स य एषोऽणिमैतदात्म्यमिदँ सर्वं तत्सत्यँ स आत्मा तत्त्वमसि श्वेतकेतो इति भूय एव मा भगवान्विज्ञापयत्विति तथा सोम्येति होवाच
sa ya eṣo'ṇimaitadātmyamidam̐ sarvaṃ tatsatyam̐ sa ātmā tattvamasi śvetaketo iti bhūya eva mā bhagavānvijñāpayatviti tathā somyeti hovāca
अर्थMeaning
जो यह अणिमा, यानी सूक्ष्म सार है, यह सारा जगत उसी को अपना आत्मा रखने वाला है। वही सत्य है, वही आत्मा है; श्वेतकेतो, वह तुम हो। श्वेतकेतु ने कहा, 'भगवन्, मुझे और समझाइए।' उद्दालक ने कहा, 'ठीक है, सौम्य।'
अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।
That which is this subtle essence has the whole world as its self. That is the real; that is the Self; that you are, Shvetaketu. 'Sir, please instruct me further,' he said. 'So be it, dear,' he replied.
Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.
व्याख्याVyakhya
यह मंत्र छठे अध्याय के उस संवाद में आता है जिसमें उद्दालक अपने पुत्र श्वेतकेतु को एक ऐसी शिक्षा देते हैं जिससे जो नहीं सुना गया वह भी समझ में आ जाता है। यहाँ तत् त्वम् असि पहली बार आता है, और आगे नौ बार दोहराया जाता है, हर बार एक नए उदाहरण के बाद। अणिमा का अर्थ है सबसे सूक्ष्म सार, जिसे इस अध्याय में सत् कहा गया है, यानी वह जो है। ऐतदात्म्य का अर्थ है इस सार को ही अपना आत्मा रखने वाला। इसलिए श्लोक पहले कहता है कि सारा जगत उसी सार पर टिका है, फिर कहता है कि वही सत्य और आत्मा है, और तब श्वेतकेतु से कहता है कि वह तुम हो। इस वाक्य के अर्थ पर परंपरा में मतभेद है: एक पाठ इसे जीव और सत् की एकता कहता है, दूसरे इसे गहरे संबंध या उसी पर आश्रित होने के अर्थ में लेते हैं। अंत में श्वेतकेतु का और समझाइए कहना बताता है कि यह वाक्य उपदेश की समाप्ति नहीं, एक पड़ाव है।
विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी
इस संवाद की एक बनावट को साहित्यिक और भाषा-शैली के अवलोकन के रूप में देखा जा सकता है: एक ही निष्कर्ष को अलग-अलग उदाहरणों के साथ नौ बार दोहराया जाता है, और हर बार शिष्य और जानना चाहता है। यह उपदेश-शैली की एक पहचान है, किसी वैज्ञानिक तथ्य का दावा नहीं। मंत्र का विषय परम सत् और आत्मा का संबंध है, जिसे प्रयोग या आँकड़े से न सिद्ध किया जा रहा है, न खंडित। इसे केवल पाठ की संरचना पर एक आधुनिक टिप्पणी की तरह पढ़ना उचित है, इसके अर्थ का विकल्प मानकर नहीं।
A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.
स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण
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- 2026-10-23
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