Vayu Purana
124
अध्याय 124 / 232

Adhyaya 124

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 124

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे कर्मदेश्वरतीर्थमाहत्म्यवर्णनं नाम त्रयोविंशत्युत्तरशततमो ऽध्यायः॥ र्क्व् अध्याय १२४ श्रीमार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेन्महीपाल नर्मदेश्वरमुत्तमम् ।तत्र तीर्थे नरः स्नात्वा मुच्यते सर्वकिल्बिषैः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe karmadeśvaratīrthamāhatmyavarṇanaṃ nāma trayoviṃśatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ|| rkv adhyāya 124 śrīmārkaṇḍeya uvāca: tato gacchenmahīpāla narmadeśvaramuttamam / tatra tīrthe naraḥ snātvā mucyate sarvakilbiṣaiḥ

हिन्दी अर्थ

मक्षिकाणां विकाराणि जायस्ते जातयो5परे ।) प्रायेण तु वसन्त्यस्मिन्नुच्छिष्टोदककर्दसे ३१३१६ मशकानां विकाराणि अ्रमराणां तथंव च। तृणेस्यः समजायन्त पुत्रिकाः पुत्रसप्तकाः मणिच्छेदास्तथा व्याला: पोतजाः परिकीतिता: । शतवेरिविकाराणि करीषेभ्यो भवन्ति हि. ॥३े१८ एवमादिरसंख्यातो गणः संस्वेदों मया समासाभिहितों होष प्रावकर्मंवशजः स्मृतः ३१६ तथाइउन्ये नेऋंता सत्तवास्ते स्मृता उपसर्गजाः । पृतास्तु योनिजाः केचित्केचिदोत्पत्तिका: स्मृता: ॥

English

Ravana's harrasment is not thus delimited elsewhere. It should be a part of his span of life. Bd. 3.8.53 correctly reads Satfim caiva sahasrayi 'sixty thousand years' as a part of Ravana's total life. For, a set of the four Yugas=4320000 years, thirteen such sets=56160000 years. Ravaria is credited with this span.

अध्याय 124

श्लोक 2

अग्निप्रवेशश्च जले ऽथवा मृत्युरनाशके ।अनिवर्तिका गतिस्तस्य यथा मे शङ्करो ऽब्रवीत्

agnipraveśaśca jale 'thavā mṛtyuranāśake / anivartikā gatistasya yathā me śaṅkaro 'bravīt

हिन्दी अर्थ

प्रायेण देवा: सर्वे वे विज्ेया ह्यपपत्तिजाः । केचित्तु योनिजा देवा: केचिदेवानिमित्तत:

English

Mahodara, Prahasta, Mahapariisu and Khara were the sons of Puspotkata and Kumbhlnasl was her daughter.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।