अध्याय 4
श्लोक 9.1
आञ्जनम्।१-१० भृगुः।त्रैकाकुदञ्जनम्।अनुष्टुप्, २ ककुम्मती, ३ पथ्यापङ्क्तिः।एहि॑ जी॒वं त्राय॑माणं॒ पर्व॑तस्या॒स्यक्ष्य॑म्।विश्वे॑भिर्दे॒वैर्द॒त्तं प॑रि॒धिर्जीव॑नाय॒ कम्
āñjanam| 1-10 bhṛguḥ| traikākudañjanam| anuṣṭup, 2 kakummatī, 3 pathyāpaṅktiḥ| ehi jīvaṃ trāyamāṇaṃ parvatasyāsyakṣyam| viśvebhirdevairdattaṃ paridhirjīvanāya kam
हिन्दी अर्थ
ते पिता =ये “त्रिककुत्” है ब्रह्म-पूरुष ! तेरे पिता हैँ । इन तीनों के कहा है ¦ अथवं (४।३६।६) मेँ अग्नि मे विचरनेवाले अग्नि नामक परमेश्वर को ऋषीणां पूत्रः" कहा है, ओर इस द्वारा ऋषियों को पिता कहा है, ब्रह्म, (तरैककुंदम्) तीन ककुदो से आविर्भूत होता है, ओर (हिमवतः परि धानान्) सव यातनाओं के निधिभूतों को तथा (स्वाः च) सव (यातु-
English
Whomso thou creepest over, Salve! member by member, joint by joint, From him, like some strong arbiter of strife, thou banishest decline.