अध्याय 64
श्लोक 1
बंदौं रघुपति करुना-निधान ।जाते छूटै भव-भेद-ग्यान
baṃdauṃ raghupati karunā-nidhāna | jāte chūṭai bhava-bheda-gyāna
अध्याय 64
बंदौं रघुपति करुना-निधान ।जाते छूटै भव-भेद-ग्यान
baṃdauṃ raghupati karunā-nidhāna | jāte chūṭai bhava-bheda-gyāna
अध्याय 64
रघुबंस-कुमुद-सुखप्रद निसेस ।सेवत पद-पंकज अज-महेस
raghubaṃsa-kumuda-sukhaprada nisesa | sevata pada-paṃkaja aja-mahesa
अध्याय 64
निज भक्त-हृदय-पाथोज-भृंग ।लावन्य बपुष अगनित अनंग
nija bhakta-hṛdaya-pāthoja-bhṛṃga | lāvanya bapuṣa aganita anaṃga
अध्याय 64
अति प्रबल मोह-तम-मारतंड ।अग्यान-गहन-पावक प्रचंड
ati prabala moha-tama-mārataṃḍa | agyāna-gahana-pāvaka pracaṃḍa
अध्याय 64
अभिमान-सिंधु-कुंभज उदार ।सुररंजन, भंजन भूमिभार
abhimāna-siṃdhu-kuṃbhaja udāra | suraraṃjana, bhaṃjana bhūmibhāra
अध्याय 64
रागादि-सर्पगन-पन्नगारि ।कंदर्प-नाग-मृगपति, मुरारि
rāgādi-sarpagana-pannagāri | kaṃdarpa-nāga-mṛgapati, murāri
अध्याय 64
भव-जलधि-पोत चरनारबिंद ।जानकी-रवन आनंद-कंद
bhava-jaladhi-pota caranārabiṃda | jānakī-ravana ānaṃda-kaṃda
अध्याय 64
हनुमंत-प्रेम-बापी-मराल ।निष्काम कामधुक गो दयाल
hanumaṃta-prema-bāpī-marāla | niṣkāma kāmadhuka go dayāla
अध्याय 64
त्रैलोक-तिलक, गुनगहन राम ।कह तुलसिदास बिश्राम-धाम
trailoka-tilaka, gunagahana rāma | kaha tulasidāsa biśrāma-dhāma
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.