वाल्मीकि रामायण

Uttara Kandaश्लोक 1.10/1050%

Ramayana 7.1.10

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

प्रणवो धन्वो विराटो रामो राजीवलोचनः ।पार्थिवो विश्वकर्मा च श्रीरामः पुरुषोत्तमः

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

ॐ धनुष है, विराट बाण है, राम कमलनयन है। राम पार्थिव है, विश्वकर्मा है, पुरुषोत्तम है।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

Om is the bow, the universe is the arrow, Rama is the lotus-eyed one. Rama is the earthly one, the creator of all, the supreme person.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

ब्रह्मांडीय धनुर्धर ध्यान: "प्रणवो धन्वो विराटो रामो राजीवलोचनः। पार्थिवो विश्वकर्मा च श्रीरामः पुरुषोत्तमः॥" — संपूर्ण सृष्टि का महा-रहस्य: 'प्रणव' (ओम्) ही धनुष है, यह 'विराट' ब्रह्मांड ही बाण है, और कमलनयन श्रीराम उस धनुष को धारण करने वाले साक्षात् पुरुषोत्तम हैं! वे ही इस पार्थिव जगत के रचयिता विश्वकर्मा हैं और वे ही समस्त पुरुषों में उत्तम सनातन परब्रह्म हैं!

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
रामायण का यह अंतिम मंत्र मनुष्य की चेतना को उसके सर्वोच्च ब्रह्मांडीय शिखर पर आरूढ़ कर देता है। श्रीराम केवल एक धनुर्धर नहीं हैं जो बाण चलाते हैं; वे साक्षात् उस ब्रह्मांडीय ध्यान-प्रक्रिया के स्वामी हैं जहाँ 'प्रणव' (ओम्) धनुष है, साधक की आत्मा और यह विराट जगत बाण है, और लक्ष्य साक्षात् सच्चिदानंद परब्रह्म है। जब कोई साधक अपनी चेतना को ओंकार के धनुष पर चढ़ाकर एकाग्रता के साथ लक्ष्य की ओर छोड़ता है, तो उसका सारा अज्ञान एक क्षण में नष्ट हो जाता है और वह श्रीराम रूपी पुरुषोत्तम में विलीन हो जाता है। यह ध्यान आधुनिक जीवन के तनाव, अवसाद और भटकाव का अंतिम समाधान है। जब आप अपने जीवन को इस ब्रह्मांडीय परिप्रेक्ष्य में देखते हैं, तो आपके छोटे-मोटे झगड़े, चिंताएं, पद-प्रतिष्ठा की होड़ और मृत्यु का भय तिनके की तरह उड़ जाते हैं। आप अनुभव करते हैं कि आप इस विराट अस्तित्व के एक दिव्य अंश हैं। श्रीराम का स्मरण आपको केवल एक धार्मिक व्यक्ति नहीं बनाता; वह आपको एक निर्भीक, मर्यादित, करुणावान और परम स्वतंत्र 'पुरुषोत्तम' बना देता है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **प्रणव-धनुर्धर ध्यान**: प्रतिदिन ओंकार (ॐ) का जप करते हुए यह भावना करें कि मेरी चेतना ओंकार रूपी धनुष से छूटकर सीधे परमात्मा के अनंत प्रकाश में विलीन हो रही है। - **पुरुषोत्तम बनने का संकल्प**: केवल एक साधारण, लाचार मनुष्य बनकर न जिएं; अपने भीतर के पुरुषोत्तम (उत्कृष्टतम मनुष्य) को जगाएं। - **ब्रह्मांडीय एकता की अनुभूति**: यह स्मरण रखें कि इस चराचर विश्व का कण-कण उसी एक पुरुषोत्तम श्रीराम के दिव्य प्रकाश से ओत-प्रोत है।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं केवल अपने संकीर्ण स्वार्थों और क्षुद्र चिंताओं में ही उलझा हुआ हूँ, अथवा मैं उस ओंकार रूपी धनुष को धारण करके अपनी आत्मा को पुरुषोत्तम श्रीराम के अनंत सत्य में विलीन करने को तैयार हूँ?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

प्रणव-अनुसंधान और ब्रह्मांडीय चेतना का संरेखण (Cosmic Archer Meditation): मुण्डकोपनिषद् (2:2:4) के प्रणवो धनुः शरो ह्यात्मा की भाँति यह ध्यान-पद्धति साधक की चेतना (बाण) को ओंकार (धनुष) के माध्यम से सीधे परब्रह्म (लक्ष्य) में विलीन कर देती है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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2026-10-24
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श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

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Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

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