अध्याय 7
श्लोक 79.1
अमावास्या।१-४ अथर्वा।अमावास्या।त्रिष्टुप्, १ जगती।यत् ते॑ दे॒वा अकृ॑ण्वन् भाग॒धेय॒ममा॑वास्ये सं॒वस॑न्तो महि॒त्वा।तेना॑ नो य॒ज्ञं पि॑पृहि विश्ववारे र॒यिं नो॑ धेहि सुभगे सु॒वीर॑म्
amāvāsyā| 1-4 atharvā| amāvāsyā| triṣṭup, 1 jagatī| yat te devā akṛṇvan bhāgadheyamamāvāsye saṃvasanto mahitvā| tenā no yajñaṃ pipṛhi viśvavāre rayiṃ no dhehi subhage suvīram
हिन्दी अर्थ
जो कोई क्षयरोग (ककुदि) ककुद् में (धितः) आश्रय पा लेता उसे (निर्हाः) तू निःसारित कर। ; तलीद्यम् = अस्थि के समीप का मांस (सायण) । पैप्पलाद शाख। में तलाम्याम् पाठ रहै, जिसका अभिप्राय हैषैोंके तलुएु 1 “अवतिष्ठति” तलुए सूचित होते ह । "जायान्यम्'” निरन्तरं जायासंभोगेन जायमानं क्षय-
English
Night hath conquered in the battle. In her: may we, dwelling with Gods and greatness, feast in the height of heaven, on strengthening viands.