प्रश्नोपनिषद्

Praśna 5श्लोक 3/743%

Prashna Upanishad 5.3

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

स यद्येकमात्रमभिध्यायीत स तेनैव संवेदितस्तूर्णमेव जगत्यामभिसम्पद्यते ।तमृचो मनुष्यलोकमुपनयन्ते स तत्र तपसा ब्रह्मचर्येण श्रद्धया सम्पन्नो महिमानमनुभवति

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

यदि वह केवल एक मात्रा (अकार) का ध्यान करता है, तो उसी से जागृत होकर वह शीघ्र ही इस जगत् में आ जाता है। ऋच् मन्त्र उसे मनुष्य-लोक में ले जाते हैं; वहाँ वह तप, ब्रह्मचर्य और श्रद्धा से सम्पन्न होकर महिमा का अनुभव करता है।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

If he meditates on one mātrā (the A alone), being awakened by that, he quickly attains the earthly world. The Ṛc verses lead him to the human realm; there, endowed with austerity, celibacy, and faith, he experiences greatness.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

ओंकार के प्रथम चरण (एक मात्र — 'अ') के ध्यान का फल: 'स यद्येकमात्रमभिध्यायीत स तेनैव संवेदितस्तूर्णमेव जगत्यामभिसम्पद्यते। तमृचो मनुष्यलोकमुपनयन्ते स तत्र तपसा ब्रह्मचर्येण श्रद्धया सम्पन्नो महिमानमनुभवति'। यदि कोई साधक ओंकार की केवल एक मात्रा ('अ' कार — ऋग्वेद का प्रतीक) का ध्यान करता है, तो वह उस साधना से प्रबुद्ध होकर मृत्यु के पश्चात शीघ्र ही इस पृथ्वी लोक में एक श्रेष्ठ मनुष्य के रूप में जन्म लेता है। ऋग्वेद की ऋचाएं उसे मनुष्य योनि में ले आती हैं, जहाँ वह तप, ब्रह्मचर्य और श्रद्धा से संपन्न होकर एक महान, तेजस्वी और सम्मानित जीवन का अनुभव करता है। यह साधना मनुष्य को पशुवत पतन से बचाकर मानवीय चेतना के शिखर पर स्थापित करती है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
कई लोग सोचते हैं कि ध्यान का अर्थ केवल आंखें बंद करके दुनिया से कट जाना है। यह मंत्र स्पष्ट करता है कि ध्यान की प्रथम सीढ़ी भी आपको इस पृथ्वी पर एक बेहतर, अधिक सजग और नैतिक मनुष्य बनाती है। यदि आप केवल एक मात्रा ('अ') के प्रति भी सच्चे हैं, तो आपका जीवन अनुशासन, सत्य और सम्मान से भर जाएगा। अपनी इस वर्तमान मानव देह और पृथ्वी के जीवन को व्यर्थ न गंवाएं; इसे तप और साधना द्वारा एक महान अवसर में बदलें।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **मानव जीवन का आदर (Living with Human Dignity)**: अपने मनुष्य होने के दुर्लभ अवसर का सम्मान करें; पशुवत वासनाओं और आलस्य में अपना समय नष्ट न करें। - **जाग्रत कर्मों में पूर्ण सजगता (Mindful Presence in Action)**: दिनभर जो भी कार्य करें — खाना, चलना, बात करना — उसे पूरी उपस्थिति और होश के साथ करें; यही 'अ' कार की साधना है। - **तप, ब्रह्मचर्य और श्रद्धा की त्रिवेणी (Practicing Discipline, Restraint & Faith)**: अपने दैनिक आचरण में आत्म-संयम, ऊर्जा का संरक्षण और उच्चतर मूल्यों में अटूट श्रद्धा को स्थान दें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या आप इस पृथ्वी पर अपने मानवीय जीवन को केवल खाना-सोना और भोग का माध्यम बना रहे हैं, या आप तप और श्रद्धा द्वारा अपने जीवन को वास्तव में महिमामयी बना रहे हैं?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

जाग्रत अवस्था, भौतिक चेतना और अल्फा न्यूरो-फीडबैक (Beta/Alpha Oscillations & Grounded Sensory Presence): मांडूक्य और प्रश्नोपनिषद् में 'अ' कार जाग्रत अवस्था (Waking State / Vaishvanara) का प्रतीक है। जो व्यक्ति स्थूल संसार में रहते हुए सजगता और नैतिक अनुशासन का अभ्यास करता है, उसका मस्तिष्क उच्च-कार्यकारी क्षमता (Executive Function) और ग्राउंडेड उपस्थिति विकसित करता है। यह साधना मनुष्य को आलस्य और विकृतियों से बचाकर एक ऊर्जावान, नैतिक और सफल नागरिक बनाती है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
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Last updated
2026-10-24
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श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

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🟣Cross-Scriptural Linkपार-ग्रंथ सम्बन्ध (गीता ↔ उपनिषद् ↔ रामायण)

Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

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आगे क्या · What next