Atharva Veda
11
अध्याय 11 / 20

Kanda 11

काण्ड 11

420 श्लोकभाग 6/7 · श्लोक 7.1–8.34

पूर्ण अध्याय पाठ60 श्लोक

अध्याय 11

श्लोक 7.1

उच्छिष्ट ब्रह्म-सूक्तम्।१-२७ अथर्वा।अध्यात्मं, उच्छिष्टः।अनुष्टप्, ६ पुर उष्णिग्बार्हतपरा, २१ स्वराट्, २२ विराट् पथ्याबृहती।उच्छि॑ष्टे॒ नाम॑ रू॒पं चोच्छि॑ष्टे लो॒क आहि॑तः ।उच्छि॑ष्ट॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ विश्व॑म॒न्तः स॒माहि॑तम्

ucchiṣṭa brahma-sūktam| 1-27 atharvā| adhyātmaṃ, ucchiṣṭaḥ| anuṣṭap, 6 pura uṣṇigbārhataparā, 21 svarāṭ, 22 virāṭ pathyābṛhatī| ucchiṣṭe nāma rūpaṃ cocchiṣṭe loka āhitaḥ | ucchiṣṭa indraścāgniśca viśvamantaḥ samāhitam

हिन्दी अर्थ

भौर क्षिति के भ्र्थो में कुछ भेद हुभा है । १७० अथरवेवेद-माध्य कां० ११1 सू०७ हर्षातिरेक, (सर्व देवाः) तथा सब देव (दिवि) जो किं द्यलोकमे ह भी भ्रवशिष्ट परमेक्वर से (जज्ञिरे) पैदा हृए है।

English

Gods made the mortal their abode, and entered and possessed the man.

अध्याय 11

श्लोक 7.3

उच्छि॑ष्टे॒ द्यावा॑पृथि॒वी विश्वं॑ भू॒तं स॒माहि॑तम्।आपः॑ समु॒द्र उच्छि॑ष्टे च॒न्द्रमा॒ वात॒ आहि॑तः ॥ सन्नुच्छि॑ष्टे॒ असं॑श्चो॒भौ मृ॒त्युर्वाजः॑ प्र॒जाप॑तिः ।लै॒क्या उच्छि॑ष्ट॒ आय॑त्ता॒ व्रश्च॒ द्रश्चापि॒ श्रीर्मयि॑

ucchiṣṭe dyāvāpṛthivī viśvaṃ bhūtaṃ samāhitam| āpaḥ samudra ucchiṣṭe candramā vāta āhitaḥ || sannucchiṣṭe asaṃścobhau mṛtyurvājaḥ prajāpatiḥ | laikyā ucchiṣṭa āyattā vraśca draścāpi śrīrmayi

हिन्दी अर्थ

स्नाव = वे मांसतन्तु जिन के द्वारा मांस हडयों के साथ बन्वा पड़ा है । इन तन्तुं को कण्डराए कहते है । नाली वाली ही मेँ जो स्नेह भाग विद्यामान होता है वह मज्जा है 1. अज्ञा पर्वाणि मृश्जानं को मासं त॒ आभरत् ॥१२॥

English

For all the Deities abide in him as cattle in their pen. At his first death he goeth hence, asunder, in three separate parts.

अध्याय 11

श्लोक 7.4

दृ॒ढो दृं॑हस्थि॒रो न्यो ब्रह्म॑ विश्व॒सृजो दश॑ ।नाभि॑मिव स॒र्वत॑श्च॒क्रमुच्छि॑ष्टे दे॒वताः॑ श्रि॒ताः

dṛḍho dṛṃhasthiro nyo brahma viśvasṛjo daśa | nābhimiva sarvataścakramucchiṣṭe devatāḥ śritāḥ

हिन्दी अर्थ

(कुतः) कहां ने भ्नौर. किस नेः (केशान्). के्ो-को, (कुतः). कां० ११। सु० क म्रथर्ववेद-माष्य १८१ कहां से श्रौर किघने (स्नाव) मांस तन्तुर को, (कुतः) कहां से भौर मास को (कः) किस ने (कुतः) कहांसे (भ्राभरत्) दारीर मे भर

English

He goeth yonder with one part, with one he goeth yonder: here he sinketh downward with a

अध्याय 11

श्लोक 7.5

ऋक् साम॒ यजु॒रुच्छि॑ष्ट उद्गी॒थः प्रस्तु॑तं स्तु॒तम्।हि॒ङ्का॒र उच्छि॑ष्टे॒ स्वरः॒ साम्नो॑ मे॒डिश्च॒ तन्मयि॑

ṛk sāma yajurucchiṣṭa udgīthaḥ prastutaṃ stutam| hiṅkāra ucchiṣṭe svaraḥ sāmno meḍiśca tanmayi

हिन्दी अर्थ

सर्वं संसिच्य सत्यै देवाः पुरुषमाविशन् ॥१३॥ ते देवाः) वे देव (संसिचः नाम) संसिच् नाम वाले ईँ, (ये) संसिचः- सीं चने वाले देव “श्रापः” प्रतीतं होते है । रस-रक्तरूपी द्रवो को “श्रापः“नेहीसीचाहै । वेदने रस-रक्त को भरापःकहाहै। न=शरीरमें सब श्रोर गति करने वाले भ्रापः । शरीर की समग्र रचनां पिता के वीयंद्रव तथा माताके रजोद्रव से होती है । ये दोनोंद्रवरहैः

English

third. In the primeval waters cold the body is deposited.

अध्याय 11

श्लोक 7.6

ऐ॒न्द्रा॒ग्नं पा॑वमा॒नं म॒हाना॑म्नीर्महाव्र॒तम्।उच्छि॑ष्टे य॒ज्ञस्याङ्गा॑न्य॒न्तर्गर्भ॑ इव मा॒तरि॑

aindrāgnaṃ pāvamānaṃ mahānāmnīrmahāvratam| ucchiṣṭe yajñasyāṅgānyantargarbha iva mātari

हिन्दी अर्थ

- भाषः हैः इन्हीं से केशः भ्रादिका निर्माण हुमांदहै । अतः ये संसिच् देव है, इन्दी से समग्रशरीर सीचागयाहै, ये ही शरीर मँ प्रविष्ट संसि छरू पादाष्ठीवन्तौ शिरो इस्तावयो सुसंम् । (शिरो हस्तौ) सिर भौर हाथो, (अथो). तथा . (मुखम्) मुख को, (पृष्टीः) पसलियों को, (बजंह्य ) दौ कन्धों या हंसलियों कौ, पार्ष्वे) दो कोलो को (कः षिः) किंस ऋषि ने (तत्) वह् सब (समदधात्) जोड दिया ।

English

In this there is the power of growth: from this is power of growth declared.

अध्याय 11

श्लोक 7.7

रा॒ज॒सूयं॑ वाज॒पेय॑मग्निष्टो॒मस्तद॑ध्व॒रः ।अ॒र्का॒श्व॒मे॒धावुच्छि॑ष्टे जी॒वब॑र्हिर्म॒दिन्त॑मः

rājasūyaṃ vājapeyamagniṣṭomastadadhvaraḥ | arkāśvamedhāvucchiṣṭe jīvabarhirmadintamaḥ

हिन्दी अर्थ

१८२. भरथर्वेवेद-माष्य कां० ११।सु० ८ उरू 11 ्, इस का अनुवाद प्रायः जाएं किया जाता है । पृथक् पठित हैँ । मन्त्र मेँ ऋषिपद दवारा उत्तर भी दे.दिया है कि “कः यथा “को वं नाम प्रजापतिः' (एे° ३।२.१) 1

English

An incantation for the destruction of a hostile army All arms and every arrow, all the power and might that bows possess,

अध्याय 11

श्लोक 7.8

अ॒ग्न्या॒धेय॒मथो॑ दी॒क्षा का॑म॒प्रश्छन्द॑सा स॒ह।उत्स॑न्ना य॒ज्ञाः स॒त्राण्युच्छि॒ष्टेऽधि॑ स॒माहि॑ताः

agnyādheyamatho dīkṣā kāmapraśchandasā saha| utsannā yajñāḥ satrāṇyucchiṣṭe'dhi samāhitāḥ

हिन्दी अर्थ

शिरो दस्तावथो सुस जिह्वा ग्रीवाश्च कीकताः। (शिरः, हस्तौ, श्रयो, मुखम्) सिर, दोनों हाथों भ्रौर मूख को, (जिह्वा, प्रीवादच, कीकसाः) जौ पर, गदेन की नसनाद्ियो, रीड को हदिड- कर के, (मही संधा) जोड़ने वाली बड़ी शक्ति ने (समदधात्) परस्पर संधा = सन्धि पेदाः करने वाली पारमे्वरी शक्ति ।

English

The warlike weapon, axes, swords, the plan and purpose in the heart,

अध्याय 11

श्लोक 7.9

अ॒ग्नि॒हो॒त्रं च॑ श्र॒द्धा च॑ वषट्का॒रो व्र॒तं तपः॑ ।दक्षि॑णे॒ष्टं पू॒र्तं चोच्छि॒ष्टेऽधि॑ स॒माहि॑ताः

agnihotraṃ ca śraddhā ca vaṣaṭkāro vrataṃ tapaḥ | dakṣiṇeṣṭaṃ pūrtaṃ cocchiṣṭe'dhi samāhitāḥ

हिन्दी अर्थ

येनेदमचय रोष॑ते को अस्मिन् वणेमाभ॑रत् ॥१६॥ . (इदम्) यह शरीर (श्रय) भ्राज (रोचते) चमकता या रुचिकर होता है, कः=प्रदनवाची ; तथा “कः प्रजापतिः, करोति इति कः, जगत्क- सर्वे देवा उपाशषिक्षन् तदजानादु' वधूः -सती ।

English

All this, O Arbudi, make thou visible to our enemies, and let them look on mist and fog. Arise ye and prepare yourselves: ye, the celestial hosts, are friends.

अध्याय 11

श्लोक 7.10

ए॒क॒रा॒त्रो द्वि॑रा॒त्रः स॑द्यः॒क्रीः प्र॒क्रीरु॒क्थ्यः ।ओतं॒ निहि॑त॒मुच्छि॑ष्टे य॒ज्ञस्या॒णूनि॑ वि॒द्यया॑

ekarātro dvirātraḥ sadyaḥkrīḥ prakrīrukthyaḥ | otaṃ nihitamucchiṣṭe yajñasyāṇūni vidyayā

हिन्दी अर्थ

(देवाः) विद्रानूलोग, (पितरः) गृहस्थी, (मनुष्याः) साघारण मनुष्य ये गन्धर्वाः) जो गो भर्थात् पृथिवी का धारण करने वाले राजा भादि दिवि) जोकि लोक मेँ है, (दिविश्रितः) भ्रौर द्यलोक में जिन का १-मननरील ब्रह्म का विवाह प्रकृति के साथ (१)। २ विवाह मेँ वरपक्ष के बराती, भ्रौर कन्यापक्ष के धंराती तपः

English

Sleep, specially, Sloth, Nirriti, and deities whose name is Sin, Baldness, old age, and hoary hairs within the body found their way.

अध्याय 11

श्लोक 7.11

च॒तू॒रा॒त्रः प॑ञ्चरा॒त्रः ष॑ड्रा॒त्रश्चो॒भयः॑ स॒ह।षो॒ड॒शी स॑प्तरा॒त्रश्चोच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॒ ये य॒ज्ञा अ॒मृते॑ हि॒ताः

catūrātraḥ pañcarātraḥ ṣaḍrātraścobhayaḥ saha| ṣoḍaśī saptarātraścocchiṣṭājjajñire sarve ye yajñā amṛte hitāḥ

हिन्दी अर्थ

४--कर्मः से तपः को उत्पत्ति (६) । ४५-- पुराणवित् का स्वरूप (७) । ७-संसिचः देवाः, उन द्वारा छरीर का सेच॑न (१३) । १९-वेवो का धर, त्येदेह (१८) । १२-पापमय देवताः . (१६) । १४-ज्ञरीरस्थ भराठ प्रकार के जलं (२८) ।

English

Theft, evil-doing, and deceit, truth, sacrifice, exalted fame,

अध्याय 11

श्लोक 7.12

प्र॒ती॒हा॒रो नि॒धनं॑ विश्व॒जिच्चा॑भि॒जिच्च॒ यः ।सा॒ह्ना॒ति॒रा॒त्रावुच्छि॑ष्टे द्वादशा॒होऽपि॒ तन्मयि॑

pratīhāro nidhanaṃ viśvajiccābhijicca yaḥ | sāhnātirātrāvucchiṣṭe dvādaśāho'pi tanmayi

हिन्दी अर्थ

६--शरीर का श्रषिपति प्रजापति जीवं (३०) । १७--मृतद्यरीर का दाहकमं (३१) । १६-कर्मो द्वारा त्रिविध गति (३३) । १७२ भथववंवेद-माष्यं कां० ११। सू क आंसुन् जन्याः के वराः क उ जयेष्टवरो ऽभवत् ॥१॥

English

Strength, princely power, and energy entered the body as a home. Prosperity and poverty, kindnesses and malignities,

अध्याय 11

श्लोक 7.13

सू॒नृता॒ संन॑तिः॒ क्षेमः॑ स्व॒धोर्जामृतं॒ सहः॑ ।उच्छि॑ष्टे॒ सर्वे॑ प्र॒त्यञ्चः॒ कामाः॒ कामे॑न ततृपुः

sūnṛtā saṃnatiḥ kṣemaḥ svadhorjāmṛtaṃ sahaḥ | ucchiṣṭe sarve pratyañcaḥ kāmāḥ kāmena tatṛpuḥ

हिन्दी अर्थ

तब, (जन्याः) जायापक्ष के लाग (के भ्रासन्) कौन थे, (के वराः) वर ने वरण करना हँ (श्रभवत्) हृभ्रा था । परमेरवरीय मनन कां निर्देश किया है । यह मनन. भालोचनारूप है कि सृष्टि को पैदा करू तो प्रकार, किस काल, भ्रौर किस क्रमं से कर ! इस मानुष स्वमाव का भ्रारोप, परमेदवर के सुष्टच त्पादन मे, परमेरवर मँ किया तमी का है “तन्मे मनः दिवसंकल्पमस्तु"" (यजु° २४।१-६) । मन्युः

English

Hunger and thirst of every kind entered the body as a home.

अध्याय 11

श्लोक 7.14

नव॒ भूमीः॑ समु॒द्रा उच्छि॒ष्टेऽअधि॑ श्रि॒ता दिवः॑ ।आ सूर्यो॑ भा॒त्युच्छि॑ष्टेऽहोरा॒त्रे अपि॒ तन्मयि॑

nava bhūmīḥ samudrā ucchiṣṭe'adhi śritā divaḥ | ā sūryo bhātyucchiṣṭe'horātre api tanmayi

हिन्दी अर्थ

मे भी कामना की सत्ता का कथन हभ है । यही कामना जब फलोन्ुखी हो जाती है तो इसे संकल्प कहते है 1 परमेदवरनिष्ठ कामना सदा संकल्प- रूपी होती है, वह सदा फलोन्मुखी होती है भस्मदादि की कामना सदा फलोन्मुखी नहीं होती । इसं लिये भ्रस्भदादि की कामना गौर संकल्प में भेद विवाह मँ कई लोग तो जनी-पक्ष के होते है, भौर करई वर.पक्च के । वर-पक्ष के. लोग कन्या का वरण. करते है, चुनाव करते है, भत; मन्व मेँ उन सब को “वरा” कहा है । परन्तु भ्रन्तिम चुनाव जिसने करना है । १. सोऽकामयत् बहू स्यां प्रजायेय' (तै° भा० ८।६।१) । काऽ ११।सु० ८ श्रथववेद-माष्य. १७१ उसे “चयेष्ठवरः” कहा है, भ्रौर वह है जिस ने कि कन्या को विवाहित कर प्राप्त करना है । भरावहत् = मा +-वह (प्रापणे) 1

English

Reproaches, freedom from reproach, all blamable, all blameless deeds, Bounty, belief, and unbelief entered the body as a home.

अध्याय 11

श्लोक 7.15

उ॒प॒हव्यं॑ विषू॒वन्तं॒ ये च॑ य॒ज्ञा गुहा॑ हि॒ताः ।बिभ॑र्ति भ॒र्ता विश्व॒स्योच्छि॑ष्टो जनि॒तुः पि॒ता

upahavyaṃ viṣūvantaṃ ye ca yajñā guhā hitāḥ | bibharti bhartā viśvasyocchiṣṭo janituḥ pitā

हिन्दी अर्थ

जनौपक्ष के धराती, (श्रासन्) थे, (ते) वे दो (वराः) वरपक्ष के बराती “प्राणियों के कमो रौर तदनुरूप सुष्टि की रचना का पर्यालोचनरूषी तपः । करना होता हैँ । व्यापक के लिये स्थान परिवतंन श्रसम्भव है । परमेरवर मे कर्मं या किया स्वाभाविकी है। यथा “परास्य शक्तिविविधैव भूयते सकता । इसलिये वह॒ विभ्रु तथापि चेतने होने से उसमें क्रिया भीर!

English

All knowledge and all ignorance, each other thing that one may learn,

अध्याय 11

श्लोक 7.16

पि॒ता ज॑नि॒तुरुच्छि॒ष्टोऽसोः॒ पौत्रः॑ पिताम॒हः ।स क्षि॑यति॒ विश्व॒स्येशा॑नो॒ वृषा॒ भूम्या॑मति॒घ्न्यः

pitā janiturucchiṣṭo'soḥ pautraḥ pitāmahaḥ | sa kṣiyati viśvasyeśāno vṛṣā bhūmyāmatighnyaḥ

हिन्दी अर्थ

. खूप क्रिया का निषेधपूर्वंक क्रियाविशेष का समर्थेन हृभा है । कमं मानसिक भी कहे है, चाहे उन कर्मों के करने मेँ मन, शरीर से बाहिर गतिं नहीं कैरता। भौर परमेदवंर के कमं रागद्वेष से प्रेरित भी नहीं होते. - सुष्टि की रचना मोग भौर रपव के लिये होती है, “भोगापवर्गार्थं चाहिए जोकि मनुष्यों कौ.भपवे की भरोर बढ़ाने .वाले हो । दुरित कां १७४ भथर्ववेद-भाष्य , कां० ११।सु०८

English

Entered the body, prayer, and hymns, and songs, and sacrificial texts. Enjoyments, pleasures, and delights, gladness, and rapturous ecstasies.

अध्याय 11

श्लोक 7.17

ऋ॒तं स॒त्यं तपो॑ रा॒स्ट्रं श्रमो॒ धर्म॑श्च॒ कर्म॑ च ।भू॒तं भ॑वि॒ष्यदुच्छि॑ष्टे वी॒र्यं ल॒क्ष्मीर्बलं॒ बले॑

ṛtaṃ satyaṃ tapo rāsṭraṃ śramo dharmaśca karma ca | bhūtaṃ bhaviṣyaducchiṣṭe vīryaṃ lakṣmīrbalaṃ bale

हिन्दी अर्थ

ग्रपव्गं कौ कामना बनो रहती हैँ । भद्रकमं परिणाम में सुखदायक भ्रौरः न मे सहायक होते है, बाधक नहीं । एसे भद्रकमों के सम्बन्ध म कहा कूवन्नेवेह कर्माणि निजी विषेच्छरत समाः । कमं मनुष्य.को ससार मे लिप्त नहीं करते ।

English

Laughter and merriment and dance entered the body as a home.

अध्याय 11

श्लोक 7.18

समृ॑द्धि॒रोज॒ आकू॑तिः क्ष॒त्रं रा॒ष्ट्रं षडु॒र्व्यः ।सं॒व॒त्स॒रोऽध्युच्छि॑ष्ट इडा॑ प्रै॒षा ग्रहा॑ ह॒विः

samṛddhiroja ākūtiḥ kṣatraṃ rāṣṭraṃ ṣaḍurvyaḥ | saṃvatsaro'dhyucchiṣṭa iḍā praiṣā grahā haviḥ

हिन्दी अर्थ

तपः भ्र्थात् तपोमय जीवन भी भ्रपवगे में सहायक होता है । “तपः मरौर इन्द्रियों को शुद्धि होती है, इन के तमोगुण भ्रौर रजोगुण का हास चेतनजगत् के भोग भौर भरपव्गे के लिये ही है । भरतः चेतन-जगत् के तप- दवीरा गृहस्थ जीवन की उपादेयता प्रतीत होती है" ।

English

Discourse and conversation, and the shrill-resounding cries of woe, All entered in, the motives and the purposes combined there- with.

अध्याय 11

श्लोक 7.19

चतु॑र्होतार आ॒प्रिय॑श्चातुर्मा॒स्यानि॑ नी॒विदः॑ ।उच्छि॑ष्टे य॒ज्ञाः होत्राः॑ पशुब॒न्धास्तदिष्ट॑यः

caturhotāra āpriyaścāturmāsyāni nīvidaḥ | ucchiṣṭe yajñāḥ hotrāḥ paśubandhāstadiṣṭayaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० ११1 सु०८ श्रय्ववेद-माष्य १७५ दशं साकण्जायन्त देवा देषेभ्य॑ः पुरा । (्रजायन्त) पदा हई । (यः) जो कोई (वं ) निदचयपू्वं क (तान् विद्यात्) भ्रौर उदान, (वाक्) वाणी (मनः) . मन (ते) बे (व) निक्वय से (श्राकः-

English

Inbreath and outbreath, ear and eye, decay and freedom from decay.

अध्याय 11

श्लोक 7.20

अ॒र्ध॒मा॒साश्च॒ मासा॑श्चार्त॒वा ऋ॒तुभिः॑ स॒ह।उच्छि॑ष्टे घो॒षिणी॒रापः॑ स्तनयि॒त्नुः श्रुति॑र्म॒ही

ardhamāsāśca māsāścārtavā ṛtubhiḥ saha| ucchiṣṭe ghoṣiṇīrāpaḥ stanayitnuḥ śrutirmahī

हिन्दी अर्थ

१७६ भरधववेवेद-माष्य कां० १९१॥ सुग सब इन्द्रियों को प्रेरित करने वाला सुखादिज्ञान का साधन । दस देव है, ्रौर एकां मे नित्यः। मन यद्यपि महत्त्व का परिणाम-है, इस लिये (यजु. ३४१४) द्वारा मन को नित्य कहा है । भ्राकूतिः = मानुष संकल्प ।

English

Breath upward and diffused, voice, mind, these quickly with the body move, All earnest wishes, all commands, directions, and admonish- ments.

अध्याय 11

श्लोक 7.21

शर्क॑राः॒ सिक॑ता॒ अश्मा॑न॒ ओष॑धयो वी॒रुध॒स्तृणा॑ ।अ॒भ्राणि॑ वि॒द्युतो॑ व॒र्षमुच्छि॑ष्टे॒ संश्रि॑ता श्रि॒ता

śarkarāḥ sikatā aśmāna oṣadhayo vīrudhastṛṇā | abhrāṇi vidyuto varṣamucchiṣṭe saṃśritā śritā

हिन्दी अर्थ

अजाता आसन्नृतवो्थो घाता बृहस्पतिः । अदिवना) धारण पोषण-करने वाला मेष, वायु, विचुतू-रौर-प्रग्नि, सूरये- उत्पत्ति के लिये प्रतीक्षा करते थे । वणित किया है । घाता (धाञ् ध.रणपोषणयोः) भर्थात् मेघ । बृहस्पतिः

English

Reflections, all deliberate plans entered the body as a home.

अध्याय 11

श्लोक 7.22

राद्धिः॒ प्राप्तिः॒ समा॑प्ति॒र्व्याऽप्ति॒र्मह॑ एध॒तुः ।अत्या॑प्ति॒रुच्छि॑ष्टे॒ भूति॒श्चाहि॑ता॒ निहि॑ता हि॒ता

rāddhiḥ prāptiḥ samāptirvyā'ptirmaha edhatuḥ | atyāptirucchiṣṭe bhūtiścāhitā nihitā hitā

हिन्दी अर्थ

वागु प्राणधार है । विना वायु के जीवन कतिपय क्षणो मेँ समाप्त हो जाता है, भरतः वायु महापालक है, बृहस्पति है । सत्का्यवाद का समथक है (रथव. .१७।१।१९६) । वेदिक वृष्टि म वस्तु का. तु भ्रादि जड़ है, परन्तु कविता मेँ इन्दं चेतनरूप देकर इन की उपासना परिपाक के कारण ही हैँ । इसलिये जीवात्माभ्रों के सामूहिक कम॑, सृष्टध -

English

They laid in the abhorrent frame those waters hidden, bright, and thick, Which in the bowels spring from blood, from mourning or from hasty toil.

अध्याय 11

श्लोक 7.23

यच्च॑ प्रा॒णति॑ प्रा॒णेन॒ यच्च॒ पश्य॑ति॒ चक्षु॑षा ।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

yacca prāṇati prāṇena yacca paśyati cakṣuṣā | ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

(या शरुभिः) जो भूमि (इतः) इस प्रत्यक दुष्ट ्रूमि से (पर्वा) या सत्यज्ञानी (इत्) ही (विदुः) जानते हैँ । (यः) जो ( व॑) निद्वय से भूमिः जिस मं कि प्राणी प्रादि पेदा होते है “भवन्ति पदार्था ग्रतः उस का नाम उस श्रवस्था मं “पृथिवी” था, भूमि नहीं । भ्रडातयः,

English

Fuel they turned to bone, and then they set light waters in the frame.

अध्याय 11

श्लोक 7.24

ऋचः॒ सामा॑नि॒ च्छन्दां॑सि पुरा॒णं यजु॑षा स॒ह।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

ṛcaḥ sāmāni cchandāṃsi purāṇaṃ yajuṣā saha| ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

इ, मूमि को पृथिवी मी कृते है । (कुतः) कहां से (इन्द्रः) इन्द्र, (कुतः) कहां से (सोमः). सोम, (कुतः) कहां से (अग्निः) अग्नि (भ्रजायत) प्रादुभूत हई थी । (कृतः) बनस्पतियां पैदा हो रदी है, इसलिये इसु का नाम है “भूमि परन्तु इस भ्रवस्था से पूवं की भवस्था मे सूमि उत्पादिकावस्था मेँ न थी । सुं से जन यह पृथक् हई तो

English

The molten butter they made seed: then the Gods entered into man. All Waters, all the Deities. Virāj with Brahma at her side:

अध्याय 11

श्लोक 7.25

प्रा॒णा॒पा॒नौ चक्षुः॒ श्रोत्र॒मक्षि॑तिश्च॒ क्षिति॑श्च॒ या।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

prāṇāpānau cakṣuḥ śrotramakṣitiśca kṣitiśca yā| ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

मर परिणामो में भ्रधिकाधिक विस्तृत थी, फली हई थी, प्रथितावस्था में थी । इसलिये भमि, वतंमान प्रवस्था मे भरधिक प्रथित है। भ्रतः दुसे पृथिवी कहा जाता है । कांर ११।सु०८ भ्रथर्ववेदनमाष्य १७६ त्यादक होने से सब प्राणियों का धारण-पोषण करता ह, प्रतः घाता है ।

English

Brahma into the body passed: Prajāpati is Lord thereof.

अध्याय 11

श्लोक 7.26

आ॒न॒न्दा मोदाः॑ प्र॒मुदो॑ऽभिमोद॒मुद॑श्च॒ ये।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

ānandā modāḥ pramudo'bhimodamudaśca ye| ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

१८० भ्रथवेवेद-माष्य कांऽ ११॥ सुऽ द नः होने से नाना रोग षेदाहो जाति । मूत्रचिकित्सक तो शरीर के लिये मूत्र को महौषध कहते हैँ । भयव. ६।४४।२ मे “खस्य मूत्रमस्य- उसकैद्वारा वरते वर्षा जल को मूत्र सदुश लाभकारी कहा है । भमृतम् उदकनाम ( निधं० १।१२ ) । वर्षा जल स्वच्छ तथा गुणकारी होने से ये त आसन् दशं जाता देवा देवेभ्यः पुरा ।

English

The Sun and Wind formed, separate, the eye and vital breath of man. His other person have the Gods bestowed on Agni as a gift.

अध्याय 11

श्लोक 7.27

दे॒वाः पि॒तरो॑ मनु॒ष्याऽ गन्धर्वाप्स॒रस॑श्च॒ ये।उच्छि॑ष्टाज्जज्ञिरे॒ सर्वे॑ दि॒वि दे॒वा दि॑वि॒श्रितः॑

devāḥ pitaro manuṣyā' gandharvāpsarasaśca ye| ucchiṣṭājjajñire sarve divi devā diviśritaḥ

हिन्दी अर्थ

, येते दश्च देवाः) वे जो १० देव (भन्ते ३-४), (पुरा) पूरवंकाल (लोकं दत्वा) स्थान या यह लोक देकर (कस्मिन्) किस (लोके) लोक में यदा केशानस्थि स्नाव मांसं मञ्जानमा म॑रत् । › कण्डरा्रो, मांस, मज्जा को (भ्रा भरत्) उस ने शरीर में मर दिया, रौर (शरीरम्) शरीर को (पादवत् कृत्वा) पैरों समेत कर के वह कारी-

English

Therefore whoever knoweth man regardeth him as Brāhman’s self:

अध्याय 11

श्लोक 8.1

अध्यात्मम्।१-३४ कौरुपथिः।अध्यात्मं, मन्युः।अनुष्टुप्, ३३ पथ्यापङ्क्तिः।यन्म॒न्युर्जा॒यामाव॑हत् संक॒ल्पस्य॑ गृ॒हादधि॑ ।क आ॑सं॒ जन्याः॒ के व॒राः क उ॑ ज्येष्ठव॒रोऽभवत्

adhyātmam| 1-34 kaurupathiḥ| adhyātmaṃ, manyuḥ| anuṣṭup, 33 pathyāpaṅktiḥ| yanmanyurjāyāmāvahat saṃkalpasya gṛhādadhi | ka āsaṃ janyāḥ ke varāḥ ka u jyeṣṭhavaro'bhavat

हिन्दी अर्थ

(सवं देवाः) सबं देवों ने (उपािकान्) समीप होकर शक्ति ल्षगारई, (सती वधूः) साध्वी वधू ने (तत्) उसे (भजानात्) जान लिया । वह वधू कां० ११।सू०८ । भ्रथवंवेद-माष्य १८३ है, शरकृति । कः ऋषिः (१४); कः (१६) ; संवा (१५, १६) ध्या दाक्ति्यो के नाम ह शशा है शासनश्षक्ति (देशो ११।६।२५०२६) । अरभि- प्राय यह है कि ब्रहतर कोई शक्ति न तो शरीर में सन्वियां कर सकती है.‡न कोई प्रजा का पति है, भौर न कोद शासक है) ।

English

Let your mysterious natures be seen by our friends O Arbudi.

अध्याय 11

श्लोक 8.2

तप॑श्चै॒वास्तां॒ कर्म॑ चा॒न्तर्म॑ह॒त्यऽर्ण॒वे।त आ॑सं॒ जन्या॒स्ते व॒रा ब्रह्म॑ ज्येष्ठव॒रोऽभवत्

tapaścaivāstāṃ karma cāntarmahatya'rṇave| ta āsaṃ janyāste varā brahma jyeṣṭhavaro'bhavat

हिन्दी अर्थ

इदं शहा = पुरुष को . “इदं ब्रहम कहना, नवीन् बरेदात्तियो के “हं का० ११।सूु० . भ्रथरवेवेद-माष्य १८९ सबं देवताग्रों का निवास है, इस सादुश्य से विद्वान् गौणरूप मं पुरष को अद् एकेन गच्छत्यद एकन गच्छतीदेकेन नि चवते ॥३३॥

English

Her husband, brother, kin, when one, Arbudi! hath been pierc- ed by thee. Let vultures, ravens, kites, and crows, and every carrion-eating bird.

अध्याय 11

श्लोक 8.3

दश॑ सा॒कम॑जायन्त दे॒वा दे॒वेभ्यः॑ पु॒रा।यो वै तान् वि॒द्यात् प्र॒त्यक्षं॒ स वा अ॒द्य म॒हद् व॑देत्

daśa sākamajāyanta devā devebhyaḥ purā| yo vai tān vidyāt pratyakṣaṃ sa vā adya mahad vadet

हिन्दी अर्थ

(अबुदिः नाम) भ्वुंदि नाम बाला (यः देवः) ओ विजिगीषु सेना- पति है, (ईशानः च न्यु दिः) भौर सेनाधीरवर जो न्यबु दि है, (याभ्याम्) (आवृतम्) बेरा गया है, (इयं च महः पृथिवी) भौर यह विस्तृत गुदभूमि कार १ १। सुई अचवेवेद-भाष्य १६१५ उन भवृदि श्रौर न्थबुं दि के साथ (सेनया) तथा सेना कं साथ (जितम्) विजित राष्ट मे श्रनु एभि) उन के पीछे पीछे या विजित राष्ट के भनुकूल

English

All these, O Arbudi, do thou make visible to our enemies and let them look on mists and fog.

अध्याय 11

श्लोक 8.4

प्रा॒णा॒पा॒नौ चक्षुः॒ श्रोत्र॒मक्षि॑तिश्च॒ क्षिति॑श्च॒ या।व्या॒नो॒दा॒नौ वाङ् मन॒स्ते वा आकू॑ति॒माव॑हन्

prāṇāpānau cakṣuḥ śrotramakṣitiśca kṣitiśca yā| vyānodānau vāṅ manaste vā ākūtimāvahan

हिन्दी अर्थ

श्रलिः= भौरे जसे पुष्पमधृ के लिये उत्तेजित होते है, वंसे मांस के अथो सवं श्वापदं म्षिका ठप्यतु करिभिः । हिलप्राणी, (मक्षिका) मक्लियां, (क्रिमिः) मौर कीड़े .मकौडे, ( पौरषेये कुणपे भ्रधि) पुरषो के मृतशरीरो पर (तृप्यतु) तृप्त हो, (भवुं दे) है हसक सेनापति ! (तव) तुक द्वारा (रदिते) शुभो के कंटने पर .। (न्यबुं दे, श्रव दे) है न्यव दि सेनाधीश ! भ्रौर भबरुदिं सेनापति !

English

Stifled and crushed, O Nyarbudi, low let the smitten foeman lie.

अध्याय 11

श्लोक 8.5

अजा॑ता आसन्नृ॒तवोऽथो॑ धा॒ता बृह॒स्पतिः॑ ।इ॒न्द्रा॒ग्नी अ॒श्विना॒ तर्हि॒ कं ते ज्ये॒ष्ठमुपा॑सत

ajātā āsannṛtavo'tho dhātā bṛhaspatiḥ | indrāgnī aśvinā tarhi kaṃ te jyeṣṭhamupāsata

हिन्दी अर्थ

(श्रवुदे) है शत्रुषातक (तव) तुक द्वारा (रदिते) दात्रु्रो को काटने १९६८ भ्रथववेद-माष्य कां० ११। सु०..९ भय के साथ (संसृज) उन का संसर्गे कर । (अभित्रान्) चतुभ्रोको कर देने बाले, या टेढ़ा कर देते वाले; तथा (२). बाहों को भद्धत कर देने

English

With tongue of fire and crest of smoke go conquering maidens with our host! May Indra, Lord of Might, strike down each bravest warrior of the foes,

अध्याय 11

श्लोक 8.6

तप॑श्चै॒वास्तां॒ कर्म॑ चा॒न्तर्म॑ह॒त्यर्ण॒वे।तपो॑ ह जज्ञे॒ कर्म॑ण॒स्तत् ते ज्ये॒ष्ठमुपा॑सत

tapaścaivāstāṃ karma cāntarmahatyarṇave| tapo ha jajñe karmaṇastat te jyeṣṭhamupāsata

हिन्दी अर्थ

तोड़ देने को वणेन हरभरा है, जिसे कि “वक्र कर देना.कह सकते ह । टांगों के कड् जाने से रात्रुसेनिक गतिहीन हो जते है, भौर बाह्ृभ्रो के भगन या (एषाम्) इन छतों की (वाहवः) बाह ) मृद. हो जाय, कत्य रितं हो जावे, इन के (हदि) हवयों मे (ल ( + . - ४" -भशषवा व्रिस्तृतं पक़-करने बाले जालो द्वारा पकड्ना. भी -वीयने के सदृशच. ही है । "खाल" ढे लिए देखो भयव (९।६-७ ) (

English

Whom this our band hath put to flight: let not one man of those escape.

अध्याय 11

श्लोक 8.7

येत आसी॒द् भूमिः॒ पूर्वा॒ याम॑द्धा॒तय॒ इद् वि॒दुः ।यो वै तां वि॒द्यान्ना॒मथा॒ स म॑न्येत पुराण॒वित्

yeta āsīd bhūmiḥ pūrvā yāmaddhātaya id viduḥ | yo vai tāṃ vidyānnāmathā sa manyeta purāṇavit

हिन्दी अर्थ

कां०११।स्०९ . भ्रथवत्रेद-माष्य, १६९ (एषाम्) इन का (किचन) कुछ भी (मा उच्छेष) ११९ न बचे, (अरवुंदे) हे शत्रुधातक सेनापति! (तव रदिते) तुं वारा शत्रुं के. कट जाने पर । अधारिणींविकेश्यो रुदत्य £: पुरुषे इते रंदिते अंबे तवं ॥१४॥ (पुषे हते) पति भ्रादि के मर जाने पर, उन की स्त्रियां (खदत्यः )' रोती हई, (तिष्नानाः) युद्धभरूमि से प्रतिमुख हो कर जाती हई, भ्रौर (उरः) छातियो को तथा (पट्रौ) पटूरों को (भ्राष्नानाः) हार्थो दारां पीटती हुई, (भरारिणीः) दुःख से रातं, तथा (विकेद्यः) बिखरे केश षटूरौ = पटृरू=पट् (गतौ) +-उरू । गति के साधन “उरू भ्रथात् कटि प्रदेश्च रौर दो घुटनों के बीच के .दो भाग, पंजाबी भाषा में “दो-पटर ' । उरू का प्रथं प्रायः जंघा किया जाता है जोकि वैदिक दृष्टि में ठीक नहीं । भ्रथरववेद “ऊर्बोरोजो जद्खयो्जव."” ( १९।६०।२). म, उसभो भौर जक्घाभाों को पृथक्-पृथक् कटा है । भतिध्नानाः=भति+ हन् (गतौ) ।

English

Let their hearts burst asunder, let their breath fly up and pass away. Let dryness of the mouth o’ertake our foemen, not the friendly ones.

अध्याय 11

श्लोक 8.8

कुत॒ इन्द्रः॒ कुतः॒ सोमः॒ कुतो॑ अ॒ग्निर॑जायत ।कुत॒स्त्वष्टा॒ सम॑भव॒त् कुतो॑ धा॒ताजा॑यत

kuta indraḥ kutaḥ somaḥ kuto agnirajāyata | kutastvaṣṭā samabhavat kuto dhātājāyata

हिन्दी अर्थ

श न्वी प्रसरो रूपका उतारे । .. सनिको वाली सेनाभ्रों को, (अप्सरसः) अन्तरिक्ष मे विचरने वाली सनिक- टूकहियों को, (रूपकाः) नानारूप घारण करने वाली संनिक दुकडियों को, (पात्रे अन्तः) सत्पा्रो मे बेड कर (रेरिहतीम् ) एूजायाठ करने वाली,

English

The clever and the foolish ones, those who are twisted round, the deaf,

अध्याय 11

श्लोक 8.9

इन्द्रा॒दिन्द्रः॒ सोमा॒त् सोमो॑ अ॒ग्नेर॒ग्निरजायत ।त्वष्टा॑ ह जज्ञे॒ त्वष्टु॑र्धा॒तुर्धा॒ताजा॑यत

indrādindraḥ somāt somo agneragnirajāyata | tvaṣṭā ha jajñe tvaṣṭurdhāturdhātājāyata

हिन्दी अर्थ

मे बुरी इच्छाए निहित है एेसी सेनिक-दुकडि्यो को-- तिः सर्वाः)'उन सय टो को (डु दे) दे सतुषातक धेनापठि ! (तवम्) तुः ( भरमि- २०० भ्रथवंवेद-भाष्य कां० ११।सु०९ रम्यः दृशे कूर) तुभो के देखने के लिए त्यार कर, ्रौर (उदारान् च)

English

The dusky-hued, the hornless goats and those whose voice is like the buck’s, All these, O Arbudi, do thou make visible to our enemies: cause them to look on mists and

अध्याय 11

श्लोक 8.10

ये त आस॒न् दश॑ जा॒ता दे॒वा दे॒वेभ्यः॑ पु॒रा।पु॒त्रेभ्यो॑ लो॒कं द॒त्त्वा कस्मिं॒स्ते लो॒क आ॑सते

ye ta āsan daśa jātā devā devebhyaḥ purā| putrebhyo lokaṃ dattvā kasmiṃste loka āsate

हिन्दी अर्थ

गृहं कृत्वा मर्त्यं देवाः पुरुष मारिन् ॥१८॥ दारीर-गृह में चद्ंका निर्माण करता है, भरतः कारीगर है । व्यतृणत् = (कठ. उप. २।१)। सन्तानं “उत्” उत्कृष्टं तब होती है जब किं पिता-माता, खष्नो वे तनदरीनिकतिः पाप्मानो नाम॑ देवताः ।

English

Rise both of you: begin your work with fettering and binding. fast, Assail, both of you, Arbudi, the armies of our enemies.

अध्याय 11

श्लोक 8.11

य॒दा केशा॒नस्थि॒ स्नाव॑ मां॒सं म॒ज्जान॒माभ॑रत्।शरी॑रं कृ॒त्वा पाद॑व॒त् कं लो॒कमनु॒ प्रावि॑शत्

yadā keśānasthi snāva māṃsaṃ majjānamābharat| śarīraṃ kṛtvā pādavat kaṃ lokamanu prāviśat

हिन्दी अर्थ

१. “या तयोधच्यते घा वेवता,-- दस दुष्ट सेः स्वप्न भादि भी देवता ही. है, बाहे इन मे दिव्यता हो, चाहे न हो । अगले मन्तो भे भी देवता कौ यही . लक्षण १८४ -श्रय्ववेद-माष्य कां० ११।सु१ ८ "खालत्यम्" । देवताः == इन पापमय स्वप्नं रादि को भी देवता कहा है।. रादि को देवता कहा हो, दिव्यता की दुष्टि से नहीं । भनु = उत्पन्न शिशु

English

Arise ye and prepare yourselves: ye, the celestial hosts, are friends.

अध्याय 11

श्लोक 8.12

कुतः॒ केशा॒न् कुतः॒ स्नाव॒ कुतो॒ अस्थी॒न्याभ॑रत्।अङ्गा॒ पर्वा॑णि म॒ज्जानं को मां॒सं कुत॒ आभ॑रत्

kutaḥ keśān kutaḥ snāva kuto asthīnyābharat| aṅgā parvāṇi majjānaṃ ko māṃsaṃ kuta ābharat

हिन्दी अर्थ

रजस्तमोमय जीवन के कारण शरीर में पापमय तत्त्वो का भी प्रवेशो यच्च । पप्लोप चाखा मे बृहत् के स्थान मे “सहः” पाढहै। जन्म के अनन्तर, शनेः-दानेः, कष दगुण तया करई सदृगुण शरीर भे प्रविष्ट होते रहते है । (च धतिः) भौर समृद्धि, (व) निदचय से (च भ्रभूतिः) भ्रौर समृद्धि का भ्रभाव, (रातयः) दानभाव, उदारता (च.भरातयः). भ्रौर दाननदेना

English

The God whose name is Arbudi, and Nyarbudi the Mighty One,

अध्याय 11

श्लोक 8.13

सं॒सिचो॒ नाम॒ ते दे॒वा ये सं॑भा॒रान्त्स॒मभ॑रन्।सर्वं॑ सं॒सिच्य॒ मर्त्यं॑ दे॒वाः पुरु॑ष॒मावि॑शन्

saṃsico nāma te devā ye saṃbhārāntsamabharan| sarvaṃ saṃsicya martyaṃ devāḥ puruṣamāviśan

हिन्दी अर्थ

कां ११।ब्रु०८ . भ्रथदवेद-माष्यः १८५ स्तुतियां, (च यत् ओर जो (हन्त इति) “हां” यह, (च न इति) भौर “न” ग्थवेवेद, (भरथो) तथा (ऋचः, साम, यजुः) ऋग्वेद, सामवेद, यजुवद सुख, भरथवा नरनारियों की इच्छाएे, मनो कौ मनाए, (नृत्तानि) नाच

English

The two by whom the air and this great earth are compassed and possessed,

अध्याय 11

श्लोक 8.14

ऊ॒रू पादा॑वष्ठी॒वन्तौ॒ शिरौ॒ हस्ता॒वथो॒ मुख॑म्।पृ॒ष्टीर्ब॑र्ज॒ह्ये पा॒र्श्वे कस्तत् सम॑दधा॒दृषिः॑

ūrū pādāvaṣṭhīvantau śirau hastāvatho mukham| pṛṣṭīrbarjahye pārśve kastat samadadhādṛṣiḥ

हिन्दी अर्थ

नदष्टाःन्=भर्थवौ नरिष्टानि । पदपाठ मे विसगे रहित पाठ है । निरर्थक भाषण, (भभोलापलपः च ये) भौर जो परस्पर संमुख हो कर १८६ भ्रथरवेवेद-माष्य कार १११ सु०८. गानविद्या तंथा नृत्य के सूचक है । ..

English

With these two friends of Indra I go forth to conquer with the host. Rise with our army stand thou up. O Godlike Being, Arbudi.

अध्याय 11

श्लोक 8.15

शिरो॒ हस्ता॒वथो॒ मुखं॑ जि॒ह्वां ग्री॒वाश्च॒ कीक॑साः ।त्व॒चा प्रा॒वृत्य॒ सर्वं॒ तत् सं॒धा सम॑दधान्म॒ही

śiro hastāvatho mukhaṃ jihvāṃ grīvāśca kīkasāḥ | tvacā prāvṛtya sarvaṃ tat saṃdhā samadadhānmahī

हिन्दी अर्थ

वाक् मन, (ते) वे (शरीरेण) शरीर के साथ (ईयन्ते) गति करते ह, सक्रिय चित्तानि सर्वे संकराः क्षरौरमनु भािंशम् ॥२७॥ विविध प्रकार के शासन, (चित्तानि) नाना प्रकार.के विचार या मन, बुद्धि, कृपणाः) भरौर जो मन्दगति वाले, (गुह्याः) छिपे हृए भर्थातु शरीर के. घटक,

English

Breaking the hosts of enemies, surround them with thy winding coils.

अध्याय 11

श्लोक 8.16

यत् तच्छरी॑र॒मश॑यत् सं॒धया॒ संहि॑तं म॒हत्।येने॒दम॒द्य रोच॑ते॒ को अ॑स्मि॒न् वर्ण॒माभ॑रत्

yat taccharīramaśayat saṃdhayā saṃhitaṃ mahat| yenedamadya rocate ko asmin varṇamābharat

हिन्दी अर्थ

जलो को (बीमत्सौ) कल्याणकारी तथा सुख के साधन भूत शरीर मेँ (भरसा- निष्ठ श्राप आठ प्रकार के है, (देडो मन्व २९) । कां० ११।सु० ८ भथर्ववेद-भाष्य १८७ हृश्रा है, लान श्रौर नीले। शरीर मे दोनों प्रकार के खून है । “वास्तेयी”

English

Exhibiting, O Arbudi, seven children of the mist and fog, When butter hath been offered, rise with all of these and with the host.

अध्याय 11

श्लोक 8.17

सर्वे॑ दे॒वा उपा॑शिक्ष॒न् तद॑जानाद् व॒धूः स॒ती।ई॒शा वश॑स्य॒ या जा॒या सास्मि॒न् वर्ण॒माभ॑रत्

sarve devā upāśikṣan tadajānād vadhūḥ satī| īśā vaśasya yā jāyā sāsmin varṇamābharat

हिन्दी अर्थ

हैशरीरकी रचनाका निर्माण करने वाते भ्रापः । शरीर की रचनामें दवारा नासिकामल, भरांखों का मल, बलगम भ्रादि का ब्रहण क्याहै । ये कल्याणे सूखे है । शरीर कल्याण काभी हेतु है, ्रौर सुख का साधन रेत॑ः कृत्वाज्यं देवाः पुरुषमाविशन् ॥२९॥ (भ्रस्थि) शरीर की हहं को (समिधम् कत्वा) समिधा कर के

English

Beating her breast, with tearful face, let the short-earned, the wild-haired hag.

अध्याय 11

श्लोक 8.18

य॒दा त्वष्टा॒ व्यतृ॑णत् पि॒ता त्वष्टु॒र्य उत्त॑रः ।गृ॒हं कृ॒त्वा मर्त्यं॑ दे॒वाः पुरु॑ष॒मावि॑शन्

yadā tvaṣṭā vyatṛṇat pitā tvaṣṭurya uttaraḥ | gṛhaṃ kṛtvā martyaṃ devāḥ puruṣamāviśan

हिन्दी अर्थ

(यजु, ३१।१७) -में क्षरीर की रचना जल, पृथिवी भौर रस द्वारा कही है ।. - भरतः “गुह्याः. पद द्वारा, शरीर के घटक जलो का प्रहण, वेदानुमोदित १८८ भ्रथववेद-माष्य कां९-११। सुर या आपो याश देवंता या विराड् बरह्मणा चह । -

English

Shriek loudly when a man is slain, pierced through by thee, O Arbudi;

अध्याय 11

श्लोक 8.19

स्वप्नो॒ वै त॒न्द्रीर्निरृ॑तिः पा॒प्मानो॒ नाम॑ दे॒वताः॑ ।ज॒रा खाल॑त्यं॒ पालि॑त्यं॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

svapno vai tandrīrnirṛtiḥ pāpmāno nāma devatāḥ | jarā khālatyaṃ pālityaṃ śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

अथास्येत॑रमात्मानं देवाः पराय॑च्छन्नगरये ॥३ १॥ सर्वा हस्िन् देवता मावो गोष्ठ इसते ॥३२॥ (पुम्) (मन्यते) मानतां है कि (इदं हा) यह् बरहम है ¦ . . (आसते) निवास करते है, (इवं) खसे किं (गावः) गौएः (गोष्ठे) गोः

English

Snatching away the vertebra, while with her thought she seeks her son,

अध्याय 11

श्लोक 8.20

स्तेयं॑ दुष्कृ॒तं वृ॑जि॒नं स॒त्यं य॒ज्ञो यशो॑ बृ॒हत्।बलं॑ च क्ष॒त्रमोज॑श्च॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

steyaṃ duṣkṛtaṃ vṛjinaṃ satyaṃ yajño yaśo bṛhat| balaṃ ca kṣatramojaśca śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

तीन प्रकार कें (वि गच्छति) विविध स्थानों में जाता दहै (निषेवते) सुखदुःख का सेवन करता है । परमेदवर ही मृत्यु है, वह भमत है । कारण (शवः) बलस्वरूप.या बली जीवात्मा (ग्रधि) शरीर का अधिष्ठाता (उच्यते) कहा जाता हं ।

English

Feast on our foes, and show where one, Arbudi! hath been pierced by thee.

अध्याय 11

श्लोक 8.21

भूति॑श्च॒ वा अभू॑तिश्च रा॒तयोऽरा॑तयश्च॒ याः ।क्षुध॑श्च॒ सर्वा॒स्तृष्णा॑श्च॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

bhūtiśca vā abhūtiśca rātayo'rātayaśca yāḥ | kṣudhaśca sarvāstṛṣṇāśca śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

कारण भ्न्तरिश्ष मं .घूमता रहता है । २. इह = इस पृथिवीलोक मे । भरथवा “पुष्येन पुण्यं लोकं नयति पापेन पाप १९० . भथरववेद-भाष्य कां० ११।सुग्८ मातग म. विद्यमान शरीर का वर्णन हृभ्राहै। यहमी कहा है कि उस भवस्था का शरीर निरात्मक नहीं होता, भ्रपितु उस में बलस्वरूप या बली जीवात्मा रहता है, जोकि शरीर का भ्रधिष्ठाता हो कर उस की रक्षा तथा

English

Then let each greedy beast of prey, and fly and worm regale itself Upon the human corpse where one, Arbudi, hath been pierced by thee.

अध्याय 11

श्लोक 8.22

नि॒न्दाश्च॒ वा अनि॑न्दाश्च॒ यच्च॒ हन्तेति॒ नेति॑ च ।शरी॑रं श्र॒द्धा दक्षि॒णाश्र॑द्धा॒ चानु॒ प्रावि॑शन्

nindāśca vā anindāśca yacca hanteti neti ca | śarīraṃ śraddhā dakṣiṇāśraddhā cānu prāviśan

हिन्दी अर्थ

भरसङ्गानूसार जीवात्मा के र्मवास का वणन उचित ही प्रतीतं होता है । काण. ११। सु° ६-१० भथवेवेद-बाष्य १९ वि . १० वें सूक्त मे “केतुभिः सह” तथा “श्रदणेः केतुभिः सह" (१०।१,२) दारा ण्डे घोर युद्ध मे हए रक्तपात के सूचक हैँ । = “प

English

Attack them, both of you; bear off their vital breath O Nyar- budi.

अध्याय 11

श्लोक 8.23

वि॒द्याश्च॒ वा अवि॑द्याश्च॒ यच्चा॒न्यदु॑पदे॒श्यऽम्।शरी॑रं॒ ब्रह्म॒ प्रावि॑श॒दृचः॒ सामाथो॒ यजुः॑

vidyāśca vā avidyāśca yaccānyadupadeśya'm| śarīraṃ brahma prāviśadṛcaḥ sāmātho yajuḥ

हिन्दी अर्थ

. २. €वेमेंसुक्तर्मे भवुंदिभ्रौरन्यबरुंदिदो सेनापति ै। ्रबुंदि न्यवुं दि सेना संचाल मे उसे निर्देश देता है । इसी लिये न्यबुं दि को “ईशान कहा है (४) । श्रवु दिः = भर्व (भ्रवं हिसायाम्) +दा (दनि), जो कि मत्यधिक हिसा दायक । ईशान होने के कारण हसे भ्रत्यधिक हिसादायक = ही देवासेना के अधिपति ख्पमें युद्ध करते है । (१०।२०,२१) मे भ्रबुदि

English

Let mingled shouts and echoing cries of woe amid our foemen show where thou, O Arbudi, hast pierced

अध्याय 11

श्लोक 8.24

आ॒न॒न्दा मोदाः॑ प्र॒मुदो॑ऽभिमोद॒मुद॑श्च॒ ये।ह॒सो न॒रिष्टा॑ नृ॒त्तानि॒ शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

ānandā modāḥ pramudo'bhimodamudaśca ye| haso nariṣṭā nṛttāni śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

के सहायक रूप मे न्यबुं दि को पुनः नियुक्त किया हैँ । इस प्रकार (१०।२०, में बन्धे तीन मित्रराष्टरो का प्रतिनिधि होकर सेनासंचालन करता है। भरतः हृभा है । परन्तु . साथ ही.उदार. भावों का प्रदद्येन भी अनुमोदित हृभ्रा है, ताकि भरासुरी-सेना उदार भावों से प्रभावित हो कर भ्रात्मसमर्पण करदे भौर -घोर युद्ध समाप्त हो सके (९।,१.६,१५.१६,२२,२४) 1 (१०।१) में सायणाचायं ने भी “उदाराः” का. भरं किया है “श्रौदायं गुणोपेताः सेना- (क ) इवन्वतीः सेनाएं (६।१५), भर्थात् शिकारी, खोजी ग्रा दोनों भ्रकार के कुत्तो वाली सेनाए ॥

English

Shake them, and let them sink with fear: e’erwhelm our enemies with dread.

अध्याय 11

श्लोक 8.25

आ॒ला॒पाश्च॑ प्रला॒पाश्चा॑भिलाप॒लप॑श्च॒ ये।शरी॑रं॒ सर्वे॒ प्रावि॑शन्ना॒युजः॑ प्र॒युजो॒ युजः॑

ālāpāśca pralāpāścābhilāpalapaśca ye| śarīraṃ sarve prāviśannāyujaḥ prayujo yujaḥ

हिन्दी अर्थ

, करने वाला भस्त्र (६।२२,१०।१६) के सदुश र्चबाने. वाले .४ दाढ़ों वाले नोकोले बाण, चयावदतः भ्र्थात्ः काले- केवेल शितिपदी, सम्मवतः विभोहनास्तर के गणो वाला भस्त्र (१०।२०) . याणि) भौर धनुर्घारियो की वीरता के कमं हया उनके पराक्रमर्है, उर,

English

With widely-grasping bends of arm, O Arbudi, crush down our foes. Let those mens’ arms grow faint and weak, dull be the purpose of their heart;

अध्याय 11

श्लोक 8.26

प्रा॒णा॒पा॒नौ चक्षुः॒ श्रोत्र॒मक्षि॑तिश्च॒ क्षिति॑श्च॒ या।व्या॒नो॒दा॒नौ वाङ् मनः॒ शरी॑रेण॒ त ई॑यन्ते

prāṇāpānau cakṣuḥ śrotramakṣitiśca kṣitiśca yā| vyānodānau vāṅ manaḥ śarīreṇa ta īyante

हिन्दी अर्थ

है, (तद् सर्व॑म्) उस सब को (अबुदे) है हिसा करने वालि सेनापति (च) भ्रौर (उदारान्) उदार भावों कामी (प्र ददंय) प्रददोन कर। +-दा +-किंः = हिसा देने बाला -श्र्थात् हिसा करने वाला सेनापति या सेना- है, यथा-जलचिः; इषुत्रिः (्रष्टा० ३।३।६३) ।

English

And let not aught of them be left when thou, O Arbudi, hast pierced.

अध्याय 11

श्लोक 8.27

आ॒शिष॑श्च प्र॒शिष॑श्च सं॒शिषो॑ वि॒शिष॑श्च॒ याः ।चि॒त्तानि॒ सर्वे॑ संक॒ल्पाः शरी॑र॒मनु॒ प्रावि॑शन्

āśiṣaśca praśiṣaśca saṃśiṣo viśiṣaśca yāḥ | cittāni sarve saṃkalpāḥ śarīramanu prāviśan

हिन्दी अर्थ

विचारों तथा संकल्पो भ्रौर उदारभावो को भी प्रकट कर देना चाहिए, जिस , से वंह जान सके कि हम किसीप्रकार भी युद्ध नही चाहते, यदि युद्धके लिये' हरमे बोधिते ही नँ कर दिया जाथ १९४ भ्रयवेवेद-माष्य कां० ११।सु० ६

English

Self-smiting, beating breast and thigh, careless of unguent, with their hair dishevelled, weeping, hags shall run together, when a man is slain, when thou, O

अध्याय 11

श्लोक 8.28

आस्ते॑यीश्च॒ वास्ते॑यीश्च त्वर॒णाः कृ॑प॒णाश्च॒ याः ।गुह्याः॑ शु॒क्रा स्थू॒ला अ॒पस्ता बी॑भ॒त्साव॑सादयन्

āsteyīśca vāsteyīśca tvaraṇāḥ kṛpaṇāśca yāḥ | guhyāḥ śukrā sthūlā apastā bībhatsāvasādayan

हिन्दी अर्थ

(देवजनाः मित्राः) है भित्र विजिगीषु सैनिक जनो (उत्तिष्ठत) दे) है हिसा मे कुशल सेनापति ! (नः) हमारे (या मित्राणि) मित्रैः यदि युद्ध के लिये. बाधित ही होना पड़ तो युद्ध की तय्यारी करनी लेनी चाहिए । भ्रपनी पूरी सैनिक शक्ति को युद्ध भूमि मेननाखड़ाकरना

English

Arbudi, hast pierced.

अध्याय 11

श्लोक 8.29

अस्थि॑ कृ॒त्वा स॒मिधं॒ तद॒ष्टापो॑ असादयन्।रेतः॑ कृ॒त्वाज्यं॑ दे॒वाः पुरु॑ष॒मावि॑शन्

asthi kṛtvā samidhaṃ tadaṣṭāpo asādayan| retaḥ kṛtvājyaṃ devāḥ puruṣamāviśan

हिन्दी अर्थ

चाहिए । कु युद्ध भमि में लाने चाहिए, शेष गुप्त रखने चािर्ये । संदृष्टा, गुप्ता = संदृष्टानि गुप्तानि मित्राणि । देवजनाः दिवु विजिगीषा . अमित्राणां सेनां अमि ष॑चमहदे ।।३॥ (भ्रबुंदे) है वंदि ! भौर न्यवुंदि ! (४) तुम दोनों (उत्तिष्ठ- अबुदिरनाम्. यो देवः नच्च न्यडेदिः ।

English

Apsarases with dog-like mates, and Rūpakās, O Arbudi, And her who licks the cup inside, and seeks to wound in ill- kept place,

अध्याय 11

श्लोक 8.30

या आपो॒ याश्च॑ दे॒वता॒ या वि॒राड् ब्रह्म॑णा स॒ह।शरी॑रं॒ ब्रह्म॒ प्रावि॑श॒च्छरी॒रेऽधि॑ प्र॒जाप॑तिः

yā āpo yāśca devatā yā virāḍ brahmaṇā saha| śarīraṃ brahma prāviśaccharīre'dhi prajāpatiḥ

हिन्दी अर्थ

देवः = दिवु विजिगीषा, तान् । न्यत्रंदि बडा आफिखर है, तभी ८।३७) । सश्नाट् दोनों भ्राफिसरों तथा सेना के पीछे पीछे विजित राष्ट के भति भ्रनुकल भावनाभ्रो सित, विजित राष्ट्र मे पदापंण करता है, विरोधी या बदला लेने की मावना से नहीं । । उन्चिष्ठ त्वं देवजनाबदे सेन॑या सह । मरञ्जन्नमित्रांणां सेनां मोगेमिः प्ररिबारय ॥५॥ (देवजन अबु दे) है विजिगीषु-जन, भवुं दिं ! (त्वम्) तु (सेनया

English

The fiend who creeps upon the sword, maimed, dwelling where Lthe wounded lie,

अध्याय 11

श्लोक 8.31

सूर्य॒श्चक्षु॒र्वातः॑ प्रा॒णं पुरु॑षस्य॒ वि भे॑जिरे ।अथा॒स्येत॑रमा॒त्मानं॑ दे॒वाः प्राय॑च्छन्न॒ग्नये॑

sūryaścakṣurvātaḥ prāṇaṃ puruṣasya vi bhejire | athāsyetaramātmānaṃ devāḥ prāyacchannagnaye

हिन्दी अर्थ

(मोगेभिः) मोग की वस्तुं के द्वारा (परिवाहय) षेर'। सेनापति का यहु कर्तव्य है कि वह जब शत्र राष्टरकी सेना््रों पर विजयपाले, तो वह शत्रु राष्ट कीप्रनाको.तंगन करे, श्रपितुभोगकी बस्तुए दे कर, उसे भपने भनुकूल बनाने या यत्न करे । के साथ, भीर (सेनया) पर राष्ट की सेना के साथ (उतिष्ठ) भ्रपने राष्ट का उत्थान कर, समुन्नति कर । नि

English

The misty shapes that lurk concealed, Gandharvas and Apsara- ses, demons, and snakes and

अध्याय 11

श्लोक 8.32

तस्मा॒द् वै विद्वान् पुरु॑षमि॒दं ब्रह्मेति॑ मन्यते ।सर्वा॒ ह्यऽस्मिन् दे॒वता॒ गावो॑ गो॒ष्ठ इ॒वास॑ते

tasmād vai vidvān puruṣamidaṃ brahmeti manyate | sarvā hya'smin devatā gāvo goṣṭha ivāsate

हिन्दी अर्थ

१९६ प्रथववेद-माष्य . रका० ११। सूु०8 उदारतां प्रदशित करनो चाहिए इस पर सम्यक् विचार कर के, इन सब उदार भावों के साथ, पर-राष्टर मे प्रवेश कर भ्रौर शुभ-यज्ञ मे घुताहुतियां विवी पुरुषे इते रदिते अंबदे तव॑ ॥५७॥. (भ्रबुं दे) है हिसा करने वाले सेनापति ! (तव रदिते) तेरं काटने

English

Other Folk; Armed with four fangs and yellow teeth, deformed, with faces smeared with blood, the

अध्याय 11

श्लोक 8.33

प्र॒थ॒मेन॑ प्रमा॒रेण॑ त्रे॒धा विष्व॒ङ् वि ग॑च्छति ।अ॒द एके॑न॒ गच्छ॑त्य॒द एके॑न गच्छती॒हैके॑न॒ नि षे॑वते

prathamena pramāreṇa tredhā viṣvaṅ vi gacchati | ada ekena gacchatyada ekena gacchatīhaikena ni ṣevate

हिन्दी अर्थ

पर (पुरषे हते) पुरुष के मर जाने पर उस की पत्नी (भतिष्नाना) छाती पीटती हई, (भधुमूखी ) मुख पर श्रांसुभ्रो वालो, (कृधुकर्णी) हलके , कानों वाती, (विकेशी) भौर बिलरे केशों वाली होकर (क्रोशतु) चिल्लाएं । कषु = हस्वनाम (निरुक्त ६।१।३), दुःख कै कारण कर्णाभषण उतार लेने पर हलके कानों वाली । रदित = कोटना, तलवार, कुल्हा, बाण (श्रवु दे) है हिसा करने वाले सेनापति ! (तव रदिते) तेरे काटने , पर, (करूकरम्) करूकर को (संकषन्ती) खीचती हुई, (मनसा पुत्रम्

English

terrible and fearless ones,

अध्याय 11

श्लोक 8.34

अ॒प्सु स्ती॒मासु॑ वृ॒द्धासु॒ शरी॑रमन्त॒रा हि॒तम्।तस्मिं॒छवोऽध्य॑न्त॒रा तस्मा॒च्छवोऽध्यु॑च्यते

apsu stīmāsu vṛddhāsu śarīramantarā hitam| tasmiṃchavo'dhyantarā tasmācchavo'dhyucyate

हिन्दी अर्थ

पति, भाई तदनन्तर निज सम्बन्वियो को मन से चाहती हृईः (क्रोशतु) “कुरीर” पत्नी के हाथ का भ्राभ्रूषण है, जिसे कि पन्जांबी माषा सें कलीरा कहते है । भ्रव ० ६।१३८।३ मे करीर को शिरोभूषेण कहा है । यथा कांश १ १। सु € भरथवववेद-भाष्य १६७ शरींरों पर (तृप्यन्तु) तृप्त ह, (श्रवु दे तव रदिते) है भबुंदि ! तेरे काटने पर । (समीक्षयन्) तु इस दृश्य को देखता रह् । त,

English

Make thou, O Arbudi, those wings of hostile armies quake with dread. Let Conqueror and Victor, friends of Indra, overcome our foes.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।