Atharva Veda
9
अध्याय 9 / 20

Kanda 9

काण्ड 9

313 श्लोकभाग 4/5 · श्लोक 7.1–9.22

पूर्ण अध्याय पाठ70 श्लोक

अध्याय 9

श्लोक 7.1

गौः १-२६ ( एकः पर्यायः) ब्रह्म।गौः।१ आर्ची बृहती, २ आर्च्युष्णिक्, ३, ५ आर्च्यनुष्टुप्, ४, १४-१६ साम्नी बृहती, ६,८ आसुरी गायत्री, ७ त्रिपदा पिपीलिकमध्या निचृद्गायत्री, ९, १३ साम्नी गायत्री, १० पुर उष्णिक्, ११-१२, १७, २५ साम्न्युष्णिक्, १८, २२ एकपदाऽसुरी जगती, १९ एकपदाऽसुरी पङ्क्तिः, २० याजुषी जगती, २१ आसुर्यनुष्टुप्, २३ एकपदाऽऽसुरी बृहती, २४ साम्नी भुरिग्बृहती, २६ साम्नी त्रिष्टुप्, (७, १८-१९, २२-२३ आभ्योऽतिरिक्ता द्विपदा)।प्र॒जाप॑तिश्च परमे॒ष्ठी च॒ शृङ्गे॒ इन्द्रः॒ शिरो॑ अ॒ग्निर्ल॒लाटं॑ य॒मः कृका॑टम्

gauḥ 1-26 ( ekaḥ paryāyaḥ) brahma| gauḥ| 1 ārcī bṛhatī, 2 ārcyuṣṇik, 3, 5 ārcyanuṣṭup, 4, 14-16 sāmnī bṛhatī, 6,8 āsurī gāyatrī, 7 tripadā pipīlikamadhyā nicṛdgāyatrī, 9, 13 sāmnī gāyatrī, 10 pura uṣṇik, 11-12, 17, 25 sāmnyuṣṇik, 18, 22 ekapadā'surī jagatī, 19 ekapadā'surī paṅktiḥ, 20 yājuṣī jagatī, 21 āsuryanuṣṭup, 23 ekapadā''surī bṛhatī, 24 sāmnī bhurigbṛhatī, 26 sāmnī triṣṭup, (7, 18-19, 22-23 ābhyo'tiriktā dvipadā)| prajāpatiśca parameṣṭhī ca śṛṅge indraḥ śiro agnirlalāṭaṃ yamaḥ kṛkāṭam

हिन्दी अर्थ

(रकनासि) राक्षसस्वभाव के लोग हँ (लोहितम्) गौ का खून, (इतर- जनाः) उपयु क्त कथितो से भिन्न लोग है, (उबघ्यम्) गौ का गोबररूप, राक्षस खूनी स्वभाव वाले होते है, रतः इहं खून कहा है (अभ्रम्) जल से भरा मेष है (पीवः) गौ का मोटा शरीर, (मज्जा)

English

He, having been invited among the gods, regales, invited in that which wears all various forms among the Gods.

अध्याय 9

श्लोक 7.2

सोमो॒ राजा॑ म॒स्तिष्को॒ द्यौरु॑त्तरह॒नुः पृ॑थि॒व्यऽधरह॒नुः

somo rājā mastiṣko dyauruttarahanuḥ pṛthivya'dharahanuḥ

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (एवम् इस प्रकार (वेद) जानता है (एनम्) इये (विद्व- रूपाः) विद्वः केः रूप वाले; (स्वल्पाः). सर्वरूपी. (पशवः) पशु (उपति- दुषके लिये गौ का, कृषि के लिये बल का, सवारी के निये भ्रव का, गृहु- रक्षा के लिथे दवा का । इस प्रकारः विविघ प्रयोजनों के लिये. विविध पशु का संग्रह करता हैः।. - काण्ड ९ । सूक्त ७ । सम्पूर्णं

English

The All-embracing (Aditi) is the hide, the herbs are her hair,. and the Lunar Mansions her form. The hosts of Gods are her entrails, man are her bowels, and demons her abdomen.

अध्याय 9

श्लोक 7.3

वि॒द्युज्जि॒ह्वा म॒रुतो॒ दन्ता॑ रे॒वति॑र्ग्री॒वाः कृत्ति॑का स्क॒न्धा घ॒र्मो वहः॑

vidyujjihvā maruto dantā revatirgrīvāḥ kṛttikā skandhā gharmo vahaḥ

हिन्दी अर्थ

„.. बहिषिटं निदरैवतु काहाबाहं तवोदरात् । . १; "हरिमा" केः लिः भयव ५..१।२२।४ भं शुक भर्थात् तोते का दृष्टान्त विया है । तोता हरा हौतां है षीला नहीं । हरिमा रोग.19४०0न्६ का ही भेद है। जिगर । कौ र (भट पित्त यदि देर तक स्का रहे तो वहं हरा प्रकृ जातौ है, जिससे दस्तों में हरापन भरा जाता है जिगर रस स्वयं पीला -होता है । । १३४ भरथववेद-भाष्य कौ०.९। सु०८

English

All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell. So that Consumption may depart forth from thine ears and from. thy mouth, All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell.

अध्याय 9

श्लोक 7.4

विश्वं॑ वा॒युः स्व॒र्गो लो॒कः कृ॑ष्ण॒द्रं वि॒धर॑णी निवे॒ष्यः

viśvaṃ vāyuḥ svargo lokaḥ kṛṣṇadraṃ vidharaṇī niveṣyaḥ

हिन्दी अर्थ

हमा मूत्र, (तव उदरात्) तेरे उदर से, पेट से (बिलं बहिः) बस्तिछिद्र भहम्) निकालदेने को विधि गैनेकहंदीहै। (ते) तेरे (उदरात्). पेट से, (क्लोम्नः) फेफडे से, (नाभ्याः) नाभिं

English

The malady that makes one deaf, the malady that makes one blind, All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell.

अध्याय 9

श्लोक 7.5

श्ये॒नः क्रो॒डो॒३ऽन्तरि॑क्षं पाज॒स्यं॑१ बृह॒स्पतिः॑ क॒कुद् बृ॑ह॒तीः कीक॑साः

śyenaḥ kroḍo3'ntarikṣaṃ pājasyaṃ1 bṛhaspatiḥ kakud bṛhatīḥ kīkasāḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रपः. रक्तरूपी जलं (सोमानम्) सीमा कों (विरुजन्ति) विशेषतया खण क्रते है, वै. (भ्रहिसन्तीः, भ्रनामयाः) न हिसाः करने वाले, रोग रहित वन्तु) द्रवरूप में निकल जाय । .: का. निदरत्चक-ह :( भवं ०- १०।२।११). मर रक्त-ापः -मूर्घा.की शरोर गेति करतेःहएं अपने मेः विलीन यकष्म-क्रिमियो ७७65 को जे जाते है, भौर

English

The throbbing pain in all thy limbs that rends thy frame with fever-throes, All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell. The malady whose awful look makes a man quiver with alarm,

अध्याय 9

श्लोक 7.6

दे॒वानां॒ पत्नीः॑ पृ॒ष्टय॑ उप॒सदः॒ पर्श॑वः

devānāṃ patnīḥ pṛṣṭaya upasadaḥ parśavaḥ

हिन्दी अर्थ

. सिरकी सीमा. . -पालाण९' करो रुण कर देते है 1. उपचार द्वारा ये १ मंस्तिंष्कावरणं । इस. के सुजन को पाश्णोपषपंऽ कहते है । क्रिमि मूत्ररूप+ में जब मूत्रमाग से, बाहर निकल जाति है, तब सिर हिसा रहित भ्रौर -रोगरहित हो जाते ई । क्रिमियों भर्थात् ७6705 के लिये देखो

English

Fever whom every Autumn brings we charm away with this our spell. Disease that creeps about the thighs and, after, reaches both the groins,

अध्याय 9

श्लोक 7.7

मि॒त्रश्च॒ वरु॑ण॒श्चांसौ॒ त्वष्टा॑ चार्य॒मा च॑ दो॒षणी॑ महादे॒वो बा॒हू

mitraśca varuṇaścāṃsau tvaṣṭā cāryamā ca doṣaṇī mahādevo bāhū

हिन्दी अर्थ

करते है, श्रौर (कीकसाः) हंसलि्यों तथा पफंसलियों के (श्नु) साथ-साथ (तन्वति). फैल जाते है, वे (अदिसन्तीः). न हिसा करने -वाले, (भरना- (याः) जो भ्राषः रक्त जल. (पाश्वे) दो पाद्व . के (उप) समीप (याः) जो (भ्रषंणीः) गतिः करने वाले भायः रक्त-जल (ते) तेरी

English

Consumption from thine inward parts we charm away with this our spell. If the disease originates from love, from hatred, from the heart, Forth from the heart and from the limbs we charm the wasting malady.

अध्याय 9

श्लोक 7.8

इ॒न्द्रा॒णी भ॒सद् वा॒युः पुच्छं॒ पव॑मानो॒ बालाः॑

indrāṇī bhasad vāyuḥ pucchaṃ pavamāno bālāḥ

हिन्दी अर्थ

समीप, (छषन्ति) गति करे है, वे. (भरहिसन्तीः) . न हिसा करे हए : (अनामयाः) रोग रहित भ्रापः रक्त-जल (बिलम्, बहिः) वस्ति के छिद्र से बाहर (निद्र॑वन्तु) व्रवरूप मे निकल जांयः । 1 । =“ (मावा (मन्त १३) । वक्षणाः =शरीरके दो पाश्वं मँ पेट के.अन्दर की भ्रोर के माग! तिरक्वीः-- (०७७86, . ,

English

The yellow Jaundice from thy limbs, and Colic from the parts within, And Phthisis from thine inward soul we charm away with this our spell.

अध्याय 9

श्लोक 7.9

ब्रह्म॑ च क्ष॒त्रं च॒ श्रोणी॒ बल॑मू॒रू

brahma ca kṣatraṃ ca śroṇī balamūrū

हिन्दी अर्थ

, (गाः) जो रापः रक्त-जल (गुदाः-नु) गुदा के श्रवयरवो के साथ (निन्त) पी जाति है. (च). श्रौरः परंषि) जोड़ को (विरुजन्ति) तौड़ देते हँ वे उपचार यां चिकित्सा द्वाराः (भ्रहिसन्तीः) न हिसा करते णको के,जोढ द्वारा मालारूप मे बना ह्राद, जिनुःमे सुषुम्णा नाड़ी सूत्र मे मज्जा होती है । -मज्जा = था छण - ; :.

English

Let wasting malady turn to dust, become the water of disease. I have evoked the poison-taint of all Consumptions out of thee. Forth from the hollow let it run, and rumbling sounds from thine inside.

अध्याय 9

श्लोक 7.10

धा॒ता च॑ सवि॒ता चा॑ष्ठी॒वन्तौ॒ जङ्घा॑ गन्ध॒र्वा अ॑प्स॒रसः॒ कुष्ठि॑का॒ अदि॑तिः श॒फाः

dhātā ca savitā cāṣṭhīvantau jaṅghā gandharvā apsarasaḥ kuṣṭhikā aditiḥ śaphāḥ

हिन्दी अर्थ

कहा है । भ्रदिविनौ है मेषरारिस्थ दो तारा । ये चुलोकमे ऊचे उठे हुए है, है 1 इन में तादात्म्य दर्चाया है । ४ . भ्रोर मुख कर 'खड़ा बेल । (यमः) -रदिमयों को .नियन्तंत किया हृभ्रा सूयं है

English

He, having been invited in the worlds, regales, invited, in that which wears all various forms in the worlds. He, having been invited hath been invited.

अध्याय 9

श्लोक 7.11

चेतो॒ हृद॑यं॒ यकृ॑न्मे॒धा व्र॒तं पु॑री॒तत्

ceto hṛdayaṃ yakṛnmedhā vrataṃ purītat

हिन्दी अर्थ

रिमरूपी रेश्वये वाला होता है, उधर मुख कर खडा बेल मानो सू्य॑रूप है। सूयं .पूवंदिश्ा से. जब. दक्षिण.की रोर जाता है तब रीतकाल होता है, मानो उस समय सूयं यमरूप होता है, यतः. वह् निज -रदिमयों को का सूर्यं, मानो दक्षिण को भोर मूख कर खड़ा बेल है । दक्षिण की भोर खड़ा बेल कहा है। इसके दारा. वर्चा दिया है कि सूयं वास्तव मे एक स्थानम खड़ादहै। उस में गति पृथिवी.की गति के कारण प्रतीतः होती है । तिष्ठन् = “श्ठा गतिनिवृत्तौ. . , ... ..

English

He gains this world and the world yonder. He who hath this knowledge wins the luminous spheres.

अध्याय 9

श्लोक 7.12

क्षुत् कु॒क्षिरिरा॑ वनि॒ष्ठुः पर्व॑ताः प्ला॒शयः॑

kṣut kukṣirirā vaniṣṭhuḥ parvatāḥ plāśayaḥ

हिन्दी अर्थ

की भ्रोर भुख कर खड़ा बैल, (सविता). उत्पादक तथा प्रेरक सूयं है (उदङ् तिष्ठन्) उत्तर की भ्रोर मुख कर खड़ा बल ।. - रहता है । तदनन्तर सूयं परिचमदिला की भ्रोरं ्रग्रसर होता, है 1. पदिचम दिशा का सूयं “वाता" है । इस काल में शीतकाल कीः वर्षा द्वारा लाद्यान्न पैदा होताहै, जिससे प्राणियों का घारण-पोषण . होता है । क्ाता-धा घारण-पोषणयीः : धता. की व्याख्या मे देखो निरुक्तः ११।१।१०) । उत्तर दिशा मेही प्राणियों की भरधिक उत्पत्ति है

English

A glorification of the typically bull and cow Prajapati and Parameshthin are the two horns, Indra is the head, Agni the forehead, Yama the joint of the neck.

अध्याय 9

श्लोक 7.13

क्रोधो॑ वृ॒क्कौ म॒न्युरा॒ण्डौ प्र॒जा शेपः॑

krodho vṛkkau manyurāṇḍau prajā śepaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० € ।-सुऽ.७ : -द्थववेद-माष्य ९९५७ (सोमः राजा) सोम राजा है बैल, जब किं वहु . चारे के लिये धास भ्रादि तृणों को प्राप्त होतादहै। -. सोभ है महौषवः। भतः : यह वीरुधो , का ग्रधिपति है । यथा “सोमो

English

King Soma is the brain, Sky is the upper jaw, Earth is the lower jaw. Lightning is the tongue, the Maruts are the teeth, Revati is the neck, the Krittikās are the

अध्याय 9

श्लोक 7.14

न॒दी सू॒त्री व॒र्षस्य॒ पत॑य॒ स्तना॑ स्तनयि॒त्नुरूधः॑

nadī sūtrī varṣasya pataya stanā stanayitnurūdhaḥ

हिन्दी अर्थ

रहता है । श्रतः इसे ब॑लरूप मँ . वर्णित किया है जं कि बैल घास भोदि के तृणो के खाने के लिये तुणोँ को-प्राप्त् होता है १“ ॥ , (ईक्षमाणः) तुप्त होः कर जब बैल देख, रहा होता.है त बह (मितः) मित्र के सदु स्नेहभरी दृष्टि से. मानो देखता है 1. (आवृत्तः) जब.वापिसि मेँ होता है । मित्रः = तरिमिदा स्नेहने (म्वादिः) । - ...

English

shoulders, the Gharma s the shoulder-bar. His universe is Vāyu, Svarga is his world, Krishpadram is the tendons and Vertebrae. The Syena ceremony is the breast, Air is the region of the belly,.

अध्याय 9

श्लोक 7.15

वि॒श्वव्य॑चा॒स्चर्मौष॑धयो॒ लोमा॑नि॒ नक्ष॑त्राणि रू॒पम्

viśvavyacāscarmauṣadhayo lomāni nakṣatrāṇi rūpam

हिन्दी अर्थ

माणः), निरीक्षण करता है -(रदक्षमाणः) ईक्षण. करता हृभ्रा बैलरूप है । भद होता है भरावृत्त हए भानन्दस्वरूप बेल सदु है 1 (युज्यमानः) जोता जाता हृभ्रा बैल (वैदवदेवः) -वरि्वदेवों का है.

English

Brihaspati is the hump, Brihatī the breast-bone and cartilages of the ribs. The consorts of the Gods are the ribs, the attendants are ribs.

अध्याय 9

श्लोक 7.16

दे॒व॒ज॒ना गुदा॑ मनु॒ष्याऽ आ॒न्त्राण्य॒त्रा उ॒दर॑म्

devajanā gudā manuṣyā' āntrāṇyatrā udaram

हिन्दी अर्थ

(सर्वम्) भ्रात्मना “सरवंरूप" है । - (१). यह श्रंथं गौ बेल की .. दृष्टि से । .जोता .जाता हमरा बैल: मानो राष्ट्र के संब' देवों के.,लिये.उपकारो .है,- दुषार-गौभ्रों के उत्पादन तथा भास्वाही बड़ों के उत्पादन द्वारा, कषिकरममं दवारा, खाद के लिये “सवरूप“ है । भारोदरहन रादि कार्यों ' से विमुक्त हुः निजं “सर्वरूपं” मेँ

English

Mitra and Varuna are the shoulder-blades. Tvashtar and Arya- man the fore-arms, Mahādeva is the arms. Indrāni is the hinder parts, Vāyu the tail, Pavamāna the hair.

अध्याय 9

श्लोक 7.17

रक्षां॑सि॒ लोहि॑तमितरज॒ना ऊब॑ध्यम्

rakṣāṃsi lohitamitarajanā ūbadhyam

हिन्दी अर्थ

स्मरण कराया है । मानो भ्रात्मना “सवंरूप” भववस्था मे बेल एसा सुख दकट-वहन द्वारा बैल के “अनडवान्" स्वरूप को द्योतित किया है । (२) परभेदवर भी भनडवान् है, भनः विरवरूपम् शकटं वहतीति ।

English

Priestly rank and princely power are the hips, and strength is. the thigh. Dhātar and Savitar are the two knee-bones, the Gandharvas are the legs the Apsarases are bits

अध्याय 9

श्लोक 7.18

अ॒भ्रं पीबो॑ म॒ज्जा नि॒धन॑म्

abhraṃ pībo majjā nidhanam

हिन्दी अर्थ

दर्शाया है । मन्तो मै विश्व को गोरूप कहा है, गौ को विद्वरूप नहीं । गौ गौ मातृवत् पूजचीया है । परमेश्वरः यरा रचा “विद्व. मीः गोसदुश्च महो पकारी है यहं हमारे भ्रौरं सब प्राणियों के लिये.मोग रपव के लिये हैः । वाका 9 न नरपिननगयणणषपवककक्कक्काणणकशपकनक्याकामााषषष स

English

of the feet, Aditi is the hooves. Thought is the heart, intelligence is the liver, law the pericar- dium. Hunger is the belly, refreshing drink is the rectum, mountains. are the inward parts.

अध्याय 9

श्लोक 7.19

अ॒ग्निरासी॑न॒ उत्थि॑तो॒ऽश्विना॑

agnirāsīna utthito'śvinā

हिन्दी अर्थ

कां० ९ । सुऽ ७ भथववेद-भाष्य १९९ करते हैँ उसी प्रकार हमे महोपकारी परमेश्वर की भी पूजा भौर सेवा रूप है, (सवंरूपम्) सवंरूप है (मन्त्र २४), (गोरूपम्) गोरूप है । ..

English

Wrath is the kidneys, anger the testes, offspring the generative organ. The river is the womb, the Lords of the Rain are the breasts,. the thunder is the udder.

अध्याय 9

श्लोक 7.20

इन्द्रः॒ प्राङ् तिष्ठ॑न् दक्षि॒णा तिष्ठ॑न् य॒मः

indraḥ prāṅ tiṣṭhan dakṣiṇā tiṣṭhan yamaḥ

हिन्दी अर्थ

(२) मलेरिया का बहिष्करण (६) । (३) --यक्ष्म रोगो का बहिष्करण (७,.१०-१२, १९, २०1 .. (भ) हरापन, पीलाषन, पेट की .हवा, यक्ष्मभावना का बहिष्करण (९), (६) मूत्रमागं से यक्ष्मा का निराकरण १० 1 . (७) -हुदय.कम्पनं ९गा18110 , हृदयव्यथां का शमन ( ).।

English

Rākshasas are the blood, the Other Folk are the contents of the Stomach.

अध्याय 9

श्लोक 7.21

प्र॒त्यङ् तिष्ठ॑न् धा॒तोद॒ङ् तिष्ठ॑न्त्सवि॒ता

pratyaṅ tiṣṭhan dhātodaṅ tiṣṭhantsavitā

हिन्दी अर्थ

कर्णाभ्यां ते कडनषेभ्यः कर्णशूलं विसरपक यू । कां० ९।सु०न' श्रथरवेवेव-माष्य , १३१ रोगम्) शिरोगतं रोग की (बहिः निमेन्ैयामहे) हम पृथक् . करते है

English

The rain-cloud is her fat, her resting-place her marrow. Sitting he is Agni, when he hath stood up he is the Asvins. Standing east-wards he is Indra, standing southwards, Yama.

अध्याय 9

श्लोक 7.22

तृणा॑नि प्राप्तः॒ सोमो॒ राजा॑

tṛṇāni prāptaḥ somo rājā

हिन्दी अर्थ

१३ : भ्रथर्वेवेद-माष्य यस्यं भीमः भ॑ती काच उंदेपयंति पूरषम् । यस्य. जिस की प्रतीकाशः). चमक (भीमः) भयानक है, (पूरुषम् ) य ऊरू भनुसपेत्यथो - एति गवीनिके ।

English

Standing westwards he is Dhātar, standing northwards Savitar. When he hath got his grass he is King Soma.

अध्याय 9

श्लोक 7.23

मि॒त्र ईक्ष॑माण॒ आवृ॑त्त आन॒न्दः

mitra īkṣamāṇa āvṛtta ānandaḥ

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (ऊर) दो पटो, 71028 के (नु सर्प॑ति) साथ-साथे । प्रतिनन्धिके नाड्यौ” अरथवे० १।११।५, सायण) . यदि कामोदपकामाद् पृ्दयाज्नायते परं ।

English

He is Mitra when he looks about him, and when he hath turned round he is joy. When he is yoking he belongs to the All-Gods, when yoked he is Prajāpati, when unyoked he is All.

अध्याय 9

श्लोक 7.24

यु॒ज्यमा॑नो वैश्वदे॒वो यु॒क्तः प्र॒जाप॑ति॒र्विमु॑क्तः॒ सर्व॑म्

yujyamāno vaiśvadevo yuktaḥ prajāpatirvimuktaḥ sarvam

हिन्दी अर्थ

(यदि) यदि (भ्रपकामात् कामात्) बुरी कामनामयी कामवासना से (हृदयात् परि) हृदय से (बलासम्) “बलास” रोग(जायते ) पैदा होता है भङ्गो से (बहिः निमत्वयामहे) हम चिकित्सक पृथक् कर देते है (१) - का०.९। सुगल -- -भधरवेवेद-माष्य १३३

English

This verily is omniform, wearing all forms, bovine-formed. Upon him wait omniform beasts, wearing every shape, each one who hath this knowledge.

अध्याय 9

श्लोक 7.25

ए॒तद् वै वि॒श्वरू॑पं॒ सर्व॑रूपं गोरू॒पम्

etad vai viśvarūpaṃ sarvarūpaṃ gorūpam

हिन्दी अर्थ

बलास रोगे बुरी कामवासना. से;.प्रथम, हृदयं मे प्रकट होता है, - तत्य- धारण किया हृभ्रा है” इस भावना को (बहिः निमेन्तंयामहे); हमं चिकित्सकं पृथक् कर देते है । : हरिमाणम्=-†8४10;48, फाण्डरोग, कामलारोगः 1 मप्वामू्- रप

English

A charm for the cure of various diseases connected with Consumption Each pain and ache that racks the head, earache, and erysipelas,.

अध्याय 9

श्लोक 7.26

उपै॑नं वि॒श्वरू॑पाः॒ सर्व॑रूपाः प॒शव॑स्तिष्ठन्ति॒ य ए॒वं वेद॑

upainaṃ viśvarūpāḥ sarvarūpāḥ paśavastiṣṭhanti ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

आत .बकासौ मवतु मूत्रं भवेस्वामयं् । हे यक्ष्मरोगिन् ! तेरा (बलासः) बंलक्षयकारी रोग. (भरासः भवतु); मूत्र को, शरीर से बाहर निकाल देना चाहिए । भामयत् = श्रम रोगे (चुरा-.

English

All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell. From both thine ears, from parts thereof, thine earache, and the throbbing pain,

अध्याय 9

श्लोक 8.1

यक्ष्मनिवारणम्।१-२२ भृग्वङ्गिराः।सर्वशीर्षामयाद्यपाकरणम्।अनुष्टुप्, १२ अनुष्टुब्गर्भा ककुम्मती चतुष्पदोष्णिक्, १५ विराडनुष्टुप्, २१ विराट् पथ्याबृहती, २२ पथ्यापङ्क्तिः।शी॒र्ष॒क्तिं शी॑र्षाम॒यं क॑र्णशू॒लं वि॑लोहि॒तम्।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yakṣmanivāraṇam| 1-22 bhṛgvaṅgirāḥ| sarvaśīrṣāmayādyapākaraṇam| anuṣṭup, 12 anuṣṭubgarbhā kakummatī catuṣpadoṣṇik, 15 virāḍanuṣṭup, 21 virāṭ pathyābṛhatī, 22 pathyāpaṅktiḥ| śīrṣaktiṃ śīrṣāmayaṃ karṇaśūlaṃ vilohitam| sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

मे निवास करती है । जोड़ों के जोड़ पर एक-एक गदी होती है, भ्रौर' मणकों . . भङ्गी को भ्रौर (रोपणाः) रोपणों को (मदयन्ति) मदयुक्त ५. 7 1 कां०.९।-सुऽ 5 भ्रथरववैद-माष्य १३० देते है, उन (सर्वेषां यक््माणांमं विषम्. सबं ्रकर..के येकम के विष को

English

I have evoked the poison-taint of all Consumptions out of thee. Forth from thy belly and thy lungs, forth from thy navel and thy heart.

अध्याय 9

श्लोक 8.2

कर्णा॑भ्यां ते॒ कङ्कू॑षेभ्यः कर्णशू॒लं वि॒सल्पकम्।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

karṇābhyāṃ te kaṅkūṣebhyaḥ karṇaśūlaṃ visalpakam| sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

पैदा होते हए देखने वाला कोई न था । उस समय इस का द्रष्टा श्रौर ज्ञाता कैवल परमेरवर ही था । परन्तु इस रहस्य के जानने भ्रौर पुने के लिये उ समय कौन था जो कि .परभेदवर के समीप योग समाधि हारा पहुचा हो । इ ब्रघीतु य कभङ्ग वेदास्य वामस्य पदं वेः. ; सुन्दर (वेः) पक्षी क (पदम्) पद को (वेद) जानता है ॐ (इह) मह

English

children. The seven make the one-wheeled chariot ready: bearing seven names the single Courser draws it.

अध्याय 9

श्लोक 8.3

यस्य॑ हे॒तोः प्र॒च्यव॑ते॒ यक्ष्मः॑ कर्ण॒त आ॑स्य॒तः ।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yasya hetoḥ pracyavate yakṣmaḥ karṇata āsyataḥ | sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

१४४ , -्रथववेद-भाष्यं कीं० ९1 सुर कि (ग्रः); जो (इमा) इन (षट् रजांसि) ६ लोकों को (तस्तम्भ). थामे किं वेदिक “कित्” घातु है, जिसःका भथ प्रज्ञान है । षड़ रजांसि = “रजांसि वँ लोकाः" (निरक्त ४।३।२९ ) । सौरमण्डल के तीन लोक हँ, पृथिवीं लोक भन्तरिक्ष लोक, भरौरं सूयं लोकं । इन. से भ्रतिरिक्तः तीन लोकः है -चलोकः;

English

Where is the blood of earth, the life, the spirit? Who may ap- proach the man who knows, to ask it? Let him who knoweth presently declare it, this lovely Bird’s securely-founded station.

अध्याय 9

श्लोक 8.4

यः कृ॒णोति॑ प्र॒मोत॑म॒न्धं कृ॒णोति॒ पूरु॑षम्।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yaḥ kṛṇoti pramotamandhaṃ kṛṇoti pūruṣam| sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

नाकः” (यजु ° ३२।६) इस मन्त्र मे.यौः,. स्वः, प्रौर नाकः ये. तीन लोक कषःहैँ । येःभिलकरः ६ लोकै । “किमपि स्विदेकम्” प्रकृति तत्तव । (ऋते). जगत्. की यथार्थता के निमित्त (माता). प्रकृति माता-ते । ॑ (संजग्मे) -उस प्रकृति. ने परमेर्वर के साथःसंगम किया । (सा) वहः माता

English

Forth from his head the Cows draw milk, and wearing his ves- ture with their foot have drunk the water.

अध्याय 9

श्लोक 8.5

अ॒ङ्ग॒भे॒दम॑ङ्गज्व॒रं वि॑श्वा॒ङ्ग्यंऽ वि॒सल्प॑कम्।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

aṅgabhedamaṅgajvaraṃ viśvāṅgyaṃ' visalpakam| sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

कों (उप ईयुः) प्राप्तं किया । १ रसा जगत् पैदा करने मेंपरमेश्वर के कामना ख्पी.रस को.गधं मे षारण से पैदा होते हैः 1:इसलिये परमेदवर कीः कामनाःकरो र्य कहा

English

Unripe in mind, in spirit undiscerning, I ask of these the Gods’ established places. High up above the yearling Calf the sages, to form a web, their own seven threads have woven.

अध्याय 9

श्लोक 8.6

यस्य॑ भी॒मः प्र॑तीका॒श उ॑द्वे॒पय॑ति॒ पूरु॑षम्।त॒क्मानं॑ वि॒श्वशा॑रदं ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yasya bhīmaḥ pratīkāśa udvepayati pūruṣam| takmānaṃ viśvaśāradaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

का० । सु०् भ्रथवेवेद-भाष्य १४५ (माता) वेदमाता (दक्षिणायाः) वृद्धि की (धुरि) धुरा.मे (युक्ता स्थित हुमा । (त्रिषु योजनेषु) तीन के . योगयुक्त हो जाने पर, (वत्सः) दिया, तब वेदमाता प्रकट हुरई,भौर उस द्वारा मनुष्यो वा ऋषियों की समृद्धि

English

Here, ignorant, I ask the wise who know it, as one who knows not, for the sake of knowledge, What is That One, who in the Unborn’s image hath stablished and fixed firm this world’s six

अध्याय 9

श्लोक 8.7

य ऊ॒रू अ॑नु॒सर्प॒त्यथो॒ एति॑ ग॒वीनि॑के ।यक्ष्मं॑ ते अ॒न्तरङ्गे॑भ्यो ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

ya ūrū anusarpatyatho eti gavīnike | yakṣmaṃ te antaraṅgebhyo bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

किया । वेदवाणी प्रकट हो जने.पर ऋषियों ने वेदवाणी का उच्चारण हए । “वेद माता" यथा स्तुता भया वरदा वेद माता (म्रथर्वं ° १९।७१।१) ३।१५२, महषि दयानन्द) । ग राब्दे कथादिः) = गुरः । इसलिये योगजास्त्र मे कहा है “स एष पूर्वेषामपि गुः कालेनानवच्छेदात्” (१।२६) । वृजनीषुः

English

regions. The Mother gave the Sire his share of Order. With thought at first she wedded him in spirit. She, coyly loth, was filled with dew prolific. With adoration men approached to praise her.

अध्याय 9

श्लोक 8.8

यदि॒ कामा॑दपका॒माद्धृद॑या॒ज्जाय॑ते॒ परि॑ ।हृ॒दो ब॒लास॒मङ्गे॑भ्यो ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yadi kāmādapakāmāddhṛdayājjāyate pari | hṛdo balāsamaṅgebhyo bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

वत्सः (उणा ० ३।६२) ,जोकि परमेरवर के गुणों का कथन करता रहतां है १४६ भरथरवैवेद-माष्य कां० ९। सु० ९ (तिस्रः मातुः) तीन मातां का, (त्रीन् पितृन्) तीन पिताोंका , विन्नाम्) सब को विदित नहीं होती ।

English

Yoked was the Mother to the boon Cow’s car-pole; in humid folds of cloud the infant rested. Then the Calf lowed and looked upon the Mother, the Cow who wears all shapes in three

अध्याय 9

श्लोक 8.9

ह॒रि॒माणं॑ ते॒ अङ्गे॑भ्यो॒ऽप्वाम॑न्त॒रोदरा॑त्।य॒क्ष्मो॒धाम॒न्तरा॒त्मनो॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

harimāṇaṃ te aṅgebhyo'pvāmantarodarāt| yakṣmodhāmantarātmano bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

चायुः (निरक्त ७।७।२६) । इस प्रकार जन्तरिक्ष को भी माता कहा है) है भरतः यह चलता नहीं । इस मेँ गति, पृथिवी के निज भ्रक्ष पर घूमनेके कारण प्रतीत होती है । संसार में विरोधी शक्तिथां भी हँ जिन द्वारा बुद़ापो बीमारियां तथा मृत्युए होती है, मौर हष॑क्षय होता रहता है । परन्तु सूर्य

English

directions. Bearing three mothers and three fathers, single he stood erect: they never made him weary. On yonder heaven’s high ridge they speak together in speech not known to all, themselves

अध्याय 9

श्लोक 8.10

आसो॑ ब॒लासो॒ भव॑तु॒ मूत्रं॑ भवत्वा॒मय॑त्।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

āso balāso bhavatu mūtraṃ bhavatvāmayat| yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

के साथः जडो रहती हैः1. यक्षम.कीठणुभरो के लिये देखो (मन्त्र १३) (वातीकारस्य) उदर में वायुके प्रकोपके, (वा) तथा (अ्रलजेः) भ्रलजि से (निर्) निकाल देने की विधि (रह्म). ने (अवोचम्) कह दी है ।

English

I have evoked the poison taint of all Consumptions out of thee. The penetrating stabs of pain which rend asunder crown and head, Let them depart and pass away, free from disease and harming not.

अध्याय 9

श्लोक 8.11

ब॒हिर्बिलं॒ निर्द्र॑वतु॒ काहा॑बाहं॒ तवो॒दरा॑त्।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

bahirbilaṃ nirdravatu kāhābāhaṃ tavodarāt| yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

या (्थएपात८ कोड़ा भ्रथवा ण्ट 0 । तथा (कशीष्णैः) सिर के (रोगम्) रोग को (अरनीनशम्) मैने नष्ट कर १. परस्पर संनिकृष्ट नाना फु सियां, जो कि समय पा कर नानामूखी एक बड़ा

English

The pangs that stab the heart and reach the breast-bone and connected parts, Let them depart and pass away, free from disease and harming not.

अध्याय 9

श्लोक 8.12

उ॒दरा॑त् ते क्लो॒म्नो नाभ्या॒ हृद॑या॒दधि॑ ।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

udarāt te klomno nābhyā hṛdayādadhi | yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

१२८ भरथवंवेद-भाष्य कां -९:।-सु९ फ (त). तेरे (शीर्ष्णः) सिर के (कपालानि सम्) कपालो; के साय (शीष्णंः रोगम्) पररके रोगको, (च) तथा (हृदथस्थ) हदय का (यः) जो ( विषुः कम्पन. या बीधना हैः उसे (उदन् श्रादित्य)-है

English

The stabs that penetrate the sides and pierce their way along the ribs, Let them depart and pass away, free from disease and harming not. The penetrating pangs that pierce thy stomach as they shoot across,

अध्याय 9

श्लोक 8.13

याः सी॒मानं॑ विरु॒जन्ति॑ मू॒र्धानं॒ प्रत्य॑र्ष॒नीः ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yāḥ sīmānaṃ virujanti mūrdhānaṃ pratyarṣanīḥ | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

विषुः वि+-षूञ् कम्पने, हदय की षडक, एमि) + काण्ड ९ । सुक्त ८ । सम्पूणं : (१) मन्न संस्याः २२। सात , प्रों वाने विर्पति काः दन (१);

English

Let them depart and pass away, free from disease and harming not. The pains that through the bowels creep, disordering the inward parts,

अध्याय 9

श्लोक 8.14

या हृद॑यमुप॒र्षन्त्य॑नुत॒न्वन्ति॒ कीक॑साः ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yā hṛdayamuparṣantyanutanvanti kīkasāḥ | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

भनस्था, जीवात्मा (४); पक्षिरूपीं सूयं का पादं द्वारा उदकपान (५); सप्त तन्तु (६) ; अज भें भ्राधितंः एक तत्तव, ्रकृति (७); वेदमाता का देस की पीठ पर वेदवाणी के सम्बन्ध मे मन्त्रणा (१०); पांच अरो वाला (२) -यह “्रस्यवामीय” सक्त है 1 ऋण्वेद मेँ भी वतंमान है । (ऋ

English

Let them depart and pass away, free from disease and harming not. The pains that suck the marrow out, and rend and tear the bones apart, May they speed forth and pass away, free from disease and harming not.

अध्याय 9

श्लोक 8.15

याः पा॒र्श्वे उ॑प॒र्षन्त्य॑नु॒निक्ष॑न्ति पृ॒ष्टीः ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yāḥ pārśve uparṣantyanunikṣanti pṛṣṭīḥ | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

(भ्रस्य) इस सूयं का (तृतीयः) तीसरा (ज्नाता) भाई. या .मतंच्तर ह वायु या बिद् तथा पाथिवागि ये तीन भाई-भाई हैःएक पित्ता परमेवर मेष.का भरण-पोषण.सू् रमिमयों दवारा होता है + पाथिवान्नि का भरणः पोष॑ण भी सये.की "ररिमियां ही करती ईद । वृक पैदा होतेह । सौराग्न

English

Consumptions with their Colic pains which make thy limbs insensible I have evoked the poison-taint of all Consumptions out of thee.

अध्याय 9

श्लोक 8.16

यास्ति॒रश्ची॑रुप॒र्षन्त्य॑र्ष॒णीर्व॒क्षणा॑सु ते ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yāstiraścīruparṣantyarṣaṇīrvakṣaṇāsu te | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

दवारा उपासक कहता है कि “जने पाथिवाग्नि में विरपति का दशन किया परिणत होता है (वहति) सयं रथ का वहन करता है । (चक्रम् ) रथचक्र (त्रिनाभि) तीन नाभियों वाला है, (अजरम्) जीणं नहीं होता, (अरनवंम्) इसके साथ कोर भवं: भर्थात् प्राणी घोड़ा जुता हृ नहीं है । (यत्र भि) जिस रथ में (विष्वाः मुवना) सौर परिवार के सब सुवन (तस्थुः) स्थित है । सूयं चक्राकार है । यह एकचकरूपः रथ है । इसमे ७ भरर लगे हृष

English

Of piercing pain, of abscesses, rheumatic ache, ophthalmia— I have evoked the poison-taint of all Consumptions out of thee. I have dispelled the piercing pains from feet, knees, hips, and hinder parts,

अध्याय 9

श्लोक 8.17

या गुदा॑ अनु॒सर्प॑न्त्या॒न्त्राणि॑ मो॒हय॑न्ति च ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yā gudā anusarpantyāntrāṇi mohayanti ca | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

होते है । वस्तुतः दस एक चक्षरथ् का एक वहनं एक भरद ही ------ रः व ए शकम का एत पहं एष भ शी राह कींऽ.६। सुर प्रथवेवेद-भाष्य ई४१ जोकि शुक्लरदिम समूह है 1 यह शुक्लरदिम ७ रदिमयो में " हो ी है 1 तीन नाभियां है -्रीष्म, वर्षा, तथा शरद् ऋतुं । कई “एक चक्र ॥ द्वारा “वषं चक्रः का कथन करते है ५ सात स्थत है, उन कां (वहन्ति) वहन करते है (सः भदवाः, उनं के सात भ्रदव, या सात सौराशव 4 . (सप्त स्वसारः) सात जोकि स्वसारः” , भर्थात् भ्रपने-भपने भागे मे.सरण.करते है वे (अभि) सूय के हृए (संनवन्तः); मिल -कर मानो सूयं कौ -स्तुतियां करते है, ०५ ). ५

English

And spine, and from the neck and nape the malady that racked the head. Sound are the skull-bones of thy head and thy heart’s beat is regular.

अध्याय 9

श्लोक 8.18

या म॒ज्ज्ञो नि॒र्धय॑न्ति॒ परूं॑षि विरु॒जन्ति॑ च ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yā majjño nirdhayanti parūṃṣi virujanti ca | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

मंगल, बृहस्पति, तथा शनैरचरः ग्रह॒ । ये निज मार्गो प्र गति.करते हए ४ कीपरिक्रमाए कररहेह।ये परिक्रमाए मानो सूरे क स्तुति रूप ह 1 ह सात चक्र या ग्रह मानो भ्रदवरूप हए, सू्रथं का वहन कर रे हं। १४ स, ्रकार को रदविमयों मे परिणत हौ रही है । वर्षा छतु भं इन्द्र ्नुष भर, भी. को द॑दे भरयमं जायंमानमस्थन्वतं यदंनस्या बिभ॑तिं + ५५

English

Thou, Sun, arising with thy beams hast chased away the head’s disease, hast stilled the pain that racked the limbs. Enunciation of mystico-theological and cosmological doctrine

अध्याय 9

श्लोक 8.19

ये अङ्गा॑नि॒ म॒दय॑न्ति॒ यक्ष्मा॑सो रोप॒णास्तव॑ ।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

ye aṅgāni madayanti yakṣmāso ropaṇāstava | yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

वुल शरीर को (कः दद) किस ने देखा है, (यत्) जिस शरीर का क्रि (भरनस्था) भ्रस्थियो से रहित जीवात्मा (विमति) भरण-पोषण करता १४१ श्रथवेवेद-भाष्य कां०-९.1 सुऽ-९ परिणामरूप ह । परन्तु जीवात्मा भूमि का भरं नहीं । यह कटां -था, प्रौरं कहां सेभ्राया जोरि श्रस्थि्यों वाले शरीर का भरण-पोषणं करता ह

English

The second brother of this lovely Hotar, hoary with eld, is the voracious Lightning. The third is he whose back is balmed with butter. Here have I seen the King with seven male

अध्याय 9

श्लोक 8.20

वि॒स॒ल्पस्य॑ विद्र॒धस्य॑ वातीका॒रस्य॑ वाल॒जेः ।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

visalpasya vidradhasya vātīkārasya vālajeḥ | yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

(दहते) दोहती है, (व्र वसानाः) ख्य को श्रोढृती हुई । भरौर (पदा) पाद द्वारा (उदकम्) उदक को (श्रपुः) पीतीहै। . ५ सूये .को पक्षी कहा है जोकि श्राकाद मे मानो उड़ता है । इसे ही सिरं कहा है जोकिसिरंके सदृश गोल दह, जिसमेंकि. ८०4 कृ निवास है । इस सिर से निकलती हई रदिमयां चमकीली होती ह । कहा है । युम पर प्डने.वाली रदिमर्यों को “पदा” द्वाराः निदिष्ट किया है। जसे कि कटाह कि . (बालस्यापि रवैः पादाः पतन्ति शिरसि भृताम्" ॥ मी 'होगि । इसलिये मन्त्र मे “शीर्णः, रौर “पदा” का कथन इभा है ।

English

The wheel, three-naved, is sound and undecaying: thereon these worlds of life are all dependent.

अध्याय 9

श्लोक 8.21

पादा॑भ्यां ते॒ जानु॑भ्यां॒ श्रोणि॑भ्यां॒ परि॒ भंस॑सः ।अनू॑कादर्ष॒णीरु॒ष्णिहा॑भ्यः शी॒र्ष्णो रोग॑मनीनशम्

pādābhyāṃ te jānubhyāṃ śroṇibhyāṃ pari bhaṃsasaḥ | anūkādarṣaṇīruṣṇihābhyaḥ śīrṣṇo rogamanīnaśam

हिन्दी अर्थ

कां०.९1-सु० श्रथरवंवेद-भाष्य ९४३ पाकः पृछामि मन॒साऽ विजानन् देवानामेना निता पदानि । जहां कि (देवानाम्) . प्रथिवी श्रादि देवों के (एना. पदानि) ये परं म (कवयः) वेदकाव्य के कवि, उन. (सप्त) सात पदों को या ( को, (तन्तून) तन्तुर के रूप, (वितेनिरे) विस्तृत हृए.कहते है; जिनमेकि (भ्रोतवै) बाना डालने-के लिये ह । (उ) वितं, बाना के -लियेःवितकं ! भर्थात् वितकं करो कि बाना के तन्तु कौनसे

English

The seven who on this seven-wheeled car are mounted have horses, seven in tale, who draw them onward. Seven sisters utter songs of praise together, in whom the Cows’ seven names are held and

अध्याय 9

श्लोक 8.22

सं ते॑ शी॒र्ष्णः क॒पाला॑नि॒ हृद॑यस्य च॒ यो वि॒धुः ।उ॒द्यन्ना॑दित्य र॒श्मिभिः॑ शी॒र्ष्णो रोग॑मनीनशोऽङ्गभे॒दम॑शीशमः

saṃ te śīrṣṇaḥ kapālāni hṛdayasya ca yo vidhuḥ | udyannāditya raśmibhiḥ śīrṣṇo rogamanīnaśo'ṅgabhedamaśīśamaḥ

हिन्दी अर्थ

तन्तु. । श्रौर बाना, भरतव है . चौडाईके तन्तु । तानातो है बुष कर्म॑, तथा शुक्ल-भरौर-कृष्ण मिधित कमं । तानाः के होते भी, बाना के विनः; सदस का है । इस.के तय्यार करने के. लिये. ताना-बानाः दोनो की भाव- द्यकता है । प्राणियों के त्रिविध कमं जो कि “बाना रूप है - उनके विना, सौरपरिवार रूपी पटः किंस के लिये हैँ । समग्र जगत् भोग-भौर-भपवगे के लिये है, जोकि प्राणियों के कमो द्वारा अजितं होता है।

English

treasured. Who hath beheld at birth the Primal Being, when She who hath no bone supports the bony?

अध्याय 9

श्लोक 9.1

आत्मा।१-२२ ब्रह्मा।वामः, अध्यात्मं, आदित्यः।त्रिष्टुप्, १२, १४, १६, १८ जगती।अ॒स्य वा॒मस्य॑ पलि॒तस्य॒ होतु॒स्तस्य॒ भ्राता॑ मध्य॒मो अ॒स्त्यश्नः॑ ।तृ॒तीयो॒ भ्राता॑ घृ॒तपृ॑ष्ठो अ॒स्यात्रा॑पश्यं वि॒श्पतिं॑ स॒प्तपु॑त्रम्

ātmā| 1-22 brahmā|vāmaḥ, adhyātmaṃ, ādityaḥ| triṣṭup, 12, 14, 16, 18 jagatī| asya vāmasya palitasya hotustasya bhrātā madhyamo astyaśnaḥ | tṛtīyo bhrātā ghṛtapṛṣṭho asyātrāpaśyaṃ viśpatiṃ saptaputram

हिन्दी अर्थ

सूष्टि रचना काल से चमकं रहा है, मानो निज चमक में हंसता तथा हृषित सूयं की पीठ पर मुक्तात्मा रहते है, श्रौर वहां रह कर वेदवाणी के मी अतिसूक्ष्म कारण शरीर मेँ वास करते है, रतः उन के . शरीरो के भस्मी भूत होने की सम्भावना नहीं होती । परभेदवर की सत्ता भी भ्रादित्य मे कही है (यचु° ४०।१७) । वहां मुक्तात्माभ्रों को परमेदवर का सत्संग भी मिलता है। यचुरवद में नाक मेँ साध्य देवों की सत्ता भी कही है । यथा वेह '

English

all-knowing. Upon the five-spoked wheel revolving ever, whereon all crea- tures rest and are dependent,

अध्याय 9

श्लोक 9.2

स॒प्त यु॑ञ्जन्ति॒ रथ॒मेक॑चक्र॒मेको॒ अश्वो॑ वहति स॒प्तना॑मा ।त्रि॒नाभि॑ च॒क्रम॒जर॑मन॒र्वं यत्रे॒मा विश्वा॒ भुव॒नाधि॑ त॒स्थुः

sapta yuñjanti rathamekacakrameko aśvo vahati saptanāmā | trinābhi cakramajaramanarvaṃ yatremā viśvā bhuvanādhi tasthuḥ

हिन्दी अर्थ

रूपी विकृतियों से। ये ६ दारीर का नियमन करते ई, गति शोल है, श्रौर परमेश्वर देव से पदा हृए हँ । शरीर भं इन के भ्रभीष्ट स्थान निदिचत कर वयि गए है । ये शरीर में स्थित हुए जीवात्मा के भोगापवगे के लिये गतिमान् . होते है, श्रपने-भरपने नियत स्थानों भे रहते हए भी गति करते हैँ । महत्त्व तो मोक्षावस्था भें भी जीवात्मा के साथ रहता है, जिस दारा जीवात्मा मोक्षसुख का अनुभव करता है, ्रौर पुनरावतंन पर शेष ६, महस्तव से विकृतिरूप मेँ पुनः प्रकट हो जाते है ।

English

Two Birds with fair wings, knit with bonds of friendship, in the same sheltering tree have found a refuge, One of the twain eats the sweet Fig-tree’s berry: the other, eat- ing not, regardeth only.

अध्याय 9

श्लोक 9.3

इ॒मं रथ॒मधि॒ ये स॒प्त त॒स्थुः स॒प्तच॑क्रं स॒प्त व॑ह॒न्त्यश्वाः॑ ।स॒प्त स्वसा॑रो अ॒भि सं न॑वन्त॒ यत्र॒ गवां॒ निहि॑ता स॒प्त नामा॑

imaṃ rathamadhi ye sapta tasthuḥ saptacakraṃ sapta vahantyaśvāḥ | sapta svasāro abhi saṃ navanta yatra gavāṃ nihitā sapta nāmā

हिन्दी अर्थ

स्थान नीचे दिखाई देगे श्रौर पृथिवी ऊचे । जसे भ्रमरीका हमारे लिये पाद तलो की भ्रोर है, परन्तु श्रमरीका वासियों के लिये हम उन के पाद तलो . ¦ . पृथिवी वासिंथीं के कार्यो का सम्पादन कर रहे हैँ । रात्रिया विश्वम देती है, भ्रौर दिन कृत्यो मे व्यापृत करते हँ ।

English

Trishtup they fashioned the Trishtup forth: How on the Jagatī was based the Jagatī—they who know this have won themselves immortal life.

अध्याय 9

श्लोक 9.4

को द॑दर्श प्रथ॒मं जाय॑मानमस्थ॒न्वन्तं॒ यद॑न॒स्था बिभ॑र्ति ।भूम्या॒ असु॒रसृ॑गा॒त्मा क्वऽस्वित् को वि॒द्वांस॒मुप॑ गा॒त् प्रष्टु॑मे॒तत्

ko dadarśa prathamaṃ jāyamānamasthanvantaṃ yadanasthā bibharti | bhūmyā asurasṛgātmā kva'svit ko vidvāṃsamupa gāt praṣṭumetat

हिन्दी अर्थ

कां१ ९ घु० ६. प्रथववेद-माष्छ १५३ भ से.(अत्यः) एकः (पि्यलम्) उस वृक्ष के पके हुए फलः को (स्वादु) भां अमि चाकशीति) सब जोर देखता -रहता है, एेसे (सगजा) व्याप्य समान वतंमान जीव-प्रौर-ईश, (समानं वृक्षम्) समान नदवर-देह.-का (परिषस्वजाते ) अय करते हैः (तयोः): उनमें से (अन्यः) जीव पाप्पष्य

English

With Gāyatri he measures out the praise-song, Sāman with praise-song, triplet with the Trishtup,

अध्याय 9

श्लोक 9.5

इ॒ह ब्र॑वीतु॒ य ई॑म॒ङ्ग वेदा॒स्य वा॒मस्य॒ निहि॑तं प॒दं वेः ।शी॒र्ष्णः क्षी॒रं दु॑ह्रते॒ गावो॑ अस्य व॒व्रिं वसा॑ना उद॒कं प॒दापुः॑

iha bravītu ya īmaṅga vedāsya vāmasya nihitaṃ padaṃ veḥ | śīrṣṇaḥ kṣīraṃ duhrate gāvo asya vavriṃ vasānā udakaṃ padāpuḥ

हिन्दी अर्थ

हा उस भोगते हए जीव को (श्नमि चाकशीति) -देखताः उस का साक्षी होता है। म चाकशीति) सव मोर से.देवता धूर्थात् जैसे (मध्वदः) मधुर फल खाने वाले (सुपर्णाः) पक्षी (वक्षे कि (पितरम्) जगत् के पिता को (नवेद) नहीं जनता ।

English

The triplet with the two or four-foot measure, and with the syllable they form seven metres. With Jagatī the flood in heaven he stablished, and saw the Sun in the Rathantara Sāman. Gāyatri hath, they say, three logs for burning: hence it excels in majesty and vigour.

अध्याय 9

श्लोक 9.6

पाकः॑ पृच्छामि॒ मन॒सावि॑जानन् दे॒वाना॑मे॒ना निहि॑ता प॒दानि॑ ।व॒त्से ब॒ष्कयेऽधि॑ स॒प्त तन्तू॒न् वि त॑त्निरे क॒वय॒ ओत॒वा उ॑

pākaḥ pṛcchāmi manasāvijānan devānāmenā nihitā padāni | vatse baṣkaye'dhi sapta tantūn vi tatnire kavaya otavā u

हिन्दी अर्थ

सुपर्णाः सुपतना सुगमनाः “शोभन कर्मो . वाले". (म० दयानन्द) । एना इनः (ऋ० १।१६४।२१)। मन्त्र २०,२१,२२ के भ्रथ, ऋ० १।१६४ , काण्ड ९। सक्त ९ । सम्पूरणं -जो (पृत्रः) पुत्र (कविः) -मेवावी है, वेदकाव्य के : रहस्य को जानता है - (सः) वह (ईम्) - इस तथ्य को (भरा चिकेत) ठीक प्रकार.से जानता है । (यः) जो (ताः).उन स्रियो को (विजानात्) . विवेकःपूरवैकर जाने (सः) वह (पितुः पिता) पिता-के-पिता के सवृदा ध जनीय (भ्रसत्) हो जाय ।

English

I invocate this Milch-cow good at milking, so that the Milker, deft of hand, may milk her. May “Savitar give goodliest stimulation. The caldron is made hot: he will proclaim it.

अध्याय 9

श्लोक 9.7

अचि॑कित्वांस्चिकि॒तुष॑श्चि॒दत्र॑ क॒वीन् पृ॑च्छामि वि॒द्वनो॒ न वि॒द्वान्।वि यस्त॒स्तम्भ षडि॒मा रजां॑स्य॒जस्य॑ रू॒पे किमपि॑ स्वि॒देक॑म्

acikitvāṃscikituṣaścidatra kavīn pṛcchāmi vidvano na vidvān| vi yastastambha ṣaḍimā rajāṃsyajasya rūpe kimapi svidekam

हिन्दी अर्थ

सावंमौमः उन्नति मे सहयोग दे सकती है । निखक्तकार यास्काचायं की वृष्टि मँ-- . अपनी शरोर लीधते है 1 न्तर इन्दं “धुम्” शबद परा निदरिष्ट करतां है; जो

English

She, Lady of all treasures, hath come hither, yearning in spirit for her calf, and lowing. May this Cow yield her milk for both the Asvins, and may she prosper to our high advantage. The Cow hath lowed after her blinking youngling: she licks his forehead as she lows, to form

अध्याय 9

श्लोक 9.8

मा॒ता पि॒तर॑मृ॒त आ ब॑भाज धी॒त्यग्रे॒ मन॑सा॒ सं हि ज॒ग्मे।सा बी॑भ॒त्सुर्गर्भ॑रसा॒ निवि॑द्धा॒ नम॑स्वन्त॒ इदु॑पवा॒कमी॑युः

mātā pitaramṛta ā babhāja dhītyagre manasā saṃ hi jagme| sā bībhatsurgarbharasā nividdhā namasvanta idupavākamīyuḥ

हिन्दी अर्थ

श्वे . शयवेवेदमाष्य कां ९।सू० जीवन प्राण पर भ्राधित है वैसे जीवन शब्द श्रादि पर भी भराधित है। तः शब्द ्नादि का सदुपयोग करना चाहिए, दुरुपयोग नहीं । (निरुक्त भ्र ° को ्राप्तकरती हँ । (निखक्त भर° ५, पाऽ १, खं० २) । ऋग्वेद के भाष्यकार श्री वेकटमाघरव की वृष्टि मेँ- . -भथि स्त्री भौर पुम् विभाग शरीरकृत है । ्रनात्मविदोंके-लियेये

English

it. His mouth she fondly calls to her warm udder, and suckles him with milk while gently

अध्याय 9

श्लोक 9.9

यु॒क्ता मा॒तासि॑द्धु॒रि दक्षि॑णाया॒ अति॑ष्ठ॒द् गर्भो॑ वृज॒नीष्व॒न्तः ।अमी॑मेद् व॒त्सो अनु॒ गाम॑पश्यद् विश्वरू॒प्यंऽ त्रि॒षु योज॑नेषु

yuktā mātāsiddhuri dakṣiṇāyā atiṣṭhad garbho vṛjanīṣvantaḥ | amīmed vatso anu gāmapaśyad viśvarūpyaṃ' triṣu yojaneṣu

हिन्दी अर्थ

भरात्माजोकिशरीरो मेह वंह पुमान् ही है, पुल्लिङ्गही है (ऋ० महषि दयानन्द की वृष्टि भे- “जिन को (सतीः) विद्या तथा उत्तम रिक्षादि शुभ गुणौं.से. युक्त (स्त्रियः) स्त्रां कहती हैः (तामु) उ (पुसः) . पुरुष -जानो । कन्यां को करे" (भावाथं) ऋऽ. १।१६४।१६॥

English

lowing. He also snorts, by whom encompassed round the Cow lows as she closely clings to him who sheds the rain.

अध्याय 9

श्लोक 9.10

ति॒स्रो मा॒तॄस्त्रीन् पि॒तॄन् बिभ्र॒देक॑ ऊ॒र्ध्वस्त॑स्थौ॒ नेमव॑ ग्लापयन्त ।म॒न्त्रय॑न्ते दि॒वो अ॒मुष्य॑ पृ॒ष्ठे वि॑श्व॒विदो॒ वाच॒मवि॑श्वविन्नाम्

tisro mātṝstrīn pitṝn bibhradeka ūrdhvastasthau nemava glāpayanta | mantrayante divo amuṣya pṛṣṭhe viśvavido vācamaviśvavinnām

हिन्दी अर्थ

कां० ९1 सू० € भरथवेवेद-माष्य १४७ घूमने पर,-- (यस्मिन्) जिसमें किं (विरवा भुवनानि ) सब सौर परिवार है ग्रह, उपग्रह भ्रादि का वह (सनात् एव) सनातन काल से हो (सना- भिः) नाभि समेत (न तप्यते) न तप्त होता है, (न छिद्यते) न टूटता ही है, वह सनातन काल से ही विद्यमान है । -‹

English

The axle, heavy-laden, is not heated: the nave from ancient time remains unheated. They call him in the farther half of heaven the Sire five-footed, of twelve forms, wealthy in watery store.

अध्याय 9

श्लोक 9.11

पञ्चा॑रे च॒क्रे प॑रि॒वर्त॑माने॒ यस्मि॑न्नात॒स्थुर्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।तस्य॒ नाक्ष॑स्तप्यते॒ भूरि॑भारः स॒नादे॒व न च्छि॑द्यते॒ सना॑भिः

pañcāre cakre parivartamāne yasminnātasthurbhuvanāni viśvā | tasya nākṣastapyate bhūribhāraḥ sanādeva na cchidyate sanābhiḥ

हिन्दी अर्थ

होता रहता है ! इसलिये राशिचक्र को घूमता हुध्रा कहा है । राचिचक्र के कार है, रौर राशिचक्र भी चक्राकार है । इन दोनों चक्रों को परस्पर जोड़ने एक हो जाने से, ५ ऋतुए पांच .भ्रे है (निक्त ४।४।२७) । १२ व ५ (पुरीषिणम्) जल के क(रणीभूत राशिचक्र ध की

English

These others, later still, say that he takes his stand upon a seven- wheeled car, six-spoked, whose sight is clear.

अध्याय 9

श्लोक 9.12

पञ्च॑पादं पि॒तरं॒ द्वाद॑शाकृतिं दि॒व आ॑हुः परे॒ अर्धे॑ पुरी॒षिण॑म्।अथे॒मे अ॒न्य उप॑रे विचक्ष॒णे स॒प्तच॑क्रे॒ षड॑र आहु॒रर्पि॑तम्

pañcapādaṃ pitaraṃ dvādaśākṛtiṃ diva āhuḥ pare ardhe purīṣiṇam| atheme anya upare vicakṣaṇe saptacakre ṣaḍara āhurarpitam

हिन्दी अर्थ

१४८ शभ्रधरवैवेद-भाष्य कां० ९। सू० है (मन्व ११ की व्याख्या देखो) । राशिचक्र की दो-दो राशियों मे पृथिवी या सुय की गृति द्वारा एक-एक ऋतु का निर्माण होता है । ९ वीं श्रौर १० वीं तथा १९१ वींभ्रौर १२ वींइन चार राशियोंमे पृथिवी या सूर्यकी गति के के कारण (निरक्त ४।४।२७) । “्रादशाकृतिम्"रारिचक्र दवादश श्राकृतियों

English

Formed with twelve spokes, too strong for age to weaken, this wheel of during Order rolls round heaven. Herein established, joined in pairs together, seven hundred sons and twenty stand, O Agni.

अध्याय 9

श्लोक 9.13

द्वाद॑शारं न॒हि तज्जरा॑य॒ वर्व॑र्ति च॒क्रं परि॒ द्यामृ॒तस्य॑ ।आ पु॒त्रा अ॑ग्ने मिथु॒नासो॒ अत्र॑ स॒प्त श॒तानि॑ विंश॒तिश्च॑ तस्थुः

dvādaśāraṃ nahi tajjarāya varvarti cakraṃ pari dyāmṛtasya | ā putrā agne mithunāso atra sapta śatāni viṃśatiśca tasthuḥ

हिन्दी अर्थ

भक्ति वाली है। यथा मेषाकृति, वृषाकृति, मिथुनाकृति, कन्याकरति, कर्काक़ृति, सिंहाङृति, तुलाकृति, वुर्चिकाृति, धनुषाङृति, मकराकृति, नाम” (निषं० १।१२) । रदिमिचक्र उदक वाला है ) सूयं जब ककैराशि मे तथा मकरराशि मेँ होता है तब-तब वर्षा होती है । राशिचक्र की दो-दो राशियों मे सूयं की गति के कारण एक ऋतु होती है, मरतः .१२ राशियों मे गति के कारण ६ ऋतुएं हर्द" । यह् वस्तुतः है । परन्तु हेमन्त भौर शिशिर की सर्दी में एकानुभूति होने के कारण ऋतुएं ५ भी कही जाती है । भरतः “पञ्चपादम्”, भौर “षडर” मे परस्पर विरोष नहीं । वार-वार घूमता है । (तत्) वह चक्र (जराय नहि) जीणं .होने के लिये

English

The wheel revolves, unwasting, with its felly: ten draw it, yoked to the far-stretching car pole. Girt by the region moves the eye of Sūrya, on whom dependent rest all living creatures.

अध्याय 9

श्लोक 9.14

सने॑मि च॒क्रम॒जरं॒ वि वा॑वृत उत्ता॒नायां॒ दश॑ यु॒क्ता व॑हन्ति ।सूर्य॑स्य॒ चक्षू॒ रज॑सै॒त्यावृ॑तं॒ यस्मि॑न्नात॒स्थुर्भुव॑नानि॒ विश्वा॑

sanemi cakramajaraṃ vi vāvṛta uttānāyāṃ daśa yuktā vahanti | sūryasya cakṣū rajasaityāvṛtaṃ yasminnātasthurbhuvanāni viśvā

हिन्दी अर्थ

१. सयं श्रौर राशिचक्र की स्थिति एक ही चुभाग मे होती है । क्योंकि सूयं कौ गति रारिचक् मँ होती है । भतः दोनों का एक चयूभागे में होना भरावक्यक है । कां९९।सु०९ भ्रथरवैवेद-माष्य १४६ ७ सौ श्रौर बीस (मिथुनासः) मिथुन रूप, नर-मादास्प (पुत्राः) सूयं के

English

They told me these were males, though truly females. He who hath eyes sees this, the blind discerns not. The son who is a sage hath comprehended: who knows this rightly is his father’s father.

अध्याय 9

श्लोक 9.15

स्त्रियः॑ स॒तीस्ताँ उ॑ मे पुं॒सः आ॑हुः॒ पश्य॑दक्ष॒ण्वान् न वि चे॑तद॒न्धः ।क॒विर्यः पु॒त्रः स ई॒मा चि॑केत॒ यस्ता वि॑जा॒नात् स पि॒तुष्पि॒तास॑त्

striyaḥ satīstā~ u me puṃsaḥ āhuḥ paśyadakṣaṇvān na vi cetadandhaḥ | kaviryaḥ putraḥ sa īmā ciketa yastā vijānāt sa pituṣpitāsat

हिन्दी अर्थ

दयादलारम् = १२ मासरूमी प्ररे । मिथुनासः == भिथुनख्प, स्तरी-पुरुष रूप, ३६० रात्रिया भ्रौर ३६० दिन । ये ३६० मिथुन हैँ । एक व श्रौर एक दिन एक मिथुन । इन के साथ प्रग का सम्बन्ध है । भ्रथवेवेदानूसार सनेमि चक्रमजरं विं्वात उत्तानायां दहं युक्ता वहन्ति । सु्॑स्य चू रज॑सेत्यातं यसमि्नात॒सथ॒व॑नानि विद्वां ॥१५॥ चक्रसमान गोलाकार सूयं (विवावृते) निज भ्रक्ष पर घूम रहा है, (उत्ता- (वहन्ति) सूं का वहन करती हैँ । (सूर्यस्य चकुः) सूरय॑रूपी आंख (

English

Of the co-born they call the seventh single-born: the six twin, pairs are called the Rishis, sons of Gods.

अध्याय 9

श्लोक 9.16

सा॒कं॒जानां॑ स॒प्तथ॑माहुरेक॒जं षडिद् य॒मा ऋष॑यो देव॒जा इति॑ ।तेषा॑मि॒ष्टानि॒ विहि॑तानि धाम॒श स्था॒त्रे रे॑जन्ते॒ विकृ॑तानि रूप॒शः

sākaṃjānāṃ saptathamāhurekajaṃ ṣaḍid yamā ṛṣayo devajā iti | teṣāmiṣṭāni vihitāni dhāmaśa sthātre rejante vikṛtāni rūpaśaḥ

हिन्दी अर्थ

सनेमि रथ के पिये की परिधि पर लोहे का चक्कर जिसे नेमि कहते ह, चढ़ा दिया जाता है जो कि -पहिये कीरक्षा करता है, उसे टूटने से बचाता है । सूयूपी पिये की रक्षा करता है बरह्म । इसलिये ब्रह्म को कृविये पुत्रः सं हमा चिकेत यस्ता विजानात स पिरुष्पिताऽस॑द् ॥१५ मु कहते हैँ (पुसः) कि ये पुमान है, (भक्षण्वान् ) भरांलों वाला (पद्यत)

English

Their good gifts sought of men are ranged in order due, and, various, form by form, move for 149 their guiding Lord.

अध्याय 9

श्लोक 9.17

अ॒वः परे॑ण प॒र ए॒नाव॑रेण प॒दा व॒त्सं बिभ्र॑ती॒ गौरुद॑स्थात्।सा क॒द्रीची॒ कं स्वि॒दर्धं॒ परा॑गा॒त् क्वऽस्वित्सूते न॒हि यू॒थे अ॒स्मिन्

avaḥ pareṇa para enāvareṇa padā vatsaṃ bibhratī gaurudasthāt| sā kadrīcī kaṃ svidardhaṃ parāgāt kva'svitsūte nahi yūthe asmin

हिन्दी अर्थ

नहीं कर सकता । (यः कविः) जो कविता की दृष्टि वाला (पत्रः) परमे- प्रकार से जानता है। (यः) जो (ताः) उन्दः (विजानत्) विशेषतया जाने (सः) वह (पितुष्पिता) पिता के पिता के सदश्च पूजनीय ( म्रसत्) मन्व १३ में मिथुनासः पुत्राः” का कथन हुभ्रा है । इस द्वारा ३६०

English

Beneath the upper realm, above this lower, bearing her Calf at foot, the Cow hath risen. Whitherward, to what place hath she departed? Where doth she calve? Not in this herd of

अध्याय 9

श्लोक 9.18

अ॒वः परे॑ण पि॒तरं॒ यो अ॑स्य॒ वेदा॒वः परे॑ण प॒र ए॒ना व॑रेण ।क॒वी॒यमा॑नः॒ क इ॒ह प्र वो॑चद् दे॒वं मनः॒ कुतो॒ अधि॒ प्रजा॑तम्

avaḥ pareṇa pitaraṃ yo asya vedāvaḥ pareṇa para enā vareṇa | kavīyamānaḥ ka iha pra vocad devaṃ manaḥ kuto adhi prajātam

हिन्दी अर्थ

है' भौर. इन्हें समानाधिकार दिये हँ । मनु की भी यही सम्मति है। यथा भविकेषेण पुत्राणां दायो भवति ध्मेतः। साकंजानां स॒प्तर्थसाहुरेकज षडिद्यमा क्रषयो देवजा एति । (यमाः) नियमनकर्ता है, (ऋषयः) जो कि गति करते. है तथा (देवजा इति)

English

cattle. Who, that the father of this Calf discerneth beneath the upper realm, above the lower, Showing himself a sage, may here declare him? Whence hath the godlike spirit had its rising?

अध्याय 9

श्लोक 9.19

ये अ॒र्वाञ्च॒स्ताँ उ॒ परा॑च आहु॒र्ये परा॑ञ्च॒स्ताँ उ॑ अ॒र्वाच॑ आहुः ।इन्द्र॑श्च॒ या च॒क्रथुः॑ सोम॒ तानि॑ धु॒रा न यु॒क्ता रज॑सो वहन्ति

ye arvāñcastā~ u parāca āhurye parāñcastā~ u arvāca āhuḥ | indraśca yā cakrathuḥ soma tāni dhurā na yuktā rajaso vahanti

हिन्दी अर्थ

नुसार (विदितानि) विहितं कयि है, निरिचत किये ह, वे (रूपदाः ) निज कां° € । सु०९ भ्रथववेद-भाष्य १५१ मे स्थित जीवात्मा के लिये (रेजन्ते). गति करते है । , साथ-साथ रहते हैँ । शरीरावस्था मेँ भी साथ-साथ रहते है, . भौर जन्म-

English

Those that come hitherward they call departing, those that depart they call directed hither. Whatever ye have made, Indra and Soma! steeds draw, as’ twere, yoked to the region’s car pole.

अध्याय 9

श्लोक 9.20

द्वा सु॑प॒र्णा स॒युजा॒ सखा॑या समा॒नं वृ॒क्षं परि॑ षस्वजाते ।तयो॑र॒न्यः पिप्प॑लं स्वा॒द्वत्त्यन॑श्नन्न॒न्यो अ॒भि चा॑कशीति

dvā suparṇā sayujā sakhāyā samānaṃ vṛkṣaṃ pari ṣasvajāte | tayoranyaḥ pippalaṃ svādvattyanaśnannanyo abhi cākaśīti

हिन्दी अर्थ

भ्रवराविद्या के साथ (परः) पराविद्या को निरुपित करने वाले (पदा) हई (गौः) वेदवाणी रूप वेद माता (उदस्थात् ) सदा उत्थान किये हए है । (सा) वह वेदवाणी रूप-माता (कद्रीची ) कहां से भी भ्राती हुई, (कस्वित्) किसी ही (भेम्) ऋद्धिशील को (परा गात्) उसके दुर रहते हृए भी करती है, (भ्रस्मिन् यूथे) परन्तु इस मानुष-समुदाय में (नहि) वह होता है, लेटे था बेठे वह् दूष नहीं पिला सकती । वेदमाता भी निज ज्ान- दुग .पिलाने के लिये सदा उत्थान कयि हृए है, सदा उद्यत है । मन्त्र की

English

The tree whereon the fine Birds eat the sweetness, where they all rest and procreate their offspring

अध्याय 9

श्लोक 9.21

यस्मि॑न् वृ॒क्षे म॒ध्वदः॑ सुप॒र्णा नि॑वि॒शन्ते॒ सुव॑ते॒ चाधि॒ विश्वे॑ ।तस्य॒ यदा॒हुः पिप्प॑लं स्वा॒द्वग्रे॒ तन्नोन्न॑श॒द् यः पि॒तरं॒ न वेद॑

yasmin vṛkṣe madhvadaḥ suparṇā niviśante suvate cādhi viśve | tasya yadāhuḥ pippalaṃ svādvagre tannonnaśad yaḥ pitaraṃ na veda

हिन्दी अर्थ

तथा जीवात्मा के उपकरणों का वणेन हृभ्रा है । ॑ १५२ श्रयववेवेद-माष्य कां € 1 सू० € अव; परेण पितरं यो अस्य वेदावः परण पर एनावरेण । कवीयमानः क इह परवोचद् देवं मनः कुतो अधि भातम् ॥१८॥

English

Upon the top, they say the fruit is luscious: none gaineth it who knoweth not the Father. Where the fine birds hymn ceaselessly their portion of life eter- nal, and the sacred synods. There is the Universe’s Guard and Keeper who, wise hath entered into me the simple.

अध्याय 9

श्लोक 9.22

यत्रा॑ सुप॒र्णा अ॒मृत॑स्य भ॒क्षमनि॑मेषं वि॒दथा॑भि॒स्वर॑न्ति ।ए॒ना विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य गो॒पाः स मा॒ धीरः॒ पाक॒मत्रा वि॑वेश

yatrā suparṇā amṛtasya bhakṣamanimeṣaṃ vidathābhisvaranti | enā viśvasya bhuvanasya gopāḥ sa mā dhīraḥ pākamatrā viveśa

हिन्दी अर्थ

के लोक के साथ (श्रवः) भ्रवर के लोक से सम्बद्ध (वेद) जानता है; तथा (श्रवः) भ्रवरके लोकको (परेण) परके लोकके साथ, श्रौरः (एना भ्रवरेण) इस श्रवर लोक के साथ (परः) परकेभोक कोभी परस्पर सम्बद्ध जानता है, एेसा (कः) कौन (कवीयमानः) श्रपने श्राप को वेद परे के लोक (ग्राहः) कहते ह, ये) प्रौर जो (पराञ्चः) परे के लोक है का (चक्रथुः) निर्माण करते हो, (तानि) वे (घुरा न युक्ताः) धुरि जुते हृए (रजसः) रञ्जक पृथिवी लोक के कायो का (वहन्ति) वहन करते है, सम्पादन करते हैँ । देते है, वे सापेक्ष दृष्टि से है, वस्तुतः न कोई नीचे है, न ऊपर । पृथिवी के यासियों को पृथिवी नीचे भ्रौर सूर्य, नक्षत्र, तारा ऊचे दिखाई देते है।

English

Continuation of Hymn 9 How on the Gāyatri the Gāyatri was based; how from the

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।