Atharva Veda
19
अध्याय 19 / 20

Kanda 19

काण्ड 19

453 श्लोकभाग 6/7 · श्लोक 49.1–66.1

पूर्ण अध्याय पाठ76 श्लोक

अध्याय 19

श्लोक 49.1

रात्रिः।१-१० गोपथः, भरद्वाजश्च।रात्रिः।अनुष्टुप्, १-५, ८ त्रिष्टुप्, ६ आस्तारपङ्क्तिः, ७ पथ्यापङ्क्तिः, १० त्र्यवसाना इ॒षि॒रा योषा॑ युव॒तिर्दमू॑ना॒ रात्री॑ दे॒वस्य॑ सवि॒तुर्भग॑स्य ।अ॒श्व॒क्ष॒भा सु॒हवा॒ संभृ॑तश्री॒रा प॑प्रौ॒ द्यावा॑पृथि॒वी म॑हि॒त्वा

rātriḥ| 1-10 gopathaḥ, bharadvājaśca| rātriḥ| anuṣṭup, 1-5, 8 triṣṭup, 6 āstārapaṅktiḥ, 7 pathyāpaṅktiḥ, 10 tryavasānā iṣirā yoṣā yuvatirdamūnā rātrī devasya saviturbhagasya | aśvakṣabhā suhavā saṃbhṛtaśrīrā paprau dyāvāpṛthivī mahitvā

हिन्दी अर्थ

करनेवाला, (भूरिरेताः) प्रशूतोत्पादन दाक्तिवाला, (भजरः ) जरारहित, जीणं न होनेवाला, सदागतिक (कालः) काल (वहति ) संसार-रथ का . (वहति) वहन कर रहा है । (कवयः) क्रान्तदर्शी, दूरदर्शी (विपरिचतः) मेघावी (तम्) उस पर (गा रोहन्ति) भ्रारोहण करते है, उसे नियन्ति

English

Yes, Rāmyā is the name thou hast assumed. The men who fain. would spoil. My wealth do thou annoy, O Night, that not one robber may appear, none may a second time

अध्याय 19

श्लोक 49.2

अति॒ विश्वा॑न्यरुहद् गम्भी॒रो वर्षि॑ष्ठमरुहन्त॒ श्रवि॑ष्ठाः ।उ॒श॒ती रात्र्यनु॒ सा भ॒द्राभि ति॑ष्ठते मि॒त्र इ॑व स्व॒धाभिः॑

ati viśvānyaruhad gambhīro varṣiṣṭhamaruhanta śraviṣṭhāḥ | uśatī rātryanu sā bhadrābhi tiṣṭhate mitra iva svadhābhiḥ

हिन्दी अर्थ

काल अद्व के समान मेधावियों का सहायक होता है, मेषावियों दारा नियन्त्रित होता है । । एषः कालः) यह काल (सप्त चक्रान्) सात चक्रं को (वहति) वहन करता है, उन्हँ चला रहा है । (मरस्य) हस काल के चक्रोंकी (सप्त नाभीः) सात नाभियां ९५5 ह । (नु) भौर निदवय से (भ्रमृतम्) भमर परमेदवर (श्रक्षः) इन नाभि्यों मेँ लगी धुरादहै। (सः) वहु काल (इमा विष्वा भुवनानि) इन सब भर्थात् सात चक्राकार मुवो को देवः ) प्रथम देव अर्थात् परमे्बर के (नु) सदृश (ईयते) सक्रिय ये सात" चक्राकार लोक । इन चक्रं में प्रत्येक की एक-एक नाभिं १8५७ या 0भा6 केन्द्र है, गौर इन नाभयो मेँ परमेदवरखूपी धुरा

English

Thou lovingly, for me with eyes to se: them, hast bound on thee heaven’s stars as thine adornment.

अध्याय 19

श्लोक 49.3

वर्ये॒ वन्दे॒ सुभ॑गे॒ सुजा॑त॒ आज॑ग॒न् रात्रि॑ सु॒मना॑ इ॒ह स्या॑म्।अ॒स्मांस्त्रा॑यस्व॒ नर्या॑णि जा॒ता अथो॒ यानि॒ गव्या॑नि पु॒ष्ठ्या

varye vande subhage sujāta ājagan rātri sumanā iha syām| asmāṃstrāyasva naryāṇi jātā atho yāni gavyāni puṣṭhyā

हिन्दी अर्थ

की अभिन्यक्ति था उत्पत्ति नियत कालों मेँ ही होता है । नु उपमावाचकं। उपग्रह भ्रादिं चक्राकार=गोलाङृति लोक । ३४४ भयरववेद-माष्य का० १९ सु० ५३

English

Whatever robber comes to-day, mischievous mortal enemy. Let Night go forth, encounter him, and smite away his neck and head; His feet that he may walk no more, his hands that he may do no harm.

अध्याय 19

श्लोक 49.4

सिं॒हस्य॒ रात्र्यु॑श॒ती पीं॒षस्य॑ व्या॒घ्रस्य॑ द्वी॒पिनो॒ वर्च॒ आ द॑दे ।अश्व॑स्य ब्र॒ध्नं पुरु॑षस्य मा॒युं पु॒रु रू॒पाणि॑ कृणुषे विभा॒ती

siṃhasya rātryuśatī pīṃṣasya vyāghrasya dvīpino varca ā dade | aśvasya bradhnaṃ puruṣasya māyuṃ puru rūpāṇi kṛṇuṣe vibhātī

हिन्दी अर्थ

३८८. पृणेः कुम्मो ऽधि काल आितस्तं बे पश्यामो बुषा च सन्तः। (णेः कुम्भः) पूर्णं कुम्भ राशि (काले) काल के आश्रय (अधि) भर्थात् जीवित हम (व नु) निरय से (तम्) उस कम्म राचि को (बहुधा) प्रायः या बहत प्रकार से (पद्यामः) देखते है । (सः) बह काल (इमा है । (तम्) उस (कालम्) काल को (राहुः) कहते ह किं वह (परमे

English

The robber who comes hitherward goes crushed and mutilated hence, Goes hence, goes far away from us, goes hence and bears no spoil away.

अध्याय 19

श्लोक 49.5

शि॒वां रात्रि॑मनु॒सूर्यं॑ च हि॒मस्य॑ मा॒ता सु॒हवा॑ नो अस्तु ।अ॒स्य स्तोम॑स्य सुभगे॒ नि बो॑ध॒ येन॑ त्वा॒ वन्दे॒ विश्वा॑सु दि॒क्षु

śivāṃ rātrimanusūryaṃ ca himasya mātā suhavā no astu | asya stomasya subhage ni bodha yena tvā vande viśvāsu dikṣu

हिन्दी अर्थ

राश्चिचक्र मे १ बीं है । यथा-मेष, वष, मिथुन, ककं, सिह, कन्या, तुला, वृदिचक, घन, मकर कुम्भ, मीन । कम्म = वण्शां८७, 706 अन्शौ बहूधा पृथिवी राकिचक्त में गति करती हई स्थान बदलती रहती गोचर होती ह, पौर कभी दुष्टिगोचर नहीं होती । तथा पृथिवीं कै स्थान-

English

A hymn to Night for protection and prosperity 261 Blind him and make him headless, Night! the serpent with the pungent breath.

अध्याय 19

श्लोक 49.6

स्तोम॑स्य नो विभावरि॒ रात्रि॒ राजे॑व जोषसे ।आसा॑म॒ सर्व॑वीरा॒ भवा॑म॒ सर्व॑वेदसो व्यु॒च्छन्ती॒रनू॒षसः॑

stomasya no vibhāvari rātri rājeva joṣase | āsāma sarvavīrā bhavāma sarvavedaso vyucchantīranūṣasaḥ

हिन्दी अर्थ

(निर० १३।१।१२) । तथा “ (ऋचः) ऋग्वेदादि वेदमान्र से प्रतिपादित वणन यों नहीं किया, इसका एक विशेष कारण है । वह् यष कि ५ का० १६ । सु० ५३ भयर्वेवेद-माष्य ३४१५ लगभग २१ जनवरी को कम्भरारि में वेल करता है, प्रौर एकक मास

English

Strike from his head the wolf’s two eyes, and dash the thief against a post. Those oxen that are thine, O Night, with sharpened horns and rapid pace,

अध्याय 19

श्लोक 49.7

शम्या॑ ह॒ नाम॑ दधि॒षे मम॒ दिप्स॑न्ति॒ ये धना॑ ।रात्री॒हि तान॑सुत॒पा यस्ते॒नो न वि॒द्यते॒ यत् पुन॒र्न वि॒द्यते॑

śamyā ha nāma dadhiṣe mama dipsanti ye dhanā | rātrīhi tānasutapā yasteno na vidyate yat punarna vidyate

हिन्दी अर्थ

कृम्मराशि में रहकर लगभग २ १फरवरी को १२वीं राशि "मीन" भे भरवेश करता है । जब तक सूर्यं कृम्भराशिमें रहता है, तब तक कम्म का देन “पषटयामः" शब्द हलिन के. भथं हैँ कि “सम्पूणं कम्म को .हम देखते है", यह तभी सम्भव हो सक्ता है, जब कि सूर्यं इतनी दूर चला जाय किं उसकी

English

With those transport us safe to-day o’er difficulties everywhere. Uninjured in our bodies may we pass through each succeeding night, And let malignities fail to pass, as men without a boat the depth.

अध्याय 19

श्लोक 49.8

भ॒द्रासि॑ रात्रि चम॒सो न वि॒ष्टो विष्वं॒ गोरू॑पं युव॒तिर्बि॑भर्षि ।चक्षु॑ष्मती मे उश॒ती वपूंषि॒ प्रति॒ त्वं दि॒व्या न क्षाम॑मुक्थाः

bhadrāsi rātri camaso na viṣṭo viṣvaṃ gorūpaṃ yuvatirbibharṣi | cakṣuṣmatī me uśatī vapūṃṣi prati tvaṃ divyā na kṣāmamukthāḥ

हिन्दी अर्थ

लगभग जब सूर्यं पहुंच जाता है, तभी कूम्भराशि का पूणं दर्शन हो सकता है । मेषराशि भे यं लगभग २१ मानम प्रवेश करतादहै, मरौर २१ माघं होतादहै, जोकि संवत्सर का भारम्भिक मास है। इस संवत्सरारम्भ को भ्रथवा-- विवाह तथा नवशाला प्रवेश का भ्रपना-मपना निर्िचित काल होता । जिस काल में जिसका विवाह दहो, तथा जिस काल में नव- शाला भे प्रवेश करना हो, बह-वहं काल उस-उस् विवाह का, तथा उस- ६-७) मेँ चार कृम्भों का वर्णन है । यथा-"“धृतहदा मधुकूलाः सुरोदकाः

English

As millet hurried through the air before us is beheld no more. So cause the man to vanish, Night, who plans to do us injury.

अध्याय 19

श्लोक 49.9

यो अ॒द्य स्ते॒न आय॑त्यघा॒युर्मर्त्यो॑ रि॒पुः ।रात्री॒ तस्य॑ प्र॒तीत्य॒ प्र ग्री॒वाः प्र शिरो॑ हनत्

yo adya stena āyatyaghāyurmartyo ripuḥ | rātrī tasya pratītya pra grīvāḥ pra śiro hanat

हिन्दी अर्थ

का वर्णनहै। हृदभ्रौर कृलका एकी षथंहै- सरोवर । कूलम् = 00110 (शापे), गौए घृत की सरोवर है, भौर मधुर दुध की सरोवर है। मन्त्र.४।३४।७ भ चार प्रकारके चार कुम्भो को धर में रखते का विघान किय ई । ये कृम्म सुरोदक क्षीर (वघ) उदक भौर दधिसे पूणं होने चाहिए । “सुरोदक का प्रसिप्राय है"घुरावत् =भमिषव (01511810) )

English

The thief hast thou kept far away, the robber driver of our kine. Even him who having covered up the horse’s head would lead him off. If dealing treasure thou hast come to-day, O highly favoured

अध्याय 19

श्लोक 49.10

प्र पादौ॒ न यथाय॑ति॒ प्र हस्तौ॒ न यथाशि॑षत्।यो म॑लि॒म्लुरु॒पाय॑ति॒ स संपि॑ष्टो॒ अपा॑यति ।अपा॑यति॒ स्वपा॑यति॒ शुष्के॑ स्था॒णावपा॑यति

pra pādau na yathāyati pra hastau na yathāśiṣat| yo malimlurupāyati sa saṃpiṣṭo apāyati | apāyati svapāyati śuṣke sthāṇāvapāyati

हिन्दी अर्थ

95 = सनन 0 का ००००० ज ज ०७० ००००७. ग ७०० ०० = ० का० १९1 सुऽ ५३ प्रय्ववेद-माष्य ३४३ अर्वः = “एको भशवो वहति प्तनासादित्यः" (निर्० ४।४।२७)। सप्तरदिमः== सात प्रकार की किरणे है--लाल, पीत, नारङ्गी वरणं, हरित,

English

appear. Thou like a well-wrought cup, O Night, art lovely: thou, a. young maid, art formed in perfect beauty.

अध्याय 19

श्लोक 50.1

रात्रिः।१-७ गोपथः।रात्रिः।अनुष्टुप्।अध॑ रात्रि तृ॒ष्टधू॑ममशी॒र्षाण॒महिं॑ कृणु ।अ॒क्षौ वृक॑स्य॒ निर्ज॑ह्या॒स्तेन॒ तं द्रु॑प॒दे ज॑हि

rātriḥ| 1-7 gopathaḥ| rātriḥ| anuṣṭup| adha rātri tṛṣṭadhūmamaśīrṣāṇamahiṃ kṛṇu | akṣau vṛkasya nirjahyāstena taṃ drupade jahi

हिन्दी अर्थ

३४६ भयर्ववेद-माष्य क।° १९ । प° ४३ को ला, भौर घुृतपायी इन शालानिवासियों को भमृत घृत दारा कान्ति- (सः एव) उस काल ने ही (भुवनानि) मुवनो को (सम्) सम्यक् प्रकारसे (आ भरत्) धूण॑तया धारित किया हरभरा है। (सः एव) उस कालनेही (मुवनानि) मुवनों को (सम्) सम्यक् (परिपत्) षेरा भा है । (पिता) वह् कालं पिता (सन्) होता हृप्रा (एषाम्) इन भुवनो कां करता है, भरतः काल इन का पिता है । भुवनो की विवि गतियो से वसन्त काल भादि तथा प्रातःकाल सायंकाल भ्रादिषेदा हो रहर, अतः काल

English

Night. Cause thou us to enjoy it all so that this may not pass away.

अध्याय 19

श्लोक 50.2

ये ते॑ रात्र्यन॒ड्वाह॒स्तीक्ष्ण॑शृङ्गाः स्वा॒शवः॑ ।तेभि॑र्नो अ॒द्य पा॑र॒याति॑ दु॒र्गाणि॑ वि॒श्वहा॑

ye te rātryanaḍvāhastīkṣṇaśṛṅgāḥ svāśavaḥ | tebhirno adya pārayāti durgāṇi viśvahā

हिन्दी अर्थ

“कालकालः” भर्थात् काल का भी काल कहा है । यथा- “ज्ञः कालकालो १९०. कालोऽमू दिषमजनयत् कारु इमाः थिीरत । काठे ई भूतं भव्यं चेषितं ह बि तिष्ठते ।(५॥ वेदा किया है ६ (उत) भौर (कालः) काल ने (ईमाः) इन (पृथिवीः)

English

Do thou entrust us to the Dawn, all of us free from sin, O Night. May Dawn deliver us to Day, and Day to thee, O glorious One.

अध्याय 19

श्लोक 50.3

रात्रिं॑रात्रि॒मरि॑ष्यन्त॒स्तरे॑म त॒न्वा व॒यम्।ग॒म्भी॒रमप्ल॑वा इव॒ न त॑रेयु॒ररा॑तयः

rātriṃrātrimariṣyantastarema tanvā vayam| gambhīramaplavā iva na tareyurarātayaḥ

हिन्दी अर्थ

का० १६ । सु० ४३ भथर्ववेद-भाष्य . ३४७ (इषितम्). प्रंरित हुभा वतंमान जगत् (ह) निदचय से (वि तिष्ठते) स्थित है । पुथिवीः= पृथिवी शब्द यहां बहुवचनान्तं है, इसलिये नाना पुथिवियों का सुचकं है ये नाना पृथितियां प्रह-उपग्रह रूप ह । १९१. कालो भूतिर्मसुजत काले त॑पति बयः । कारे ह विश्वौ भूतानं काठे चधुविं पयति ॥६॥ तपति) भूयं तपता है । (कले ह) कालम ही (विद्वा शूतानि) सब भूत- भौतिक जगत् स्थित है। (काले) काल मेँ (चक्षुः) भरांख (वि परयति) विविध जगत् को देखती है । स्वप्नकाल में नदीं देखती, जागरित काल

English

A sacrificial formula Undisturbed am I, undisturbed is my soul, undisturbed mine eye, undisturbed mine ear,

अध्याय 19

श्लोक 50.4

यथा॑ शा॒म्याकः॑ प्र॒पत॑न्नप॒वान् नानु॑वि॒द्यते॑ ।ए॒वा रा॑त्रि॒ प्र पा॑तय॒ यो अ॒स्मां अ॑भ्यघा॒यति

yathā śāmyākaḥ prapatannapavān nānuvidyate | evā rātri pra pātaya yo asmāṃ abhyaghāyati

हिन्दी अर्थ

३९२. काठे म्नः कारे प्राणः कारे नामं समाहितम् । कारेन सब नन्दुन्स्यागतेन प्रजा इमाः ॥७॥ (काले) काल में (मनः) मननशक्ति, (काले) काल मे (प्राणः) प्राण- शक्ति, भौर (कलि) काल में (नाम) न।म ( समाहितम्) रखा जाता है । (भरागतेन कालेन) श्राए काल द्वारा (इमाः) ये (सर्वाः) सब (प्रजाः) ३९६. काले तः करे ज्येष्टं काले बमं स॒मातम् ।

English

undisturbed is mine in-breathing, undisturbed mine out-breathing, undisturbed my diffusive breath, undisturbed the whole of me. Under the impulse of the God Savitar, sent forth from the arms- of the Asvins and both hands of Pūshan I have taken thee.

अध्याय 19

श्लोक 50.5

अप॑ स्ते॒नं वासो॑ गोअ॒जमु॒त तस्क॑रम्।अथो॒ यो अर्व॑तः॒ शिरो॑ऽभि॒धाय॒ निनी॑षति

apa stenaṃ vāso goajamuta taskaram| atho yo arvataḥ śiro'bhidhāya ninīṣati

हिन्दी अर्थ

, १. ऋऋगेद में वेदों को “नामधेयम्” कहा है । नामदेय भ्रौर नाम--एकर्यक ३४८ . भय्ववेद-माष्य का० १९।सू०५द३ (काले) काल में (तपः). ब्रह्म का ज्ञानमय तप, (कलि) कालम (समाहितम्) समाधित है । (कालः) काल (ह) निरय से (सर्वस्य ) सब का (ईदवरः) शासक है, (यः) जो काल कि (प्रजापतेः) प्रजापति का (पिता प्रासीत्) पिता हमा है ।

English

A hymn to Kāma or Desire Thereafter rose Desire in the beginning, Desire the primal seed and germ of Spirit.

अध्याय 19

श्लोक 50.6

यद॒द्या रा॑त्रि सुभगे वि॒भज॒न्त्ययो॒ वसु॑ ।यदे॒तद॒स्मान् भो॑जय॒ यथेद॒न्यानु॒पाय॑सि

yadadyā rātri subhage vibhajantyayo vasu | yadetadasmān bhojaya yathedanyānupāyasi

हिन्दी अर्थ

भी तभी साथेक हो सकत्ना है,लब.प्रजाएं हों, मौर प्रजाभों का होना काला- भावना प्रजाननों तथा न्तानां की सत्ता पर प्राधित है, पौर इनकी कालो इ जहम मूतवा बिभि परमेष्ठनंष् ॥९।

English

O Kāma dwelling with the lofty Kāma, give growth of riches to the sacrificer. Thou, Kāma, art victorious, famous, potent, splendid, a friend. to him who seeks thy friendship.

अध्याय 19

श्लोक 50.7

उ॒षसे॑ नः॒ परि॑ देहि॒ सर्वा॒न् रात्र्य॑ना॒गसः॑ ।उ॒षा नो॒ अह्ने॒ आ भ॑जा॒दह॒स्तुभ्यं॑ विभावरि

uṣase naḥ pari dehi sarvān rātryanāgasaḥ | uṣā no ahne ā bhajādahastubhyaṃ vibhāvari

हिन्दी अर्थ

का० १९। सु० ५४ ्रथववेद-माष्य ३४९ (तेन) उस काल द्वारा (इषितम्) प्रेरित, . (तेन) उस -कालद्ारा के अधीन है । परमेश्वर भी कालबद्धसा होकर उत्पत्ति जादि करता है । ३९५. कालः श्रजा अलूजत कालो अर प्रजापतिम् । खयंभूः कश्यपः कारात् तप॑ः कालादजायत ॥१०॥

English

Mighty and overpowering in battle, give strength and vigour to the sacrificer. They heard his prayers, and they begot, by Kāma, heavenly- light for him.

अध्याय 19

श्लोक 51.1

आत्मा।१-२ ब्रह्मा।१ आत्मा, २ सविता च।१ एकपदा ब्राह्म्यनुष्टुप्, २ त्रिपाद् यवमध्योष्णिक्, (१-२ एकावसाना)।यु॑तो॒ऽहमयु॑तो म आ॒त्मायु॑तं मे॒ चक्षु॒रयु॑तं मे॒ श्रोत्र॒म॑युतो मे प्रा॒णोऽयु॑तो मे ऽपा॒नोऽयु॑तो मे व्या॒नोऽयु॑तो॒ऽहं सर्वः॑

ātmā| 1-2 brahmā| 1 ātmā, 2 savitā ca| 1 ekapadā brāhmyanuṣṭup, 2 tripād yavamadhyoṣṇik, (1-2 ekāvasānā)| yuto'hamayuto ma ātmāyutaṃ me cakṣurayutaṃ me śrotramayuto me prāṇo'yuto me 'pāno'yuto me vyāno'yuto'haṃ sarvaḥ

हिन्दी अर्थ

(कालः) कालत (प्रजाः) प्रलाभों का (भसृजत) सजन किया। काल से ही (तपः) जगदुत्पादन का तप (अजायत) पैदा हुषा । कहते है, देखो (भथर्वं० १६।६।६) । महषि दयानन्द के भ्रनुसार परमेदर का निज नाम भ्नोम् है । शेषनाम गुणकृत भौर कर्मकृत 1 भतः गौणिक भौर कामिक नाम काल से सम्बद्ध है।

English

Who from a distance longed for it, a dealer ready to exchange. O Kāma, with whatever wish we make this offering to thee, May it be all fulfilled to us. Then taste this sacrifice, All hail!

अध्याय 19

श्लोक 51.2

दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्यां॒ प्रसू॑त॒ आ र॑भे

devasya tvā savituḥ prasave'śvinorbāhubhyāṃ pūṣṇo hastābhyāṃ prasūta ā rabhe

हिन्दी अर्थ

कालेनेति प्रथः काले नि विंश्षते पुन॑ः ॥१॥ (कालात्) काल से (भापः) जलं (समभवन्) प्रकट हए। (कालात्) (कालेन) काल से (सूर्यं उदेति) सूयं उदित होता है । (कले). भौर कालं म (पूनः) फिर (नि विशते) प्रवेश पा जाता है" अस्त हो जातादहै। किया गया है । ब्रह्म = वेद, देखो ( १६।५३।८) । दिशः दिशाभरों का

English

A hymn to Kāma or Time Prolific, thousand-eyed, and undecaying, a horse with seven reins Time bears us onward.

अध्याय 19

श्लोक 52.1

कामः।१-५ ब्रह्माः कामः।त्रिष्टुप्, ३ चतुष्पदा उष्णिक्, ५ उपरिष्टाद्बृहती।काम॒स्तदग्रे॒ सम॑वर्तत॒ मन॑सो॒ रेतः॑ प्रथ॒मं यदासी॑त्।स का॑म॒ कामे॑न बृह॒ता सयो॑नी रा॒यस्पोषं॒ यज॑मानाय धेहि

kāmaḥ| 1-5 brahmāḥ kāmaḥ| triṣṭup, 3 catuṣpadā uṣṇik, 5 upariṣṭādbṛhatī| kāmastadagre samavartata manaso retaḥ prathamaṃ yadāsīt| sa kāma kāmena bṛhatā sayonī rāyaspoṣaṃ yajamānāya dhehi

हिन्दी अर्थ

३९७. कूलेन वातैः पवते काठेनं पृथिवी म॒ही । (कालेन) समय पर (वातः) वायुः (पवते) बहती है॥ (कालेन ) समय पर (पृथिवी) पृथिवी (मही ) महापरिमाण वाली हू है । (मही ) महापरिमाण वाला ( द्यौः ) द्युलोक ( काले ) समय पर (आहिता ) स्थापित हृभा है वातः पवते =-कमी पूर्वी वायु बहती है, कभी मानसून वायु, कमी ्रष्म ऋतु की संफावात भादि । मही = पृथिवी कमी भाग्नेयरूप थी, फिर द्रवरूप हर्द, भ्रव “दृढा” होकर महापरिमाणवाली हई दीखती है । “येन

English

Sages inspired with holy knowledge mount him: his chariot wheels are all the worlds of creatures. This Time hath seven rolling wheels and seven naves immorality is the chariot’s axle.

अध्याय 19

श्लोक 52.2

त्वं का॑म॒ सह॑सासि॒ प्रति॑ष्ठितो वि॒भुर्वि॒भावा॑ सख॒ आ स॑खीय॒ते।त्वमु॒ग्रः पृत॑नासु सास॒हिः सह॒ ओजो॒ यज॑मानाय धेहि

tvaṃ kāma sahasāsi pratiṣṭhito vibhurvibhāvā sakha ā sakhīyate| tvamugraḥ pṛtanāsu sāsahiḥ saha ojo yajamānāya dhehi

हिन्दी अर्थ

३९८. कारो ई भूतं भ्यं च पुत्रो अजनयत् पुरा । कालादुचच; सरम॑मबुन् यज; काठाहैजायत ॥३॥ ( प्रः) पु्ररूप (कालः ह ) काल नें निदचय से (भूतम् भग्यम् च) काल से (षः) वेदों की छन्दोमयी रचना (समभवत्) प्रकट हू 1 (यजुः) भ्नौर वेदों की गद्यमयी रचना (कालात्) काल से (भरजायत) पेदा हुई । पुत्रः=दस से प्रतीत होता है कि करालका मी कोई पिता है,जिसका कि काल पुत्र है। वहु पिता परमेइवर ही है। भरथवा-देखो मन्त्र ( १६।५३ ॥४ )।

English

This Time brings hitherward all worlds about us: as primal Deity is he entreated.

अध्याय 19

श्लोक 52.3

दू॒राच्च॑कमा॒नाय॑ प्रतिपा॒णायाक्ष॑ये ।आस्मा॑ अशृण्व॒न्नाशाः॒ कामे॑नाजनय॒न्त्स्वः

dūrāccakamānāya pratipāṇāyākṣaye | āsmā aśṛṇvannāśāḥ kāmenājanayantsvaḥ

हिन्दी अर्थ

का० १९1 सु° ५४ प्रथर्ववेद-माष्य ३५१ स्थिति रही, जो फि भ्रब से मविष्यत् मे भी चलती जायेगी 1 भथरवं° १६।५४।३ में काल का पुत्रपन वास्तविक है ।

English

On Time is laid an overflowing beaker: this we behold in many a place appearing. He carries from us all these worlds of creatures. They call him Kāla in the loftiest heaven.

अध्याय 19

श्लोक 52.4

कामे॑न मा॒ काम॒ आगन् हृद॑या॒द्धृद॑यं॒ परि॑ ।यद॒मीषा॑म॒दो मन॒स्तदैतूप॒ मामि॒ह

kāmena mā kāma āgan hṛdayāddhṛdayaṃ pari | yadamīṣāmado manastadaitūpa māmiha

हिन्दी अर्थ

३९९. कालो यद्चं समैरयद् देवेभ्यां भागमधितप् । (कालः) काल अर्थात् समय (देवेभ्यः) देवों कै लिये, उन के (लोकाः) तीनों लोक (प्रतिष्ठिताः) स्थित है। गुण स्थापित करती है इसलिये देवों के यज्ञमायं को “भक्षितम्” कहा है,

English

He only made the worlds of life, he only gathered the worlds of living things together. 262

अध्याय 19

श्लोक 52.5

यत् का॑म का॒मय॑माना इ॒दं कृ॒ण्मसि॑ ते ह॒विः ।तन्नः॒ सर्वं॒ समृ॑ध्यता॒मथै॒तस्य॑ ह॒विषो॑ वीहि॒ स्वाहा॑

yat kāma kāmayamānā idaṃ kṛṇmasi te haviḥ | tannaḥ sarvaṃ samṛdhyatāmathaitasya haviṣo vīhi svāhā

हिन्दी अर्थ

३५२३ शथर्दवेद-माष्य का० १९1 बु ५४ मन; पौर अप्सरसः--ऋक् गौर साम । इन सब गन्धवा ओरं इन की प्नोषधिर्यो को “मुदः” कहा है, क्योंकि इन के होते ही जीवन में मोद-्रमोद होते । मरीचियों को “धायुवः” कहा है, वर्योकि ये वस्तुभो में परस्पर मिश्रण.मौर भरमिश्रण करती है । भ्रायुवः=भरा+-यु (मिधंणे, भमिध्णे ) ।

English

Their son did he become who was their Father: no other higher power than he existeth. Kāla created yonder heaven, and Kāla made these realms of earth. By Kāla, stirred to motion, both what is and what shall be expand.

अध्याय 19

श्लोक 53.1

कालः।१-१० भृगुः।कालः।अनुष्टुप्, १-४ त्रिष्टुप्, ५ निचृत् पुरस्ताद्बृहती।का॒लो अश्वो॑ वहति स॒प्तर॑श्मिः सहस्रा॒क्षो अ॒जरो॒ भूरि॑रेताः ।तमा रो॑हन्ति क॒वयो॑ विप॒श्चित॒स्तस्य॑ च॒क्रा भुव॑नानि॒ विश्वा॑

kālaḥ| 1-10 bhṛguḥ| kālaḥ| anuṣṭup, 1-4 triṣṭup, 5 nicṛt purastādbṛhatī| kālo aśvo vahati saptaraśmiḥ sahasrākṣo ajaro bhūriretāḥ | tamā rohanti kavayo vipaścitastasya cakrā bhuvanāni viśvā

हिन्दी अर्थ

है, भरमिलाषार्भो.को सिद्ध करते है । (भथर्वा) भथ ज (कालेऽधि) काल मे (तिष्ठतः) स्थित है । (च दहमं लोकम्) भौर इस लोक भर्थात् पृथिवो को, (च परमं लोकम्) तथा परम. सहारे (सर्घान् लोकान् ) सब लोको को ( अभिजित्य) जीत कर (सः कालः) वह काल (परमः देवः) परमदेव भर्थात् ब्रह्म के (न) सदृश हम हृभ्रा (ईयते) विचरता है! देवः इससे ज्ञात होता है कि भर्जिराभौर भ्रथर्वा ऋषि कोटि कै

English

Kāla created land; the Sun in Kāla hath his light and heat. In Kāla rest all things that be: in Kāla doth the eye discern.

अध्याय 19

श्लोक 53.2

स॒प्त च॒क्रान् व॑हति का॒ल ए॒ष स॒प्तास्य॒ नाभी॑र॒मृतं॒ न्वक्षः॑ ।स इ॒मा विश्वा॒ भुव॑नान्यञ्जत् का॒लः स ई॑यते प्रथ॒मो नु दे॒वः

sapta cakrān vahati kāla eṣa saptāsya nābhīramṛtaṃ nvakṣaḥ | sa imā viśvā bhuvanānyañjat kālaḥ sa īyate prathamo nu devaḥ

हिन्दी अर्थ

भगिनि है। तथा भद्किरा! =प्राण (शतपथ० ६।१।२।८) का भी नाम है। कि चलता. नहीं, भरपना स्थान नहीं बद्षता । उपग्रहो समेत श्रह सूयं की बदलता । तथा “दिवि देवा भथवणिः'" (भधवं० ११।६।१३) दारा भर्थर्वा पैदा हुए, तथा नियत कालौ तक स्थित रर्हुगे ।

English

Yea, Kāla, who was father of Prajāpati, is Lord of All. He made, he stirred this universe to motion, and on him it rests.

अध्याय 19

श्लोक 53.3

पू॒र्णः कु॒म्भोऽधि॑ का॒ल आहि॑त॒स्तं वै पश्या॑मो बहु॒धा नु स॒न्तः।स इ॒मा विश्वा॒ भुव॑ना॒नि प्र॒त्यङ्कालं तमा॑हुः पर॒मे व्योमन्

pūrṇaḥ kumbho'dhi kāla āhitastaṃ vai paśyāmo bahudhā nu santaḥ| sa imā viśvā bhuvanāni pratyaṅkālaṃ tamāhuḥ parame vyoman

हिन्दी अर्थ

भौर भ्रग्रतेताभों के सां एेकमत्य में रहते है, उस देश को म “पुण्यलोक स्पर सहयोय देना; (३) यज्ञो का करना; (४) राष्ट के भरग्रनेताभो के साथ दकमत्य में रहना । ये उपाय ह स्वयं पुण्यरूप । ये उपाय है “विधृतीः रूप र्थात् राष्ट्रो का विशेष रूप मँ धारण करनेवाले । परलय काल द्वारा नियन्वित है । परणमतु स्वयं काल परमेदवराधित है, तथा बरमेदवर की सहायता दारा कार्यक्षम होता 8 1

English

He, Kāla, having now become Brahma, holds Parameshthin up. Kāla created living things and, first of all, Prajāpati. From Kāla self-made Kasyapa, from Kāla Holy Fire was born.

अध्याय 19

श्लोक 53.4

स ए॒व सं भुव॑ना॒न्याभ॑र॒त् स ए॒व सं भुव॑नानि॒ पर्यै॑त्।पि॒ता सन्न॑भवत् पु॒त्र ए॑षां॒ तस्मा॒द् वै नान्यत् पर॑मस्ति॒ तेजः॑

sa eva saṃ bhuvanānyābharat sa eva saṃ bhuvanāni paryait| pitā sannabhavat putra eṣāṃ tasmād vai nānyat paramasti tejaḥ

हिन्दी अर्थ

३५४ अथर्ववेद-भाष्य का १६ । सुऽ ५४ ४०१. रा्रिरात्रिम्रयातं भरन्तोऽधायेब तिष्ठते धासमसे । लिये (ासम्) भरन्तादि सामग्री की (मरन्तः) भेट करते हुए, (ते परति. बदाः) भापके समीपवासी हम प्रजाजन (रायस्पोषेण) घन की परिपुष्टि इन्द्र का अथं है-रजा। 5 ८।३७)। प्म्ति

English

A hymn to Kāla; a continuation of the preceding hymn From Kāla sprang the Waters, sprang the regions, Brahma,

अध्याय 19

श्लोक 53.5

का॒लोऽमूं दिव॑मजनयत् का॒ल इ॒माः पृ॑थि॒वीरु॒त।का॒ले ह॑ भू॒तं भव्यं॑ चेषि॒तं ह॒ वि ति॑ष्ठते

kālo'mūṃ divamajanayat kāla imāḥ pṛthivīruta| kāle ha bhūtaṃ bhavyaṃ ceṣitaṃ ha vi tiṣṭhate

हिन्दी अर्थ

किया है। यथा---"न सेनां सोहयामित्राणाम्' (अथवं ०३।१।५); तथा “इनदरः सेनां मोहयतु" (भयर्व० ३।१।६) । घासम् = घास तथा भोजन (भग्ने) है अग्रणी राजन् (वसोः) प्रजाजनों को बसानेवलि (ते) आपकी (या) जो (वातः दषुः) वातर्ूपी. इषु है, (एषा सा) यह् बह (तै) का० १९1 सुऽ ५१ भरयर्ववेद-भाष्य ३१५१ जाप के प्रधिकारमेदहैः (तया) उसके प्रयोग द्वारा (नः) हमें (मृड) सुखी कीजिये । (रायस्पोषेण ---““- रिषाम पुरवंबत् ।

English

Holy Fire. The Sun ascends by Kāla, and in Kāla sinks again to rest. By Kāla freshly blows the wind, mighty through Kāla is the

अध्याय 19

श्लोक 53.6

का॒लो भू॒तिम॑सृजत का॒ले त॑पति॒ सूर्यः॑ ।का॒ले ह॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ का॒ले चक्षु॒र्वि प॑श्यति

kālo bhūtimasṛjata kāle tapati sūryaḥ | kāle ha viśvā bhūtāni kāle cakṣurvi paśyati

हिन्दी अर्थ

नाना दिषो मे व्याप्त या मागनेवाले उन शत्रु सेनिकों का विनाश कर । करता हूष्रा इनके भङ्गो को जकड़ दे । शतरुभों कौ भोर ला,घोकों दारा इन के हृद्यो को दग्ध कर । है भङ्गो को जकड़नेवलि तु भमित्न शुरो को भरन्धकार द्वारा वीध (३।२।५) । तामसास्त्र यथा--हे वायु -के समान वेग. वलि या मारने कुशल सैनिको ! स्पर्धा करती हई वह जो पराई सेना वेगसे हमारी ओर धभराती है, उसे धकर्म॑ण्य कर देने वाले भन्धकार दुन्य करता, - पङ्गो को जकड़ देता, भौर शत्रुदल में अन्धकार फला देता ह । रेते छस्त्रास््रों के प्रयोग करने यानकरनेका अधिकार राजा को होना चाहिए (ते एषा)। (गृहपतिः) गृह भादि सम्पत्तियों की रक्षा करनेवाला हो ! प्रौर (परावः

English

Earth: on Kāla rests the mighty Sky. In Kāla erst the text produced what is and what is yet to be.

अध्याय 19

श्लोक 53.7

का॒ले मनः॑ का॒ले प्रा॒णः का॒ले नाम॑ स॒माहि॑तम्।का॒लेन॒ सर्वा॑ नन्द॒न्त्याग॑तेन प्र॒जा इ॒माः

kāle manaḥ kāle prāṇaḥ kāle nāma samāhitam| kālena sarvā nandantyāgatena prajā imāḥ

हिन्दी अर्थ

बाला हो । है धग्रणि ¡ (वसोः वोः) हर प्रकार की पमीष्ट वस्तुं के -को ( दण्धानाः) समुज्ज्वथ करते हए; प्रापं की कीति, को बढ़ते हए (तन्वम्) भापकीः तथा भ्रपनी तनू को (पुषेम) परिपृष्ट करे ।

English

From Kāla sprang the Richas, and from Kāla was the Yajus born. They formed in Kāla sacrifice, eternal portion for the Gods. In Kāla the Gandharvas and Apsarasas and worlds abide.

अध्याय 19

श्लोक 53.8

का॒ले तपः॑ का॒ले ज्येष्ठं॑ का॒ले ब्रह्म॑ स॒माहि॑तम्।का॒लो ह॒ सर्व॑स्येश्व॒रो यः पि॒तासी॑त् प्र॒जाप॑तेः

kāle tapaḥ kāle jyeṣṭhaṃ kāle brahma samāhitam| kālo ha sarvasyeśvaro yaḥ pitāsīt prajāpateḥ

हिन्दी अर्थ

सायंसायम्--सायंकाल से लेकर प्रातःकाल तक । प्रातःप्रातः राजापरक धथ किया है । मनो के त्रिविध प्रथं हो सकते है-आाधिहैविक निम्नलिखित मन्व मी प्रकाश डालता है- तथा सब गोर के मेरे भङ्गं प्रजाजन है” । (यनजु्माष्य, महषि दयानन्व)

English

Atharvan and this Angiras in Kāla are supreme o’er heaven. Both this world and the world that is most lofty, the pure worlds and pure intermediate

अध्याय 19

श्लोक 53.9

तेने॑षि॒तं तेन॑ जा॒तं तदु॒ तस्मि॒न् प्रति॑ष्ठितम्।का॒लो ह॒ ब्रह्म॑ भू॒त्वा बिभ॑र्ति परमे॒ष्ठिन॑म्

teneṣitaṃ tena jātaṃ tadu tasmin pratiṣṭhitam| kālo ha brahma bhūtvā bibharti parameṣṭhinam

हिन्दी अर्थ

बसेोवसोवेसुदानं एषीन्धानास्त्वा शतदिंमा पेम ।४॥। सार्यकाल .(सौमनसस्य ) मानसिक प्रसन्नता का (दाता) देनेवाला हो । ह अग्रणी राजन् । (वसोः वसोः) हर भकार कौ भमीष्ट वस्तुं के (वसु- दानः) दाता (एषि) भाप हृलिये । (त्वा) भापको (इन्घानाः) समुज्ज्वल करते हृए, भाप की कीति को बढ़ते हए हम (शतं हिमाः) सौ हेमन्त- अग्निहोत्र प्रौर उपासना का भी सुचक है।

English

spaces,— Yea, having conquered all the worlds by Brahma, Kāla as God Supreme is supplicated.

अध्याय 19

श्लोक 53.10

का॒लः प्र॒जा अ॑सृजत का॒लो अग्रे॑ प्र॒जाप॑तिम्।स्व॒यं॒भूः क॒श्यपः॑ का॒लात् तपः॑ का॒लाद॑जायत

kālaḥ prajā asṛjata kālo agre prajāpatim| svayaṃbhūḥ kaśyapaḥ kālāt tapaḥ kālādajāyata

हिन्दी अर्थ

मनष्य नहीं, भपि तु ये सूयं चन्दर प्रादि की तरह देव है। पर्जिराः= घुत से बषाने का विधान है। इस प्रमति को मन्म “शङ््िरः” कठा है, का० १९॥। सु० ५४ धथर्वेवेद-माध्य ३५३

English

In Kāla mind, in Kāla breath, in Kāla name are fixt and joined. These living creatures, one and all, rejoice when Kāla hath approached. Kāla embraces Holy Fire, the Highest, Brahma in himself.

अध्याय 19

श्लोक 54.1

कालः।१-५ भृगुः।कालः।अनुष्टुप्, २ त्रिपदाऽर्षी गायत्री, ५ त्र्यवसाना षट्पदा विराडष्टिः।का॒लादापः॒ सम॑भवन् का॒लाद् ब्रह्म॒ तपो॒ दिशः॑ ।का॒लेनोदे॑ति॒ सूर्यः॑ का॒ले नि वि॑शते॒ पुनः॑

kālaḥ| 1-5 bhṛguḥ| kālaḥ| anuṣṭup, 2 tripadā'rṣī gāyatrī, 5 tryavasānā ṣaṭpadā virāḍaṣṭiḥ| kālādāpaḥ samabhavan kālād brahma tapo diśaḥ | kālenodeti sūryaḥ kāle ni viśate punaḥ

हिन्दी अर्थ

का० १९ । सु० ५५ प्रथर्वेवेद-माष्य ३५७ भर्थात् घन का (दाता) देनेवाला है 1 सी से परमेदवर (वसुदानः) अर्थात् चित्त में सदा प्रकाशित (एषि) रहो । यहां भौतिक अग्नि भी प्रहण भाप को (इन्धानाः) प्रकाशित करते हुए (तन्वं पुषेम) अपने शरीर से

English

A hymn to Agni for protection and prosperity Bringing, as ‘twere, with care unceasing fodder night after night to feed this stabled Courser,

अध्याय 19

श्लोक 54.2

का॒लेन॒ वातः॑ पवते का॒लेन॑ पृथि॒वी म॒ही।द्यौर्म॒ही का॒ल आहि॑ता

kālena vātaḥ pavate kālena pṛthivī mahī| dyaurmahī kāla āhitā

हिन्दी अर्थ

हैदवर की उपासना करते हुए हम लोग (शतहिमाः) सौ हेमन्त ऋतु ग्यतीत ऋवेदादिमाष्य-मूमिका, पञ्चमहायज्ञ-विषय, महषि दयानन्द को पिडा हुभा न (भरयासम्) होऊं । ताकि (अन्नादाय) भरन्नभाग का मादान्

English

Joying in food and in the growth of riches, may we thy neigh- bours, Agni, ne’er be injured. Here is thine own desire for wealth: through this be gracious unto us. Joying in food and in the growth of riches, may we thy neigh- bours, Agni, ne’er be injured.

अध्याय 19

श्लोक 54.3

का॒लो ह॑ भू॒तं भव्यं॑ च पु॒त्रो अ॑जनयत् पु॒रा।का॒लादृचः॒ सम॑भव॒न् यजुः॑ का॒लाद॑जायत

kālo ha bhūtaṃ bhavyaṃ ca putro ajanayat purā| kālādṛcaḥ samabhavan yajuḥ kālādajāyata

हिन्दी अर्थ

(ये) जो (सम्या) खमा के योभय (सभासदः) समाम बैठेहैवे मी मेरी समाकी रक्षाकरं) न १ होता । यथा-- "विदग्ध" का प्रथं है विद्वान् तथा चतुर । इसी.भकार छोक- १८ भयववेद-भाष्य कार १९ । घु००५५ दवारा उपज के षष्ठांश को लेकर राज्यकोष मे देता है।

English

Each eve that comes our household’s Lord is Agni, showing his. loving-kindness every morning.

अध्याय 19

श्लोक 54.4

का॒लो य॒ज्ञं समै॑रयद् दे॒वेभ्यो॑ भा॒गमक्षि॑तम्।का॒ले ग॑न्धर्वाप्स॒रसः॑ का॒ले लो॒काः प्रति॑ष्ठिताः

kālo yajñaṃ samairayad devebhyo bhāgamakṣitam| kāle gandharvāpsarasaḥ kāle lokāḥ pratiṣṭhitāḥ

हिन्दी अर्थ

अहैरदबीरिमिह् ते हरन्तो ऽशयव् तिष्ठते घासभ॑परे ।।६॥ १.०बरषों तक जीवित रहकर राज्य करे । (इव) जसे (तिष्ठते भक्वाय) (बलिम्) राञ्यकर (हरन्तः) लानेवाले हम हों ।

English

Bestow upon us treasure after treasure: enkindling thee may we increase thy body. Each morn that comes our household’s Lord is Agni, showing. his loving-kindness every evening.

अध्याय 19

श्लोक 54.5

का॒लेऽयमङ्गि॑रा दे॒वोऽथ॑र्वा॒ चाधि॑ तिष्ठतः ।इ॒मं च॑ लो॒कं प॑र॒मं च॑ लो॒कं पुण्यां॑श्च लो॒कान् विधृ॑तीश्च॒ पुण्याः॑ ।सर्वां॑ल्लो॒कान॑भि॒जित्य॒ ब्रह्म॑णा का॒लः स ई॑यते पर॒मो नु दे॒वः

kāle'yamaṅgirā devo'tharvā cādhi tiṣṭhataḥ | imaṃ ca lokaṃ paramaṃ ca lokaṃ puṇyāṃśca lokān vidhṛtīśca puṇyāḥ | sarvāṃllokānabhijitya brahmaṇā kālaḥ sa īyate paramo nu devaḥ

हिन्दी अर्थ

श्ानुंभर राजा रह सकताहै । यथा- अरजां ने. मिक्षकर, तेरा वरण रथात् निर्वाचन किया है । वे सब एकमत होकर .भापका पराह्ञान करे ॥ पाप प्रसन्नचित्त होकर, मौर शासन भे का० १९ । सु० ४६ भरथववेद-माष्य ३५९ (एकाकिना) जायरित धृत्तियो से वच्नवित हए, भ्रौर इसलिये अकेले हए जीवात्मा के साथ (सृरथम्) एक ही चित्तरथ भं (यासि) विचरता ह।

English

Vouchsafe us treasure after treasure: kindling thee may we prosper through a hundred winters.

अध्याय 19

श्लोक 55.1

रायस्पोषप्राप्तिः।१-६ भृगुः।अग्निः।त्रिष्टुप्, २ आस्तारपङ्क्तिः, ५ त्र्यवसाना पञ्चपदा पुरस्ताज्ज्योतिष्मती।रात्रिं॑रात्रि॒मप्र॑यातं॒ भर॒न्तोऽश्वा॑येव॒ तिष्ठ॑ते घा॒सम॒स्मै।रा॒यस्पोषे॑ण॒ समि॒षा मद॑न्तो॒ मा ते॑ अग्ने॒ प्रति॑वेशा रिषाम

rāyaspoṣaprāptiḥ| 1-6 bhṛguḥ| agniḥ| triṣṭup, 2 āstārapaṅktiḥ, 5 tryavasānā pañcapadā purastājjyotiṣmatī| rātriṃrātrimaprayātaṃ bharanto'śvāyeva tiṣṭhate ghāsamasmai| rāyaspoṣeṇa samiṣā madanto mā te agne prativeśā riṣāma

हिन्दी अर्थ

निनाधिकारपू्वंक चित्त भ प्रवेश पालेता है। समय पर न चाहते हृए को भी स्वप्नभा षेरता है। धीरः्=धी कम॑नाम (निधं० २।१)-ईरः हेन वहान् भसुरः” (निख० ३।२।४) । योनौ गृहनाम (निष० ३।४)। ३६० प्रथरवेवेद-माष्य क।० १९ । पु ५६

English

Never may I come short of food to feed me. Glory to Agni, Rudra, the consumer and the Lord of food! Protect my company, protect its courteous members, courteous.

अध्याय 19

श्लोक 55.2

या ते॒ वसो॒र्वात॒ इषुः॒ सा त॑ ए॒षा तया॑ नो मृड ।रा॒यस्पोषे॑ण॒ समि॒षा मद॑न्तो॒ मा ते॑ अग्ने॒ प्रति॑वेशा रिषाम

yā te vasorvāta iṣuḥ sā ta eṣā tayā no mṛḍa | rāyaspoṣeṇa samiṣā madanto mā te agne prativeśā riṣāma

हिन्दी अर्थ

चयाः) सब प्रकार कै संस्कारोंका चयन. किया था, तब (एके भरह्धि) शिशु की उत्पत्ति के काल से (इदम्) इस शरीर में (बा बभूविथ) तुभ क (रप गूहमानः) छिपाये हए है, अर्थात् चिकित्सक भी तेरे स्वरूप को भूत अरंस्कारो का चयन करता रहता है । मृत्यु के पदचात् जिस दिन शिश्ु-

English

God! Only through thee, O much-invoked, may I be ever rich in kine.

अध्याय 19

श्लोक 55.3

सा॒यंसा॑यं गृ॒हप॑तिर्नो अ॒ग्निः प्रा॒तःप्रा॑तः सौमन॒सस्य॑ दा॒ता।वसो॑र्वसोर्वसु॒दान॑ एधि व॒यं त्वेन्धा॑नास्त॒न्वं पुषेम

sāyaṃsāyaṃ gṛhapatirno agniḥ prātaḥprātaḥ saumanasasya dātā| vasorvasorvasudāna edhi vayaṃ tvendhānāstanvaṃ puṣema

हिन्दी अर्थ

थानो ) भरागामी प्रलय-रात्री की (जनितो) उत्पत्ति से सू्पर्मे (भाबभूविथ) तु भा प्रकट हृश्रा है। (भिषरभ्या--गूहमानः सृष्ट त्पाबन से पूवं परमेदवर धं सृष्ट त्पादन को “कामना

English

Only to thee bringing our tribute, Agni, each day as fodder to a stabled courser, Joying in food and in the growth of riches, may we the neigh- bours, Agni ne’er be injured.

अध्याय 19

श्लोक 55.4

प्रा॒तःप्रा॑तर्गृ॒हप॑तिर्नो अ॒ग्निः सा॒यंसा॑यं सौमन॒सस्य॑ दा॒ता।वसो॑र्वसोर्वसु॒दान॑ ए॒धीन्धा॑नास्त्वा श॒तंहि॑मा ऋधेम

prātaḥprātargṛhapatirno agniḥ sāyaṃsāyaṃ saumanasasya dātā| vasorvasorvasudāna edhīndhānāstvā śataṃhimā ṛdhema

हिन्दी अर्थ

हौ पूवं तथा नई वाडनाभों के कारण हम पै स्वष्वोद्गम होते है । देखो- का० १६ । सु० ५६ भरथववेद-भाष्ये ३६१ ४०९. बरहवगावापुरेम्योऽधिं देवाचुपावतेत मदिमानमिच्छन् । पृथक् होकर, (देवान्) दिव्यगुणियों के (उप) पास (अवर्तत) चला गया।

English

A hymn to Sleep Thou art come hither from the world of Yama: thou, resolute, affectest men with rapture.

अध्याय 19

श्लोक 55.5

अप॑श्चा द॒ग्धान्न॑स्य भूयासम्।अ॒न्ना॒दायान्न॑पतये रु॒द्राय॒ नमो॑ अ॒ग्नये॑ ।स॒भ्यः स॒भां मे॑ पाहि॒ ये च॑ स॒भ्याः स॑भा॒सदः॑

apaścā dagdhānnasya bhūyāsam| annādāyānnapataye rudrāya namo agnaye | sabhyaḥ sabhāṃ me pāhi ye ca sabhyāḥ sabhāsadaḥ

हिन्दी अर्थ

वालेको क्षणमेंदही कहींका कहीं पहुचा देता है । बृहद्गावा=बृहद् + गावा (गाङ् गतौ) 1 कविता में स्वप्न को चेतनसा मानकर कहाहैकि ते पृथक् होकर देवों कै पास चला गया। भ्रसुरों कै स्वप्न आसुरी माव तक पहुंचाने मेँ सहायक होते हँ । इसलिये देवों ने एेसे दिव्य स्वप्नो को भ्रपने पर भ्राधिपत्य का अधिकार दे दिया। जसे ३३ देवता भाधिदेविक है, वैसे ३३ देवता प्राध्यात्मिक मी रहै, जिनकाकि निवासशरीरमे भी है-

English

Thou, Sleep, created in the Asura’s dwelling, goest, well-know- ing, with the solitary. At first the all-containing, depth beheld thee, ere Night was born, when only Day existed. Thence hast thou come, thence, Sleep, hast thou come hither, concealing, deep within, all

अध्याय 19

श्लोक 55.6

त्वामि॑न्द्रा पुरुहूत॒ विश्व॒मायु॒र्व्यश्नवन्।अह॑रहर्ब॒लिमित् ते॒ हर॒न्तोऽश्वा॑येव॒ तिष्ठ॑ते घा॒सम॑ग्ने

tvāmindrā puruhūta viśvamāyurvyaśnavan| aharaharbalimit te haranto'śvāyeva tiṣṭhate ghāsamagne

हिन्दी अर्थ

४१०. नैतां विदुः पितरो नोत देवा येषां जसिपिश्रत्यन्तरेदम् । गृहस्थ में भासक्त ( विदुः) जान पाते है, (उत न) गौर न (देवाः) भषर- के भीतर (जल्पिः) व्यथं का वाद-विवाद (चरति) चलता रहता है । ३६२ धथर्वेवेद-माष्य का० १९। सु० ५६

English

form and figure. Come from the Asuras in lofty, glory, he hath approached the

अध्याय 19

श्लोक 56.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१-६ यमः।दुःष्वप्ननाशनम्।त्रिष्टुप्।य॒मस्य॑ लो॒कादध्या ब॑भूविथ॒ प्रम॑दा॒ मर्त्या॒न् प्र यु॑नक्षि॒ धीरः॑ ।ए॒का॒किना॑ स॒रथं॑ यासि वि॒द्वान्त्स्वप्नं॒ मिमा॑नो॒ असु॑रस्य॒ योनौ॑

duḥṣvapnanāśanam| 1-6 yamaḥ| duḥṣvapnanāśanam| triṣṭup| yamasya lokādadhyā babhūvitha pramadā martyān pra yunakṣi dhīraḥ | ekākinā sarathaṃ yāsi vidvāntsvapnaṃ mimāno asurasya yonau

हिन्दी अर्थ

मेषावी, या तीन लोकों का विस्तार करनेवाले, या तीन लोको मेँ व्याप्त उपादेय है । वरुणेन =““भ्राार्यो मूत्यु्वखणः सोम प्रोषयः पयः" (भथवं 9 ११।४५।१४) में भ्राचायं को वरुण भी कहा है '। तथा “बमा चुतं शृणृते इस मन्त्र मे भी वरण को भाचायं कटा 8 चिते == “त्रितः तीर्णतमो मेषया"

English

Gods in search of greatness. Winners of heavenly light, the Three-and-Thirty endowed this Sleep with his supreme dominion.

अध्याय 19

श्लोक 56.2

ब॒न्धस्त्वाग्रे॑ वि॒श्वच॑या अपश्यत् पु॒रा रात्र्या॒ जनि॑तो॒रेके॒ अह्नि॑ ।ततः॑ स्वप्ने॒दमध्या ब॑भूविथ भि॒षग्भ्यो॑ रू॒पम॑प॒गूह॑मानः

bandhastvāgre viśvacayā apaśyat purā rātryā janitoreke ahni | tataḥ svapnedamadhyā babhūvitha bhiṣagbhyo rūpamapagūhamānaḥ

हिन्दी अर्थ

होता है, न कि सांसारिक पदा्थोँ पर । यह है परमेश्वर में स्वर्प्नोका के (मनसः प्रधि) मन से (जन्िषे) उत्पन्न होता रहता है, या हृभरा है । रोना-िल्लाना, षबरा लाना, भौर विन्तित होना-यह दुःस्वप्नो की विचारो का निरोघ कर परमेष्वर के ध्यान मे जब लीन हो जाते है, तब

English

Of him nor Fathers nor the Gods have knowledge, the Gods whose gentle talk is still about him.

अध्याय 19

श्लोक 56.3

बृ॒ह॒द्गावासु॑रे॒भ्योऽधि॑ दे॒वानुपा॑वर्तत महि॒मान॑मि॒च्छन्।तस्मै॒ स्वप्ना॑य दधु॒राधि॑पत्यं त्रयस्त्रिं॒शासः॒ स्वरानशा॒नाः

bṛhadgāvāsurebhyo'dhi devānupāvartata mahimānamicchan| tasmai svapnāya dadhurādhipatyaṃ trayastriṃśāsaḥ svarānaśānāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रमावदूप हो जाती है । तब योत्रौ का जीतन पवित्र हो- जाता है, परन्तु (पुरस्तात्) पिले से (ते) तेरे (सर्वाः) सब (परिजाः) परिजनों जानते उसे, (यः) जो कि (दह) इस जीवन मे (ते) तेरा (भ्रधिपाः) पालक है । (नः) हम (यरस्विनः) यदवालों को (यश्चसा) यशके साथ

English

Urged by command of Varuna the Ādityas, Heroes, transported Sleep to Trita Āptya. Thou whose severity hath reached ill-doers, and whose reward the good have gained in

अध्याय 19

श्लोक 56.4

नैतां वि॑दुः पि॒तरो॒ नोत दे॒वा येषां॒ जल्पि॒श्चर॑त्यन्तरेदम्।त्रि॒ते स्वप्न॑मदधुरा॒प्त्ये नर॒ आदि॑त्यासो॒ वरु॑णे॒नानु॑शिष्टाः

naitāṃ viduḥ pitaro nota devā yeṣāṃ jalpiścaratyantaredam| trite svapnamadadhurāptye nara ādityāso varuṇenānuśiṣṭāḥ

हिन्दी अर्थ

भावनाभों समेत तू (भ्रारात्) हमारे समीप से (दरम्) हम से दुर (भ्रप (यथा) जिख प्रकार (कलाम्) ऋण के १६बं हिस्से को, (यथा) जिस रकार (चछफम् ) ऋण क भ्राठवे ओर.चौये हिस्से को, भरौर (यथा)जिस परति पहूंबा देते है, (एवा) इसी प्रकार शनैःशनैः (सर्वम्) सब (दुष्व- कीदुष्टिते एक कला है १६बां भाग । शफम् = गौ के चार शफ ( =घुर) फटे होते है, रतः इस दृष्टि से एक ते ्मिप्राय है भराठवां भाग, भौर जद्व

English

slumber, Delightest heaven with thy most lofty kinship, born from his spirit who was worn and weary.

अध्याय 19

श्लोक 56.5

यस्य॑ क्रू॒रमभ॑जन्त दु॒ष्कृतो॒ऽस्वप्ने॑न सु॒कृतः॒ पुण्य॒मायुः॑ ।स्वर्मदसि पर॒मेण॑ ब॒न्धुना॑ त॒प्यमा॑नस्य॒ मन॒सोऽधि॑ जज्ञिषे

yasya krūramabhajanta duṣkṛto'svapnena sukṛtaḥ puṇyamāyuḥ | svarmadasi parameṇa bandhunā tapyamānasya manaso'dhi jajñiṣe

हिन्दी अर्थ

ज म भ 0 ०००१७ ० ००१ 09 ०० का ० ३६४ भ्रथववेद-माष्य क° १९ । पु° ५७ विभागः .शनःशनः चुका दिया जातादहै, वसे ही संकल्प करके दुःस्वप्न को भी दानैः शनैः भ्प्रिय जानकर, उसे सदा के लिये भरप्रियपक्ष में डाल कर दुःस्वप्नो से छुटकारा पाया जा सकता है ।

English

Of old we know all places whence thou comest. O Sleep, we know him who is here thy ruler. Protect us here illustrious with glory. Go, from afar, with poisons, into distance. A charm against evil dreams

अध्याय 19

श्लोक 56.6

वि॒द्म ते॒ सर्वाः॑ परि॒जाः पु॒रस्ता॑द् वि॒द्म स्व॑प्न॒ यो अ॑धि॒पा इ॒हा ते॑ ।य॒श॒श्विनो॑ नो॒ यश॑से॒ह पा॑ह्या॒राद् द्वि॒षेभि॒रप॑ याहि दू॒रम्

vidma te sarvāḥ parijāḥ purastād vidma svapna yo adhipā ihā te | yaśaśvino no yaśaseha pāhyārād dviṣebhirapa yāhi dūram

हिन्दी अर्थ

(राजानः) राजा लोग (सम् भरगुः) इकटुं हो जते है, (ऋणानि) ऋण (सम् अगुः) इकदटु हो जाते है, (कुष्ठाः) कष्ठ रोग (सम अगुः) इकटु हो जाते है, (कलाः) चन्द्रमा की कलाएु' (सम् भ्रगुः) इकटी हो जाती है, इसी भ्रपनेमे से बाहर निकालदेते है । ८०); भर्थात् राजा लोग समिति मेँ दकटुं होते ह । ऋणानि यदि ऋणो को रने: शनैः न चुकाया जाय, तो सुद-दर-सुद द्वारा ऋण बढ़ जाते ह । है । कलाः पुणिमा के दिन चन्द्रमा की १६ कलाए इकटी हो जाती है।

English

As men discharge the utmost debt, collect the eighth and sixteenth part, So to the foeman we transfer together all the evil dream.

अध्याय 19

श्लोक 57.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१-५ यमः।दुःष्वप्ननाशनम्।१ अनुष्टुप्, २-३ त्रिष्टुप् (त्र्यवसाना), ४ षट्पदा उष्णिग्बृहतीगर्भा विराट् शक्वरी, ५ त्र्यवसाना पञ्चपदा परशाक्वरातिजगती।यथा॑ क॒लां यथा॑ श॒फं यथ॒र्णं सं॒नय॑न्ति ।ए॒वा दु॒ष्वप्न्यं॒ सर्व॒मप्रि॑ये॒ सं न॑यामसि

duḥṣvapnanāśanam| 1-5 yamaḥ| duḥṣvapnanāśanam| 1 anuṣṭup, 2-3 triṣṭup (tryavasānā), 4 ṣaṭpadā uṣṇigbṛhatīgarbhā virāṭ śakvarī, 5 tryavasānā pañcapadā paraśākvarātijagatī| yathā kalāṃ yathā śaphaṃ yatharṇaṃ saṃnayanti | evā duṣvapnyaṃ sarvamapriye saṃ nayāmasi

हिन्दी अर्थ

इन के मी संस्कार इकटु होकर दुःखदायी हो जाते है । इस लिये दुःस्वप्नो को भरपने दुदमन जानकर, दृढ़ संकल्प द्वारा उन्दः चित्तभूमि से बाहर कर देने का यत्न करते रहना चाहिए । ४१५. देवानां पत्नीनां गम यम॑स्य कर यो भद्रः ख॑प्न। के (गभं) है गर्मभूत ¡ ,तथा (यमस्य). यंमनिम्रमो कै परिपालक.के (कर)

English

Princes came together, debts came together, Kushthas came to- gether, Sixteenths came together. The whole evil dream that hath visited us we send away as a bad dream to the man who hates us.

अध्याय 19

श्लोक 57.2

सं राजा॑नो अगुः॒ समृ॒णाम्य॑गुः॒ सं कु॒ष्ठा अ॑गुः॒ सं क॒ला अ॑गुः ।सम॒स्मासु॒ यद् दु॒ष्वप्न्यं॒ निर्द्वि॑ष॒ते दु॒ष्वप्न्यं॑ सुवाम

saṃ rājāno aguḥ samṛṇāmyaguḥ saṃ kuṣṭhā aguḥ saṃ kalā aguḥ | samasmāsu yad duṣvapnyaṃ nirdviṣate duṣvapnyaṃ suvāma

हिन्दी अर्थ

का० १९। सु° ५७ भथयववेद-माष्य ३६१५ सुखदायक भौर कल्याणकारी है, (सः) वहत् (मम) मेराहो गयादहै। के (मुखम्) कले मुख के सदृशा है । देवानाम् = दिव्यगुणी उपासक । यथा - “यत्र देवा भरमृतसानक्षाना-

English

Child of Gods’ Consorts, minister of Yama is the good Dream: that which is my trouble we drive away to the enemy.

अध्याय 19

श्लोक 57.3

देवा॑नां पत्नीनां गर्भ॒ यम॑स्य कर॒ यो भ॒द्रः स्व॑प्न ।स मम॒ यः पा॒पस्तद् द्वि॑ष॒ते प्र हि॑ण्मः ।मा तृ॒ष्टाना॑मसि कृष्णशकु॒नेर्मुख॑म्

devānāṃ patnīnāṃ garbha yamasya kara yo bhadraḥ svapna | sa mama yaḥ pāpastad dviṣate pra hiṇmaḥ | mā tṛṣṭānāmasi kṛṣṇaśakunermukham

हिन्दी अर्थ

-=साघना-सम्पनन तथा, ऋषि लोग = वेदाथं साक्षातुकर्ता । यथा--तेनं देवा भ्रयजन्त साध्या ऋषयश्च ये" (यजु० ३१।९) । गमं = जेसे माताभों है । भद्र स्वप्न यमनियमों के पालक को एेसे सहायक होते है, जैसे कि काम करने ओौर वीरता में हाथ । दुःस्वप्न तामसिक है, तमोगुण के परिणाम है। का मूख काला होता है, भौर इस मुख के द्वारा वह चोरी से पड़ भन्न को खा जाता है। तमोगुण भी काला होता है, ओर चोरी भ्रादि करते का

English

Thou whose name is Rough art the mouth of the Black Bird. As such we know thee, Dream, as such we know thee well. Like a horse art thou, O Dream. As they bind girth and surcingle on a horse, so bind the alien mischief-maker, the scorner of

अध्याय 19

श्लोक 57.4

तं त्वा॑ स्वप्न॒ तथा॒ सं वि॑द्म॒ स त्वं स्व॒प्नाश्व॑ इव का॒यमश्व॑ इव नीना॒हम्।अ॒ना॒स्मा॒कं दे॑वपी॒युं पिया॑रुं वप॒ यद॒स्मासु॑ दु॒ष्वप्न्यं॒ यद् गोषु॒ यच्च॑ नो गृ॒हे

taṃ tvā svapna tathā saṃ vidma sa tvaṃ svapnāśva iva kāyamaśva iva nīnāham| anāsmākaṃ devapīyuṃ piyāruṃ vapa yadasmāsu duṣvapnyaṃ yad goṣu yacca no gṛhe

हिन्दी अर्थ

कारण बनता है, भौर तदनुरूप दुःस्वप्नं को उत्पन्न करता है । तथा (भदव दव भ्रव जते (नीनाहम्) बन्धी रस्सीया काटी को भुमला ३६६ भधववेद-माष्य का० १९ 1सू०५७ भावनाभो का विनाशक, तथा (पियास्म्) दुःखदायी है । तथा (यद्) जो

English

the Gods. The evil dream that threatens us, threatens our cattle or our home.

अध्याय 19

श्लोक 57.5

अ॒ना॒स्मा॒कस्तद् दे॑वपी॒युः पिया॑रुर्नि॒ष्कमि॑व॒ प्रति॑ मुञ्चताम्।नवा॑र॒त्नीनप॑मया अ॒स्माकं॒ ततः॒ परि॑ ।दु॒ष्वप्न्यं॒ सर्वं॑ द्विष॒ते निर्द॑यामसि

anāsmākastad devapīyuḥ piyārurniṣkamiva prati muñcatām| navāratnīnapamayā asmākaṃ tataḥ pari | duṣvapnyaṃ sarvaṃ dviṣate nirdayāmasi

हिन्दी अर्थ

ह जो कि सुखदायक ओर कल्याणकारी रहै । यथा स्वप्न भँ मी सदृविचारों पियास्म् =पीयतिः हिसाकर्मां (निख० ४।४।२५) । गोषू = “गौरिति नो दुःस्वप्न (अनास्माकः) हमारा नहीं रहा, (तत्) उस (देवपीयुः)

English

That let the scorner of the Gods, the alien mischief-maker bind as a gold jewel round his neck. Having measured off nine cubits’ distance from us we give away the whole of the evil dream

अध्याय 19

श्लोक 58.1

यज्ञः।१-६ ब्रह्मा।यज्ञः, बहुदैवत्यम्।त्रिष्टुप्, २ पुरोऽनुष्टुप्, ३ चतुष्पदाऽतिशक्वरी, ५ भुरिक्।घृ॒तस्य॑ जू॒तिः सम॑ना॒ सदे॑वा संवत्स॒रं ह॒विषा॑ व॒र्धय॑न्ती ।श्रोत्रं॒ चक्षुः॑ प्रा॒णोच्छि॑न्नो नो अ॒स्त्वच्छि॑न्ना व॒यमायु॑षो॒ वर्च॑सः

yajñaḥ| 1-6 brahmā| yajñaḥ, bahudaivatyam| triṣṭup, 2 puro'nuṣṭup, 3 catuṣpadā'tiśakvarī, 5 bhurik| ghṛtasya jūtiḥ samanā sadevā saṃvatsaraṃ haviṣā vardhayantī | śrotraṃ cakṣuḥ prāṇocchinno no astvacchinnā vayamāyuṣo varcasaḥ

हिन्दी अर्थ

(द्विष) दष्यपक्च म (निदंयामसि ) हम सब निदं यपूरवंक फक देते है । देना 1 दुःस्वप्न को त्यागा जाता है, पहना नहीं जाता । ्रतिमुञ्चु-यथा महसि" (रधुवं ३१४६) मे “पतिम्” का भयं है- त्यागना, छोद्ना । कन ०७ च न = (न = न ाा्ााकूकाककाककककककपककककक

English

to the man who hates us. A prayer for prosperity, accompanying a sacrifice

अध्याय 19

श्लोक 58.2

उपा॒स्मान् प्रा॒णो ह्व॑यता॒मुप॑ व॒यं प्रा॒णं ह॑वामहे ।वर्चो॑ जग्राह पृथि॒व्य॑१न्तरि॑क्षं॒ वर्चः॒ सोमो॒ बृह॒स्पति॑र्विध॒त्ता

upāsmān prāṇo hvayatāmupa vayaṃ prāṇaṃ havāmahe | varco jagrāha pṛthivya1ntarikṣaṃ varcaḥ somo bṛhaspatirvidhattā

हिन्दी अर्थ

का० १९ ॥ सुऽ भय भथर्वंवेद-माष्य ३६७ पा65 ध6 151 ७रभ (भ्रापटे), भर्थात् कमी-कमी भरति का श्रथं महि भी होता है । भ्रङ्गूठे क मूलमाग से यदि मुदिकोनापा जाय, तो प्रायः करके भ्रौसतन € मृह्वियों के परिमाण वालाश्चरीर होता है। भरतः “नव प्रररनीन्'' का भ्रभिप्राय है--€ मुदि परिमाण वाला शरीर । उस ४१८. धृतस्य जूतिः सम॑ना सदेवा संवत्सरं हविषा वर्धयन्ती ।

English

Still equal be the flow of butter ever causing the Year to prosper with oblation. Still be our hearing, sight, and breath uninjured: let us lose nothing of our life and vigour. Let lively breath invite us: we call vital breath to visit us.

अध्याय 19

श्लोक 58.3

वर्च॑सो॒ द्यावा॑पृथि॒वी सं॒ग्रह॑णी बभू॒वथु॒र्वर्चो॑ गृही॒त्वा पृ॑थि॒वीमनु॒ सं च॑रेम ।य॒शसं॒ गावो॒ गोप॑ति॒मुप॑ तिष्ठन्त्याय॒तीर्यशो॑ गृही॒त्वा पृ॑थि॒वीमनु॒ सं च॑रेम

varcaso dyāvāpṛthivī saṃgrahaṇī babhūvathurvarco gṛhītvā pṛthivīmanu saṃ carema | yaśasaṃ gāvo gopatimupa tiṣṭhantyāyatīryaśo gṛhītvā pṛthivīmanu saṃ carema

हिन्दी अर्थ

(समना) मननपूरवेक, तथा (सदेवा) यज्ञवेत्ताः विद्वानों के सहयोग- बड़ -बड़ यज्ञो मे वषंमर दी गई भ्राहूतिर्या, वेग से ऊंचे अन्तरि म पहुंच कर, चारों प्रोर फल कर, सब के लिये सुखदायक होती, रौर दीं परमेदवर को (उप) उपासना विधि द्वारा (हवामहे) सहायतार्थं -पुकारते ३६८ भरयर्ववेद-माष्य का० १९। सु० ५८

English

Earth and air’s middle realm have gathered, Soma, Brihaspati and Dhartar gathered vigour. 264

अध्याय 19

श्लोक 58.4

व्र॒जं कृ॑णुध्वं॒ स हि वो॑ नृ॒पाणो॒ वर्मा॑ सीव्यध्वं बहु॒ला पृ॒थूनि॑ ।पुरः॑ कृणुध्व॒माय॑सी॒रधृ॑ष्टा॒ मा वः॑ सुस्रोच्चम॒सो दृं॑हता॒ तम्

vrajaṃ kṛṇudhvaṃ sa hi vo nṛpāṇo varmā sīvyadhvaṃ bahulā pṛthūni | puraḥ kṛṇudhvamāyasīradhṛṣṭā mā vaḥ susroccamaso dṛṃhatā tam

हिन्दी अर्थ

है । यजो हारा (पृथिवी) पृथिवीस्थ पदार्थो तथा पृथिवीस्थ प्रजाजनने का चारण करनेवाले (बहस्पतिः) सूयं ने, उसकी किरणों ने (वचः जग्राह) (दावापृथिवी) चुलोक भ्रौर पृथिवीलोक (वर्च॑ः) तेज के (संग्रहणो )

English

The earth and heaven have come to be two gatherers up of vigo- rous might. So let us gather vigour up and closely follow after Earth. With glory come the cows and stand beside the master of the herd. Let us when we have

अध्याय 19

श्लोक 58.5

य॒ज्ञस्य॒ चक्षुः॒ प्रभृ॑ति॒र्मुखं॑ च वा॒चा श्रोत्रे॑ण॒ मन॑सा जुहोमि ।इ॒मं य॒ज्ञं वित॑तं वि॒श्वक॑र्म॒णा दे॒वा य॑न्तु सुमन॒स्यमा॑नाः

yajñasya cakṣuḥ prabhṛtirmukhaṃ ca vācā śrotreṇa manasā juhomi | imaṃ yajñaṃ vitataṃ viśvakarmaṇā devā yantu sumanasyamānāḥ

हिन्दी अर्थ

(संचरेम) हम संचार करर, मिलकर विचरं । (मायतीः)गोचर से भ्रात हुई (गृहीत्वा) ग्रहण करके (पृथिवीम्) पृथिवी पर (अनु) निरन्तर (संचरेम) हम संचार करं, मिल कर विचरे । यजो दारा च.लोक को किरणें बलिष्ठ होकर वर्षा करतीं ह, भौर है, ओर इस कारण गोपति गौश्रों का संग्रह कर सकता है । अन्नो के प्रभूतः होने पर हम प्रसन्नतापूर्वंक पृथिवी पर विचरते है । यशः भन्न (निषं०

English

gathered fame and glory closely follow Earth. Prepare the cow-stall, for there drink your heroes: stitch ye the coats of armour wide and

अध्याय 19

श्लोक 58.6

ये दे॒वाना॑मृ॒त्विजो॒ ये च॑ य॒ज्ञिया॒ येभ्यो॑ ह॒व्यं क्रि॒यते॑ भाग॒धेय॑म्।इ॒मं य॒ज्ञं स॒ह पत्नी॑भि॒रेत्य॒ याव॑न्तो दे॒वास्त॑वि॒षा मा॑दयन्ताम्

ye devānāmṛtvijo ye ca yajñiyā yebhyo havyaṃ kriyate bhāgadheyam| imaṃ yajñaṃ saha patnībhiretya yāvanto devāstaviṣā mādayantām

हिन्दी अर्थ

का० १९ सुऽ ५८ भरथर्ववेद-भाष्य ३६९ (व्रजम् ) गोशाला (कृणुध्वम्) बनाभो, (सः) वह गोशाला (हि) निरचय से (वः नुपाणः) तुम मनुष्यों के दुग्धपान तथा रक्षा का साधन् है । (बहुला बहुलानि) बहुत तथा (पृथुनि) शरीर-विस्तारी (वर्मा न टपकरे, इसलिये (तम्) उसे (दु हता) सुद्ढ़ बनाभो ।

English

many. Make iron forts defying all assailants: let not your pitcher leak; stay it securely. The eye of sacrifice, source and beginning with voice, car, spirit unto him I offer.

अध्याय 19

श्लोक 59.1

यज्ञः।१-३ ब्रह्मा।अग्निः।त्रिष्टुप्, १ गायत्री।त्वम॑ग्ने व्रत॒पा अ॑सि दे॒व आ मर्त्ये॒ष्वा।त्वं य॒ज्ञेष्वीड्यः॑

yajñaḥ| 1-3 brahmā| agniḥ| triṣṭup, 1 gāyatrī| tvamagne vratapā asi deva ā martyeṣvā| tvaṃ yajñeṣvīḍyaḥ

हिन्दी अर्थ

सत्रों कवचो, सुदृढ नगरों तथा दुगों कानिर्माण भी करो । इमं यद्घं वित॑तं विश्वकभेणा देवा य॑न्तु सुमनस्यमानाः ॥५॥। भारम्भक है, (च) भौर (मखम्) मुख है । उसके प्रति (वाचा) वाणी तिया देता हूं । (विदवक्मणा ) विदव कै कर्ता द्वारा (विततम्) फले हृए

English

To this our sacrifice, wrought by Visvakarman, may the Gods come gracious and kindly hearted. Let the Gods’ Priests and those who merit worship, to whom oblation as their share is

अध्याय 19

श्लोक 59.2

यद् वो॑ व॒यं प्र॑मि॒नाम॑ व्र॒तानि॑ वि॒दुषां॑ देवा॒ अवि॑दुष्टरासः ।अ॒ग्निष्टद् वि॒श्वादा पृ॑णातु वि॒द्वान्त्सोम॑स्य॒ यो ब्रा॑ह्म॒णां आ॑वि॒वेश॑

yad vo vayaṃ pramināma vratāni viduṣāṃ devā aviduṣṭarāsaḥ | agniṣṭad viśvādā pṛṇātu vidvāntsomasya yo brāhmaṇāṃ āviveśa

हिन्दी अर्थ

संसार को यज्ञकहा है । संसार मेँ यज्ञमावना करनी चाहिए ।. इस लिये संसार को पवित्र जानकर प्रवित्र भावना से संसार मँ कमं करने चाहिए । संसार-यज्ञ का रचानैवाला विदवकर्मा परमेदवर है संसार-यज्ञ के सृष्टि पेदाहो जाने पर वही विदवकर्मां मानो मुखवाला होकर वेदों के दारा संसार-यज्ञ कै रहस्यं का उपदेल करता . है । यथा-“्रस्यङ् जना- ३७० भथर्ववेद-माष्य का० १९६ । सु० ५

English

offered, Come to this holy service with their Consorts, and all Gods revel in the food we bring them. An expiatory hymn accompanying sacrifice

अध्याय 19

श्लोक 59.3

आ दे॒वाना॒मपि॒ पन्था॑मगन्म॒ यच्छ॒क्नवा॑म॒ तद॑नु॒प्रवो॑ढुम्।अ॒ग्निर्वि॒द्वान्त्स य॑जा॒त् स इद्धोता॒ सोऽध्व॒रान्त्स ऋ॒तून् क॑ल्पयाति

ā devānāmapi panthāmaganma yacchaknavāma tadanupravoḍhum| agnirvidvāntsa yajāt sa iddhotā so'dhvarāntsa ṛtūn kalpayāti

हिन्दी अर्थ

उस का मनन भट करने चाहिए । देव लोग प्रसन्नतापुवंक इस संसार-यज्ञ मे आके, भौर इसे भ्रभ्युदय निःश्रेयस फा साघन सम कर इसमे विचरे । ्भृतिः=भअथवा भरण-पोषण करने वाला"। (देवानाम्) देवकोटि के (ये) भो देव (ऋत्विजः) ऋतु-ऋतु के अनुसार ऋतु-यज्ञ करते है, (च) भौर (ये) जो देव (यज्ञियाः) ऋतुयज्ञ (क्रियते) दिया जाता है, (यावन्तः देवाः) ये जितने देव है, वे (पत्नीभिः याजी जल वायु भ्रन्न. भादिकी शुद्धि तथा रोगनिवारण हारा; तथा भ्रध्यात्मयाजी नंतिक-जीवन तथा निःश्रेयस के सदुपदेशों दारा समाजसेवा करते ह । अतः उन कै धारण-पोषण क्रा भार भी प्रजाजनों को उठाना होता है । हविष्यान्न है- सात्विक भन्न ।

English

God among mortals, Agni, thou art guard of holy Law, thou art To be adored in sacred rites.

अध्याय 19

श्लोक 60.1

अङ्गानि।१-२ ब्रह्मा।वाक्, अङ्गानि च।१ पथ्याबृहती, २ ककुम्मती पुर उष्णिक्।वाङ् म॑ आ॒सन् न॒सोः प्रा॒णश्चक्षु॑र॒क्ष्णोः श्रोत्रं॒ कर्ण॑योः ।अप॑लिताः॒ केशा॒ अशो॑णा॒ दन्ता॑ ब॒हु बा॒ह्वोर्बल॑म्

aṅgāni| 1-2 brahmā| vāk, aṅgāni ca| 1 pathyābṛhatī, 2 kakummatī pura uṣṇik| vāṅ ma āsan nasoḥ prāṇaścakṣurakṣṇoḥ śrotraṃ karṇayoḥ | apalitāḥ keśā aśoṇā dantā bahu bāhvorbalam

हिन्दी अर्थ

र४. त्वमे ्रतपा असि देव आ मद्वा । लवं यङे; ।(१॥ घारण-पीषण करनेवाला, तथा मुखिया है । का० १९ । सु० ४५९ भरथर्वेवेद-भाष्य ३७१

English

When, ignorant, we violate the statutes of you, O Deities, with whom is knowledge, Wise Agni shall correct our faults and failings, and Soma who hath entered into Brāhmans. To the Gods’ pathway have we come desiring to execute what work we may accomplish.

अध्याय 19

श्लोक 60.2

ऊ॒र्वोरोजो॒ जङ्घ॑योर्ज॒वः पाद॑योः ।प्र॒ति॒ष्ठा अरि॑ष्टानि मे॒ सर्वा॒त्मानि॑भृष्टः

ūrvorojo jaṅghayorjavaḥ pādayoḥ | pratiṣṭhā ariṣṭāni me sarvātmānibhṛṣṭaḥ

हिन्दी अर्थ

(भभिनाम) तोड़ा है, जो हम कि (भरविदृष्टरासः) भाप की अपेक्षया रविद्या करनेवाला, (अग्निः) घरमेप्थ पर चलानेवाला परमेष्वर (प्रा पृणातु) हरम प्रकट होता है । अग्निः “भ्म्ने नय सुपथा” (यजु ° ४०।१६।) (देवानाम्) प्राकृतिक देवों के (पन्थाम्) मागं को (अपि) भी (भरा

English

Let Agni—for he knows—complete the worship. He is the Priest: let him fix rites and seasons.

अध्याय 19

श्लोक 61.1

पूर्णायुः।१ ब्रह्मा।ब्रह्मणस्पतिः।विराट् पथ्याबृहती।त॒नूस्त॒न्वा मे सहे द॒तः सर्व॒मायु॑रशीय ।स्यो॒नं मे॑ सीद पु॒रुः पृ॑णस्व॒ पव॑मानः स्व॒र्गे

pūrṇāyuḥ| 1 brahmā| brahmaṇaspatiḥ| virāṭ pathyābṛhatī| tanūstanvā me sahe dataḥ sarvamāyuraśīya | syonaṃ me sīda puruḥ pṛṇasva pavamānaḥ svarge

हिन्दी अर्थ

उस मागं को (भ्रनु) निरन्तर (प्रवोढुम्) निभा सकने, -उस पर चंल सकने व्रतो के पथं पर ले चलनेवाला, चलानेवालं परमेदवर (यजात्) हमारे इन है । मन्व ३ मे प्राकृतिक देवो कै पथ पर चलने का वर्णन है । भाकृतिक

English

A prayer for perfect bodily and mental health and vigour May I have voice in my mouth, breath in my nostrils, sight in mine eyes, hearing in mine ears, hair that hath not turned gray, teeth free from yellowness, and much strength in mine

अध्याय 19

श्लोक 62.1

सर्वप्रियत्वम्।१ ब्रह्मा।ब्रह्मणस्पतिः।अनुष्टुप्।प्रि॒यं मा॑ कृणु दे॒वेषु॑ प्रि॒यं राज॑सु मा कृणु ।प्रि॒यं सर्व॑स्य॒ पश्य॑त उ॒त शू॒द्र उ॒तार्ये॑

sarvapriyatvam| 1 brahmā| brahmaṇaspatiḥ| anuṣṭup| priyaṃ mā kṛṇu deveṣu priyaṃ rājasu mā kṛṇu | priyaṃ sarvasya paśyata uta śūdra utārye

हिन्दी अर्थ

है । इसलिये इन के त्रत भदूट हैँ । इन पर निरन्तर चल घकना मनुष्यो के लिये भरति कठिन है । इसलिये परभेदवंर से दक्ति की प्रार्थना की गई है । ३७२ भरयवववेद-माष्य का०.१९ 1 सू० ६१ अपंरिताः केशा अक्लोणा दन्तां बहु बाह्योबलंम् ॥१॥ (ऊर्वोः) दोनों पदर मे (भोजः) भोज हो, (नक्खयोः) दोनो टयो में (जवः) वेग हो, (पादयोः) दोनो पैरों में (प्रतिष्ठा) दुढु स्थिति की राक्ति

English

arms. May I have power in my thighs, swiftness in my legs, stedfast- ness in my feet. May all my

अध्याय 19

श्लोक 63.1

आयुर्वर्धनम्।१ ब्रह्मा।ब्रह्मणस्पतिः।विराडुपरिष्टाद्बृहती।उत् ति॑ष्ठ ब्रह्मणस्पते दे॒वान् य॒ज्ञेन॑ बोधय ।आयुः॑ प्रा॒णं प्र॒जां प॒शून् की॒र्तिं यज॑मानं च वर्धय

āyurvardhanam| 1 brahmā| brahmaṇaspatiḥ| virāḍupariṣṭādbṛhatī| ut tiṣṭha brahmaṇaspate devān yajñena bodhaya | āyuḥ prāṇaṃ prajāṃ paśūn kīrtiṃ yajamānaṃ ca vardhaya

हिन्दी अर्थ

मेश्वर ! (सीद) भ्राप विराजिये । (पुरः) पालन करनेवाले भ्राप-. (पृणस्व ) मेरी पालना कीजिये; (स्वगे) भौर सुखी हृदय में (पवमानः) वास कर ममे पवित्र कीजिये । ३१) । भर्थात् भाठ चक्रो वाली, नौ द्वारो वाली देवोंकी पूरी है,जो कि भ्रयोध्या है । उस पुरी (= शरीर) मे सुवणं घटित एक कोश (हदय) है, भी दुद. संकल्प ओौर तदनुकूल उपायों के भवलम्बन हारा दष्टसिद्धि. ही सकती है--इस का वर्णन हुभ्रा है ।

English

members be uninjured and my soul unimpaired. A prayer for long life prosperity and final happiness in heaven May my self remain in my body: may I enjoy the full time of life,

अध्याय 19

श्लोक 64.1

दीर्घायुत्वम्।१-४ ब्रह्मा।अग्निः।अनुष्टुप्।अग्ने॑ स॒मिध॒माहा॑र्षं बृह॒ते जा॒तवे॑दसे ।स मे॑ श्र॒द्धां च॑ मे॒धां च॑ जा॒तवे॑दाः॒ प्र य॑च्छतु

dīrghāyutvam| 1-4 brahmā| agniḥ| anuṣṭup| agne samidhamāhārṣaṃ bṛhate jātavedase | sa me śraddhāṃ ca medhāṃ ca jātavedāḥ pra yacchatu

हिन्दी अर्थ

(प्रियं कृण) प्रिय कोजिये 1 (राजसु) राजाभों तथा क्षत्रियो मे (मा) मुके (प्रियं कृण ) प्रिय कीजिये । (उत) गौर (द्र) दरो मे, (उत) तथा (भाय = “भुदेवाः मी कहते है 4. चुर लु(भादयु) द्रवति कायषु इति शूद्रः स्वस्य शरीर हने के कारण शित्प भादि कायो मे छी घ्रतापु्वेकं काम करनेवाले । प्राये = भयं भराय (भेष्ठ), भर्य स्वामी भौर वेदय ॥ ४६१. उतिष्ठ बरहमणस्यते देवान् यङगेनं बोधय । आयुः प्राणं रजाँ पन् कीतिं यजमानं च. वेय ॥१॥ ३७४ धयर्ववेद-माष्य का० १६। सू० ६४

English

Rest thee pleasantly: pour forth abundance, purifying thyself in Svarga.

अध्याय 19

श्लोक 64.2

इ॒ध्मेन॑ त्वा जातवेदः स॒मिधा॑ वर्धयामसि ।तथा॒ त्वम॒स्मान् व॑र्धय प्र॒जया॑ च॒ धने॑न च

idhmena tvā jātavedaḥ samidhā vardhayāmasi | tathā tvamasmān vardhaya prajayā ca dhanena ca

हिन्दी अर्थ

गुणी जनों को (बोधय) जगादइये । (च) पौर (यजमानम्) यज्ञियकमों के वैदिक विद्वानों को चाहिए कि वे निज यृज्ञिय-माचरणों द्वारा दिन्य- ४३२. अग्न समिधमाद। ष ब्रते जातवेदसे । सम श्रद्धां च मेधां च जातवेदाः प्र यच्छतु ॥१॥

English

A prayer for the love of Gods and men Make me beloved among the Gods, beloved among the Princes, make Me dear to everyone who sees, to Sūdra and to Aryan man.

अध्याय 19

श्लोक 64.3

यद॑ग्ने॒ यानि॒ कानि॑ चि॒दा ते॒ दारू॑णि द॒ध्मसि॑ ।सर्वं॒ तद॑स्तु मे शि॒वं तज्जु॑षस्व यविष्ठ्य

yadagne yāni kāni cidā te dārūṇi dadhmasi | sarvaṃ tadastu me śivaṃ tajjuṣasva yaviṣṭhya

हिन्दी अर्थ

ग्राधान करता है,.जो काष्टौषच सात्विक भौर मेधाजनक । हों । छनके प्रौर बुद्धिको षडे-सुने को धारण करने मे समथं बनाता है । शरदा भत् सत्यनाम (निषं० ३।१०) +-घा (धारणे) । मेधा-=घीः घारणावती, बुद्धि ४३१. इमेन त्वा जातवेदः सुमि बधंयामति । का० १९ ।सु०६४ भयववेद-माष्य २७१५

English

A prayer, with sacrifice, for long life and prosperity Rise up, O Brāhmanaspati; awake the Gods with sacrifice.

अध्याय 19

श्लोक 64.4

ए॒तास्ते॑ अग्ने स॒मिध॒स्त्वमि॒द्धः स॒मिद् भव ।आयु॑र॒स्मासु॑ धेह्यमृत॒त्वमा॑चा॒र्याय

etāste agne samidhastvamiddhaḥ samid bhava | āyurasmāsu dhehyamṛtatvamācāryāya

हिन्दी अर्थ

उन्हँ घन की सहायता मिलती रहती है । ४३४. यरदभ्रे यानि कानि चिद् ते दारूणि दष्मसिं काष्ठ को (जुषस्व) ततु सेवन कर । .

English

Strengthen the Sacrificer: aid life, breath, and off-spring, cattle, fame. A prayer to Agni for children, long life, and various blessings For lofty Jātavedas I have brought the fuel hither first.

अध्याय 19

श्लोक 65.1

अवनम्।१ ब्रह्मा।जातवेदाः, सूर्यश्च।जगती।हरिः॑ सुप॒र्णो दिव॒मारु॑हो॒ऽर्चिषा॒ ये त्वा॒ दिप्स॑न्ति॒ दिव॑मु॒त्पत॑न्तम्।अव॒ तां ज॑हि॒ हर॑सा जातवे॒दोऽबि॑भ्यदु॒ग्रोऽर्चिषा॒ दिव॒मा रो॑ह सूर्य

avanam| 1 brahmā| jātavedāḥ, sūryaśca| jagatī| hariḥ suparṇo divamāruho'rciṣā ye tvā dipsanti divamutpatantam| ava tāṃ jahi harasā jātavedo'bibhyadugro'rciṣā divamā roha sūrya

हिन्दी अर्थ

कविता कीदृष्टि से जड भ्रग्नि का सम्बोधन किया गया है। सकता है, ताकि अस्निहोत्र-तव्रत संग न होने पाए । यविष्ठचन=यु (भरने) है प्रभति ! (एताः) ये (ते) तेरे लिये (समिधः) समिषाए है, स्वस्थः भायु (धेहि) स्थापिति कर 1 भ्रौर (आचा्ययि) भाषाय के लिये

English

May he who knoweth all bestow faith and intelligence on me. With fuel and with flaming wood we, Jātavedas, strengthen thee;

अध्याय 19

श्लोक 66.1

असुरक्षयणम्।१ ब्रह्मा।जातवेदाः सूर्यो वज्रश्च।अतिजगती।अयो॑जाला॒ असु॑रा मा॒यिनो॑ऽय॒स्मयैः॒ पाशै॑र॒ङ्किनो॒ ये चर॑न्ति ।तांस्ते॑ रन्धयामि॒ हर॑सा जातवेदः स॒हस्र॑ऋष्टिः स॒पत्ना॑न् प्रमृ॒णन् पा॑हि॒ वज्रः॑

asurakṣayaṇam| 1 brahmā| jātavedāḥ sūryo vajraśca| atijagatī| ayojālā asurā māyino'yasmayaiḥ pāśairaṅkino ye caranti | tāṃste randhayāmi harasā jātavedaḥ sahasraṛṣṭiḥ sapatnān pramṛṇan pāhi vajraḥ

हिन्दी अर्थ

३७६ प्रथवववेद-माष्य क° १९ । पु० ६४ अवं तां जहि इश्सा जातवेदोऽगिंभ्यदगरोऽचिषा दिवमा रोह ये ॥१॥ क्लेशो का भपहरण किये हूये है, (सुपर्णः) तु रदिम. के सदुश प्रकाशमान

English

So do thou strengthen us in turn with children and with store of wealth. Whatever even be the logs which, Agni, we lay down for thee, propitious be it all to me: accept it, O most youthful God.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।