योनि परिपुष्ट होनी चाष्टिये । नि्बला- वस्या मेँ गर्भाधान होने पर सन्तान निबेल पेदा होतो, मौर गभपातकी मन्म परष्मेवर का वर्णन दहै यह दर्शानेकेलिये कितुहौ सूयं, ह होती है । मयदिा की तिथियों का निदंश मनुस्मृति मे हुमा है । आगमन काल है १० मासका काल । परिहृस्त=परिगृहीतद्स्त, मध्यपदलोपी

English

Let this man be again bedewed with this presented sacrifice. And comfort with the sap of life the bride whom they have brought to him. With life’s sap let him comfort her, and raise her high with princely sway.

अध्याय 6

श्लोक 75.1

सपत्नक्षयणम्।१-३ कबन्धः।इन्द्रः।अनुष्टुप्, ३ षट्-पदा जगती।निर॒मुं नु॑द॒ ओक॑सः स॒पत्नो॒ यः पृ॑त॒न्यति॑ ।नै॒र्बा॒ध्येऽन ह॒विषेन्द्र॑ एनं॒ परा॑शरीत्

sapatnakṣayaṇam| 1-3 kabandhaḥ| indraḥ| anuṣṭup, 3 ṣaṭ-padā jagatī| niramuṃ nuda okasaḥ sapatno yaḥ pṛtanyati | nairbādhye'na haviṣendra enaṃ parāśarīt

हिन्दी अर्थ

यं प॑रिहस्तमबिमरदिंतिः पुत्रकाम्या । २. कालका निर्माण करने वाले तथा उसकी पभिव्यक्ति करने वसि तीन, १. जंसे कि वतमान मे विक्रम, ईसा, शक आदि कालो का प्रयोग होता ( क । जिस हस्तम्रहण करने वाज्ने पति को , (मविभः) धारित (अस्थे) इस पत्नी के लिये (आ बध्नात् दिया है, (थथा) ताकि (पुत्रम्, जनप, दति)

English

In wealth that hath a thousand powers, this pair be inexhausti- ble! Tvashtar formed her to be thy dame, Tvashtar made thee to be her lord.

अध्याय 6

श्लोक 75.2

प॒र॒मां तं प॑रा॒वत॒मिन्द्रो॑ नुदतु वृत्र॒हा।यतो॒ न पुन॒राय॑ति शश्व॒तीभ्यः॒ समा॑भ्यः

paramāṃ taṃ parāvatamindro nudatu vṛtrahā| yato na punarāyati śaśvatībhyaḥ samābhyaḥ

हिन्दी अर्थ

ग्रहण तथा पति-पत्नी मे गठ-जोड् किया आता है (१--३) । भगः (जायाकामः) इः । अनष्टु म. । (जायतः) सव प्रकार से प्रयतशील, उद्यमी, अथवा संयमी र्म हं; 8 (वृत्रघ्नः । विवाहमण्डप पर घेरा डालनेवाले विरोधियो का हनन करने

English

Long life let Tvashtar give you both. Let Tvashtar give a thousand lives. A prayer for seasonable rain and prosperity May this our Lord of Cloudy Sky, bedewed with liquid drops preserve unequalled riches in

अध्याय 6

श्लोक 75.3

एतु॑ ति॒स्रः प॑रा॒वत॒ एतु॒ पञ्च॒ जनाँ॒ अति॑ ।एतु॑ ति॒स्रोऽति॑ रोच॒ना यतो॒ न पुन॒राय॑ति ।शश्व॒तीभ्यः॒ समा॑भ्यो॒ यावत् सूर्यो॒ अस॑द् दि॒वि

etu tisraḥ parāvata etu pañca janā~ ati | etu tisro'ti rocanā yato na punarāyati | śaśvatībhyaḥ samābhyo yāvat sūryo asad divi

हिन्दी अर्थ

हनन के. लिये । “राज्ञः वन्वे" (पेप्प० शाखा । वन्वे =वनु याचने, तना- तेन मामंत्रवीद् मगो जायामा वहतादिति ॥२॥ य माता-पिताने पृ्रके लिये (सावित्रीम्) जीवित पिता की पृतरी अथ्वेवेद-भाष्य का० ६ अनु० ८ । सू°० ८२ के (नाम) नाम को (गृह्णामि) म घोषित करता हूं, (वन्वे) ओर उस से याचना करता हं विवाह को सफलता के

English

our homes. Lord of the Cloudy Sky, bestow vigour and strength on our abodes. Let wealth and treasure

अध्याय 6

श्लोक 76.1

आयुष्यम्।१-४ कबन्धः।सान्तपनाग्निः।अनुष्टुप्, ३ ककुम्मती।य ए॑नं परि॒षीद॑न्ति समा॒दध॑ति॒ चक्ष॑से ।सं॒प्रेद्धो॑ अ॒ग्निर्जि॒ह्वाभि॒रुदे॑तु॒ हृद॑या॒दधि॑

āyuṣyam| 1-4 kabandhaḥ| sāntapanāgniḥ| anuṣṭup, 3 kakummatī| ya enaṃ pariṣīdanti samādadhati cakṣase | saṃpreddho agnirjihvābhirudetu hṛdayādadhi

हिन्दी अर्थ

का०६। अनु०प सूऽ ८२ अयवषेद-भाष्य १४५ वहतात्) तू भावहन कर (इति) यह् । निरुक्त अ० २। पाद १। ण्ड १--६ वेस जीवित-पितुका-पृद्री के विवाह को भी नियन्त्रित किया है (अथवं० काण्ड १४, सूक्त १।२) । इस ४ वें == मश्व ¬- इनिः (अत इनिठनौ, अष्टा० ५।२।१२५), अर्थात् धुडसवार

English

come to us. Thou, God bedewed with drops, art Lord of infinite prosperity. Grant us thereof, give us thereof: may we enjoy this boon of thine.

अध्याय 6

श्लोक 76.2

अ॒ग्नेः सा॑न्तप॒नस्या॒हमायु॑षे प॒दमा र॑भे ।अ॒द्धा॒तिर्यस्य॒ पश्य॑ति धू॒ममु॒द्यन्त॑मास्य॒तः

agneḥ sāntapanasyāhamāyuṣe padamā rabhe | addhātiryasya paśyati dhūmamudyantamāsyataḥ

हिन्दी अर्थ

विभाग कर, देने वाला, (हिरण्ययः) सुवणेनि्मित (वृहत् अङ्कुशः) बड़ा अङ्कुश हाथो को हांकने के लिये लोहुनिमित्त दण्डा । एमे प्रजा के शासन के लिये राजा! का दण्डा! इस राजदण्डे को 80९)€ कहते ह । यह् राजा का दण्डा है अतः वेदानुसार सुवणेनिमित होना चाहिए, लोह- निमित नहीं । वसुदानः = (यनुर्वेद अ० ३० मन्त्र ४) में वसुविभक्ता को (निघं० २।१; ३।६) । सूक्तम दर्शाया है कि वसुविभाग तथा विवाह, राजकीय नियमों द्वारा नियन्त्रित होने चाहिए । (अपचितः) है गले से आरम्भ करके नीचे की गोरं सञ्चित हुई, फली टई गण्डमालाभों ! सायण, (प्रपतत) शीघ्र उड़ जाभो, (इव) जेसे फिं (सुपणंः) पक्षी (वसतेः) अपने निवास-स्थानसे शीघ्र उड जाताहै।

English

A prayer for help and protection He flieth in the firmament observing all the things that be:

अध्याय 6

श्लोक 76.3

यो अ॑स्य स॒मिधं॒ वेद॑ क्ष॒त्रिये॑ण स॒माहि॑ताम्।नाभि॑ह्वा॒रे प॒दं नि द॑धाति॒ स मृ॒त्यवे॑

yo asya samidhaṃ veda kṣatriyeṇa samāhitām| nābhihvāre padaṃ ni dadhāti sa mṛtyave

हिन्दी अर्थ

अपचितः = अपचयन की हई गण्डमालाए; अपचयन = बुरी तरह से चिनी गर्ह या अपाक् नीचे की ओर चिनी गई गण्डमालाएं । ये गण्ड+ मालां क्षय रोग की सूचिका ह । सूर्य॑ की रश्मियां सुप्तविध होती है, का०६। अनु € । सू० ८२ अथववेद-भाष्य १४७ गण्डमालाक्षयरोगदहै जोकि निर्बेलों का हनन करती है । अतः

English

We with this offering will adore the greatness of the Heavenly Hound. The three, the Kālakānjas, set aloft in heaven as they were Gods All these I call to be our help and keep this man secure from harm.

अध्याय 6

श्लोक 76.4

नैनं घ्नन्ति पर्या॒यिणो॒ न स॒न्नाँ अव॑ गच्छति ।अ॒ग्नेर्यः क्ष॒त्रियो॑ वि॒द्वान् नाम॑ गृ॒ह्णात्यायु॑षे

nainaṃ ghnanti paryāyiṇo na sannā~ ava gacchati | agneryaḥ kṣatriyo vidvān nāma gṛhṇātyāyuṣe

हिन्दी अर्थ

पौष्टिकं अत्र मोय ओषधों के सेवन करने का विधान हुआ है असूतिका रामायण्यपचित् प प॑तिष्यति (असूतिका) पूयस्राव न करती हई (रामायणी कृष्णा (अपचित्) गल- जायगी, (सः) वह रोग (गलुन्तः) गल कर, सवित होकर ( नशिष्यति) असूतिका पीप पेदा न करनेवाली गण्डमाला । रामायणी : -= रामा

English

In waters is thy birth, in heaven thy station, thy majesty on earth and in the ocean.

अध्याय 6

श्लोक 77.1

प्रतिष्ठापनम्।१-३ कबन्धः।जातवेदाः।अनुष्टुप्।अस्था॒द् द्यौरस्था॑त् पृथि॒व्यस्था॒द् विश्व॑मि॒दं जग॑त्।आ॒स्थाने॒ पर्व॑ता अस्थु॒ स्थाम्न्यश्वां॑ अतिष्ठिपम्

pratiṣṭhāpanam| 1-3 kabandhaḥ| jātavedāḥ| anuṣṭup| asthād dyaurasthāt pṛthivyasthād viśvamidaṃ jagat| āsthāne parvatā asthu sthāmnyaśvāṃ atiṣṭhipam

हिन्दी अर्थ

गलन्तः = गण्ड, जो कि वित होता है, पीपवाला है। गलन्तः = गल् है भपचित्रोगी ! (मनसा) मन से (जुषाणः) प्रीतिपूर्वैक तू चिकित्सा सूचित की गई है । अपोच्छतु अप उषी विवासे । रागिनि मे आहुतिरूप में देता हं उसे (मनसा) विचारपूर्व॑कं (स्वाहा) ओर

English

We with this offering will adore the greatness of the Heavenly Hound. A charm to facilitate child-birth Thou art a grasper, holding fast both hands: drivest fiends away.

अध्याय 6

श्लोक 77.2

य उ॒दान॑ट् प॒राय॑णं॒ य उ॒दान॒ण् न्याय॑नम्।आ॒वर्त॑नं नि॒वर्त॑नं॒ यो गो॒पा अपि॒ तं हु॑वे

ya udānaṭ parāyaṇaṃ ya udānaṇ nyāyanam| āvartanaṃ nivartanaṃ yo gopā api taṃ huve

हिन्दी अर्थ

एक प्रकार की होती है, (कृष्णा) काली गण्डमाला (एका) एक प्रकार की होती है, (रोहिणी) लाल गण्डमालाएं (द्वै) दो प्रकार की होती है । करता है, यतः यहु क्षयकाही कूपहै, तदर्थं पौष्टिकं अघ्न करा सेवन करना जाठरानिनि में आहूत करना चाहिए, ओर दृढसंकल्पपूवेक भोज्यान्न का १. अपपचितः -- “अप'' चिन् चयने, अथवा “अपाक् चिब चयने । मे उपासनोपमेय माव दरण से इन दोनों में अथं भेद ज्ञात होता है।

English

A holder both of progeny and riches hath this Ring become. Prepare accordantly, O Ring, the mother for the infant’s birth.

अध्याय 6

श्लोक 77.3

जात॑वेदो॒ नि व॑र्तय श॒तं ते॑ सन्त्वा॒वतः॑ ।स॒हस्रं॑ त उपा॒वृत॒स्तभि॑र्नः॒ पुन॒रा कृ॑धि

jātavedo ni vartaya śataṃ te santvāvataḥ | sahasraṃ ta upāvṛtastabhirnaḥ punarā kṛdhi

हिन्दी अर्थ

चनाव करना चाहिए । अपचित् है "गले के ऽशछणिलपऽ 08765 का । सूजन' । गण्डमाला के लिये देखो (अथवे० ६।२५।१-३) । वहती; ३ जगती; ४ भुरिक् त्रिष्टुभ् । भूमिरिति त्वायि परमनवते जना निकतिरिति तवाहं परि वेद सर्वतः १

English

On the right way bring forth the boy. Make him come hither. I am here. The Amulet which Aditi wore when desirous of a son,

अध्याय 6

श्लोक 78.1

दम्पत्यो रयिप्राप्तये प्रार्थना।१-३ अथर्वा।१-२ चन्द्रमाः, ३ त्वष्टा।अनुष्टुप्।तेन॑ भू॒तेन॑ ह॒विषा॒यमा प्या॑यतां॑ पुनः॑ ।जा॒यां याम॑स्मा॒ आवा॑क्षु॒स्तां रसे॑ना॒भि व॑र्धताम्

dampatyo rayiprāptaye prārthanā| 1-3 atharvā| 1-2 candramāḥ, 3 tvaṣṭā| anuṣṭup| tena bhūtena haviṣāyamā pyāyatāṃ punaḥ | jāyāṃ yāmasmā āvākṣustāṃ rasenābhi vardhatām

हिन्दी अर्थ

(यस्याः ते) जिस तुज्ञ के (आसनि) मूख भे (जुहोमि) म आहूतियां देता हु, (त्वा) उस तुज्ञ को (जनाः) सवेसाधारण जन (भूमिः इति प्रमन्वते) (नि ऋ तिः इति) कष्टापत्तिरूप (परिवेद ) ठीक प्रकार से जानता हं । संसार से विरक्त कर परमेश्वर को ओर प्रेरित करताहै। इस निमित्त सद्गुरु उसे शरणागत करलेता है । वणेन कविताशेली में मन्त्र में हुमा है। आहृतियां तो यज्ञाग्निके मृखमें ही देनी हैँ ।' कम्= यथा कमिति

English

Tvashtar hath bound upon this dame and said, Be mother of a boy. A charm to win a bride

अध्याय 6

श्लोक 78.2

अ॒भि व॑र्धतां॒ पय॑सा॒भि रा॒ष्ट्रेण॑ वर्धताम्।र॒य्या स॒हस्र॑वर्चसे॒मौ स्तामनु॑पक्षितौ

abhi vardhatāṃ payasābhi rāṣṭreṇa vardhatām| rayyā sahasravarcasemau stāmanupakṣitau

हिन्दी अर्थ

वादी यह मानते हैँकिहमभरमिसेही पेदा हुए, भूमिसेदही पलते, भूमि मे ही रहते, अतः भूमि ही निति" है। निक्छंति' वस्तुतः कृच्छापत्ति .. १. मोक्षाभिलाषौ शिष्यो के सदगुरु का कथन सूक्त पमे है। अयववेवेद-भाष्य का० ६। अनु० ६ । सु०्ड

English

I call the name of him who comes, hath come, and still draws- nigh to us. p. a238 Foe-slaying Indra’s name I love, the Vasus’ friend with hundred powers. Thus Bhaga spake to me: Let him bring thee a consort by the path.

अध्याय 6

श्लोक 78.3

त्वष्टा॑ जा॒याम॑जनय॒त् त्वष्टा॑स्यै॒ त्वां पति॑म्।त्वष्टा॑ स॒हस्र॒मायूं॑षि दी॒र्घमायुः॑ कृणोतु वाम्

tvaṣṭā jāyāmajanayat tvaṣṭāsyai tvāṃ patim| tvaṣṭā sahasramāyūṃṣi dīrghamāyuḥ kṛṇotu vām

हिन्दी अर्थ

कां० ६ । अनु० । सु° ८४ अथववेद-भाष्य १४९ को ग्रहण करनेवालो (भव) तू हो जा, (एषः) यह हवि (ते भागः) तेरा भागदहै तेरा आंशिकस्वरूपहै, तुहीतद्रपदहै जोकि (अस्मासु) हम से अतिरिक्त है (एनसः) पाप से (मुञ्च) मुक्त कर दे, (स्वाहा) तदथ हुम परमेश्व रापित आहुतियां प्रदान करते ह । इस मे कृच्छापत्ति विद्यमान है, वह तू ही आंशिकरूप मे विद्यमान है।

English

Whereon the Asvins brought the bride Sūryā the child of Savitar.

अध्याय 6

श्लोक 79.1

ऊर्जःप्राप्तिः।१-३ अथर्वा।संस्फानम्।गायत्री, ३ त्रिपदा प्राजापतया गायत्री।अ॒यं नो॒ नभ॑स॒स्पतिः॑ सं॒स्फानो॑ अ॒भि र॑क्षतु ।अस॑मातिं गृहेषु॑ नः

ūrjaḥprāptiḥ| 1-3 atharvā| saṃsphānam| gāyatrī, 3 tripadā prājāpatayā gāyatrī| ayaṃ no nabhasaspatiḥ saṃsphāno abhi rakṣatu | asamātiṃ gṛheṣu naḥ

हिन्दी अर्थ

प्रदान कीदटै, उसे तू स्वीकार कर । ओौर मेरे इन शिष्यो ओर उन भावी शिष्यो को पापकर्म करने से मूक्त कर, डा '' जंसे-जेसे यज्ञिय कमं किये जाते है वैसे-वैसे पापकर्मोकाक्षय होते जाना स्वाभाविकी है ) (नि ते) है ृच्छापत्ति ! (अनेहा) पाप से ्डानेवाली (त्वम्) तु नियन्ता के लिये (नमः) नमस्कार (अस्तु) हो । रिमिक, आधिभौतिक तथा आधिदेविक । इन फन्दों मे जीवात्मा बन्धा हुभा है । यम ओौर मृत्यु परमेश्वर के नाम ह। यथा “स महायमः, स्र एव मृत्युः" (अथववे० काण्ड १३। अनुवाक ४। पर्याय १। मन्त्र ५; तथा (अथवे०

English

Great, Indra. is that hook of thine, bestowing treasure, wrought of gold: Therewith, O Lord of Might, bestow a wife on me who long to wed. A charm against sores and pustules (apachitas)

अध्याय 6

श्लोक 79.2

त्वं नो॑ नभसस्पत ऊर्जं॑ गृ॒हेषु॑ धारय ।आ पु॒ष्टमेत्वा वसु॑

tvaṃ no nabhasaspata ūrjaṃ gṛheṣu dhāraya | ā puṣṭametvā vasu

हिन्दी अर्थ

१५० अथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० € । भु० ८५ पादबन्धन मे (वेधिष) तू जव विद्ध करदेतीहै, तव (ये सहस्रम्) जो सहस्रविध मृतं ह उन (मृ्युभिः) मृत्युभोंके दारा (इह) इस भ्रूलौक में (अभिहितः) जीवात्मा बदरहोजातादहै। है मृमृक्षु! (स्वम्) तू जब के साथ (संविदानः) रैक्यमतका प्राप्त होताहै तबहेनि्छति ! तु जीवात्मा निकऋतिके कारण विद्धदहो जातादहै भौर नित्य होने के कारण अनादिकाल से हजारों योनियों मे जन्म पा कर, सहखविध ङृच्छा- पत्तियो को भोगता, ओर अपने को वन्धा हमा अनुभव कर मुमृक्षुहो एेक्यमत को प्राप्त हो जाता, तदनुक्ल अपनी मति बनानेतादहै; तब

English

Hence, Sores and Pustules, fly away even as the eagle from his home. Let Sūrya bring a remedy, the Moon shine forth and banish you.

अध्याय 6

श्लोक 79.3

देव॑ संस्फान सहस्रापो॒षस्ये॑शिषे ।तस्य॑ नो रास्व॒ तस्य॑ नो धेहि॒ तस्य॑ ते भक्ति॒वांसः॑ स्याम

deva saṃsphāna sahasrāpoṣasyeśiṣe | tasya no rāsva tasya no dhehi tasya te bhaktivāṃsaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

न किसी प्रकार सुखाभावही । अपितु मोक्षमें इन दोनोंसे भिन्न आनन्दा नुमूति होतीदहै। मौक्षमें जौवात्माका संग परमेश्वर के साथ रहताहै ओर वहु परमेष्वरीय आनन्दमाच्रा मेंलीन रहूतादहै। परमेश्वर ओर पितरो का शिन्नानुसार तदनुरूप मति वाला हुमाभौ भुभृक्षु जब तक सांसारिक सुख-दुःखो से विरक्त नहीं होता ततर तक वह् नाक) को प्राप्त. नहीं होता । इसलिये (नाक' पर अधिगोहण मेँ अन्तिम कारण नि्छति पुलिङ्घंमे है। अतः मन्त्रमेदोका वणेन हुजा टै एक का नहीं । वरणो वार्ता अयं देवो वन॒स्पतिः ।

English

One bright with variegated tints, one white, one black, a couple red:— The’names of all have I declared. Begone, and injure not our men. Hence, childless, shall the Pustule flee, grand-daughter of the dusky one.

अध्याय 6

श्लोक 80.1

अरिष्टक्षयणम्।१-३ अथर्वा।चन्द्रमाः।१ भुरिक्, २ अनुष्टुप्, ३ प्रस्तारपङक्तिः।अ॒न्तरि॑क्षेण पतति॒ विश्वा॑ भू॒ताव॒चाक॑शत्।शुनो॑ दि॒व्यस्य॒ यन्मह॒स्तेना॑ ते ह॒विषा॑ विधेम

ariṣṭakṣayaṇam| 1-3 atharvā| candramāḥ| 1 bhurik, 2 anuṣṭup, 3 prastārapaṅaktiḥ| antarikṣeṇa patati viśvā bhūtāvacākaśat| śuno divyasya yanmahastenā te haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

(अयम्) यह् (देवः) दिव्यगुणों वाला (वरणः) वरण नाम वाला,या का०६। अनु° € । सू ८५ अथवेवेद-भाष्य १५१ दिन्यगणी वेद्यो ने (अवीवरन्) निवारित कियादहै। देवानां सर्वेषां वाचा यक्ष्म ते बारयामहे ॥२॥ नर अग्नि को यक्ष्मनिवारक कहा टै ।

English

The Boil shall fly away from us, the morbid growth shall vanish hence. Taste, happy in thy mind, thine own oblation, as I with Svāhā with my heart present it.

अध्याय 6

श्लोक 80.2

ये त्रयः॑ कालका॒ञ्जा दि॒वि दे॒वा इ॑व श्रि॒ताः ।तान्त्सर्वा॑नह्व ऊ॒तये॒ऽस्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

ye trayaḥ kālakāñjā divi devā iva śritāḥ | tāntsarvānahva ūtaye'smā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

एवा तें अभ्रिना यक्ष्मं वेदवानरेणं वारये ॥३॥ (यथा) जसे (वृधः) आवरण करनेवाले मेघ ने (विश्वधा) सबके १५२ अथवेवेदभाष्य :कां¢ ६। भनु० € । सू० ८६ १-३ । अथर्वा (वृषकामः) । एकवुषः । अनुष्टुभ् ।

English

A charm to accompany the symbolical loosing of sacrificial victims Thou in whose dread mouth I present oblation, that these bound victims may obtain their freedom,

अध्याय 6

श्लोक 80.3

अ॒प्सु ते॒ जन्म॑ दि॒वि ते॑ स॒धस्थं॑ समु॒द्रे अ॒न्तर्म॑हि॒मा ते॑ पृथि॒व्याम्।शुनो॑ दि॒व्यस्य॒ यन्मह॒स्तेना॑ ते ह॒विषा॑ विधेम

apsu te janma divi te sadhasthaṃ samudre antarmahimā te pṛthivyām| śuno divyasya yanmahastenā te haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

(दिवः) दयलोक का (वृषा) मुखिया है, (पृथिव्याः) पृथिवी का (वृषा) मखिया है, (त्वम्) है राजन् ! तरु (एकवृषः) भकेला सब का मुखिया कां० ६। अनु० ६ । सू० ८9 अथयवेवैद-भाष्य १५३ है गौर एक सम्राट् भो। अतः देव, असुर ओर मनुष गुणकर्मछरत् है जातिपरक नदीं । देवानाम्, अघेभाग् =इप के नाना अथर ।(१) देव- कोटि! के ऋषि-मुनियों के आसन में एकासन के भधभाग का अधिकारी । (२) देवानाम्" केदो अभिप्रायः तरिजिगोषु सैनिक, तथा ग्यवहारो विजिगीषु सेना को देषसेना अथवा देवानां सेनाकहा भीहै। यथा

English

The people deem that thou art Earth: I know thee thoroughly, and I say thou art Destruction. Be thou enriched, O Welfare, with oblations, here among us is thine allotted portion.

अध्याय 6

श्लोक 81.1

गर्भाधानम्।१-३ अथर्वा।आदित्यः, ३ त्वष्टा।अनुष्टुप्।य॒न्तासि॒ यच्छ॑से॒ हस्ता॒वप॒ रक्षां॑सि सेधसि ।प्र॒जां धनं॑ च गृह्णा॒नः प॑रिह॒स्तो अ॑भूद॒यम्

garbhādhānam| 1-3 atharvā| ādityaḥ, 3 tvaṣṭā| anuṣṭup| yantāsi yacchase hastāvapa rakṣāṃsi sedhasi | prajāṃ dhanaṃ ca gṛhṇānaḥ parihasto abhūdayam

हिन्दी अर्थ

उस को आधी सम्पत्ति सम्राट् को, भौर शेष आधो सेनिकोंकी हो । इसी प्रफार व्यापारियों कोव्यापारमे जो (लाभ दहो उसका आधा-आधा मुखिया । इस अभिप्राय मँ मन््र एमे “ईशे” का प्रयोग हमा है । अथवा ॥ “वृषा” का अर्थं है वर्षा करने वाला शक्ति का प्रदाता । । ख्पमेंदहै। व्यापारियों के लाभ को “उत्थितम् कहाहै, ओर मूलधन को

English

Free—Hail to thee!—from sin those here and yonder. Do thou, Destruction, thus, without a rival, release us from the iron bonds that hind us. To me doth Yama verily restore thee. To him, to Yama, yea, to

अध्याय 6

श्लोक 81.2

परि॑हस्त॒ वि धा॑रय॒ योनिं॒ गर्भा॑य॒ धात॑वे ।मर्या॑दे पु॒त्रमा धे॑हि॒ तं त्वमा ग॑मयागमे

parihasta vi dhāraya yoniṃ garbhāya dhātave | maryāde putramā dhehi taṃ tvamā gamayāgame

हिन्दी अर्थ

देवानामथ भाग॑सि सवमेकवृषो भौव ॥३॥ हि अनुसार प्रजापति के तन पत्र ह देव, मनुष्व मौर अकुर। भौर तीनोंही २. चरित है मूलधन, जिसे कि व्यापारमे लगाया, गौर उस वारा प्राप्त लाम है “उत्थित” । इस लाम का अधा “करस्पहे। १५२ अथर्ववेद-भाष्य का० ६॥ अनु° । सु० ८७ वेदानुसार वंशपरम्परागत व्यक्ति राजा नहीं होता किसो याभ्य

English

Death be worship! Thou hast been fastened to an iron pillar, here compassed with a thousand deaths around thee.

अध्याय 6

श्लोक 81.3

यं प॑रिह॒स्तमबि॑भ॒रदि॑तिः पुत्रका॒म्या।त्वष्टा॒ तम॑स्या॒ आ ब॑ध्ना॒द् यथा॑ पु॒त्रं जना॒दिति॑

yaṃ parihastamabibharaditiḥ putrakāmyā| tvaṣṭā tamasyā ā badhnād yathā putraṃ janāditi

हिन्दी अर्थ

लाया है । भ्रशत् श्रु अधःपतने । इहैव धि माऽप॑ च्योष्ठाः परवत इवापिचाचखत् । (इह) इस राज्यासन पर (एव) ही (एधि) हौ, (मा अप च्योष्ठाः) मपच्युत न हो, (पर्वतः इव ) पवेत के सदृश (अविचाचलत्) विना विच- ही है । (तस्म) उस राजा के लिये (सोमः) राष्ट का सेनानायक (च) भौर

English

In full accord with Yama and the Fathers, send this man up- ward to the loftiest heaven. A charm against Consumption 88

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।