Atharva Veda
9
अध्याय 9 / 20

Kanda 9

काण्ड 9

313 श्लोकभाग 2/5 · श्लोक 4.1–5.38

पूर्ण अध्याय पाठ62 श्लोक

अध्याय 9

श्लोक 4.1

ऋषभः १-२४ ब्रह्मा।ऋषभः।त्रिष्टुप्, ८ भुरिक्, ६, १०, २४ जगती, ११-१७, १९-२०, २३ अनुष्टुप्, १८ उपरिष्टाद्बृहती, २१ आस्तारपङ्क्तिः।सा॒ह॒स्रस्त्वे॒ष ऋ॑ष॒भः पय॑स्वा॒न् विश्वा॑ रू॒पाणि॑ व॒क्षणा॑सु॒ बिभ्र॑त्।भ॒द्रं दा॒त्रे यज॑मानाय॒ शीक्ष॑न् बार्हस्प॒त्य उ॒स्रिय॒स्तन्तु॒माता॑न्

ṛṣabhaḥ 1-24 brahmā| ṛṣabhaḥ| triṣṭup, 8 bhurik, 6, 10, 24 jagatī, 11-17, 19-20, 23 anuṣṭup, 18 upariṣṭādbṛhatī, 21 āstārapaṅktiḥ| sāhasrastveṣa ṛṣabhaḥ payasvān viśvā rūpāṇi vakṣaṇāsu bibhrat| bhadraṃ dātre yajamānāya śīkṣan bārhaspatya usriyastantumātān

हिन्दी अर्थ

कार सू० भ्. र प्रथववेद-भाष्य र ६७ मरणं से रहित जानकर मोक्ष पाने का भ्रभिलाषी है । “महान्ति तमांसि का भ्रभिप्राय है लम्बे-लम्बे. कालो. तकं ननाविध तामसिक जीवन को तैर कर मानुष शरीर को पाना । तृतीय नाक के सम्बन्ध मे देखो, मन्त्र (ये) जो काम, क्रोध, लोभ. श्रादि (नः) हमारे साथ. (द्विषन्ति) दष

English

And all that measures out the air’s mid-region I make a hollow to contain thy treasures. Therewith I take the house for his possession.

अध्याय 9

श्लोक 4.2

अ॒पां यो अग्ने॑ प्रति॒मा ब॒भूव॑ प्र॒भूः सर्व॑स्मै पृथि॒वीव॑ दे॒वी।पि॒ता व॒त्सानां॒ पति॑र॒घ्न्यानां॑ साह॒स्रे पोषे॒ अपि॑ नः कृणोतु

apāṃ yo agne pratimā babhūva prabhūḥ sarvasmai pṛthivīva devī| pitā vatsānāṃ patiraghnyānāṃ sāhasre poṣe api naḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

है, (जीवता) जीवित व्यक्ति द्वारा . जीवित काल में ) (रजम्) निज तक (तमांसि) -्ज्ञानान्धकारों को (रव) हटाकर, (हन्ति). उन का हनन कारो.को दूरदूरं तके हटा देता है । परन्तु एसी शक्ति उसी' जीवात्मा को

English

Now from the east side of the house to the Great Power be homage paid! Hail to the Gods whose due is Hail!

अध्याय 9

श्लोक 4.3

पुमा॑न॒न्तर्वा॒न्त्स्थवि॑रः॒ पय॑स्वा॒न् वसोः॒ कब॑न्धमृष॒भो बि॑भर्ति ।तमिन्द्रा॑य प॒थिभि॑र्देव॒यानै॑र्हु॒तम॒ग्निर्व॑हतु जा॒तवे॑दाः

pumānantarvāntsthaviraḥ payasvān vasoḥ kabandhamṛṣabho bibharti | tamindrāya pathibhirdevayānairhutamagnirvahatu jātavedāḥ

हिन्दी अर्थ

जीवित है, उसने श्रभी तकः मोक्षारोहण नहीं किया । केवल शुभमावना ¦ देता है । (योगाचार्य के लिये. देखो - मन्त्र १, २) "1 चत्तः-= चते याचने पञ्चौदनो बह्मणं दीयमानो विश्वरूपा धेनुः कामदधाऽस्येकां ॥ १०॥ ,

English

giver. He who at first became the Waters’ model, a match for everyone, like Earth the Goddess;

अध्याय 9

श्लोक 4.4

पि॒ता व॒त्सानां॒ पति॑र॒घ्न्याना॒मथो॑ पि॒ता म॑ह॒तां गर्ग॑राणाम्।व॒त्सो ज॒रायु॑ प्रति॒धुक् पी॒यूष॑ आ॒मिक्षा॑ घृ॒तं तद् व॑स्य॒ रेतः॑

pitā vatsānāṃ patiraghnyānāmatho pitā mahatāṃ gargarāṇām| vatso jarāyu pratidhuk pīyūṣa āmikṣā ghṛtaṃ tad vasya retaḥ

हिन्दी अर्थ

हे मुमुक्षुः (पंच्चौदनः). पांच इन्द्रियं-भोगों वाला जोतु था, वहतू १४ . कियो जानि वालाहो जाताहै, तब तु (एका) एक (कामदा ग्रस): ५ यथेच्छ-दुही-जाने-वाली गौ के सदृश हौ जाता है, जो कामदुघा कि (विदव- होता है, श्रौर जिसकी तीन.पीठे है, एेततेनाक की. किसी एक प्ष्ठपर

English

The husband of the cows, the young calves’ father, may be secure us thousandfold abundance.

अध्याय 9

श्लोक 4.5

दे॒वानां॑ भा॒ग उ॑पना॒ह ए॒षो॒३पां रस॒ ओष॑धीनां घृ॒तस्य॑ ।सोम॑स्य भ॒क्षम॑वृणीत श॒क्रो बृ॒हन्नद्रि॑रभव॒द् यच्छरी॑रम्

devānāṃ bhāga upanāha eṣo3pāṃ rasa oṣadhīnāṃ ghṛtasya | somasya bhakṣamavṛṇīta śakro bṛhannadrirabhavad yaccharīram

हिन्दी अर्थ

सर.होतताहै। तवब.वह कामदुषा गौ के सदृशा . हम्रा-हमना, मानुषः जगत् की ॥ २ छ कामनाप्रों को सफल कर के, मानुष-जगत् को एकः. नया.रूप दे देता है, निज सदुपदेशों दवारा. -उनके.. जीवनो मे परिवतैनः वैदा कर उन के जीवनोको ह , सुधार देता है, जेसेकिं गौ निज दुग्ध द्वारां दुग्धसेवियों :को रूपवान् कर इ ५.१ 8 स्थापितं कर वेता ४. ; ; ¦ योगी तीन प्रकार केःहोते है, विदेह, प्रकृतिलीन, समाधिसिद्ध (योग० „ . १।१६.२०) । तीन प्रकारके योगियों में .से प्रत्येक योगी, निजकर्मानुसार,

English

Masculine, prégnant, stedfast. full of vigour, the Bull sustains a trunk of goodly treasure. May Agni Jātavedas bear him offered, on pathways traversed by the Gods, to Indra.

अध्याय 9

श्लोक 4.6

सोमे॑न पू॒र्णं क॒लशं॑ बिभर्षि॒ त्वष्टा॑ रु॒पाणां॑ जनि॒ता प॑शू॒नाम्।शि॒वास्ते॑ सन्तु प्रज॒न्वऽ इ॒ह या इ॒मा न्य॑स्मभ्यं॑ स्वधिते यच्छ॒ या अ॒मूः

somena pūrṇaṃ kalaśaṃ bibharṣi tvaṣṭā rupāṇāṃ janitā paśūnām| śivāste santu prajanva' iha yā imā nyasmabhyaṃ svadhite yaccha yā amūḥ

हिन्दी अर्थ

¦ ¦ ¦ " भुवनज्ञानं सुयं संयमात्" (योग०.२।२९) इस के माष्य मे व्यासमुनि ,, : ने एक प्राचीन इलोक उद्धत किया हैव यथाः-- ॑ ३.१ ; में ्राथिक श्रौर.भाव सम्बन्धी समता प्रतीत होती है शलोक मे ७ भुवनो . रजुं? ३९१६) । मन्तरं मे: “साध्य देवो की स्थिति “नाक! मे दशाहे ।

English

The husband of the cows, the young calves’ father, father is he of mighty water-eddies. Calf, after-birth, new milk drawn hot, and biestings, curds, butter, that is his best genial

अध्याय 9

श्लोक 4.7

आज्यं बिभर्ति घृ॒तम॑स्य॒ रेतः॑ साह॒स्रः पोष॒स्तमु॑ य॒ज्ञमा॑हुः ।इन्द्र॑स्य रू॒पमृ॑ष॒भो वसा॑नः॒ सो अ॒स्मान् दे॑वाः शि॒व ऐतु॑ द॒त्तः

ājyaṃ bibharti ghṛtamasya retaḥ sāhasraḥ poṣastamu yajñamāhuḥ | indrasya rūpamṛṣabho vasānaḥ so asmān devāḥ śiva aitu dattaḥ

हिन्दी अर्थ

, रजसो विमानः, कर्मे देवाय हविषा विषेम्” (यजु१, ३२।६) मे . (१) यौः, (पितरः) है पितरो 1 (एतत्) यह (वः) तुम्हारे लिये ( तीयमं । र, लोके ) इस पृथिवी लोकःमें (तमांसि) प्रज्ञानान्धकायो को ( दूरम् ) दूर-दूर 111

English

humour. He is the Gods’ allotted share and bundle, essence of waters, and of plants, and butter.

अध्याय 9

श्लोक 4.8

इन्द्र॒स्यौजो॒ वरु॑णस्य बा॒हू अ॒श्विनो॒रंसौ॑ म॒रुता॑मि॒यं क॒कुत्।बृह॒स्पतिं॒ संभृ॑तमे॒तमा॑हु॒र्ये धीरा॑सः क॒वयो॒ ये म॑नी॒षिणः॑

indrasyaujo varuṇasya bāhū aśvinoraṃsau marutāmiyaṃ kakut| bṛhaspatiṃ saṃbhṛtametamāhurye dhīrāsaḥ kavayo ye manīṣiṇaḥ

हिन्दी अर्थ

स्थियों के लिथे एक ज्योति ..है । ्ाचायै, वि्ञुरोहित । दूसरी ज्योतिःहै निवासो के श्रजञानान्धकारों कौ विनष्ट केर देता है समपित करना। जिस .लोक को मुमुक्षु चाहता है वह परिमाणे प्रथिवी .

English

Sakra elected him, the draught of Soma. What was his body was a lofty mountain. A beaker filled with Soma juice thou bearest. framer of forms, begetter of the cattle.

अध्याय 9

श्लोक 4.9

दैवी॒र्विशः॒ पय॑स्वा॒ना त॑नोषि॒ त्वामिन्द्रं॒ त्वां सर॑स्वन्तमाहुः ।स॒हस्रं॒ स एक॑मुखा ददाति॒ यो ब्रा॑ह्म॒ण ऋ॑ष॒भमा॑जु॒होति॑

daivīrviśaḥ payasvānā tanoṣi tvāmindraṃ tvāṃ sarasvantamāhuḥ | sahasraṃ sa ekamukhā dadāti yo brāhmaṇa ṛṣabhamājuhoti

हिन्दी अर्थ

कहा है । :यहुःतरिनाक ब्राह्मी चति द्वारा. योतमानः होता है। = ४। कल्याणमार्गी है, वह॒ जब शिवकूप हो जाता है तो प्रजाजन श्रादर पूवक. परमेश्वर की (सहसः) विति से (विप्रः) मेधावी तथा (विपरचत् ) ज्ञानी

English

Kindly to us be these thy wombs here present, and stay for us, O Axe, those that are yonder.

अध्याय 9

श्लोक 4.10

बृह॒स्पतिः॑ सवि॒ता ते॒ वयो॑ दधौ॒ त्वष्टु॑र्वा॒योः पर्या॒त्मा त॒ आभृ॑तः ।अ॒न्तरि॑क्षे॒ मन॑सा त्वा जुहोमि ब॒र्हिष्टे॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे स्ता॑म्

bṛhaspatiḥ savitā te vayo dadhau tvaṣṭurvāyoḥ paryātmā ta ābhṛtaḥ | antarikṣe manasā tvā juhomi barhiṣṭe dyāvāpṛthivī ubhe stām

हिन्दी अर्थ

मानस्य) संसार-गरज्ञ के रचयिता के (वीराः) वीर पृत्र (भ्रनागसः) पापोंसे (व्यक्ति जब तक सांसारिक भोगों मे लिप्तं रहता है तब तक वह् परमेश्वरः के लिये निजभागरूप नहीं होता । परन्तु वहु मूमृक्षु होकर जब ध्यानयज्ञ मे परमेदवर का स्तोता बन जाता है तब उसे परमेश्वर निजभाग- रूपमे स्वीकार करलेताहै। काम क्रोध लोभ ्रादि त्रिय तो लगते परन्तु परिणाममेयेदहैँदषी । सूमृक्षु को चाहिए किः वह इनकी पक्डमे न रहे । ताकि परमेश्वर के पृ, वीर बने, श्रौर वीर बनकर इन शुभ्रो पर विजय पा कर, पापों से रहित हो जाय । सूरिम् = सूरिः स्तोतृनाम (निषं०

English

Rich in prosperity, rich in milk, founded and built upon the earth, Injure not thy receivers, House who holdest food of every sort!’

अध्याय 9

श्लोक 4.11

य इन्द्र॑ इव दे॒वेषु॒ गोष्वेति॑ वि॒वाव॑दत्।तस्य॑ ऋष॒भस्याङ्गा॑नि ब्र॒ह्मा सं स्तौ॑तु भ॒द्रया॑

ya indra iva deveṣu goṣveti vivāvadat| tasya ṛṣabhasyāṅgāni brahmā saṃ stautu bhadrayā

हिन्दी अर्थ

६ ¦ ... : -श्रथवेवेद-भाष्य कां०९। सू० ५ उसे तथा उस सदृश दुराचार को तु शुद्ध करदे, ताकि (प्रजानन्) ज्ञान भ्र्थात् बकरा (शुद्धैः) रोगों से. रहित (शफैः) निज पो हारा अ्रगेपग

English

Grass-covered, clad with straw, the house, like Night, gives rest to man and beast. Thou standest, built upon the earth, like a she-elephant, borne on feet.

अध्याय 9

श्लोक 4.12

पा॒र्श्वे आ॑स्ता॒मनु॑मत्या॒ भग॑स्यास्तामनू॒वृजौ॑ ।अ॒ष्ठी॒वन्ता॑वब्रवीन्मि॒त्रो ममै॒तौ केव॑ला॒विति॑

pārśve āstāmanumatyā bhagasyāstāmanūvṛjau | aṣṭhīvantāvabravīnmitro mamaitau kevalāviti

हिन्दी अर्थ

मय जीवनो को तैर कर, (तृतीयं नाकम्) तीसरे सुखमय लोक की . प्रर मे शेफः" पद द्वारा बकरेकेख॒रोका निदश्च कर बकरे को उपमान रूप प्रमिप्रायहैकि दुराचार करने के लिये जिस पादको उसने प्रथम उठाया

English

I loosen and remove from thee thy covering formed by mats of reed. What Varuna hath firmly closed Mitra shall ope at early morn.

अध्याय 9

श्लोक 4.13

भ॒सदा॑सीदादि॒त्यानां॒ श्रोणी॑ आस्तां॒ बृह॒स्पतेः॑ ।पुच्छं॒ वात॑स्य दे॒वस्य॒ तेन॑ धूनो॒त्योष॑धीः

bhasadāsīdādityānāṃ śroṇī āstāṃ bṛhaspateḥ | pucchaṃ vātasya devasya tena dhūnotyoṣadhīḥ

हिन्दी अर्थ

है, मानो वह दुराचार उसं पाद द्वारा किया गया है मामि हः परशः कर्पयैनं तृतीये नाके अधि विश्रयेनम् ॥४॥ उपदेश द्वारा, (ग्रसिना) तथा ज्ञानासि द्वारा, (यथापर) : पर-पर करके

English

May Indra, Agni, deathless Gods, protect the house where Soma dwells,

अध्याय 9

श्लोक 4.14

गुदा॑ आसन्त्सिनीवा॒ल्याः सू॒र्याया॒स्त्वच॑मब्रुवन्।उ॒त्था॒तुर॑ब्रुवन् प॒द ऋ॑ष॒भं यदक॑ल्पयन्

gudā āsantsinīvālyāḥ sūryāyāstvacamabruvan| utthāturabruvan pada ṛṣabhaṃ yadakalpayan

हिन्दी अर्थ

(माभिमंस्थाः) इस सम्बन्ध मे तु श्रभिमान न कर,्रथवा इसकी हिसा. न कर इस मृमृक्षु को. पर-पर मे सामथ्यवान् कर, तथा एनम् )- इसको (तृतीये नाके श्रधि) सुखमयं तीसरे नाक पर (विश्रय) विश्चाम करने योग्य 7721560, 04७ (राष्ट). 4 ्रनुच्छय =ग्रनुक्ल होकर काट (छो . छेदने

English

House that was founded with the prayer, built and erected by the wise. Nest upon nest hath been imposed, compartment on compart- ment laid:

अध्याय 9

श्लोक 4.15

क्रो॒ड आ॑सीज्जामिशं॒सस्य॒ सोम॑स्य क॒लशो॑ धृ॒तः ।दे॒वाः सं॒गत्य॒ यत् सर्व॑ ऋष॒भं व्यक॑ल्पयन्

kroḍa āsījjāmiśaṃsasya somasya kalaśo dhṛtaḥ | devāḥ saṃgatya yat sarva ṛṣabhaṃ vyakalpayan

हिन्दी अर्थ

संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत. ।॥ (गीता ५।४२) में ज्ञानासि का वणेन ३) प्रविष्ट हुए-हुए है उन्हं ज्ञानासि हारा काटकर अलम.कर देना, .ताकिः साथः" (महीधर, यंजुऽ १३।४१) । इसी भावनां को प्रकट करने के लिये

English

There man shall propagate his kind, and there shall everything born. Within the house constructed with two side-posts, or with four, or six.

अध्याय 9

श्लोक 4.16

ते कुष्ठि॑काः स॒रमा॑यै कू॒र्मेभ्यो॑ अदधुः श॒फान्।ऊब॑ध्यमस्य की॒टेभ्यः॑ श्वव॒र्तेभ्यो॑ अधारयन्

te kuṣṭhikāḥ saramāyai kūrmebhyo adadhuḥ śaphān| ūbadhyamasya kīṭebhyaḥ śvavartebhyo adhārayan

हिन्दी अर्थ

मिभधित नीली तलवार! हारा इसके परुप्रों ब्र्थात् जोडोंको काटदे। विरुद्ध. प्रतीत होता है न छ य् । लेतां है इसलिये अ्राचायं को “मृत्यु” कहा है; रौर “वरूण, सोम, मरोषधः, तथा प्रय (दुध) भी कहा है (ग्रथवं० ११।५।१४॥) ।

English

Built with eight side-posts, or with ten, lies Agni like a babe unborn. Turned to thee, House! I come to thee, innocent, turned to welcome me:

अध्याय 9

श्लोक 4.17

शृङ्गा॑भ्यां॒ रक्ष॑ ऋष॒त्यव॑र्तिं हन्ति॒ चक्षु॑षा ।शृ॒णोति॑ भ॒द्रं कर्णा॑भ्यां॒ गवां॒ यः पति॑र॒घ्न्यः

śṛṅgābhyāṃ rakṣa ṛṣatyavartiṃ hanti cakṣuṣā | śṛṇoti bhadraṃ karṇābhyāṃ gavāṃ yaḥ patiraghnyaḥ

हिन्दी अर्थ

(ऋचा) वेदवाणी के ग्रनुसार (कुम्भीम्). तेरी शरीररूपी कुम्भी को उदक करो तु सींचता रह्, (एनम्) भ्रौर इसे (श्रवधेहि) सावधान करता (शृतः). परिपक्व. होकर यह्. (गच्छतु) - जाए (यत्र) जहां.कि (सुकृतां लोकः सुकमियों कालोकःहै। .

English

For Fire and Water are within, the first chief door of sacrifice. Water that kills Consumption, free from all Consumption, here

अध्याय 9

श्लोक 4.18

श॒त॒याजं॒ स य॑जते॒ नैनं॑ दुन्वन्त्य॒ग्नयः॑ ।जिन्व॑न्ति॒ विश्वे॒ तं दे॒वा यो ब्रा॑ह्म॒ण ऋ॑ष॒भमा॑जु॒होति॑

śatayājaṃ sa yajate nainaṃ dunvantyagnayaḥ | jinvanti viśve taṃ devā yo brāhmaṇa ṛṣabhamājuhoti

हिन्दी अर्थ

म॒मुक्ष की देख-भाल के लिये निदंश देता है, (१) कि इसे श्राश्वासनरूपी उदकं द्वारा सीचते रहो, (२) इसे सावधान. भी करते रहो ताकि यहः दवारा तप्त हुए (चरोः श्रधि) चरु से (तृतीये नाकम्) सुखमय तीसरे लोक

English

I bring. With Agni, the immortal one, I enter and possess the house.

अध्याय 9

श्लोक 4.19

ब्रा॒ह्म॒णेभ्य॑ ऋष॒भं द॒त्त्वा वरी॑यः कृणुते॒ मनः॑ ।पुष्टिं॒ सो अ॒घ्न्यानां॒ स्वे गो॒ष्ठेऽव॑ पश्यते

brāhmaṇebhya ṛṣabhaṃ dattvā varīyaḥ kṛṇute manaḥ | puṣṭiṃ so aghnyānāṃ sve goṣṭhe'va paśyate

हिन्दी अर्थ

ग्रभ्निसदृश पाप मलको जला देने वाला (संःवभूविथ) तरुहृ्राहै।तु करं०.६। सू०.५ .अधवेवेद-भाष्य ७१ चर = चलने फिरने वाला .- शरीर । इसे (मन्वे ५) में कुम्भी कहा है.। (नाकं तृतीयम्, देखो मन्त्र १०) ।

English

Lay thou no cord or noose on us: a weighty burthen, still be light! Withersoever be our will, O House, we bear thee like a bride.

अध्याय 9

श्लोक 4.20

गावः॑ सन्तु प्र॒जाः स॒न्त्वथो॑ अस्तु तनूब॒लम्।तत् सर्व॒मनु॑ मन्यन्तां दे॒वा ऋ॑षभदा॒यिने॑

gāvaḥ santu prajāḥ santvatho astu tanūbalam| tat sarvamanu manyantāṃ devā ṛṣabhadāyine

हिन्दी अर्थ

इजानानां सचतां परेहि मध्यं ततीये नाके अधिः वि श्रयस्व ।॥८॥ भोगो पर विजयरूपी यज्ञ किये हँ उन सुकमियो के (मध्ये) मध्यमे (प्रेहि) जा । तदन्तर (तृतीये. नाके) सुखमय तीसरे नाक मे (ग्रधि) प्रधिकार ह

English

Now from the south side of the house, etc. Now from the west side of the house, etc.

अध्याय 9

श्लोक 4.21

अ॒यं पिपा॑न॒ इन्द्र॒ इद् र॒यिं द॑धातु चेत॒नीम्।अ॒यं धे॒नुं सु॒दुघां॒ नित्य॑वत्सां॒ वशं॑ दुहां विप॒श्चितं॑ प॒रो दि॒वः

ayaṃ pipāna indra id rayiṃ dadhātu cetanīm| ayaṃ dhenuṃ sudughāṃ nityavatsāṃ vaśaṃ duhāṃ vipaścitaṃ paro divaḥ

हिन्दी अर्थ

व्यविति की परिस्थित्तिको दशनिके लिये उसे पञ्चौदन कहाहै, ‹ कारी बन जाता है । पाच एेन्द्रियिक भोगों परं विजय. पाकर वह्,. (१) सुकर्मिथों की संमाजं' मे जाने-म्रानेः योग्य बनता है, रौरं (२) प्रधिक. ५6

English

Now from the north side of the house, etc. So from the mansion’s every side to the Great Power be homage paid!

अध्याय 9

श्लोक 4.22

पि॒शङ्ग॑रूपो नभ॒सो व॑यो॒धा ऐ॒न्द्रः शुष्मो॑ वि॒श्वरू॑पो न॒ आग॑न्।आयु॑र॒स्मभ्यं॒ दध॑त् प्र॒जां च॑ रा॒यश्च॒ पोषै॑र॒भि नः॑ सचताम्

piśaṅgarūpo nabhaso vayodhā aindraḥ śuṣmo viśvarūpo na āgan| āyurasmabhyaṃ dadhat prajāṃ ca rāyaśca poṣairabhi naḥ sacatām

हिन्दी अर्थ

वहं सुखमय तीसंरे नाक में चिरकरलिं तक विश्ामपातादहै। “ तीन ज्योतियां ह तीन ज्ञान ज्योति, जोकि योगी को विभूतिरूपमे करने की शक्ति का हो.जाना (योग .३।३.१).। (२) मरातिभ-ज्ञान (योग ३।३३) जिसे कि पाप्ाा०१९1 1031८" कहते है । (३) विवेकज-ज्ञान

English

Hail to the Gods whose due is Hail! A glorification of the typical sacrificial bull

अध्याय 9

श्लोक 4.23

उपे॒होप॑पर्चना॒स्मिन् गो॒ष्ठ उप॑ पृञ्च नः ।उप॑ ऋष॒भस्य॒ यद् रेत॒ उपे॑न्द्र॒ तव॑ वी॒र्यऽम्

upehopaparcanāsmin goṣṭha upa pṛñca naḥ | upa ṛṣabhasya yad reta upendra tava vīrya'm

हिन्दी अर्थ

सबको एक क्षणःमे जानं सकना,--सम्भवः हो जातां है (योगं ३।५४) कि (सकेता लोकः) सुकेमियो का लोक है, (चत्तः) प्राधित हृए (शरभः). गनौर: शान्ति धारणं किये हृए के (न) सदुश, (दुर्गाणि - ग्रति) दुगेम मगो काऽ 64 सुग - शरथवैवेदनभष्य ७३

English

The Bull, fierce, thousandfold, filled full of vigour, bearing within his flanks all forms and

अध्याय 9

श्लोक 4.24

ए॒तं वो॒ युवा॑नं॒ प्रति॑ दध्मो॒ अत्र॒ तेन॒ क्रीड॑न्तीश्चरत॒ वशाँ॒ अनु॑ ।मा नो॑ हासिष्ट ज॒नुषा॑ सुभागा रा॒यश्च॒ पोषै॑र॒भि नः॑ सचध्वम्

etaṃ vo yuvānaṃ prati dadhmo atra tena krīḍantīścarata vaśā~ anu | mā no hāsiṣṭa januṣā subhāgā rāyaśca poṣairabhi naḥ sacadhvam

हिन्दी अर्थ

कोलोध कर भौ (एषः) हमारे पास श्राया कर। (पञ्चौदनः). पाच ५ मानः) समपंण के योग्य हो जाता है, तो वह (दातारम्) दाता श्राचायेःको . पर, जसे वह कठिन मार्गो को लांघ करभीहमारे पासश्रातारहै,वैसेहे..

English

natures, Brihaspati’s Steer, hath stretched the thread, bestowing bliss on the worshipper, the liberal

अध्याय 9

श्लोक 5.1

पञ्चौदनो अजः।१-३८ भृगुः।पञ्चौदनोऽजः, मन्त्रोक्ताः।त्रिष्टुप्, ३ चतुष्पदा पुरोतिशक्वरी जगती, ४, १० जगती, १४, १७, २७-३० अनुष्टुप् ( ३० ककुम्मती), १६ त्रिपदानुष्टुप्, १८, ३७ त्रिपदा विराड् गायत्री, २३ पुर उष्णिक्, २४ पञ्चपदानुष्टुबुष्णिग्गर्भोपरिष्टाद्विराड् जगती, २०-२२, २६ पञ्चपदानुष्टुबुष्णिग्गर्भोपरिष्टाद्बार्हता भुरिक्, ३१ सप्तपदाष्टिः, ३२-३५ दशपदा प्रकृतिः, ३६ दशपदाऽऽकृतिः, ३८ एकावसाना द्विपदा साम्नी त्रिष्टुप्।आ न॑यै॒तमा र॑भस्व सु॒कृतां॑ लो॒कमपि॑ गच्छतु प्रजा॒नन्।ती॒र्त्वा तमां॑सि बहु॒धा म॒हान्त्य॒जो नाक॒मा क्र॑मतां तृ॒तीय॑म्

pañcaudano ajaḥ| 1-38 bhṛguḥ| pañcaudano'jaḥ, mantroktāḥ| triṣṭup, 3 catuṣpadā purotiśakvarī jagatī, 4, 10 jagatī, 14, 17, 27-30 anuṣṭup ( 30 kakummatī), 16 tripadānuṣṭup, 18, 37 tripadā virāḍ gāyatrī, 23 pura uṣṇik, 24 pañcapadānuṣṭubuṣṇiggarbhopariṣṭādvirāḍ jagatī, 20-22, 26 pañcapadānuṣṭubuṣṇiggarbhopariṣṭādbārhatā bhurik, 31 saptapadāṣṭiḥ, 32-35 daśapadā prakṛtiḥ, 36 daśapadā''kṛtiḥ, 38 ekāvasānā dvipadā sāmnī triṣṭup| ā nayaitamā rabhasva sukṛtāṃ lokamapi gacchatu prajānan| tīrtvā tamāṃsi bahudhā mahāntyajo nākamā kramatāṃ tṛtīyam

हिन्दी अर्थ

वणेन “बकरा” श्रथं मे सम्भव नहीं करताहै, (ये दिव्याः) जो दिव्यहैँ (ये च) श्रौर जो (पाथिवाः) पाथिव (्रज) है जन्म सरणसे रहित परमेश्वर ! (सोम्याः) सोम का,

English

He bears oblation, and his seed is butter. Thousand-fold plenty; sacrifice they call him. May he, the Bull, wearing the shape of Indra, come unto us, O

अध्याय 9

श्लोक 5.2

इन्द्रा॑य भा॒गं परि॑ त्वा नयाम्य॒स्मिन् य॒ज्ञे यज॑मानाय सू॒रिम्।ये नो॑ द्वि॒षन्त्यनु तान् र॑भ॒स्वाना॑गसो॒ यज॑मानस्य वी॒राः

indrāya bhāgaṃ pari tvā nayāmyasmin yajñe yajamānāya sūrim| ye no dviṣantyanu tān rabhasvānāgaso yajamānasya vīrāḥ

हिन्दी अर्थ

परमेदवर का - दर्दन- करा. देता है । इससे शिष्य भी श्रपरिमित यज (प्रवेशयेत्) परमेदवर में प्रविष्टकरादे। . न कराए जिससे शिष्य. के भंगं मंग की भ्राशंका हो, ईसकी' हदिव्यो में विकृति पदा हो जाय श्रौर = रीढ् की हडिडयोंः का मञ्जा सूख . जाय,

English

They gave the hooves to tortoises, to Saramā scraps of the feet: His undigested food they gave to worms and things that creep and crawl.

अध्याय 9

श्लोक 5.3

प्र प॒दोऽव॑ नेनिग्धि॒ दुश्च॑रितं॒ यच्च॒चार॑ शु॒द्धैः श॒फैरा क्र॑मतां प्रजा॒नन्।ती॒र्त्वा तमां॑सि बहु॒धा वि॒पश्य॑न्न॒जो नाक॒मा क्र॑मतां तृ॒तीय॑म्

pra pado'va nenigdhi duścaritaṃ yaccacāra śuddhaiḥ śaphairā kramatāṃ prajānan| tīrtvā tamāṃsi bahudhā vipaśyannajo nākamā kramatāṃ tṛtīyam

हिन्दी अर्थ

कोः ५००५५५६ (वेद )- जानता है (एष वे नैदाघः). यह हैः वस्तुतः ६९ : + श्रथववेद-माष्य कां०.९६सु०.४ सेदाषः (नाम ऋतुः). नाम वाली ऋतुः (यद् ्रजः पञ्चौदनः) . निदाघ है ग्रीष्मकाल, जोकि नितरां दग्ध कर देता है, जिसमे वि

English

Crossing in many a place the mighty darkness, let the Goat mount to the third heaven above us.

अध्याय 9

श्लोक 5.4

अनु॑च्छ्य श्या॒मेन॒ त्वच॑मे॒तां वि॑शस्तर्यथाप॒र्व॑१सिना॒ माभि मं॑स्थाः ।माभि द्रु॑हः परु॒शः क॑ल्पयैनं तृ॒तीये॒ नाके॒ अधि॒ वि श्र॑यैनम्

anucchya śyāmena tvacametāṃ viśastaryathāparva1sinā mābhi maṃsthāḥ | mābhi druhaḥ paruśaḥ kalpayainaṃ tṛtīye nāke adhi vi śrayainam

हिन्दी अर्थ

है, (मात्मना मवति) भौर स्वयं उस पर .-असुता पा लेता है (यः) जोकि गृहस्यी के भ्रति. (ददाति) भदान करताहैः। .. . उदित होती हई ऋतु को पञ्चौदंन भज” कहा है । “उचन्तम्” ऋतु ििर है जोकि हेमन्तं ऋतु के परचात् भाती है । “शिशिर प्रद शुहिसा- ९० श्रथर्वैवेद-माष्य कां० ९1 सु०

English

heaven. Rise to that world, O Goat, where dwell the righteous: pass, like a Sarabha veiled, all difficult

अध्याय 9

श्लोक 5.5

ऋ॒चा कु॒म्भीमध्य॒ग्नौ श्र॑या॒म्या सि॑ञ्चोद॒कमव॑ धेह्येनम्।प॒र्याध॑त्ता॒ग्निना॑ शमितारः शृ॒तो ग॑च्छतु सु॒कृतां॒ यत्र॑ लो॒कः

ṛcā kumbhīmadhyagnau śrayāmyā siñcodakamava dhehyenam| paryādhattāgninā śamitāraḥ śṛto gacchatu sukṛtāṃ yatra lokaḥ

हिन्दी अर्थ

हयो जाति, ड़ जते इस लिये इस ऋतु को पतभड भी कहते है, ते- । शििर ऋतु को “पञ्चौदनं रजः कहा न म जब उदित हो रहा होता है तब जीवनं मर तामस, राजस रूपी पत्ते फढने भ्रारम्भ. हो जाते हैँ । शेष अजमिप्राय पूव- वि मुभ (वेद) जानता है वह (भ्रप्रियस्यं)

English

places. The Goat Panchaudana, given to a Brāhman, shall with all ful- ness satisfy the giver.

अध्याय 9

श्लोक 5.6

उत् क्रा॒मातः॒ परि॒ चेदत॑प्तस्त॒प्ताच्च॒रोरधि॒ नाकं॑ तृ॒तीय॑म्।अ॒ग्नेर॒ग्निरधि॒ सं ब॑भूविथ॒ ज्योति॑ष्मन्तम॒भि लो॒कं ज॑यै॒तम्

ut krāmātaḥ pari cedataptastaptāccaroradhi nākaṃ tṛtīyam| agneragniradhi saṃ babhūvitha jyotiṣmantamabhi lokaṃ jayaitam

हिन्दी अर्थ

हर लेता है, स्वायत्त कटर लेता है । (एषः वा भ्रभि भूः नाम ऋतुः) यह है वस्तुतः पराभव करने वाली ऋतु (यद् भ्रजः पञ्चौदनः) जो किं पांच को (निरदंहति) दग्ध -कर देता है, (भवति शरात्मना) भ्रौर स्वयं उस पर : पारमेदवरीय ज्योति के शूप मे, गृहस्थी के प्रति (वदाति) प्रदान करता है । रभि भूः ऋतु है, वसन्त; जोकि शिशिर ऋतु के (मन्त्र ३५) परचात् श्राती है! निज शोभा के कारण शेष सब ऋतुभ्रो पर यह् ऋतु विजय

English

The Goat Panchaudana, given to a Brāhman, sets the bestower on the pitch of heaven, In the third vault, third sky, third ridge. One only Cow omni- form art thou, that yields all

अध्याय 9

श्लोक 5.7

अ॒जो अ॒ग्निर॒जमु॒ ज्योति॑राहुर॒जं जीव॑ता ब्र॒ह्मणे॒ देय॑माहुः ।अ॒जस्तमां॒स्यप॑ हन्ति दू॒रम॒स्मिंल्लो॒के श्र॒द्दधा॑नेन द॒त्तः

ajo agnirajamu jyotirāhurajaṃ jīvatā brahmaṇe deyamāhuḥ | ajastamāṃsyapa hanti dūramasmiṃlloke śraddadhānena dattaḥ

हिन्दी अर्थ

को “ऋतूनां कुलुमाकरः” (१०।३५) कहा द । कुसुमाकर का भ्रथं है. । कुसुमां भर्थात् पूरलो की खान । इस ऋतु मं वृक्षो भँ भी नवाङ्ककर प॑दा होने : शोमा द्वारां न्य ऋषु्रों का पराभव करती हुई नवा को पेदा करती ¦ ( है, वसेः “पञ्चौदन-प्रज"” भी तामस राजस विचारो तथा क्मोँका पराभव कर; ध्याता में सात्विक नवाङ्कुरों को पैदा करता है । शेष ्रभिभ्राय पूवत ¦ ॥ (सघ्ीचीः) परस्पर मिल कर भ्रौरं (संमनसः) एकं मन हो कर (ते) हे

English

wishes. That is the third light that is yours, ye Fathers. He gives the

अध्याय 9

श्लोक 5.8

पञ्चौ॑दनः पञ्च॒धा वि क्र॑मतामाक्रं॒स्यमा॑न॒स्त्रीणि॒ ज्योतीं॑षि ।ई॒जा॒नानां॑ सु॒कृतां॒ प्रेहि॒ मध्यं॑ तृ॒तीये॒ नाके॒ अधि॒ वि श्र॑यस्व

pañcaudanaḥ pañcadhā vi kramatāmākraṃsyamānastrīṇi jyotīṃṣi | ījānānāṃ sukṛtāṃ prehi madhyaṃ tṛtīye nāke adhi vi śrayasva

हिन्दी अर्थ

देशवासियों का सुचक है । त पचत का भ्रभिप्राय श्रम्नि पर पकाना नही, ्रपितु निज जीवनो मेँ परमेरवरः न कि बकरा । ईसी प्रकार “पांच भ्रोदनो" का श्रमिप्राय है पांच ,. “पञ्च भरोदनों का परिपाकं निज जीवनो मे कर नेते हैँ उन का संमान सब

English

Goat Panchaudana to the Brāhman. Given in this world by the devout believer, the Goat dispels and drives afar the darkness.

अध्याय 9

श्लोक 5.9

अजा रो॑ह सु॒कृतां॒ यत्र॑ लो॒कः श॑र॒भो न च॒त्तोऽति॑ दु॒र्गान्ये॑षः ।पञ्चौ॑दनो ब्र॒ह्मणे॑ दी॒यमा॑नः॒ स दा॒तारं॒ तृप्त्या॑ तर्पयाति

ajā roha sukṛtāṃ yatra lokaḥ śarabho na catto'ti durgānyeṣaḥ | pañcaudano brahmaṇe dīyamānaḥ sa dātāraṃ tṛptyā tarpayāti

हिन्दी अर्थ

(ताः) वे सब दिशाए भर्थात् सब दिचयाभों के वासी . प्रनाए (मन्त ३७) (ते) है “पुनम् :” तेरे, (तव एतम्) भर्थात् तेरे इस पति की, (आज्यम्) धृत भ्रौर (इदम् हविः) (जुहोमि) में पुरोहित भाहृतियों के रूप मे भराहूत करता हूं । इसमे है किं उस का पति जीवित तथा सुरक्षित रहे । विह्षोषः-- काण्ड ९।५।३१ में नेदाघ० छतु से वर्षारम्भ किया गया है ।

English

Seeking the world of good men who have worshipped, he gives the Goat Panchaudana to the Brāhman.

अध्याय 9

श्लोक 5.10

अ॒जस्त्रि॑ना॒के त्रि॑दि॒वे त्रि॑पृ॒ष्ठे नाक॑स्य पृ॒ष्ठे द॑दि॒वांसं॑ दधाति ।पञ्चौ॑दनो ब्र॒ह्मणे॑ दी॒यमा॑नो वि॒श्वरू॑पा धे॒नुः का॑म॒दुघा॒स्येका॑

ajastrināke tridive tripṛṣṭhe nākasya pṛṣṭhe dadivāṃsaṃ dadhāti | pañcaudano brahmaṇe dīyamāno viśvarūpā dhenuḥ kāmadughāsyekā

हिन्दी अर्थ

की पीठप्रर (सप्तरश्मौ ) सात प्रकार की रदिमयों वाले सूं में (धि) रदिमियां फट कर, सातरंगों की रदिमयो मे ५ हो जाती है । ये सात- रंगी रदिमयां वर्षतु में मेधीय इन्द्रधनुष मे दीखती हं । यजुवद (४०।१७) - है! (तंपृण्यं लोकम्) उस पुण्य लोक को (्जेषम्) तेरी 'छृपासेमै

English

Gods, bestowed, with blessing. Both arms of Varuna, and Indra’s vigour, the Maruts’ hump is he, the Asvins’ shoulders.

अध्याय 9

श्लोक 5.11

ए॒तद् वो॒ ज्योतिः॑ पितरस्तृ॒तीयं॒ पञ्चौ॑दनं ब्र॒ह्मणे॒ऽजं द॑दाति ।अ॒जस्तमां॒स्यप॑ हन्ति दू॒रम॒स्मिंल्लो॒के श्र॒द्दधा॑नेन द॒त्तः

etad vo jyotiḥ pitarastṛtīyaṃ pañcaudanaṃ brahmaṇe'jaṃ dadāti | ajastamāṃsyapa hanti dūramasmiṃlloke śraddadhānena dattaḥ

हिन्दी अर्थ

येना संदृशं वह॑सि येनाग्नि सवेदेदसम् । हेतु से (सहस्रम्) हजारों लोक लोकान्तरं का (वहसि) तू वहन करता है, (येन) जिस हेतु से (सवैवेदसम्) सर्वस्वत्यागी' का बहुन करता है । ( तेन) उसदहतु से (नः). हमारे (यज्ञम्) यज्ञ को सफलता कौ ग्रोर (वह) ले चल, ताकि (देवेषु ) देवों म वतमान (स्वः) सुखविशेष को (गन्तवे)

English

They who are sages, bards endowed with wisdom, call him Brihaspati compact and heightened.

अध्याय 9

श्लोक 5.12

ई॒जा॒नानां॑ सु॒कृतां॑ लो॒कमीप्स॒न् पञ्चौ॑दनं ब्र॒ह्मणे॒ऽजं द॑दाति ।स व्याऽप्तिम॒भि लो॒कं ज॑यै॒तं शि॒वो॒३ऽस्मभ्यं॒ प्रति॑गृहीतो अस्तु

ījānānāṃ sukṛtāṃ lokamīpsan pañcaudanaṃ brahmaṇe'jaṃ dadāti | sa vyā'ptimabhi lokaṃ jayaitaṃ śivo3'smabhyaṃ pratigṛhīto astu

हिन्दी अर्थ

क्योंकि उस के सकामकमै निष्कामखूप हो. गए हँ भरतः उस के जीवन को कि हमः जीवन्मुक्तो के जीवन यज्ञो का भी तु . वहनः कर, ताकि उस सुख तेनं लोकान्त्सूर्यवतो जयेम ॥१८॥

English

Thou, vigorous, reachest to the tribes of heaven. Thee they call Indra, thee they call Sarasvān.

अध्याय 9

श्लोक 5.13

अ॒जो ह्य॑१ग्नेरज॑निष्ट॒ शोका॒द् विप्रो॒ विप्र॑स्य॒ सह॑सो विप॒श्चित्।इ॒ष्टं पू॒र्तम॒भिपू॑र्तं॒ वष॑ट्कृतं॒ तद् दे॒वा ऋ॑तु॒शः क॑ल्पयन्तु

ajo hya1gnerajaniṣṭa śokād vipro viprasya sahaso vipaścit| iṣṭaṃ pūrtamabhipūrtaṃ vaṣaṭkṛtaṃ tad devā ṛtuśaḥ kalpayantu

हिन्दी अर्थ

म स्थापित कर देत। है । (तेन) उस की- सहायता या कृष से (धूर्यवतः सवं तद॑ग्ने सुकृतस्य छोके नानीता; संगम॑ने पथीनाम् ॥१९॥ के हाथ मे (निदधे) ओ स्थापित करताहुं (यंच) भ्रौर जिसे 1

English

Turned to one aim, that Brāhman gives a thousand who offers up the Bull as his oblation. Brihaspati, Savitar gave thee vital vigour: thy breath was brought from Tvashtar and from

अध्याय 9

श्लोक 5.14

अ॒मो॒तं वासो॑ दद्या॒द्धिर॑ण्य॒मपि॒ दक्षि॑णाम्।तथा॑ लो॒कान्त्समा॑प्नोति॒ ये दि॒व्या ये च॒ पार्थि॑वाः

amotaṃ vāso dadyāddhiraṇyamapi dakṣiṇām| tathā lokāntsamāpnoti ye divyā ye ca pārthivāḥ

हिन्दी अर्थ

(रगे). है प्रकाशमयं तथा ज्ञानमय परमेइवेर ! (पथीनां संगमने; .सुक्रत- स्य लोके) पथो के संगम मेँ जहां कि-सुकर्मो का लोक है वहां, त्. (नः) ˆ दारा बलिवश्वदेव यज्ञ को सूचित. किया है, जिस मे कि प्राणिमात्र के लिये

English

Vāyu. In thought I offer thee in air’s mid-region. Thy sacrificial grass be Earth and Heaven!

अध्याय 9

श्लोक 5.15

ए॒तास्त्वा॒जोप॑ यन्तु॒ धाराः॑ सो॒म्या दे॒वीर्घृ॒तपृ॑ष्ठा मधु॒श्चुतः॑ ।स्त॒भा॒न पृ॑थि॒वीमु॒त द्यां नाक॑स्य पृ॒ष्ठेऽधि॑ स॒प्तर॑श्मौ

etāstvājopa yantu dhārāḥ somyā devīrghṛtapṛṣṭhā madhuścutaḥ | stabhāna pṛthivīmuta dyāṃ nākasya pṛṣṭhe'dhi saptaraśmau

हिन्दी अर्थ

पक्वान्न के भ्रंश भेट किये जाते है । यथा “शुनां च पतितानां च -इवप्च रोहि सूचित करिया है. जिस से तण्डुलं निकाल कर ग्रोदन-पकाएः जति ह । पव श्रष्यायं. ३३७) । पथीनां संगमने सम्भवतः देवभागे .श्रौर पितू- माय का जहां संगम हतां हो, वहां सूकरृेत का कोई स्थान विशेष हो जिसे कि “सुकृतस्य लोके" द्वारा निदिष्ट किया है । ;

English

Let the priest joyfully extol the limbs and members of the Bull Who moved and roared among the kine as Indra moves among the Gods.

अध्याय 9

श्लोक 5.16

अ॒जो॒३स्यज॑ स्वर्गोऽसि॒ त्वया॑ लो॒कमङ्गि॑रसः॒ प्राजा॑नन्।तं लो॒कं पुण्यं॒ प्र ज्ञे॑षम्

ajo3syaja svargo'si tvayā lokamaṅgirasaḥ prājānan| taṃ lokaṃ puṇyaṃ pra jñeṣam

हिन्दी अर्थ

किया, (तस्य) उस की (उरः श्रभवत्) छाती हई (इयम्) यह पृथिवी (कुक्षी) दो कोखं हुई । (समुद्रौ ) दो . समूद्र । पादवं = दो षार्वो की नाना, .अस्थियों को. “दिक्च नाना दिश्चाएं

English

The sides must be Anumati’s, and both rib-pieces Bhaga’s share, Of the knee-bones hath Mitra said, Both these are mine, and only mine.

अध्याय 9

श्लोक 5.17

येना॑ स॒हस्रं॒ वह॑सि॒ येना॑ग्ने सर्ववेद॒सम्।तेने॒मं य॒ज्ञं नो॑ वह॒ स्वऽर्दे॒वेषु॒ गन्त॑वे

yenā sahasraṃ vahasi yenāgne sarvavedasam| tenemaṃ yajñaṃ no vaha sva'rdeveṣu gantave

हिन्दी अर्थ

एष वा अधरिमितो यह्नो .यदजः पञ्चौदनः ॥२१॥ “श्रज' है, जन्मरहित परमेश्वर है । लिये है, कमंवासनाजन्य नहीं । क अ"

English

The Ādityas claim the hinder parts, the loins must be Brihas- pati’s. Vāta, the God, receives the tail: he stirs the plants and herbs therewith,

अध्याय 9

श्लोक 5.18

अ॒जः प॒क्वः स्व॒र्गे लो॒के द॑धाति॒ पञ्चौ॑दनो॒ निरृ॑तिं॒ बाध॑मानः ।तेन॑ लो॒कान्त्सूर्य॑वतो जयेम

ajaḥ pakvaḥ svarge loke dadhāti pañcaudano nirṛtiṃ bādhamānaḥ | tena lokāntsūryavato jayema

हिन्दी अर्थ

जो किःकाटपनिक ही होत है । परमेदवर की दो भख है, सत्य श्रौर ऋत । कोः “बृहत्-सत्यम्”ःमी कहा है (अथव १२।१।१) । वैयक्तिक, सामाजिक, पौषण करना) ये दो है परमेदवर के भ्राणलूप, इ्वास-प्ररवासरूप, प्राणा- 1

English

To Sūryā they assigned the skin, to Sinivāli inward parts. The Slaughterer hath the feet, they said, when they distributed the Bull.

अध्याय 9

श्लोक 5.19

यं ब्रा॑ह्म॒णे नि॑द॒धे यं च॑ वि॒क्षु या वि॒प्रुष॑ ओद॒नाना॑म॒जस्य॑ ।सर्वं॒ तद॑ग्ने सुकृ॒तस्य॑ लो॒के जा॑नी॒तान्नः॑ सं॒गम॑ने पथी॒नाम्

yaṃ brāhmaṇe nidadhe yaṃ ca vikṣu yā vipruṣa odanānāmajasya | sarvaṃ tadagne sukṛtasya loke jānītānnaḥ saṃgamane pathīnām

हिन्दी अर्थ

दिव् को सिरं तथो मूर्षा कहा है . तथा ते विवमेवं विराजं पञ्चमीं चिति- सान होता है 1 भ्रपरिमितः यज्ञः परमेश्वर (यजु०.३.१।६,७,६) ।. . . प्रतीत होते है, जिन में मूत्रपेदा होता है जिन्हे कि समुद्रौ कहाहै।

English

They made a jest of kindred’s curse: a jar of Soma juice was set, What time the deities, convened, assigned the Bull’s divided parts.

अध्याय 9

श्लोक 5.20

अ॒जो वा इ॒दमग्ने॒ व्यऽक्रमत॒ तस्योर॑ इ॒यम॑भव॒द् द्यौः पृ॒ष्ठम्।अ॒न्तरि॑क्षं॒ मध्यं॒ दिशः॑ पा॒र्श्वे स॑मु॒द्रौ कु॒क्षी

ajo vā idamagne vya'kramata tasyora iyamabhavad dyauḥ pṛṣṭham| antarikṣaṃ madhyaṃ diśaḥ pārśve samudrau kukṣī

हिन्दी अर्थ

तल्लीन करे । योगरदरंन म तप मे सम्बन्ध मे कहा कि “नातपस्विनो होता, परन्तु वह तप उस सीमा तक. ही होना चाहिए जितनी तक.कि मन॒ योगसाधन कयि जां सकते्है, भ्रस्थि तोड़ तथा रीढृ की भस्थियो के रस .

English

That Bull, the husband of the kine, pierces the demons with his horns, Banishes famine with his eye, and hears good tidings with his ears.

अध्याय 9

श्लोक 5.21

स॒त्यं च॒र्तं च॒ चक्षु॑षी॒ विश्वं॑ स॒त्यं श्र॒द्धा प्रा॒णो वि॒राट् शिरः॑ ।ए॒ष वा अप॑रिमितो य॒ज्ञो यद॒जः पञ्चौ॑दनः

satyaṃ cartaṃ ca cakṣuṣī viśvaṃ satyaṃ śraddhā prāṇo virāṭ śiraḥ | eṣa vā aparimito yajño yadajaḥ pañcaudanaḥ

हिन्दी अर्थ

को सुखा देने वाला तप योगविरोधी ही है जीवन को सफल करता है उसे भी परमेइवर इष भ्रादि प्रदान करता है । कार ९। सू०५ . भ्रथवववेद-मोाष्य ८३

English

With hundred sacrifices he worships: the fires consume him not: All Gods promote the Braman who offers the Bull in sacrifice.

अध्याय 9

श्लोक 5.22

अप॑रिमितमे॒व य॒ज्ञमा॒प्नोत्यप॑रिमितं लो॒कमव॑ रुन्धे ।यो॒३ऽजं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑णाज्योतिषं॒ ददा॑ति

aparimitameva yajñamāpnotyaparimitaṃ lokamava rundhe | yo3'jaṃ pañcaudanaṃ dakṣiṇājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

यथेच्छ दुघ देने वाली दुधार गौएं (भवन्ति) देय होती है (यः) जो भोग पर,विजय प्राप्त करानेः के लिये, गुड एक-एक सुवर्णाभरषण, वस्व, तथा कराकर रिष्य के जीवन को सफल बनाना कोई साधारण कायं नहीं। तो

English

He who hath given away the Bull to Brāhmans frees and cheers his soul. In his own cattle-pen he sees the growth and increase of his cows.

अध्याय 9

श्लोक 5.23

नास्यास्थी॑नि भिन्द्या॒न्न म॒ज्ज्ञो निर्ध॑येत्।सर्व॑मेनं समा॒दाये॒दमि॑दं॒ प्र वे॑शयेत्

nāsyāsthīni bhindyānna majjño nirdhayet| sarvamenaṃ samādāyedamidaṃ pra veśayet

हिन्दी अर्थ

भी परिणामसूपमें कथित दक्षिणा, है मी मामूलो। रिष्य पाच सुवणं- मालाएं तो कृतज्ञता रूप मे गुड की गरदन पर पहनाता हैभूर फा जाने वाली पृष्पमालाणएं नहीं, तथा गुर के परिधान के . लिये पांच नवीन वस्र, तथा दुग्धसेवी गुर के लिये पांच गौएं देता है, जिस द्वारा गुर .के परिवार कां पालन-पोषण हो सके । पांच सुवर्णं-मालाएं भी तात्कालिक समारोह मेँ गुर मवम्ति) सोभारूप होते है, (वासांसि). वस्त्रे (तन्वे) शरीर के लिये गये पांच सुवर्णाभषण, पांच सुवणंमालारएं" भ्रच्यात्मगुरु कों सुशोभित करती है, उस समय उसके मूख की श्राभाः चमकती है । वमं = वृज् प्रावरणे

English

Let there be cattle, let there be bodily strength and progeny: All this may the Gods kindly grant to him who gives away the

अध्याय 9

श्लोक 5.24

इ॒दमि॑दमे॒वास्य॑ रू॒पं भ॑वति॒ तेनै॑नं॒ सं ग॑मयति ।इषं॒ मह॒ ऊर्ज॑मस्मै दुहे॒ यो॒३ऽजं पञ्चौ॑दनं दक्षि॑णाज्योतिषं॒ ददा॑ति

idamidamevāsya rūpaṃ bhavati tenainaṃ saṃ gamayati | iṣaṃ maha ūrjamasmai duhe yo3'jaṃ pañcaudanaṃ dakṣiṇājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

ठ , , अथवंवेद-भाष्य कां७-।८स्० ५ शरीर का भावरण करने .वाले ठकने वाले, कवच के सदृशा वस्त्र समारोह मे :' देते हैँ तो वे (न वियोषतः) परस्पर से वियुक्त नहीं होते ।

English

Bull. 142

अध्याय 9

श्लोक 5.25

पञ्च॑ रु॒क्मा पञ्च॒ नवा॑नि॒ वस्त्रा॒ पञ्चा॑स्मै धे॒नवः॑ काम॒दुघा॑ भवन्ति ।यो॒३जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑णाज्योतिषं॒ ददा॑ति

pañca rukmā pañca navāni vastrā pañcāsmai dhenavaḥ kāmadughā bhavanti | yo3jaṃ pañcaudanaṃ dakṣiṇājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

. “वियोषतः”, पद द्वारा यह भाव प्रकट होता है कि ये नव वर-वघू तक को, एक-दूसरे पर न्यौचछावर करदे तो उनं के वियोग ॒की सम्भावना समानलोंको भवति पुनरवाप॑रः पतिः ।

English

Indra here verily hath rejoiced: let him bestow conspicuous wealth. May he draw forth at will from yonder side of heaven a deft cow, good to milk, whose calf is

अध्याय 9

श्लोक 5.26

पञ्च॑ रु॒क्मा ज्योति॑रस्मै भवन्ति॒ वर्म॒ वासां॑सि त॒न्वेऽ भवन्ति ।स्व॒र्गं लो॒कम॑श्नुते॒ यो॒३जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑णाज्योतिषं॒ ददा॑ति

pañca rukmā jyotirasmai bhavanti varma vāsāṃsi tanve' bhavanti | svargaṃ lokamaśnute yo3jaṃ pañcaudanaṃ dakṣiṇājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

(पुनभ वा) ““ुनः पत्नी" होने वाली के साथ (श्रपरः पति) यह दुसरा पति (समानलोकः) एक ही गृहस्थ लोक मेँ वास करने वाला (भवति) हो जाता दहै, (यः) जोकि (पञ्चौदनम्) निज पचेन्द्रिय भोगोंको, दक्षिणा के समय एकं नई ज्योति रूप मे (ददाति) पत्नी के प्रति देता है । इसलिये विवाह विधि की समाप्ति पर, पति जो पत्नी के प्रति पञ्चभोगौं

English

never wanting. With close connexion mingle with the cows in this our cattle- pen:

अध्याय 9

श्लोक 5.27

या पूर्वं॒ पतिं॑ वि॒त्त्वाथा॒न्यं वि॒न्दतेऽप॑रम्।पञ्चौ॑दनं च॒ ताव॒जं ददा॑तो॒ न वि यो॑षतः

yā pūrvaṃ patiṃ vittvāthānyaṃ vindate'param| pañcaudanaṃ ca tāvajaṃ dadāto na vi yoṣataḥ

हिन्दी अर्थ

भ्रकरेरण मे, पुनमू के पुनवि्वाह कौ प्रसक्ति हुई है। ष पत्नी के लिये एक ज्योति ना प्रदान है, जीवन मागं मे जीकि पलो म नव- -(अनुपू्ववत्साम्) पिले बच्चे के ' परचात् पूनः ब ( म गौ को, (अ्रमेड्वाहम्) शकटवाही बल को,

English

Mingle, the Bull’s prolific flow, and, Indra! thine heroic strength! Here we restore this Bull, your youthful leader: sporting with him, go, wander at your

अध्याय 9

श्लोक 5.28

स॒मा॒नलो॑को भवति पुन॒र्भुवाप॑रः॒ पतिः॑ ।यो॒३जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑णाज्योतिषं॒ ददा॑ति

samānaloko bhavati punarbhuvāparaḥ patiḥ | yo3jaṃ pañcaudanaṃ dakṣiṇājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

विवाह में पुरोहित को दक्षिणाख्प में देकर, (ते) वे ध व को, ला को, (पितामहम् ) पिता .के पिता क्रो, (जायाम्) निज ५ गोः ह, या सदा संत्कार पूर्वक ब्ुलाता हृ" भ्रादर पूवक बुलाता

English

pleasure. Ne’er, wealthy ones! may he be reft of offspring; and do ye favour us with growth of riches.

अध्याय 9

श्लोक 5.29

अ॒नु॒पूर्व॒व॑त्सां धे॒नुम॑न॒ड्वाह॑मुप॒बर्ह॑णम्।वासो॒ हिर॑ण्यं द॒त्त्वा ते य॑न्ति॒ दिव॑मुत्त॒माम्

anupūrvavatsāṃ dhenumanaḍvāhamupabarhaṇam| vāso hiraṇyaṃ dattvā te yanti divamuttamām

हिन्दी अर्थ

यह् कथन : पति" का ' है 1 पति गुहजीवन भं सबके साथ नमध्वम् क उनके प्रति मधुर तथा मेममयी "वाणी का प्रयोग किया रे । मन्व मे “संयुक्त पारिवारिक जीवन” का निदेश हृभा है

English

A glorification of a sacrificial goat Seize him and bring him hither. Let him travel. foreknowing, to the regions of the pious.

अध्याय 9

श्लोक 5.30

आ॒त्मानं॑ पि॒तरं॑ पु॒त्रं पौत्रं॑ पिताम॒हम्।जा॒यां जनि॑त्रीं मा॒तरं॒ ये प्रि॒यास्तानुप॑ ह्वये

ātmānaṃ pitaraṃ putraṃ pautraṃ pitāmaham| jāyāṃ janitrīṃ mātaraṃ ye priyāstānupa hvaye

हिन्दी अर्थ

भो कमजोर पड़ जाते. हँ । यहं काल. ज्येष्ट-भ्राषाढ़ -मासों. का होता देता है जसे कि उग्र नेदाष ऋतु दग्ध करती है ।. वैदिक साहित्य मे देवों भौर भसुरों को प्रजापति करी सन्ताने कहा है, ग्रथा “देवा्चासुराह्चोभये

English

I bring thee hither as a share for Indra; prince, at this sacrifice,. for him who worships. Grasp firmly from behind all those who hate us: so let the sacri- ficer’s men be sinless.

अध्याय 9

श्लोक 5.31

यो वै नैदा॑घं॒ नाम॒र्तुं वेद॑ ।ए॒ष वै नैदा॑घो॒ नाम॒र्तुर्यद॒जः पञ्चौ॑दनः ।निरे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रियं॑ दहति॒ भव॑त्या॒त्मना॑ ।यो॒३जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑णाज्योतिषं॒ ददा॑ति

yo vai naidāghaṃ nāmartuṃ veda | eṣa vai naidāgho nāmarturyadajaḥ pañcaudanaḥ | nirevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyaṃ dahati bhavatyātmanā | yo3jaṃ pañcaudanaṃ dakṣiṇājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

हर सी शत्र न । ये.देव भ्रौर्रसुर कोर मानुष.जाति के नही, भरपितु भावनोभ्नों भौर. तज्जन्य उदारता, । , दिव्य मोका ननन ॑ परोपकार दिव्य. कामना का के स्वामी भ्रजन्मा परमेश्वर की व का वरन कटा देता. ह । म रन्मे वर का विवाह पुनभू; के साथ हराः है । विवाह तो पुरोहित ही. नें

English

Wash from his feet all trace of evil-doing: foreknowing, with cleansed hooves let him go upward.

अध्याय 9

श्लोक 5.32

यो वै कु॒र्वन्तं॒ नाम॒र्तुं वेद॑ ।कु॒र्व॒तींकु॑र्वतीमे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रिय॒मा द॑त्ते ।ए॒ष वै कु॒र्वन्नाम॒र्तुर्यद॒जः पञ्चौ॑दनः ।निरे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रियं॑ दहति॒ भव॑त्या॒त्मना॑।यो॒३जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑नाज्योतिषं॒ ददा॑ति

yo vai kurvantaṃ nāmartuṃ veda | kurvatīṃkurvatīmevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyamā datte | eṣa vai kurvannāmarturyadajaḥ pañcaudanaḥ | nirevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyaṃ dahati bhavatyātmanā| yo3jaṃ pañcaudanaṃ dakṣinājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

फलस्य भ पुरोहित वे विवाहित धुरः को प्रमेद्वर के दोन कराः दि 1 काऽ ;९.। शुः ध .:भरधववेद-भाष्य ' ८७ विवाहित शुषः भी प्रमेदवरे क्री. दिव्य जयोतिः कोपराप्तः कर, निज. जीवन मे आसुरी शको दरब कर, हैवी भीः को प्राप्तकरता ह। एसी ही भावः यो है कन्त नाततुं॑वेद । कुवती डैवेतीमेवाभियस्य घातब्यभ्य

English

Gazing on many a spot, crossing the darkness, let the Goat mount to the third heaven above us.

अध्याय 9

श्लोक 5.33

यो वै सं॒यन्तं॒ नाम॒र्तुं वेद॑ ।सं॒य॒तींसं॑यतीमे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रिय॒मा द॑त्ते ।ए॒ष वै सं॒यन्नाम॒र्तुर्यद॒जः पञ्चौ॑दनः ।निरे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रियं॑ दहति॒ भव॑त्या॒त्मना॑।यो॒३जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑णाज्योतिषं॒ ददा॑ति

yo vai saṃyantaṃ nāmartuṃ veda | saṃyatīṃsaṃyatīmevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyamā datte | eṣa vai saṃyannāmarturyadajaḥ pañcaudanaḥ | nirevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyaṃ dahati bhavatyātmanā| yo3jaṃ pañcaudanaṃ dakṣiṇājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

ऋतुम्) पेदा करने वाली ऋतु. को उसके नामानुरूप (वेद ), जानता है, यह वस्तुतः पदा. करने वाली ऋतु 'है (यद्. भ्रजः पञ्चौदनः) जोकिपांच पारमेचवरीय ज्योति के रूप मे गृहस्थी के प्रति (वदाति). प्रदान करता है

English

Cut up this skin with the grey knife, Dissector! dividing joint from joint, and mangle nothing Do him no injury: limb by limb arrange him, and send him up to the third cope of heaven.

अध्याय 9

श्लोक 5.34

यो वै पि॒न्वन्तं॒ नाम॒र्तुं वेद॑ ।पि॒न्व॒तींपि॑न्वतीमे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रिय॒मा द॑त्ते ।ए॒ष वै पि॒न्वन्नाम॒र्तुर्यद॒जः पञ्चौ॑दनः ।निरे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रियं॑ दहति॒ भव॑त्या॒त्मना॑।यो॒३जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑णाज्योतिषं॒ ददा॑ति

yo vai pinvantaṃ nāmartuṃ veda | pinvatīṃpinvatīmevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyamā datte | eṣa vai pinvannāmarturyadajaḥ pañcaudanaḥ | nirevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyaṃ dahati bhavatyātmanā| yo3jaṃ pañcaudanaṃ dakṣiṇājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

“ मन्त्र ३१ मेँ निदाच या नैदाघ दारा ग्रीष्म ऋतुं का वणेन हुमा है । होता है, नानाविघ सन्जिथां पैदा होनि लगतीं है, पठन-पाठन भी शुरू हो “पञ्चौदन रज" कहा है । ऋतु का निर्माता तथा नियन्ता -परमेदवर हो है । "वही ऋतुं द्वारा भूमण्डल .को सजीव कर रहा है । इस ध लिये

English

With verse upon the fire I set the caldron: pour in the water; lay him down within it! Encompass him with fire, ye Immolators. Cooked, let him reach the world where dwell the

अध्याय 9

श्लोक 5.35

यो वा उ॒द्यन्तं॒ नाम॒र्तुं वेद॑ ।उ॒द्य॒तीमु॑द्यतीमे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रिय॒मा द॑त्ते ।ए॒ष वा उ॒द्यन्न्नाम॒र्तुर्यद॒जः पञ्चौ॑दनः ।निरे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रियं॑ दहति॒ भव॑त्या॒त्मना॑।यो॒३जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑णाज्योतिषं ददा॑ति

yo vā udyantaṃ nāmartuṃ veda | udyatīmudyatīmevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyamā datte | eṣa vā udyannnāmarturyadajaḥ pañcaudanaḥ | nirevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyaṃ dahati bhavatyātmanā| yo3jaṃ pañcaudanaṃ dakṣiṇājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

है । रषं भमिभरायं पूरवमत्न ३१यत् है । . ह अथर्वेद-माष्य कां०- € । सु? ऋतुम्) एकत्रित करने वाली ऋतु को उस के नामानुरूपं (वेद) जानता

English

righteous. Hence come thou forth, vexed by no pain or torment. Mount to the third heaven from the

अध्याय 9

श्लोक 5.36

यो वा अ॑भि॒भुवं॒ नाम॒र्तुं वेद॑ ।अ॒भि॒भव॑न्तीमभिभवन्तीमे॒वाप्रि॑यस्य भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रिय॒मा द॑त्ते ।ए॒ष वा अ॑भि॒भूर्नाम॒र्तुर्यद॒जः पञ्चौ॑दनः ।निरे॒वाप्रि॑यस्य॒ भ्रातृ॑व्यस्य॒ श्रियं॑ दहति॒ भव॑त्या॒त्मना ।यो॒३जं पञ्चौ॑दनं॒ दक्षि॑नाज्योतिषं॒ ददा॑ति

yo vā abhibhuvaṃ nāmartuṃ veda | abhibhavantīmabhibhavantīmevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyamā datte | eṣa vā abhibhūrnāmarturyadajaḥ pañcaudanaḥ | nirevāpriyasya bhrātṛvyasya śriyaṃ dahati bhavatyātmanā | yo3jaṃ pañcaudanaṃ dakṣinājyotiṣaṃ dadāti

हिन्दी अर्थ

हर लेता है, स्वायत्त कर लेता है । (एष वं संयत् नाम ऋतुः) यह वस्तुतः के फलस्वरूप पारमेशवरीय ज्योति के रूप मे, गृहस्थी के प्रति (ददाति) वर्णेन हृभरा है । यह ऋतु है रद् ऋतु जो वर्षा ऋतु के परचात् होती है ।

English

heated vessel. As fire out of the fire hast thou arisen. Conquer and win this lucid world of splendour.

अध्याय 9

श्लोक 5.37

अ॒जं च॒ पच॑त॒ पञ्च॑ चौद॒नान्।सर्वा॒ दिशः॒ संम॑नसः स॒ध्रीचीः॒ सान्त॑र्देशाः॒ प्रति॑ गृह्णन्तु त ए॒तम्

ajaṃ ca pacata pañca caudanān| sarvā diśaḥ saṃmanasaḥ sadhrīcīḥ sāntardeśāḥ prati gṛhṇantu ta etam

हिन्दी अर्थ

ऋतुम्). पुष्टिदायक ऋतु को उसके नामानुरूप (वैद) जानता है, । वह ॥ कों०.९॥। सु०.५ भरथववेद-माष्य ८8 गृहस्थी के प्रति (ददाति) प्रदान करता है । व

English

The Goat is Agni: light they call him, saying that living man must give him to the Brāhman. Given in this world by a devout believer, the Goat dispels and drives afar the darkness.

अध्याय 9

श्लोक 5.38

तास्ते॑ रक्षन्तु॒ तव॒ तुभ्य॑मे॒तं ताभ्य॒ आज्यं॒ ह॒विरि॒दं जु॑होमि

tāste rakṣantu tava tubhyametaṃ tābhya ājyaṃ haviridaṃ juhomi

हिन्दी अर्थ

हमा है । शेष भभिभ्राय मन्त्र ३१ के सदृश द ॑ यो वा उधन्तं नामु वेद, । .उतीयुबतीमेषाभियस्यः श्रारनयस्य होती हई (ऋतुम्). ऋतु को (नाम्) उसके नामानुरूप (वेद) जानता है, लेता है ।. (एषः) यह (वै) वस्तुतः (उद्यन् नाम ऋः) उदय होती हई ऋतु है, (यद् भजः पञ्चौदनः) जोकि पांच इद्दिय भोगों का स्वामी

English

Let the Panchaudana Goat, about to visit the three lights, pass away in five divisions. Go midst the pious who have paid their worship, and parted, dwell on the third cope of

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।