Ravana Samhita
18
अध्याय 18 / 19

Mrityu Vichara — The Contemplation of Death

मृत्युविचार

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 18

श्लोक 1

अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् ।यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः

antakāle ca māmeva smaranmukt'vā kalevaram | yaḥ prayāti sa madbhāvaṃ yāti nāstyatra saṃśayaḥ

हिन्दी अर्थ

जो अन्तकाल में केवल मुझे स्मरण करते हुए शरीर छोड़ता है — वह मेरे भाव को प्राप्त होता है। संशय नहीं।

English

Whoever, at the time of death, remembers me alone and departs, leaving the body — attains my state. There is no doubt.

अध्याय 18

श्लोक 19

मृत्युरेव महाशत्रुः मृत्युरेव महागुरुः ।मृत्युं पश्यति यो नित्यं तस्य किं भयमास्थितम्

mṛtyureva mahāśatruḥ mṛtyureva mahāguruḥ | mṛtyuṃ paśyati yo nityaṃ tasya kiṃ bhayamāsthitam

हिन्दी अर्थ

मृत्यु महाशत्रु है; मृत्यु महागुरु है। जो सदा मृत्यु को देखता है — उसे कौन सा भय घेर सकता है?

English

Death is the great enemy; death is the great teacher. One who sees death constantly — what fear can take hold in them?

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।