अध्याय 107
श्लोक 1
है नीको मेरो देवता कोसलपति राम ।सुभग सरोरुह लोचन, सुठि सुंदर स्याम
hai nīko mero devatā kosalapati rāma | subhaga saroruha locana, suṭhi suṃdara syāma
अध्याय 107
है नीको मेरो देवता कोसलपति राम ।सुभग सरोरुह लोचन, सुठि सुंदर स्याम
hai nīko mero devatā kosalapati rāma | subhaga saroruha locana, suṭhi suṃdara syāma
अध्याय 107
सिय-समेत सोहत सदा छबि अमित अनंग ।भुज बिसाल सर धनु धरे, कटि चारु निषंग
siya-sameta sohata sadā chabi amita anaṃga | bhuja bisāla sara dhanu dhare, kaṭi cāru niṣaṃga
अध्याय 107
बलिपूजा चाहत नहीं, चाहत एक प्रीति ।सुमिरत ही माने भलो, पावन सब रीति
balipūjā cāhata nahīṃ, cāhata eka prīti | sumirata hī māne bhalo, pāvana saba rīti
अध्याय 107
देहि सकल सुख, दुख दहै, आरत-जन-बंधु ।गुन गहि, अघ-औगुन हरै, अस करुनासिंधु
dehi sakala sukha, dukha dahai, ārata-jana-baṃdhu | guna gahi, agha-auguna harai, asa karunāsiṃdhu
अध्याय 107
देस-काल-पूरन सदा बद बेद पुरान ।सबको प्रभु, सबमें बसै, सबकी गति जान
desa-kāla-pūrana sadā bada beda purāna | sabako prabhu, sabameṃ basai, sabakī gati jāna
अध्याय 107
को करि कोटिक कामना, पूजै बहु देव ।तुलसिदास तेहि सेइये, संकर जेहि सेव
ko kari koṭika kāmanā, pūjai bahu deva | tulasidāsa tehi seiye, saṃkara jehi seva
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भाषा एवं सामग्री · Language and layers
स्रोत: local proofread transcription: Tulsidas's Vinaya Patrika (279 padas), read from page images of a printed edition and proofread. One chapter per pada, stanza numbers as printed. The editor's Hindi bhavartha is not reproduced. · प्राप्त 19/10/2026
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अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
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भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
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समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
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Collated against Kashi Nagari Pracharini Sabha critical edition.