तैत्तिरीयोपनिषद्

Śīkṣā Vallīश्लोक 8/1267%

Taittiriya Upanishad 1.8

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

ओमिति ब्रह्म ।ओमितीदंसर्वम् ।ओमित्येतदनुकृतिर्हस्म वा अप्योश्रावयेत्याश्रावयन्ति ।ओमिति सामानि गायन्ति ।ॐंशोमिति शस्त्राणि शंसन्ति ।ओमित्यध्वर्युः प्रतिगरं प्रतिगृणाति ।ओमिति ब्रह्मा प्रसौति ।ओमित्यग्निहोत्रमनुजानाति ।ओमिति ब्राह्मणः प्रवक्ष्यन्नाह ब्रह्मोपाप्नवानीति ।ब्रह्मैवोपाप्नोति ॥ १ ॥ ॥ इति अनुवाकः

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

ॐ — यही ब्रह्म है। ॐ — यह सब है। ॐ ही श्रावण-अनुकरण है। ॐ से साम गाये जाते हैं; ॐ-शोम् से शस्त्र पढ़े जाते हैं; ॐ से अध्वर्यु प्रतिगर बोलता है; ॐ से ब्रह्मा प्रसौति करता है; ॐ से अग्निहोत्र की अनुज्ञा होती है; ॐ से ब्राह्मण कहता है — "मैं ब्रह्म को प्राप्त करूँ" — और वह ब्रह्म ही प्राप्त करता है।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

OM — that is Brahman. OM — all this. OM is the assent of recital: 'recite!' — they reply OM. By OM the sāman is sung; with OM-Śom the śastras are recited; with OM the adhvaryu replies; with OM the brahmā priest commands; with OM the agnihotra is consented to. With OM the Brahmin says: 'May I attain Brahman!' — and he indeed attains Brahman.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

ॐ — यही ब्रह्म है। ॐ — यह सब है। ॐ ही श्रावण-अनुकरण है। ॐ से साम गाये जाते हैं; ॐ-शोम् से शस्त्र पढ़े जाते हैं; ॐ से अध्वर्यु प्रतिगर बोलता है; ॐ से ब्रह्मा प्रसौति करता है; ॐ से अग्निहोत्र की अनुज्ञा होती है; ॐ से ब्राह्मण कहता है — "मैं ब्रह्म को प्राप्त करूँ" — और वह ब्रह्म ही प्राप्त करता है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
मानव मस्तिष्क लगातार सूचनाओं, आंतरिक वार्तालापों और बिखरे हुए विचारों के एक प्रचंड शोर में फंसा रहता है। इस मानसिक कोलाहल के कारण निर्णय लेने की क्षमता क्षीण हो जाती है और चित्त लगातार व्याकुल रहता है। तैत्तिरीयोपनिषद् का यह उद्घोष—'ओमिति ब्रह्म, ओमितीदं सर्वम्' (ॐ ही ब्रह्म है, ॐ ही यह सब कुछ है)—समस्त बिखराव को एक ही परम केंद्र बिंदु में समेटने का महामंत्र है। ध्वन्यात्मक और न्यूरोलॉजिकल शोध बताते हैं कि 'ॐ' का दीर्घ उच्चारण मस्तिष्क के अमिग्डाला (Amygdala) की अति-सक्रियता को शांत करता है और मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों (hemispheres) में सुसंगतता लाता है। प्राचीन काल में किसी भी वैदिक अनुष्ठान या महत्वपूर्ण घोषणा से पूर्व 'ॐ' का उच्चारण किया जाता था क्योंकि यह चित्त को सांसारिक विकर्षणों से काटकर सर्वोच्च सत्य के साथ जोड़ देता है। आधुनिक जीवन में ॐ केवल एक पारंपरिक शब्द नहीं, बल्कि आंतरिक व्यवस्था को तुरंत रीसेट करने वाला आध्यात्मिक स्विच है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **संज्ञानात्मक रीसेट (Instant Cognitive Reset)**: जब भी दिनभर के काम के बीच मानसिक थकान या घबराहट महसूस हो, अपनी आंखें मूंदें और 3 बार गहरी सांस लेकर मन ही मन या धीमे स्वर में 'ॐ' का गुंजन करें। - **कार्य से पूर्व ओंकार संरेखण (Pre-Task Centering)**: किसी भी महत्वपूर्ण ईमेल, प्रस्तुति या कठिन निर्णय से पहले 10 सेकंड के लिए ॐ का ध्यान करें, जिससे आपका मन अनावश्यक पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर वर्तमान क्षण में आ जाए। - **स्पंदन के प्रति सजगता (Resonance Awareness)**: दिनभर यह स्मरण रखें कि आपके विचार और वाणी भी एक स्पंदन हैं; अपने भीतर केवल सकारात्मक और शांत स्पंदनों को ही पोषण दें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं दुनिया के अंतहीन शोर और अपने ही विचारों के चक्रवात में उलझा हुआ हूं, या मैंने ॐ के उस परम शांत केंद्र को पहचाना है जो समस्त अस्तित्व का आधार है?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

ओंकार का ध्वन्यात्मक अनुनाद (Acoustic Resonance) और न्यूरो-वेस्कुलर सक्रियता: एमआरआई (fMRI) अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि 'ॐ' का दीर्घ उच्चारण लिम्बिक सिस्टम (Amygdala, Hippocampus) की अति-सक्रियता को शांत करता है और मस्तिष्क के द्विपक्षीय हेमिस्फेयर्स में सुसंगतता (Coherence) लाता है। उपनिषद् का यह कथन कि "ॐ ही सब कुछ है" इस वैज्ञानिक तथ्य की पुष्टि करता है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का मौलिक स्वरूप स्पंदन (Vibration / Frequency) ही है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Edition (Book Code 0071). Gita Press Gorakhpur (Official Publication)
Translation
Gita Press Editorial Board (Hindi)
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain. Digitized by sanskritdocuments.org.
पाठ-भेद · Variant readings
Collated with Anandashram Sanskrit Series No. 12.

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श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

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Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

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आगे क्या · What next