अध्याय 194
श्लोक 1
जो अनुराग न राम सनेही सों ।तौ लह्यो लाहु कहा नर-देही सों
jo anurāga na rāma sanehī soṃ | tau lahyo lāhu kahā nara-dehī soṃ
अध्याय 194
जो अनुराग न राम सनेही सों ।तौ लह्यो लाहु कहा नर-देही सों
jo anurāga na rāma sanehī soṃ | tau lahyo lāhu kahā nara-dehī soṃ
अध्याय 194
जो तनु धरि, परिहरि सब सुख, भये सुमति राम-अनुरागी ।सो तनु पाइ अघाइ किये अघ, अवगुन-उदधि अभागी
jo tanu dhari, parihari saba sukha, bhaye sumati rāma-anurāgī | so tanu pāi aghāi kiye agha, avaguna-udadhi abhāgī
अध्याय 194
ग्यान-बिराग, जोग-जप, तप-मख, जग मुद-मग नहिं थोरे ।राम-प्रेम बिनु नेम जाय जैसे मृग-जल-जलधि-हिलोरे
gyāna-birāga, joga-japa, tapa-makha, jaga muda-maga nahiṃ thore | rāma-prema binu nema jāya jaise mṛga-jala-jaladhi-hilore
अध्याय 194
लोक-बिलोकि, पुरान-बेद सुनि, समुझि-बूझि गुरु-ग्यानी ।प्रीति-प्रतीति राम-पद-पंकज सकल-सुमंगल-खानी
loka-biloki, purāna-beda suni, samujhi-būjhi guru-gyānī | prīti-pratīti rāma-pada-paṃkaja sakala-sumaṃgala-khānī
अध्याय 194
अजहुँ जानि जिय, मानि हारि हिय, होइ पलक महँ नीको ।सुमिरु सनेहसहित हित रामहिं, मानु मतो तुलसीको
ajahu~ jāni jiya, māni hāri hiya, hoi palaka maha~ nīko | sumiru sanehasahita hita rāmahiṃ, mānu mato tulasīko
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स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.