Vayu Purana
123
अध्याय 123 / 232

Adhyaya 123

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 123

श्लोक 1

॥ इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां पञ्चम आवन्त्यखण्डे रेवाखण्डे कोहनतीर्थमाहात्म्यवर्णनं नाम द्वाविंशत्युत्तरशततमो ऽध्यायः ॥ र्क्व् अध्याय १२३ मार्कण्डेय उवाच: ततो गच्छेत्तु राजेन्द्र कर्मदीतीर्थम् उत्तमम् ।यत्र तिष्ठति विघ्नेशो गणनाथो महाबलः

|| iti śrīskānde mahāpurāṇa ekāśītisāhasryāṃ saṃhitāyāṃ pañcama āvantyakhaṇḍe revākhaṇḍe kohanatīrthamāhātmyavarṇanaṃ nāma dvāviṃśatyuttaraśatatamo 'dhyāyaḥ || rkv adhyāya 123 mārkaṇḍeya uvāca: tato gacchettu rājendra karmadītīrtham uttamam / yatra tiṣṭhati vighneśo gaṇanātho mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

गये गोबर में ये जन्तु उत्पन्न होते हैं। है द्विजगण इसी प्रकार काष्ठादि वस्तुओं से घुन आदि क्षद्र जन्तु उत्पन्न होते हैं । वृक्षों से विविध प्रकार की नीली मक्खियाँ उत्पन्न होती हैं, सब प्रकार की सूखी हुई वस्तुओं से पुत्रिका उत्पन्न होती हैं, शतिको (?) से सभी प्रकार के वर्षकालीन सर्प उत्पन्न होते है। सूखे गोबरों से बिच्छुओं की उत्पत्ति होती है ।३०६९-३१२। है प्रभो ! इसी प्रकार मौओं और भंसों के शरीर से भी स्वेदज जन्तुओं

English

His span of life as reckoned by Brahmanas, experts in calculation, extended to five crores and sixtyone lakhs of years. For sixty lakhs of years 3, this Ravana made Devas and Sages terribly sleepless (by means of his atrocities). In the twenty-fourth Tretayuga, when his merit of penance declin¬ ed, he met Rama, the son of Dasaratha, (in battle) and was slain along with his followers.

अध्याय 123

श्लोक 2

तत्र तीर्थे नरः स्नात्वा चतुर्थ्यां वा ह्युपोषितः ।विघ्नं न विद्यते तस्य सप्तजन्मनि भारत

tatra tīrthe naraḥ snātvā caturthyāṃ vā hyupoṣitaḥ / vighnaṃ na vidyate tasya saptajanmani bhārata

हिन्दी अर्थ

की उत्पत्ति होती है। मत्स्य आदि विविध जन्‍्तु अण्डे से उत्पन्न होते हैं। च॑ंवीरिक, गोजा एथं अन्यान्य प्रकार घनुरिचिल्नान्तगंतग्रग्यो घ पुस्तके नास्ति ।

English

Etymology of'Kubera*, the god of wealth.

अध्याय 123

श्लोक 3

तत्र तीर्थे हि यत्किंचिद् दीयते नृपसत्तम ।तदक्षयफलं सर्वं जायते नात्र संशयः

tatra tīrthe hi yatkiṃcid dīyate nṛpasattama / tadakṣayaphalaṃ sarvaṃ jāyate nātra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

चैवीरिकाश्च जायन्ते तथा गोजाकुलानि च तथाउन्‍्यानि च सुक्ष्माणि जलोकादीनि जातयः ॥३ १४ +कपोतकुररादिभ्यः सुक्ष्मा यूकास्तथेव च ॥2 तथवान्ये४पि संख्याता अष्टापदकुलीरकाः

English

The Purana-writer entertained fantastic ideas about Ravana. Jaina Raraayanas give a sober and a more realistic picture of Ravana, e.g. Ravana was one-headed but due to the reflection of his face in the nine precious stones of his necklace, he was (poetically) called 'ten-headed*.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_revAkhANDa-of-the-vAyupurANa-rkv.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।