रिपु रन जीति सुजस सुर गावत।सीता सहित अनुज प्रभु आवत॥ सुनत बचन बिसरे सब दूखा।तृषावंत जिमि पाइ पियूषा
ripu rana jīti sujasa sura gāvata| sītā sahita anuja prabhu āvata|| sunata bacana bisare saba dūkhā| tṛṣāvaṃta jimi pāi piyūṣā
व्याख्याVyakhya
श्रीरामचरितमानस की यह चौपाई श्रीराम के विराट और सर्वव्यापी रूप की घोषणा करती है: जानकी, राम, लक्ष्मण, हनुमान और उनके समस्त सेवक — सभी राम के ही रूप हैं, सभी साक्षात भगवान हैं। यह तुलसीदास जी की भक्ति का अद्वैत प्राण है: जहाँ भक्त स्वयं भगवान का रूप हो जाता है। सेवक और स्वामी का भेद इस परम सत्य के प्रकाश में मिट जाता है। परम सेवक हनुमान जी स्वयं श्रीराम का ही रूप हैं। भक्ति का यही अनुपम विरोधाभास है: आप जितना अधिक समर्पण करते हैं, उतने ही अधिक आप उसी तत्व में लीन हो जाते हैं जिसके प्रति आपने समर्पण किया है।
विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी
समूहों में पहचान के विलय (आइडेंटिटी फ्यूजन) पर शोध (स्वान, गोमेज़): जब लोग किसी समूह या महान उद्देश्य के साथ अपनी पहचान का पूर्णतः विलय कर लेते हैं, तो वे स्वयं और समूह के बीच कोई अंतर नहीं देखते। यह विलय असाधारण आत्म-त्याग और पारस्परिक सहयोग को जन्म देता है। श्रीरामचरितमानस का यह दर्शन कि "सब राममय हैं" वास्तव में परमात्मा के साथ हमारी पहचान के इसी पूर्ण विलय का प्रतीक है: जहाँ भक्त स्वयं और ईश्वर के बीच कोई भेद नहीं देखता। यही वह परम रूपांतरण है जिसका भक्ति मार्ग वादा करता है।
A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.
स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण
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- Sanskrit edition
- Gita Press Illustrated Edition (Book Code 0080). Gita Press Gorakhpur (Official Publication)
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- Gita Press Editorial Board (Hindi)
- Last updated
- 2026-10-23
- Licence note (as recorded)
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- पाठ-भेद · Variant readings
- Collated with Kashi Nagari Pracharini Sabha recension.
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