Ravana Samhita
19
अध्याय 19 / 19

Bhakti Rahasya — The Secret of Devotion

भक्तिरहस्य

3 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 19

श्लोक 1

सा परानुरक्तिरीश्वरे

sā parānuraktirīśvare

हिन्दी अर्थ

वह — ईश्वर में परम अनुरक्ति — [भक्ति है।]

English

That — supreme attachment to the Lord — is [bhakti].

अध्याय 19

श्लोक 14

भक्तिर्भगवतो सेवा भक्तिः प्रेमस्वरूपिणी ।भक्तिरानन्दरूपा च भक्तिर्मुक्तिप्रदायिनी

bhaktirbhagavato sevā bhaktiḥ premasvarūpiṇī | bhaktirānandarūpā ca bhaktirmuktipradāyinī

हिन्दी अर्थ

भक्ति भगवान की सेवा है; भक्ति प्रेमस्वरूपिणी है; भक्ति आनन्दरूपा है; और भक्ति मुक्तिप्रदायिनी है।

English

Bhakti is service to the Lord; bhakti is of the nature of love; bhakti is of the nature of bliss; and bhakti is the bestower of liberation.

अध्याय 19

श्लोक 33

नायमात्मा बलहीनेन लभ्यो न च प्रमादात् न तपसा विना ।उपायैरेतैर्यतते यस्तु विद्वान् तस्यैष आत्मा विशते ब्रह्मधाम

nāyamātmā balahīnena labhyo na ca pramādāt na tapasā vinā | upāyairetairyatate yastu vidvān tasyaiṣa ātmā viśate brahmadhāma

हिन्दी अर्थ

यह आत्मा बलहीन को नहीं मिलती, न प्रमाद से, न तप के बिना। जो विद्वान इन उपायों से प्रयत्न करता है — उसकी आत्मा ब्रह्मधाम में प्रवेश करती है।

English

This Self is not attained by the weak, nor through negligence, nor without austerity. The wise one who strives through these means — for that one the Self enters the abode of Brahman.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।