Atharva Veda
7
अध्याय 7 / 20

Kanda 7

काण्ड 7

286 श्लोकभाग 2/5 · श्लोक 30.1–56.8

पूर्ण अध्याय पाठ65 श्लोक

अध्याय 7

श्लोक 30.1

अञ्जनम्।१ भृग्वङ्गिराः।द्यावापृथिवी, मित्रः, ब्रह्मणस्पतिः, सविता च ।बृहती।स्वाक्तं॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी स्वाक्तं॑ मि॒त्रो अ॑कर॒यम्।स्वाक्तं॑ मे॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॒ स्वाक्तं॑ सवि॒ता क॑रत्

añjanam| 1 bhṛgvaṅgirāḥ| dyāvāpṛthivī, mitraḥ, brahmaṇaspatiḥ, savitā ca | bṛhatī| svāktaṃ me dyāvāpṛthivī svāktaṃ mitro akarayam| svāktaṃ me brahmaṇaspatiḥ svāktaṃ savitā karat

हिन्दी अर्थ

वचन । “इको यणचि" द्वारा उकार को वकार । अराय्य,=अ-रा (दाने) + युक् डी + प्रथमा बहुवचन । दुर्वचः असत्य भाषण, कटवचनं परकोय निन्दा वचन आदि । सप्तम काण्ड का द्वितीय अनुवाक समाप्त प्राकृतिक उषाए' तौ केवल सूर्योदय से पूर्वं कुछ काल के लिये ही चमकती हैं 1 का० ७ । श्रनु०.३ । सू० २६९ अथर्वविद-माष्य ३५

English

Ye love the great law, Agni Vishnu! joying, ye feast on mystic essences of butter, Exalted in each house with fair laudation. Let your tongue stretch to take the offered fatness. A charm to be used when the eyes are anointed

अध्याय 7

श्लोक 31.1

शत्रुनाशनम्।१ भृग्वङ्गिराः।इन्द्रः।भुरिक् त्रिष्टुप्।इन्द्रो॒तिभि॑र्बहु॒लाभि॑र्नो अ॒द्य या॑वच्छ्रे॒ष्ठाभि॑र्मघवन्छूर जिन्व ।यो नो॒ द्वेष्ट्यध॑र॒ सस्प॑दीष्ट॒ यमु॑ द्वि॒ष्मस्तमु॑ प्रा॒णो ज॑हातु

śatrunāśanam| 1 bhṛgvaṅgirāḥ| indraḥ| bhurik triṣṭup| indrotibhirbahulābhirno adya yāvacchreṣṭhābhirmaghavanchūra jinva | yo no dveṣṭyadhara saspadīṣṭa yamu dviṣmastamu prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

(मरुतः) सेनिकों ने खोदा, (तत्) उस सब को--( सविता ) प्रेरक, को (नियच्छात्) नियम पूवेक प्रदान कर दे। वेश्य , विष्वेदेवाः (श ० त्रा° १०।४।१।९) । मरूतः = “देवसेनानामभि यो पत्य॑ते अतीतौ सहो भि विष्णुमगान् वरुणं पुवहंतिः ॥१॥

English

Heaven, Earth, and Mitra here have caused mine eyes to be- anointed well, Savitar, Brāhmanaspati take care that they be duly balmed! A prayer for the overthrow of enemies

अध्याय 7

श्लोक 32.1

दीर्घायुः।१ ब्रह्मा।आयुः।अनुष्टुप्।उप॑ प्रि॒यं पनि॑प्नतं युवा॑नमाहुती॒वृध॑म्।अग॑न्म॒ बिभ्र॑तो॒ नमो॑ दी॒र्घमायुः॑ कृणोतु मे

dīrghāyuḥ| 1 brahmā| āyuḥ| anuṣṭup| upa priyaṃ panipnataṃ yuvānamāhutīvṛdham| aganma bibhrato namo dīrghamāyuḥ kṛṇotu me

हिन्दी अर्थ

(ययोः) जिन दो के (ग्रोजसा) ओज द्वारा (रजांसि) लोक-लोका- शविष्टौ) शक्तिशाली है, ओौर (वीर्यः) शक्तियों दारा (वीरतमा = वीर- ३६ अथववेद-भाष्य का० ७। अनु° ३1 सू० २६ को थाम रहे हैँ यह यथाथं में अप्रतीत हे, अज्ञात" है । ्रगन् = गमेः छान्दसे लुडि च्लेः लुकि “मो नो घातोः” (अष्टा० ८।२। ६४) इति मकारस्य नत्वे

English

Rouse us to-day O Indra, Maghavan, hero, with thy best pos- sible and varied succours, May he who hateth us fall low beneath us, and him whom we detest let life abandon. A prayer to Agni for long life

अध्याय 7

श्लोक 33.1

दीर्घायुः।१ ब्रह्मा।मरुतः, पूषा, बृहसपतिः, अग्निः।पथ्यापङ्क्तिः।सं मा॑ सिञ्चन्तु म॒रुतः॒ सं पू॒षा सं बृह॒स्पतिः॑ ।सं मा॒यम॒ग्निः सि॑ञ्चतु प्र॒जया॑ च॒ धने॑न च दी॒र्घमायुः॑ कृणोतु मे

dīrghāyuḥ| 1 brahmā| marutaḥ, pūṣā, bṛhasapatiḥ, agniḥ| pathyāpaṅktiḥ| saṃ mā siñcantu marutaḥ saṃ pūṣā saṃ bṛhaspatiḥ | saṃ māyamagniḥ siñcatu prajayā ca dhanena ca dīrghamāyuḥ kṛṇotu me

हिन्दी अर्थ

(यस्य) जिस विष्णु ओर वरूण के (प्रदिशि) मे (यत् इदम्) जो यह सब (विरोचते ) विशेषतया प्रदीप्त हो रहा है, (च) ओरं (प्र अनति) प्राणने रहा है, (च) ओर (शचीभिः) कर्म ग्रौर वरुण के (धर्मणा) धारण द्वारा तथा (सहोभिः) बलों द्वारा (पुरा) (निघं° २।१; ३।६) । “विरोचते” द्वारा जड-जगत् का; तथा “प्रानति १. जसे दो दलो के सांमृस्य भें रस्ते के माध्यम द्वारा समतुलन होता है वै

English

We bringing homage have approached the friend who seeks our wondering praise, Young, strengthener of the sacrifice. May he bestow long life on me. A prayer for long life, children, and riches

अध्याय 7

श्लोक 34.1

शत्रुनाशनम्।१ अथर्वा।जाचवेदाः।जगती।अग्ने॑ जा॒तान् प्र णु॑दा मे स॒पत्ना॒न् प्रत्यजा॑तान् जातवेदो नुदस्व ।अ॒ध॒स्प॒दं कृ॑णुष्व॒ ये पृ॑त॒न्यवोऽना॑गस॒स्ते व॒यमदि॑तये स्याम

śatrunāśanam| 1 atharvā| jācavedāḥ| jagatī| agne jātān pra ṇudā me sapatnān pratyajātān jātavedo nudasva | adhaspadaṃ kṛṇuṣva ye pṛtanyavo'nāgasaste vayamaditaye syāma

हिन्दी अर्थ

भ्रज्ञात. है 1 वैनानिक कहते हँ किं इन में समतुलन ईथर द्वायाहो रहा है, जोकि खिचाव में टटता नहीं । वैदिक सिद्धान्त मे इन लोक-लोकान्तरों की विधृति" का० ७1 अनु० ३। सू० २७ ग्रथर्षवेद-भाष्य २३७. अवोचम्) मैने प्रवचन किया है, (यः) जिसने कि (पापिवानि) पृथिवी ओर अन्तरिक्ष के (रजांसि) लोकों का (विममे) निर्माण कियाहैतथा (यः) जिस (उरुगायः) महा स्तुति वाले ने (त्रेधा तरिचक्रमाणः) तीन प्रकार

English

Let Pūshan, let the Maruts, let Brihaspati pour forth on me; This present Agni pour on me children and riches in a stream! May he bestow long life on me.

अध्याय 7

श्लोक 35.1

सपत्नीनाशनम्।१-३ अथर्वा।जातवेदाः।१ जगती, २ अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्।प्रान्यान्त्स॒पत्ना॒न्त्सह॑सा॒ सह॑स्व॒ प्रत्यजा॑तान् जातवेदो नुदस्व ।इ॒दं रा॒ष्ट्रं पि॑पृ॒हि सौभ॑गाय॒ विश्व॑ एन॒मनु॑ मदन्तु दे॒वाः

sapatnīnāśanam| 1-3 atharvā| jātavedāḥ| 1 jagatī, 2 anuṣṭup, 3 triṣṭup| prānyāntsapatnāntsahasā sahasva pratyajātān jātavedo nudasva | idaṃ rāṣṭraṃ pipṛhi saubhagāya viśva enamanu madantu devāḥ

हिन्दी अर्थ

वह् (भीमः) न्याय कौ दृढता या कर्मफल के प्रदान मेँ भयानक है, (कुचरः) वह् पृथिवी में विचर रहा है. (गिरिष्ठाः) पर्वत में स्थित है, तथा मेष मे स्थित है। (परावतः परस्याः) दर देश कौीद्यौ सेभी दूर देशसे (आ जगम्यात्) वह आ जाता है। २८ ग्रथवेवेद-भाष्य का० ७ । अनु० ३1 सू० २७ पवंते"तथा मेषे तिष्ठति (निघं० १।१०) । आजगम्यात् = वह दर से दूर तक ओर समीप से समीप में व्याप्त है, अतः सबको दज्ञेन दे सकता. । यस्योरुषु निषु विकरमंणेष्वधि क्षियन्ति. युव॑नानि विचा । (विश्वा भुवनानि) सब भुवन (अधिक्षियन्ति) वसते है, (विष्णो) टे क्षयाय) हमारे निवास के लिये (ऊर) विस्तृत (कृधि) कर (घृतयोने) हे धूतोत्पत्ति के कारणरूप विष्णु ! (घृतं पिव) हमारी घृताहुतियों का

English

A prayer for freedom from sin and the overthrow of enemies Agni, drive off my rivals born and living, repel those yet unborn, O Jātavedas.

अध्याय 7

श्लोक 35.2

इ॒मा यास्ते॑ श॒तं हि॒राः स॒हस्रं॑ ध॒मनी॑रु॒त।तासां॑ ते॒ सर्वा॑साम॒हमश्म॑ना॒ बिल॒मप्य॑धाम्

imā yāste śataṃ hirāḥ sahasraṃ dhamanīruta| tāsāṃ te sarvāsāmahamaśmanā bilamapyadhām

हिन्दी अर्थ

तीन विक्रमणैः पृथिवी, ग्रन्तरिक्न मौर बुलोक, ओरयेरहैभी विहरण चाहता है, जहां-जहां किं विष्णु विद्यमान है, अतः विष्णु की सत्ता उसका उपभोग करना विहितः है । धूत का नाम यह् दशनि के लिये परित है कि “श्रायुवं घृतम्'' घृत आयुवधक है । का० ७। अनु० ३। सु २७ अथवेवेद-भाष्य २€

English

Cast down beneath my feet mine adversaries. In Aditi’s regard may we be sinless. A prayer for the prosperity of a King and his kingdom Subdue with conquering might his other rivals, those yet unborn repel, O Jātavedas.

अध्याय 7

श्लोक 35.3

परं॒ योने॒रव॑रं ते कृणोमि॒ मा त्वा॑ प्र॒जाभि भू॒न्मोत सूनुः॑ ।अ॒स्वं॑१ त्वाप्र॑जसं कृणो॒म्यश्मा॑नं ते अपि॒धानं कृणोमि

paraṃ yoneravaraṃ te kṛṇomi mā tvā prajābhi bhūnmota sūnuḥ | asvaṃ1 tvāprajasaṃ kṛṇomyaśmānaṃ te apidhānaṃ kṛṇomi

हिन्दी अर्थ

भान होता है जसे धूलिधूसरित पाद का । “षि दयानन्दकृत यजुवद भाष्य इसरा प्रकाशरहित पृथिवी आदि, ओौर जो तीसरा परमाणु ्रादि अदृश्य परमेण्वर ने (त्रीणि पदा) तीन पादो का (विचक्रमे) विक्षेप किया । (इतः) प्राकृतिक-शसनविधि को देखा करो, ओर् उसे निज व्रतो मे ढाल

English

For great felicity protect this kingdom, and in this man let all the Gods be joyful. Hae quot tibi sunt venae atque arteriae harum omnium os tibi lapide occlusi. 107

अध्याय 7

श्लोक 36.1

अञ्जनम्।१ अथर्वा।अक्षि, मनः।अनुष्टुप्।अ॒क्ष्यौऽनौ॒ मधु॑संकाशे॒ अनी॑कं नौ स॒मञ्ज॑नम्।अ॒न्तः कृ॑ष्णुष्व॒ मां हृ॒दि मन॒ इन्नौ॑ स॒हास॑ति

añjanam| 1 atharvā| akṣi, manaḥ| anuṣṭup| akṣyau'nau madhusaṃkāśe anīkaṃ nau samañjanam| antaḥ kṛṣṇuṣva māṃ hṛdi mana innau sahāsati

हिन्दी अर्थ

दोनों प्रापस में सखारहै। यथा शद्रा सुपर्णा सयजा सखाया" (ऋ० १। १६४५. ५० श्रथवैवेद-भाष्य का० ७ प्रनु० ३ । सू० २७ प्रापणीय स्वरूप को, (सूरयः) मेधावी उपासक (सदा पश्यन्ति) सदा दवारा फली हई (चक्षुः इव) सूरयरूपी आंख के सदृश ।

English

Uteri tui summam partem inferam facio: ne tibi soboles neque filius eveniat. Sterilem et infecundam te facio: lapidem tuum, operimentum facio. A charm to be pronounced by bride and bridegroom

अध्याय 7

श्लोक 37.1

वासः।१ अथर्वा।वासः।अनुष्टुप्।अ॒भि त्वा॒ मनु॑जातेन॒ दधा॑मि॒ मम॒ वास॑सा ।यथासो॒ मम॒ केव॑लो॒ नान्यासां॑ की॒र्तया॑श्च॒न

vāsaḥ| 1 atharvā| vāsaḥ| anuṣṭup| abhi tvā manujātena dadhāmi mama vāsasā | yathāso mama kevalo nānyāsāṃ kīrtayāścana

हिन्दी अर्थ

अभिप्राय यह् कि मेधावी उपासक जव भी चहँ तो वे ध्यानावस्थित होकर विष्णु का दशेन पा सवते है, जसे कि साधारण व्यक्ति दिन के समय जब भी चाहं तो सूये का दर्शन कर सकते हैँ । सूरय॑कोचक्षु कहादहै, जौ चक्षु कि दुलोक मेह! जैसे चक्षु गोलहै वैसे सूयं भी गोल दहै, जसे चक्षु प्रकाणमय ओर पदार्थौ का दशन कराती है, वसे सूयं भी प्रकाशमय तथा प्रमेषए्वर की स्थिति कही है । यथा -- योऽसावादिस्ये पुरुषः सोऽसावदहम् । (विष्णो) है सवव्यापक परमेश्वर ! (दिवः) घुलोक से, (उत वां). १. अ्रथवा ““हमारे दोनों हाथ भर दे, म्मौर इस निमित्त हमारे दाहिने तथा. बाए पावा से हमें प्रदान कर“ 1

English

Sweet are the glances of our eyes, our faces are as smooth as balm, Within thy bosom harbour me; one spirit dwell in both of us! A nuptial charm to be spoken by the bride

अध्याय 7

श्लोक 38.1

केवलः पतिः।१-५ अथर्वा।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ चतुष्पदा उष्णिक्।इ॒दं ख॑नामि भेष॒जं मां॑प॒श्यम॑भिरोरु॒दम्।प॒रा॒य॒तो नि॒वर्त॑नमाय॒तः प्र॑ति॒नन्द॑नम्

kevalaḥ patiḥ| 1-5 atharvā| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 catuṣpadā uṣṇik| idaṃ khanāmi bheṣajaṃ māṃpaśyamabhirorudam| parāyato nivartanamāyataḥ pratinandanam

हिन्दी अर्थ

का० ७। अनु० ३। सु० २८ श्रथवेवेद-भाष्य १ क ) (उत) तथा सव्यात्) बाएं से (आ 1 ४ के ५ कवितामंरहँ, क्योंकि हाथों से दिया जाता उतना धन जितना कि कोई दाए-बाएं हाथों अञ्ज वासम अनुं वस्तां व्रतेन यस्याः पदे पुनते देवयन्त॑! ।

English

With this my robe, inherited from Manu, I envelop thee, So that thou mayst be all mine own and give no thought to other dames. A maiden’s love-charm

अध्याय 7

श्लोक 38.2

येना॑ निच॒क्र आ॑सु॒रीन्द्रं॑ दे॒वेभ्य॒स्परि॑ ।तेना॒ नि कु॑र्वे॒ त्वाम॒हं यथा॒ तेऽसा॑नि॒ सुप्रि॑या

yenā nicakra āsurīndraṃ devebhyaspari | tenā ni kurve tvāmahaṃ yathā te'sāni supriyā

हिन्दी अर्थ

(इडा एव) वेदवाणो ही (व्रतेन) ब्रतकमोँ द्वारा मं कौ कामना वाले (पुनते) म्रपने-अप को पविश्र करते है 1 (वृतपदी) वेदवाणी के “पद” प्रकाशमय ह, (शक्वरी) वह शविति प्रदान करती, (सोमः ण) 9 1 उसको पीठ पर है, वहु ( वेश्वदेवी) ग दवाः का वणन करती है, (यज्ञम्). हमारे यज्ञकर्म में उप उपासक पवित्रे होकर षृरमेश्वर की प्राप्ति के ५८ न 1 १।१६४।३६), अर्थात् चाएं पढ़कर भी जो पश्मेष्वर को नहीं नानत

English

I dig this Healing Herb that makes my lover look on me and weep; That bids the parting friend return and kindly greets him as he comes. This Herb wherewith the Asuri drew Indra downward from the

अध्याय 7

श्लोक 38.3

प्र॒तीची॒ सोम॑मसि प्र॒तीच्यु॒त सूर्य॑म्।प्र॒तीची॒ विश्वा॑न् दे॒वान् तां त्वा॒च्छाव॑दामसि

pratīcī somamasi pratīcyuta sūryam| pratīcī viśvān devān tāṃ tvācchāvadāmasi

हिन्दी अर्थ

भ्रासुरी कमं हम पर प्रहारन कर सके । ४२ अथर्वेवेद-भाष्य का० ७ । अनु० ३ । सू० ३० मेधातिथिः वेददेवताक त्रिष्टुभ् । (परशुः) तथा कुशा को काटने वाला फरसा (नः) हमे (स्वस्ति) कल्याण-

English

Gods, With this same Herb I draw thee close that I may be most dear to thee. Thou art the peer of Soma, yea, thou art the equal of the Sun, p. a285

अध्याय 7

श्लोक 38.4

अ॒हं व॑दामि॒ नेत् त्वं स॒भाया॒मह॒ त्वं वद॑ ।ममेदस॒स्त्वं केव॑लो॒ नान्यासां॑ की॒र्तया॑श्च॒न

ahaṃ vadāmi net tvaṃ sabhāyāmaha tvaṃ vada | mamedasastvaṃ kevalo nānyāsāṃ kīrtayāścana

हिन्दी अर्थ

न्ताम् ) प्रीतिपूवेक सेवन करे 1 , उपस्थित विद्वानों का वणेन हभ है । ' ए दुर्ध का (पाथः) पान करते हो । (दमे दमे) घर-घर मे (सप्त) सात तुम दोनों की (जिह्वा) जिह्वा (घृतम्) चपि घत की (प्रति) ओर

English

The peer of all the Gods art thou: therefore we call thee hither— ward. I am the speaker here, not thou: speak thou where the assembly meets. Thou shalt be mine and only mine, and never mention other dames.

अध्याय 7

श्लोक 38.5

यदि॒ वासि॑ तिरोज॒नं यदि॑ वा न॒द्यऽस्ति॒रः ।इ॒यं ह॒ मह्यं॒ त्वामोष॑धिर्ब॒द्ध्वेव॒ न्यान॑यत्

yadi vāsi tirojanaṃ yadi vā nadya'stiraḥ | iyaṃ ha mahyaṃ tvāmoṣadhirbaddhveva nyānayat

हिन्दी अर्थ

(ख्राचरण्यात्) गति करती है । है । धृत दूध में छिपा होता है । उस समय उसका नाम दूध होता है धृत का० ७ ।-अनु० ३। ०३० अथर्ववेद-भाष्य ४३ नहीं । "पाथः" द्वारा भी दूध काही वणेन प्रतीत होता है, यह् पियाभी करती है, ओर सूयं रदिमिरूपी जिह्वाओं दवारा पान कररता है । जब घर-घर

English

If thou art far away beyond the rivers, far away from men, This Herb shall seem to bind thee fast and bring thee back my prisoner. A sacrificial charm for rain and prosperity

अध्याय 7

श्लोक 39.1

आपः।१ प्रस्कण्वः।आपः, सुपर्णः वृषभः त्रिष्टुप्।दि॒व्यं सु॑प॒र्णं प॑य॒सं बृ॒हन्त॑म॒पां गर्भं॑ वृष॒भमोष॑धीनाम्।अ॒भी॒प॒तो वृ॒ष्ट्या त॒र्पय॑न्त॒मा नो॑ गो॒ष्ठे र॑यि॒ष्ठां स्था॑पयाति

āpaḥ| 1 praskaṇvaḥ| āpaḥ, suparṇaḥ vṛṣabhaḥ triṣṭup| divyaṃ suparṇaṃ payasaṃ bṛhantamapāṃ garbhaṃ vṛṣabhamoṣadhīnām| abhīpato vṛṣṭyā tarpayantamā no goṣṭhe rayiṣṭhāṃ sthāpayāti

हिन्दी अर्थ

रत्न कहा है । यथा--१) सुगन्ध; (२) वायुशुद्धि; (६) रोग कीर्टाणुओं 0605 का हनन = रक्षोहा (ब्रथवं० ४।२३।३) † (४) अमीवचरातनं "गृह्य"! का श्रथंहै गृहामें निहित। धृत को गुहाहै दग्ध, इस मेघुत गृह्यरूप मे छिपा रहता है । अतः दुग्ाहृतियों दवाय “गुह्य” घृत की आहु- तियां सम्पन्न हो जाती हैँ । मन्व में "पाथः" का कर्म है "नामन कि सेवन करते हुए (वीयः) भक्षण करते हो । (दमे दमे) घर-घर म (सुष्ट्त्या आ कर इसे (उच्चरण्यात्) उ्वंगति प्रदान करे। '

English

May he establish in our home the master of riches, gladdening with rain in season, Mighty, strong-winged, celestial, dropping moisture, Bull of the plants and embryo of waters. A prayer for prosperity

अध्याय 7

श्लोक 40.1

सरस्वान्।१-२ प्रस्कण्वः।सरस्वान्।१ भुरिक्, २ त्रिष्टुप्।यस्य॑ व्र॒तं प॒शवो॒ यन्ति॒ सर्वे॒ यस्य॑ व्र॒त उ॑प॒तिष्ठ॑न्त॒ आपः॑ ।यस्य॑ व्र॒ते पु॑ष्ट॒पति॒र्निवि॑ष्ट॒स्तं सर॑स्वन्त॒मव॑से हवामहे

sarasvān| 1-2 praskaṇvaḥ| sarasvān| 1 bhurik, 2 triṣṭup| yasya vrataṃ paśavo yanti sarve yasya vrata upatiṣṭhanta āpaḥ | yasya vrate puṣṭapatirniviṣṭastaṃ sarasvantamavase havāmahe

हिन्दी अर्थ

घत द्वारा तैयार किये गये हव्यो कौ आहुतियां अग्नि के तेज मे, तथा सूये के उदित होने पर देनी चाहिए । ये दोनों तेजावस्थाएं आुतिथों के आहव्य देवों के गुणघर्मो का कथन करते हुए आहंतियां देना। आहृतिं अथवेवेद-भाष्य का० ७ । अनु० ३1 सू० ३२ मकः करोतेः छन्दसे लुडि, च्लेलुकि, गुणे, तिपो लोपे रूपभ; करत् = करोतेः लुडि च्लेः श्रड (सायण) ।

English

We call Sarasvān, under whose protection all cattle wander, to preserve and aid us, Him in whose ordinance abide the waters, to whose command the Lord of Plenty listens. Abiding here let us invoke Sarasvān, the seat of riches, glorious, wealth-increaser,

अध्याय 7

श्लोक 40.2

आ प्र॒त्यञ्चं॑ दा॒शुषे॑ दा॒श्वंसं॒ सर॑स्वन्तं पुष्ट॒पतिं॑ रयि॒ष्ठाम्।रा॒यस्पोषं॑ श्रव॒स्युं वसा॑ना इ॒ह हुवेम॒ सद॑नं रयी॒णाम्

ā pratyañcaṃ dāśuṣe dāśvaṃsaṃ sarasvantaṃ puṣṭapatiṃ rayiṣṭhām| rāyaspoṣaṃ śravasyuṃ vasānā iha huvema sadanaṃ rayīṇām

हिन्दी अर्थ

दारा, दिन के समय ने आजीविका-प्रदान द्वारा, मेघ ने वर्षा हारा जल ओर का० ७। श्रनु० ३।सू० २३ अथववेद-भाष्य ४५ कर । (यः) जो (नः) हमारे साथ (देष्टि) देष करता द (सः) वह् (श्रधरः) नौचे (पदीष्ट) पतित हो, (यमु) अर जिसके साथ (द्विष्मः) हम द्वेष करते हैँ (तमू) उसे (प्राणः जहातु) प्राणं छोड़ जाय । सम्मिलित होते हँ । जो शतरुराष्टर साम्राज्य के साथ देष करताहै, या जिस

English

Him who inclines and gives to him who worships, the rich pos- sessor and the Lord of Fulness. A prayer for prosperity

अध्याय 7

श्लोक 41.1

सुपर्णः।१-२ प्रस्कण्वः।श्येनः ।१ जगती, २ त्रिष्टुप्।अति॒ धन्वा॒न्यत्य॒पस्त॑तर्द श्ये॒नो नृ॒चक्षा॑ अवसानद॒र्शः ।तर॒न् विश्वा॒न्यव॑रा॒ रजां॒सीन्द्रे॑ण॒ सख्या॑ शि॒व आ ज॑गम्यात्

suparṇaḥ| 1-2 praskaṇvaḥ| śyenaḥ | 1 jagatī, 2 triṣṭup| ati dhanvānyatyapastatarda śyeno nṛcakṣā avasānadarśaḥ | taran viśvānyavarā rajāṃsīndreṇa sakhyā śiva ā jagamyāt

हिन्दी अर्थ

राजा को प्राणदण्ड देना चाहिए, यह् वेदाज्ञा है । को बढाए, युवा तथा व्यवहारकुशल हो । नमः अन्ननाम (निधं २।७) सम्यक् सीचं, (पूषा) रषयो, से पृष्ट सूयं (सं संसिञ्चतु) रषिमयों ग्रोर (मे) मेरी (दीषेम् प्रायुः) दीघं आयु (कृणोतु) करे ।

English

Observing men, and viewing home, the Falcon hath cleft his swift way over wastes and waters. May he, with Indra for a friend, auspicious, traversing all air’s lower realms, come hither.

अध्याय 7

श्लोक 41.2

श्ये॒नो नृ॒चक्षा॑ दि॒व्यः सु॑प॒र्णः स॒हस्र॑पाच्छ॒तयो॑निर्वयो॒धाः ।स नो॒ नि य॑च्छाद् वसु॒ यत् परा॑भृतम॒स्माक॑मस्तु पि॒तृषु॑ स्व॒धाव॑त्

śyeno nṛcakṣā divyaḥ suparṇaḥ sahasrapācchatayonirvayodhāḥ | sa no ni yacchād vasu yat parābhṛtamasmākamastu pitṛṣu svadhāvat

हिन्दी अर्थ

हुए शतरुभों को (भ्र नुद) परे धकेल, (जातवेदः) है जातप्रजञ प्रधानमन्तिन! : (ते वयम्) वे हम (अनागसः) निष्पाप हुए (अदितये ) अविनाश के लिये निष्पाप हो कर अविनाश के लिये हों । अदितये =ग्र-दोड क्षये + क्तिन , जातवेदाः = जातप्रज्ञानः (निसक्त ७।५।१६) । भ क्तत प्रथतेवेद-भाष्य का० ७1 अनु० ३) सू० ३५

English

The heavenly Falcon, viewing men, well-pinioned, strength-giver, hundred-footed, hundred nested, Shall give us treasure which was taken from us. May it be rich in food among our Fathers. 108

अध्याय 7

श्लोक 42.1

पापमोचनम्।१-२ प्रस्कण्वः।सोमारुद्रौ।त्रिष्टुप्।सोमा॑रुद्रा॒ वि वृ॑हतं॒ विषू॑ची॒ममी॑ वा॒ या नो॒ गय॑मावि॒वेश॑ ।बाधे॑थां दू॒रं निरृ॑तिं परा॒चैः कृ॒तं चि॒देनः॒ प्र मु॑मुक्तम॒स्मत्

pāpamocanam| 1-2 praskaṇvaḥ| somārudrau| triṣṭup| somārudrā vi vṛhataṃ viṣūcīmamī vā yā no gayamāviveśa | bādhethāṃ dūraṃ nirṛtiṃ parācaiḥ kṛtaṃ cidenaḥ pra mumuktamasmat

हिन्दी अर्थ

करा० ७ । श्ननु० ३। सू०३६९ अथवेवेद-भराष्य 9, सपत्नो कां (सहसा) साहसपूवेक (प्रसहस्व) पराभव कः (जातवेदः) ह (पिपहि) पालित तथा सुख सामग्री से पूरित कर 1 ताकि (विष्वे देवाः) राष्ट के सब देव (एनम्, अनु) इस राजा को अनुकूलरूप पाकर (मदन्तु) दासन के विरोधी दल । एक पति राजा की द्विविध प्रजाएु है--शासना- । नकल प्रजा, तथा शासनविरोधी प्रजा, णासनविरोधी प्रजा का पराभवं साहसपूर्क करना चाहिए, इसमे ढील न दहयेनी चाहिए 1 पिपृहि =प॒ पालन- पूरणयोः (जुहोत्यादिः) हस्वान्तोऽयमिल्येके 1

English

A prayer for delivery from sin and sickness Scatter and drive away, Soma and Rudra, the sickness that hath come within our dwelling, Afar into the distance chase Destruction, and even from commit- ted sin release us.

अध्याय 7

श्लोक 42.2

सोमा॑रुद्रा यु॒वमे॒तान्य॒स्मद् विश्वा॑ त॒नूषु॑ भेष॒जानि॑ धत्तम्।अव॑ स्यतं मु॒ञ्चतं॒ यन्नो॒ अस॑त् त॒नूषु॑ ब॒द्धं कृ॒तमेनो॑ अ॒स्मत्

somārudrā yuvametānyasmad viśvā tanūṣu bheṣajāni dhattam| ava syataṃ muñcataṃ yanno asat tanūṣu baddhaṃ kṛtameno asmat

हिन्दी अर्थ

है, (उतत) ओर (सहम् धमनः ) हजार धृमनियां हु" (ते) तेरी (तासाम् सर्वासाम) उन सव सिराश्रों ओर धमनियो के (विलम्) मूख को (अहम् दारा ( बिलम्) बिल को बन्द कर दिया जाताहै। हिरः का प्रथं गर्माशय कौ सिराएु, नीले रक्तकौी नाड्यां । ८ भयवेवेद-भाष्य का० ७। भ्नु० ३ ! सू० ३७ फ अभाव मे गभेस्थिति नहीं होती ।

English

Lay on our bodies, O ye twain, O Soma and Rudra, all those balms that heal diseases. Set free and draw away the sin committed, which we have still inherent in our persons. A charm against lightning

अध्याय 7

श्लोक 43.1

वाक् १ प्रस्कण्वः।वाक्।त्रिष्टुप्।शि॒वास्त॒ एका॒ अशि॑वास्त॒ एकाः॒ सर्वा॑ बिभर्षि सुमन॒स्यमा॑नः ।ति॒स्रो वाचो॒ निहि॑ता अ॒न्तर॒स्मिन् तासा॒मेका॒ वि प॑पा॒तानु॒ घोष॑म्

vāk 1 praskaṇvaḥ| vāk| triṣṭup| śivāsta ekā aśivāsta ekāḥ sarvā bibharṣi sumanasyamānaḥ | tisro vāco nihitā antarasmin tāsāmekā vi papātānu ghoṣam

हिन्दी अर्थ

(ते) तेरी (योनेः) योनि के (परम्) पहले भाग को (श्रवरम्) नीचे की भोर (कृणोमि) मँ करता ह, इस प्रकार (त्वा अभि ) तुभे लक्ष्य करके करता हूः (म्रष्मानं ते म्र पिधानं कृणोमि) तेरे मागं कोर बन्दकर देता स पद एकवचन मे है । इसलिये जो कोई नारी सन्तान-प्रतिबन्ध चाहे उसकं लिये इन प्रयोगो का विधान हग्ना है, जनिच्छुक पर नहीं । योनि क पैन्द अक्ष्यो नो मधुसंकाशे भनीकं नौ समञ्जनम् ।

English

Some of thy words bode weal and some misfortune: thou scat- terest them all with friendly feeling. Deep within this three words are laid: among them one hath flown off even as the sound was

अध्याय 7

श्लोक 44.1

इन्द्राविष्णुः।१ प्रस्कण्वः।इन्द्रः, विष्णुः।भुरिक् त्रिष्टुप्।उ॒भा जि॑ग्यथु॒र्न परा॑ जयेथे॒ न परा॑ जिग्ये कत॒रश्च॒नैन॑योः ।इन्द्र॑श्च विष्णो॒ यदप॑स्पृधेथां त्रे॒धा स॒हस्रं॒ वि तदै॑रयेथाम्

indrāviṣṇuḥ| 1 praskaṇvaḥ| indraḥ, viṣṇuḥ| bhurik triṣṭup| ubhā jigyathurna parā jayethe na parā jigye kataraścanainayoḥ | indraśca viṣṇo yadapaspṛdhethāṃ tredhā sahasraṃ vi tadairayethām

हिन्दी अर्थ

(नौ) हम दोनों की (मक्ष) दोनो-दोनों आसे मधुसंकाशे मधुके. कर, (नौ) हम दोनों का (मनः इत्) मन भी (सह्) परस्पर सहकारी का० ७1 अनु० ३। सु० ३८ अथव॑वेद-भाष्य ४९ यह सूक्त विवाह संस्कार मे विनियुक्त हुआ है । पति-पत्नी के जीवनं

English

uttered. In praise of Indra and Vishnu Ye twain have conquered, and have not been vanquished: not either of the pair hath been

अध्याय 7

श्लोक 45.1

ईर्ष्यानिवारणम्।१-२ प्रस्कण्वः, २ अथर्वा।ईर्ष्यापनयनं, भेषजम्।अनुष्टुप्।जना॑द् विश्वज॒नीना॑त् सिन्धु॒तस्पर्याभृ॑तम्।दू॒रात् त्वा॑ मन्य॒ उद्भृ॑तमी॒र्ष्याया॒ नाम॑ भेष॒जम्

īrṣyānivāraṇam| 1-2 praskaṇvaḥ, 2 atharvā| īrṣyāpanayanaṃ, bheṣajam| anuṣṭup| janād viśvajanīnāt sindhutasparyābhṛtam| dūrāt tvā manya udbhṛtamīrṣyāyā nāma bheṣajam

हिन्दी अर्थ

दुसरे को सदा श्रपने-अपने हृदय के भीतर रखने का संकल्प करते है । इस यथाऽसो मम् केव॑ला नान्यासां कीतैयाञच॒न ॥१॥ (मनुजातेन') मनोऽनुराग द्वारा उत्पादित (मम) मेरे अर्थात् अपने दधामि) बान्धती हूं । (यथा) जिस प्रकार करि तु (मम केवलः) केवल मेरा

English

defeated. Ye, Indra Vishnu, when ye fought your battle; produced this infinite with three divisions. A charm against jealousy

अध्याय 7

श्लोक 45.2

अ॒ग्नेरि॑वास्य॒ दह॑तो दा॒वस्य॒ दह॑तः॒ पृथ॑क्।ए॒तामे॒तस्ये॒र्ष्यामु॒द्राग्निमि॑व शमय

agnerivāsya dahato dāvasya dahataḥ pṛthak| etāmetasyerṣyāmudrāgnimiva śamaya

हिन्दी अर्थ

यह मन्व भी विवाह संस्कार सम्बन्धी है। वधू निज मनोऽनुराग जोड़ करती है । भौर इस विधि द्वारा पति को केवल अपना पति घोषित करती है । असः अस् (भुवि), लेट् लकार+सिप् (इकारलोप, “इतश्च लोपः परस्मेपदेषु"' + अट् का आगम

English

Brought hitherward from Sindhu, from a folk of every mingled race, Fetched from afar, thou art I deem, a balm that cureth. jealousy. As one with water quencheth fire, so calm this lover’s jealousy,

अध्याय 7

श्लोक 46.1

सिनीवाली।१-३ अथर्वा।सिनीवाली।अनुष्टुप्।३ त्रिष्टुप्।सिनी॑वालि॒ पृथु॑ष्टुके॒ या दे॒वाना॒मसि॒ स्वसा॑ ।जु॒षस्व॑ ह॒व्यमाहु॑तं प्र॒जां दे॑वि दिदिड्ढि नः

sinīvālī| 1-3 atharvā| sinīvālī| anuṣṭup| 3 triṣṭup| sinīvāli pṛthuṣṭuke yā devānāmasi svasā | juṣasva havyamāhutaṃ prajāṃ devi didiḍḍhi naḥ

हिन्दी अर्थ

निरोध. के लिये ब्रह्मचयं षं ष्ठ उपाय है । ++; अथवेवेद-माष्य का० ७) श्रनु० २) सु० ३६ ओौर मेरे वियोग में पतिको रुला देती है, जो (परायतः) दूर गए पति नम्) के प्रति आनन्दकररी होती है।

English

Like heat of fire that burneth here, or flame that rageth through the wood. A charm for offspring and prosperity O broad-tressed Sinivāli, thou who art the sister of the Gods,

अध्याय 7

श्लोक 46.2

या सु॑बा॒हुः स्व॑ङ्गु॒रिः सु॒षूमा॑ बहु॒सूव॑री ।तस्यै॑ वि॒श्पत्न्यै॑ ह॒विः सि॑नीवा॒ल्यै जु॑होतन

yā subāhuḥ svaṅguriḥ suṣūmā bahusūvarī | tasyai viśpatnyai haviḥ sinīvālyai juhotana

हिन्दी अर्थ

यह भेषज कोई वानस्पतिक वस्तु नहीं, अपितु पत्नीका पति के प्रति गाढ़ म्रनुराग है । किसी भी वनस्पति की मखे नहीं हौतीं जिन द्वारा कि मे विद्यमान गाढृ-अनुराग का प्रकटीकरण ही अभिप्रेत है, यही महाभेषज हैः जो कि पत्नी के वियोग में पति को .रुला देती है, विह्वल कर देती है, गए को लौटा लाती ओौर लौट श्राए को प्रसन्न कर देती है । येनानिचक्र अ सुरीन््र देवेभ्यस्पारे । मँ पत्नी (त्वाम्, निकरे) तुभे वश में करती हूं, (यथा) ताकि (ते) तेरी

English

Accept the offered sacrifice, and, Goddess, grant us progeny. Present the sacrifice to her, to Sinivāli, Queen of men, Beauti- ful-fingered, lovely-armed, prolific, bearing many a child.

अध्याय 7

श्लोक 46.3

या वि॒श्पत्नीन्द्र॒मसि॑ प्र॒तीची॑ स॒हस्र॑स्तुकाभि॒यन्ती॑ दे॒वी।विष्णोः॑ पत्नि॒ तुभ्यं॑ रा॒ता ह॒वींषि॒ पतिं॑ देवि॒ राध॑से चोदयस्व

yā viśpatnīndramasi pratīcī sahasrastukābhiyantī devī| viṣṇoḥ patni tubhyaṃ rātā havīṃṣi patiṃ devi rādhase codayasva

हिन्दी अर्थ

(सायणं) 1 अभिप्राय यह कि जहां पति ओौर पत्नौ दोनों बुद्धिमान् हो वहां का०७॥ अनु०३। सू० ३९ भ्रथवेवेद-भाष्य ५१ निकारः = ऽप्रणंपषटश्रा०) (अष्ट) =-स्वाधोनं कुवे, वशोकरोमि । भतीची विश्वान् देवान् तां तवाऽच्छावंदामसि ॥२॥

English

Thou who as Queen of men art Indra’s equal, a Goddess coming with a thousand tresses, To thee our sacrifices are performed, O Consort of Vishnu Goddess, urge thy Lord to bounty!

अध्याय 7

श्लोक 47.1

कुहूः।१-२ अथर्वा।कुहूः।जगती, २ त्रिष्टुप्।कु॒हूं दे॒वीं सु॒कृतं॑ विद्म॒नाप॑सम॒स्मिन् य॒ज्ञे सु॒हवा॑ जोहवीमि ।सा नो॑ र॒यिं वि॒श्ववा॑रं॒ नि यच्छाद् ददा॑तु वी॒रं श॒तदा॑यमु॒क्थ्यऽम्

kuhūḥ| 1-2 atharvā| kuhūḥ| jagatī, 2 triṣṭup| kuhūṃ devīṃ sukṛtaṃ vidmanāpasamasmin yajñe suhavā johavīmi | sā no rayiṃ viśvavāraṃ ni yacchād dadātu vīraṃ śatadāyamukthya'm

हिन्दी अर्थ

हई (असि) तु है, (उत) तथा (सूयम्) सूयं की प्रतीची ) प्रतिरूपता को सौन्दयं मे चांद श्रौर सूयं के प्रतिरूप है, भौर दिव्यगणो में देवपुरुषो के ममेरसस्त्वं केवली नान्यासौं कीतेयांरचन ॥॥ मे (वद) बोला कर । (त्वम्) तु (मम इत्) मेख ही (केवलः) केवल (असः) हौ, (अन्यासाम्) अन्यनारियों का (न, कीकैयाः चन) कीतंन भी

English

A prayer for wealth and birth of a son Oft in this sacrifice with favoured cry I call Kuhū, beneficent Goddess, skilled in all her works.

अध्याय 7

श्लोक 47.2

कु॒हूर्दे॒वाना॑म॒मृत॑स्य॒ पत्नी॒ हव्या॑ नो अस्य ह॒विषो॑ जुषेत ।शृ॒णोतु॑ य॒ज्ञमु॑श॒ती नो॑ अ॒द्य रा॒यस्पोषं॑ चिकि॒तुषी॑ दधातु

kuhūrdevānāmamṛtasya patnī havyā no asya haviṣo juṣeta | śṛṇotu yajñamuśatī no adya rāyaspoṣaṃ cikituṣī dadhātu

हिन्दी अर्थ

तथा राजनंतिक कार्यो मं ग्रधिकार पतिका। इस प्रकार दोनों प्रकार की व्यवस्थाएं बनी रहती है" ओर पारस्परिक प्रेम दृढ होता जाता है। पति को यह् भी परामशं देती है कि तूने पत्नीत्रत का ध्यान रखना है । ५२ श्रथवेवेद-भाष्य का० ७1 श्रनु० ३) सू०३६ दारा तु तिरोहित अन्तहित (असि) हृञ है, (यदि वा) अथवा (नद्यः) नदियां (तिरः) तेरी तिरोघायक हुई ह, तो (इयम्, ग्रोषधिः) यह ओषधि निश्चय से (न्यानयत्) वापिस लाएगी, या लाए ।

English

May she vouchsafe us wealth with every boon, and give a, hero meet for praise who gives a hundred gifts. Kuhl), the Queen of Gods and immortality, called to assist, enjoy this sacrifice of’ ours!

अध्याय 7

श्लोक 48.1

राका।१-२अथर्वा।राका।जगती।रा॒काम॒हं सु॒हवा॑ सुष्टु॒ती हु॑वे शृ॒णोतु॑ नः सु॒भगा॑ बोध॑तु॒ त्मना॑ ।सीव्य॒त्वपः॑ सू॒च्याच्छिद्यमानया॒ ददा॑तु वी॒रं श॒तदा॑यमु॒क्थ्यऽम्

rākā| 1-2atharvā| rākā| jagatī| rākāmahaṃ suhavā suṣṭutī huve śṛṇotu naḥ subhagā bodhatu tmanā | sīvyatvapaḥ sūcyācchidyamānayā dadātu vīraṃ śatadāyamukthya'm

हिन्दी अर्थ

कं कारण पति कहीं चला गया प्रतीत होता है पत्नी को विश्वास रहै कि उसका अनुरागा विष्ट सततानुचिन्तन पति को वापिस ले आएगा । सूक्त में पुरुषाय भेषजम् 1 सुखं मेषाय मेष्ये" (३।५६९) । इस पर उवट” लिखते सप्तम काण्ड का तृतीय अलुवाक समाप्त का० ७ अनु० ४। सू० ४१ अथववेद-माष्य ५३

English

Let her, desirous of our worship, hear to-day: may she, intelligent, give increase of our wealth. A prayer for prosperity and the birth of a son

अध्याय 7

श्लोक 48.2

यास्ते॑ राके सुम॒तयः॑ सु॑पेश॑सो॒ याभि॒र्ददा॑सि दा॒शुषे॒ वसू॑नि ।ताभि॑र्नो अ॒द्य सु॒मना॑ उ॒पाग॑हि सहस्रापो॒षं सु॑भगे॒ ररा॑णा

yāste rāke sumatayaḥ supeśaso yābhirdadāsi dāśuṣe vasūni | tābhirno adya sumanā upāgahi sahasrāpoṣaṃ subhage rarāṇā

हिन्दी अर्थ

जलो के गर्भरूप, (ओषधीनाम्, वृषभम्) ्रोषधियों पर वर्षा करने वाले, (अभीपतः) सूयं को ग्रभिमुख करके उसके चारों भ्रोर उङ्ने वाले ग्रहो को आदि स्थान में परमेश्वर (स्थापयति) स्थापित करे, या कगतादहै) र भीमजल की अपेक्षा मेघस्थ जल दिव्यगुणों वाला होता है, उ जल वायु द्वारा इधर-उधर उडता रहता है । मेघ के कारण अन्नादि सम्पत्ति मेधो क स्वामी सूर्यं को, (अवसे) रक्षां (हवामहे) हम बुलाते है ।

English

I call on Rākā with hair laud and reverent cry: may she, auspicious, hear us and herself observe. With never-breaking needle may she sew her work, and send a glorious man who gives a

अध्याय 7

श्लोक 49.1

देवपत्न्यः।१-२ अथर्वा।देवपत्नीः।१ आर्षी जगती, २ चतुष्पदा पङ्क्तिः।दे॒वानां॒ पत्नी॑रुश॒तीर॑वन्तु नः॒ प्राव॑न्तु नस्तु॒जये॒ वाज॑सातये ।याः पार्थि॑वासो॒ या अ॒पामपि॑ व्र॒ते ता नो॑ देवीः सु॒हवाः॒ शर्म॑ यच्छन्तु

devapatnyaḥ| 1-2 atharvā| devapatnīḥ| 1 ārṣī jagatī, 2 catuṣpadā paṅktiḥ| devānāṃ patnīruśatīravantu naḥ prāvantu nastujaye vājasātaye | yāḥ pārthivāso yā apāmapi vrate tā no devīḥ suhavāḥ śarma yacchantu

हिन्दी अर्थ

५४ अथवेवेद-माष्य का० ७ अनु० ४। सू० ४१ सूयं व्रती है । नियमानुसार उदितास्त होता ओर ऋषतुभं का सजेन तथा जल प्रादि सूये के व्रतानुसार चलते हैँ । पृष्टपति है मेव । वह भौ सूये दारा यह सूचित कियाद करि अनावृष्टि की श्रवस्थामे यज्ञिय साधन आदि दारा सूयं की शक्ति का आह्वान करना चाहिए । पैप्पलाद शाखा मे “हवा महे'' कं स्थान में ““जुहुवेम"” पाठ है

English

hundred gifts. All thy kind favours, Rākā! lovely in their form, wherewith thou grantest treasures to the man who gives,

अध्याय 7

श्लोक 49.2

उ॒त ग्ना व्य॑न्तु दे॒वप॑त्नीरिन्द्रा॒ण्य॑१ग्नाय्य॒श्विनी॒ राट्।आ रोद॑सी वरुणा॒नी शृ॑णोतु॒ व्यन्तु॑ दे॒वीर्य ऋ॒तुर्जनी॑नाम्

uta gnā vyantu devapatnīrindrāṇya1gnāyyaśvinī rāṭ| ā rodasī varuṇānī śṛṇotu vyantu devīrya ṛturjanīnām

हिन्दी अर्थ

जिस के नियम में सब शाणी चलते है, जिसके नियम पे जल उपस्थित होते है । जिक्तके नियम भं पुष्ट अन्नादि का पति पूषा सूयं युलोकमें आपः. वर्षा के जल का बरसना, नदियों श्रादिके जलों का प्रवहण रहा है । प्राणी भी नियम में बन्धे शयन-जागरण तथा अन्य कमं करते है सूय भी चुलोक में निविष्ट हूश्रा नियम पूवक अन्नो तथा फलों का विपाक फा० ७। अनु० ४। सूु० ४२ श्रथववेद-भाष्य ५५ की (सदनम्) श्रागार परमेश्वर को (वसानाः) निज जीवनोँ मे बसति ट्र, (इह) यहां निज जीवनो या इस पृथिवी पर (आहुवेम) हम उसका

English

With these come thou to us this day benevolent, O blessed one, bestowing wealth of thousand sorts. A prayer for children and booty

अध्याय 7

श्लोक 50.1

विजयः।१-९ अङ्गिराः ( कितववधकामः)।इन्द्रः।अनुष्टुप्, ३, ७ त्रिष्टुप्, ४ जगती, ६ भुरिक् त्रिष्टुप्।यथा॑ वृ॒क्षम॒शनि॑र्वि॒श्वाहा॒ हन्त्य॑प्र॒ति।ए॒वाहम॒द्य कि॑त॒वान॒क्षैर्ब॑ध्यासमप्र॒ति

vijayaḥ| 1-9 aṅgirāḥ ( kitavavadhakāmaḥ)| indraḥ| anuṣṭup, 3, 7 triṣṭup, 4 jagatī, 6 bhurik triṣṭup| yathā vṛkṣamaśanirviśvāhā hantyaprati| evāhamadya kitavānakṣairbadhyāsamaprati

हिन्दी अर्थ

(नृचक्षाः) नर-नारियों का निरीक्षक, (श्येनः) प्रशंसनीय गति वाला वरता रहा है,या कर देता है। वह (विश्वानि अवरा रजांसि तरन्) समग्र अवर कोटि कं लोकोंको पार करता हुश्रा, (सस्या इन्द्रेण) निज सखा जीवात्मा कं साथ वतमान हमा (शिवः) कल्याण करता है, (आ जगम्यात्) शवित मे अवर कोटिक, तभी परमेश्वर उन का तर्दन कर सकता है। हजारों का रक्षक (णतयोनिः) सड का योनिरूप, (वयोधाः) अन्तां का

English

May the Gods’ Consorts aid us of their own free will, help us to offspring and the winning of the spoil. May Goddesses who quickly listen shelter us, both those on earth and they within the waters’

अध्याय 7

श्लोक 50.2

तु॒राणा॒मतु॑राणां वि॒शामव॑र्जुषीणाम्।स॒मैतु॑ वि॒श्वतो॒ भगो॑ अन्तर्ह॒स्तं कृ॒तं मम॑

turāṇāmaturāṇāṃ viśāmavarjuṣīṇām| samaitu viśvato bhago antarhastaṃ kṛtaṃ mama

हिन्दी अर्थ

धारण करने वाला, उन का स्वामी (सः) वह् परमेश्वर (नः) हमे (निय- च्छात्) नितरां देवे (वसु) धन; (यत्) जो धन कि (पराभृतम्) दुरसे ५६ श्रथवेवेद-भाष्य का० ७ श्रनु० ४। सू० ४३ भी लाया गया हो, वह् धन (अस्माकम् पितुषु) हमारे माता-पिता भादि वाले रोग को (विवृहतम्) विनष्ट करो, (या भमीवा) जो अमीवा कि(नः गयम्) हमारे घरमे या शरीरो (आ विवेश) प्रविष्ट हो गयाहै (पराचैः) दुर करने के निज साधनों द्वारा (निकतिम्) कष्टापत्तिरूप विषूचौको (दूरम्) दर कर (बाधेथाम्) इस का नाशकरो, (छतं चित्

English

realm. May the Dames, wives of Gods, enjoy our presents, Rāt, Asvini Indrāni and Agnāyi;

अध्याय 7

श्लोक 50.3

ईडे॑ अग्निं स्वाव॑सुं॒ नमो॑भिरि॒ह प्र॑स॒क्तो वि च॑यत् कृ॒तं नः ।रथै॑रिव॒ प्र भ॑रे वा॒जय॑द्भिः प्रदक्षि॒णं म॒रुतां॒ स्तोम॑मृध्याम्

īḍe agniṃ svāvasuṃ namobhiriha prasakto vi cayat kṛtaṃ naḥ | rathairiva pra bhare vājayadbhiḥ pradakṣiṇaṃ marutāṃ stomamṛdhyām

हिन्दी अर्थ

विषूची विषूचिका = (10€ा9 (अष्ट) । वृहतम् = विनाणयतम् (सायण) । अमीवा =ग्रम रोगे (चुरादिः) । “अमीवा रोगकीटाणु भी है। “गयः गृहनाम (निघं० ३।४) । सोम =जल, भौर रुद्र - विचुत्। वम्" (अथवं० १।६।२), सोम का सम्बन्ध अपः के साथ है, ओर आपः में सव भेषज ओर अग्िहैजोकि सव रोगों को शान्त करती है। यह् (निरक्त ५।२।६) । जब रोग समाप्त हो गया, तो यह रोग, जिस पापका परिणाम था वह॒ भी दुर गया, क्योंकि उस पाप कन फल भुक्त हो चूका का० ७। अनु ४1 स० ४४ अथर्ववेद-माष्य ५७

English

May Rodasi and Varunāni hear us, and Goddesses come at the matrons’ season. A gambler’s prayer for success in gaming As evermore the lightning flash strikes, irresistible, the tree,

अध्याय 7

श्लोक 50.4

व॒यं ज॑येम॒ त्वया॑ यु॒जा वृत॑म॒स्माक॒मंश॒मुद॑वा॒ भरे॑भरे ।अ॒स्मभ्य॑मिन्द्र॒ वरी॑यः सु॒गं कृ॑धि॒ प्र शत्रू॑णां मघव॒न् वृष्ण्या॑ रुज

vayaṃ jayema tvayā yujā vṛtamasmākamaṃśamudavā bharebhare | asmabhyamindra varīyaḥ sugaṃ kṛdhi pra śatrūṇāṃ maghavan vṛṣṇyā ruja

हिन्दी अर्थ

देहो मे (एतानि विश्वा भेषजानि) इन सव भेषजो को (धत्तम्) स्थापित करो। (यत्) जो (कृतम्, एनः) किया पाप (नः तनूषु) हमारे देहं मे शिवास्त एका आशषिवास्त एकाः सर्षा तरिभरषिं सुमनस्यमानः हे पुरुष ! (ते) तेरी (एकाः) एक प्रकार की वाचः वाणियां (शिवाः) कल्याणमयी है (ते) तेरी (एकाः) अन्य प्रकारकी वाणियां उन सब वाणियों कौ (विभि) तु अपने मेधारण करताहै। (ग्रस्मिन् गरन्तः) इस पुरूष के भीतर (तिलः वाचः निहिताः) तीन वाणियां निहित रहती ह" (तासाम्) उनमें से (एका) एक वाणी (घोषम् अनु) ध्वनि के साथ (विपपात) बाहिर गिरतीहै। सायण ने चार वाणियों का निदेश मन्त्र-व्याख्यामें करिया है--परा,

English

So, irresistible, may I conquer the gamblers with the dice. From every side, from hale and sick, impotent to defend them- selves, May all the fortune of the folk as winnings pass into my hands.

अध्याय 7

श्लोक 50.5

अजै॑षं त्वा॒ संलि॑खित॒मजै॑षमु॒त सं॒रुध॑म्।अविं॒ वृको॒ यथा॒ मथ॑दे॒वा म॑थ्नामि ते कृ॒तम्

ajaiṣaṃ tvā saṃlikhitamajaiṣamuta saṃrudham| aviṃ vṛko yathā mathadevā mathnāmi te kṛtam

हिन्दी अर्थ

प्रात् स्थिति केटी है, ओौर उनमें से एक ध्वनि" रूप वाणी का मूख से पतन कहा है वाणी “संस्कार रूप"' मेँ चित्त मेँ निहित रहती है । यह् “संस्कारमयी'' वाणी है । यह् संस्कारमयी वाणी पदवाक्यरूप में, बोलते यान करे, वक्ता की इच्छा पर निभरहौताहै। परन्तु जब वह् बोलताहै तो चित्तस्थ वाणी ध्वनि कं सथ मुखसे गिरती है । इस तृतीयावस्था कौ वाणी को "वैखरी" कहते हँ । वेखरी वाणी तालु, ओष्ठ आदि स्थानों में „र अथवेवेद-भाष्य का० ७ । भ्रनु० ४। सू० ४१५ है, इसकी स्थिति को पुरुष विना मुख द्वारा उच्चारण कयि भी जान रहा होता है। संस्कारमयी वाणी "परावाणी है, जो कि वक्ता की दच्छा कं

English

I pray to Agni, him who guards his treasure: here, won by homage, may he pile our winnings. As ‘twere with racing cars I bring my presents: duly with reverence, let me laud the Maruts. With thee to aid us may we win the treasure: do thou assist our side in every battle.

अध्याय 7

श्लोक 50.6

उ॒त प्र॒हामति॑दीवा जयति कृ॒तमि॑व श्व॒घ्नी वि चि॑नोति का॒ले।यो दे॒वका॑मो॒ न धनं रु॒णद्धि॒ समित् तं रा॒यः सृ॑जति स्व॒धाभिः॑

uta prahāmatidīvā jayati kṛtamiva śvaghnī vi cinoti kāle| yo devakāmo na dhanaṃ ruṇaddhi samit taṃ rāyaḥ sṛjati svadhābhiḥ

हिन्दी अर्थ

२७) चतुविध वाक्-पदों का कथन हुञा है । विजयी होते हो, (न पराजयेथे) पराजित नहीं होते, (एनयोः) इन दोनौ मं से (कतरः चन) कोई एक ्रकेला भी (न पराजिग्ये) कभी पराजित नहीं हमा या होता । (यत्) जब (अपस्पृधेयाम्) दोनों किसी कं साथ १ “सपर्था" यतः चेतनधमं है, साथ ही मन्त्र मे जय-पराजय का कथन दभ्रा सकता है । “सहस्रम्” पद द्वारा हजारों रोगकौटाणु समभने चाहिए जिनक्रा कि

English

Give us wide room and easy way, O Indra; break down, O Maghavan, the foemen’s valour. I have completely cleaned thee out, won from thee what thou keptest back.

अध्याय 7

श्लोक 50.7

गोभि॑ष्टरे॒माम॑तिं दु॒रेवां॒ यवे॑न वा॒ क्षुधं॑ पुरुहूत॒ विश्वे॑ ।व॒यं राज॑सु प्रथ॒मा धना॒न्यरि॑ष्टासो वृज॒नीभि॑र्जयेम

gobhiṣṭaremāmatiṃ durevāṃ yavena vā kṣudhaṃ puruhūta viśve | vayaṃ rājasu prathamā dhanānyariṣṭāso vṛjanībhirjayema

हिन्दी अर्थ

(्रथवै० २।३२।१)॥ उदित तथा भ्रस्त होते सूर्यं की लाल रदिमयौं मे रोगकीटाणुश्रो हजारो रोगकीटाणुश्न का हनन हौ सके । का० ७। श्रनु० ४। सु० ४६ अथर्वेवेद-भाष्य ५६ सेनिकों को (व्यैरयेथाम्) ये तितर-वितर कर देते हु ।

English

As a wolf tears and rends a sheep, so do I tear thy stake away. Yea, by superior play one gains advantage: in time he piles his spoil as doth a gambler. He overwhelms with wealth’s inherent powers the devotee who keeps not back his riches.

अध्याय 7

श्लोक 50.8

कृ॒तं मे॒ दक्षि॑णे॒ हस्ते॑ ज॒यो मे॑ स॒व्य आहि॑तः ।गो॒जिद् भू॑यासमश्व॒जिद् ध॑नंज॒यो हि॑रण्य॒जित्

kṛtaṃ me dakṣiṇe haste jayo me savya āhitaḥ | gojid bhūyāsamaśvajid dhanaṃjayo hiraṇyajit

हिन्दी अर्थ

निदधे पदम्” (ऋ० १।२२।१७) मं विष्णु अर्थात् सूये के अआराधिदेविकाथं मे “त्रेधा विक्रमो" ओर श््रेधा पदनिधानो' का वणेन हुआ है। राज- (विश्वजनीनात् जनात्) सब जनो का हित करने वाले जन से, तथा से भी (उदमृतम्) पृथिवी से उद्धृत कौ गई (त्वा) वु को (ई््यायाः) सर्वहितकारी वैच से लाई गई ओषधि, या सवंहितकारी योगी महात्मा आदि; तथा पृथिवी को खोदकर प्राप्त खनिज पदाधे, तथा वानस्पतिक जड, ईरष्यावित्ति की ओौषध है ।

English

May we all, much-invoked! repel with cattle want that brings sin, hunger with store of barley. May we uninjured, first among the princes, obtain possessions by our own exertions. My right hand holds my winnings fast, and in my left is victory.

अध्याय 7

श्लोक 50.9

अक्षाः॒ फल॑वतीं॒ द्युवं॑ द॒त्त गां क्षी॒रिणी॑मिव ।सं मा॑ कृ॒तस्य॒ धार॑या॒ धनुः॒ स्नाव्ने॑व नह्यत

akṣāḥ phalavatīṃ dyuvaṃ datta gāṃ kṣīriṇīmiva | saṃ mā kṛtasya dhārayā dhanuḥ snāvneva nahyata

हिन्दी अर्थ

जो कि अत्य मानपिकर वृत्तियों के निरोधे सदण, यौगोपायों द्वारा निरुद्ध ६० ग्रथववेद-माष्य का० ७ । अनु० ४। सू० ४८ निरोधके लिये सिन्धु से, तथा पृथिवी से भी उद्धृत ग्रौषधों का प्रयोग करना चाहिए । मन्त्रम किसी विशिष्ट ओषध का नाम नहीं लिया) केवल स्वभाव तथा मानसिक लक्षणों के अनुसार एक ही रोगके लिये ग्रोषधि

English

I would that I were winner of cattle and horses, wealth and gold. Dice, give me play that bringeth fruit as ‘twere a cow with flowing milk! And, as the bowstring binds, the bow, unite me with a stream of gains.

अध्याय 7

श्लोक 51.1

परिपाणम्।१ अङ्गिराः।इन्द्राबृहस्पती।त्रिष्टुप्।बृह॒स्पति॑र्नः॒ परि॑ पातु प॒श्चादु॒तोत्त॑रस्मा॒दध॑रादघा॒योः ।इन्द्रः॑ पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नः॒ सखा॒ सखि॑भ्यो॒ वरी॑यः॒ कृणोतु

paripāṇam| 1 aṅgirāḥ| indrābṛhaspatī| triṣṭup| bṛhaspatirnaḥ pari pātu paścādutottarasmādadharādaghāyoḥ | indraḥ purastāduta madhyato naḥ sakhā sakhibhyo varīyaḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

जाता है किसी विशिष्ट ओषध का नहीं । ईष्याभाव को (णमय) है विश्वजन हितकारी ! तु शान्त कर दे, (इव) सिनीवालि परथुष्टके या देवानामसि स्वसा । जुषस्वं हत्यमाहुते परजां देवि दिदिडटि नः ॥१॥ (सिनीवालि) हि अन्नवाली अथवा प्रेम से बन्धने वाली, तथा सुन्दर मे आहुतिरूप मे दिये वीयं हव्य की (जुषस्व) प्री तिभवंक सेवा कर, सुरक्षा कर (देवि) है दिव्यगुणों वाली ! (नः) हम पारिवारिक जनों को (प्रजाम् दिदिडिढ) उत्तम अ्रपत्य प्रदान कर। िनीयाली जीर ततसम्बन्धी बुहु दँ “देवपल््यौ" (११।३।३१; पद

English

A prayer for Brihaspati’s and Indra’s protection Brihaspati protect us from the sinner, from rearward, from above, and from below us! May Indra from the front and from the centre, as friend to friends, vouchsafe us room and

अध्याय 7

श्लोक 52.1

सांमनस्यम्।१-२ अथर्वा।सांमनस्यं, अश्विनौ।१ ककुम्मत्यनुष्टुप्, २ जगती।सं॒ज्ञानं॑ नः॒ स्वेभिः॑ सं॒ज्ञान॒मर॑णेभिः ।सं॒ज्ञान॑मश्विना यु॒वमि॒हास्मासु॒ नि य॑च्छतम्

sāṃmanasyam| 1-2 atharvā| sāṃmanasyaṃ, aśvinau| 1 kakummatyanuṣṭup, 2 jagatī| saṃjñānaṃ naḥ svebhiḥ saṃjñānamaraṇebhiḥ | saṃjñānamaśvinā yuvamihāsmāsu ni yacchatam

हिन्दी अर्थ

षो देवों की स्वसा कहा भी है । अतः सिनीवाली मानुषी हं। साथ ही या सुंवाहुः स्वड्गुरिः सुषूमा वहुसूवरी । गन्तानोत्पादन करने वाली, (बहुसूवरी) नाना सन्तानो का उत्पादन करने करे लिये (हविः जुह्योतन) हवि की आहृतियां दो गर्भाधान संस्कार मे

English

freedom. A prayer for peace and concord Give us agreement with our own, with strangers give us unity:

अध्याय 7

श्लोक 52.2

सं जा॑नामहै॒ मन॑सा॒ सं चि॑कि॒त्वा मा यु॑ष्महि॒ मन॑सा॒ दैव्ये॑न ।मा घोषा॒ उत् स्थु॑र्बहु॒ले वि॒निर्ह॑ते॒ मेषुः॑ पप्त॒दिन्द्र॒स्याह॒न्याग॑ते

saṃ jānāmahai manasā saṃ cikitvā mā yuṣmahi manasā daivyena | mā ghoṣā ut sthurbahule vinirhate meṣuḥ paptadindrasyāhanyāgate

हिन्दी अर्थ

दिप्णीः पनि तुभ्य राता हवीषि पतिं देवि राधसे चोदय ॥३॥' (सहस्रस्तका) हजारों बालों के केशगुच्छे वाली, (अभियन्ती) विवाह ६२ अथवंवेद-भाष्य का० ७ । अनु० ४। सुऽ ४६ । का० ७। श्रनु० ४। सु ५० अथवंवेद-भाष्य ६३ (पतिम्) पति को (राधसे) धनोपार्जन के लिये (चोदयस्व) प्रेरित (1 न करती रह् । शृणोतु यज्ञमुंशती नो अद्म रायस्पोषं चिकितुषी दधातु ॥२॥

English

Do ye, O Asvins, in this place join us in sympathy and love. May we agree in mind, agree in purpose: let us not fight against the heavenly spirit. Around us rise no din of frequent slaughter, nor Indra’s arrow fly, for day is present!

अध्याय 7

श्लोक 53.1

दीर्घायुः।१-७ ब्रह्मा।आयुः, बृहस्पतिः अश्विनौ च।१-२ त्रिष्टुप्, ३ भुरिक्, ४ उष्णिग्गर्भार्षी पङ्क्तिः, ५-७ अनुष्टुप्।अ॒मु॒त्र॒भूया॒दधि॒ यद् य॒मस्य॒ बृह॑स्पतेर॒भिश॑स्तेर॑मुञ्चः ।प्रत्यौ॑हताम॒श्विना॑ मृ॒त्युम॒स्मद् दे॒वाना॑मग्ने भि॒षजा॒ शची॑भिः

dīrghāyuḥ| 1-7 brahmā| āyuḥ, bṛhaspatiḥ aśvinau ca| 1-2 triṣṭup, 3 bhurik, 4 uṣṇiggarbhārṣī paṅktiḥ, 5-7 anuṣṭup| amutrabhūyādadhi yad yamasya bṛhaspaterabhiśasteramuñcaḥ | pratyauhatāmaśvinā mṛtyumasmad devānāmagne bhiṣajā śacībhiḥ

हिन्दी अर्थ

वेश्यवणं की है । पति को व्यापारार्थं देश विदेश जाना पड़ता है ग्रतः इसे का अधिकार पत्ीको सौपागयाहै। ्रथवं० ३।१५ में वणिक् को हवाई जहाजों द्वारा व्यापाराथं देश विदेश जानेका मी निदेश दिया है, जीर कहा है कि “यथा क्रीत्वा धनमाहराणि"” (३।१५।२), क्रि "खरीद कर मै घन लाॐं“ । अथवं० ३।१५ का समग्र सूक्त पठनीय है कुं देवी सुकृतं विदम् नापसमस्मिन् यतते स॒हवां जोहवीमि । (कुहम्) परथिवी में शब्दनीया, कथनीया (सुकृतम्) सुकर्म वाली

English

A charm to recover a sick man at the point of death As thou, Brihaspati, from the curse hast saved us, from dwel- ling yonder in the realm of Yama,

अध्याय 7

श्लोक 53.2

सं क्रा॑मतं॒ मा ज॑हीतं॒ शरी॑रं प्राणापा॒नौ ते॑ स॒युजा॑वि॒ह स्ता॑म्।श॒तं जी॑व श॒रदो॒ वर्ध॑मानो॒ऽग्निष्टे॑ गो॒पा अ॑धि॒पा वसि॑ष्ठः

saṃ krāmataṃ mā jahītaṃ śarīraṃ prāṇāpānau te sayujāviha stām| śataṃ jīva śarado vardhamāno'gniṣṭe gopā adhipā vasiṣṭhaḥ

हिन्दी अर्थ

जा सकने वाली (देवीम्) कुहु-देवौ को (अस्मिन्) इस(यजने) यन्न मे (जोहयौमि) मै पति बार-बार बरुलाता हूं । (सा) वह् त्रु (नः) हेम पारिवारिक जनों दारा वरणौय हो, चाहने योग्य हो, ओर (शतदायम्) सैकड़ों को दान देने वाला पत्नी सुहवा है, हठीली नहीं । शेषगण मन्ता्थं में स्पष्ट हैँ । जोहवीमि = ह्वपतेखिदिं रूप जुहोतेवां (सायग) । निस्त के अनुपार जूहू देवपत्नी ड, (नः अस्य हूविषः) हमारे इस हविष्यान्न का (जुषेत) सेवन करे, भोजन

English

The Asvins, leeches of the Gods, O Agni, have chased Death far from us with mighty powers. Move both together; do not leave the body. Let both the breathings stay for thee united. Waxing in strength live thou a hundred autumns. Thy noblest guardian and thy lord is Agni.

अध्याय 7

श्लोक 53.3

आयु॒र्यत् ते॒ अति॑हितं परा॒चैर॑पा॒नः प्रा॒णः पुन॒रा तावि॑ताम्।अ॒ग्निष्टदाहा॒र्निरृ॑तेरु॒पस्था॒त् तदा॒त्मनि॒ पुन॒रा वे॑शयामि ते

āyuryat te atihitaṃ parācairapānaḥ prāṇaḥ punarā tāvitām| agniṣṭadāhārnirṛterupasthāt tadātmani punarā veśayāmi te

हिन्दी अर्थ

कामना वाली, (चिकितुषी) तथ। सम्यक्-ज्ञानवाली विदुषी, (नः) हमें ; नोत्पत्ति से विरत रहना । दोनों प्रकार कौ कुहू" पत्नियां पुथकू्-पृयक पतियो के साथ विवाहयोग्या ह राकामहं सुहवां सुष्डुतीं वे श्रोतुं नः सुभगा बोधतु त्मना । (सुहवाम्) शोभन शब्दो द्वारा बुलाई जाने वाली (राकाम्) दानशीला

English

Return, thy life now vanished into distance! Return, the breath thou drawest and exhalest! Agni hath snatched it from Destruction’s bosom: into thyself again I introduce it. Let not the vital breath he draws forsake him, let not his expiration part and leave him.

अध्याय 7

श्लोक 53.4

मेमं प्रा॒णो हा॑सी॒न्मो अ॑पा॒नोऽव॒हाय॒ परा॑ गात्।स॒प्त॒र्षिभ्य॑ एनं॒ परि॑ ददामि॒ त ए॑नं स्व॒स्ति ज॒रसे॑ वहन्तु

memaṃ prāṇo hāsīnmo apāno'vahāya parā gāt| saptarṣibhya enaṃ pari dadāmi ta enaṃ svasti jarase vahantu

हिन्दी अर्थ

उत्तम रे्वर्यो वाली वह (नः शुणोतु) हमारी बात सुने, प्रौर (त्मना) प्रणस्त वीर प्र दे। राकान=रादाने (अदादिः) +करृ+टप् ) भ्र० ४) त्रा० ५। कण्डिका १-१५) । ६४ ग्रथवेवेदं-भाष्य का० ७। प्रनु०४।सू० ५१. राका =रां (दानम्) करोतीति (कृ+-डः) स्त्रीलिङ्घ। राका दान- शीला देवपत्नी है। ओर सुभगा है, एेश्वर्यो की स्वामिनी है । पतिके ..

English

I give him over to the Seven Rishis: let them conduct him to old age in safety. Enter him, both ye breaths, like two draught-oxen entering their stall. Let him, the treasure of old age, still wax in strength, uninjured,. here.

अध्याय 7

श्लोक 53.5

प्र वि॑शतं प्राणापानावन॒ड्वाहा॑विव व्र॒जम्।अ॒यं ज॑रि॒म्णः शे॑व॒धिररि॑ष्ट इ॒ह व॑र्धताम्

pra viśataṃ prāṇāpānāvanaḍvāhāviva vrajam| ayaṃ jarimṇaḥ śevadhirariṣṭa iha vardhatām

हिन्दी अर्थ

कथन कोध्यान से सुनती ओर कथन के अभिप्रायकोजाय चेती है। गृह्य (राके) है दानणीले देवपत्नी । (याःते) जो तेरी (सुमतयः) उत्तम मतियां ह, जोकि (सुषेणः) घर को सुन्दररूप में रख, ग्रौर (याभिः) जिन सुमतियोँ दरा प्रेरित हुत (दाशुषे) दानी मनुष्यों को (वसूनि) नानाविध धन (ददासि) दती है, (ताभिः) उन सुमतिथीं के संग, (सुमनाः) राका सम्पत्तिशालिनी है, ओर दानशीला है । सुमतिद्वाराप्ररित हुई यह् दान श्रौर महादान भी करती है। सदा प्रसन्न रहती । इसे सामाजिक दित के लिये निमन्त्रित किया है । इन मन्त्रो मे "अनुमति" का वणेन नहीं याः पार्थिवासो या चुपामपिं व्रते ता नौ देवौ; सुहवाः शमे यच्छन्तु

English

I send thee back thy vital breath; I drive Consumption far from thee, May Agni here, most excellent, sustain our life on every side. From out the depth of darkness, we, ascending to the highest heaven,

अध्याय 7

श्लोक 53.6

आ ते॑ प्रा॒णं सु॑वामसि॒ परा॒ यक्ष्मं॑ सुवामि ते ।आयु॑र्नो वि॒श्वतो॑ दधद॒यम॒ग्निर्वरे॑ण्यः

ā te prāṇaṃ suvāmasi parā yakṣmaṃ suvāmi te | āyurno viśvato dadhadayamagnirvareṇyaḥ

हिन्दी अर्थ

(उषतीः) रक्षा करने कौ कामना्रो वाली (देवानाम् पत्नीः) देवों की पतिनियां, (नः अवन्तु) हमारी रक्षा कर, (तुजये) बलप्रदान के लिये, अर का०७। ्रनु० ४। सु० ५१ अथवेवेद-माष्य ६५ करं । (याः) जो पत्तियां (पाथिवासः) पाथिव जीक्न वाली हु, (याः) तथा (सुहवाः) सुगमतः! से बुलाई जा सकने वाली (देवीः) देवियां (नः) हमें (शमर ) सुख (यच्छन्तु) प्रदान करं ।

English

Have come to the sublimest light, to Sūrya, God among the. Gods. A charm to obtain knowledge of the Veda

अध्याय 7

श्लोक 53.7

उद् व॒यं तम॑स॒स्परि॒ रोह॑न्तो॒ नाक॑मुत्त॒मम्।दे॒वं दे॑व॒त्रा सूर्य॒मग॑न्म॒ ज्योति॑रुत्त॒मम्

ud vayaṃ tamasaspari rohanto nākamuttamam| devaṃ devatrā sūryamaganma jyotiruttamam

हिन्दी अर्थ

देवियां दो प्रकारकी कही हँ पाथिव भोगों वाली, ओर इन्द्रियो, कात्यायनी ओर गार्गी । पहली सांसारिक भावनाओं वाली थो, ओर केतनेष॒ (चूरादिः) । वाजः अन्ननाम (निषं० २।७) 1 शमं सुखनाम (उत) तथा (ग्नाः) विदुषी (देवपत्नीः) देवपलियां, देवों अर्थात्

English

We worship holy Verse and Song, by which they carry out their acts, Shining in order’s seat these twain present the sacrifice to Gods. As I have asked about Verse, Song, Sacrifice, strength, force,.

अध्याय 7

श्लोक 54.1

अध्यापकविघ्नशमनम्।(१-२) १ ब्रह्मा, २ भृगुः।१ ऋक्सामनी, २ इन्द्र।अनुष्टुप्।ऋचं॒ साम॑ यजामहे॒ याभ्यां॒ कर्मा॑णि कु॒र्वते॑ ।ए॒ते सद॑सि राजतो य॒ज्ञं दे॒वेषु॑ यच्छतः

adhyāpakavighnaśamanam| (1-2) 1 brahmā, 2 bhṛguḥ| 1 ṛksāmanī, 2 indra| anuṣṭup| ṛcaṃ sāma yajāmahe yābhyāṃ karmāṇi kurvate | ete sadasi rājato yajñaṃ deveṣu yacchataḥ

हिन्दी अर्थ

हमारी प्राथनाओों को ध्यानपूरवेक सूने, ग्रौर यथाकमल (देवीः) ये देवियां ६६ श्रथववेद-भाष्य क्रा० ७। अनु०४। सू० ५२ सम्भवतः राष्ट का नागरिक प्रजाविभाग, तथा युद्धविभांग के दो (यथा) जंसे (अशनिः) बिजुली, (प्रति) विना प्रतिरोध के, (वि- (अहम्) मै ( कितवान् ) जुजारियों का, (ब्रक्षेः) अभियोगों दारा, (बध्यासम्) बध करूगा।

English

Yajus-text, So never let this lore that I have sought forsake me, Lord of Might!

अध्याय 7

श्लोक 54.2

ऋचं॒ साम॒ यदप्रा॑क्षं ह॒विरोजो॑ यजु॒र्बल॑म्।ए॒ष मा॒ तस्मा॒न्मा हिं॑सी॒द् वेदः॑ पृ॒ष्टः श॑चीपते

ṛcaṃ sāma yadaprākṣaṃ havirojo yajurbalam| eṣa mā tasmānmā hiṃsīd vedaḥ pṛṣṭaḥ śacīpate

हिन्दी अर्थ

“अहम्” हारा कोई राज्याधिकारी प्रतीत होता है, जोकि जुभारियों पर कंडी दुष्टि रखता दहै, ओर उन्हं पकड कर न्यायालय में उपस्थित कर १८) । इसी प्रकार दण्डित के वध करने वाले को “उपमन्थित्ता तथा वकौल को सम्भवतः “प्रनविवाक'' प्राड्तिवाक कहा है, यथा “वधा- करूगा, या कारागार मे बन्द करूगा का० ७। अनु० ४। सु० ५२ प्रथर्ववेदभाष्य ६७

English

A charm to ensure a prosperous journey Thy downward paths from heaven, whereby thou hast raised all the world to life, Give us in gracious love, good Lord!

अध्याय 7

श्लोक 55.1

मार्गस्वस्त्ययनम्।१ भृगुः।इन्द्रः।विराट् परोष्णिक्।ये ते॒ पन्था॒नोऽव॑ दि॒वो येभि॒र्विश्व॒मैर॑यः ।तेभिः॑ सुम्न॒या धे॑हि नो वसो

mārgasvastyayanam| 1 bhṛguḥ| indraḥ| virāṭ paroṣṇik| ye te panthāno'va divo yebhirviśvamairayaḥ | tebhiḥ sumnayā dhehi no vaso

हिन्दी अर्थ

के अंग्रेजी में अनुवादकर्ता “विलियम दह्धिट ह्विटनी ने भी कटा है । यथा वाली, (अवर्जुषीणाम्' ) परन्तु यूतकमं से वजित न होने वाली सायण (अ्थंस्वामित्व के लिये) +-जुषीणान् (चूत को सेषित करने वाली) देताहैकितुम लोग जो धन द्यूतक्रिया के लिये लाए हौ वह से मुभे सौप दो । इस प्रकार का अधिकार मेरे हाथोंमेंहै। पैप्पलाद शाखा मे “अन्त- स्तयं कृतं मनः" पाठ है, “कृतं मनः'' = “मनः कृतम्" मने निश्चय किया है, जो निश्चय करना मेरे हाथमे रहँ? राज्याधिकारी “अक्षराज' ने मानो यूत स्थान पर छापा मार कर कितवो को श्रादेश दिया ह । (१०।३४।१३) द्वारा चयूतकीष्ा कौ निषेध्रदिषि है । वेदों मे परस्पर विरोधी विधि-

English

A charm against poisonous bites and stings Whether it came from viper, from black snake or snake with transverse stripes, Or Kankaparvan’s bite, this herb hath made the poison power- less.

अध्याय 7

श्लोक 56.1

विषभैषज्यम्।१-८ अथर्वा।वृश्चिकादयः, २ वनस्पतिः, ४ ब्रह्मणस्पतिः।अनुष्टुप्, ४ विराट्-प्रस्तारपङ्क्तिः।तिर॑श्चिराजेरसि॒तात् पृदा॑कोः॒ परि॒ संभृ॑तम्।तत् क॒ङ्कप॑र्वणो वि॒षमि॒यं वी॒रुद॑नीनशत्

viṣabhaiṣajyam| 1-8 atharvā|vṛścikādayaḥ, 2 vanaspatiḥ, 4 brahmaṇaspatiḥ| anuṣṭup, 4 virāṭ-prastārapaṅktiḥ| tiraścirājerasitāt pṛdākoḥ pari saṃbhṛtam| tat kaṅkaparvaṇo viṣamiyaṃ vīrudanīnaśat

हिन्दी अर्थ

६८ अथर्ववेद-माष्य करां०७। अनु० ४।सू० ५२. का० ७1 गलु० ४० ५२ अयरववेद-भाष्य 4 करे । ( वाजयद्भिः ) अन्न संग्रह करने वाते ( रथैः ) रथो दवारा (इव) थ कि मादि स (म न ५२ (कृतम्) किय णवत मारयति वा स मरत् (उणा० १।६०), तथा “देवसेनानामभिभजञ्जतीनां ौ त प्रबल सैन्यश सेनापति, (प्रहाम्) रण कोत्याग कर भागे हुए को, (जयति) सुगमता से जीतलेता है, (एवघ्नी इव) निज भविष्यकरे हन्ता के सदुश शत्र (कृतम्) किये शतरुत्व को (काले) समय पर ( विचिनोति) विचारता दहै (यः) जो (देवकामः) अग्निदेव की कामना वाला मन्त्र ३ (धनम्) धन

English

Honey-born, honey-dropping, rich in honey, honeysweet, this herb, Is medicine that heals the wound and kills the gnat that bites and stings. Whatever bit, or sucked thy blood, we summon thence away from thee

अध्याय 7

श्लोक 56.2

इ॒यं वी॒रुन्मधु॑जाता मधु॒श्चुन्म॑धु॒ला म॒धूः ।सा विह्रु॑तस्य भेष॒ज्यथो॑ मशक॒जम्भ॑नी

iyaṃ vīrunmadhujātā madhuścunmadhulā madhūḥ | sā vihrutasya bheṣajyatho maśakajambhanī

हिन्दी अर्थ

कर जो युद्धभूमि को त्याग कर भाग जाता है, उसे “जयति"' । (श्वघ्नी = राया (ऋरवेद १०।४२।६) । विचिनोति; विचयः -ऽध्गला1; 100 (वयम्, जयेम) हम सैनिक विजयी हो, (भरेभरे) संम्राम-संग्राम में (वृतम्) यदिद्ररहोतो रथों द्वारा उसे सुगम्य कर देना चाहिए, ताकरि सेनिक युद्ध से पूवं थकावट अनुभव न करें । सैनिक, शत्रु की जिस धन राशि को घेर लें उस का कतिपय अंण सैनिकोंकाभी होना चाहिए ताकि उन की धन- वृद्धि होती जाय । भरेभरे संग्रामनाम (निषं० २।१७) 1 “कृतम् का (गोभिः) गौं के दूध हास (दुरेवाम्) दुष्परिणामी ( अमतिम्) मननशवित के अभाव का, मति की जडता का (तरेम) हम परिहार करे, (वा) तथा (पुरुहूत) है बहतो दवारा पुकारे गगे परमेषवर (विश्वे ट्म सव (यवेन) जौ द्वारा (क्षुधम्) क्षुधा को (तरेम) निवारित करं ।

English

The ineffectual poison of the little sharply-stinging gnat. Thou here who crookest wicked jaws, thou tortuous, jointless, limbless thing, 111

अध्याय 7

श्लोक 56.3

यतो॑ द॒ष्टं यतो॑ धी॒तं तत॑स्ते॒ निर्ह्व॑यामसि ।अ॒र्भस्य॑ तृप्रदं॒शिनो॑ म॒शक॑स्यार॒सं वि॒षम्

yato daṣṭaṃ yato dhītaṃ tataste nirhvayāmasi | arbhasya tṛpradaṃśino maśakasyārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

अवि वृको यथा मथदेवा म॑थ्नामि ते कृतम् ॥१॥ ७० प्रथवेवेद-भाष्य का०७। श्रनु० ४। सू० ५२ को, (भ्ररिष्टासः वयम्) हसित न हुए हम प्रजाजन के नेता (वृजनीभिः) इस प्रकार गोभिः" का अथं है गौओोंके दधु द्वारा।गौका दूध, गोघुत, तथा गोदधि मति की जडता कौ दुर करते हँ । “यव” शब्द ब्रीहिकामभी उपलक्षक है । ये दोनो क्षुधानिवृत्ति के लिये कहे गएुरहै। राजा लोगं ध्वा्थ-

English

These jaws thou, Brāhmanaspati! shalt bend together like a reed. This scorpion here that creeps along, low on the ground and powerless— I have removed his poison and then utterly demolished him.

अध्याय 7

श्लोक 56.4

अ॒यं यो व॒क्रो विप॑रु॒र्व्यऽङ्गो॒ मुखा॑नि व॒क्रा वृ॑जि॒ना कृ॒णोषि॑ ।तानि॒ त्वं ब्र॑ह्मणस्पत इ॒षीका॑मिव॒ सं न॑मः

ayaṃ yo vakro viparurvya'ṅgo mukhāni vakrā vṛjinā kṛṇoṣi | tāni tvaṃ brahmaṇaspata iṣīkāmiva saṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

तो भी सायणाचायं ने “राजसु'" का अथं नुपेषु, राजमानेषु दीव्यत्सु वा (जयः) विजय (मे) मेरे (सव्ये) बाएं हाय मे (आदितः) निहित है । (गोजित्) गौओं को जीतने वाला, (अश्वजित्) अण्वं को जीतने वाला, आदि की प्राप्ति होती है, विना काम किये नहीं (कृतस्य ) कृत" की (धारया) धारा द्वारा (मा) मुभे (स नह्यत) संनद्ध का० ७1 अनु° ४। सू० ५३ अथवंवेद-भाष्य ७१

English

No strength in thy two arms hast thou, nor in thy head, nor in thy waist: Then what is that small thing thou so viciously bearest in thy tail? The emmets make a meal of thee and peahens tear and mangle thee:

अध्याय 7

श्लोक 56.5

अ॒र॒सस्य॑ श॒र्कोट॑स्य नी॒चीन॑स्योप॒सर्प॑तः ।वि॒षं ह्य॑१स्यादि॒ष्यथो॑ एनमजीजभम्

arasasya śarkoṭasya nīcīnasyopasarpataḥ | viṣaṃ hya1syādiṣyatho enamajījabham

हिन्दी अर्थ

दोनो पक्षों मे समान है, “रक्षाः” का सम्बोधन मी उभयपक्ष मे समान है । लम्बी होती है, अतः उसे भी धारारूप समा जा सकता ह । अत्तः मन्त्र भी जहाँ “श्यृतक्रीडा” का वाचक है, वह साथी “विजयेच्छा'“ काभी वाचक हो सकता है । यथा “दिवु करीडाविजिगीषा"' आदि (दिवादिः ) 1 (बृहस्पतिः) बृहती-सेना-का-पति, (अघायोः) हत्यारे शत्रू से (नः) हमारी (परिपातु) सब ओरसे रक्षा करे, (पश्चात्) पश्चिम से, (उत)

English

All ye are crying out, In sooth the scorpion’s poison hath no strength. Thou creature who inflictest wounds both with thy mouth and with thy tail, No poison in thy mouth hast thou: what at thy tail’s root will there be?

अध्याय 7

श्लोक 56.6

न ते॑ बा॒ह्वोर्बल॑मस्ति॒ न शी॒र्षे नोत म॑ध्य॒तः ।अथ॒ किं पा॒पया॑मु॒या पुच्छे॑ बिभर्ष्यर्भ॒कम्

na te bāhvorbalamasti na śīrṣe nota madhyataḥ | atha kiṃ pāpayāmuyā pucche bibharṣyarbhakam

हिन्दी अर्थ

हमारे लिये (वरीयः) वरणीय श्रं ष्ठ सुख (कृणोतु) प्रदान करे । सप्तम काण्ड का चतु तुवा समाप्त १. एक काम को लगातार करते रहूनां यही उस कामकी धारा है, प्रवाह है। ७२ श्रयवेवेद-भाष्य का० ७ । श्रनु० ५ । सू० भर अ्थति समभौता हो, (अरणेभिः) जिन के साथ हमारी बोल-चाल नहीं उन

English

A charm for some physical disorder Whatever trouble hath disturbed and shaken me—I speak with hope, I move, imploring, ‘mid the folk

अध्याय 7

श्लोक 56.7

अ॒दन्ति॑ त्वा पि॒पीलि॑का॒ वि वृ॑श्चन्ति मयू॒र्यः ।सर्वे॑ भल ब्रवाथ॒ शार्को॑टमर॒सं वि॒षम्

adanti tvā pipīlikā vi vṛścanti mayūryaḥ | sarve bhala bravātha śārkoṭamarasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

पुरुषे: । भथवा अर।(तिभिः (सायण) । अश्विनौ ="'ुण्यकृतौ राजानौ" (निस्त १२।१।१) । स्वकीय श्रौर॒परकौय राज्यों केदो राजा,जो कि घं जानामहै मभसा सं चिकित्व मा युंप्रहि मनसा देव्येन (मः युष्महि) हम वियुक्त न ही बहुले विनिहते) महाघाती युद्धमें (घोषाः) आवाजं (मा उत् स्थुः) न उठ । (अहनि आगते) युद्ध का दिन का० ७॥ अनु० ५। सु ५५ श्रथवेवेद-भाष्व ७१३

English

What harm my body in myself hath suffered, now let Sarasvati relieve with fatness. Seven flow for him, the youth on whom the Maruts wait: the sons have taught the Father everlasting laws.

अध्याय 7

श्लोक 56.8

य उ॒भाभ्यां॑ प्र॒हर॑सि॒ पुच्छे॑न चा॒स्येऽन च ।आ॒स्ये॒३ न ते॑ वि॒षं किमु॑ ते पुच्छ॒धाव॑सत्

ya ubhābhyāṃ praharasi pucchena cāsye'na ca | āsye3 na te viṣaṃ kimu te pucchadhāvasat

हिन्दी अर्थ

कर दियादहैःतो (ग्रमे) है सर्वेग्रिणी! ्रापकोप्रेरणा हारा (देवा- . अश्विनौ =ग्रश्विनौ को नासत्यौ भी कहते ह (ऋ० ७।३६।४) । नासत्यौ = नासिकाप्रभवौ बभूवतुरिति वा (निरुक्त ६।३।१३) । नासिका रक्त शरीर में प्रवाहित होकर शरीरके रोगों काउपचार करत।( ओर शविति ७४ प्रथववेद-माष्य का० ७ अनु० ५। सू० ५५ (ते) तेरे प्राण-अपान (इह) इस तेरे शरीर मे (सयुजौ) परस्पर मिले

English

Both worlds are his: both shine belonging unto him. Both move together: both, as his possession thrive. An invitation to Indra and Varuna

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।