Vayu Purana
217
अध्याय 217 / 232

Adhyaya 217

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 217

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे अषाढीतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम षोडशोत्तरद्विशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय २१७ श्रीमार्कण्डेय उवाच: एरण्डीसङ्गमं गच्छेत् सुरासुरनमस्कृतम् ।तत्तु तीर्थं महापुण्यं महापातकनाशनम्

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe aṣāḍhītīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma ṣoḍaśottaradviśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 217 śrīmārkaṇḍeya uvāca: eraṇḍīsaṅgamaṃ gacchet surāsuranamaskṛtam / tattu tīrthaṃ mahāpuṇyaṃ mahāpātakanāśanam

हिन्दी अर्थ

न ज्ञायेत यदि व्यासो गोपयेदथ वा भवान्। अन्न नः संशयं छिन्धि पुणः पोराणिको यतः १८

English

Verses 48-57 contain the Phala-Sruti of listening to or narrating this Purana.

अध्याय 217

श्लोक 2

उपवासपरो भूत्वा नियतेन्द्रियमानसः ।तत्र स्नात्वा विधानेन मुच्यते ब्रह्महत्यया

upavāsaparo bhūtvā niyatendriyamānasaḥ / tatra snātvā vidhānena mucyate brahmahatyayā

हिन्दी अर्थ

पराशरसुतो व्यासः कृत्वा पौराणिकों कथाम् । सर्ववेदार्थंघदितां चिन्तयाभास चेतसि १२० वर्णाश्रमवरता धर्मों मया सम्पगुदाहृतः । मुक्तिमार्गा बहुविधा उक्ता वेदाविरोधतः जीवेश्व रब्नह्मभेदो निरस्तः सुत्रनिणंये । निरूपितं परं ब्रह्म श्रुतियुक्तविचारत:ः २२ अक्षरं परम ब्रह्म परमात्मापरं पदं पदम् । यदर्थ ब्रह्मचर्योदिवानप्रस्थयतिन्रतम्

English

MS. Kha used by A. (Anandas'rama edition) contains the following additional verses:

अध्याय 217

श्लोक 3

तत्र तीर्थे तु यो भक्त्या प्राणत्यागपरो भवेत् ।अनिवर्तिका गतिस् तस्य रुद्रलोकाद् असंशयम्

tatra tīrthe tu yo bhaktyā prāṇatyāgaparo bhavet / anivartikā gatis tasya rudralokād asaṃśayam

हिन्दी अर्थ

धर्म, भक्तिमार्ग, शान मार्ग, वेराग्य मार्भ, अनिल, नीरज (?) विविध उपासनाएं चित्त की कर्म संशुद्धि आदि का विधि समेत वर्णन किया गया है। ब्राह्य, शव, वेष्णव, सौर, शाक्त, आहत, षड् दर्शनादि विविध

English

A. records the following additional verses from the same (Kha) MS. after the words Brahmabhuydya gacchati: They are translated from p 421 of A edition as follows:

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।