Atharva Veda
19
अध्याय 19 / 20

Kanda 19

काण्ड 19

453 श्लोकभाग 4/7 · श्लोक 29.1–38.3

पूर्ण अध्याय पाठ71 श्लोक

अध्याय 19

श्लोक 29.1

दर्भमणिः।१-९ ब्रह्मा।दर्भमाणिः।अनुष्टुप्।निक्ष॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ निक्ष॑ मे पृतनाय॒तः ।निक्ष॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ निक्ष॑ मे द्विष॒तो म॑णे

darbhamaṇiḥ| 1-9 brahmā| darbhamāṇiḥ| anuṣṭup| nikṣa darbha sapatnān me nikṣa me pṛtanāyataḥ | nikṣa me sarvān durhārdo nikṣa me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

को प्धिक्रार सौपते समय उसका श्रभिषेक होना चाहिए । वच॑सा = भरन्नेन है । प्रामाधिपति होने से वनाधिपति “गार्हुपत्य“मी हैगृहपतियों का शासक २७४ छथर्ववेद-माष्य का० १९ । सुर ३२ पालक (कृणु) केर दे । (त्वम्) तु (भरौदुम्बरः) वनाधिपति है (सः) वह तू

English

Darbha, thou hast a hundred shields, thou hast a thousand. manly powers. All Gods have given thee to him to bear thee till extreme old age.

अध्याय 19

श्लोक 29.2

तृ॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे तृ॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।तृ॒न्द्धि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्द॑तृ॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

tṛnddhi darbha sapatnān me tṛnddhi me pṛtanāyataḥ | tṛnddhi me sarvān durhārdatṛnddhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

(घेहि) स्थापित कर । (च) गौर (नः) हमे (सर्ववीरम्) सबकोवीर (रायस्पोषाय) राष्ट की सम्पत्तियों के परिपोषण के लियेहे वनाधिपति ! है । (सः) वह् वनाधिपति (नः) हमारे (सनिम्) घन-विभाजन को (मघु-

English

They call thee, ‘Darbha, shield of Gods, they call the Brāhmanas- pati. They call thee shield of Indra: thou protectest kingdoms from attack. 253

अध्याय 19

श्लोक 29.3

रु॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे रु॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।रु॒न्द्धि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ रु॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

runddhi darbha sapatnān me runddhi me pṛtanāyataḥ | runddhi me sarvān durhārdo runddhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

(नि यच्छात्) देवे, जिससे कि (सवंवीरम्) हम सब वीर बन जाय । २५०. शतकाण्डो दुश्च्यवनः सहद॑पणे उत्तिरः । (शतकाण्डः) सैकड़ों दवारा कमनीय अर्थात् चाहा गया, (दुष्यवनः) न्यायपय से च्यत न होनेवाला या ध्रपराभवनीय, (सहस्रपणंः) हजारो का परिपालकः, (उत्तिरः) क्लेशो से तैरातेवाला (यः) जो (उग्रः भोषधिः) उग्र तेरे (भ्रायुषे) जीवन के लिथे (बध्नामि) तेरे साथ यै दुद् बद्धकरता हं ।

English

Darbha, destroyer of the foe, vexing the hearts of enemies, An Amulet that strengthens rule I make thee, and the body’s. guard.

अध्याय 19

श्लोक 29.4

मृ॒ण द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे मृ॒ण मे॑ पृतनाय॒तः ।मृ॒ण मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ मृ॒ण मे॑ द्विष॒तो म॑णे

mṛṇa darbha sapatnān me mṛṇa me pṛtanāyataḥ | mṛṇa me sarvān durhārdo mṛṇa me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

का० १९1 सु० ३२ भयवंवेद-भाष्य २७५ वोषं धयतीति वा (निरु० । ३। २७) । परमेदवर भ्रविद्यादि रोगों का भरोषघहूप है, उग्र भौषघरूप है 1 २५१, नाख केशान् प्र वपन्ति नोरसि ताडमा कते ।

English

What time Parjanya roared to it with lightning flashes in the sea, Thence came the drop, the golden drop, thence Darbha into being sprang. A charm to ensure general prosperity, accompanying self-investiture with an amulet of

अध्याय 19

श्लोक 29.5

मन्थ॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ मन्थ॑ मे पृतनाय॒तः ।मन्थ॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॒ मन्थ॑ मे द्विष॒तो म॑णे

mantha darbha sapatnān me mantha me pṛtanāyataḥ | mantha me sarvān durhārdo mantha me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

(अस्य) इसके केशान्) केशो को (प्र वपन्ति न) कोद उखाइते नहीं, (न) भ्रौरन (उरसि) इसकी छाती पर (ताडम् ) ताडना भर्थात् चोट (शमं) सुख गौर भ्राश्रय (यच्छति) प्रदान करता है । त्वया सद्काण्डेनायुः प्र ब॑धेयामेहे ॥३॥। (भोषघे ) ताप-सन्तान तथा सरमग्रदोषो के शोषधिरूप है परमेदवर ।

English

Udumbara Savitar make all cattle grow and prosper in my stable with.

अध्याय 19

श्लोक 29.6

पि॒ण्ड्ढि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे पि॒ण्ड्ढि मे॑ पृतनाय॒तः ।पि॒ण्ड्ढि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ पि॒ण्ड्ढि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

piṇḍḍhi darbha sapatnān me piṇḍḍhi me pṛtanāyataḥ | piṇḍḍhi me sarvān durhārdo piṇḍḍhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

नक्षत्र तथा तारागण नौर सूर्यं आपके ररह, इनमें भ्राप निवास किये हये है । तथा “योऽसावावित्ये पुरुषः सोऽसावहम. । भोम. खं ब्रह्म" १. वेद मेँ “पणं” शाब्द पु ल्लिङ्गं भी पठित है ( अथव इ३।४।४, ८; तथा परमेदवर । आयुः जीवनकाल तथा जीवन । तुलम् = तुल निष्कषं, निष्कषं

English

Amulet of Udumbara, helper of him who longs for wealth! May he who was our Household Fire, the ruler of our cattle, strong. Amulet of Udumbara endow us with prosperity.

अध्याय 19

श्लोक 29.7

ओष॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ ओष॑ मे पृतनाय॒तः ।ओष॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ ओष॑ मे द्विष॒तो म॑णे

oṣa darbha sapatnān me oṣa me pṛtanāyataḥ | oṣa me sarvān durhārdo oṣa me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर प्रलय में (तिस्रः) तीन (दिवः) चुलोकों को (उत) ओौरं (इमाः) इन (तिन्नः) तीन (पृथिवी!) पृथिवियों को (भतुणत्) विनष्ट कर देता । है परमेदवर ! (त्वया) भ्राप की सहायता द्वारा (अहम्) मै भर्थात् (वचांसि) हुव चनो को (तृणद्मि) समाप्त कर देता हूं, उन दुरव॑चनों जाती है किं उसके निन्दक मी उसके प्रशंसक हो जति हैउन कौ जिह्वाकी कटुता मधुरूप मेँ परिणत हो जाती है । तिलः दिवः, तिरः पुथिवीः=देवो- प्रथं ० काण्ड १६।सु०२७। मन्त्र ३। उभौ सदहंखन्तौ भूत्वा सपलान्त्सदिषीवहि ॥५॥।

English

By power of the Udumbara Charm may Dhātar give me plenty, rich. In the kine’s droppings and in fruit, and, in our dwelling, food, and drink.

अध्याय 19

श्लोक 29.8

दह॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ दह॑ मे पृतनाय॒तः ।दह॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॒ दह॑ मे द्विष॒तो म॑णे

daha darbha sapatnān me daha me pṛtanāyataḥ | daha me sarvān durhārdo daha me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

है दोषों के भ्रोषधिरूप परमेइवर 1 (त्वम्) श्राप (सहमानः) सहन- शील होते हृए कामादि दातुप्रों का पराभव करनेवाले है, (्रहम् ) पेभी (सहस्वान् ) सहनक्षील होता हुमा कामादि शत्रुं का पराभव करनेवाला (भ्रस्मि) हृं । (उभौ ) हम दोनों (सहस्वन्तौ) सहनशील तथा पराभव करने वाले (भुत्वा ) होकर (सपत्नान्) कामादि शत्रो का (सहिषीवहि ) पराभवं पराभव के लिते यत्नवान् होता है, तो परमेदवर भी इस प्रयत्न भें उसका सहायक होता है । सहमानः षह मषणे। का०१९ । सू० २३२ प्रयवेवेद-माष्य २७७

English

I win great plenty, while I wear the Amulet of Udumbara. Of quadrupeds and bipeds, of juices and food of every sort. I have obtained abundant wealth of cattle, bipeds and quad- rupeds, and corn in plenty.

अध्याय 19

श्लोक 29.9

ज॒हि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे ज॒हि मे॑ पृतनाय॒तः ।ज॒हि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ ज॒हि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

jahi darbha sapatnān me jahi me pṛtanāyataḥ | jahi me sarvān durhārdo jahi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

सद॑ सवोन् दुहीहैः सृदादौ मे बहन् षि ॥६॥ भअभिमनमावनाभों का (स्स्व) पराभव कीजिये 1 (पृतनायतः) कामादि, जो कि भ्रपने वर्गोके साथ सेनारूपमें हम पर आक्रमण करते है, उनका (सहस्व) पराभव कीलिये । (मे) मेरे (दुहः) कुत्सित हदयस्थभावों का २५६. दमेण देवजतिन दिनि दम्भेन शरश्वदित् । ( देवजातेन) देवकोटि के उपासको द्वारा प्रकट हए, साक्षात् किये गये (दिवि) दयूलोक मे (स्तम्भेन) तारागण को थामनेवाले (तेन) उस (दर्भेण)

English

Savitar and Brihaspati vouchsafe me the milk of kine and herbs’ refreshing juices! Fain would I be the lord of herds of cattle: may he who rules o’er riches send me riches!

अध्याय 19

श्लोक 30.1

दर्भमणिः।१-५ ब्रह्मा।दर्भमणिः।अनुष्टुप्।यत् ते॑ दर्भ ज॒रामृ॑त्युः श॒तं वर्म॑सु॒ वर्म॑ ते ।तेने॒मं व॒र्मिणं॑ कृ॒त्वा स॒पत्नां॑ जहि वी॒र्यैः

darbhamaṇiḥ| 1-5 brahmā| darbhamaṇiḥ| anuṣṭup| yat te darbha jarāmṛtyuḥ śataṃ varmasu varma te | tenemaṃ varmiṇaṃ kṛtvā sapatnāṃ jahi vīryaiḥ

हिन्दी अर्थ

(असनम्) परामव प्रदान किया है, (च) भौर (सनवानि ) परमेदवर फी छपा सरम भ्रागे भी पराभव प्रदान करता रहं । जनान् यथा “पञ्च यस्म च कामयामहे स्रस्मै च विपद्यते ॥८॥ कामयामहे ) जिसकी हम कामना करते है, उसके भरति (च) भौर (स्वं

English

May the Udumbara Amulet vouchsafe possessions unto me. To me with wealth and children come the Amulet of Udumbara. With splendour come the Amulet hastened by Indra on its way!

अध्याय 19

श्लोक 30.2

श॒तं ते॑ दर्भ॒ वर्मा॑णि स॒हस्रं॑ वी॒र्या॑णि ते ।तम॒स्मै विश्वे॒ त्वां दे॒वा ज॒रसे॒ भर्त॒वा अ॑दुः

śataṃ te darbha varmāṇi sahasraṃ vīryāṇi te | tamasmai viśve tvāṃ devā jarase bhartavā aduḥ

हिन्दी अर्थ

नाता है । “भ्रयः स्वामिवेश्ययोः(अष्टा०३।१।१०३)। २७८ क्रथवैवेद-भाष्य. काऽ १९।स्०३९ यं बिभ्रतं ननु पाप्मा विवेद स नोऽयं दर्मो वरणो दिवा कः ।९॥ (जायमानः) प्रकट होते हुए (यः) जिसने (पृथिवीम्) पुथिवीः को

English

Divine, foe-quelling Amulet, wealth-winner for the gain of wealth— May it give store of beasts and food and cause our kine to multiply.

अध्याय 19

श्लोक 30.3

त्वामा॑हुर्देव॒वर्म॒ त्वां द॑र्भ॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑म्।त्वामिन्द्र॑स्याहु॒र्वर्म॒ त्वं रा॒ष्ट्राणि॑ रक्षसि

tvāmāhurdevavarma tvāṃ darbha brahmaṇaspatim| tvāmindrasyāhurvarma tvaṃ rāṣṭrāṇi rakṣasi

हिन्दी अर्थ

द्वारक परमेश्वर को (पाप्मा) पाप या पापी ने (नु) निश्चय ते (न) नहीं (विवेद) जाना, (सः) वह (भयम्) यह ( वरुणः) वरूण नामवाला करता है। इस वर्णन से निदचय होता है कि“दभं "कुशा घास नहीं। सायणा- हतु-=यथा-- “येन च्यौरण्रा पुथिवौ च दृढा ' (यजु ° ३२।६) । वंरुणः = यहं परमेदवर का नाम है, कुशाघास नहीं । देखो--वरुण सूक्त ( प्रथं ० ४।१६। १--९) । दिवायह वरूण ही ज्ञानप्रकाश करता है, कुशा चास नहीं । यं बिभ्रतम् =भथवा जिसे धारण करनेवलि को पाप स्पशं नहीं करता । दिवा=प्रकाशम् (सायण)

English

As thou, O Forest Tree, wast born with increase when thy life began, So let Sarasvati bestow abundant growth of wealth on me. Sarasvati vouchsafe me wealth, household prosperity, and corn!

अध्याय 19

श्लोक 30.4

स॒प॒त्न॒क्षय॑णं दर्भ द्विष॒तस्तप॑नं हृ॒दः ।म॒णिं क्ष॒त्रस्य॒ वर्ध॑नं तनू॒पानं॑ कृणोमि ते

sapatnakṣayaṇaṃ darbha dviṣatastapanaṃ hṛdaḥ | maṇiṃ kṣatrasya vardhanaṃ tanūpānaṃ kṛṇomi te

हिन्दी अर्थ

२५९. सपहा शतकाण्डः सदानोष॑धीनां प्रथमः सं बभूव । (सपत्नहा) कामादि शत्रुभों का हनन करनेवाला, (शतकाण्डः) बाधाभ्रों का पराभव करनेवाला, (जोषधोनाम्) भध्यात्मरोगों के निवारण करनेवाले उपायों मँ (प्रथमः) सवे श्रेष्ठ उपाय (संबभूव) परमेश्वर हा है । (खः) वह॒ (बयम्) यह (दभः) भविद्यादि का विदारक परमेश्वर (नः) हमारी (विष्वतः) सब प्रकार से (परि पातु) पू्णेतया रक्षा करे । (तेन) उसकी सहायता द्वारा (पृतन्यतः) सेनाभ्रो हारा भाक्रमण चाहने कामादि के उहीपक कामादि कीसेनषए है -

English

Let Sinivāli bring them, and this Amulet of Udumbara. The Lord of amulets art thou, most mighty: in thee wealth’s ruler hath engendered riches,

अध्याय 19

श्लोक 30.5

यत् स॑मु॒द्रो अ॒भ्यक्र॑न्दत् प॒र्जन्यो॑ वि॒द्युता॑ स॒ह।ततो॑ हिर॒ण्ययो॑ बि॒न्दुस्ततो॑ द॒र्भो अ॑जायत

yat samudro abhyakrandat parjanyo vidyutā saha| tato hiraṇyayo bindustato darbho ajāyata

हिन्दी अर्थ

का० १९ । सु० ३३ भय्वंवेद-माष्य २७१ २६०. य॒हुसराषेः श॒तकांण्डः पयंखानपामभिर्वीरषा राजघय॑म् । स॒ मोऽयं दुर्भ; परं पातु विश्वतो देवो मगिरायुंषा स॑ घंजाति नः। १ रूप ( सः भ्रयम् ) यह वह (दर्भः) अविद्यादिविदारक परमेदवर (नः) हमारी (विष्वतः) सब भ्रोर से (परि पातु) परिपालना करे 1 (देवः मणि)

English

These gains are lodged in thee, and all great treasures. Amulet, conquer thou: far from us banish malignity and indigence, and hunger. Vigour art thou, in me do thou plant vigour: riches art thou, so do thou grant me riches.

अध्याय 19

श्लोक 31.1

औदुम्बरमणिः।१-१४ सविता (पुष्टिकामः)।औदुम्बरमणिः।अनुष्टुप्, ५, १२ त्रिष्टुप्, ६ विराट् प्रस्तारपङ्क्तिः, ११ , १३ पञ्चपदा शक्वरी, १४ विराडास्तारपङ्क्तिः।औदु॑म्बरेण म॒णिना॒ पुष्टि॑कामाय वे॒धसा ।प॒शूणां॒ सर्वे॑षां स्फा॒तिं गो॒ष्ठे मे॑ सवि॒ता क॑रत्

audumbaramaṇiḥ| 1-14 savitā (puṣṭikāmaḥ)| audumbaramaṇiḥ| anuṣṭup, 5, 12 triṣṭup, 6 virāṭ prastārapaṅktiḥ, 11 , 13 pañcapadā śakvarī, 14 virāḍāstārapaṅktiḥ| audumbareṇa maṇinā puṣṭikāmāya vedhasā | paśūṇāṃ sarveṣāṃ sphātiṃ goṣṭhe me savitā karat

हिन्दी अर्थ

बाली यज्ञियाग्नि कै सदुश सुखदायी, (मधुमान्) मधुभरे छन्ते के ५ परास्त करनेवाले, (सपत्नान्) कामादि शुभो को (नुदन्) घकेलते हए, २८० भथरवंवेद-माष्य का० १९ । सु° ३३ हे परभेदवर ! (त्वम्) प्राप (गोजसा) निज भोज के कारण (भूमिम्

English

Plenty art thou, so prosper me with plenty: House-holder, hear” a householder’s petition. Amulet of Udumbara, enrich us: vouchsafe us wealth with all good men about us. I bind thee

अध्याय 19

श्लोक 31.2

यो नो॑ अ॒ग्निर्गार्ह॑पत्यः पशू॒नाम॑धि॒पा अस॑त्।औदु॑म्बरो॒ वृषा॑ म॒णिः सं मा॑ सृजतु पु॒ष्ट्या

yo no agnirgārhapatyaḥ paśūnāmadhipā asat| audumbaro vṛṣā maṇiḥ saṃ mā sṛjatu puṣṭyā

हिन्दी अर्थ

ग्धं को निस्तेज ओौर भरस करती दहै। इसी प्रकार इस भरौषधके रोगकीटाणुओं (= कृभियो )के लिये देखो --भ्रथवं० कां २, सू० ३१, ३२; तथा कां° ५। सू° २३। विनक्तु = विचिर् पृथग्भावे! भाविक (नादम्) सर-खर ध्वनि को (भ्ररसम्)रसरदित कर दे, सुखा दे; (सप्त ) शिरोगतं सात छिद्रों से (विन्लसः) बहनेवाजञ -दुरगन्धित रस (भररसाः) सूख जायें । (इव ) जंसे (भस्ता) धनुर्षारी (इषुम्) बाण को दूर फकता है, वैसे तु (इतः) इस व्यक्ति से (अमतिम्) मति कै भ्रमाव या कुमति को (भ्रप शातय) दुर फक दे । का० १९ । सु° ३४ परथवेवेद-भाष्य २८३

English

Thou art victorious in thy might I am endowed with conquering strength:

अध्याय 19

श्लोक 31.3

क॒री॒षिणीं॒ फल॑वतीं स्व॒धामिरां॑ च नो गृ॒हे।औदु॑म्बरस्य॒ तेज॑सा धा॒ता पु॒ष्टिं द॑धातु मे

karīṣiṇīṃ phalavatīṃ svadhāmirāṃ ca no gṛhe| audumbarasya tejasā dhātā puṣṭiṃ dadhātu me

हिन्दी अर्थ

जङ्जिंड के सेवन ते कफ रोग,जुकाम प्रादि, तथा करमति का भ्रमाव, भौर मननशक्ति का प्रादुर्माव होता है 1.शातय =-शदूलु चातन; चातनम् भावना को दूर करती है । (भरथो) तथा (सहस्वान्) रोगों का पराभव करनेवाली (जङ्गिडः) जङ्ज्गिड भौषध (नः) हमारी (भरायुंषि) भयुभ्रों को (प्र तारिषत्) बढाती है । (जच्किंडस्य) जङ्जखिड-मौषध की (सः) बहु ( महिमा) महिमा (विद्वतः) सब गोर सेशौर सव प्रकार से (नः) हमारी (परि पातु) पूरण रक्षा करे । (येन) लिख महिमा के कारण, (गजः) ओजोमय जङ्किड

English

Possessed of overpowering force we two will quell our enemies. Subdue our foeman, overcome the men who fain would fight: with us. Conquer all evil-hearted ones: make many well-disposed to me.

अध्याय 19

श्लोक 31.4

यद् द्वि॒पाच्च॒ चतु॑ष्पाच्च॒ यान्यन्ना॑नि॒ ये रसाः॑ ।गृ॒ह्णे॒३हं॑ त्वेषां॑ भू॒मानं॒ बिभ्र॒दौदु॑म्बरं म॒णिम्

yad dvipācca catuṣpācca yānyannāni ye rasāḥ | gṛhṇe3haṃ tveṣāṃ bhūmānaṃ bibhradaudumbaraṃ maṇim

हिन्दी अर्थ

प्रद्रा नाम्न से (विदुः) जानते हँ । देवाः = विद्ासो वै देवाः (श०ब्रा० ३। ७। ३। १०) । पूर्व्या = पुवं २८४ भरथवंवेद-माष्य का० १९ ॥ सुर ३४ तथा ब्रह्म का अथं “मन्व भी होता है । जङ्कखिंड को “अंगिराः” कहा है, क्योंकि यह कृषिजन्य मरोषधियो के गङ्ख का ररूप है, देखो- भ्रथवं १६।३४५१ की व्याख्या । धङ्किराः= भङ्कानां रसः

English

With Darbha that hath sprung from Gods, stationed in heaven, full many a time. With this have I won many men, have won and may I win them still.

अध्याय 19

श्लोक 31.5

पु॒ष्टिं प॑शू॒नां परि॑ जग्रभा॒हं चतु॑ष्पदां द्वि॒पदां॒ यच्च॑ धा॒न्यम्।पयः॑ पशू॒नां रस॒मोष॑धीनां॒ बृह॒स्पतिः॑ सवि॒ता मे॒ नि य॑च्छात्

puṣṭiṃ paśūnāṃ pari jagrabhāhaṃ catuṣpadāṃ dvipadāṃ yacca dhānyam| payaḥ paśūnāṃ rasamoṣadhīnāṃ bṛhaspatiḥ savitā me ni yacchāt

हिन्दी अर्थ

न) बढ़कर नहीं हँ, (याः) भ्रौर जो (नवाः) नवीन प्रोषधियां हैःवेभी (त) तुकसे (तरन्तिन) बदृकर नहीं हं । (जङ्किडः) जङ्जगिंड परौषध (विवाघः) रोगों को विशेषरूप से रोकती है, (उग्रः) प्रभावमें उग्रै, (परिपाणः) सब प्रकार से रक्षा करती है, (सुमंगलः) बड़ी मंगल- (अथ) तथा (उपदान) है शक्तिप्रद ¡ (भगवः) रोगनिवारण मेँ भ्रथवं ° १६।३५।१) । प्रसते =ग्रास करना, खाना, तवन करना ।.

English

Do thou, O Darbha, make me dear to Brāhman and Rājanya, dear to Sūdra, and to Arya dear, Yea, dear to every man we love, to every man with eyes to see. He who first born fixed earth in her position, he who established heaven and air’s mid-region,

अध्याय 19

श्लोक 31.6

अ॒हं प॑शू॒नाम॑धि॒पा अ॑सानि॒ मयि॑ पु॒ष्टं पु॑ष्ट॒पति॑र्दधातु ।मह्य॒मौदु॑म्बरो म॒णिर्द्रवि॑णानि॒ नि य॑च्छतु

ahaṃ paśūnāmadhipā asāni mayi puṣṭaṃ puṣṭapatirdadhātu | mahyamaudumbaro maṇirdraviṇāni ni yacchatu

हिन्दी अर्थ

दधौ) तुक मे प्राहित किया है, स्थापित किया है । (भ्रोषधे ) है दोषनाशक जङ्जगिंड ! (सर्वाः) सब (अमीवाः) रोगों को (चातयन् ) बिनष्ट करती हई त् (रक्षांसि) रोग-कीटाणुश्रो का (जहि) हनन कर । का०.१९ १ सुऽ २५ परयवंवेद-माष्य ददन् निर्मित होता है, इसलिये इसे वनस्पति कहा है । देखो -अथवं ° १९।३४।१ शरीर के किसी विशेष भद्ध के जीणं-शीणे हो जाने को, (बलासम्) बल

English

Whom sinner ne’er hath known as his supporter,—this Darbha be our shelter and protection! First of all plants it sprang into existence, victorious, hundred- stemmed, the foe-subduer,

अध्याय 19

श्लोक 31.7

उप॒ मौदु॑म्बरो म॒णिः प्र॒जया॑ च॒ धने॑न च ।इन्द्रे॑ण जिन्वि॒तो म॒णिरा मा॑गन्त्स॒ह वर्च॑सा

upa maudumbaro maṇiḥ prajayā ca dhanena ca | indreṇa jinvito maṇirā māgantsaha varcasā

हिन्दी अर्थ

नामक ओौषघ (ददुः) प्रदान करती हैँ; (देवाः) भौर देवकोटि के महामेध को फलाया है, भौर उदकदाता मेष को ताडित कर तूने जल- धारार्भो का नीचे पृथिवी की गोर विसर्जन किया है । भरतः इनदर मेधस्थ २८६ भथर्ववेद-साष्य का० १६ ।सु० ३५

English

So may this Darbha from all sides protect us: with this may I subdue our foes in battle. A protective and benedictive charm Hundred stemmed, succulent, and worth a thousand, the Royal

अध्याय 19

श्लोक 31.8

दे॒वो म॒णिः स॑पत्न॒हा ध॑न॒सा धन॑सातये ।प॒शोरन्न॑स्य भू॒मानं॒ गवां॑ स्फा॒तिं नि य॑च्छतु

devo maṇiḥ sapatnahā dhanasā dhanasātaye | paśorannasya bhūmānaṃ gavāṃ sphātiṃ ni yacchatu

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न होती है । ऋषयः = सूयं रदमयः (निरु० १२।४।३७) । ददुः, चक्र: देवा य॑ चद्गु्यणाः प॑रिपार्णमरातिहम् ।.२॥ करे, (इव ) जैसे कि (धनपालः) धन का स्वामी (धनाघनानि) धनौं रूपी शत्रु के हनन के लिये (चक्र) प्रयुक्तं करते ह ।

English

Rite of plants, the Water’s Agni, Let this same Darbha guard us from all quarters. This Godlike

अध्याय 19

श्लोक 31.9

यथाग्रे॒ त्वं व॑नस्पते पु॒ष्ठ्या स॒ह ज॑ज्ञि॒षे।ए॒वा धन॑स्य मे स्फा॒तिमा द॑धातु॒ सर॑स्वती

yathāgre tvaṃ vanaspate puṣṭhyā saha jajñiṣe| evā dhanasya me sphātimā dadhātu sarasvatī

हिन्दी अर्थ

द्वारा रोगियों को रोगोपचारके बोध द्वारा ( नाराय ) विनष्ट कर। (परिपाणः) पूणणंतया रोगो से रक्षा करनेवाली (जक्किडः भ्रसि) तु जच्जिडि (जङ्गिडः) जङ्किंड भौषधघ (मा) मेरी (परि पातु) पूणं रक्षा करे का० १९1 सूु० ३६ भथर्ववेद-माष्य २८७

English

Amulet shall with life endow us. Drawn forth from butter, juicy, sweetly-flavoured, firm as the earth, unshaken, overthrowing. Driving off foes and casting them beneath me, mount with the strength of mighty Ones, O

अध्याय 19

श्लोक 31.10

आ मे॒ धनं॒ सर॑स्वती॒ पय॑स्फातिं च धा॒न्यऽम्।सि॒नी॒वा॒ल्युपा॑ वहाद॒यं चौदु॑म्बरो म॒णिः

ā me dhanaṃ sarasvatī payasphātiṃ ca dhānya'm| sinīvālyupā vahādayaṃ caudumbaro maṇiḥ

हिन्दी अर्थ

हटाकर (पुनीहि) हमें पवित्र कीजिये । ओजं देवानां बर॑मु्रमेतप् तं त॑ बध्नामि जरसं खस्तयं ॥४॥ (विषासहिः) तो भी पराभमवकारी है, (रक्षोहा ) राक्षस स्वमाववालों का हूनन करता है, भौर (विदवचषं णिः) विदवद्रष्टा है । (देवानाम् ) पापकर्मा

English

on for increase of possessions. For hero is this hero bound, Amulet of Udumbara. So may he make our offering sweetly-savoured, and grant us wealth with all good men about

अध्याय 19

श्लोक 31.11

त्वं म॑णी॒नाम॑धि॒पा वृषा॑सि॒ त्वयि॑ पु॒ष्टं पु॑ष्ट॒पति॑र्जजान ।त्वयी॒मे वाजा॒ द्रवि॑णानि॒ सर्वौदु॑म्बरः॒ स त्वम॒स्मत् स॑हस्वा॒रादरा॑ति॒मम॑तिं॒ क्षुधं॑ च

tvaṃ maṇīnāmadhipā vṛṣāsi tvayi puṣṭaṃ puṣṭapatirjajāna | tvayīme vājā draviṇāni sarvaudumbaraḥ sa tvamasmat sahasvārādarātimamatiṃ kṣudhaṃ ca

हिन्दी अर्थ

उग्र बलरूप है, है विजयेच्छो ¡ (ते) तेरी (जरसे) सुखभयी जरावस्था के तेरे सार्य दृढ बद्ध करता हूं । देवानाम्; दिव् = विजिगीषा 1 का०१९। सु० ३४ भ्रथवेवेद-माष्य २८१ (वीर्याणि) वीरकं (कृणवत्) किया कर । (द्भेम्) मयविदारक परमे-

English

us. A charm, with an amulet of Darbha grass, to subdue enemies and win the affection of others

अध्याय 19

श्लोक 31.12

ग्रा॒म॒णीर॑सि ग्राम॒णीरु॒त्थाया॒भिषि॑क्तो॒ऽभि मा॑ सिञ्च॒ वर्च॑सा ।तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धार॒याधि॑ र॒यिर॑सि र॒यिं मे॑ धेहि

grāmaṇīrasi grāmaṇīrutthāyābhiṣikto'bhi mā siñca varcasā | tejo'si tejo mayi dhārayādhi rayirasi rayiṃ me dhehi

हिन्दी अर्थ

(सूयं इव) सूयं के सदृश (चतस्रः प्रदिश्षः) चारो विस्तृत दिशां को रोगो को निगल जाती है; (रक्षिता भसि) तू रक्षा करती है, ( जद्किडः ) पचुभो की (रक्षतु) रोगोंसे रक्षाकरे।

English

For lengthened life I bind on thee the Darbha grass, the mighty plant. Excellent, hard to overthrow, with hundred stems and thousand blades. They cut not off his hair, they strike blow upon the breast for’ him.

अध्याय 19

श्लोक 31.13

पु॒ष्टिर॑सि पु॒ष्ट्या मा॒ सम॑ङ्ग्धि गृहमे॒धी गृ॒हप॑तिं मा कृणु ।औदु॑म्बरः॒ स त्वम॒स्मासु॑ धेहि र॒यिं च॑ नः॒ सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छ रा॒यस्पोषा॑य॒ प्रति॑ मुञ्चे अ॒हं त्वाम्

puṣṭirasi puṣṭyā mā samaṅgdhi gṛhamedhī gṛhapatiṃ mā kṛṇu | audumbaraḥ sa tvamasmāsu dhehi rayiṃ ca naḥ sarvavīraṃ ni yaccha rāyaspoṣāya prati muñce ahaṃ tvām

हिन्दी अर्थ

जच्िंढ-भौषध, कृषिजनित पदार्थो के रसो से प्राप्त होती है + यथा- कृष्या अन्यो रतेभ्यः' (भरयवं ०२,४।५) । इस मनर में शण (सन) भौर दारीराद्खं का सुख जाना। स्कन्दिर गतौ, शोषणे च । शण के क्वाधकते. २०८२ प्रथर्ववेद-भाष्य कं।० १९ । प° ३४

English

To whom one gives protection by Darbha that hath uninjured leaves. O Plant, thy root is in the sky, and thou art stationed on the earth:

अध्याय 19

श्लोक 31.14

अ॒यमौदु॑म्बरो म॒णिर्वी॒रो वी॒राय॑ बध्यते ।स नः॑ स॒निं मधु॑मतीं कृणोतु र॒यिं च॑ नः॒ सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छात्

ayamaudumbaro maṇirvīro vīrāya badhyate | sa naḥ saniṃ madhumatīṃ kṛṇotu rayiṃ ca naḥ sarvavīraṃ ni yacchāt

हिन्दी अर्थ

(त्रिपञ्चा्नीः) तीन भौर पांचमें व्याप्त होने वाली (याः) जो (कृत्याकृतः) हिसा करनेवाले (ये ) जो (चतम्) सेकड़ों रोग कीटाणु ई (जङ्कगिंडः) जङ्गड ओषध (सर्वान्) उन सव को (तेजसः) उनके निज (करत्) कर दे, विषले रसो से रहित कर दे ।

English

With thee who hast a thousand stalks we strengthen all the powers of life. Through all three skies the plant hath pierced, and the three regions of the earth; With thee I split in twain the tongue and words of the bad- hearted man.

अध्याय 19

श्लोक 32.1

दर्भः।१-१० भृगुः (आयुष्कामः)।दर्भः।अनुष्टुप्, ८ पुरस्ताद्बृहती, ९ त्रिष्टुप्, १० जगती।श॒तका॑ण्डो दुश्च्यव॒नः स॒हस्र॑पर्ण उत्ति॒रः ।द॒र्भो य उ॒ग्र ओष॑धि॒स्तं ते॑ बध्ना॒म्यायु॑षे

darbhaḥ| 1-10 bhṛguḥ (āyuṣkāmaḥ)| darbhaḥ| anuṣṭup, 8 purastādbṛhatī, 9 triṣṭup, 10 jagatī| śatakāṇḍo duścyavanaḥ sahasraparṇa uttiraḥ | darbho ya ugra oṣadhistaṃ te badhnāmyāyuṣe

हिन्दी अर्थ

(दिवः) लोकसे; (मा) मेरी (परि) पूर्णं रक्षा करे (पृथिव्याः) पृथिवी पूणे रक्षा करे (भरतात्) भ्रुत से; (उत) भौर (मा) मेरी (परि) पूणे रक्षा दिवः सूर्यं के भ्रधिक ओर कम तापके कारण होनेवाते रोगोँसे। उत्पन्न होनेवाले रोगो से, मेरी भौर हम सब की पूणं रक्षा जद्किड भरौषध

English

Darbha. Thou movest o’er the earth with vigour: lovely in sacrifice thou sittest on the altar.

अध्याय 19

श्लोक 32.2

नास्य॒ केशा॒न् प्र वप॑न्ति॒ नोर॑सि॒ ताड॒मा घ्न॑ते ।यस्मा॑ अछिन्नप॒र्णेन॑ द॒र्भेण॒ शर्म॑ यच्छति

nāsya keśān pra vapanti norasi tāḍamā ghnate | yasmā achinnaparṇena darbheṇa śarma yacchati

हिन्दी अर्थ

रोगो को (अरसान्) रसरहित, नीरस तथा निष्प्रमाव ( करत्) करती है । (शतवारः) संकडों यक्ष्मरोगो का निवारण करनेवाली “कशतवार” रवण भ्रथववेद-माष्य का० १९। सु०३६ करती है । (वच॑सा सहु) भ्रपनी पूरी चक्ति के साथ (भ्रारोहन्) सरीर पर भ्रारूढृ होकर (मणिः) शतवार मणि, (दुर्णामचातनः) दुष्परिणामी नाना रोगों का विनारकरती है

English

Achieve heroic deeds with Darbha, wearing this Darbha never let thy soul be troubled. In splendour and precedence over others illumine like the Sun the heaven’s four regions.

अध्याय 19

श्लोक 32.3

दि॒वि ते॒ तूल॑मोषधे पृथि॒व्याम॑सि॒ निष्ठि॑तः ।त्वया॑ स॒हस्र॑काण्डे॒नायुः॒ प्र व॑र्धयामहे

divi te tūlamoṣadhe pṛthivyāmasi niṣṭhitaḥ | tvayā sahasrakāṇḍenāyuḥ pra vardhayāmahe

हिन्दी अर्थ

शततवारः = सम्भवतः “शतावरी” भौषध । भावभकाश्च मेँ इसे भ ' वारये पद की दृष्टि से “शतवार” में “वार का श्रयं “निवारण करनेवाली, एसा किया है । दुर्णाम= रोग दहै--गुल्म, भ्रतिसार, वातरोग, २८१. शृज्गौम्यां रक्षो दते मुहैन याहुघान्य ; ।

English

A protective charm addressed to the panacea called A Jangida Jangida, thou art Angiras: thou art a guardian, Jangida. Let Jangida, keep safely all our bipeds and our quadrupeds.

अध्याय 19

श्लोक 32.4

ति॒स्रो दि॒वो अत्य॑तृणत् ति॒स्र इ॒माः पृ॑थि॒वीरु॒त॑।त्व॑याहं दु॒र्हार्दो॑ जि॒ह्वां नि तृ॑णद्मि॒ वचां॑सि

tisro divo atyatṛṇat tisra imāḥ pṛthivīruta| tvayāhaṃ durhārdo jihvāṃ ni tṛṇadmi vacāṃsi

हिन्दी अर्थ

के कीटाणुश्रों को (नुदते) दूर करती है । (मूलेन) जड़ द्वारा (यातुधान्यः) महाशतावरी कटिदार होती है । भावप्रकाश्च मेँ इसे “ऊध्वंकंटिका" कहा है। शुङ्खं का भ्रभिप्राय है-कटि। महाशतावरी कै काटो द्वारा निमित पौषधघ सम्भवतः यक्ष्मरोग के कीटाणुओों कोमार देतीहौ। अन्यभी श्रोषधियां ह, जिनके साथ श्यृद्खो का वणेन हुगा है । यथा--पृङ्खी, ककट- का० १९1 सु० ३६ . प्रघरववेद-माष्य २८९ दुष्परिणामी रोगों का हनन करनेवाला (मणिः) रत्नरूप (शतवारः) शत

English

Dice-witcheries, the fifty-threes, the hundred witchcraft-practi- sers, All these may Jangida make weak, bereft of their effectual force.

अध्याय 19

श्लोक 32.5

त्वम॑सि॒ सह॑मानो॒ऽहम॑स्मि॒ सह॑स्वान्।उ॒भौ सह॑स्वन्तौ भू॒त्वा स॒पत्ना॑न्सहिषीवहि

tvamasi sahamāno'hamasmi sahasvān| ubhau sahasvantau bhūtvā sapatnānsahiṣīvahi

हिन्दी अर्थ

र्णा; स्यू त्वाव रकांपि पूलुते ।४॥ शततवार (शतम्) संकडों (वीरन्) वीरो को (भजनयत्) मानो वीरान् वीर पुरुषों को भी यदि यक्ष्मरोग हो जाय, भ्रौर इय कारण वे निबंल हो जांय, तो शततवार उन्दँ पुनः वीरता-सम्पन्न कर देतां है, मानो उन्हें नवीन-जन्म प्रदान कर देता है।

English

Baffle the loud factitious howl, make impotent the seven decays. As when an archer speeds the shaft, drive away want, O Jangida,

अध्याय 19

श्लोक 32.6

सह॑स्व नो अ॒भिमा॑तिं॒ सह॑स्व पृतनाय॒तः ।सह॑स्व॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दः॑ सु॒हार्दो॑ मे ब॒हून् कृ॑धि

sahasva no abhimātiṃ sahasva pṛtanāyataḥ | sahasva sarvān durhārdaḥ suhārdo me bahūn kṛdhi

हिन्दी अर्थ

(शातवारः) हतवार-जाति की (भ्रयम्) यह (मणिः) रत्नसमान बहुमूल्य विषाणी कहा है । तथा जीवर भौर ऋषभ प्रोषर्धो को “'क्षयापही" अर्थात क्षयरोग-विनाश्क भी कहा है । २९० भरथवेवैद-माष्य का० १९॥। सु° ३७ (शतवारेण)रतवार-भौषघ द्वारा (वारये) निवारित करता हूं ।

English

This counteracts the sorceress, this banishes malignity: Then may victorious Jangida’s prolong the days we have to live.

अध्याय 19

श्लोक 32.7

द॒र्भेण॑ दे॒वजा॑तेन दि॒वि ष्ट॒म्भेन॒ शश्व॒दित्।तेना॒हं शश्व॑तो॒ जनाँ॒ अस॑नं॒ सन॑वानि च

darbheṇa devajātena divi ṣṭambhena śaśvadit| tenāhaṃ śaśvato janā~ asanaṃ sanavāni ca

हिन्दी अर्थ

माता" तथा “हुतस्वसा" का है (अथं ० २।३२।४; तथा ५।२३।११) 1 हतस्वसा = क्रिमि जिस की माताभ्रौर बहनि भीमारदी गरदर्ह। माता का०१९ । पुऽ ३७ प्रथववेद-माष्य २९१

English

Let Jangida’s protecting might encompass us on every side. Wherewith he quells Vishkandha and Sanskandha, might by greater might. Three times the Gods engendered thee fixt on the surface of the earth;

अध्याय 19

श्लोक 32.8

प्रि॒यं मा॑ दर्भ कृणु ब्रह्मराज॒न्याऽभ्यां शू॒द्राय॒ चार्या॑य च ।यस्मै॑ च का॒मया॑महे॒ सर्व॑स्मै च वि॒पश्य॑ते

priyaṃ mā darbha kṛṇu brahmarājanyā'bhyāṃ śūdrāya cāryāya ca | yasmai ca kāmayāmahe sarvasmai ca vipaśyate

हिन्दी अर्थ

(यानि) जो (यस्तत्) ३३ (वीर्याणि) शक्तियां है, (तानि) उन तन्मात्राघों की रक्तया, १ मन, १ भहंकार, १ बुद्धि । २८७. मच आ वेदि मे तन्वं सह ओजो भयो बल॑ । के लिये, (कर्मणे) त्यागमावना से कर्मों को करने के लिये, (वीर्याय ) वो्यं- रक्षा क लिये, (शतशारदाय) सौ वर्षो तक जीवन के लिये (त्वा) है पर

English

The Brāhmans of the olden time knew that thy name was Angiras;

अध्याय 19

श्लोक 32.9

यो जाय॑मानः पृथि॒वीमदृं॑ह॒द् यो अस्त॑भ्नाद॒न्तरि॑क्षं॒ दिवं॑ च ।यं बिभ्र॑तं न॒नु पा॒प्मा वि॑वेद॒ स नो॒ऽयं द॒र्भो वरु॑णो दि॒वा कः॑

yo jāyamānaḥ pṛthivīmadṛṃhad yo astabhnādantarikṣaṃ divaṃ ca | yaṃ bibhrataṃ nanu pāpmā viveda sa no'yaṃ darbho varuṇo divā kaḥ

हिन्दी अर्थ

९८८. छने त्रा बलाय स्वोजसे सर्दसे त्वा । अभिमू्याय त्वा राषटमत्याय पामि शतर्चारकाय ॥३॥ हे भग्निनामक परमेश्वर (शतशारदाय) सौ वषो की घ्रायु के लिये (बलाय) शारीरिक बल प्राप्त करने कै लिये (त्वा) अण को, भोजते)

English

The ancient plants surpass thee not, nor any herbs of recent days. A potent charm is Jangida, a most felicitous defence. Then when thou sprangest into life, Jangida of un-measured strength,

अध्याय 19

श्लोक 32.10

स॒प॒त्न॒हा श॒तका॑ण्डः॒ सह॑स्वा॒नोष॑धीनां प्रथ॒मः सं ब॑भूव ।स नो॒ऽयं द॒र्भः परि॑ पातु वि॒श्वत॒स्तेन॑ साक्षीय॒ पृत॑नाः पृतन्य॒तः

sapatnahā śatakāṇḍaḥ sahasvānoṣadhīnāṃ prathamaḥ saṃ babhūva | sa no'yaṃ darbhaḥ pari pātu viśvatastena sākṣīya pṛtanāḥ pṛtanyataḥ

हिन्दी अर्थ

२७९. य ऋषणवें देवदता य उतो ब॑वतेऽन्यः + (ये) जो (्णवः) रोगजन्यहिसाएं (देवकृताः) प्राकृतिक शक्तियों भिन्न कारणों से रोग (ववृते) प्रवृत्त हो जाते है, (विदवभेषजः) उन

English

The Rishis bear thee as a purifier: cleanse thou us from all evil deeds’ defilement. A stern and all-victorious king, foe-queller, dear to every man— That energy of Gods and mighty power, I bind this on thee for long life and welfare.

अध्याय 19

श्लोक 33.1

दर्भः।१-५ भृगुः।दर्भः।१ जगती, २, ५ त्रिष्टुप्, ३ आर्षी पङ्क्तिः, ४ आस्तारपङ्क्तिः।स॒ह॒स्रा॒र्घः श॒तका॑ण्डः॒ पय॑स्वान॒पाम॒ग्निर्वी॒रुधां॑ राज॒सूय॑म्।स नो॒ऽयं द॒र्भः परि॑ पातु वि॒श्वतो॑ दे॒वो म॒णिरायु॑षा॒ सं सृ॑जाति नः

darbhaḥ| 1-5 bhṛguḥ| darbhaḥ| 1 jagatī, 2, 5 triṣṭup, 3 ārṣī paṅktiḥ, 4 āstārapaṅktiḥ| sahasrārghaḥ śatakāṇḍaḥ payasvānapāmagnirvīrudhāṃ rājasūyam| sa no'yaṃ darbhaḥ pari pātu viśvato devo maṇirāyuṣā saṃ sṛjāti naḥ

हिन्दी अर्थ

तथा राष्ट् के मरण-पोषण के लिये (पयुहामि) वै राप क्तो निज जीवन में पग हामि = परि +-वह । छान्दस प्रयोग । यथा-““पगु ढा" ( गथवं° ११।६।१५; तथा १२।५१३) । अभिप्राय यह है छि प्रार्थी परमेषटवर कै प्रति २६९२ प्रथ्वेवेद-माष्य का० १९१ सू०३८ पर्यन्त सदा अपने जीवन मे भ्राप को घारण करता हृभ्ा विचरूगा, ताकि मै ऊजं. भ्रादिकी प्राप्ति के लिये कूुपथगामी न हो जाऊं । उजं. ऊजं

English

Indra, O mighty One, bestowed great power upon thee from the first. 255

अध्याय 19

श्लोक 33.2

घृ॒तादुल्लु॑प्तो॒ मधु॑मा॒न् पय॑स्वान् भूमिदृं॒होऽच्यु॑तश्च्यावयि॒ष्णुः ।नु॒दन्त्स॒पत्ना॒नध॑रांश्च कृ॒ण्वन् दर्भा रो॑ह मह॒तामि॑न्द्रि॒येण॑

ghṛtādullupto madhumān payasvān bhūmidṛṃho'cyutaścyāvayiṣṇuḥ | nudantsapatnānadharāṃśca kṛṇvan darbhā roha mahatāmindriyeṇa

हिन्दी अर्थ

हे भग्निनामक परमेदवर! (ऋतुभ्यः) ऋतु से (्रातवेभ्यः ) ऋतुजन्य प्राप्त करने के लिये, (घात्रे) धारण-पोषण करनेवाले, (विधात्रे) विधियो का यजन करता हू, राप देव का पूजन तथा संग करता हूं, तथा प्रापक परति आत्मसमपंण करता हू" । यजे यज देवपुजासंगतिकरणदानेषु ।

English

To thee in truth, O Forest Tree, Indra the mighty One gave strength. Driving away all maladies, strike thou the demons down, O Plant.

अध्याय 19

श्लोक 33.3

त्वं भूमि॒मत्ये॒ष्योज॑सा॒ त्वं वेद्यां॑ सीदसि॒ चारु॑रध्व॒रे।त्वां प॒वित्र॒मृष॑योऽभरन्त॒ त्वं पुनीहि दुरि॒तान्य॒स्मत्

tvaṃ bhūmimatyeṣyojasā tvaṃ vedyāṃ sīdasi cāruradhvare| tvāṃ pavitramṛṣayo'bharanta tvaṃ punīhi duritānyasmat

हिन्दी अर्थ

न्ते) भवसद्ध नहीं करते, शौर (न) न (एनम्) इसे (पथः) शपथ लेने == दपथ श्र्थात् सौगन्ध या कसम की भादत मानसिक कमजोरी को सूचित करती है 1 गुग्गुल की गन शपथ खाने की प्रवृत्तिको कम करती है। गुग्गुल-गन्ध से भतिरिक्तं भ्रौर मी भोषधियांरह,जो कि शपथ खाते कीं का०.१९ । सु° ३९ भ्रथववेद-माष्य २९३ प्रवृत्ति को कम करती ह, जिन्हें कि ““रापथयावनी (भ्रथवं० ४।१७।२),

English

Lumbago and rheumatic pain, consumptive cough, and pleurisy, And fever which each Autumn brings, may Jangida make- powerless.

अध्याय 19

श्लोक 33.4

ती॒क्ष्णो राजा॑ विषास॒ही र॑क्षो॒हा वि॒श्वच॑र्षणिः ।ओजो॑ दे॒वानां॒ बल॑मु॒ग्रमे॒तत् तं ते॑ बध्नामि ज॒रसे॑ स्व॒स्तये॑

tīkṣṇo rājā viṣāsahī rakṣohā viśvacarṣaṇiḥ | ojo devānāṃ balamugrametat taṃ te badhnāmi jarase svastaye

हिन्दी अर्थ

तंथा “शपथयोपनी (भ्रथवं ०२।७।१) कहा है । है, (उभयोः) इन दोनो का (नाम) नाम (भस्मं) इस व्यक्ति के लिये जाते हैँ । ईरते दर कम्पने । नाम भग्रभम् =नामनि्देश करना, प्रौषधं का कथन करना, यक्ष्मरोग की निवृत्ति के लिये ॥

English

A similar charm addressed to the same While their lips uttered Indra’s name the Rishis gave us Jangida.. Which in the earliest time Gods made a remedy, Vishkandha’s- cure.

अध्याय 19

श्लोक 33.5

द॒र्भेण॒ त्वं कृ॑णवद् वी॒र्याऽणि द॒र्भं बिभ्र॑दा॒त्मना॒ मा व्य॑थिष्ठाः ।अति॑ष्ठाया॒ वर्च॒साधा॒न्यान्त्सूर्य॑ इ॒वा भा॑हि प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः

darbheṇa tvaṃ kṛṇavad vīryā'ṇi darbhaṃ bibhradātmanā mā vyathiṣṭhāḥ | atiṣṭhāyā varcasādhānyāntsūrya ivā bhāhi pradiśaścatasraḥ

हिन्दी अर्थ

(हिमवतः परि) बर्फलि पर्व॑त से, (यमाणः) यह रक्षक (देवः कुष्ठः) २९४ अथर्ववेद-माष्य का० १९ । सुर ३९ (कुष्ठ) है कुष्ठनामक भ्रौषध (ते) तेरे (त्रीणि नामानि) तीन हे कुष्ठौषध (परिब्रवीमि) मै क्ता कि वह (त्वा) तेरा सेवन करे (सायम्) सायंकाल, (प्रातः) प्रातःकाल, ( भ्रथोदिवा) भौरदिनं के समय अर्थात् प्रतिदिन ३ तीन बार ।

English

So may this Jangida guard us, even as a treasurer guards wealth,. Even this which Gods and Brāhmans made a malice-quelling sure defence.

अध्याय 19

श्लोक 34.1

जङ्गिडमणिः।१-१० अङ्गिराः।वनस्पतिः, लिङ्गोक्ताः।अनुष्टुप्।जा॒ङ्गि॒डोऽसि जङ्गि॒डो रक्षि॑तासि जङ्गि॒डः ।द्वि॒पाच्चतु॑ष्पाद॒स्माकं॒ सर्वं॑ रक्षतु जङ्गि॒डः

jaṅgiḍamaṇiḥ| 1-10 aṅgirāḥ| vanaspatiḥ, liṅgoktāḥ| anuṣṭup| jāṅgiḍo'si jaṅgiḍo rakṣitāsi jaṅgiḍaḥ | dvipāccatuṣpādasmākaṃ sarvaṃ rakṣatu jaṅgiḍaḥ

हिन्दी अर्थ

है, (ते) तेरा (पिता) पिता ( जीवन्तः नाम) नीवन्त नामवाला है। (नद) हि नदीप्रदेशोत्पनन रोग ॒! (अयम्) यह ( पुरुषः) कुष्टौषधसेवी पुरुष (रिषत्) तेरा विनाश करे । (यस्मै " ". ) इत्यादि धुवंवत् । येन सष: (उणा०३।१२७), प्र्थात् मेघः 1 पृथवी को माता तथा मेष को पित्ता का भी है । यथा--"माता भुमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः । पजन्यः पिता स छ नः पिषतु" ( भरथवं०१२।१।१२) । जमिप्राय यह् है कि जहां मेव बर- सता रहता है, पैसी जलप्राय चुमि मे कुष्ठटौषध उत्पन्न होती है । का०-१९.1 सु० ३६ भरधर्ववेद-भाष्य २६१

English

Hard-hearted men, the cruel eye, the sinner who hath come to- us, Destroy thou these with watchful care, O thou who hast a. thousand eyes. Thou, Jangida, art my defence.

अध्याय 19

श्लोक 34.2

या गृत्स्य॑स्त्रिपञ्चा॒शीः श॒तं कृ॑त्या॒कृत॑श्च॒ ये।सर्वा॑न् विनक्तु॒ तेज॑सोऽर॒सां ज॑ङ्गि॒डस्क॑रत्

yā gṛtsyastripañcāśīḥ śataṃ kṛtyākṛtaśca ye| sarvān vinaktu tejaso'rasāṃ jaṅgiḍaskarat

हिन्दी अर्थ

दान्द तीन वार मन्व मेँ पठित है 4 यह ददानि के लिये किकृष्ठकेतीनही २९६ भयर्ववेद-भाष्य क।° १९६ । पु° ३९ के साथ सादुद्य रखनेवाले दो शब्द है--शम्बरः == मेषः (निघं० १।१०)

English

Protect me from the present and the future. From every region Jangida preserve us! All sorcerers made by the Gods, all that arise from mortal men,.

अध्याय 19

श्लोक 34.3

अ॒र॒सं कृ॒त्रिमं॑ ना॒दम॑र॒साः स॒प्त विस्र॑सः ।अपे॒तो ज॑ङ्गि॒डाम॑ति॒मिषु॒मस्ते॑व शातय

arasaṃ kṛtrimaṃ nādamarasāḥ sapta visrasaḥ | apeto jaṅgiḍāmatimiṣumasteva śātaya

हिन्दी अर्थ

“भ्रकाश्चमयी किरणे" करना उचित प्रतीत होता है । सूं भौरचनद्रका २।४।१३ ), भर्थात् आदित्य पाथिव जलादि रसो काम्रादान करतार, जि के द्वारा कि मेघ बनते ह, इसलिये भादित्य को भ्रादित्य.कहते है । रसों का भ्रादान, भादित्य की तापमयी किरणों द्वारा होता है, इसलिये तापमयी किरणों द्वारा निमित मेघोंसे वर्षा द्वारा कुष्ठ आदि भोषधियां न जयंति" (अथवं १०।८।३२) मे वेदको परमेश्वर देव कां काव्य कहा है भरतः कविता की दुष्ट से, जड का सम्बोधन भी उचित ही प्रतीत

English

These, one and all, let Jangida, healer of all, make impotent. A charm against disease and evil spirits

अध्याय 19

श्लोक 34.4

कृ॒त्या॒दूष॑ण ए॒वायमथो॑ अराति॒दूष॑णः ।अथो॒ सह॑स्वां जङ्गि॒डः प्र ण आयूं॑षि तारिषत्

kṛtyādūṣaṇa evāyamatho arātidūṣaṇaḥ | atho sahasvāṃ jaṅgiḍaḥ pra ṇa āyūṃṣi tāriṣat

हिन्दी अर्थ

(इतः) इस पुथिषी से (तृतीयस्यां दिवि) तीसरे पर्थात् यलोके को० १९1 सू० २९ भरथर्ववेद- २९७ सर्वोत्तिम कूट या कुठ (अजायत) पदा होता है । (स कुष्ठो - "“"यातुघान्यः). मण्डल मे, या इस दिशा में सूयं जब प्रपनी वार्षिक गति से भाता है, तब

English

The Hundred-haired hath banished hence fiends and Consump- tions by its might. With splendour hath the charm that scares demons of ill-name mounted up. It drives off demons with its horns and sorceresses with its root,

अध्याय 19

श्लोक 34.5

स ज॑ङ्गि॒डस्य॑ महि॒मा परि॑ णः पातु वि॒श्वतः॑ ।विष्क॑न्धं॒ येन॑ सा॒सह॒ संस्क॑न्ध॒मोज॒ ओज॑सा

sa jaṅgiḍasya mahimā pari ṇaḥ pātu viśvataḥ | viṣkandhaṃ yena sāsaha saṃskandhamoja ojasā

हिन्दी अर्थ

बन्धी हुई (नौः) नौका (दिवि) चुलोक में (भचरत्) विच्तरती है । (तत्र) दुष्टिगोचर होता £ । (तततः) उस उदक से (कुष्ठः) उत्तम कूट या कुठ २९८ प्रथरववेद-माष्य क।° १९ । पु° ३९ ढलवान् नहीं है, भरपि तु (यत्र) जहां बर्फलि पवत का (चिरः) उच्च भाग ,.

English

It stays Consumption with its waist: from this no wickedness escapes. Consumptions, light and serious, and those which sounds accompany,

अध्याय 19

श्लोक 34.6

त्रिष्ट्वा॑ दे॒वा अ॑जनय॒न् निष्ठि॑तं॒ भूम्या॒मधि॑ ।तमु॒ त्वाङ्गि॑रा॒ इति॑ ब्राह्म॒णाः पू॒र्व्या वि॑दुः

triṣṭvā devā ajanayan niṣṭhitaṃ bhūmyāmadhi | tamu tvāṅgirā iti brāhmaṇāḥ pūrvyā viduḥ

हिन्दी अर्थ

दर्शन होता है, तो (ततः) उस भाग से (कुष्ठः) उत्तम कूट या उत्तम कृष्ठ कै लिये सतत जलं चाहिए । हिमवतः दस पद द्वारा हिमालय पर्वत का ग्रहण नहीं है । भपितु केवल बर्फलि पवंतो का ग्रहण है) इसी दक्तथमिलाषी (यं त्वा) जिस तुक को (वेद) अपने रोग की भ्ोषधिरूप जानता है; (यंवा) तथा जिस (त्वा) तुक को (काम्यः) कामातुर ध्यक्ति म्मपने कामरोग की गोषंधिखूप जानता है; (यं वा) या जिस तुरू को (वसो)

English

All these the Amulet, Hundred-haired, scarer of fiends, hath banished hence. A hundred men hath it produced, hundred Consumptions chased away, All fiends of evil-name it hath smitten, and shakes the

अध्याय 19

श्लोक 34.7

न त्वा॒ पूर्वा॒ ओष॑धयो॒ न त्वा॑ तरन्ति॒ या नवाः॑ ।विबा॑ध उ॒ग्रो ज॑ङ्गि॒डः प॑रि॒पाणः॑ सुम॒ङ्गलः॑

na tvā pūrvā oṣadhayo na tvā taranti yā navāḥ | vibādha ugro jaṅgiḍaḥ paripāṇaḥ sumaṅgalaḥ

हिन्दी अर्थ

की गोषधिरूप जनता है, (तेन) इस कारण (विदवभेषजः) सर्व रोगौषधः भिति । काम्यः कामपृश्र (सायण), कामातुर । वसो =वसा-1- उन वसा- का० १६॥ सु० ४० भथववेद-भाष्य २९९ तीसरे दिन आनेवाले ज्वर को, (यः) जो कि (खन्ददि!) शरीर को जकड़ देता है; (च) मरौर (हायनः ) जो वार्षिक ज्वर है उसे; (भरराञ्नवम्) तथा

English

Rākshasas. The Bull that weareth horns of gold, this Amulet with hundred hairs,

अध्याय 19

श्लोक 34.8

अथो॑पदान भगवो॒ जाङ्गि॒डामि॑तवीर्य ।पु॒रा त॑ उ॒ग्रा ग्र॑सत॒ उपेन्द्रो॑ वी॒र्यं ददौ

athopadāna bhagavo jāṅgiḍāmitavīrya | purā ta ugrā grasata upendro vīryaṃ dadau

हिन्दी अर्थ

वीयं) है सब प्रकारके सामथ्यं वाले उत्तम कष्ठ (परासुव) तु परे वहु ञ्वरजोकिं सिर को चठ जाता है । सन्ददिः, सन्दान=रस्सी। ““सन्ददिः” मानो रस्सो से जकड़ देनेवाला । १--४ ब्रह्मा । बहस्पतिः, विषवेदेवादं ।

English

Hath cleft the demons of ill-name and overcome the Rākshasas. Hundred she-fiends, a hundred of Gandharvas and Apsarasas, A hundred of dog-mated nymphs, I keep away with Hundred Hair

अध्याय 19

श्लोक 34.9

उ॒ग्र इत् ते॑ वनस्पत॒ इन्द्र॑ ओ॒ज्मान॒माद॑धौ ।अमी॑वाः॒ सर्वा॑श्चा॒तयं॑ ज॒हि रक्षां॑स्योषधे

ugra it te vanaspata indra ojmānamādadhau | amīvāḥ sarvāścātayaṃ jahi rakṣāṃsyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

विभरैरतद् देवैः सह संविदानः सं दधातु बृहस्पतिः ॥१॥ (मे) मेरे (मनसः) मन का (यत्) जो (छिद्रम्) दोष है, (च) भ्रौर (यत्) जो (वाचः) वाणी कादोषहै, तथा जो मेरी (सरस्वती) ज्ञान- देवेभ्यः षह ) भन्य सब भ्राचार्यं भादि देवों के साथ (संविदानः) सहमत. होकर (बृहस्पतिः) वेदवाणी का भराचार्यं (सं दधातु) उपचार करे, उन दोषों भर्थात् छिद्रो को पूरित करे । मनसः मन का दोष है-भिवसरंकल्प, नास्तिकता भादि । वाचः = वाणी का दोष है-भरसत्य व चन,निन्दा,कटूता भादि । सरस्वती =

English

A charm to secure long life and dominion to a prince To me hath come this word given by Agni, fame, force and might, and strength, and life, and

अध्याय 19

श्लोक 34.10

आश॑रीकं॒ विश॑रीकं ब॒लासं॑ पृष्ट्याम॒यम्।त॒क्मानं॑ वि॒श्वशा॑रदमर॒सां ज॑ङ्गि॒डस्क॑रत्

āśarīkaṃ viśarīkaṃ balāsaṃ pṛṣṭyāmayam| takmānaṃ viśvaśāradamarasāṃ jaṅgiḍaskarat

हिन्दी अर्थ

भ्रोषधि (असि) तु है, (इव ) जेते कि (अनड्वान्) चकटवाही बल (जग- तैरा विनाश करे, (यस्म. ) पूववत् । प्रकाहमयी किरणों से, तथा (आदित्येभ्यः) रसादान करनेवाली तापमयी भेषजः) सर्वौषधर्प है, गौर (सोमेन साकम्) सोम पभरोषधि के संगमे

English

Guard me from earth and guard me from the heavens, guard me from middle air, from plants protect me.

अध्याय 19

श्लोक 35.1

जङ्गिडः।१-५ अङ्गिराः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ पथ्याबृहतीः, ४ शक्वरी निचृत् त्रिष्टुप्।इन्द्र॑स्य॒ नाम॑ गृ॒ह्णन्त॒ ऋस॑यो जङ्गि॒डं द॑दुः ।दे॒वा यं च॒क्रुर्भे॑ष॒जमग्रे॑ विष्कन्ध॒दूष॑णम्

jaṅgiḍaḥ| 1-5 aṅgirāḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 pathyābṛhatīḥ, 4 śakvarī nicṛt triṣṭup| indrasya nāma gṛhṇanta ṛsayo jaṅgiḍaṃ daduḥ | devā yaṃ cakrurbheṣajamagre viṣkandhadūṣaṇam

हिन्दी अर्थ

३०० भधरवववेद-माष्य कार १९॥ सुम ४९ वाणीमें भी यदिक्षोभहो जाये, तो वहू दोष ही है। ब्रहस्पतिः=बहती शिक्षक, मातुदेव, पितुदेव प्रादि । संदधातु = मन्वमे दोष को चद्र कहा

English

lustre. May Agni too bestow on me three-times a hundred manly powers. For mighty strength, for action, I receive thee, for manly power, to last a hundred autumns.

अध्याय 19

श्लोक 35.2

स नो॑ रक्षतु जङ्गि॒डो ध॑नपा॒लो धने॑व ।दे॒वा यं च॒क्रुर्ब्रा॑ह्म॒णाः प॑रि॒पाण॑मराति॒हम्

sa no rakṣatu jaṅgiḍo dhanapālo dhaneva | devā yaṃ cakrurbrāhmaṇāḥ paripāṇamarātiham

हिन्दी अर्थ

है। खिद्रको भरना होता है । इसलिये संदधातु का पथं है-संघान करना । “दोष प्रथं भं इसका पथं होगा--उपचार करना । भ्रापः) है भराप्त जनो श्रष (मा) न (नः) हमारी (मेषाम्) मिलकर प्रवाहरूप में धति रहिये, (सुष्यदाः) जैसे कि उत्तमरूप मँ प्रवा- हित होनेवाले जल, मिलकर समृद्र. की भोर प्रवाहित होते है। ताकि

English

For conquering strength and energy and vigour I fasten thee for chieftainship, for bearing royal dominion through a hundred autumns.

अध्याय 19

श्लोक 35.3

दु॒र्हार्दः॒ संघो॑रं॒ चक्षुः॑ पाप॒कृत्वा॑न॒माग॑मम्।तांस्त्वं स॑हस्रचक्षो प्रतीबो॒धेन॑ नाशय परि॒पाणो॑ऽसि जङ्गि॒डः

durhārdaḥ saṃghoraṃ cakṣuḥ pāpakṛtvānamāgamam| tāṃstvaṃ sahasracakṣo pratībodhena nāśaya paripāṇo'si jaṅgiḍaḥ

हिन्दी अर्थ

हे माता-पिता ! घाप दोनों (मा) न (नः) हमारी बुद्धि को, (मा) न (नः) हमारे (दीक्षाम्) - व्रत-नियमों को, (यत्) जो (नः). हमारा (तपः) तपदहै (मा) न उसको ( हिसिष्टम् ) हसित होने दीलियें। पितृवगं (नः) हमारे लिये ( शिवाः ) कल्याणकारी पौर ( शम् ) शल. शान्तिकर (सन्तु) हो, भ्रौर (मातरः) माताए' (शिवाः) कल्याणकारिणी का० १९ । सू०° ४९ भ्रथववेद-माष्य ३०१ (तमस्तिरः) भ्रन्धकार को तिरोहितं करके (नः) हमारा (पीपरत् ) पालन

English

With Seasons and with Season-groups, for vigour and extended life. With splendour of the perfect year we fasten thee about the neck. 256

अध्याय 19

श्लोक 35.4

परि॑ मा दि॒वः परि॑ मा पृथि॒व्याः पर्य॒न्तरि॑क्षा॒त् परि॑ मा वी॒रुद्भ्यः॑ ।परि॑ मा भू॒तात् परि॑ मो॒त भव्या॑द् दि॒शोदि॑शो जङ्गि॒डः पा॑त्व॒स्मान्

pari mā divaḥ pari mā pṛthivyāḥ paryantarikṣāt pari mā vīrudbhyaḥ | pari mā bhūtāt pari mota bhavyād diśodiśo jaṅgiḍaḥ pātvasmān

हिन्दी अर्थ

मावना भौर राष्ट्य बल तथा भोज की पूतिक प्रति (देवाः) राष्टू के ३०८. बह्म होता बरं यज्ञा जकषणा खरंगो भिताः । छे साथ (स्वरवः) यज्ञसतुप आदि (मिताः) उपमित हए है । (अध्व : ३०२ मर्थवेवेद-माष्य का० १९ ।सु०४२

English

A protective charm Never Consumption, never curse touches the man, Arundhatī!

अध्याय 19

श्लोक 35.5

य ऋ॒ष्णवो॑ दे॒वकृ॑ता॒ य उ॒तो व॑वृ॒तेऽन्यः ।सर्वां॒स्तान् वि॒श्वभे॑षजोऽर॒सां ज॑ङ्गि॒डस्क॑रत्

ya ṛṣṇavo devakṛtā ya uto vavṛte'nyaḥ | sarvāṃstān viśvabheṣajo'rasāṃ jaṅgiḍaskarat

हिन्दी अर्थ

निहित की जाती है, उसे समपित की जाती. है 1 पजा के लिये, भौर सके नाम पर हविश्रदान केलिये ही होते है । यथा- यज्ञ किया जाता ह, बह यज्ञ का चिर है"।

English

Whom the delicious odour of the healing Bdellium penetrates Consumptions flee apart from it as from a wild beast fly the deer. If thou, O Bdellium, art produced from Sindhu or hast come from sea,

अध्याय 19

श्लोक 36.1

शतवारो मणिः।१-६ ब्रह्मा।शतवारः।अनुष्टुप्।श॒तवा॑रो अनीनश॒द् यक्ष्मा॒न् रक्षां॑सि॒ तेज॑सा ।आ॒रोह॒न् वर्च॑सा स॒ह म॒णिर्दु॑र्णाम॒चात॑नः

śatavāro maṇiḥ| 1-6 brahmā| śatavāraḥ| anuṣṭup| śatavāro anīnaśad yakṣmān rakṣāṃsi tejasā | ārohan varcasā saha maṇirdurṇāmacātanaḥ

हिन्दी अर्थ

. मँ उपमानोपमेयभाव दर्थाया है । जिस गुणकम की दृष्टि से वस्तुभ्रो मे उपमान का०१९। सु० ४३ भथववेद-माष्य ३०३ इस मनीषारूपी हवि को (प्रतिगृमाय) स्वीकार कीजिये । आपकी कृपासे (यजमनस्य) समपंणखूपो यज्ञ के कर्ता की (कामाः) कामनाएं (सत्याः) मन भौर बुद्धि को कूमागं मे न पतन होने देनेवाले परमेश्वर का (हवे ) मै सदा भाह्वान करता हूं । परमेदवर प्रार्थी को कहता है कि (भिवन)

English

The quality of both have I taken to keep this man unscathed. A protective charm

अध्याय 19

श्लोक 36.2

शॄङ्गा॑भ्यां॒ रक्षो॑ नुदते॒ मूले॑न यातुधा॒न्यः ।मध्ये॑न॒ यक्ष्मं॑ बाधते॒ नैनं॑ पा॒प्माति॑ तत्रति

śṝṅgābhyāṃ rakṣo nudate mūlena yātudhānyaḥ | madhyena yakṣmaṃ bādhate nainaṃ pāpmāti tatrati

हिन्दी अर्थ

अ होमुचम् = परमेवर का सभ्चा-उपासक, परमेदवर से शकितं पाकर, पार्पो से विमूख हो जाता है । भष्विनौ समाज के सुघारके लिये यह् भरावदयकं है कि प्रत्येक परिवार में माता पिता इन्दिय-संयमी होकर ३०४ अयर्ववेद-माष्य का० १९ । घु° ४३ भग्निः = “श्रग्रणी्मवति' (निर० ७।४।१४), तथा ““तदेवाग्नि-

English

Let Kushtha from the Hill of Snow come, a divine deliverer. Banish thou all Consumption, drive all sorceresses far away. Kushtha, three several names hast thou, Naghamāra,

अध्याय 19

श्लोक 36.3

ये यक्ष्मा॑सो अर्भ॒का म॒हान्तो॒ ये च॑ श॒ब्दिनः॑ ।सर्वा॑न् दुर्णाम॒हा म॒णिः श॒तवा॑रो अनीनशत्

ye yakṣmāso arbhakā mahānto ye ca śabdinaḥ | sarvān durṇāmahā maṇiḥ śatavāro anīnaśat

हिन्दी अर्थ

(दीक्षया) ब्रतो-नियमो भरौर (तपसा सह) - तपष्चर्या के साथ वतमानं (वायुः) वायुवत् प्राणप्रदाता परमेदवर (मा) मूके (नयतु) पहुचाए, ले को (दधातु) स्थापित ओर परिपृष्ट करे । (वायवे) प्राणप्रदाता परमेदवर के लिये. (स्वाहा ) यै स्वस्व समर्पण करता हूं । (सूयः) सुयंवत् स्वततप्रकाशमान परमेश्वर (मा) मुभे (नयतु) कहंनाए

English

Naghārisha: let not mishap befall this man, For whom I make a charm of thee at eve, at morning, and by day.

अध्याय 19

श्लोक 36.4

श॒तं वी॒रान॑जनयच्छ॒तं यक्ष्मा॒नपा॑वपत्।दु॒र्णाम्नः॒ सर्वा॑न् ह॒त्वाव॒ रक्षां॑सि धूनुते

śataṃ vīrānajanayacchataṃ yakṣmānapāvapat| durṇāmnaḥ sarvān hatvāva rakṣāṃsi dhūnute

हिन्दी अर्थ

का० १६ । सु° ४३ भ्रथववेद-माष्य ३०४ (चन्द्रः) प्राह्लादकारी षरमेदवर (मा) मुभे (नयतु) पहुंबये, ले चले । मयी या भ्राह्वादमयी हो जाती है यह परमेरवरीय कृपा भौर योगा-

English

Jivalā is thy mother’s name, thy father’s name is Jivala; let not mishap, etc. Thou art the best amid the plants, even as the ox is best of tame, the tiger of rapacious beasts: let not mishap, etc.

अध्याय 19

श्लोक 36.5

हिर॑ण्यशृङ्ग ऋष॒भः शा॑तवा॒रो अ॒यं म॒णिः ।दु॒र्णाम्नः॒ सर्वां॑स्तृ॒ड्ढ्वाव॒ रक्षां॑स्यक्रमीत्

hiraṇyaśṛṅga ṛṣabhaḥ śātavāro ayaṃ maṇiḥ | durṇāmnaḥ sarvāṃstṛḍḍhvāva rakṣāṃsyakramīt

हिन्दी अर्थ

(दीक्षयां) व्रतो निवमों भौर (तपसा सहु) तपरचर्था के साथ वतमान (सोभः) जगदु्पादक परमेदवर (मे) मूक में (पयः) सारिष्ठं वी्यत॑त्त्व ३०६ भयर्ववेद-माष्य का० १९॥ सूु० ४३ (दधातु) स्थापित करे, भ्रौर, परिपृष्ट करे। (सोमाय) जगदुत्पादक परमेरवर के भ्रति (स्वाहा) मै सवेंस्व समर्पित करता हुं । सोमः षु

English

Born thrice from the Ādityas, thrice from Bhrigus, thrice from Angiras’ sons, born from the Visve Devas thrice,

अध्याय 19

श्लोक 36.6

श॒तम॒हं दु॒र्णाम्नी॑नां गन्धर्वाप्स॒रसां॑ श॒तम्।श॒तं श॑श्व॒न्वती॑नां श॒तवा॑रेण वारये

śatamahaṃ durṇāmnīnāṃ gandharvāpsarasāṃ śatam| śataṃ śaśvanvatīnāṃ śatavāreṇa vāraye

हिन्दी अर्थ

(दीक्षया) तरतो नियमों भौर (तपसा सह ) तपश्चर्या के साथ वतमान (ऋ० १। १६४। ४६) ; निर०१३।२।१४। बलम् “या च का च बल- कतिरिन्रकर्मेव तत्” (निङ० ७।३।१०) । बलम् शारीरिक, मानसिक, (दीक्षया) त्रतों नियमों भौर (तपसा सह) तपदचर्या के साथ विद्य-

English

Healer of every malady, that Kushtha stands by Soma’s side. Banish thou all Consumption, drive all sorceresses far away. In the third heaven above us stands the Asvattha tree, the seat of Gods:

अध्याय 19

श्लोक 37.1

बलप्राप्तिः।१-४ अथर्वा।।अग्निः।१ त्रिष्टुप्, २ आस्तारपङ्क्तिः, ३ त्रिपदा महाबृहती, ४ उष्णिक्।इ॒दं वर्चो॑ अ॒ग्निना॑ द॒त्तमाग॒न् भर्गो॒ यशः॒ सह॒ ओजो॒ वयो॒ बल॑म्।त्रय॑स्त्रिंश॒द् यानि॑ च वी॒र्याणि॒ तान्य॒ग्निः प्र द॑दातु मे

balaprāptiḥ| 1-4 atharvā|| agniḥ| 1 triṣṭup, 2 āstārapaṅktiḥ, 3 tripadā mahābṛhatī, 4 uṣṇik| idaṃ varco agninā dattamāgan bhargo yaśaḥ saha ojo vayo balam| trayastriṃśad yāni ca vīryāṇi tānyagniḥ pra dadātu me

हिन्दी अर्थ

वहां (ब्रह्मा ) चारों वेदो का विद्वान् (मा) मे (नयतु) पहुचाने बड़ा परमेदवर । “आ” का सम्बन्ध "नयतु" के साथ होकर “जा नयतु का ३२०. आदुषोऽसि प्रतरणं विप्र भेषृजयुंच्यसे । है । (विप्रम्) मेवावी है, (भेषजम्) सवं रोगो कीः चिकित्सा करनेवाले महौ.

English

There is embodiment of life that dies not: thence was Kushtha born. There moved through heaven a golden ship, a ship with cordage wrought of gold:

अध्याय 19

श्लोक 37.2

वर्च॒ आ धे॑हि मे त॒न्वां॒३ सह॒ ओजो॒ वयो॒ बल॑म्।इ॒न्द्रि॒याय॑ त्वा॒ कर्म॑णे वी॒र्याय॒ प्रति॑ गृह्णामि श॒तशा॑रदाय

varca ā dhehi me tanvāṃ3 saha ojo vayo balam| indriyāya tvā karmaṇe vīryāya prati gṛhṇāmi śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

गौर (आपः) है मेरे प्राणो ! तुम दोनों. (शम्) मेरे उपस्थित रोगो की शान्ति, तथा मु (जमयम्) भावी रोगो से निभेय (कृतम्) कीजिये । २०८ भयर्ववेद-माष्य का० १९ ॥। सूर ४४ (भथवं ०४।९।१) कहा है । भक्ष्यम् का थं है-“श्रांखो के लिये हितकर" ।

English

There is embodiment of life that dies not; thence was Kushtha born. Where is the Sinking of the Ship, the summit of the Hill of Snow,

अध्याय 19

श्लोक 37.3

ऊ॒र्जे त्वा॒ बला॑य॒ त्वौज॑से॒ सह॑से त्वा ।अ॒भि॒भूया॑य त्वा रा॒ष्ट्रभृ॑त्याय॒ पर्यू॑हामि श॒तशा॑रदाय

ūrje tvā balāya tvaujase sahase tvā | abhibhūyāya tvā rāṣṭrabhṛtyāya paryūhāmi śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

जमति भेषजं गवेऽश्वाय पुरुषाय भेषजम् । सुखं मेषाय मेष्ये ॥ (यजु० ३। रोगों के आक्तमणकोन होने देने के कारण निर्भय बनाता दहै। (यः) जो (हरिमा) विषयों हारा इन्द्रियो का भरपहुरण है, (लायात्यः) जो जाया को जीवन का साधन समना है, (भच्ुभेदः ) जो भषुष्ठित योगाङ्खो मे तृटि भा गई है, (विसल्पकः) जो चित्त का विविध विष्यो में का० १९॥ सुऽ ४४ धथ्वंवेद-माष्य ३०९

English

There is embodiment of life that dies not: thence was Kustha born. Healer of every malady, that Kushtha stands by Soma’s side.

अध्याय 19

श्लोक 37.4

ऋ॒तुभ्य॑ष्ट्वार्त॒वेभ्यो॑ मा॒द्भ्यः सं॑वत्स॒रेभ्यः॑ ।धा॒त्रे वि॑धा॒त्रे स॒मृधे॑ भू॒तस्य॒ पत॑ये यजे

ṛtubhyaṣṭvārtavebhyo mādbhyaḥ saṃvatsarebhyaḥ | dhātre vidhātre samṛdhe bhūtasya pataye yaje

हिन्दी अर्थ

१३२२. आञ्जन एृथिव्यां जातं भद्रं पुरुषजी्नम् । तथा कल्याणकारी है, (परुषजीवनम्) क्षरीरपुरी मे वसनेवालो का जीवन- से रहित (कृणोतु) करे ¦ (रथजूतिम्) हमारे शरीर-रथों मेँ वेगदे, भौर ह्मे (भ्रनागस्षम्) पापों से रदित करे ।

English

Banish thou all Consumption, drive all sorceresses far away. Thou whom Ikshvāku’s ancestor, whom he who well-loved Kushtha, knew,

अध्याय 19

श्लोक 38.1

यक्षमनाशनम्।१-३ अथर्वा।गुल्गुलुः।१ अनुष्टुप्, २ चतुष्पदा उष्णिक्, ३ एकावसाना प्राजापत्याऽनुष्टुप्।न तं यक्ष्मा॒ अरु॑न्धते॒ नैनं॑ श॒पथो॑ अश्नुते ।यं भे॑ष॒जस्य॑ गुल्गु॒लोः सु॑र॒भिर्ग॒न्धो अ॑श्नु॒ते

yakṣamanāśanam| 1-3 atharvā| gulguluḥ| 1 anuṣṭup, 2 catuṣpadā uṣṇik, 3 ekāvasānā prājāpatyā'nuṣṭup| na taṃ yakṣmā arundhate nainaṃ śapatho aśnute | yaṃ bheṣajasya gulguloḥ surabhirgandho aśnute

हिन्दी अर्थ

तथा--पृथिवी मं पदा सुरमा सुख देता, सानुषजीवन को बढाता, शीघ्र मृत्यु से बचाता, शरीर को सक्रिय करता.श्नौरं रोगों का विनाशक है । पुरुषजीवनम्, पुरुषः पुरि वसतीति । त्राण कीजिये । (रसो) हि प्रज्ञानमय ! (मृड) हमे सुखी कीजिये, ताकि हम है परमेदवर ! जाप (सिन्धोः) नदियों भौर समदो के (गर्मः) जन्म- ३१० भरथर्वेवेद-माष्य क० १९ 1 धु ४४

English

Whom Vāyasa and Mātsya knew, hence healer of all ills art thou. O thou who hast all-reaching might drive away Fever, drive it down,

अध्याय 19

श्लोक 38.2

विष्व॑ञ्च॒स्तस्मा॒द् यक्ष्मा॑ मृ॒गा अश्वा॑ इवेरते ।यद् गु॑ल्गु॒लु सै॑न्ध॒वं यद् वाप्यासि॑ समु॒द्रिय॑म्

viṣvañcastasmād yakṣmā mṛgā aśvā iverate | yad gulgulu saindhavaṃ yad vāpyāsi samudriyam

हिन्दी अर्थ

गणो को (पुष्पम्) विकसित करते हँ । (वातः) भाप की वायु (प्राणः) ३२५. देवान् त्रैककुदं परं मा पाहि विशतः । प्राप रक्षा करते है । (मा) मेरी भी (विदवतः) सब भोर के, प्रौर (परि) सब

English

Head racking Fever, tertian, continual, lasting for a year. A prayer for pardon of error in sacrifice, and for wisdom, strength, and life For each defect of mine in voice and spirit I have approached

अध्याय 19

श्लोक 38.3

उ॒भयो॑रग्रभं॒ नामा॒स्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

ubhayoragrabhaṃ nāmāsmā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

प्रकार से (पाहि) भराव रक्षा कीजिये । (बाह्याः) बाहिर की (उत) तथा भवासपद्) हृदय के विशिष्ट-स्थान मँ निजप्रकाशरूप च फल . जाता , तब परमेश्वर (रक्षोहा ) राक्षसी भावों का हनन करता, भौर (भ्रमीव- परमेश्वर भेषल है (मन्त्र १, तथा ६ 1 तथा परमेदवर को “सुभि- शरीर भन्तःकरण इन्द्रिय पौर पाय रादि पद्यु कै रोग नाश करनेवाले

English

One vehement and ardent. With all the Deities, fully approving, Brihaspati supply the want!

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।