मुण्डकोपनिषद्

Khaṇḍa 1श्लोक 3/933%

Mundaka Upanishad 1.3

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

शौनको ह वै महाशालोऽङ्गिरसं विधिवदुपसन्नः पप्रच्छ ।कस्मिन्नु भगवो विज्ञाते सर्वमिदं विज्ञातं भवतीति

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

महाशाल शौनक ने अंगिरस के पास विधिपूर्वक उपस्थित होकर पूछा — "हे भगवन्! किसके जान लेने से यह सब जाना हुआ हो जाता है?"

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

Śaunaka, the great householder, having approached Aṅgiras with proper respect, asked: "Sir, what is that, by knowing which, all this becomes known?"

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

आठ शब्दों में दर्शन का सबसे गहरा प्रश्न: 'किसके जानने से सब जाना जाता है?' शौनक कोई तथ्य नहीं माँग रहे — वे उस सिद्धांत को माँग रहे हैं जो सब तथ्यों की व्याख्या कर सके।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
21वीं सदी सूचना का महासागर है, परंतु ज्ञान की प्यास से मनुष्य फिर भी तड़प रहा है। हम प्रतिदिन हजारों खबरें, रील्स, रिसर्च पेपर्स और तथ्य जमा करते हैं, परंतु मन की बेचैनी और जीवन का भ्रम कम नहीं होता। हम पत्तों को पानी दे रहे हैं और जड़ को भूल चुके हैं। अनेक शाखाओं को जानने के बाद भी हमें उस मूल तने का पता नहीं है जिससे पूरा वृक्ष जीवन पा रहा है। महागृहस्थ शौनक ऋषि अंगिरस के पास जाकर जीवन का सर्वोच्च प्रश्न पूछते हैं: "कस्मिन्नु भगवो विज्ञाते सर्वमिदं विज्ञातं भवतीति" — हे भगवन्, वह कौन सा एक मूल तत्त्व है जिसके जान लेने पर यह सब कुछ जान लिया जाता है? आधुनिक भौतिकी जिसे 'थ्योरी ऑफ एवरीथिंग' (Theory of Everything) कहती है, उपनिषद् ने उसे चेतना के स्तर पर तीन हजार वर्ष पूर्व पूछा था। उस एक चेतना को जान लेना ही सारे विखंडित ज्ञान का अंतिम समाधान है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **सर्वोच्च प्रश्न की खोज (Prioritizing Ultimate Questions)**: दिन भर की तुच्छ और गपशप भरी सूचनाओं के पीछे भागने के बजाय उन बुनियादी प्रश्नों पर विचार करें जो जीवन के वास्तविक अर्थ को खोलते हैं। - **जड़ को सींचने की नीति (Watering the Root)**: बाहरी परिस्थितियों को बदलने में अपनी सारी ऊर्जा नष्ट करने के बजाय अपने आंतरिक चित्त और चेतना को रूपांतरित करें; भीतर शांति आते ही बाहर की दुनिया सुलझ जाती है। - **सार-तत्व की पहचान (Discerning the Essence)**: कोई भी पुस्तक पढ़ते या निर्णय लेते समय पूछिए: "क्या यह ज्ञान मुझे मेरे आत्म-स्वरूप के निकट ला रहा है या केवल मन पर सूचनाओं का बोझ बढ़ा रहा है?"
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या आप जीवन भर केवल विखंडित सूचनाओं के पत्ते बटोरते रहेंगे, अथवा उस एक मूल स्रोत को जानने का प्रयास करेंगे जिसके जानने से सब कुछ जान लिया जाता है?म्”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

सैद्धांतिक भौतिकशास्त्री इसे 'Theory of Everything' कहते हैं — एक ऐसा सिद्धांत जिससे सब घटनाएँ निकाली जा सकें। उपनिषद् ने यह प्रश्न भौतिकी से 3000 साल पहले उठाया।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

Content status

  • Original text
  • Translation · from the source archive

No independent human review is recorded for this verse yet. How this site is made.

Sanskrit edition
Atharvaveda Shaunaka Shakha Recension. GRETIL / Digital Library of India
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. Max Müller
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Mantra 3.1.6 (Satyameva Jayate) cross-referenced with national motto epigraphic sources.

Found a mistake?

आगे क्या · What next