Atharva Veda
4
अध्याय 4 / 20

Kanda 4

काण्ड 4

331 श्लोकभाग 3/6 · श्लोक 15.1–21.7

पूर्ण अध्याय पाठ65 श्लोक

अध्याय 4

श्लोक 15.1

वृष्टिः।१-१६ अथर्वा।१ दिशः, २-३ वीरुधः, ४ मरुत्पर्जन्यौ, ५-१० मरुतः आपः, ११ प्रजापतिः, स्तनयित्नुः, १२ वरुणः, १३-१५ मण्डूकाः पितरश्च, १६ वातः।त्रिष्टुप्, १-२, ५ विराड् जगति, ४ विराट् पुरस्ताद्बृहती, ७, १३ अनुष्टुप्, ९ पथ्यापङ्क्तिः, १० भुरिक्, १२ पञ्चपदानुष्टुब्गर्भा भुरिक्, १५ शंकुमत्यनुष्टुप्।स॒मुत्प॑तन्तु प्र॒दिशो॑ नभ॑स्वतीः॒ सम॒भ्राणि॒ वात॑जूतानि यन्तु ।म॒ह॒ऋ॒ष॒भस्य॒ नद॑तो॒ नभ॑स्वतो वा॒श्रा आपः॑ पृथि॒वीं त॑र्पयन्तु

vṛṣṭiḥ| 1-16 atharvā| 1 diśaḥ, 2-3 vīrudhaḥ, 4 marutparjanyau, 5-10 marutaḥ āpaḥ, 11 prajāpatiḥ, stanayitnuḥ, 12 varuṇaḥ, 13-15 maṇḍūkāḥ pitaraśca, 16 vātaḥ| triṣṭup, 1-2, 5 virāḍ jagati, 4 virāṭ purastādbṛhatī, 7, 13 anuṣṭup, 9 pathyāpaṅktiḥ, 10 bhurik, 12 pañcapadānuṣṭubgarbhā bhurik, 15 śaṃkumatyanuṣṭup| samutpatantu pradiśo nabhasvatīḥ samabhrāṇi vātajūtāni yantu | mahaṛṣabhasya nadato nabhasvato vāśrā āpaḥ pṛthivīṃ tarpayantu

हिन्दी अर्थ

पैरो को (विगृह्य) अलग-अलग करके, (दस्य मध्ये) कच्चे तालाब में (प्लवस्व) तैर, या गति कर। (मध्ये) हद के मध्य में (खण्वचे, खैमघे, तदुरि) है खण्वखा, खैमखा तथा तदुरी ! (वषेम्) वर्षा की (वनुध्वम्) तुम याचनाकरो। (पितरः) हे पितरो ! (मरुताम्) मानसून वायुओं के (मनः) मन को स्वानुकूल करना (इच्छत) चाहो । खण्वखा = 'खनियो' अर्थात् खुदे हदो मे 'वखा" गति करनेवाली भ्वादिः) हद में स्थिरता से गति करनेवाली मण्डूको । तदुरी तादुरी

English

May he who hath become the plants’ high regent, suiting our bodies, Agni of the Waters, May Jātavedas send us rain from heaven, Amrit and vital breath to earthly creatures. Sending up waters from the flood and ocean Prajapati move the sea to agitation!

अध्याय 4

श्लोक 15.2

समी॑क्षयन्तु तवि॒षाः सु॒दान॑वो॒ ऽपां रसा॒ ओष॑धीभिः सचन्ताम्।व॒र्षस्य॒ सर्गा॑ महयन्तु॒ भूमिं॒ पृथ॑ग् जायन्ता॒मोष॑धयो वि॒श्वरू॑पाः

samīkṣayantu taviṣāḥ sudānavo 'pāṃ rasā oṣadhībhiḥ sacantām| varṣasya sargā mahayantu bhūmiṃ pṛthag jāyantāmoṣadhayo viśvarūpāḥ

हिन्दी अर्थ

सप्त सप्त = “मूल प्रकृतिरविकृतिः, महदादयः प्रकृतिविकृतयः जोकि ज्ञान ओर कर्मके हेतुभूतं । तथाजौ मुत्युहो जाने पर भी जीवात्मा के साथ वर्तमान रहते है, ओर पूनजेन्मोंके बीजरूप होते है । सत्यमय- जीवन मँ ये, सत्यवादी को पूनजंन्मों से मक्त कर देते ह, उसका संग-त्याग (वरुण) है वरुण ! (एनम्) इसे (शतेन पाशैः) सौ फंदों दारा (अभि धेहि) तु बाध, (नृचक्षः) है नरः-नारियों पर दृष्टि रखनेवाले ! (अनृतवाक्) असत्यवक्ता (ते) तेरे फदो से (मा मोचि) न छटा रहे । (जाल्मः) असत्य ६८ मथरवेवेदभाष्य काण्ड ४ । अनु० ४। सूक्त १६

English

If a man stands or walks or moves in secret, goes to his lying- down or his uprising, What two men whisper as they sit together, King Varuna knows: he as the third is present. This earth, too, is King Varuna’s possession, and the high heaven whose ends are far asunder.

अध्याय 4

श्लोक 15.3

समी॑क्षयस्व॒ गाय॑तो॒ नभां॑स्य॒पां वेगा॑सः॒ पृथ॒गुद् वि॑जन्ताम्।व॒र्षस्य॒ सर्गा॑ महयन्तु॒ भूमिं॑ पृथ॑ग् जायन्तां वी॒रुधो॑ वि॒श्वरू॑पाः

samīkṣayasva gāyato nabhāṃsyapāṃ vegāsaḥ pṛthagud vijantām| varṣasya sargā mahayantu bhūmiṃ pṛthag jāyantāṃ vīrudho viśvarūpāḥ

हिन्दी अर्थ

पुष्पकोश (परिकृत्यमानः) सब गोर से कटा हुभा होकर रहता है । वरुण है “अपामधिपतिः” (अथवं० ५।२४४), अतः मन््रमे उदरका रोग अभिप्रेत हि, जलोदर 7708४ । इससे पेट फूल जाता किया है । जलोदर रोग मुख्य है, इसके अवान्तर दष्परिणामों को “शतेन एक गोलाकृतिकं बन्ध, होता है, जिसे किं वृन्त कहते ह । पुष्प के आभ्यन्तर की ओर निचले हिस्से मे गोलाकृतिक एक अल्पगतं होता है,

English

The loins of Varuna are both the oceans, and this small drop of water, too, contains him. If one should flee afar beyond the heaven, King Varuna would still be round about him.

अध्याय 4

श्लोक 15.4

ग॒णास्त्वोप॑ गायन्तु॒ मारु॑ताः पर्जन्य घो॒षिणः॒ पृथ॑क्।सर्गा॑ व॒र्षस्य॒ वर्ष॑तो॒ वर्ष॑न्तु पृथि॒वीमनु॑

gaṇāstvopa gāyantu mārutāḥ parjanya ghoṣiṇaḥ pṛthak| sargā varṣasya varṣato varṣantu pṛthivīmanu

हिन्दी अर्थ

विदश्य ; । यो देवो वरुणो यश्च मानुषः ॥८॥ (वरुणः) वारुण्य परिणाम है, (यः) जो (विदेश्यः) विविध देशो कँ जलोदर वारुण्य परिणाम है उन शतेन पाशे: अभि धेहि एनम्, मन्त्र ७; अथवा (असौ अमूष्यायण) वह् है अमुक गोत्रवालेः (अमूष्याः) तथा उस

English

Proceeding hither from the sky his envoys look, thousand-eyed, over the earth beneath them. All this the royal Varuna beholdeth, all between heaven and earth and all beyond them. The twinklings of men’s eyelids hath he counted. As one who plays throws dice he settles all

अध्याय 4

श्लोक 15.5

उदी॑रयत मरुतः समुद्र॒तस्त्वे॒षो अ॒र्को नभ॒ उत् पा॑तयाथ ।म॒ह॒ऋ॒ष॒भस्य॒ नद॑तो॒ नभ॑स्वतो वा॒श्रा आपः॑ पृथि॒वीं त॑र्पयन्तु

udīrayata marutaḥ samudratastveṣo arko nabha ut pātayātha | mahaṛṣabhasya nadato nabhasvato vāśrā āpaḥ pṛthivīṃ tarpayantu

हिन्दी अर्थ

१. बन्ध के कट जाने से पृष्य की पंखदिययां कटकर बिखर जाती है, अलग-अलग होकर पुत्र कापरिचयमाताकेनामद्राराभी होना चाहिए--यह सूचित (१-८) । शुक्रः । अपामागं ओषधिः देवता । अनुष्टुम् । (उज्जेष) रोगों पर विजय पाने के लिए (त्वा) तुक्च (ईशानम्,

English

things. Those fatal snares of thine which stand extended, threefold,

अध्याय 4

श्लोक 15.6

अ॒भि क्र॑न्द स्त॒नया॒र्दयो॑द॒धिं भूमिं॑ पर्जन्य॒ पय॑सा॒ सम॑ङ्धि ।त्वया॑ सृ॒ष्टं ब॑हु॒लमैतु॑ व॒र्षमा॑शारै॒षी कृ॒शगु॑रे॒त्वस्त॑म्

abhi kranda stanayārdayodadhiṃ bhūmiṃ parjanya payasā samaṅdhi | tvayā sṛṣṭaṃ bahulamaitu varṣamāśāraiṣī kṛśaguretvastam

हिन्दी अर्थ

प्राप्त करते टै । (ओषधे) है ओषधि ! दोषों का दहन करनेवाली ! (सवंस्मं) वाले भेषजरूप मे (चक्रे) मै करता हूं, यार्मैने कियाहै मानाहै। भेषज है अपामा" (मन्त्र ६,७,८) । सहदेवी (सायण, मन्त्र १) । सत्यजितं शपथयावं नीं सहमानां पुनःसराम् ।

English

O Varuna, seven by seven, May they all catch the man who tells a falsehood, and pass un- harmed the man whose words are truthful.

अध्याय 4

श्लोक 15.7

सं वो॑ऽवन्तु सु॒दान॑व॒ उत्सा॑ अजग॒रा उ॒त।म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घा वर्ष॑न्तु पृथि॒वीमनु॑

saṃ vo'vantu sudānava utsā ajagarā uta| marudbhiḥ pracyutā meghā varṣantu pṛthivīmanu

हिन्दी अर्थ

(सत्यजितम्) यथार्थरूप में विजय पानेवाली, (शपथयावनीम्) शपथ लेने की आदत को पथक् करनेवाली, हटानेवाली, (पूनःसराम्) वाली, (सहमानम्) व्धाधि को पराभरत करनेवाली 'सहदेवी' ओषधि का (समदि) ने आह्वान किया है, इस भोषधि के साथ (सर्वाः ओषधीः) सव जओषधियों को भी ताकि (नः) हमे, (इतः) इस व्याधि से, (पारयात्) प्रयोक्ता पार करे, (इति) इसलिए । शपथ स्वयं ली जाती है, ओर शाप दरसरे को दिया जाताहै। दूटी होती है । इस क्ूठ--आदत को सहदेवी, अन्य गोषधियों के साथ मिल- कर पृथक् करती है, हृटाती है ।

English

Varuna, snare him with a hundred nooses! Man’s watcher! let not him who lies escape thee. There let the villain sit with hanging belly and bandaged like a cask whose hoops are broken.

अध्याय 4

श्लोक 15.8

आशा॑माशां॒ वि द्यो॑ततां॒ वाता॑ वान्तु दि॒शोदि॑शः ।म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घाः सं य॑न्तु पृथि॒वीमनु॑

āśāmāśāṃ vi dyotatāṃ vātā vāntu diśodiśaḥ | marudbhiḥ pracyutā meghāḥ saṃ yantu pṛthivīmanu

हिन्दी अर्थ

(शशाप) शाप दिया है, (या) तथा जिसने (मूरम्) मूर्छलादक कर्मरूपी ७० अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ४1 सक्त १७ (अघम्) पापको (आदधे) धारण किया है, या अवलम्बित किया है, (या) जिसने कि (रसस्य हरणाय )रक्तादिरस के हरण करनेवाले के लिए ( जातम्) उत्पन्न हमारे पत्र को (आरेभे) बलात्कार से हथिया लिया है, (सा) वह (तोकम्) निज पृत्र को (अत्तु) खाये । शापो का वणेन हृ है शशाप' पद द्वारा तथा तोकम्, अत्तु सा! द्वारा। आरेभे आलेभे, रलयो रभेदः ये दोनों शाप गाली के रूपमे ह ।

English

Varuna sends, and drives away, diseases: Varuna is both native and a stranger, Varuna is celestial and is human. 42

अध्याय 4

श्लोक 15.9

आपो॑ वि॒द्युद॒भ्रं व॒र्षं सं वो॑ऽवन्तु सु॒दान॑व॒ उत्सा॑ अजग॒रा उ॒त।म॒रुद्भिः॒ प्रच्यु॑ता मे॒घाः प्राव॑न्तु पृथि॒वीमनु॑

āpo vidyudabhraṃ varṣaṃ saṃ vo'vantu sudānava utsā ajagarā uta| marudbhiḥ pracyutā meghāḥ prāvantu pṛthivīmanu

हिन्दी अर्थ

आमे मांसे कृत्यां यां चक्रुस्तयां कृत्याकृतो जहि ॥५॥ को, (नीललोहिते) धूमोत्थान द्वारा नील ओर ज्वाला द्वारा लोहित, अग्निम (चक्रुः) देषियों नेकियाहै; (आमे मसि) तथा घरके किसी मन्त्र मँ विष-प्रयोग तथा उसके करनेवालों का वर्णन हुभा है । आमे जमा गृहनाम (निघं० ३।४); अमे गृह्ये । मांसे == घर के किसी तादृश कृत्या के प्रयोग करने का निदंश किया है ।

English

I bind and hold thee fast with all these nooses, thou son of such a man and such a mother. All these do I assign thee as thy portion.

अध्याय 4

श्लोक 15.10

अ॒पाम॒ग्निस्त॒नूभिः॑ संविदा॒नो य ओष॑धीनामधि॒पा ब॒भूव॑ ।स नो॑ व॒र्षं व॑नुतां जा॒तवे॑दाः प्रा॒णं प्र॒जाभ्यो॑ अ॒मृतं॑ दि॒वस्परि॑

apāmagnistanūbhiḥ saṃvidāno ya oṣadhīnāmadhipā babhūva | sa no varṣaṃ vanutāṃ jātavedāḥ prāṇaṃ prajābhyo amṛtaṃ divaspari

हिन्दी अर्थ

स््रीजाति की होने से इन तीनों को मातरः' कहना उचित रहै, नकिं 'पितरः' । अथवा जैसे जड आदित्य को "पिता' कहा है (मन्त्र १२), वैसे निज तान-स्वरों द्वारा, मेधागमन ओौर वर्षाकी सूचनाएं देती रह, जिससे मण्डूकियों को पितरः कहा है । “मनः, इच्छत" ये पद कविता में प्रयुक्तं महान्तं कोशमुद॑ चाभि पिञ्च सविद्युतं भवत् वातु वात॑ः

English

Forth flow the moisture of the vigorous stallion! With this thy roar of thunder come thou hither,

अध्याय 4

श्लोक 15.11

प्र॒जाप॑तिः सलि॒लादा स॑मुद्रादाप॑ ई॒रय॑न्नुद॒धिम॑र्दयाति ।प्र प्या॑यतां॒ वृष्णो॒ अश्व॑स्य॒ रेतो॒ऽर्वाङे॒तेन॑ स्तनयि॒त्नुनेहि॑

prajāpatiḥ salilādā samudrādāpa īrayannudadhimardayāti | pra pyāyatāṃ vṛṣṇo aśvasya reto'rvāṅetena stanayitnunehi

हिन्दी अर्थ

समूद्रसे तू उद्-गत कर, उद्धृत कर, (अभिषिञ्च) ओर भूमि के अभिमुख ६४ मथर्वबेदभाष्य काण्ड ४1 अनु० २। सूक्त १५ विचुत्-सदहित हो, (वातः वातु) वायु वृष्टि के अनुकल बहे । बहुधा बहुत प्रकार से (विसृष्टाः) मेष सेपेदा हए जल (यज्ञम्) र (तन्वताम्) विस्तार करे, यजो के विस्तार के हेतु बने, (ओषधयः) ओर

English

Our father, Lord divine pouring the torrents. Let the streams breathe, O Varuna, of the waters. Pour the floods down: along the brooks and channels let frogs with speckled arms send out their voices.

अध्याय 4

श्लोक 15.12

अ॒पो नि॑षि॒ञ्चन्नसु॑रः पि॒ता नः॒ श्वस॑न्तु॒ गर्ग॑रा अ॒पां व॑रु॒णाव॒ नीची॑र॒पः सृ॑ज ।वद॑न्तु॒ पृश्नि॑बाहवो म॒ण्डूका॒ इरि॒णानु॑

apo niṣiñcannasuraḥ pitā naḥ śvasantu gargarā apāṃ varuṇāva nīcīrapaḥ sṛja | vadantu pṛśnibāhavo maṇḍūkā iriṇānu

हिन्दी अर्थ

वहत्रैपामधिष्टाता अन्तिकादिंव पश्यति । चलता-फिरता (तायन्) अपने को परिपालित (मन्यते) मानता है, (इदं सर्व॑म्) इस स्वको (देवाः) वरुण के पाशहस्त देव (विदुः) जानते है। पालित; चरन् = चलता-फिरता हआ कोर्ई जो दुष्कमं करता है ओर फिर भी अपने-आपको वह परिपालित अर्थात् सुरक्षित मानताहै, इस सबको वरुण के देव (मन्त्र ४, ६) जानते है) तायत् तायु सन्तानपालनयोः

English

They who lay quiet for a year, the Brāhmans who fulfil their vows. The frogs, have lifted up their voice, the voice Parjanya hath. inspired.

अध्याय 4

श्लोक 15.13

सं॒व॒त्स॒रं श॑शया॒ना ब्रा॑ह्म॒णा व्र॑तचा॒रिणः॑ ।वाचं॑ प॒र्जन्य॑जिन्वितां॒ प्र म॒ण्डूका॑ अवादिषुः

saṃvatsaraṃ śaśayānā brāhmaṇā vratacāriṇaḥ | vācaṃ parjanyajinvitāṃ pra maṇḍūkā avādiṣuḥ

हिन्दी अर्थ

(यः) जो कोई (तिष्ठति) खड़ा है, (चरति) या चल रहा है, (यः च) ओर जो (वञ्चति) धोखा देता है, (यः) जो (निलायम्, चरति) छ्पि- (मन्त्रयेते) गुप्त परिभाषण करते है, (वरुणः राजा ) जगत् का राजा वरूण, (तृतीयः) उनम तीसरा हआ, (तत् वेद्) उसे जानता है । उतो संमुद्रौ वरणस्य कुक्षी उताभिनसपं उदके निरीनः ॥३॥ ६६ भथववेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ४। सूक्त १६

English

Speak forth a welcome, female frog! Do thou O frog, accost the rain. Stretch thy four feet apart, and swim in the middle of the lake. Khanvakhā, ho! Khaimakhā, ho! thou in the middle, Taduri!

अध्याय 4

श्लोक 15.14

उ॒प॒प्रव॑द मण्डूकि व॒र्षमा व॑द तादुरि ।मध्ये॑ ह्र॒दस्य॑ प्लवस्व वि॒गृह्य॑ च॒तुरः॑ प॒दः

upapravada maṇḍūki varṣamā vada tāduri | madhye hradasya plavasva vigṛhya caturaḥ padaḥ

हिन्दी अर्थ

(उत) तथा (इयम्, भुमिः) यह भूमि (वरुणस्य, राज्ञः) वरूण राजा की है, (उत) तथा (असौ) वह् बृहती (यौः) बडा द्युलोक वरुण राजा काहे, (दूरे अन्ता) दुर ओर समीप में विद्यमान द्यौः ओर पृथिवी वरुण राजाकेर्ह। (उतो) तथा (समूद्रौ) दो समृद्र (वरुणस्य) वरुण की मे (निलीनः) वह नितरां लीन हुआ-हुआ है । दूरे दूर में यौः, अन्ते, अन्तिके, समीप मे पुथिवी । “"दुरे-अन्ते द्यावा-पृथिवीनाम'' (निषं० ३।३०) । समुद्रौ पूवं ओर परिचम के समुद्र । अल्पे उदके उदक विन्दु मे। लीनः ली इलेषणे (क्रयादिः) लीङ् इलेषणे अतिक्रमण करके उससे भी परे चला जाय, (सः) वह् (वरुणस्य राज्ञः) वरुण

English

Fathers, enjoy the rain from one who strives to win the Marutes heart. Lift up the mighty cask and pour down water; let the wind blow, and lightnings flash around

अध्याय 4

श्लोक 15.15

खण्व॒खा३इ॒ खैम॒खा३इ॒ मध्ये॑ तदुरि ।व॒र्षं व॑नुध्वं पितरो म॒रुतां॒ मन॑ इछत

khaṇvakhā3i khaimakhā3i madhye taduri | varṣaṃ vanudhvaṃ pitaro marutāṃ mana ichata

हिन्दी अर्थ

राजा के फे से (न मुच्यातै) नहीं मुक्त हो सकता । (अस्य) इस वरूण के (सहस्राक्षाः) हजारो अखोंवाले (स्पशः) गुप्तचर (दिवः) चुलोक से अति) भूमि का भी अतिक्रमण करके (परयन्ति) देखते है । (वरुणः राजा) वरूण राजा (तद् सर्वम्) उस सवको (वि चष्टे) विवेकपूवंक देवता है, (यत्) जोकि (रोदसी) चुलोक ओौर पृथिवी के (जनानाम्) जनों के (निमिषः) निमेष-उन्मेष (अस्य) इस वरुण के

English

us. Let sacrifice be paid, and, widely scattered, let herbs and plants be full of joy and gladness. On the omnipresence and omniscience of Varuna

अध्याय 4

श्लोक 15.16

म॒हान्तं॒ कोश॒मुद॑चा॒भि षि॑ञ्च सविद्यु॒तं भ॑वतु॒ वातु॒ वातः॑ ।त॒न्वतां॑ य॒ज्ञं ब॑हु॒धा विसृ॑ष्टा आन॒न्दिनी॒रोष॑धयो भवन्तु

mahāntaṃ kośamudacābhi ṣiñca savidyutaṃ bhavatu vātu vātaḥ | tanvatāṃ yajñaṃ bahudhā visṛṣṭā ānandinīroṣadhayo bhavantu

हिन्दी अर्थ

जैसेकि (दवघ्नी) अपने भविष्य का हनन करनेवाला जूञा-खिलाडी, (अक्षान्) पासोंको आस्फार मे (नि मिनोति) फेकता है स्वविजय आरस्फार = क्रीडाफलक । इवः उपाशंसनीयः कालः (निरुक्त (वरुण) है वरुण ! (ते ये पाशाः) तेरे जो फंदे, (सप्त सप्त) सात- विशेषतया जो बंधे हुए हैँ, ओर जोकि (रुशन्तः) शरीर को हसित कर

English

The mighty Ruler of these worlds beholds as though from close at hand, The man who thinks he acts by stealth: all this the Gods perceive and know.

अध्याय 4

श्लोक 16.1

सत्यानृतसमीक्षकः।१-९ ब्रह्म।वरुणः, सत्यानृतान्वीक्षणम्।त्रिष्टुप्, १ अनुष्टुप्, ५ भुरिक्, ७ जगति, ८ त्रिपान्महाबृहती, विराण्नाम त्रिपाद्गायत्री।बृ॒हन्ने॑षामधिष्ठा॒ता अ॑न्ति॒कादि॑व पश्यति ।य स्ता॑यन्मन्य॑ते॒ चर॒न्त्सर्वं॑ दे॒वा इ॒दं वि॑दुः

satyānṛtasamīkṣakaḥ| 1-9 brahma| varuṇaḥ, satyānṛtānvīkṣaṇam| triṣṭup, 1 anuṣṭup, 5 bhurik, 7 jagati, 8 tripānmahābṛhatī, virāṇnāma tripādgāyatrī| bṛhanneṣāmadhiṣṭhātā antikādiva paśyati | ya stāyanmanyate carantsarvaṃ devā idaṃ viduḥ

हिन्दी अर्थ

म॒त्युदण्ड देकर इनके विनाश को सूचित किया है । (अनपत्यताम्) अपत्यकेन होने को, अभाव को, (अपामागं) है अपामागे मृज्महे) हटाकर शोधन करते हँ, अपने भापका शोधन करते है अगोताम् गौः वाङ्नाम (निषं० १।११), अगोप्ता है वाणी का पक्षाघात । अपामागे ओषधि है । इसके या इसके किसी योग का वणन

English

A charm to secure freedom from various evils We seize and hold thee, Conquering One! the queen of medi- cines that heal. O Plant, I have endowed thee with a hundred powers for every man,

अध्याय 4

श्लोक 16.2

यस्तिष्ठ॑ति॒ चर॑ति॒ यश्च॒ वञ्च॑ति॒ यो नि॒लायं॒ चर॑ति॒ यः प्र॒तङ्क॑म्।द्वौ सं॑नि॒षद्य॒ यन्म॒न्त्रये॑ते॒ राजा॒ तद् वे॑द॒ वरु॑णस्तृ॒तीयः॑

yastiṣṭhati carati yaśca vañcati yo nilāyaṃ carati yaḥ prataṅkam| dvau saṃniṣadya yanmantrayete rājā tad veda varuṇastṛtīyaḥ

हिन्दी अर्थ

सबको (अप मृज्महे) हटाकर, प्रथक् कर, आत्म-शोधन करते द । होना, इन्द्रियों को स्ववश न कर, उनके वशीभ्रूत हो जाना। अपामागया उसके योग सम्भवतः इस निमित्त सहायक हों । अपामा ओषध ! तु (सर्वासाम् ओषधीनाम्) सब ओषधियौं में से (एकः इत्) एक ही (वशी) व्याधि्यों का वशीकर्ताहै। (तेन) उसद्भवारा, है ७२ अथवंवेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ४) भुक्त १८

English

Still conquering, banishing the curse, mighty, with thy reverted. bloom. Thee and all Plants have I invoked: Hence let it save us! was my prayer.

अध्याय 4

श्लोक 16.3

उ॒तेयं भूमि॒र्वरु॑णस्य॒ राज्ञ॑ उ॒तासौ द्यौर्बृ॑ह॒ती दू॒रेअ॑न्ता ।उ॒तो स॑मु॒द्रौ वरु॑णस्य कु॒क्षी उ॒तास्मिन्नल्प॑ उद॒के निली॑नः

uteyaṃ bhūmirvaruṇasya rājña utāsau dyaurbṛhatī dūreantā | uto samudrau varuṇasya kukṣī utāsminnalpa udake nilīnaḥ

हिन्दी अर्थ

करते हँ, (अथ) तदनन्तर (त्वम्) तू (अगदः) रोगरदहित हआ ( चर) विचर। योगिकाथं मे अपामागं द्वारा, सर्व॑रोगापहारी, शोधक परमेश्वर भी अभिप्रेतहो सकता है । परमेश्वर भेषज है, यथा “भेषजमसि भेषजं गवे कृणोमि सत्यमृतर्येऽरसाः स॑न्तु कृत्व॑रीः ॥१॥ (सूर्येण) सूये के (समम्) समान (ज्योतिः) ज्योति तेरे लिए हो,

English

She who hath cursed us with a curse, or hath conceived a murderous sin, Or seized our son to take his blood, may she devour the child she bare. What magic they have wrought for thee in dish unbaked or burnt dark-red,

अध्याय 4

श्लोक 16.4

उत यो द्याम॑ति॒सर्पा॑त् प॒रस्ता॒न्न स मु॑च्यातै॒ वरु॑णस्य॒ राज्ञः॑ ।दि॒व स्पशः॒ प्र च॑रन्ती॒दम॑स्य सहस्रा॒क्षा अति॑ पश्यन्ति॒ भूमि॑म्

uta yo dyāmatisarpāt parastānna sa mucyātai varuṇasya rājñaḥ | diva spaśaḥ pra carantīdamasya sahasrākṣā ati paśyanti bhūmim

हिन्दी अर्थ

मै तेरे लिए निदिष्ट करता हूं, (कृत्वरीः) इससे नाशकारिणी प्रवृत्तियां (अरसा सन्तु) रसरहित हो जायें, अर्थात् सूख जाये, असमर्थं हो जायें । यो देवाः कृत्यां कृत्वा हृराद विदुषो गृहम् । (देवाः) दिव्यगरणोवाले है राज्याधिकारियो ! (यः) जो (कृत्याम्) हिखक्रिया को (कृत्वा) करके (अविदुषः) अज्ञानी पुरूष के (गृहम्) धर को घर को छीन लिया जाय (दव) जैसेकि (धारः) दुग्धपायी (वत्सः) बछ्डा

English

What they have wrought in flesh undressed,—conquer the sorcerers therewith. Ill dream and wretchedness of life, Rākshasa, monster, stingy hags,

अध्याय 4

श्लोक 16.5

सर्वं॒ तद् राजा॒ वरु॑णो॒ वि च॑ष्टे॒ यद॑न्त॒रा रोद॑सी॒ यत् प॒रस्ता॑त्।संख्या॑ता अस्य नि॒मिषो॒ जना॑नाम॒क्षानि॑व श्व॒घ्नी नि मि॑नोति॒ तानि॑

sarvaṃ tad rājā varuṇo vi caṣṭe yadantarā rodasī yat parastāt| saṃkhyātā asya nimiṣo janānāmakṣāniva śvaghnī ni minoti tāni

हिन्दी अर्थ

हमा उसके पीच-पीछ (पद्यताम्) जाय या जातादहै। कीण्ड ४ । अनु० ४) सूक्त १८ अथवंवेदभाष्य ७६ (अमा) घर में घूसकर, (पाप्मानम्) पापकमं अर्थात् हिसरकमं चिता मे, (बहुलाः, अदमानः) बहुत पत्थर अर्थात् उनकी बौकछाड (फट्) फट्-फट् (करिक्रति) बार-बार अवाजं कर ।

English

All the she-fiends of evil name and voice, we drive away from us. Death caused by famine, caused by thirst, failure of children,. loss of kine, With thee, O Apāmārga, all this ill we cleanse and wipe away.

अध्याय 4

श्लोक 16.6

ये ते॒ पाशा॑ वरुण स॒प्तस॑प्त त्रे॒धा तिष्ठ॑न्ति॒ विषि॑ता॒ रुश॑न्तः ।छि॒नन्तु॒ सर्वे॒ अनृ॑तं॒ वद॑न्तं॒ यः स॑त्यवा॒द्यति॒ तं सृ॑जन्तु

ye te pāśā varuṇa saptasapta tredhā tiṣṭhanti viṣitā ruśantaḥ | chinantu sarve anṛtaṃ vadantaṃ yaḥ satyavādyati taṃ sṛjantu

हिन्दी अर्थ

एेये पापीको मारकर, उसे चितापर रखकर दग्ध करने का विधान मन्रमे हुआ है । साथ ही जलती चिता पर वृणाप्रदशंनार्थ, पत्थरों की बौछाडका भी कथन किया है, जिससे कि पत्थरों के परस्पर टकराने ते बार-बार फट्-फट् नाना आवाज उठे । उग्र पापकमं के लिए यह प्रिया-पत्नी कै स्वामी के लिए वापस प्रेषित कर दिया जातादहे। छायय--छो छेदने (दिवादिः) । चक्रुषे -करोतेलिटः क्वसुः, सब हिस्रक्रियाओं को (अदूदुषम्) दूषित कर दियाहै उन्हैँ विकृत कर दिया है, कार्यासिमथं कर दिया ह । (याम्) जिसेकि (चक्रुः) उन्होने किया है (क्षेत्रे) खेत में, (याम्) जिसे कि (गोषु) गौओं कौ गौशाला मे, (वा) या (याम्) जिसे (ते) तेरे (पुरुषेषु) पुरुषो मे, पुरुषसमाज में किया है ।

English

Death caused by thirst, death caused by stress of hunger, loss at play with dice, All this, O Apāmārga with thine aid we cleanse and wipe away.

अध्याय 4

श्लोक 16.7

श॒तेन॒ पाशै॑र॒भि धे॑हि वरुणैनं॒ मा ते॑ मोच्यनृत॒वाङ् नृ॑चक्षः ।आस्तां जा॒ल्म उ॒दरं॑ श्रंसयि॒त्वा कोश॑ इवाब॒न्धः प॑रिकृ॒त्यमा॑नः

śatena pāśairabhi dhehi varuṇainaṃ mā te mocyanṛtavāṅ nṛcakṣaḥ | āstāṃ jālma udaraṃ śraṃsayitvā kośa ivābandhaḥ parikṛtyamānaḥ

हिन्दी अर्थ

इस मन्त्र मेँ राजाके प्रति चिकित्सक का कथन है । चकारं भद्रमस्मभ्यमात्मने तपनं तु सः॥६॥ ५ काण्ड ४। अनुं० ४ । सूक्तं १६ (यः) जिसने (चकार) हिख्कमं किया है परन्तु (कर्त क ४६ , परन्तु (कर्तुम्) हिखकमं करने में पूर्णतया (न शशाक) नहीं समर्थं हृभा, सफल हु, त तु उसने

English

The Apāmārga is alone the sovran of all Plants that grow. With this we wipe away whate’er hath fallen on thee: go in health! A counter-charm against the incantations of enemies

अध्याय 4

श्लोक 16.8

यः स॑मा॒म्यो॒३वरु॑णो॒ यो व्या॒म्यो॒३यः सं॑दे॒श्यो॒३वरु॑णो॒ यो वि॑दे॒श्यः ।यो दै॒वो वरु॑णो॒ यश्च॒ मानु॑षः

yaḥ samāmyo3varuṇo yo vyāmyo3yaḥ saṃdeśyo3varuṇo yo videśyaḥ | yo daivo varuṇo yaśca mānuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

(आत्मने) अपने लिए (सः तु) उसने तो (तपनम्) सन्ताप पैदा कर लिया है । हिल्रकमं करने वाला हमारी हिसा तो करने मे समर्थं नहीं हमा हुमा है, ओर उसके प्रति . सन्तापरूप हुमा है । वह भविष्य मेँ हमारे प्रति (अपामागेः) अपामागे ओषधि (अप मष्ट) रोग को जो (शपथः) शपथग्रहण की आदत है उसे (अप) पृथक् करे । (यातुधानीः ) दूसरों को यातना कष्ट पहुंचाने की प्रवृत्तियों को, (अह्) तथा (अप)

English

The moonlight equalleth the sun, night is the rival of the day. I make effectual power my help: let magic arts be impotent.

अध्याय 4

श्लोक 16.9

तैस्त्वा॒ सर्वै॑र॒भि ष्या॑मि॒ पाशै॑रसावामुष्यायणामुष्याः पुत्र ।तानु॑ ते॒ सर्वा॑ननु॒संदि॑शामि

taistvā sarvairabhi ṣyāmi pāśairasāvāmuṣyāyaṇāmuṣyāḥ putra | tānu te sarvānanusaṃdiśāmi

हिन्दी अर्थ

अपामा: अपमृज्यते रोगादिनिराकरणेन पुरुषः शो (यातुधानान्) यातना देने के विचारों को (अपमुञ को (अप) पृथक् कर ओौर पुरुष को विशृद्ध करके, (अपामा) है अपामार्गं समह् को (अप + पृथक् करके (मृज्महे) अपने को शुद्ध करते है। सुवत में राजा ओर अपामा मोषधि का मिधित वणेन हृभा है ।

English

Gods! if one make and bring a spell on some man’s house who knows it not, Close as the calf that sucks the cow may it revert and cling to him. When one puts poison in a dish of unbaked clay to kill a man,

अध्याय 4

श्लोक 17.1

अपामार्गः।१-८ शुक्रः।अपामार्गो वनस्पतिः।अनुषटुप्।ईशा॑णां त्वा भेष॒जाना॒मुज्जे॑ष॒ आ र॑भामहे ।च॒क्रे स॒हस्र॑वीर्यं॒ सर्व॑स्मा ओषधे त्वा

apāmārgaḥ| 1-8 śukraḥ| apāmārgo vanaspatiḥ| anuṣaṭup| īśāṇāṃ tvā bheṣajānāmujjeṣa ā rabhāmahe | cakre sahasravīryaṃ sarvasmā oṣadhe tvā

हिन्दी अर्थ

(वापिकम्) वर्षाकालोद्धव (नडम्) नड को आसानीसे काट दिया जाता है। वर्षाकालोद्भूत नड यतः गोला होता है अतः आसानीसे काटा जा सकता है । जामि पद जन्मसे सम्बन्धी का वाचके । यथा (जामये क्रिया करने का अनुमोदन किया है। (ना्षदेन) नृषद् है परमेश्वर, नर-नारियौ मे स्थित; नाषद हे, नृषद् का पुत्र, सम्भवतः अथर्वा ऋषि, जिसद्वारा कि अथववेवेद का आविभवि

English

It cracks when set upon the fire with the sharp sound of many stones. Endowed with thousand powers! adjure the bald and those with necks awry.

अध्याय 4

श्लोक 17.2

स॒त्य॒जितं॑ शपथ॒याव॑नीं॒ सह॑मानां पुनःस॒राम्।सर्वाः॒ सम॒ह्व्योष॑धीरि॒तो नः॑ पारया॒दिति॑

satyajitaṃ śapathayāvanīṃ sahamānāṃ punaḥsarām| sarvāḥ samahvyoṣadhīrito naḥ pārayāditi

हिन्दी अर्थ

ओषधि ! तू प्रोक्तः हुई है । (त्विषीमती) दीप्तिमती (सेना इव ) सेना के सदुश तू (एषि) गति करती है रक्ना्थं ; (तत्र) उस मनुष्य मे (भयम्) भय (न अस्ति) नहीं होता (यप्र) जिसमें ( ओषधे) है ओषधि ! (प्राप्नोषि) तु प्राप्त होती है । वेदादिशास्त्रो मेँ चारों ऋषियों के नाम पठित दं जिनके द्वारा चारों वेदों का आविर्भाव हृ है! ये चारों ऋषि परमेश्वर के मानस-पुत्र है, अ्मथूनी-सृष्टि के है । प्रतिसगे मे इन नामवाले चार ऋषियों द्वारा चारोंवेदोंका आविर्भाव होतादहै। चारों ऋषियों भौरचारोंवेदोंका नित्य सम्बन्ध है, अतः वर्णन एतिहासिक नहीं । नाषदेन परमेश्वर को ““ध्रुवसदं, "नृषदं, मनःसदम्; अप्सुसदं १. करीं साक्षात्, कहीं परम्परया ।

English

Back to its author turn the spell like a dear damsel to her friend! I with this Plant have ruined all malignant powers of witchery. The spell which they have laid upon thy field, thy cattle, or thy men.

अध्याय 4

श्लोक 17.3

या श॒शाप॒ शप॑नेन॒ याघं मूर॑माद॒धे।या रस॑स्य॒ हर॑णाय जा॒तमा॑रे॒भे तो॒कम॑त्तु॒ सा

yā śaśāpa śapanena yāghaṃ mūramādadhe| yā rasasya haraṇāya jātamārebhe tokamattu sā

हिन्दी अर्थ

२. यह् ओषधि ह परमेश्वर । इसलिए परमेद्वर को “भेषजम् ' कहा है । यथा “'भेष- ७६ अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। मनु ४। सूक्त १६९ घुतसदं, व्योमसदम् ; पुथिवी सदं, अन्तरिक्षसद, दि विषदं; देव सदं, नाकसदम! कहा है (यजुः° €।२), अतः नाषद है अथर्वा ऋषि । नषद का पुत्र । क्रियाको दग्ध करती हुई तु है। (उत) तथा (पाकस्य) दुग्धपायी शिश

English

No power had he who wrought the spell: he hurt his foot, he broke his toe. His act hath brought us happiness and pain and sorrow to him- self.

अध्याय 4

श्लोक 17.4

यां ते॑ च॒क्रुरा॒मे पात्रे॒ यां च॒क्रुर्नी॑ललोहि॒ते।आ॒मे मां॒से कृ॒त्यां यां च॒क्रुस्तया॑ कृत्या॒कृतो॑ जहि

yāṃ te cakrurāme pātre yāṃ cakrurnīlalohite| āme māṃse kṛtyāṃ yāṃ cakrustayā kṛtyākṛto jahi

हिन्दी अर्थ

रोगजीवाणु का (हन्ता असि) हनन करनेवाला त् है। । मन्त्र मे अपामागं-भोषधि, तथा परमेदव र-भेषज, दोनों का, गौण- मुख्य भाव में वणेन हुआ है । पाकः = पिबतीति, दुगधपायी बालकः शिशुः । यददो देवा अरसुरास्त्वयाग्रं निरकरर्वत । (यत्) जो (अदः) उस पूवंकालमें (देवाः) देवों ने (त्वया) तेरे द्वारा (अग्र) प्रथम (असुरान्) असुरो का (निः अकवत) निराकरण किया, (ततः) तब से ( भोषधे) है ओषधि । (त्वम्) तु (अधि) अन्य ओषधियों की अधिष्ठात्री रूपमे (अपामागेः) अपामागे नाम से (अजायथाः) प्रकट हुई है ।

English

Let Apāmārga sweep away chronic disease and every curse, Sweep sorceresses clean away, and all malignant stingy hags. Sweep thou away the sorcerers, all stingy fiendish hags away.

अध्याय 4

श्लोक 17.5

दौष्व॑प्न्यं॒ दौर्जी॑वित्यं॒ रक्षो॑ अ॒भ्वऽमरा॒य्यः ।दु॒र्णाम्नीः॒ सर्वा॑ दु॒र्वाच॒स्ता अ॒स्मन्ना॑शयामसि

dauṣvapnyaṃ daurjīvityaṃ rakṣo abhva'marāyyaḥ | durṇāmnīḥ sarvā durvācastā asmannāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

(अदादिः) । अपामागं पद, धात्वथं से, भोषधि तथा परमेदवरभेषज का रक्षसः द्वारा अचुर अभिप्रेत हैँ। (शतशाखा) है ओषधि ! तू सौ शाखाओंवाली है । (विभिन्द विविध असुरो तथा राक्षसो मन्व ४, ३ का भेदन करती है, (ते पिता)

English

All this, O Apāmārga, with thine aid we wipe away from us. Thou breakest ties of kith and kin, thou causest, too, relation- ship:

अध्याय 4

श्लोक 17.6

क्षु॒धा॒मा॒रं तृ॑ष्णामा॒रम॒गोता॑मनप॒त्यता॑म्।अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे

kṣudhāmāraṃ tṛṣṇāmāramagotāmanapatyatām| apāmārga tvayā vayaṃ sarvaṃ tadapa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

विविध असुरो तथा राक्षसो का भेदन करता है, हनन करता है । (यः) जो छिन्न-थिन्न कर । ( ) विविध रूप् मे ओषधि का वर्णेन हुमा है (सायण) । परमेरव र-भेषज' पक्ष मँ सात्विक करोधादि असुरो की विभेदिका हैँ । पिता है “तज्जपस्तद्थेभावनम् (योग

English

So bruise the sorcerer’s offspring, like a reed that groweth in the Rains. Thou hast been blessed with blessing by the Brāhman, Kanva

अध्याय 4

श्लोक 17.7

तृ॒ष्णा॒मा॒रं क्षु॑धामा॒रमथो॑ अक्षपराज॒यम्।अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॒ मृज्महे

tṛṣṇāmāraṃ kṣudhāmāramatho akṣaparājayam| apāmārga tvayā vayaṃ sarvaṃ tadapa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

पुनः उसका प्रवेश । इस द्वारा परमेडव र-भेषज प्रकट होता है। प्रकट होकर वह असुरो गौर राक्षसो का छेदन-मेदन कर देता है, जोकि हमारा उपक्षय पृथिव्याः" (यजुः० ३७।६) । धूपन ==धुर्थां देना या सन्तप्त करना ''धरप मू्तिभावेषु (तुदादिः) 1 आसुर-राक्षस भावना पेदा होकर भावनोत्पादकं को पीडित करती रहे तो उत्पादक किसी भी समय उस भावना से विरक्त तथा (वधम्) वध को (वरीयः) बहुत दूर (यावय) अलग कर

English

Nārshada. Thou fliest like a flashing dart: there is no fear or danger, Plant! within the limit of thy range.

अध्याय 4

श्लोक 17.8

अ॒पा॒मा॒र्ग ओष॑धीनां॒ सर्वा॑सा॒मेक॒ इद् व॒शी।तेन॑ ते मृज्म॒ आस्थि॑त॒मथ॒ त्वम॑ग॒दश्च॑र

apāmārga oṣadhīnāṃ sarvāsāmeka id vaśī| tena te mṛjma āsthitamatha tvamagadaścara

हिन्दी अर्थ

१. यजुः० ३।५६ । मन्मरोक्त असुर-राक्षस मानसिक विकाररूप ई विकृतिर्याँ ह । का निर्दे हमा है । जसे अपामागं के फलों के मुख प्रतीपमुखी होते है, वैसे शपथो भौर तज्जन्य दुःखरूपी फल को भी प्रतीपमुखी करने कौ भरथना हई है, न शपथे हों मौर न उनका दुःखरूपी फल ही मुक्ष प्राप्त हो । शपथ भौर अभिशाप भिन्न-भिन्न है । शपथे स्वयं ली जाती है, ओर अभिशाप परमेदवर-भेषज पक्ष म फलदायक परमेदवर है । वहु शपथ आदि करनेसे प्रतीपमूखीहो जाताहै, ओर दुःख तथा कष्टरूपी वध को प्राप्त

English

Illumining, as ‘twere, with light, thou movest at the head of plants. The saviour of the simple man art thou, and slayer of the fiends.

अध्याय 4

श्लोक 18.1

अपामार्गः।१-८ शुक्रः।अपामार्गो वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ६ बृहतीगर्भा।स॒मं ज्योतिः॒ सूर्ये॒णाह्ना॒ रात्री॑ स॒मावती॑ ।कृ॒णोमि॑ स॒त्यमू॒तये॑ऽर॒साः स॑न्तु॒ कृत्व॑रीः

apāmārgaḥ| 1-8 śukraḥ| apāmārgo vanaspatiḥ| anuṣṭup, 6 bṛhatīgarbhā| samaṃ jyotiḥ sūryeṇāhnā rātrī samāvatī | kṛṇomi satyamūtaye'rasāḥ santu kṛtvarīḥ

हिन्दी अर्थ

(शतेन) सौ रक्नोपायों हारा (मा) मेरी (परि) सव ओरसे (पाहि) रक्षा कर, (सहचरेण) तथा निज हजार शक्तियों दवारा (अभि) साक्षात (मा रक्ष) मेरी रक्षा कर । (वीरुधांपते) है वि रोहण करनेवाली लताओों या को स्थापित करे । परमेव र-भेषज का वर्णन मन्त्र मेँ नहीं हुजा । उस सव- निज स्वाभाविक शविति द्वारा अपामार्ग" है, बुराइयों को अप" अर्थत दिव॑मन्तरिक्षमाद् भूरिं सव तद देवि पश्यति ॥ १

English

As once when time began the Gods with thee expelled the Asuras,

अध्याय 4

श्लोक 18.2

यो दे॑वाः कृ॒त्यां कृ॒त्वा हरा॒दवि॑दुषो गृ॒हम्।व॒त्सो धा॒रुरि॑व मा॒तरं॒ तं प्र॒त्यगुप॑ पद्यताम्

yo devāḥ kṛtyāṃ kṛtvā harādaviduṣo gṛham| vatso dhāruriva mātaraṃ taṃ pratyagupa padyatām

हिन्दी अर्थ

(आ पश्यति) सबको एक दृष्टिपात मे देखता है, (प्रति परयति प्रतिवस्तु को पृथक्-पृथक् रूप मे भी देखता दहै, (परा ॥ दुरकी ८८ को भी देखता हे, (प्यति) समीप की नस्तु कौ भी देखत है, (देनि)" ह भूमि को (तत् सर्व॑म्) उस सबको (पश्यति) वह देखता हे देवी है दिव्यगुणवती 'सदंपुष्पा' (सायण) । सद॑पुष्पा का अर्थ है, “सदा जिसके फूल खिले रहते है", इसी प्रकार द्रष्टा-योगी को चक्षुः सदा फूल के सदृश विकसित रहती है, देखने के लिए । त्वयारै सवौ भतानि पश्यानि देव्योषधे ॥२॥

English

Even thence, O Plant, wast thou produced as one who wipes and sweeps away. Thy father’s name was Cleaver. Thou with thousand branches cleavest all. Do thou, turned backward, cleave and rend the man who treateth us as foes.

अध्याय 4

श्लोक 18.3

अ॒मा कृ॒त्वा पा॒प्मानं॒ यस्तेना॒न्यं जिघां॑सति ।अश्मा॑न॒स्तस्यां॑ द॒ग्धायां॑ बहु॒लाः फट् क॑रिक्रति

amā kṛtvā pāpmānaṃ yastenānyaṃ jighāṃsati | aśmānastasyāṃ dagdhāyāṃ bahulāḥ phaṭ karikrati

हिन्दी अर्थ

(देवि ओषधे !) दिव्यगुणवती है ओषधि ! (तिः दिवः) तीन दौः को, (तिस्रः पृथिवीः) तीन पृथिवियों को, (च) जौर (पृथक्) पृथक्-पृथक् तिखः पृथिवीः तिखः दिवः = “इस जगत् मेँ उत्तम, मध्यम भौर अधम तीन प्रकार की भूमि ओर अग्नि है" (ऋ० २।२७।८; दयानन्द) । यलोक की विषुवत् रेखा एवणप्०५९8। 1४८ , जिसपर सूर्यं के आते दिन- रात बराबर कालके हो जततिर्हु; तथा इस रेखा से उत्तरकाभाग ओर दक्षिण काभाग। इस प्रकार भी द्युलोक तीन भागों में विभक्तहो जाता है । पटी, शीतोष्ण पटरी तथा शीत पटरी में तीन विभाग ।

English

The evil sprang from earth; it mounts to heaven and spreads to vast extent. Reverted, shaking him with might, thence on its maker let it fall.

अध्याय 4

श्लोक 18.4

सह॑स्रधाम॒न् विशि॑खा॒न् विग्री॑वां छायया॒ त्वम्।प्रति॑ स्म च॒क्रुषे॑ कृ॒त्यां प्रि॒यां प्रि॒याव॑ते हर

sahasradhāman viśikhān vigrīvāṃ chāyayā tvam| prati sma cakruṣe kṛtyāṃ priyāṃ priyāvate hara

हिन्दी अर्थ

जली है, इन्दं पृथक्-पृथक् सीमाओं मेँ विभक्त कर पहिचानना । भूतानि = पंचभूत तथा भौतिक जगत् । दिव्यस्यं पणस्य तस्यं हासि कनीनिका । सा भूमिमा रुरोहिथ वह्यं श्रान्ता वधूरिव ॥३॥

English

For thou hast grown reverted, and turned backward also is thy fruit. Remove all curses far from me, keep most remote the stroke of death. Preserve me with a hundred, yea, protect me with a thousand aids.

अध्याय 4

श्लोक 18.5

अ॒नया॒हमोष॑ध्या सर्वाः॑ कृ॒त्या अ॑दूदुषम्।यां क्षेत्रे॑ च॒क्रुर्यां गोषु॒ यां वा॑ ते॒ पुरु॑षेषु

anayāhamoṣadhyā sarvāḥ kṛtyā adūduṣam| yāṃ kṣetre cakruryāṃ goṣu yāṃ vā te puruṣeṣu

हिन्दी अर्थ

(सा) वह् तू कनीनिका (भूमिम्) भूमि पर (मा रुरोहिथ) मारूढ हुई है, (इव) जसेकि (श्रान्ता वधूः) थकी वधू (वह्यम्) वहन साधनरूपी रथ में , अथवेवेदभाष्य काण्कं ४। अनु०° ४। सूक्त २० कनीनिका -€लकणण। । वेदों में सूयं को चक्षुः कहा 9 अतः सूयं की मुच्चरत्'” (यजुः० ३६।२४) में सूयं को चक्षु: कहा है ।

English

May mighty Indra, Lord of Plants! give store of strength and. power to thee. A charm for the acquisition of superhuman powers of sight

अध्याय 4

श्लोक 18.6

यश्च॒कार॒ न श॒शाक॒ कर्तुं॑ श॒श्रे पाद॑म॒ङ्गुरि॑म्।च॒कार॑ भ॒द्रम॒स्मभ्य॑मा॒त्मने॒ तप॑नं॒ तु सः

yaścakāra na śaśāka kartuṃ śaśre pādamaṅgurim| cakāra bhadramasmabhyamātmane tapanaṃ tu saḥ

हिन्दी अर्थ

(सहस्राक्षः देवः) हजारों आंखोंवाले देव ने (ताम्) उस ओषधि को (मे) मेरे (दक्षिणे हस्ते) दाहिने हाथ में (आ दधत्) स्थापित किया (यः च) जो (शद्रः) शृद्र है, (उत) तथा (आर्यः) आयं है । सहाक्षः देवः परमेर्व र-पुरुषः, यथा “सहस्रशीर्षा पुरूषः मणिबन्धन कलार्ईमेहोतादहै,या बाहू मे, हाथ में नहीं । इसलिए मन्त्रमें आधान का कथन हु है, बन्धन का नहीं ।

English

It sees in front, it sees behind, it sees afar away, it sees The sky, the firmament, and earth: all this, O Goddess, it beholds. Through thee, O godlike Plant, may I behold all creatures that exist,

अध्याय 4

श्लोक 18.7

अ॒पा॒मा॒र्गोऽप॑ मार्ष्टु क्षेत्रि॒यं श॒पथ॑श्च॒ यः ।अपाह॑ यातुधा॒नीरप॒ सर्वा॒ अरा॒य्यः

apāmārgo'pa mārṣṭu kṣetriyaṃ śapathaśca yaḥ | apāha yātudhānīrapa sarvā arāyyaḥ

हिन्दी अर्थ

विचार, यथा, (१ ) "उत शूद्र उतायं" यह अथववेद का वचन है । आर्यो नाम अनायं अर्थात्, अनाडी है, (सण प्र०, समु० ८; पु० ३५२; रामलाल १. वेदो मे सयं कौ चक्षुः कहा है, अतः, सूयं में चकषुिष्ठ कनीनिका का वणन हुआ है । कनीनिका दारा वस्तुदशंन होता है । इस द्वारा सूयं मानो सबको देखता है । दिष्य दृष्टि वाला योगी कहता है कि वह कनीनिका मानो भूमि पर आणू हुई मेरी चक्ष हाथ भाग्यशाली है, अधिक शक्तिशाली है । । +

English

Three several heavens, three several earths, and these six regions one by one. The pupil, verily, art thou of that celestial Engle’s eye.

अध्याय 4

श्लोक 18.8

अ॒प॒मृज्य॑ यातु॒धाना॒नप॒ सर्वा॑ अरा॒य्यः ।अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॒ मृज्महे

apamṛjya yātudhānānapa sarvā arāyyaḥ | apāmārga tvayā vayaṃ sarvaṃ tadapa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

(३) जिसको पठने-पढाने से कुछ भी न अवे, वह निर्वृद्धि भौर मूखं होने से श्र कहातादहै (सण प्र०, समु० ३, पुर १२६; रामलाल कषर हे सहस्रचक्षुरूप परमेश्वर ! । रूपाणि) अपने स्वरूपों को गूहथाः) ढके रख, छिपाये र्व । ( अथो) अपिच (सहस्रचक्षो") हजार आंखों वाले है परमेवर ! (त्वम्) त (किमीदिनः) भेद लेनेवालो मं से (प्रति- परया) प्रत्येक को दृष्टि में रख । प्रह्न करके भेद लेने वाले । पश्याः = दृशेः लेटि अडागमः ।

English

On earth hast thou alighted as a weary woman seeks her couch. The God who hath a thousand eyes give me this Plant in my right hand! I look on every one therewith, each Sūdra and each Āryan man.

अध्याय 4

श्लोक 19.1

अपामार्गः।१-८ शुक्रः।अपामार्गो वनस्पतिः।अनुष्टुप्, २ पथ्यापङ्क्तिः।उ॒तो अ॒स्यब॑न्धुकृदु॒तो अ॑सि॒ नु जा॑मि॒कृत्।उ॒तो कृ॑त्या॒कृतः॑ प्र॒जां न॒डमि॒वा छि॑न्धि॒ वार्षि॑कम्

apāmārgaḥ| 1-8 śukraḥ| apāmārgo vanaspatiḥ| anuṣṭup, 2 pathyāpaṅktiḥ| uto asyabandhukṛduto asi nu jāmikṛt| uto kṛtyākṛtaḥ prajāṃ naḍamivā chindhi vārṣikam

हिन्दी अर्थ

(मा) मुञ्चे (यातुधानान्) यातनाएं धारण करनेवालौं को (दशंय) दिखा, (यातुधान्यः) यातना धारण करने वालियौं को (दशय) दिखा । (सर्वान् पिशाचान्) सव मांसभक्षकों को (दशय) दिखा, (इति) इसलिए (ओषधे) है ओषधिरूप परमेङवर ! (त्वा आ रभे) र्म तेरा अवलम्बन करता हँ । तुजे प्राप्त कर्ता हूं । वप्रे सूयैमिव सर्पन्तं मा पिशाचं तिरस्करः ॥७॥ है कि “मा आट्मानम् अपगृहयाः 1 (निरुक्त ६।३।२७), जो कि दाह का पान करती है, ताप-सन्ताप को विनष्ट करती है। परमेश्वर योगी के ताप-सन्ताप को नष्ट करता है, अतः वहं ओपधिरूप है ।

English

Make manifest the forms of things; hide not their essences from sight. And, thou who hast a thousand eyes, look the Kimidins in the face.

अध्याय 4

श्लोक 19.2

ब्रा॒ह्म॒णेन॒ पर्यु॑क्तासि॒ कण्वे॑न नार्ष॒देन॑ ।सेने॑वैषि॒ त्विषी॑मती॒ न तत्र॑ भ॒यमस्ति॒ यत्र॑ प्रा॒प्नोष्यो॑षधे

brāhmaṇena paryuktāsi kaṇvena nārṣadena | senevaiṣi tviṣīmatī na tatra bhayamasti yatra prāpnoṣyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

पिक्चाचों को, जोकि मुम छिये रहकर मुभ यातनां दे रद है, मुभे भी दर्शा । वे ह काम, क्रोध, लोभ आदि । तर् अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ४ । सूक्त २० (असि, तु है, (च) ओौर (चतुरक््याः° शुन्याः) चार आंखोवाली कुतियाकी (सूयम् इव सूयं के सदृश,(पिशाचम् ) मांसभक्षक को (मा) मत (तिरस्करः ) अन्तहित कर, छुपने न दे ।

English

Make me see Yātudhānas, make thou Yātudhānis visible. Make me see all Pisāchas With this prayer, O Plant, I hold thee fast. Thou art the sight of Kasyapa and of the hound who hath four eyes.

अध्याय 4

श्लोक 19.3

अग्र॑मे॒ष्योष॑धीनां॒ ज्योति॑षेवाभिदी॒पय॑न्।उ॒त त्रा॒तासि॒ पाक॒स्याथो॑ ह॒न्तासि॑ र॒क्षसः॑

agrameṣyoṣadhīnāṃ jyotiṣevābhidīpayan| uta trātāsi pākasyātho hantāsi rakṣasaḥ

हिन्दी अर्थ

कद्यप = पदयतीति कडयपः, उदित हभ सूर्य॑, जोकि सबको देखता यह सवंदष्टिगोचर है, इसी प्रकार है ओषधि ! तू पिशाच को भी अन्तर्हित न होने दे, छिपने न दे । तिरः तिरोऽन्तधौ' (अष्टा० १।४।७६९) । करः = करोतेर्माडि लुडि च्लेरङ् (सायण)। पिशाच है मांसभक्नण करनेवाला, उसे क्षीण कर देने वाला रोगकीटाणु श्य । ये शरीर में प्रविष्ट होकर शारीरिक रुधिर-मांस को क्षीण कर देते हँ । पिशाच = पिशितं मांसम् अचति मे विद्यमान रहते है, ओर वर्हे हमारे शरीरो में प्रविष्टहो जति (परिपाणात्) सव प्रकारके पेयसे (यातुधानम्) यातनाएं धारण करनेवाले, या प्रदान करनेवाले पिशाच को (उदग्रभम्) मैने पकड़ लिया

English

Make the Pisācha manifest as Sūrya when he rides at noon. Kimidin, Yātudhāna from their hiding-places have I dragged.

अध्याय 4

श्लोक 19.4

यद॒दो दे॒वा असु॑रां॒स्त्वयाग्रे॑ नि॒रकु॑र्वत ।तत॒स्त्वमध्यो॑षधेऽपामा॒र्गो अ॑जायथाः

yadado devā asurāṃstvayāgre nirakurvata | tatastvamadhyoṣadhe'pāmārgo ajāyathāḥ

हिन्दी अर्थ

पर्वंक भेद लेनेवाले को पकड़ लिया जाता है । (तेन) उस पकड़ के कारण १. सूर्य आकाशम निर्वाधरूप मेँ चलता है, नियमपूवंक । एेसा चलना बिना चक्षु के सम्भव नहीं, अतः दहे परमेदवर ! तुहीउसकाचक्षुहै,तू ही उसका चक्षु बनकर य॒लोकस्थहै, रात्रिम दृष्टिगोचर होतीदहै, दिनमे सौर प्रकाशकै कारण छिपी रहती है । मानो रात्रिकाले तुम चक्षुके्ारा रात्रिक दुश्योंको वह देती है । नियमपू्वंक चला रहा है, परन्तु सूयं जो दिन मे चलतारहै, ओर चतुरक्षी शुनी जो रातिम देखती रहै, ये दो केवल दृष्टान्तरूप मे कथित क्य है अथवं० १८।२।११ मे दोश्वानों का वर्णन हृ ठै जिन्हे कि “सारमेयौ "चतुरक्षी रबलौ" कहा है । सम्भवतः इन दो 'इवानौ' को शुनीमण्डल' कहा है, जिसेकिं “शगुन्याइदच चतुरश्याः" कहा है । दो !हवानौ' कौ चार मांखं होती ह ।

English

I look on every one with this, Sūdra and Aryan man alike. Make that Pisācha visible, the fiend who flies in middle air, The fiend who glides across the sky, and him who deems the earth his help.

अध्याय 4

श्लोक 19.5

वि॒भि॒न्द॒ती श॒तशा॑खा विभि॒न्दन् नाम॑ ते पि॒ता।प्र॒त्यग् वि भि॑न्धि॒ त्वं तं यो अ॒स्माँ अ॑भि॒दास॑ति

vibhindatī śataśākhā vibhindan nāma te pitā| pratyag vi bhindhi tvaṃ taṃ yo asmā~ abhidāsati

हिन्दी अर्थ

परिपाणात् = सव प्रकार के पेय तथा खाद्य पदार्थो से। पिशाच उनके पकड़ लेने से दृष्टि पूववत् देखने मे सक्षम हो जाती है। शूद्र ओर आयं (देखो मन्त्र ४ की व्याख्या) । करता है, (च यः) ओर जो (दिवम्, अति, सर्पति) चुलौक ओौर उसको लाघकर भी (सपति) सपण करतार । (यः) जो (भूमिम्) भूमि को मे “सद॑पुष्पा' नामक ओषधि का वणेन है, परन्तु सूक्त मेँ इस ओषधि का

English

Glorification and benediction of cows The kine have come and brought good fortune: let them rest in the cow-pen and be happy

अध्याय 4

श्लोक 19.6

अस॒द् भूम्याः॒ सम॑भव॒त् तद् यामे॑ति म॒हद् व्यचः॑ ।तद् वै ततो॑ विधू॒पाय॑त् प्र॒त्यक् क॒र्तार॑मृच्छतु

asad bhūmyāḥ samabhavat tad yāmeti mahad vyacaḥ | tad vai tato vidhūpāyat pratyak kartāramṛcchatu

हिन्दी अर्थ

होता, अपितु यह अध्यात्म-भोषधि" है । यथा-- (४) तथा "प्रातिभ-आदशं (योग० विभूतिपादः, सूत्र ३६), अर्थात् स्थल, जिसमें कि फफ मे वायु कातथा हृदय में रक्तरूपी आपः का संचार होता गला" कहते हैँ । इन शारीरिक अवयवो मेँ रोग-कीटाणुओं द्वारा जनित रोगतो

English

near us. Here let them stay prolific, many-coloured, and yield through many morns their milk for Indra.

अध्याय 4

श्लोक 19.7

प्र॒त्यङ् हि सं॑ब॒भूवि॑थ प्रती॒चीन॑फल॒स्त्वम्।सर्वा॒न् मच्छ॒पथाँ॒ अधि॒ वरी॑यो यावया व॒धम्

pratyaṅ hi saṃbabhūvitha pratīcīnaphalastvam| sarvān macchapathā~ adhi varīyo yāvayā vadham

हिन्दी अर्थ

अथवा अन्तरिक्ष है उदर (अथवं० १०।७।३२) मौर भूमि है पाद (टाँगों ८४ अधववंबेदभाष्य काण्ड ४1 अनु० ४) सुक्त २० उषसः) उषाकाल के प्रारम्भ होते (दुहानाः) दोही जाये । इन्द्राय = परमैशवर्यवान् राजा के लिए । ये गोशालाएं राजकीय गोदाता राजा की इस निमित्त प्रशंसा करनेवाले के लिए (इत्) ही (उप ददाति) गौं उपदानरूप मे (ददाति) देता है, (स्वम्) इसके गोधन को ना (3 । (न मुषायति) इससे छीन नहीं नेता, अपितु (अस्य) इस प्रबन्धक कौ

English

Indra aids him who offers sacrifice and praise: he takes not what is his, and gives him more thereto.

अध्याय 4

श्लोक 19.8

श॒तेन॑ मा॒ परि॑ पाहि स॒हस्रे॑णा॒भि र॑क्ष मा ।इन्द्र॑स्ते वीरुधां पत उ॒ग्र ओ॒ज्मान॒मा द॑धत्

śatena mā pari pāhi sahasreṇābhi rakṣa mā | indraste vīrudhāṃ pata ugra ojmānamā dadhat

हिन्दी अर्थ

करते हैः भौर इनकी प्रयोगक्षालाओं को सम्भवतः “असुरभवनं"” कटा है । उदाहरणा्ं योगी तौ योगप्रक्रियानुसार सशरीर आकाश-गमन के लिए यत करते व ५ दा काद चुट ववुः भत हनो चाहिए, ताकि टट कर गौओं पर इसका प्रहार न हो । है, भौर वतमान में वेज्ञानिक, विज्ञान साधनों द्वारा, वा युयानों द्वारा आकाशगमन । निधं 4 । शिक्षते शिक्षति दानकर्मा (निधं० ३।२० ) । (५) २०वेँ सक्त के भाष्य में सायणाचार्य ने 'सदंपुष्पा' का कथन किया है, जिसेकि सूक्त में देवी गोषधि, अर्थात् दिव्य गु्णोवाली ओषधि कहा है । योगदशेन में भी “जन्मौषधिमन्त्रतपः समाधिजाः सिद्धयः" (योग ० ४।१) दवारा ओषधियों को भी सिद्धिजनक कहा है । इस सम्बन्ध मे योगभाष्यकार व्यासमूनि ने कहा है कि “ओषधिभिः असुर'-भवनेषु रसायनेनेत्येवमादि"" ।

English

Increasing ever more and ever more his wealth, he makes the pious dwell within unbroken bounds. These are ne’er lost, no robber ever injures them: no evil-minded foe attempts to harass them.

अध्याय 4

श्लोक 20.1

पिशाचक्षयणम्।१-९ मातृनामा।मातृनामा।अनुष्टुप्, १ स्वराट्, ९ भुरिक्।आ प॑श्यति॒ प्रति॑ पश्यति॒ परा॑ पश्यति॒ पश्य॑ति ।दिव॑म॒न्तरि॑क्ष॒माद् भूमिं॒ सर्वं॒ तद् दे॑वि पश्यति

piśācakṣayaṇam| 1-9 mātṛnāmā| mātṛnāmā| anuṣṭup, 1 svarāṭ, 9 bhurik| ā paśyati prati paśyati parā paśyati paśyati | divamantarikṣamād bhūmiṃ sarvaṃ tad devi paśyati

हिन्दी अर्थ

सम्भवतः किसी ओषधि के सेवन से दुष्टिशवित में तीव्रता आ जाती जसेकि योगशक्ति द्वारा योगी इनका दशंन कर सकता है । वतमान समय दरुरबीन रूपी कृत्रिम यन्वरद्वारा भी दररदुर की वस्तुओं का दशेन होताहै। कर रहे है तथा चन्द्रमा तक मी सरीर यात्राहो चुकी है ।

English

The master of the kine lives a long life with these, the Cows whereby he pours his gifts and serves the Gods.

अध्याय 4

श्लोक 20.2

ति॒स्रो दिव॑स्ति॒स्रः पृ॑थि॒वीः षट् चे॒माः प्र॒दिशः॒ पृथ॑क्।त्वया॒हं सर्वा॑ भू॒तानि॒ पश्या॑नि देव्योषधे

tisro divastisraḥ pṛthivīḥ ṣaṭ cemāḥ pradiśaḥ pṛthak| tvayāhaṃ sarvā bhūtāni paśyāni devyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

देवांश्च याभियजते ददाति च ज्योगित्ताभिः सचते गोप॑तिः सह ॥३। (ताःन नशन्ति) वे गौं नष्ट नहीं होती, (न तस्करः दभाति) न चोर, न डाक दम्भपूवेकं इनका चौर्यं कर पाताहै, (आमित्रः--भमित्रः ) डश्मन (व्यथिः ) पीड़ादायक होकर (आसाम्) इन गौओं का (न आ दधषति) धर्षण नहीं करता । (याभिः) जिन गौं दारा (गोपतिः) गो रक्षक बना रहता है । दभाति = लेट् लकार, आट् आगम । नता अर्व रेणुककाोऽगनुत न संस्कृतत्रमुप यन्तिता अमि। रेणुककाटः -= रेणु (मृत्कण)-। कक (लौल्ये, भ्वादिः) अगत (कृती) छेदने, काटना, (तुदादिः, रुधादिः) + त्र + अल्, (सप्तम्येकवचन)

English

The charger with his dusty brow o’ertakes them not, and never to the shambles do they take 44 their way.

अध्याय 4

श्लोक 20.3

दि॒व्यस्य॑ सुप॒र्णस्य॒ तस्य॑ हासि क॒नीनि॑का ।सा भूमि॒मा रु॑रोहिथ व॒ह्यं श्रा॒न्ता व॒धूरि॑व

divyasya suparṇasya tasya hāsi kanīnikā | sā bhūmimā rurohitha vahyaṃ śrāntā vadhūriva

हिन्दी अर्थ

(निघं० ३।४) । अथवा गायम् गाने का स्थान, वेदमन्त्र के गाने का स्थान, यज्ञगाला, “गायति अ्चतिकर्मा'' (निवं० ३।१४) । (मे) मेरे लिए (गावः इच्छात् ) गौं चाहे, (गावः ) गौं अर्थात् उनका दुघ भक्षणीय है । (इमाः याः गावः) ये जो गौं हैँ मानो (सः इनदरः) वे एेदवर्य- सम्पन्न राजाकेहीरूपरहै, अतः (हृदा) हृदय द्वारा, (मनसा) ओर मन (गावः) हि गौभो ! (यूयम्) तुम (कृशम् चित्) कमजोर को भी (मेदयथा) मोटा कर देती हौ, (अश्रीरम्, चित्) शोभासेरर्हितकोभी (सृप्रतीकम् ) उत्तम शोभायुक्त अवयवोंवाला (कृणुथ) कर देती हो। (भद्रवाचः) कल्याणकारिणी तथा सुखप्रद आवाजों रम्भारव वालीहै

English

These Cows, the cattle of the pious worshipper, roam over wide- spread pasture where no danger is.

अध्याय 4

श्लोक 20.4

तां मे॑ सहस्रा॒क्षो दे॒वो दक्षि॑णे॒ हस्त॒ आ द॑धत्।तया॒हं सर्वं॑ पश्यामि॒ यश्च॑ शू॒द्र उ॒तार्यः॑

tāṃ me sahasrākṣo devo dakṣiṇe hasta ā dadhat| tayāhaṃ sarvaṃ paśyāmi yaśca śūdra utāryaḥ

हिन्दी अर्थ

कर देती हो, (वः वयः) तुम्हारा अन्न (सभासु) सभाम (वृहत्) महत्व- शाली या वृद्धिकारक (उच्यते कहा जाता है । भरजाव॑ती; सूयव॑से रुशन्तीः शुद्धा श्रपः संभपाणे पिबन्तीः । (प्रजावतीः) वचछडे-बछछडियोंवाली, (सूयवसे) उत्तम घासवाले प्रदेश (मा ईशत) चुरानेमें अधिकारयुक्त नहो, (मा अघणंसः) न हत्यारा तुम्हारा

English

To me the Cows seem Bhaga, they seem Indra, they seem a portion of the first poured Soma. These present Cows, they, O ye men, are Indra. I long for Indra with my heart and spirit. O Cows, ye fatten e’en the worn and wasted, and make the unlovely beautiful to look on.

अध्याय 4

श्लोक 20.5

आ॒विष्कृ॑णुष्व रू॒पाणि॒ मात्मान॒मप॑ गूहथाः ।अथो॑ सहस्रचक्षो॒ त्वं प्रति॑ पश्याः किमी॒दिनः॑

āviṣkṛṇuṣva rūpāṇi mātmānamapa gūhathāḥ | atho sahasracakṣo tvaṃ prati paśyāḥ kimīdinaḥ

हिन्दी अर्थ

(परि वृणक्तु) परिवजंन करे, तुमपर न भिरे। की वर्षा करनेवाला (कृणु) कर । (अस्य अमित्रान्) ओर इसके वि रोधियों उन सव वि रोधियों को (अस्म) इसके लिए (रन्धय) निज वण में कर, (अह्- मन्त्र मे भे" द्वारा, दलके मुखिया ने अपने उम्मीदवार को चुनाव के लिए प्रस्तुत किया है, जेसे कि वतमान मे राजनंतिक चुनावों मे प्रथा चालू

English

Prosper my home, ye with auspicious voices! Your power is magnified in our assemblies. In goodly pasturage, bright-hued, prolific, drinking pure water at fair drinking-places,

अध्याय 4

श्लोक 20.6

द॒र्शय॑ मा यातु॒धाना॑न् द॒र्शय॑ यातुधा॒न्यः ।पि॒शा॒चान्त्सर्वा॑न् दर्श॒येति॒ त्वा र॑भ ओषधे

darśaya mā yātudhānān darśaya yātudhānyaḥ | piśācāntsarvān darśayeti tvā rabha oṣadhe

हिन्दी अर्थ

सम्राड वरुणश्च राजा" (यजुः° ८।३७) । “अहमृत्तरेषु"' दारा चुनाव में मे नियुक्त कर, ओर (तम्) उसे (निर् भज) सेवक रूप से पृथक् कर, (यः) केवल नगरवासियों की ही सेवा करनेवाला न हो, अपितु राष्ट के प्रत्येक ग्राम में प्रजाओं की सेवा करने वाला हो । आभज=ञजा + भज सेवायाम् (द्यावापृथिवी) है द्यौः तथा पृथिवी ! तुम दोनों (अस्मे) इस राजा के लिए (भूरि) प्रभूत तथा (वामम्) संभजनीय या याचनीय धन का (दुहाथाम्) दोहन करो, प्रदान करो, (इव) जंसेकि (घर्मदुघे) धारोष्ण दुग्ध का दोहन करने वाली (धेनू) दो दुधार-गौषएं दूध का दोहन अथति्

English

Never be thief or sinful man your master, and may the dart of Rudra still avoid you! A benediction on a newly consecrated king

अध्याय 4

श्लोक 20.7

क॒श्यप॑स्य॒ चक्षु॑रसि शु॒न्याश्च॑ चतुर॒क्ष्याः ।वी॒ध्रे सूर्य॑मिव॒ सर्प॑न्तं॒ मा पि॑शा॒चं ति॒र॒स्क॑रः

kaśyapasya cakṣurasi śunyāśca caturakṣyāḥ | vīdhre sūryamiva sarpantaṃ mā piśācaṃ tiraskaraḥ

हिन्दी अर्थ

ओर अन्य पशुओं का भी (प्रियः) प्रिय यह ह प्रति, धन प्रदान करती है, वैसे गौ, ओषधियां ओर मन्य पशु, इस राजा ही वसुन्धरा, वह राजा के लिए नानाविध वस्तुओं को प्रदान कररहीहै यो; भी ताप, प्रकाश, शुद्ध वायु तथा वषरूपी धन का प्रदान स्वयमेव ६० अथर्वेवेदमाष्य काण्ड ४। अनु° ५। सूक्तं २१

English

Exalt and strengthen this my Prince, O Indra, Make him sole lord and leader of the people. Scatter his foes, deliver all his rivals into his hand in struggles for precedence.

अध्याय 4

श्लोक 20.8

उद॑ग्रभं परि॒पाणा॑द् यातु॒धानं॑ किमी॒दिन॑म्।तेना॒हं सर्वं॑ पश्याम्यु॒त शू॒द्रमु॒तार्य॑म्

udagrabhaṃ paripāṇād yātudhānaṃ kimīdinam| tenāhaṃ sarvaṃ paśyāmyuta śūdramutāryam

हिन्दी अर्थ

इसके प्रति कर रही है। वामम् =वन षण संभक्तौ (भ्वादिः) तथा वनुं को (ते) तेरे लिए (युनज्मि) सहयोगी रूप मे नियुक्त करता हं, (येन) जिसके सहयोग द्वारा (जयन्ति) तेरे सैनिक विजयी होते ह, (न पराजयन्ते) भौर (ते) तेरे (सपत्नाः) शत्रू (अधरे) तेरे नीचेहुएहै, (येकेच) जो कोई कि है, (शत्रूयताम्) शत्रुता चाहने--करनेवालों की (भोजनानि) भोजन- सामग्रियों को (आभर), आहरण करले, छीन नले।

English

Give him a share in village, kine, and horses, and leave his enemy without a portion. Let him as King be head and chief of Princes, Give up to him, O Indra, every foeman.

अध्याय 4

श्लोक 20.9

यो अ॒न्तरि॑क्षेण॒ पत॑ति॒ दिवं॒ यश्चा॑ति॒सर्प॑ति ।भूमिं॒ यो मन्य॑ते ना॒थं तं पि॑शा॒चं॑ प्र द॑र्शय

yo antarikṣeṇa patati divaṃ yaścātisarpati | bhūmiṃ yo manyate nāthaṃ taṃ piśācaṃ pra darśaya

हिन्दी अर्थ

सिहमतीको विशो अद्धि सवा व्याघ्रपतीकोऽव॑वाधस्व शतन । (सिहप्रतीकः) शेर के सदृश (सर्वाः विशः) शत्रू कौ सव प्रजाओं को भेदिये के सदृश (शत्रून्) शत्रुओं को (अव बाधस्व) तू पिलोडित कर। (यम्) जिसेकि (वहुधा) बहुत प्रकार से (इन्धते) उपासक निज हृदयो

English

Let him be treasure-lord of goodly treasures, let him as King be master of the people. Grant unto him great power and might, O Indra, and strip his enemy of strength and vigour.

अध्याय 4

श्लोक 21.1

गावः।१-७ ब्रह्मा ।गावः ।त्रिष्टुप्, २-४ जगती आ गावो॑ अग्मन्नु॒त भ॒द्रम॑क्र॒न्त्सीद॑न्तु गो॒ष्ठे र॒णय॑न्त्व॒स्मे।प्र॒जाव॑तीः पुरु॒रूपा॑ इ॒ह स्यु॒रिन्द्रा॑य पू॒र्वीरु॒षसो॒ दुहा॑नाः

gāvaḥ| 1-7 brahmā | gāvaḥ | triṣṭup, 2-4 jagatī ā gāvo agmannuta bhadramakrantsīdantu goṣṭhe raṇayantvasme| prajāvatīḥ pururūpā iha syurindrāya pūrvīruṣaso duhānāḥ

हिन्दी अर्थ

हए को (ईमहे) हम प्राप्त होते है, (सः) वह॒ अग्नि (नः) हमे (अंहसः) पाप से (मुञ्चतु) छृडाए् । लिए कहा है कि ये पांच पंचकों से उत्पन्न हूए हँ, (१) प्रकृति तथा अन्तः पंचक । (३) तीसरा पंचक है, पञ्चभरुत । (४) चौथा पंचकं है पञ्च की उपासना से पापसे मोचन होता है।

English

Like milch-kine yielding milk for warm libations, pour, Heaven and Earth! on him full many a blessing. May he as King be Indra’s well-beloved, the darling of the kine, the plants, the cattle.

अध्याय 4

श्लोक 21.2

इन्द्रो॒ यज्व॑ने गृण॒ते च॒ शिक्ष॑त॒ उपेद् द॑दाति॒ न स्वं मु॑षायति ।भूयो॑भूयो र॒यिमिद॑स्य व॒र्धय॑न्नभि॒न्ने खि॒ल्ये नि द॑धाति देव॒युम्

indro yajvane gṛṇate ca śikṣata uped dadāti na svaṃ muṣāyati | bhūyobhūyo rayimidasya vardhayannabhinne khilye ni dadhāti devayum

हिन्दी अर्थ

यथां हव्यं वहसि जातवेदो यथां यज्ञं करपय सि प्रजानन् । एवा देवेभ्यः; सुमति नआ वहस नौं मुञ्चत्वंहसः ॥२॥ करता है, (एवा) इसी प्रकार (देवेभ्यः) दिव्यगरुणी आचाय आदि देवों से (नः) हमे (सुमतिम्) सुमति को (आ वह) प्राप्त करा, (सः) वह अग्नि (नः) हमे पाप से (मुञ्चतु) छ्डाए । करता हूं, (सः) वह (नः) हमें (अंहसः) पाप से (मृञ्चतु) छडाए । उ" (अथवं ० ४।३६।६) । परमेश्वराग्नि ही पाप करने से छृड़ा सकती है, जड़ या्ञिकाग्नि नहीं । सायणाचायं आदि भी याज्ञिक पद्धतिमे, भमग्नि आदि को चेतनाधिष्ठित ही मानते हैं ।

English

I join in league with thee victorious Indra, with whom men conquer and are ne’er defeated. He shall make thee the folk’s sole lord and leader, shall make thee highest of all human

अध्याय 4

श्लोक 21.3

न ता न॑शन्ति॒ न द॑भाति॒ तस्क॑रो॒ नासा॑मामि॒त्रो व्य॒थिरा द॑धर्षति ।दे॒वांश्च याभि॒र्यज॑ते॒ ददा॑ति च॒ ज्योगित् ताभिः॑ सचते॒ गोप॑तिः स॒ह

na tā naśanti na dabhāti taskaro nāsāmāmitro vyathirā dadharṣati | devāṃśca yābhiryajate dadāti ca jyogit tābhiḥ sacate gopatiḥ saha

हिन्दी अर्थ

मेहम आह्वान करते ह, (सः) वह् (नः) हमे (अंहसः) पापसे (मुञ्चतु) (सुजातम् ) परमेदवराग्ति जब हृदय में प्रकट होती है तब उसका जातवेदसम = “जातवेदाः, जातानि वेद, जातानि वैनं विदुः, जाते (येन यजा) जिसके सहयोग द्वारा (ऋषयः ) ऋषियों ने (बलम्) निजबल को (अद्योतयन्) चमकाया, (येन) जिसके सहयोग द्वारा (असुराणाम्) देवासुर-संग्राम में आसुरभावों की (मायाः) छल-कपट कौ

English

rulers. Supreme art thou, beneath thee are thy rivals, and all, O King, who were thine adversaries. Sole lord and leader and allied with Indra, bring, conqueror, thy foremen’s goods and

अध्याय 4

श्लोक 21.4

न ता अर्वा॑ रे॒णुक॑काटोऽश्नुते॒ न सं॑स्कृत॒त्रमुप॑ यन्ति॒ ता अ॒भि।उ॒रु॒गा॒यमभ॑यं॒ तस्य॒ ता अनु॒ गावो॒ मर्त॑स्य॒ वि च॑रन्ति॒ यज्व॑नः

na tā arvā reṇukakāṭo'śnute na saṃskṛtatramupa yanti tā abhi| urugāyamabhayaṃ tasya tā anu gāvo martasya vi caranti yajvanaḥ

हिन्दी अर्थ

निज दुर्व्यवहारों को (जिगाय) जीता, (सः) वह् परमेरवराग्नि (नः) हमें हसः) पाप से (मूञ्चतु) छृडाए । न यन 36 = (अदादिः) । पणीन् =पण व्यवहारे येन॑ देवा ज्रमृत॑मन्वविन्दन येनो ष॑थीमषुंमतीरपण्वन । 8 जिसके सहयोग द्वारा, (देवाः) साध्यो-तथा-छषियं ने, किया, (येन ) जिसके सहयोग द्वारा (देवाः) व्यवहार-कुशल व्यक्तियों ने (ओषधीः) ओषधियों को ( मधुमतीः) मक्षु रसवाली (अक्रण्वन्) किया; (येन) जिसके सहयोग द्वारा ( देवाः) दिव्य गुणियों ने (स्वः) सुखविशेष या

English

treasures. Consume, with lion aspect, all their hamlets, with tiger aspect, drive away thy foemen.

अध्याय 4

श्लोक 21.5

गावो॒ भगो॒ गाव॒ इन्द्रो॑ म इच्छा॒द् गावः॒ सोम॑स्य प्रथ॒मस्य॑ भ॒क्षः ।इ॒मा या गावः॒ स ज॑नास॒ इन्द्र॑ इ॒च्छामि॑ हृ॒दा मन॑सा चि॒दिन्द्र॑म्

gāvo bhago gāva indro ma icchād gāvaḥ somasya prathamasya bhakṣaḥ | imā yā gāvaḥ sa janāsa indra icchāmi hṛdā manasā cidindram

हिन्दी अर्थ

-) हमे (अंहसः) पाप से (मूञ्चतु) छृडाए । ५ कु 4 री सम्बन्ध अभिप्रेत है। देवाः=“साध्याः कृषक जल सेचन कर यव-त्रीहि भादि ओषधियों को मधुर रसवती करते दुढा येन स्व स्तभितं येन नाकः (यजुः० ३२।६) में अन्य लोकों के समवाय में स्वः" का कथन हुमा है, अतः स्व" भी एक लोक ही प्रतीत होता है । ऋषि दयानन्द 'स्वः' द्वारा 'सुखविशेष' अथं मानते हँ । मधुमतीः == मधु उदकनाम (निं ० १।१२), मधुर उदक सेचन कर, ओोषधियौं को मधुररस्- ६४ अथरवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ५। सूक्त २४

English

Sole lord and leader and allied with Indra, seize, conqueror, thine enemies’ possessions. Magnification of Agni and prayer for his protection I fix my heart on wise and ancient Agni, the Five Tribes’ Lord, in many a place enkindled.

अध्याय 4

श्लोक 21.6

यू॒यं गा॑वो मेदयथ कृ॒शं चि॑दश्री॒रं चि॑त् कृणुथा सु॒प्रती॑कम्।भ॒द्रं गृ॒हं कृ॑णुथ भद्रवाचो बृ॒हद् वो॒ वय॑ उच्यते स॒भासु॑

yūyaṃ gāvo medayatha kṛśaṃ cidaśrīraṃ cit kṛṇuthā supratīkam| bhadraṃ gṛhaṃ kṛṇutha bhadravāco bṛhad vo vaya ucyate sabhāsu

हिन्दी अर्थ

(इदम्) यह (यत् ) जो (विरोचते) विविधरूपों मेँ चमकत है, (यत् मँ स्तुति करता ह, (नाधितः) उस स्वामीवाला हआ मँ (जोहवीमि) बार- नार उसका आह्वान करता हूं, (सः) वहु (नः) हमे (अंहसः) पापसे को लक्ष्य करके (एति) आता है, प्रकट होता है (सः) वह (नः) हमें (अंहसः) पाप से (मुञ्चतु) छडाए । सूक्त २३से २६ तक के सूक्तों मेँ पाप-मोचन का वर्णन हमा है ।

English

We seek him who hath entered all our houses. May he deliver us from grief and trouble. As thou conveyest offerings, Jātavedas! and fashionest the sacri- fice with knowledge,

अध्याय 4

श्लोक 21.7

प्र॒जाव॑तीः सू॒यव॑से रु॒शन्तीः॑ शु॒द्धा अ॒पः सु॑प्रपा॒णे पिब॑न्तीः ।मा व॑ स्ते॒न ई॑शत॒ माघशं॑सः॒ परि॑ वो रु॒द्रस्य॑ हे॒तिर्वृ॑णक्तु

prajāvatīḥ sūyavase ruśantīḥ śuddhā apaḥ suprapāṇe pibantīḥ | mā va stena īśata māghaśaṃsaḥ pari vo rudrasya hetirvṛṇaktu

हिन्दी अर्थ

रस ऋषिद्वाराप्रकटहुएहैँ तो भी तद्धिन्न ऋषियोंको भी काल-काल प्राप्त होते है, यह “उपमा इमे आ अगुःद्रारा सूचित होता है । सेनाओं को (ययुः) हमसे पृथक् करता है, (यः) जिसने (दानवानाम्) ं के (बलम्) बल को (आरस्रोज) पूणंतया भग्न कियारहै, (येन) जिसने ( ५ तथा (गावः) गौमं को (जिताः) जीत लिया है, (सः) वह इन्द्र (नः) हमें (अंहसः) पापसे (मुञ्चतु) छडाए ।

English

So bear thou to the Gods the prayer we utter. May he deliver us from grief and trouble. I pray to Agni in each act successful, employed in every sacrifice, the strongest, Fiend-slayer, served with fatness, strengthening worship. May he deliver us from grief and

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।