Atharva Veda
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अध्याय 4 / 20

Kanda 4

काण्ड 4

331 श्लोकभाग 2/6 · श्लोक 9.1–14.9

पूर्ण अध्याय पाठ59 श्लोक

अध्याय 4

श्लोक 9.1

आञ्जनम्।१-१० भृगुः।त्रैकाकुदञ्जनम्।अनुष्टुप्, २ ककुम्मती, ३ पथ्यापङ्क्तिः।एहि॑ जी॒वं त्राय॑माणं॒ पर्व॑तस्या॒स्यक्ष्य॑म्।विश्वे॑भिर्दे॒वैर्द॒त्तं प॑रि॒धिर्जीव॑नाय॒ कम्

āñjanam| 1-10 bhṛguḥ| traikākudañjanam| anuṣṭup, 2 kakummatī, 3 pathyāpaṅktiḥ| ehi jīvaṃ trāyamāṇaṃ parvatasyāsyakṣyam| viśvebhirdevairdattaṃ paridhirjīvanāya kam

हिन्दी अर्थ

ते पिता =ये “त्रिककुत्” है ब्रह्म-पूरुष ! तेरे पिता हैँ । इन तीनों के कहा है ¦ अथवं (४।३६।६) मेँ अग्नि मे विचरनेवाले अग्नि नामक परमेश्वर को ऋषीणां पूत्रः" कहा है, ओर इस द्वारा ऋषियों को पिता कहा है, ब्रह्म, (तरैककुंदम्) तीन ककुदो से आविर्भूत होता है, ओर (हिमवतः परि धानान्) सव यातनाओं के निधिभूतों को तथा (स्वाः च) सव (यातु-

English

Whomso thou creepest over, Salve! member by member, joint by joint, From him, like some strong arbiter of strife, thou banishest decline.

अध्याय 4

श्लोक 9.2

प॒रि॒पाणं॒ पुरु॑षाणां परि॒पाणं॒ गवा॑मसि ।अश्वा॑ना॒मर्व॑तां परि॒पाणा॑य तस्थिषे

paripāṇaṃ puruṣāṇāṃ paripāṇaṃ gavāmasi | aśvānāmarvatāṃ paripāṇāya tasthiṣe

हिन्दी अर्थ

यम उपरमे (भ्वादिः), सांसारिक भोगों से उपरतिः, विश्चाम, उनभोगौका (पातु) रक्षा करे (अंहसः, हनन से । ओर इनमे जल की सत्ता मानसून वायुसे होती है, जिसका निदेश वातात् हिरण्यजाः =- जैसे जलीय प्रदेशों से कपदिकाषं श्वेत तथा पीतवणं

English

From hostile and malignant eye,—from these, O Salve, protect us well. I, knowing this, O Salve, will speak the very truth and not a lie:

अध्याय 4

श्लोक 9.3

उ॒तासि॑ परि॒पाणं॑ यातु॒जम्भ॑नमाञ्जन ।उ॒तामृत॑स्य॒ त्वं वे॒त्थाथो॑ असि जीव॒भोज॑न॒मथो॑ हरितभेष॒जम्

utāsi paripāṇaṃ yātujambhanamāñjana | utāmṛtasya tvaṃ vetthātho asi jīvabhojanamatho haritabheṣajam

हिन्दी अर्थ

शंख को हिरण्यजाः" कहा है । कृशनः करण तनूकरणे (दिवादिः), पीतवर्ण (उणादि १।१०२, दयानन्द); श्भुं रोगों को शान्त करता है, अतः शद्खु- पद श्खुभस्म का निर्देश करता है। कायंमें कारण का उपचार हुआ दहै। अजीर्णं आदिमे विशेष उपयोगी है। यह पित्ताधिक्यको कम करती है (यः) जो (रोचनानाम्) चमकते पदार्थो मे (अग्रतः) मुखिया है,

English

May I obtain both horse and ox, may I obtain thy life, O man. Three are the slaves that serve the Salve, Fever, Consumption, and the Snake. Thy father is the loftiest of mountains, named the Triple- peaked.

अध्याय 4

श्लोक 9.4

यस्या॑ञ्जन प्र॒सर्प॒स्यङ्ग॑मङ्गं॒ परु॑ष्परुः ।ततो॒ यक्ष्मं॒ वि बा॑धस उ॒ग्रो मध्यम॒शीरि॑व

yasyāñjana prasarpasyaṅgamaṅgaṃ paruṣparuḥ | tato yakṣmaṃ vi bādhasa ugro madhyamaśīriva

हिन्दी अर्थ

हनन करके (अत्रिणः) रक्त, मांसादि को खा जानैवाले रोग कोटाणुञों का (वि षहा महे) हम विशेष पराभव करते हें। णु के नाद द्वारा राक्षसो ओौर अत्रियों का हनन तथा पराभव हट पैदा करनेवाली पीडाओं को विषहामहे, मन्त्र २ हम पराभूत करते है, (शद्धः) श्व (नः) हमारे लिए (विषश्व-भेषजः) सब रोगों का भौषध है । (कृशनः२) हिरण्य सदृश पीतवर्ण शङ्ख (अंहसः) हनन से (नः) हमारी यह “विरवभेषज” नहीं हो सकता । श ह्भभस्म को विदव-भेषज कहा जा सकता है । शह्भ-भस्म नाना रोगोँका शासक है, (देखो मन्त्र १ की

English

Sprung from the Snowy Mountain’s side, this Ointment of the Three-peaked hill.

अध्याय 4

श्लोक 9.5

नैनं॒ प्राप्नो॑ति श॒पथो॒ न कृ॒त्या नाभि॒शोच॑नम्।नैनं॒ विष्क॑न्धमश्नुते॒ यस्त्वा॒ बिभ॑र्त्याञ्जन

nainaṃ prāpnoti śapatho na kṛtyā nābhiśocanam| nainaṃ viṣkandhamaśnute yastvā bibhartyāñjana

हिन्दी अर्थ

(दिवि) द्युलोक के जलो मेँ (जातः) प्रकट हुजा, (समृद्रनः) समुद्र से पैदा हआ, (सिन्धृतः परि आभृतः) स्यन्दनशील नदियों से आहृत होता है! (श्वः) शह्भः (हिरण्यजाः) हिरण्य से पैदा हज (सः) वहं (आयुष ३६ अधरववंवेदमाष्य काण्ड ४। अनु° २। सूक्त १० प्रतरणः) आयु का बद़ानेवाला (मणिः) बहुमूल्य पाषाण के सदृश बहुमूल्य है । हिरण्यजाः =सुवणंभस्म-मिधित श्कभस्म । समुदराज्जाता मणिवृत्राज्जातो दिवाकरः

English

Crushes and rends all sorcerers and every witch and sorceress. If thou art from the Three-peaked hill or hast thy name from Yamunā,

अध्याय 4

श्लोक 9.6

अ॒स॒न्म॒न्त्रा॑द् दु॒ष्वप्न्याद् दुष्कृ॒ताच्छम॑लादु॒त।दु॒र्हार्द॒श्चक्षु॑षो घो॒रात् तस्मा॑न्नः पाह्याञ्जन

asanmantrād duṣvapnyād duṣkṛtācchamalāduta| durhārdaścakṣuṣo ghorāt tasmānnaḥ pāhyāñjana

हिन्दी अर्थ

(समुद्रात्) समुद्र से (जातः) पेदा हुमा, (मणिः) बहुमूल्य पाषाण के मेघ से (जातः) पैदा हुआ, (दिवाकरः) दिन के करनेवाले सथं के सदश वृत्र है मेघ, जोकि अन्तरिक्ष काञावरण करताहै। मेधघके जल से शद्ध पदा होता है) यद्यपि श्भुः समूद्र सेपेदा होताहैतोभी इसे जेसे शङ्खं मेघीय जल से पैदा होता है, इसी प्रकार मेघ द्वारा आवृत सूर्य भी मेघावरण कै हट जाने पर मानौ पैदा होता है । उस समय पीतवर्णी सूर्य

English

These names are both auspicious: by these two protect thou us, O Salve!

अध्याय 4

श्लोक 9.7

इ॒दं वि॒द्वाना॑ञ्जन स॒त्यं व॑क्ष्यामि॒ नानृ॑तम्।स॒नेय॒मश्वं॒ गाम॒हमा॒त्मानं॒ तव॒ पूरुष

idaṃ vidvānāñjana satyaṃ vakṣyāmi nānṛtam| saneyamaśvaṃ gāmahamātmānaṃ tava pūruṣa

हिन्दी अर्थ

विकारो मणिः" का ग्रहणकियादहै। यहाँ विकार से सम्भवतः शङद्कुविकत कोई ओषधविशेष अभिप्रेत हो । दिरंण्यानामेकों ऽसि सोमात् त्वमथि जङ्गिषे असिज तु भी एक चमकीला पदार्थहै, (त्वम्) तु (सोमात् अधि) जलसे तु (दशतः) दशंनीय (असि) होता है, (इषुधौ) इषुओं को धारण करनेवाले निषङ्खमे, तुणीरमें (त्वम्) तु (रोचनः) चमकता है। (नः) हमारी (आयूंषि) आयुञं को (प्र तारिषत्) वह् बढ़ाये ।

English

A charm accompanying investiture with an amulet of shell Child of the wind firmament, sprung from the lightning and the light, May this the gold-born Shell that bears the pearl preserve us from distress.

अध्याय 4

श्लोक 9.8

त्रयो॑ दा॒सा आञ्ज॑नस्य त॒क्मा ब॒लास॒ आदहिः॑ ।वर्षि॑ष्ठः॒ पर्व॑तानां त्रिक॒कुन्नाम॑ ते पि॒ता

trayo dāsā āñjanasya takmā balāsa ādahiḥ | varṣiṣṭhaḥ parvatānāṃ trikakunnāma te pitā

हिन्दी अर्थ

का उपग्रह है, पृथिवी को परिक्रमा करता ओौर प्रथिवी से कटकर अलग हआ है । परृथिवीसे शङ्कु पदा होता । सम्भवतः चन्द्रमा भी किसी समय त्र की स्थिति तथा उसकी चाल-ढाल को सूचित कर सकनेके लिएहे। तो रथ-योद्धा के लिए है, जौर निषद्घ में स्थिति पदाति-योद्धा के लिए कही विचरती है । (तत्) उसे (तै) तेरी (आयुषे) स्वस्थ आयु के लिए, (वच॑से) तेज के लिए, (वलाय) शारीरिक बल के लिए, (दी्चुत्वाय) दीर्घायु के लिए, (शतशारदाय) सौ शरद् ऋतुभां सम्बन्धी सौ वर्षो तक के जीवनके

English

Shell that wast born from out the sea, set at the head of things that shine! With thee we slay the Rākshasas and overcome voracious fiends.

अध्याय 4

श्लोक 9.9

यदाञ्ज॑नं त्रैककु॒दं जा॒तं हि॒मव॑त॒स्परि॑ ।या॒तूंश्च॒ सर्वा॑ञ्ज॒म्भय॒त् सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

yadāñjanaṃ traikakudaṃ jātaṃ himavataspari | yātūṃśca sarvāñjambhayat sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

मे विचरता है । अस्थिमय-शङ्भ आगु-वृद्धि मादिका कारण नहीं हो सकता, अभिप्रायके अनुकल भीदहै। वध्नामि= इस पद मे "हस्ते बध्नामि का कथन नहीं हुभा । इसका यहं भी अभिप्राय सम्भवरहै कि “सेवित जख अस्म" को तेरे शरीर में, अनुपान कौ सहायता से, मँ दुद्बद्ध कर देता हूं जिससे कि वह् तैरी सव प्रकारसे रोगों से रक्षा करे । (अनड्वान्) संसार-रूप शकट का वहन करनेवाले परमेश्वरः ने (दाधार) धारित तथा पोषित किया है (प्रथिवीम्, उत, याम्) पृथिवी को तथा दुलोक को, (अनड्वान् ) अनड्वान् ने (दाधार) धारित तथा पोषित अनड्वान् ने धारित तथा पोषित किया है (प्रदिशः) विस्तृत दिशाओं को,

English

We stay disease and indigence, and chase Sadānvās with the Shell. May the all-healing Shell that bears the pearl preserve us from distress.

अध्याय 4

श्लोक 9.10

यदि॒ वासि॑ त्रैककु॒दं यदि॑ यामु॒नमु॒च्यसे॑ ।उ॒भे ते॑ भ॒द्रे॑ नाम्नी॒ ताभ्यां॒ नः पाह्याञ्जन

yadi vāsi traikakudaṃ yadi yāmunamucyase | ubhe te bhadre nāmnī tābhyāṃ naḥ pāhyāñjana

हिन्दी अर्थ

प्रदेश अधिक सहायक होता है, अथवा हिमवान् ह प्रसिद्ध हिमालय पव॑त । यातुधान हैँ यातनाओं की निधिभूत राजसिक तथा तामसिक इन्र्या, तथा यातुधानीः है यातनाओंकी निधिभ्रूत राजसिक तथा तामसिक चित्त- यदि वासि त्रैककुदं यदि यामुनमुच्यसे । (यदि वा) चाहेतू (त्रैकुदम् असि) तीन ककुद-स्थलों से आविर्भत हुआ है, (यदि वा) अथवा (यापनम्) उपरामं विधिसे प्रकट हुमा (उच्यसे) कहा जाता है, (ते) तेरे (उभे नाम्नी) दोनों ४ (भद्रे) सुखदायक ओौरं कल्याण करनेवाले ह, (ताभ्याम्) उन दोनों नामों हारा (नः) हमारी (पाहि) ३४ अथवेवेदभाष्य काण्ड ४1 अनु० २। सूक्त १०

English

No imprecation reaches him, no magic, no tormenting fiend, O Salve, Vishkandha seizes not the man who carries thee about. From lying speech, from evil dream, from wicked act and sinfulness,

अध्याय 4

श्लोक 10.1

शङ्खमणिः।१-७ अथर्वा।शङ्खमणिः, कृशनः।अनुष्टुप्, ६ पथ्यापङ्क्तिः, ७ पञ्चपदा परानुष्टुप्शक्वरी।वाता॑ज्जा॒तो अ॒न्तरि॑क्षाद् वि॒द्युतो॒ ज्योति॑ष॒स्परि ।स नो॑ हिरण्य॒जाः श॒ङ्खः कृश॑नः पा॒त्वंह॑सः

śaṅkhamaṇiḥ| 1-7 atharvā| śaṅkhamaṇiḥ, kṛśanaḥ| anuṣṭup, 6 pathyāpaṅktiḥ, 7 pañcapadā parānuṣṭupśakvarī| vātājjāto antarikṣād vidyuto jyotiṣaspari | sa no hiraṇyajāḥ śaṅkhaḥ kṛśanaḥ pātvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अनडवान् = अनो वहतीति (दशपाद्युणादिवृत्ति, ९।१०७), इस अनुसंवहन्ति । अयातमस्य ददृशे न यातं परं नेदीयौऽवरं दवीयः'' देखे, अथवेवेदभाष्य (१०।८।८); मन्त्र मे परमेश्वर को संसार-शकट का वहन -चौषधयदच'' (सायण) । वस्तुतः षडुर्वीः' पद प्रदिशः का विशेषण है । उर्वीः भौर उध्वं दिशां । विडवम्, भुवनम् = जात्येकवचन, भुवन १४ होते हँ ।

English

Born in the heaven, sprung from the sea, brought to us hither from the flood. This gold-born Shell shall be to us an amulet to lengthen life.

अध्याय 4

श्लोक 10.2

यो अ॑ग्र॒तो रो॑च॒नानां॑ समु॒द्रादधि॑ जज्ञि॒षे।श॒ङ्खेन॑ ह॒त्वा रक्षां॑स्य॒त्त्रिणो॒ वि ष॑हामहे

yo agrato rocanānāṃ samudrādadhi jajñiṣe| śaṅkhena hatvā rakṣāṃsyattriṇo vi ṣahāmahe

हिन्दी अर्थ

वह् (पशुभ्यः) पशुओं कौ रक्षा के लिए (वि चष्टे) विशेषतया देख रहा का (विमिमीते) निर्माण करता है । (भूतम्, भविष्यद्, भृवना = भुवनानि) भूत, भविष्यद् तथा वर्तमान तीनों भवनों को दोहता हुमा परमेश्वर आधिहैविक तथा आध्यात्मिक मागं, जीवन के । भूतम् आदि दुहानः परमेरवर तीनों कालों के जगत् से, प्रजा के लिए, दुग्ध आदि पदार्थोका दोहन कर रहा है तथा वह सूर्यादि देवों के कर्मो को भी स्वयमेव सम्पादित

English

From ocean sprang the Amulet, from Vritra sprang the Lord of Day: May this protect us round about from shaft of God and Asura.

अध्याय 4

श्लोक 10.3

श॒ङ्खेनामी॑वा॒मम॑तिं श॒ङ्खेनो॒त सदान्वाः॑ ।श॒ङ्खो नो॑ वि॒श्वभे॑षजः॒ कृश॑नः पा॒त्वंह॑सः

śaṅkhenāmīvāmamatiṃ śaṅkhenota sadānvāḥ | śaṅkho no viśvabheṣajaḥ kṛśanaḥ pātvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

विभक्ता गावो अश्वाः पुरुषा अजावयः” (अथवें० ११।२।९) । चमकता हुआ वह (शोशुचानः) अत्यन्त प्रदीप्त हुआ (चरति) हूदयों में विचरता है । (यः) जो (अनड्हः विजानन्) संसार-शकट के वहन करने- भोगों का भोग न करे, (सः) वह (सप्रजाः) उत्तम-प्रजनवाला (न सेत्) संसार में पुन: सरण नहीं करता, जन्म नहीं नेता । (सुकृतस्य लोके) सुकमं के लोक मे (अनड्वान् ) संसार-शकट का वहन करनेवाला परमेश्वर (दहै) भोग्यो का दोहन करता है, प्रदान करता ह,

English

Peerless ‘mid golden ornaments art thou: from Soma wast thou born. Thou gleamest on the quiver, thou art beautiful upon the car: may it prolong our days of life!

अध्याय 4

श्लोक 10.4

दि॒वि जा॒तः स॑मुद्र॒जः सि॑न्धु॒तस्पर्याभृ॑तः ।स नो॑ हिरण्य॒जाः श॒ङ्ख आ॑युष्प्र॒तर॑णो म॒णिः

divi jātaḥ samudrajaḥ sindhutasparyābhṛtaḥ | sa no hiraṇyajāḥ śaṅkha āyuṣprataraṇo maṇiḥ

हिन्दी अर्थ

इस अनड्वान् को (आप्याययति) बढाता है, इसके गुण-कर्मो का कथन ४० अथर्वंवेदभाष्य काण्ड ४ । अनु° ३ । सूक्त ११ इस अनड्वान् का (दोहः) दोहरूप' है । न इसके ज्ञान करा दानी अधीदवर है, (न प्रतिग्रहीता) ओरन दान ग्रहण करनेवाला अधीश्वर है । (यः) जो परमेइवर (विश्व जित्) विश्व का जेता

English

Bone of the Good became the pearl’s shell-mother endowed with soul it moveth in the waters. I bind this on thee for life, strength, and vigour, for long life lasting through a hundred

अध्याय 4

श्लोक 10.5

स॒मु॒द्राज्जा॒तो म॒णिर्वृ॒त्राज्जा॒तो दि॑वाक॒रः ।सो अ॒स्मान्त्स॒र्वतः॑ पातु हे॒त्या दे॑वासु॒रेभ्यः॑

samudrājjāto maṇirvṛtrājjāto divākaraḥ | so asmāntsarvataḥ pātu hetyā devāsurebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

उस दीप्यमान का (नः) हमारे प्रति (ब्रूत) कथन करो, (यतमः) जीव, येन॑ देवाः स्व रारुरुदुषित्वा शरीरममृतस्य नाभिम् । (येन ) जिस अनडवान्, अर्थात् संसार-णशकट का वहन करनेवाले की के स्थान पर् (जाररुहुः) आरूढ हए, (तेन) उस अनड्वान् की कृपासे

English

autumns. May the pearl’s mother keep and guard thee safely!

अध्याय 4

श्लोक 10.6

हिर॑ण्याना॒मेको॑ऽसि॒ सोमा॒त् त्वमधि॑ जज्ञिषे ।रथे॒ त्वम॑सि दर्श॒त॑ इ॑षु॒धौ रो॑च॒नस्त्वं प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत्

hiraṇyānāmeko'si somāt tvamadhi jajñiṣe | rathe tvamasi darśata iṣudhau rocanastvaṃ pra ṇa āyūṃṣi tāriṣat

हिन्दी अर्थ

शरीर अमृतकी नाभिहै। परीरके रहते ही तरतं, तपश्चर्या आदि प्रविष्ट है । (सः) उसने (अदु हयत) जगत् को दृढ किया ह, (सः) उसने जगत् का (अधारयत) धारण कियाहै। अनडहि अक्रमत = अनड्वान् है संसार-शकटं का वहन करनेवाला ओर धारक होता है) इस प्रकार गुण-कमंके भेदरूपी उपाधयो द्वारा एक

English

A glorification of the sacrificial gharma or milk caldron The Bull supports the wide-spread earth and heaven, the Bull supports the spacious air between them.

अध्याय 4

श्लोक 10.7

दे॒वाना॒मस्थि॒ कृश॑नं बभूव॒ तदा॑त्म॒न्वच्च॑रत्य॒प्स्व॑१न्तः ।तत् ते॑ बध्ना॒म्यायु॑षे॒ वर्च॑से॒ बला॑य दीर्घायु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदाय कार्श॒नस्त्वा॒भि र॑क्षतु

devānāmasthi kṛśanaṃ babhūva tadātmanvaccaratyapsva1ntaḥ | tat te badhnāmyāyuṣe varcase balāya dīrghāyutvāya śataśāradāya kārśanastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

मान है । इसलिए इसे 'आदित्यव्णैम्' कहा है (यजुः० ३१।१८) । वहन दारा बह अग्निहै। अग्निद्रारा अभ्निरथों, रेलगाडियों तथा मिलो मे वहन १. ““अयमेवागनर्वेदकानर इति शाकपूणिः । विश्वानरायेते उत्तरे ज्योतिषी सूयं तथा २ प्य काण्डं ४। अनु० ३ सुक्त ११ मध्यमेतदं नइहर यत्रैष वह आहितः ।

English

The Bull supports the sky’s six spacious regions: the universal world hath he pervaded. The Bull is Indra o’er the beasts he watches. He, Sakra measures out three several pathways.

अध्याय 4

श्लोक 11.1

अनड्वान् १-१२ भृग्वङ्गिराः।अनड्वान्, इन्द्रः।त्रिष्टुप्; १, ४ जगति, २ भुरिक्, ७ त्र्यवसाना षट् पदानुष्टुब्गर्भोपरिष्टज्जागतानिचृच्छक्वरी, ८-१२ अनुष्टुप्।अ॒न॒ड्वान् दा॑धार पृथि॒वीमु॒त द्याम॑न॒ड्वान् दा॑धारो॒र्व१न्तरि॑क्षम्।अ॒न॒ड्वान् दा॑धार प्र॒दिशः॒ षडु॒र्वीर॑न॒ड्वान् विश्वं॒ भुव॑न॒मा वि॑वेश

anaḍvān 1-12 bhṛgvaṅgirāḥ| anaḍvān, indraḥ| triṣṭup; 1, 4 jagati, 2 bhurik, 7 tryavasānā ṣaṭ padānuṣṭubgarbhopariṣṭajjāgatānicṛcchakvarī, 8-12 anuṣṭup| anaḍvān dādhāra pṛthivīmuta dyāmanaḍvān dādhārorva1ntarikṣam| anaḍvān dādhāra pradiśaḥ ṣaḍurvīranaḍvān viśvaṃ bhuvanamā viveśa

हिन्दी अर्थ

(अनड्हः) संसार-शकट का वहन करनेवाले परमेश्वर ए वाला परमेश्वर (आहितः) स्थित है । (एतावत्) इतना ही (अस्य) इस ककं ओर मकर राशिको परस्पर मिलानेवाली रेखा कोदोभागोंमें विभक्त करतीहै, पूव॑भागमे ओर 1 दोनो भागपरिमाणमे समह, बरावर-वराबर हँ । वहनकर्ता अनडवान्- परमेरवर, इन दो विभागों के मध्य में स्थित हुआ, दोनों भागों का यथावत् वहन करता है, शासन करता है । । सौर जगत् मे सूयं ककं-मकररेखा को दो बरावर-वर में

English

He, milking out the worlds, the past, the future, discharges all the Gods’ eternal duties. Being produced among mankind as Indra, the Caldron works heated and brightly glowing. 39

अध्याय 4

श्लोक 11.2

अ॒न॒ड्वानिन्द्रः॒ स प॒शुभ्यो॒ वि च॑ष्टे त्र॒यां छ॒क्रो वि मि॑मीते॒ अध्व॑नः ।भू॒तं भ॑वि॒ष्यद् भुव॑ना॒ दुहा॑नः॒ सर्वा॑ दे॒वानां॑ चरति व्र॒तानि॑

anaḍvānindraḥ sa paśubhyo vi caṣṭe trayāṃ chakro vi mimīte adhvanaḥ | bhūtaṃ bhaviṣyad bhuvanā duhānaḥ sarvā devānāṃ carati vratāni

हिन्दी अर्थ

केवल भत्ल्काकृति-सम्बन्धी तारागणो के लिए नहीं दहै। “शिशुपालवध (६।३४।) तथा "रघृवंश' (१६।५३) मे भी अभिप्राय पूवेवत् है । दारा कृषि से अन्न पैदा होता है, ओर कृषक अर्थात् किसानों को अन्नलाभं होता दहै। कृषक वेत को तैयार कर, अन्न वोते है, अतः करृषकों ओर सूयं के सहयोग से कीलाल पैदा होता है, "कौलालम् अन्ननाम” (निषं० २।७) । (एताः) इन द्वादश रात्रीः) १२ रात्रयो को (वे) निर्चयसे

English

fervour, Whereby the Gods went up to heaven, the centre of life eternal, having left the body. Prajāpati, supreme and sovran ruler, Indra by form and by his shoulder Agni,

अध्याय 4

श्लोक 11.3

इन्द्रो॑ जा॒तो म॑नु॒ष्येऽष्व॒न्तर्घ॒र्मस्त॒प्तश्च॑रति॒ शोशु॑चानः ।सु॒प्र॒जाः सन्त्स उ॑दा॒रे न स॑र्ष॒द्यो नाश्नी॒यादन॒डुहो॑ विजा॒नन्

indro jāto manuṣye'ṣvantargharmastaptaścarati śośucānaḥ | suprajāḥ santsa udāre na sarṣadyo nāśnīyādanaḍuho vijānan

हिन्दी अर्थ

बरहा को (यः) जो (वेद) जानलेताहै, (वै) निर्चय से (तत्) वहु है परमेरवर का कथन हया है, इसे ही ब्रह्म भी कहा है (मन्बर ११) । प्रजापति बजेसे आरम्भ करके आगामी रातिके १२ बजे का काल। रात्रिका कालं णान्त-काल होताहै, जो कि ध्यान के लिए अधिक उपयोगी है । १२ मासों

English

Came to Visvānara, came to all men’s Bullock: he firmly forti- fied and held securely. The middle of the Bullock’s neck, there where the shoulder-bar is placed,

अध्याय 4

श्लोक 11.4

अ॒न॒ड्वान् दु॑हे सुकृ॒तस्य॑ लो॒क ऐनं॑ प्याययति॒ पव॑मानः पु॒रस्ता॑त्।प॒र्जन्यो॒ धारा॑ म॒रुत॒ ऊधो॑ अस्य य॒ज्ञः पयो॒ दक्षि॑णा॒ दोहो॑ अस्य

anaḍvān duhe sukṛtasya loka ainaṃ pyāyayati pavamānaḥ purastāt| parjanyo dhārā maruta ūdho asya yajñaḥ payo dakṣiṇā doho asya

हिन्दी अर्थ

भी कहा जा सकता है । इसे मन्त्र में (अनडुहो व्रतम्" कहा है । रातिकाल शान्त होते हैँ अतः ब्रह्यध्यान के लिए उपयोगी हैं । (सायम्) सायंकाल में (दुहे) मै, अनडवान्-परमेदवर को दोहता ह, नं -परमेदवर के (ये दोहाः) जो दोह दोहता हं । (अस्य) इस अनडवान्-पर ४ र

English

Extends as far to east of him as that is settled to the west. He whosoever knows the seven exhaustless pourings of the Ox, Wins himself offspring and the world: the great Seven Rishis know this well.

अध्याय 4

श्लोक 11.5

यस्य॒ नेशे॑ य॒ज्ञप॑ति॒र्न य॒ज्ञो नास्य॑ दा॒तेशे॒ न प्र॑तिग्रही॒ता।यो वि॑श्व॒जिद् वि॑श्व॒भृद् वि॒श्क॑र्मा घ॒र्मं नो॑ ब्रूत यत॒मश्चतु॑ष्पात्

yasya neśe yajñapatirna yajño nāsya dāteśe na pratigrahītā| yo viśvajid viśvabhṛd viśkarmā gharmaṃ no brūta yatamaścatuṣpāt

हिन्दी अर्थ

५ (4. मे (अरिवनोः कालम) तोब्रह्मका ध्यान र चाहिए, परन्तु दिन के तीन कालोंमेभी अनड्वान्-परभेरवर 0५४ सम्भव शक्तिरूपी दोहो की प्रार्थना करनी चाहिए । ये व इ अन्य कर्तव्यो मे बाधक न होकर सहायक हो जाती ै। ये 1) न हणि लोहित बणैवाली है लाक्षा ' अ । असि) ध द ¢ प्रयहित करती है, भर देती न क प) द्व । त जोड देती है । (अर्न्ध हई गहणी) तू प्ररोहित करती है, जोड देता ह । 0) । (इदम्) इस कटे अङ्ग को ( रोहय) तू ५ तेरे (आत्मनि) शरीरमें (पेष्टृम्) जो अद्ध पिस गया है, कुचला ५. (तत्) उसे (धाता) विधाता (भद्रया) कल्याणकारिणी ओर जोड की सन्धिकरदे। ४ ४ श ाता=बेवानूार रोगनिवारण मे ओषधि के साथ-साथ परमेदवर की भी कृपा चाहिए, अतः ओषधि-सेवन के साथ-साथ परमेश्वरसेभी

English

With feet subduing weariness, with legs extracting freshening draughts, Through toil the plougher and the Ox approach the honeyed beverage.

अध्याय 4

श्लोक 11.6

येन॑ दे॒वाः स्वरारुरु॒हुर्हि॒त्वा शरी॑रम॒मृत॑स्य॒ नाभि॑म्।तेन॑ गेष्म सुकृ॒तस्य॑ लो॒कं घ॒र्मस्य॑ व्र॒तेन॒ तप॑सा यश॒स्यवः॑

yena devāḥ svarāruruhurhitvā śarīramamṛtasya nābhim| tena geṣma sukṛtasya lokaṃ gharmasya vratena tapasā yaśasyavaḥ

हिन्दी अर्थ

४६ अथवैवेदभाप्य काण्ड ४। अनु०३। सूक्त १२ (मज्ज्ञा) अस्थिसार के (सं भवतु) साथ मिल जाय, (तै) तेरी (परः) हड़ी का जोड (परुषा) हट़्ी के जोड़ के (सम्, उ) संभवत, साथ मिल जाय । असृक् ते अस्थि राहतु मासं मांसेन रोहतु ॥५॥ (रोहतु) प्ररोहित हो जाए, (मांसम्) मांस (मांसेन) मांस के साथ ( रोहतु

English

Assigned are these twelve nights, they say, as holy to Prajāpati: Whoever knows their proper prayer performs the service of the Ox.

अध्याय 4

श्लोक 11.7

इन्द्रो॑ रू॒पेणा॒ग्निर्वहे॑न प्र॒जाप॑तिः परमे॒ष्ठी वि॒राट्।वि॒श्वान॑रे अक्रमत वैश्वान॒रे अ॑क्रमतान॒दुह्य॑क्रमत ।सोऽदृंहयत॒ सोऽधारयत

indro rūpeṇāgnirvahena prajāpatiḥ parameṣṭhī virāṭ| viśvānare akramata vaiśvānare akramatānaduhyakramata | so'dṛṃhayata so'dhārayata

हिन्दी अर्थ

(लोम) लोम को (लोम्ना) लोम के साथ (संकल्पय) समथित कर तथा तेरी (अस्थि) हही (रोहतु) प्ररोदित हो जाय, (ओषधे) है भोषधि ! वाला, (सुनाभिः) उत्तमनाभिवाला (रथः) रथ जेसेवेगसे द्रूतहोतारदहै, रथनेमि है लोहचक्र जिसे कि पिये की परिधि पर चढ़ाया जाता है, पहिये

English

At evening he is milked, is milked at early morn, is milked at noon. We know that streams of milk that flow from him are in- exhaustible.

अध्याय 4

श्लोक 11.8

मध्य॑मे॒तद॑न॒डुहो॒ यत्रै॒ष वह॒ आहि॑तः ।ए॒ताव॑दस्य प्रा॒चीनं॒ यावा॑न् प्र॒त्यङ् स॒माहि॑तः

madhyametadanaḍuho yatraiṣa vaha āhitaḥ | etāvadasya prācīnaṃ yāvān pratyaṅ samāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

पहिये के अरे लगे रहते है, बंधे रहते हैँ । नाभिः = णह् बन्धने (दिवादिः) । (यदि) यदि (कर्तम्) छेदक आयुध ने (पतित्वा) शरीर पर गिरकर (संश) शरीर को हिसित किया है, चोट पटंचाई है, (यदि वा) अथवा किसी अद्खका हनन कियादहै, तो (ऋभुः) तखनि (इव) जैसे (रथस्य अङ्घानि) रथकेअद्धों को (संदधत्) जोड़देतादहै इसी प्रकार रोहुणी अर्थात् लाक्षा (परुषा परः) तेरे जोड कै साथ जोड़ की सन्धि कर दे। कर्तम् = कृती छेदने (तुदादिः), छेदकम् आयुधम् (सायण), अथवा

English

A charm to mend a broken bone Thou art the healer, making whole, the healer of the broken bone: Make thou this whole, Arundhatī!

अध्याय 4

श्लोक 11.9

यो वेदा॑न॒डुहो॒ दोहा॑न्त्स॒प्तानु॑पदस्वतः ।प्र॒जां च॑ लो॒कं चा॑प्नोति॒ तथा॑ सप्तऋ॒षयो॑ विदुः

yo vedānaḍuho dohāntsaptānupadasvataḥ | prajāṃ ca lokaṃ cāpnoti tathā saptaṛṣayo viduḥ

हिन्दी अर्थ

उत दवा श्रवितं देवा उन्नयथा पुनः उताग॑श्चक्रुषं हैवा देवां जीवयथा पुन॑ः ॥१॥ (उत) तथा (अवदहितम्) अधोगति-प्राप्त हुए को (देवाः) है दिव्य (पुनः) बार-बार समुन्नत करो । (उत) तथा (आगः) पापकमं (चक्रुषम्) किये हृए को (देवाः) है दिव्य महात्मामो (जीवयथ) नया जीवन प्रदान करो, (देवाः) है दिव्य महात्माओ ! (पुनः) बार-बार नया जीवन प्रदान अवहितम् = भ्रव (अधः) + हितम् (हि गतौ) + क्तः 1

English

Whatever bone of thine within thy body hath been wrenched or cracked, May Dhātar set it properly and join together limb by limb.

अध्याय 4

श्लोक 11.10

प॒द्भिः से॒दिम॑व॒क्राम॒न्निरां॒ जङ्घा॑भिरुत्खि॒दन्।श्रमे॑णान॒ड्वान् की॒लालं॑ की॒नाश॑श्चाभि ग॑च्छतः

padbhiḥ sedimavakrāmannirāṃ jaṅghābhirutkhidan| śrameṇānaḍvān kīlālaṃ kīnāśaścābhi gacchataḥ

हिन्दी अर्थ

बाटता है । जनवरी से जून तक ६ महीनो में सूयं इस रेखा के पूर्वं में रहता है, ओर जुलाई से दिसम्बर तक ६ मासोंमे परिचममें रहतादहै। इसेही सोर परिवारका वहन करनेवाला सूर्यं । आहितः = सूर्यं स्थापि यो वेदानदुदौ दोहन सपनानुंपदस्वतः । (यः) जो (अनड्हः) अनङ्वान्-परमेदवर के (अ पदस्व

English

Let him not, with good sons, pass off in vapour who hath not eaten of the Ox with knowledge.

अध्याय 4

श्लोक 11.11

द्वाद॑श॒ वा ए॒ता रात्री॒र्व्रत्या॑ आहुः प्र॒जाप॑तेः ।तत्रोप॒ ब्रह्म॒ यो वेद॒ तद् वा अ॑न॒डुहो॑ व्र॒तम्

dvādaśa vā etā rātrīrvratyā āhuḥ prajāpateḥ | tatropa brahma yo veda tad vā anaḍuho vratam

हिन्दी अर्थ

क्षीण होनेवाले (सप्त दोहान्) सात दोहो को (वेद) न वि, ( र प्राप्त होता दहै, (तथा) उस प्रकार (सप्त ऋषयः) सा णास्तर से इसे“ ०५-8०'' कहते है, अर्थात् वड़ा री । ऋष पद क अप- चेतन ऋषि .1.कर किया गया दहै । विदुः मे बहुवचनं ऋक्ष के ताराओं के बाहूल्यके कारण है ।

English

The Ox pours milk out in the world of virtue: in earliest time, he, Pavamna, swells it. Parjanya is the stream, Maruts his udder, sacrifice is the milk, the meed his milking. That which not sacrifice nor sacrificer, not giver nor receiver rules and governs,

अध्याय 4

श्लोक 11.12

दु॒हे सा॒यं दु॒हे प्रा॒तर्दु॒हे म॒ध्यंदि॑नं॒ परि॑ ।दोहा॒ ये अ॑स्य सं॒यन्ति॒ ता॑न् वि॒द्मानु॑पदस्वतः

duhe sāyaṃ duhe prātarduhe madhyaṃdinaṃ pari | dohā ye asya saṃyanti tān vidmānupadasvataḥ

हिन्दी अर्थ

श्रमेगानदवान कीलालं कीनाशंश्चामि गंच्छतः ॥१०॥ "पद्ध" द्वारा ६ दिशाओोंमे सूयके पादोंका वर्णन हूञा है ओर 'जद्ाभिः दवारा गति ओर वेग सूचित किया गया है । यथा “जद्भयोजेवः'' है, हन हिंसागत्योः (अदादिः ) 1 जङ्घा पद में गत्यर्थं सुचित हजा है । पाद तो शरीर की स्थिति के साधन दहै ““पादयोः प्रतिष्ठा" स्थितिः (अथवर १६।६०।२) । सूयं कौ रदिमयों के अग्र भागो को भी “पादाः'' कहते हँ, यथा ये पादाग्र जव पृथिवी के जलप्रधान प्रदेशों पर पडते है, तव जल वाष्पी- भूत होकर अन्तरिक्ष की ओर उड़कर मेघ निर्माण करता है, ओौर वर्षा

English

All-winning, all-supporting, all-effecting,—which of all quadru- peds, tell us! is the Caldron? May we, fame-seekers, reach the world of virtue by service of the Gharma and through

अध्याय 4

श्लोक 12.1

रोहिणी- वनस्पतिः।१-७ ऋभुः।रोहिणी- वनस्पतिः।अनुष्टुप्, १ त्रिपदा गायत्री, ६ त्रिपदा यवमध्या भुरिग्गायत्री, ७ बृहती।रोह॑ण्यसि॒ रोह॑ण्य॒स्थ्नश्छि॒न्नस्य॒ रोह॑णी ।रो॒हये॒दम॑रुन्धति

rohiṇī- vanaspatiḥ| 1-7 ṛbhuḥ| rohiṇī- vanaspatiḥ| anuṣṭup, 1 tripadā gāyatrī, 6 tripadā yavamadhyā bhuriggāyatrī, 7 bṛhatī| rohaṇyasi rohaṇyasthnaśchinnasya rohaṇī | rohayedamarundhati

हिन्दी अर्थ

7 अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनू० ३। सूक्त १३ (द्री) दो (इमौ) ये (वातौ) वायुँ (वातः) गत्ति करती है, (आ सिन्धोः) एक हदय-समुद्र से, दूसरी (आ परावतः) परे के प्रदेश से । (अन्यः) एक (ते) तेरे लिए (दक्षम्) बल (आ वातु) बहा लाये, (अन्यः) ओौर उससे ५ (वि वातु) प्रथक् बहा ले-जाय, (यद् रपः) जोकि पापरूप है, अशुद्ध दारा विवात होती रहती है, प्रथक् होकर प्रवाहित होती रहती है; सिन्धोः यथा “सिन्धुसृत्याय == हदयाय' जाताः" (अथव ० १०।२।११), देवे परेकेप्रदेण से उवासरूपमे हूदय-समुद्र मे आती है, इसमे 'आवसीजन' वायु का निवेश होता ह जोकि स्वासरूप में फफड़ों में प्रविष्ट होकर अशद्ध

English

Let blood and bone grow strong in thee, flesh grow together with the flesh. Join thou together hair with hair, join thou together skin with skin.

अध्याय 4

श्लोक 12.1-2

रोहिणी- वनस्पतिः।१-७ ऋभुः।रोहिणी- वनस्पतिः।अनुष्टुप्, १ त्रिपदा गायत्री, ६ त्रिपदा यवमध्या भुरिग्गायत्री, ७ बृहती।रोह॑ण्यसि॒ रोह॑ण्य॒स्थ्नश्छि॒न्नस्य॒ रोह॑णी ।रो॒हये॒दम॑रुन्धति

rohiṇī- vanaspatiḥ| 1-7 ṛbhuḥ| rohiṇī- vanaspatiḥ| anuṣṭup, 1 tripadā gāyatrī, 6 tripadā yavamadhyā bhuriggāyatrī, 7 bṛhatī| rohaṇyasi rohaṇyasthnaśchinnasya rohaṇī | rohayedamarundhati

हिन्दी अर्थ

त्वं हि विश्वभेषज देवानाँ दतं दय॑से ॥३॥ (वात) है वायु (भेषजम्) ओौषध को (आ वादि) हमारी ओर प्रवाहित कर, (यत्) जो (रपः) पापरूप अशुद्धि है उसे (वि वाहि) हमसे को ओषध ¦ (देवानाम्) इन्द्रियों का (दूतः) उपतापी हृजा (ईयसे) गति तापद्वारा जैसे धातुओं कामलक्षीण हो जाता है वैसे उपतापी प्रवासं दवारा शरीरगत मल शुद्ध होता रहता है ।

English

Let blood and bone grow strong in thee, flesh grow together with the flesh. Join thou together hair with hair, join thou together skin with skin.

अध्याय 4

श्लोक 12.2

यत् ते॑ रि॒ष्टं य॑त् ते द्यु॒त्तमस्ति॒ पेष्ट्रं॑ त आ॒त्मनि ।धा॒ता तद् भ॒द्रया॒ पुनः॒ सं द॑ध॒त् परु॑षा॒ परुः॑

yat te riṣṭaṃ yat te dyuttamasti peṣṭraṃ ta ātmani | dhātā tad bhadrayā punaḥ saṃ dadhat paruṣā paruḥ

हिन्दी अर्थ

(मरुताम्) प्राणापान-व्यान-समानादि शरीरगत वायुं के (गणाः) समूह् (चायन्ताम्) रक्षा करं । (विश्वा -विरवानि, भुतानि) सब भूत भौतिक (अरपाः) पापरूपी अशुद्धियों से रहित (असत्) हो जाय । होकर, इसकी रक्षा तथा पालना करे । अरपाः =अ + रप् + असून् । (शंतातिभिः) रोगशामक साधनों के विस्तार के साथ, (अथो) तथा (अरिष्टतातिभिः) अ्हिसा-विस्तारक साधनों के विस्तार के साथ । (ते)

English

Stand up erect upon thy feet. If he be torn and shattered, having fallen into a pit, or a cast stone have struck him,

अध्याय 4

श्लोक 12.2-2

यत् ते॑ रि॒ष्टं य॑त् ते द्यु॒त्तमस्ति॒ पेष्ट्रं॑ त आ॒त्मनि ।धा॒ता तद् भ॒द्रया॒ पुनः॒ सं द॑ध॒त् परु॑षा॒ परुः॑

yat te riṣṭaṃ yat te dyuttamasti peṣṭraṃ ta ātmani | dhātā tad bhadrayā punaḥ saṃ dadhat paruṣā paruḥ

हिन्दी अर्थ

(मयम्, मे, हस्तः) यह मेरा हाथ (भगवान् ) भाग्यशाली है; (अयं मे भगवत्तरः) यह मेर दूसरा हाथ अधिक भाग्यशाली है । (अयम् मे) यह् मेरा हाथ (विरवभेषजः) सब रोगो का ओौषधरूप है, (अयम्) यह दूसरा हाथ (शिवाभिमशंनः) द्ूनेमात्र से कल्याणकारी तथा सुखदायक है । मन्त्र में उपचारक ने रोगी को विश्वास दिलाया है कि तेरे रोग का शमन हो जाएगा तथा उपचारक, निज मनोबल के साथ रोगी को स्पशे कर उसके स्नायुमण्डल मे शक्ति का संचार करता है । विना रोगविकित्सा की जाती है। इन संस्थागों को 0०8 कहते ह । का ५० अथवंवेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ३। सूक्त १४

English

Stand up erect upon thy feet. If he be torn and shattered, having fallen into a pit, or a cast stone have struck him,

अध्याय 4

श्लोक 12.3

सं ते॑ म॒ज्जा म॒ज्ज्ञा भ॑वतु॒ समु॑ ते॒ परु॑षा॒ परुः॑ ।सं ते॑ मां॒सस्य॒ विस्र॑स्तं॒ समस्थ्यपि॑ रोहतु

saṃ te majjā majjñā bhavatu samu te paruṣā paruḥ | saṃ te māṃsasya visrastaṃ samasthyapi rohatu

हिन्दी अर्थ

, दसशाखाएंरहैः दोनोंहा्थों की खुली हुई १० अंगुलियां अंगुलियों के अग्रभागो द्वारा शक्ति का संचार 1 (6 संचार करने से पूवं जिह्वा हारा उच्वारणपूरवंक रोगी को विश्वास दिला- कर उसे शक्तिग्रहण के लिए स्वाभिमूख किया गया है । चिकित्सक नाना हुः तभौ (मृशामसि' मे बहुवचन का प्रयोग हुमा है । सभी मनोबलपूर्वक (अजः) जन्म से रहित (हि) निद्चय से, जीवात्मा , (अग्नेः) धारण कर परमेश्वर के प्रकाश को देखता है ओौर पवित्र होकर ऊचाइयो कर, पवित्र होकर, ऊंचादयों पर आरोहण करते हैँ । शोकात-- शौक

English

Ye Gods, restore to life again, him, Gods! who hath committed sin. Here these two winds are blowing far as Sindhu from a distant land.

अध्याय 4

श्लोक 12.3-2

सं ते॑ म॒ज्जा म॒ज्ज्ञा भ॑वतु॒ समु॑ ते॒ परु॑षा॒ परुः॑ ।सं ते॑ मां॒सस्य॒ विस्र॑स्तं॒ समस्थ्यपि॑ रोहतु

saṃ te majjā majjñā bhavatu samu te paruṣā paruḥ | saṃ te māṃsasya visrastaṃ samasthyapi rohatu

हिन्दी अर्थ

अथं है राक्ति, ०५८7. । इन संस्थाओं में हाय की अगूलियों के अग्रभागो मं शक्ति का संचार कियाजाताहै, ओर इस द्वारा नानारोमोंकी 9 स्थिर करना, तथा दी॑श्वास लेना,-- इन तीन सिद्धान्तं पर रोगी में प लिया गया है । लेख आंग्ल भाषा मेँ है, जिसका हिन्दी अनुवाद किया है। ॥

English

Ye Gods, restore to life again, him, Gods! who hath committed sin. Here these two winds are blowing far as Sindhu from a distant land.

अध्याय 4

श्लोक 12.4

म॒ज्जा म॒ज्ज्ञा सं धी॑यतां॒ चर्म॑णा॒ चर्म॑ रोहतु ।असृ॑क् ते॒ अस्थि॑ रोहतु मां॒सं मां॒सेन॑ रोहतु

majjā majjñā saṃ dhīyatāṃ carmaṇā carma rohatu | asṛk te asthi rohatu māṃsaṃ māṃsena rohatu

हिन्दी अर्थ

करम॑ध्वमग्निना नाकमु्यान् हस्तैषु वितः । (देवेभिः) देवों के साथ (मिश्राः) मिश्रित होकर, (आध्वम्) बेठो । फल । आध्वम् मास उपवेशने (सायण) । देवेभिः मिश्रा =देखो (यजुः० उत्पन्न होती ह । उनके पीछे कहीं भी न रुकनेवाली गति से अभीष्ट स्थानों को जा सकता है, अन्यथा नहीं" (यज्ः° १७।६७' दयानन्द) ।

English

For thou who hast all medicine comest as envoy of the Gods.

अध्याय 4

श्लोक 12.4-2

म॒ज्जा म॒ज्ज्ञा सं धी॑यतां॒ चर्म॑णा॒ चर्म॑ रोहतु ।असृ॑क् ते॒ अस्थि॑ रोहतु मां॒सं मां॒सेन॑ रोहतु

majjā majjñā saṃ dhīyatāṃ carmaṇā carma rohatu | asṛk te asthi rohatu māṃsaṃ māṃsena rohatu

हिन्दी अर्थ

धारण करते हुए; अथवा निज हाथो में घारण करते हुए, समीपवर्ती मर्थात् अव्य भावी मानते हए, पथा "८८५1 18114" (गल्या), समीप । देवेभिः आध्वम् == साध्य देवों के साथ, मिलकर उपविष्ट होओ (यजुः० ३१।१६) 1 आध्वम् जास उप- गमन (योग० ३।४२) करता है, या शारीरिक अद्खखूपी पृथिवी अर्थात् पाद यहं ये विश्वतोधारं सु विरसो वितेनिरे ॥६। हए (न अपेक्षन्ते) पाथिव भोगों की अपेक्षा नहीं करते, उन्हें नहीं चाहते, अपितु वे (चाम्) चुलोक की ओर (आ रोहन्ति) आरोहण करते है, तथा (रोदसी ) तत्यश्चात् दो अन्य लोकों की ओर आरोहण करते हँ । (ये) जो

English

For thou who hast all medicine comest as envoy of the Gods.

अध्याय 4

श्लोक 12.5

लोम॒ लोम्ना॒ सं क॑ल्पया त्व॒चा सं क॑ल्पया॒ त्वच॑म्।असृ॑क् ते॒ अस्थि॑ रोहतु छि॒न्नं सं धे॑ह्योषधे

loma lomnā saṃ kalpayā tvacā saṃ kalpayā tvacam| asṛk te asthi rohatu chinnaṃ saṃ dhehyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

वाले (यज्ञम्) यजनीय-परमेरुवररूपी यज्ञ' का (वितेनिरे) विशेष विस्तार रोदसी का अथं मन्त्र मे 'चावापृथिवी' प्रतीत नहीं होता, यद्यपि निघंटु मे चावापृथिवी अथे दिया है (निषं० ३।३०) । क्योंकि "नापेक्षन्ते" पर आरोहण कर पृथिवी पर पुनः लौटना निष्प्रयोजन है । "आ अरुहम्" वणन भी है, अतः "रोदसी" का दयावापूथिवी अर्थं व्यथं हो जाता ह । तब रोदसी पद का अथं दावापृथिवी से भिन्न होना चाहिए । द्यावापृथिवी से

English

I bring thee mighty strength, I drive thy wasting malady away. Felicitous is this my hand, yet more felicitous is this.

अध्याय 4

श्लोक 12.5-2

लोम॒ लोम्ना॒ सं क॑ल्पया त्व॒चा सं क॑ल्पया॒ त्वच॑म्।असृ॑क् ते॒ अस्थि॑ रोहतु छि॒न्नं सं धे॑ह्योषधे

loma lomnā saṃ kalpayā tvacā saṃ kalpayā tvacam| asṛk te asthi rohatu chinnaṃ saṃ dhehyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

भिन्न अन्य दो लोक रोदसी द्वारा जानने चाहिए । निरुक्त के अनुसार इमे चिदिन्द्र रोदसी" (ऋ० ३।३०।५) मे रोदसी का अथं "रोधसी" है, ओर (रोधः' का अथं दहै कूल", जोकि बहते स्रोत का इधर-उधर फलने से निरोध करता है (निरुक्त ६।१।१; पद कशिः' ३) । "रोधसी विरोधनात्! (निरुक्त) । अतः "रोधसी" वे दो लोक है, जोकि सबको वहां तक जाने में स्वे" तक तो पहूंच सकते ह, परन्तु सस्वः' से ऊपर के दो लोकों तक नहीं १. यजुर्वेद ३१।९ मे परमेइवर को "यज्ञं पुरुषम्! हारा यज्ञ कहा है । कण्डं ४। अनु० ३। सूक्तं १४ अथरववेदमाष्य ५३

English

I bring thee mighty strength, I drive thy wasting malady away. Felicitous is this my hand, yet more felicitous is this.

अध्याय 4

श्लोक 12.6

स उत् ति॑ष्ठ॒ प्रेहि॒ प्र द्र॑व॒ रथः॑ सुच॒क्रः सु॑प॒विः सु॒नाभिः॑।प्रति॑ तिष्ठो॒र्ध्वः

sa ut tiṣṭha prehi pra drava rathaḥ sucakraḥ supaviḥ sunābhiḥ| prati tiṣṭhordhvaḥ

हिन्दी अर्थ

अग्ने परि परथमो देवतानां चष्देवानामुत मायुंषाणाम् । देवों की (उत) तथा (मानुषाणाम्) मनुष्यों की (चक्षुः) आंख है, उन्हँ मागे दर्शाता है । (दइयक्षमाणाः) यज्ञ करने कौ इच्छावाले (यजमानाः) यजमान, सूयं आदि देवों के चक्षु हैँ, उनका मागेदर्शी है परमेश्वर । अग्नि के अभाव में अन्धकार होताहै, ओर मागं नहीं दीखता, अतः मार्ग दशनिं भ्रस्ज पाके (तुदादिः) । सजोषाः जृषी भ्ीतिसेवनयौः (तुदादिः) ।

English

Accompanying the sacrifice of a he-goat The Goat was verily produced from Agni. Through sorrow he beheld, at first, his father.

अध्याय 4

श्लोक 12.6-2

स उत् ति॑ष्ठ॒ प्रेहि॒ प्र द्र॑व॒ रथः॑ सुच॒क्रः सु॑प॒विः सु॒नाभिः॑।प्रति॑ तिष्ठो॒र्ध्वः

sa ut tiṣṭha prehi pra drava rathaḥ sucakraḥ supaviḥ sunābhiḥ| prati tiṣṭhordhvaḥ

हिन्दी अर्थ

अकाय, नित्य, परमेश्वर को (पयसा) दुग्धाहुति द्वारा, तथा (घृतेन) घृता- (नाकम् अभि) दुःख-संस्पशं से रहित नाकलोक' को लक्ष्य करके, अभिमुख (सुखाभाव ) + नाकम् (अकम् का निषेध) (निरुक्त २।४। १४) । ५४ अथर्व॑वेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ३ । सूक्तं १४

English

Accompanying the sacrifice of a he-goat The Goat was verily produced from Agni. Through sorrow he beheld, at first, his father.

अध्याय 4

श्लोक 12.7

यदि॑ क॒र्तं प॑ति॒त्वा सं॑श॒श्रे यदि॒ वाश्मा॒ प्रहृ॑तो ज॒घान॑ ।ऋ॒भू रथ॑स्ये॒वाङ्गा॑नि॒ सं द॑ध॒त् परु॑षा॒ परुः॑

yadi kartaṃ patitvā saṃśaśre yadi vāśmā prahṛto jaghāna | ṛbhū rathasyevāṅgāni saṃ dadhat paruṣā paruḥ

हिन्दी अर्थ

साधनोवाले (एतम्) अज-सम्बन्धी इस मृतशरीर को (उद्धर कर, उटा, ओर (प्राच्यां दिशि) पूवदिणा में 1 क क सिरो ८ चिता पर स्थापिते कर तथा (दक्षिणायाम् दिशि) दक्षिण दिशा वाला जीवात्मा मोक्षधाम में जाय । तथा-- ॥ (अस्य) इस अज के (भसदम्°) गुदा भाग को (प्रतीच्य परिचम दिशा में (धेहि) स्थापित कर, (उत्तरम्, ४ ) ८ मेँ (मध्यम्) शरीर के मध्य भाग को (धेहि) स्थापित कर । अज क निर्जीव शरीर की चिता पर स्थापन-विधि से यह स्पष्ट है

English

Gods. From earth’s high ridge to middle air I mounted, and from mid- air ascended up to heaven.

अध्याय 4

श्लोक 12.7-2

यदि॑ क॒र्तं प॑ति॒त्वा सं॑श॒श्रे यदि॒ वाश्मा॒ प्रहृ॑तो ज॒घान॑ ।ऋ॒भू रथ॑स्ये॒वाङ्गा॑नि॒ सं द॑ध॒त् परु॑षा॒ परुः॑

yadi kartaṃ patitvā saṃśaśre yadi vāśmā prahṛto jaghāna | ṛbhū rathasyevāṅgāni saṃ dadhat paruṣā paruḥ

हिन्दी अर्थ

१।१२३०; दयानन्द) । भस् धातु का अथं मक्षणमभी है । यथा ""भसथः =-= अरनीथः कण्ड ४। जनु० ३ । सूक्त १४ अथर्व॑वेदभाष्यं ५५ साधारण शवस्थापन विधि के विपरीतहै। कारण यहहैकि यह “अज नवद्वारा देवानां पूरयोध्या” (अथर्व ° १०।२।३१) । आठ चक्रै : मूला-

English

Gods. From earth’s high ridge to middle air I mounted, and from mid- air ascended up to heaven.

अध्याय 4

श्लोक 13.1

रोगनिवारणम् १-७ शंतातिः।चन्द्रमाः, विश्वे देवाः, १ देवाः, २-३ वातः, ४ मरुतः, ६-७ हस्तः।अनुष्टुप्।उ॒त दे॑वा॒ अव॑हितं॒ देवा॒ उन्न॑यथा॒ पुनः॑ ।उ॒ताग॑श्च॒क्रुषं॑ देवा॒ देवा॑ जी॒वय॑था॒ पुनः॑

roganivāraṇam 1-7 śaṃtātiḥ| candramāḥ, viśve devāḥ, 1 devāḥ, 2-3 vātaḥ, 4 marutaḥ, 6-7 hastaḥ| anuṣṭup| uta devā avahitaṃ devā unnayathā punaḥ | utāgaścakruṣaṃ devā devā jīvayathā punaḥ

हिन्दी अर्थ

अनाहत चक्र का स्थान हृदय कै समीप है । एक “निम्न मानस चक्र' (10 वण०ऽ चक्र 1०५5) भी है । इनमें से अनाहतचक्र हृदय को नियन्त्रित करता है जोकि जीवात्मा ौर परमात्मा का निवास-स्थान है) इस निवास-स्थान ऊरध्वेमुखरूप मे खिल जाता है, ओौर मुक्तात्मा इस खिले कमल हारा ऊध्वे- की ओर स्थापित किया जाता है (देखो, पातञ्जल योगप्रदीप द्वारा, अनाहतचक्र कमल के सदृश हे, खिलकर वहं १२ पंखडियों वाला हो जाता है । हृदय दहै जीवात्मा ओौर परमात्मा का निवास-स्थान । यथा--- अष्टाचक्षा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या ।

English

From the high pitch of heaven’s cope I came into the world of light. Mounting the sky they look not round; they rise to heaven through both the worlds, Sages who paid the sacrifice that pours its streams on every side.

अध्याय 4

श्लोक 13.2

द्वावि॒मौ वातौ॒ वात॒ आ सिन्धो॒रा प॑रावतः॑ ।दक्षं॑ ते अ॒न्य आ॒वातु॒ व्य॑१न्यो वा॑तु॒ यद् रपः॑

dvāvimau vātau vāta ā sindhorā parāvataḥ | dakṣaṃ te anya āvātu vya1nyo vātu yad rapaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रवेश ब्रहमात्मामेंहो जाताहै। ५६ अथर्ववेदमाष्य काण्ड ४। धनु० ३ । सूक्तं १४ मे मन्त्र € मे कहा है । यथा-- लोक के (अभि) संमुख (चतुभिः पद्भिः) धमं, अर्थ, काम, मोक्षरूपी चार पादो सहित (दिक्षु) नाना दिशाओं में (प्रतितिष्ठ) दढ स्थित हो जा।

English

First among all the deities, come forward, thou who art eye of Gods and men, O Agni.

अध्याय 4

श्लोक 13.3

आ वा॑त वाहि भेष॒जं वि वा॑त वाहि॒ यद्रपः॑ ।त्वं हि वि॑श्वभेषज दे॒वानां॑ दू॒त ईय॑से

ā vāta vāhi bheṣajaṃ vi vāta vāhi yadrapaḥ | tvaṃ hi viśvabheṣaja devānāṃ dūta īyase

हिन्दी अर्थ

पृथिवी में गाड देना है, (यजु:° ३५।२१) में निर्दिष्ट विधि द्वारा 1 (१) सायणाचायं ने समग्र सूक्त मेँ चार पैरोंवाले बकरे का वर्णेन मानाहै। समग्र सूक्त के वणेन मौर अभिप्राय सायणाचायं कैमतके चार पादोंका कथन देखकर चार पैरोंवाले बकरे को कल्पना सम्भव है । परन्तु पाद या चार पाद निश्चयरूप में बकरे के चार पैरोंके निदेशक नहीं (२) सूक्त मे 'अज' पदभी पठितहै। अज का अर्थं बकराभी

English

Imploring, and accordant with the Bhrigus, to heaven in safety go the sacrificers! With milk and butter I anoint the mighty, celestial Goat, strong- winged, and full of juices. Through him will we attain the world of virtue, ascending to the loftiest cope, to heaven.

अध्याय 4

श्लोक 13.4

त्राय॑न्तामि॒मं दे॒वास्त्राय॑न्तां म॒रुतां॑ ग॒णाः ।त्राय॑न्तां॒ विश्वा॑ भू॒तानि॒ यथा॒यम॑र॒पा अस॑त्

trāyantāmimaṃ devāstrāyantāṃ marutāṃ gaṇāḥ | trāyantāṃ viśvā bhūtāni yathāyamarapā asat

हिन्दी अर्थ

जीवात्मा ओरब्रह्मभी होता है । यथा-- अजामेकां लोहितशुक्लकृष्णां बहली: प्रजाः सृजमानां सरूपाः । अजो ह्येको जुषमाणोऽनुशेते जहात्येनां भुकष्तमोगामजोऽन्यः ॥ उपनिषद् अध्याय ४ (खण्ड ५) । अज है प्रकृति; लोहित है रजो- से परे ब्रहमज्योति, जोकि सुखस्वरूप है ।

English

Set the Goat’s head toward the eastern region, and turn his right side to the southern quarter. His hinder part turn to the western quarter, and set his left side to the northern region.

अध्याय 4

श्लोक 13.5

आ त्वा॑गमं॒ शंता॑तिभि॒रथो॑ अरि॒ष्टता॑तिभिः ।दक्षं॑ त उ॒ग्रमाभा॑रिषं॒ परा॒ यक्ष्मं॑ सुवामि ते

ā tvāgamaṃ śaṃtātibhiratho ariṣṭatātibhiḥ | dakṣaṃ ta ugramābhāriṣaṃ parā yakṣmaṃ suvāmi te

हिन्दी अर्थ

मिलकर उत्पात करे मेघध्वनियों दारा शोर करं (वातज्तानि) वायु (नदतः) गते (महः ऋषभस्य) महाकाय वृषभ के सदृश उपमावाचक वायुं मिलकर ऊध्वं अन्तरिक्ष को ओर उड़, ताकि विस्तृत दिशा, नभ- स्वतीः अर्थात् मेघवाली हौ, मेघाच्छादित हों । की (सर्गाः) धारां (भूमिम्, महयन्तु) भूमि को महिमायुक्त कर, तथा

English

Set the Goat’s backbone upmost in the zenith, and lay his belly downward in the nadir; set his midportion in mid-air between them. O’er the dressed Goat lay a dressed skin to robe him prepared, in perfect form, with all his

अध्याय 4

श्लोक 13.6

अ॒यं मे॒ हस्तो॒ भग॑वान॒यं मे॒ भग॑वत्तरः ।अ॒यं मे॑ वि॒श्वभे॑षजो॒ऽयं शि॒वाभि॑मर्शनः

ayaṃ me hasto bhagavānayaṃ me bhagavattaraḥ | ayaṃ me viśvabheṣajo'yaṃ śivābhimarśanaḥ

हिन्दी अर्थ

(अदादिः) । मन्त्रमे मरुतः का वणन 1/1 हआ है; मरुतः हँ मानसून वायुं है मरुद्गण 1 (गायतः) प्रसन्नतामें ग हमें 4 गं नदी-नालों मे (उद् विजन्ताम् ) उछल-उछलकर चले, प्रवाहित

English

members. Rise upward to the loftiest vault of heaven: with thy four feet stand firmly in the regions.

अध्याय 4

श्लोक 13.7

हस्ता॑भ्यां॒ दश॑शाखाभ्यां जि॒ह्वा वा॒चः पु॑रोग॒वी।अ॒ना॒म॒यि॒त्नुभ्यां॒ हस्ता॑भ्यां॒ ताभ्यां॑ त्वा॒भि मृ॑शामसि

hastābhyāṃ daśaśākhābhyāṃ jihvā vācaḥ purogavī| anāmayitnubhyāṃ hastābhyāṃ tābhyāṃ tvābhi mṛśāmasi

हिन्दी अर्थ

क 1 ओषधिर्या । (गायतः वर्षाऋतु मे प्रसन्नता से गाते हुए) (पजेन्यघोषिणः) मेघ को गजनिवाले, (मारुताः गण :/ वषा करते हृएु (वषैस्य) मेघ कौ (सर्गाः) उत्प धारां (1 नुकूल रूप में (वषन्तु) बरसे; पृथक् = पृथक्-

English

A charm to hasten the coming of the rains Let all the misty regions fly together, let all the rain-clouds sped by wind, assemble. Let waters satisfy the earth, the voices of the great mist-enve- loped Bull who roareth.

अध्याय 4

श्लोक 14.1

स्वर्ज्योतिः प्राप्तिः।१-९ भृगुः।आज्यं, अग्निः।त्रिष्टुप्, २, ४ अनुष्टुप्, ३ प्रस्तारपङ्क्तिः, ७, ९ जगति, ८ पञ्चपदातिशक्वरी।अ॒जो ह्य॑१ग्नेरज॑निष्ट॒ शोका॒त् सो अ॑पश्यज्जनि॒तार॒मग्रे॑ ।तेन॑ दे॒वा दे॒वता॒मग्रा॑ आय॒न् तेन॒ रोहा॑न् रुरुहु॒र्मेध्या॑सः

svarjyotiḥ prāptiḥ| 1-9 bhṛguḥ| ājyaṃ, agniḥ| triṣṭup, 2, 4 anuṣṭup, 3 prastārapaṅktiḥ, 7, 9 jagati, 8 pañcapadātiśakvarī| ajo hya1gnerajaniṣṭa śokāt so apaśyajjanitāramagre | tena devā devatāmagrā āyan tena rohān ruruhurmedhyāsaḥ

हिन्दी अर्थ

८ अ से ये दोनों 'समस्तपद' प्रतीत होते ह । मारुतगण पन दक होते ही दह। मन्व ३से श्रूमि' पद का अन्वय अभिप्रेत है । मानो मारूतगण भूमि के समीप होकर भूमि की महिमा का गान करते है, निज ध ( व ) है मानसून वायुओ ! (समुद्रतः) समूद्र से (उदीरयत) उपर र प्रेरित करो, ( नभः ) मेष को उसे (उत् पातयाथ) ऊर्वं कीओर १. मानसूुन-मरुतं समद्र के जलषूपी वीयं से, तथा म से उत्पः ह न , तथा भूमि माताके गमं से उत्पन्न होते

English

Let them show forth, the strong, the bounteous Maruts: let plants and shrubs be hung with drops of moisture.

अध्याय 4

श्लोक 14.2

क्रम॑ध्वम॒ग्निना॒ नाक॒मुख्या॒न् हस्ते॑षु॒ बिभ्र॑तः ।दि॒वस्पृ॒ष्ठं स्वऽर्ग॒त्वा मि॒श्रा दे॒वेभि॑राध्वम्

kramadhvamagninā nākamukhyān hasteṣu bibhrataḥ | divaspṛṣṭhaṃ sva'rgatvā miśrā devebhirādhvam

हिन्दी अर्थ

: वे निजं माता को महिमा का मानो निज गजंनाभो द्वारा गान करते ह + करता है । (नदतः) गर्जते हुए । (महः ऋषभस्य ) महाकाय वृषभ कं सदृश मान (आपः) जल (पृथिवीम्) पृथिवी को ( तपयन्तु) तृप्त कर । त्वेषः अकं: = उपमावाचक पद लुप्त है । पातयाथ्=पत गतौ

English

Let floods of rain refresh the ground with gladness and herbs spring various with each form and colour. Cause us who sing to see the gathering vapours: out burst in many a place the rush of waters!

अध्याय 4

श्लोक 14.3

पृ॒ष्ठात् पृ॑थि॒व्या अ॒हम॒न्तरि॑क्ष॒मारु॑हम॒न्तरि॑क्षा॒द् दिव॒मारु॑हम्।दि॒वो नाक॑स्य पृ॒ष्ठात् स्व॑१र्ज्योति॑रगाम॒हम्

pṛṣṭhāt pṛthivyā ahamantarikṣamāruhamantarikṣād divamāruham| divo nākasya pṛṣṭhāt sva1rjyotiragāmaham

हिन्दी अर्थ

गजं, (उदधिम्) समुद्र कौ (अर्दय) पीड़तिकरः, (भूमिम्) भूमि को (पयसा) आशाओं अर्थात् दिशाओं के भेदो को पूर्णतया नष्ट करता हुमा, वरसते ह पृथिवी पर, नकि समुद्र पर, अतः वर्षाभिाव से समुद्र मानो पीडति" होता है । आशारेषी सूय मानो बहुल वर्षा के कारण, पर्जन्यो द्वारा, दिशाओं को पूर्णतया आच्छादित कर, दिर्भेद कौ नष्ट कर देता है ओर रक्षा करे, (उत) तथा (अजगराः) अजगर-सपि के सदृश (उत्साः) प्रवाहित

English

Let floods of rain refresh the ground with gladness; and herbs spring various with each form and colour.

अध्याय 4

श्लोक 14.4

स्व॑१र्यन्तो॒ नापे॑क्षन्त॒ आ द्यां रो॑हन्ति॒ रोद॑सी ।य॒ज्ञं ये वि॒श्वतो॑धारं॒ सुवि॑द्वांसो वितेनि॒रे

sva1ryanto nāpekṣanta ā dyāṃ rohanti rodasī | yajñaṃ ye viśvatodhāraṃ suvidvāṃso vitenire

हिन्दी अर्थ

(प्रच्युताः) गिरे (मेषाः) मेघ (पृथिवीमनु ) पृथिवी के अनुकल (वषेनतु) अजगराः नदियों मे जल, रे मार्गो मेँ प्रवाहित होते हए, अजगर के सदुश गति करते हुए प्रतीत होते ह । अनु = अनुकल, न कम, न अत्यधिक, जपि तु आवश्यकतानुसार बरसे । १. अथवा वर्षा ऋतु मं सूये को प्रखर रमियों द्वारा पीडित होकर समुद्र उछलता है । ६० मयवंवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ३ । सूक्त १५

English

Apart, Parjanya! let the troops of Maruts, roaring, swell the song. Let pouring torrents of the rain that raineth rain upon the earth. Up from the sea lift your dread might, ye Maruts: as light and splendour, send the vapour

अध्याय 4

श्लोक 14.5

अग्ने॒ प्रेहि॑ प्रथ॒मो दे॒वता॑नां॒ चक्षु॑र्दे॒वाना॑मु॒त मानु॑षानाम्।इय॑क्षमाणा॒ भृगु॑भिः स॒जोषाः॒ स्वऽर्यन्तु॒ यज॑मानाः स्व॒स्ति

agne prehi prathamo devatānāṃ cakṣurdevānāmuta mānuṣānām| iyakṣamāṇā bhṛgubhiḥ sajoṣāḥ sva'ryantu yajamānāḥ svasti

हिन्दी अर्थ

चमके, (दिशोदिशः) प्रत्येक दिशा मे (वाताः) मेघसंपृक्त वायुं (वान्तु) संचार करं । (मरुद्भिः) मानसून वायुओों द्वारा प्रच्युताः) मिरे (मेघाः) मेघ (पृथिवीमनु) प्रथिवी के अनुकूल होकर (संयन्तु) मिलकर गति करे, ६।१।१); आशाभ्यः, पद (२) । आशाः = स्व॑त्र स्थिति होने से । आशारेषी' (मन्त्र ६१ मेँ आशा पद भी व्यापकं दिशावाचक है । (सुदानवः) उत्तम जल प्रदान करने वाली मानसून वायु, (आपः) उत्साः) अजगर समान आकारवालेचङमेया नदी-नाले (सम्) मिलकर (वः)

English

upward! 41

अध्याय 4

श्लोक 14.6

अ॒जम॑नज्मि॒ पय॑सा घृ॒तेन॑ दि॒व्यं सु॑प॒र्नं प॑य॒सं बृ॒हन्त॑म्।तेन॑ गेष्म सुकृ॒तस्य॑ लो॒कं स्वऽरा॒रोह॑न्तो अ॒भि नाक॑मुत्त॒मम्

ajamanajmi payasā ghṛtena divyaṃ suparnaṃ payasaṃ bṛhantam| tena geṣma sukṛtasya lokaṃ sva'rārohanto abhi nākamuttamam

हिन्दी अर्थ

गिरे (मेघाः) मेघ (पृथिवीम्, अनु) पृथिवी की अनुकूलता में (प्रावन्तु) तुम्हा री प्रकष॑रूप मेँ रक्षा करं, अथवा पृथिवी को संतप्त करे । प्रच्युताः द्वारा यह् सूचित किया हैकि मेघ जलसेभरेहोनेसे भारी होते है, अतः वे गिर पडते ह, अन्तरिक्षस्थ वायुएं उनके थामने मे असमर्थ है । (तनूभिः) मेषरूपी तनुभों के साथ (संविदानः) एेकमत्य को प्राप्त हुई, (ओषधीनाम्) भओोषधियों कौ (अधिपाः) अधिष्ठातुरूप में रक्षक हुहै, मेचीय जल प्रदान कर, ओषधियों की 'जधिपाः' हुई है । विदयुत्-अग्नि सब

English

Let waters satisfy the earth, the voices of the great mist-enve- loped Bull who roareth. Roar, thunder, set the sea in agitation, bedew the ground with thy sweet rain, Parjanya! Send plenteous showers on him who seeketh shelter, and let the owner of lean kine go

अध्याय 4

श्लोक 14.7

पञ्चौ॑दनं प॒ञ्चभि॑र॒ङ्गुलि॑भि॒र्द॑र्व्योद्ध॑र पञ्च॒धैतमो॑द॒नम्।प्राच्यां॑ दि॒शि शिरो॑ अ॒जस्य॑ धेहि॒ दक्षि॑णायां दि॒शि दक्षि॑णं धेहि पा॒र्श्वम्

pañcaudanaṃ pañcabhiraṅgulibhirdarvyoddhara pañcadhaitamodanam| prācyāṃ diśi śiro ajasya dhehi dakṣiṇāyāṃ diśi dakṣiṇaṃ dhehi pārśvam

हिन्दी अर्थ

तथा द्युलोक से जल प्रदान करती है जोकि अमृतरूप है, 1 ( ५ शीघ्र म॒ल्युका कारण नहीं बनता । चुलोक से अमृतः स ध है सूये । अमृतम् उदकनाम (निघंटु १।१२ ) पाथिव जल भारीहं जलमय (७ र आ, ईरयन्) जल को प्रेरित कशता १ ( स जलाधार समुद्र को (अहैयाति) पीडित कर । (वृष्णः) वर्षा क (अदइवस्य) आदित्य का (रेतः) जलरूपी वीयं (प्र न व अ +अप: । अर्दयाति =-लेटि आट् । सलिल तो समुद्र की सम्प द। अदवो वहति सप्तनामा आदित्यः । सप्तास्म रङमयो रसानभि त 1

English

homeward. Let the boon Maruts, let the springs and coiling serpents tend! you well.

अध्याय 4

श्लोक 14.8

प्र॒तीच्यां॑ दि॒शि भ॒सद॒मस्य धेह्युत्त॑रस्यां दि॒श्युत्त॑रं धेहि पा॒र्श्वम्।ऊ॒र्ध्वायां॑ दि॒श्य॑१जस्यानू॑कं धेहि दि॒शि ध्रु॒वायां॑ धेहि पाज॒स्यऽम॒न्तरि॑क्षे मध्य॒तो मध्य॑मस्य

pratīcyāṃ diśi bhasadamasya dhehyuttarasyāṃ diśyuttaraṃ dhehi pārśvam| ūrdhvāyāṃ diśya1jasyānūkaṃ dhehi diśi dhruvāyāṃ dhehi pājasya'mantarikṣe madhyato madhyamasya

हिन्दी अर्थ

स्तन, गदी देवशब्दे (चुरादिः) । । १. वेदों में जड पदार्थो काभ व मी वर्णन प्रायः एसा होता है मानो कि वे चेतन ह । इसलिए वेदों के व्णंन चेतन की भावनाभों द्वारा मिधित होते है। इस भावना को सायणा- उछछल-कूद वेदा करता तथा उसे तरङ्कित करता रहता है । यह समृद्रका अदनहै, नी चीरपः सुज । वदन्तु पृरनिवाहवो मण्डूका इ्रिणानुं ॥१२॥

English

Urged by the Maruts let the clouds pour down their rain upon. the earth. Let lightning flash on every side: from all the regions blow the winds! Urged by the Maruts let the clouds pour down their rain upon the earth.

अध्याय 4

श्लोक 14.9

शृ॒तम॒जं शृ॒तया॒ प्रोर्णु॑हि त्व॒चा सर्वै॒रङ्गैः॒ संभृ॑तं वि॒श्वरू॑पम्।स उत् ति॑ष्ठे॒तो अ॒भि नाक॑मुत्त॒मं प॒द्भिश्च॒तुर्भिः॒ प्रति॑ तिष्ठ दि॒क्षु

śṛtamajaṃ śṛtayā prorṇuhi tvacā sarvairaṅgaiḥ saṃbhṛtaṃ viśvarūpam| sa ut tiṣṭheto abhi nākamuttamaṃ padbhiścaturbhiḥ prati tiṣṭha dikṣu

हिन्दी अर्थ

(अपः) जलो को (निषिजञ्चन् भवतु ) नितरां सीचता रह, अथवा निचली भूमि को सींचता रहे, (अपाम्) मेघस्य जलों के (ग्भंराः) गड़गडाते शब्द (रवसन्तु) प्राणवान् हो, प्रबल हों; (वरुण) है उदकाधिपति ! (अपः ) जलों को (नीचीः) नीचै को ओर (अवसुज) प्रेरित कर । (पृदिन बाहवः) शुध बाहुओंवाले अथवा नानावर्णोवाली बाहुभोवाले (मण्डकाः) मण्डक (इरिणा वाच॑ पजन्य जिन्वितां म मण्टुकां त्रवादिषुः ।१३॥ चाहिए एेसी विधि मन्त्र द्वारा सूचित होती है, तथा तदितर काल में वेदाङ्खों का अध्ययन करना चाहिए । मे बोल, उच्चैः शब्दोच्च(रण कर, (तादुरि) ह तानपूवेक उच्चारण करने-

English

May waters, lightning, cloud, and rain, boon springs and serpents tend you well. Urged by the Maruts let the clouds pour down their rain upon the earth.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।