अध्याय 37
श्लोक 1
लाल लाड़िले लखन, हित हौ जनके ।सुमिरे संकटहारी, सकल सुमंगलकारी, पालक कृपालु अपने पनके
lāla lāḍa़ile lakhana, hita hau janake | sumire saṃkaṭahārī, sakala sumaṃgalakārī, pālaka kṛpālu apane panake
अध्याय 37
लाल लाड़िले लखन, हित हौ जनके ।सुमिरे संकटहारी, सकल सुमंगलकारी, पालक कृपालु अपने पनके
lāla lāḍa़ile lakhana, hita hau janake | sumire saṃkaṭahārī, sakala sumaṃgalakārī, pālaka kṛpālu apane panake
अध्याय 37
धरनी-धरनहार भंजन-भुवनभार, अवतार साहसी सहसफनके ।सत्यसंध, सत्यब्रत, परम धरमरत, निरमल करम बचन अरु मनके
dharanī-dharanahāra bhaṃjana-bhuvanabhāra, avatāra sāhasī sahasaphanake | satyasaṃdha, satyabrata, parama dharamarata, niramala karama bacana aru manake
अध्याय 37
रूपके निधान, धनु-बान पानि, तून कटि, महाबीर बिदित, जितैया बड़े रनके ।सेवक-सुखदायक, सबल, सब लायक, गायक जानकीनाथ गुनगनके
rūpake nidhāna, dhanu-bāna pāni, tūna kaṭi, mahābīra bidita, jitaiyā baḍa़e ranake | sevaka-sukhadāyaka, sabala, saba lāyaka, gāyaka jānakīnātha gunaganake
अध्याय 37
भावते भरतके, सुमित्रा-सीताके दुलारे, चातक चतुर राम स्याम घनके ।बल्लभ उरमिलाके, सुलभ सनेहबस, धनी धन तुलसीसे निरधनके
bhāvate bharatake, sumitrā-sītāke dulāre, cātaka catura rāma syāma ghanake | ballabha uramilāke, sulabha sanehabasa, dhanī dhana tulasīse niradhanake
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स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.