Atharva Veda
7
अध्याय 7 / 20

Kanda 7

काण्ड 7

286 श्लोकभाग 4/5 · श्लोक 79.1–107.1

पूर्ण अध्याय पाठ64 श्लोक

अध्याय 7

श्लोक 79.1

अमावास्या।१-४ अथर्वा।अमावास्या।त्रिष्टुप्, १ जगती।यत् ते॑ दे॒वा अकृ॑ण्वन् भाग॒धेय॒ममा॑वास्ये सं॒वस॑न्तो महि॒त्वा।तेना॑ नो य॒ज्ञं पि॑पृहि विश्ववारे र॒यिं नो॑ धेहि सुभगे सु॒वीर॑म्

amāvāsyā| 1-4 atharvā| amāvāsyā| triṣṭup, 1 jagatī| yat te devā akṛṇvan bhāgadheyamamāvāsye saṃvasanto mahitvā| tenā no yajñaṃ pipṛhi viśvavāre rayiṃ no dhehi subhage suvīram

हिन्दी अर्थ

जो कोई क्षयरोग (ककुदि) ककुद् में (धितः) आश्रय पा लेता उसे (निर्हाः) तू निःसारित कर। ; तलीद्यम् = अस्थि के समीप का मांस (सायण) । पैप्पलाद शाख। में तलाम्याम् पाठ रहै, जिसका अभिप्राय हैषैोंके तलुएु 1 “अवतिष्ठति” तलुए सूचित होते ह । "जायान्यम्'” निरन्तरं जायासंभोगेन जायमानं क्षय-

English

Night hath conquered in the battle. In her: may we, dwelling with Gods and greatness, feast in the height of heaven, on strengthening viands.

अध्याय 7

श्लोक 79.2

अ॒हमे॒वास्म्य॑मावा॒स्या॒३ मामा व॑सन्ति सु॒कृतो॒ मयी॒मे।मयि॑ दे॒वा उ॒भये॑ सा॒ध्याश्चेन्द्र॑ज्येष्ठाः॒ सम॑गच्छन्त॒ सर्वे॑

ahamevāsmyamāvāsyā3 māmā vasanti sukṛto mayīme| mayi devā ubhaye sādhyāścendrajyeṣṭhāḥ samagacchanta sarve

हिन्दी अर्थ

मानो उड़ता है, (सः) वह मानो उड़कर (पूरुषम्) पुरूष मे (श्राविशति) विवूम वैत जायान्य जानं यतों जायान्य जाय॑से । है जायान्य! इस निश्चय से तेरे जन्म को जानते है, जहां से है जायान्य! फा० ७ ॥ अनु ० ७ ।सू० ८० भ्रथवेवेद-भाष्य १९११. त्र जन्म लेता है पैदा होता है। उसे" कंसे तु ¡हन्न करे, जिसके शृह मे हम हविः प्रवान करते हैँ ।

English

To him, the Full Moon’s mighty Bull, we pay our solemn sacri- fice. May he bestow upon us wealth unwasting, inexhaustible. No one but thou, Prajāpati, none beside thee, pervading, gave to all these forms their being.

अध्याय 7

श्लोक 79.3

आग॒न् रात्री॑ सं॒गम॑नी॒ वसू॑ना॒मूर्जं॑ पु॒ष्टं वस्वा॑वे॒शय॑न्ती ।अ॒मा॒वा॒स्याऽयै ह॒विषा॑ विधे॒मोर्जं॒ दुहा॑ना॒ पय॑सा न॒ आग॑न्

āgan rātrī saṃgamanī vasūnāmūrjaṃ puṣṭaṃ vasvāveśayantī | amāvāsyā'yai haviṣā vidhemorjaṃ duhānā payasā na āgan

हिन्दी अर्थ

वतक ओषधियों की ्राहुतियों से उत्यघ्च धूमके सूषनेसेक्षयरोगया दारा, श्रोषधि-धूम फफडों मे जाकर रक्त को भ्रोषधि युक कर शरीरस्थ रोग का शीघ्र शमन कर देता है, ग्रोषषि के खाने से रोगशमन देर से होता है । जायान्यः == जायायाः आनेयः, श्रथवा जायायाः जन्यः, “जकार” कां हश्रा, (कलशे) शरीररूपी कलश मेँ स्थित (सोमम्) वीयं का (पिब) तू पान कर, (वृत्रहा) तु ने वत्र भावनाश्रों का हनन करदिया है, (शूर) हे के (सवने) सवन मे (श्रा वृषस्व) शरीर मे सोम सींच, (रयिष्ठानः) ओौर

English

Grant us our hearts’ desire when we invoke thee: may we have store of riches in possession. First was the Full Moon meet for adoration among the days and in the nights’ deep darkness. Into thy heaven, O Holy One, have entered those pious men who honour thee with worship.

अध्याय 7

श्लोक 79.4

अमा॑वास्ये न त्वदे॒तान्य॒न्यो विश्वा॑ रू॒पाणि॑ परि॒भूर्ज॑जान ।यत् का॑मास्ते जुहु॒मस्तन्नो॑ अस्तु व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयि॒णाम्

amāvāsye na tvadetānyanyo viśvā rūpāṇi paribhūrjajāna | yat kāmāste juhumastanno astu vayaṃ syāma patayo rayiṇām

हिन्दी अर्थ

(रयिम्) सद्गुण सम्पत्ति (धेहि) धारण करा । “पुरुष निश्चय से यज्ञरूप है । २४ वर्षो कौ आयु तक उस का प्रातः वर्षोकी यु तक उसका तृतीय सवन है। इन भ्रायु कालोंमें यदि उसे १. भ्रयवा उसधरमेंतू किसीकोभी कंसे मारे जिसके कि घरमेंहुम हवि सवन है । ४४ वर्षों की मायु तके उसका माध्यन्दिनि सवन है; श्रौर ४.

English

A hymn to the New Moon Forward and backward by their wondrous power move these two youths, disporting, round the ocean.

अध्याय 7

श्लोक 80.1

पूर्णिमा।१-४ अथर्वा।पौर्णमासी, ३ प्रजापतिः।त्रिष्टुप्, २ अनुष्टुप्।पू॒र्णा प॒श्चादु॒त पू॒र्णा पु॒रस्ता॒दुन्म॑ध्य॒तः पौ॑र्णमा॒सी जि॑गाय ।तस्यां॑ दे॒वैः सं॒वस॑न्तो महि॒त्वा नाक॑स्य पृ॒ष्ठे समि॒षा म॑देम

pūrṇimā| 1-4 atharvā|paurṇamāsī, 3 prajāpatiḥ| triṣṭup, 2 anuṣṭup| pūrṇā paścāduta pūrṇā purastādunmadhyataḥ paurṇamāsī jigāya | tasyāṃ devaiḥ saṃvasanto mahitvā nākasya pṛṣṭhe samiṣā madema

हिन्दी अर्थ

११२ अथरववेद-माष्यं क”० ७। भनु० ७ 1 मू० ८१ सन व्यक्ति को संतप्त करर्खकते रह, ्रौरं “देषायुर-समर'” मं देव विजयीं अवशिष्ट जीवन मे, उसे देवासुर संग्राम के लिये संनद्ध किया है मन््रमें सोम हँ बीयं । उसका पान हं “उध्वैरेतस्"' होना । सोम ह वोयं,--इसं्क ज्िये देखो 1 अ्नन्थकार का अथषैवेदभाष्य ( १४।१।१-५) । सोमाः = सोमन् वीयं को “8611601” कहते हैँ । सोमन् ओौर इल) मे श्रुतिसाम्यमी है, (सांतपनाः) .संतप्त सूयं के सदृण जस्त्र-शस्् दारा यतमान (मरुतः) '

English

One views all living things, and thou, the other, art born again arranging times and seasons. Thou art re-born for ever new: thou marchest, ensign of days, in forefront of the mornings. Marching thou dealest to the Gods their portion. Thou lengthe- nest, Moon! the days of man’s

अध्याय 7

श्लोक 80.2

वृ॒ष॒भं वा॒जिनं॑ व॒यं पौ॑र्णमा॒सं य॑जामहे ।स नो॑ ददा॒त्वक्षि॑तां र॒यिमनु॑पदस्वतीम्

vṛṣabhaṃ vājinaṃ vayaṃ paurṇamāsaṃ yajāmahe | sa no dadātvakṣitāṃ rayimanupadasvatīm

हिन्दी अर्थ

कोतीः) हमं प्रजाजनों की र॑क्षा कं लिये (रिशादसः) हिसाकारी शत्रभों का ग्रतः मरुतः संनिफ प्रतीत होते है। “मरुत् मारयतीति वा मनुष्यजातिः" ॥ (वसवः) प्रशस्त (मरतः) है सैनिको ! (यः) जो (दुह णयुः) दृष्ट- का० ७ 1 ्बनु० ७। सू० ८१ अथर्वेवेद-मांभं १९३ हमारे (चित्तानि) चितौ को (जिघांसति) कूब करना चाहता टै, (सः) "मरूतः" के दो अथो को लेकर सूक्त मेँ द्विवि अथं हए हँ 1 मानसून

English

existence. O spray of Soma, Lord of Wars! all-perfect verily art thou. Make me all-perfect, Beauteous One! in riches and in progeny.

अध्याय 7

श्लोक 80.3

प्रजा॑पते॒ न त्वदे॒तान्य॒न्यो विश्वा॑ रू॒पाणि॑ परि॒भूर्ज॑जान ।यत् का॑मास्ते जुहु॒मस्तन्नो॑ अस्तु व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम्

prajāpate na tvadetānyanyo viśvā rūpāṇi paribhūrjajāna | yat kāmāste juhumastanno astu vayaṃ syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

(यजु ° १७।४०) 1 “हृणि: क्रोधः कर्मा” (रिषं ०२1१३; २। १२) । दुहः दह् जिघांसायाम् (दिवादिः) । हत्या करने की इच्छा वाले राजा को फन्दों दवारा जकड़ कर, मार देना चाहिए । मर्तः को “मानुषासः (मन्व ३) में कहा है । इसलिये मनुष्य सैनिक भी सूक्त म अमित्रेत है ।तथा मरुत् = स्यते मारयतिवा स मरत्, मनुष्यजातिः, पवनो वा (उणा० संवत्सरीणां मरुतः स्वका उरुक्षयाः सगणा मानुषासः । महाक्षयं करने वाले, (सगणाः) गणो सहित, (मानुषासः ) मनुष्यों के संघ- शवर्नो का उपक्षयं करो ॥१।५. जुजुष्टन -जुषी प्रीतिसेवनयोः (तुदादिः) । ऊतिः

English

Thou art the New Moon, fair to see, thou art complete in every part. May I be perfect, fully blest in every way in steeds and kine, in children, cattle, home, and wealth.

अध्याय 7

श्लोक 80.4

पौ॒र्ण॒मा॒सी प्र॑थ॒मा य॒ज्ञिया॑सी॒दह्नां॒ रात्री॑णामतिशर्व॒रेषु॑ ।ये त्वां य॒ज्ञैर्य॑ज्ञिये अ॒र्धय॑न्त्य॒मी ते नाके॑ सु॒कृतः॒ प्रवि॑ष्टाः

paurṇamāsī prathamā yajñiyāsīdahnāṃ rātrīṇāmatiśarvareṣu | ye tvāṃ yajñairyajñiye ardhayantyamī te nāke sukṛtaḥ praviṣṭāḥ

हिन्दी अर्थ

वाले, (मादयिष्णवः) हमे प्रसन्न करने वाले (ते) वे (मरुतः) सेनिक, शण अ्ष्विवेद-भाष्य. का० ७ अनु° ७५ सूवुत ८२२ । ˆ पाशान् = शत्र ने हमासै कमजोरी या पायमयी प्रवृत्तियों के. कारण. जो फदे ह्म पर डाल दिये हन से छटकारा पाना । कर देता हूं, (नि योजनम्) नियोजन को (वि) पृथक् करता हं । (त्वम्) तु (इह एव) यहां ही (अनसः ) ग्रताडित हृजा (एधि)हो, विद्यमान रह ।

English

Inflate thee with his vital breath who hathes us and whom we detest. May we grow rich in steeds and kine, in children, cattle, houses, wealth. With that unwasting stalk which Gods, unwasting Gods, in- crease and eat,

अध्याय 7

श्लोक 81.1

सूर्याचन्द्रमसौ।१-६ अथर्वा।सावित्री, सूर्यः, चन्द्रमाः।त्रिष्टुप्, ३ अनुष्टुप्, ४ आस्तारपङ्क्तिः, ५ सम्राडास्तारपङ्क्तिः।पू॒र्वा॒प॒रं च॑रतो मा॒ययै॒तौ शिशू॒ क्रीड॑न्तौ॒ परि॑ यातोऽर्ण॒वम्।विश्वा॒न्यो भुव॑ना वि॒चष्ट॑ ऋ॒तूँर॒न्यो वि॒दध॑ज्जायसे॒ नवः॑

sūryācandramasau| 1-6 atharvā| sāvitrī, sūryaḥ, candramāḥ| triṣṭup, 3 anuṣṭup, 4 āstārapaṅktiḥ, 5 samrāḍāstārapaṅktiḥ| pūrvāparaṃ carato māyayaitau śiśū krīḍantau pari yāto'rṇavam| viśvānyo bhuvanā vicaṣṭa ṛtū~ranyo vidadhajjāyase navaḥ

हिन्दी अर्थ

होता है । “अग्निपद दवारा सम्भवतः अश्व की वेगशक्तिको सूचित किया है। जीवात्मा के तीन शरीर होते है, कारणशरीर, सूक्ष्मशरीर तथा स्थूलशरीर । स्थूलशरीर तो जीवात्माका रथ है, मरौर गवशिष्ट दो शरीरो कं तीन मन अधम पाश दहै, गौर शेष दो उत्तम तथा मध्यम पाण है । जीवात्मा मनरूपी पाश से वद्ध हुजा नाना योनियों तथा सांसारिक जीवनो मेँ विचरतां नियोजन द्वारा निदिष्ट किया है।

English

May Varuna, Brihaspati, and Indra, the Lords and Guardians of the world, increase us. In praise of Agni Sing with fair laud the combat for the cattle. Bestow upon us excellent possessions.

अध्याय 7

श्लोक 81.2

नवो॑नवो भवसि॒ जाय॑मा॒नोऽह्नां॑ के॒तुरु॒षसा॑मे॒ष्यग्र॑म्।भा॒गं दे॒वेभ्यो॒ वि द॑धास्या॒यन् प्र च॑न्द्रमस्तिरसे दी॒र्घमायुः॑

navonavo bhavasi jāyamāno'hnāṃ keturuṣasāmeṣyagram| bhāgaṃ devebhyo vi dadhāsyāyan pra candramastirase dīrghamāyuḥ

हिन्दी अर्थ

का०७। अनु ७।सु० ८३ भ्रथवंवेद-भाष्य ११५ है । यथा “निण्यः संनद्धो मनसा चरामि" (ऋ० १।१६४।३७) । मन्त्र मेँ का वणेन मन्त्र (२) में हुभा है । . यथा-- प्रदान किया कर करे, जिससे प्रजाजन सात्त्विक हो सके। देवतासु = ““विद्धांसो वं देवाः") । (अमावास्ये) हमारे हृदयगृहों में हमारे साथ बसने वाली पारमेश्वरी मातः ! (महित्वा) योगजन्य महिमा के कारण (संवसन्तः) तेरे साथ बसते हुए (देवाः) दिव्य उपासक, (ते) तेरे लिये (यत्) जो (भागधेयम्)

English

Lead to the Gods the sacrifice we offer: let streams of oil flow pure and full of sweetness. Agni I first appropriate with power, with splendour, and with might. I give myself children and lengthened life, with Hail! take Agni to myself.

अध्याय 7

श्लोक 81.3

सोम॑स्यांशो युधां प॒तेऽनू॑नो॒ नाम॒ वा अ॑सि ।अनू॑नं दर्श मा कृधि प्र॒जया॑ च॒ धने॑न च

somasyāṃśo yudhāṃ pate'nūno nāma vā asi | anūnaṃ darśa mā kṛdhi prajayā ca dhanena ca

हिन्दी अर्थ

पिपृहि प पालनपूरणयोः (जुहोत्यादिः) । पारमेश्वरीमाता के सहवासी योगी जन, सुवीर पृर्रेको मातासेप्राप्त कर, भूमिको स्वगे बना देते है! सुवीर = धरमंकृत्यो के करने मे सुवीर । । ृभेतया वते है, (मयि) प्नौर मु मे बसे ह । (मयि) मुभ मँ (उभये)

English

Even here do thou, O Agni, stablish wealth: let not oppressors injure thee by thinking of thee first. Light be thy task of ruling, Agni, with, thy power: may he who worships thee wax strong,

अध्याय 7

श्लोक 81.4

द॒र्शोऽसि दर्श॒तोऽसि॒ सम॑ग्रोऽसि॒ सम॑न्तः ।सम॑ग्रः॒ सम॑न्तो भूयासं॒ गोभि॒रश्वैः॑ प्र॒जया॑ प॒शुभि॑र्गृहैर्धने॑न

darśo'si darśato'si samagro'si samantaḥ | samagraḥ samanto bhūyāsaṃ gobhiraśvaiḥ prajayā paśubhirgṛhairdhanena

हिन्दी अर्थ

(सवं) वे सब (समगच्छन्त) संगत हुए, या होते) मयि आवसम्ति हारा। देवाः = साध्याः ऋषयः च । यथा (तेन देवाऽग्रय- का० ७। अनु ७) सु० ८३ अथर्ववेद-भाष्् ११७ परिचर्या प्रदान करे, यह माता (पयसा) दूध कं साथ वतंमान गौकं सदृश सम्बन्ध पैदा करने वाली शुभरात्री आई है जब कि उपासक कः निवास पारमेश्वरीमाता मे हयो जाता है 1 उपासना कं लिये रात्रीकाल' शुभकाल होता है । रात्रीकाल शान्तकाल होत, है, श्रतः उपासना कं लिये शुभकाल है । ऊर्जम् = ऊजं बलप्राणनयोः (चुरादिः) 1

English

invincible. 117 Agni hath looked upon the spring of Morning, looked on the days, the earliest Jātavedas.

अध्याय 7

श्लोक 81.5

यो॒३ऽस्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मस्तस्य॒ त्वं प्रा॒णेना प्या॑यस्व ।आ व॒यं प्या॑सिषीमहि॒ गोभि॒रश्वैः॑ प्र॒जया॑ प॒शुभि॑र्गृ॒हैर्धने॑न

yo3'smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmastasya tvaṃ prāṇenā pyāyasva | ā vayaṃ pyāsiṣīmahi gobhiraśvaiḥ prajayā paśubhirgṛhairdhanena

हिन्दी अर्थ

भूतभौतिक वस्तुओं को (न जजान) नही पेदा किया, (परिभः) तुही इन सब के सब ओर विद्यमान है । (यत्कामाः) जिस कामना वाले (वयम्) हम (ते) तुभे (जुहुमः) आत्माहुति देते है, (नः) हमे (तत्) वंह काम्य परिभुः =जैसे दुर्गं की रक्षा के लिये, उसके चारों ग्रोर खाई होती है, वैसे भाप भूतभौतिक जगत् की रक्षा के लिये उसके सब ग्रोर विद्यमान पूरवो यजमानो वरीयान्" (ऋ० ५।७७।२) , भर्थात् उषाकाल से जितना पूं के काल मे उपासक उपासना करता है वहू उतना ही प्रधिक प्रेष्ठ होता है । त॑था भ्रव ११८ श्रथववेद-भाष्य का० ७। अनु ७ सू दर

English

So, following the gleams of Morning, Sūrya hath entered heaven and earth as his possession. Agni hath looked upon the spring of Mornings, looked on the days, the earliest Jātavedas. So he in countless places hath extended, full against heaven and earth, the beams of Sūrya.

अध्याय 7

श्लोक 81.6

यं दे॒वा अं॒शुमा॑प्या॒यय॑न्ति॒ यमक्षि॑त॒मक्षि॑ता भ॒क्षय॑न्ति ।तेना॒स्मानिन्द्रो॒ वरु॑णो॒ बृह॒स्पति॒रा प्या॑ययन्तु॒ भुव॑नस्य गो॒पाः

yaṃ devā aṃśumāpyāyayanti yamakṣitamakṣitā bhakṣayanti | tenāsmānindro varuṇo bṛhaspatirā pyāyayantu bhuvanasya gopāḥ

हिन्दी अर्थ

ह, “परि (सवे रोर) भूः ( सत्तायाम् )"" । “सव ग्रोर” का अभिप्राय दहै: (पौणंमासी) पौणंमासी के सदृश (पश्वात्) परिचम मे (पूर्णा) पुर्ण- त्मा-देवों के साथ मिल कर आनन्दरसकं पान द्वारा संमुदित रहते है । १. भ्रभिप्राय यह कि पौणंमासी का चन्द्रमा जव पूरं मे उदित होता, तो पुरणं से दी युक्त होता है । तथ पूवं भ्रौर पश्िम के मघ्याकाश मे गति करता दभा भी पूणं ,

English

Butter to thee in heaven thy home, O Agni! Manu this day hath kindled thee with butter. Let the Celestial Daughters bring thee butter: Let cows pour butter forth for thee, O Agni. A prayer for deliverance from sin and other evils

अध्याय 7

श्लोक 82.1

अग्निः।१-६ शौनकः (संपत्कामः)।अग्निः।त्रिष्टुप्, २ ककुम्मती बृहती, ३ जगती।अ॒भ्यऽर्चत सुष्टु॒तिं गव्य॑मा॒जिम॒स्मासु॑ भ॒द्रा द्रवि॑णानि धत्त ।इ॒मं य॒ज्ञं न॑यत दे॒वता॑ नो घृ॒तस्य॒ धारा॒ मधु॑मत् पवन्ताम्

agniḥ| 1-6 śaunakaḥ (saṃpatkāmaḥ)| agniḥ| triṣṭup, 2 kakummatī bṛhatī, 3 jagatī| abhya'rcata suṣṭutiṃ gavyamājimasmāsu bhadrā draviṇāni dhatta | imaṃ yajñaṃ nayata devatā no ghṛtasya dhārā madhumat pavantām

हिन्दी अर्थ

कलार से ही युक्त रहता है । परन्तु पौणेमाप्ी के उत्तरकाल से उसकी कलाभों भरं हास होने लगता है । परन्तु परमेश्वर फा प्रकाश पौण॑मासी के प्रकारा की तरु सवा एक सा रहता है, उसके प्रकाश में हास नहीं होता । का० ७ । भ्रनु०.७। सू० ८४ अधवंवेद-माष्य ११९ पृषमं वाजिनं वयं पा्णमासे यजामहे 1; - (वृषभम्) आनन्दरस की वर्षा करने वाले, (वाजिनम्) बलशाली,

English

Stablished amid the waters is, King Varuna, thy golden home. Thence let the Sovran who maintains the statutes loose all bind- ing cords. Hence free thou us, King Varuna, from each successive bond and tie.

अध्याय 7

श्लोक 82.2

मय्यग्रे॑ अ॒ग्निं गृ॑ह्णामि स॒ह क्ष॒त्रेण॒ वर्च॑सा॒ बले॑न ।मयि॑ प्र॒जां मय्यायु॑र्दधामि॒ स्वाहा॒ मय्य॒ग्निम्

mayyagre agniṃ gṛhṇāmi saha kṣatreṇa varcasā balena | mayi prajāṃ mayyāyurdadhāmi svāhā mayyagnim

हिन्दी अर्थ

। (वयं यजामहे ) हम यजन करते ह, उसकी पजा, उसका संग, ता उस वाजिनम् = वाजः बलनाम (निं २९) । यजामहे = यज देवपुजा- परमेश्वर को शीतल प्रकाश वाला कहा है, ओर यजु° ३१।१८ मे “आदित्य- फहा है । शेष का अर्थं मन्त्र ७।८३।४, क सदृश है । तथा (यजु° १०।२०; कालो में (पौणेमासी ) पौणेमासी के सदृश प्रकाशमयी पारमेश्वरी मता

English

As we have cried, O Varuna! have said, The Waters, they are kine, thence set us free, O Varuna. Loosen the bonds, O Varuna, that hold us, loosen the bond. above, between, and under.

अध्याय 7

श्लोक 82.3

इ॒हैवाग्ने॒ अधि॑ धारया र॒यिं मा त्वा॒ नि क्र॒न् पूर्व॑चित्ता निका॒रिणः॑ ।क्ष॒त्रेणा॑ग्ने सु॒यम॑मस्तु॒ तुभ्य॑मुपस॒त्ता व॑र्धतां ते॒ अनि॑ष्टृतः

ihaivāgne adhi dhārayā rayiṃ mā tvā ni kran pūrvacittā nikāriṇaḥ | kṣatreṇāgne suyamamastu tubhyamupasattā vardhatāṃ te aniṣṭṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

(बधघेथन्ति) निज हृदयो मे तेरी वृद्धि करते हँ (ते अमी). वे ये (सुकृतः) १२० भ्रथर्ववेद-भाष्य का० ७1 अनु ७।. सु° ० । मन्व मे “अतिशर्वरेषु" पाठ है न कि श्रतिशवेरीषु” । “शवरी क । समाप्ति, श हिसायाम् । "भह्लञाम् ४ का धथ है “दिनं 2 का पौणमासी की तरह पूणं प्रकाश होता है। परमेष्वर माता पूजनीया, संगतियोग्या, तथा आत्मसम्पैणयोग्था है (यज देवपूनासग = करणदानेषु) इस प्रक्रिया कं भनूसार ही, यजनकर्ता, माता कं 1

English

So before Aditi may we be sinless under thy favouring auspices, Āditya! Varuna, free us from all snares that bind us, Varuna’s bonds, the upper and the lower.

अध्याय 7

श्लोक 82.4

अन्व॒ग्निरु॒षसा॒मग्र॑मख्य॒दन्वहा॑नि प्रथ॒मो जा॒तवे॑दाः ।अनु॒ सूर्य॑ उ॒षसो॒ अनु॑ र॒श्मीननु॒ द्यावा॑पृथि॒वी आ वि॑वेश

anvagniruṣasāmagramakhyadanvahāni prathamo jātavedāḥ | anu sūrya uṣaso anu raśmīnanu dyāvāpṛthivī ā viveśa

हिन्दी अर्थ

के संग को प्राप्त करता है (यजु०° ३१।१६) ¡। १ का विधान करता हुभां । (तथा ्रथर्व० १४।१।२३; गृहस्थ) । ॥ का० ७। अनु० ७। सू० ८५ भ्रयर्ववेद-भाष्य नवोनवो मधि जार्यमानोऽ्द केतुर्पसापष्पग्र्॑ । = (जायमानः भवसि) पदा होता रहता है । (ब्रह्न केतुः) तु मनो दिनी तिथियों का ज्ञापक है (उषसाम्) उषाओं क (अग्रम्) आगे-अागे, पहिले (एषि)तु आता है । (आयन्) म्राता हृपरा (देवेभ्यः) देवों के लिये (भागम्) देय भाग का (विदधासि) तू विधान करता है, (चमः) है चन्द्रमा ! त् (आयुः) जायु को (दीर्घम्) दीर्घं (प्रतिरसे) करता है, बढाता है,

English

Drive from us evil dream, drive off misfortune: then let us pass into the world of virtue. A prayer for protection Holder of sway, shine here refulgent, Agni! invincible immortal

अध्याय 7

श्लोक 82.5

प्रत्य॒ग्निरु॒षसा॒मग्र॑मख्य॒त् प्रत्यहा॑नि प्रथ॒मो जा॒तवे॑दाः ।प्रति॒ सूर्य॑स्य पुरु॒धा च॑ र॒श्मीन् प्रति॒ द्यावा॑पृथि॒वी आ त॑तान

pratyagniruṣasāmagramakhyat pratyahāni prathamo jātavedāḥ | prati sūryasya purudhā ca raśmīn prati dyāvāpṛthivī ā tatāna

हिन्दी अर्थ

१४।९।८।२६) किह पृत्र तूमेराखूपहीदहै। पत्नी दिनि में उषाकाल से पूवं जाग जाती है। वह् सास-सधुररूपी देवों का सत्कार करती है । यथा “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव । तथा अग्तिहोतर मे सूयं, अग्नि अदि देवों १४।१।२१), तथा ““गाहपत्यं सपर्यं" (भथवै० १४।२।१८) । गृहकरयो में (सोमस्य) वीयं के (अंशो) अंशुरूप, ज्योतिषूप, तथा (युं पते) १. कित संज्ञाने । २. ददशपौणंमास तथा भ्रष्टमी के यज्ञँ मे वायु

English

Jātavedas. With succours friendly to mankind, auspicious, driving away all maladies, guard our dwelling.

अध्याय 7

श्लोक 82.6

घृ॒तं ते॑ अग्ने दि॒व्ये स॒धस्थे॑ घृ॒तेन॒ त्वां मनु॑र॒द्या समि॑न्धे ।घृ॒तं ते॑ दे॒वीर्न॒प्त्य॑१आ व॑हन्तु घृ॒तं तुभ्यं॑ दुह्रतां॒ गावो॑ अग्ने

ghṛtaṃ te agne divye sadhasthe ghṛtena tvāṃ manuradyā samindhe | ghṛtaṃ te devīrnaptya1ā vahantu ghṛtaṃ tubhyaṃ duhratāṃ gāvo agne

हिन्दी अर्थ

ग्रादवि देवों के लियं यज्ञभाग प्रदान । १२२ सथ्ववेद-भाष्यं के†० ७ अनु०. ७1 सु० ८५ (अनूनः, नाम श्रसि) हद्गुणों मे न्यून तू नहीं है ¦ (दष) है दशेनीय नयूनतारहित (कृधि) कर । मन््ोक्ति पत्नी द्वारा हुई है । सोम = वीयं (अथवं० १४।१।१-५) । तथा सोम सोमन्, उणा० १।१४० तथा लाला (वीय) में श्रुति तथा ह क्षत्रिय ! यां सेनापति ! (दशैः असि) त् दशनीय है, (दशेतः ग्रसि) है, (समन्तः) त् सद्गणोंकी सीमा है) मैँभी (गोभिः) गौओं द्वारा,

English

Thou, Indra, lord and leader of the people, wast born for lovely strength and high dominion. Thou dravest off the folk who were unfriendly, and madest for the Gods wide room and freedom.

अध्याय 7

श्लोक 83.1

पाशमोचनम्।१-४ शुनःशेपः।वरुणः।अनुष्टुप्, २ पथ्यापङ्क्तिः, ३ त्रिष्टुप्, ४ बृहतीगर्भा त्रिष्टुप्।अ॒प्सु ते॑ राजन् वरुण गृ॒हो हि॑र॒ण्ययो॑ मि॒थः ।ततो॑ धृ॒तव्र॑तो॒ राजा॒ सर्वा॒ धामा॑नि मुञ्चतु

pāśamocanam| 1-4 śunaḥśepaḥ| varuṇaḥ| anuṣṭup, 2 pathyāpaṅktiḥ, 3 triṣṭup, 4 bṛhatīgarbhā triṣṭup| apsu te rājan varuṇa gṛho hiraṇyayo mithaḥ | tato dhṛtavrato rājā sarvā dhāmāni muñcatu

हिन्दी अर्थ

की सीमारूप (भूयासम्) हो जाऊं । समन्तः = संगतः श्रन्तेन । है, मतः एकवचन का प्रयोग हुभा है । का ग्रहण किया है, भरतः वह् सद्गुणी मी है। का० ७ । श्रनु० ७ सू० ८५ अथर्ववेद-माष्य १२३

English

Like a dread wild beast roaming on the mountain, may he. approach us from the farthest distance. Whetting thy bolt and thy sharp blade, O Indra, crush down our foes and scatter those who

अध्याय 7

श्लोक 83.2

धाम्नो॑धाम्नो राजन्नि॒तो व॑रुण मुञ्च नः ।यदापो॑ अ॒घ्न्या इति॒ वरु॒णेति॒ यदू॑चि॒म ततो॑ वरुण मुञ्च नः

dhāmnodhāmno rājannito varuṇa muñca naḥ | yadāpo aghnyā iti varuṇeti yadūcima tato varuṇa muñca naḥ

हिन्दी अर्थ

राजव, (बृहस्पतिः) सा्रज्य कौ बहती सेना का अ्रविपति (अस्मान्) वीय की वृद्धि एकदम नहीं होती, वृद्धि अंश-अंशसरूप मं होती रहती है, अतः इन अंशो की रक्षा देवजन करते हँ, ओर ब्रक्षितवीयं वाले ऊध्वं रेतस्-ब्रह्मचारी गृहस्थ मं इसका उपभोग करते हँ । अथवा इस को निज- सप्तम काण्ड का सप्तम अनुवाक समाप्त १२४ प्रथवेवेद-भाष्य का० ७ । भ्रनु० ८.) सुऽ ठ्द ताकि (घृतस्य) प्रकाशमयी (धाराः) धाराएं (मधुमत्) मधुररस से उपेत हई (नः) हम में (पवन्ताम्) प्रवाहित हों ।

English

hate us. A charm to ensure victory in battle This very mighty one whom Gods urge onward, the conqueror of cars, ever triumphant,

अध्याय 7

श्लोक 83.3

उदु॑त्त॒मं व॑रुण॒ पाश॑म॒स्मदवा॑ध॒मं वि म॑ध्य॒मं श्र॑थाय ।अधा॑ व॒यमा॑दित्य व्र॒ते तवाना॑गसो॒ अदि॑तये स्याम

uduttamaṃ varuṇa pāśamasmadavādhamaṃ vi madhyamaṃ śrathāya | adhā vayamāditya vrate tavānāgaso aditaye syāma

हिन्दी अर्थ

वाडनाम (निघं० १।११)1 प्राजिम् = देवाभूरसंग्राम। हम लोग पाप करते है, परन्तु पापरूपी असुर के साथ दव बनकर संग्रामं नहीं करते, इसलिये पापायुर के वशीभूतदहौ जाते हँ इसलिये “देवासूरसंग्रम के लिये याचना मन्त्रम कौ गई है) आजिः संभ्राम। । का० ७ । अनु० ८ । सू० ८६ अथवेवेद-भाष्य १२५ भायुको (दधामि) स्थापित करता हूं, (स्वाहा) स्वाहा के उच्चारण यजु० ३२।२) । अनग्निको जीवन में धारण करनेके लिये क्षात्रदृढता

English

Swift, fleet to battle, with uninjured fellies, even Tārkshya for our weal will we call hither. The same Indra the rescuer, Indra the helper, Indra the brave who hears each invocation,

अध्याय 7

श्लोक 83.4

प्रास्मत् पाशा॑न् वरुण मुञ्च॒ सर्वा॒न् य उ॑त्त॒मा अ॑ध॒मा वा॑रु॒णा ये ।दु॒ष्वप्न्यं॑ दुरि॒तं नि ष्वा॒स्मदथ॑ गच्छेम सुकृ॒तस्य॑ लो॒कम्

prāsmat pāśān varuṇa muñca sarvān ya uttamā adhamā vāruṇā ye | duṣvapnyaṃ duritaṃ ni ṣvāsmadatha gacchema sukṛtasya lokam

हिन्दी अर्थ

वीर्य! । परमेश्वर को अपनेमें धारण करनेके लिये वीर्यंशक्ति को जआव- रेषाम्"” (योग १।२०) । वी्ेनिग्रह से अयु भौ बढती ओर सुखदायी होती सम्पत् (अधि धारय) मुभ मे मेरे अधिकाररूप मे, स्थापित कर, (पूवे चित्ताः निकारिणः) पूवैकाल की विकृत मेरी चित्तवृत्तियां (त्वा) तुह भग्नि! (मानिक्रन्) विकरतन करे, मुभसे पराङमुख या विमुख न कर । उपासनाविधि से बैठने वाला (अनिष्टतः) श्रहिसित हूग्रा (वधताम) वृद्धि को प्राप्त ह्ये, बढ़ नहीं । यजुर्वेद (२७।४) में “पूरव चित्ताः” के स्थान मेँ शभूवेचितः'' पाठ है ¦ जिसका अभिप्राय सम्भव है “भूवं संचित” 1 अनिष्टृतः = काम, क्रोध, लोभ,

English

Sakra I call, Indra invoked of many. May Indra Maghavan pros- per and bless us. A prayer to Rudra as Agni To Rudra in the fire, to him who dwells in floods, to Rudra who hath entered into herbs and

अध्याय 7

श्लोक 84.1

क्षत्रभृदग्निः।१-३ भृगु।१ जातवेदाःअग्निः, २-३ इन्द्रः।त्रिष्टुप्, १ जगती।अ॒ना॒धृ॒ष्यो जा॒तवे॑दा॒ अम॑र्त्यो वि॒राड॑ग्ने क्षत्र॒भृद् दी॑दिही॒ह।विश्वा॒ अमी॑वाः प्रमु॒ञ्चन् मानु॑षीभिः शि॒वाभि॑र॒द्य परि॑ पाहि नो॒ गय॑म्

kṣatrabhṛdagniḥ| 1-3 bhṛgu| 1 jātavedāḥagniḥ, 2-3 indraḥ| triṣṭup, 1 jagatī| anādhṛṣyo jātavedā amartyo virāḍagne kṣatrabhṛd dīdihīha| viśvā amīvāḥ pramuñcan mānuṣībhiḥ śivābhiradya pari pāhi no gayam

हिन्दी अर्थ

१२६ अथववेद-माष्य का० ७ । धरनु० ८ । सु० ८ ह 1० ७। भनु० ८ । सु ७ अथवेनेद-माष्य उसने (द्यावापृथिवी) दौः ओौर पृथिवी को (आततान) फलाया है । । पुरुघा रष्मीन् = वेदानुसार सूयेरश्मियां सप्तविध हैँ, भतः पुरुषा है । प्रकाशित करता है । (देवीः) दिव्यगणों वाली (नप्त्यः) हमारी नाती-

English

plants, 118 To him who formed and fashioned all these worlds, to him this

अध्याय 7

श्लोक 84.2

इन्द्र॑ क्ष॒त्रम॒भि वा॒ममोजोऽजा॑यथा वृषभ चर्षणी॒नाम्।अपा॑नुदो॒ जन॑ममित्रा॒यन्त॑मु॒रुं दे॒वेभ्यो॑ अकृणोरु लो॒कम्

indra kṣatramabhi vāmamojo'jāyathā vṛṣabha carṣaṇīnām| apānudo janamamitrāyantamuruṃ devebhyo akṛṇoru lokam

हिन्दी अर्थ

समान प्रकाशमान उस अग्निने (उषसः) उषाओं को (अनु) प्रनुकूलषूपं प्रकाशित करने वाला परमेश्वर (चयावापथिवी) यलोक ओर परथिवी में पृथवी में पायिव प्रग्निको प्रकाशित कर रहा है। यह् सब कुछ हमारे जीवनो के लिये ्रनुकूलरूप है । क्योंकि यह् सव जगत् हमारे भोग प्रौर अपवगके लिये है, प्रतः हमारी उन्नति के लिये अनुकूल है । ' भोगापवर्गा परयम । इस प्रकार महीर ने भी श्रगिि द्वारा परमेश्वर ही माना है ।

English

Rudra, yea, to Agni, reverence be paid! A charm to cure a snake-bite Depart! thou art a foe, a foe. Poison with poison hast thou mixt, yea, verily poison hast thou

अध्याय 7

श्लोक 84.3

मृ॒गो न भी॒मः कु॑च॒रो गि॑रि॒ष्ठाः प॑रा॒वत॒ आ ज॑गम्या॒त् पर॑स्याः ।सृ॒कं सं॒शाय॑ प॒विमि॑न्द्र ति॒ग्मं वि शत्रू॑न् ताढि॒ वि मृघो॑ नुदस्व

mṛgo na bhīmaḥ kucaro giriṣṭhāḥ parāvata ā jagamyāt parasyāḥ | sṛkaṃ saṃśāya pavimindra tigmaṃ vi śatrūn tāḍhi vi mṛgho nudasva

हिन्दी अर्थ

२ जातवेदाः -=जातानि वेद । जातानि वनं विदुः । जाते जाते निघ दति वा । (दुष्टताम् ) दुग्धरूप मे प्रदान करें ¦ तथा ईश्वर सहवास करते ह, इकदुं रहते हैँ । हवियों में श्रेष्ठ हवि है, घृत । । (अथवे० ४।३६।६) । घृताहूति के लिये गोघृत चाहिए, भैस आदि का धृत

English

mixt. Go to the serpent: strike him dead. A prayer for purification and prosperity

अध्याय 7

श्लोक 85.1

अरिष्टनेमिः।१ अथर्वा (स्वस्त्ययनकामः)।तार्क्ष्यः।त्रिष्टुप्।त्यमू॒ षु वा॒जिनं॑ दे॒वजू॑तं॒ सहो॑वानं तरु॒तारं॒ रथा॑नाम्।अरि॑ष्टनेमिं पृतना॒जिमा॒शुं स्व॒स्तये॒ तार्क्ष्य॑मि॒हा हु॑वेम

ariṣṭanemiḥ| 1 atharvā (svastyayanakāmaḥ)| tārkṣyaḥ| triṣṭup| tyamū ṣu vājinaṃ devajūtaṃ sahovānaṃ tarutāraṃ rathānām| ariṣṭanemiṃ pṛtanājimāśuṃ svastaye tārkṣyamihā huvema

हिन्दी अर्थ

(ते) तेरा (हिरण्ययः) हिरण्यमय (गृहः) घर है, (मिथः) जो कि हम दोनों के निवास के लिये है (धृतव्रतः, राजा) व्रतधारी वहु वरुण राजा (ततः) उस गृह से (सर्वा धामानि) सन धामोंमे आश्चित पाशं को (मजञ्चतु) १२८ श्रथवेवेद-भाष्य का० ७। श्नु ८। सू० ८ १०।२।३६-३३) । मिथः = जौवात्मा ्रौर वरूण का सहवास का स्थान 1 जन्मानि” (निरुक्त ।२८) । पाणो के स्थान तीन है, (१) उत्तमपाश का कर देना । कई पाण्डुलिपियों मे “वामानि” के स्थान में "दामानि" पाठहै।

English

The heavenly Waters have I ranged: we have been sated with their dew. Here, Agni, bearing milk, am I. Endow me with the gift of strength. Endow me with the gift of strength, with children, and a length- ened life.

अध्याय 7

श्लोक 86.1

त्राता इन्द्रः।१ अथर्वा (स्वस्त्ययनकामः)।इन्द्रः।त्रिष्टुप्।त्रा॒तार॒मिन्द्र॑मवि॒तार॒मिन्द्रं॒ हवे॑हवे सु॒हवं॒ शूर॒मिन्द्र॑म्।हु॒वे नु श॒क्रं पु॑रुहू॒तमिन्द्रं॑ स्व॒स्ति न॒ इन्द्रो॑ म॒घवा॑न् कृणोतु

trātā indraḥ| 1 atharvā (svastyayanakāmaḥ)| indraḥ| triṣṭup| trātāramindramavitāramindraṃ havehave suhavaṃ śūramindram| huve nu śakraṃ puruhūtamindraṃ svasti na indro maghavān kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

दाम = रस्सी, पाश । वह् पाठ उत्तम है (वरुण, राजन्) हि वरणीय राजा ! . (इतः) इस (धाम्नः, घाम्नः+। (वरुण इति) है वरगीय परमेए्वर ! इस प्रकार (ऊचिम) हमने तुभे पुकारा है, (ततः) उस कारण (वरुण) है वरणीय परमेश्वर ! (नः) हमारे पाशो परमेश्वर तो पाशो के मोचन काब्रतधारण किये हज है, परन्तु

English

May the Gods mark this prayer of mine, may Indra with the Rishis mark. Ye Waters, wash away this stain and whatsoever taint be here,

अध्याय 7

श्लोक 87.1

व्यापको देवः।१ अथर्वा।रुद्रः।जगती।यो अ॒ग्नौ रु॒द्रो यो अ॒प्स्व॑१न्तर्य ओष॑धीर्वी॒रुध॑ आवि॒वेश॑ ।य इ॒मा विश्वा॒ भुव॑नानि चाक्लृ॒प तस्मै॑ रु॒द्राय॒ नमो॑ अस्त्व॒ग्नये

vyāpako devaḥ| 1 atharvā| rudraḥ| jagatī| yo agnau rudro yo apsva1ntarya oṣadhīrvīrudha āviveśa | ya imā viśvā bhuvanāni cāklṛpa tasmai rudrāya namo astvagnaye

हिन्दी अर्थ

पुकार कर कहते है कि हमारे पाशो को खोल दे। मन्त मेंदो “इति""द्रा भी पाठ दहै । जिसका अथै प्रत्येफ़दामसे, रस्सीसे, पाशसे। : का० ७। श्रनु० ८4 सु० ८७ अथरववंवेद-भाष्य १२६ (ग्रदितये) अविनाश के लिये (स्याम) हो जाय । अविनाश पापजन्य शीघ्र नाश का प्रभाव, १०० वर्षोकौञआयुसे पुवंन मरना । वरुण का व्रत है पाशो का विमोचन । इत निमित्त व्यक्ति पपोंसे

English

Each sinful wrong that I have done and every harmless curse of mine. Thou art the wood, may I succeed! fuel, may I be glorified! splendour, give splendour unto me.

अध्याय 7

श्लोक 88.1

सर्पविषनाशनम्।१ गरुत्मान्।तक्षकः।त्र्यवसाना बृहती।अपे॒ह्यरि॑र॒स्यरि॒र्वा अ॑सि।वि॒षे वि॒षम॑पृक्था वि॒षमिद् वा अ॑पृक्थाः ।अहि॑मे॒वाभ्यपे॑हि॒ तं ज॑हि

sarpaviṣanāśanam| 1 garutmān| takṣakaḥ| tryavasānā bṛhatī| apehyarirasyarirvā asi| viṣe viṣamapṛkthā viṣamid vā apṛkthāḥ | ahimevābhyapehi taṃ jahi

हिन्दी अर्थ

पाश तीन है" उत्तम, मध्यम ओर अधम । सम्भवतः (१ ) त्रिविध दुःख आध्यात्मिक, भ्राधिदेविक तथा अःपिभौतिक । (२) त्रिविध भोग, मानसिक सब पाशो को (प्रमञ्च) छा दे, (ये) जो कि (उत्तमाः अधमाः ) उत्तम ओर अघम (ये वारुणाः) श्रौर जो वरणीय आप परमेश्वर द्वारा कर्मा- लोकम्) सुकमियो के लोक' में गच्छेम) हम जणएुं। निःष्व =निः, षू प्रेरणे १. सुकर्भियों के समाज में जाने के योग्य हम हयो सके । भ्रथवा “नाकलोक" मे जाने ॐ भ्रविकारी हो सकं (यज्ु° ३११६) ।

English

A charm against a rival in love Tear thou asunder, as of old, like tangles of a creeping plant. Demolish thou the Dāsa’s might.

अध्याय 7

श्लोक 89.1

दिव्या आपः।१-४ सिन्धुद्वीपः।अग्निः।अनुष्टुप्, ४ त्रिपदा निचृत् परोष्णिक्।अ॒पो दि॒व्या अ॑चायिषं॒ रसे॑न॒ सम॑पृक्ष्महि ।पय॑स्वानग्न॒ आग॑मं॒ तं मा॒ सं सृ॑ज॒ वर्च॑सा

divyā āpaḥ| 1-4 sindhudvīpaḥ| agniḥ| anuṣṭup, 4 tripadā nicṛt paroṣṇik| apo divyā acāyiṣaṃ rasena samapṛkṣmahi | payasvānagna āgamaṃ taṃ mā saṃ sṛja varcasā

हिन्दी अर्थ

१३० अथवववेद-भाष्य का० ७1 अनुप सू०ष्ठ मर्त्याः मनुष्यनाम (निधं २।३)। जातवेदा; = जातानां वेदिता (सायण)। ते त्राण करनेकी भावना को, शासक वे मे परिपुष्ट करने वाले ! भृत् अपानुदो जन॑ममिन्नायन्तमुं देवेभ्यां अकृणोरु लकम् ॥२॥ (उरुम्, लोकम्) विस्तृत लोक ( अकृणोः उ) कर ।

English

May we with Indra’s help divide the gathered treasure of the foe. I, by the law of Varuna, bring down thy pride and wantonness. Ut virga abeat et feminis innocua fiat, (virga) membri humidi, membri quod verberat

अध्याय 7

श्लोक 89.2

सं मा॑ग्ने॒ वर्च॑सा सृज॒ सं प्र॒जया॒ समायु॑षा ।वि॒द्युर्मे॑ अ॒स्य दे॒वा इन्द्रो॑ विद्यात् सह ऋषि॑भिः

saṃ māgne varcasā sṛja saṃ prajayā samāyuṣā | vidyurme asya devā indro vidyāt saha ṛṣibhiḥ

हिन्दी अर्थ

। का० ७ । श्रनु० ८। सू० ८६ अथववेद-भाष्य १३१ लिये 1 चर्षणयः मनुष्यनाम (निघं० २।३) । (मृगः न) सिह के सदृश (भीमः) भयद्भुर्, (कुचरः) पृथिवी पर विचरने वाला, (गिरिष्ठाः) तथा पवतो पर जाकर स्थित होने वाला सम्राट् पर (वितादि) प्रहार कर, श्रौर (मृधः) संग्रामकारियों को (विनुदस्व) साम्राज्य से परे धकेल ।

English

penetratque, id quod tentum est laxa, id quod sursum tentum est deorsum tende. A Prayer for protection May Indra with his help, Lord of all treasures, be unto us a careful protector.

अध्याय 7

श्लोक 89.3

इ॒दमा॑पः॒ प्र व॑हताव॒द्यं च॒ मलं॑ च॒ यत्।यच्चा॑भिदु॒द्रोहानृ॑तं॒ यच्च॑ शे॒पे अ॒भीरु॑णम्

idamāpaḥ pra vahatāvadyaṃ ca malaṃ ca yat| yaccābhidudrohānṛtaṃ yacca śepe abhīruṇam

हिन्दी अर्थ

पविः वज्रनाम. (निघं० २।२० । ताहि वधकर्मां (निषं° २।१९) । तड आघाते (चुरादिः) । अभिप्राय यह करि सम्राट् पद. के लिये योग्य व्यित, चाह कहीं भी रहता हो, उसे स्वीकृत करना चाहिए 1 स्यमृषु वाजिनं देवभूतं सहोवानं तर्ूतारं रथानाम् । (आहुवेम ) आदर पूर्व॑क हम आमन्त्रित करते हैँ ! वाजिनम्, वाजः बलनाम (निघं २।६) । देवजूतम् =देवभ्रीतं वा १३२ ध्रथवेवेद-भाष्य का० ७1 अनु० ८। सू० ६२

English

Drive off our foes and give us peace and safety. May we be lords of goodly store of heroes. A Prayer for protection May this rich Indra as our good protector keep even far away the men who hate us.

अध्याय 7

श्लोक 89.4

एधो॑ऽस्येधिषी॒य स॒मिद॑सि॒ समे॑धिषीय ।तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धेहि

edho'syedhiṣīya samidasi samedhiṣīya | tejo'si tejo mayi dhehi

हिन्दी अर्थ

भीतर, (यः) जो (वीरुधः) विविध रूप में प्रादुर्भूत हमा (ओषधीः) ओषधियों में (आविवेश) प्रविष्ट है। (यः) जिसने (दमा=-दइमानि विष्वा = विश्वानि इन सब (भुवनानि) भुवनो को (चाक्लुपे) रचा है, (तस्मै रुद्रः रोदयतीति शद्रः । जो कि कर्मानुसार प्राणियों को सलाता है । का० ७॥ अनु० ८) सू० ६३ श्रथवेवेद-भाष्य हे गरुड ! (भपेदहि) तू जा, (अरिः प्रसि) सप का शत्रुतूहै, (अरिः वै असि) निश्चयसेतूशत्रुहै। (विषे) सपिके विषमे (विषम्) अपना विष (अपुक्थाः) तूने मिला दिया है, (विषम्, इत्, वे अदृक्थाः) निश्चय से अपना विषतू नेमिला दिया है। (श्रहिम्, एव) सपिकोही

English

May we enjoy his favour, his the holy: may we enjoy his blessed loving-kindness. A prayer for success in battle With Indra’s and with Manyu’s aid may we subdue our enemies, resistlessly destroying foes.

अध्याय 7

श्लोक 90.1

शत्रुबलनाशनम्।१-३ अङ्गिराः।मन्त्रोक्ताः।१ गायत्री, २ विराट् पुरस्ताद् बृहती, अपि॑ वृश्च पुराण॒वद् व्र॒तते॑रिव गुष्पि॒तम्।ओजो॑ दा॒स्यस्य॑ दम्भय

śatrubalanāśanam| 1-3 aṅgirāḥ| mantroktāḥ| 1 gāyatrī, 2 virāṭ purastād bṛhatī, api vṛśca purāṇavad vratateriva guṣpitam| ojo dāsyasya dambhaya

हिन्दी अर्थ

के विषमे भिलादेताहै, चोंचद्वारासांप को क्षत-विक्षत कर देना यह गरुडका विष है । इसके पश्चात् सांप मर जाता है । ७।५।१६) “गरणवान् का अथं है निगीणे करने वाला, (गृ निगरणे, तुदादिः) । परमेश्वर पाप-ग्रहि को निगलता है, मानो नष्ट करता है, ग्रत पाप-अहिकाअरिरहै, शत्र है वहु पाप-अहि के विष श्र्थात् दुरित को, विष कर अन्त में पाप-अहि को मार डालता है, पृथक् कर देता है । विषम् उदक- (दिव्याः) दिव्य (आपः) “आपः” नामक परमेश्वर की (अचायिषम्) मने पजा की है, (रसेन) आनन्दरस से (समपृक्ष्महि) हम सब पूजा करने वाले को (वचसा) तेज के सथ (संसुज) संयुक्त कर ।

English

A charm to ensure the obedience of subjects We laid the constant Soma on with constant sacrificial gift, That Indra may make all the tribes unanimous and only ours.

अध्याय 7

श्लोक 90.2

व॒यं तद॑स्य॒ सम्भृ॑तं॒ वस्विन्द्रे॑ण॒ वि भ॑जामहै ।म्ला॒पया॑मि भ्र॒जः शि॒भ्रं वरु॑णस्य व्र॒तेन॑ ते

vayaṃ tadasya sambhṛtaṃ vasvindreṇa vi bhajāmahai | mlāpayāmi bhrajaḥ śibhraṃ varuṇasya vratena te

हिन्दी अर्थ

आपः तथा अग्नि-परमेष्वर के नाम हँ (यजु° ३२।२) । प्रचायिषम् == चायु पूजानिशामनयोः (भ्वादिः) । पजा वस्तुतः चेतन कौ होती है, जड १३४ अथर्वैवेद-भाष्य का० ७। अनु० ८। सू० ६३ (श्रमे) है श्रम्नि” नामक परमेश्वर ! (मा) मुभे (वचसा) तेज के मे) इष मुभ की स्थिति को (देवाः) राष्ट के विद्वान् (विदयः) जानें, तथा

English

An incantation against an undetected thief To heaven, as ‘twere, have soared this man’s two vultures, staggering, dusky hued.

अध्याय 7

श्लोक 90.3

यथा॒ शेपो॑ अ॒पाया॑तै स्त्री॒षु चास॒दना॑वयाः ।अ॒व॒स्थस्य॑ क्न॒दीव॑तः शाङ्-कु॒रस्य॑ नितो॒दिनः॑ ।यदात॑त॒मव॒ तत् त॑नु॒ यदुत्त॑तं॒ नि तत् त॑नु

yathā śepo apāyātai strīṣu cāsadanāvayāḥ | avasthasya knadīvataḥ śāṅ-kurasya nitodinaḥ | yadātatamava tat tanu yaduttataṃ ni tat tanu

हिन्दी अर्थ

के होने चाहिए, धन लोलुप तथा पद लोलुप नहीं । (आपः) है जलो ! (इदम्) इसे (प्रवहत) प्रवाहित कर दो (यत् च) मानसिक तमोगुणरूपी मल है, (यत् च) ओर जो (ग्रभिदुदरोह्) मरक मे द्रोह- “प्रवाहित” करने द्वारा नदी के प्रवाह का वणेन अभिप्रेतहै । नदीके प्रौर शापके हेतुमूत क्रोध, द्वेषभावना का उपचार करने का विधान

English

The Parcher and the Drier-up, the pair who parch and dry his heart. I verily have stirred them up like oxen resting after toil. Like two loud-snarling curs, or like two wolves who watch to make their spring:

अध्याय 7

श्लोक 91.1

सुत्रामा इन्द्रः।१ अथर्वा।चन्द्रमाः (इन्द्रः)।त्रिष्टुप्।इन्द्रः॑ सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒ अवो॑भिः सुमृडी॒को भ॑वतु वि॒श्ववे॑दाः ।बाध॑तां॒ द्वेषो॒ अभ॑यं नः कृणोतु सु॒वीर्य॑स्य॒ पत॑यः स्याम

sutrāmā indraḥ| 1 atharvā| candramāḥ (indraḥ)| triṣṭup| indraḥ sutrāmā svavā~ avobhiḥ sumṛḍīko bhavatu viśvavedāḥ | bādhatāṃ dveṣo abhayaṃ naḥ kṛṇotu suvīryasya patayaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

तो सवेशक्तिमान् की कृपा से सब बुराइयों का नश होना सवथा सम्भव का० ७। अनु० ८ सु° € ॒भ्रथर्ववेद-भाष्य मयि धेहि) तेज मुभ मे स्थापित कर) , (इव) जंसे (व्रततेः) लता के (गुष्पितम्) शुच्छेकोकाटाजाताहै उस

English

Like two that thrust, like two that pierce, like two that strike with mutual blows. I bind the conduit of the man or dame who hence hath taken aught. An incantation against an undetected thief

अध्याय 7

श्लोक 92.1

सुत्रामा इन्द्रः।१ अथर्वा।चन्द्रमाः (इन्द्रः)।त्रिष्टुप्।स सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒ इन्द्रो॑ अ॒स्मदा॒राच्चि॒द् द्वेषः॑ सनु॒तर्यु॑योतु ।तस्य॑ व॒यं सु॑म॒तौ य॒ज्ञिय॒स्यापि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म

sutrāmā indraḥ| 1 atharvā| candramāḥ (indraḥ)| triṣṭup| sa sutrāmā svavā~ indro asmadārāccid dveṣaḥ sanutaryuyotu | tasya vayaṃ sumatau yajñiyasyāpi bhadre saumanase syāma

हिन्दी अर्थ

का भी वणेन हृजा है (७।६६।३) । जम्भय; जम्भयतिववेघकर्मा इति यास्कः; तथा (निघं० २।१९; सायण) वेदानुसार व्यभिचारी को एसा दण्ड, पुराण- विधि है । भोजः मलं प्रजननसमर्थं वीयं वा जम्भय विनाशय (सायण) । नियमानुसार (म्लापयामि) हषदयकारी कर देता हूं 1 १३६ प्रथवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० ८ सु० €. का० ७ 1 अनु० € । सू० ६७ अथरवैद-भाष्य १३७ व ५५ त । वान् हौ । (दवेषः बाधताम्) हमारे द्ेषियों का हनन करे, भौर (नः) हम हिसा में स्थित, (क्नदीवतः = करदीवतः) कन्दन करने वाले, (शाड कुरस्य ¦ णड कु की तरह पीडित करने वाले, (नितोदिनः) नितरां मानसिक व्यथाप्रद

English

The kine are resting in the stall, home to her nest hath flown the bird, The hills are firmly rooted: I have fixed the kidneys in their place. Sacrificial formulas

अध्याय 7

श्लोक 93.1

शत्रुनाशनम्।१ भृग्वङ्गिराः।इन्द्रः।गायत्री।इन्द्रे॑ण म॒न्युना॑ व॒यम॒भि ष्या॑म पृतन्य॒तः ।घ्नन्तो॑ वृ॒त्राण्य॑प्र॒ति

śatrunāśanam| 1 bhṛgvaṅgirāḥ| indraḥ| gāyatrī| indreṇa manyunā vayamabhi ṣyāma pṛtanyataḥ | ghnanto vṛtrāṇyaprati

हिन्दी अर्थ

(भवतनु) है राजन् ! तु संकुचित कर, (यत्) ओर जो (उत्तमम्") समू- ; न्तत बल है (तत्) उसे (नि तनु) नीचा कर दे। । कर्मो के कारण रोने वाले (क्रदि रोदने च, भ्वादिः) 1 सप्तम काण्ड का आठवां अनुवाक समाप्त । सुमति मे, (अपि) तथा उसकी (सौमनसे) मानसिक प्रसन्नता में (वयं

English

As we have here elected thee, skilled Hotar! to-day as this our sacrifice proceedeth, Come to the firm place, mightiest! yea, come firmly. Knowing the sacrifice, approach the Soma.

अध्याय 7

श्लोक 94.1

सांमनस्यम्।१ अथर्वा।सोमः।अनुष्टुप्।ध्रु॒वं ध्रु॒वेण॑ ह॒विषाव॒ सोमं॑ नयामसि ।यथा॑ न॒ इन्द्रः॒ केव॑ली॒र्विशः॒ संम॑नस॒स्कर॑त्

sāṃmanasyam| 1 atharvā| somaḥ| anuṣṭup| dhruvaṃ dhruveṇa haviṣāva somaṃ nayāmasi | yathā na indraḥ kevalīrviśaḥ saṃmanasaskarat

हिन्दी अर्थ

निर्वाचित होता है। त्रियते इति वरणः । - । ं । का० ७। म्रनु । मू० € अथववरेद-भाष्य १३९ कर्, (वृत्राणि) राष्टरका ञावरण कैरने वाले, घेरा डालने वाले शएतरप्रों का (सोमम्) परकीय-सेनानायक का (अवेनयामपि) हम अवपात करते गत्रुरहित या पारस्परिक सेवा वासी, (संमनसः) श्रौर एकं मन वाली

English

With kine connect us, and with spirit, Indra! Lord of Bay Steeds, with princes and with favour, With the God-destined portion of the Brāhmans, and the good-will of Gods who merit

अध्याय 7

श्लोक 95.1

शत्रुनाशनम्।१-३ कपिञ्जलः।गृध्रौ।अनुष्टुप्, २-३ भुरिक्।उद॑स्य श्या॒वौ वि॑थु॒रौ गृध्रौ॒ द्यामि॑व पेततुः ।उ॒च्छो॒च॒न॒प्र॒शो॒च॒नाव॒स्योच्छोच॑नौ हृ॒दः

śatrunāśanam| 1-3 kapiñjalaḥ| gṛdhrau| anuṣṭup, 2-3 bhurik| udasya śyāvau vithurau gṛdhrau dyāmiva petatuḥ | ucchocanapraśocanāvasyocchocanau hṛdaḥ

हिन्दी अर्थ

हूविरूप हैँ । परकीय सेना का सेनाध्यक्ष जव ध्रु होकर युद्ध लड़ रहा हो. चाहिए, ताक्रि परकीय सेनानायक का अधोनयने करिया जा सकं । श्रथवेवेद-भाष्य॒को० ७ श्रनु०. 1 सू० ६४ (इव) जैसे (गृध्रौ) दो गीष (याम्) चयुलोक की ग्रोर (उत् पेततुः)

English

worship. The willing Gods whom, God, thou hast brought hither, send thou to their own dwelling place, O Agni. When ye have eaten and have drunk sweet juices, endow this man with precious wealth, ye

अध्याय 7

श्लोक 95.2

अ॒हमे॑ना॒वुद॑तिष्ठिपं॑ गावौ॑ श्रान्त॒सदा॑विव ।कु॒र्कु॒रावि॑व॒ कूज॑न्तावु॒दव॑न्तौ॒ वृका॑विव

ahamenāvudatiṣṭhipaṃ gāvau śrāntasadāviva | kurkurāviva kūjantāvudavantau vṛkāviva

हिन्दी अर्थ

उड़ द, वैसे (अस्य) इस पुमान् मनर ३ के (ष्यावौ) श्याववणे वाले, ओर, (हूदः) हदय से उडर्हैः जोकि (ग्रस्य) इस पुमान् के हृदको (उत् शोचनौ प्रशोचनौ) शोकित तया संतापिति कर देतेर्है, तयाजो लोभ-मोह (उच्छेचनौ) स्वभावतः शोर्पत तथा संतापित करने वालेर्हू। गोव वृक्षसे चूलोक की ओर उडतादहै। इसी प्रकार लोभ-माह् हदयस उठ कर सिरकी भ्रोर उडत, सिर के मस्तिष्क को विकृत करदेतेहैं। द्यौः द्वारासिरको सूचित किया है । यथा “शीर्ष्ण यौः समवतेत"' (यजु° इर! लोभ-मोह को भिधित वणं वाले सूचित क्रिया है । लोभ-मौह् तमोगुण ग्रौर रजोगण के भिश्रण के परिणाम होतेह । भाव कोस्पष्टकरनेकेलिये

English

Vasus. Gods, we have made your seats of easy access, who, pleased with me, have come to my libation.

अध्याय 7

श्लोक 95.3

आ॒तो॒दिनौ॑ नितो॒दिना॒वथो॑ संतो॒दिना॑वु॒त।अपि॑ नह्याम्यस्य॒ मेढ्रं॒ य इ॒तः स्त्री पुमा॑न् ज॒भार॑

ātodinau nitodināvatho saṃtodināvuta| api nahyāmyasya meḍhraṃ ya itaḥ strī pumān jabhāra

हिन्दी अर्थ

कुराविवु रूजन्तःवुदरधन्तौ वरकरंविव ॥२॥ (अहम्) मैन (एनौ) इन दोनों “लोभ. मोह" को (उदपिष्ठिपिम्) इस के हदय श्रौर मस्तिष्कसे उठादियादहै बहिष्कृत कर दिया है, (इव) जंसे कि (श्रान्तसदौ) थककर बरेठी (गवौ) दो गोभों को, (इव) जेसे (कजन्तौ) घुरघुराते (कुकूरौ, दो कुत्तो को, तथा (इव) जसे (उदवन्तौ) छाती में फफडो -में वायु तथा हृदय मेँ रक्तरूपी जल होता है । भ्रन्तरिक्षमेभी वायु ग्रौर मेघरूपी जल दीताहै। दम हदयरूपी अन्तरिक्ष से लोभ-मोहरूपी दो पक्षी, सिरया मस्तिष्करूपी यौःकीः -इतेहँ। वेदिक साहित्यानुधार सिर है दयौः, . पेट है श्रन्नाधारा पृथिवी । मुख में लाररूपी उदक वाले (वृकौ) दो भेड्यों को जबरदस्ती उठादिया

English

Bearing and bringing hitherward your treasures, after the rich warm beverage mount to heaven. Go to the sacrifiee, go to its master, Sacrifice! To thy birth- place go with Svāhā.

अध्याय 7

श्लोक 96.1

शत्रुनाशनम्।१ कपिञ्जलः।वयः।अनुष्टुप्।अस॑द॒न् गावः॒ सद॒नेऽप॑प्तद् वस॒तिं वयः॑ ।आ॒स्थाने॒ पर्व॑ता अस्थुः॒ स्थाम्नि॑ वृ॒क्काव॑तिष्ठिपम्

śatrunāśanam| 1 kapiñjalaḥ| vayaḥ| anuṣṭup| asadan gāvaḥ sadane'paptad vasatiṃ vayaḥ | āsthāne parvatā asthuḥ sthāmni vṛkkāvatiṣṭhipam

हिन्दी अर्थ

१४० अथरवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० € । सूक्त १०० मनोभावना हारा लोभ-मोह् को हूदय ओर मस्तिष्क से बहिष्कृत कर देता है, उठा देता है । तीन दृष्टन्तं द्वारा लोभ-मोह के तारतम्य को सूचित कियाजातादहै। तथा वृकं के लोभ-लालच को “उदवन्तौ"” द्वारा मन्त्र मेँ. सुचित क्रिया है, जिस के मुख से खाने के लिये लार बहती रहती है। दिनी) नितराम् व्यथा दाई हैँ । (उत) .ओौर (संतोदिनौ) ये दोनों मिल

English

This is thy sacrifice with hole hymnal, Lord of the Rite, Svāhā! and fraught with vigour. Vashat to paid and yet unpaid oblations! Ye Gods who know the way, find and pursue it! Lord of the Mind, lay this our sacrifice in heaven among the

अध्याय 7

श्लोक 97.1

यज्ञः १-५ अथर्वा।इन्द्राग्नी।त्रिष्टुप्, ५ त्रिपदार्षी भुरिग्गायत्री, ६ त्रिपदा प्राजापत्या बृहती, ७ त्रिपदा साम्नी भुरिग्जगती, ८ उपरिष्टाद्बृहती।यद॒द्य त्वा॑ प्रय॒ति य॒ज्ञे अ॒स्मिन् होत॑श्चिकित्व॒न्नवृ॑णीमही॒ह।ध्रु॒वम॑यो ध्रु॒वमु॒ता श॑विष्ठ प्रवि॒द्वान् य॒ज्ञमुप॑ याहि॒ सोम॑म्

yajñaḥ 1-5 atharvā| indrāgnī|triṣṭup, 5 tripadārṣī bhuriggāyatrī, 6 tripadā prājāpatyā bṛhatī, 7 tripadā sāmnī bhurigjagatī, 8 upariṣṭādbṛhatī| yadadya tvā prayati yajñe asmin hotaścikitvannavṛṇīmahīha| dhruvamayo dhruvamutā śaviṣṭha pravidvān yajñamupa yāhi somam

हिन्दी अर्थ

(गावः) गौएं (सदने) गोशाला में (ग्रसदन्) बैठ गई ह, (वयः) पक्षी का०७। अनु । सू० १०१ श्रथवेवेद-भाष्य १४१ सायंकाल मे गौग्रों भौर पक्षियों का निजस्थानों में स्थित हो जाने, ओर निज स्थानों में करदेनेका निदेश हुश्रा है ।

English

Gods. Svāhā in heaven! Svāhā on earth! Svāhā in air! In wind have I paid offerings. Hail! Anointing the sacred grass

अध्याय 7

श्लोक 97.2

समि॑न्द्र नो॒ मन॑सा नेष॒ गोभिः॒ सं सू॒रिभि॑र्हरिव॒न्त्सं स्व॒स्त्या।सं ब्रह्म॑णा दे॒वहि॑तं॒ यदस्ति॒ सं दे॒वानां॑ सुम॒तौ य॒ज्ञिया॑नाम्

samindra no manasā neṣa gobhiḥ saṃ sūribhirharivantsaṃ svastyā| saṃ brahmaṇā devahitaṃ yadasti saṃ devānāṃ sumatau yajñiyānām

हिन्दी अर्थ

(त्वा) तुभे (अवृणीमहि) हप ने वरण क्रिया है, चुना है, तो (शविष्ठ)हे सोमयज्ञ को लक्षय कर (उप) हमारे समीप (याहि) प्राप्त हो । सं बरह्मणा देवहितं यदस्ति . देवान सुमतो य्खियानाम् ॥२॥ १५२ प्रथववेद-भाष्य का० ७। अनु० । सू०.१०१ । फा० ७। अनु० ९। सू० १०१ अथव॑वेद-भाष्य ॥ (मनसा) ज्ञान तथा अवबोधन, ओर (गोभिः) गौश्नो के साथ (संनेष)

English

Balmed is the Grass with butter and libation, with Indra. gracious Lord, and with the Maruts. Hail! let the sacrifice go forth anointed to Indra with the Gods and Visve Devas. The preparation of the altar

अध्याय 7

श्लोक 97.3

यानाव॑ह उश॒तो दे॑व दे॒वांस्तान् प्रेर॑य॒ स्वे अ॑ग्ने स॒धस्थे॑ ।ज॒क्षि॒वांसः॑ पपि॒वांसो॒ मधू॑न्य॒स्मै ध॑त्त वसवो॒ वसू॑नि

yānāvaha uśato deva devāṃstān preraya sve agne sadhasthe | jakṣivāṃsaḥ papivāṃso madhūnyasmai dhatta vasavo vasūni

हिन्दी अर्थ

कोटि के गुरुओ की नहीं । ये "वसु", विया, सदाचार, सक्कर्मो भौर योगा- त. वहमाना भरमाणा स्वा व्ुनि व्यु घमं दिवमा रोहुतावु ॥८॥ प्रित कर । (वसवः) ह वसुकरोटि के गृरुग्रों । (मधूनि) मधुर (जक्षिवांसः, ॥ धन (अस्मे) इस आश्रम कं लिये (धत्त) प्रदान करो आ अवह: --लड, लकार, वह प्रापणे (भ्वादिः ) । उषतः जिन्होने । सवेच्छपूवंक सेवा करना स्वीकार फिय। है, न्ह । वसवः =आश्रमकी

English

Strew thou the Grass, and spread it on the Altar: rob not the sister who is lying yonder. The Hotar’s seat is green and golden: these are gold necklets. in the plaee of him who worships.

अध्याय 7

श्लोक 97.4

सु॒गा वो॑ देवाः॒ सद॑ना अकर्म॒ य आ॑ज॒ग्म सव॑ने मा जुषा॒णाः ।वह॑माना॒ भर॑माणाः॒ स्वा वसू॑नि॒ वसुं॑ घ॒र्मं दिव॒मा रो॑ह॒तानु॑

sugā vo devāḥ sadanā akarma ya ājagma savane mā juṣāṇāḥ | vahamānā bharamāṇāḥ svā vasūni vasuṃ gharmaṃ divamā rohatānu

हिन्दी अर्थ

मिककोटिकं वघु-गरओों कौही भावश्यकता होती हैर श्रौरञदित्य १४४ श्रथवंवेद-भाष्य का० ७। श्रनु° € । सु° १०१ हम प्रतिदिन के यज्ञ.मे आहति देते है । परमेश्वरापित करते हुए उसका संचालन करना चाहिए । “यज्ञ'' परमेश्वर । यज्ञ (सहसूक्तवाकः) सूक्तो के कथन कं समेत, (ते) तेरे लिये समर्पित है ।

English

A charm against nightmare I turn away from evil dream, from dream of sin, from indigence.

अध्याय 7

श्लोक 97.5

यज्ञ॑ य॒ज्ञं ग॑च्छ य॒ज्ञप॑तिं गच्छ ।स्वां योनिं॑ गच्छ॒ स्वाहा॑

yajña yajñaṃ gaccha yajñapatiṃ gaccha | svāṃ yoniṃ gaccha svāhā

हिन्दी अर्थ

(सुवीयः) जिस मं कि वीयं का उत्तम पालन किया जाता है, (स्वाहा) यह् चारी वेदिक सूक्तो का उच्चारण करते हुए वेदों क अध्ययन करते ह । वषैददुतेभ्यो वष उहुतेभ्यः देवां गातुविदो गातुं वित्वा गातुर्पित ॥७ निज गन्तव्यस्थानों के जानने वाले (देवाः) है उभयविध दिव्यजनो । स्थान पर (इत) चले जभ्र विश्राम के लिये ।

English

I make the prayer mine inmost friend. Hence! torturing. dreamy phantasies! The same The food that in a dream I eat is not perceived at early morn.

अध्याय 7

श्लोक 97.6

ए॒ष ते॑ य॒ज्ञो य॑ज्ञपते स॒हसू॑क्तवाकः ।सु॒वीर्यः॒ स्वाहा॑

eṣa te yajño yajñapate sahasūktavākaḥ | suvīryaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

किया है, भौर नियुक्ति में जिनका सत्कार भोज्यो भौर पेयो द्वाराहो चुका, का० ७1 भ्रनु° । सू० १०२ अथवेवेद-भाष्य १४५ नहीं हुआ, ये अहुत देव ह, गौर नियुक्तवसु हुतदेव हँ । इन सब कं सहमोज कं लिये पृथक्-पृथक् स्थान निश्चित किये हए है, जिन कि “गातु कषा हारा पूराकरनाहै। यह् विधि कालान्तर मँ कौ जायेगी, उससे पूवं देवों मन॑सस्पत इष नो दिवि देवेषु यङ्गम्।

English

May all that food be blest to me because it is not seen by day. A charm to obtain pardon for an indecent act When I have worshipped Heaven and Earth, reverenced Firma- ment and Death,

अध्याय 7

श्लोक 97.7

वष॑ड् ढु॒तेभ्यो॒ वष॒डहु॑तेभ्यः ।देवा॑ गातुविदो गा॒तुं वि॒त्त्वा गा॒तुमि॑त

vaṣaḍ ḍhutebhyo vaṣaḍahutebhyaḥ | devā gātuvido gātuṃ vittvā gātumita

हिन्दी अर्थ

यज्ञ को (नः) हमारे (देवेषु) वसु नामक गृरुदेवों ओर ब्रह्मचारियो मे देवो श्रादिमें इस यज्ञ की स्थापनाकरदीहै। "१४६ -अथर्ववेद-भाष्य का०७। अनु० । सू० १०३ (स्वाहा) तदथं स्वाहाधूर्वक हवि का व्याग हो ।

English

I will make water standing up. Let not the Sovrans injure me. The cry of an unemployed priest What princely warrior, seeking higher fortune, will free us from this shameful fiend of

अध्याय 7

श्लोक 97.8

मन॑सस्पत इ॒मं नो॑ दि॒वि दे॒वेषु॑ य॒ज्ञम्।स्वाहा॑ दि॒वि स्वाहा॑ पृथि॒व्यां स्वाहा॒न्तरि॑क्षे॒ स्वाहा॒ वाते॑ धां॒ स्वाहा॑

manasaspata imaṃ no divi deveṣu yajñam| svāhā divi svāhā pṛthivyāṃ svāhāntarikṣe svāhā vāte dhāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

देवेभिः एते वे रश्मयो विश्वे देवाः (श० ब्रा० १२।४।४।६) । है । साथ ही वर्षकालीन यज्ञ का कथन कर उसे परमेषवरापित किया रै । का० ७ । श्रनु° € । सू० १०५ अथर्ववेद-माष्य १४७ चाहिए 1 निष्काः “निष्कः ०तल 6०7 ग कलिला ए1प्९३ साधन) । जिसे मद्रा ओौर सिक्का कहते है, ओर जिसे राज्य द्वारा निमित किया जाता है । निष्क का प्रथं सुवणं-हार भी होता दह। »

English

mischief? What friend of sacrifice? What guerdon-lover? Who winneth:

अध्याय 7

श्लोक 98.1

हविः।१ अथर्वा।इन्द्रः, विश्वे देवाः।विराट् त्रिष्टुप्।सं ब॒र्हिर॒क्तं ह॒विषा॑ घृ॒तेन॒ समिन्द्रे॑ण॒ वसु॑ना॒ सं म॒रुद्भिः॑ ।सं दे॒वैर्वि॒श्वदे॑वेभिर॒क्तमिन्द्रं॑ गच्छतु ह॒विः स्वाहा॑

haviḥ| 1 atharvā| indraḥ, viśve devāḥ| virāṭ triṣṭup| saṃ barhiraktaṃ haviṣā ghṛtena samindreṇa vasunā saṃ marudbhiḥ | saṃ devairviśvadevebhiraktamindraṃ gacchatu haviḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

मोषीः इस द्वारा सोई हई पत्नो कौ निद्रा के अपहरण करने को स्तेय कहा है “मुष स्तेये" (-क्रयादिः) । निद्रा भौ एक घन है, उस का अपहरण करने वाला मानो धन का ्रयहूरण करतादह, श्रतः चोर है। निष्कः. सिक्का । “नि” के न्" का लोप, शेष बचा, ““इष्क' = इ +स् 1क सिक होतृषदनं हारतं हिरण्ययं निष्का एते यज॑मानस्य टोके ॥१॥ हि (परि धेहि) गौर उसे परिधि दवारा घेर, (अमुया) उस वेवि कं समीप (शयानाम्) शयन की हुई (जामिम्) यजमान-पत्नी को (मा मोषीः ) कष्ट £ ॥

English

‘mid the Gods a long existence? A prayer for prosperity Who will prepare the dappled Cow, good milker, ne’er without calf, whom Varuna gave

अध्याय 7

श्लोक 99.1

वेदी।१ अथर्वा।वेदी।भुरिक् त्रिष्टुप्।परि॑ स्तृणीहि॒ परि॑ धेहि॒ वेदिं॒ मा जा॒मिं मो॑षीरमु॒या शया॑नाम्।हो॒तृ॒षद॑नं हरि॑तं हिर॒ण्ययं॑ नि॒ष्का ए॒ते यज॑मानस्य लो॒के

vedī| 1 atharvā| vedī| bhurik triṣṭup| pari stṛṇīhi pari dhehi vediṃ mā jāmiṃ moṣīramuyā śayānām| hotṛṣadanaṃ haritaṃ hiraṇyayaṃ niṣkā ete yajamānasya loke

हिन्दी अर्थ

(हिरण्ययम्) हिरण्यमय हौ । (यजमनस्य ) यजमान कं (लोके) घरमे नहीं होते । यह अनुभूत ह । (एते निष्काः) ये निष्क पर्याप्त है) देने चाहिए, ओर यज्ञवेदि को परिधियों वारा घेर दना चाहिए, ताकि कोई पशु यज्ञवेदि में प्रवेश न पा सके । यदि किसी व्रत को धारण कर, यजमान् की पत्नी, यज्ञ की पूवेरात्री में वेदि के समीप आकर शयन कर रहीहोतो, उसके शयन मेँ किसी प्रकार भी बाधाया विघ्न न हौना चाहिए । यजमान धनवान् है ग्रतः उसके होता का आसन, उसके सत्कारार्थं, सुवणंमय होना वम वर्म बुरे विचारोंको निवारण क्ररने वाला, उनसे रक्षा करने वाला, कवच ।

English

Atharvan, And, joying in Brihaspati’s alliance, arrange according to his will her body?

अध्याय 7

श्लोक 100.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१ यमः।दुःष्वप्ननाशनम्।अनुष्टुप्।प॒र्याव॑र्ते दु॒ष्वप्न्या॑त् पा॒पात् स्वप्न्या॒दभू॑त्याः ।ब्रह्मा॒हमन्त॑रं कृण्वे॒ परा॒ स्वप्न॑मुखाः॒ शुचः॑

duḥṣvapnanāśanam| 1 yamaḥ| duḥṣvapnanāśanam| anuṣṭup| paryāvarte duṣvapnyāt pāpāt svapnyādabhūtyāḥ | brahmāhamantaraṃ kṛṇve parā svapnamukhāḥ śucaḥ

हिन्दी अर्थ

१४८ अथवेवेद-माष्य का० ७ । प्ननु० € सू० १०६ हो (हि) यतः (तत्) वह (दिवा) दिन के स्मय (न दृश्यते) नहीं प्रजापतिः । नाना देवताः! विराट् पुरस्ताद् बृहती । नमः करके, (उध्वं तिष्ठन्) उठ खडा होकर, (मोक्नामि) मै जो चलता हं देनिक कार्योके करनेके लिये तब (ईश्वराः) भूलोक की अधोए्वर शव्तियां (मा) मेरी (मा हिसिषुः) हिसा न करे, मुके किसी प्रकार का

English

An initiation formula Leaving humanity behind, making the heavenly word thy choice, With all thy friends address thyself to furthering and guiding men.

अध्याय 7

श्लोक 101.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१ यमः।दुःष्वप्ननाशनम्।अनुष्टुप्।यत् स्वप्ने॒ अन्न॑म॒श्नामि॒ न प्रा॒तर॑धिग॒म्यते॑ ।सर्वं॒ तद॑स्तु मे शि॒वं न॒हि तद् दृ॒ष्यते॒ दिवा॑

duḥṣvapnanāśanam| 1 yamaḥ| duḥṣvapnanāśanam| anuṣṭup| yat svapne annamaśnāmi na prātaradhigamyate | sarvaṃ tadastu me śivaṃ nahi tad dṛṣyate divā

हिन्दी अर्थ

के मन्त्र २५) में परमेश्वर को “मृत्यु कहा है । ० ७। अनु० १० सू° १०७ श्रथवेवेद-माष्य मेक्षामि- यह् पद “मख या मखि गतौ" (भ्वादिः) का रूप प्रतीत होता छटा होकर मूत्र करूगा । इस अर्थं में “मेक्षामि"' पद को ह्िटनी ने १ रचने" का भविष्यत्-क।लिक रूप माना है । वेदानुयायी हिन्दुभो मे खड ्ौकर मूत्र करने की प्रथा नहो । वतमान में पेण्ट-घारी लोगों मे यह प्रथा अंग्रजी प्रथा से ्राईहै। सायण ने निम्नलिखित अथं किया है "तिष्ठन आसोनोऽदम् उध्वं

English

A prayer for pardon of sin Each thoughtless ill that we have done, O Agni, all error in our conduct, Jātavedas!

अध्याय 7

श्लोक 102.1

आत्मनोऽहिंसनम्।१ प्रजापतिः।द्यावापृथिवी, अन्तरिक्षम्, मृत्युः।विराट् पुरस्ताद् बृहती।न॒म॒स्कृत्य॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॑म॒न्तरि॑क्षाय मृ॒त्यवे॑ ।मे॒क्षाम्यू॒र्ध्वस्तिष्ठ॒न् मा मा॑ हिंसिषुरीश्व॒राः

ātmano'hiṃsanam| 1 prajāpatiḥ| dyāvāpṛthivī, antarikṣam, mṛtyuḥ| virāṭ purastād bṛhatī| namaskṛtya dyāvāpṛthivībhyāmantarikṣāya mṛtyave | mekṣāmyūrdhvastiṣṭhan mā mā hiṃsiṣurīśvarāḥ

हिन्दी अर्थ

भवामीति शेषः" । सायण ने मेक्षामि के स्थान में मेष्यामि पाठ माना है सप्तम काण्ड का नवम अनुवाक समाप्त को यज्ञकांमः कं उ पू्तिकाप्ः को देवेषु वनुते दीधेमायुं; ॥ ?' करेगा । (कः) कौन (यज्ञकामः) राष्ट्-यज्ञ कौ कामना वालारहै, (कः उ) भौर कोन (पूत्तिकामः) राष्टू-यज्ञ की पूति की कामना वाला है, (कः) कौन (देवेषु) राष्ट के देवों मे (दीषंम्, आयुः) दीधं प्राय (वनुते) चाहता है ।

English

Therefrom do thou, O sapient God, preserve us. May we thy friends, for bliss, have life eternal. A charm against Cough

अध्याय 7

श्लोक 103.1

क्षत्रियः।१ ब्रह्म।आत्मा।त्रिष्टुप्।को अ॒स्या नो॑ द्रु॒होऽव॒द्यव॑त्या॒ उन्ने॑ष्यति क्ष॒त्रियो॒ वस्य॑ इ॒च्छन्।को य॒ज्ञका॑मः॒ क उ॒ पूर्ति॑कामः॒ को दे॒वेषु॑ वनुते दी॒र्घमायुः॑

kṣatriyaḥ| 1 brahma| ātmā| triṣṭup| ko asyā no druho'vadyavatyā unneṣyati kṣatriyo vasya icchan| ko yajñakāmaḥ ka u pūrtikāmaḥ ko deveṣu vanute dīrghamāyuḥ

हिन्दी अर्थ

यदि कोई राष्ट, परकीय राष्टृपति की जिघांसा का शिकार बन जाय, लाभ द्वारा एतिहासिक दृष्टि से सदा जीवित रहना । (वनुते=न्वनु याचने १५० श्रथववेद-भाष्य का० ७ बनु० १० । सू १० ४ (बृहस्पतिना) बृहती वेदवाणी कं पति परमेश्वर फे स।थ (सस्यम्) सखि भाव का (जुषाणः) प्रतिपूर्व सेवन करने वाला, (यथावशम्) गिज कामनानुसार (तन्वः) निज तनुओं को (कल्पयाति) सामर््य॑युक्त करे पा हञा है । मौर हिरण्यय हिरण्यमय आसन या कोश है, हृदय (अथवं० १०।२।३१,३२) । इसे हिरण्ययी पुर् भी कटा है (ग्रथवं० १०।२।३३) !

English

The seven bright beams of Surya bring the waters downward from the sky, The streams of ocean: these have made the sting that pained thee drop away.

अध्याय 7

श्लोक 104.1

गौः।१ ब्रह्म।आत्मा।त्रिष्टुप्।कः पृश्निं धे॒नुं वरु॑णेन द॒त्तामथ॑र्वने सु॒दुघां॒ नित्य॑वत्साम्।बृह॒स्पति॑ना स॒ख्यंऽ जुषा॒णो य॑थाव॒शं त॒न्वः कल्पयाति

gauḥ| 1 brahma| ātmā| triṣṭup| kaḥ pṛśniṃ dhenuṃ varuṇena dattāmatharvane sudughāṃ nityavatsām| bṛhaspatinā sakhyaṃ' juṣāṇo yathāvaśaṃ tanvaḥ kalpayāti

हिन्दी अर्थ

क बृहती वाणी का पति बृहस्पति भी कहा है । वेदवाणी ज्ञान-दुग्ध प्रदानं दवारा वेदवाणोलूपी धेनु को सदा ज्ञान-दुगध प्रदात्री कहा है । यह धेनु धुगमः से दोही जा सकती है उस गोगधाद्वाराजो इस कौ नित्यसेवा करता ¶7° ७ । गरनु° १०। सू° ११० अथवेवेद-माष्य १५१ धनु सुदुघा है । वेद-धेनु नाना वर्णो वाली है, नानाविध पदार्थो का वणन

English

A prayer for protection 121 Whoso by stealth or openly would harm us, a friend who knows us, or a stranger, Agni!

अध्याय 7

श्लोक 105.1

दैव्यं वचः।१ अथर्वा।मन्त्रोक्ताः।अनुष्टुप्।।अ॒प॒क्राम॒न् पौरु॑षेयाद् वृणा॒नो दैव्यं॒ वचः॑ ।प्रणी॑तीर॒भ्याव॑र्तस्व॒ विश्वे॑भिः॒ सखि॑भिः स॒ह

daivyaṃ vacaḥ| 1 atharvā|mantroktāḥ| anuṣṭup|| apakrāman pauruṣeyād vṛṇāno daivyaṃ vacaḥ | praṇītīrabhyāvartasva viśvebhiḥ sakhibhiḥ saha

हिन्दी अर्थ

रतो है, जैसे कि चितकबरी धेनु नाना वर्णो वाली होती है। जो व्यक्ति रादा वेद-धेनु की सेवा करता, भौर वहस्पति के साय सखिभाव्रमें रहता है ६।येतनु है, स्थूल, सृष्ष्म तथा कारण शरीर । “यथावशं तन्वः कल्पयाति" का यह भी श्रभिप्रायहो सकता हैकि गी के यदि कोई ्रवणशिष्ट कमं हैँ जिन कि देहान्तरं मे भोगा जा सकता

English

May the strange she-fiend armed with teeth attack them: O Agni, theirs be neither home nor children!

अध्याय 7

श्लोक 106.1

अमृतत्वम्।१ अथर्वा।जातवेदा वरुणश्च।बृहतीगर्भा त्रिष्टुप्।यदस्मृ॑ति चकृ॒म किं चि॑दग्न उपारि॒म चर॑णे जातवेदः ।ततः॑ पाहि॒ त्वं नः॑ प्रचेतः शु॒भे सखि॑भ्यो अमृत॒त्वम॑स्तु नः

amṛtatvam| 1 atharvā| jātavedā varuṇaśca| bṛhatīgarbhā triṣṭup| yadasmṛti cakṛma kiṃ cidagna upārima caraṇe jātavedaḥ | tataḥ pāhi tvaṃ naḥ pracetaḥ śubhe sakhibhyo amṛtatvamastu naḥ

हिन्दी अर्थ

अपक्रामन पोरूषेयाद् हृणानो हैव्यं वच॑ः । वरण करता हुआ, (विश्वेभिः सखिभिः र तव ब्रह्मचारी सखाओं के साथ प्रविष्ट- ब्रह्मचारी के उपनयन काल में उसे उपदेश दिया है, (कौशिक यदस्ति चकम किचंदग्न उपारिम चरणे जातवेदः

English

Whoso oppresseth us O Jātavedas, asleep or waking, standing still or moving. Accordant with Vaisvānara thy comrade, O Jātavedas, meet them and consume them. A prayer for success in gambling

अध्याय 7

श्लोक 107.1

संतरणम्।१ भृगुः।सूर्यः आपः च।अनुष्टुप्।अव॑ दि॒वस्ता॑रयन्ति स॒प्त सूर्य॑स्य र॒श्मयः॑ ।आपः॑ समु॒द्रिया॒ धारा॒स्तास्ते॑ श॒ल्यम॑सिस्रसन्

saṃtaraṇam| 1 bhṛguḥ| sūryaḥ āpaḥ ca| anuṣṭup| ava divastārayanti sapta sūryasya raśmayaḥ | āpaḥ samudriyā dhārāstāste śalyamasisrasan

हिन्दी अर्थ

१५२ भ्रथवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० १०। स्० ११ । किचित्) जो कुछ (चकृम) हम से कम॑ हो गया है, (चरणे) तथा आचार व्यवहार में (उपारम) नो त्रुटि हुई है, (ततः) उससे (प्रचेतः) है भरज्ञानी (त्वम्) तु (नः) हमारी (पाहि) रक्षा कर, (शुभे) ताकि शुभकमोँ म सखिभ्यः हम जोततेरे सखा है परमेश्वर ! । गुस्करुल शिक्षा 3 (समुद्रियाः धाराः) अ्रन्तरिक्ष सेधागा रूप में बरसते ह, (ताः) वे जल (सूयस्य) सूयं की (सप्त रश्मयः) साते रश्रिमियां (दिवः) दुलोक ते;

English

My homage to the strong, the brown, the sovran lord among the dice! Butter on Kali I bestow: may he be kind to one like me.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।