Atharva Veda
6
अध्याय 6 / 20

Kanda 6

काण्ड 6

453 श्लोकभाग 3/8 · श्लोक 41.1–60.3

पूर्ण अध्याय पाठ60 श्लोक

अध्याय 6

श्लोक 41.1

दीर्घायुःप्राप्तिः।१-३ ब्रह्म।१ चन्द्रमाः, २ सरस्वती, ३ दैव्या ऋषयः।१ भुरिक्, २ अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्।मन॑से॒ चेत॑से धि॒य आकू॑तय उ॒त चित्त॑ये ।म॒त्यै श्रु॒ताय॒ चक्ष॑से वि॒धेम॑ ह॒विषा॑ व॒यम्

dīrghāyuḥprāptiḥ| 1-3 brahma|1 candramāḥ, 2 sarasvatī, 3 daivyā ṛṣayaḥ| 1 bhurik, 2 anuṣṭup, 3 triṣṭup| manase cetase dhiya ākūtaya uta cittaye | matyai śrutāya cakṣase vidhema haviṣā vayam

हिन्दी अर्थ

‰१€5॥ अर्थात् जिन स्थानौ पर सूयं के आगमन पर दिन-रात बराबरष्टोते ह, उन अथवेवेद-भाष्य कां० ६॥ अनु० ५ । सू०्ण्थः कां० ६ 1 अनु० ५1 सू० ४५ अथववरेद-माष्य ७७ परेहि न तवां कायये वृक्षान वनांनि सं च॑र गृहेषु गोष मे मन॑ः ॥१॥ (मनस्पाप) है मानसिक पाप! (परः अप इहि) परे हट जा, (किम्)

English

May he, the brightly pure one, give us riches: may we have life enjoying food together. At this our second offering may Indra, Maruts, and Visve Devas never fail us. Still may the favour of the Gods be with us, blest with long life and speaking words that

अध्याय 6

श्लोक 41.2

अ॒पा॒नाय॑ व्या॒नाय॑ प्रा॒णाय॒ भूरि॑धायसे ।सर॑स्वत्या उरु॒व्यचे॑ वि॒धेम॑ ह॒विषा॑ व॒यम्

apānāya vyānāya prāṇāya bhūridhāyase | sarasvatyā uruvyace vidhema haviṣā vayam

हिन्दी अर्थ

हि) परे चला जा, (त्वा न कामये तुक्ञे नहीं मै चाहता, (वृक्षान्, वनानि) वृक्षो ओर वनो मे (संचर) संचार कर, विचर (मे) मेश (मनः) मन (गृहेषु) गृहकायों मे, (गोषु) ओर गोपालन मे विचरे। ओर उसके हटाने का संकल्प है देव । मानसिक-पाप ही वास्तविक पाप है । एेद्धियिक ओर शारीरिक पाप तो मानसिक-पाप के परिणाम होते ह, अतः संकल्पो ओर विचारों को शिव बनाना चाहिए । मानसिक-पाप को कामना को वजित करना चाहिए । वृक्षों भौर वनो मे पाप विचरता है ' वृक्षो का वास होता है । तभी इन्हें “ऊध्वेस्वप्नाः'' कहा है (मथवं० ६।४४।१)। स्थानों का पूवं से पश््विम कौ ओर बदल जना । तथा-- रविमायं मे उन दो स्थानों का, जहा किं विन-रात बराबर हो जति ह, माषं १ तथा सितम्बर २३ को दिन मौर रात के स्यानोका पौछेकी ओर शनः-शनं

English

please them. We pour this third libation of the Sages who fashioned forth the cup in proper order.

अध्याय 6

श्लोक 41.3

मा नो॑ हासिषु॒र्ऋष॑यो॒ दैव्या॒ ये त॑नू॒पा ये न॑स्त॒न्वऽस्तनू॒जाः ।अम॑र्त्या॒ मर्त्यां॑ अ॒भि नः॑ सचध्व॒मायु॑र्धत्त प्रत॒रं जी॒वसे॑ नः

mā no hāsiṣurṛṣayo daivyā ye tanūpā ye nastanva'stanūjāḥ | amartyā martyāṃ abhi naḥ sacadhvamāyurdhatta prataraṃ jīvase naḥ

हिन्दी अर्थ

होने पर होता है, जिस से भूमध्य रेखा पर सूर्य के आने फा समय पुवपिक्षया कम ७८ अयर्ववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ५। सूु० ४५. स्वप्न ओौर जागरण जीवधासियों को होते र्है,जड़ो को नहीं । मन को खाली न रखना चाहिय, इसलिये कहा है “गृहेषु गोषु” “मे मनः" । जीवात्मा के लिये कहा “जोष धिषु प्रतितिष्ठा शरी रेः” (अथवं० १८।२।७) । शरीरे; = . बार-बार शरीर रहण करना ओषधियो म । मतः शरीरः बहुवचन है, या सूम जोर कारण शरोर सहित स्यृल शरीर रूप में मौषधि, वनस्पति,

English

Winners of heaven, may they, Sudhanvan’s children, lead our fair sacrifice to happy fortune. Formulas to be used at the three daily libations Thou art the Hawk, Gāyatri’s lord: I hold thee fast. Happily bear me to the goal of this my

अध्याय 6

श्लोक 42.1

परस्परचित्तैकीकरणम्।१-३ भृग्वङ्गिराः।(परस्परचित्तैकीकरणकामः)।मन्युः।१-२ भुरिक्,३ अनुष्टुप्।अव॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नो म॒न्युं त॑नोमि ते हृ॒दः ।यथा॒ संम॑नसौ भू॒त्वा सखा॑याविव॒ सचा॑वहै

parasparacittaikīkaraṇam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| (parasparacittaikīkaraṇakāmaḥ)| manyuḥ| 1-2 bhurik,3 anuṣṭup| ava jyāmiva dhanvano manyuṃ tanomi te hṛdaḥ | yathā saṃmanasau bhūtvā sakhāyāviva sacāvahai

हिन्दी अर्थ

वृक्षो भौर वनो मे शरीरग्रहणं करना, अभिप्रेत है । हम से (अप) अपगत कर्के (आरे) दुर (दधातु) स्थापित करे। अन्धकारमय दुष्क्मो को हेम से दुर करे । एवर्यैवान् परमेश्वर ! (यद् अपि) जो भी (मुषा हम करते हैँ आप कौ प्रेरणा से ( आङ्किरसः) प्राणायामादि योगाङ्ग (अंहसः) पाष से (पातु) सुरक्षित करे :

English

sacrifice. All hail! Thou art the Ribhu, lord of Jagatī: I hold thee fast. Happily bear me to the goal of this my

अध्याय 6

श्लोक 42.2

सखा॑याविव सचावहा॒ अव॑ म॒न्युं त॑नोमि ते ।अ॒धस्ते॑ अश्म॑नो म॒न्युमुपा॑स्यामसि॒ यो गु॒रुः

sakhāyāviva sacāvahā ava manyuṃ tanomi te | adhaste aśmano manyumupāsyāmasi yo guruḥ

हिन्दी अर्थ

स्वकर्माणि भस्मसात्कुरुतेऽ्जुन"' (गीता ४।३७) । उपारिम उप + आट् +- ऋ (गतौ ) + उत्तम ॒ पुरुष , बहुवचन । गतेस्त्रयो- कां० ६ । .अनु०.५। सू० ४६ अथवेबेद-भाष्य ७६ यो न जीषीसि न मतो देवानामगृतग मं सि स्वप्न । (स्वप्न) है स्वप्न ! (यः) जो (न जोवः मसि) न जौविततु है, (न मृतः) न मुत है, अपितु (देवानाम् ) इन्द्रियों का (अमृतगभेः असि) न मरने वाला गरभंरूप है, पुत्ररूप है । (वरुणानी) रात्री (ते) तैरी (माता) माता है, (यमः) नियन्तादिन तेरा (पिता) पितादहै, (अररः) अरु (नाम) नाम वाला (असि) तूदहै। . स्थिर रहता है । वरुणानी है रात्री, यथा “अहोराच्ौ मित्रावरुणौ” (तां०

English

sacrifice. Al I hail! Thou art the Bull, the Trishtup’s lord: I hold thee fast. Happily bear me to the goal of this my sacrifice. All hail!

अध्याय 6

श्लोक 42.3

अ॒भि ति॑ष्ठामि ते म॒न्युं पार्ष्ण्या॒ प्रप॑देन च ।यथा॑व॒शो न वादि॑षो॒ मम॑ चि॒त्तमु॒पाय॑सि

abhi tiṣṭhāmi te manyuṃ pārṣṇyā prapadena ca | yathāvaśo na vādiṣo mama cittamupāyasi

हिन्दी अर्थ

के अनुभवो के संस्कारों के कारण स्वप्न की स्थिति होती है, अतः दिन भय मे "रेषण” कष्टानुभव करता, विचलित होता रहता . है, मतः स्वप्न विदम ते खप्न जनि दंवजामीना प्रो सि प॒मस्य करणः । १. “नैनद् देवा आप्नुयुः" (यञु० ४०।४), देवाः इ्दरियाणि (महीषर) ।, तू पुरर है, (यमस्य) दिन का यम-नियमषूपौ चित्तवृत्तियों कात (करणः) .

English

In praise of Agni O Agni, in thy body man hath never found a wounded part.

अध्याय 6

श्लोक 43.1

मन्युशमनम्।१-३ भृग्वङ्गिराः (परस्परचित्तैकीकरणकामः)।मन्युशमनम्।अनुष्टुप्।अ॒यं द॒र्भो विम॑न्युकः॒ स्वाय॒ चार॑णाय च ।म॒न्योर्विम॑न्युकस्या॒यं म॑न्यु॒शम॑न उच्यते

manyuśamanam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ (parasparacittaikīkaraṇakāmaḥ)| manyuśamanam| anuṣṭup| ayaṃ darbho vimanyukaḥ svāya cāraṇāya ca | manyorvimanyukasyāyaṃ manyuśamana ucyate

हिन्दी अर्थ

कमं है । (अन्तकः मसि) तू दुःस्वप्नं भौर उनके परिणामों को भन्तकर देता है, (मृटुः असि) तु उनके लिए मृत्युरूप है । उस तुक्षको (तथा) उन गुणो वालाह शैली से ्ै। इस प्रकरण की विशेष व्याख्या अथवं० कां. १६) सूक्त ५।८-१० म, तया अथवं १६।५ के समग्र सूक्त मेँ सामान्यखूप से कर दी ग्ई्है, एक करके सूर्यरप्मियां अमावास्या मे (सं नयन्ति) ले जातौ है, लीन कर् देती ईह (यथा) जिस प्रकार लोहकार (शफम्) अश्व ओर बेल के रको लोरे की खरी लगने के लिए (सं नयन्ति) तरासते तथा छटील कर अपगत करते है, (यथा) जिस प्रकार ऋणी परुष ¦ ऋणम्) ऋण की

English

The Ape devours the arrow’s shaft as a cow eats her after- birth. Thou like a fleece contractest and expandest thee what time the upper stone and that below devour.

अध्याय 6

श्लोक 43.2

अ॒यं यो भूरि॑मूलः समु॒द्रम॑व॒तिष्ठ॑ति ।द॒र्भः पृ॑थि॒व्या उत्थि॑तो मन्यु॒शम॑न उच्यते

ayaṃ yo bhūrimūlaḥ samudramavatiṣṭhati | darbhaḥ pṛthivyā utthito manyuśamana ucyate

हिन्दी अर्थ

राशि को शनैः शनेः (संनयन्ति) सम्प्रदान द्वारा समीकृत करते है, को (द्विषते) अप्रियपक्ष के लिये (संनयामसि) ह राजसिक गौर तामसिक स्वप्न । जिस अनुपात से जीवन में सात्विक स्वप्न उत्पन्न होते रहते है, उसो अनुपात से राजसिक मौर तामसिक अथवेवेद-भाष्य कां ६। अनु०° ५। सु० ४६ ह का०६। अनु० १ । सुऽ ४७ अथक्त्रेद-भाष्य ,

English

Closely compressing head with head and breast with breast he crunches up the tendrils with his yellow jaws.

अध्याय 6

श्लोक 43.3

वि ते॑ हन॒व्यां श॒रणिं॒ वि ते॒ मुख्यां॑ नयामसि ।यथा॑व॒शो न वादि॑षो॒ मम॑ चि॒त्तमु॒पाय॑सि

vi te hanavyāṃ śaraṇiṃ vi te mukhyāṃ nayāmasi | yathāvaśo na vādiṣo mama cittamupāyasi

हिन्दी अर्थ

(वैश्वानरः) सव नर-नारी खूप प्राणियों का हितशारी, (विश्वकृत्) चारियों की (पातु) रक्षा करे। (सः) वहु (पावकः ) पवित्र करने वाला परमेश्वर (नः) हमे (द्रविणे) शारीरिक वलमे, तथा वीयं यां प्राणरूपी धन में (दधातु) धारित-पोषित करे, ( आयुष्मन्तः) ताकि हम दीर्घाय से अ धभौतिक अथं निम्नलिखित प्रमाणके आधार पर किया गया है । अतीव शुभ गुणो से संगत ओर सत्कतव्य है । इस को अवश्य है कि २४ वषं प्रहण करे। तो उसके शरीरम प्राण बलवान् होकर सअ शुभ गणो के वास कराने वाले होते हैँ ॥१॥

English

The Eagles have sent forth their voice aloud to heaven: in the sky’s vault the dark impetuous ones have danced. When they come downward to repair the lower stone, they, dwellers with the Sun, have

अध्याय 6

श्लोक 44.1

रोगनाशनम्।१-३ विश्वामित्रः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ त्रिपदा महाबृहती।अस्था॒द् द्यौरस्था॑त् पृथि॒व्यस्था॒द् विश्व॑मि॒दं जग॑त्।अस्थु॑र्वृ॒क्षा ऊ॒र्ध्वस्व॑प्ना॒स्तिष्ठा॒द् रोगो॑ अ॒यं तव॑

roganāśanam| 1-3 viśvāmitraḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 tripadā mahābṛhatī| asthād dyaurasthāt pṛthivyasthād viśvamidaṃ jagat| asthurvṛkṣā ūrdhvasvapnāstiṣṭhād rogo ayaṃ tava

हिन्दी अर्थ

८२ वभर्वेवेद-भास्थ का० ६॥ जनु० भ । सु° ४७ पक्त हो के सव दुष्टों को रलाने ओर भेष्ठों का पालन करने हारे विद्याओं.का ग्रहण करते द ) 1 सत्यारथप्रकास, तृतीय समृल्लास, दयानन्द आयुष्मन्तः भयमेषां वद॑न्तो वयं देवानां सुमतो स्याप ॥२॥ (वदन्तः) बोलते हए (वयम्) देम (देवानाम्) गुरुदेवो की (सुमतौ)सुमति

English

gained abundant seed. A charm for the destruction of vermin

अध्याय 6

श्लोक 44.2

श॒तं या भे॑ष॒जानि॑ ते स॒हस्रं॒ संग॑तानि च ।श्रेष्ठ॑मास्रावभेष॒जं वसि॑ष्ठं रोग॒नाश॑नम्

śataṃ yā bheṣajāni te sahasraṃ saṃgatāni ca | śreṣṭhamāsrāvabheṣajaṃ vasiṣṭhaṃ roganāśanam

हिन्दी अर्थ

-- "एषाम् सताम्” इन के विद्यमान रहते । ओर उदर भागम मानो बड़े विल वाला हता है । यहो अवस्था मस्तिष्क जोर सुपुम्णादण्ड कौ होती है । चमचेमे भी उसे पकड़ने के लिये हत्था होतादहै,जोकरि दण्डरूपहोताहै। मस्तिष्क उर्वभाग में उभरा हु होता है, ओर निचले भाग में छिद्र वासा होताहै, जिसमेंसे सुषुम्मादण्ड निकल कर पीठम फला होता है । इस मस्तिष्क मे ज्ञानरूपी यश्च निहित मे भौ पठित है (१०।८।६) तथा (यजु ३४।५५) । वपोयः; ईयस् के ईकार का लोप। तैत्तिरीय में “वसीयः'' पाठ है । थ अथवेवेद-भाध्य का० ६। अनु ५। सुर ्८

English

Destroy the rat, the mole, the boring beetle, cut off their heads and crush their ribs, O Asvins. Bind fast their mouths; let them not eat our barley: so guard, ye twain, our growing corn from danger.

अध्याय 6

श्लोक 44.3

रु॒द्रस्य॒ मूत्र॑मस्य॒मृत॑स्य॒ नाभिः॑ ।वि॒षा॒ण॒का नाम॒ वा अ॑सि पितॄ॒णां मूला॒दुत्थि॑ता वातीकृत॒नाश॑नी

rudrasya mūtramasyamṛtasya nābhiḥ | viṣāṇakā nāma vā asi pitṝṇāṃ mūlādutthitā vātīkṛtanāśanī

हिन्दी अर्थ

उपनयन" करके आचार्यं उसे दण्डप्रदान करता है । कौशिक सूत्र भवितपूर्वक उपासित परमेश्वर शोध सफलता प्रदान कर्ता है, अतः भाष्य) ) उदूचि--वसुकाल में जतनी ऋचाणएं पाठ्य हँ उन की समाप्ति पवर की उपासना करनी चाहिए इसी लिये कहा है “गायत्रं प्रातः सव- १. उपनयन उप (समीप भे +- नयन (ले आना, अर्थात् निज भाश्चम मे

English

Ho! boring beetle, ho! thou worm, ho! noxious grub and grasshopper! As a priest leaves the unfinished sacrifice, go hence devouring not, injuring not this corn.

अध्याय 6

श्लोक 45.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१-३ अङ्गिराः प्रचेता, यमश्च।दुःष्वप्ननाशनम्।१ पथ्यापङ्क्तिः, २ भुरिक् त्रिष्टुप्, ३ अनुष्टुप्।प॒रोऽपे॑हि मनस्पाप॒ किमश॑स्तानि शंससि ।परे॑हि॒ न त्वा॑ कामये वृ॒क्षां वना॑नि॒ सं च॑र गृ॒हेषु॑ गोषु॑ मे॒ मनः॑

duḥṣvapnanāśanam| 1-3 aṅgirāḥ pracetā, yamaśca| duḥṣvapnanāśanam| 1 pathyāpaṅktiḥ, 2 bhurik triṣṭup, 3 anuṣṭup| paro'pehi manaspāpa kimaśastāni śaṃsasi | parehi na tvā kāmaye vṛkṣāṃ vanāni saṃ cara gṛheṣu goṣu me manaḥ

हिन्दी अर्थ

से साना । यहु आश्षमरहै ब्रहाचर्या्नम)। । कां० ६। अनु ५।सू० ४८ अथयबवेद-भाष्य 4 श्वर कौ उपासना करनी चाहिए (छान्दोग्य ३।१६।३) । तथा तुतोय सवन करनी चाहिए (छान्दोग्य ३।१६।५) । इस भावना के अनुसार सूक्त ४८ के त्वाऽऽरभे त्वा” द्वारा परमेश्वर को कहा है, अतः उपासनामें प को “आलम्बन रूप में वणित किया दहै । सूक्त ४७ के मन्त्रम (जगच्छन्दाः) जगती छन्द वाली ऋचा द्वारा उपासनीय है, (अनु) तद-

English

Hearken to me, lord of the female borer, lord of the female grub! ye rough-toothed vermin! Whate’er ye be, dwelling in woods, and piercing, we crush and mangle all those piercing insects.

अध्याय 6

श्लोक 45.2

अ॒व॒शसा॑ निः॒शसा॒ यत् प॑रा॒शसो॑पारि॒म जाग्र॑तो॒ यत् स्व॒पन्तः॑ ।अ॒ग्निर्वि॑श्वा॒न्यप॑ दुष्कृ॒तान्यजु॑ष्टान्या॒रे अ॒स्मद् द॑धातु

avaśasā niḥśasā yat parāśasopārima jāgrato yat svapantaḥ | agnirviśvānyapa duṣkṛtānyajuṣṭānyāre asmad dadhātu

हिन्दी अर्थ

११।२।१६; ऋभवः १० )। वसु काल से परमेश्वर मे ध्यानाभ्यास द्रा हे परमेश्वर ! (वृषा) सखो की वर्षा करने वाला (गसि) तुः है, जथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० ५। सू० ४६ तक अर्याति शद्रकलि ॐ बध्रे में पठनीय चाभ की समाप्ति तक, कल्याग मा से (संवह) सम्यक् प्रकार सेने की समाप्ति मे आहृतियां विष्टुप् छन्द के

English

A prayer for purification and forgiveness of sins 81

अध्याय 6

श्लोक 45.3

यदि॑न्द्र ब्रह्मणस्प॒तेऽपि॒ मृषा॒ चरा॑मसि ।प्रचे॑ता न आङ्गिर॒सो दु॑रि॒तात् पा॒त्वंह॑सः

yadindra brahmaṇaspate'pi mṛṣā carāmasi | pracetā na āṅgiraso duritāt pātvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

की (3 र को (मत्यः) मरणधर्मा" मनुष्य ( नहि ) नही . , (जानंश) प्राप्त होता । (कपिः) उदक का पान करने वाले आदित्य सदृशं देता है, (दव) जैषे (गौः) गौ (जरा) जरायुज वत्स को (बभस्ति) अग्नि को ही "कपि" कहा है । कपिः = कम्, उदकम्, पिबतीति (सायण) मन्व म "जरायुः" पद जरायुज "वत्स" अभिप्रेत है । यथा “सृण्येव नभर (ऋ० १०।१०६।६) मन्त्र मे जायु है ““जरावरुजं शरीरम्" (निरुक्त १३ । क० ६। अनु० ५। सू° ४६ अथवेवेद-भाष्य ७

English

Cleansed by the filter of the Wind comes Soma past all our enemies, meet friend of Indra. May the maternal Waters make us ready: cleanse us with fat- ness they who cleanse with fatness!

अध्याय 6

श्लोक 46.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१-३ अङ्गिराः प्रचेता, यमश्च।दुःष्वप्ननाशनम्।१ विष्टारपङ्क्तिः, २ त्र्यवसाना शक्वरीगर्भा पञ्चपदा जगती, ३ अनुष्टुप्।यो न जी॒वोऽसि॒ न मृ॒तो दे॒वाना॑ममृतग॒र्भोऽसि स्वप्न ।व॒रु॒णा॒नी ते॑ मा॒ता य॒मः पि॒तार॑रु॒र्नामा॑सि

duḥṣvapnanāśanam| 1-3 aṅgirāḥ pracetā, yamaśca| duḥṣvapnanāśanam|1 viṣṭārapaṅktiḥ, 2 tryavasānā śakvarīgarbhā pañcapadā jagatī, 3 anuṣṭup| yo na jīvo'si na mṛto devānāmamṛtagarbho'si svapna | varuṇānī te mātā yamaḥ pitārarurnāmāsi

हिन्दी अर्थ

मेष ईववसंच॒ वि चोवच्यसे यदुतरदराडुष॑रञ्च खाद॑तः। हे परमेश्वर ! (मेषः) की (इव) तरहत्ु (व) निश्चय से (सम्, मच्यसे) सगत होतादहै, (वि च बच्यसे) ओर संगति से विरहित होतादहै, (च) मौर तु आदित्यरूप मे अर्थात् तुम दोनों (खादतः) खाते हो । को उपमित करता हआ परमेश्वर (हरितेभिः मासभिः) हरे वृक्षो रूपी मृखों इरा (अंशून्) रश्मयो को (अर्दयन्) हसित करता हुमा, चबाता हआ (बभस्ति) खाता है । मेष द्वारा मेषराश्षि बरभिप्रेत है । मेषराशि का संगम सूयं के साथ

English

The Goddesses bear off each blot and tarnish: I come forth from the waters cleansed and stainless.

अध्याय 6

श्लोक 46.2

वि॒द्म ते॑ स्वप्न ज॒नित्रं॑ देवजामी॒नां पु॒त्रोऽसि य॒मस्य॒ कर॑णः ।अन्त॑कोऽसि मृ॒त्युर॑सि।तं त्वा॑ स्वप्न॒ तथा॒ सं वि॑द्म॒ स नः॑ स्वप्न दु॒ष्वप्न्या॑त् पाहि

vidma te svapna janitraṃ devajāmīnāṃ putro'si yamasya karaṇaḥ | antako'si mṛtyurasi| taṃ tvā svapna tathā saṃ vidma sa naḥ svapna duṣvapnyāt pāhi

हिन्दी अर्थ

का संगम सूयं से रहित हो जाता है, भौर सूर्यं व॒षराशिमे चलाजातादहै। घाता यथापूवेमकल्पयत्"” (क्र ० १०।१९०।३) । इस प्रकार उगिमिषित जगत् को मेष कहा है। तदनन्तर प्रलय काल मे परमेश्वर का संगम मृष्ट जगत् से छट जातादहै, भौर “मेष निमिषित जगत्” परमेश्वर कै संगम से रहित हो जाता है । ८८ अथवेवेद-भाष्य का० ६1 अनु० ५। भू ५९ उपर" अर्थात् मेघ (उपरः मेवनाम; निधं ११०) भौर मादित्य, जल- । रूपी अन्न खाते ह । आ्त्य है परमेश्वर का शरीर. जिस में परमेश्वर . बसा हुआ, जपे शरोर में 1 षुसलिये आदित्य द्वारा य आदित्यस्थ परमेश्वर का खाना जसे शरीर द्वाराखानादहैश ४ जीवात्मा का खाना । मतः कहा है “योऽसा वादित्ये पुरुषः ८ खाता ही है, गौर आदित्य भी निज रर्मियों द्वारा जल कापान क रहता है, यह् है आदित्य का जलाच्च का खाना।

English

O Varuna, whatever the offence may be, the sin which men commit against the heavenly folk, When, through our want of thought we violate thy laws, punish us not, O God, for that iniquity.

अध्याय 6

श्लोक 46.3

यथा॑ क॒लां यथा॑ श॒फं यथ॒र्णं सं॒नय॑न्ति ।ए॒वा दु॒ष्वप्न्यं॒ सर्वं॑ द्विष॒ते सं न॑यामसि

yathā kalāṃ yathā śaphaṃ yatharṇaṃ saṃnayanti | evā duṣvapnyaṃ sarvaṃ dviṣate saṃ nayāmasi

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर-पुरुष के काल्पनिक (यजु० ३१।१ २ कल्पयन् ) ' ५ दयौः शिरः प्रकट हू दहै । यौः कोब्रह्याण्डका शिरः कहा है । १ परमेश्वर का आस्य दहै, मूख है । हरितेभिः मे बहुवचन ठै, अतः आसाभः लाकर अर्यात् निज स्वरूप मे विलीन कर हरा + रै । वृक्ष, ६ स्पत्तियों मे हरापन सूये को रष्पियों के कारण होता है । यथा अ व षः नाम देवता ऋतेनास्ते परीवृता । तस्या रूपेणेमे वक्षा हरिता हरितखनः (अथव ० १२।८।३१), अर्थात् “अविः” सूर्य॑परिवार का र्षक भुय, च अर्थात जल के आवरण द्वारा धिरा भा है, उसे सूप ॥ दारा ये वृक्ष हः को रश्मियों को खाता है ' ऋतम् उदकनाम् (निध० १।१ २) , १. है जीवो ! जगदीष्वर ने ड जनो जगदीप्वर ने (अश्वतये)कल वदरा या नशी रस सनित्य संसा

English

A charm against noxious reptiles and insects Slaying the Rākshasas, the Sun mounts upward in the front of heaven,

अध्याय 6

श्लोक 47.1

दीर्घायुः प्राप्तिः।१-३ अङ्गिराः प्रचेताः।१ अग्निः, २ विश्वे देवाः, ३ सुधन्वा।त्रिष्टुप्।अ॒ग्निः प्रा॑तःसव॒ने पा॑त्व॒स्मान् वै॑श्वान॒रो वि॑श्व॒कृद् वि॒श्वशं॑भूः ।स नः॑ पाव॒को द्रवि॑णे दधा॒त्वायु॑ष्मन्तः सहभ॑क्षाः स्याम

dīrghāyuḥ prāptiḥ| 1-3 aṅgirāḥ pracetāḥ| 1 agniḥ, 2 viśve devāḥ, 3 sudhanvā| triṣṭup| agniḥ prātaḥsavane pātvasmān vaiśvānaro viśvakṛd viśvaśaṃbhūḥ | sa naḥ pāvako draviṇe dadhātvāyuṣmantaḥ sahabhakṣāḥ syāma

हिन्दी अर्थ

शरीर मे (वः) तुम्हारी (वसतिः) निवास (हृत) ) किया है (दयानन्द) ।, का०६। अनु° ५। सू० ४६ अथवेवेद-माष्य ८९ है 1 भक्षण में भक्ष्यको मुखम डाल कर उसकै स्वरूप को हिसा को जातो अशुभो, सूयं को रश्मियों को मानो प्रयम चवाता, ओर उन के स्वरूपो को शक्ति में विकृत कर, हरे वृक्षों के शरीरो मे विलोन करलेतादहै। हरे गतिशोल हुई (आषरे) अन्तरिक्न मे (अनतिधुः) नाच करती हैँ। सूर्य रष्मियां (यत् यदा/ जब (नियन्ति) नोचे भरमि तफ़ नियम से पहुंवती

English

Āditya, from the mountains, seen of all, destroying things unseen. The kine had settled in their pen, wild animals sought their lairs The wavelets of the brooks had passed away, and were beheld no more.

अध्याय 6

श्लोक 47.2

विश्वे॑ दे॒वा म॒रुत॒ इन्द्रो॑ अ॒स्मान॒स्मिन् द्वि॒तीये॒ सव॑ने॒ न ज॑ह्युः ।आयु॑ष्मन्तः प्रि॒यमे॑षां॒ वद॑न्तो व॒यं दे॒वानां॑ सुम॒तौ स्या॑म

viśve devā maruta indro asmānasmin dvitīye savane na jahyuḥ | āyuṣmantaḥ priyameṣāṃ vadanto vayaṃ devānāṃ sumatau syāma

हिन्दी अर्थ

सरथं मे आश्रय पाई हई रष्मियां (पुरु रेनः) बहुत शक्ति को, या बहुत जल को (दधिरे) धारण करती है । होती है, ये ८ भिनिटों मे लगभग १० करोड मीलकेवेग से गति करती अष्टा २।४।८०) । आखर है अन्तरिक्ष, आखर सव ओर खृदाहुभासा ६० अथवेवेद-माध्य कां ६। अनु० ५।सु०५० . का० ६। अनु०५। सू० ५० अथववेद-भाष्य ९१ तद॑ है पत॑ङ्ग है जभ्य हा उपक्वस ।

English

I have brought Kanva’s famous Plant, life-giving, and itself inspired, The medicine that healeth all: may it suppress my hidden foes.

अध्याय 6

श्लोक 47.3

इ॒दं तृ॒तीयं॒ सव॑नं कवी॒नामृ॒तेन॒ ये च॑म॒समैर॑यन्त ।ते सौ॑धन्व॒नाः स्वऽरानशा॒नाः स्विऽष्टिं नो अ॒भि वस्यो॑ नयन्तु

idaṃ tṛtīyaṃ savanaṃ kavīnāmṛtena ye camasamairayanta | te saudhanvanāḥ sva'rānaśānāḥ svi'ṣṭiṃ no abhi vasyo nayantu

हिन्दी अर्थ

हिसायाम् + डः। अनतिषुः= जैसे वेगवती नदी की, तथा समुद्रकीतरङ्ख ¦ मे तर्त हई नाचतो सीह! ये रश्मियां मेघका निर्माण करती रहै, समद्रादिसे जल का आकषं करके 1 ये रप्मियां जव स्थूलपदाथं के साय टकराती है तव प्रकाशमयी हो जाती हैँ । रेतः उदकनाम (निघं० १।१२), तथा वीं शक्ति, वीयंवान् पुरुष ही शक्ति वाला होता है । उपरः मेघनाम (१-३) । अथर्वा (अभयकामः) । माश्विनम् । १ विराड् जगती; (अश्विनौ) है दो अश्वियो ! (तदम्) धान्य की हिसा करने वाले,

English

A prayer for recovery and preservation of health and security May Heaven and Earth, wise pair, may lofty Sukra grant me this thing by reason of the guerdon.

अध्याय 6

श्लोक 48.1

स्वस्तिवाचनम्।१-३ अङ्गिराः, प्रचेताः।१ श्येनः, २ ऋभुः, ३ वृषा।उष्णिक्।श्ये॒नोऽसि गाय॒त्रच्छन्दा॒ अनु॒ त्वा र॑भे ।स्व॒स्ति मा॒ सं व॑हा॒स्य य॒ज्ञस्यो॒दृचि॒ स्वाहा॑

svastivācanam| 1-3 aṅgirāḥ, pracetāḥ| 1 śyenaḥ, 2 ṛbhuḥ, 3 vṛṣā| uṣṇik| śyeno'si gāyatracchandā anu tvā rabhe | svasti mā saṃ vahāsya yajñasyodṛci svāhā

हिन्दी अर्थ

(है) है (तदं) हिसक ! (है) है (पतङ्ख)पतङ्खं के सदश शोध्रगतिक ! (जभ्य) हस्य ! (हा -है। है (उपक्वस -उप + कु अस) ओ ! लगभग कुत्सित गति अर्थात् चाल वाले आखु ! चूटै (हविः)हवि को (अनदन्तः) न खाते हृए (इमान् यवान्) इन जौँ कौ (अहिसन्तः) हिसा न करते हए (अपोदित) अपगत हो जाजा भाग जाओ। (ब्रह्म इव हविः) ब्रह्म के जा सकता, अतः सुरक्षित है । तद, पतङ्गं आदि में जात्येकवचन है । उपक्वस मे "अस का अथे है, "गति (स्वादिः)। अथवा श्रय वैसे यज्ञयो्य हविः अन्न भी सुरक्षित है इसे आखु खा नहीं सकता । तव इस के दो विभाग कर “नवसस्येष्टि"” तथा अन्य यज्ञो के लिधे एक विभाग अलग रब लेना चाहिए, ओौर खाद्य अन्न का विभाग उससे अलग ' पतङ्खं = पतन् गच्छतीति, जो उड़ता हुंजा जाता है, पतङ्गा । (त्दपिते) टे हिसक आखओं के पति ! (वर्घांपते) है आक्षप

English

May Agni, Soma mark through this libation: may Vāyu, Savitar, and Bhaga guard us.

अध्याय 6

श्लोक 48.2

ऋ॒भुर॑सि॒ जग॑च्छन्दा॒ अनु॒ त्वा र॑भे ।स्व॒स्ति मा॒ सं व॑हा॒स्य य॒ज्ञस्यो॒दृचि॒ स्वाहा॑

ṛbhurasi jagacchandā anu tvā rabhe | svasti mā saṃ vahāsya yajñasyodṛci svāhā

हिन्दी अर्थ

नाश करते है । वघांपतेवघ् (क्विप्, कतरि, षष्ठी बहुवचन) । धान्य के लिये (अभयम् कृणुतम्) अभय प्रदान करो । अस्विनौ=सायणने दो अश्विनौ! को देवौ माना है । क्या देव आए है गृहवासी पति-ओौर-पत्नी । 1 निरुक्त के अनुसार अग्विनोौ है “यावा- । (शिरः छिन्तम्) सिर को काट डालो, (अपि पृष्टोः) पसलियोंकोभी

English

Again return to us our breath and spirit, again come back to us our life and vision! Vaisvānara, unscathed, our bodies’ guardian, stand between us and every woe and danger! We are again united with our bodies, with happy mind, with spirit, strength, and splendour.

अध्याय 6

श्लोक 48.3

वृषा॑सि त्रि॒ष्टुप्छ॑न्दा॒ अनु॒ त्वा र॑भे ।स्व॒स्ति मा॒ सं व॑हा॒स्य य॒ज्ञस्यो॒दृचि॒ स्वाहा॑

vṛṣāsi triṣṭupchandā anu tvā rabhe | svasti mā saṃ vahāsya yajñasyodṛci svāhā

हिन्दी अर्थ

पर किप्रजा का जीवन अवलम्बित है उसकी रक्षा, महापृुण्यका कामहै।ये अधिविनी डस आदि का विनाश कर प्रजा को जीवित रखते हैँ । । ६२ मथवेवेद-भाष्य का०६। मनु० ५। सु०५१ इन तीनों मन्त्रो में प्रायः आखुभों का वणन है । आखु = “विभवे सति चोर (आष्टे) । अर्थात् धन के होते जोन खाता, न दान करता,न यज्ञ करता, उसे आख कहते हैँ । एसे व्यक्तियों को धान्य के खाने से वञ्चित कर भूवे मार देना चाहिए । ये चाहे अरण्यवासी हों, या प्रामवासी

English

May Tvashtar here make room for us, and freedom and smooth whate’er is injured in our bodies.

अध्याय 6

श्लोक 49.1

अग्निस्तवः।१-३ गार्ग्यः।अग्निः।१ अनुष्टुप्, २ जगती, ३ विराड्जगती।न॒हि ते॑ अग्ने त॒न्वः क्रू॒रमा॒नंश॒ मर्त्यः॑ ।क॒पिर्ब॑भस्ति॒ तेज॑नं॒ स्वं ज॒रायु॒ गौरि॑व

agnistavaḥ| 1-3 gārgyaḥ| agniḥ| 1 anuṣṭup, 2 jagatī, 3 virāḍjagatī| nahi te agne tanvaḥ krūramānaṃśa martyaḥ | kapirbabhasti tejanaṃ svaṃ jarāyu gauriva

हिन्दी अर्थ

देना चाहिए (अपोदित मन्त्र २) । एसे व्यक्तिचोर है, समाजके धनको चुराकर विभवशालीहृएरह। इन्द चोरों को दण्ड देना ही चाहिए। पुरुष-भाचमों के सम्बन्ध मे. कहा, है “एष ते शद्रभाग आखुस्ते पशुः" (वायोः, पवित्रेण) वायुरूप पविश्रता के साधन दवारा (पूतः) पवित्र का०६1 अनु० ५) सू° ५१ अथर्ववेद-भाष्य ६३ भङ्खमे गति करताद् स्थूल रूप य प्रकट हना साम शरोर ह हौ जाता है, शरोर में ठहर नहीं सकता । इछ है जीवात्मा । यथा द्रि

English

A benediction on a newly elected King Win the love of Indra that his friend may reach yet higher state. Increase, as rain the grass, this man’s dominion and his lofty fame.

अध्याय 6

श्लोक 49.2

मे॒ष इ॑व॒ वै सं च॒ वि चो॒र्व॒ऽच्यसे॒ यदु॑त्तर॒द्रावुप॑रश्च॒ खाद॑तः ।शी॒र्ष्णा शिरोऽप्स॒साप्सो॑ अ॒र्दय॑न्नं॒शून् ब॑भस्ति॒ हरि॑तेभिरा॒सभिः॑

meṣa iva vai saṃ ca vi corva'cyase yaduttaradrāvuparaśca khādataḥ | śīrṣṇā śiro'psasāpso ardayannaṃśūn babhasti haritebhirāsabhiḥ

हिन्दी अर्थ

के साथजृता हुआ, शरीर रथ का संचालन कर्ता है । वोय के अभाव शरीर रथ का संचालन नहीं हो सक्ता । यूज्यः का अथं है जुता हमा, च सहयोग ओौर सांमनस्य सुचित किया है । विद्व हि रमं भवहन्ति देवीरुदिदाभ्यः शुचिरा पूत एमि ॥२॥ (मातरः) माताओं की तरह (आपः) जल (अस्मान्) हमे (सुदयन्तु) ्रक्षालित करे, शुद्ध करे । (घृतप्वः) घृत की तरह पवित्र करने वाले (नः) हमे (तेन) घृत सदृश जल द्वारा (पुनन्तु) पवित्र करें । (देवीः) दिव्य देते हँ । (कशचिः) णद्ध तथा (पूतः) पवित्र हआ, (आभ्यः) इन ज से (उद् इत्) उठ कर (भा एमि) म आता हू ।

English

Confirm the princely power in him, Agni and Soma! grant him wealth. In all the circuit of his rule make him yet higher for your friend.

अध्याय 6

श्लोक 49.3

सु॒प॒र्णा वाच॑मक्र॒तोप॒ द्यव्या॑ख॒रे कृष्णा॑ इषि॒रा अ॑नर्तिषुः ।नि यन्नि॒यन्त्युप॑रस्य॒ निष्कृ॑तिं पु॒रू रेतो॑ दधिरे सूर्य॒श्रितः॑

suparṇā vācamakratopa dyavyākhare kṛṣṇā iṣirā anartiṣuḥ | ni yanniyantyuparasya niṣkṛtiṃ purū reto dadhire sūryaśritaḥ

हिन्दी अर्थ

“मातरः'' मातां जसे निजबच्चो के मलों को धोकर उन्हं शुध करती है, बेसे जल हमारे मलों को क्षारित कर हमे शुद्ध करं । ये मल पाप तीन प्रकारका है। (१) भूमिष्ठ, जिस मे कि भौमतत्तव मिले रहते हैँ । मृ क्षरणे (जुहोत्यादिः), यह भौमजल को अपेक्षा शद होता है । देवो (अथरव० १४।१।३-५) मत्त भाष्य । सोम॒ (वीये) का सम्बन्ध ¦ वायु के साथहे यथा “वायूः सोमस्य रक्षिता (अथव० १४।१।४); प्राणा- से शारीरिक मल साथ-साथ प्रवाहित होता रहता है, जब कि टबके जल मे जल चिकित्सा करने से शारोरिक मल जलमें ही मिला रहता है।

English

The man who shows us enmity, whether a stranger or akin, Thou wilt give up entire to me who sacrifice and press the juice. A prayer for general protection and prosperity

अध्याय 6

श्लोक 50.1

अभययाचना।१-३ अथर्वा (अभयकामः)।अश्विनौ।१ विराड्जगती, २-३ पथ्यापङ्क्तिः।ह॒तं त॒र्दं स॑म॒ङ्कमा॒खुमश्वि॑ना छि॒न्तं शिरो॒ अपि॑ पृ॒ष्टीः शृ॑णीतम्।यवा॒न्नेददा॒नपि॑ नह्यतं॒ मुख॒मथाभ॑यं कृणुतं धा॒न्याऽय

abhayayācanā| 1-3 atharvā (abhayakāmaḥ)| aśvinau| 1 virāḍjagatī, 2-3 pathyāpaṅktiḥ| hataṃ tardaṃ samaṅkamākhumaśvinā chintaṃ śiro api pṛṣṭīḥ śṛṇītam| yavānnedadānapi nahyataṃ mukhamathābhayaṃ kṛṇutaṃ dhānyā'ya

हिन्दी अर्थ

(२) दूसरा है वर्पाजल जिसे कि “वृत” सदृश पवित्र या क्षरित कहा है ट अथवेवेद-भाष्य॒का० ६ । अनु० ५। सू° ५१ यजु० ४।२ मे भौ “घृतप्वः पाठ दहै । मन्म “शुचि"' द्वारा मानसिक मौर “पूत” द्वारा शारीरिक शुद्धि का कथन हमा है । यत् कि चेदं ज॑रुण देव्ये जनैऽमि द्रोहं मनुष्या शचर॑निति । (वरुण) है पापनिवारक परमेश्वर ! (मनुष्याः) मनुष्य (देग्ये जने)

English

Of all the many God-frequented pathways that traverse realms between the earth and heaven, Consign me, all ye Gods to that which leadeth to perfect and inviolable safety.

अध्याय 6

श्लोक 50.2

तर्द॒ है पत॑ङ्ग॒ है जभ्य॒ हा उप॑क्वस ।ब्र॒ह्मेवासं॑स्थितं ह॒विरन॑दन्त इ॒मान् यवा॒नहिं॑सन्तो अ॒पोदि॑त

tarda hai pataṅga hai jabhya hā upakvasa | brahmevāsaṃsthitaṃ haviranadanta imān yavānahiṃsanto apodita

हिन्दी अर्थ

देव कोटिके जनों के प्रति (यत् किच) जो कुछ (इदम्) यह (अभि- (युयोपिम) हम ने उल्लंघन किया है, तो (देव) है देव ! (तस्मात् एनसः) उस पापसे (नः) हमे (मा) न (रीरिषः) हसित कर । हम मनुष्यो द्वारा किसी भी देवकोटि के जनके प्रति कयि द्रोह से; परमेष्वर से क्षमा चाहते हँ । यह मानुष स्वभावहोहै। बेदमे वरण को “अपामधिपति"" भी कहा है (अथवे० ५ २४।४) । अतः (आपः प्रकरण मे वरुण नाम से परमेश्वर तथा आपः दोनों का कयन क्रिधा है, (रक्षांसि) अन्धकार, घोर, रोगजनक कीटाणुमों भादि की (निज्वेत्) नितरां हिसा करता हृभा (सूयः) सवं प्रेरक सूयं (पुरः) पूवं दिशा में (दिवः) द्युलोक के प्रकाशित प्रदेश से (उत् एति) उदित होतादहै।

English

Maintain us in well-being Summer, Winter Dew-time and Spring, Autumn, and Rainy Season Give us our share of cattle and of Children. May we enjoy your unassailed protection.

अध्याय 6

श्लोक 50.3

तर्दा॑पते॒ वघा॑पते॒ तृष्ट॑जम्भा॒ आ शृ॑णोत मे ।य आ॑र॒ण्या व्यऽद्व॒रा ये के च॒ स्थ व्यऽद्वरास्तान्त्सर्वा॑न् जम्भयामसि

tardāpate vaghāpate tṛṣṭajambhā ā śṛṇota me | ya āraṇyā vya'dvarā ye ke ca stha vya'dvarāstāntsarvān jambhayāmasi

हिन्दी अर्थ

ओर (पवतेभ्यः) पर्वतौ से उदित होता है, भौर (अदृष्टहा) अदुष्ट क्रिमियो का हनन करताहै। सूयं पवंतीय प्रदेशो मे परवतो से, तथा तद्धि प्रदेशों भँ प्रकाशित दयभागों से उदित होता है । उदित होनेसेपूर्व सौरप्रभासे पूवंकाभाग प्रकाशित हो जाता है । सूर्यं कौ उदय काल की, तथा सायंकाल को, लाल रश्मियां रोग कीटाणुओं क्रिमियों का हनन कर्ती र (अथवं० २।३२।१)। असदन्) नितरां स्थित हो गई है, (मुगासः) स्थान का अन्वेषण करने वाली रषिमियो ने (नि) नितरां (अविक्षत) निज स्थान में प्रवेश पा लिया है। कालीन स्तुति तरङ्ग भी परमेश्वर को स्तुति काल में पाती रहेगी ।

English

Pay to the Year your lofty adoration, to the first Year, the second, and the present. Many we abide in the auspicious favour and gracious love of these who claim our worship.

अध्याय 6

श्लोक 51.1

एनोनाशनम्।१-३ शन्तातिः।आपः, ३ वरुणः।१ गायत्री, २ त्रिष्टुप्, ३ जगती।वा॒योः पू॒तः प॒वित्रे॑ण प्र॒त्यङ् सोमो॒ अति॑ द्रु॒तः ।इन्द्र॑स्य॒ युजः॒ सखा॑

enonāśanam| 1-3 śantātiḥ| āpaḥ, 3 varuṇaḥ| 1 gāyatrī, 2 triṣṭup, 3 jagatī| vāyoḥ pūtaḥ pavitreṇa pratyaṅ somo ati drutaḥ | indrasya yujaḥ sakhā

हिन्दी अर्थ

२८१) 1 ७२ (१४), निरुक्त अतिस्तुति प्रकरण । गावः = "सवं रश्मयो रश्मयो का कथन हु है जो कि प्रवेश के लिये स्थान का अभी अन्वेषण अथवंवेद-भाष्य कां० ६। अनु०६। सू० ५२॥ कर रहीं थीं । ये भावी काल कौ अर्थात् जने वले दिनोंकौ रस्मि्यां है, गए सूर्यके सम-काल कौ घटनाओं का कथन कियाहै।

English

A charm against snakes Let not the serpent slay us, O Gods, with our children and our folk.

अध्याय 6

श्लोक 51.2

आपो॑ अ॒स्मान् मा॒तरः॑ सूदयन्तु घृ॒तेन॑ नो घृ॒तप्वः पुनन्तु ।विश्वं॒ हि रि॒प्रं प्र॒वह॑न्ति दे॒वीरुदिदा॑भ्यः॒ शुचि॒रा पू॒त ए॑मि

āpo asmān mātaraḥ sūdayantu ghṛtena no ghṛtapvaḥ punantu | viśvaṃ hi ripraṃ pravahanti devīrudidābhyaḥ śucirā pūta emi

हिन्दी अर्थ

आयुहैदं विपश्चितं श्रुतां कण्व॑स्य वीरुधं । (आयुदेदम्) पूणं जायुः प्रद, (विपश्चितम्) मेधा का चयन करने वालो जो फि सब प्रकारकेरोगों को अषधरूपहै उसको (आ भारिषम्, मँ विनाश करने वाली (मथर्वं० २।२५।१) । अथवे० २।२५।१ मे इसे ““पुष्निपर्णी' कटा है । विपः मेधाविनाम (निघं° ३।१५) ।

English

Let it not close the opened mouth nor open that which now is closed. Be worship paid unto the black, worship to that with stripes across!

अध्याय 6

श्लोक 51.3

यत् किं चे॒दं व॑रुण॒ दैव्ये॒ जने॑ऽभिद्रो॒हं म॑नु॒ष्या॒३श्चर॑न्ति ।अचि॑त्त्या॒ चेत् तव॒ धर्मा॑ युयोपि॒म मा न॒स्तस्मा॒देन॑सो देव रीरिषः

yat kiṃ cedaṃ varuṇa daivye jane'bhidrohaṃ manuṣyā3ścaranti | acittyā cet tava dharmā yuyopima mā nastasmādenaso deva rīriṣaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० ६1 अनु०६। सू० ५३ अथववेद-भाष्य (१-३) । बहच्छुकः । नानादेवताः । त्रिष्टुभ्; १ जगतो । बड़ा सूयं (दक्षिणया) वृद्धि हारा (पिपतु) मेरा पालन करर; (स्वधा) इन में से प्रत्येक (नः पातु) हमारी र्ना करे। अनुदित परन्तु उदोयमान सूयं (निरुक्त) । परमेष्वरसे प्राथेना की गई हैकिये सब हमारा पालन करे।

English

To the brown viper reverence, reverence to the demon brood! I close together fangs with fang, I close together jaws with jaw. I close together tongue with tongue, I close together mouth with mouth.

अध्याय 6

श्लोक 52.1

भैषज्यम्।१-३ भागलिः।१ सूर्यः, २ गावः, ३ भेषजम्।अनुष्टुप्।उत् सूर्यो॑ दि॒व ए॑ति पु॒रो रक्षां॑सि नि॒जूर्व॑न्।आ॒दि॒त्यः पर्वतेभ्यो वि॒श्वदृ॑ष्टो अदृष्ट॒हा

bhaiṣajyam| 1-3 bhāgaliḥ| 1 sūryaḥ, 2 gāvaḥ, 3 bheṣajam| anuṣṭup| ut sūryo diva eti puro rakṣāṃsi nijūrvan| ādityaḥ parvatebhyo viśvadṛṣṭo adṛṣṭahā

हिन्दी अर्थ

(नः) हमें (रतु) प्राप्त हो; (वेश्वानरः) सब नर-नारियों का हितकारी (अदन्धः) अहिसित तथा (तनूपाः) ततन् का रक्षक परमेश्वर या शारीरिक अग्नि (विश्वा दुरितानि ) सब दृष्फलों का निवारण करता हुआ (नः अन्तः) हमारे भीतर अर्थात् शरीर मे (तिष्ठाति) स्थित रहै । रष्वास, ओर भसुहै शरीर ओर शरीराङ्खों मे संचारी प्राण । शय सथवेवेद-भाष्य॒का० ६ ' अनु° ६। सू० ५४ (वचसा) शारीरिक कान्ति भौर (पयसा) माता के दूध के (सम्, अगन्महि) साथ हम संगत हए है, (तनूभिः) स्थूल, सूक्ष्म तथा कारण ॑ तनुम, अथवा तन् के सर्वाङ्गो के साथ (सम्) हम संगत हुए ह, (शिवेन, मनसा) शिव संकल्पां वाले मन के साथ (सम्) हम संगत हए है।। नवजीवन म (वरीयः) उरुतम उदेश्य (कृणोतु) सफल करे, तथा (तन्वः)

English

A charm for a wound or bruise This is a medicine indeed, Rudra’s own medicine is this,

अध्याय 6

श्लोक 52.2

नि गावो॑ गो॒ष्ठे अ॑सद॒न् नि मृ॒गासो॑ अविक्षत ।न्यू॒३र्मयो॑ न॒दीनं॒ न्य॑१दृष्टा॑ अलिप्सत

ni gāvo goṣṭhe asadan ni mṛgāso avikṣata | nyū3rmayo nadīnaṃ nya1dṛṣṭā alipsata

हिन्दी अर्थ

(अनुमाष्टु ) अनुकूल रूप में शुद्ध करे, ठीक करे । पुनर्जन्म हो जाने पर यह प्राना परमेश्वर से की गई है । उरुतम उदेश्य है, मोक्ष प्राप्ति । ¦ जोतता हूं, (अष्टये) फल की प्राप्ति के लिये (सुम्भामि) से माला को (वधय) तू बढ़ा, (इव) जैसे (वृष्टिः) वर्षां (तृणम्) घास को कां० ६ अनु० ६ । सू० ५५ अथवेवेद-भाष्य ९€ है अग्रणीः (निरुक्त ७1४।१४), तथा सौम है सेनाध्यक्ष (यजु १७।४० ) । अग्नीषोमौ = उभयपद द्विवचन । वेदिक प्रथा ।

English

Wherewith he warns the arrow off one-shafted, with a hundred tips. Besprinkle it with anodyne, bedew it with relieving balm: Strong, soothing is the medicine: bless us therewith that we may live.

अध्याय 6

श्लोक 52.3

आ॒यु॒र्ददं॑ विप॒श्चितं॑ श्रु॒तां कण्व॑स्य वी॒रुध॑म्।आभा॑रिषं वि॒श्वभे॑षजीम॒स्यादृष्टा॒न् नि श॑मयत्

āyurdadaṃ vipaścitaṃ śrutāṃ kaṇvasya vīrudham| ābhāriṣaṃ viśvabheṣajīmasyādṛṣṭān ni śamayat

हिन्दी अर्थ

(अस्मान्) हमे (अभिदासति) उपक्षीण करता, या दास बनाता है, (तम्, सर्वम्) उस सब को (मे) मेरे (सुन्वते) राज्याभिषेक करने वाले, (यज- मानाय) यज्ञ कर रहे सम्राट् के लिये, (रन्धयामसि) हम सब मिल कर उसे उसके वशम करते ह) मे हु है । "दम्, तत्" ये दो पद वाक्यालंकार शूप मेह । अष्टये =, तेषामञ्यानि यतमो षहांति तस्मै पा देवा परं धत्ते सर्वे ॥१॥ १०० अथवेवेद-भाष्य का० ६। अनु० ६1 सू० ५५ (बहवः) नाना, (देवयानाः) व्यापारियों के जाने-आने के (पन्थानः) माग, (ये) जो (द्यावापृथिवी अन्तरा, चुलोक गौर पृथिवी के मध्यमे

English

Let it be health and joy to us. Let nothing vex or injure us. Down with the wound! Let all to us be balm, the whole be medicine.

अध्याय 6

श्लोक 53.1

सर्वतो रक्षणम्।१-३ बृहच्छुक्रः।१ द्यौः, पृथिवि, शुक्रः, सोमः, अग्निः, वायुः, सविता, १ भगः, २ वैश्वानरः, ३ त्वष्टा।त्रिष्टुप्, १ जगती।द्यौश्च॑ म इ॒दं पृ॑थि॒वी च॒ प्रचे॑तसौ शु॒क्रो बृ॒हन् दक्षि॑णया पिपर्तु ।अनु॑ स्व॒धा चि॑कितां॒ सोमो॑ अ॒ग्निर्वा॒युर्नः॑ पातु सवि॒ता भग॑श्च

sarvato rakṣaṇam| 1-3 bṛhacchukraḥ| 1 dyauḥ, pṛthivi, śukraḥ, somaḥ, agniḥ, vāyuḥ, savitā, 1 bhagaḥ, 2 vaiśvānaraḥ, 3 tvaṣṭā| triṣṭup, 1 jagatī| dyauśca ma idaṃ pṛthivī ca pracetasau śukro bṛhan dakṣiṇayā pipartu | anu svadhā cikitāṃ somo agnirvāyurnaḥ pātu savitā bhagaśca

हिन्दी अर्थ

(वहाति) ले चलता है, (तस्मे) उस माग के लिये (देवाः) है व्यापारियों ! (सवे) तुम सव । इह) इस राज्य मे (मा) मक्षे (परिधत्त) मागं के इन ऋतुओं म है देवाः (मन्त्र १) है दिव्य व्यापारियों ! (नः) हमें हमें धारित-पोषित करो । (नः) हमें (गोषु, प्रजायाम्) गौमों ओर कहते ह कि तुम हमें अपना आश्वय प्रदान करो, ताकि हम सुगमता से, कां० ६। अनु० ६ । सू० ५५ अथवेवेद-भाष्य १०१

English

A priest’s prayer for power and glory May Indra Maghavan give me name and glory. May Heaven and Earth, this couple, make me famous.

अध्याय 6

श्लोक 53.2

पुनः॑ प्रा॒णः पुन॑रा॒त्मा न॒ ऐतु॒ पुन॒श्चक्षुः॒ पुन॒रसु॑र्न॒ ऐतु॑ ।वै॒श्वा॒न॒रो नो॒ अद॑ब्धस्तनू॒पा अ॒न्तस्ति॑ष्ठाति दुरि॒तानि॒ विश्वा॑

punaḥ prāṇaḥ punarātmā na aitu punaścakṣuḥ punarasurna aitu | vaiśvānaro no adabdhastanūpā antastiṣṭhāti duritāni viśvā

हिन्दी अर्थ

तेषां वयं संमतौ यश्तियानामपिं भद्रे सौमनसे स्याम ॥र॥ (संवत्सराय) अग्नि के लिये (वृहत्) बहुत (नमः) अश्राहुतियां (कृणुत, कल्याणमय (सौमनसे) उत्तम-मानसिक प्रसन्नता में (अपि) भी हों वायुरनुवत्सरः” (तै० ब्रा० १।४।१०।१) । वत्सर का अथं है “वष”, यथा अग्नि, चन्द्रमा, आदित्य, वाथु, सृखपुवेक वास के लिये हो सक, इस उश से अग्नि मे बहुतायत मे अन्नादि की अहुतियां होनी चाहिए । नमः अन्ननाम (निघं० २।७) । उचित पदार्थो की अहृतिमों से वायु आदि

English

May Savitar the deity make me honoured. Here may the man who gives the guerdon love me. Indra from Heaven and Earth receiveth glory among the plants the Waters have their glory;

अध्याय 6

श्लोक 53.3

सं वर्च॑सा॒ पय॑सा॒ सं त॒नूभि॒रग॑न्महि॒ मन॑सा॒ सं शि॒वेन॑ ।त्वष्टा॑ नो॒ अत्र॒ वरी॑यः कृणो॒त्वनु॑ नो मार्ष्टु त॒न्वो॒३यद् विरि॑ष्टम्

saṃ varcasā payasā saṃ tanūbhiraganmahi manasā saṃ śivena | tvaṣṭā no atra varīyaḥ kṛṇotvanu no mārṣṭu tanvo3yad viriṣṭam

हिन्दी अर्थ

यजुर्वेद (३०।१५)मे निम्नलिखित वत्सरो का कथन हुभा द । यथा (संव शिक्षित करना है । एतदथं उन्हे वायुयानों को चला सकने, उनकी मुरम्मत कर सकने, तीन वर्षो के नामोंका भी कथन हमा है, जिससे कि सिन्न-सिन्न वषं कौ पहिषान देवयानाः; देव है व्यापारी, यथा "दिव् क्रीडा विजिगीषा “व्यवहार । कां० ६। अनु० ६। सू० ५७ अथववेद-भाष्य १०३

English

Even so may we be glorious’mid all the Universal Gods. Indra and Agni were renowned, famous was Soma at his birth; So too am I illustrious, most glorious of all that is.

अध्याय 6

श्लोक 54.1

अमित्रदम्भनम्।१-३ ब्रह्मा।अग्नीषोमौ।अनुष्टुप्।इ॒दं तद् यु॒ज उत्त॑र॒मिन्द्रं॑ शुम्भा॒म्यष्ट॑ये ।अ॒स्य क्ष॒त्रं श्रियं॑ म॒हीं वृ॒ष्टिरि॑व वर्धया॒ तृण॑म्

amitradambhanam| 1-3 brahmā| agnīṣomau| anuṣṭup| idaṃ tad yuja uttaramindraṃ śumbhāmyaṣṭaye | asya kṣatraṃ śriyaṃ mahīṃ vṛṣṭiriva vardhayā tṛṇam

हिन्दी अर्थ

स्वजाय॑ ब्रवै नमो नमां देवज॒नेभ्य॑ः ॥२॥ हो, (तिरस्चिराजये) टेढ़ी रेखाओं वाले सापि के लिये ल ) वच्प्रहार सांप क लिये (नमः) वज्रप्रहार हो, (देवजनेभ्यः) जौर देवजनों के लिये १०२ अथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० ६१ सु° ५६ षान्) भूत्यादि पुरुषों सहित (नः) हमारा (अहिः) सपि (मा) न ) । स्वजाय = सु+ मज गतिक्षेपणयोः

English

A charm to protect cattle and men First, O Arundhatī, protect our oxen and milky kine:

अध्याय 6

श्लोक 54.2

अ॒स्मै क्ष॒त्रम॑ग्नीषोमाव॒स्मै धा॑रयतं र॒यिम्।इ॒मं रा॒ष्ट्रस्या॑भीव॒र्गे कृ॑णु॒तं यु॒ज उत्त॑रम्

asmai kṣatramagnīṣomāvasmai dhārayataṃ rayim| imaṃ rāṣṭrasyābhīvarge kṛṇutaṃ yuja uttaram

हिन्दी अर्थ

याप दिग्यजनों के लिये (नमः) नमस्कार हो । देवाः देवजनाः, यथा देवदत्तः दत्तः । देवजन ह स्प-तथा-विष ¦ अभिलाषा व्यक्त की है, देवजनों से। ये देवजनर्है, देवकोटि के “जम सुगमता से हो सके । इस अथं मे “तेषां यज्ञियानाम् सुमतौ” भादि कायंहैकि “उन गुरुभो,-जो कि व्यापार-यज्ञ कराने की योग्यता रसते है,-को सुमति तथा (ते) तेरे (दता)ऊपर के दान्तो के साथ (वतः ) नीचे फे दान्तौ को (सं हन्मि) ओ मिला देता ह, संहित कर देता हं (ते) तेर (हन्वा) ऊपर के जवाडे के साथ (हनः) नीचे के जादे को (सम् उ) संहित फर देता हृ,

English

Protect each one that is infirm, each quadruped that yields no milk. Let the Plant give us sheltering aid, Arundhatī allied with Gods; Avert Consumption from our men and make our cow-pen rich in milk.

अध्याय 6

श्लोक 54.3

सब॑न्धु॒श्चास॑बन्धुश्च॒ यो अ॒स्मां अ॑भि॒दास॑ति ।सर्वं॒ तं र॑न्धयासि मे॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते

sabandhuścāsabandhuśca yo asmāṃ abhidāsati | sarvaṃ taṃ randhayāsi me yajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

जिह्वा को (सम्) संहित कर देता हू, मिला देता हृ, १ है सांप (आस्ना) तेरे मुख के साथ (आस्यम ) मुख को (सम् उ) संहित कर देता सम्भवतः 'देवजन' की है, जो कि सपैविष चिकित्सक है। आस्यके उत्तर भाग को नीचे के भाग ॐ साथ संदिष्ट करता हूं (सायण) । जन्नबीज बोने पर वह जितने फाल मेँ परिपक्व हो जाता है वह् कान। ददरत्सरमे १. वह सांपके सिरकोदुढृतासे पकडलेतादहै, जिससे सापिन मुख खोल वहू काल । वत्सर है नक्षत्र के उदय होने से अगले दिनम उस कै उदय होने तक का काल, से नाक्षत्र दिन कहते है, पसे ३६० दिन होते है, नाक्षत्र वषं मे। इन

English

I welcome the auspicious Plant, life-giving, wearing every hue. Far from our cattle may it turn the deadly dart which Rudra casts.

अध्याय 6

श्लोक 55.1

सौमनस्यम्।१-३ ब्रह्म।१ विश्वे देवाः, २-३ रुद्रः।जगती, २ त्रिष्टुप्।ये पन्था॑नो ब॒हवो॑ देव॒याना॑ अन्त॒रा द्यावा॑पृथि॒वी सं॒चर॑न्ति ।तेषा॒मज्या॑निं यत॒मो वहा॑ति॒ तस्मै॑ मा देवाः॒ परि॑ धत्ते॒ह सर्वे॑

saumanasyam| 1-3 brahma| 1 viśve devāḥ, 2-3 rudraḥ| jagatī, 2 triṣṭup| ye panthāno bahavo devayānā antarā dyāvāpṛthivī saṃcaranti | teṣāmajyāniṃ yatamo vahāti tasmai mā devāḥ pari dhatteha sarve

हिन्दी अर्थ

(देवाः) है देवजनों ! (सतोकान्) पूर्रपौत्रादि समेत, यथा (सहपुर- 4; कालो या वत्सरो का यथाथं ज्ञान वायुयार्नो के संचालकों के लिये आवश्यक है। १०४ अथववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ६ । सू०५७ अग्रभागो वाले (इषुम्) वाण को भी (अप ब्रवीत्) वेद ने अपाकृत निवा- रित करने वाला कहा है । अर्थात् तद्वारा कि क्षत को निवारित करने (उपषिञ्चत) समीप से सेक करो । (जालाषम्) गमं या प्रतप्त जल (उग्रम्, भेषजम्) उग्र भषज है (तेन) उस ओषध हारा (नः) हमें (जीवसे) जीने के लिये (मृड) है जलं चिकित्सक ! तू सुखी कर।

English

The wooing of a bride With forelock loosened o’er his brow here comes the wooer of the bride, p. a228 Seeking a husband for this maid, a wife for this unmarried man.

अध्याय 6

श्लोक 55.2

ग्री॒ष्मो हे॑म॒न्तः शिशि॑रो वस॒न्तः श॒रद् व॒र्षाः स्वि॒ते नो॑ दधात ।आ नो॒ गोषु॒ भज॒ता प्र॒जायां॑ निवा॒त इद् वः॑ शर॒णे स्या॑म

grīṣmo hemantaḥ śiśiro vasantaḥ śarad varṣāḥ svite no dadhāta | ā no goṣu bhajatā prajāyāṃ nivāta id vaḥ śaraṇe syāma

हिन्दी अर्थ

जल द्वारा धोने से क्षत प्रदेश में कीटाणु-प्रवेश (1761101) नहीं होता । सुख हो, (नः च) ओर हमे (कि चन) कोईभोरोग (मा) न (आममत्) जौषध सूप हौ जाय, (स्वम्) विश्व के सब तत्व (नः) हमारे लिये चकारद्रय समुच्चयाथक हैँ । आममत् --आ-+अम रोगे (चुरादि १. साथणानुसार पाठ है “जलाषम्; ओर अर्थं है "गोमूत्रफेन'' ।

English

Wooer! this girl hath toiled in vain, going to others’ marriages. Now to her wedding, verily, wooer! another maid shall come.

अध्याय 6

श्लोक 55.3

इ॒दा॒व॒त्स॒राय॑ परिवत्स॒राय॑ संवत्स॒राय॑ कृणुता बृ॒हन्नमः॑ ।तेषां॑ व॒यं सु॑म॒तौ य॒ज्ञिया॑ना॒मपि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म

idāvatsarāya parivatsarāya saṃvatsarāya kṛṇutā bṛhannamaḥ | teṣāṃ vayaṃ sumatau yajñiyānāmapi bhadre saumanase syāma

हिन्दी अर्थ

अर्थात् पाप क्षीण हो जाय, उसका क्षय हो जाय। य॒शस॑ मा देवः सविता कृगोतु भियो दातुरहै्षिणाया इह स्याम् ॥१॥ (कृणोतु) करे, (इमे उभे) ये दोनों (दावापृथिवो) चुलोक भौर पृथिवी (यशसम्) यशस्वो करे । (सविता देवः) उत्पादकं पितृदेव (मा) गृह्ञ (यशसम्) यशस्वी (कृणोतु) करे ताकि (इह) इस जीवन में (दक्षिणायाः) सम्राट् मूङ्षे एसे पद पर आरूढ करे जिस सेमेरा यश बद, म एसे श॒ भकमं करूं जिससे दोनो लोकोमे मेरा यश फले, मेरा पितृदेव मुद सुशिक्षित करे, जिससे र्म यशस्वी हौ जाऊ, भौर सबके दाता परमेश्वर (यथा) जैसे (इन्दः) सूये (यावापृथिग्योः) ुलोक "भौर पृथिवी में

English

Dhātar upholds the spacious earth, upholds the sky, upholds the Sun. Dhātar bestow upon this maid a husband suited to her wish!

अध्याय 6

श्लोक 56.1

सर्पेभ्यो रक्षणम्।१-३ शन्तातिः।१ विश्वे देवाः, २-३ रुद्रः।१ उष्णिग्गर्भा पथ्यापङ्क्तिः, २ अनुष्टुप्, ३ निचृत्।मा नो॑ देवा॒ अहि॑र्वधी॒त् सतो॑कान्त्स॒हपु॑रुषान्।सम्य॑तं॒ न वि ष्प॑रद् व्यात्तं॒ न सं य॑म॒न्नमो॑ देवज॒नेभ्यः॑

sarpebhyo rakṣaṇam| 1-3 śantātiḥ| 1 viśve devāḥ, 2-3 rudraḥ| 1 uṣṇiggarbhā pathyāpaṅktiḥ, 2 anuṣṭup, 3 nicṛt| mā no devā ahirvadhīt satokāntsahapuruṣān| samyataṃ na vi ṣparad vyāttaṃ na saṃ yamannamo devajanebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(यथा) शंसेः (आपः) जल (ओषधीषु) अत्न प्रदान कै दहतु होनेसे हम (यशसः). कोत्तिमान् (स्याम) हौ जाय । इस मन्त्र की व्याख्या के लिए देखो (अथवं ° ६।३६।२) । अधनवे वयसे क्षमं यच्छ चतुष्पदे ॥१॥ अथवेवेद-भाष्य॒कां० ६॥ अनु० ६। सू०५६

English

A prayer for prosperity and greatness The Waters send me what is sweet and pleasant, Sūra bring all

अध्याय 6

श्लोक 56.2

।नमो॑ऽस्त्वसि॒ताय॒ नम॒स्तिर॑श्चिराजये ।स्व॒जाय॑ ब॒भ्रवे॒ नमो॒ नमो॑ देवज॒नेभ्यः॑

| namo'stvasitāya namastiraścirājaye | svajāya babhrave namo namo devajanebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(षेनुभ्यः) दूध देने बाली गौओं के लिय, (अधेनवे) न दध देने वाली (वयसे) छोटी आयु वाली गौ के लिये, (चतुष्पदे) तथा अन्य चौपाए पद्यु के लिये (शमं) सुख (यच्छ) प्रदान कर । सूखा देने वालो, स्वस्थ कर देने वाली ओौषध सहदेवी, मन्त्र २ । ( मरुन्धती ) घावों को पी कर सूखा देने वालो, स्वस्थ कर देने वाली (सहदेवी) सहदेवी (ओषधिः) ओषधि (शमं) सुख (यच्छतु) प्रदान करे ।

English

I need for light and vision! The deities, and all of pious nature, and Savitar the God afford me freedom! I set the heaven and the earth asunder, I brought all seven sea- sons into being.

अध्याय 6

श्लोक 56.3

सं ते॑ हन्मि द॒ता द॒तः समु॑ ते॒ हन्वा॒ हनू॑ ।सं ते॑ जि॒ह्वया॑ जि॒ह्वां सम्वा॒स्नाह॑ आ॒स्यऽम्

saṃ te hanmi datā dataḥ samu te hanvā hanū | saṃ te jihvayā jihvāṃ samvāsnāha āsya'm

हिन्दी अर्थ

करने वाली, (जीवलाम्) जीवन देने वाली, सहदेवी ओषध को, वाले व्र को (नः) हमारी (गोभ्यः) गौभों से, (दूरम्) दुर (नयतु) ले जाय, रखे । अर्थात् गोशाला का निर्माण इस प्रकार फा होना चाहिए कि उस पर विद्युत् का प्रभावन हो सके । सहदेवी ओषधि दो प्रकार की होती है सहदेवी मौर सहदेवी बष्टी । सहदेवी के एूल बगनी रंग के भौर बीज कालो जीरी के समान होते है । इस का पौदात्रिरोष, क्षप तथा दमा, खांसी मे लाभदायक हदोतादहै, तथा (अर्यमा) अन्धकार आदि भरियों का नियमन करने वाला आदित्य (आ याति) आया है (पुरस्तात्) हमारे संमुख या पूवेमें, (अस्ये) इस के लिये (पतिम्) पति को (उत) तथा (मजानये) जाया रदित पुरुष के लिये (जायाम्) जाया को (इच्छन् ) चाहता हुञा ।

English

My word is truth, what I deny is falsehood, above celestial Vāk, above the nations. I gave existence to the earth and heaven, I made the seasons and the seven rivers.

अध्याय 6

श्लोक 57.1

जलचिकित्सा।१-३ शन्तातिः।रुद्रः।१-२ अनुष्टुप् ३ पथ्याबृहती।इ॒दमिद् वा उ॑ भेष॒जमि॒दं रु॒द्रस्य॑ भेष॒जम्।येनेषु॒मेक॑तेजनां श॒तश॑ल्यामप॒ब्रव॑त्

jalacikitsā| 1-3 śantātiḥ| rudraḥ| 1-2 anuṣṭup 3 pathyābṛhatī| idamid vā u bheṣajamidaṃ rudrasya bheṣajam| yeneṣumekatejanāṃ śataśalyāmapabravat

हिन्दी अर्थ

इच्छन् = चाहता हुभा, इच्छा करता हुआ । इच्छा या चाहूना चेतन का धर्महै, जडका नहीं। आदित्य जड है, चेतन नहीं, अतः आदित्य का २. अथवा “अगि गतौ +- रः ओणादिक प्रत्यय (४।१०२-१०४), बाहुलकात् इस कन्या के (समनम्) सामाजिक जोवन सम्बन्धो विवाह मे (आ परमेश्वर ! (नु) निचय से (अन्याः) अन्य धाताम्या अग्रे पतिं दधातु मतिकाम्यम् ॥२॥

English

My word is truth; what I deny is falsehood, I who rejoice in Agni’s, Soma’s friendship. A prayer for purification and riches

अध्याय 6

श्लोक 57.2

जा॒ला॒षेणा॒भि षि॑ञ्चत जालाषेणोप॑ सिञ्चत ।जा॒ला॒षमु॒ग्रं भे॑ष॒जं तेन॑ नो मृड जी॒वसे॑

jālāṣeṇābhi ṣiñcata jālāṣeṇopa siñcata | jālāṣamugraṃ bheṣajaṃ tena no mṛḍa jīvase

हिन्दी अर्थ

(धाता) विधाता ने (पृथिवीम्) पृथिवी को (दाधार) धारित किया है (धाता) विधाता (याम्) दुलोक को (उत्त) तथा (सूर्यम्) सूयं को अयमा को धाता कहा है । उस धाता ने सूयं काभो धारण किया हुभाहै) मं देवा उत॒ रिश्च तणोजा म्यं देवः संदिता व्यचो धात् ॥१॥ (मद्यम्) मेरे" लिये (आपः) नदियों के जल, (मधुमत्) मधुर-जल १. मेरी प्रसन्नताके लिये, यामेरी आज्ञाके पालन के लिये; भाज्ञामंग होने अथवेवेद-भाष्य का० ६। अतरु९। सू० ६१

English

Cleanse us Vaisvānara with rays of splendour! With breath and clouds let quickening Vāyu cleanse us.

अध्याय 6

श्लोक 57.3

शं च॑ नो॒ मय॑श्च नो॒ मा च॑ नः॒ किं च॒नाम॑मत्।क्ष॒मा रपो॒ विश्वं॑ नो अस्तु भेष॒जं सर्वं॑ नो अस्तु भेष॒जम्

śaṃ ca no mayaśca no mā ca naḥ kiṃ canāmamat| kṣamā rapo viśvaṃ no astu bheṣajaṃ sarvaṃ no astu bheṣajam

हिन्दी अर्थ

का० ६1 अनु ९ । सू० ६१ अथववेवेद-भाष्य १०६ घारण कयि. हए ह । (मह्यम्) मेरे लिये हँ (देवाः) देव, (उत) तथा लिये (देवः सविता) चुतिमान् सविता ने (व्यचः) विस्तार (धात्) स्थापित कियादहै। ¢ „4 उदित सूयं जब कि आकाश तो चमक जातादहै, परन्तु पृथिवी पर ५५ अन्धकार शेष रहता है (निरुक्त १२।२।१४) । सविता के उदय होने से रवं अन्धकार था, दूर की वस्तु दौखती न थी ! सविता के उदय होने पर (सहम्) मैने (पृथिवीम्) पृथिवी को (उत) तथा (बयाम्) द्युलोक कौ (विवेच) विवेक पूवेक पृथक्-पृथक् किया है; (अहम्) मने (सप्त ऋतन) सात ऋतुभों को (साकम्) साथ-साथ (अजनयम्) पेदा किया हे।

English

And, rich in milky rain, let Earth and Heaven, worshipful, holy, cleanse us with their water. Lay hold on Sūnritā whose forms and regions have fair smooth backs, her who is all men’s treasure.

अध्याय 6

श्लोक 58.1

यशः प्राप्तिः।१-३ अथर्वा (यशस्कामः)।बृहस्पतिः, १-२ इन्द्रः, द्यावापृथिवि, सविता, ३ अग्निः, इन्द्रः, सोमः।१ जगती, २ प्रस्तारपङ्क्तिः, ३ अनुष्टुप्।य॒शसं॒ मेन्द्रो॑ म॒घवान् कृणोतु य॒शसं॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे।य॒शसं॑ मा दे॒वः स॑वि॒ता कृ॑णोतु प्रि॒यो दा॒तुर्दक्षि॑णाया इ॒ह स्या॑म्

yaśaḥ prāptiḥ| 1-3 atharvā (yaśaskāmaḥ)| bṛhaspatiḥ, 1-2 indraḥ, dyāvāpṛthivi, savitā, 3 agniḥ, indraḥ, somaḥ| 1 jagatī, 2 prastārapaṅktiḥ, 3 anuṣṭup| yaśasaṃ mendro maghavān kṛṇotu yaśasaṃ dyāvāpṛthivī ubhe ime| yaśasaṃ mā devaḥ savitā kṛṇotu priyo dāturdakṣiṇāyā iha syām

हिन्दी अर्थ

वदामि) म ही कहता हं, (च) भौर (विशः परि) सब प्रजा को (देवीम्, वाचम्) दिन्य वेदवाणी (अहम् वदामि) मै कहता हूं । विमितं तरिशदङ्ध प्रयोदशं मासं यो निर्मिमीते” (अथं १३।३।८) । यहं १३बां मास, सौरमासों भौर चान्द्रमासों के वर्षो मे दिनोंद्ारा हुई विषमता की पूति के लिये ह । परमेश्वर सत्य शौर भनृत का भेद वेदवाक् व्रारा २. अथवा देवाः विद्वांसः, तपोजाः तपस्विनः । ११० अथहैमेद-भाष्य कां० ६। धनु° ६। सू० ६१ ने सत्य ओर अनृत के स्वकूपों को देख कर उन का भेद दर्शया है । उस

English

Through her may we, in sacrificial banquets singing her glory, be the lords of riches. For splendour, seize on her whom all men worship, becoming pure yourselves, and bright,

अध्याय 6

श्लोक 58.2

यथेन्द्रो॒ द्यावा॑पृथि॒व्योर्यश॑स्वा॒न् यथाप॒ ओष॑धीषु॒ यश॑स्वतीः ।ए॒वा विश्वे॑षु दे॒वेषु॑ व॒यं सर्वे॑षु य॒शसः॑ स्याम

yathendro dyāvāpṛthivyoryaśasvān yathāpa oṣadhīṣu yaśasvatīḥ | evā viśveṣu deveṣu vayaṃ sarveṣu yaśasaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

अहं सत्यमतं यद् वदामि यो अगनीषोपावयंषे सखाया ॥२॥ (अहम्) मै ने (जजान) पेदा किया है (पृथिवीम्) पृथिषी को, (उत) तथा (चाम्) दुलोक को, (अहम्) मैने (तृन्) ऋतुगो को, (सप्त रूप है उस का (अहम् वदामि) मै कथन करता ह, (यः) जिस र्मैनेकि (सखायौ) परस्पर-सखि रूप (अग्नीषोमौ) अग्नि भौर सोम का (अजुषे) सेवन किया है सुष्ट्युत्पादन मे सात प्रकार की नदियां रई ग्धा आदि (ऋ १०।७५।५)ये काकुदं सुम्यं सुषिरामिव ॥” (ऋ० ८।६६।१२). (निरुक्त ५।४।२७) ।

English

and brilliant. Here, through our prayer rejoicing in the banquet, long may we look upon the Sun ascending. The symbolical liberation of a sacrificial victim

अध्याय 6

श्लोक 58.3

य॒शा इन्द्रो॑ य॒शा अ॒ग्निर्य॒शाः सोमो॑ अजायत ।य॒शा विश्व॑स्य भू॒तस्या॒हम॑स्मि य॒शस्त॑मः

yaśā indro yaśā agniryaśāḥ somo ajāyata | yaśā viśvasya bhūtasyāhamasmi yaśastamaḥ

हिन्दी अर्थ

अथवा सात प्रकार के भौम समुद्र । जाता है तोये परस्पर सखा के रूपमे योनिमे वासकरतेर्हँ भौर दोनों का सेवन करता है, सहायता लेताहै। हसी प्रकार “तस्मादा (वेश्वानरः) सब नर-नारियों का हितकारी सूर्यं (रश्मिभिः) रश्मयो द्वारा (नः) हमे (पुनातु) पवित्र करे; (वातः) वायु (प्राणेन) प्राण सत्यनियमों वाली, (यज्ञिये) यज्ञो मेँ साधनरूप (चावापुथिवी) घौ भौर पृथिवी (पयसा) जल द्वारा (नः) हमे (पुनोताम्) पवित्र करं ।

English

That collar round thy neck, not to be loosened, which Nirriti the Goddess bound and fastened, I loose for thy long life and strength and vigour. Eat, liberated, food that brings no sorrow.

अध्याय 6

श्लोक 59.1

औषधिः।१-३ अथर्वा।रुद्रः, अरुन्धती औषधिः।अनुष्टुप्।अ॒न॒डुद्भ्य॒स्त्वं प्र॑थ॒मं धे॒नुभ्य॒स्त्वम॑रुन्धति ।अधे॑नवे॒ वय॑से॒ शर्म॑ यच्छ॒ चतु॑ष्पदे

auṣadhiḥ| 1-3 atharvā| rudraḥ, arundhatī auṣadhiḥ| anuṣṭup| anaḍudbhyastvaṃ prathamaṃ dhenubhyastvamarundhati | adhenave vayase śarma yaccha catuṣpade

हिन्दी अर्थ

(वैश्वानरीम्) सब नर-नारियो के लिये हितकारिणी, (सूनृताम्) प्रि उस वेदवाणी द्वारा (सधमादेषु) सामाजिक हषो अर्थात् उत्सवो में स्याम) एेष्वयों के स्वामी हों । ११२ अथरवेवेद-भाष्य का०६॥। अनु० ७1 सू० ६३ है । सधमादेषु = सहस्य सधादेशः-+ मदी हषं (भ्वादिः) ।

English

To thee, sharp-pointed Nirriti, be homage! Loose thou the binding fetters wrought of iron. To me, in truth, again doth Yama give thee. To him, to Yama, yea, to Death, be homage! Compassed by death which comes in thousand manners, here art thou fastened to the iron

अध्याय 6

श्लोक 59.2

शर्म॑ यच्छ॒त्वोष॑धिः स॒ह दे॒वीर॑रुन्ध॒ती।कर॒त् पय॑स्वन्तं गो॒ष्ठम॑य॒क्ष्मां उ॒त पूरु॑षान्

śarma yacchatvoṣadhiḥ saha devīrarundhatī| karat payasvantaṃ goṣṭhamayakṣmāṃ uta pūruṣān

हिन्दी अर्थ

वेद्वानरीं वचस आ रमध्वं शुद्धा भवन्तः शलयः पावकाः । नारियों के लिये हितकारिणो वेदवाणो का स्वाध्याय (आरभध्वम्) . मन से शुचि तथा शरोर से (पावकाः) पवित्र होकर (इह) इस पाथिव जीवन में, (इडया!) अन्न दारा सहभोजों द्वारा (सधमादम्) पारस्परिक चिरकाल के लिये (उच्चरन्तम्) ऊपर भाकाशमे विचरते (सूयम्) सूय को (पश्येम) हम देखं । नस-नाडियों मे (आ बबन्ध) सव म्रोर वान्ध रखीदहै, (यत्) जो कि ।

English

pillar. Unanimous with Yama and the Fathers, make this man rise and reach the loftiest heaven.

अध्याय 6

श्लोक 59.3

वि॒श्वरू॑पां सु॒भगा॑म॒च्छाव॑दामि जीव॒लाम्।सा नो॑ रु॒द्रस्या॒स्तां हे॒तिं दू॒रं न॑यतु॒ गोभ्यः॑

viśvarūpāṃ subhagāmacchāvadāmi jīvalām| sā no rudrasyāstāṃ hetiṃ dūraṃ nayatu gobhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(अविमोक्यम्) खोली नहीं जा सकती, (ते) तेरी (तत्) उस रस्सीको (जामुषे) दीं तथा स्वस्थ जीवन के लिये, (वचसे) तेज के लिये, (बलाय) कां० ६1 अनु० ७। सु० ६३ अयववेद-माष्य ११३ निच्् तिः कच्छापत्तिः (निरत २।२।८) । खाने में असंग्रम के कारण . वस्तुभों के अधिक प्रथोगसे प्रीवा की नस नाडियां सूज जाती रहै । अतः आघायं द्वारा प्रेरित होकर खाने मे मधुर अन्न का सेवन करना चाहिए ।

English

Thou, mighty Agni, good and true, gatherest up all precious things. Bring us all treasures as thou art enkindled at libation’s place. To promote unanimity in an assembly

अध्याय 6

श्लोक 60.1

पतिलाभः।१-३ अथर्वा।अर्यमा।अनुष्टुप्।अ॒यमा या॑त्यर्य॒मा पु॒रस्ता॒द् विषि॑तस्तुपः ।अ॒स्या इ॒चछन्न॒ग्रुवै॒ पति॑मु॒त जा॒याम॒जान॑ये

patilābhaḥ| 1-3 atharvā| aryamā| anuṣṭup| ayamā yātyaryamā purastād viṣitastupaḥ | asyā icachannagruvai patimuta jāyāmajānaye

हिन्दी अर्थ

(तिरमतेजः) है तिग्म ओर तेज वस्तुओं वाली (निक ते) कृच्छापत्ति (ते) तेरे शमन के लिये (नमः) उचित अन्न का प्रयोग (भस्तु) हौ, (विचृत) तु खोल दे । (यमः) नियन्ता परमेश्वर (त्वा) तुक्ष है रूण (यमाय) नियन्ता" परमेश्वर के किये (मृत्यवे) जो कि मृत्युः करता है (नमः अस्तु) नमस्कार हो । है । एसे पदार्थो के अधिक खाने-पोने से गल बन्ध हो जातादहै, गला रुग्ण हो जाता है। नमः अन्ननाम (निघं० २७) नमः का अर्थं नमस्कारतो प्रसिद्ध ही है। विचृत=वि+चृती हिसाग्रन्थनयोः (तुदादिः). वि (विगत करना ) +- चत (वन्धन से) 1 परमेषवर का नाम मृघ्यु भहै । यथा'स एव हे शिष्य ! तुजे स्वस्थ कर मृज प्रदान किया हि

English

Agree and be united: let your minds be all of one accord, Even as the Gods of ancient days, unanimous, await their share.

अध्याय 6

श्लोक 60.2

अश्र॑मदि॒यम॑र्यमन्न॒न्यासां॒ सम॑नं य॒ती।अ॒ङ्गो न्वऽर्यमन्न॒स्या अ॒न्याः सम॑न॒माय॑ति

aśramadiyamaryamannanyāsāṃ samanaṃ yatī| aṅgo nva'ryamannasyā anyāḥ samanamāyati

हिन्दी अर्थ

को द्विजन्मा बनाकर नवजीवन देने वाला, यथा “आचार्यो मृत्युः” (मयं ११।५।१४। षस अथं मे (“मह्यम्" दारा ब्रह्मचारी के पिता का निदेश हमा ह। ११४ अथवेवेद-भाष्य॒का० ६ । अनु० ७ । सू० ६३ हे निकंति अर्थात् कच्छापति ! (इह) इस मरत्य॑लोक में (अय- स्मधै) लोहनि्मित (दुपदे) पैरकीबेडीमेंतु (बेधिष) बान्धती दहै, तो गुरुम के साय (संविदानः) एेकमत्य को प्राप्त हो जा उनके निर्देशानु- सार निज जीवनचर्या कर , मौर है भाचायं ! तु (इमम्) इस शिष्य को , पितुभिः = विद्या प्रदाता गुर भौ पिता के सदृश ह । यथा--

English

The rede is common, common the assembly, common the law, so be their thoughts united. I offer up your general oblation: together entertain one common purpose. One and the same be your resolve, be all your hearts in har- mony:

अध्याय 6

श्लोक 60.3

धा॒ता दा॑धार पृथि॒वीं धा॒ता द्यामु॒त सूर्य॑म्।धा॒तास्या अ॒ग्रुवै॒ पतिं॒ दधा॑तु प्रतिका॒म्यऽम्

dhātā dādhāra pṛthivīṃ dhātā dyāmuta sūryam| dhātāsyā agruvai patiṃ dadhātu pratikāmya'm

हिन्दी अर्थ

१टस्पदे समिध्यसे स नो वसून्या भ॑र ॥४॥ या इस पाथिव शरीर के हृदय-स्थल में (समिष्यसे) मु प्रदीप्त होता च, . (सः) वह तु (नः) हमे (वसूनि) वास योग्य उत्तम गृणरूपी सम्पत्तियां गृङ ओर शिष्यो के भिवास स्थान आश्रम मे या उपासनालयमें कां० ६। अनु० ७ । सु० ६४ अथवववेद-भाष्य ११५

English

One and the same be all your minds that all may happily con- sent. A sacrificial charm against enemies

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।