ज्ञानjñāna · Wisdom

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परिचयOverview

शरीर, पद और मन की क्षणिक उपाधियों से परे भीतर विद्यमान अमर साक्षी चेतना (आत्मन्) का बोध।

Looking beyond the fleeting identities of body, career, and emotions to encounter the unchanging witness consciousness within.

संबंधित श्लोकRelated verses

  • न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते

    Bhagavad Gita 4.38
  • श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः

    Bhagavad Gita 4.39
  • स य एषोऽणिमैतदात्म्यमिदं सर्वं तत्सत्यं स आत्मा तत्त्वमसि श्वेतकेतो इति ।

    Chandogya Upanishad 6.8.7
  • न जायते म्रियते वा कदाचिन् नायं भूत्वा भविता वा न भूयः । अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥

    Bhagavad Gita 2.20

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आधुनिक प्रयोगModern applications

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