अध्याय 12
श्लोक 4.1
वशा गौः।१-५३ कश्यपः।वशा।अनुष्टुप्, ७ भुरिक्, २० विराट्, ३१ उष्णिग्बृहतीगर्भा, ४२ बृहतीगर्भा।ददा॒मीत्ये॒व ब्रू॑या॒दनु॑ चैना॒मभु॑त्सत ।व॒शां ब्र॒ह्मभ्यो॒ याच॑द्भ्य॒स्तत् प्र॒जाव॒दप॑त्यवत्
vaśā gauḥ| 1-53 kaśyapaḥ| vaśā| anuṣṭup, 7 bhurik, 20 virāṭ, 31 uṣṇigbṛhatīgarbhā, 42 bṛhatīgarbhā| dadāmītyeva brūyādanu caināmabhutsata | vaśāṃ brahmabhyo yācadbhyastat prajāvadapatyavat
हिन्दी अर्थ
दवाय रभिषवधित, (चूतेन मिधाः) घृतभिधित है, वे (भ्रमृतस्य नाभयः) दुष मे शहद भौर घृत मिला कर सेवन करने से भ्रायु बदृती है । (निधिपाः) निधि का रक्षक गृहस्वामी, (एनं निघम्) इस निधि को, अननधिकारी हों । (भस्माभिः दत्तः) हम दवारा दी गई (निहितः) निधिभी मृहस्वामी जब तक गृहजीवन में रहे तब तक गृह्यसम्पत्ति पर गृह- स्वामी-कां हीं भ्रधिकार होना चाहिए । दान देने से भी जीवन स्वग॑मय
English
Odana for wife and husband. Numbered, they visit earth, these drops of moisture, commensu- rate with plants and vital