Ravana Samhita
12
अध्याय 12 / 19

Tantra Vidhi — The Ritual Science of Transformation

तन्त्रविधि

2 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ2 श्लोक

अध्याय 12

श्लोक 1

दीक्षा विना न मन्त्रः स्यात् मन्त्रं विना न सिद्धिः ।गुरोः कृपाविना नैव दीक्षा फलप्रदा भवेत्

dīkṣā vinā na mantraḥ syāt mantraṃ vinā na siddhiḥ | guroḥ kṛpāvinā naiva dīkṣā phalapradā bhavet

हिन्दी अर्थ

दीक्षा बिना मन्त्र नहीं; मन्त्र बिना सिद्धि नहीं। गुरु की कृपा बिना दीक्षा भी फलप्रद नहीं।

English

Without initiation there is no mantra; without mantra there is no siddhi. Without the grace of the guru, initiation itself does not bear fruit.

अध्याय 12

श्लोक 31

यन्त्रं मन्त्रमयं देवि देवता यन्त्रमाश्रिता ।यन्त्रं विना न देवेशि पूजां ग्राहयति प्रभुः

yantraṃ mantramayaṃ devi devatā yantramāśritā | yantraṃ vinā na deveśi pūjāṃ grāhayati prabhuḥ

हिन्दी अर्थ

यन्त्र मन्त्रमय है देवि; देवता यन्त्र में वास करती है। यन्त्र बिना प्रभु पूजा ग्रहण नहीं करते।

English

The yantra is composed of mantra, O Goddess; the deity dwells in the yantra. Without the yantra, O Devi, the Lord does not accept the worship.

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/ · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।