Atharva Veda
12
अध्याय 12 / 20

Kanda 12

काण्ड 12

304 श्लोकभाग 3/5 · श्लोक 3.1–3.60

पूर्ण अध्याय पाठ60 श्लोक

अध्याय 12

श्लोक 3.1

स्वर्गैदनः।१-६० यमः।स्वर्गः, ओदनः, अग्निः।त्रिष्टुप्, १, ४२-४३, ४७ भुरिक्, ८, १२, २१-२२, २४ जगती, १३, १७ स्वराडार्षी पङ्क्तिः, ३४ विराड् गर्भा, ३९ अनुष्टुब्गर्भा, ४४ परा बृहती, ५५-६० त्र्यवसाना सप्तपदा शङ्कुमत्यतिजागतशाक्वरातिशाक्वरधा-र्त्यगर्भातिधृतिः (५५, ५७-६० कृतिः),।पुमा॑न् पुं॒सोऽधि॑ तिष्ठ॒ चर्मे॑हि॒ तत्र॑ ह्वयस्व यत॒मा प्रि॒या ते ।याव॑न्ता॒वग्रे॑ प्रथ॒मं स॑मे॒यथु॒स्तद् वां॒ वयो॑ यम॒राज्ये॑ समा॒नम्

svargaidanaḥ| 1-60 yamaḥ| svargaḥ, odanaḥ, agniḥ| triṣṭup, 1, 42-43, 47 bhurik, 8, 12, 21-22, 24 jagatī, 13, 17 svarāḍārṣī paṅktiḥ, 34 virāḍ garbhā, 39 anuṣṭubgarbhā, 44 parā bṛhatī, 55-60 tryavasānā saptapadā śaṅkumatyatijāgataśākvarātiśākvaradhā-rtyagarbhātidhṛtiḥ (55, 57-60 kṛtiḥ),| pumān puṃso'dhi tiṣṭha carmehi tatra hvayasva yatamā priyā te | yāvantāvagre prathamaṃ sameyathustad vāṃ vayo yamarājye samānam

हिन्दी अर्थ

२षठ ¦ अरथवंवेद-भाष्य कां४,१२। सु०२ लिये (प्रवदति) व्यथं में बात. करता है, - (यान्) जिस-जिख का किं समीप होकर (भ्रनु वितावति) भ्रनुर्ग॑मन करती रहत है । ,. व्यापक परमेश्वर तथा जल . (मा) मुं (शुम्भन्तु) पुनः सुशोभित कां० १२।यु०२ भ्रथवेवेद-भाष्य २८९

English

the river. Abandon here the powers that were malignant, and let us cross to powers exempt from

अध्याय 12

श्लोक 3.2

ताव॑द् वां॒ चक्षु॒स्तति॑ वी॒र्याऽणि॒ ताव॒त् तेज॑स्तति॒धा वाजि॑नानि ।अ॒ग्निः शरी॑रं सचते य॒दैधोऽधा॑ प॒क्वान्मि॑थुना॒ सं भ॑वाथः

tāvad vāṃ cakṣustati vīryā'ṇi tāvat tejastatidhā vājināni | agniḥ śarīraṃ sacate yadaidho'dhā pakvānmithunā saṃ bhavāthaḥ

हिन्दी अर्थ

उन क समीप होकर, (भनु) निरन्तर (वितावति) वृद्धि या उनति से विगत करती रहती है । वितावतिन्न्वि +तु (वृद्धौ) । . कां० १२। सु०.२ भरथवं वेद-भाष्य २९४ का शिकार बना रहूता,है भौर उन्नति नहीं कर सकता ।

English

He loses all if Agni the Carnivorous be not set aside, Unholy, splendour-reft is he, his sacrifice unfit to eat. Krayād deprives of tilth of cow, of riches him whom he pursues,

अध्याय 12

श्लोक 3.3

सम॑स्मिंल्लो॒के समु॑ देव॒याने॒ सं स्मा॑ स॒मेतं॑ यम॒राज्ये॑षु ।पू॒तौ प॒वित्रै॒रुप॒ तद्ध्व॑येथां॒ यद्य॒द् रेतो॒ अधि॑ वां संब॒भूव॑

samasmiṃlloke samu devayāne saṃ smā sametaṃ yamarājyeṣu | pūtau pavitrairupa taddhvayethāṃ yadyad reto adhi vāṃ saṃbabhūva

हिन्दी अर्थ

प्रतिदिन करना चाहिए । गृहजीवन में जिन के माता पिता परमेदवरो- पासना में रत होगे उन की सन्तार्ने .मी भरास्विक बन जार्येगीः । (उभे नभसी) दोनो भ्र्थात् पृथिवी भ्रौर चौ.को, (च) तथा भौर भूलोक में यथेच्छ विहारी होकर भ्रानन्द लाभ करना । तथा गृहस्थ में रहते मधुर. गृहस्थ जीवन. व्यतीत करना ॥. (३)...

English

Thou followest the day and night, supporting, standing, at peace, promoting, rich in heroes. 190

अध्याय 12

श्लोक 3.4

आप॑स्पुत्रासो अ॒भि सं वि॑शध्वमि॒मं जी॒वं जी॑वधन्याः स॒मेत्य॑ ।तासां॑ भजध्वम॒मृतं॒ यमा॒हुर्यमो॑द॒नं पच॑ति वां॒ जनि॑त्री

āpasputrāso abhi saṃ viśadhvamimaṃ jīvaṃ jīvadhanyāḥ sametya | tāsāṃ bhajadhvamamṛtaṃ yamāhuryamodanaṃ pacati vāṃ janitrī

हिन्दी अर्थ

१ मन, १ बुद्धि । इन्दं यजुवद मं सात्त ऋषि मी कहां है, यथा “सप्त ऋषयः “सप्तमेघान्'"” का भथं है “सातयज्ञः । ये कौन से सात यज्ञ हैः जिनः काकि . १. ये ३३ देवता श्षरीरगत.लारीरिकं भौर मानसिक दिव्य शाक्तियं प्रतीत ३०८ भरयर्ववेद-माष्य कां० १२। सु०३

English

Do ye, O sons, unite you with the waters, meeting this living man, ye life-sustainers, Allot to them the Odana your mother is making ready, which they call immortal. That which your mother and your sire, to banish sin and un- cleanness from their lips, are

अध्याय 12

श्लोक 3.5

यं वां॑ पि॒ता पच॑ति॒ यं च॑ मा॒ता रि॒प्रान्निर्मु॑क्त्यै॒ शम॑लाच्च वा॒चः ।स ओ॑द॒नः श॒तधा॑रः स्व॒र्ग उ॒भे व्याऽप नभ॑सी महि॒त्वा

yaṃ vāṃ pitā pacati yaṃ ca mātā riprānnirmuktyai śamalācca vācaḥ | sa odanaḥ śatadhāraḥ svarga ubhe vyā'pa nabhasī mahitvā

हिन्दी अर्थ

परजोभ्रग्निहै उका मूल ्लोत सूं है । पृथिवी के दक्षिण में समुद्र से भाकाद् मे भ्राती है । मरत् मानसून वायु (रथं ° ४।२७।४.५) । पृथिवी के पदिचम से चान्द का उदय होताः है । सम्मवतः इस मन्त्र मेँ का भी सम्बन्व है, दसलिये चान्द को अलाधिपति भी कहा हो । उत्तरम है । सोम मी भोषधि है। सोम को भरोषधियों का भ्रधिपति का है । कै कारण सोम का-सम्बन्ध उत्तर के साथ दर्खाया गया है" । वीरुधः विविष प्रकार कीः रोहण करने वाली श्रोषधियां तथा वनस्पतियां । रोहण

English

shall chase the demon. Mount on the skin: afford us great protection, Let not the sons’ sin fall on wife and husband.

अध्याय 12

श्लोक 3.6

उ॒भे नभ॑सी उ॒भयां॑श्च लो॒कान् ये यज्व॑नाम॒भिजि॑ताः स्व॒र्गाः ।तेषां॒ ज्योति॑ष्मा॒न् मधु॑मा॒न् यो अग्रे॒ तस्मि॑न् पु॒त्रैर्ज॒रसि॒ सं श्र॑येथाम्

ubhe nabhasī ubhayāṃśca lokān ye yajvanāmabhijitāḥ svargāḥ | teṣāṃ jyotiṣmān madhumān yo agre tasmin putrairjarasi saṃ śrayethām

हिन्दी अर्थ

निधिपाः = धर के खजाने का. रक्चक । ६० वर्षो की भ्रायु होने पर मे की जाने वाली -क्रियाभ्रों को समाप्त करदे। गृह के भरवशिष्ट पितर जीवनं निभाए गे । ६० वषं से अभिप्रायः यह प्रतीत होता है कि१० वंषंकी (धर्ता) धारण करने वाला तु (पृथिव्याः धरुणे) समग्र पृथिवी के

English

Conjoined with sacrificial gear and butter may pot and jar stand firmly on the altar. Eastward may Agni as he cooks preserve thee. Southward may Indra, grit by Maruts, guard thee,

अध्याय 12

श्लोक 3.7

प्राचीं॑प्राचीं प्र॒दिश॒मा र॑भेथामे॒तं लो॒कं श्र॒द्दधा॑नाः सचन्ते ।यद् वां॑ प॒क्वं परि॑विष्टम॒ग्नौ तस्य॒ गुप्त॑ये दंपती॒ सं श्र॑येथाम्

prācīṃprācīṃ pradiśamā rabhethāmetaṃ lokaṃ śraddadhānāḥ sacante | yad vāṃ pakvaṃ pariviṣṭamagnau tasya guptaye daṃpatī saṃ śrayethām

हिन्दी अर्थ

मे, स्वामी के शव के साथ दर करना होता हँ 1 इसलिये मृत्युकाल तक उन्हे सुरक्षित रखने का विधान हुश्रा है । एषणाए पुत्रैषणा, लौकंषणा, वाभेवो्ना -तरुणं स्तनस्युभिमं देवासो अमि हि दरंणोत ॥ ३७॥ नवाश्चमी पवंदिशा म भरासन बिछाता है। घृतादि द्वारा यज्ञ किया जाता है, भौर यज्ञ की समाप्ति निमित्तक सामगान कियां जाता है। साम- गान के ५ भवयव होते. है; हिकार, प्रस्ताव, उद्गीथ, प्रतिहार भौर ३२० भ्रथवेवेद-माष्य . कां १२। सु०३

English

they travel, May Indra light them up, poured in the vessel, lively and sted- fast, quickening living creatures.

अध्याय 12

श्लोक 3.8

दक्षि॑णां॒ दिश॑म॒भि नक्ष॑माणौ प॒र्याव॑र्तेथाम॒भि पात्र॑मे॒तत्।तस्मि॑न् वां य॒मः पि॒तृभिः॑ संविदा॒नः प॒क्वाय॒ शर्म॑ बहु॒लं नि य॑च्छात्

dakṣiṇāṃ diśamabhi nakṣamāṇau paryāvartethāmabhi pātrametat| tasmin vāṃ yamaḥ pitṛbhiḥ saṃvidānaḥ pakvāya śarma bahulaṃ ni yacchāt

हिन्दी अर्थ

मे पालन-पोषण करने वाला भ्राचायं (शयाते) निवास करे । (देवाः) जो कुछ (पचति) पकाती है, (जाये) है पत्नी ! (वा) या (पत्तिः त्वत् तिरः) पति तुक से छिप कर पकाता है, (तत्) उसे (सं सृजेथाम्) तुमं दोनों मिला दो, (वाम्) तुम दोनों का (तद् सह भ्रस्तु) वह कमं एकं साथ, हो जाय, (एकं लोक सह संपादयन्तौ) इस भरकार एक गृहस्थलोक का तुम . दोनों मिल कर सम्धादन करो । » ५ खाने के पात्र के (उप) समीप (हगरेधाम्) तुम दोनों बुलाशो, (नाभि

English

From heaven they come, they visit earth, and rising from earth unite themselves with air’s mid-region,

अध्याय 12

श्लोक 3.9

प्र॒तीची॑ दि॒शामि॒यमिद् वरं॒ यस्यां॒ सोमो॑ अधि॒पा मृ॑डि॒ता च॑ ।तस्यां॑ श्रयेथां सु॒कृतः॑ सचेथा॒मधा॑ प॒क्वान्मि॑थुना॒ सं भ॑वाथः

pratīcī diśāmiyamid varaṃ yasyāṃ somo adhipā mṛḍitā ca | tasyāṃ śrayethāṃ sukṛtaḥ sacethāmadhā pakvānmithunā saṃ bhavāthaḥ

हिन्दी अर्थ

सब चि माता-पिता के साथ मिल कर साथ-साथ भोजन किया . पद पठित है । नामि जानानाः== एक माता के पेंट से पैदा हुएु भ्रषने भराप कां० १२।सू०३ प्रथवेवेद-माष्य ३२१ धाः) जो (वसोः धाराः) दूष को धाराए, (मधुना प्रपीनाः) मधु

English

Purified, excellent, they with shine in beauty. Thus may they lead us to the world of Svarga. Yea, and supreme, alike in conformation, and brilliant and refulgent and immortal, As such, enjoined, well-guarding, water-givers, dress ye the

अध्याय 12

श्लोक 3.10

उत्त॑रं रा॒ष्ट्रं प्र॒जयो॑त्त॒राव॑द् दि॒शामुदी॑ची कृणवन्नो॒ अग्र॑म्।पाङ्क्तं॒ छन्दः॒पुरु॑षो बभूव॒ विश्वै॑र्विश्वा॒ङ्गैः स॒ह सं भ॑वेम

uttaraṃ rāṣṭraṃ prajayottarāvad diśāmudīcī kṛṇavanno agram| pāṅktaṃ chandaḥpuruṣo babhūva viśvairviśvāṅgaiḥ saha saṃ bhavema

हिन्दी अर्थ

दोर्षो का उपचार करना चाहिए । चवाग्नि की गमी की चञ्चल ज्वाला दारा स्वस्थ करना चाहिए । संकसुकः; = चस्वलः (उणा० २।३० = महषि शवाग्निः की चञ्चल हई ज्वाला । संकसुकः = सम् +-कसि (गतौ) । दई सी (देवयानः पथिभिः) वायुदेव के जाने-्राने के परो द्वारा (भ्रधराद्)

English

sickness. Rise up erect, cross over, my companions: the stream is stony that flows here before us. Abandon here the powers that were ungracious, and let us cross to powers benign and

अध्याय 12

श्लोक 3.11

ध्रु॒वेयं वि॒राण्नमो॑ अस्त्व॒स्यै शि॒वा पु॒त्रेभ्य॑ उ॒त मह्य॑मस्तु ।सा नो॑ देव्यदिते विश्ववार॒ इर्य॑ इव गो॒पा अ॒भि र॑क्ष प॒क्वम्

dhruveyaṃ virāṇnamo astvasyai śivā putrebhya uta mahyamastu | sā no devyadite viśvavāra irya iva gopā abhi rakṣa pakvam

हिन्दी अर्थ

(पुराणीः सरितः) पुरानी नदियां (नवाः) नया नया रूप धारण करक वृषभस्य = वृषु वर्षणे । देवयानः = वायु देव जिस श्रोर गति करता भा है 1 पीने तथा जलचिकित्सा के लिये वर्षा जल तथा पव॑त से उतरता जल उत्तम होता है । पृथिवौ पर बहता बहता मलिन हो जाता है । गरतः शारीरिक रोग है इसनिये इसका परिणाम है मासिभक्षक क्रव्याद्

English

189 friendly.

अध्याय 12

श्लोक 3.12

पि॒तेव॑ पु॒त्रान॒भि सं स्व॑जस्व नः शि॒वा नो॒ वाता॑ इ॒व वा॑न्तु॒ भूमौ॑ ।यमो॑द॒नं पच॑तो दे॒वते॑ इ॒ह तं न॒स्तप॑ उ॒त स॒त्यं च॑ वेत्तु

piteva putrānabhi saṃ svajasva naḥ śivā no vātā iva vāntu bhūmau | yamodanaṃ pacato devate iha taṃ nastapa uta satyaṃ ca vettu

हिन्दी अर्थ

२९० ¦ भरधर्ववेद-भाष्य कां १२। सु०२. इमं छन्यादा विवेशायं कर्यादमन्वगात् । उसका (हरामि) म संहार करता हं, (क्िवापरम्) जो शिव सेभ्रपर मर्थात् भिन्न है, भ्रशिव दहै ॥ ऋरव्यादु,-- यक्ष्मरोगरूप में रोगी भँ विष्ट हई है, जो किं रोगी के मांस का भक्षण करती रहती है, दमदानाग्नि के रूप मेँ प्रविष्ट नहीं हुई ।

English

Becoming pure and bright and purifying begin the Vaisvadevi strain for splendour.. May we rejoice, o’erpassing troublous places, with all our heroes through a hundred winters. On pathways swept by wind, directed upward, passing beyond the lower, on the higher,

अध्याय 12

श्लोक 3.13

यद्य॑त् कृ॒ष्णः श॑कु॒न एह ग॒त्वा त्सर॒न् विष॑क्तं॒ बिल॑ आस॒साद॑ ।यद् वा॑ दा॒स्या॒३र्द्रह॑स्ता सम॒ङ्क्त उ॒लूख॑लं॒ मुस॑लं शुम्भतापः

yadyat kṛṣṇaḥ śakuna eha gatvā tsaran viṣaktaṃ bila āsasāda | yad vā dāsyā3rdrahastā samaṅkta ulūkhalaṃ musalaṃ śumbhatāpaḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणशक्ति होती है, जिसं द्वारा वहु भरपने स्वरूप को बनाए रखने तथा विजयी करने मे सशक्त होता है । वणंन कवितामय है । . ि है, भौर (मनुष्याणाम्) मनुष्यो के (परिषिः) बाहर स्थिर होकर उन का धारण-पोषण करतौ है, भ्रौर (उमयान् भन्तरा) दोर्नो--रोयी होने बाले मनुष्य भ्रौर रोग,-को व्यवहित करती हुई (शिवः) रहती है १ पूवेक श्राहृतियो द्वारा रोग, मनुष्य +से दुर रहता है । सन्यासी है, देवकोरि के लोग । गाहेपत्य भगिनि इन की. आत्माभ्रो में भारोपित रहती है । यथाः-- .. सुगाहैपत्यो वितपन्नरांतिपुषाधंवां भेय॑सीं येदम ॥४५॥

English

Thrice seven times have the Rishis, the Departed, forced Mrityu backward with the fastened fetter.

अध्याय 12

श्लोक 3.14

अ॒यं ग्रावा॑ पृ॒थुबु॑ध्नो वयो॒धाः पू॒तः प॒वित्रै॒रप॑ हन्तु॒ रक्षः॑ ।आ रो॑ह॒ चर्म॒ महि॒ शर्म॑ यच्छ॒ मा दंप॑ती॒ पौत्र॑म॒घं नि गा॑ताम्

ayaṃ grāvā pṛthubudhno vayodhāḥ pūtaḥ pavitrairapa hantu rakṣaḥ | ā roha carma mahi śarma yaccha mā daṃpatī pautramaghaṃ ni gātām

हिन्दी अर्थ

जीवितो की (भ्रायुः प्रतिर) भ्रायु को बढा (येमृताः) जो मर गए वे इतने मे है कि हस मेदी गर्ह, पौष्टिक तथा भ्रारोग्यकारी भाहूतियो को यह सुफल करर देती है 1. पराभव करता हशर तु, .(एषाम्) इन के (ऊर्जम्) बल भ्रौर-पराणदविति को भ्रौर वेग होता हैँ । गाहंपत्य-म्रग्नि के यथोचितं सेवन से रोग के बल रादि

English

Effecting Mrityu’s footstep ye came hither, to further times pro- longing your existence, Seated, drive Mrityu to his proper dwelling: then may we, living, speak to the assembly. Let these unwidowed dames with goodly husbands adorn them- selves with fragrant balm and

अध्याय 12

श्लोक 3.15

वन॒स्पतिः॑ स॒ह दे॒वैर्न॒ आग॒न् रक्षः॑ पिशा॒चाँ अ॑प॒बाध॑मानः ।स उच्छ्र॑यातै॒ प्र व॑दाति॒ वाचं॒ तेन॑ लो॒काँ अ॒भि सर्वा॑न् जयेम

vanaspatiḥ saha devairna āgan rakṣaḥ piśācā~ apabādhamānaḥ | sa ucchrayātai pra vadāti vācaṃ tena lokā~ abhi sarvān jayema

हिन्दी अर्थ

(शरम्) जीर्णं-रीर्णं कर देने वाले रोग को (श्रपहत) दूर करो याउस का प्णंतया हनन फरो, (तेन) उस की कृपा हारा (खस्य) खरूपी रोग- करो या उसं का पूर्णतया हनन करो, रौर (परि पात) भपनी सबभ्रोर से, दारा-उसकी कृपा का श्राह्वान कर, दुःखो से छुटकारा पाने का यत्न करते (अनड्वाहम्). संसाररूपी शकट का वहन . करने वाली, (प्लवम्) भवसागर से तैराने वाली नौका रूप परमेष्वेर .का (धनु). निरन्तर णामी पाप से । (सवितुः) संसार के उत्पादक परमेर्वर रूपौ (एतां नावम्) !

English

unguent, Decked with fair jewels, tearless, sound and healthy, first let the dames go up to where he

अध्याय 12

श्लोक 3.16

स॒प्त मेधा॑न् प॒शवः॑ पर्य॑गृह्ण॒न् य ए॑षां॒ ज्योति॑ष्मां उ॒त यश्च॒कर्श॑ ।त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वता॒स्तान्त्स॑चन्ते॒ स नः॑ स्व॒र्गम॒भि ने॑ष लो॒कम्

sapta medhān paśavaḥ paryagṛhṇan ya eṣāṃ jyotiṣmāṃ uta yaścakarśa | trayastriṃśad devatāstāntsacante sa naḥ svargamabhi neṣa lokam

हिन्दी अर्थ

इ नौका पर (भ्रा रोहत) भ्रारोहण करो ताकि. (षद्भिः) छः (उर्वीभिः) रूपी च्ंकंट का वहन करने वाला परभेदवर । प्लवम् = नौका । परमेश्वर को २. खं. ८) । सवितुः नावम् = सविता रूपी नौका (विकल्पे षष्टी ) । भव्- सागर पे तैराने वाली नौका है परमेदवर, श्रौर . जिस भष्यात्म-अनज्ञानरूपी नदर्मे हेम गोतेखा रहै है, या बे जा रहे है, उस भ्रज्ञानूवीं नद से तैराने वाली है षट्-सम्पत्ति रूपी. छः नकारे । . ॑ (ब्रहोरात्रे) दिन-भौर-रातत (बिभ्रत्), सब कां भरण-पोषणर करता

English

lieth. I with oblation separate both classes, and with my prayer dis- part their several portions. I offer food that wastes not to the Fathers, a nd to these men give life of long duration.

अध्याय 12

श्लोक 3.17

स्व॒र्गं लो॒कम॒भि नो॑ नयासि॒ सं जा॒यया॑ स॒ह पु॒त्रैः स्या॑म ।गृ॒ह्णामि॒ हस्त॒मनु॒ मैत्वत्र॒ मा न॑स्तारी॒न्निरृ॑ति॒र्मो अरा॑तिः

svargaṃ lokamabhi no nayāsi saṃ jāyayā saha putraiḥ syāma | gṛhṇāmi hastamanu maitvatra mā nastārīnnirṛtirmo arātiḥ

हिन्दी अर्थ

किसी का भी विनाशकं नहीं है, सब को न्यायानुसार फलदेता है; या पलङ्ख । जैसे रात्रि के समय थके मनुष्य पलङ् पर भाराम पाते, ह, वैसे ह । इसी भावना के अनुसार वैदिक सादित्य मे परमेषवर को “उपस्तरण सदा पौरष कं तथा पुस्रषा्थं मे तत्पर रहता है । । देवेभ्य आ यन्ते. पापं जीवन्ति सवेदा । ˆ

English

That Agni, Fathers! who, himself immortal, hath entered and possessed our mortal bosoms, Even him I grasp and hold the God with me, Let him not hate us, may we never hate him.

अध्याय 12

श्लोक 3.18

ग्राहिं॑ पा॒प्मान॒मति॒ तां अ॑याम॒ तमो॒ व्यऽस्य॒ प्र व॑दासि व॒ल्गु।वा॒न॒स्प॒त्य उद्य॑तो॒ मा जि॑हिंसी॒र्मा त॑ण्डु॒लं वि श॑रीर्देव॒यन्त॑म्

grāhiṃ pāpmānamati tāṃ ayāma tamo vya'sya pra vadāsi valgu| vānaspatya udyato mā jihiṃsīrmā taṇḍulaṃ vi śarīrdevayantam

हिन्दी अर्थ

१. "्ह्योड्पेन अतरेत वि्ठान् लोतासि सर्वानि भयावहानि" ॥ २९४ भथर्ववेद-माष्य कां०.१२। सुभ पूर्णतया काट लेते है, वच्चित कर लेते है, रौर (संदा पापम्) सदा कष्ट- भिन्न कर देती है (इव) जसे कि (दवः) घोड़ा (नडम्) नड को छिन्न-भित्न

English

When ye have left the household fire, with the Corpse-eater southward go. Do that which is delightful to the Fathers, Brāhmans, and your- selves. Agni, the banqueter on flesh, not banished, for the eldest son

अध्याय 12

श्लोक 3.19

वि॒श्वव्य॑चा घृ॒तपृ॑ष्ठो भवि॒ष्यन्त्सयो॑निर्लो॒कमुप॑ याह्ये॒तम्।व॒र्षवृ॑द्ध॒मुप॑ यच्छ॒ शूर्पं॒ तुषं॑ प॒लावा॒नप॒ तद् वि॑नक्तु

viśvavyacā ghṛtapṛṣṭho bhaviṣyantsayonirlokamupa yāhyetam| varṣavṛddhamupa yaccha śūrpaṃ tuṣaṃ palāvānapa tad vinaktu

हिन्दी अर्थ

खाता रहता है, भ्रौर रोगी को भ्रन्त से दमशानाग्नि के सुपूरदं कर देता है (समासते) रल-मिल कर रहते है । (धनकाम्थाः) मौर घन की कामना वाले होते है, (ते वं) वे निदचय से (स्वंदा) सब जीवन काल तक (भरन्येषाम्) विहीन हो.जाते, भौर धनप्राप्तिकी कामना से दूसरों की प्राकलालाभं भोर (पिपतिषति) उडना चाहता है, परन्तु (मुहः) नार-बाद (पुनः)

English

Taketh a double share of wealth and spoileth it with poverty. What man acquires by plough, by war, all that he wins by toil of hand,

अध्याय 12

श्लोक 3.20

त्रयो॑ लो॒काः संमि॑ता॒ ब्राह्म॑णेन॒ द्यौरे॒वासौ पृ॑थि॒व्य॑१न्तरि॑क्षम्।अं॒शून् गृ॑भी॒त्वान्वार॑भेथा॒मा प्या॑यन्तां॒ पुन॒रा य॑न्तु॒ शूर्प॑म्

trayo lokāḥ saṃmitā brāhmaṇena dyaurevāsau pṛthivya1ntarikṣam| aṃśūn gṛbhītvānvārabhethāmā pyāyantāṃ punarā yantu śūrpam

हिन्दी अर्थ

है उन के समोप रोग रहते है । कुकमोँः द्वारा रोगनिरोष शक्ति कम हौ धेयम् भ्राहुः) तेरे भाग्यरूप में वैयलोग कहते है । (पिष्टाः माषाः) पीसे हए उरद जोकि (हव्यम्) खने योभ्य हवि (ते भागधेयम्) तेरे शवाग्नि क्रा परस्पर सहचार है (मन्व ५१), भरतः साहचयं के कारण (२) सीसमस्म, (३) चान्दी तथा सवेण निमित श्रौषर्घे, (४) .पिसे रद का भोजन तथा उस्र की आहूतियां, (४) तथा बड़ भ्ररण्यो के धने प्रदेयो कां की वायु स्वच्छ होती है .॥, भागवेयम् = एगध). 0650४,

English

Oft as a greedy beggar speaks the mortal who has brought distress, Those whom Carnivorous Agni close at hand runs after and detects.

अध्याय 12

श्लोक 3.21

पृथ॑ग् रू॒पाणि॑ बहु॒धा प॑शू॒नामेक॑रूपो भवसि॒ सं समृ॑द्ध्या ।ए॒तां त्वचं॒ लोहि॑नीं॒ तां नु॑दस्व॒ ग्रावा॑ शुम्भाति मल॒ग इ॑व॒ वस्त्रा॑

pṛthag rūpāṇi bahudhā paśūnāmekarūpo bhavasi saṃ samṛddhyā | etāṃ tvacaṃ lohinīṃ tāṃ nudasva grāvā śumbhāti malaga iva vastrā

हिन्दी अर्थ

मृत्यु की भग्निखूप "यक्ष्म को, या शवानि को, (निरादधौ) दरीरसे,या - इन निज शर्वितिरयो को, (दीर्घेण भरायुषा ) दीं रायु के साथ, (सं सजामि) म सम्बद्ध करता हूं । । ९, ५ के वेदनिदिष्ट जीवन मागं को जान कर, शरीर गृह में मानो पुनः भ्रविष्ट : हमरा है । वह पवित्रजीवन-विरोधी कर्मो का परित्याग करता है, प्रौर भरकों देवो भवति यदेनमर्चन्ति” (निदक्त ५।१।४) ।

English

When a dame’s husband dies the house is tangled fast in Grāhi’s net. A learned Brāhman must be sought to drive Carnivorous Agni, forth.

अध्याय 12

श्लोक 3.22

पृ॒थि॒वीं त्वा॑ पृथि॒व्यामा वे॑शयामि त॒नूः स॑मा॒नी विकृ॑ता त ए॒षा।यद्य॑द् द्यु॒त्तं लि॑खि॒तमर्प॑णेन॒ तेन॒ मा सु॑स्रो॒र्ब्रह्म॒णापि॒ तद् व॑पामि

pṛthivīṃ tvā pṛthivyāmā veśayāmi tanūḥ samānī vikṛtā ta eṣā| yadyad dyuttaṃ likhitamarpaṇena tena mā susrorbrahmaṇāpi tad vapāmi

हिन्दी अर्थ

कां० ९२।सु० ३ भ्रथववेद-माष्य २९७ यथाः-पतिपत्नी का एकासन पर बैठना; भूतपूव विवाह सम्बन्धी भरायुभ्रो की राज्य हारा स्वीकृति (१) विवाह से पूवं पारस्परिक भभिरुचि भादि (२) । देवयान सम्बन्धी कतव्यों का पालन (३-१२) । गृह्य उपकरणों की शुद्धि (१३-१५) । गृहस्य को स्वगं बनाना (१६) । पाणिग्रहण तथा पलनी का पति के अनुव्रता होना (१७) । गृहस्थ में परित्याग (२१) । तण्डुल पकाना (२२-३०) । - भोजनार्थं भ्रासन के लिये कृशा काट. कर लाना, सह मोजन भादि (३१-३३) । ६० वषं की भ्रायु होने पर गृह त्याग कर भ्राम परिवतंन होने परः सन्तानोत्यादने कमं त्याग करना (४१) भौर'गृही"ंत्यासी होना। "गृही संन्यासी होने की .योम्यता,--पति पत्नी मे परस्पर सहानुभूति तथा परिवार के, खव सवस्यो के प्रति . खमदृष्टि. (३९४०). ।. वसु: (दुष), मषु भौर घृत का सात्विक भोजन (४१) । गृह निधि की सुरकषा,. िविष,स्वर्म .

English

From any evil we have done, act of impurity or sin, Let waters purge me and from all that comes from Agni

अध्याय 12

श्लोक 3.23

जनि॑त्रीव॒ प्रति॑ हर्यासि सू॒नुं सं त्वा॑ दधामि पृथि॒वीं पृ॑थि॒व्या।उ॒खा कु॒म्भी वेद्यां॒ मा व्य॑थिष्ठा यज्ञायु॒धैराज्ये॒नाति॑षक्ता

janitrīva prati haryāsi sūnuṃ saṃ tvā dadhāmi pṛthivīṃ pṛthivyā| ukhā kumbhī vedyāṃ mā vyathiṣṭhā yajñāyudhairājyenātiṣaktā

हिन्दी अर्थ

समग्र लोगो के : प्रति कूमर् पृ, की. भावना-वेक सेवाः (४७.४८) । मेम . आवना (४९) ।.घर बुना वस्र ध्रारणः करना (५१) 4. भनृताषणे परि ल्वा (भर) “गृही संन्यासी की ्रे्टि ५३६० २९. । भरथरवंवेद-माष्य कां० १२। सु०३ (पुमान्) वृद्धि्ील है पुरुष ! तु (पुसः+) नर पशु के (चर्म) चमडे पर (श्रधितिष्ठ) बंठ, (एहि) भ्रा, (तत्र) उस पर बेठने के लिये (ह्यस्व) उसे बरुला (यतमा) इनमे से जो (ति) तेरी (प्रिया) प्रिया है ।

English

Breaker-up. By pathways travelled by the Gods these waters, well-knowing, from below have mounted upward.

अध्याय 12

श्लोक 3.24

अ॒ग्निः पच॑न् रक्षतु त्वा पु॒रस्ता॒दिन्द्रो॑ रक्षतु दक्षिण॒तो म॒रुत्वा॑न्।वरु॑णस्त्वा दृंहाद्ध॒रुणे॑ प्र॒तीच्या॑ उत्त॒रात् त्वा॒ सोमः॒ सं द॑दातै

agniḥ pacan rakṣatu tvā purastādindro rakṣatu dakṣiṇato marutvān| varuṇastvā dṛṃhāddharuṇe pratīcyā uttarāt tvā somaḥ saṃ dadātai

हिन्दी अर्थ

तुम दोनों की (तत् वयः) वह श्नायु (यमराज्ये) यमनियमों के पालन कराने वाले नियन्ता राजा के राज्य मँ (समानम्) मान सहित स्वीकृत है । विवाह सम्बन्धी प्रकरण है । विवाह के लिये वरवघू की आयुग्रों पूव वर-वघू में विवाह के लिये परस्पर प्रीति होनी चाहिए । अधिः शरीरं सचते यदधोऽध। पकान्मिश्ना सं मंवायः ॥२॥ उसी प्रकार बनी रहे, (वीर्याणि). वीयं शक्तियां (तति) उतनी ही बनी रहै, (तेजः) तेज (तावत्) उतना या उसी प्रकार का रुहे, (वाजिनानि)

English

High on the summit of the raining mountain the ancient rivers fresh and new are flowing. Drive off Carnivorous Agni, thou Agni who eatest not the flesh;. carry oblation paid to Gods.

अध्याय 12

श्लोक 3.25

पू॒ताः प॒वित्रैः॑ पवन्ते अ॒भ्राद् दिवं॑ च॒ यन्ति॑ पृथि॒वीं च॑ लो॒कान्।ता जी॑व॒ला जी॒वध॑न्याः प्रति॒ष्ठाः पात्र॒ आसि॑क्ताः॒ पर्य॒ग्निरि॑न्धाम्

pūtāḥ pavitraiḥ pavante abhrād divaṃ ca yanti pṛthivīṃ ca lokān| tā jīvalā jīvadhanyāḥ pratiṣṭhāḥ pātra āsiktāḥ paryagnirindhām

हिन्दी अर्थ

बल. (ततिषा) उतने ही प्रकार के बने रहे जसे कि ब्रह्मचर्याखम मे थे । (सचते) संगत हो जाय, जंसे कि (भगिनि ) भ्रम्नि (एषः) इन्वन को १. चर्मे-भरजिन या मृगछाल । "युस दवारा यह दर्शाया हैकितु भभिवृद्धि रील पुरषो पर भ्रषिष्ठ्ति हो, उन का गूखिया -बन । पुसः (पुस् भमिवधने) + कां० १२। सुऽ . प्रथवेवेद-माष्य . २६६

English

The Flesh-eater hath entered him: he hath pursued the Flesh- eater. Making two tigers different-wise, I bear away the ungracious one. He who holds Gods within himself, the rampart and defence of men,

अध्याय 12

श्लोक 3.26

आ य॑न्ति दि॒वः पृ॑थि॒वीं स॑चन्ते॒ भूम्याः॑ सचन्ते॒ अध्य॒न्तरि॑क्षम्।शु॒द्धाः स॒तीस्ता उ॒ शुम्भ॑न्त ए॒व ता नः॑ स्व॒र्गम॒भि लो॒कं न॑यन्तु

ā yanti divaḥ pṛthivīṃ sacante bhūmyāḥ sacante adhyantarikṣam| śuddhāḥ satīstā u śumbhanta eva tā naḥ svargamabhi lokaṃ nayantu

हिन्दी अर्थ

भ्त्येक के परिपक्व शरीर से (मिना) बाल-बालिकाएं (संमवाथः) सदुश ही रहते है, भ्रौर उन के तेज भादि पूरवंवत् बने रहते है । सम॑सिरछोके समु देवयाने सं स्मा समेतं यमराज्यैषु बुलाया करो, (यद् यद्) जो जो सन्तान कि (वाम्) तुम दोनों के (रेतः भ्रधि) रजनवीयं से (संबभूव) उत्पन्न हई है । पकारी हो कर, - (जीवधन्याः) जीवलोकं में भ्रपने-म्राप को घन्य सममे. के भाई-बहन की (जनित्री) जननी (पचति). परिपक्व करती रहती है ।

English

Agni, the sacred household fire, hath come and stands between them both. Prolong the lives of those who live, O Agni, Let the dead go unto world of Fathers.

अध्याय 12

श्लोक 3.27

उ॒तेव॑ प्र॒भ्वीरु॒त संमि॑तास उ॒त शु॒क्राः शु॒च॑यश्चा॒मृता॑सः ।ता ओ॑द॒नं दंप॑तिभ्यां॒ प्रशि॑ष्टा आपः॒ शिक्ष॑न्तीः पचता सुनाथाः

uteva prabhvīruta saṃmitāsa uta śukrāḥ śucayaścāmṛtāsaḥ | tā odanaṃ daṃpatibhyāṃ praśiṣṭā āpaḥ śikṣantīḥ pacatā sunāthāḥ

हिन्दी अर्थ

कमं भान .कर भ्रपः को. “अपः” “भं -पिवित्तित. किया है । ३०० अयरवेवेद-माष्य कां० १२। सूु०-३ मन्वे मे बुजुगं ्रपने पुत्रो को उपदे देताहैकि (१) तुम ्रपने भाप को धन्य समो कि इस जीवलोक में तुम्हँ मनुष्य जन्म मिला है; (२) परस्पर भिल कर इस जीवलोक मे जीवनो को सफल. बनाभ्रो; (३) पर- मेष्वर का भजन किया करो, (४) सदा भ्रमृत परमेदवर का भजन किया करो, म॑रन वाले का नहीं; (५) परमेदवर का भजन करते हए, जैसे शारीरिक भोजन के लिये भ्रोदन का सेवन करते हो, व॑से भरात्मिक भोजन

English

As goodly household fire burn up Arāti; give this man dawn brighter than all the mornings. Subduing all our adversaries, Agni, give us their food, their strength and their possessions. Grasp ye this Indra, furtherer, satisfier: he will release you from disgrace and trouble.

अध्याय 12

श्लोक 3.28

संख्या॑ता स्तो॒काः पृ॑थि॒वीं स॑चन्ते प्राणापा॒नैः संमि॑ता॒ ओष॑धीभिः ।असं॑ख्याता ओ॒प्यमा॑नाः सु॒वर्णाः॒ सर्वं॒ व्याऽपुः॒ शुच॑यः शुचि॒त्वम्

saṃkhyātā stokāḥ pṛthivīṃ sacante prāṇāpānaiḥ saṃmitā oṣadhībhiḥ | asaṃkhyātā opyamānāḥ suvarṇāḥ sarvaṃ vyā'puḥ śucayaḥ śucitvam

हिन्दी अर्थ

प्रकट होता है, जो गायत्री का अधिपति हृश्रा है । जिस में 'विदव का निरू- मृत्यु के नद को (भ्रतितराणि) मै तैर जाऊ 1 । क - (रिप्रात्) षाप से (च वाचः शमलात्) भ्रौर वाणी केमलसे (पिता, यमू, पचति) पिता जिस भ्रोदनं नामक परमेश्वर को निज जीवन मे योगाभ्यासं द्वारा परिपक्व करता टै, (यं च माता) भ्रौर जिसे धारः) सको का घारण-पोषण करता, या सैको भानन्द धाराप्नो को

English

With him drive back the shaft that flies against you, with him. ward off the missile shot by Rudra.

अध्याय 12

श्लोक 3.29

उद्यो॑धन्त्य॒भि व॑ल्गन्ति त॒प्ताः फेन॑मस्यन्ति बहु॒लांश्च॑ बि॒न्दून्।योषे॑व दृ॒ष्ट्वा पति॒मृत्वि॑यायै॒तैस्त॑ण्डु॒लैर्भ॑वता॒ समा॑पः

udyodhantyabhi valganti taptāḥ phenamasyanti bahulāṃśca bindūn| yoṣeva dṛṣṭvā patimṛtviyāyaitaistaṇḍulairbhavatā samāpaḥ

हिन्दी अर्थ

निज भ से (उभे नभसी) वह दोनों भूलोक श्रौर बुलोक मे. (व्याप) कां० १२। घु०.३ - भरयवेवेद-भाष्य . ३०१. कैलियेकि हम जैसे शारीरिक भख की शान्ति के लिये प्राकृतिक -भरोदनं का सेवन करते वैसे भ्राष्यात्मिक भूल की दान्ति के लिये, तथा मानसिक पाष

English

Seize with firm hold the Ox who boundeth forward: he will uplift you from disgrace and trouble. Enter this ship of Savitar; let us flee from poverty over all the six expenses.

अध्याय 12

श्लोक 3.30

उत्था॑पय॒ सीद॑तो बु॒ध्न ए॑नान॒द्भिरा॒त्मान॑म॒भि सं स्पृ॑शन्ताम्।अमा॑सि॒ पात्रै॑रुद॒कं यदे॒तन्मि॒तास्त॑ण्डु॒लाः प्र॒दिशो॒ यदी॒माः

utthāpaya sīdato budhna enānadbhirātmānamabhi saṃ spṛśantām| amāsi pātrairudakaṃ yadetanmitāstaṇḍulāḥ pradiśo yadīmāḥ

हिन्दी अर्थ

बनाना, भौर जरावस्था मे पुत्रों के साथ गृहस्थ. मे मघुर जीवनं व्यतीत ३०२ भरथरववेद-माष्य कां१२।सु०३ . गुप्तये) -उस कमं को सुरक्षित करने के लिये, (दम्पती) है धर केतुम दोनों स्वामी ! (संश्चयेथाम्) परस्पर मिल कर रहो । गृहस्थं का सेवन शवद्धा से करना चाये, केवल शारीरिक भोग क लिये नही, भौर देनिक धर्मकृत्यं का विलोप न होने देना चाहिए ।

English

Long bearing undiseased and happy sleepers, be ours, O Bed, with smell of man about thee, They sever from the Gods, they live in sin and misery evermore, Those whom from very near at hand Carnivorous Agni casteth down as a horse tramples

अध्याय 12

श्लोक 3.31

प्र य॑च्छ॒ पर्शुं॑ त्व॒रया ह॑रौ॒समहिं॑सन्त॒ ओष॑धीर्दान्तु॒ पर्व॑न्।यासां॒ सोमः॒ परि॑ रा॒ज्यं ब॒भूवाम॑न्युता नो वी॒रुधो॑ भवन्तु

pra yaccha parśuṃ tvarayā harausamahiṃsanta oṣadhīrdāntu parvan| yāsāṃ somaḥ pari rājyaṃ babhūvāmanyutā no vīrudho bhavantu

हिन्दी अर्थ

दिक्षा, प्रतीची दिशा उत्तर, तथा घरूवा का वर्णन है । ये दिशाए भी जीवन सम्बन्धी निदो को सूचित करती है । ये दिश्ाए । ((शकाणवा एणाः) दक्षिणायन को संचित नहीं करतीं । दोनों का (यमः) नियन्ता बुजुर्ग, (पित्रभिः) धर के पितरों के साथ हो जाते है, देवमागे से च्युत हो जाते है 1 भरतः उन्हँ कहा कि इस, वुद्धि- करने म सहायता दे कर धर का बुजुर्ग, श्रन्य पितरो. पराम ले कर तुम्हे बहुत सुख सामध्री प्रदान करतार । -्राची है देवमागे भौर दक्षिणा

English

down the reeds. The faithless, who from lust of wealth abide with him who feeds on flesh,

अध्याय 12

श्लोक 3.32

नवं॑ ब॒र्हिरो॑द॒नाय॑ स्तृणीत प्रि॒यं हृ॒दश्चक्षु॑षो व॒ल्ग्वऽस्तु ।तस्मि॑न् दे॒वाः स॒ह दै॒वीर्वि॑शन्त्वि॒मं प्राश्न॑न्त्वृ॒तुभि॑र्नि॒षद्य॑

navaṃ barhirodanāya stṛṇīta priyaṃ hṛdaścakṣuṣo valgva'stu | tasmin devāḥ saha daivīrviśantvimaṃ prāśnantvṛtubhirniṣadya

हिन्दी अर्थ

कां० .१२। सू०३ भ्रथवंवेद-भाष्य ३०३ है पितृमाग । इस उपयु क्त अभिप्राय को दनि के लिये मन्व मे यम भ्रौर पितरों का वर्णन हृभरा है । - परिपक्व योगाभ्यास से (सं भवाथः) परस्पर मिलकर नवजोवन वारण ्रतीची दिला हास को सुचित करती है । सूयं प्राची से उदित होता; मध्याकाश तक चदृता जाता, तत्पदइचात् पदिचम की श्रोर

English

For ever set upon the fire an alien caldron, not their own. Forward in spirit would he fly, and often turns he back again, Whomso Carnivorous Agni from anear discovers and torments.

अध्याय 12

श्लोक 3.33

वन॑स्पते स्ती॒र्णमा सी॑द ब॒र्हिर॑ग्निष्टो॒भैः संमि॑तो दे॒वता॑भिः ।त्वष्ट्रे॑व रू॒पं सुकृ॑तं॒ स्वधि॑त्यै॒ना ए॒हाः परि॒ पात्रे॑ ददृश्राम्

vanaspate stīrṇamā sīda barhiragniṣṭobhaiḥ saṃmito devatābhiḥ | tvaṣṭreva rūpaṃ sukṛtaṃ svadhityainā ehāḥ pari pātre dadṛśrām

हिन्दी अर्थ

है । यही परिस्थिति चारीरिक जीवन मं शरीर कीदटै.। ४० वर्षोकरी भ्रायु के पर्चातू शरीर मं परिहाणि का प्रारम्भ ही जाता है, मानो शरीर परिचम की भ्रोर.ढलकता जाता है । इस ठलकते काल मे, वीर्यं का प्रयोग , विना योगाभ्यास में सफलता नहीं मिलती । इसलिये योगददयन में वीयं दारा द्योतित जीवन यापन के परचात् ठलकती भ्रायु ममे जीवन को शान्त बना कर, योगाभ्यास करना चाहिए । . इस -ढलकती भ्रायु ममे सोम पालक भ्रौर सुखदायी होता है । इस भायु मे सुकमियों के साथ सम्पकं करते हुए ३०४ भरथवेवेद-माष्य । कां० १ २ । सू० ३ (विद्वः) सब के साथ मिल कर (विरवाङ्गैः सह) खब भ्रङ्खों सहित

English

Among tame beasts the black ewe is thy portion, and the bright lead is thine, they say, Flesh eater! Mashed beans have been assigned thee for oblation go seek the dark wood and the

अध्याय 12

श्लोक 3.34

ष॒ष्ट्यां श॒रत्सु॑ निधि॒पा अ॒भीच्छा॒त् स्वःऽ प॒क्वेना॒भ्यश्नवातै ।उपै॑नं जीवान् पि॒तर॑श्च पु॒त्रा ए॒तं स्व॒र्गं ग॑म॒यान्त॑म॒ग्नेः

ṣaṣṭyāṃ śaratsu nidhipā abhīcchāt svaḥ' pakvenābhyaśnavātai | upainaṃ jīvān pitaraśca putrā etaṃ svargaṃ gamayāntamagneḥ

हिन्दी अर्थ

मन्व ९ में सुकमोँ के करने का वणन हुभ्रा है । सुकमों दवारा उक्कृष्ट सा नौ देव्यदिते विश्ववार इय इव गोपा अमि रस पक्वम् ॥११॥ (इयम्) यह (धवा) गतिश्षील तो भी स्थिररूप पृथिवी (विराट्) भरखण्डित, (विवकार) तथा सबं वरणीय वस्तुप्रो वालो मातृभूमि 1. (सा).

English

wildernesses. I sought the rustling sugar-cane, white Seasamum, and cane and reed. I made this Indra’s fuel, and the Fire of Yama I removed.

अध्याय 12

श्लोक 3.35

ध॒र्ता ध्रि॑यस्व ध॒रुणे॑ पृथि॒व्या अच्यु॑तं त्वा दे॒वता॑श्च्यावयन्तु ।तं त्वा॒ दंप॑ती॒ जीव॑न्तौ जी॒वपु॑त्रा॒वुद् वा॑सयातः॒ पर्य॑ग्नि॒धाना॑त्

dhartā dhriyasva dharuṇe pṛthivyā acyutaṃ tvā devatāścyāvayantu | taṃ tvā daṃpatī jīvantau jīvaputrāvud vāsayātaḥ paryagnidhānāt

हिन्दी अर्थ

कर (इब) जसे कि (दर्यः) जलों का स्वामी (गोषाः) पृथिवीति (पक्वम्) पकी खेती की रक्षा करता है । वासियों को पृ्र कहने. से पृथिवी कोमाता है। माताके प्रति नमस्कार नही, भरपितु एक सार्वेमौम महाराजा के साथ -सम्बद्ध; सव माण्डलिक राजा होने चाहिए । भ्रतिथिः पृथिवी नाम (तिषं. १,१) । दयः इरा- (जलम्) कां० १२। सु०३ अयवेवेद-मष्य ३०५

English

Against the sinking western Sun I set them; each sundered path, knowing my way, I entered. I have warned off the ghosts of the Departed: to these I give the boon of long existence.

अध्याय 12

श्लोक 3.36

सर्वा॑न्त्स॒मागा॑ अभि॒जित्य॑ लो॒कान् याव॑न्तः॒ कामाः॒ सम॑तीतृप॒स्तान्।वि गा॑हेथामा॒यव॑नं च॒ दर्वि॒रेक॑स्मि॒न् पात्रे॒ अध्युद्ध॑रैनम्

sarvāntsamāgā abhijitya lokān yāvantaḥ kāmāḥ samatītṛpastān| vi gāhethāmāyavanaṃ ca darvirekasmin pātre adhyuddharainam

हिन्दी अर्थ

यमोदनं पच॑तो देवतं इह तं नस्तप उत सत्यं च॑ वे ॥१२॥ (पिता इव पुत्रान्) पिता जेते पुत्रो का, वसे है भरोदन परमेख्वर! भूमि मे (नः) हमारे लिये (शिवाः वाताः) शुभ वायुं तुम्हारी पासे (वान्तु) बह । (देवते) देवतास्वलू्प पति-पत्नी (इह) दस गृह मे (यम् भ्रोदनमु) जिस परमेश्वर को (पचतः) परिपक्व करते हँ (तम्) उस परमेरवर को (नः) हमारा (तपः) तप (च) भौर (सत्यम्) सत्यमय जीवन (विततु) भोदनम् = परमेदबर को, (देखो मन्त्र ४) । पचतः योगाभ्यास.

English

An accompaniment to the preparation and presentation of sacrificial offerings by a householder and his wife, with prayer for prosperity and happiness on earth and in heaven Mount, male from male, the skin. Go thither: summon those whom thou lovest, one and all,

अध्याय 12

श्लोक 3.37

उप॑ स्तृणीहि प्र॒थय॑ पु॒रस्ता॑द् घृ॒तेन॒ पात्र॑म॒भि घा॑रयै॒तत्।वा॒श्रेवो॒स्रा तरु॑णं स्तन॒स्युमि॒मं दे॑वासो अभि॒हिङ्कृ॑णोत

upa stṛṇīhi prathaya purastād ghṛtena pātramabhi ghārayaitat| vāśrevosrā taruṇaṃ stanasyumimaṃ devāso abhihiṅkṛṇota

हिन्दी अर्थ

यहां भ्रा कर (बिले) बिल सदृश सुरक्षादायकं हमारे घरमे (्रासमाद) दासी (उलूखलं मुसलम्) उलूखल श्रौ र॒मुसल को (समञ्क्त) गीला कर देती है, तो (भ्रापः) है जलो ! (शुम्मत) उन्हें शुद्ध कर दो । कौश्रा विष्ठा खाता तथा विष्ठा के समीप बैठतादहै। धर मेभ्रा भ्राशद्ा रहती है, हसी रकार 'दौसी के साथ से टपकते जल बृन्दों दारा उलूखल (1101127) अर मुसल (6816) के भी श्रपवित्र हो जाने पर ३०६ ॥ि अथवेवेद-माष्य कां० १२। सु ३

English

to meet thee, Strong as ye were when first ye met each other, still be your strength the same in Yama’s

अध्याय 12

श्लोक 3.38

उपा॑स्तरी॒रक॑रो लो॒कमे॒तमु॒रुः प्र॑थता॒मस॑मः स्व॒र्गः ।तस्मिं॑छ्रयातै महि॒षः सु॑प॒र्णो दे॒वा ए॑नं दे॒वता॑भ्यः॒ प्र॑च्यछान्

upāstarīrakaro lokametamuruḥ prathatāmasamaḥ svargaḥ | tasmiṃchrayātai mahiṣaḥ suparṇo devā enaṃ devatābhyaḥ pracyachān

हिन्दी अर्थ

विटेमिनः विनष्ट नही होते । बिले बिल, बिलवासियों को. सुरक्षा प्रदान के पापया कृष्टको (मा निगाताम्) न प्राप्त हों। कौए. से प्राप्त हो सकने वाली कौटाणख्यी अंपवित्रता का निदेशो किया है । कीटाणु पु्रहत्या के कारणीभरूव हो सकते हँ । अन्नामाव द्वारा मी पुत्र हत्या होती है, इस कारण का निषेव “वयोधाः” शब्द द्वारा दर्चया है । इस द्वारा श्रल्न के अभाव को सुचित किया है । वयः भनन्ननाम - (निं २1७) । “ग्रावा” पतत्र का बना हैया लकड़ी का-यह सन्दिग्धरहै। वनस्पतिः सह देवेन आगन रक्षः पिशाचं अंप बाध॑मानः स उच्छयातै भ व॑दाति वाचं तन॑ छोकां मि सर्वान् जयेम ॥१५॥ (देवैः सह) दिग्ययुणों वाला (वनस्पतिः) वृक्ष-नि्मित मुसलं (नः

English

kingdom. So strong your sight, so many be your powers, so great your force, your energies so many, When fire attends the body as its fuel, then may, ye gain full chargers, O ye couple.

अध्याय 12

श्लोक 3.39

यद्य॑ज्जा॒या पच॑ति॒ त्वत् प॒रःप॑रः॒ पति॑र्वा जाये॒ त्वत् ति॒रः ।सं तत् सृ॑जेथां स॒ह वां॒ तद॑स्तु संपा॒दय॑न्तौ स॒ह लो॒मेक॑म्

yadyajjāyā pacati tvat paraḥparaḥ patirvā jāye tvat tiraḥ | saṃ tat sṛjethāṃ saha vāṃ tadastu saṃpādayantau saha lomekam

हिन्दी अर्थ

म्नौर पिष्ठार्चो को दूर करता है (सः) वहे (उच्छयात) ऊपर कीं भोर उठे भ्रौर नीचे की शौर भराता हृभ्रा ८६०. भ्र वदाति) भावाज करे 1 (तेन) उस के सहारे मानो (सर्वान् अभि जयेम) सब लोको पर “वनेस्पति"" ठार मखल का वर्णेन किया है। मूसंस एसे वक्ष की कां १२।सु०्२३ भथववेद-भाष्व ३ ०७ लकड़ी का होना चाहिए जो कि रोगनिवारक हो । रक्षः=वे रोग या रोग- हमारे मृहस्थों को स्वर्गीय करे ।

English

Together in this world, in God-ward pathway, together be ye in the realms of Yama. Invite, made pure with means of purifying, whatever seed of yours hath been developed.

अध्याय 12

श्लोक 3.40

याव॑न्तो अ॒स्याः पृ॑थि॒वीं सच॑न्ते अ॒स्मत् पु॒त्राः परि॒ ये सं॑बभू॒वुः ।सर्वां॒स्तां उप॒ पात्रे॑ ह्वयेथां॒ नाभिं॑ जाना॒नाः शिश॑वः स॒माया॑न्

yāvanto asyāḥ pṛthivīṃ sacante asmat putrāḥ pari ye saṃbabhūvuḥ | sarvāṃstāṃ upa pātre hvayethāṃ nābhiṃ jānānāḥ śiśavaḥ samāyān

हिन्दी अर्थ

परावः वेद की दष्ट मे ५ प्रकार के पशु भ्रधिक उपयोगी मान कर उन्हें ५ विभागों में विभक्त किया है। यथा “तवेमे पञ्च पावो गृहस्थरूपी स्वगे लोक की भ्रोर (नयासि) ले.-चल, ताकिं हम (जायया). है। गृहस्थधारण कर श्रदानी न. होना चाहिए । भ्रदानभावना के होते (तमः) तामसिक भावना को (व्यस्य) इटा कर (वल्गु) मनोहरः (घर वदासि वचन बोला केर । (वानस्पत्य) . है वनस्पति के बने मुसल !. (उद्यतः) ऊपर की भोर उठता हृभरा, उद्यम करता हृश्रा तु (मा जिहिसीः) तण्डुल

English

cooking. That Odana with hundred streams, sky-reaching, hath in its might prevaded earth and heaven.

अध्याय 12

श्लोक 3.41

वसो॒र्या धारा॒ मधु॑ना॒ प्रपी॑ना घृ॒तेन॑ मि॒श्रा अ॒मृत॑स्य॒ नाभ॑यः ।सर्वा॒स्ता अव॑ रुन्धे स्व॒र्गः ष॒ष्ट्यां श॒रत्सु॑ निधि॒पा अ॒भीच्छात्

vasoryā dhārā madhunā prapīnā ghṛtena miśrā amṛtasya nābhayaḥ | sarvāstā ava rundhe svargaḥ ṣaṣṭyāṃ śaratsu nidhipā abhīcchāt

हिन्दी अर्थ

कौ चूरा-चूरान कर, (मा) रौर न (विशरी) इसे तोड्,. (देवयन्तम्) केयोकिं पकं कर दस ने माता, पिता, भतिथि भरादि देवं की सेवाके कट्वचन तामसिक भावना के परिणाम होते है । गृहादि कृत्यो के . कां०.१२। सू० ३ भ्रथ्ववेद-मष्य ३९९

English

Live with your sons, when life on earth is ended, live in the sphere most rich in light and sweetness. In skies that have been won by sacrificers make both the worlds, earth, heaven, your

अध्याय 12

श्लोक 3.42

नि॒धिं नि॑धि॒पा अ॒भ्येऽनमिच्छा॒दनी॑श्वरा अ॒भितः॑ सन्तु॒ ये॒३न्ये।अ॒स्माभि॑र्द॒त्तो निहि॑तः स्व॒र्गस्त्रि॒भिः काण्डै॒स्त्रीन्त्स्व॒र्गान॑रुक्षत्

nidhiṃ nidhipā abhye'namicchādanīśvarā abhitaḥ santu ye3nye| asmābhirdatto nihitaḥ svargastribhiḥ kāṇḍaistrīntsvargānarukṣat

हिन्दी अर्थ

समय मुसल का प्रहार एेसा करना चाद्ये करि न तो तण्डूलं काः म्राटा कने हे तण्डल ! (विदवव्यचाः) सब को प्राप्त होने वाला, (सयोनिः) (एतं लोकम्) इस देवलोक. को (उप याहि) प्राप्तहो । हेग कर, पकड, (तद्) वह छाज (तुषं पलावान्) तुषो श्रौर तिनको को (भप विनक्तु) छांट कर तण्ड्लों से पृथक् करे । रन्न पर सब प्राणियों का श्रधिक्रार है। सयोनिः =स+-योनिः (उदक नाम,

English

habitation. Approach the eastern, yea: the eastern region, this is the sphere to which the faithful turn

अध्याय 12

श्लोक 3.43

अ॒ग्नी रक्ष॑स्तपतु॒ यद् विदे॑वं क्र॒व्याद् पि॑शा॒च इ॒ह मा प्र पा॑स्त ।नु॒दाम॑ एन॒मप॑ रुध्मो अ॒स्मदा॑दि॒त्या ए॑न॒मङ्गि॑रसः सचन्ताम्

agnī rakṣastapatu yad videvaṃ kravyād piśāca iha mā pra pāsta | nudāma enamapa rudhmo asmadādityā enamaṅgirasaḥ sacantām

हिन्दी अर्थ

धृत मिला कर देवो के निवास स्थानों पर पह चा कर उन कौ सेवा करना जयां लोकाः सेबिता त्राह्ंणेन चोरेषासो पथिः न्तरम् । लोक (संमिता) सम्यक्तया जाने ।हृए होते रै, (्रसौ यौः) वह चुलोक, किया है । माता, पिता, श्राचायं, भ्रतिथि तो सेवनीय देव रै ही, परन्तु.

English

them, Your cooked oblation that in fire was offered, together, wife and husband, meet to guard it. Now, as your steps approach the southern quarter, move in. your circling course about this

अध्याय 12

श्लोक 3.44

आ॒दि॒त्येभ्यो॒ अङ्गि॑रोभ्यो॒ मध्वि॒दं घृ॒तेन॑ मि॒श्रं प्रति॑ वेदयामि ।शु॒द्धह॑स्तौ ब्राह्म॒णस्यानि॑हत्यै॒तं स्व॒र्गं सु॑कृता॒वपी॑तम्

ādityebhyo aṅgirobhyo madhvidaṃ ghṛtena miśraṃ prati vedayāmi | śuddhahastau brāhmaṇasyānihatyaitaṃ svargaṃ sukṛtāvapītam

हिन्दी अर्थ

जाता है तो कतिपय तेण्डल टूट जाते है, उन करणो को लेकर छाज द्वारा पुनः छट लेना चाहिए । संमिाः= सम्+ मिताः (ज्ञाताः) । ३१० भयर्वेवेद-माष्य कां० १२। सु०३ (पशुनां स्पाणि) षुभ के रूप (वहुधा पृथक्) बहुत कर के पृथक् एकरूप हो जाता है। (एतां लोहिनीं त्वचम्) इस लोहिनी त्वचा को

English

vessel. Herein, accordant with the Fathers, Yama shall mightily protect your cooked oblation.

अध्याय 12

श्लोक 3.45

इ॒दं प्राप॑मुत्त॒मं काण्ड॑मस्य॒ यस्मा॑ल्लो॒कात् प॑रमे॒ष्ठी स॒माप॑ ।आ सि॑ञ्च स॒र्पिर्घृ॒तव॒त् सम॑ङ्ग्ध्ये॒ष भा॒गो अङ्गि॑रसो नो॒ अत्र॑

idaṃ prāpamuttamaṃ kāṇḍamasya yasmāllokāt parameṣṭhī samāpa | ā siñca sarpirghṛtavat samaṅgdhyeṣa bhāgo aṅgiraso no atra

हिन्दी अर्थ

शुम्भाति) उस को शुभ्र रूप करे, (इव) ज॑से कि(मलगः) वस्त्रौ के मल को पशुग्रो मे पुरुष भी पयु. है,“ तवेमे पञ्च पशवो विभक्ता गावो अवा पुरषाः भ्रजावयः”” (भ्रथवं ° ११।२।९) । पुरुष भी नाना रूप होता है, कभी तामसिकं रूप कभी राजसिक रूप, ्रौर कभी सात्विक रूप । जीवात्मा करई कोर्शोसे धिरा हूभ्राहै, जिनमें दो मुख्य रहै, (१) एक शरीर जिते कि (३) दूसरी त्वचा को भी “लोहिनो त्वचा” कहा है । यह् है रजोगुण वाली मनोरूप त्वचा । मनोरूप-त्वचा प्रायः पुरुषो में रजोगुणी" होती है । रजोगुण का घमं है क्रियाशीलता । जागते-सोते मन सदा क्रियारील रहता है । रूप श्रौर रजोखूप भलों को सदूगुरं घो डालता है । मलगः==मलं गमयति,

English

Best of the regions is indeed this western wherein the King and gracious Lord is Soma. Thither resort for rest, follow the pious. Then gain the laden chargers, O ye couple. Ever victorious is the northern region: may the east quarter set us first and foremost.

अध्याय 12

श्लोक 3.46

स॒त्याय॑ च॒ तप॑से दे॒वता॑भ्यो नि॒धिं शे॑व॒धिं परि॑ दद्म ए॒तम्।मा नो॑ द्यू॒तेऽव गा॒न्मा समि॑त्यां॒ मा स्मा॒न्यस्मा॒ उत् सृ॑जता पु॒रा मत्

satyāya ca tapase devatābhyo nidhiṃ śevadhiṃ pari dadma etam| mā no dyūte'va gānmā samityāṃ mā smānyasmā ut sṛjatā purā mat

हिन्दी अर्थ

अपाकरोति, अरपगमग्रति-धोधी । प्रावा = गुरः, गृणातेः (निक्त ९।१।६); तण्डल व्रीहि से निकलते है । व्रीहि के नाना शूप होते है । व्रीहि को २: रजोगुण को “लोहितं” मी कटैते है, यथा “प्रथामेकां लोहितसुक्ल- कां० १२।सु०३ अथववेद-माष्य ३११. तण्डुल नाना प्रकारके होते है, भ्रौर उनके दाम भ इस लिये भरलग-परलग घान को कटा, छांटा जाता है तो सब प्रकार के तण्डुल एक रूप हो जाते रैः

English

The Man became the five-divisioned metre. May we abide wit . all our members perfect. This stedfast realm is Queen. To her be homage! To me and to my sons may she be gracious.

अध्याय 12

श्लोक 3.47

अ॒हं प॑चाम्य॒हं द॑दामि॒ ममेदु॒ कर्म॑न्क॒रुणेऽधि॑ जा॒या।कौमा॑रो लो॒को अ॑जनिष्ट पु॒त्रो॒३न्वार॑भेथां॒ वय॑ उत्त॒राव॑त्

ahaṃ pacāmyahaṃ dadāmi mamedu karmankaruṇe'dhi jāyā| kaumāro loko ajaniṣṭa putro3nvārabhethāṃ vaya uttarāvat

हिन्दी अर्थ

शुभ्र रूप हो जाते है इन कौ पहली. तचा भर्थात् भावृरण लोहिनी रयात् रोही होती है । इस त्वचा के होते बीज का जन्म होता है, पौदा पदा होता है ( खह बीजजन्मनि ) । दूसरी त्वचा ठण्डल क साथ चिपकी होती रह । एकरूप, शुभ्ररूप हो -जाता है 1. तण्डूल पक्ष मे “रावा है चक्कीका पाट उसे तण्डलरूप - पदान करता . है ! यथा “वरीहोनवहन्ति (खतपथ

English

Guard thou, O Goddess Aditi, all-bounteous, our cooked oblation as an active warder. Embrace us as a father clasps his children. Here on the Earth let kindly breezes fan us. 191

अध्याय 12

श्लोक 3.48

न किल्बि॑ष॒मत्र॒ नाधा॒रो अस्ति॒ न यन्मि॒त्रैः स॒मम॑मान॒ एति॑ ।अनू॑नं॒ पात्रं॒ निहि॑तं न ए॒तत् प॒क्तारं॑ प॒क्वः पुन॒रा वि॑शाति

na kilbiṣamatra nādhāro asti na yanmitraiḥ samamamāna eti | anūnaṃ pātraṃ nihitaṃ na etat paktāraṃ pakvaḥ punarā viśāti

हिन्दी अर्थ

(त्वा पृथिवीम्) तुक पृथिवी रूप को (पृथिव्याम् भावयामि) पृथिवी पर ओ स्थापित करता हू, (तनूः खमानी) तुम दोनों का स्वरंस्म समान है, (एषा) यह उचा तथा कुम्भी. मन्व २३ (ते) है पृथिवी! तेरा (लिखितम्) क्षत हृभा है (तेन) उस से (यु्लोः मा) तु लवित न होऽनू मठ, (वद् भ्रपि) उस को भी ब्ह्यणाः) वेदानुसार (वपामि) ठोक कर देता हूं । उखा भौर कुम्भी को भग्नि मे पकाया ऋता है । -इस का निरदेस् “चुत्तमू" ह 1 नेप द्वारा न्दं लीप दिया जाता है ताकि. ये सुन्दर सूप हो जाए, भरर तण्डूल पकाते खमय कुम्भी; से ख विवः तर हौ १ : ३१२ अथववेद-माष्य कां १२। सूुऽ३

English

Let the rice-mess these two cook here, O Goddess, know this our truthfulness and zealous fervour.

अध्याय 12

श्लोक 3.49

प्रि॒यं प्रि॒याणां॑ कृणवाम॒ तम॒स्ते य॑न्तु यत॒मे द्वि॒षन्ति॑ ।धे॒नुर॑न॒ड्वान् वयो॑वय आ॒यदे॒व पौरु॑षेय॒मप॑ मृ॒त्युं नु॑दन्तु

priyaṃ priyāṇāṃ kṛṇavāma tamaste yantu yatame dviṣanti | dhenuranaḍvān vayovaya āyadeva pauruṣeyamapa mṛtyuṃ nudantu

हिन्दी अर्थ

(जनित्री इव ) माता जैसे (सूनुम्) पृत्र को, वेसे है पृथिवी ! तू इसे रूप को (पृथिव्या) पृथिवी के साथ (सं दवामि) जँ क करता हूं । दवाय गृहस्थ की पाकशाला को, यज्ञदाला कारूप दिया गया है, क्योंकि कां० १२। सूऽं भ्रथर्ववेद-माष्य ३१३

English

If the dark bird hath come to us and, stealing the hanging. . morsel, settled in his dwelling, Or if the slave-girl hath, wet-handed, smearing the pestle and the mortar, cleansed the waters, This pressing-stone, broad-based and strength-bestowing, made pure by cleansing means,

अध्याय 12

श्लोक 3.50

सम॒ग्नयो॑ विदुर॒न्यो अ॒न्यं य ओष॑धीः॒ सच॑ते॒ यश्च॒ सिन्धू॑न्।याव॑न्तो दे॒वा दि॒व्या॒३तप॑न्ति॒ हिर॑ण्यं॒ ज्योतिः॒ पच॑तो बभूव

samagnayo viduranyo anyaṃ ya oṣadhīḥ sacate yaśca sindhūn| yāvanto devā divyā3tapanti hiraṇyaṃ jyotiḥ pacato babhūva

हिन्दी अर्थ

को (लोकान्) इन तीनो लोकों को (यन्ति) जाते है, (ताः) वे भ्रापः भयात् जल . (जीवलाः) जीवनप्रदान करते, (जीवधन्याः) प्राणियों के शम्मी तो एक दुष्टान्तसूपः है । † ३१ भअथर्ववेद-माष्य कार १२। सु०३ तण्डुलो के परिपाक के लिये कुम्भी में जल डाल कर उन्हे ्रभ्नि दारा प्रतप्त करने का निर्देश दिया दहै । जीवलाः जीवलाः

English

Together with the Gods, banning Pischas and demons, hath Vanaspati come hither. He shall rise up and send his voice out loudly. May we win all the worlds with him to help us.

अध्याय 12

श्लोक 3.51

ए॒षा त्व॒चां पुरु॑षे॒ सं ब॑भू॒वान॑ग्नाः॒ सर्वे॑ प॒शवो॒ ये अ॒न्ये।क्ष॒त्रेणा॒त्मानं॒ परि॑ धापयाथोऽमो॒तं वासो॒ मुख॑मोद॒नस्य॑

eṣā tvacāṃ puruṣe saṃ babhūvānagnāḥ sarve paśavo ye anye| kṣatreṇātmānaṃ pari dhāpayātho'motaṃ vāso mukhamodanasya

हिन्दी अर्थ

वे जल (उ) निरचय से (शुम्भन्ते) सु्ोभित होति ह । (ताः) वे जल (नः). (उत इव) मानो (प्रम्बीः) जल है तो प्रभूत, (उत) परन्तु (सं मितासः) कुम्भौ भ सम्यक्तया मापे हए है, (उत) तथा कुम्भी के जल , पृथिवी म जल हतो प्रभूतः, परन्तु भरोदन कै परिपाक के लिये जल मापे हए होने चाहिए । जल शुद्ध-पविच्र होने चारये । जल जीवन म महोपकारी है । शिक्षन्तीः = शिक्षति दानकर्मा , निषं० . ३।९० ) । सुनाथाः=सु + नाथु (उपतापे ) । मन्त्र म “भ्रापः” पद की दुष्टि र बहुवचन जल का पीना तथां जल चिकित्सा भरायुव्धंक है, इसलिये ज्रल भ्रमृत है । ..

English

Seven victims held the sacrificial essence, the bright one and the one that hath grown feeble. The three-and-thirty Deities attend them. As such, conduct us io the world of Svarga.

अध्याय 12

श्लोक 3.52

यद॒क्षेषु॒ वदा॒ यत् समि॑त्यां॒ यद् वा॒ वदा॒ अनृ॑तं वित्तका॒म्या।स॒मा॒नं तन्तु॑म॒भि सं॒वसा॑नौ॒ तस्मि॒न्त्सर्वं॒ शम॑लं सादयाथः

yadakṣeṣu vadā yat samityāṃ yad vā vadā anṛtaṃ vittakāmyā| samānaṃ tantumabhi saṃvasānau tasmintsarvaṃ śamalaṃ sādayāthaḥ

हिन्दी अर्थ

पहुंचाए । जहां जल नहीं बह नरकषाम है । जां जल है बहे स्वेगं षाम है । कां० १२। सु० ३ भअयवेवेदःमाष्य ३१५ संरू्याता स्तोकाः एंथि्वी स॑चन्ते पाणापानैः संमिता ओषधीभिः । पानो द्वारा उपलक्षित प्राणियों के साथ, (भोषधीमिः) तथा श्रोषधियों बीजरूप में डाले जाते हए मेष के जल बिन्दु (भषंख्याता;) अनगिनत

English

Unto the world of Svarga shalt thou lead us: there may we dwell beside our wife and children. I take thy hand Let not Destruction, let not Malignity come hither and subdue us.

अध्याय 12

श्लोक 3.53

व॒र्षं व॑नु॒ष्वापि॑ गच्छ दे॒वांस्त्व॒चो धू॒मं पर्युत् पा॑तयासि ।वि॒श्वव्य॑चा घृ॒तपृ॑ष्ठो भवि॒ष्यन्त्सयो॑निर्लो॒कमुप॑ याह्ये॒तम्

varṣaṃ vanuṣvāpi gaccha devāṃstvaco dhūmaṃ paryut pātayāsi | viśvavyacā ghṛtapṛṣṭho bhaviṣyantsayonirlokamupa yāhyetam

हिन्दी अर्थ

होते है, (सुवर्णाः) उत्तमरूप वाले, (शुचयः) पवित्र होते है, तथा (सवम् भरोदन परिपाकं के साथ-साथ जलविद्या का भी प्रतिपादन मन्त्रो करते हैँ । भाकाश से जल भरसंख्य मात्रा. मे पृथिवी पर पड़ता है, जोकि प्रवाहरूप मेँ समुद्र मे समा जाता है, ्रौर यह बरसा-जल बीजाकृ को भ्रकट करता तथा सब प्रकार से पवित्र होता है॥ (तप्ताः) तपे जल (उद् योधन्ति) मानो उषछछल-उछल कर युद्ध करे है (श्रभि वल्गन्ति) नाचते हैया युद्धाथं चां चलते है, (फेन-

English

We have subdued that sinful-hearted Grāhi. Thou shalt speak sweetly having chased the darkness.

अध्याय 12

श्लोक 3.54

त॒न्वं स्व॒र्गो ब॑हु॒धा वि च॑क्रे॒ यथा॑ वि॒द आ॒त्मन्न॒न्यव॑र्णाम्।अपा॑जैत् कृ॒ष्णां रुश॑तीं पुना॒नो या लोहि॑नी॒ तां ते॑ अ॒ग्नौ जु॑होमि

tanvaṃ svargo bahudhā vi cakre yathā vida ātmannanyavarṇām| apājait kṛṣṇāṃ ruśatīṃ punāno yā lohinī tāṃ te agnau juhomi

हिन्दी अर्थ

ऋतुकमं के.लिये (सम् भवति) उसके साथ सम्पकं करती है वैसे (आपः) -है जलो तुम (एतेः तण्डुलैः) .इन तण्डलों के साथः (सम् भवत) सम्पकं सेनाः चोतित होती है । मषिं दयानन्द के लेखो भँ स्तव्रीसेना का भी वर्णन , हमा है । तंथा मन्त्र मे यह भी भवित कियाद किं पति-पत्नी का सम्पकं केवल ऋतुकाल भे ही होना चाहिए । मन्तराथं में जल पद के स्थानमेस्तरी लिङ्गी “आपः” पद जानना चाहिए ।

English

Let not the wooden gear made ready fail us, nor harm the grain of rice that pays due worship. Soon to be, decked with butter, all-embracing, come to this world wherewith birth unites thee.

अध्याय 12

श्लोक 3.55

प्राच्यै॑ त्वा दि॒शे॒३ग्नयेऽधि॑पतयेऽसि॒ताय॑ रक्षि॒त्र आ॑दि॒त्यायेषु॑मते ।ए॒तं परि॑ दद्म॒स्तं नो॑ गोपाय॒तास्माक॒मैतोः॑ ।दि॒ष्टं नो॒ अत्र॑ ज॒रसे॒ नि ने॑षज्ज॒रा मृ॒त्यवे॒ परि॑ णो ददा॒त्वथ॑ प॒क्वेन॑ स॒ह सं भ॑वेम

prācyai tvā diśe3gnaye'dhipataye'sitāya rakṣitra ādityāyeṣumate | etaṃ pari dadmastaṃ no gopāyatāsmākamaitoḥ | diṣṭaṃ no atra jarase ni neṣajjarā mṛtyave pari ṇo dadātvatha pakvena saha saṃ bhavema

हिन्दी अर्थ

३१६ भरथरवेवेद-भाष्य कां १२॥ सू० ३. (बुष्ने सीदतः) कूम्भी के तल पर बैठे (एनान्) इन तण्डुलो को जल को (भ्रमासि) तूने मापा है, (यत् एतत्) जोकि यह कुम्भी म है। (तण्डुलाः) तण्डल भी (मिताः) मापि हृएु है, (यदि) यदि (इमाः प्रदिशः ) इन प्रकृष्ट निर्देशो को (भरमासि) तु जानता हैः! पकाने वाले से कहा है कि तु तण्डूल पकाने के लिये, जल श्रौर ¦ तण्डुल के पारस्परिक भनुपत को जान-ले । श्रमासि=श्र-+मा (मापना,

English

Seize thou the winnowing-fan which rains have nourished, and let this separate the chaff and refuse.

अध्याय 12

श्लोक 3.56

दक्षि॑णायै त्वा दि॒श इन्द्रा॒याधि॑पतये॒ तिर॑श्चिराजये रक्षि॒त्रे य॒मायेषु॑मते ।ए॒तं परि॑ दद्म॒स्तं नो॑ गोपाय॒तास्माक॒मैतोः॑ ।दि॒ष्टं नो॒ अत्र॑ ज॒रसे॒ नि ने॑षज्ज॒रा मृ॒त्यवे॒ परि॑ णो ददा॒त्वथ प॒क्वेन॑ स॒ह सं भ॑वेम

dakṣiṇāyai tvā diśa indrāyādhipataye tiraścirājaye rakṣitre yamāyeṣumate | etaṃ pari dadmastaṃ no gopāyatāsmākamaitoḥ | diṣṭaṃ no atra jarase ni neṣajjarā mṛtyave pari ṇo dadātvatha pakvena saha saṃ bhavema

हिन्दी अर्थ

निकालने पर जल के घुले तण्डृल के करई पौष्टिक भ्र श व्यथं हो जते है । ताकि उषा के भासपास,- (भोषधीः) भोषधियों को-- (भ्रहिसन्तः) उनकी जडो की हिसा न करते हृए (पन्) जोड़ों पर (दान्तु) काटे, (श्रा हर) पर (सोमः) सोम (बधरूव) राजा हृभ्रा है वे (वीख्धः) भोषधियां (नः

English

Three worlds hath Power Divine marked out and measured, Fheaven yonder, and the earth, and airs mid-region. Grasp ye the stalks and in your hands retain them: let them be watered and again be

अध्याय 12

श्लोक 3.57

प्र॒तीच्यै॑ त्वा दि॒शे वरु॑णा॒याधि॑पतये॒ पृदा॑कवे रक्षि॒त्रेऽन्ना॒येषु॑मते ।ए॒तं परि॑ दद्म॒स्तं नो॑ गोपाय॒तास्माक॒मैतोः॑ ।दि॒ष्टं नो॒ अत्र॑ ज॒रसे॒ नि ने॑षज्ज॒रा मृ॒त्यवे॒ परि॑ णो ददा॒त्वथ॑ प॒क्वेन॑ स॒ह सं भ॑वेम

pratīcyai tvā diśe varuṇāyādhipataye pṛdākave rakṣitre'nnāyeṣumate | etaṃ pari dadmastaṃ no gopāyatāsmākamaitoḥ | diṣṭaṃ no atra jarase ni neṣajjarā mṛtyave pari ṇo dadātvatha pakvena saha saṃ bhavema

हिन्दी अर्थ

हमारे लिये (भमन्यूताः) मन्यु का विस्तारन करने वाली (भवन्तु) हों । फरसे भी नाना चाहिए । त्वरण = फरसे देने मे शीघ्रता, क्योंकि उषा काल के भ्रास- पास शरोषधियां काट लेनी .है । भषम् = भरोषसम् । भरोषधीः == बहिः (मन्त ३२) । कार १९२ । सु० ३ भथवंवेद-माष्य ३१७ (श्रोदनाय) चावल क लिये (नवं बहिः) नई कटी कृाभ्रों को भ्रस्तु) ्रांख के लिये रमणीय हो । (तस्मिन्) उस पर (देवाः देवीः). देव

English

winnowed. Manifold, various are the shapes of victims. Thou growest uni- form by great abundance.

अध्याय 12

श्लोक 3.58

उदी॑च्यै त्वा दि॒शे सोमा॒याधि॑पतये स्व॒जाय॑ रक्षि॒त्रेऽशन्या इषु॑मत्यै ।ए॒तं परि॑ दद्म॒स्तं नो॑ गोपाय॒तास्माक॒मैतोः॑ ।दि॒ष्टं नो॒ अत्र॑ ज॒रसे॒ नि ने॑षज्ज॒रा मृ॒त्यवे॒ परि॑ णो ददा॒त्वथ॑ प॒क्वेन॑ स॒ह सं भ॑वेम

udīcyai tvā diśe somāyādhipataye svajāya rakṣitre'śanyā iṣumatyai | etaṃ pari dadmastaṃ no gopāyatāsmākamaitoḥ | diṣṭaṃ no atra jarase ni neṣajjarā mṛtyave pari ṇo dadātvatha pakvena saha saṃ bhavema

हिन्दी अर्थ

कर (ऋतुभिः) ऋतु के भनुकूल (इमम् प्रा्नन्तु) इसे खाए । पुव परस्पर साथ-साथ बैठ कर भोजन करर । भोजन के लिये भोज्य पदार्थं भावनाग्मो म्नौर दिव्य कर्मो वाले होने चाहिए । तत्सम्बन्धी साम र्नो के कारण (देवताभिः) इन देवि्यो भौर देवताश

English

Push thou away this skin of ruddy colour: the stone will cleanse as one who cleanses raiment. Earth upon earth l set thee. This thy body is con-substantial,. but in form it differs. Whate’er hath been worn off or scratched in fixing, leak not thereat: I spread a charm to

अध्याय 12

श्लोक 3.59

ध्रु॒वायै॑ त्वा दि॒शे विष्ण॒वेऽधि॑पतये क॒ल्माष॑ग्रीवाय रक्षि॒त्र ओष॑धीभ्य॒ इषु॑मतीभ्यः ।ए॒तं परि॑ दद्म॒स्तं नो॑ गोपाय॒तास्माक॒मैतोः॑ ।दि॒ष्टं नो॒ अत्र॑ ज॒रसे॒ नि ने॑षज्ज॒रा मृ॒त्यवे॒ परि॑ णो ददा॒त्वथ॑ प॒क्वेन॑ स॒ह सं भ॑वेम

dhruvāyai tvā diśe viṣṇave'dhipataye kalmāṣagrīvāya rakṣitra oṣadhībhya iṣumatībhyaḥ | etaṃ pari dadmastaṃ no gopāyatāsmākamaitoḥ | diṣṭaṃ no atra jarase ni neṣajjarā mṛtyave pari ṇo dadātvatha pakvena saha saṃ bhavema

हिन्दी अर्थ

सुन्दर रूप क्रिया जाता है, इसी प्रकार (एहाः) भोजनेच्छक (एनाः) इन. देवी-देवता को सुन्दर सूप मे, (पात्रे) भोजन-पनि के (परि) चारो भ्रोर प्मभ्यागतो के देन की धरभिलाषा प्रकट की है । ३१८ भथवेवेद-माष्य कां० १२। सुऽ ३ (षष्ट्यां शरत्यु). ६०.वषो की भ्रायु मेँ (निधिपाः) निधिका

English

mend it. Thou for thy son shalt yearn as yearns a mother. I lay thee down and with the earth unite thee.

अध्याय 12

श्लोक 3.60

ऊ॒र्ध्वायै॑ त्वा दि॒शे बृह॒स्पत॒येऽधि॑पतये श्वि॒त्राय॑ रक्षि॒त्रे व॒र्षायेषु॑मते ।ए॒तं परि॑ दद्म॒स्तं नो॑ गोपाय॒तास्माक॒मैतोः॑ ।दि॒ष्टं नो॒ अत्र॑ ज॒रसे॒ नि ने॑षज्ज॒रा मृ॒त्यवे॒ परि॑ णो ददा॒त्वथ प॒क्वेन॑ स॒ह सं भ॑वेम

ūrdhvāyai tvā diśe bṛhaspataye'dhipataye śvitrāya rakṣitre varṣāyeṣumate | etaṃ pari dadmastaṃ no gopāyatāsmākamaitoḥ | diṣṭaṃ no atra jarase ni neṣajjarā mṛtyave pari ṇo dadātvatha pakvena saha saṃ bhavema

हिन्दी अर्थ

त्वा) . गृह कार्यो से . न-विरत हए, तुफ़ को (देवताः) दिव्य गुणी सज्जन (च्यावुयन्दु) गृह-कायो से विरत कराए । (जीवन्तौ) . जीवित, (जीवपुत्रौ) जीवित पूत्रो वाले , (दम्पती) जाया भ्रौर.पति (तंत्वा) उस तुको गृह का धारण करने वाला ६० वषो की.भायु मेँ मी यदि गृहका्योँ से विरत नहीं भा, तो दिव्य सज्जन उसे सदपदेश दे कर. गृहकार्यो से छ्ड़ा कां० १२। सू०३ ४ अथ्मेद-मास्य , २३६९ सम्भाल लंग; उन के पुत्रे. भी जीवित है, इस लिये वंश परम्परा मी बनी रहेगी, तु भरव समग्र पृथिवी क सेवा मे भपने-माप को व्यापृत कर । पाकर तूने (सम् भागाः) नए श्राश्चम में समागम. किया है, (यावन्तः कामाः) जितनी भी एषणाए हैँ (तान्). उन (सम् ्रतीतृपः) तूने पुरी तरह तृप्त कर लिया है । (भायवनं च दविः) तेरे कडची श्रौर चमच भौर

English

Varuna strengthen and support thee westward, and Soma on the north hold thee together. Drops flow, made pure by filters, from the rain-cloud: to heaven and earth and to the worlds

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।