अध्याय 24
श्लोक 1
अब चित चेति चित्रकूटहि चलु ।कोपित कलि, लोपित मंगल मगु, बिलसत बढ़त मोह-माया-मलु
aba cita ceti citrakūṭahi calu | kopita kali, lopita maṃgala magu, bilasata baḍha़ta moha-māyā-malu
अध्याय 24
अब चित चेति चित्रकूटहि चलु ।कोपित कलि, लोपित मंगल मगु, बिलसत बढ़त मोह-माया-मलु
aba cita ceti citrakūṭahi calu | kopita kali, lopita maṃgala magu, bilasata baḍha़ta moha-māyā-malu
अध्याय 24
भूमि बिलोकु राम-पद-अंकित, बन बिलोकु रघुबर-बिहारथलु ।सैल-सृंग भवभंग-हेतु लखु, दलन कपट-पाखंड-दंभ-दलु
bhūmi biloku rāma-pada-aṃkita, bana biloku raghubara-bihārathalu | saila-sṛṃga bhavabhaṃga-hetu lakhu, dalana kapaṭa-pākhaṃḍa-daṃbha-dalu
अध्याय 24
जहँ जनमे जग-जनक जगतपति, बिधि-हरि-हर परिहरि प्रपंच छलु ।सकृत प्रबेस करत जेहि आस्रम, बिगत-बिषाद भये पारथ नलु
jaha~ janame jaga-janaka jagatapati, bidhi-hari-hara parihari prapaṃca chalu | sakṛta prabesa karata jehi āsrama, bigata-biṣāda bhaye pāratha nalu
अध्याय 24
न करु बिलंब बिचारु चारुमति, बरष पाछिले सम अगिले पलु ।मंत्र सो जाइ जपहि, जो जपि भे, अजर अमर हर अचइ हलाहलु
na karu bilaṃba bicāru cārumati, baraṣa pāchile sama agile palu | maṃtra so jāi japahi, jo japi bhe, ajara amara hara acai halāhalu
अध्याय 24
रामनाम-जप जाग करत नित, मज्जत पय पावन पीवत जलु ।करिहैं राम भावतो मनकौ, सुख-साधन, अनयास महाफलु
rāmanāma-japa jāga karata nita, majjata paya pāvana pīvata jalu | karihaiṃ rāma bhāvato manakau, sukha-sādhana, anayāsa mahāphalu
अध्याय 24
कामदमनि कामता, कलपतरु सो जुग-जुग जागत जगतीतलु ।तुलसी तोहि बिसेषि बूझिये, एक प्रतीति-प्रीति एकै बलु
kāmadamani kāmatā, kalapataru so juga-juga jāgata jagatītalu | tulasī tohi biseṣi būjhiye, eka pratīti-prīti ekai balu
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.