Atharva Veda
9
अध्याय 9 / 20

Kanda 9

काण्ड 9

313 श्लोकभाग 3/5 · श्लोक 6.1–6.17

पूर्ण अध्याय पाठ73 श्लोक

अध्याय 9

श्लोक 6.1

अतिथि-सत्कारः।१-६२ (षट् पर्यायाः) ब्रह्माः।अतिथिः, विद्या।(१) १-१७, नागीनाम त्रिपदा गायत्री, २ त्रिपदाऽर्षी गायत्री, ३,७ साम्नी त्रिष्टुप्, ४,९ आर्च्यनुष्टुप्, ५ आसुरी गायत्री, ६ त्रिपदा साम्नी जगती, ८ याजुषी त्रिष्टुप्, १० साम्नी भुरिग्बृहती, ११,१४-१६ साम्न्यनुष्टुप्, १२ विराड् गायत्री, १३ साम्नि निचृत्पङ्क्तिः, १७ त्रिपदा विराड् भुरिग्गायत्री।यो वि॒द्याद् ब्रह्म॑ प्र॒त्यक्षं॒ परूं॑षि॒ यस्य॑ संभा॒रा ऋचो॒ यस्या॑नू॒क्यऽम्

atithi-satkāraḥ| 1-62 (ṣaṭ paryāyāḥ) brahmāḥ| atithiḥ, vidyā| (1) 1-17, nāgīnāma tripadā gāyatrī, 2 tripadā'rṣī gāyatrī, 3,7 sāmnī triṣṭup, 4,9 ārcyanuṣṭup, 5 āsurī gāyatrī, 6 tripadā sāmnī jagatī, 8 yājuṣī triṣṭup, 10 sāmnī bhurigbṛhatī, 11,14-16 sāmnyanuṣṭup, 12 virāḍ gāyatrī, 13 sāmni nicṛtpaṅktiḥ, 17 tripadā virāḍ bhuriggāyatrī| yo vidyād brahma pratyakṣaṃ parūṃṣi yasya saṃbhārā ṛco yasyānūkya'm

हिन्दी अर्थ

काल गणना का सुचक है-इन पर विचार की .भ्रावर्यकता है । - पर्याय (३):ः-भतिधि पति भ्रतिथि से पूवं मोजन न करे (३१-३६) ¡ गोमांस न खाए; मांस का अभिप्राय (३७-३ ९)1. :

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय 9

श्लोक 6.1-2

(२) १८-३० (१-१३) १ विराट् पुरस्ताद्बृहती, २, १२ साम्नी त्रिष्टुप्, ३ आसुरी अनुषटुप्, ४ साम्नी उष्णिक्, ५,११ साम्नी बृहती (११ भुरिक्) ६ आर्च्यनुष्टुप्, ७ त्रिपदा स्वराडनुष्टुप्, ८ आसुरी गायत्री, ९ साम्नी अनुष्टुप्, १० त्रिपदाऽर्ची त्रिष्टुप्, १३ त्रिपदाऽर्ची पङ्क्तिः (७ पञ्चपदा विराट् पुरस्ताद्बृहती, ८ साम्न्यनुष्टुप् वा) य॒ज॒मा॒न॒ब्रा॒ह्म॒णं वा ए॒तदति॑थिपतिः कुरुते॒ यदा॑हा॒र्याऽणि॒ प्रेक्ष॑त इ॒दं भू॑या३ इ॒दा३मिति॑

(2) 18-30 (1-13) 1 virāṭ purastādbṛhatī, 2, 12 sāmnī triṣṭup, 3 āsurī anuṣaṭup, 4 sāmnī uṣṇik, 5,11 sāmnī bṛhatī (11 bhurik) 6 ārcyanuṣṭup, 7 tripadā svarāḍanuṣṭup, 8 āsurī gāyatrī, 9 sāmnī anuṣṭup, 10 tripadā'rcī triṣṭup, 13 tripadā'rcī paṅktiḥ (7 pañcapadā virāṭ purastādbṛhatī, 8 sāmnyanuṣṭup vā) yajamānabrāhmaṇaṃ vā etadatithipatiḥ kurute yadāhāryā'ṇi prekṣata idaṃ bhūyā3 idā3miti

हिन्दी अर्थ

कांऽ € । सु०:६. श्रथवेवेद॑-मष्य १ समानि यस्य रोमानि यनुहैद॑यमुच्यतं परिस्तरंणमिद्धविः ॥२॥ ...: (यस्य) जिस श्रतिथि' के (लोमानि) लोम ' (सामानि) सामवेद॑कै सामगान ई, श्रौर (हृदथम्) हदय (यजुः उच्यते) यजुर्वेद कहा जाता हैः लोमानि सामगान द्वारा लोमहर्षेण होता है हृदय, . रक्तप्रदान

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय 9

श्लोक 6.1-3

३०॥ (३) ३१-३९ (१-९) १-६, ९ त्रिपदा पिपीलिकमध्या गायत्री, ७ साम्नी बृहती, ८ पिपीलिकमध्योष्णिक्।इ॒ष्टं च॒ वा ए॒ष पू॒र्तं च॑ गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

30|| (3) 31-39 (1-9) 1-6, 9 tripadā pipīlikamadhyā gāyatrī, 7 sāmnī bṛhatī, 8 pipīlikamadhyoṣṇik| iṣṭaṃ ca vā eṣa pūrtaṃ ca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

९४ भ्रथवंवेद-भाष्य कां०.६। सुऽ ६ भ्रतिथिपति (यद् श्रभिवदति) अतिथयो को अभिवादन करता है मानो जल लाने की मांग करता है मानो (श्रपः) यज्ञ निमित्त उदक को (प्रण- यति) प्राप्त करता है ।

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय 9

श्लोक 6.1-4

३९॥ (४) ४०-४४ (१-१०) १-४ प्राजापत्यानुष्टुप्, २-५ त्रिपदा गायत्री, ९ भुरिक्, १० चतुष्पदा प्रस्तारपङ्क्तिः।स य ए॒वं वि॒द्वान् क्षी॒रमु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

39|| (4) 40-44 (1-10) 1-4 prājāpatyānuṣṭup, 2-5 tripadā gāyatrī, 9 bhurik, 10 catuṣpadā prastārapaṅktiḥ| sa ya evaṃ vidvān kṣīramupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

लाए जते हँ (ताः एव ताः) वेही वेदँ जोकि भ्रतिथि यज्ञ के निमित्त (यः एव) जो ही (श्ररनीषोमीयः पशुः वध्यते) भग्नि भौर सोम देवताक पशु बान्धा जाता है (सः एव सः) वह ही वह है । भौर हवि के रखने के गृहो को ही (कल्पयन्ति) तय्यार करते है । ,

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय 9

श्लोक 6.1-5

४४॥ (५) ४५-४८ (१-१०) १ साम्नी उष्णिक्, २ पुर उष्णिक्, ३ साम्नी भुरिग्बृहती, ४ ६, ९ साम्नी अनुष्टुप्, ५ त्रिपदा निचृद्विषमा नाम गायत्री, ७ त्रिपदा विराड् विषमा नाम गायत्री, ८ त्रिपदा विराडनुष्टुप्।तस्मा॑ उ॒षा हिङ्कृ॑णोति सवि॒ता प्र स्तौ॑ति

44|| (5) 45-48 (1-10) 1 sāmnī uṣṇik, 2 pura uṣṇik, 3 sāmnī bhurigbṛhatī, 4 6, 9 sāmnī anuṣṭup, 5 tripadā nicṛdviṣamā nāma gāyatrī, 7 tripadā virāḍ viṣamā nāma gāyatrī, 8 tripadā virāḍanuṣṭup| tasmā uṣā hiṅkṛṇoti savitā pra stauti

हिन्दी अर्थ

(पुरा-परिवेषात्) मुरूय मोजन परोसने से पहिले (यद्) जो (खादम् क वस्तु (भ्राहरन्ति) भ्राहार रूप में लाति है ( तौ) वे दो (पुरोडाशौ परोडाशौ-तण्डल को पीस कर मटूरो को सी गोल- केदो (बरीहयः यवाः) घान श्रौर जौँ (ये) जौ (निसप्यन्ते) - निकाल कर लाए जति.है, (ते) वे (भ्ंशवः एव ) सोम ग्नोषधिं के र हीरहै।

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय 9

श्लोक 6.1-6

४८॥ (६) ४९-६२ (१-१४) १ आसुरी गायत्री, २ साम्नी अनुष्टुप्, ३,५ त्रिपदार्ची पङ्क्तिः, ४ एकपदा प्राजापत्या गायत्री, ६-११ आर्ची बृहती, १२ एकपदाऽऽसुरी जगती, १३ याजुषी त्रिष्टुप्, १४ एकपदाऽऽसुरी उष्णिक्।यत् क्ष॒त्तारं॒ ह्वय॒त्या श्रा॑वयत्ये॒व तत्

48|| (6) 49-62 (1-14) 1 āsurī gāyatrī, 2 sāmnī anuṣṭup, 3,5 tripadārcī paṅktiḥ, 4 ekapadā prājāpatyā gāyatrī, 6-11 ārcī bṛhatī, 12 ekapadā''surī jagatī, 13 yājuṣī triṣṭup, 14 ekapadā''surī uṣṇik| yat kṣattāraṃ hvayatyā śrāvayatyeva tat

हिन्दी अर्थ

(शपंम्) छाज है (पवित्रम्). सोमरस के छानने का सधन, (तुषाः) व्रीहि के कूटनें पर प्राप्तं छिलके हँ (ऋजीषा) सोम श्रोषधि के पीसने पर बच्चे छिलके, (भ्रापः) जल है (ग्रभिषवणीः) सोम भ्रोषधि पीसनेके लिये कुम्मियां हँ (द्रोणकलशः) सोमरस के कंाष्ठ-कलंसै, (पात्राणि) जल

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय 9

श्लोक 6.2

सामा॑नि॒ यस्य॒ लोमा॑नि॒ यजु॒र्हृद॑यमु॒च्यते॑ परि॒स्तर॑णा॒मिद्ध॒विः

sāmāni yasya lomāni yajurhṛdayamucyate paristaraṇāmiddhaviḥ

हिन्दी अर्थ

रथव. ६।४।७ में “स य एवं विद्धान् मांसमुपसिच्योपहरति" द्वारा मांसोप- सेचन द्वारा भी मांस के रस की . फ़लक्र मालूम पड़ती है । परन्तु इस मत्र ७.मे मु प्रामिक्षा का वर्णन प्रतीत होता है। गमं दूष. भ जब दधिं डाली . जाती है तनं दश्च फट कर ओ पनीर होता .है वह् “श्रामिक्षा"“ कहां जाता है । इस भ्रामिक्षा मे दो तत्तत होते है, (१) दुग्ध करा रस, (२) तथा पनीर। : भ्रामिक्षाःकाः उपसेचन है । इस के दारां - स्वादुं मी.बनजातादहै, श्रौर पौष्टिकपनीर (मांस) भी खाया, जाता, है। भरथवं० €।।४; तथा श्रा +मिंषु (सेचने, भ्वादिः) 1

English

He lives himself, etc. The man who knows the season called the Rising takes to him- self the rising fame, his hated

अध्याय 9

श्लोक 6.2-2

१८॥ यदाह॒ भूय॒ उद्ध॒रेति॑ प्रा॒णमे॒व तेन॒ वर्षी॑यांसं कुरुते

18|| yadāha bhūya uddhareti prāṇameva tena varṣīyāṃsaṃ kurute

हिन्दी अर्थ

' ११४ प्रथवेवेद-भाष्यं कां० ९ । सु० ६ प महत्त्व को जानता है, भरौर (सर्पिः) पिघला घृत (उपसिच्य) डाल कर (उपहरति) उपहारखूप मेँ भ्रननन देताहैः ८ करता है, या स्वाधिकार में कर लेता है, (तावत्) उतना फलं (भ्रनेन)

English

The man who knows the season called the Rising takes to him- self the rising fame, his hated rival’s rising fame.

अध्याय 9

श्लोक 6.2-3

३१॥ पय॑श्च॒ वा ए॒ष रसं॑ च॒ गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

31|| payaśca vā eṣa rasaṃ ca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

महत्त्वं को जानता है, भ्रौर (मधु) शहद या ० (उपसिच्य) संच कर, डाल कर (उपहरति) उपहाररूप में भ्रन्न प्रदान करता है, या स्वाधिकार मे कर लेता है (तावत ) उतना फल (श्रनेन) इस भ्रतिथि- :§ यही भावना भ्रन्य मन्त्रं म भी जाननी चाहिए ।

English

The Goat Panchaudana in this Rising season. The man who knows the season called Surpassing takes to him- self thé conquering fame, his

अध्याय 9

श्लोक 6.2-4

याव॑दग्निष्टो॒मेने॒ष्ट्वा सुस॑मृद्धेनावरु॒न्धे ताव॑देने॒नाव॑ रुन्धे

yāvadagniṣṭomeneṣṭvā susamṛddhenāvarundhe tāvadenenāva rundhe

हिन्दी अर्थ

को० ९। सु० ६ भयवेवेद्-माष्यु ९०५ डाल कर (उपहरति ) उपहारसूप मेँ ्रन्न प्रदान करता है (सः) वह । -करता या स्वाधिकार मेँ कर लेता है (तावत्) उतना फलं (श्रनेन ) इस

English

hated rival’s conquering fame. The Goat Panchaudana is this Conquering season.

अध्याय 9

श्लोक 6.2-5

बृह॒स्पति॑रू॒र्जयोद्गा॑यति॒ त्वष्टा॒ पुष्ट्या॒ प्रति॑ हरति॒ विश्वे॑ दे॒वा नि॒धन॑म्

bṛhaspatirūrjayodgāyati tvaṣṭā puṣṭyā prati harati viśve devā nidhanam

हिन्दी अर्थ

महत्त्व को जानता है, भौर (उदकम्, उपसिच्य ) उदकं सींच कर (उपह- अतिथिप्रति जो किक्षीर रादि के उपसेचन देने में भ्रसमरथ ह, वह् १. देखो पर्याय ३ 1 ९ २९ की व्याख्या । तथा मांसम्-- 16 68; १.

English

He lives himself, he verily burns up his hated rival’s fame Who gives the Goat Panchaudana illumined with a priestly fee.

अध्याय 9

श्लोक 6.2-6

४९॥ यत् प्र॑तिशृ॒णोति॑ प्र॒त्याश्रा॑वयत्ये॒व तत्

49|| yat pratiśṛṇoti pratyāśrāvayatyeva tat

हिन्दी अर्थ

का उतना ही भ्रभिप्राय सममना उचित होगा जितना कि इन केः यौगिकार्थो होनी चाहिए । यथा “श्रग्निनायक परमेदवर"” (यजुः ३२।१) के स्तावक प्रति भात्मसमपेण करके जितना फल प्राप्त होता है उतना फल भतिथि-

English

He cooks the Goat and the five boiled rice messes. May the uni- ted Quarters, all accordant, and intermediate points, accept him from thee.

अध्याय 9

श्लोक 6.3

यद् वा अति॑थिपति॒रति॑थीन् प्रति॒पश्य॑ति देव॒यज॑नं॒ प्रेक्ष॑ते

yad vā atithipatiratithīn pratipaśyati devayajanaṃ prekṣate

हिन्दी अर्थ

पूवक (दष्ट्वा) परभेदवरदेव के पुजन, उस. के संग तथा उस के प्रति कां० ९।.सु०.६. भरथर्ववेद-माष्य १७७. दरकट) का वहन करता है। इस भावना सहित चित्त को ब्रह्म म लीन

English

A glorification of hospitable reception of guests Whoso will know Prayer with immediate knowledge, whose mem- bers are the stuff, whose

अध्याय 9

श्लोक 6.3-2

१९॥ उप॑ हरति ह॒वींष्या सा॑दयति

19|| upa harati havīṃṣyā sādayati

हिन्दी अर्थ

का फल कहा है कि “श्रनडवान् दुहे सुकृतस्य लोके" (भ्रव ० ४।१६।४), अर्थात् संसार-शकट का वहन करने वाला उपासकं के लिये, “सुकरो के लोकं में “दुहे” फलप्रदान करता है, भ्रानन्द रस ॒का दोहन करता है" उपासना की रात्रियों के सम्बन्ध मे कहा कि- है। श्रौर.जिस में भूत जागते है.वह रात्रि है. ्रष्टा-मुनि के.लिये । इस २४ धण्टोंके दिनके लिये ्रयुक्त ह्राद इन दिनों की रात्रियोंमें

English

Whoso will know Prayer with immediate knowledge, whose mem- bers are the stuff, whose spine the verses:

अध्याय 9

श्लोक 6.3-3

३२॥ ऊ॒र्जां च॒ वा ए॒ष स्फा॒तिं च॑ गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

32|| ūrjāṃ ca vā eṣa sphātiṃ ca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

समर्पण करके जितना फल मिलता है, उतना फल भरतिथि की सेवा दारा भ्रतिथि सेवा सामाजिक धमं है । भतः इस के माहात्म्य का वणन हृभा है! वेद ते सामाजिक धमं को सर्वंधेष्ठ घमं माना है । . है । यथा ““भरहृ्व कृष्णमहरजुं नं च” .(ऋ० ६।६।१) मे निरक्त म काह किं

English

Whose hairs are psalms, whose heart is called the Yajus, whose coverlet is verily oblation— Verily when a host looks at his guests he looks at the place of sacrifice to the Gods.

अध्याय 9

श्लोक 6.3-4

४०॥ स य ए॒वं वि॒द्वान्त्स॒र्पिरु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

40|| sa ya evaṃ vidvāntsarpirupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

(तस्म) उस भतिथिपति के लिये (उषाः) उषा-काल (हिङ्करोति ) - (बहस्पतिः ऊ्जंया उद्गायति) बृहस्पति का काल बल पूवक ऊंचागान भरतिहार करता. है, (विष्वेदेवाः). समप्रदेवो का काल (निधनम्) साम की

English

When he salutes them reverently he undergoes preparation for a religious ceremony: when he calls for water, he solemnly brings sacrificial water.

अध्याय 9

श्लोक 6.3-5

नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

nidhanaṃ bhūtyāḥ prajāyāḥ paśūnāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

भरवयवों वाला सामगान होता ै, (छान्दोग्य उप० २।१-७) । हिङ्कार सामानं की सम्पुणेता ।.उषा-काल है दिन कां प्रारम्भ काल । सविता-काल् है जब किं चुलोकरमेतो प्रकाश हो भ्नौरं पृथिवी परं श्रभी तमसं । बृह॒स्पतिं काल है मध्याह्ञ काल, जब कि दिनं पूरे यौवन मेँ होता है । तवष्टाकाकाल

English

The water that is solemnly brought at a sacrifice is this same water. The libation which they bring; the sacrificial victim dedicated to Agni and Soma which is tied

अध्याय 9

श्लोक 6.3-6

५०॥ यत् प॑रिवे॒ष्टारः॒ पात्र॑हस्ताः॒ पूर्वे॒ चाप॑रे च प्र॒पद्य॑न्ते चम॒साध्व॑र्यव ए॒व ते

50|| yat pariveṣṭāraḥ pātrahastāḥ pūrve cāpare ca prapadyante camasādhvaryava eva te

हिन्दी अर्थ

विद्वेदेवाः का कालं है जबकि द्युलोक मे सब तारे चमक रहे हो । यथा- उषा का काल हिङ्कार । सविता का काल प्रस्ताव । बृहस्पति का करं ९। सु० ६ भ्रथववेद-भाष्य १०९

English

to the post, that, verily, is this man. When they arrange dwelling-rooms they arrange the sacred chamber and the shed for housing

अध्याय 9

श्लोक 6.4

यद॑भि॒वद॑ति दी॒क्षामुपै॑ति॒ यदु॑द॒कं याच॑त्य॒पः प्र ण॑यति

yadabhivadati dīkṣāmupaiti yadudakaṃ yācatyapaḥ pra ṇayati

हिन्दी अर्थ

मो मानो हैनिक काल, सामगान करता है । यह कालिकगान ह भर्थात् सुय भादि का “देवत सामगान” वणित होगा । : निधने भूत्याः अजाया; पशुनां मवति य पं वेदं ॥५॥ ४६

English

What they spread upon the floor is just Sacrificial Grass. With the couch that the men bring, he wins for himself the world of Svarga. The pillow-coverings that they bring are the green sticks that surround the sacrificial altar.

अध्याय 9

श्लोक 6.4-2

२०॥ तेषा॒मास॑न्नाना॒मति॑थिरा॒त्मन् जु॑होति

20|| teṣāmāsannānāmatithirātman juhoti

हिन्दी अर्थ

सुयं (हिङ्कृणोति) हिड् शन्द का उच्चारण करतां है, (संगवः) .ररिमयो सामगान कीः सम्पुणता करता है। . . (य एवं वेद). जो. यहस्थी या -भ्रतिथिपति इस प्रकारः जनिता है वहः

English

With the couch that the men bring, he wins for himself the world of Svarga. The pillow-coverings that they bring are the green sticks that surround the sacrificial altar.

अध्याय 9

श्लोक 6.4-3

३३॥ प्र॒जां च॒ वा ए॒ष प॒शूंश्च॑ गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

33|| prajāṃ ca vā eṣa paśūṃśca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

भवति निधिरूप हो जाता है। मन्त्र मे सूयं के सामगान काः वर्णन हूभरा है । (तस्म). उस अतिधिपति के लिये (श्रभ्नः भवन्) मेष होता हृभरा (निधनम्) सामगान को सम्पूणंता करतां है। ॥ न . (यः एवं विद्वान्) जो भ्रतिथिपति इस मकारः जानता है वह॒ ;

English

The ointment that they bring for injunction is just clarified liquid butter. The food they bring before the general distribution represents the two sacrificial cakes of rice

अध्याय 9

श्लोक 6.4-4

याव॑दतिरा॒त्रेणे॒ष्ट्वा सुस॑मृद्धेनावरु॒न्धे ताव॑देने॒नाव॑ रुन्धे

yāvadatirātreṇeṣṭvā susamṛddhenāvarundhe tāvadenenāva rundhe

हिन्दी अर्थ

पहिले “श्रतिहरति" का वर्णन या.तो भ्रथववेदपाटी द्वारा या छापे खाने दवारा हृश्रा प्रतीत होता है । यह स्थान विपर्यास है । । निषनं भूत्य; भरना; पदन. च भ॑वति य एवं वेद॑ ॥२०॥ ४. मानपूर्वेक देखता है (हिडकृणोति) वह हिड शब्द का उच्चारण करता

English

meal. When they call the man who prepares food they summon the preparer of oblation.

अध्याय 9

श्लोक 6.4-5

४५॥ तस्मा॑ उ॒द्यन्त्सूर्यो॒ हिङ्कृ॑णोति संग॒वः प्र स्तौ॑ति

45|| tasmā udyantsūryo hiṅkṛṇoti saṃgavaḥ pra stauti

हिन्दी अर्थ

मांग करता है वह (उद्गायति) उच्चैः गान (उद्गीथ) करता है । (उपहरति) उदक को जो उपहार सूप मेँ देता है वह॒ (प्रति हरति) प्रतिहार कंरता है; सामगान का उप संहार करता है, (उच्छिष्टम्) खाने के परचात् जो बच जाता है (स्थाली आदि वर्तन) वह. (निषनेम्) साम- गान की सम्पू्णेता है । . "1 1 सान्) सम्पत्ति का, ्रशुधों का (निधनम् भवति) .निधिरूप

English

The grains of rice and barley that are selected are just filaments of the Soma plant. The pestle and mortar are really the stones of the Soma press.

अध्याय 9

श्लोक 6.4-6

५१॥ तेषां॒ न कश्च॒नाहो॑ता

51|| teṣāṃ na kaścanāhotā

हिन्दी अर्थ

. १ मेष मे-जबः पानी मरा रहता है तो भारी होने से मेव वायुमण्डलं के नीचे उपरके स्तरो चढ़ जाता है। . श क ९", ऋ क्षता"=ग्रीहि से तण्डुले तय्यार कर, उन का . परिपाक करने वाला सेवक । उधोह श्रौर ॒समृह.को “क्षत्तारौ” कहा है (रथं ० ३।२४।७) ।

English

The winnowing-basket is the filter, the chaff the Soma dregs, the water, the pressing-gear. Spoon, ladle, fork, stirring-prong are the wooden Soma tubs; the earthen cooking-pots are the

अध्याय 9

श्लोक 6.5

या ए॒व य॒ज्ञ आपः॑ प्रणी॒यन्ते॒ ता ए॒व ताः

yā eva yajña āpaḥ praṇīyante tā eva tāḥ

हिन्दी अर्थ

. (यत्) जब. (परिष्टारः) . परोसने वाले, (पात्रहस्ताः) परोसने के भागे की भ्नोर जाते ह तब (ते) वे (चमसाध्वर्यवः एंव) यज्ञिय चमसो के .११२ . अथववेद-माष्य करा०. ९। सु९ ९

English

He brings oblations: he makes the men sit down. As the guest of the seated company he himself offers up sacrifice. With ladle, with hand, in life, at the sacrificial post, with cry of

अध्याय 9

श्लोक 6.5-2

२१॥ स्रु॒चा हस्ते॑न प्रा॒णे यूपे॑ स्रुक्का॒रेण॑ वषट्का॒रेण॑

21|| srucā hastena prāṇe yūpe srukkāreṇa vaṣaṭkāreṇa

हिन्दी अर्थ

(तेषाम्) उन परोसने बालो म (कः चन) कोई भी (ब्रहोतान) न द्मगनिहोत्र करने वाला नहीं होता । यो को खाना परोस कर (गृहान् उप उदेति) समीप के धरो पर् चृता है

English

utensils he says, More here t yet more here. When he says, Bring out more, he lengthens his life thereby.

अध्याय 9

श्लोक 6.5-3

३४॥ की॒र्तिं च॒ वा ए॒ष यश॑श्च गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

34|| kīrtiṃ ca vā eṣa yaśaśca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

उहैति, अवैति “उद्” का भ्रभिप्राय है ऊपर, भौर श्रव. का काला है, “श्रव से प्रतीत होता है कि स्नान गृह. निचारई पर है भ्रथवा उदु भ्रौर भव केवलः पादपूर्ति के लिये प्रयुक्त हुए है

English

He brings oblations: he makes the men sit down. As the guest of the seated company he himself offers up sacrifice.

अध्याय 9

श्लोक 6.5-4

४१॥ स य ए॒वं वि॒द्वान् मधू॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

41|| sa ya evaṃ vidvān madhūpasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

भ्रतिथिपति (यत्). जो (सभागयति) -्रन्न बाटता है (दक्षिणाः सभा- गयति) मनो दक्षिणाए, बाटता है,. (यत्) जो (भ्रयुतिष्ठते) वापिस ' जाते हए प्रततिथियों के.पीछे या साथ स्थित होता है (तत्) वह (उदवस्यति एव) भ्रतिथियज्ञ का भ्रवसानः करता है, उसे समाप्त करता है । जो कुछ भट करता है वंह॒दक्षिणाए भेट करता है ।-यज्ञ मे द्क्षिणाए' तो

English

With ladle, with hand, in life, at the sacrificial post, with cry of Ladle! with exclamation of Vashat!

अध्याय 9

श्लोक 6.5-5

म॒ध्यन्दि॑न॒ उद्गा॑यत्यपरा॒ह्णः प्रति॑ हरत्यस्तं॒यन् नि॒धन॑म्।नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

madhyandina udgāyatyaparāhṇaḥ prati haratyastaṃyan nidhanam| nidhanaṃ bhūtyāḥ prajāyāḥ paśūnāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

नानाविघ है, (उपहूतः; उपहूतः). ब्रार-बार . निमन्तित हुमा (मक्षयति) चुका है, रौर पृथिवी पर जीवन्मुक्तावस्था में वास कर रहा है । पृथिवी- वासी उसे बार-बार निमन्त्रित करते है भ्रौर वह उपहारख्पं मे दिये.उन रूपम्) नानाविध है, (उपहृतः, उपहूतः) बार-बार निमन्वित हुभरा (मक्ष- यति) भोगो का भक्षण करता है, भोग भोगता है ।

English

Now these guests, as priests beloved or not beloved, bring one to the world of Svarga. He who hath this knowledge should not eat hating, should not eat the food of one who hates

अध्याय 9

श्लोक 6.5-6

५२॥ यद् वा अति॑थिपति॒रति॑थीन् परि॒विष्य॑ गृ॒हानु॑पो॒दैत्य॑व॒भृथ॑मे॒व तदु॒पावै॑ति

52|| yad vā atithipatiratithīn pariviṣya gṛhānupodaityavabhṛthameva tadupāvaiti

हिन्दी अर्थ

(दिवि) ध लोक मे स्थित ॒हुभ्रा (सः) वह भरतिथिपति, (तस्मिन्) उस भोज के निमित्त (यद्) जो कि (दिवि) धुलोक में (विदवरूपम्) नाना विष है, (उपहूतः, उपहूतः) बार-बार निमन्तवित हृभ्रा (भक्षयति) भोगो का भक्षण करता है, भोगों को मोगता है । । : भोज के निमित्त (यद्) जोकि (देवेषु) देवौ मे (विश्वरूपम्) नानाविष है, (उपहूतः, उपहूतः) बार-बार ॒निम्रन्त्रित हरा ( भक्षयति) भोगो का भक्षण करता है, भोगों को भोगता है ।

English

him, nor of one who is doubt- ful, nor of one who is undecided. This man whose food they eat hath all his wickedness blotted out.

अध्याय 9

श्लोक 6.6

यत् तर्प॑णमा॒हर॑न्ति॒ य ए॒वाग्नी॑षो॒मीयः॑ प॒शुर्ब॒ध्यते॒ स ए॒व सः

yat tarpaṇamāharanti ya evāgnīṣomīyaḥ paśurbadhyate sa eva saḥ

हिन्दी अर्थ

(लोकेषु) विविध लोकों मँ स्थित हृभ्रा (सः) वह॒ श्रतिथि पति, (तरिमन्) उस भोज के निमित्त (यद्) जोकि (लोकेषु) विविध लोकों मेँ (विश्वरूपम्) नानाविध है, . (उपहृतः, उपहतः) बार-बार निमन्त्रित हृभ्रा (भक्षयति) भोगों का भक्षण करता है, भोगों को भोगता है । (सः) वह भरतिधिपति (उपहूतः, उपहूतः) सत्कार पूरवैक निमन्वित पराप्त होता है (भमुम्) उस लोक को ।

English

whereon they cook food is the South- ern Sacrificial Fire. Now that man who eats before the guest eats up the sacrifice and the merit of the house. He devours the milk and the sap:

अध्याय 9

श्लोक 6.6-2

२२॥ ए॒ते वै प्रि॒याश्चाप्रि॑याश्च॒र्त्विजः॑ स्व॒र्गं लो॒कं ग॑मयन्ति॒ यदति॑थयः

22|| ete vai priyāścāpriyāścartvijaḥ svargaṃ lokaṃ gamayanti yadatithayaḥ

हिन्दी अर्थ

लयौ तिंष्मतो छोकान् ज॑यति य एवं षेदं ॥१४॥ ६२ (वेद) जानता है तथा तदनुसार. भ्रतिथियज्ञ करता है वह (ज्योष्मतो . लोकान्) ज्योतिमंय लोकों पर (जयति) विजय पा लेता है उन मेँ यथेच्छ विचरता तथा संमान पाता है । लिङ्खी हृभा है, भौर मन्त्र १९-२४ मे गोजातीय बेल का वर्णेन हृभरा है।

English

prepared religious rites, and mental power to complete the arranged sacrifice. The arranged sacrifice of the man who offers food is a sacrifice to Prajāpati.

अध्याय 9

श्लोक 6.6-3

३५॥ श्रियं॑ च॒ वा ए॒ष सं॒विदं॑ च गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

35|| śriyaṃ ca vā eṣa saṃvidaṃ ca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

रेवतीः ग्रीवाः कृत्तिकाः स्कन्धः (३) विद्व को गोरूप कहने का प्रयोजन, ब्रह्माण्डे“ उक्ति का भी समथंनहोताहै। ॥

English

The man who offers food follows the steps of Prajāpati. The fire of the guests is the Āhavaniya, the fire in the dwelling is the Gārhapatya, that

अध्याय 9

श्लोक 6.6-4

याव॑त् सत्त्र॒सद्ये॑ने॒ष्ट्वा सुस॑मृद्धेनावरु॒न्धे ताव॑देने॒नाव॑ रुन्धे

yāvat sattrasadyeneṣṭvā susamṛddhenāvarundhe tāvadenenāva rundhe

हिन्दी अर्थ

रूपमे माना है, ओर गौ के भ्रवयवोंको विघेयरूप म । भ्रतः विदव को गोरूप कहा है, नकिं गौ को विइवरूप । “ददन भन्तरिकास्थानी है (निस्त ७।२।५) । भ्र॑तः यह विदत् है । " ५ बोलती है, मानो कड़कड़ाती है, मुख में । (३) लहररूप मे गतिशीला । इस तीसरे ११०८ भ्रथवंवेद-माष्य कां० ६॥ सु°७

English

whereon they cook food is the South- ern Sacrificial Fire. Now that man who eats before the guest eats up the sacrifice and the merit of the house.

अध्याय 9

श्लोक 6.6-5

४६॥ तस्मा॑ अ॒भ्रो भव॒न् हिङ्कृ॑णोति स्त॒नय॒न् प्र स्तौ॑ति

46|| tasmā abhro bhavan hiṅkṛṇoti stanayan pra stauti

हिन्दी अर्थ

नाद़ी.का रम्भ होता है । यह नाड़ी समग्र शरीर का नियमन करती है, ..‡ जाती है, अतः यह् मृत्युर्य भी है । सोमो रानां मरतिष्को. चौरुतरहवुः पथिभ्य धरहुतुः ॥२॥

English

He devours the milk and the sap: And the vigour and prosperity.

अध्याय 9

श्लोक 6.6-6

५३॥ यत् स॑भा॒गय॑ति॒ दक्षि॑णाः सभागयति॒ यद॑नु॒तिष्ठ॑त उ॒दव॑स्यत्ये॒व तत्

53|| yat sabhāgayati dakṣiṇāḥ sabhāgayati yadanutiṣṭhata udavasyatyeva tat

हिन्दी अर्थ

यलोक (उत्तरहनुः ) उपर का जबड़ा है, (पृथिवी भ्रधरहनुः ) पृथिवी ए विचुज्जिहवा परतो दन्तां रेवतीगीषाः छृिका स्कन्धः घमां वहः । ३ शकट का जुभ्रा (०६६०) रखा जाता है ।

English

And the progeny and the cattle: And the fame and reputation.

अध्याय 9

श्लोक 6.7

यदा॑वस॒थान् क॒ल्पय॑न्ति सदोहविर्धा॒नान्ये॒व तत् क॑ल्पयन्ति

yadāvasathān kalpayanti sadohavirdhānānyeva tat kalpayanti

हिन्दी अर्थ

मर्तः = ये ७८७ == ४९ प्रकार क मत् हैँ । यजुर्वेद १७।८०-५४५ ये म सति-सात मर्तो के नाम दिये है। महीधराचा्यं लिखते हँ “शुक्रज्था- २५) ।. रदिमियां नोकीली होती है । इस साम्य से मर्तो को मन्त्र ३ में

English

He who pours out mead and offers it wins for himself thereby as much as he gains by the performance of a very successful Sattrasadya sacrifice.

अध्याय 9

श्लोक 6.7-2

२३॥ स य ए॒वं वि॒द्वान् न द्वि॒षन्न॑श्नीया॒न्न द्वि॑ष॒तोऽन्न॑मश्नीया॒न्न मी॑मांसि॒तस्य॒ न मी॑मां॒समा॑नस्य

23|| sa ya evaṃ vidvān na dviṣannaśnīyānna dviṣato'nnamaśnīyānna mīmāṃsitasya na mīmāṃsamānasya

हिन्दी अर्थ

हि: का जुप्रा ०८० स्थापित किया जाता है कां० ९। सू० ७ , भ्रथवंवेद-माष्य ११९ ही पूर्वापिरभाव रेवतीः मीनराहि मे श्रौर कृत्तिकाः मेषराशि में

English

When the guest hath eaten he should eat. This is the rule for the animation of the sacrifice and the preservation of its continuity.

अध्याय 9

श्लोक 6.7-3

३६॥ ए॒ष वा अति॑थि॒र्यच्छ्रोत्रि॑य॒स्तस्मा॒त् पूर्वो॒ नाश्नी॑यात्

36|| eṣa vā atithiryacchrotriyastasmāt pūrvo nāśnīyāt

हिन्दी अर्थ

किया है किं भ्रथवंवेदानुसार राशि चक्र की श्रन्तिमि राशिमीनन हौ कर मेषराशि पडती है, क्योंकि भ्रंथवेवेदानुसार कृत्तिकाः या वृषराि सेः राशिचक्रका या वषंका भरारम्म माना दहै । यथा “सुहवमग्ने कृत्तिका मरनूभरूत होने लगती है, भौर शीतकाल के दोत्य.की संमाप्ति हो जाती है 1 प्रकार कृत्तिकाः नक्षत्र या वृषरारि, सौर रथ के वहन मे “वहः का कोम करती है । “वहः” है बेल का ककुद् ण जिस के. ्ग्रभाग पर शकट

English

Now the sweetest portion, the produce of the cow, milk, or flesh, that verily he should not eat. The man who having this knowledge pours out milk and offers it wins for himself as much

अध्याय 9

श्लोक 6.7-4

४२॥ स य ए॒वं वि॒द्वान् मां॒समु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

42|| sa ya evaṃ vidvān māṃsamupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

गौ के लिये, (विधरणी) विस्तृतं पृथिवी दहै (निवेष्यः) गौके बैठने तथा विश्नाम करने का स्थान गोशाला । शयेनः क्रोडो रनतरिं पास्ये? बशपतिः कठद् तीः कीकसाः ।५।

English

thereby as he gains by the perfor- mance of a very successful Agnishtoma sacrifice. The man who having this knowledge pours out clarified butter and offers it wins for himself

अध्याय 9

श्लोक 6.7-5

वि॒द्योत॑मानः॒ प्रति॑ हरति॒ वर्ष॒न्नुद्गा॑यत्युद्गृह्णन् नि॒धन॑म्।नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

vidyotamānaḥ prati harati varṣannudgāyatyudgṛhṇan nidhanam| nidhanaṃ bhūtyāḥ prajāyāḥ paśūnāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

(बृहतीः) बृहती ईह (कीकसाः ) रीढ् की भ्रस्थियां ए भी होता है जोकिं भन्तरिक्ष मे गति करता है, उड़ता है । विद्युत् भी फफड़े, जिन मे ्वास-्रह्वास रूपी वायु रहती है, (२) हृद्य; जिस में कि

English

thereby as much as he gains by the performance of a very successful Atirātra sacrifice. He who pours out mead and offers it wins for himself thereby as much as he gains by the

अध्याय 9

श्लोक 6.7-6

५४॥ स उप॑हूतः पृथि॒व्यां भ॑क्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न् यत् पृ॑थि॒व्यां वि॒श्वरू॑पम्

54|| sa upahūtaḥ pṛthivyāṃ bhakṣayatyupahūtastasmin yat pṛthivyāṃ viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

(श्रथवं ० १०।७।३२) । उदर स्वयं एक थैले जसा है, अन्तरिक्न सदश है, . १ 0 ““बुहुस्पतिः'' एक ग्रह है सौरमण्डल मे । यह ग्रह बड़ा है “बृहतः पतिः” भीगौकी पीठसे ऊपर उठा रहता है, सीगो को छोड़ कर गौ के सब रङ्गो

English

performance of a very successful Sattrasadya sacrifice.

अध्याय 9

श्लोक 6.8

यदु॑पस्तृ॒णन्ति॑ ब॒र्हिरे॒व तत्

yadupastṛṇanti barhireva tat

हिन्दी अर्थ

से ऊचां है । इस लिये बृहस्पति को गौ का कुकद् कहा है । “बृहतीः” यह .4 (निखक्त १०।१।११) । बड़ होने के कारण इसे बृहस्पति कहा है । का ललोतं.है । ज्ञानमय होने के कारणः इसे वेद कहते हँ (विद् ज्ञाने) ।

English

of cattle. He looks at the guests, he utters a gentle sound; he speaks, he signs the prelude; he calls for water, he chants the psalm; he offers the residue of the sacrifice, he takes up the conclusion.

अध्याय 9

श्लोक 6.8-2

२४॥ सर्वो॒ वा ए॒ष ज॒ग्धपा॑प्मा॒ यस्यान्न॑म॒श्नन्ति॑

24|| sarvo vā eṣa jagdhapāpmā yasyānnamaśnanti

हिन्दी अर्थ

फली हई है । सुषुम्णा न ड़ीज्ञान-साधिका है कीकसाः कहा है, भर्थात् गौ के कीकसं “ कां०९ 1 सु° ७: भथवेवेव-माष्य १२१ (देवानाम्) देवँ कौ (पलनीः) पलियां ( पृष्टयः) गौ बेल की पीठ

English

The man who having this knowledge pours out water and offers it obtains a resting-place for the procreation of living beings and becomes dear to living beings, even the man who having

अध्याय 9

श्लोक 6.8-3

३७॥ अ॒शि॒ताव॒त्यति॑थावश्नीयाद् य॒ज्ञस्य॑ सात्म॒त्वाय॑ य॒ज्ञस्यावि॑च्छेदाय॒ तद् व्र॒त॑म्

37|| aśitāvatyatithāvaśnīyād yajñasya sātmatvāya yajñasyāvicchedāya tad vratam

हिन्दी अर्थ

दिव्यगुणी-पतियों के लिये जसे उन की पत्नियां भाश्चय होती ईह वसे मारोद्वहन द्वारा प्राणिजगत् का उपकार करतीहै। : उपसदः है उपग्रह, जोक्रि निज ग्रहो के समीप स्थित हए उन की परि-

English

this knowledge pours out water and offers it. or him Dawn murmurs, and Savitar sings the prelude; Brihas- pati chants with vigour, and

अध्याय 9

श्लोक 6.8-4

याव॑द् द्वादशा॒हेने॒ष्ट्वा सुस॑मृद्धेनावरु॒न्धे ताव॑देनेनाव॑ रुन्धे

yāvad dvādaśāheneṣṭvā susamṛddhenāvarundhe tāvadenenāva rundhe

हिन्दी अर्थ

भरमा (दोषणी) दो सुजाए' ईः महादेव दो बाहृए" ह । करता है । “वरुणः पदनामं” . (निधं ० ५।४। ५।६) भ्रावृणोति रात्रिं स्व- १२२ भ्रथवेवेद-भाष्यं कां० € 1 सुऽ ७

English

Tvashtar joins in with increase; the Visve Devāh take up conclusion. He who hath this know ledge is the abiding-place of welfare, of progeny, and of cattle. For him the rising Sun murmurs, and Early Morning sings the prelude; Noon chants the

अध्याय 9

श्लोक 6.8-5

अति॑थी॒न् प्रति॑ पश्यति॒ हिङ्कृ॑णोत्य॒भि व॑दति॒ प्र स्तौ॑त्युद॒कं याच॒त्युद्गा॑यति

atithīn prati paśyati hiṅkṛṇotyabhi vadati pra stautyudakaṃ yācatyudgāyati

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार “श्रयंमा” भी माध्यमिकः हैवता है । ये दोनों “दोः” है, कन्धों मौर कोटनियों के मध्यवर्ती दौ भाग है । महादेव काः भ्रभिप्राय है देवो कां देव भ्र्थात् परमेदवर । सृष्टि रचना मेँ परमेव॑र-की दो बाहु कां वेणेन (यजु १६-१९.),.इन दो बाहों की शक्तियों कों, गौ की बाहृए" कटा है । बाह है .कोहनियो के-ग्रभाग, हाथों समेत । इसके द्वारा गौ की भ्रागे क्री.दो द्ग का कथन मन्त्रे हृब्राहै ˆ ,; : . इन्द्राणी है जवनमदेशा मसद्', वायु है पुछ बहती, वायु (पवमानः) है बाल धरछ' के, पवमानः गच्छन् वायुः (भ्रयरवं° ६।१९। १ सायण) !

English

psalm, Afternoon joins in; the setting Sun takes up the conclusion. He who hath this know ledge is the abiding place of welfare, of progeny, and of cattle. For him the Rain-cloud murmurs when present, sings the pre- lude when thundering, joins in

अध्याय 9

श्लोक 6.8-6

५५॥ स उप॑हूतो॒ऽन्तरि॑क्षे भक्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न् यद॒न्तरि॑क्षे वि॒श्वरू॑पम्

55|| sa upahūto'ntarikṣe bhakṣayatyupahūtastasmin yadantarikṣe viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

“ ;-्रह्य भौर कषतर दो कटिभ्रवेश श्रोणी है, बल है दो ऊद. दो घुटनों केऊपरके भागः. कटिग्रदेश तक ऊर = उर्वोरोजः (भ्रथर्व० १९।- ६०।२) । कटिप्रदेश-= गौ की पिछली टांगे जहां जुड़ी रहती हँ । कष्ठिकाः = ह + ्स्थिकाः ्रृति भ्दितिः है खुर फा । † देवमाता" (निरुक्त ४।४।२२), सूर्थादि देवो की माता प्रकृति श्रथवा “श्रदितिः -पृथिवी नाम” (निघं० १।१) । -पृथिवी को का त नाम निष 2६) (पृषती शर भ्रमा कहा है,

English

when lightening, chants the psalm when raining, and takes up the conclusion when it stays the downpour. He who hath this knowledge is the abiding- place of welfare, of progeny, and

अध्याय 9

श्लोक 6.9

यदु॑परिशय॒नमा॒हर॑न्ति स्व॒र्गमे॒व तेन॑ लो॒कमव॑ रुन्द्धे

yadupariśayanamāharanti svargameva tena lokamava runddhe

हिन्दी अर्थ

दूसरे के सामने, दो कषितिजों पर होते है, मानो यै उठे हए भरमि के दो स्कन्वस्प हं । (२) पूछकेदहिलतेही पूछ के बाल हिलते है मच्छर के निवारण के लिये । कां9.९।।.सु९.७ भ्रथरववेद-भाष्प् १२३

English

He, having been invited in air, regales, invited, in that which wears all various forms in air. He having been invited in the sky, regales, invited, in that which wears all various forms in the sky.

अध्याय 9

श्लोक 6.9-2

सर्वो॒ वा ए॒षोऽज॑ग्धपाप्मा॒ यस्यान्नं॒ नाश्नन्ति॑

sarvo vā eṣo'jagdhapāpmā yasyānnaṃ nāśnanti

हिन्दी अर्थ

दारा किभमि नापी जाती है" प्रमीयते यया सा प्रमा” । पादो द्वारा भूमि नापी जाती है", “फटे” को ०० (पाद) कहते हैँ! इसं प्रकारं भ्रदिति . (चेतः) चित्त है (हृदयम्). गौ का हृदय, (मेषा) ' प्राशु ग्रहणशंवित स्थूल-भान्त “ ०01071 , (पर्व॑ताः) पव॑त है (प्लारयः) एलारियां, मासि

English

water, he chants the psalm; he offers the residue of the sacrifice, he takes up the conclusion. When he summons the door-keeper he gives instruction.

अध्याय 9

श्लोक 6.9-3

३८॥ ए॒तद् वा उ॒ स्वादी॑यो॒ यद॑धिग॒वं क्षी॒रं वा॑ मां॒सं वा॒ तदे॒व नाश्नी॑यात्

38|| etad vā u svādīyo yadadhigavaṃ kṣīraṃ vā māṃsaṃ vā tadeva nāśnīyāt

हिन्दी अर्थ

„ कुक्षिः पशु की वह ली जिसमे कि. चनाया हुभ्रा चारा एकच्रित'होता १२४ भ्रथववेद-भाष्य काऽ ९ -सू०७ कोधो वृक्कौ मन्युराण्डौ भला शेः ॥१३॥ . . (कषः) कोष है (वृक्कौ) दो गुदे, (न्युः). मनयु है (भाण्डौ) दो

English

He (the door-keeper) pronounces the sacrificial formula in his answer to what he hears. When the attendants with vessels in their hands, foremost and hindmost, come in, they are

अध्याय 9

श्लोक 6.9-4

४३॥ स य ए॒वं वि॒द्वानु॑द॒कमु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

43|| sa ya evaṃ vidvānudakamupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

- करोषमे भरज्ञानाय होता है, रौर मन्यु मे ज्ञानांश होता है । अ.दोनों (नदी) नदी है (सूत्री) नाभिनाल, (वषंस्य पतयः) वर्षा के पति है (स्तनाः ) स्तनः, (स्तनयित्नुः) गजता मेष है (ऊषः) दुगधाशय । रदिमयां या, अन्तरिक्ष है (चमं) गौ की चमडी, (श्रोषधयः लोमानि) भोषधियां हैँ गौ के लोम,

English

just the priests who manage the Soma cups.

अध्याय 9

श्लोक 6.9-5

४७॥ उप॑ हरति॒ प्रति॑ हर॒त्युच्छि॑ष्टं नि॒धन॑म्

47|| upa harati prati haratyucchiṣṭaṃ nidhanam

हिन्दी अर्थ

(देवजनाः) उन्मत्त जन हैँ (गुदाः) गौ की गुदा कँ ्रवयव, (मनुष्याः) परमेदवर को मी. मन्यु कहा है, भौर उससे मन्यु्ी प्रार्थना मीकी गर हं कां० ९। सुऽ७ भ्रथववेदं-भाष्य -१२५

English

Not one of them is incompetent to sacrifice. Or if the host, having offered food to his guest, goes up to the house, he virtually enters the

अध्याय 9

श्लोक 6.9-6

५६॥ स उप॑हूतो दि॒वि भ॑क्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न् यद् दि॒वि वि॒श्वरू॑पम्

56|| sa upahūto divi bhakṣayatyupahūtastasmin yad divi viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

देव पद “दिव्“धातुका रूपदहै। दिव् का भ्रथं “मद” मी होता है (दिवादिः) । भ्रतः देवजनाः उन्मत्त जन । ये गौ के गुदा के समान. है , (निरक्त ३।२।७) । मननपुवक कर्पट बनने या सीनेवाले व्यक्ति अपने देवजनों तथा मनुष्यो से भ्रतिरिक्त प्राणी केवल भोजनपरायण होते है, “्रत्राः होते है भरद् +राः, ग्रतः इन्द उदर कहा है ि

English

bath of purification. When he distributes food he distributes priestly fees; what he performs he asks as favour.

अध्याय 9

श्लोक 6.10

यत् क॑शिपूपबर्ह॒णमा॒हर॑न्ति परि॒धय॑ ए॒व ते

yat kaśipūpabarhaṇamāharanti paridhaya eva te

हिन्दी अर्थ

भोजन परस वाते है चमसाष्वयुः (५९); -परोसने वाल भरनम्नटोत्री न होने चाहिए (५२); अवभृथस्नान (५३) ; ऋत्विजो को दक्षिणा (५४).;. - , १. स्वगं की कामना वाला “यो विघातू" सूक्ते दारा जप करे । एेसा.वित्ियोग ; है । परन्तु सायणाचायं की हस विनियोग से विमति है । वे कहते है कि “यो विद्यात्” , । की सेवा का फल, तथा भ्रतिथियज्ञ की प्रशंसा परक है । -

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय 9

श्लोक 6.10-2

२६॥ स॒र्व॒दा वा ए॒ष यु॒क्तग्रा॑वा॒र्द्रप॑वित्रो॒ वित॑ताध्वर॒ आहृ॑तयज्ञक्रतु॒र्य उ॑पहर॑ति

26|| sarvadā vā eṣa yuktagrāvārdrapavitro vitatādhvara āhṛtayajñakraturya upaharati

हिन्दी अर्थ

यद् वा.भर्पियिपतिरपिथीन् भति पडय॑ति देव॒जैनं भेकते ॥३॥, (यद्). जो (भ्नतिथिपतिः) -अतिथियों की रक्षा करने वाला गृहस्थ तुतः. (देवयजनम् ) देवो के अरति जहां भराहुतियां दरी जाती है उसु यज्ञ- शाला कों (रक्षते) देखता है । ४ ्रति पद्यति=भ्रागत ्रतिथियों मे से प्रत्यक को मानपूवक देखन

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय 9

श्लोक 6.10-3

प्र॒जानां॑ प्र॒जन॑नाय गच्छति प्रति॒ष्ठां प्रि॒यः प्र॒जानां॑ भवति॒ य ए॒वं वि॒द्वानु॑द॒कमु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

prajānāṃ prajananāya gacchati pratiṣṭhāṃ priyaḥ prajānāṃ bhavati ya evaṃ vidvānudakamupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

(यद् उपस्तृणन्ति) जो बिदछछौना विते ह, (तत बहिः एव) वह यज्ञ स्थल मँ कुशास्तरण हीहै। र कां० £ । सु° ६ . श्रथर्ववेद्-भाष्य ९५ न उपरिदश्यन = सोने के लिये ऊंची चारपाई ॥ मानो यह ऊर्ध्वा ॑ दिशा (यद्) जो (करिपूपबहैणम् भराहरन्ति) जो तकिया श्रौर मसनद ला ह 8 परिषयः एव.) वे परिषियां हौ ह । यज्ञ स्थल को (र के साधन र परिषयः=यज्ञ स्थल. को घेरने के लिये चारो प्रोर का चेरा

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय 9

श्लोक 6.10-4

नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

nidhanaṃ bhūtyāḥ prajāyāḥ paśūnāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

(ग्रावाणः एव) सिल-वहा ही है । । ९६ श्रथरवेवेद-माष्य कां9 ६ । सूु-६ उलूखल भौर मुसल ब्रीहि (धाने) को कूट कर तण्डुल तय्यार करने के लिये होते है, श्नौर सिल-वट्रा पीठी पीसने तथा सोमं भोषधि पीस कर सोमरस निकालने के लिये होते है

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय 9

श्लोक 6.10-5

५७॥ स उप॑हूतो दे॒वेषु॑ भक्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मिन् यद् दे॒वेषु॑ वि॒श्वरू॑पम्

57|| sa upahūto deveṣu bhakṣayatyupahūtastasmin yad deveṣu viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

(कृष्णाजिनम्) कृष्णमृग की छाल । है । सोमयाग में वागुदेवताक पात्र होतें है, छोटी-छोटी प्यालियां जिनके हारा सोमरस प्रानी के पात्रों कोवायुकेपा््रोद्वारा शूपित इसलिये कियादहैकि पानी वर्षाहारा

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय 9

श्लोक 6.11

यदा॑ञ्जनाभ्यञ्ज॒नमा॒हर॒न्त्याज्य॑मे॒व तत्

yadāñjanābhyañjanamāharantyājyameva tat

हिन्दी अर्थ

कां9 ९ । सु भ्रथवेवेद-भाष्य :9 करता है (वै) निश्चय से (भ्रतिथिपतिः कुर्ते) भ्रतिथिपति वही करता पड़ताल करता है कि (इदम् भूयः) यहं प्रभूत मातरा में है (इदम् इति) या

English

Who gives the Goat Panchaudana illumined with a priestly fee. Let him not break the victim’s bones, let him not suck the marrow out.

अध्याय 9

श्लोक 6.11-2

२७॥ प्रा॒जा॒प॒त्यो वा ए॒तस्य॑ य॒ज्ञो वित॑तो॒ य उ॑प॒हर॑ति

27|| prājāpatyo vā etasya yajño vitato ya upaharati

हिन्दी अर्थ

श्रतिथिपरति सेवक को (यद् श्राह) जो कहता है कि. (भूयः उद्र) (वर्षीयांसम् कुरुते) प्रवृद्ध करतादहै। यथा “श्रन्तं वै प्राणिनां प्राणः" । कायं का कारण में उपचार हृभरा है

English

Who gives the Goat Panchaudana illumined with a priestly fee. Let him not break the victim’s bones, let him not suck the marrow out.

अध्याय 9

श्लोक 6.11-3

५८॥ स उप॑हूतो लो॒केषु॑ भक्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न्य यल्लो॒केषु॑ वि॒श्वरू॑पम्

58|| sa upahūto lokeṣu bhakṣayatyupahūtastasminya yallokeṣu viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

हवींषि = भ्रतिथिसेवा यतः यज्ञ है, इसलिये भोज्य पदार्थो को हवींषि कहा है । उपहरति = उपहार रूप मे देता है । भ्रात्मत् जुहोति) भरतिथि म्राहृतियां .अ्रपने मे देताहै। सचा हस्तेन भ्ाणे यूषै सुककारेणं वषट्कारेणं ॥५॥ २२

English

Who gives the Goat Panchaudana illumined with a priestly fee. Let him not break the victim’s bones, let him not suck the marrow out.

अध्याय 9

श्लोक 6.12

यत् पु॒रा प॑रि॒वेषात् स्वा॒दमा॒हर॑न्ति पुरो॒डाशा॑वे॒व तौ

yat purā pariveṣāt svādamāharanti puroḍāśāveva tau

हिन्दी अर्थ

१. यूप, य्ञियखम्भा . होता है जिस के साथ युज्ञियपदु बन्धाः जाता है की १ ग हन् त्तिक तुमु क च 11 ॥ २. ५--श्रथवेवेद-भाष्य कं२.६।-सु०.६

English

The five gold pieces, and the five new garments, and the five milch-kine yield him all his wishes.

अध्याय 9

श्लोक 6.12-2

२८॥ प्र॒जाप॑ते॒र्वा ए॒ष वि॑क्र॒मान॑नु॒विक्र॑मते॒ य उ॑प॒हर॑ति

28|| prajāpatervā eṣa vikramānanuvikramate ya upaharati

हिन्दी अर्थ

दवारा उसके जीवनं कौ निष्पाप कर देते है . २. सदुपदेशो दवारा गृहस्थियो को सन्मां दर्शा कर । कां० । सु०-६. भ्रयववेद-भाघ्य ०९६

English

The five gold pieces, and the five new garments, and the five milch-kine yield him all his wishes.

अध्याय 9

श्लोक 6.12-3

५९॥ स उप॑हूत॒ उप॑हूतः

59|| sa upahūta upahūtaḥ

हिन्दी अर्थ

वह् कुसंगी हो कर पापकर्मो मे प्रवृत्त हो सकता है । .-. : सवेदा षा एषं यक्तप्रावाद्रेपेवि नो विवताध्वेर माहूतयदवरतुधे (यः) ज (उपहरति) उपहार रूप मेँ भ्रनन देता है (वं) निश्चय से (एषः) यह संदा ). सब काल (युक्तप्रावा) सिलवटरी को तय्यार रखता

English

The five gold pieces, and the five new garments, and the five milch-kine yield him all his wishes.

अध्याय 9

श्लोक 6.13

यद॑शन॒कृतं॒ ह्वय॑न्ति हवि॒ष्कृत॑मे॒व तद्ध्व॑यन्ति

yadaśanakṛtaṃ hvayanti haviṣkṛtameva taddhvayanti

हिन्दी अर्थ

सेवा के लिये; तय्यार रहना मानो सभी.प्रकार के यज्ञो -ौरं क्तुधों को प्रजपिति सम्बन्धी यज्ञ (विततः) फला .“रहतां है (थः . उपहरति) उपहार रूप. मे.श्रघ्त प्रदान करता रहता है। रक्षा के लिये परमेश्वर रचित संसार-यज्ञ सवकालं होता रहता है ।-जोः द्मतिथिपति सर्वकाल; अंतिधिरयो की सेवा के लिये संनद्धः रहता वहः मानो प्राजापत्य यज्ञ कर रहौ हौता है. .

English

The twain shall not be parted if they give the Goat Panchaud- ana. One world with the re-wedded wife becomes the second hus- band’s home.

अध्याय 9

श्लोक 6.13-2

२९॥ योऽति॑थीनां॒ स आ॑हव॒नीयो॒ यो वेश्म॑नि॒ स गार्ह॑पत्यो॒ यस्मि॒न् पच॑न्ति॒ स द॑क्षिणा॒ग्निः

29|| yo'tithīnāṃ sa āhavanīyo yo veśmani sa gārhapatyo yasmin pacanti sa dakṣiṇāgniḥ

हिन्दी अर्थ

(यः). जो .(उपहरति) . उपहाररूपः मे ; भ्रन्न प्रदान करता है (वै) भ्र्थात् उस का पदानुयायी होता है । , (यः) जो (ग्रतिथिनाम्) भ्रतिथियों की जाठर रमि है (सः) वह्

English

The twain shall not be parted if they give the Goat Panchaud- ana. One world with the re-wedded wife becomes the second hus- band’s home.

अध्याय 9

श्लोक 6.13-3

६०॥ आ॒प्नोती॒मं लो॒कमा॒प्नोत्य॒मुम्

60|| āpnotīmaṃ lokamāpnotyamum

हिन्दी अर्थ

श्राहुतियां दी जाती है, (२) दूसरी भ्रम्नि होती है गाहपत्य, जो कि सदा (१ से ९) १-६, ९ न्रिषदा पिपीलिकमध्या गायत्री; ७ साम्नी बृहतीः; (यः) जो भरतिथिपति (प्रतिथेः) भ्रतिथि से (पुर्वः) पहले (भ्रदनाति) खा लेता है (वे) निद्चय से (एषः) यह (गृहाणाम्) गृहवासियों के

English

The twain shall not be parted if they give the Goat Panchaud- ana. One world with the re-wedded wife becomes the second hus- band’s home.

अध्याय 9

श्लोक 6.14

ये व्री॒हयो॒ यवा॑ निरु॒प्यन्तें॒ऽशव॑ ए॒व ते

ye vrīhayo yavā nirupyanteṃ'śava eva te

हिन्दी अर्थ

भ्रातिभ्यं वंरवदेवदव इष्टमित्यभिधीयते ॥ पुतम् = वापी कूषतडागावि देवतायतनानि च । . कां०.६ । स० ६ परयववेद्-माष्य' १०१. (यः) जो भ्रतिथिपति (भ्रतिथेः पूर्वः श्ररनाति) अतिथि से पहिले खा लेता है । (वै) निश्चय से (एषः गृहाणाम् पयः च, रस च भ्ररनाति) यह गृहवासियों के लिये दघ को भ्नौर रस. को खाता है, विनष्ट करता ह ।

English

A coverlet, a robe, or gold, go to the loftiest sphere of heaven. Himself, the father and the son, the grandson, and the father’s sire,

अध्याय 9

श्लोक 6.14-2

६१॥ ज्योति॑ष्मतो लो॒कान् ज॑यति॒ य ए॒वं वेद॑

61|| jyotiṣmato lokān jayati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

जो श्रतिथिपति श्रतिथिसे पिले खालेताहै, निरचय से वह गृह वासियों की ऊर्जा को भ्रौर वृद्धि को खा. लेता है, विनष्ट करता है । जो श्रतिथिपति श्रतिथि से पहिले खा लेता है, निरुचय से, वह गृह- वासियों की प्रजा को श्रौर पशुभ्रोंकोखा लेता है, विनष्ट कर देता है1. कीपि चवा एष यदाश्च गृ्टाणांमहनति यः पूरवाऽतिथेर- जो भ्रतिथिपति अतिथि से पिले ला लेता है, निदचय से, वह गृह वासि्यो की. कीति भौर यच्ःको खा लेता है, विनष्ट कर देता है ।

English

A coverlet, a robe, or gold, go to the loftiest sphere of heaven. Himself, the father and the son, the grandson, and the father’s sire,

अध्याय 9

श्लोक 6.15

यान्यु॑लूखलमुस॒लानि॒ ग्रावा॑ण ए॒व ते

yānyulūkhalamusalāni grāvāṇa eva te

हिन्दी अर्थ

जो भ्रतिथिपति श्रतिथिसे पहिले खा लेता है वह कीश्री : मौर संविद् कोखालेता है, विनष्ट कर देता है। ऋ १३९. भ्रथेर्ववेद-याष्यः कां०.९ १ सुभ द खाना. दान्तो मरौर मुख. दवारा नहीं. हो सकता, इस लिये “विनाश्च करना यह् भ्रं सुसंगत प्रतीत होता है । ।

English

Mother, wife, her who bore his babes, all the beloved ones I call. The man who knows the season named the Scorching—the Goat

अध्याय 9

श्लोक 6.16

शूर्पं॑ प॒वित्रं॒ तुषा॑ ऋजी॒षाभि॒षव॑णी॒रापः॑

śūrpaṃ pavitraṃ tuṣā ṛjīṣābhiṣavaṇīrāpaḥ

हिन्दी अर्थ

भोजन से पष्िले भोजन करना सभ्यता भ्रौर शिष्टाचार फे विपरीत है। पति को यह निजत्रत. सममना चाहिए. किः वह भ्रतिधि से पुवं मोजनन करे । भ्रतिथिसेवा यज्ञ" रूप है । यज्ञ में देवता को भाहति देने के पहचात् पतद्रा उ. -स्पादीथो यदधिगवं क्षीरं वा. मसं वा तर्देवं

English

Pafichaudana is this scorching season He lives himself, he verily burns up his hated rival’s fame,

अध्याय 9

श्लोक 6.17

स्रुग् दर्वि॒र्नेक्ष॑णमा॒यव॑नं द्रोणकल॒शाः कु॒म्भ्योऽ वाय॒व्या॒ऽनि॒ पात्रा॑णी॒यमे॒व कृ॑ष्णाजि॒नम्

srug darvirnekṣaṇamāyavanaṃ droṇakalaśāḥ kumbhyo' vāyavyā'ni pātrāṇīyameva kṛṣṇājinam

हिन्दी अर्थ

(वैः उ). -निरवय से (एतत्) "यह -(स्वादवीयः)- भधिक, स्वादु है मांसधरा दूषी र-मास, "(तदेव ) . उसे ही. (न . भदनीयात्) श्रोत्रिय भ्रतिथि से पिल न'लंए । क कों -९।सु०६ भयवंवेदं-माष्य भ्रधिगवम् का.भरथं “पृथिवीं मे” भी सम्भव है । “गौः. पृथिवी. नाम (निषं० १1१) । वेदों मे. गौ कोः “श्रष्त्या' कंहा द - (निधं ° २।११) श्रत गोमांस की श्रनृन्ञा वेद नही दे सकता । “मांसं” का श्रथं प्राणिमांस मरौर भप्राणिमांस भी । दातप॒थ .१।२।३।८ मे. चावल श्रौर जौ की पोटी पुर

English

Who gives the Goat Panchaudana illumined with the priestly fee. The man who knows the season called the Working takes to himself the active fame, his

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।